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कालीचरण 2 दिन की रिमांड पर, कोर्ट के बाहर जमकर हुआ हंगामा

रायपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपशब्द कहने वाले कालीचरण महाराज को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। रायपुर पुलिस ने 1 जनवरी तक कालीचरण महाराज की रिमांड मांगी थी। ​​​​​कालीचरण समर्थकों को हाथ दिखाते हुए एक सेलिब्रिटी की तरह करीब 6.32 मिनट पर कोर्ट में दाखिल हुआ था। इस दौरान कोर्ट परिसर में जमकर हंगामा भी हुआ। कालीचरण की पेशी को देखते हुए पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोर्ट के अंदर 4-5 वकीलों ने कालीचरण की ओर से पक्ष रखा और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों की हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया। इससे पहले पुलिस ने रायपुर पुलिस लाइन में कालीचरण के सभी टेस्ट करवाए। शुगर, बीपी की रिपोर्ट के साथ-साथ कालीचरण की कोरोना जांच भी निगेटिव आई। कालीचरण ने किसी भी पुरानी बीमारी से इनकार किया। उसे जिला न्यायालय में जस्टिस चेतना ठाकुर की कोर्ट में पेश किया गया। बड़ी संख्या में लोग कोर्ट परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान कालीचरण महाराज समर्थन में जय श्री राम और गोडसे जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। लगभग 500 पुलिसकर्मी और अलग-अलग थानों के प्रभारी डीएसपी रैंक के अफसर कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात रहे। कालीचरण महाराज को रायपुर पुलिस ने गुरुवार तड़के मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ रायपुर, पुणे और अकोला में केस दर्ज किए गए थे। महात्मा गांधी के खिलाफ बयानबाजी के बाद से ही वह फरार था। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री ने गिरफ्तारी के तरीके पर आपत्ति जताई है। हालांकि जवाब में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने इसे नियमों के तहत एक्शन करार दिया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कालीचरण के परिवार और वकील को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दे दी गई। उसे जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा। रायपुर पुलिस ने उसे गुरुवार तड़के 4 बजे खजुराहो से 25 किलोमीटर दूर बागेश्वर धाम स्थित लॉज से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि कालीचरण ने अपने छिपने के लिए एक कॉटेज भी बुक कराया था। पुलिस को देखकर अकड़ने लगा कालीचरण पुलिस जब बागेश्वर स्थित लॉज में पहुंची तो कालीचरण यहां अपने 4 चेलों के साथ आराम फरमा रहा था। अचानक पुलिस को देख कालीचरण ने बहसबाजी शुरू कर दी। रायपुर पुलिस के अफसरों ने कहा- चलना तो पड़ेगा, विरोध करने का कोई फायदा नहीं है। (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…) कालीचरण पर राजद्रोह का केस भी दर्ज रायपुर की पुलिस ने राजद्रोह की धाराएं भी इस केस में जोड़ी हैं। कालीचरण अकोला महाराष्ट्र का रहने वाला है। धर्म संसद में दिए गए विवादित बयानों को देखकर पहले धारा 294, 505(2) के तहत मामला दर्ज हुआ था। अब धारा 153 A (1)(A), 153 B (1)(A), 295 A ,505(1)(B) , 124A इन धाराओं को भी जोड़ा गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें कहा था- गांधी ने देश का सत्यानाश किया, नाथूराम गोडसे को नमस्कार रायपुर में हुई धर्म संसद के समापन के दिन शनिवार को महाराष्ट्र से आए कालीचरण ने मंच से गांधीजी के बारे में गलत बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए राष्ट्र पर कब्जा करना है। सन् 1947 में हमने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश पर कब्जा किया गया। मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया। नमस्कार है नाथूराम गोडसे को, जिन्होंने उन्हें मार दिया। शिवराज के मंत्री बोले- एक्शन की जानकारी MP पुलिस की देनी चाहिए थी मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कालीचरण की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर ऐतराज जताया है। उन्होंने ट्वीट किया- छत्तीसगढ़ पुलिस को अपने एक्शन की जानकारी मध्यप्रदेश पुलिस को देनी चाहिए थी। इससे इंटरस्टेट प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ पुलिस से आपत्ति दर्ज कराएंगे। अपने बयान पर कालीचरण को पछतावा नहीं गिरफ्तारी से पहले कालीचरण का एक बयान सामने आया था। इसमें वह कह रहा है- गांधी को अपशब्द कहने के लिए मुझ पर FIR हुई है, मुझे उसका कोई पश्चाताप नहीं है। मैं गांधी से नफरत करता हूं, मेरे हृदय में गांधी के प्रति तिरस्कार है। अपने ताजा बयान में कालीचरण ने गोडसे को महात्मा बताते हुए कहा कि मैं गोडसे को कोटि-कोटि नमस्कार करता हूं उनके चरणों में मेरा साष्टांग प्रणाम है।

UP Election 2022 : बीजेपी से क्यों नाराज हैं ब्राह्मण, किसे देंगे वोट – पढ़ें विश्लेषण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में चुनावी साल है और चुनावी शोर में अब सबसे ज्यादा पूछ बहुत ही अहम माने जाने वाले बाह्मण (Brahmin) की होने लगी है. भले ही यूपी में बाह्मण सियासी तौर पर हाशिए पर हों, लेकिन हर सियासी दल ब्राह्मण को जरिए ही चुनावी वैतरणी को पार करना चाहता है. तभी तो यूपी में बीएसपी ने नारा दिया है कि ‘ब्राह्मण शंख बजाएगा और हाथी बढ़ता जाएगा’. आज यूपी में ब्राह्मणों की स्थिति भी हाथी की तरह हो गई है और किसी भी सियासी दल सत्ता में रहने के दौरान ब्राह्मण पांच साल तक उस बंधे हुए हाथी की रहते हैं, जो कुछ नहीं कर सकता है. जब चुनाव आते हैं तो ब्राह्मणों की पूजा जाती है और उसे माला पहनाई जाती है और उसे तिलक लगाकर पैर छूए जाते हैं और हर सियासी दल चाहे समाजवादी पार्टी हो या बीएसपी या फिर बीजेपी और या कांग्रेस, कहते हैं कि आपका आशीर्वाद चाहिए और सुदामा की तरह खाली हाथ रहने वाला ब्राह्मण फिर खुश होकर आशीर्वाद देकर पांच साल तक फिर खाली हाथ ही रहता है. ऐसा नहीं है कि ब्राह्मण नेता सियासी मलाई का स्वाद नहीं चखते हैं. वह सत्ता की मलाई का स्वाद चखते हैं और इसकी सियासी मलाई की जूठन भी उनके परिवार और करीबी लोगों के अलावा किसी अन्य को नसीब नहीं होती है. सच्चाई ये है कि यूपी नहीं कमोवेश देश में ब्राह्मण की यही स्थिति है. हाल ही में उत्तर प्रदेश में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में ब्राह्मणों का सम्मेलन हुआ और इस सम्मेलन को आयोजित कराने वाले थे, समाजवादी पार्टी के नेता और पार्टी में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ओम प्रकाश बाबा दुबे. जो दावा करते हैं कि वह ब्राह्मणों को संगठित करने के लिए कार्य कर रहे हैं. काशी में हुए ब्राह्मणों के सम्मेलन में लोकहित सप्तसमिति का गठन किया गया और जल्द ही दो लाख ब्राह्मणों का ब्रहमादेश समागम महासभा करने करने का संकल्प लिया गया. लेकिन चुनावी साल में ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर भी सवाल उठ रहे है. दूबे दावा करते हैं कि वह पिछले कुछ सालों से ब्राह्मणों को लेकर कार्य कर रहे हैं और पिछले दो साल से उन्होंने ब्राह्मण समाज के उत्थान और सामाजिक और राजनैतिक तौर पर उसे मजबूत करने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की वो पूछ नहीं जो यादव और मुस्लिमों की है. दुबे साफगोई से कहते हैं कि जो कार्य वह कर रहे हैं उसमें राजनीति भी है. क्योंकि राजनैतिक ताकत के बगैर कुछ हासिल नहीं किया जासकता है. जबकि अन्य सियासी दलों के नेता इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि ब्राह्मणों को लेकर राजनीति की जा रही है. दुबे कहते हैं कि यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक 18 से 20 फीसदी है. भले ही आंकड़े यूपी में 9 से 11 फीसदी बताते हों. लिहाजा आज के समय में ब्राह्मणों को एकजुटकर अपनी ताकत का अहसास करना चाहिए. अगर हम एसपी की बात करें तो 2012 के चुनाव में भी पार्टी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए भगवान परशुराम जी की प्रतिमा स्थापित करने का वादा किया था. लेकिन करीब एक दशक बीतने, और चुनाव की दस्तक के बाद एसपी को अपना वादा फिर याद आया है. ब्राह्मणों को साधने को बीजेपी भी हुई एक्टिव वहीं यूपी में बीजेपी भी ब्राह्मण वोट बैंक को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए एक्टिव हो गई है. बीजेपी ने पिछले दिनों राज्य के बीजेपी के बड़े ब्राह्मण नेताओं को बुलाया और राज्य में बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने को कहा. बीजेपी का दावा है कि ब्राह्मण उससे नाराज नहीं है. जबकि विपक्षी दल कहते हैं कि यूपी में पिछले पांच साल में बीजेपी ने ब्राहामणों के लिए कुछ नहीं किया. हालांकि विपक्ष के तर्कों में ज्यादा दम भी नहीं दिखता है. क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा ब्राह्मण बीजेपी के टिकट पर जीत कर आए और बीजेपी ने ही सबसे ज्यादा ब्राह्मणों को टिकट दिए. एसपी परशुराम जी के जरिए ब्राह्मणों को साधने में जुटी राज्य में समाजवादी पार्टी में कई बाह्मण नेता शामिल हो चुके हैं. पिछले दिनों ही गणेश शंकर पांडे और विनय शंकर तिवारी समेत कई नेता शामिल हुए हैं. जबकि पार्टी में ही कई बड़े ब्राह्मण नेता है. एसपी के ब्राह्मणों को जोड़ने ने रायबरेली से पार्टी के एकमात्र विधायक मनोज पांडे काफी दिनों से कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं. वहीं पार्टी यूपी के सभी शहरों में भगवान परशुराम की मूर्ति को स्थापित कर रही है. ताकि 2012 की तरह ब्राह्मणों के आशीर्वाद के जरिए फिर से सत्ता पर काबिज हुआ जा सके. हालांकि राज्य में परशुराम जी की प्रतिमा स्थापित करने का वादा समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज से किया था. ब्राह्मण सम्मेलनों से बीएसपी को उम्मीद वहीं अगर बीएसपी की बात करें तो बीएसपी चीफ मायावती ने पार्टी के ब्राह्मण नेता माने जाने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को आगे किया. अगर बीएसपी की पिछली सरकार की बात करें तो सतीश चंद्र मिश्रा पार्टी में मजबूत माने जाते थे और समय के साथ वह पार्टी में और ज्यादा मजबूत होते गए. हालांकि परिवारवाद को लेकर मिश्रा पर आरोप लगते आए हैं. चुनाव को देखते हुए सतीश चंद्र मिश्रा राज्य में ब्राह्मण सम्मेलन करा रहे हैं और ब्राह्मणों को झुकाव बीएसपी की तरफ करने का दावा कर रहे हैं. बीएसपी को इस बार अपने दलित और ब्राह्मण समीकरण पर उम्मीद है. प्रियंका कर रही हैं मंदिर दर्शन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मंदिरों के दर्शन कर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रही है. ये तो समय ही बताएगा कि प्रियंका गांधी के प्रयास कितने सफल होंगे. लेकिन पार्टी दावा कर रही है कि ब्राह्मण एक बार फिर कांग्रेस में आएगा क्योंकि ये कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक हैं और यूपी में कांग्रेस ने ही छह सीएम ब्राह्मण समाज से दिए हैं. हालांकि सच्चाई ये है कि पिछले दिनों कांग्रेस को छोड़ने वाले ज्यादातर नेता ब्राह्मण समाज के ही हैं. यूपी में 2017 में जीते से 58 ब्राह्मण विधायक अगर आंकड़ों की बात करें तो 2017 के विधानसभा में यूपी में … Read more

जनविश्वास यात्रा की जनसभा में BJP नेताओं के बीच चले लात-घूंसे

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) को लेकर सरगर्मी तेज हैं. ऐसे में सियासी दल एक दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. लेकिन इस बीच कन्नौज (Kannauj) में बीजेपी की जनविश्वास यात्रा (BJP Jan Vishwas Yatra) के दौरान पार्टी के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए. माहौल ऐसा गरमाया कि देखते ही देखते भाजपा नेताओं के समर्थकों में लात-घूंसे चलने लगे. दरअसल बुधवार को कन्नौज के छिबरामऊ स्थित कॉलेज में भाजपा की ‘जन विश्वास यात्रा’ की जनसभा आयोजित की गई थी. आजतक ऑनलाइन मीडिया के मुताबिक इसी दौरान वर्तमान विधायक अर्चना पांडे और बीजेपी जिला उपाध्यक्ष के समर्थकों में मंच पर बैठने को लेकर विवाद हो गया. अर्चना पांडे के समर्थकों पर बीजेपी जिला उपाध्यक्ष और उनके समर्थकों पर हमला करने का आरोप है. कार्यकर्ताओं में गाली-गलौज के साथ शुरू हुई हाथापाई मामले ने इतना तूल पकड़ गया, कि गाली-गलौज के साथ हाथापाई भी शुरू हो गई. लोगों के मुताबिक दोनों गुटों के नेता पार्टी से टिकट की जुगत में लगे हैं. इस वजह से मनमुटाव चल रहा है. मंच से ही जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई. सांसद सुब्रत पाठक ने भी समझाकर शांत कराया. जन विश्वास यात्रा में ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष पर बोला हमला भाजपा की ‘जन विश्वास यात्रा’ को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा इत्रनगरी कन्नौज पहुंचे थे. इस दौरान ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला. ऊर्जा मंत्री ने कहा- 2017 में जो मैनोफेस्ट्रो जारी किया था, लगभग लगभग पूरे मैनोफोस्ट्रो पर सरकार ने काम किया है. कहा- राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे. ऐसा सवाल अखिलेश एंड कंपनी करती थी. मंत्री ने आगे कहा कि आज अयोध्या में मंदिर बन रहा है. सांस्कृति राष्ट्रवाद, देश की सुरक्षा व गरीब कल्याण की योजनाएं हमारे कुछ मुद्दे हैं, जिन हम खरे उतरे हैं. कहा- हम सौभाग्यशाली हैं हमारे भगवान राम हैं, भगवान श्रीकृष्ण हैं, हमारे साथ बाबा विश्वनाथ भी हैं. हमारी सरकार चौमुखी विकास कर रही है. दीवारों से रुपए निकल रहे हैं. इसीलिए कुछ लोग नोटबंदी का विरोध कर रहे थे.

NCP चीफ शरद पवार ने की पीएम मोदी की तारीफ, बोले – पीएम मोदी की प्रशासन पर अच्छी पकड़ है

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार (NCP Chief Sharad Pawar) ने पीएम मोदी नरेंद्र मोदी (PM Modi) की जमकर तारिफ की है. मुंबई में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीपी चीफ ने कहा कि पीएम मोदी की प्रशासन (Administration) पर अच्छी पकड़ है. यही उनका पक्ष काफी मजबूत करता है. शरद पवार ने कहा कि पीएम के कामकाज की शैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक बार जब कोई कार्य करते हैं तो वो इसे पूरा करना सुनिश्चित करते हैं. पवार ने कहा कि मोदी बहुत प्रयास करते हैं और काम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देते हैं. उन्होंने कहा कि मोदी का स्वभाव ऐसा है कि एक बार जब वो किसी भी कार्य को हाथ में लेते हैं, तो वो ये सुनिश्चित करेंगे कि जब तक वो अपने निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाता, तक तक वो नहीं रुकेगा. सहयोगियों को साथ ले जाने का एक अलग तरीका एनसीपी चीफ ने आगे कहा कि पीएम इस बात पर भी जोर देते हैं कि उनकी सरकार की नीतियों के प्रभावी कार्यान्यवयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और उनके सहयोगी एक साथ कैसे आ सकते हैं. मोदी के पास अपने सहयोगियों को साथ ले जाने का एक अलग तरीका है और वो शैली मनमोहन सिंह जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों में नहीं थी. पवार ने कहा कि मेरी और तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह की राय थी कि तत्कालीन गुजरात के सीएम मोदी के खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति नहीं की जानी चाहिए. पवार ने कहा कि जब मोदी गुजरात के सीएम थे, मैं केंद्र में था. जब पीएम सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाते थे, तब मोदी बीजेपी शासित राज्यों के सीएम के एक समूह का नेतृत्व करते थे और केंद्र पर हमला करते थे. मोदी लगातार सरकार पर हमला करते थे उन्होंने कहा कि तो ऐसी स्थिति में मोदी को कैसे जवाब दिया जाए, इस पर रणनीति बनाई जाती थी. मेरे अलावा यूपीए सरकार में कोई अन्य मंत्री नहीं था जो मोदी से बातचीत कर सके क्यों कि वो मनमोहन सिंह सरकार पर लगातार हमला करते थे. राज्यसभा सांसद ने कहा कि यूपीए की आंतरिक बैठकों मे वह उपस्थित सभी लोगों से कहते थे कि भले ही उनके और मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के बीच मतभेद हों, किसी को ये नहीं भूलना चाहिए कि वो सीएम थे. उन्होंने कहा कि मैं बैठकों में कहा करता था कि हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि वो एक राज्य के सीएम हैं और लोगों ने उन्हें जनादेश दिया है, अगर वो यहां मुद्दों के साथ आ रहे हैं, तो ये सुनिश्चित करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि मतभेदों का समाधान हो और हित उनके राज्य के लोग प्रभावित नहीं है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने उनकी राय का समर्थन किया.

योगी-मोदी की रैली पर वरुण का निशाना:बोले- रात में कर्फ्यू और दिन में लाखों की भीड़

पीलीभीत। पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी लगातार अपनी ही पार्टी पर हमलावर हैं। सोमवार को एक बार फिर उन्होंने ट्वीट करके सीएम योगी के प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाने के फैसले पर निशाना साधा। वरुण ने कहा- रात में कर्फ्यू लगाना और दिन में रैलियों में लाखों लोगों को बुलाना, ये सामान्य जनमानस की समझ से परे है। उत्तर प्रदेश की सीमित स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मद्देनजर हमें ईमानदारी से ये तय करना पड़ेगा कि हमारी प्राथमिकता भयावह ओमिक्रॉन को फैलने से रोकना है, चुनावी शक्ति प्रदर्शन करना नहीं। वरुण पहले भी कर चुके हैं वार कुछ दिन पहले वरुण ने सीएम योगी को संविदा कर्मियों की मांगों को लेकर घेरा था। उन्होंने सीएम को एक पत्र लिखकर कहा था कि आपने संविदा कर्मियों को उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिया था। इसके ढाई महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वरुण 19 दिसंबर को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संविदा कर्मियों के कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां उनके बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनी थीं। UPTET पेपर लीक मामले में वरुण ने सरकार से पूछा था कि आखिर रसूखदारों पर एक्शन कब होगा? उन्होंने कहा था कि ज्यादातर शिक्षण संस्थानों के मालिक राजनीतिक रसूखदार हैं। कृषि कानून और किसानों के मुद्दे पर भी वरुण सरकार के लिए कई बार असहज स्थिति उत्‍पन्‍न कर चुके हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को कई बार लेटर लिखा था। इसमें किसानों की मांग को पूरा करने की बात कही थी। वरुण गांधी ने एक किसान के फसल जलाने पर भी BJP को घेरा था। उन्होंने लिखा था कि यूपी के किसान श्री समोध सिंह पिछले 15 दिनों से अपनी धान की फसल को बेचने के लिए मंडियों में मारे-मारे फिर रहे थे, जब धान बिका नहीं तो निराश होकर इसमें स्वयं आग लगा दी।। केंद्र के निजीकरण प्रस्ताव का भी कर चुके हैं विरोध वरुण ने केंद्र सरकार के बैंकों के निजीकरण का भी विरोध किया था। वहीं अमेजन, फ्लिपकार्ट पर भी हमला किया था। उन्होंने कहा था कि किसानों के हित में केवल मैं खड़ा हुआ था। इसके विरोध करने की बाकी किसी भी सांसद की हिम्मत नहीं हुई थी। गन्ना मूल्य को लेकर परोक्ष रूप से राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करते हुए वरुण ने कहा कि टिकट कटने के डर से पार्टी के नेता ऐसे मुद्दे नहीं उठाते।

MP की हेल्थ सुविधा में 5 साल से सुधार नहीं:19 बड़े राज्यों में नीचे से तीसरे स्थान पर

भोपाल। नीति आयोग के देशभर के सभी राज्यों के हेल्दी स्टेट्स प्रोगेसिव इंडिया 2019-20 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश 19 बड़े राज्यों की सूची में 17वें स्थान पर है। वहीं, सूची में नीचे से तीसरी पोजीशन है। हमसे नीचे सिर्फ बिहार और यूपी ही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नीति आयोग की हेल्थ रिपोर्ट में पिछले 5 साल से प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं बीमार की स्थिति में ही चल रही हैं। 17 और 18वें स्थान पर ही हम टिके हुए हैं। जबकि कई अन्य राज्य लगातार बेहतर प्रदर्शन करते जा रहे हैं। नीति आयोग द्वारा हर साल देशभर के छोटे से लेकर बड़े प्रदेशों की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति, उपलब्धता और सरकारी प्रशासन की व्यवस्था को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाती है। सोमवार को आयोग ने हेल्दी स्टेट्स प्रोगेसिव इंडिया की हेल्थ इंडेक्स राउंड -4 (2019-20) को जारी किया है। इसमें 19 बड़े राज्यों में हेल्थ फैसेलिटीज, गर्वमेंट एफर्ट और रिजल्ट के पैमाने पर रैंकिंग की जाती है। मध्य प्रदेश इस रिपोर्ट में इस बार भी 19 बड़े राज्यों की सूची में 17वें स्थान पर रहा। इससे पहले भी मप्र ओवरऑल रिफ्रेंस ईयर रैंक में 18वें पोजीशन पर ही था। नीति आयोग की हेल्थ रिपोर्ट रैंकिंग के अनुसार 2015-16 में भी मध्य प्रदेश 17वें, 2017-18 में 18वें, 2018-19 में 18वें और 2019-20 में 17वें स्थान पर ही रहा है। नीति आयोग ने अब तक हेल्थ इंडेक्स को लेकर पिछले 5 साल में 4 राउंड ओवरऑल हेल्थ परफॉर्मेस रिपोर्ट बनाई है। गर्भ निरोधक अपनाने के प्रयास में सबसे फिसड्‌डी इस रिपोर्ट में देशभर के बड़े राज्यों में गर्भ निरोधक प्रयास दर (Modern contraceptive prevalence rate) में हमारी स्थिति खराब है। 19 बड़े स्टेट में मप्र की पोजीशन 18वें नंबर पर है। हमसे बेहतर काम बिहार, यूपी, झारखंड और ओडिशा का है। इस सूची में मप्र से नीचे तेलंगाना है। इसके अलावा टीबी जैसी बीमारी के रोकथाम की सक्सेस रेट में हम इस सूची में 19वें स्थान पर सबसे नीचे हैं। हर तरह के टीकाकरण में भी हम 13वें नबर पर पूर्ण टीकाकरण की स्थिति में बड़े स्टेट्स में हमारी पोजीशन 13वें नंबर पर रही है। पहले नंबर पर तेलंगाना है, जहां 100 फीसदी पूर्ण टीकाकरण किया गया। इसके बाद महाराष्ट्र में 98.94 फीसदी, आंध्र प्रदेश 98.87 और झारखंड में 96.54 फीसदी और मध्य प्रदेश का 90.98 फीसदी रहा। मातृ मृत्यु दर भी नहीं रोक पा रहे, इसमें नीचे से 5वां स्थान इस रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में हमारी पोजीशन 15 वें नंबर पर है। पिछले 2018-19 की रिपोर्ट से हम नीचे चले गए हैं। पिछले बार इसमें 188 पॉइंट्स थे, जो घटकर अब 173 हो गए हैं। हमसे अच्छे परिणाम देने वालों में छत्तीसगढ़ एक नंबर पर, उत्तराखंड, पंजाब और केरल रहे हैं।

क्या खत्म हो गया PM मोदी का करिश्मा … रैली के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सरकारी अफसरों पर

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा क्या खत्म हो गया है। 28 दिसंबर को कानपुर में रैली के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सरकारी अफसरों के कंधों पर है। 16 विभागों को 70 हजार की भीड़ जुटाने का फिक्स टारगेट दिया गया है। यह विभाग अपनी अलग-अलग योजनाओं के 70 हजार लाभार्थियों को पीएम के कार्यक्रम में लेकर आएंगे। इन्हें लाने और ले जाने से लेकर खाने-पीने का इंतजाम भी सरकारी अफसर ही करेंगे। यानी पीएम मोदी के कार्यक्रम में दिखने वाली भीड़ भी सरकारी ही होगी। कार्यक्रम में 70 हजार लोगों की भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी डीएम विशाख जी. को दी गई है। उन्होंने सीएमओ से लेकर समाज कल्याण अधिकारी, आईटीआई के प्रिंसिपल, केडीए सचिव, परियोजना अधिकारी डूडा समेत 16 अलग-अलग विभागों को लाभार्थियों को लाने का लक्ष्य दिया है। सभी विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लाभार्थियों को लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। विभाग की ओर से ही 2250 बसों का इंतजाम किया गया है। विभागों के चपरासी से लेकर बाबू और अफसरों को बस से लाभार्थियों को लाने और वापस निर्धारित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही खाने का भी इंतजाम करने की जिम्मेदारी दी गई है। मोदी के आगमन पर इन सभी विभागों में कामकाज ठप रहेगा। अगर किसी भी विभाग ने इसमें लापरवाही की तो संबंधित अफसर या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई है। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, कृषि, उद्यान विभाग, खाद्य एवं रसद, समाज कल्याण, बैंक, विद्युत विभाग, श्रम विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, पंचायती राज, स्किल डेवलपमेंट, नगर निगम, डूडा और केडीए समेत 16 विभागों से 70 हजार लाभार्थियों को बुलाया गया है। योगी-मोदी की सभा में पहले भी जुटाई गई है भीड़ CM योगी की रविवार को प्रयागराज के लीडर प्रेस मैदान में जनसभा थी। इसमें भीड़ जुटाने के लिए जिले के आला अफसर पिछले तीन-चार दिनों से लगे थे। सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचें। इसमें शिक्षा विभाग, एनआरएलएम, डूडा, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास विभाग जैसे सभी विभागों को शामिल किया गया था। सुल्तानपुर में 16 नवंबर को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने पीएम मोदी पहुंचे थे। मोदी की सभा में शामिल होने के लिए करीब 2 लाख लोगों को लाने का लक्ष्य रखा गया था। इतने लोगों को लाने-ले जाने के लिए सुल्तानपुर के DM ने 2 हजार बसें उपलब्ध कराई थीं। 19 नवंबर को महोबा जिले में PM नरेंद्र मोदी की रैली थी। आसपास के जिलों से भीड़ लाने के लिए 1,600 रोडवेज बसों का जुगाड़ किया गया था। डीएम मनोज कुमार ने परिवहन विभाग से बसों की मांग की थी।

सरकार ने 1.38 करोड़ टैक्सपेयर को दिया 1.44 करोड़ का ITR रिफंड, कैसे चेक करें

नई दिल्ली। अब तक 1.38 करोड़ टैक्सपेयर्स को 1.44 लाख करोड़ रुपये का इनकम टैक्स रिफंड दिया जा चुका है. आईटी डिपार्टमेंट ने यह जानकारी दी. अभी आईटीआर फाइलिंग का समय भी चल रहा है. इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की अंतिम तारीख 31 दिसंबर निर्धारित है. टैक्स विभाग ने इनकम टैक्स रिफंड के बारे में कहा है कि 99.75 लाख रिफंड 2021-22 एसेसमेंट ईयर का है. इस एसेसमेंट ईयर की मियाद 31 मार्च 2021 को समाप्त होगा. अब तक 99.75 लाख लोगों को रिफंड के तौर पर 20,451.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. टैक्स रिटर्न की दी जानकारी दूसरी ओर, टैक्स विभाग ने आईटीआर फाइलिंग की भी जानकारी दी है. टैक्स विभाग ने कहा है कि 2020-21 वित्त वर्ष के लिए 21 दिसंबर तक 4 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हो चुकी है. 31 दिसंबर की डेडलाइन नजदीक आने के साथ ही आईटीआर फाइलिंग में तेजी देखी जा रही है. आईटी विभाग ने एक ट्वीट में लिखा, अब तक 4 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल की गई हैं. पिछले 7 दिन में ही 46.77 लाख आईटीआर दाखिल की गई है. 21 दिसंबर को 8.7 लाख आईटीआर दाखिल की गई. रिफंड के बारे में क्या कहा टैक्स विभाग ने रिफंड के बारे में इनकम टैक्स विभाग ने एक ट्वीट में लिखा है, 1,35,35,261 संस्थाओं को 49,194 करोड़ रुपये का आयकर रिफंड जारी किया गया है और 2.11 लाख से अधिक मामलों में 95,133 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट टैक्स रिफंड जारी किया गया है. ट्वीट में कहा गया, “सीबीडीटी ने 1 अप्रैल, 2021 से 20 दिसंबर, 2021 तक 1.38 करोड़ से अधिक करदाताओं को 1,44,328 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड जारी किया.” इससे पहले टैक्स रिटर्न के बारे में विभाग ने कहा, ‘आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 21 दिसंबर 2021 तक चार करोड़ से अधिक आईटीआर मिले हैं. पिछले एक सप्ताह में 46.77 लाख और 21 दिसंबर को 8.7 लाख आईटीआर रिटर्न दाखिल किए गए.’ मंत्रालय ने कहा कि करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की बढ़ी हुई अंतिम तिथि 31 दिसंबर है. आयकर विभाग ने करदाताओं को अंतिम तारीख याद दिलाने के लिए मैसेज और ईमेल भी भेजे हैं. विभाग ने आईटीआर जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है. रिफंड कैसे करें चेक जब रिफंड मिल रहे हैं तो इसे चेक करने का तरीका भी जान लेना चाहिए. आपको जानना चाहिए कि आईटीआर भरने के बाद भी क्यों अब तक रिफंड नहीं मिला. नियम के अनुसार अगर आपने रिटर्न भरा है तो रिफंड भी आएगा. रिफंड के बारे में जानने के लिए आपको इनकम टैक्स इनकम टैक्स ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाना होगा. यहां आपको my account-my returns/forms सेक्शन में जाना होगा. यहां हो सकता है कि आपको यह लिखा मिले कि आपका आईटीआर प्रोसेस हो चुका है लेकिन इनक टैक्स डिपार्टमेंट अभी नो रिफंड की स्थिति में है. हो सकता है कि आपको यह लिखा दिखे कि टैक्स डिपार्टमेंट रिफंड के लिए तैयार है, लेकिन आप तक चेक या ईसीएस क्रेडिट नहीं पहुंच पा रहा. इसकी वजह यह हो सकती है कि आपने जो पता दिया है, वह गलत हो या उस पते पर चेक या ईसीएस कोई नहीं ले रहा हो. यह भी हो सकता है कि आपने जो पता दिया है वह घर बंद हो. हो सकता है कि ईसीएस क्रेडिट के लिए जो अकाउंट नंबर दिया गया है, वह गलत हो. ऐसी स्थिति में रिफंड इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को वापस मिल जाता है. इसके लिए आपको अपनी जानकारी पुष्ट करनी चाहिए जो टैक्स डिपार्टमेंट को दिया है.

Indian Idol 12 फेम सायली कांबले ने की सगाई

मुंबई. इंडियन आइडल 12 (Indian Idol 12) की सेकेंड रनर-अप सिंगर सायली कांबले (Sayli Kamble) ने हाल ही में बॉयफ्रेंड धवल (Dhaval) से मुंबई में सगाई की है. गायिका ने सोशल मीडिया पर अपनी सगाई की अंगूठी दिखाते हुए एक तस्वीर शेयर की है. सायली की तरह उनके मंगेतर धवल ने भी सगाई की एक खूबसूरत तस्वीर फैंस के साथ साझा की है. सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरों को सायली कांबले के फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. सगाई के लहंगे में सायली काफी खूबसूरत लग रही हैं. उन्होंने इस फंक्शन के लिए पीच रंग का शानदार लहंगा पहना है, तो उनके मंगेतर धवल ने नीले रंग की शेरवानी पहनी है. इस खास दिन के लिए सायली ने अपने हाथों में मेहंदी भी लगाई है. धवल ने अपनी लेडीलव सायली के साथ जो तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की है, उसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है, “मैं हमेशा तुम्हारे साथ हंसने के लिए, मुश्किल समय पर आपको उठाने के लिए और जीवन भर बिना शर्त तुम्हे प्यार करने के लिए साथ रहूंगा. आखिरी सांस तक तुम्हे प्यार करता रहूंगा..!” सगाई के दौरान किया रोमांटिक डांस सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली एक फोटो में धवल सायली को अंगूठी पहनाने के लिए घुटने के बल नीचे बैठे हुए नजर आ रहे हैं. सगाई के इस खास मौके पर कपल ने एक साथ रोमांटिक डांस भी किया. उनके इस डांस को सगाई में शामिल हुए मेहमानों ने खूब एंजॉय किया. सयाली के इस दिन को खास बनाने के लिए उनके इंडियन आइडल 12 के कुछ दोस्त भी अपनी खास दोस्त की सगाई में शामिल हुए थे, तो कुछ दोस्तों ने मुंबई में होने के बावजूद इस समारोह से दूरियां बनाई. इंडियन आइडल के दोस्त भी हुए शामिल इंडियन आइडल 12 के कंटेस्टेंट निहाल टौरो (Nihal Tairo), अंजलि गायकवाड़(Anjali Gaikwad) और नचिकेत लेले (Nachiket Lele) जैसे टैलेंटेड सिंगर ने अपनी दोस्त सायली की सगाई में खूब मस्ती की. लेकिन आशीष कुलकर्णी (Ashish Kulkarni), पवनदीप राजन (Pawandeep Rajan) और अरुणिता कंजीलाल (Arunita) इस फंक्शन में शामिल नहीं हो पाए. हालांकि, सूत्रों की माने तो पवनदीप और अरुणिता फिलहाल मुंबई में ही हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि कुछ प्रोफेशनल कमिटमेंट्स के चलते वह अपनी दोस्त की सगाई में शामिल नहीं हो पाए.

सावधान : VIDEO कॉल पर न्यूड हो जाती लड़की, BJP नेता बचे, आप भी अलर्ट रहें

भोपाल. 15 दिसंबर को मध्यप्रदेश BJP के सीनियर लीडर हरिहर शर्मा को वॉट्सऐप पर दो VIDEO कॉल आए। पहला कॉल उन्होंने रिसीव नहीं किया तो मैसेज मिला। लिखा था- आपकी फेसबुक फ्रेंड हूं। दूसरा कॉल रिसीव करते लड़की ने टॉपलेस होकर उनसे बात करने की कोशिश की। उन्होंने तुरंत कॉल कट की और FIR कराई। हरिहर शर्मा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष और लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रहे हैं। BJP नेता सेक्सटॉर्शन का शिकार होने से बच गए, लेकिन राजगढ़ से इंदौर पढ़ने आया स्टूडेंट फंस गया। मामला मार्च 2021 का है। स्टूडेंट को उसकी फेसबुक फ्रेंड ने न्यूड होकर वॉटसऐप कॉल की। उसे भी उकसाया। उसकी एक्टिविटी का VIDEO रिकॉर्ड कर वापस उसे भेजा और पैसों की डिमांड की। सेक्सटॉर्शन के ऐसे मामलों में बहुत कम ही लोग सामने आकर शिकायत करते हैं। वजह होती है शर्मिंदगी। आखिर कैसे होता है ये अपराध सेक्सटॉर्शन के लिए शिकार ढूंढने से पहले साइबर क्रिमिनल्स सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल बनाते हैं। अपने टारगेट को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। टारगेट ऐसे लोग होते हैं, जो सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव रहते हों। मान लीजिए आपका अकाउंट फेसबुक पर है। फेसबुक पर क्रिमिनल आपका दोस्त बनेगा। भरोसे में लेकर वॉटसऐप नंबर लेगा। अश्लील वीडियो कॉल करने के लिए कहेगा। आपके ऐसा करते ही क्रिमिनल्स वीडियो रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसके जरिए शुरू होता है वसूली का खेल। इसे ही सेक्सटॉर्शन कहते हैं। जनवरी में राजस्थान में पकड़ा गया था गैंग दिल्ली पुलिस ने राजस्थान में इसी साल जनवरी में सेक्सटॉर्शन से जुड़ा गैंग पकड़ा था। इस गैंग में कोई लड़की नहीं थी। आरोपी सोशल साइट्स पर लड़कियों के नाम से अकाउंट बनाते थे। वॉटसऐप पर वीडियो कॉलिंग में लड़की का प्री-रिकॉर्डेड वीडियो चलाते थे। जब कोई शख्स वीडियो कॉल पर जुड़ता तो उसे अश्लील वीडियो (प्री-रिकॉर्डेड) दिखाते थे। उस शख्स को भी ऐसा करने के लिए उत्तेजित करते थे। सामने वाला यही समझता था कि वह किसी लड़की से ही वीडियो कॉलिंग कर रहा है। अश्लील वीडियो को सोशल साइट और दोस्तों को भेजने की बात कहकर ब्लैकमेल करते थे। ऐसे बचा जा सकता है दिल्ली पुलिस ने सेक्सटॉर्शन जैसे क्राइम को अंजाम देने वाले 6 लोगों को गिरफ्तार करने के साथ लोगों को ऐसे मामलों में रिपोर्ट करने को भी कहा था। DCP साइबर पुलिस ने ट्विटर अकांउट के जरिए ये सुरक्षा टिप्स साझा किए थे:- किसी अंजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट न करें। अगर आप किसी को नहीं जानते हैं तो उसके साथ वीडियो कॉल के माध्यम से न जुड़ें। कभी भी ब्लैकमेलिंग करने वाले व्यक्ति को किसी तरह का भुगतान न करें. ऐसे किसी भी मामले में तुरंत ही साइबर पुलिस के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। इन सुझावों को हमेशा ध्यान में रखने की जरूरत है, लेकिन हमेशा कहा जाता है कि इलाज से बेहतर है कि हम बचाव करें। अनजान लोगों से बातचीत या वीडियो चैट करते वक्त हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है। कोई भी ऐसी हरकत न करें, जिससे अपराधियों को फायदा पहुंचे।

मध्यप्रदेश में हर महीने 1100 नवजात अस्पताल में ही तोड़ देते हैं दम

भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक साल में सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान 13 हजार 530 नवजातों की मौत हुई। यानी रोजाना 37 बच्चों ने दम तोड़ा। हर महीने लगभग 1100। यह बात कोई और नहीं, मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कबूली है। वे एक सवाल का विधानसभा में जवाब दे रहे थे। सरकार की ओर से आया यह जवाब ही बच्चों के स्वास्थ्य और सुविधाओं के दावों पर कई सवाल खड़े कर रहा है। मामले में किसी तरह की लापरवाही से मौत हुई है या नहीं, न यह बताया, न इसे रोकने के लिए क्या तगड़े प्रबंध किए जाने वाले हैं, उस पर खुलकर कुछ ठोस रणनीति का जिक्र किया। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने सरकार से पूछा था कि चाइल्ड इनटेंसिव केयर यूनिट में इलाज के दौरान पिछले पांच साल में कितने नवजात शिशुओं की मौत हुई? पटवारी ने पिछले दिनों भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हुए हादसे की जांच को लेकर सवाल किए थे, लेकिन इसका जवाब मंत्री डाॅ. चौधरी ने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी एकत्र की जा रही है। सरकार के इस जवाब ने बच्चों के इलाज के लिए किए जा रहे दावों पर सवाल खड़ा कर दिया है। विधायक पटवारी ने हमीदिया हादसे को लेकर सरकार से पूछा था कि पिछले माह आग लगने और उसमें नवजात शिशुओं के मृत होने की घटना की जांच करने किस अधिकारी को नियुक्त किया था? क्या स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर कोई जांच की है? इस हादसे के लिए किन-किन दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई? लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने लिखित जवाब में कहा कि जानकारी एकत्र की जा रही है। मंत्री से पूछे गए सवाल के जवाब में यह सामने आया कि सरकारी अस्पतालों में नवजातों के इलाज की संख्या 2015-16 में 84,691 थी, जो 2019-20 में बढ़कर 1 लाख 12 हजार हो गई। जबकि यह आंकड़ा वर्ष 2020-21 में 99 हजार से ज्यादा रहा। यह आंकड़े बताते है कि प्रतिवर्ष इन गहन चिकित्सा इकाई में इलाज के दौरान 14 से 15 प्रतिशत बच्चों की मौत हो रही है। यानी हर 6 में से 1 नवजात ने दम तोड़ा। स्वास्थ्य मंत्री को कोविड मृतकों को सहायता राशि देने की जानकारी नहीं कोरोना संक्रमण से मरने वालों के आश्रितों को सरकार ने अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. चौधरी को इसकी कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में कोरोना से मरने वालों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 1 लाख रुपए से घटाकर 50 हजार रुपए कर दी गई है? इसके लिए बनाए गए नियमों की जानकारी दें? इस राशि का वितरण कब किया जाएगा? इन सभी सवालों का कोई जवाब सरकार के पास नहीं है। डाॅ. चौधरी ने अपने लिखित जवाब में कहा कि यह जानकारी एकत्रित की जा रही है। डाॅ. चौधरी ने पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक तरुण भनोत के एक सवाल के जवाब में कहा कि कोविड से हुई मौत के एवज में मिलने वाली अनुग्रह राशि के संबंध में कोई अधिसूचना सरकार की तरफ से जारी नही हुई है। कोरोना पॉजिटिव 448 मरीजों की होम आइसोलेशन में हुई थी मौत मध्य प्रदेश में काेरोना से अब तक 10 हजार 80 लोगों की मौत हुुई है। इसमें से 448 कोरोना मरीज ऐसे हैं, जिनकी होम आइसोलेशन में ही मौत हो गई थी। जिलेवार आंकड़ों को देखें तो सबसे ज्यादा नीमच में 102 कोरोना मरीजों ने घर में ही दम तोड़ दिया था।

दारोगा साहब बोले- सबसे इमानदार पुलिस है…पैसा लेती है तो पक्का काम करती है, हुए सस्पेंड

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के उन्नाव (Unnao) जिले के एक दारोगा (Sub Inspector) साहब का वीडियो सोशल मीडिया में छाया हुआ है. जिसमें वो कह रहे हैं कि ‘पुलिस पैसा लेती है तो काम भी करके दिखाती है’ और कोई विभाग में जाओ पैसा ले लेंगे काम नहीं होगा. हालांकि, खाकी पर रिश्वत की कालिक पोतने वाले दारोगा साहब को सस्पेंड कर दिया गया है. पुलिस विभाग की सोशन मीडिया में फजीहत के बाद ऐसा फैसला लिया गया. मामला बीघापुर थानाक्षेत्र का है. यहां तैनात सब इंस्पेक्टर (दारोगा) उमेश त्रिपाठी को एक स्थानीय स्कूल में आयोजित पुलिस-पाठशाला में पहुंचे थे. इस दौरान दरोगा उमेश त्रिपाठी को भी अनुभव शेयर करने का मौका मिला. मंच पर आते ही दारोगा साहब मुंह फट हो पड़े. पैसा लेते हैं तो काम भी करके दिखाते हैं दारोगा ने कहा कि ‘पुलिस पैसा लेती है तो काम भी करके दिखाती है’ और कोई विभाग में जाओ पैसा ले लेंगे, काम नहीं होगा. पुलिस से अच्छा कोई विभाग ही नहीं बना है. मास्टर साहब लोगों को देखो, घर में रहकर पढ़ाते हैं. 6 महीना घर में रहकर छुट्टियां भी काटते है. कहीं कोरोना आ गया तो साल भर स्कूल नहीं जाएंगे.’वहीं, इस पुलिस पाठशाला में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी इन बातों पर बहुत हंसे. करीब 20 दिन पुराना है वीडियो वीडियो 20 दिन पुराना बताया जा रहा है. दरअसल, 29 नवंबर को बीघापुर क्षेत्र के एक स्कूल में पुलिस पाठशाला का आयोजन किया गया था. इसमें पुलिसकर्मियों ने मंच से अपने अनुभव शेयर किए थे. दारोगा उमेश त्रिपाठी के इस बयान का वीडियो पर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. वहीं, उन्नाव के एएसपी शशि शेखर सिंह ने बताया कि मामले की जांच सीओ बीघापुर को सौंप दी गई है और सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है. लखनऊ में भी आया था रिश्वतखोर दारोगा का एक मामला बता दें, रिश्वत खोर के आरोप उत्तर प्रदेश पुलिस पर लगते ही रहते हैं. अभी 6 माह पहले ही यूपी की राजधानी लखनऊ में पुलिस पर 50 हजार रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. बताया गया था कि मड़ियांव कोतवाली के दारोगा साहब ने रिश्वत न देने पर मकान निर्माण का काम भी रुकवा दिया. पीड़ित युवक ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की. उसने प्रार्थना पत्र में बताया कि रुपए न देने पर दरोगा उल्टा उसी पर केस दर्ज करने की धमकी दे रहा है.

विदाई के दिन बॉयफ्रेंड की बाइक पर बैठकर फरार हुई दुल्हन

सतना। मध्य प्रदेश के सतना में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है. शादी के बाद पति के साथ विदा हुई दुल्हन रास्ते में अपने प्रेमी के साथ फरार (हो गई. यह घटना सागर की है. बताया जा रहा है कि सतना के अहिरगांव में 14 दिसंबर को एक लड़की की शादी बहुत ही धूमधाम से हुई थी. पूरे हिंदू रीति रिवाज से परिवार ने शादी की सभी रस्में पूरी कीं. अगले दिन कुशवाहा परिवार ने अपनी बेटी को उसके दूल्हे के साथ विदा कर दिया. दुल्हन कार में सवार होकर अपने पति के साथ ससुराल के लिए रवाना हो गई. लेकिन रास्ते में उसने कार रुकवाई और पहले से बाइक लेकर वहां खड़े अपने बॉयफ्रेंड (Bride’s Boyfriend) अशोक यादव के साथ फरार हो गई. नई नवेली दुल्हन को किसी और के साथ भागता देखकर दूल्हा हैरान रह गया. जिसके बाद उसे खाली हाथ अपने घर वापस लौटना पडा. दूल्हे के परिवार के मामले की खबर तुरंत दुल्हन के परिवार को दी. यह खबर सुनते ही उसके मायके में हड़कंप मच गया. पूरा परिवार तुरंत उसके ससुराल पहुंचा और सिविल लाइन थाने (MP Police) में उन्होंने मामले की शिकायत की. दुल्हन को ढूंढने के लिए पुलिस ने चारों तरफ नाकाबंदी करा दी. मोबाइल लोकेशन के आधार पर देर रात पुलिस ने दुल्हन को उसके बॉयफ्रेंड के साथ पकड़ लिया. पति को छोड़कर बॉयफ्रेंड संग फरार दुल्हन खबर के मुताबिक दुल्हन और उसके बॉयफ्रेंड को एसडीएम के सामने पेश किया गया. लड़की ने एसडीएम से कहा कि वह अपने मायके और ससुराल दोनों ही जगह नहीं जाना चाहती है. उसने कहा कि वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ जिंदगी बिताना चाहती है. जिसके बाद उसने अपने सारे गहने मायके वालों को सौंप दिए और अपने बॉयफ्रेंड अशोक यादव के साथ चली गई. बयान दर्ज कराने के बाद SDM उस पर कोई दवाब नहीं बना सके. मायके और सुसुराल वालों के सामने दुल्हन अपने प्रेमी के घर चली गई. शादी के अगले दिन पति को छोड़ा नई नवेली दुल्हन के प्रेमी संग फरार होने की खबर गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है. वहीं इसका खामियाजा सबसे ज्यादा दूल्हे को भुगतना पड़ा है. उसकी कोई गलती न होने के बाद भी उसे बिना दुल्हन के ही अपने घर लौटना पड़ा. उसकी दुल्हन उसकी आंखों के सामने अपने प्रेमी के साथ चली गई और वह कुछ न कर सका.

महाठग की महा दीवानगी .. जैकलीन से किया 500 करोड़ की सुपरहीरो फिल्म बनाने का वादा

मुंबई। 200 करोड़ की महाठगी करने वाले कॉनमैन सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन फर्नांडीज को लाखों-करोड़ों के तोहफे ही नहीं वुमन सेंट्रिक सुपरहीरो फिल्म का लालच भी दिया था। सुकेश ने जैकलीन से कहा था कि वह उसके लिए 500 करोड़ के बजट की तीन पार्ट्स फिल्म का प्रोडक्शन करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वादा भी जैकलीन को लुभाने की प्लानिंग में से एक था। केस से जुड़े एक सूत्र ने खुलासा किया कि सुकेश अच्छी तरह से जानता था कि जैकलीन बॉलीवुड में काम की तलाश में हैं। वह बहुत ज्यादा फिल्में साइन नहीं कर रही थी, इसलिए सुकेश ने जैकलीन से फिल्म बनाने का वादा किया था जिसमें ए-लिस्ट प्रोड्यूसर्स के नाम हटा दिया गया था। फिल्म में हॉलीवुड वीएफएक्स कलाकार शामिल होने और इसे वर्ल्डवाइड शूट करने का झांसा भी दिया था। उसने जैकलीन से यह भी कहा था कि वह हॉलीवुड एक्ट्रेस एंजेलिना जोली से मिलती-जुलती हैं और वह अपने इर्द-गिर्द बनी एक सुपरहीरो सीरीज की हकदार हैं। सुकेश के वादे पर भरोसा कर चुकी थीं जैकलीन जैकलीन ने भले ही पूरी सावधानी बरती लेकिन फिर भी वह सुकेश के इस वादे से आश्वस्त थी कि वह वास्तव में उसके लिए बड़े बजट की यह फिल्म प्रोड्यूस करेगा। सूत्र ने आगे खुलासा किया कि सुकेश ने फिल्म बजट, प्रोडक्शन पर पर्याप्त होमवर्क और रिसर्च किया था अपनी हर बातचीत के दौरान इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े नामों को शामिल किया था। 4 साल से सुकेश के संपर्क में थीं जैकलीन चार्जशीट में जैकलीन ने चंद्रशेखर के साथ अपनी मुलाकात के बारे में भी खुलासा किया है। उन्होंने कहा था, ‘मैं फरवरी 2017 से सुकेश से बात कर रही हूं। अगस्त 2021 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद मैं उनसे कभी नहीं मिली। उन्होंने मुझे बताया था कि वे सन टीवी के मालिक हैं और जयललिता के राजनीतिक परिवार से हैं।’ जैकलीन के अलावा नोरा फतेही के भी चंद्रशेखर से महंगे तोहफे लेने की खबर हैं। कथित तौर पर नोरा को सुकेश ने एक महंगी BMW दी थी। कौन है सुकेश चंद्रशेखर? सुकेश चंद्रशेखर कर्नाटक के बेंगलुरु का रहने वाला है। कहा जाता है कि उसने लैविश लाइफस्टाइल जीने के लिए 17 साल की उम्र से ही लोगों को ठगना शुरू कर दिया था। बेंगलुरु में ठगी करने के बाद उसने चेन्नई और दूसरे शहरों में भी लोगों को निशाना बनाया। सुकेश हाई-प्रोफाइल लोगों को फोन कर खुद को बड़ा सरकारी अफसर बताता था। 2007 में उसने खुद को बड़ा सरकारी अधिकारी बताते हुए बेंगलुरू डेवलपमेंट अथॉरिटी में काम कराने के बदले 100 से ज्यादा लोगों को ठगा था। इस मामले में सुकेश की गिरफ्तारी भी हुई थी। जेल से छूटने के बाद सुकेश ने दोबारा लोगों को ठगने का काम जारी रखा। सुकेश के ऊपर 30 से भी ज्यादा मामले दर्ज हैं। कहा जाता है कि तमिलनाडु में वो खुद को पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का बेटा बताता था। वो खुद को आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वायएसआर रेड्डी का भतीजा बताकर भी कई लोगों से ठगी कर चुका है।

ED के शिकंजे में बच्चन परिवार, सवालों की बौछार, ऐश्वर्या के होश उड़े

नई दिल्ली। पनामा पेपर लीक मामले में सोमवार को ऐश्वर्या राय बच्चन से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 7 घंटे पूछताछ की। ऐश्वर्या से उनकी कंपनियों और बैंक अकाउंट्स के बारे में सवाल हुए। भास्कर को सूत्रों ने बताया कि ED ने ऐश्वर्या से पूछा कि उन्होंने 50 हजार डॉलर में खरीदी कंपनी महज 1500 डॉलर्स में क्यों बेच दी। अमिताभ बच्चन की बहू बनने के बाद कंपनियों को बंद क्यों कर दिया गया? ED ने सोमवार को उनसे दिल्ली के लोकनायक भवन में पूछताछ की। ED के अधिकारी ऐश्वर्या के लिए सवालों की लिस्ट पहले ही तैयार कर चुके थे। वे शाम 7:30 बजे ED ऑफिस से रवाना हुईं। सूत्रों के मुताबिक ऐश्वर्या ED दफ्तर के पिछले दरवाजे से निकलीं। उन्होंने ED के सामने केस से जुड़े कुछ दस्तावेज भी सब्मिट किए हैं। ऐश्वर्या से ED ने पूछे 5 सवाल 1. आप किन-किन कंपनियों में डायरेक्टर के पद पर रही हैं? 2. अमिताभ बच्चन जिन कंपनियों में डायरेक्टर थे, बाद में उनके शेयर क्यों बेच दिए गए? 3. 2008 के बाद कंपनियों को क्यों बंद कर दिया गया? 4. क्या आपकी कंपनी ने RBI वित्तीय लेन-देन की मंजूरी ली थी? 5. 50 हजार डॉलर की कंपनी को महज 1500 डॉलर में क्यों बेच दिया? पनामा पेपर्स में 500 बड़े नाम दरअसल, पनामा पेपर्स मामले में भारत के करीब 500 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई थी। इनमें नेता, अभिनेता, खिलाड़ी, बिजनेसमैन हर वर्ग के प्रमुख लोगों के नाम हैं। इन लोगों पर टैक्स की हेराफेरी का आरोप है, जिसको लेकर टैक्स अथॉरिटी जांच में जुटी है। पनामा पेपर्स मामले की लंबे समय से जांच चल रही है। ED के अधिकारी देश की कई बड़ी हस्तियों को जांच में शामिल कर चुके हैं। इसी कड़ी में एक महीने पहले अभिषेक बच्चन भी ED कार्यालय में पहुंचे थे। वे कुछ दस्तावेज भी ED अधिकारियों को सौंपे चुके हैं। ED सूत्रों की मानें तो जल्द ही इस मामले में उनके पिता अमिताभ बच्चन को भी ED नोटिस देकर बुलाने वाली है। बच्चन परिवार का नाम क्यों? साल 2016 में ब्रिटेन में पनामा की लॉ फर्म के 1.15 करोड़ टैक्स डॉक्युमेंट लीक हुए थे। इसमें दुनियाभर के बड़े नेताओं, कारोबारियों और बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए थे। भारत की बात करें तो करीब 500 लोगों के नाम सामने आए थे। इसमें बच्चन परिवार का नाम भी शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमिताभ बच्चन को 4 कंपनियों का डायरेक्टर बनाया गया था। इनमें से तीन बहामास में थीं, जबकि एक वर्जिन आइलैंड्स में। इन्हें 1993 में बनाया गया। इन कंपनियों की कैपिटल 5 हजार से 50 हजार डॉलर के बीच थी, लेकिन ये कंपनियां उन शिप्स का कारोबार कर रही थीं, जिनकी कीमत करोड़ों में थी। ऐश्वर्या को पहले एक कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया था। बाद में उन्हें कंपनी का शेयर होल्डर डिक्लेयर कर दिया गया। कंपनी का नाम अमिक पार्टनर्स प्राइवेट लिमिटेड था। इसका हेडक्वार्टर वर्जिन आइलैंड्स में था। ऐश्वर्या के अलावा उनके पिता के. राय, मां वृंदा राय और भाई आदित्य राय भी कंपनी में उनके पार्टनर थे। यह कंपनी 2005 में बनाई गई थी। तीन साल बाद यानी 2008 में कंपनी बंद हो गई थी।

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