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आरजीपीवी: वर्चस्व को लेकर दो गुटों में झगड़ा, एंटी रैगिंग सेल में दर्ज हुई शिकायत.

RGPV: Clash between two factions over dominance, complaint registered in the Anti-Ragging Cell. भोपाल। शुक्रवार को राजीव गांधी प्रौद्यागिकी विश्वविद्यालय में वर्चस्व को लेकर फिर से दो गुटों में झगड़ा हुआ। आरजीपीवी के यूआईटी में प्रथम वर्ष के छात्रों की रैङ्क्षगग को लेकर अंतिम वर्ष के छात्रों के दो गुटों में आपसी बहस के बाद झगड़े की बात सामने आई है। इस मामले में सूत्रों का कहना है कि पहले से सक्रिय भेल ग्रुप का नाम एक बार फिर से सामने आया है। यूआईटी केंपस के बाहर हुए झगड़े में दोनों गुटों के बीच तीखी बहस के बाद धक्कामुक्की हुई। बताया गया है कि दो दिन पहले प्रथम वर्ष के कुछ छात्रों की रैगिंग अंतिम वर्ष के छात्रों ने की थी, जिसको लेकर भेल ग्रुप के छात्रों ने अंतिम वर्ष के छात्रों के साथ मारपीट कर दी। दोनों गुटों के बीच हुई मारपीट में एक छात्र शिवांक बह्मे के सिर में गहरी चोट बताई गई है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस पूरे मामले को एंटी रैगिंग सेल ने भी ऑनलाइन दर्ज कर लिया है। दो दिन से चल रहा झगड़ा अंतिम वर्ष के छात्र जैद खान का कहना है कि प्रथम वर्ष के कुछ छात्रों की रैगिंग दो दिन से ली जा रही थी। कुछ सीनियर्स को इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हम लोगों से पूछताछ की। जैद का कहना है कि जूनियर पुलिस स्टेशन भी गए थे, लेकिन उस समय उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। शुक्रवार को पेपर के पहले हम लोग केंपस में कार से जा रहे थे, तभी कुछ सीनियरों ने आकर मारपीट शुरू कर दी। इसमें एक छात्र शिवांग को सिर में चोट आई है।

सीएम डॉ. यादव ने एसीएस लेवल के अधिकारियों को सौंपी संभागीय बैठक की जिम्मेदारी.

CM Dr. Yadav assigned the responsibility of the regional meeting to the officers of the ACS level. पीएम मोदी की गारंटी और भाजपा के संकल्प को पूरा करने के लिए रहेगा लक्ष्य, रिव्यू के साथ करेंगे मानिटरिंग भोपाल। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने संभागीय बैठक के लिए एसीएस लेवल के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम ने अधिकारियों को संभाग बैठक के लिए प्रभारी नियुक्त किया है। प्रदेश के दस संभाग के लिए दस अधिकारियों की तैनाती की गई है। ये सभी अधिकारी संभागीय बैठक की न सिर्फ तैयारी करेंगे बल्कि बैठक के बाद बैठक में दिए गए सीएम के निदेर्शों की मॉनिटरिंग भी करेंगे। एसीएस स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी देने के पीछे की वजह है कि मध्य प्रदेश में पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी को प्राथमिकता देनी है। यानी कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि गारंटियों को पूरा किया जाए। इसके साथ ही भाजपा के संकल्प को भी पूरा करने की चुनौती होगी। लोक स्वास्थ्य, वन विभाग, गृह, नर्मदा घाटी विकास प्रधिकरण, जनजातिय कार्य विभाग, वित्त विभाग, किसान कल्याण, पिछड़ा वर्ग, उच्च शिक्षा से जुड़े विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। दरअसल, सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभालते ही संभागों की बैठक लेना शुरू किया है। उन्होंने इसकी शुरूआत अपने गृह संभाग उज्जैन से की थी। इसके बाद जिले वार समीक्षा के लिए अधिकारियों की पोस्टिंग की गई है। अधिकारियों को भी फील्ड की जानकारी भी सीएम को देना होगा। खास बात है कि राजेश राजौरा को उज्जैन का प्रभार दिया गया है। सीएम बनने के बाद राजौरा ही पहले अधिकारी थे। जिन्होंने लाउड स्पीकर पर नियंत्रण का आदेश जारी कराया। उज्जैन में रहते हुए एसीएस राजौरा सीएम मोहन यादव के काफी भरोसेमंद अफसरों में शुभार रहे हैं। इन्हें बनाया प्रभारी एसीएस मोहम्मद सुलेमान को भोपाल संभाग, एसीएस विनोद कुमार को जबलपुर संभाग, एसीएस जेएन कंसोटिया को रीवा संभाग, एसीएस राजेश राजौरा को उज्जैन संभाग, एसीएस एसएन मिश्रा को सागर संभाग, एसीएस मलय श्रीवास्तव को इंदौर संभाग, एसीएस अजीत केसरी को नर्मदापुरम संभाग, एसीएस अशोक वर्णवाल को शहडोल संभाग, एसीएस मनु श्रीवास्तव को चंबल संभाग और एसीएस केसी गुप्ता को ग्वालियर संभाग की जिम्मेदारी दी गई।

रोजगार सृजन के लिए DICCI करेगा मध्यप्रदेश के 313 ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर्स का प्रशिक्षण.

DICCI will provide training to 313 block coordinators in Madhya Pradesh for the creation of employment. DICCI के भोपाल ऑफिस में होगा यह बिजनेस लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम, DICCI मध्यप्रदेश के ब्लॉक कॉर्डिनेटर साझा करेंगे अपनी सफलता की कहानियां   उदित नारायण भोपाल। दलित इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) मध्यप्रदेश चैप्टर की ओर से बिजनेस लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं प्रशिक्षण की शुरुआत की जा रही है। इसमें मध्यप्रदेश के सभी विकासखंडों में मौजूद डिक्की के 313 ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर्स शामिल होंगे। प्रशिक्षण के लिए 45-45 को-ऑर्डिनेटर्स के 7 बैच बनाए गए हैं। डिक्की मध्यप्रदेश चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ.अनिल सिरवैयां ने बताया कि प्रदेश में उद्यमिता विकास और स्व-रोजगार की गतिविधियों को विकासखंड स्तर पर क्रियान्वित कर रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए ब्लॉक लेबल बिजनेस लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। 23 दिसम्बर को पहले बैच, 24 दिसम्बर को दूसरे बैच और 25 दिसम्बर को तीसरे बैच का प्रशिक्षण होगा। इस दौरान एससी-एसटी उद्यमियों और युवाओं को अपने ब्लॉक में ही व्यापार-व्यवसाय और उद्यमिता के अवसर, सफल बिजनेस फ्रेचाइजी मॉडल, लघु और मध्यम उद्योगों के क्लस्टर निर्माण, एमएसएमई इकाईयों की स्थापना, महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ लेने की प्रक्रिया, आसान और सब्सिडाइस बैंक ऋण से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के टिप्स दिए जाएंगे।  लक्ष्य : प्रत्येक विकासखंड में प्रत्येक माह में 10 से अधिक उद्यमी तैयार करना डॉ. सिरवैयां ने बताया कि डिक्की का लक्ष्य प्रत्येक विकासखंड में प्रत्येक माह में 10 से अधिक उद्यमी तैयार करना है। साथ ही प्रत्येक विकासखंड में एक एमएसएमई कलस्टर का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि औद्योगिकीकरण से वंचित और पिछड़े जिलों सहित प्रत्येक जिले में विनिर्माण, सर्विस सेक्टर के स्टार्टअप और नए उद्यम तथा ट्रेडिंग कारोबार के लिए डिक्की ने विशेष प्लान तैयार किया है। अगले दो साल में इसे शत-प्रतिशत क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी उद्देश्य से डिक्की द्वारा प्रत्येक विकासखंड में प्रशिक्षित एससी-एसटी व्यापारियों, उद्यमियों और युवाओं की टीम तैयार की जा रही है जो स्थानीय स्तर पर गांव-गांव में आर्थिक गतिविधियों का क्रियान्वयन करेंगे। कार्यशाला में विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण वर्तमान समय में व्यापार और रोजगार को बढ़ाने के लिए ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर्स को एक्सपर्ट्स द्वारा डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे वे व्यापार विस्तार के लिए ऑनलाइन माध्यमों का भरपूर उपयोग कर पाएंगे। इसके साथ ही उन्हें अपनी सफलता की कहानियों से दूसरों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने संबंधी टिप्स भी दिए जाएंगे। कार्यशाला में डिक्की के अनुभवी उद्यमी,बैंकों के अधिकारी और इंडस्ट्री और उद्यमिता के क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण देंगें।

ग्वालियर के शासकीय महाविद्यालय परिसर में अतिक्रमण कार्यों का चौथरबा कब्जा.

Illegal encroachments in the premises of the government college in Gwalior have reached an alarming level. ग्वालियर, ग्वालियर के शासकीय महाविद्यालय डॉ भगवत सहाय कॉलेज परिसर में अतिक्रमण कार्यों का चौथरबा कब्जा जहां एक ओर सरकार और प्रशासन सरकारी जमीनों को लेकर अभियान चला रही है भूमाफिया के कब्जे से सरकारी जमीन छुड़ाई जाने की कार्यवाही हो रही है लेकिन वही एक और राजनीतिक दबाव के चलते कुछ लोग सरकारी कॉलेज परिसरों में मंदिरों के नाम पर सरकारी जगह घेर कर कब्जा जमा रहे हैं अतिक्रमणकारियों को सरकारी जगह पर कब्जा करना कितना आसान हो चुका है मंदिरों के नाम पर कॉलेज परिसर में धड़ल्ले से कब्जे किए जा रहे हैं लेकिन कॉलेज प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है.

नए पदों की मिली मंजूरी, 4 अफसर डीजीपी, 2 एडीजी,13 आईजी और 18 डीआईजी रैंक में होंगे पदोन्नत.

Approval granted for new positions, including 4 DIGs, 2 ADGs, 13 IGs, and 18 DIGs. 7 आईपीएस अधिकारियों को मिलेगा सिलेक्शन ग्रेड, जानिए सभी रैंक के आईपीएस अधिकारियों के नाम भोपाल। मध्यप्रदेश में आईपीएस अफसरों की पदोन्नति की राह अब आसान हो गई है। पदोन्नति के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के दो, महानिरीक्षक (आईजी) के तेरह, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के 18, और सलेक्शन ग्रेड में पदोन्नति के लिए सात पदों की मंजूरी मिल गई है।पदोन्नति की बांट जोह रहे आईपीएस अफसरों के लिए अच्छी खबर है। नये साल से इन अफसरों को पदोन्नतियां मिलने लगेंगी।सूत्रों के मुताबिक डीजीपी के जो चार पद मंजूर हुए है उनपर वर्ष 2024 में जैसे-जैसे पद रिक्त होते जाएंगे उस हिसाब से अफसरों को पदोन्नत किया जाएगा। जो अफसर डीजीपी के पद पर पदोन्नत होंगे उनमें एक मार्च को विजय कटारिया,एक मई को अनुराधा शंकर सिंह,एक जून को वरुण कपूर, 1 जुलाई को उपेन्द्र जैन डीजी बन जाएंगे। एक जनवरी से जिन अफसरों को पदोन्नति मिलना है उसमें जो अफसर एडीजी बनेंगे उनमें 1999 बैच के राकेश गुप्ता, दीपिका सूरी शामिल है। जो तेरह अफसर आईजी बनेंगे। इनमें 2006 बैच के चंद्रशेखर सोलंकी, रुचि वर्धन, एस चित्रा, अनिल कुशवाहा, आर आरएस परिहार, राजेश हिंगणकर, अंशुमान सिंह, मनीष कपूरिया, अरविंद सक्सेना, विनीत खन्ना, हिमानी खन्ना, मिथिलेश शुक्ला, अनुराग शर्मा शामिल है।जो 18 अफसर डीआईजी बनेंगे उनमे 2009 बैच के साकेत प्रकाश पांडे, अमित सांघी, टीके विद्यार्थी, सत्येन्द्र शुक्ला, वीरेन्द्र कुमार सिंह, प्रशांत खरे, अतुल सिंह, मनीष कुमार अग्रवाल और 2010 बैच के आबिद खान, आशुतोष प्रसाद सिह, मोहम्मद युसूफ कुरेैशी, निमिष अग्रवाल, सिद्धार्थ बहुगुणा,पंकज श्रीवास्तव, राजेश कुमार सिंह, विनीत कपूर, धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, हेमंत चौहान शामिल है।इसके अलावा 2011 बैच के सात अफसरों को सलेक्शन ग्रेड मिलेगा। इनमें रियाज इकबाल, आदित्य प्रताप सिंह, राहुल लोढ़ा, सिमाला प्रसाद, डॉ असित यादव, सुशील रंजन सिंह, संजय कुमार सिंह शामिल है।

30 एकड़ सरकारी जमीन पर बनाई अवैध कालोनी, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर.

An illegal colony was constructed on 30 acres of government land; the administration used a bulldozer to demolish it. आदमपुर के ग्राम छावनी पठार में चार करोड़ रुपये कीमत की जमीन कराई अतिक्रमण मुक्त। राजीव गांधी प्रौद्योगिक मिशन के नाम पर आवंटित है जमीन। भोपाल । जिला प्रशासन ने आदमपुर छावनी में गुरुवार को अवैध कालोनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 30 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस जमीन की वर्तमान में अनुमानित कीमत चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। जमीन राजीव गांधी प्रौद्योगिक मिशन के नाम से आवंटित की गई है। कार्रवाई के दौरान लोग विरोध में उतर आए थे, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी के चलते कार्रवाई लगातार चलती रही। बताया जा रहा है कि यहां बने चालीस से अधिक निर्माणाधीन मकानों को तोड़ा गया है। इसके साथ ही जिन मकानों में लोग निवास कर रहे हैं ,उनको ये जगह छोड़ने के लिए कुछ समय की मोहलत दी गई है। कालोनाइजरों का पता लगा रहे अधिकारीसरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बनाए जा रहे हैं। कार्रवाई के विरोध में यहां मकान में रहने वाली महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ सामने आ गईं थीं। राजस्व अधिकारियों द्वारा पता लगाया जा रहा है कि आखिर सरकारी जमीन पर किन लोगों के द्वारा अवैध रूप से कालोनी विकसित की जा रही है। यहां पक्के निर्माण के साथ ही बाउंड्रीवाल तक बना ली थी। इनका कहना हैछावनी पठार आदमपुर में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बनाए गए हैं, जिन्हें बुलडोजर चलाकर तोड़ा गया है। कुछ लोगों को समय दिया गया है जल्द ही आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

560 सरकारी स्कूलों में नहीं है बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार.

The Supreme Court has rebuked the absence of separate toilets for girls in 560 government schools. – प्रदेश के 25 फीसदी सरकारी स्कूलों का मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट – सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 2022 स्कूलों में नहीं अलग शौचालय भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं के सुधार के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते इन प्रयासों पर अमल नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 560 प्रायमरी और मिडिल स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। जिस पर राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक धनराजू एस ने विभाग के उपसचिव को पत्र लिखकर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका में सुनवाई के बाद दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 2022 सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है, यह याचिका 25 फीसदी स्कूलों को लेकर लगाई गई थी। यह है पूरा मामलादरअसल, प्रदेश के 52 जिलों में 24,741 विद्यालयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में डॉ. जया ठाकुर द्वारा याचिका लगाई थी। इस याचिका में बताया गया कि 560 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस पर कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को फटकार लगाई है । जानकारों की माने तो प्रदेश के स्कूलों में लड़कियों के शौचालय का प्रतिशत 95 है। जबकि उनमें से आधे से अधिक शौचालय उपयोग लायक नहीं हैं। शहरी क्षेत्रों में एक बारगी शौचालय मिल भी जाएंगे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

गांधी परिवार के करीबी दो पूर्व सीएम का भविष्य लिखना बांकी.

Writing the future of two former Chief Ministers close to the Gandhi family remains pending. – अब क्या करेंगे कमलनाथ और दिग्विजय, दोनों ने राजनैतिक विरासत की कुर्सी पर बेटों को किया शिफ्ट जेवी विधायक और नकुल सांसद- जय-वीरू की जोड़ी को हाईकमान ने दिया रेस्ट, दिग्विजय फिर भी सक्रिय और कमलनाथ 5 जनवरी के बाद लौटेंगे भोपाल। मध्य प्रदेश में पीढ़ी परिवर्तन का दौर भाजपा से लेकर कांग्रेस तक में चल रहा है। पुराने दिग्गजों को किनारे कर सेंकड और थर्ड लीडरशिप को फ्रंट पर खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ सालों में देखें तो भाजपा ने यह प्रयोग पहले ही किया है। तीन राज्यों में करारी हार के बाद अब कांग्रेस ने भी प्लानिंग की है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने एक झटके में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को साइडलाइन कर दिया है। हैरत की बात है कि दोनों ही नेता गांधी परिवार के करीबियों में शुमार रहे हैं। इंदिरा गांधी ने तो कमलनाथ को तीसरा बेटा माना था। वहीं दिग्विजय सिंह के संबंध भी उनके पिता के चलते कांग्रेस में शुरुआत से ही बेहतर रहे हैं। विधानसभा के चुनाव में दोनों से जय-वीरू की भूमिका निभाई। परिणाम के बाद हाईकमान ने घर ही बैठा दिया। अब राहुल गांधी की यूथ ब्रिगेड के हाथों में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी है। इसके बाद सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का क्या होगा। यह लोकसभा के चुनाव में स्पष्ट हो जाएगा। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे जयवर्धन सिंह को राघौगढ़ से विधायक बनवाया। हालांकि जेवी कमलनाथ सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कमलनाथ ने अपनी सीट से राजनैतिक विरासत की जमीन पर बेटे नकुलनाथ को सांसद की कुर्सी पर बैठा दिया। खास बात है कि कांग्रेस प्रदेश की सभी सीटों पर हार गई। सिर्फ छिंदवाड़ा से ही कांग्रेस को सफलता मिली। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 10 से 15 साल में पार्टी ने क्षत्रपों की दूसरी पीढ़ी तैयार ही नहीं की। इसका विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। बिना राय और सलाह कर दी जीतू की नियुक्तिपार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब कमलनाथ को कोई पद देने के मूड में नहीं है। इसके संकेत इससे भी मिल रहे हैं कि बगैर उनकी राय लिए सीधे नियुक्तियां कर दी गईं। ऐसे में आगे उनको कोई जिम्मेदारी मिलने की संभावना नहीं दिख रही है। वहीं, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी राज्यसभा में तो बने रहेंगे, पर उनको भी कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। हालांकि, वे नए युवाओं को मार्गदर्शन देते रहेंगे। वहीं कमलनाथ अभी विदेश के दौरे पर हैं। जानकारी है कि वो 5 जनवरी को भारत लौट सकते हैं।पिछली जीत से नहीं लिया सबक – 2018 में कांग्रेस में पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह के साथ युवा के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। राजस्थान में अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट थे। इस वरिष्ठ और युवा नेता के समन्वय से कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी। इस बार मध्य प्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जय और वीरू की जोड़ी मुख्य रोल में थी। इन दोनों के ही बीच द्वंद्व जैसे कई बार स्थितियां देखी गई। युवा को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, जीतू पटवारी जैसे नेताओं को साइड लाइन करके रखा गया। इस बार का चुनाव व्यक्ति विशेष केंद्रित हो गया था, जिसका कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। मार्गदर्शक के रूप में अनुभव का लाभ ले सकते हैं – विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पुरानी पीढ़ी के नेता हैं। भाजपा से लड़ने के लिए कांग्रेस को पीढ़ी परिवर्तन की जरूरत थी। यह राहुल गांधी ने पहल की तो यह देर से उठाया सही कदम है। वरिष्ठों के अनुभव का लाभ पार्टी मार्गदर्शक के रूप में ले सकती है। वरिष्ठ पदों पर बैठाने से नई पीढ़ी का युवा पार्टी से जुड़ नहीं पाता। इसका ही प्रदेश में कांग्रेस को नुकसान हुआ है। कमलनाथ के पास विकल्प है कि वह बेटे को लोकसभा चुनाव लड़ाएं या खुद लड़ें। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के ऊपर निर्भर करेगा कि वे इस पर सहमत होते हैं या नहीं? वहीं पीसीसी एमपी अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है िक कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 51 प्रतिशत वोट शेयर को प्राप्त करेगी।

13 हजार अतिथि विद्वानों के लिए वित्त ने जारी किया फंड, उच्च शिक्षा विभाग ने शुरु कराया वेरिफिकेशन.

A fund has been released for 13,000 guest scholars, and the Department of Higher Education has initiated the verification process. – 571 सरकारी कालेजों के प्राचार्यों ने मांगी रिपोर्ट, छात्रों की संख्या के आधार पर विद्वानों की दर्ज होगी जानकारी भोपाल – सरकारी कॉलेज में अतिथि विद्वानों की सैलरी के लिए वित्त विभाग ने फंड जारी कर दिया है। वित्त विभाग के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने भी वेरिफिकेशन करने का फैसला किया है। प्रदेश के 571 सरकारी कॉलेज से अतिथि विद्वानों की रिपोर्ट मांगी गई है। उच्च शिक्षा विभाग में प्राचार्य को निर्देश दिए हैं कि छात्रों की संख्या के आधार पर ही अतिथि विद्वानों की संख्या तय होगी। करीब 13 हजार से अधिक अतिथि विद्वानों के लिए बजट जारी किया गया है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि आनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। विद्यार्थियों की संख्या की मैपिंग के बाद ही खाली पदों की पुष्टि होगी। प्राचार्य को गुरुवार को उच्च शिक्षा विभाग को आनलाइन मैपिंग की रिपोर्ट सौंपनी है। अधिकारियों ने बताया कि नवंबर की रिपोर्ट में जानकारी सामने आई है कि मध्य प्रदेश में 13700 से अधिक पद अतिथि विद्वानों के तय किए गए हैं। प्राचार्य ने रिपोर्ट भेजी है कि 6500 से अधिक कॉलेज में नियुक्त किए गए हैं। 7111 पद खाली है। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्वानों की संख्या 4513 है। करीब 2000 से अधिक अतिथि विद्वानों को भुगतान बिना पढ़ाए ही किया गया है। इसके बाद विभाग की चिंता है कि गड़बड़ी न हो। इसलिए प्राचार्य से जानकारी बुलाई गई है। बता दें कि शिवराज सरकार ने अतिथि विद्वानों का मानदेय बढ़ाते हुए 25 हजार से 50 हजार कर दिया था।

7 लाख क्विंटल से अधिक खरीदा गया धान निगरानी और जांच के लिये पहुंच रहे अधिकारी।

More than 7 lakh quintals of rice have been purchased, and officials are arriving for inspection and monitoring. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Balaghat.बालाघाट। समर्थन मुल्य पर धान उपार्जन का कार्य अब‍ तेज गति से होने लगा है। जिले में बनाये गए कुल 185 उपार्जन केंद्रो में खरीदी लगातार बढ़ने लगी है। धान उपार्जन के लिये जिले 1 लाख 17 हजार 596 किसानों ने पंजीयन कराया है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा खरीदी केंद्रो की निगरानी और निरीक्षण के लिये तहसीलदारों व नोडल अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे है। मंगलवार को कटंगी तहसीलदार छवि पंत ने बनेरा और घुनाड़ी उपार्जन केंद्रो का निरीक्षण कर आवश्यीक व्यवस्थाएं देखी । उन्होंने जानकारी देते हुये बताया कि मुख्य रूप से धान की नमी बारदानों की संख्या तथा धान परिवहन का उठाव आदि की जानकारी ली गई। साथ ही किसानों द्वारा लाये जा रहे धान की नमी की भी जांच की जा रही है। उपार्जन के संबंध में सहकारिता विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार को 5394 किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराया है जबकि मंगलवार को ही 4554 किसानों से 185 केंद्रो पर 2 लाख 17 हजार 582 क्विंटल धान खरीदा गया है। 1 दिसम्बर से आज दिनांक तक जिले के 15877 किसानों से 7 लाख 30 हजार 999 क्विंटल धान खरीदा गया है। जिले में अब तक कुल 45632 किसानों ने स्लॉट बुक करवाया है।

कमलनाथ पर भारी जीतू पटवारी, उमंग को स्वभाव, व्यवहार बदलने की चुनौती.

Jitu Patwari scores a significant win over Kamal Nath, challenging Umang to change his nature and behavior. वक्त बदला लेकिन कांग्रेस नहीं बदली. कभी युवा पीढ़ी को दरकिनार कर बुजुर्ग नेतृत्व को कमांड देने वाले कांग्रेस हाईकमान ने अब पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर एकतरफा बिना सोचविचार के वरिष्ठ नेताओं को किनारे करते हुए युवा नेतृत्व के हाथ में पार्टी दे दी. कभी युवा नेताओं पर कमलनाथ भारी पड़ रहे थे और अब कमलनाथ पर जीतू पटवारी भारी साबित हो गए हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को अपना स्वभाव, संगत और व्यवहार बदलना होगा. नेता-प्रतिपक्ष के स्टॉफ में ऐसे तत्व शामिल हो जाते है, जो सरकार से अप्रत्यक्ष रूप से उपकृत होते है. यही विपक्ष की रणनीति को लीक करते आ रहे है. ऐसे घुसपैठियों को रोक पाना, उमंग के लिए बड़ी चुनौती है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस हारी तो कमलनाथ का कांग्रेस में भविष्य डूब गया. लेकिन जीतू पटवारी अपना विधानसभा चुनाव हार कर भी कांग्रेस अध्यक्ष पद जीत गए. कांग्रेस हाकमान पहले भी वही था, आज भी वही है. पहले का निर्णय भी इसका था और आज का निर्णय भी उसी का है. दोनों निर्णय का लक्ष्य तो बदलाव का था लेकिन अप्रोच अहंकारी थी. जब निर्णय का अप्रोच अहंकार से भरा होगा तो फिर इंप्लीमेंटेशन में तो यही एटीट्यूड ही दिखाई पड़ेगा. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की पराजय अहंकार, तानाशाही और कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने के कारण हुई है. कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में कितना भी बदलाव कर ले लेकिन जब तक संगठन की कार्यपद्धति में सामूहिकता का ईमानदारी से पालन नहीं होगा तब तक पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े होते रहेंगे. जीतू पटवारी और उमंग सिंगार को संगठन और विधायक दल की कमान सौंपी गई है. इन दोनों नेताओं को संगठन और वरिष्ठ नेताओं की कार्य प्रणाली से समस्या थी. मध्यप्रदेश में कमलनाथ के जाने के बाद कांग्रेस उनकी कार्यप्रणाली की समस्या से तो निजात पा सकती है लेकिन कांग्रेस के संगठन का डीएनए बदलाव के इस निर्णय में भी दिखाई पड़ रहा है. कई वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की गई है जिन चेहरों पर भरोसा जताया गया है, उन पर कई तरह के सवाल उछलते रहे हैं. मसलन, जीतू पटवारी के बड़बोलापन से कई बार कांग्रेस की किरी- किरी हो चुकी है. अब उन्हें अपनी जुबा पर लगाम लगानी होगी. वहीं कांग्रेस में कुंडली मारकर बैठे पदाधिकारियों को हटाने की बड़ी चुनौती होगी. वैसे बदलाव हमेशा अच्छा होता है. नया नेतृत्व हमेशा स्वागतयोग्य होता है. जब भी कोई निर्णय होता है तब उसका विश्लेषण इस आधार पर होता है कि निर्णय के पीछे हाईकमान ने किस सोच और चिंतन के आधार पर निष्कर्ष निकाले हैं. यह दोनों नेता ऊर्जावान हैं, सक्रिय हैं. कांग्रेस के सामने युवा ऊर्जावान और सक्रिय नेताओं के असफल होने का सबसे बड़ा उदाहरण राहुल गांधी स्वयं हैं. उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. कांग्रेस लगातार राजनीतिक चुनौतियों में असफल होती ही दिखाई पड़ी. अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष संभवत सबसे बुजुर्ग नेता हैं. *बदलाव के पीछे गांधी परिवार* मध्यप्रदेश में नेतृत्व बदलाव का जो फैसला हुआ है उसमें गांधी परिवार का रोल साफ देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश में राजनीतिक क्षेत्र में यह स्पष्ट धारणा लंबे समय से बनी हुई है कि यह दोनों युवा नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी रहे हैं. चुनाव में पराजय के कारण भले ही कमलनाथ को अपमानजनक परिस्थितियों में विदा किया गया हो लेकिन राज्य के राजनीतिक हालातों को कमलनाथविहीन करने में दोनों नेताओं को लंबा वक्त लगेगा. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर भी ऐसी ही राजनीतिक चर्चाएं हैं कि उन्हें भी मुख्य भूमिका से विश्राम दिया गया है. सियासत में हमेशा वही चेहरे सफल होते हैं जिन पर कोई विवाद नहीं होते हैं. हाईकमान द्वारा नामित नेतृत्व का पार्टी और विधायक दल में बहुमत का समर्थन शायद तौला नहीं गया है. हाईकमान द्वारा निर्णय को थोपा गया है. कमलनाथ के अध्यक्ष के कार्यकाल में पार्टी का परफॉर्मेंस जिस स्तर पर पहुंच गया है, उसके पीछे भी निर्णय को एकतरफा लेने और थोपने की प्रवृत्ति काम कर रही थी. ऐसी प्रवृत्ति संगठन के लिए लाभप्रद नहीं होती है. *जमीन पर साबित करने की बड़ी चुनौती*  नए नेतृत्व को राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान का भले ही संपूर्ण समर्थन हो लेकिन दोनों नेताओं को जमीन पर अपना नेतृत्व साबित करना होगा. जिस तरह तेज और डिजिटल पॉलिटिक्स बढ़ती जा रही है उसमें केडर मैनेजमेंट के साथ ही पार्टी के लिए फंड मैनेजमेंट भी महत्वपूर्ण पक्ष होता है. कमलनाथ के साथ यह भी माना जा रहा था कि उनका बीजेपी सरकार और नेतृत्व के साथ मिला-जुला राजनीतिक गणित चल रहा था. विपक्षी दल के सामने सबसे बड़ी समस्या यही रहती है कि जनहित के मुद्दों पर जमीन पर संघर्ष किया जाए. अक्सर ऐसा देखा गया है कि विपक्षी राजनीति सरकार के साथ एडजस्टमेंट करके आगे बढ़ने लगती है. ऐसी परिस्थितियां दूरगामी रूप से पार्टी के लिए हानिकारक साबित होती हैं. *क्या कमलनाथ-दिग्विजय के बिना कांग्रेस का उड़ान सम्भव* मध्यप्रदेश में कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को भले ही अलग-थलग करने के संदेश और संकेत स्पष्ट कर दिए हों लेकिन वास्तविक रूप से जमीन पर ऐसा करना फिलहाल संभव नहीं दिखाई पड़ रहा है. इन दोनों नेताओं की जड़ें मध्यप्रदेश की राजनीति में दूर-दूर तक फैली हुई हैं. उनको अलग-थलग करके पार्टी बहुत लंबी दूरी तय नहीं कर पाएगी. इन दोनों नेताओं की जड़ों का इस्तेमाल कर कांग्रेस अपनी नई शाखाओं को मज़बूत कर सकती है. कांग्रेस के नए नेतृत्व को बीजेपी के मजबूत संगठन और नेतृत्व का मुकाबला करना है. बिना वरिष्ठ नेताओं के समन्वय और सहयोग के हो-हल्ला और मीडिया अटेंशन भले पाया जा सके लेकिन पार्टी की जड़ों को मजबूत करना संभव नहीं होगा. राज्य के नए नेतृत्व को पांच साल तक संघर्ष की स्थिति में रहना होगा. इसके लिए जनता के मुद्दों को चिन्हित करना, उसके लिए सतत संघर्ष करना होगा. अब सियासत सुविधा से आगे निकलकर संघर्ष की चौखट पर पहुंच गई है. जो पार्टी और नेता केवल सुविधा को राजनीति का लक्ष्य बनाएंगे उनको तो भविष्य में निराश होना निश्चित है.

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दुर्घटनाओं को रोकने के सम्बन्ध में आदेश जारी किए.

The Chief Minister, Dr. Mohan Yadav, issued orders regarding the prevention of accidents. मनीष त्रिवेदी, सहारा समाचार,भोपाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अनुपयोगी एवं खुले नलकूप, बोरवेल, ट्यूबवेल में दुघर्टनाओं को रोकेने के सम्बंध में आदेश जारी किया है। पहले भी इस तरह के कई आदेश जारी हुए है, इन आदेशों का पालन नहीं हो पाया इनको पालन करने वाले सुस्त है. लेकिन मुख्यमंत्री एक्टिव मोड में है और उनके के आदेशों पर काम भी हो रहा है.

सशक्त, समृद्ध राष्ट्र की पहचान है “एकजुटता“

The recognition of a strong, prosperous nation is “Unity.” तरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस आज डॉ. केशव पाण्डेयआधुनिक युग में पूरी दुनिया एक गठबंधन की भावना के साथ आगे बढ़ रही है। जिसमें मानव एकजुटता की महत्वपूर्ण भूमिका है। विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी युग में यह वह अद्वितीय मौका है, जब हम सभी मिलकर समस्त मानव जाति के लिए एकमत और समृद्धि की दिशा में बेहतर काम कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस के अवसर पर आज हम इसके महत्व को समझेंगे और इसकी महत्वपूर्णता को भी जानेंगे। 20 दिसंबर को प्रति वर्ष अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को एकजुटता के महत्त्व को बताना, गरीबी पर अंकुश लगाना एवं विकासशील देशों में मानव और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र ने 22 दिसंबर 2005 को इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी। इस दिवस को विश्व एकजुटता कोष और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा बढ़ावा दिया जाता है, जो दुनिया भर में गरीबी उन्मूलन के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित हैं। विश्व एकजुटता कोष की स्थापना फरवरी 2003 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के ट्रस्ट फंड के रूप में की गई थी।विश्व में एकजुटता का दौर : मौजूदा परिवेश में बेशक कुछ देशों के बीच युद्ध चल रहे हैं या फिर कुछ में टकराव की स्थिति है, बावजूद इसके दुनिया के अनेक देशों और समुदायों के बीच मित्रता, समरसता और एकजुटता के हालात जन्म ले रहे हैं। आपसी समझ, भावना, सहयोग, साझा जिम्मेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने हमें एक समृद्धि भरे भविष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए मजबूती दी है। इस संदर्भ में यह दिवस हमें सकारात्मक रूप से सोचने और उस दिशा में आगे बढ़कर कार्रवाई करने का अवसर प्रदान करता है। इसके माध्यम से सरकारों को सतत् विकास लक्ष्य के गरीबी और अन्य सामाजिक बाधाओं का जवाब देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कोई भी व्यक्ति शिक्षा को बढ़ावा देकर या गरीबों, शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम लोगों की मदद करके इस दिवस में अपना योगदान दे सकता है। क्योंकि इस दिवस की थीम ही- “सहयोग, समानता और सामाजिक न्याय की संस्कृति को बढ़ावा देना“ है। अन्य अंतरराष्ट्रीय दिनों के विपरीत इस दिवस की थीम प्रति वर्ष एक समान ही रहती है।दरअसल, एकजुटता का अर्थ है- साझा लक्ष्यों और हितों के बारे में जागरूकता। जो एक ऐसे समाज में एकता की मनोवैज्ञानिक भावना को जन्म देकर संबंधों को मजबूत करता व बांधता है। इसका उद्देश्य पूरी दुनिया में, विशेषकर विकासशील देशों में सहयोग, समानता और सामाजिक न्याय की संस्कृति को बढ़ावा देना है।ताकि सामाजिक, आर्थिक विकास, मानवाधिकार और शांति को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के देशों और लोगों को एक साथ लाने का प्रयास किया जा सके। वैश्विक साझेदारी भी संयुक्त राष्ट्र की तरह वैश्विक सहयोग और एकजुटता की नींव पर ही बनाई जा सकती है। सतत विकास एजेंडा इसी पर केंद्रित है, जो लोगों को गरीबी, भूख और बीमारी से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध वैश्विक साझेदारी द्वारा समर्थित है। मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।यह दिवस हमें सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है ताकि हम सभी मिलकर समस्त विश्व के लिए सुधार कर सकें। विभिन्न सांघीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से हम एक बेहतर और संबलित समाज की दिशा में काम कर सकें।अंत में, अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस हमें एक सशक्त, समृद्ध और एकजुट विश्व की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संकल्पित करता है। हमें यहां एक मौका मिलता है कि हम सभी मिलकर सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए काम करें और एक समृद्धि भरे भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं। यह दिन सभी को समर्पित होना चाहिए ताकि हम समृद्धि और एकता की दिशा में आगे बढ़ सकें। क्योंकि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और सशक्तता की प्रतीक है एकजुटता।

जनसुनवाई में पुलिस कप्तान ने सुनी नागरिकों की समस्याएं दिए निराकरण.

In the public hearing, the police captain heard and dismissed the issues raised by the citizens. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Katni.कटनी । नागरिकों की समस्या सुनने एवं उनके निराकरण के लिए हर मंगलवार को जनसुनवाई की जाती है जिससे लोगों की समस्याओं को सुनते हुए अधिकारियों ने निराकरण किया है इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक कटनी अभिजीत रंजन की सरहानीय पहल की है आज थाना कोतवाली परिसर में शहरी व ग्रामीण थानो क्षेत्र में लगी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की निराकरण हेतु शिविर का आयोजन किया गया जिसमें मोके पर ही पीड़ितों की शिकायत का निराकरण करने का प्रयास किया गया। जिससे शिकायत कर्ताओ को राहत मिल रही है। आज शिविर में कोतवाली थाना, माधवनगर थाना, कुठला थाना, रंगनाथ थाना, एनकेजे थाना, झिंझरी चौकी, बिलहरी चौकी, बस स्टैंड चौकी, खिरहनी चौकी, स्लीमनाबाद थाना में की शिकायतों का निराकरण करने पहल की गई इस दौरान सभी थानों व चौकी के प्रभारी मौजूद रहे।

धान खरीदी के नाम पर व्यवस्था की खुली रही पोल, हो रहा शासन को करोड़ो का नुकसान.

The arrangement for rice procurement has opened, causing the government millions in losses under the guise of rice purchases. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Katniकटनी। धान खरीदी के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा हो रहा है किसानों के खून पसीने की कमाई बर्बाद तो हो ही रही है शासन को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है हर वर्ष यही रवैया अपनाया जाता है जिले के ओपन कैपो में जिम्मेदारों की लापरवाही से किस तरह किसानों से खरीद कर रखी गई करोड़ों की धान खराब हुई। इस बात का पता अब जिले के अलग-अलग थानों में हो रही एफआईआर में सामने आ रहा है। बड़वारा, बहोरीबंद व रीठी पुलिस के बाद अब बरही पुलिस ने भी ओपन कैप में रखी करोड़ों की धान खराब होने के मामले में एमएस ग्रो ग्रेन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ संतोष साहू, स्टेट हेड सौरभ मालवीय, कंपनी एडवाइजर अखिलेश बिसेन के विरूद्ध संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बरही कृषि उपज मंडी के टेम्परेरी ओपन कैप में रखी करोड़ों मूल्य की धान खराब हुई है। धान बर्बाद हो जाने के बाद मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन कटनी के जिला प्रबंधक योगेंद्र सिंह सेंगर की शिकायत पर बरही पुलिस ने ओपन कैप संचालक कंपनी के चार अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। बताया जाता है कि सभी जगह मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खरीदी गई धान को ओपन कैप में रखा गया था। ओपन कैप का संचालन एमएस ग्रो ग्रेन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा किया जा रहा था। बीते दिनों मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन कटनी के जिला प्रबंधक योगेंद्र सिंह सेंगर ने लिखित शिकायती पत्र बड़वारा, बहोरीबंद, रीठी व बरही थाने में दिया था। शिकायती पत्रों की जांच के उपरांत सबसे पहले बड़वारा पुलिस, उसके बाद बहोरीबंद व रीठी पुलिस ने एमएस ग्रो ग्रेन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ संतोष साहू, स्टेट हेड सौरभ मालवीय, कंपनी एडवाइजर अखिलेश बिसेन एवं ओपन कैप सुपरवाइजर संजू रजक के खिलाफ धारा 409, 120, 427 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। वहीं अब बरही पुलिस ने भी एमएस ग्रो ग्रेन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ संतोष साहू, स्टेट हेड सौरभ मालवीय, कंपनी एडवाइजर अखिलेश बिसेन प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। गौरतलब है कि बड़वारा थाना अंतर्गत ग्राम मझगवां स्थित ओपन कैप में 7 करोड़ की धान खराब होने के मामले में पुलिस ने ओपन कैप संचालक कंपनी के इन्ही अधिकारियों सहित एक सुपरवाइजर के विरूद्ध मामला दर्ज किया था। सवाल यह उठता है कि हर वर्ष यही रवैया रहता है इसका स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा है

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