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पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेसियों की बेईमानी से सतर्क रहकर मतगणना की प्रक्रिया में सूक्षमता से नजर रखें.

Stay vigilant against the dishonesty of party workers and ensure efficiency in the electoral process. भोपाल की सभी 6 विधानसभा के पोलिंग एजेंट का प्रशिक्षण वर्ग प्रदेश कार्यालय में संपन्न भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की जिले की इकाई ने भोपाल जिले के मतगणना पोलिंग एजेंटों को मतगणना के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता आदि को लेकर मतगणना एजेंटों को प्रशिक्षित किया। यह प्रशिक्षण शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में संपन्न हुआ। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष व उत्तर विधानसभा के प्रत्याशी आलोक शर्मा, पार्टी प्रदेश महामंत्री व दक्षिण पश्चिम के प्रत्याशी भगवानदास सबनानी, कैबिनेट मंत्री नरेला विधानसभा के प्रत्याशी विश्वास सारंग, प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल, पार्टी के जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी, एसएस उप्पल एवं महापौर श्रीमती मालती राय ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जिला अध्यक्ष पचौरी ने प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए कहा हमें मतगणना की टेबल पर विशेष तौर पर ध्यान रखना है। खासतौर पर बैलेट पेपर सरकारी कर्मचारियों की ओर से दिया गया वोट उसको अच्छी तरह देखना है। उन्होंने कहा कि आप सभी ने चुनाव में जो निरंतर परिश्रम किया है। उसका प्रतिफल प्राप्त करने का समय आ गया है। आप सभी मतगणना अभिकर्ता तय समय और मानकों के साथ मतगणना स्थल पर अपनी निर्धारित टेबल पर उपस्थित रहें। हम सभी को मतगणना की प्रक्रिया में सूक्षमता से नजर रखेंगे तथा मतगणना समाप्त होने की प्रक्रिया के बाद ही अपनी नियत जगह से उठेंगे। विधानसभा चुनाव में भारी विजय के रास्ते पर चल पड़ेनेताओं ने कहा कि आप सभी के अथक परिश्रम, हमारी सरकारों के काम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता के कारण विधानसभा चुनाव में भारी विजय के रास्ते पर चल पड़े हैं। मतगणना के दौरान की आवश्यक कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं ने पूरे चुनाव अभियान में काफी परिश्रम किया है। हमारी सरकारों के काम को भी व्यापक समर्थन मिला है। इसी कारण से कांग्रेस के लोग बौखलाए हुए हैं। वे मतगणना के दौरान बेईमानी करने के भी प्रयास करेंगे, लेकिन हमारा कार्यकर्ता सक्षम, निर्भय और सतर्क है। हम कांग्रेसियों की हर चाल का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। कांग्रेस के कुत्सित प्रयासों के बावजूद हम मतगणना की पारदर्शिता को प्रभावित नहीं होने देंगे। हमारे कार्यकर्ता कुछ भी गड़बड़ होने पर चुप नहीं बैठेंगे, बल्कि हर बात को चुनाव आयोग के संज्ञान में लाएंगे।

जेपी नड्डा ने शिवराज-सिंधिया के साथ चुनाव नतीजों पर की घंटों मंत्रणा.

JP Nadda deliberated for hours with Shivraj Singh Chouhan and Jyotiraditya Scindia on the election results. राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं मतगणना से पूर्व भाजपा अध्यक्ष के मप्र पहुंचने पर राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं तेज ग्वालियर। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा मतगणना से पहले शुक्रवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में पहुंचे हैं। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ होटल में घंटों चर्चा की। बताया गया है कि राज्य के चुनाव नतीजों को लेकर मंत्रणा की गई है। राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों के तीन दिसंबर को आने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले भाजपा अध्यक्ष की ग्वालियर में मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं तेज हैं। यहां सिंध विहार स्थित होटल उषा किरण पैलेस में तीन घंटे से ज्यादा चली बैठक में बड़े नेताओं की लंबी चर्चा हुई। सिंधिया के आमंत्रण पर शाही महल जयविलास पैलेस पहुंचे नड्डा नड्डा ने सिंधिया के आमंत्रण पर उनके शाही महल जयविलास पैलेस में पहुंचकर भोज भी किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और सिंधिया के साथ दतिया जाकर पीतांबरा पीठ के दर्शन भी किए। नड्डा रात्रि विश्राम ग्वालियर में ही करेंगे। पार्टी की ओर से उनके अगले दिन के कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई है।भाजपा जिंदाबादः सीएम शिवराजमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में एक्जिट पोल को लेकर किए सवाल पर कहा- भाजपा जिंदाबाद। एयरपोर्ट पर शिवराज ने मीडिया से कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा आगे बढ़ रही है, मोदीजी जन-जन के मन में हैं, उनका स्नेह सदैव प्रदेश को मिलता रहा है। डबल इंजन की सरकार ने प्रदेश में प्रगति और विकास किया है। वहीं, सिंधिया ने कहा कि 48 घंटे का इंतजार है, जनता ने भाजपा को आशीर्वाद दिया है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

मध्य प्रदेश के एग्जिट पोल पर बरसे कमलनाथ…झूठ फैला रहे एग्जिट पोल.

Kamal Nath lashes out at the exit polls in Madhya Pradesh, claiming that false information is being spread. एग्जिट पोल एजेंसियां चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती TV भाजपा मध्य प्रदेश में चुनाव हारेगी *उदित नारायण* भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने शुक्रवार को भाजपा की जीत की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसियों के एग्जिट पोल के नतीजों पर सवाल उठाया। कमलनाथ ने कहा कि एग्जिट पोल एजेंसियां झूठा माहौल बना रही हैं। भाजपा मध्य प्रदेश में चुनाव हारेगी। उन्होंने कहा कि कुछ एग्जिट पोल एजेंसियां चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती हैं। अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो में उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 3 दिसंबर को निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करनी चाहिए। तीन दिसंबर को भाजपा की सािजश सफल नहीं होगीकमलनाथ ने कहा कि सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई है। कुछ एग्जिट पोल जानबूझकर बनाए गए हैं, ताकि कांग्रेस कार्यकर्ता निराश हो जाएं और गलत माहौल बनाकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह साजिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सभी कांग्रेस पदाधिकारियों को मतगणना के दिन के लिए तैयार रहना चाहिए। हम सभी जीतने के लिए तैयार हैं और सभी एकजुट हैं। यदि आपको (पार्टी कार्यकर्ताओं को) कोई समस्या महसूस होती है तो कृपया सीधे मुझसे बात करें या तीन दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) कार्यालय को सूचित करें। कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने वाली है। क्या कहते हैं एग्जिट पोल?बता दें, कई एग्जिट पोल में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की गई है। दैनिक भास्कर ने बीजेपी को 95-115 सीटें और कांग्रेस को 105-120 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया ने बीजेपी को 140-162 सीटें और कांग्रेस को 70-89 सीटें दीं। टुडेज़ चाणक्य ने कहा कि बीजेपी को 151 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 74 सीटें मिलेंगी, जन की बात एग्जिट पोल ने भविष्यवाणी की थी कि बीजेपी को 100-123 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 102-125 सीटें मिलेंगी, रिपब्लिक टीवी-मैट्रिज ने बीजेपी को 118-130 सीटें दी हैं और कांग्रेस 97-107 सीटें दी हैं। अन्य एग्जिट पोल ने भी इसी तरह के नतीजों की भविष्यवाणी की है। इस बीच, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीजेपी राज्य में सत्ता बरकरार रखेगी। नतीजे ती दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।

एग्जिट पोल में बीजेपी को भारी बहुमत, केंद्रीय मंत्री पटेल ने कहा- 2003 जैसी रिकॉर्ड जीत दोहराई जा सकती है.

Exit polls, BJP is projected to win by a significant margin; Union Minister Patel said – a record victory like 2003 can be repeated. इस बार चुनाव आयोग की गाइडलाइंस की वजह से एग्जिट पोल पांचों राज्यों की चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी किए गए । 30 नवंबर को वोटिंग की प्रक्रिया संपन्नहोने के बाद जो एग्जिट पोल्स जारी हुए, जिसमें भाजपा को बंपर बहुमत मिलते दिख रहा है। देश की प्रमुख 8 न्यूज एजेंसियों ने सर्वे कर एग्जिट पोल जारी किए और पतालगाया कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना व मिजोरम में किसकी सरकार बन सकती है। वहीं सर्वे पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में 2003 जैसे परिणाम दोहराते हुए दिखते हैं। एग्जिट पोल में बीजेपी को बंपर सीटें ज्यादातर न्यूज एजेंसियों के एग्जिट पोल में बीजेपी के पक्ष में परिणाम आते नजर आ रहे हैं। अगर ये सच साबित हुए तो मध्यप्रदेश व राजस्थान में बीजेपी औरछत्तीसगढ़ व तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है। इसके साथ ही मिजोरम में हंग असेंबली के आसार हैं। बात करें मध्यप्रदेश की तो एक दो एग्जिटपोल छोड़कर ज्यादातर बीजेपी को काफी बढ़त के साथ बहुमत में आता दिखा रहे है मप्र में भाजपा की फिर वापसी? Exit Polls 2023 में लगभग सभी न्यूज एजेंसियों ने मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनने के आसार जताए हैं।बात करें इंडिया टुडे एक्सिस सर्वे की तो मध्यप्रदेश में भाजपा को 140 से 162, कांग्रेस को 68-90 और अन्य को 3 सीट मिलते दिख रही हैं।यानी कांग्रेस को यहां भारी नुकसान होने की संभावना है। टुडेज चाणक्य न्यूज 24 के सर्वे में भाजपा को 151, कांग्रेस को 74 व अन्य को 0 सीटेंमिलने के आसार बताए जा रहे हैं। वहीं जन की बात सर्वे में भाजपा को 100 से 123, कांग्रेस को 102 से 125 व अन्य को 5 सीटें मिलती दिख रही हैं।वहीं टाइम्स नाउ ईटीजी के सर्वे में भाजपा को 106 से 116, कांग्रेस को 110 से 124 और अन्य को 10 सीटें मिलती दिख रहे हैं। इसी प्रकार रपब्लिकटीवी के सर्वे में भाजपा को 118 से 130, कांग्रेस को 97 से 107 और अन्य को 0 से 2 सीटें मिलने की संभावना बताई जा रही है। मप्र में सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए? मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, ऐसे में यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 116 सीटें किसी भी पार्टी को चाहिए। बात करें एग्जिटपोल्स की तो ज्यादातर एग्जिट पोल्स बीजेपी को बहुमत के आंकड़े के करीब या उससे ज्यादा दिखा रहे हैं। कुछ अन्य सर्वे कांग्रेस को भी इस आंकड़ेके करीब दिखा रहे हैं। बात करें पिछले चुनाव की तो बीजेपी को 2018 में 109 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 114, इसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई थी और बीजेपी सत्ता में आई। मप्र में 2003 जैसा प्रदर्शन करेगी बीजेपी? एग्जिट पोल्स पर पार्टियों की मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही हैं, एक ओर बीजेपी के पक्ष में पोल्स आते देख वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंहनाखुश नजर आए। उन्होंने पोल्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टेलीविजन से नहीं प्रदेश-विजन से देश चलता है। उन्होंने दावा किया किमप्र में कांग्रेस 130 सीटों के साथ सरकार बनाएगी। वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोई कांटे की टक्कर नहीं है,भाजपा भारी बहुमत से जीत रही है। इसी बीच बीजेपी के कद्दावर नेता केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि बीजेपी 2003 के चुनाव जैसाप्रदर्शन करती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि मैंने 2003 के चुनाव को बेहद करीब से देखा है और मैं साफ देखता हूं कि 2003 के परिणाम 2023 में आते दिखते हैं।बता दें कि 2003 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी 173 सीटों के बंपर बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, वहीं कांग्रेस को केवल 38 सीटें ही मिली थीं। बता दें कि 3 दिसंबरको मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम आने हैं।

पीएम मोदी के स्वागत में ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजा दुबई एयरपोर्ट.

Bharat Mata Ki Jai’ slogans echoed at Dubai Airport during the welcome of Prime Minister Modi. पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात में वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे और तीन उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे जिनमें से दो की सह-मेजबानी भारत द्वारा की जाएगी. दुबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP28) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार रात दुबई पहुंचे. वह 1 दिसंबर को होने वाले COP28के वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन शिखर सम्मेलन में भाग लेंगेजैसे ही पीएम मोदी दुबई हवाई अड्डे पर उतरे, एक होटल के बाहर इंतजार कर रहे भारतीय प्रवासियों ने ‘सारे जहां से अच्छा’ गाया और ‘भारत माता की जय’ के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए. दुबई पहुंचने के बाद, पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि वो शिखर सम्मेलन की कार्यवाही की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य एक बेहतर प्लैनेट बनाना है.उन्होंने कहा, “सीओपी-28 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुबई में उतरा हूं. शिखर सम्मेलन की कार्यवाही का इंतजार कर रहा हूं, जिसका उद्देश्य एक बेहतर प्लैनेट बनाना है.” पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात में वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे और तीन उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जिनमें से दो की सह-मेजबानी भारत द्वारा की जाएगी. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने एक्स पर एक वीडियो मैसेज शेयर किया, जिसमें कल के उनके एक्शन-पैक कार्यक्रम का ओवरव्यू दिया गया. उन्होंने कहा कि वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट COP28 का उच्च-स्तरीय खंड है, यह कहते हुए कि यह सुबह इस उच्च-स्तरीय जलवायु कार्यक्रम के उद्घाटन कार्यक्रमों के साथ शुरू होगा. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री अपना संबोधन देंगे. लेकिन जलवायु वित्त में परिवर्तन पर संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात केसाथ एक कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे, जो हरित क्रेडिट पर ध्यान देगा, ये एक वो पहल है, जिसमें प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत रुचि है. बागची ने आगे कहा कि इस दौरान दिन में बड़ी संख्या में द्विपक्षीय कार्यक्रम होंगे. दुबई में COP28 जलवायु वार्ता से पहले अपने डिपार्चर नोट में, पीएम मोदी ने ये भी कहा कि G20 नई दिल्लीनेताओं की घोषणा में जलवायु कार्रवाई और सतत विकास पर ठोस कदम भी शामिल थे.

अधिकतर चैनल्स जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं.

Most channels are far away from ground reality. आइए आपको उन सीटों की जानकारी देते है जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय है या चतुष्कोणीय है,यह सीटें कोई नहीं बता सकता कि कौन जीतेगा,जहाँ प्रत्याशी की हार जीत तीसरे चौथे प्रत्याशी को मिले वोट पर निर्भर होगी,कई जगह यह गैर भाजपा गैर कांग्रेस उम्मीदवार जीतने की ताकत भी रखते हैं । *उदित नारायण* भोपाल।पहले हम बसपा की Top performing सीट्स से शुरुआत करते हैं 1-दिमनी2-मुरैना3-रेगांव4-नागौद5-सतना6-गुढ़7-सिमरिया8-राजनगर9-पथरिया10-गोहद11-लहार12-भिंड13-बारासिवनी-अजाबशास्त्री(लोधी)14-सेंवढ़ा-दामोदर यादव-भीम आर्मी आदिवासी बहुल सीटे जो GGP के असर की हैं15-परसवाड़ा-कंकर मुंजारे16-बिछिया-कमलेश टेकाम17-जबेरा-विनोद राय18-शाहपुरा-अमानसिंह पोर्ते19-मानपुर-राधेश्याम काकोड़िया20-अमरवाड़ा-देव रावेन भलावी21-लखनादौन-सन्तर भलावी22-सिवनी-रंजीत वासनिकऐसी सीटें जहाँ जयस से जुड़े युवकों ने अच्छी चुनोती देकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाया है23-सैलाना-कमलेश्वर डोडियार24-महू-प्रदीप मावी25-रतलाम ग्रामीण-डॉ अभय ओहरी26-पेटलावद- इंजीवालूसिंह गामड़27-नेपानगर-बिल्लोरसिंह जमरा28-भगवानपुरा-मोहन किराड़े29-मनावर-लालसिंह बर्मन(आप/जयस)30-सरदारपुर-राजेन्द्र गामड़आप पार्टी जिन सीटो पर प्रभावी है31-सिंगरौली-रानी अग्रवाल32-बंडा सुधीर यादव33-चाचौड़ा-ममता मीणाइसके अलावा कुछ निर्दलीय है जिन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है34-कटंगी-केसर बिसेन/प्रशांत मेश्राम35-भीकनगांव-मोहन पटेल36-पानसेमल-रमेश चौहान37-जोबट-माधोसिंह डाबर/रिंकुबाला डाबर(जयस)38-बुरहानपुर से हर्ष चौहान/AIMIM उम्मीदबार नफीस मंशा खान39-होशंगाबाद-चौरे40-सिवनी मालवा-ओम रघुवंशी/सुनील गौरहीरा अलावा के नेशनल जयस ने भी 4 प्रत्याशी उतारे है41-भैंसदेही-संदीप धुर्वे42-घोड़ाडोंगरी-स्मिता राजा धुर्वे43-टिमरनी-रमेश मर्सकोले44-बड़वाणी-संदीप नरगावे45-राजपुर सुनील सोलंकीइसके अलावा लगभग 2/3सीटों पर समाजवादी पार्टी प्रत्याशी निर्णायक वोट लाएंगे46-निवाड़ी-मीरा दीपक यादव47-टीकमगढ़ से सपा प्रत्याशी48-बहोरीबंद से शंकर महतो

बरगी अनुभाग के सीएसपी सुनील नेमा का नहीं छूट रहा थानेदारी से मोह.

Bargi subdivision CSP Sunil Nema is not relieved from the police station due to attachment. थाने के स्टाफ से करवा रहे खुलेआम वसूली, नहीं मिलने पर थाने में कर देते हैं बंद होटल संचालकों, ठेकेदारों और चरगंवा सड़क बनी उनके लिए कमाऊपूत, साहब की मनमानी से तिलवारा थाना का स्टाफ परेशान संतोष तोमर भोपाल। सीएसपी नेमा अपराध पर कंट्रोल करने की बजाय तिलवारा थाने की थानेदारी में खर्च कर रहे ज्यादा ऊर्जा भोपाल। पुलिस विभाग में जमावट से जबलपुर क्षेत्र के बरगी अनुभाग में पदस्थापना पाने में सफल रहे एक सीएसपी सुनील नेमा की मनमानी के खूब चर्चे हैं। उनका कार्यालय के नीचे तल में स्थित तिलवारा थाना से मोह नहीं छूट रहा है। इन दिनों वे थाना से पर्याप्त वसूली नहीं मिलने से वे खासे परेशान हैं। यही वजह है कि वसूली को लेकर वे पुलिस वालों पर अप्रत्यक्ष रूप से रोब झाड़ रहे हैं। दबाव में आकर कुछ पुलिस कर्मी उनके इस विशेष वसूली अभियान को अंजाम देने में लगे हैं। उनके इस कारनामे से पूरा स्टाफ परेशान होना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार थानांतर्गत क्षेत्र में जब से सीएसपी पदस्थ हुए हैं, तभी से यहां उनकी तानाशाही और मनमानी के नए नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। कहा तो ये जा रहा है कि वे क्षेत्र के कई होटल संचालकों को बुलाकर उनसे खूब शुभ-लाभ कर रहे हैं। उन्हें दक्षिणा पर ही भरोसा है। बताया जा रहा है कि बरगी क्षेत्र में लंबे समय से पदस्थ सीएसपी सुनील नेमा अपराध पर कंट्रोल और लोगों को न्याय दिलाने की अपने वे तिलवारा थाने की थानेदारी करने में ज्यादा ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। वे अपनी कुर्सी का रोब दिखाते हुए रेत, गिट्टी और मुरूम खदान खोदने में लगे हैं। इसके अलावा ठेकेदारों को खुलेआम धमकी भी दे रहे हैं कि यदि उनका हिस्सा नहीं दिया तो ठेकेदारी निकल जाएगी। उनकी जेसीबी जब्त कर कई गुना वसूली करने में लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, सीएसपी सुनील नेमा की हरकतों से टीआई भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं। उनकी ही जी हुजूरी में उनका दिन निकल रहा है। साहब के रोब के कारण स्टाफ में काना-फूसी चलती रहती है, हालांकि वे अपने दर्द किसी को बंया नहीं करते हैं। सबसे बड़ा कमाई का उनका अड्डा चरगंवा रोड बना हुआ है। वे कभी भी इस रोड पर ट्रकों की लाइन लगाकर चेकिंग के नाम पर वसूली करने पहुंच जाते हैं। पांच सितारा होटल में करते हैं नाश्तासीएसपी सुनील नेमा को महंगे से महंगे होटलों में खाना और नाश्ता करने का शौंक है। वे प्रतिदिन अपने बेटे के साथ पास के ही एक पांच सितारा होटल में जिम करने जाते हैं। वहीं बेटे के साथ वेज-नॉनवेज खाना का भी आनंद उठाते हैं। वहीं उनके ऑफिस के सामने एक ढाबा संचालित है। जिसको वसूली में देरी होने पर कभी भी थाने में बुलाकर बैठा िलया जाता है। बता दें, यह खबर अपुष्ट सूत्रों पर आधारित है।

30 साल से जीतते आ रहे केपी सिंह की शिवपुरी में परीक्षा, क्या रहेगा रिजल्ट.

The examination in Shivpuri, which has been won by K.P. Singh for the past 30 years, what will be the result? Special Correspondent- Sahara Samachaar, Shivpuri भोपाल। शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों के लिए 3 दिसंबर को मतगणना का काम होगा। इसको लेकर सभी आवश्यक तैयारियां जिला प्रशासन के द्वारा पूरी कर ली गई हैं लेकिन इसी बीच शिवपुरी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि यहां से कांग्रेस के नेता और पिछले 30 साल से पिछोर विधानसभा सीट से जीतते हुए आ रहे केपी सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने केपी सिंह को पिछोर की बजाय शिवपुरी से टिकट दिया है। पिछोर विधानसभा सीट से पिछले 30 साल से 6 बार से केपी सिंह विधायक बनते हुए आ रहे हैं लेकिन इस बार उनका टिकट बदला गया और उन्हें शिवपुरी विधानसभा में मैदान में उतारा गया है। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने उनके खिलाफ देवेंद्र जैन को टिकट दिया है क्योंकिभाजपा की वरिष्ठ नेता यशोधरा राजे सिंधिया अपने स्वास्थ्य कारणों के चलते चुनाव नहीं लड़ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा चुनाव नहीं लड़ने के कारण भाजपा ने भी यहां पर टिकट बदलकर उनकी जगह देवेंद्र जैन को मौका दिया है।भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाती है शिवपुरी सीट-शिवपुरी विधानसभा सीट को भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहां से पिछले चार बार से विधानसभा चुनाव में भाजपा जीतते हुए आ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया यहां से चार बार विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं इसलिए इस सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है लेकिन इस बार कांग्रेस के केपी सिंह ने यहां से चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा को टक्कर दी है।केपी सिंह हार गए तो टूट जाएगा रिकॉर्ड-पिछोर विधानसभा सीट से 6 बार से विधायक बनते हुए आ रहे केपी सिंह इस बार शिवपुरी में अपना भाग्य आजमा रहे हैं अगर वह यहां से चुनाव हार गए तो उनका लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड टूट जाएगा। अगर जीतते हैं तो वह इस रिकार्ड को कायम कर पाएंगे और सातवीं बार वह वह निर्वाचित होंगे। वैसे अभी तक जो अनुमान लगाया जा रहा है उसके अनुसार यहां पर भाजपा के देवेंद्र जैन केपी सिंह पर भारी पड़े क्योंकि देवेंद्र जैन यहां पर केपी सिंह की दबंगई छवि को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा। इसके अलावा शिवराज सरकार की योजना और लाडली बहना योजना का असर यहां पर देखा जा रहा है। हालांकि 3 दिसंबर को परिणाम सामने आएंगे तब तक सबकी निगाहें इस परिणाम पर ही टिकी हैं।कांग्रेस में टिकट को लेकर चली माथापच्ची-शिवपुरी विधानसभा सीट की टिकट को लेकर कांग्रेस में अंतिम दौर तक माथापच्ची चली। नाम निर्देशन पत्र भरने के अंतिम दौर तक तमाम कयासों के दौर चलते रहे कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा। पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा छोड़कर आए कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को कांग्रेस टिकट देगी लेकिन उनको टिकट न देकर केपी सिंह को टिकट दिया गया। केपी सिंह को पिछोर की वजह शिवपुरी मैदान में उतारा गया। इसको लेकर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच कुछ दिनों के लिए बयानबाजी का दौर भी चला लेकिन बाद में मामला साफ हो गया कि उन्हें एक रणनीति के तहत शिवपुरी से उतारा गया है। पिछोर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस में टिकट को लेकर माथापच्ची चली। पूर्व में यहां से केपी सिंह की बजाय कांग्रेस ने शैलेंद्र सिंह को टिकट दिया लेकिन उनका नाम भी बदलकर फिर बाद में अरविंद लोधी को टिकट दिया गया। कांग्रेस की बार-बार टिकट बदला-बदली की रणनीति के कारण भी पार्टी की फजीयत हुई।

एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर.

Exit poll” indicates a tough competition between the BJP and Congress एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर* एमपी विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल रिजल्ट, अब आखिरी वक्त का इंतजार उदित नारायण भोपाल-ग्वालियर। एमपी एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर टिकी है। ग्वालियर-चंबल की वजह से ही 2020 में कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन दाम लिया था। एबीपी और सी वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार ग्वालियर-चंबल में बीजेपी की स्थिति ठीक नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को बड़ा नुकसान हो रहा है।दरअसल, मध्य प्रदेश में एबीपी और सी-वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार एमपी में बीजेपी को 88-112 और कांग्रेस को 113-137 सीटें मिल रही हैं। वहीं, अन्य को 02-08 सीटें मिल रही है। बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में हो रही है। यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए असहज करने वाले नतीजे हैं।एबीपी-सी वोटर्स के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से बीजेपी को 4-8 और कांग्रेस को 25-29 सीटें मिल रही हैं। अगर यह अनुमान सही साबित हुए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। ग्वालियर-चंबल की सीटों पर ही उनका प्रदर्शन टिका हुआ है। पार्टी में आगे की स्थिति उनकी तभी मजबूत रहेगी, जब ज्यादा से ज्यादा उनके वफादार चुनाव जीतेंगे।निकाय चुनाव में लग चुका है झटकावहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को निकाय चुनाव में झटका लगा चुका है। कई सालों बाद पार्टी ग्वालियर और मुरैना में मेयर चुनाव हार गई थी। ऐसे में इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने बड़ा चैलेंज है।एक्सिस माय इंडिया में बीजेपी को बढ़तइसके साथ आजतक और एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में सिंधिया के गढ़ में कांग्रेस को झटका लग रहा है। इस सर्वे के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से 19 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस को 14 सीटें मिल रही है।एग्जिट पोल के नतीजे कुछ भी बता रहे है यदि कुल मिलाकर देखा जाय तो मध्यप्रदेश में बीएसपी एसपी एवं गोंडवाना पार्टी की कुल मिलाकर 32 सीटो में त्रिकोणीय मुकाबला होने से एवम लाडली बहना योजना का लाभ यदि बीजेपी को मिलता है तो मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार पुनः बनने की संभावना प्रबल है कुल मिलाकर बीजेपी 118 से 122 सीट, कांग्रेस 108 से 110, बीएसपी अन्य की 5 सीटे आने की संभावना दिख रही है। बीएसपी एसपी गोंडवाना के आने ज्यादा फायदा भाजपा को मिल सकता है ।मध्य प्रदेश में इस बार भी भाजपा की सरकार बनती दिख रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने सीहोर के मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का किया निरीक्षण

मतगणना की तैयारियों का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लिया जायजा

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी, शिवपुरी की घटना पर मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी

पार्टियों ने काटा टिकट, तो विधानसभा सचिवालय ने कहा, बंगला खाली करो

Parties have issued tickets, so the Legislative Assembly Secretariat has said, Vacate the bungalow. छिनेगा यशोधरा राजे से बंगला, चुनाव नहीं लड़ने वाले विधायकों को नोटिस, विधानसभा सचिवालय ने 30 बेटिकट विधायकों को भेजा पत्र भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों बड़ी पािर्टयों भाजपा और कांग्रेस ने इनकमवेंशी के कारण लगभग ढाई दर्जन के क्या टिकट काट दिए कि अब उनका बंगला भी छिनने वाला है। यानि इधर पार्टियों ने टिकट काटा, तो उधर, जैसे लोकसभा में राहुल गांधी का बंगला िछनने की जल्दबाजी की गई, उसी तरह विधानसभा सचिवालय ने भी बेटिकट वाले माननीयों को बंगला खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इससे इन माननीयों की भोपाल में रहने को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूरा हो चुका है। अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है। जिसमें 16वीं विधानसभा के सदस्यों के नाम सामने आ जाएंगे। नई विधानसभा सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के लिए विधानसभा सचिवालय ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सचिवालय ने उन विधानसभा सदस्यों को नोटिस जारी कर दिया है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। ऐसे भाजपा और कांग्रेस के 30 वर्तमान विधायकों को नोटिस देकर आवास खाली करने को कहा गया है। हालांकि वर्तमान विधायक नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते हैं। नए विधायकों को लेकर टेंशन में विधानसभा सचिवालय नए विधायकों के जीतने के बाद उन्हें भोपाल में सरकार द्वारा आवास मुहैया कराया जाता है। इसको लेकर विधानसभा सचिवालय ने राज्य सरकार को भी पत्र लिखा है। इसमें नए विधायकों के चुन कर आने पर उनके लिए गेस्ट हाउस और रेस्ट खाली रखने को कहा गया है। इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से भी विभिन्न विभागों को लिखा गया है।

कर्ज में डूबा मध्यप्रदेश, जो सत्ता में आएगा, करोड़ों का कर्ज मिलेगा विरासत में।

Madhya Pradesh will inherit debts in the millions when it comes to power. मनीष त्रिवेदीभोपाल, मध्यप्रदेश में इस बार तीन दिसंबर को जिसकी भी सरकार बनती है, उसे करोड़ों का कर्ज विरासत में मिलेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार पर करोड़ों के कर्ज हैं। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि जिसकी भी सरकार बनती है उसने जो जनता से वादे किए हैं वह कैसे पुरे होंगे? फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. प्रदेश के हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. सरकारी खजाने से साल का 20 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है. मध्यप्रदेश शासन का वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है. इसका तकरीबन 26.2% हिस्सा वेतन, भत्ते और ब्याज की अदायगी में ही चला जाता है. अकेले वेतन-भत्ते को देखें तो वित्तीय वर्ष खत्म होने तक 56 हजार 314 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस पर खर्च होंगे. यह बजट का 18.64% होता है. वहीं, पेंशन पर बजट का 18 हजार 636 करोड़ रुपए यानी 6.17% और ब्याज पर 22 हजार 850 करोड़ रुपये यानी 7.56% खर्च होगा. मौजूदा फाइनेंसियल बजट के मुताबिक सरकार की आमदनी 2.25 लाख करोड़ है और खर्च इससे 54 हजार करोड़ है. अब नई सरकार को वर्तमान बजट से अधिक राशि की आवश्यकता होगी. मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम 3 दिसंबर को आने हैं. मतदान के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की ओर से सरकार बनाने का दावा किया जा रहा हैं. हालांकि,वोटर का फैसला 3 दिसम्बर को आएगा लेकिन सूबे में सरकार किसी भी पार्टी की बने, उसे विरासत में खाली खजाना मिलेगा. फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. साफ है कि नई सरकार के लिए खस्ताहाल खजाने से अपनी लोक-लुभावन चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए बड़ी चुनौती सामने आने वाली है. जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार सालाना 20 हजार करोड़ रुपए ब्याज देती है. जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य के पास नए टैक्स लगाने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है. ऐसे में सरकार किसी भी बने, उसके लिए अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने के साथ वित्तीय प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी. अभी मध्यप्रदेश सरकार पर जितना कर्ज है, उस लिहाज से देखा जाए तो हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. वित्तीय जानकार बताते है कि पिछले 23 सालों में प्रति व्यक्ति कर्ज 42000 बढ़ गया है. साल 2001-02 में प्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपए का कुल कर्ज था. जनसंख्या के हिसाब से प्रतिव्यक्ति बमुश्किल 3,500 हजार रुपए का कर्ज था. दरअसल, 31 मार्च 2023 को खत्म वित्तीय वर्ष में सरकार पर 3.31 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2023-24 के अंत तक 3.85 लाख करोड़ रुपए हो गया.

सिर्फ वेबसाइट तक ही सिमटा कामकाज, शिवराज सरकार का आनंद विभाग.

Work of the Anand Department of the Shivraj government is confined only to the website. Manish Trivedi भोपाल: वर्ष 2016 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आनंद विभाग (Ministry of Happiness) के गठन को मंजूरी दी थी. मोटे तौर पर इसका मूल मकसद राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर मापकर उनका जीवन खुशहाल बनाने का प्रयास करना था. इसकी प्रेरणा मुख्यमंत्री चौहान को भूटान के राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक से मिली थी. इसलिए मध्य प्रदेश का एक ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ जारी करने की भी बात कही गई थी, जो राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर बताता. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उनके इस विभाग के कामकाज की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि संस्थान के कार्यों के निष्पादन हेतु 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 रिक्त हैं. वहीं, वेबसाइट पर जिन 17 पदाधिकारियों का उल्लेख है, उनमें सामान्य सभा के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री, कार्यपालन समिति के अध्यक्ष के तौर पर राज्य के प्रमुख सचिव और सीईओ के अलावा बाकी 14 पदों में से 7 रिक्त हैं. द वायर में आनंद विभाग के ऊपर एक रिपोर्ट के अनुसार आनंद विभाग पर एक रिपोर्ट के अनुसार  संस्थान की ओर से आनंद के विषय पर शोध/अनुसंधान के लिए ‘आनंद रिसर्च फेलोशिप’ भी जारी की जाती है, लेकिन आज तक कोई शोध प्रकाशित नहीं हुआ है. लोगों के जीवन में आनंद घोलने का बजट 10 पैसा प्रति व्यक्ति है आनंद विभाग का गठन एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुआ था. वर्ष 2018 में सरकार बदलने पर इसका विलय अध्यात्म विभाग में कर दिया गया. वापस भाजपा की सरकार आने पर इसे फिर से स्वतंत्र कर दिया गया. वर्ष 2022-23 में इसको 5 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें 2 करोड़ वेतन भुगतान, कार्यालय किराया, बिजली-पानी व्यय, प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार के लिए थे. 3 करोड़ का पोषण अनुदान था, जिससे विभाग को आनंद के प्रसार के कार्यक्रमों का संचालन करना था. विभाग केवल 4.22 करोड़ की राशि खर्च कर सका. वित्तीय वर्ष 2021-22 के उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी विभाग द्वारा आनंद के प्रसार के लिए चलाए जाने वाले सभी कार्यक्रमों पर केवल 79 लाख रुपये खर्च किए गए, जो राज्य की लगभग 8 करोड़ आबादी के लिहाज से लगभग 0.10 पैसा प्रति व्यक्ति होता है. हालांकि, इस बजट को पर्याप्त मानते हैं. उनका कहना है, ‘हम वालंटियर (स्वयंसेवी) के जरिये काम करते हैं. यह एक नई अवधारणा लाने की शुरुआत है, समय तो निश्चित तौर पर लगेगा. बजट हमारे लिए पर्याप्त है, कोई समस्या नहीं है.’ ‘आनंद विभाग’ या ‘सरकारी अधिकारी/कर्मचारी आनंद विभाग?’ स्वयंसेवी आनंदकों (84 हजार से अधिक) में बड़ी संख्या में शासकीय सेवक शामिल हैं (दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक), उनमें भी शिक्षा विभाग के कर्मियों की संख्या इनमें अधिक है. अशासकीय व्यक्तियों में समाजसेवी, पत्रकार जैसे ज़मीनी सक्रियता वाले पेशों के लोग शामिल हैं. वहीं, वेबसाइट पर उपलब्ध 268 आनंदम सहयोगियों की सूची में 60 फीसदी से अधिक शासकीय कर्मचारी हैं. भले ही पूरी योजना को वॉलंटियर रूप से सफल बनाने का ख्वाब देखते हों लेकिन द वायर से बातचीत में ‘अशासकीय आनंदम सहयोगी’ कहते हैं कि हम काम-धाम छोड़कर अपने मन की संतुष्टि के लिए लोगों में खुशियों बांटने के प्रयास करते हैं, तो कम से कम विभाग को हमारे पानी-पेट्रोल का खर्च तो देना ही चाहिए. विभाग के गठन के समय राज्य का हैप्पीनेस इंडेक्स जारी करने को इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य बताया गया था. आईआईटी खड़गपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने सरकारी खर्च पर भूटान के दौरे भी किए थे. लेकिन, तब से अब तक नतीजा सिफर ही रहा है. कभी कोरोना, तो कभी किसी अन्य कारण से बार-बार राज्य आनंद संस्थान की ओर से इंडेक्स जल्द ही जारी करने का आश्वासन दिया जाता है. वेबसाइट पर उपलब्ध विभागीय कामकाज की उपरोक्त जानकारी किसी को भी बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और है. ‘द वायर’ ने इस दौरान कई ‘आनंदम सहयोगी’ से बात की. इनमें एक डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा भी थे. उनका नाम वेबसाइट पर ग्वालियर के ‘आनंदम सहयोगी’ के रूप में दर्ज है. द वायर से बातचीत में उन्होंने बताया, ‘जो भी दिख रहा है वो केवल कागजों में है, धरातल पर शून्य है. आपको केवल संस्थान के ईमेल मिलेंगे, वेबसाइट पर सब कुछ मिलेगा, ज़मीन पर कुछ भी नहीं है. विभाग की सक्रियता केवल फोटो खिंचवाकर अपलोड करने तक है. थोड़ी-बहुत गतिविधियां कर देते हैं, जिससे फोटो बन जाते हैं और वेबसाइट पर अपलोड हो जाते हैं. कुल मिलाकर यह केवल एक वेबसाइट के अलावा और कुछ नहीं है. डॉ. शर्मा के दावों की ज़मीनी पड़ताल की और राज्य के विभिन्न तबकों से जुड़े लोगों से बात करके जाना कि वह ‘आनंद विभाग ’ या ‘राज्य आनंद संस्थान’ के कामकाज को किस तरह देखते हैं या उसके कामकाज के बारे में कितना जानते हैं. शिवपुरी और श्योपुर ज़िलों में आदिवासी समुदाय के बीच पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि समस्यों पर सक्रियता से काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अजय यादव को तो पता ही नहीं है कि ऐसा कोई विभाग भी है जो लोगों का जीवन खुशहाल बनाने के लिए कार्य करता है. ‘मैं करीब दशकभर से वंचित तबकों के बीच काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने आज तक आनंद विभाग या राज्य आनंद संस्थान का नाम ही नहीं सुना और न ही कभी इसके द्वारा किया गया कोई आयोजन देखा.’ सिवनी ज़िले के केवलारी खेड़ा गांव के किसान सतीश राय, जो किसान संबंधी समस्याओं पर भी मुखर रहते हैं, को भी नहीं पता कि लोगों के जीवन में आनंद का प्रसार करने के लिए भी कोई विभाग काम कर रहा है. वे आगे कहते हैं, मेरे जैसे सक्रिय किसान को भी ऐसे किसी विभाग या उसके कार्यक्रमों और आयोजनों की जानकारी नहीं है. कोई भी ग्रामीण इस विभाग की गतिविधियों के बारे में नहीं बता पाएगा कि इसके कार्यक्रम कब और कहां होते हैं.’ पूरे राज्य में पोषण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल अधिकार और नागरिक अधिकारों पर काम करने वाली भोपाल की एनजीओ विकास संवाद के राकेश मालवीय को विभाग के गठन … Read more

पुरानी घोषणा को लेकर बीजेपी मोन, मोदी जी के नाम मांग रहे वोट.

Sahara Samachaar; Mandla; MP Elections;

People are seeking votes in the name of the old announcement, asking for votes in the name of BJP, Modi. Special Correspondent मंडला, नैनपुर – जैसे जैसे मतदान की तारीख पास आती जा रही हे दोनों पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी हे। काम को और विकास को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्या रोप का सिलसिला शुरू हो गया हे एक तरफ कांग्रेस पार्टी किसानों,बहनों ,बेरोजगार युवाओं, गैस जैसे मुद्दों को लेकर जनता के सामने प्रचार प्रसार कर रही हे।तो दूसरी तरफ बीजेपी माननीय मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा किए गए कार्यों ,घोषडाओ के साथ माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी को सामने कर चुनाव प्रचार कर रही हे।लेकिन बीजेपी मंडला विधान सभा में पिछले बीस सालों को उपलब्धि गिनवाने में बगले झांकती नजर आ रही हे। पूर्व विधायक के द्वारा जनता से जुड़े ऐसे कोई काम नहीं की जिसको मद्दे नजर रखते हुए जनता सबक सिखाने तैयार हे।इसी प्रकार जिला पंचायत सदस्य चुन कर मंडला जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष रही हे और राज्य सभा सांसद रही हैं अब मंडला विधान सभा से बीजेपी की टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ रही हैं श्रीमति संपतिया उईके ।पद में रहते हुए सिर्फ घोषणा के अलावा कुछ नही फिर चाहे वो नैनपुर में केंद्रीय विद्यालय को बात हो या अन्य ऑफिस की बात हो विकास के नाम पर नैनपुर के साथ सौतेला व्यवहार ही किया बीजेपी सरकार ने।उसी कड़ी में सबसे अहम मुद्दा नैनपुर को जिला बनाओ को लेकर गर्म हे जो इस चुनाव के परिणाम को बदलने में काफी हद तक कारगार होगा। इन मुद्दों को अभी भी ठंडे बस्ते में रखी हुई हे बीजेपी ने।जनता पूछती हे इन वादों का क्या हुआ सिर्फ नैनपुर के साथ छलावा और सिर्फ छलावा।

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