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10 फरवरी का राशिफल: इन राशियों के लिए ग्रहों की चाल से आ सकते हैं बड़े बदलाव

मेष 10 फरवरी के दिन संतुलन तलाशने और बदलावों के लिए तैयार रहने का दिन है। लव के मामले में पॉजिटिव रहें, अपने करियर के लक्ष्यों पर ध्यान दें, पैसों को स्मार्ट तरीके से मैनेज करें और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। वृषभ 10 फरवरी का दिन नई शुरुआत के बारे में है। आपको प्यार और करियर से लेकर सेहत तक रोमांचक अवसर मिल सकते हैं। बदलावों के लिए तैयार रहें। खुद पर भरोसा रखें। मिथुन 10 फरवरी के दिन आपको जीवन के हर क्षेत्र में विकास और सुधार के अवसर मिलेंगे। तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। अपनी डाइट पर ध्यान दें। रिलेशनशिप वालों को आज एक दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए। कर्क 10 फरवरी के दिन जीवन में बैलेंस बनाने की सलाह दी जाती है। चाहे वह रिलेशन हो, करियर हो, आर्थिक मामले हो या स्वास्थ्य हो, खुद को पॉजिटिव बनाए रखें। आज की चुनौतियों और अवसरों को पार करने में आपकी स्किल्स मददगार साबित होंगी। सिंह 10 फरवरी के दिन हर काम को आसानी से निपटा लेने का आपका स्वभाव आपकी सबसे बड़ी संपत्ति होगी। सीखने और एक साथ आगे बढ़ने के अवसरों को अपनाएं। खर्चों को कंट्रोल में रखें। कन्या 10 फरवरी के दिन ऐसी एक्टिविटी में शामिल हों, जो तनाव से राहत दिला सके। आप सावधानी के साथ मौकों को एक्सप्लोर करें। नया कनेक्शन भी बन सकता है। कॉन्फिडेंस के साथ कदम उठाएं। तुला 10 फरवरी के दिन नई फीलिंग्स एक्सप्लोर करने से न हिचकिचाएं। आपकी स्किल्स ही आपकी क्षमता है, जो आपको दूसरों से अलग बनाएगी। कभी-कभी पैसे कमाने के नए रास्ते भी आजमाने चाहिए। सेहत पर गौर करें। कन्या 10 फरवरी के दिन ऐसी एक्टिविटी में शामिल हों, जो तनाव से राहत दिला सके। आप सावधानी के साथ मौकों को एक्सप्लोर करें। नया कनेक्शन भी बन सकता है। कॉन्फिडेंस के साथ कदम उठाएं। वृश्चिक 10 फरवरी के दिन आपको नए अवसर मिल सकते हैं, जो आपको उन्नति की ओर ले जा सकते हैं। अपने बजट और बचत प्लान पर नजर जरूर रखें। बेहतर रिजल्ट के लिए अपनी योजनाओं में बदलाव करने के लिए तैयार रहें। धनु 10 फरवरी के दिन सहकर्मियों के फीडबैक पर भी ध्यान दें। दिन का लाभ उठाएं। इसे अपने रिश्ते को मजबूत बनाने पर फोकस करें। आप शांति या आराम में रहना पसंद करेंगे। खुद की देखभाल की जरूरत को भी समझेंगे। मकर 10 फरवरी के दिन टीमवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आपको मान सम्मान और पहचान मिल सकती है। पुरानी यादों को भुलाकर वर्तमान को अपनाना बेहद जरूरी है। कुंभ 10 फरवरी के दिन आपको अपनी कमाई बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। आज अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। अगर आप सिचूएशन को पलटने पर विचार कर रहे हैं, तो आगे बढ़ें। मीन 10 फरवरी 2026 का दिन करियर के मामले में आज शुभ है। आज का दिन बदलावों को अपनाने और संतुलन खोजने के बारे है। नए अवसरों के लिए खुद को पॉजिटिव रखें। खुद को हेल्दी रखने के लिए जंक फूड्स का ज्यादा सेवन करने से बचें।

सत्ता बनाम सुधारवादी: इस्तीफे की मांग पड़ी भारी, नोबेल विजेता नरगिस सहित कई हस्तियों की गिरफ्तारी

ईरान   ईरानी सुरक्षा बलों ने देश में जारी सुधारवादी आंदोलन से जुड़ी प्रमुख हस्तियों को हिरासत में लेने के लिए अभियान शुरू कर किया। सोमवार को प्रसारित खबरों में यह जानकारी सामने आई है। खबरों के मुताबिक, सुरक्षा बलों के इस कदम से दमनकारी कार्रवाई और भी तेज हो गई है। इससे पहले अधिकारियों ने हिंसा के जरिए देशव्यापी प्रदर्शनों को दबा दिया था। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए थे और हजारों अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया था। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को गिरफ्तार कर सात साल से अधिक जेल की एक अन्य सजा सुनाई गई है। यह कदम ईरान सरकार के अशांति के खिलाफ बगावत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को चुप कराने का प्रयास दिखाई देता है क्योंकि ईरान, अमेरिका के साथ नई परमाणु वार्ता का सामना कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो वह देश पर हमला कर सकते हैं। मीडिया में प्रसारित खबरों में ईरान की धर्मतांत्रिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे सुधारवादी आंदोलन के कार्यकर्ताओं के हवाले से बताया गया कि उनके कम से कम चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई सुधारवादी गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाले सुधारवादी मोर्चे के प्रमुख अजर मंसूरी और पूर्व राजनयिक मोहसेन अमीनजादेह शामिल हैं।  इब्राहिम असगरजादेह को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर धावा बोलने वाले विद्यार्थियों का नेतृत्व किया था। इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां संभवतः जनवरी में दिए गए एक सुधारवादी बयान से जुड़ी हैं, जिसमें ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से इस्तीफा देने और देश की देखरेख के लिए एक अंतरिम शासी परिषद नियुक्त करने का आह्वान किया गया था।  

ब्रिटेन को मिल सकती है पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री, शबाना महमूद का PoK से क्या है रिश्ता?

लंदन ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की सरकार गिर सकती है। इस बीच युनाइटेड किंगडम में चर्चाएं तेज हैं कि देश को पहली मुस्लिम महिला पीएम मिल सकती है। इसके लिए शबाना महमूद के नाम की चर्चा जोरों पर है। फिलहाल वह ब्रिटिश सरकार में होम मिनिस्टर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें लेबर पार्टी में सबसे बड़ी नेता के तौर पर देखा जा रहा है, जो पीएम के पद तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थितियां तब बन रही हैं, जब दुनिया भर की सरकारों को एपस्टीन फाइल्स वाले विवाद ने हिलाकर रख दिया है। शबाना महमूद को कीर स्टार्मर के करीबी लोगों में शुमार किया जाता है। 45 साल की शबाना पेशे से वकील हैं और एक युवा नेता हैं।   लेबर पार्टी में उनकी पहचान एक कुशल वक्ता के तौर पर रही है। उनके परिवार का ताल्लुक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर कस्बे से रहा है। उनका जन्म ब्रिटेन के ही बर्मिंगम में हुआ था। उनकी मां का नाम जुबैदा है और पिता का नाम महमूद अहमद है। 2025 में होम मिनिस्टर के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के बाद से उनके आगे सबसे बड़ा टास्क ब्रिटेन की सीमा सुरक्षा का रहा है। ऑक्सफोर्ड के लिंकन कॉलेज से लॉ की डिग्री हासिल करने वाली शबाना महमूद को 2010 में पहली बार सांसद बनने का मौका मिला था। वह उन चंद मुस्लिम महिलाओं में से हैं, जो ब्रिटेन में सांसद बनी हैं। इनमें रौशनआरा अली और यासमीन कुरैशी के नाम भी शामिल हैं। शबाना महमूद ने लेबर पार्टी से ऐसे लोगों को भी जोड़ा है, जो बीते कुछ सालों में उससे छिटक गए थे। इसकी वजह यह है कि लेबर पार्टी ने गाजा में इजरायली हमलों का पक्ष लिया था, जबकि शबाना महमूद खुलकर इजरायल का विरोध करती रही हैं। ऐसे में एक तबका है, जो शबाना महमूद को पसंद करता है और उनकी राय के चलते वापस लेबर पार्टी से जुड़ा है। दरअसल एपस्टीन फाइल्स वाले मामले में कीर स्टार्मर को लेकर भी कयास लग रहे हैं और कहा जा रहा है कि उनकी कुर्सी ही खतरे में है। ऐसी स्थिति में शबाना महमूद को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाने लगा है। फिलिस्तीन की समर्थक हैं शबाना महमूद, पर एक और बात दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ शबाना फिलिस्तीन की समर्थक हैं तो वहीं ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सख्त नियम बनाने की भी पैरोकार हैं। कीर स्टार्मर की सरकार ने बीते दिनों पीटर मैंडलसन को वॉशिंगटन में यूके के राजदूत के तौर पर नियुक्त किया था। इसे लेकर भी विवाद की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मेंडलसन का भी एपस्टीन से कनेक्शन जोड़ा जा रहा है। इसी के चलते विवाद गहरा गया है।

औद्योगिक क्षेत्र बना प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

लखनऊ.  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार उत्तर प्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र बीते वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में विभिन्न औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत लगभग ₹4,000 करोड़ की इंसेंटिव राशि का भुगतान किया गया, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। औद्योगिक गलियारों, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और आधुनिक अवसंरचना परियोजनाओं ने प्रदेश को उद्योगों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया है। दोगुने से ज्यादा बढ़ी कारखानों की संख्या आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि कारखाना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत पंजीकृत कारखानों की संख्या में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश में 14,169 कारखाने पंजीकृत थे, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के नवंबर माह तक यह संख्या बढ़कर 30,695 तक पहुंच गई है। इसे प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा संकेत माना गया है। इसके साथ ही वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण की नवीनतम रिपोर्ट में राज्य के उद्योगों के सकल मूल्य वर्धन में गत वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश के प्रमुख राज्यों में प्रथम स्थान पर है और अखिल भारतीय औसत वृद्धि दर (11.9 प्रतिशत) से दोगुनी से भी अधिक है। निर्यात में भी दोगुने से अधिक वृद्धि निर्यात के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश से कुल ₹0.84 लाख करोड़ का निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2024–25 में यह दोगुने से भी अधिक बढ़कर ₹1.86 लाख करोड़ तक पहुंच गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर माह तक ₹1.31 लाख करोड़ का निर्यात किया जा चुका है। यह वृद्धि प्रदेश की विनिर्माण क्षमता, नीति आधारित विकास और वैश्विक बाजारों में उत्तर प्रदेश की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है। भारत सरकार द्वारा जनवरी 2026 में जारी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024 में उत्तर प्रदेश ने चौथा स्थान प्राप्त किया है, जबकि वर्ष 2022 में प्रदेश सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश इस सूचकांक में प्रथम स्थान पर रहा, जिसे निर्यात अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स सुधार और नीतिगत मजबूती का परिणाम माना गया है।  निवेश आकर्षण में उत्तर प्रदेश अग्रणी उत्तर प्रदेश निवेश आकर्षित करने में भी अग्रणी राज्य है। हाल ही में दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में उत्तर प्रदेश ने ₹2.94 लाख करोड़ से अधिक के निवेश समझौते किए, जिनमें एआई रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, वेस्ट-टू-एनर्जी और रक्षा निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। भारत सरकार द्वारा जारी स्टेट स्टार्ट अप इकोसिस्टम रैंकिंग के 5वें संस्करण में उत्तर प्रदेश टॉप परफॉर्मर कैटेगरी ‘ए-1’  में शामिल है।  स्थानीय उद्योगों को मिला बढ़ावा वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत स्थानीय उद्योगों को वैश्विक पहचान दिलाते हुए वर्ष 2018–19 से दिसंबर 2025 तक कुल ₹890.44 करोड़ की मार्जिन मनी वितरित की गई, जिससे 3.22 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए। सितंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट में आयोजित तीसरे इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगभग 70 देशों के बायर्स की भागीदारी ने प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद को वैश्विक मंच प्रदान किया। उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेस मॉडल की ओर आर्थिक समीक्षा के अनुसार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेस मॉडल की ओर अग्रसर है। कंप्लायंस रिडक्शन में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। डिरेगुलेशन, निवेश मित्र के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, और भूमि से श्रम तक किए गए सुधारों ने पारदर्शी, तेज और निवेश-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया है।

नफरत भरे बयान पर बवाल: ओवैसी ने बताया ‘नरसंहार की सोच’, शिकायत दर्ज—हिमंता सरमा ने क्या कहा?

हैदराबाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ एक कथित सोशल मीडिया वीडियो को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ओवैसी ने इस मामले में हैदराबाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। यह विवाद उस वीडियो को लेकर है, जिसे असम भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया था और बाद में हटा लिया। इस वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री सरमा को राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया है। वीडियो के दृश्य में दो लोग दिखाई देते हैं। उनमें से एक ने टोपी पहनी हुई थी और दूसरे ने दाढ़ी रखी थी। इसके कैप्शन में “प्वाइंट-ब्लैंक शॉट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। नफरत भरी भाषा अब सामान्य होती जा रही: ओवैसी ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दुर्भाग्य से, नरसंहार की मानसिकता वाली नफरत भरी भाषा अब सामान्य होती जा रही है।” ओवैसी ने अपनी शिकायत में सरमा पर ‘मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करने’, दोनों धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और ‘राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप लगाने’ की बात कही है। AIMIM प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, सार्वजनिक मंचों और भाषणों के जरिये मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान देते रहे हैं। ओवैसी की सख्त कार्रवाई की मांग ओवैसी के अनुसार, हाल के महीनों में यह बयानबाजी और भी उग्र हो गई है, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को गंभीर खतरा पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को पोस्ट किया गया यह वीडियो भले ही एक दिन बाद हटा लिया गया हो, लेकिन अब भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मुस्लिम समुदाय का स्पष्ट संकेत देने वाले किरदारों को निशाना बनाए जाने का चित्रण किया गया है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। ओवैसी ने मांग की कि इस मामले में कानून के तहत सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाने वाले ऐसे कृत्यों पर रोक लगाई जा सके। क्या बोले CM हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि अहर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है तो पुलिस गिरफ्तार करे। हालांकि, उन्होंने इस तरह के किसी वीडियो के बारे में जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बोलते रहेंगे।

हरित ऊर्जा में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, सौर व जैव ऊर्जा से बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भर राज्य

लखनऊ. उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राज्य स्वच्छ, हरित और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से पूरा किया जा सकेगा। 22 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा का रोडमैप आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि प्रस्तावित 22,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन में 6,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर संयंत्रों से, 14,000 मेगावाट यूटिलिटी स्केल एवं सोलर पार्कों से तथा 2,000 मेगावाट पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। नीति के तहत 13.50 लाख घरों को रूफटॉप सोलर प्लांट से आच्छादित कर राज्य अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी। अयोध्या मॉडल सोलर सिटी, 16 नगर निगम होंगे सौर नगर प्रदेश सरकार ने अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही 16 नगर निगमों एवं नोएडा को सोलर सिटी बनाया जाएगा। बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने, बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में ट्रांसमिशन सहायता, सार्वजनिक व निजी भूमि पर रियायती लीज तथा 30,000 युवाओं के कौशल विकास को भी इस नीति का हिस्सा बनाया गया है। नेट-मीटरिंग व्यवस्था के माध्यम से ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप परियोजनाओं को केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान से प्रोत्साहित किया जा रहा है। सौर ऊर्जा क्षमता में दस गुना से अधिक वृद्धि आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में जहां मात्र 288 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित थीं, वहीं वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर 2,815 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि प्रदेश की ऊर्जा नीति और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जैव ऊर्जा में देश में नंबर वन उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा नीति-2022 के सकारात्मक परिणाम भी आर्थिक समीक्षा में सामने आए हैं। जैव अपशिष्टों के उपयोग, कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट, बायो-कोल, बायो-डीजल और बायो-एथेनॉल की स्थापना को बढ़ावा देने के चलते प्रदेश 213 टन प्रतिदिन की सीबीजी उत्पादन क्षमता के साथ देश में प्रथम स्थान पर है। कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का विस्तार कृषि में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। योजना के घटक सी-1 के तहत वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में 3,024 कृषि पम्पों का सोलराइजेशन कराया गया। वहीं घटक सी-2 के अंतर्गत पृथक कृषि विद्युत फीडरों के सोलराइजेशन हेतु प्रथम चरण में 22 सबस्टेशनों पर 34.8 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए पीपीए हस्ताक्षरित किए गए हैं। द्वितीय चरण में 567 सबस्टेशनों पर 1,586.44 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जा चुके हैं। स्वच्छ हवा और ऊर्जा का साझा लक्ष्य आर्थिक समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एनसीएपी (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) के अंतर्गत चयनित 130 शहरों में स्वीकृत गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन और वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

पीएम मोदी पर राहुल का तीखा वार— ‘सदन में आने से डरते हैं’, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद की कार्यवाही और सरकार के रवैये को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में आने से डरते हैं और अगर सच में कोई खतरा था तो FIR दर्ज करानी चाहिए थी। राहुल गांधी ने बताया कि पूरा विवाद कुछ दिन पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब से जुड़े मुद्दे से शुरू हुआ। उनका आरोप है कि सरकार नहीं चाहती थी कि वह इस विषय पर कोई भी बात रखें, इसी वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले यह कहा गया कि वह किताब से उद्धरण नहीं दे सकते, फिर मैगज़ीन से भी कोट करने से रोका गया और अंत में बिना किसी उद्धरण के बोलने की इजाज़त भी नहीं दी गई। उन्होंने रक्षा मंत्री पर भी झूठा दावा करने का आरोप लगाया कि संबंधित किताब प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि किताब प्रकाशित हो चुकी है और उसकी प्रति मौजूद है। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल एक मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष के नेता और पूरे विपक्ष को बोलने का मौका ही नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी के एक सदस्य ने कई किताबों से उद्धरण देते हुए आपत्तिजनक बातें कहीं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, विपक्ष के सदस्यों को लगातार रोका गया और कई सांसदों को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर लगाए गए आरोपों पर राहुल गांधी ने कहा कि यह दावा पूरी तरह झूठा है कि विपक्ष के सदस्य पीएम को धमकी देने वाले थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदस्यों की वजह से नहीं, बल्कि सच्चाई से डरकर सदन में नहीं आए। अगर सच में किसी ने धमकी दी होती, तो तुरंत FIR दर्ज होती और गिरफ्तारी होती, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष चर्चा और बहस चाहता है, लेकिन सरकार इससे बच रही है। उनके अनुसार, सरकार बजट और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते जैसे मुद्दों पर चर्चा से डरती है, क्योंकि इनसे किसानों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि सरकार बहस से भाग रही है और यही वजह है कि प्रधानमंत्री सदन से दूर रहे।

देश कमजोर हुआ तो सनातन के समक्ष होगा अस्तित्व का संकटः योगी

सीतापुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को तपोधाम सतगुरु गिरधारी नाथ जी महाराज तपोधाम आश्रम में मूर्ति स्थापना दिवस व भंडारा में शामिल हुए। सीएम ने यहां फिर समाज को चेताया और कहा कि सनातन कमजोर होगा तो देश कमजोर होगा। देश कमजोर होगा तो सनातन के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा होगा, इसलिए बांटने वालों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मरने और जलाए जाने वाले हिंदुओं पर सभी मौन हैं। मरने वाले दलित हिंदू हैं। धर्माचार्यों व कुछ हिंदु संगठनों को छोड़ दिया जाए तो कोई मानवाधिकार या दुनिया का संगठन उनकी वकालत करने वाला नहीं है।  पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत लंबी यात्रा के लिए खुद को तैयार कर रहा है। भारत दुनिया की बड़ी ताकत बनेगा, इसे कोई रोक नहीं सकता है। भारतवासियों का दायित्व है कि इस यात्रा में सहभागी बनें और मिलकर कार्य करें। यदि ऐसा कर सके तो वर्तमान व भावी पीढ़ी के लिए परिणाम बेहतर होगा।  भारत ने विपत्ति में सभी का साथ दिया, लेकिन कुछ लोगों ने यहां आकर गला दबाने का प्रयास किया सीएम योगी ने कहा कि दुनिया में तमाम सभ्यता-संस्कृति समय के साथ समाप्त हो गई, लेकिन सनातन संस्कृति तमाम तूफानों को झेलते हुए आज भी गरिमा-गौरव के साथ खड़ी है और दुनिया को मैत्री, करुणा के साथ वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दे रही है। इसे तोड़ने के लिए अनेक प्रयास हुए। सनातन धर्मावलंबियों ने विपत्ति के समय हर किसी को शरण देकर उसे पुष्पित-पल्लवित होने का अवसर दिया, लेकिन कुछ लोगों ने शरणार्थी धर्म का निर्वहन नहीं किया, बल्कि यहां आकर हाथ की अंगुली पकड़कर गला दबाने का प्रयास किया और देश को लूटने में कसर नहीं छोड़ी।  वसुधैव कुटुम्बम् का भाव सनातन धर्मावलंबियों के जीवन का व्रत सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के पास बल, वैभव व बुद्धि भी थी, लेकिन कभी दुरुपयोग नहीं किया, बल्कि इसका उपयोग मानव कल्याण के लिए किया। वसुधैव कुटुम्बम् का भाव सनातन धर्मावलंबियों के जीवन का व्रत है। हमने चराचर जगत के कल्याण की बात की है। हमारे यहां पहला ग्रास गोमाता और अंतिम ग्रास कुत्ते का होता है। गाय और कुत्ते को भी हमने अपना हिस्सा प्रदान किया है। चींटी को आटा-चीनी तो जहरीले सांप को भी दूध-बताशा चढ़ाते हैं।  सभ्यता और संस्कृति के साथ समृद्धि की चिंता साथ-साथ चलती है तो परिणाम भी आते दिखाई देते हैं  सीएम योगी ने 11 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में बदलते भारत की प्रगति का जिक्र किया। बोले कि सभ्यता और संस्कृति के साथ समृद्धि की चिंता साथ-साथ चलती है तो परिणाम भी आते दिखाई देते हैं। भारत फिर से तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। अमेरिका व चीन को छोड़कर शेष देश भारत से पीछे होंगे। भारत तेज गति से बढ़ रहा है तो इसका कारण है कि भारत ने अपने मूल्यों-आदर्शों को पहचाना, विरासत को पुनर्स्थापित करने के अभियान को अपने कंधे पर लिया।  विकास की नई बुलंदियों को छू रहा सीतापुर सीएम योगी ने कहा कि 1947 में योगीराज गिरधारी नाथ जी महाराज को पाकिस्तान के हिंगलाज देवी के धाम को छोड़कर कुरुक्षेत्र होते हुए सीतापुर आना पड़ा। इस स्थान पर उन्होंने गुफा बनाई और वर्षों तक यहां साधना की। उनके उपरांत गुरु योगीराज चरणनाथ जी महाराज ने योग आश्रम बनाया, गुफा बनाई और महीनों साधना की। बिना कुछ खाए महीनों तक साधना योग से ही संभव है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर को भारत के सनातन धर्म का पौराणिक स्थल बताते हुए कहा कि सीतापुर आज भी विकास की नई बुलंदियों को छू रहा है। मत-संप्रदाय की दीवारों को फांदकर पूरे भारत को जोड़ने वाली है राम और भारतीयों की आत्मीयता सीएम योगी ने कहा कि कुंभ की परंपरा भारत में हजारों वर्षों की है, लेकिन पहली बार 2019 में प्रयागराज कुंभ को पहली बार वैश्विक मान्यता तब मिली, जब पीएम मोदी ने यूनेस्को के माध्यम से इस मेले को विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दिलाई। यह विरासत पर गौरव की अनुभूति करने वाला क्षण था। 22 जनवरी 2024 को पीएम मोदी के करकमलों से अयोध्या में प्रभु रामलला की भव्य प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा हो रही थी तो हर आंखों में श्रद्धा व गौरव के आंसू थे। हर भारतीय ने राम से आत्मीयता का रिश्ता जोड़ा है। यह आत्मीयता राजनीति की दीवारों से हटकर और मत-संप्रदाय की दीवारों को फांदकर पूरे भारत को जोड़ने वाली है।  इस दौरान राजस्थान के विधानसभा सदस्य बालक नाथ, योगी तेजनाथ, पीर महंत हरिनाथ, महंत कृष्णनाथ, महंत सुंदरनाथ, यूपी के मंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’, सुरेश राही, विधायक ज्ञान तिवारी, मनीष रावत, रामकृष्ण भार्गव, शशांक त्रिवेदी, निर्मल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रद्धा सागर आदि की मौजूदगी रही।

वन एवं पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल, सतत विकास की अवधारणा को साकार कर रहा उत्तर प्रदेश

 लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में भूमि एवं वन सम्पदा के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पौध रोपण को जन अभियान बनाते हुए वर्ष 2017-18 से वर्ष 2025-26 तक प्रदेश में 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया गया है। जिसमें एक पेड़ मां के नाम अभियान में रिकॉर्ड पौध रोपण के साथ पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ एवं सेवा पर्वों पर रिकॉर्ड संख्या में पौध रोपण किया गया है। परिणामस्वरूप घनी आबादी वाला प्रदेश होने के बाद भी उत्तर प्रदेश में वन एवं वृक्षावरण में देश में दूसरा स्थान है। साथ ही वन्यजीव संरक्षण अभियानों के सफल संचालन से प्रदेश की जैव विविधता का भी संरक्षण किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत एवं संपोषणीय विकास की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदूषण निवारण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 37.20 करोड़ पौधे रोपित पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया। अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्य 37 करोड़ के सापेक्ष अक्टूबर 2025 तक 37.20 करोड़ पौधे रोपित कर प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। साथ ही 01 से 07 जुलाई 2025 तक चले “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ” अभियान के तहत 1,86,053 एवं सेवा पर्वों पर चलाए गए अभियानों में 15,49,137 पौधों का रोपण किया गया। इससे न केवल प्रदेश के हरित आवरण में वृद्धि हुई, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन अवशोषण को भी बढ़ावा मिला। भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून की इंडिया स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार उत्तर प्रदेश वनावरण व वृक्षाच्छादन की दृष्टि से देश में दूसरे स्थान पर है। पर्यावरणीय सहभागिता को संस्थागत स्वरूप देते हुए वर्ष 2025 में प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘ग्रीन चौपाल’ का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जनजागरूकता को बढ़ावा देना है। साथ ही सामाजिक वानिकी के अंतर्गत वन महोत्सव 2025, सेवा पर्व और ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों पौधों का रोपण किया गया, जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी के साथ प्रदेश के वृक्षावरण और वनावरण में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की गई। वन्यजीव संरक्षण में प्रदेश ने हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। गोरखपुर के कैम्पियरगंज रेंज में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र रेड-हेडेड गिद्ध के संरक्षण के लिए देश का पहला समर्पित केंद्र है। वहीं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्टेटस ऑफ टाइगर्स-2022 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बाघों की संख्या वर्ष 2018 के 173 से बढ़कर वर्ष 2022 में 205 हो गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की आबादी का लगभग 5.6 प्रतिशत है। साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघ संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए टीएक्स-2 अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश में गंगा डॉल्फिन, सारस पक्षी, बारासिंघा, काला हिरण, चिंकारा, भालू, लंगूर जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के भी विशेष अभियान चलाए गए। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वर्ष 2025 में आगरा, झांसी और मुरादाबाद को राष्ट्रीय सम्मान उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना लागू की है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के अंतर्गत आगरा, झांसी और मुरादाबाद जैसे शहरों को शहरी हरियाली, मियावाकी वृक्षारोपण और अपशिष्ट प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। वहीं उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत वर्तमान में 2815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। साथ ही कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) में 213 टन प्रतिदिन की क्षमता के साथ यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वनावरण एवं वृक्षावरण को 15 प्रतिशत तक बढ़ाना है। वर्ष 2025 के आंकड़े दर्शाते हैं कि सतत एवं संपोषणीय विकास और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी के समन्वय से उत्तर प्रदेश भूमि एवं वन सम्पदा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन यूपी के संकल्प की सिद्धि की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

सीएम के निर्देश पर हरकत में आया लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन, स्पॉन्सरशिप योजना का दिया गया लाभ

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनता दर्शन में लखीमपुर खीरी के दो बेहारा बच्चों की आपबीती सुनी तो उन्होंने तत्काल लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन को दोनों अनाथ बच्चों हर संभव मदद के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन हरकत में आया गया। जनता दर्शन में आए दोनों अनाथ बच्चों के खीरी पहुंचने से पहले ही दोनों बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के लिए स्कूल में दाखिला करा दिया गया। इसके साथ ही बच्चों को 50 हजार नगद के साथ खाद्यान्न व सीएसआर किट सौंपी गई। वर्ष 2018 में एक दुर्घटना में माता पिता की हो गयी थी मृत्यु लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि धौरहरा के सरसवा गांव के शिवांशु और अजय कुमार के माता की वर्ष 2018 में एक दुर्घटना में मृत्यु हो गयी थी जबकि पिता ने उपचार के दौरान 41 दिनों बाद दम तोड़ दिया। माता-पिता के निधन से दोनों बच्चों के समक्ष भरण-पोषण एवं शिक्षा का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। ऐसे में आर्थिक संसाधनों के अभाव में पढ़ाई बाधित हो गई। धौरहारा के शिवांशु और अजय ने अपने बाबा दादी के साथ सोमवार को जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और अपनी समस्या बतायी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।  दोनों बच्चों को दिया गया स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ, दोनों को स्कूल में कराया गया दाखिला डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि दोनों बच्चों का स्पॉन्सरशिप योजना में आवेदन कराकर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है। अब दोनों बच्चों को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, पात्र गृहस्थी राशन कार्ड को अंत्योदय कार्ड में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि भरण पोषण की समस्या दोबारा सामने न आए। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। इतना ही नहीं अजय कुमार का गांव के ही विद्यालय में कक्षा सात में प्रवेश करा दिया गया है, जबकि शिवांशु का कक्षा नौ में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। परिवार को 50 हजार की मदद के साथ खाद्यान्न व सीएसआर किट सौंपी डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश पर सीडीओ अभिषेक कुमार ने विकास भवन में संबंधित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। साथ ही खाद्यान्न किट में आटा, चावल, दाल, तेल, बिस्किट, हल्दी, धनिया, मिर्च, भुना चना, नमक, माचिस व आलू उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त सीएसआर किट के तहत पानी की बोतल, छाता, टॉर्च (बैट्री सहित) व मच्छरदानी दी गई। दोनों बच्चों को स्कूल बैग, ज्योमेट्री बॉक्स, स्कूली ड्रेस, जूते, मौजे व स्वेटर, कंबल भी प्रदान किए गए। बाद में परिवार को सरकारी वाहन से उनके घर भिजवाया गया।

IND vs PAK विवाद गरमाया: PCB की ब्लैकमेलिंग चाल नाकाम, ICC ने नहीं मानी मुआवजे की मांग

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर छाया सस्पेंस अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिस मैच को लेकर बॉयकॉट करने की बात की गई थी, उसी पर अब पाकिस्तान क्रिकेट यू-टर्न मार सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) भारत के खिलाफ खेलने को तैयार है, लेकिन उसने आईसीसी के सामने तीन अहम शर्तें रख दी हैं। ICC ने जब उनकी शर्तें नहीं मानी है। अब डॉन की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि PCB ने ICC के सामने एक और अजीब मांग रखी है, जिसमें T20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बावजूद बांग्लादेश को मुआवजा देने के लिए कहा गया है। PCB ने ICC से की मुआवजे की मांग लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में 8 फरवरी को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, ICC और बांग्लादेश क्रिकेट के अधिकारियों के बीच 4 घंटे की लंबी मीटिंग हुई। इस मीटिंग में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का असली चेहरा बेनकाब हो गया। बांग्लादेश को ढाल बनाकर अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने ICC से भारत बनाम पाकिस्तान मैच के बदले मुआवजे की मांग कर रहा है। इसके साथ ही PCB ने टी20 वर्ल्ड कप में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए ICC के सामने अब कुछ अलग मांग रखी है। सूत्रों के अनुसार उनमें से पहला डिमांड ये है कि बांग्लादेश को ICC से अधिक से अधिक मुआवजा मिले। टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बावजूद बांग्लादेश को पार्टिसिपेशन फीस मिले। वहीं उनकी आखिरी डिमांड ये थे कि आने वाले समय में बांग्लादेश को ICC टूर्नामेंट की मेजबानी मिले। ICC ने पाकिस्तान और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों के साथ की मीटिंग पाकिस्तानी न्यूज एजेंसी डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक ICC ने 8 फरवरी 2026 को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के साथ एक मीटिंग की। मीटिंग में पाकिस्तान के बॉयकॉट करने के फैसले पर चर्चा हुई। बोर्ड अधिकारियों के बीच ये मीटिंग चार घंटे तक चली। लेकिन फिर भी कोई नतीजा नहीं निकला। मीटिंग के बाद किसी भी बोर्ड की तरफ से संयुक्त रूप से कोई बयान नहीं जारी किया गया। ICC ने अपना रूख कर दिया साफ रिपोर्ट में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों टीमें पाकिस्तान सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही कोई ऐलान करेंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईसीसी के पास बांग्लादेश को मुआवजे के तौर पर देने के लिए कुछ नहीं था। बांग्लादेश को सिर्फ आईसीसी की कमाई का अपना पूरा हिस्सा मिल सकता है। इसके अलावा ICC उन्हें कुछ भी नहीं दे सकता है। ICC के डिप्टी चेयर पर्सन ने दी पीसीबी को सलाह रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ICC के डिप्टी चेयर पर्सन इमरान ख्वाजा ने PCB को सलाह दी है कि वह तुरंत भारत बनाम पाकिस्तान मैच का बहिष्कार खत्म करे, क्योंकि यह क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है। यदि उसे कोई दिक्कत है तो वह अपना मामला आईसीसी आर्बिट्रेशन कमेटी के सामने रखे या आईसीसी बोर्ड मीटिंग के दौरान उठाए। लेकिन उनका ये मैच बॉयकॉट करने का फैसला पूरी तरह से गलत है।

राजस्व कार्यों में डिजिटल क्रांति: भुइयां चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न सुविधा शुरू

रायपुर. राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक सशक्त बनाते हुए आज नागरिक सुविधा के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण और अभिनव पहल का शुभारंभ किया गया।  राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने अपने निवास कार्यालय में भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा तथा ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा का औपचारिक राज्यव्यापी शुभारंभ किया। ये दोनों डिजिटल पहल राज्य में ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को अब राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और कार्यवाही पूरी तरह सरल, तेज़ और पारदर्शी होगी। भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा के माध्यम से छत्तीसगढ़ के नागरिक अब अपने मोबाइल फोन पर ही विभिन्न राजस्व सेवाओं की जानकारी और सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। यह सेवा नागरिकों को डिजिटल माध्यम से सीधे शासन से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है, जो राज्य की डिजिटल रूपांतरण यात्रा को नई गति प्रदान करेगी। इस चैटबॉट सेवा के अंतर्गत नागरिकों को जमीन संबंधी जानकारी, राजस्व न्यायालय से संबंधित जानकारी, मोबाइल नंबर जोड़ने की सुविधा, आधार नंबर जोड़ने हेतु ऑनलाइन आवेदन, किसान किताब हेतु आवेदन, नामांतरण हेतु आवेदन सहित अन्य नागरिक हितैषी राजस्व सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिक इन सभी सेवाओं का लाभ घर बैठे केवल एक व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से ले सकते हैं। इस सेवा का उपयोग करने के लिए नागरिक +91 7289056060 नंबर को अपने मोबाइल में सेव कर व्हाट्सऐप पर संदेश भेज सकते हैं, जिसके पश्चात चैटबॉट तुरंत आवश्यक जानकारी एवं सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। इसी क्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने एक और महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के रूप में ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा का भी शुभारंभ किया। यह सुविधा भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाकर नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करेगी।इस नई व्यवस्था के अंतर्गत अब नागरिक बिना किसी कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाए अपने भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल पर भूमि चयन से लेकर प्रीमियम एवं शुल्क की गणना तक की पूरी प्रक्रिया स्वचालित और सहज बनाई गई है। भुगतान प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए ई-चालान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवेदन के साथ छह आवश्यक दस्तावेजों का ऑनलाइन अपलोड अनिवार्य किया गया है, जिससे प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आवेदन जमा होते ही वह स्वतः संबंधित सक्षम अधिकारी के पास परीक्षण हेतु प्रेषित हो जाएगा। सक्षम अधिकारी को 15 दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय लेना अनिवार्य होगा, जिससे अनावश्यक विलंब समाप्त होगा और कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सकेगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई निर्णय नहीं होता है, तो नागरिक को डिम्ड डाइवर्ज़न प्रमाणपत्र स्वतः जारी कर दिया जाएगा, जिससे नागरिकों को लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी और शासन की जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी। नागरिक हितों की सुरक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि नागरिक द्वारा गणना की गई राशि वास्तविक देय राशि से कम पाई जाती है, तो सक्षम अधिकारी द्वारा इसकी सूचना दी जाएगी। नागरिक को 60 दिनों के भीतर शेष राशि जमा करनी होगी, अन्यथा विलंब की स्थिति में अर्थदंड का प्रावधान लागू होगा।  नागरिक https://revenue.cg.nic.in/citizenrequest/ पोर्टल के माध्यम से इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इस अवसर पर राजस्व सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले तथा संचालक राजस्व  विनीत नंदनवार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे। “तकनीक के माध्यम से शासन को सीधे नागरिकों से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है, ताकि समय, संसाधन और श्रम की बचत हो तथा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। छत्तीसगढ़ सरकार नागरिकों को तेज़, सरल और पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल गवर्नेंस को निरंतर सशक्त बना रही है। भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) जैसी पहल इसी सोच का परिणाम हैं, जिनसे आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ये डिजिटल सेवाएँ छत्तीसगढ़ को सुशासन और डिजिटल रूपांतरण की दिशा में एक नई ऊँचाई प्रदान करेंगी।”-मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय “भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऑटो-डाइवर्ज़न व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया स्पष्ट समय-सीमा में पूरी होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को त्वरित राहत मिलेगी। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुशासन, तकनीकी दक्षता और नागरिक सुविधा को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” -राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा “भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार है। इन पहल के माध्यम से नागरिकों को सूचनाओं और सेवाओं तक त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद पहुँच सुनिश्चित की गई है। ऑटो-डाइवर्ज़न व्यवस्था में तय समय-सीमा, ऑनलाइन भुगतान और डिम्ड डाइवर्ज़न जैसे प्रावधानों से प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और अनावश्यक विलंब समाप्त होगा। यह पहल राजस्व प्रशासन को अधिक कुशल, तकनीकी रूप से सक्षम और नागरिक-अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगी।” -राजस्व सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले

हर घर नल, हर घर जल : यूपी में जल जीवन मिशन ने रचा इतिहास

लखनऊ उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन और स्वच्छ पेयजल योजनाओं की अभूतपूर्व उपलब्धियों का विस्तृत खाका सामने आया है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में पेयजल आपूर्ति का दायरा अब केवल बसाहटों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हर ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और नियमित जल पहुंचाने का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति की बड़ी चुनौती निर्बाध बिजली की उपलब्धता रही है। इसे ध्यान में रखते हुए दुर्गम क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। जनवरी 2026 तक 40,955 परियोजनाओं में से 33,157 परियोजनाएं सौर ऊर्जा से संचालित हो रही हैं, जिनकी क्षमता लगभग 900 मेगावाट है। इन परियोजनाओं से 67,013 गांवों को लाभ मिलेगा और 13.30 करोड़ ग्रामीण आबादी संतृप्त होगी। सौर ऊर्जा के उपयोग से परियोजनाओं के समय पर पूर्ण होने में मदद मिली है, साथ ही संचालन लागत में भारी बचत और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। अनुमान है कि 30 वर्षों में संचालन लागत में लगभग 37,395 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो पर्यावरणीय दृष्टि से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 91 प्रतिशत घरों तक पहुंचा नल से जल प्रदेश में जल जीवन मिशन योजना के माध्यम से दिसंबर तक 2.67 करोड़ घरों की 16.69 करोड़ ग्रामीण आबादी को संतृप्त करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष दिसंबर 2025 तक 2.43 करोड़ घरेलू नल कनेक्शन प्रदान कर 15.12 करोड़ ग्रामीण जनसंख्या को शुद्ध पेयजल से जोड़ा जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है। वर्तमान में 46,303 राजस्व ग्रामों में नियमित, गुणवत्तायुक्त और पर्याप्त मात्रा में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। युवा और महिलाएं बने मिशन की ताकत जल जीवन मिशन के तहत पंचायत स्तर पर बड़े पैमाने पर कौशल विकास भी किया गया है। जनवरी 2026 तक 7.56 लाख युवाओं को इलेक्ट्रिशियन, पम्प ऑपरेटर, प्लम्बर, फिटर और मोटर मैकेनिक जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ 5.51 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें जल सुरक्षा की जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। स्वच्छता और जागरूकता पर जोर राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन द्वारा ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन’ के तहत ‘अपने पानी को जानो’, पानी के रिसाव की पहचान और मरम्मत जैसे अभियानों को जिला, ब्लॉक और गांव स्तर तक पहुंचाया गया है।

पुतिन भी एपस्टीन फाइल्स में? 1005 बार नाम आने से बढ़ी हलचल, रिश्तों पर सवाल

वाशिंगटन अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी जेफ्री एपस्टीन की फाइलों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। इन लाखों पन्नों के दस्तावेजों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम कम से कम 1005 बार आया है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश उल्लेख न्यूज क्लिपिंग्स या रिपोर्ट्स से जुड़े हैं जो एपस्टीन को भेजी जाती थीं, लेकिन कुछ ईमेल्स में एपस्टीन की पुतिन से मुलाकात कराने की बार-बार कोशिशों का जिक्र है। हालांकि, इन फाइलों में कहीं भी यह साबित नहीं होता कि दोनों की कभी वास्तविक मुलाकात हुई। रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन ने रूसी अधिकारियों, पूर्व राजदूतों और यहां तक कि FSB से जुड़े लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश की थी। इस खुलासे के बाद हनीट्रैप और जासूसी की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इसे रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बड़ा घोटाला बताते हुए जांच शुरू करने की घोषणा की है, जबकि क्रेमलिन ने इन दावों को बकवास करार देते हुए खारिज कर दिया है। रूसी राजदूत से मिलता था एपस्टीन जारी दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन न्यूयॉर्क में रूस के पूर्व राजदूत विटाली चर्किन से नियमित रूप से मिलता रहता था। एपस्टीन ने चर्किन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक प्रमुख वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी दिलाने का ऑफर भी दिया था। वर्ष 2017 में चर्किन की अचानक मौत के बाद एपस्टीन ने रूस से संपर्क बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए। जून 2018 में एपस्टीन ने नॉर्वे के राजनेता थोरबजर्न जागलैंड (जो उस समय काउंसिल ऑफ यूरोप के सेक्रेटरी जनरल थे) को ईमेल किया। इस ईमेल में उसने लिखा कि जागलैंड को पुतिन से सुझाव देना चाहिए कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मुझसे बात करके जानकारी ले सकते हैं। एपस्टीन ने लिखा था कि चर्किन बहुत अच्छे थे, उन्होंने मेरी बातों के बाद ट्रंप को समझ लिया था। जागलैंड ने जवाब में कहा था कि वह लावरोव के असिस्टेंट से मिलकर यह बात पहुंचा देंगे। रूसी जासूसी और निवेश का कनेक्शन रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन के संबंध सर्गेई बेल्याकोव जैसे अधिकारियों से भी थे, जिनके लिंक रूस की खुफिया एजेंसी (FSB) से बताए जाते हैं। वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी शामिल हुआ था और रूसी अधिकारियों को पश्चिमी निवेश लाने की सलाह देता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन ने 2019 तक रूस के वीजा के लिए भी कोशिशें की थीं। हालांकि, इन दस्तावेजों में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि एपस्टीन की पुतिन से कभी मुलाकात हुई थी। पोलैंड के प्रधानमंत्री ने दिए जांच के आदेश इस खुलासे के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि उनका देश एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों से संभावित संबंधों की जांच शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रेस में मिल रहे बढ़ते सुराग, जानकारी और टिप्पणियां इस संदेह की ओर इशारा करती हैं कि बाल यौन शोषण का यह अभूतपूर्व घोटाला रूसी खुफिया सेवाओं द्वारा सह-आयोजित किया गया था। इस पर क्या बोला रूस? दूसरी ओर, रूस की सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि एपस्टीन और रूसी जासूसी के दावों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस सिद्धांत को किसी भी तरह से लिया जा सकता है, लेकिन गंभीरता से नहीं। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसे सिद्धांतों पर बहुत सारे चुटकुले बनाने का मन कर रहा है, लेकिन अपना समय बर्बाद न करें।  

लोकसभा में सरकार पर गंभीर आरोप, कांग्रेस की महिला सांसदों का अध्यक्ष को पत्र

नई दिल्ली कांग्रेस की महिला सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के निरंतर दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए उन्होंने यह पत्र उस वक्त लिखा है जब बिरला ने बीते गुरुवार को कहा था कि इससे एक दिन पहले कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में नहीं आए।   इस पत्र पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, सांसद वर्षा गायकवाड़, ज्योति मणि और कुछ अन्य महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस की महिला सांसदों ने पत्र में लिखा, “हम यह पत्र गहरे दुःख और संवैधानिक दायित्व की भावना के साथ लिख रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको, लोकसभा के माननीय अध्यक्ष और इस सदन के संवैधानिक संरक्षक के रूप में सत्तारूढ़ दल द्वारा विपक्ष की महिला सांसदों विशेषकर कांग्रेस की सांसदों के विरुद्ध झूठे, निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया।” आवाज उठाने के लिए बनाया जा रहा निशाना उन्होंने कहा, “हमें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हमने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनविरोधी सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाई है और उनसे जवाबदेही की मांग की है। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति किसी भय के कारण नहीं थी, वह सिर्फ इस डर के कारण सदन में नहीं आए कि उनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं था।” राहुल गांधी को नहीं बोलने दिया गया- कांग्रेस सांसद उन्होंने कहा, “अध्यक्ष का पद एक संवैधानिक दायित्व वाला है जिसका उद्देश्य संसद की गरिमा बनाए रखना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है, चाहे वे किसी भी दल से हों। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्थापित संसदीय परंपरा यह है कि पहले सत्ता पक्ष और फिर विपक्ष को बोलने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद प्रधानमंत्री उत्तर देते हैं।” उनके मुताबिक, पिछले सप्ताह लगातार चार दिनों तक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने दावा किया, “दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के आठ सांसदों को सत्तारूढ़ दल के कहने पर निलंबित किया गया और एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अभद्र भाषा में बोलने की अनुमति दी गई।” उन्होंने कहा, “जब हम आपसे मिले, तो हमने न्याय की मांग की और उन भाजपा सांसद के निलंबन की मांग की। आपने स्वयं स्वीकार किया कि एक गंभीर गलती हुई है और हमें शाम चार बजे फिर आने को कहा। दोबारा मिलने पर आपने कहा कि आप सरकार की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब आप इन मामलों में निर्णयकर्ता नहीं हैं।” बिरला के अधिकारों पर उठाए सवाल महिला सदस्यों ने दावा किया कि इससे अध्यक्ष के रूप में बिरला की स्वतंत्रता और अधिकार पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा, गुरुवार को शाम 5 बजे, परंपरा प्रक्रिया के विरुद्ध, प्रधानमंत्री का लोकसभा में बोलना निर्धारित किया गया। ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सदस्यों ने विरोध में खड़े होकर आपत्ति जताई और प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए।” उन्होंने दावा किया, “अगले दिन, स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ दल के दबाव में आकर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करते हुए आपने कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए।” उनका कहना है, “हमारे विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और मर्यादित रहे हैं। हममें से अधिकतर साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और कई पहली पीढ़ी की नेता हैं। हमने दशकों तक जनता के बीच संघर्ष करते हुए, भेदभाव और बाधाओं का सामना करते हुए अपना स्थान बनाया है। हमारी ईमानदारी पर प्रश्न उठाना हर उस महिला का अपमान है जो साहस और गरिमा के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाती है।” कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा, “हम हिंसा और धमकी की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। हम साहसी निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं जिन्हें डराकर चुप नहीं कराया जा सकता। हमें विश्वास है कि पारदर्शिता ही अध्यक्ष के पद की गरिमा और इस सदन की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित कर सकती है।” उन्होंने बिरला से कहा, “हमें आपके पद और आपके प्रति पूर्ण सम्मान है। किंतु यह स्पष्ट है कि आप पर सत्तारूढ़ दल का लगातार दबाव है। हम आपसे पुनः आग्रह करते हैं कि आप लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करें। इस प्रयास में हम आपके साथ खड़े रहेंगे और आपको पूरा समर्थन देंगे।”उन्होंने इस बात पर जोर दिया, “इतिहास आपको उस व्यक्ति के रूप में याद रखे जो कठिन परिस्थितियों में भी सही के साथ खड़ा रहा और देश के हित में संवैधानिक मर्यादा की रक्षा की। 

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