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प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में महासमुंद दूसरे स्थान पर, 10 माह में 27441 आवासों का निर्माण

महासमुंद महासमुंद जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मात्र 10 माह की अवधि में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। जिसके आधार पर महासमुंद जिला राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। जिले में निर्मित कुल 27,441 आवासों में विभिन्न विकासखंडों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पिथौरा विकासखंड में सर्वाधिक 7,193 आवास, बागबाहरा विकासखंड में 6,102 आवास, महासमुंद विकासखंड अंतर्गत 5,775 आवास, सरायपाली विकासखंड अंतर्गत 5,062 आवास तथा बसना विकासखंड में 3,309 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन द्वारा गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। योजना के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के सतत निरीक्षण में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा मैदानी अमले के सतत प्रयासों, नियमित निगरानी एवं प्रभावी समन्वय के चलते यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हितग्राहियों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता एवं निर्माण सामग्री उपलब्ध कराकर कार्यों में गति लाई गई। जिले में आवास निर्माण की इस उपलब्धि से हजारों परिवारों का पक्के मकान का सपना साकार हुआ है। लाभान्वित परिवारों ने केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने निरंतर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। ताकि कोई भी पात्र परिवार आवास सुविधा से वंचित न रहे।

एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह के ‘डॉन 3’ छोड़ने पर बतौर मुआवजा 40 करोड़ रुपये की मांग की

नई दिल्ली,  रणवीर सिंह ने ‘डॉन 3’ फिल्म छोड़ दी है और इसके बाद एक्सेल एंटरटेनमेंट ने उनसे 40 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। सूत्रों ने ‘वैरायटी इंडिया’ को बताया कि ‘डॉन 3’ के प्रोजेक्ट से अचानक से अभिनेता के बाहर होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म जगत के कई सूत्रों ने बताया कि एक्सेल एंटरटेनमेंट का दावा है कि सिंह के फिल्म छोड़ने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। इसमें विकास कार्य पर हुआ खर्च और शेड्यूलिंग, प्लानिंग तथा अन्य प्री-प्रोडक्शन प्रतिबद्धताओं से जुड़ी देरी शामिल है। ‘वैरायटी इंडिया’ को एक ऐसा पत्र भी मिला है, जिससे पता चलता है कि प्रोडक्शन हाउस ने विभिन्न विभागों के प्रमुखों से इस प्रोजेक्ट के बाहर काम खोजने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि बैनर का मानना है कि रणवीर सिंह को कंपनी के हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। हालांकि, कहा जा रहा है कि सिंह इस दावे का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उनका तर्क है कि वह किसी भी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। अभिनेता के करीबी लोगों ने कहा है कि रणवीर का तर्क है कि उन्होंने अतीत में भी कई प्रोजेक्ट छोड़े हैं और तब ऐसी मुआवजे की मांग का सामना नहीं करना पड़ा, इसलिए इस मामले को अलग तरह से नहीं देखा जाना चाहिए। नाम न छापने की शर्त पर, एक सूत्र ने ‘वैरायटी इंडिया’ को बताया, “रणवीर का दावा है कि उन्होंने यह प्रोजेक्ट इसलिए छोड़ा, क्योंकि वे पटकथा से खुश नहीं थे। वे लगातार बदलावों की मांग कर रहे थे और उन्हें फाइनल ड्राफ्ट पसंद नहीं आया। दूसरी ओर एक्सेल का दावा है कि उन्होंने प्री-प्रोडक्शन का काम रणवीर सिंह की हरी झंडी मिलने के बाद ही शुरू किया था। पिछले शुक्रवार को सिंह और एक्सेल एंटरटेनमेंट के प्रतिनिधियों के बीच दो घंटे की बैठक के दौरान विवाद पर चर्चा हुई, लेकिन कथित तौर पर बातचीत बिना समाधान के समाप्त हो गयी। अंदरूनी सूत्रों ने इस बैठक को ‘विवादास्पद’ बताया, जिसमें दोनों पक्षों ने प्रोजेक्ट के पटरी से उतरने के लिए जवाबदेही और वित्तीय जिम्मेदारी पर असहमति जतायी। फिलहाल दोनों पक्षों में बढ़ते तनाव को कम करने और मामला सुलझाने के लिए ‘प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (पीजीआई) मध्यस्थता कर रही है।  

राजिम में धूमधाम से संपन्न हुआ सामूहिक विवाह समारोह

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की सराहनीय पहल छत्तीसगढ़ की साय सरकार की संवेदनशील और कल्याणकारी सोच का प्रतीक बनी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मंगलवार को राजिम के नवीन मेला मैदान में 283 जोड़ों का सामूहिक विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन के मुख्य अतिथि प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल रहे, जिन्होंने नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। अध्यक्षता राजिम विधायक  रोहित साहू ने की। राज्य सरकार की इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाई है, जो समाज के हर वर्ग के लिए वरदान साबित हो रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में बेटी की शादी हर परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने इसे सुलझा दिया है। इस योजना के तहत प्रति जोड़े 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 35 हजार रुपये वधु के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित होते हैं। शेष 15 हजार रुपये श्रृंगार सामग्री, व्यवस्था और अन्य खर्चों पर व्यय किए जाते हैं।  अग्रवाल ने कहा कि यह योजना जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक तरीके से बेटी का विवाह करने में सहारा देती है। पूरे रीति-रिवाजों के साथ एक साथ इतने जोड़ों का विवाह होना समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की सराहना की तथा नवदंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस भव्य समारोह में राजिम विधानसभा क्षेत्र के 94, बिन्द्रनवागढ़ के 181 तथा कुरूद विधानसभा के 8 जोड़े शामिल हुए। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नई उम्मीद दी है। विधायक  रोहित साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सरकार की जनकल्याणकारी भावना का जीवंत उदाहरण है। विवाह का आर्थिक बोझ अब बोझ नहीं, बल्कि खुशी का अवसर बन गया है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार माना। कलेक्टर  बीएस उइके ने बताया कि यह आयोजन पूरे प्रदेश में एक साथ हो रहा है, जो विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगा। 4 आत्मसमर्पित नक्सली बंधे विवाह बंधन में, मुख्यधारा में लौटकर सराहा राज्य सरकार की योजना योजना की सबसे प्रेरणादायक कहानी रही चार आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों की। कांकेर, सुकमा और बीजापुर जिले से इन जोड़ों ने मुख्यधारा में लौटकर नई जिंदगी अपनाई है। इनमें दिलीप उर्फ संतु, मंजुला उर्फ लखमी, दीपक उर्फ भीमा मंडावी, सुनीता उर्फ जुनकी, कैलाश उर्फ भीमा, रनीता उर्फ पायकी कारम तथा राजेंद्र उर्फ कोसा मुरिया, जैनी उर्फ देवे मड़कम शामिल हैं। विवाह मंत्रोचार के बीच विवाह बंधन में बंधे इन नवदंपतियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की तारीफ की। नक्सली जोड़ों ने मीडिया से कहा कि मुख्यधारा में जुड़ने के बाद हमें नई जिंदगी मिली है। इस योजना से जीवनसाथी के साथ खुशहाल भविष्य का सपना साकार हो रहा है। इस अवसर पर कलेक्टर  बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक  वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी  अशोक पाण्डेय के अलावा पूर्व विधायक  संतोष उपध्याय, राजिम नगर पालिका अध्यक्ष  महेश यादव, विभिन्न जनपद पंचायतों के अध्यक्षगण मती इंद्राणी साहू, मती मीरा ठाकुर,  सोहन धु्रव तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष  गौरीशंकर कश्यप ने भी संबोधित किया। राज्य सरकार की यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य भी कर रही है।

संजय मिश्रा ने बाबिल खान की जमकर तारीफ की

मुंबई,  बॉलीवुड के जानेमाने चरित्र अभिनेता संजय मिश्रा ने हाल ही में चैट शो के दौरान अभिनेता बाबिल खान की तारीफ की है। संजय मिश्रा अपनी हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म वध 2 के प्रमोशन के सिलसिले में शो पर मौजूद थे। बातचीत के दौरान जब बाबिल का ज़िक्र आया, तो संजय मिश्रा ने उनकी तुलना उनके दिवंगत पिता और दिग्गज अभिनेता इरफान खान से की, जो अपने आप में बड़ी तारीफ मानी जा रही है। संजय मिश्रा ने कहा, “ बबिल बड़ा क्यूट लगता है यार। कभी-कभी वह यंग इरफान भाई, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) वाले लगते हैं।” संजय मिश्रा जैसे अनुभवी अभिनेता की यह बात खास मायने रखती है। इरफान खान को भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिना जाता है। ऐसे में बाबिल की तुलना इरफान खान से होना उनके लिए एक बड़ी सराहना है।  

पीएमजी एवं प्रगति परियोजनाओं की मुख्य सचिव ने की समीक्षा

रायपुर. मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत केन्द्र शासन की पीएमजी प्रगति परियोजनाओं के अंतर्गत आने कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि छत्तीसगढ़ में पीएमजी एवं प्रगति पोर्टल के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं से संबंधित सभी कार्यों को आपसी समन्वय से निपटाएं। उन्होंने टेलीकॉम, वन तथा एससीसीएल, रेल्वे एवं अन्य संबंधी विभागों  के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे परियोजनाओं  के कार्य को गतिशील बनाने के लिए कार्य करें। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग के सचिव  रजत कुमार, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी के सचिव  अंकित आनंद सहित वन, रेल्वे, खनिज एवं जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

मोहन सरकार ने किया ऐलान, तलाकशुदा बेटियां भी होंगी माता-पिता की पेंशन की हकदार

भोपाल  मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के पेंशन नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई। इस नए प्रावधान के तहत, अब प्रदेश की तलाकशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता की ‘परिवार पेंशन’ की पात्र होंगी। सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में एमबी कैबिनेट की मीटिंग हुई है। कैबिनेट की मीटिंग में कई बड़े फैसले हुए हैं। मीटिंग के बाद उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप ने मीडिया को जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। तलाकशुदा बेटियों को भी पेंशन मंत्री काश्यप ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, इसीलिए तलाकशुदा बेटियों को परिवार पेंशन के दायरे में लाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। साथ ही, उन्होंने आगामी 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होने वाले बजट की तैयारियों की भी पुष्टि की। भविष्य के विकास का रोडमैप भी तैयार बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के आगामी बजट का भी अनुमोदन किया गया। यह बजट 18 फरवरी को मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट के इन निर्णयों से जहां एक ओर हजारों महिलाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के भविष्य के विकास का रोडमैप भी तैयार हो गया है। हजारों ऐसी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा उन्होंने बताया कि सरकार के इस फैसले से प्रदेश की हजारों ऐसी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा, जो कानूनी रूप से तलाक के बाद अपने माता-पिता पर आश्रित हैं। अब तक परिवार पेंशन के नियमों में कुछ तकनीकी सीमाओं के कारण तलाकशुदा बेटियों को इसमें शामिल नहीं किया गया था, लेकिन कैबिनेट की इस मुहर के बाद उन्हें आर्थिक संबल प्राप्त होगा। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज के एक संवेदनशील वर्ग को सुरक्षा भी प्रदान करेगा। पेंशन नियमों में बदलाव के साथ ही कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के आगामी बजट प्रस्तावों का भी अनुमोदन कर दिया है। सरकार का यह नया बजट आगामी 18 फरवरी को मध्यप्रदेश विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।

जनजातीय एवं महिला-बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 7,133.17 करोड़ रुपये की मंजूरी, लंबी अवधि तक जारी रहेंगे प्रोजेक्ट

जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को वर्ष 2030-31 तक की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत अविद्युतीकृत घरों एवं शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रूपये की स्वीकृति उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आई टी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को एक बार के लिए आयु सीमा में पाँच वर्ष की छूट की स्वीकृति म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन मध्यप्रदेश सिविल सेवा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन नियम 2026 तथा उपदान का संदाय नियम 2026 का अनुमोदन मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति अनुसार जनजातीय कार्य विभाग की पीवीटीजी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रूपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़ 15 लाख रूपये, सीएम राइज विद्यालय योजना के लिए 1,416 करोड़ 91 लाख रूपये, आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रूपये के साथ ही माध्यमिक शिक्षा मण्डल को शुल्क की प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्‍यार्थियों को छात्रवृत्ति, कक्षा-9वीं  की छात्रवृत्ति  के लिए 522 करोड़ 8 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास की मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 31 करोड़ 3 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में वंदे-मातरम् गायन के साथ आरंभ हुई। मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) अन्तर्गत विद्युत अधोसंरचना विस्तार द्वारा 63 हजार 77 अविद्युतीकृत घरों एवं 650 अविद्युतीकृत शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण  के लिए 366 करोड़ 72 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें केन्द्र शासन से अनुदान राशि 220 करोड़ 03 लाख रूपये तथा राज्य शासन का अंश 146 करोड़ 69 लाख रूपये का भार आयेगा।  इसके अतिरिक्त (म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा) 8 हजार 521 घरों को ऑफ-ग्रिड से विद्युतीकरण के लिए अनुमानित लागत 97 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना में विद्युतीकरण से संबंधित वितरण प्रणाली निर्माण के लिए योजना लागत की शेष राशि (केन्द्र से प्राप्त अनुदान को छोड़कर) राज्य शासन द्वारा राज्य की वितरण कंपनियों को अंश-पूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा किए जाने वाले ऑफ ग्रिड विद्युतीकरण (सोलर + बैटरी) के लिए योजना के समस्त व्यय का वहन राज्य शासन द्वारा किया जायेगा। अनुमोदन अनुसार भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वितरण कंपनी स्तर पर निर्धारित सीलिंग कॉस्ट का पालन करते हुए, 2 लाख रुपये प्रति घर तक अनुमानित लागत वाली बसाहटों में राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा विद्युत अधोसंरचना निर्माण कर ऑन-लाइन प्रणाली से विद्युतीकरण किया जायेगा। खेतों पर बने घरों के साथ ही 5 घरों से छोटी बसाहटें एवं ऐसी दूरस्थ बसाहटें, जहाँ विद्युतीकरण की औसत लागत रूपये 2 लाख प्रति घर से अधिक है, उनमें म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा 1 किलोवाट क्षमता के ऑफ-ग्रिड प्रणाली (सोलर + बैटरी) से विद्युतीकरण किया जायेगा।  मंत्रि-परिषद द्वारा उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आई टी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग की प्रचलित और भावी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए सिर्फ एक बार के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट की स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में अनारक्षित वर्ग के लिए 40 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 45 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। प्रस्तावित नियमों में प्रक्रियाओं एवं अधिकारिताओं को सहज बनाया गया है, जिससे पेंशनर्स को सुविधा होगी। संबंधित प्रकरणों का निराकरण समयसीमा में हो सकेगा। सेवानिवृत्तों को सारांशीकरण कराया जाने में सुविधा होगी तथा पेंशन सारांशीकरण मूल्य की गणना में सुविधा होगी। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 के नियम-44 के अंतर्गत परिवार पेंशन के लिए पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी सम्मिलित किया गया है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है।  अनुमोदन अनुसार यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे। नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। प्रमुख नवीन प्रावधान अंतर्गत अभिदाता की मृत्यु की दशा में परिवार पेंशन का प्रावधान किया गया है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका संबंधी प्रावधान किया गया है। केन्द्र तथा मध्यप्रदेश शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ा जायेगा। निलम्बन अवधि में अभिदाता तथा नियोक्‍ता के अंशदान का प्रावधान किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत एवं स्पष्ट प्रक्रिया, अंशदान की दर, गणना एवं विलंब की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारण के साथ सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र एवं मृत्यु की दशा में निकास प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत आने वाले शासकीय सेवकों के लिए उपदान की पात्रता निर्धारण एवं भुगतान की सुस्पष्ट प्रक्रिया होगी। विभागीय जांच (सेवा निवृत्ति उपरांत) आदेश के संदर्भ में उपदान से वसूली संभव होगी। विभागीय जांच की अवधि में नियोक्‍ता के अंशदान का भुगतान रोका जाना, सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व अभिदाता अंशदान रोका जाना और सेवानिवृत्ति उपरांत विभागीय जांच संस्थित किये जाने का प्रावधान के साथ नियमों के निवर्तन और शिथिलीकरण के संबंध में राज्य शासन की शक्ति के प्रावधान शामिल है।  

लोकपथ एप से सड़कों के गड्ढे होंगे ठीक, फोटो डालते ही लोक निर्माण विभाग करेगा सुधार

भोपाल   संकल्प से समाधान अभियान गत 12 जनवरी से प्रारंभ है। यह अभियान चार चरणों में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम चरण 12 जनवरी से 16 फरवरी तक, द्वितीय चरण 16 फरवरी से 16 मार्च तक, तृतीय चरण 16 मार्च से 26 मार्च तक एवं चतुर्थ चरण 26 मार्च से 31 मार्च तक चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत 16 विभाग की 65 योजनाओं में हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाएगा। साथ ही इन योजनाओं से संबंधित शिकायतों का भी प्राथमिकता से निराकरण किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए कमिश्नर कृष्ण गोपाल तिवारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह संकल्प से समाधान अभियान के अंतर्गत हितग्राहियों के अधिक से अधिक आवेदन लेकर उनका निराकरण कर संकल्प से समाधान पोर्टल पर निराकरण की स्थिति अपलोड करें। 15 मार्च से शिविर आयोजित किए जाएंगे कमिश्नर ने बताया कि 15 मार्च से कलस्टर लेबल पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में भी नवीन आवेदन प्राप्त कर निराकरण किया जाएगा। बताया गया कि अभियान के अंतर्गत अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, कृषि, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उघानिकी, नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जिला परिवहन विभाग, राजस्व विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, वित्त विभाग, श्रम, सहकारिता, विद्युत विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित 65 योजनाओं के आवेदन प्राप्त कर प्राथमिकता से निराकरण किए जाएंगे। एप बताएगा रास्ता, मोहन सरकार की पहल यदि आप मध्य प्रदेश में यात्रा कर रहे हैं, तो सड़कों की भूल-भुलैया से परेशान नहीं होना पड़ेगा. गूगल मैप से होने वाली दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार अब मोबाइल एप के जरिए राहगीरों को रास्ता भी बताएगी. इस एप पर सबसे आसान रास्तों के अलावा आसपास स्थित पेट्रोल पंप, होटल्स जैसी तमाम सुविधाएं भी मिलेंगी. लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह के मुताबिक हमारी कोशिश है कि मध्य प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले यात्रियों को सड़कों की सबसे सटीक और सुरक्षित जानकारी मिले. अब इस तरह काम करेगा एप लोक निर्माण विभाग मध्य प्रदेश में सड़कों पर गड्ढों की शिकायतें सरकार तक पहुंचाने शुरू किए गए लोकपथ एप पर अब नई सुविधाएं शुरू करने जा रहा है. अब यह एप सिर्फ सड़कों के गड्ढों की शिकायतों तक ही सीमित नहीं रहेगा, इस मोबाइल एप के माध्यम से यात्रा के दौरान प्रदेश की सड़कों को भी खोजा जा सकेगा. लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने मोबाइल एप में जोड़े जा रहे नए फीचर्स की जानकारी दी है. ब्लैक स्पॉट्स भी बताएगा एप मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि “इस एप पर ब्लैक स्पॉट्स की भी जानकारी मिलेगी. यानी यात्रा के दौरान इस मोबाइल एप का उपयोग कर रहे हैं तो पहले ही अलर्ट आ जाएगा कि आगे कौन-कौन से ब्लैक स्पॉट्स हैं. जहां दुर्घटनाएं होती रहती है. ऐसे में वाहन चालक पहले ही सतर्क हो जाएगा. इसके अलावा एप पर यात्रा वाले मार्ग पर कहां-कितनी दूरी पर पेट्रोल पंप, होट्ल्स, रेस्टोरेंट आदि मौजूद हैं, इसकी भी जानकारी मिल सकेगी. इस एप के जरिए हमारी कोशिश है कि यात्रियों को क्वालिटी ऑफ जर्नी मिल सके.  

मध्यप्रदेश में नए आपराधिक कानूनों के लागू होने पर समीक्षा बैठक, अपर मुख्य सचिव गृह ने की अध्यक्षता

मध्यप्रदेश में नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक आंतरिक सुरक्षा सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल  मध्यप्रदेश में नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा बैठक अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग  शिव शेखर शुक्ला की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, आंतरिक सुरक्षा की स्थिति तथा संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा करना रहा। इस दौरान आपराधिक न्याय प्रणाली, फॉरेंसिक व्यवस्था, जेल प्रबंधन, साइबर अपराध नियंत्रण, आतंकवाद निरोध, मादक पदार्थ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण सहित राज्य से जुड़े अन्य विशिष्ट मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में भारत सरकार, गृह मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा–II) सु निष्ठा तिवारी एवं संयुक्त निदेशक सु अमृता डेस, उपस्थित रहीं। अतिथियों का औपचारिक स्वागत पुलिस महानिरीक्षक एवं सचिव, गृह विभाग मती कृष्णावेणी देशावतु द्वारा किया गया। समीक्षा बैठक में गृह विभाग एवं पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विधि एवं विधायी कार्य विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, लोक अभियोजन, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) तथा मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने सहभागिता की।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से नारी निकेतन की बालिका को मिला सुरक्षित भविष्य

रायपुर. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से नारी निकेतन की बालिका को मिला सुरक्षित भविष्य जब अपनों से जीवन की राह में सहारा छूट गया, तब छत्तीसगढ़ शासन की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना शालू के जीवन में आशा की नई किरण बनकर आई। ओटगन निवासी शालू आज मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम माहुद मचांदुर निवासी  दीपक कुंजाम के साथ वैवाहिक जीवन में बंध गई। यह विवाह न केवल दो व्यक्तियों का मिलन था, बल्कि संवेदनशील शासन और सामाजिक सहयोग की जीवंत मिसाल भी बना। शालू के जीवन में संघर्षों की लंबी श्रृंखला रही। पिता का कैंसर से निधन और मां का कोरोना काल में असमय चले जाना, फिर पारिवारिक परिस्थितियों के चलते भाई-बहनों से बिछड़ना—इन सभी कठिन परिस्थितियों में शालू अकेली पड़ गई। इस दौरान उनका स्वास्थ्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। ऐसे समय में ओटगन की पूर्व सरपंच मती संजीता दीवान ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए उन्हें सखी सेंटर पहुंचाया, जहां से बेहतर देखभाल के लिए शालू को नारी निकेतन भेजा गया। नारी निकेतन की अधीक्षिका मती प्रीति मिश्रा ने बताया कि संस्थान में शालू की नियमित देखभाल, उपचार और परामर्श से उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ। शालू की सहमति से उनके भविष्य को सुरक्षित करने हेतु जीवन साथी की तलाश प्रारंभ की गई। इसी क्रम में खम्हारडीह क्षेत्र में पुलिस कार्य से जुड़े  दीपक कुंजाम ने शालू से विवाह का प्रस्ताव रखा। आज मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के आशीर्वाद और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आदर्श विवाह संपन्न हुआ। राज्य स्तरीय आयोजन में शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस विवाह को विशेष बना दिया।  दीपक ने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें शालू जैसी संस्कारी और सुशील जीवनसाथी मिली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब और सभी जनप्रतिनिधियों का स्नेह और आशीर्वाद उनके लिए बारात जैसा रहा। शालू ने भी अपने नए जीवन की शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शासन और समाज के सहयोग से उन्हें एक नई पहचान, सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिला है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से शालू जैसी बेटियों को न केवल वैवाहिक सहारा मिल रहा है, बल्कि यह योजना उन्हें आत्मसम्मान, सुरक्षा और नए जीवन की आशा भी प्रदान कर रही है।

राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की होगी स्थापना

रायपुर. मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग छत्तीसगढ़ और एसटीपीआई के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता-मुख्यमंत्री  साय छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।आधुनिक अधोसंरचना, प्रभावी ई-गवर्नेंस प्रणाली और निवेश-अनुकूल नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ आज आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) उपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।   मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि युवाओं में उद्यमिता विकसित करने और उन्हें आईटी एवं आईटीईएस जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय अवसर राज्य के भीतर ही उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल की गई है। इस एमओयू के तहत राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी, जो प्रति वर्ष लगभग 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को प्रोडक्ट डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण की सुविधाएं प्रदान करेगा।                मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को राज्य के भीतर ही इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, फंडिंग और आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उच्च कौशल वाले युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने एसटीपीआई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देशभर में 68 केंद्रों और 24 सेक्टर-विशेष सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से एसटीपीआई का व्यापक अनुभव छत्तीसगढ़ के स्टार्ट-अप और नवाचार इकोसिस्टम को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एमओयू राज्य के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा और छत्तीसगढ़ को डिजिटल नवाचार, तकनीकी उद्यमिता और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनंद, निदेशक एसटीपीआई  रवि वर्मा, चिप्स के सीईओ  प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

जनपद प्रशासन में बड़ा खुलासा, लाखों की वित्तीय अनियमितता में तत्कालीन CEO गिरफ्तार

बलरामपुर जनपद पंचायत वाड्रफनगर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण मरकाम को पुलिस ने लाखों रुपये की शासकीय राशि हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बता दें कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। पूरा मामला वाड्रफनगर पुलिस चौकी क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2013-14 में श्रवण मरकाम वाड्रफनगर जनपद पंचायत में CEO के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान कुटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि गबन का मामला सामने आया था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई। इस मामले में पूर्व में चार अन्य आरोपियों को भी जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश अभी जारी है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस प्रकरण को लेकर वाड्रफनगर पुलिस की जांच आगे भी जारी है। शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का हुआ शुभारंभ

रायपुर. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता, अंत्योदय और संवेदनशील शासन की भावना को साकार करने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि एक समय गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, जिसे इस योजना ने सम्मान और भरोसे में बदल दिया है। मुख्यमंत्री  साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : सामाजिक समरसता का विश्व रिकॉर्ड मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में रायपुर सहित पूरे प्रदेश में कुल 6,412 जोड़े विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक जीवन में बंधे। साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 नवविवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान किया, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि इस अभूतपूर्व आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : सामाजिक समरसता का विश्व रिकॉर्ड मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। इस वृहद आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सरगुजा एवं बस्तर संभाग के आठ जिलों में इस अभियान की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए शासन के साथ-साथ समाज की सहभागिता आवश्यक है तथा अभियान की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेशवासियों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो वर्षों में  ही मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में मानक बोरा मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः प्रारंभ, रामलला दर्शन योजना तथा भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक सहायता जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख भी किया। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी, जिसे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत है और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में जनसहभागिता आवश्यक है। कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण है। कार्यक्रम में विधायक  सुनील सोनी,  पुरंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा,  मोतीलाल साहू,  संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर तथा बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, संचालक डॉ. रेणुका वास्तव अनेक जनप्रतिधि और अधिकारी कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

17 फरवरी को एमपी की समीक्षा: नई दिल्ली में अमित शाह लेंगे राज्य की क्लास

भोपाल  ‘केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 फरवरी को नई दिल्ली में सहकारिता सम्मेलन में समीक्षा करेंगे। इसमें राज्यों के सहकारिता विभागों के क्रियाकलापों की समीक्षा के साथ उनके नवाचारों पर भी चर्चा होगी।प्रदेश के सहकारिता विभाग ने भी इसकी तैयारी शुरू कर दी है।सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग भी इसमें शामिल होंगे। प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश उन्होंने विभाग में किए गए नवाचार एवं उपलब्धियों से संबंधित प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा चाही गई बिन्दुवार जानकारी तैयार की जाए।  दी हिदायत भी इस बात का रखा जाए खास ख्याल जानकारी पूर्णत: अद्यतन हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। मंत्री ने कहा कि प्रजेंटेशन में सहकारिता विभाग की उपलब्धियों के साथ सीपीपीपी मॉडल, चीता, बीज और नवाचारों का भी समावेश किया जाए।

मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से कल यहां उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा जमीन की गाइडलाइन का पुनर्मूल्यांकन कर उसमें रियायत प्रदान करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।  मुख्यमंत्री को गजमाला पहनाकर प्रतिनिधिमंडल ने उनका सम्मान किया। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि इस निर्णय से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों को भी राहत प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भूमि गाइडलाइन दरों में संशोधन करते हुए इस बात का ध्यान रखा गया है कि इससे आम नागरिकों, किसानों, व्यवसायियों सहित सभी वर्ग के लोगों को सहूलियत मिले। उन्होंने कहा कि नई गाडलाइन दरों से आर्थिक विकास को गति मिलेगी।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री महेंद्र आहूजा, श्री दीपक रहेजा, श्री राजीव अग्रवाल, श्री विजय पिंजानी, श्री अजय अग्रवाल, श्री प्रतीक अग्रवाल, श्री मुलकराज शर्मा, श्री रजत चाबड़ा, श्री विलास सुतार, श्री विनोद छितिजा, श्री विजय मोटवानी, श्री सनी सेवलानी तथा श्री गौरव खेतपाल सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

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