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जनजातीय संस्कृति को नई पहचान: बस्तर में ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ की सौगात

रायपुर. उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण शहर की आपाधापी, धूल और शोर-शराबे से दूर, बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए शुक्रवार को एक भव्य और अनमोल ठिकाना मिल गया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, परंपरा और नैसर्गिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में निर्मित ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ का लोकार्पण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई यह वाटिका अब जनता के लिए समर्पित कर दी गई है, जो न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है। शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  किरण देव के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, सीसीएफ  आलोक तिवारी, स्टायलो मंडावी, संचालक कांगेर वैली सहित अन्य प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। लोकार्पण के पश्चात उपमुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी  उत्तम कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अतिथियों को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, जिसे बाद में एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने यहाँ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए बनाए गए 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में बनाए गए ‘गपशप ज़ोन’ और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा को भी देखा, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। वाटिका भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यहाँ की ‘इको-फ्रेंडली’ नीति और ‘प्लास्टिक फ्री ज़ोन’ के नियम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। वाटिका के बीच में निर्मित तालाब और आइलैंड ने सभी का मन मोह लिया। आगंतुकों की सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग और प्रसाधन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से शुरू हो गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी गई। उपमुख्यमंत्री  शर्मा द्वारा किए गए इस लोकार्पण के साथ ही अब ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल के रूप में अंकित हो गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की राशि के चेक वितरित किए। इस पहल के माध्यम से शासन ने वनांचल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और वन आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने ‘वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि’ के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण वितरित किया। इसमें सबसे बड़ी राशि बकावण्ड के ‘मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह’ को प्रदान की गई, जिन्हें काजू प्रसंस्करण और विपणन जैसे बड़े कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसी कड़ी में, आसना के ‘गोधन स्व-सहायता समूह’ को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अतिरिक्त,  शर्मा ने घोटिया और भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए क्रमशः 13.13 लाख और 13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि वितरित कर स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित किया।   कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल भी प्रदान किया। उन्होंने ‘राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना’ के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपा। यह सहायता राशि उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी। उप मुख्यमंत्री द्वारा किया गया यह वितरण न केवल लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद है, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इस दौरान उपस्थित महिला समूहों के सदस्यों से इमली, काजू के प्रोसेसिंग की गतिविधियों का संज्ञान लेकर बाजार की उपलब्धता एवं मार्केटिंग की व्यवस्था के संबंध चर्चा किए ।

PSTST-2025: RCI विशेष शिक्षा कॉलम में सुधार के लिए पोर्टल फिर से सक्रिय

PSTST-2025: RCI विशेष शिक्षा कॉलम में सुधार के लिए पोर्टल फिर खुला भोपाल मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा–2025 के आवेदन पत्र में कॉलम 7.7 (RCI विशेष शिक्षा संबंधी) को लेकर अभ्यर्थियों को सुधार का एक और मौका दिया गया है। पहले यह सुविधा 26 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक दी गई थी। अब लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश पर यह पोर्टल दोबारा 04 फरवरी 2026 से 11 फरवरी 2026 तक एमपी ऑनलाइन के माध्यम से खोला गया है। जिन अभ्यर्थियों के पास D.El.Ed Special Education (RCI) की योग्यता है, वे कॉलम 7.7 में “हाँ” का चयन करें। बाकी सभी अभ्यर्थी इसमें “नहीं” का चयन करें। मंडल ने बताया कि तय तारीख के भीतर किए गए सुधार ही मान्य होंगे और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया होगी।  

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

भोपाल।  नवाचार, अनुसंधान और समाजोन्मुख विकास पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संवाद रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “शोध शिखर 2026” का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। यह सम्मेलन नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और समाजोन्मुख अनुसंधान की दिशा में वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अपर्णा एन., ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी, इसरो, हैदराबाद ने रिमोट सेंसिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शोध में भू-स्थानिक तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग का योगदान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों और पेपर प्रेजेंटर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  संतोष चौबे, कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संस्था की शुरुआत एक पुस्तक “कंप्यूटर एक परिचय” से हुई थी, जिसकी अब तक लगभग दो मिलियन प्रतियां प्रकाशित और वितरित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक आंदोलन था। हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर प्रकाशित पुस्तक भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आज जिन पहलों—डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया—को आगे बढ़ा रही है, उन दिशाओं में आईसेक्ट समूह लंबे समय से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताते हुए शोध को व्यवहारिक और समाजोपयोगी बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट वक्ताओं में  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से भारत में रह रहे हैं और यहां की संस्कृति, अनुशासन और कार्यशैली से अत्यंत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वे किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसानों के बीच तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक शोध और तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें व्यवहारिक और प्रैक्टिकल सोच विकसित करनी होगी, तभी हम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकेंगे। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ‘विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर नवाचारों को अपनाना होगा। केवल कृषि ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में विश्व की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना होगा। विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, ने अपने संबोधन में कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय किसानों, सरकार और उद्योग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जो अनुसंधान को जमीन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और लाखों युवाओं ने नवाचार के माध्यम से नए आयाम स्थापित किए हैं। विचारों को वास्तविकता में बदलने की क्षमता ही आज के भारत की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम के प्रारंभ में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो रवि प्रकाश दुबे ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “शोध शिखर” जैसे कार्यक्रमों से ऐसे विचार सामने आते हैं जो समाज और राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां 10 संकायों में विविध पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तथा 18 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध और नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। डॉ अरुण जोशी, कुलगुरु, डॉ सी वी रामन यूनिवर्सिटी खण्डवा ने कहा कि यदि कोई अच्छा और नवाचारी शोधकर्ता बनना चाहता है, तो उसे ‘रिफ्लेक्शन’ शब्द को समझना और अपनाना होगा। जब तक आत्म-मंथन और चिंतन नहीं होगा, तब तक सच्चा शोध संभव नहीं है। उन्होंने शोध आधारित प्रशिक्षण और इनसाइटफुल एनालिसिस पर बल देते हुए कहा कि यही प्रक्रिया हमें क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाती है। डॉ. विजय सिंह, कुलगुरु, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी ने कहा कि आज कौशल आधारित शिक्षा और शोध की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उद्योगों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय स्किल और रिसर्च दोनों क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। रक्षा, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष कार्य हो रहा है, जो भविष्य की शिक्षा और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। कार्यक्रम की प्रस्तावना और भूमिका रखते हुए सम्मेलन की संयोजक डॉ. रचना चतुर्वेदी ने “शोध शिखर” की अवधारणा, उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल शोध प्रस्तुत करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नवाचारों को समाज के वास्तविक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास है, जिससे अकादमिक ज्ञान और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच सेतु स्थापित किया जा सके। उद्घाटन समारोह के पश्चात पैनल डिस्कशन में डॉ. अपर्णा एन. ने सेटेलाइटों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसरो 32 मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है, उन्होंने आगे कहा कि एनआरएससी और आरएनटीयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ रिमोट सेंसिंग, डाटा एनालिसिस, जियो स्पेशियल जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दे सकता है। वहीं डॉ मनीष मोहन गोरे, सीनियर साइंटिस्ट एंड एडिटर विज्ञान प्रगति एनआईएसपीआर नई दिल्ली ने एनआईएसपीआर की यात्रा को बताते हुए कहा कि एनआईएसपीआर और आरएनटीयू साथ मिलकर विज्ञान संचार के लिए काम कर सकते हैं जिसमें संयुक्त पब्लिकेशन और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने विद्यार्थियों को माइंडसेट चेंज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि आरएनटीयू कृषि में एआई के उपयोग पर साथ में कार्य कर सकता है। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया और  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर … Read more

क्या आपने सोचा है—कीबोर्ड के बटन सीधे ABCDE में क्यों नहीं लगे होते?

नई दिल्ली क्या आपको पता है कि कीबोर्ड पर अक्षर एक पंक्ति में क्यों नहीं होते? ज्यादातर लोग कहेंगे कि ऐसा टाइपिंग की स्पीड बढ़ाने के लिए होता है। जबकि असर वजह इससे ठीक उलट है। कीबोर्ड पर अक्षर ABCDE की तरह एक पंक्ति में इसलिए नहीं होते ताकि टाइपिंग की स्पीड को कम किया जा सके। टाइपराइटर की समस्या 1870 के दशक में पहले टाइपराइटर के बटन ABCDE के क्रम में ही थे। उस समय मशीनें मकैनिकल थीं और इस वजह से तेजी से टाइप करने के चलते टाइपराइटर जाम हो जाया करते थे। इस वजह से काम बार-बार रुकता था और देरी भी होती थी। फिर आया QWERTY फॉर्मुला इस समस्या से निपटने के लिए QWERTY फॉर्मुला पेश किया गया। इसे लाने वाले शख्स का नाम क्रिस्टोफर लैथम शोल्स था। इसने कीबोर्ड पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अक्षरों जैसे E, I, T, A एक-दूसरे से दूर रख दिया। इससे टाइप करने वाले की उंगलियों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे टाइपिंग की स्पीड थोड़ी कम हो गई और मशीनें जाम होना बंद हो गईं। कीबोर्ड के इस लेआउट का नाम बाद में QWERTY पड़ा। समय के साथ क्यों नहीं बदला गया? सवाल उठता है कि समय के साथ टेक्नोलॉजी के बेहतर होने पर कीबोर्ड के ले आउट को बदला क्यों नहीं गया। दरअसल ऐसा मसल मेमोरी के चलते किया गया। प्रैक्टिकली कीबोर्ड की टेक्नोलॉजी उन्नत होने के बाद ABCDE वाले फॉर्मेट पर वापिस जाया जा सकता था लेकिन दुनिया भर के लोगों को क्वर्टी (QWERTY) की आदत पड़ चुकी थी। आज भी अगर इसे बदला जाए, तो पूरी दुनिया की टाइपिंग स्पीड जीरो हो जाएगी।

पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में कार्मिकों के लिए हुई पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस कार्यशाला

भोपाल . मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) द्वारा अपने अभियंताओं और कार्मिकों के लिए पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन नयागांव स्थित कंपनी के प्रशिक्षण संस्थान में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कार्मिकों की व्यवहारिक दक्षताओं, नेतृत्व क्षमता व टीमवर्क कौशल को सुदृढ़ करना था, जिससे कम्पनी कार्यक्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में कंपनी के विभिन्न विभागों से कुल 67 अभियंताओं व कार्मिकों ने सक्रिय सहभागिता की। करियर काउंसलर एवं कॉर्पोरेट ट्रेनर मनीषा आनंद ने कार्मिकों को विविध टीम बिल्डिंग गतिविधियों, संवादात्मक अभ्यासों व व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से व्यावहारिक एवं नेतृत्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मॉडल एवं सिद्धांतों से परिचित कराया। सत्र के दौरान आत्म-विकास, प्रभावी संचार, सहयोगात्मक कार्यशैली एवं पेशेवर उत्कृष्टता जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया। मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री दीपक कश्यप ने कहा कि कंपनी का दृष्टिकोण केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी अपने मानव संसाधन को निरंतर सीखने एवं कौशल उन्नयन की दिशा में प्रेरित करती है। उन्होंने बताया कि कंपनी के कार्मिक न केवल अपने-अपने तकनीकी क्षेत्रों में दक्ष हैं, बल्कि व्यक्तिगत एवं पेशेवर विकास के पथ पर भी निरंतर अग्रसर हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कंपनी के कार्मिकों में सकारात्मक कार्य संस्कृति के निर्माण एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरन्तरता पर बल देते हुए कहा कि व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं।  

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती: मनेंद्रगढ़ में पीएम राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को लाभ

रायपुर. अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है।  डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

हाईवे किनारे बने अवैध निर्माणों पर चलेगा ‘पीला पंजा’, भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला

जयपुर. राजस्थान में नेशनल हाईवे के किनारे बसे अवैध निर्माणों पर अब भजनलाल सरकार का ‘पीला पंजा’ चलने को तैयार है। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राजस्थान सरकार ने हाईवे की बिल्डिंग लाइन और कंट्रोल लाइन के भीतर हुए तमाम अवैध निर्माणों को जमींदोज करने का बड़ा फैसला लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने प्रदेश के सभी जिला कलक्टरों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रदेशभर में हाईवे किनारे संचालित अवैध होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक तैयारी तेज सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अब हाईवे सीमा का सीमांकन शुरू करने की तैयारी में है। जल्द ही अवैध निर्माण को चिन्हित कर उन्हें हटाने के नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इस बड़ी कार्रवाई की आहट ने क्षेत्र के ‘अतिक्रमणकारियों’ की नींद उड़ा दी है। हाईकोर्ट का सख्त रुख: सड़क सुरक्षा सर्वोपरि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाईवे के किनारे बेतरतीब और अवैध निर्माण सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं। अनियंत्रित एंट्री-एग्जिट और अवैध कब्जों की वजह से आए दिन होने वाले हादसों में लोगों की जान जा रही है। अदालत ने सड़क सुरक्षा को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि इन अवैध ढांचों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर कदम उठाए जाएं। 75 मीटर के दायरे में बने निर्माण हटेंगे इसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से आदेश जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह का कॉमर्शियल या आवासीय निर्माण कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। इस दायरे में आने वाले सभी अवैध होटल, ढाबे, दुकानें, सर्विस सेंटर और भवन हटाए जाएं। क्या है नया नियम? नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट (मध्य बिंदु) से 75 मीटर की दूरी तक अब किसी भी प्रकार का निर्माण (व्यावसायिक या आवासीय) अवैध माना जाएगा। इस 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी होटल, ढाबे, दुकानें, शोरूम, गैराज और अन्य पक्के निर्माण हटाए जाएंगे।

दशकों बाद इरान में महिलाओं को बाइक चलाने का अधिकार, नया क़ानून मंज़ूर

तेहरान   ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उन्हें कानूनी रूप से मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दे दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे अब महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। दशकों पुरानी कानूनी अस्पष्टता का अंत ईरान में अब तक महिलाओं के मोटरसाइकिल चलाने पर कोई सीधा कानूनी प्रतिबंध नहीं था, लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस देने से इनकार कर देता था। इस अस्पष्टता के कारण महिलाएं सड़क पर वाहन नहीं चला पाती थीं। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को यातायात संहिता (Traffic Code) को स्पष्ट करने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इस वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया है। घायल होने पर महिलाओं को ही माना जाता था दोषी लाइसेंस न होने के कारण ईरानी महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि सड़क हादसे में कोई महिला घायल होती थी, तो लाइसेंस के अभाव में उसे ही जिम्मेदार मान लिया जाता था। नए कानून के लागू होने से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और दुर्घटनाओं की स्थिति में उन्हें न्याय मिल सकेगा। ट्रैफिक पुलिस के लिए अनिवार्य निर्देश ईरानी समाचार एजेंसी इलना (ILNA) के अनुसार, सरकार ने यातायात पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं…     महिला आवेदकों को व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देना होगा।     पुलिस की सीधी देखरेख में ड्राइविंग परीक्षा आयोजित करनी होगी।     योग्य महिलाओं को अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल चालक लाइसेंस जारी करना होगा।  

मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण

रायपुर. मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है। आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया जा रहा है प्रशिक्षण कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत् प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह कर सके। चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़ वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20 का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो रहा- मनहेर तारम चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी 40 वर्षीय  मनहेर तारम ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा है। इसी तरह  नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके। 19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से जोड़ रहे हैं,  जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले रही हैं। इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला, सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी  विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20 के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का मौका मिल सके।

राज्य स्तरीय पण्डूम 2026 को लेकर तैयारियां तेज, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया निरीक्षण

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने लिया जायजा संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डूम 2026 कार्यक्रम की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने आज निरीक्षण कर जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कार्यक्रम स्थल का भ्रमण कर आयोजन की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित बस्तर की पारंपरिक कला, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और जनसहभागिता से परिपूर्ण हो। निरीक्षण के दौरान स्कूली छात्रों द्वारा की जा रही सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों का अभ्यास देखकर उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डूम जैसे आयोजन बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रतिभाओं को व्यापक पहचान दिलाने का सशक्त मंच हैं। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी., कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

28 फरवरी को आसमान में 6 ग्रहों की कतार, देखिए यह दुर्लभ नजारा

28 फरवरी 2026 को शाम ढलते ही आसमान में एक खूबसूरत नजारा दिखेगा. सूर्यास्त के बाद पश्चिमी या दक्षिण-पश्चिमी क्षितिज पर छह ग्रह एक लाइन में नजर आएंगे. ये ग्रह हैं – बुध, शुक्र, शनि, नेप्च्यून, यूरेनस और बृहस्पति. नासा और खगोल विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुर्लभ प्लैनेटरी अलाइनमेंट फरवरी के अंत से मार्च की शुरुआत तक चलेगा. 28 फरवरी को यह सबसे अच्छा नजारा दिखेगा. यह मौका खास है, क्योंकि इतने ग्रह एक साथ शाम के आसमान में कम ही दिखते हैं. कौन-से ग्रह दिखेंगे और कैसे पहचानें? ये छह ग्रह सूर्य की परिक्रमा पथ (एक्लिप्टिक) के साथ एक लाइन में लगेंगे. सूर्यास्त के करीब 30-45 मिनट बाद साफ मौसम में पश्चिमी क्षितिज की ओर देखें…      शुक्र (Venus): सबसे चमकदार, क्षितिज के बहुत करीब. इसे शाम का तारा कहते हैं.      बुध (Mercury): शुक्र के पास, थोड़ा ऊपर. क्षितिज के करीब होने से देखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन साफ आसमान में नजर आएगा.     शनि (Saturn): स्थिर चमक वाला, शुक्र और बुध के ऊपर.     बृहस्पति (Jupiter): सबसे ऊंचा और चमकदार, आसमान में ऊपर की ओर.     यूरेनस: बृहस्पति के पास, लेकिन बहुत धुंधला. दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप से दिखेगा.     नेप्च्यून: क्षितिज के करीब, सबसे धुंधला. अच्छे टेलीस्कोप की जरूरत पड़ेगी. नंगी आंखों से शुक्र, बृहस्पति, शनि और बुध (अगर अच्छा मौसम हो) आसानी से दिखेंगे. यूरेनस और नेप्च्यून के लिए दूरबीन जरूरी है. कब और कहां से सबसे अच्छा दिखेगा?     तारीख: 28 फरवरी 2026 को शाम में. यह नजारा फरवरी के अंत से मार्च की शुरुआत तक चलेगा.     समय: सूर्यास्त के 30 मिनट बाद से करीब 1 घंटे तक.     दिशा: पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम क्षितिज. शहर की लाइट्स से दूर, खुले स्थान से देखें.     भारत में: पूरे देश में दिखेगा लेकिन उत्तर भारत में मौसम साफ रहने की उम्मीद है. दक्षिण भारत में भी अच्छा नजारा मिलेगा. खगोल ऐप्स जैसे स्टेलारियम, स्काई टुनाइट या स्टार वॉक का इस्तेमाल करें. ये ऐप्स ग्रहों की सटीक स्थिति बताएंगे. कुछ चुनौतियां भी हैं 28 फरवरी को चांद लगभग पूर्णिमा के करीब होगा. बृहस्पति के पास रहेगा. इसकी चमक से धुंधले ग्रह (जैसे यूरेनस और नेप्च्यून) कम दिख सकते हैं. बुध और नेप्च्यून क्षितिज के बहुत करीब होंगे, इसलिए ऊंची इमारतों या पहाड़ों से बचें. मौसम साफ होना जरूरी – बादल या धुंध होने पर कुछ ग्रह छिप सकते हैं. यह अलाइनमेंट क्या है? सच में ग्रह एक सीधी लाइन में होते हैं? यह असल में ऑप्टिकल इल्यूजन है. ग्रह सूर्य के चारों ओर अलग-अलग कक्षाओं में घूमते हैं लेकिन पृथ्वी से देखने पर वे एक कतार में लगते हैं. असल में वे एक सीधी लाइन में नहीं होते, बल्कि आसमान में फैले हुए दिखते हैं. ऐसे नजारे कुछ साल में होते हैं. छह ग्रहों का शाम के आसमान में एक साथ दिखना खास है. मंगल ग्रह क्यों नहीं शामिल? गलत तस्वीरों से सावधान! सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें सात ग्रहों की कतार दिखा रही हैं, जिनमें मंगल भी शामिल है. यह गलत है. मंगल इस बार इस कतार में नहीं है. वह सुबह के आसमान में दिखेगा. पुरानी या फेक इमेजेस से बचें. नासा और विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार सिर्फ छह ग्रह हैं.

कम जगह, ज्यादा उत्पादन: हाइड्रोपोनिक्स से टेरेस गार्डन को बढ़ावा

रायपुर. छत्तीसगढ़ वन निगम की पहल छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइड्रोपोनिक्स पद्धति पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन नया रायपुर आवासीय परिसर, सेक्टर-26 में विगत दिनों किया गया। इस कार्यशाला में मिट्टी के बिना फल एवं सलाद सब्जियों के उत्पादन तथा टेरेस गार्डन की स्थापना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्घाटन निगम के प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें सीमित स्थान में अधिक उत्पादन का अवसर देती हैं और पर्यावरण संरक्षण के साथ आय बढ़ाने में भी सहायक हैं। यह पहल शासकीय योजनाओं के अनुरूप आधुनिक कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में हाइड्रोपोनिक्स विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक श्री जावेद आलम ने प्रतिभागियों को इस पद्धति के मूल सिद्धांत, टेरेस गार्डन की स्थापना, मृदा-रहित खेती की तकनीक तथा न्यूट्रिशन फ्लो टेक्नीक (एनएफटी) विधि के बारे में सरल तरीके से जानकारी दी। साथ ही व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स नर्सरी की स्थापना और प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रतिभागी इस तकनीक को आसानी से अपनाने के लिए प्रेरित हुए। कार्यशाला में निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल आधुनिक, कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भविष्य में उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ नए आय के अवसर भी सृजित होने की संभावना है।

अस्पताल में घूसखोरी का आरोप: नवजात देने के बदले ₹4 हजार की मांग, ₹1500 लेकर बच्चा सौंपा

बुधनी. शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद जहां आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, वहीं अब यहां से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसूता के परिजनों से 4 हजार की मांग आरोप है कि सिविल अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूति दाइयों द्वारा प्रसूता के परिजनों से खुलेआम पैसों की मांग की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात दाई ने नवजात शिशु को देने से पहले 4 हजार रुपये की मांग की। जब परिवार ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई और पूरी राशि देने में असमर्थता जताई, तो दाई ने कथित तौर पर बच्चा देने से इनकार कर दिया। 1500 रुपये की ‘वसूली’ के बाद मिला बच्चा बताया जा रहा है कि मजबूर गरीब परिवार ने जैसे-तैसे 1500 रुपये की व्यवस्था की, तब जाकर उन्हें उनका नवजात शिशु मिला। इस घटना से आक्रोशित परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। जब इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. बड़ोदिया से बात की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सरकारी योजनाओं की साख पर बट्टा यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह निम्न श्रेणी के कुछ कर्मचारी अपनी मनमानी से सरकारी योजनाओं की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। सरकार जहां जननी सुरक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को निःशुल्क प्रसव सुविधा देने का दावा करती है, वहीं इस तरह की वसूली गरीबों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है।

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा में विद्यार्थियों के साथ सुने प्रधानमंत्री मोदी के परीक्षा मंत्र

लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें प्रधानमंत्री  मोदी ने जबलपुर के छात्र आयुष के प्रश्न पर दिया जवाब स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा में विद्यार्थियों के साथ सुने प्रधानमंत्री  मोदी के परीक्षा मंत्र प्रदेश के विद्यालयों में हुआ परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण, शासकीय सुभाष स्कूल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में विद्याथिर्यों से संवाद कर परीक्षा से जुड़े तनाव और शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालय, जबलपुर के छात्र  आयुष तिवारी ने प्रधानमंत्री  मोदी से प्रश्न किया कि कई बार वे शिक्षकों की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बिठा पाते हैं, उसे कैसे मैच करें? इस पर प्रधानमंत्री  मोदी ने विद्यार्थियों को समझाते हुए शिक्षकों से भी आग्रह किया कि अपने अध्‍यापन की स्‍पीड विद्यार्थियों के सीखने की गति के अनुरूप रखें। लेसन प्‍लान विद्याथिर्यों के साथ पूर्व से ही साझा करें। विद्यार्थी वह चेप्‍टर पहले से पढें, अध्‍ययन करें जो शिक्षक भविष्‍य में कक्षा में पढाने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षकों की गति से सामंजस्‍य बैठाने का सबसे अच्‍छा तरीका यह है कि पहले अपने को जोड़ो, फिर मन को जोड़ो। उसके बाद पढाई के विषय शुरू करो। प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि मन को जोड़ने का अर्थ है, विषय की तमाम जानकारियां जुटाना और जोड़ने का अर्थ है, एकाग्रता बनाए रखना। इससे आपकी समझ मजबूत होगी और आप एक कदम आगे चलेंगे। प्रधानमंत्री  मोदी ने विद्यार्थियों के साथ आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में तनावमुक्त जीवन, समय प्रबंधन, अनुशासन, जीवन कौशल एवं व्यवसायिक विकास के महत्वपूर्ण मंत्र दिए। इसके साथ ही उन्‍होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। 2018 से लगातार हो रहा आयोजन प्रधानमंत्री  मोदी वर्ष 2018 से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम का 9 वां संस्करण था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री  मोदी ने देश भर से आये विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया गया। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता- शिक्षा मंत्री  सिंह परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में स्‍कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा कन्या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी के परीक्षा मंत्र सुने। मंत्री  सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रधानमंत्री के द्वारा दिए गए सूत्रों और विचारों को आत्‍मसात कर परीक्षाओं की तैयारी करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुशासन को मजबूत करने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। समय अनुशासन सिखाता है और अनुशासन के साथ जिया गया जीवन ही सफलता की सच्ची पहचान है। जब तक असंभव को करने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक असाधारण उपलब्धियां संभव नहीं हैं। शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का भोपाल के शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम हुआ। यहां पर स्‍कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने विशिष्‍ट जनों, वरिष्‍ठ अधिकारी, अभिभावक और विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता की। संचालक लोक शिक्षण  केके द्व‍िवेदी सहि‍त कार्यक्रम के नोडल अधिकारी संयुक्‍त संचालक  एच.एन. नेमा भी उपस्थित रहे। प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान, प्रशिक्षण परिषद (SCERTS), सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों (DIETS) और प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को समारोह पर्वूक आयोजित किया गया। उक्‍त कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में विद्यार्थियों ने उत्‍साहपूर्वक सहभागिता की। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की गई थी। 9 फरवरी को होगा अगला प्रसारण परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का अगला प्रसारण 9 फरवरी 2026 को होगा। जिसमें प्रधानमंत्री  मोदी देश के विभिन्‍न अंचलों के विद्यार्थियों के साथ चर्चा करेंगे। यह कार्यक्रम विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर सुबह 10 बजे से प्रसारित किया जायेगा। प्रदेश के विद्यालयों में उक्‍त कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्‍यवस्‍थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।  

यूपी SIR से संबंधित दावे-आपत्तियों का समय एक महीने बढ़ा, 27 मार्च तक होगी नोटिस पर सुनवाई

लखनऊ यूपी एसआईआर को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब छह मार्च तक दावे और आपत्तियों की जा सकेंगी। वहीं नोटिस पर सुनवाई 27 मार्च तक की जाएगी। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने बताया कि अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक बूथ पर बैठेंगे। कुल 8990 एईआरओ सुनवाई करेंगे। उन्होंने बताया, मतदाता सूची से 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं। कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है। अभी प्रतिदिन ढाई लाख से तीन लाख लोग मतदाता बनने को फॉर्म-6 भर रहे हैं। उन्होंने बताया, कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जानी है। अब तक 2.37 करोड़ लोगों को नोटिस जारी हुई है। जिसमें से 86.27 लाख को नोटिस दी जा चुकी है । 30.30 लाख वोटरों की सुनवाई हो चुकी है । 16.18 लाख लोगों ने 6 जनवरी तक फॉर्म 6 भरे थे मतदाता बनने को। 6 जनवरी से 4 फरवरी तक 37.80 लाख ने फॉर्म भरे हैं। 5 फरवरी को सर्वाधिक 3.51 लाख लोगों ने मतदाता बनने को फॉर्म 6 भरा है। बड़ी संख्या में महिला व युवा अभी भी वोटर बनने से बाकी हैं। ऐसे में यह लोग अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो इसका भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां लोग ढंग से कर सकें इसके लिए उन्हें और समय दिया गया है। नोटिस पाने वाले सिर्फ 13 प्रतिशत मतदाताओं की सुनवाई यूपी की मतदाता सूची में शामिल ऐसे मतदाता जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है, उन्हें नोटिस भेजा गया है। अभी तक 1.72 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और अभी तक 23 लाख मतदाताओं की सुनवाई की जा सकी है। यानी नोटिस पाने वालों में 13 प्रतिशत मतदाताओं की ही सुनवाई हो सकी है। जिन्हें नोटिस जारी होगी उनमें 3.26 करोड़ लोग हैं। जिसमें पुरानी सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले वोटर हैं। ऐसे में अभी 1.53 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होना बाकी है। यही कारण है कि मतदाता सूची में दावे-आपत्तियों व सुनवाई का समय बढ़ाया गया है।

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