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पावर कॉरिडोर: मंत्री-सचिव की तकरार से लेकर वीआईपी प्रोटोकॉल तक, सत्ता के गलियारों की बड़ी हलचल

Power Corridors: Major stirrings in the corridors of power—from clashes between ministers and secretaries to VIP protocol issues. भोपाल। मध्य प्रदेश के सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर मंत्री और विभागीय सचिव के बीच बढ़ती दूरी ने नए प्रशासनिक समीकरणों को जन्म दे दिया है, तो दूसरी ओर खजुराहो एयरपोर्ट पर कलेक्टर की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इसी बीच एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी ने अहम पद पर नियुक्त होकर नया रिकॉर्ड बनाया है, जबकि मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की मुलाकात भी कई अटकलों को हवा दे रही है। मंत्री ने सचिव हटाने की मांग, अब मुख्यमंत्री के फैसले पर नजर प्रदेश सरकार की एक महिला मंत्री ने अपने विभाग की सचिव को हटाने की मांग सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रख दी है। सूत्रों के मुताबिक मंत्री चाहती हैं कि उनके विभाग में सचिव स्तर के बजाय अपर मुख्य सचिव (ACS) या प्रमुख सचिव (PS) स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए। बताया जा रहा है कि विभाग की 2005 बैच की आईएएस सचिव के साथ मंत्री के कार्यशैली को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं। हाल ही में विभाग में हुए तबादलों के दौरान भी दोनों के बीच असहमति खुलकर सामने आई थी। सूत्रों का कहना है कि मंत्री ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर सचिव को तत्काल हटाने का आग्रह किया है। अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री मंत्री की मांग स्वीकार करते हैं या वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखते हैं। खजुराहो एयरपोर्ट पर कलेक्टर की मौजूदगी से बढ़ा सियासी तापमान देश के प्रमुख उद्योगपति अनंत अंबानी के खजुराहो आगमन के दौरान छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल की एयरपोर्ट पर मौजूदगी ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने राज्यपाल और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निजी दौरे पर आए व्यक्ति को सरकारी प्रोटोकॉल उपलब्ध कराना और प्रशासनिक संसाधनों का उपयोग करना अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। हालांकि 2015 बैच के आईएएस अधिकारी पार्थ जायसवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे किसी निजी स्वागत के लिए नहीं पहुंचे थे और तस्वीरों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है।इस मामले पर जहां विपक्ष सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, वहीं कुछ लोग इसे संभावित निवेश और जिले के विकास की दृष्टि से उचित कदम भी मान रहे हैं। आईएएस आलोक सिंह के नाम जुड़ा नया प्रशासनिक रिकॉर्ड हालिया प्रशासनिक फेरबदल में 2008 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक सिंह को महानिरीक्षक पंजीयन के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कई मायनों में खास मानी जा रही है।बताया जाता है कि पिछले तीन से साढ़े तीन दशकों से इस महत्वपूर्ण पद पर मुख्यतः सीधी भर्ती वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की ही नियुक्ति होती रही है। आलोक सिंह संभवतः पहले प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं जिन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। जानकार बताते हैं कि इससे पहले केवल स्वर्गीय मोती सिंह इस परंपरा से अलग अपवाद रहे थे और वे इस पद पर दो बार नियुक्त होने वाले दुर्लभ अधिकारियों में शामिल थे। ऐसे में आलोक सिंह की नियुक्ति प्रशासनिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री और अशोक वर्णवाल की मुलाकात के कई मायने हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के बीच हुई वन-टू-वन मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई है।हालांकि मुलाकात में क्या बातचीत हुई इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि आगामी प्रशासनिक फेरबदल और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा हुई हो सकती है। 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। माना जा रहा है कि सेवानिवृत्ति से पहले या उसके आसपास उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पावर कॉरिडोर की चर्चा प्रदेश की नौकरशाही और राजनीति में इन चार घटनाओं ने नए संकेत दिए हैं। मंत्री-सचिव विवाद, वीआईपी प्रोटोकॉल पर उठे सवाल, प्रमोटी आईएएस की ऐतिहासिक नियुक्ति और मुख्यमंत्री की वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात—इन सभी घटनाओं पर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी रहेगी।

200 करोड़ की शंकराचार्य प्रतिमा के निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मुख्य पिलर में आया झुकाव, लोकायुक्त ने शुरू की जांच

Safety standards ignored in the construction of the ₹200-crore Shankaracharya statue; main pillar develops a tilt; Lokayukta initiates an investigation. भोपाल। ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की नव-निर्मित 108 फीट ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ वननेस) के एक पिलर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर (ईटीएबीएस) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल प्रतिमा के मुख्य आंतरिक स्टील पिलर पर तय सीमा से करीब 24 प्रतिशत अधिक दबाव पड़ रहा है। मानकों के मुताबिक सुरक्षा का स्ट्रेस रेशियो 0.85 होना चाहिए, जो बढ़कर 1.244 तक पहुंच गया है। इस दबाव के कारण मुख्य पिलर में हल्का झुकाव भी देखा गया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई2,300 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में सुरक्षा और तकनीकी खामियों की शिकायत अब सीबीआई, लोकायुक्त और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंच चुकी है। यह शिकायत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी ने दर्ज कराई है। बनर्जी का आरोप है कि वे पिछले 6 महीनों से मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और निर्माण कंपनी एलएंडटी को लिखित में इस खतरे की चेतावनी दे रहे थे, लेकिन कोई सुधार नहीं किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर गड़बड़ी को उजागर करने के बाद फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी को उनके पदों से हटा दिया गया है। बता दें कि 200 करोड़ की इस प्रतिमा को 140 से 170 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं को झेलने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन जांच के अनुसार यह 120 किमी/घंटा की हवा भी नहीं झेल सकती। फिलहाल इंदौर लोकायुक्त कार्यालय ने इस मामले की जांच शुरू करते हुए शिकायतकर्ता से सभी जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। अधिकारियों का पक्षइस मामले पर आदि शंकराचार्य न्यास के सीईओ डॉक्टर मनीष पांडेय का कहना है कि एकात्म धाम प्रोजेक्ट का संचालन पर्यटन विभाग द्वारा हो रहा है, इसलिए इस विषय पर पर्यटन निगम ही बात कर सकता है। वहीं, मप्र पर्यटन विकास निगम के एमडी दिलीप यादव ने निर्माण में किसी भी तरह की कमी से साफ इनकार किया है। उनका दावा है कि विशेषज्ञों की देखरेख में काम हुआ है और गुणवत्ता में किसी लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

‘ये धर्म को बेचकर कमाई करते हैं, फिर उससे विधायक खरीदते हैं…’, राम मंदिर चंदा चोरी पर बोले दिग्विजय सिंह

“They make money by selling religion, then use it to buy MLAs…” — Digvijaya Singh on the Ram Mandir donation theft. Digvijaya Singh News: महिला कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे में चोरी का आरोप लगाया. BJP-RSS पर निशाना साधते हुए 5-6 जुलाई को अयोध्या में केस दर्ज कराने का ऐलान किया. महिला कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन और चंदे के मुद्दे पर भाजपा व आरएसएस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “हनुमान गढ़ी और गोरखनाथ मठ ने राम मंदिर की लड़ाई लड़ी. न तब वहां RSS थीं और ना तब वहां बीजेपी पार्टी थी. भगवान राम से प्रेम इन्हें तब उमड़ा जब इनके केवल 2 सांसद बचे. उन्होंने आगे कहा कि ये लोग धर्म को बेचकर अपनी कमाई करते हैं और उसे कमाई से वोट खरीदते हैं, विधायक खरीदते हैं, सांसद खरीदते हैं. हमारे ही चंदा की चोरी कर यह खरीद रहे हैं. मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचाया जा रहा है. मैंने जो चंदा दिया है, जिसकी इन्होंने चोरी की है, इसके लिए अपने वकील के माध्यम से 5-6 जुलाई को अयोध्या जाकर केस दर्ज कराऊंगा.”

MP RajyaSabha Elections 2026: भाजपा प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने भरा नामांकन, सीएम मोहन यादव रहे साथ

MP Rajya Sabha Elections 2026: BJP candidates Tarun Chugh and Rajneesh Aggarwal filed their nominations, with CM Mohan Yadav accompanying them. भोपाल ! मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों के नामांकन पत्र प्रस्तुत कराए। इससे पहले भाजपा कार्यालय में बैठक और मंदिर में पूजा-अर्चना हुई।मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा में दोनों का नामांकन पत्र दाखिल कराया।दोनों ने भाजपा नेताओं के साथ शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन से पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और दोनों प्रत्याशी भाजपा कार्यालय स्थित शिव एवं हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी नेता विधानसभा के लिए रवाना हुए। नामांकन प्रक्रिया के दौरान विधानसभा परिसर में पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे।हमारे प्रत्याशियों ने भरा नामांकनसीएम मोहन यादव ने कहा कि आज हमारे दोनों ही राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन भर दिया है। इस दौरान भाजपा की सभी दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस समय हम सभी हर्ष और उल्लास के साथ हैं। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। हमारा राज्य संगठन की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में आता है। हम सबने मिलकर उनका नॉमिनेशन फॉर्म जमा करवाया है। हम सभी वर्गों की सेवा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पार्टी के घोषित उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा ने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जिन्होंने जमीन पर रहकर संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है।

एमपी में शराब दुकानों पर सख्ती बढ़ी, ओवर रेटिंग और अवैध अहातों पर चलेगा विशेष अभियान

Strictness increased on liquor shops in MP, special campaign will be launched against over-rating and illegal premises. भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत शराब दुकानों और अवैध गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में आबकारी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि शराब दुकानों पर ओवर रेटिंग, तय समय के बाद बिक्री और अवैध रूप से संचालित शॉप बार जैसी गतिविधियों के खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले मदिरा ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह “ऑफ श्रेणी” घोषित किया गया है। इसके तहत दुकान परिसर या आसपास शराब सेवन की अनुमति नहीं होगी। अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद कराने के लिए विशेष दल गठित कर औचक निरीक्षण किए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब दुकानों के खुलने और बंद होने के निर्धारित समय का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें निगरानी करेंगी। वहीं उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को रोकने के लिए दुकानों पर शराब की दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही पारदर्शिता के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे, ताकि ग्राहक वास्तविक कीमत की जांच कर सकें। उन्होंने कहा कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बेचने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के पवित्र घोषित नगरों और क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

एमपी के कर्मचारियों को राहत: छठे वेतनमान वाले 40 हजार कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 5% बढ़ा, एरियर भी मिलेगा

Relief to MP employees: Dearness allowance of 40,000 employees of sixth pay scale increased by 5%, arrears will also be given. मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। छठे वेतनमान के तहत आने वाले करीब 40 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों का महंगाई भत्ता (डीए) 5 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। इस बढ़ोतरी का लाभ 1 जुलाई 2025 से मिलेगा इस फैसले से कर्मचारियों की मासिक आय में बढ़ोतरी होगी। सरकारी आदेश के अनुसार अब छठे वेतनमान वाले कर्मचारियों का डीए 252 प्रतिशत से बढ़कर 257 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी अप्रैल 2026 की सैलरी से लागू होगी। जुलाई 2025 से मिलेगा एरियरसरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बढ़ोतरी का लाभ 1 जुलाई 2025 से मिलेगा। यानी जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक का एरियर कर्मचारियों को दिया जाएगा। यह एरियर एक साथ नहीं दिया जाएगा। इसे छह बराबर किस्तों में बांटा जाएगा, जो मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में दी जाएंगी। जो कर्मचारी या अधिकारी इस अवधि में रिटायर हो चुके हैं, उन्हें पूरा एरियर एक साथ दिया जाएगा। इससे रिटायर कर्मचारियों को भी पूरा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार पहले ही सातवें वेतनमान के कर्मचारियों का डीए 3 प्रतिशत बढ़ा चुकी है, जिससे उनका महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत हो गया है। छठे और सातवें वेतनमान में वेतन संरचना अलग होने के कारण डीए का प्रतिशत भी अलग-अलग तय किया जाता है। छठे वेतनमान में बेसिक पे कम होने से डीए अधिक रखा जाता है।

एक्रोबट एक्वाटिक फेस्ट-2026 तैराकी स्पर्धा में बच्चों ने दिखाया उत्साह

Children show enthusiasm in Acrobat Aquatic Fest-2026 swimming competition भोपाल। रायसेन रोड कल्पना नगर के कोल परिसर स्थित पुरुषोत्तम गौर स्विमिंग पूल में 12 अप्रैल को एक्रोबट एक्वाटिक फेस्ट-2026 तैराकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आयोजन की शुरुआत बच्चों के रिपोर्टिंग टाइम के साथ हुई। यह आयोजन एक्रोबट स्पोर्ट्स एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी पुरुषोत्तम गौर स्विमिंग पूल द्वारा भोपाल स्विमिंग एसोसिएशन के सहयोग से किया गया है। इसमें सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए विभिन्न श्रेणियों में प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गई। प्रतियोगिता के समापन पर कोच और समिति पदाधिकारियों ने सभी विजेता प्रतिभागी बच्चों को शील्ड-मेडल ओर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर पूल संचालक संतोष कटियार, स्वीमिंग कोच आरडी झा, समाजसेवी उदित नारायण समेत बड़ी संख्या में आयोजन समिति के सदस्य, बच्चे और उनके अभिभावक गण मौजूद रहे। 25 हजार प्रतिभागियों को सिखा चुके स्वीमिंग स्वीमिंग पूल संचालक संतोष कटियार ने बताया कि इस स्वीमिंग ग्रुप को संचालित किए हुए 14 साल हो गए हैं। अभी तक लगभग 25 हजार प्रतिभागियों को स्वीमिंग सिखा चुके हैं। बच्चों को ट्रेनिंग भी देते हैं, जिससे बच्चों की ग्रोथ हो। इस स्वीमिंग को हमने नर्सरी के तौर पर तैयार किया है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों के पैरेंटस भी प्रेरित करेंगे, तो बच्चे और आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। स्वीमिंग एक ऐसी विद्या है, जिसमें सबसे ज्यादा आयोजन होते हैं और मेडल भी सबसे ज्यादा इसी खेल में हैं। स्वीमिंग प्रतियोगिताओं की सतत आवश्यकता कोच आरडी झा ने बताया कि मप्र तैराकी में पहले स्थान पर था। अभी तीसरे स्थान पर है। ऐसी प्रतियोगिताओं की सतत जरूरत है, ताकि बच्चों को उनके हुनर के लिए सुविधाजनक मंच मिल सके। संतोष कटियार ने स्वीमिंग को मंच देने के लिए फिर से कार्य शुरू कर दिया है। उनके प्रयास और योगदान के परिणाम स्वरूप आने वाला कल फिर भोपाल को खुशी देने वाला होगा। वे बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए बाहर से कोच को बुलाते हैं। 150 से 200 प्रतिभागी हुए शामिल आयोजन सचिव एवं प्रबंधक, पुरुषोत्तम गौर स्विमिंग पूल प्रबंधक एवं आयोजक सचिव बृजमान सिंह धाकड़ ने बताया कि प्रतिभागियों के लिए फ्री स्टाइल, बैंक स्ट्रोक, ब्रेस्ट स्ट्रोक, बटरफ्लाई (50 मीटर, 100 मीटर और 200 मीटर तथा 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले (आईएम) जैसी विभिन्न प्रतिस्पधार्एं आयोजित की गई, जिनमें आयु के अनुसार प्रतिभागी बच्चों ने भाग लिया। इसमें 150 से 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपना हुनर दिखाया।पूल प्रबंधक बृजमान सिंह धाकड़ ने बताया कि यह प्रतियोगिता हर वर्ष समर वोकेशन के अवसर पर अप्रैल माह में आयोजित की जाती है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के तैराकों को एक मंच प्रदान करना, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित और तैराकी खेल को बढ़ावा देना है। प्रतियोगिता की श्रेणियां सीनियर (पुरुष/महिला): जन्म वर्ष 2009 या उससे पहले। ग्रुप-1 (बालक/बालिका): 2010 से 2012 के बीच। ग्रुप-2 (बालक/बालिका): 2013 से 2014 के बीच। ग्रुप-3 (बालक/बालिका): 2015 से 2016 के बीच। ग्रुप-4 (बालक/बालिका): 2017 से 2018 के बीच। ग्रुप-5 (बालक/बालिका): 2019 या उसके बाद के शामिल रहे। वहीं मास्टर्स (पुरुष/महिला): जन्म वर्ष 2001 या उससे पहले वालों को शामिल किया गया है।

RTI खुलासा: पिछले 14 महीनों में 149 मौतें, तेंदुओं के लिए क्यों कब्रगाह बनता जा रहा MP; सामने आई यह बड़ी वजह

RTI reveals why MP is turning into a graveyard for leopards, with 149 deaths in the last 14 months भोपाल ! भारत में सबसे ज्यादा तेंदुए मध्यप्रदेश में पाए जाते हैं और इसी वजह से इसे तेंदुओं का प्राकृतिक आवास भी कहा जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आए एक चिंताजनक आंकड़े ने देश के वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि बीते 14 महीनों में राज्य में कुल 149 तेंदुओं की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक का है। खास बात यह है कि इन मौतों के पीछे की सबसे बड़ी वजह तेंदुओं का शिकार होना नहीं है, में बल्कि इन मौतों का बड़ा कारण सड़क हादसे रहे हैं। वहीं वन विभाग ने मौतों के इन आंकड़ों को सामान्य बताया है और उसका कहना है कि तेंदुओं के मामले में चार प्रतिशत की मृत्यु दर स्वीकार्य सीमा के भीतर है। 31 प्रतिशत मौतों के पीछे सड़क हादसे वजह तेंदुओं की मौत की जानकारी पाने के लिए RTI कार्यकर्ता अजय दुबे ने आवेदन लगाया था। जिसके जवाब में उन्हें बताया गया कि जनवरी 2025 से इस साल मार्च तक के 14 महीनों में मध्य प्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हुई। इनमें से 31 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं। डेटा के अनुसार इनमें से भी 19 मौतें हाईवे पर हुईं। वहीं बुढ़ापा और बीमारी जैसे प्राकृतिक कारणों के कारण 24 प्रतिशत मौतें हुईं, जबकि 21 प्रतिशत मौतें वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष के कारण हुईं। 8 तेंदुओं की जान करंट लगने की वजह से गई आंकड़ों के अनुसार शिकार और बदले की भावना के कारण लगभग 14 प्रतिशत तेंदुओं की जानें गई। 8 लेपर्ड की मौत बिजली का झटका लगने से हुई, फिर चाहे वह जानबूझकर लगाया गया हो या गलती से लगा हो, जबकि दो जानवर फंदों में फंसकर मारे गए। इसके अलावा लगभग नो प्रतिशत मामलों में, मौत का कारण पता नहीं चल पाया। तेंदुओं की लिए कब्रिस्तान बन रहा MP- RTI कार्यकर्ता इस RTI को लगाने वाले एक्टिविस्ट अजय दुबे मौतों के इन आंकड़ों को भयावह बता रहे हैं, उनका कहना है कि ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई है। उन्होंने कहा, ‘टाइगर स्टेट (MP) तेंदुओं के लिए एक कब्रिस्तान बन गया है। NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के प्रोटोकॉल को लागू करने में सिस्टम की नाकामी और सुरक्षित रास्तों की कमी उन्हें खत्म कर रही है।’ वन विभाग ने कहा- 4% का आंकड़ा सामान्य उधर वन विभाग इन मौतों को सामान्य बता रहा है। इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि राज्य में तेंदुओं की मृत्यु दर को कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘तेंदुए आकार में छोटे होते हैं और आसानी से दिखाई नहीं देते, इसलिए वे पूरे राज्य में फैले हुए हैं। वे अक्सर इंसानी बस्तियों के करीब पाए जाते हैं।’ आगे उन्होंने कहा कि ‘मौतों के आंकड़े को कम करने के लिए हम योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं ओर नई सड़कों पर जानवरों के लिए सुरक्षित निकलने के रास्ते बनाने (एनिमल पैसेज), चेतावनी के संकेतक लगाने और नियमित गश्त करने जैसे उपाय लागू कर रहे हैं।’ साथ ही उन्होंने आगे कहा, ‘हम सड़कों के पास पानी के स्रोत न बनाने की भी सलाह दे रहे हैं, क्योंकि जानवर अक्सर पानी की तलाश में सड़कों की ओर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार बन जाते हैं।’ बिग कैट फैमिली में 10 से 20 प्रतिशत मौतें सामान्य एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ‘करीब 4,000 तेंदुओं में से 149 की मौत होना केवल 4 प्रतिशत का नुकसान है, जबकि बिल्ली परिवार में सालाना 10 से 20 प्रतिशत तक की मृत्यु दर को स्वीकार्य माना जाता है।’ बता दें कि फरवरी 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार देश में तेंदुओं की सबसे ज्यादा संख्या मध्य प्रदेश में है। उस वक्त मध्य प्रदेश में 3,907 तेंदुए थे। इससे पहले साल 2018 में राज्य में 3,421 तेंदुए थे। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का नंबर आता है।

मध्य प्रदेश में ‘नारी शक्ति वंदन’ उत्सव आज से, महिला आरक्षण कानून की दी जाएगी जानकारी

‘Nari Shakti Vandan’ festival in Madhya Pradesh from today, information will be given about women’s reservation law राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 10 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक पूरे प्रदेश में “नारी शक्ति वंदन” पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का सम्मान करना है। इसे जन-उत्सव के रूप में मनाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान की शुरुआत भोपाल के रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में राज्य स्तरीय सम्मेलन से होगी। इसके अलावा सभी संभाग मुख्यालयों और छिंदवाड़ा, खरगोन व मंदसौर में भी बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों और सफल महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा और उनके अनुभव साझा किए जाएंगे। पदयात्रा आयोजित होगीमहिला एवं बाल विकास विभाग हर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र में “नारी शक्ति पदयात्रा” आयोजित करेगा। इसमें समाज की महिलाएं शामिल होंगी। युवाओं को जोड़ने के लिए “नारी शक्ति वंदन दीवार” बनाई जाएगी, जहां वे पेंटिंग और संदेशों के जरिए अपने विचार व्यक्त करेंगे। अंबेडकर जयंती पर विशेष ग्राम सभा14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित होंगी। इनमें अधिनियम पर चर्चा होगी और बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी जाएगी। साथ ही पंचायतों, नगरीय निकायों और शिक्षण संस्थानों में गोष्ठियां और सेमिनार होंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अभियानजनसंपर्क विभाग इस अभियान का प्रचार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करेगा। प्रेरक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। महिला स्व-सहायता समूह, ‘लखपति दीदी’ और ‘लाड़ली बहना’ योजना की महिलाओं को अभियान में जोड़ा जाएगा। शिक्षा संस्थानों में कार्यक्रमस्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, ताकि युवा पीढ़ी महिला सशक्तिकरण को बेहतर तरीके से समझ सके। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए और इस पखवाड़े को जन-उत्सव के रूप में मनाया जाए।

MP के शिक्षकों को बड़ी सौगात, 35 साल की सेवा पर मिलेगा चौथा वेतनमान, 3 से 5 हजार रुपये बढ़ेगी मासिक सैलरी

MP teachers get a big gift: Fourth pay scale after 35 years of service, monthly salary will increase by 3,000 to 5,000 rupees. भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने लंबे समय से सेवा दे रहे शासकीय शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को अब चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलेगा। यह सुविधा एक जुलाई 2023 या उसके बाद पात्रता पूरी करने वाले शिक्षकों पर लागू होगी। 15 हजार शिक्षकों को अभी से लाभसरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब सवा लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे, जिनमें से लगभग 15 हजार शिक्षकों को इसी वित्तीय वर्ष में इसका फायदा मिलने लगेगा। इस वेतनमान के लागू होने से पात्र शिक्षकों को हर महीने तीन से पांच हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि मिलेगी। इस योजना के लिए कैबिनेट द्वारा 322.34 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके दायरे में सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, खेल, संगीत-नृत्य, विज्ञान, आईटी और माध्यमिक शिक्षक सहित विभिन्न शैक्षणिक पद शामिल किए गए हैं। शिक्षक दिवस पर की थी घोषणागौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी। अब इसे अमल में लाते हुए हजारों शिक्षकों को आर्थिक लाभ देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर के अनुसार, एक जुलाई 2023 तक 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक (भले ही वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं) भी इस लाभ के पात्र होंगे। पहले यह सुविधा केवल सीधे भर्ती हुए लेक्चरर, सहायक संचालक और प्राचार्यों को मिल रही थी, अब अन्य शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा।

आधी रात खुला विधानसभा सचिवालय: जीतू पटवारी व पीसी शर्मा ने दतिया विधायक के मुद्दे पर भाजपा को घेरा, कही ये बात

Assembly Secretariat opened at midnight: Jitu Patwari and PC Sharma surrounded the BJP on the issue of Datia MLA, said this भोपाल ! विधानसभा सचिवालय को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया के लिए देर रात विधानसभा सचिवालय खोला गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई भाजपा के इशारे पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। पीसी शर्मा के साथ पहुंचे विधानसभामामले की जानकारी मिलते ही जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के साथ विधानसभा पहुंचे और इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि रात में सचिवालय खोलना कई सवाल खड़े करता है। पटवारी ने कहा कि विधानसभा सचिवालय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, लेकिन जिस तरह से रात में काम किया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक गुंडागर्दी और सत्ता का दुरुपयोग बताया है। राजेंद्र भारती की सदस्यता पर घमासानकांग्रेस का दावा है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। पार्टी ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर वह पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी। फिलहाल इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। क्या है भारती का मामला? यहां जानेंयह पूरा मामला वर्ष 1998 का है, जब श्याम सुंदर संस्थान की ओर से बैंक में 10 लाख रुपये की एफडी कराई गई थी। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेरफेर की और एफडी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी।बताया जाता है कि वर्ष 1999 से 2011 के बीच करीब 13.5 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर हर साल लगभग 1.35 लाख रुपये निकाले जाते रहे। साल 2011 में जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। जांच के दौरान एफडी पर ऑडिट आपत्ति भी दर्ज की गई। इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिल सकी। अंततः वर्ष 2015 में इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया और अब अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी है।

सफलता की कहानी : सास-बहू से देवरानी-जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से खिल रहा ग्रामीण पर्यटन

Success Story: From Mother-in-law and Daughter-in-law to Sister-in-law and Sister-in-law: Rural Tourism is Flourishing Through Relationship Sharing सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को अक्सर तकरार और मतभेद के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदलते हुए एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। जिले के गॉवों की महिलाएं आपसी सहयोग और विश्वास के साथ होम-स्टे चला रही हैं और रिश्तों की मजबूती को तरक्की की नई राह में बदल रही हैं। पर्यटन ग्राम धूसावानी की श्रीमती मनेशी धुर्वे और श्रीमती अलका धुर्वे रिश्ते में सास-बहू हैं, लेकिन जब उनके होम-स्टे में पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरे उत्साह से मेहमाननवाजी में जुट जाती हैं। इसी तरह सावरवानी में श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले में उभरती एक नई सामाजिक और आर्थिक तस्वीर है, जहां रिश्तों की साझेदारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। रिश्तों की साझेदारी से मिली पहचान छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में चल रहे होम-स्टे केवल आय का साधन नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन चुके हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, भोजन तैयार करती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इन रिश्तों की सामूहिक ताकत ने यह साबित किया है कि जब परिवार की महिलाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो घर ही नहीं बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है। जिले में 50 से अधिक होम-स्टे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम-स्टे संचालित करने वाले जिलों में शामिल छिंदवाड़ा में इस समय 50 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं। खास बात यह है कि इन सभी होम-स्टे का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की अधिकांश जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्वाद और संस्कृति से जुड़ते पर्यटक गांव की महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे लोकनृत्य और लोक गायन से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी पर्यटकों को परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को आय का सम्मानजनक साधन भी प्राप्त हो रहा है। महिलाओं के हाथों में होम-स्टे की कमान गांव की महिलाएं स्वयं होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। पर्यटकों के स्वागत से लेकर भोजन व्यवस्था, आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबंधन तक की पूरी जिम्मेदारी वे ही निभाती हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सास-बहू, देवरानी-जेठानी जैसे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध ही नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास के मजबूत आधार भी बन सकते हैं। यही साझेदारी आज छिंदवाड़ा के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बन रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह पहल गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।

आदिवासी विधायक को हटाना पूरे समाज का अपमान” — जीतू पटवारी का भाजपा पर बड़ा हमला

“Removing the tribal MLA is an insult to the entire society” – Jitu Patwari’s big attack on the BJP भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर आदिवासी मुद्दा गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर दलित और आदिवासी विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। पटवारी ने कहा कि आज मध्यप्रदेश में दलित और आदिवासियों के खिलाफ पूरी भाजपा एकजुट होकर खड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता द्वारा चुने गए एक आदिवासी विधायक को पद से हटाने की कार्रवाई केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार सत्ता के अहंकार में आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी और आदिवासी समाज के सम्मान की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। पटवारी के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।

कर्ज के पहाड़ तले मध्यप्रदेश! मोहन सरकार फिर ले रही 5800 करोड़ का नया कर्ज, कांग्रेस ने घेरा”

Madhya Pradesh under a mountain of debt! The Mohan government is taking on another 5,800 crore rupees in new loans, and Congress is attacking it. भोपाल। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर बड़ा कर्ज लेने जा रही है। प्रदेश सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की तैयारी में है। इससे पहले होली से ठीक पहले सरकार 6,300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च (मंगलवार) को सरकार तीन अलग-अलग किस्तों में यह कर्ज लेगी। इसमें 1,900 करोड़, 1,700 करोड़ और 2,200 करोड़ रुपये शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यह राशि प्रदेश में विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। खासतौर पर इस धनराशि का उपयोग पूंजीगत कार्यों और अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगर हाल ही में लिए गए कर्ज को भी जोड़ लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश द्वारा लिए गए कुल कर्ज की राशि लगभग 85,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर करीब 5.66 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने का अनुमान है। इधर इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार कर्ज लेकर मध्यप्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल रही है और आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि लिया जा रहा कर्ज राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के दायरे में है और इसका उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कर्ज का यह मुद्दा सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है, जहां विपक्ष सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाएगा।

कर्ज में डूबा किसान: मप्र के हर किसान परिवार पर 74,420 रुपए का कर्ज उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल

Farmers in debt: Every farmer family in Madhya Pradesh has a debt of Rs 74,420. Umang Singhar questions government भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे कर्ज और किसानों की घटती आय को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। Umang Singhar questions government ने कहा कि संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 का कर्ज है। उन्होंने कहा कि देश के कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आते हैं, फिर भी आज एमपी का किसान देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में शामिल है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि किसानों का कर्ज़ घटाने के लिए क्या ठोस योजना है, किसानों को फसल का सही मूल्य कब मिलेगा और किसान आत्मनिर्भर कब बनेगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं हैं बल्कि देश के अन्नदाता हैं, जिनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए। उमंग सिंघार ने कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेराUmang Singhar questions government मध्य प्रदेश के किसान परिवारों पर बढ़ते कर्ज़ को लेकर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 का कर्ज़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के तमाम वादों और दावों के बावजूद किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई बल्कि उनपर कर्ज बढ़ गया है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या यही ह्लडबल इंजन सरकारह्व की किसान नीति है। उन्होंने पूछा कि जब देश के कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आते हैं, तब भी राज्य के किसान देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में क्यों शामिल हैं। मुख्यमंत्री से किए सवालनेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए हैं कि उनके पास कर्ज घटाने की क्या ठोस योजना है। उन्होंने पूछा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम कब मिलेगा और आत्मनिर्भर किसान कब बनेगा। उमंग सिंघार ने कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि देश का अन्नदाता है और लेकिन सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है। बता दें कि एमपी सरकार ने प्रदेश के बजट सत्र से ठीक पहले 5,000 करोड़ का नया कर्ज लिया है, जो पिछले एक हफ्ते में दूसरी बार लिया गया बड़ा कर्ज है। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल 36 बार कर्ज लिया जा चुका है, और इसकी कुल राशि 67,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

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