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चौकी विक्रमपुर पुलिस ने 2 साल पुराने वसूली प्रकरण के फरार स्‍थाई वांरटी रतन सिंह पट्टा को कस्‍बा समनापुर से किया गिरफ्तार

       डिंडौरी पुलिस अधीक्षक डिण्‍डौरी महोदय के निर्देशानुसार डिण्‍डौरी पुलिस द्वारा जिले के समस्त थाना क्षेत्र अंतर्गत फरार इनामी बदमाश वांछित अपराधी एवं स्थाई वारंटी की गिरफ्तारी निरंतर की जा रही है। इसी क्रम में चौकी प्रभारी विक्रमपुर संतोष कुमार यादव के द्वारा माननीय प्रधान न्यायाधीश महोदय कुटुंब न्यायालय डिंडोरी के एमजेसीआर नंबर 148/23 के स्थाई वारंटी रतन सिंह पट्टा पिता हीरा सिंह पट्टा जाति गोंड उम्र 28 साल निवासी जुनवानी को आज दिनांक 1/5/2025 को समनापुर से गिरफ्तार किया गया एवं माननीय न्‍यायालय पेश किया गया । उक्त स्‍थाई वारंटी की धरपकड़ में चौंकी प्रभारी विक्रमपुर  संतोष यादव, प्रधानरक्षक 221 हरे सिंह सैयाम,आरक्षक रामनिवास राठौर, प्रधान आरक्षक मुकेश  परधान व आरक्षक जगदीश की विशेष भूमिका रही है ।

कलेक्टर-एसपी पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, शपथ पत्र में मांगा जवाब, ये है मामला…

सिवनी सिवनी जिले के धूमा क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा काे क्षतिग्रस्त करने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जिले के कलेक्टर, एसपी और एसएचओ धूमा को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। यह घटना फरवरी 2025 की है। मामले में स्थानीय व्यक्ति ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें उसने कोर्ट को बताया कि प्रतिमा तोड़ने की शिकायत की गई थी, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिवनी निवासी जितेंद्र अहिरवार की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि धूमा थाना अंतर्गत एक गांव में 10-11 फरवरी की रात कुछ लोगों ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा में तोड़फोड़ की, अगले ही दिन धूमा पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई, लेकिन आज तक आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने की बजाय जर्जर मूर्ति को किसी अज्ञात स्थान में रख दिया और वहां पर नई प्रतिमा लाकर रख दी। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि- जो नई मूर्ति लगाई गई है वह किसके द्वारा लाई गई, कहां से लाई गई और किस मद से उसमें पैसा खर्च किया है यह जानकारी नहीं दी गई। याचिकाकर्ता ने इस मामले को लेकर लगातार सिवनी कलेक्टर, एसपी सहित अन्य अधिकारियों से जाकर शिकायत की, लेकिन किसी ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि सिवनी पुलिस प्रतिमा तोड़ने वालों की ना ही जांच कर रही है और ना ही उनके खिलाफ कार्यवाही। घटना को ढाई महीने से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन आज तक पुलिस ने एक भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई। हाईकोर्ट को यह भी बताया गया था कि पुलिस उल्टा याचिकाकर्ता को ही परेशान कर रही है कि कार्यवाही को लेकर दबाव न बनाया जाए। जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सिवनी कलेक्टर, एसपी और एसएचओ धूमा को नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी। हाईकोर्ट ने सिवनी एसपी को यह भी निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई में शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए यह बताएं कि इस मामले में अभी तक क्या कार्यवाही की गई है। हाईकोर्ट ने कार्रवाई का पूरा ब्यौरा भी पुलिस से मांगा है।  

पहलगाम हमला : शुभम की पत्नी की बातें सुन राहुल गांधी भावुक

कानपुर आतंकी हमले में मारे गए कानपुर के हाथीपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पहलगाम में हुई घटना की पल-पल की जानकारी दी। बताया कि आतंकियों ने सबसे पहले उनके पति को गोली मारी। जिस समय उनके साथ यह घटना हुई, वहां पर करीब 300 से 400 लोग थे। आतंकवादी चुन-चुनकर सिर्फ युवा जोड़ों (कपल्स) को ही निशाना बना रहे थे। बताया कि आतंकी पहले लोगों से कई सवाल करते, उसके बाद बड़ी निर्दयता से गोली मार देते थे। आतंकी जिस तरह से एक के बाद एक लोगों को मार रहे थे, ऐसा लगा कि वे सभी को मार देंगे। राहुल गांधी ने एक-एक करके सभी परिजनों की बातें सुनीं। यह सुनकर वह कई बार भावुक हुए। शुभम की पत्नी ऐशान्या जब बताते हुए रोने लगीं तो उन्हें ढांढस बंधाया। राहुल के हाथीपुर आगमन पर पार्टी की ओर से किसी भी तरह का स्वागत करने, नारेबाजी करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के माध्यम से उन्होंने एक दिन पहले ही इस संबंध में कार्यकर्ताओं के लिए निर्देश जारी कर दिया था। ग्रामीण इकाई अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने इसके लिए वीडियो भी जारी किया था। वह चकेरी एयरपोर्ट से सीधे शुभम के घर पहुंचे और वहां से वापस एयरपोर्ट। फिर हवाई जहाज से दिल्ली चले गए। ‘मेरा पति गुमनामी की मौत नहीं मर सकता, उसे शहीद का दर्जा दिलाइए’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए हाथीपुर निवासी शुभम द्विवेदी के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे। वह यहां पर करीब 20 मिनट रहे। शुभम के पिता संजय द्विवेदी और पत्नी ऐशान्या ने उनसे शुभम को शहीद का दर्जा दिलाए जाने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा पीएम को चिट्ठी लिखेंगे पत्नी ने कहा कि उनका पति गुमनामी की मौत नहीं मर सकता है। राहुल ने परिजनों को आश्वस्त किया कि वह इसके लिए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखेंगे। यह भी बताया गया कि इस घटना को देखते हुए उन्होंने लोकसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए भी प्रधानमंत्री से कहा है। शाम करीब 3.45 बजे चकेरी एयरपोर्ट से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीधे हाथीपुर पहुंचे।  ‘आपने भी आतंकवाद में दादी और पिता को खोया है, मेरा भी दर्द समझिए’ शुभम के पिता ने उनसे कहा कि आपने भी अपनी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी को आतंकवाद में खोया है। ऐसे में मेरा दर्द समझिए, मेरे बेटे को शहीद का दर्जा दिलाइए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए सभी को साथ आना पड़ेगा। राहुल गांधी ने इस दौरान ऐशान्या और परिजनों की बात फोन के जरिए पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्र्रा से कराई। उन्होंने भी परिजनों को पूरा सहयोग करने को कहा। सरकारी गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई तो जिलाध्यक्ष की कार से गए राहुल चकेरी एयरपोर्ट पहुंचने के बाद हाथीपुर जाने के लिए लाई गई कार ने धोखा दे दिया। समय पर वह स्टार्ट नहीं हो पाई। इस पर राहुल गांधी उसे छोड़कर पार्टी के ग्रामीण जिलाध्यक्ष की कार से रवाना हो गए। हालांकि सुरक्षा की द़ृष्टि से उनकी कार को साथ में चल रहे निजी सहायक अलंकार पवई ने चलाया। इस बीच एयरपोर्ट पर अंदर कौन-कौन पार्टी का नेता रहेगा, इसे लेकर भी काफी झिकझिक हुई। बताया जा रहा है कि पहले पूर्व विधायक सुहैल अंसारी, संजीव दरियावादी, नौशाद आलम मंसूरी, मदन मोहन शुक्ला सहित कई लोगों को बाहर रखा गया था। जब इसका विरोध होने लगा तो कुछ लोगों को अंदर बुला लिया गया। जब राहुल शुभम के आवास पहुंचे तो वहां पर पहले से काफी कार्यकर्ता थे। उन सभी को घर के अंदर जाने से रोका गया। इस पर पुलिस के साथ झड़प भी हुई। 

सुपरस्टार रजनीकांत पहलगाम हमले पर बोले – फाइटर हैं PM मोदी, कश्मीर में लाएंगे शांति

मुंबई सुपरस्टार रजनीकांत ने गुरुवार को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को निर्मम और बर्बर बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फाइटर की संज्ञा दी। उन्होंने विश्वास जताया कि पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर में शांति और उसका गौरव लौटाएंगे। रजनीकांत WAVES समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। आपको बता दें कि भारत के ऑडियो-विज़ुअल और एंटरटेनमेंट जगत ने मिलकर इसका आयोजन किया है। रजनीकांत ने कहा, “पीएम मोदी एक फाइटर हैं। वो किसी भी चुनौती से नहीं डरते हैं। उन्होंने इसे बीते एक दशक में बार-बार साबित किया है। मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि वो कश्मीर मुद्दे को साहस और गरिमा से संभालेंगे और वहां शांति बहाल करेंगे।” रजनीकांत ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें कहा था कि मौजूदा हालात और आलोचना को देखते हुए चार दिन का यह आयोजन शायद स्थगित कर दिया जाएगा। लेकिन मुझे भरोसा था कि यह कार्यक्रम जरूर होगा, क्योंकि मुझे नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। WAVES समिट भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को वैश्विक मंच पर ले जाने की एक पहल है। यह फिल्म, ओटीटी, गेमिंग, डिजिटल मीडिया, एआई, कॉमिक्स, ब्रॉडकास्टिंग और एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) जैसे क्षेत्रों को एक मंच पर लाकर भारत की रचनात्मक शक्ति का प्रदर्शन करेगा। इसका लक्ष्य वर्ष 2029 तक 50 अरब डॉलर के बाजार को हासिल करना है। आपको बता दें कि यह समिट उस वक्त आयोजित हो रही है जब हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है और देश में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया है।

घटिया निर्माण सामग्री से निर्माणाधीन श्मशान घाट का शेड हुआ धराशायी

गौरेला पेंड्रा मरवाही गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में निर्माणकार्यो में भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ताजा मामला मुक्तिधाम के निर्माणकार्य में भ्रष्टाचार का है। जिसमें अधिकारी और ठेकेदारो ने श्मशान घाट को भी नहीं छोड़ा। निर्माणाधीन श्मशान घाट का शेड भरभराकर गिर गया। मामले में अधिकारी जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जीपीएम जिले में ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माणकार्यों में जमकर अनियमितता और भ्रष्टाचार बरती जा रही है। जिसके चलते निर्माणकार्य पूरा होने से पहले ही उसकी गुणवत्ता की पोल खुल जा रही है। ताजा मामला जिला कलेक्टर कार्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत गौरेला के ग्राम पंचायत भदौरा में सामने आया है। जहां पर शमशान घाट में चल रहे मुर्दो को जलाने के लिए पक्के सेड निर्माणकार्य किया जा रहा था, जिसकी लागत लगभग 5 लाख रुपये है। जिसका निर्माणकार्य मनरेगा मद से किया जा रहा था और निर्माणकार्य चल रहा था। पर गुणवत्ताहीन निर्माणकार्य की पोल उस समय खुल गई पूरा स्ट्रक्चर अचानक धरासाई हो गया। राहत की बात तो यह रही कि ये हादसा दोपहर में उस समय हुआ। जब वहां पर न कोई मजदूर था और न ही कोई ग्रामीण। इसलिए कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई। अब मामले का खुलासा होने के बाद जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का कहना है कि मामले की जानकारी उन्हें भी हुई है और जांच के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। निर्माणकार्य को लेकर जवाबदार इंजीनियर एसडीओ अब मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे है। निर्माणकार्य में घटिया सामग्री उपयोग किये जाने की बात कही जा रही है।  

पटना में बारिश , सारण और सीवान में बारिश का रेड अलर्ट जारी

पटना बिहार के कई जिलों में तेज हवा के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने पटना, सीवान, सारण, नालंदा, नवादा, समस्तीपुर, वैशाली, भोजपुर, गया, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय बारिश का अलर्ट जारी किया है। पटना, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बेगूसराय, भोजपुर, औरंगाबाद सीवान और सारण के कुछ भागों में तीव्र दर्जे की मेघ गर्जन, वज्रपात, ओलावृष्टि और तेज हवा के साथ बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इधर, पटना समेत कुछ जिलों में अहले सुबह से ही बारिश हो रही है। पटना और गोपालगंज के कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवा के साथ बारिश ने तापमान में गिरावट ला दी है। दो मई को पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, एक मई को बिहार के सुपौल, अरिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल, पटना, गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर में एक या दो स्थानों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दो मई को बिहार के सभी 38 जिलों के कुछ स्थानों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।   मेघगर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बारिश और वज्रापत को लेकर मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें। खराब मौसम होने पर वज्रपात से बचाव के लिये आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किये गये सुझावों का अनुपालन करें। खराब मौसम में घरों में रहें और सुरक्षित रहें। वहीं मौसम विभाग ने लोगों से अपील कि है कि खराब मौसम के दौरान अपने पशुधन और खुद को बाहर निकलने से बचें। मेघगर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें। बारिश के समय सुरक्षित स्थान पर जाकर बैठ जाएं।  

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संभाला चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ का कार्यभार

नई दिल्ली वायु सेना के वरिष्ठ फाइटर पायलट एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने आज गुरुवार को चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) का पदभार संभाल लिया है। कार्यभार ग्रहण के अवसर पर उन्हें दिल्ली के साउथ ब्लॉक लॉन्स में त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। CISC बनने से पहले एयर मार्शल दीक्षित मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे, जहां उन्होंने उत्तर भारत और मध्य क्षेत्र में परिचालन तैयारियों को सशक्त बनाने और अन्य सेनाओं के साथ तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग 40 वर्षों के अपने शानदार करियर में दीक्षित ने अनेक कमांड, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़े प्रमुख पदों पर कार्य किया। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (बांग्लादेश), और नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) के पूर्व छात्र हैं। वे एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं, जिनके पास 3,300 से अधिक उड़ान घंटे हैं और उन्होंने 20 से ज्यादा प्रकार के विमानों जैसे मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर पर उड़ान भरी है। उन्होंने एक फ्रंटलाइन मिराज-2000 स्क्वाड्रन की कमान संभाली और नए विमान दो बैचों में फ्रांस से भारत लाने और उन्हें ऑपरेशनल करने का नेतृत्व किया। उन्होंने दक्षिणी क्षेत्र के एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली, जिसे उनके नेतृत्व में कमान का सर्वश्रेष्ठ बेस घोषित किया गया। बैंगलोर स्थित एअरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में वे टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। यहां उन्होंने जगुआर और मिग-27 जैसे विमानों के एवियोनिक्स अपग्रेड जैसे कई स्वदेशी विकास कार्यों में भागीदारी की। वायु मुख्यालय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों जैसे प्रिंसिपल डायरेक्टर एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स, असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और (प्लान्स) पर कार्य किया। एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के निदेशक रहते हुए उन्होंने मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) ट्रायल्स की योजना और निष्पादन में प्रमुख भूमिका निभाई, जिसे उनकी निष्पक्षता और पेशेवर दृष्टिकोण के लिए सराहा गया। वहीं उप वायु सेना प्रमुख के रूप में आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत उन्होंने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रक्रियाओं के जरिये स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स और प्रणालियों की तेजी से खरीद सुनिश्चित की और दीर्घकालिक योजना को मजबूत किया। उन्हें 2006 में मिराज-2000 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उल्लेखनीय योगदान के लिए वायु सेना मेडल, 2011 में MMRCA ट्रायल्स के नेतृत्व के लिए विशिष्ट सेवा मेडल और राष्ट्रपति द्वारा उत्कृष्ट सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।  

मुख्यमंत्री साय बोले- हर युवा के चेहरे की चिंता हमने पढ़ी, हर परिवार की पीड़ा हमने समझी और उसका समाधान करने का किया प्रयास

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से छत्तीसगढ़ के 26 सौ से अधिक बीएड अर्हताधारी बर्खास्त सहायक शिक्षकों के जीवन में खुशियां लौट आई है। प्रदेश सरकार ने बर्खास्त शिक्षकों को सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पद पर समायोजन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य के 2600 से अधिक युवाओं का भविष्य एक बार फिर संवर गया है।       मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ग़जमाला पहनाकर उनके प्रति कृतज्ञता जताई।        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस मौके पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनसे अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का और देश का भविष्य गढ़ना शिक्षकों का सबसे बड़ा कर्तव्य है। आप सभी अपने दायित्व के प्रति सचेत हों और इस भूमिका में सर्वोच्च योगदान दें।       मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की चिंता पहले दिन से की थी। आप हमारे प्रदेश के बच्चें है और आपके भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प हमने पहले से ले लिया था। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कदम छत्तीसगढ़ के भविष्य निर्माताओं को नया संबल देगा और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा शिक्षक आने वाले वर्षों में प्रदेश की नई पीढ़ी को दिशा देंगे और छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह निर्णय शिक्षकों के   उज्जवल, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की एक नई शुरुआत है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के साथ आपके नौकरी के संबंध में लगातार चर्चा होती थी। हमारे मुखिया इतने संवेदनशील है कि उन्होंने पहले ही दिन कहा था कि जितना भी आर्थिक बोझ पड़े राज्य सरकार अपने युवाओं के भविष्य को खतरे में नहीं डालेगी। उन्होंने कहा कि आपके परिजन भी लगातार हमसे संपर्क कर अपनी चिंता व्यक्त करते थे और आज मुख्यमंत्री ने उन सभी की चिंता को दूर करते हुए अपना वादा निभाया। मुख्यमंत्री जी ने न केवल अपना वादा निभाया है बल्कि अपनी इच्छा शक्ति से सुशासन को स्थापित करने का कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरे देश में मिसाल कायम की है।   इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे अपने भविष्य को लेकर गहरी आशंका में थे और लगातार मानसिक पीड़ा झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ने उन्हें संबल दिया। शिक्षकों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हर बार उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने हमसे वादा किया था कि हमारे बेटे-बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और आज उन्होंने अपना वादा निभाकर एक अभिभावक की जिम्मेदारी पूरी की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा शिक्षकों ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सरकार ने वास्तव में सुशासन और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। हमें गर्व है कि आज हमारे प्रदेश में ऐसी सरकार है जो हमारी पीड़ा को समझती है और संवेदनशीलता के साथ हमारी समस्याओं का समाधान करती है।

बिलासपुर:योग के बहाने नमाज, रात तीन बजे GGU सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को घर से उठा लाई…

 बिलासपुर  कोटा क्षेत्र के शिवतराई में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एनएसएस कैंप के दौरान छात्रों को योग के बहाने नमाज पढ़ाने के मामले में कोटा पुलिस की टीम रात तीन बजे केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को घर से उठा लाई है। प्राेफेसर से घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। कोटा क्षेत्र के शिवतराई में एनएसएस कैंप के दौरान विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देने का प्रलाेभन देकर नमाज पढ़वाने के मामले में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दिलीप झा, डा मधुलिका सिंह, डा ज्योति वर्मा, डा नीरज कुमारी, डा प्रशांत वैष्णव, डा सूर्यभान सिंह, डा बसंत कुमार और टीम कोर लीडर आयुष्मान चौधरी आरोपित हैं। मामले की जांच के दौरान कोटा पुलिस ने प्रोफेसर दिलीप झा को गुरुवार की तड़के तीन बजे उनके घर से हिरासत में लिया है। पुलिस की टीम मामले में शामिल अन्य आरोपित की तलाश कर रही है। क्या है मामला गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग का कोटा के शिवतराई में सात दिवसीय शिवर 26 मार्च से एक अप्रैल तक लगाया गया था। आरोप है कि 31 मार्च की सुबह कैंप में मौजूद प्रोफेसरों और टीम लीडर ने सभी छात्र-छात्राओं को एकत्र कर नमाज पढ़वाई। साथ ही छात्रों को प्रमाण पत्र देने का प्रलोभन दिया गया। कैंप से लौटकर कुछ छात्रों ने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रबंधन से की। इधर कैंप में नमाज पढ़वाने की जानकारी लगते ही हिंदू संगठन के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद कोनी पुलिस ने शुन्य में मामला दर्ज कर केस डायरी कोटा पुलिस को सौंप दी। मामले की जांच अब कोटा पुलिस कर रही है। DSP रश्मीत कौर चावला ने बताया कि कथित घटना को लेकर आठ लोगों के खिलाफ 26 अप्रैल को दर्ज FIR के सिलसिले में प्रोफेसर दिलीप झा को गुरुवार सुबह हिरासत में लिया गया. उन्होंने बताया कि झा और बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के 6 फैकल्टी मेंबर्स और टीम के एक मुख्य नेता पर धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने समेत अन्य अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता व छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच जिले के कोटा थाना इलाके के शिवतराई गांव में आयोजित एनएसएस शिविर के दौरान 31 मार्च को 159 छात्रों को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया, हालांकि उनमें से केवल चार ही मुस्लिम थे. छात्रों के वापस लौटने पर विरोध प्रदर्शन के बाद जांच शुरू की गई, जिसके बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने भी आंदोलन किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की जांच के लिए सिटी पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) अक्षय सबदरा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की थी. समिति की रिपोर्ट के आधार पर झा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. चावला ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है. छात्रों ने कार्रवाई की मांग की थी छात्रों के मुताबिक, विरोध करने पर उन्हें धमकी और सर्टिफिकेट नहीं देने की चेतावनी भी दी गई। छात्रों ने कोनी थाना पुलिस से शिकायत करके प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. बसंत कुमार, कोआर्डिनेटर दिलीप झा सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिविर में शामिल नहीं हुए थे प्रोफेसर इधर, प्रोफेसर दिलीप झा का कहना था कि यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित NSS कैंप में वो शामिल ही नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैंप में नमाज पढ़ाने की उन्हें जानकारी ही नहीं है। न ही कैंप में शामिल को आर्डिनेटर ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी। ऐसे में बेवजह केस में आरोपी बनाया गया है। पुलिस बोली- साक्ष्यों को किया प्रभावित, जांच में सहयोग नहीं वहीं, सीएसपी व मीडिया प्रभारी रश्मित कौर चावला का कहना है कि इस मामले की जांच के बाद प्रो.दिलीप झा, डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. ज्योति वर्मा, डॉ. नीरज कुमारी, डॉ. प्रशांत वैष्णव, डॉ. सुर्यभान सिंह, डॉ. बसंत कुमार और टीम कोर लीडर छात्र आयुष्मान चौधरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच में अपराध सबूत पाए जाने के साथ ही साक्ष्य को प्रभावित करने और विवेचना में सहयोग नहीं करने के कारण आरोपी प्रोफेसर दिलीप झा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।

नक्सल पीड़ितों ने नक्सल उन्मूलन अभियान को मजबूती से आगे बढ़ाने का किया अनुरोध

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बस्तर अंचल से आए नक्सल हिंसा पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में सुकमा, बीजापुर, कांकेर सहित बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों के वे नक्सल हिंसा पीड़ित शामिल थे, जिन्होंने विगत वर्षों में नक्सली हिंसा के कारण अपनों को खोया है, शारीरिक यातनाएँ झेली हैं अथवा विस्थापन का दंश सहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को ज्ञापन सौंपते हुए कुर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बस्तर के हजारों परिवार चार दशकों से माओवादी आतंक की विभीषिका का सामना कर रहे हैं, जिसने क्षेत्र की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक बुनियाद को गहरा नुकसान पहुँचाया है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समावेशी विकास की नीति से बस्तर में शांति और विकास की आशा फिर से जगी है। ग्रामीणों ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को इस नई जागरूकता और विश्वास का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुर्रेगुट्टा में चलाया जा रहा सुरक्षा अभियान निर्णायक चरण में है। सरकार किसी भी कीमत पर नक्सल उन्मूलन अभियान को पूर्ण करेगी ताकि बस्तर के विकास को गति मिले। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद सिर्फ एक हिंसक आंदोलन नहीं, बल्कि हमारी सह-अस्तित्व पर आधारित संस्कृति पर खतरा भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हर नक्सल पीड़ित परिवार के साथ सरकार खड़ी है और सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ने या अभियान में बाधा डालने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्थायी शांति और समावेशी विकास ही सरकार का लक्ष्य है, और यह तभी संभव है जब क्षेत्र को हिंसा और भय के साये से पूरी तरह मुक्त किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने आशा व्यक्त की कि नक्सल विरोधी संघर्ष में जन-भागीदारी और विश्वास की शक्ति से हम निस्संदेह सफलता प्राप्त करेंगे और बस्तर को स्थायी शांति और विकास की दिशा में अग्रसर करेंगे।

जातिगत जनगणना के फैसले को CM Mohan Yadav ने बताया ऐतिहासिक

भोपाल  केंद्र सरकार ने लंबे समय से चली आ रही जातिगत जनगणना करवाने की मांग को मंजूरी दे दी है. सरकार के इस फैसले पर पक्ष और विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने इसे समय की आवश्यकता बताते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया है. मोहन यादव ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट का आभार व्यक्त किया. मोहन यादव ने केंद्र के फैसले को बताया ऐतिहासिक डॉ. मोहन यादव ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा, ” यह एक महत्वपूर्ण फैसला है. आजादी के बाद देश के किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा यह सबसे बड़ा निर्णय है. देश में पुरानी घटनाओं के सुधार की दृष्टि से ये एक महत्वपूर्ण कदम है. कैबिनेट के इस फैसले से समता, समरसता, सुगमता और सामाजिक न्याय के एक नए युग की शुरुआत होगी.” मुख्यमंत्री ने कहा, “दशकों तक कई दलों ने जातिगत जनगणना का विरोध किया. जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़े नहीं होंगे बल्कि देश के गरीब, पिछड़े, कमजोर और वंचित वर्गों के जीवन को बदलने में अहम भूमिका निभाएगा.” सीएम ने अभी तक जातीय जनगणना न होने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया. आजादी के बाद से जातीय जनगणना की चल रही मांग बुधवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट मीटिंग की ब्रीफिंग करते हुए बताया था कि, सरकार ने आगामी जनगणना के साथ जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया है. दरअसल, देश में जातीय जनगणना की मांग आजादी के बाद से ही चल रही है. पिछली जातीय जनगणना ब्रितानिया हुकूमत के दौरान साल 1931 में हुई थी. हालांकि, 1941 की जनगणना में भी जातियों की गणना की गई थी, लेकिन सरकार ने इसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे. 2011 की जनगणना के समय भी इसकी जोर-शोर से मांग उठी थी. क्या होती है जातीय जनगणना? जातिगत जनगणना का अर्थ है भारत में मौजूद सभी जातियों के लोगों की अलग-अलग गिनती. यानी देश में अब जब भी जनगणना होगी, उसमें लोगों की जाति के आधार पर भी गिनती होगी. हालांकि, इससे पहले भी देश में जातीय गिनती होती आई है लेकिन सिर्फ अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आंकड़ों को गिना और प्रकाशित किया गया. लेकिन अब अगली जनगणना में ओबीसी की भी गिनती की जाएगी और सरकार उनके आंकड़ों को सार्वजनिक भी करेगी.

इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में, बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर

इंदौर  एमपी के इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में आ गए हैं। उनके प्रदर्शन के दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सख्त आपत्ति जताई है। बीजेपी विधायक ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। पार्षद अनवर कादरी ने पहलगाम हमले के विरोध में यह प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में आतंकवाद का पुतला जलाया गया और नारे लगाए गए। इसी दौरान ‘पाक जिंदाबाद’ किया गया। दरअसल, कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में बड़वाली चौकी पर प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता और उनके समर्थक भारी संख्या में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान आतंकवाद का पुतला जलाया गया। आरोप है कि इसी दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन में कई महिलाएं भी मौजूद थीं। बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर विवाद तब और बढ़ गया जब इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुए। इस पर एक्शन लेते हुए इंदौर के तीन नंबर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने पाक के पक्ष में नारे लगाने को देशद्रोह बताया। कांग्रेस में वरिष्ठ पार्षद है कादरी वहीं पार्षद अनवर कादरी का कहना है कि उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अनवर कादरी कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद हैं। इस घटना से इंदौर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी इस मामले को लेकर कांग्रेस को घेरती हुई नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस अपने बचाव में सफाई दे रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

गुजरात में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद होगी एमपी कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति

भोपाल कांग्रेस गुजरात में पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इस वजह से दूसरे प्रदेशों के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति रुक गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन का कहना है कि गुजरात के तर्ज पर ही मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करेगा। यही वजह है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस जिला अध्यक्षों की लिस्ट रुक गई है।  हालांकि जिन जिलों में अध्यक्षों के पद खाली है वहां एक सप्ताह के भीतर नाम की घोषणा हो जाएगी। दरअसल कांग्रेस के इतिहास में पहली बार अब जिलाध्यक्षों की सीधी नियुक्ति खुद हाईकमान कर रहा। इसके तहत सबसे पहले गुजरात राज्य को राहुल गांधी ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना है। अब स्थानीय नेताओं की सिफारिश के बजाय पर्यवेक्षक जिलाध्यक्ष चुनेंगे। केवल 30 फीसदी बदले जाएंगे अध्यक्ष मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ.संजय कामले में बताया कि मध्य प्रदेश में ज्यादा जिला अध्यक्षों के बदलाव नहीं किए जाएंगे केवल 30 फ़ीसदी अध्यक्ष ही बदले जा सकते हैं क्योंकि एक-दो साल पहले ही ज्यादातर जिला अध्यक्ष बदले गए थे उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद भी बदलने की संभावना है। ज्यादातर पुराने नाम पर ही सहमति बन गई है। गुजरात में जिला अध्यक्षों को लेकर पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। गुजरात में जिला अध्यक्षों की घोषणा होने के बाद मध्य प्रदेश उसी तर्ज पर जिला अध्यक्षों की लिस्ट तैयार की जाएगी। जिला अध्यक्ष होंगे पावरफुल संगठन की मजबूती के मिशन में जुटे कांग्रेस आलाकमान ने अब जिला अध्यक्षों को फिर से पावरफुल बनाने की दिशा में धरातल पर ऑपरेशन शुरु कर दिया है। जिम्मेदारी के साथ जिला अध्यक्षों की जवाबदेही तय करने के लिए अब उनके चयन से जुड़ा कांग्रेस ने नया फार्मूला चुना है। अब विधायक और सांसदों सहित अन्य सीनियर लीडर की सिफारिशों पर जिला अध्यक्ष नहीं बनाए जाएंगे। अब नियुक्ति से पहले बाकायदा हर एंगल और समीकरणों के मद्देनजर रखते हुए पड़ताल की जाएगी। कांग्रेस में जिलाध्यक्ष बनाने का नया फार्मूला 1- अब बड़े नेताओं की नहीं चलेगी चयन में पसंद-नापसंद 2- अब हाईकमान खुद करेगा जिला अध्यक्षों का चयन 3- गुजरात से चयन का पायलट प्रोजेक्ट किया शुरु 4- कांग्रेस के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा 5- जब पर्यवेक्षक करेंगे जिला अध्यक्ष का चयन 6- पर्यवेक्षक 5-5 नामों का करेंगे पैनल तैयार 7- हाईकमान हर एंगल से पैनल के नामों को करेगा क्रॉस चेक 8- उसके बाद जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की होगी सूची जारी होगी। राहुल गांधी की ड्रीम प्रोजेक्ट खास बात है कि  खुद राहुल गांधी अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। दरअसल राहुल गांधी का इसके पीछे मकसद है कि अब पार्टी को संगठन खास तौर से जिला अध्यक्षों के भरोसे चलाया जाए. इसलिए टिकट वितरण जैसे बड़े काम में उनका रोल तय होगा। लिहाजा वो चाहते है कि जिला अध्यक्ष ऐसा बने जो पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हुआ हो। इसलिए उनका साफ कहना है कि जिला अध्यक्षों के चयन में कोई समझौता अब नहीं होगा।  

महासमुंद : सुशासन तिहार : राजस्व प्रकरणों का त्वरित समाधान और जमीन स्तर पर बदलाव की नई शुरुआत

महासमुंद   जिले में ‘सुशासन तिहार’ अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा  त्वरित समाधान हेतु किए जा रहे पहल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक हैं, बल्कि आम जनता को राहत देने वाले ठोस प्रयास भी हैं। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के सतत मार्गदर्शन में राजस्व विभाग की टीम द्वारा जिस तत्परता से प्रकरणों का समाधान किया जा रहा है, वह सराहनीय है। सीमांकन प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुशासन तिहार के इतर सामान्य दिनों में राजस्व विभाग के समक्ष आने वाले सबसे सामान्य लेकिन जटिल प्रकरणों में सीमांकन की समस्या प्रमुख है। पहले इन प्रकरणों के निराकरण में समय लग जाते थे, जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन सुशासन तिहार के दौरान, इन प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान गया। उदाहरणस्वरूप, ग्राम चौकबेड़ा के किसान श्री ब्रज प्रसाद की भूमि का सीमांकन वर्षों से लंबित था, जिससे खेती करना मुश्किल हो गया था। अभियान के दौरान राजस्व विभाग ने दो दिनों के भीतर सीमांकन कर रिपोर्ट प्रदान की, जिससे किसान परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी तरह उपतहसील पटेवा अंतर्गत किसान पंचराम और झाखरमुडा में ग्रामीणों सीमांकन की कारवाई की गई । छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान इस अभियान में केवल बड़े प्रकरणों पर ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया। भू-अभिलेख की प्रतिलिपि, सीमांकन रिपोर्ट की प्रति,  किसान किताब ,भूमि स्वामित्व की त्रुटियों का संशोधन, खातों की अद्यतन जानकारी जैसी मामूली लेकिन समय-संवेदनशील समस्याओं का तत्काल समाधान किया गया जा रहा है। किसान किताब और दस्तावेजों का वितरण अभियान के दौरान राजस्व विभाग द्वारा बसना तहसील अंतर्गत ग्राम डूमरपाली के किसान महेशराम, ग्राम जगत के मीन केतन और राजकुमार को तहसीलदार ममता ठाकुर द्वारा किसान किताब वितरण किया गया। इसके अलावा  बागबाहरा के ग्राम तेंदुलोथा के श्रीमती पुरी हरपाल को भी किसान किताब एक सप्ताह के भीतर मिल गया। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आम जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। लोग अब यह महसूस कर रहे हैं कि उनका शासन उनके द्वार पर है। बसना के किसान पंचराम ने कहा, “अब हमें तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, अफसर खुद गांव आकर समाधान कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी सरकार की यह पहल वास्तव में समाधान कारक है।‘सुशासन तिहार’ केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि जनता से जुड़ने और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुलझाने की एक सशक्त पहल है। महासमुंद जिले में इस अभियान ने प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही को जमीन स्तर पर सिद्ध करने का प्रयास किया है। यदि इसी गति और भावना से कार्य होते रहे, तो सुशासन की यह अवधारणा एक स्थायी बदलाव का माध्यम बन सकती है।`

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित माओवादियों को मिल रहा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण

रायपुर, राज्य शासन द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना एवं समावेशी विकास को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 लागू की गई है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। सुकमा जिले में कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से 20 आत्मसमर्पित युवाओं को कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण तीन माह की अवधि का है जिसमें उन्हें ड्रिप इरिगेशन, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, डेयरी, मुर्गी और मत्स्य पालन जैसी आजीविका आधारित तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय साक्षरता तथा लघु उद्यम स्थापित करने की विधियों पर भी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात इन युवाओं को सिलाई तथा मोटर ड्राइविंग जैसे अन्य रोजगारमूलक विषयों में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं को नवजीवन देने का प्रयास है, जो कभी भटकाव के रास्ते पर चले गए थे। हमारा उद्देश्य है कि वे आत्मनिर्भर बनें, सम्मानजनक जीवन जिएं और समाज के लिए प्रेरणा बनें। कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव ने बताया कि यह केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि मुख्यधारा में लौटे युवाओं के लिए स्थायी आजीविका की दिशा में एक ठोस कदम है। लाइवलीहुड कॉलेज की नोडल अधिकारी सुश्री मधु तेता ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं को स्वरोजगार हेतु शासन से आवश्यक सहायता भी प्रदान की जाएगी। राज्य शासन की यह पहल न केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित कर रही है, बल्कि युवाओं को एक सकारात्मक भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है।

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