कूनो में बनेगा नया चीता जेनेटिक पूल, बोत्सवाना की मादा CCB-3 को ग्वालियर के जंगल से लाकर वापस छोड़ा; बढ़ेगी प्रजनन की संभावना
New cheetah genetic pool to be created in Kuno; female cheetah CCB-3 from Botswana brought back from Gwalior forests and released; breeding prospects to improve. ग्वालियर। श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता परियोजना के अगले चरण को गति देने के लिए नया जेनेटिक पूल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। परियोजना के तहत बोत्सवाना से लाए गए चीतों के माध्यम से आनुवंशिक विविधता बढ़ाने और स्वस्थ नई पीढ़ी तैयार करने की दीर्घकालिक योजना पर काम किया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत बोत्सवाना मूल की मादा चीता सीसीबी-3 (CCB-3) को दोबारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया है। करीब 20 दिनों तक ग्वालियर वन मंडल के जंगलों में विचरण करने के बाद मादा चीता को सुरक्षित वापस लाकर ऐसे क्षेत्र में छोड़ा गया है, जहां उसके अन्य नर चीतों के संपर्क में आने और प्राकृतिक प्रजनन की संभावना अधिक मानी जा रही है। आनुवंशिक विविधता बढ़ाना मुख्य उद्देश्यवन अधिकारियों के अनुसार, चीता परियोजना का प्रमुख लक्ष्य केवल चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि मजबूत और विविध आनुवंशिक आधार वाली नई पीढ़ी विकसित करना भी है। इसी उद्देश्य से बोत्सवाना से लाए गए चीतों को परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नए वातावरण में इन चीतों को पूरी तरह स्थापित करना और उन्हें सफल प्रजनन कार्यक्रम से जोड़ना परियोजना की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी वजह से उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और गतिविधियों पर लगातार विशेषज्ञों की निगरानी रखी जा रही है। रंग और बनावट में दिखा अंतरवन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बोत्सवाना से लाए गए चीतों का रंग पहले दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों की तुलना में अधिक गहरा पीला है। इसके अलावा उनके शरीर की बनावट और व्यवहार में भी कुछ प्राकृतिक अंतर देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह अंतर पूरी तरह सामान्य है और उनके मूल आवास तथा आनुवंशिक पृष्ठभूमि का परिणाम है।