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IND vs NAM मुकाबले में टीम इंडिया की नई रणनीति, कई खिलाड़ियों पर गिरी गाज

 नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 के अपने दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम का सामना नामीबिया से होगा. यह मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में आज यानी गुरुवार को खेला जाएगा. टीम इंडिया ने टूर्नामेंट का आगाज जीत के साथ किया था और अब कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम इस लय को बरकरार रखना चाहेगी. दूसरी ओर नामीबिया को इसी मैदान पर नीदरलैंड के खिलाफ हार झेलनी पड़ी थी, ऐसे में वह वापसी की कोशिश करेगा. अभिषेक शर्मा की फिटनेस पर संशय भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की सेहत को लेकर है. अभिषेक पेट में संक्रमण और बुखार से जूझ रहे हैं और उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि उन्हें छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन नामीबिया के खिलाफ उनके खेलने पर संशय बना हुआ है. अगर अभिषेक मैच से बाहर होते हैं तो संजू सैमसन को ओपनिंग का मौका मिल सकता है. सैमसन के पास आक्रामक शुरुआत देने की क्षमता है, जो टीम को पावरप्ले में मजबूती दे सकती है. बुमराह की वापसी से बढ़ेगा आत्मविश्वास पहले मुकाबले में अमेरिका के खिलाफ तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बुखार के कारण नहीं खेल पाए थे. अब वह पूरी तरह फिट बताए जा रहे हैं और उन्होंने मंगलवार को नेट्स में गेंदबाजी अभ्यास भी किया. ऐसे में नामीबिया के खिलाफ उनकी प्लेइंग इलेवन में वापसी लगभग तय मानी जा रही है. अगर बुमराह टीम में लौटते हैं तो मोहम्मद सिराज को बाहर बैठना पड़ सकता है. बुमराह की मौजूदगी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को और धारदार बना देगी, खासकर डेथ ओवर्स में. पाकिस्तान मैच से पहले लय पाना जरूरी अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में कप्तान सूर्यकुमार यादव को छोड़कर बाकी बल्लेबाज खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे. 15 फरवरी को पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले यह मैच भारतीय बल्लेबाजों के लिए लय हासिल करने का सुनहरा मौका होगा. अगर सैमसन और ईशान किशन ओपनिंग करते हैं तो टीम को तेज शुरुआत मिल सकती है. मिडिल ऑर्डर में तिलक वर्मा और इन-फॉर्म सूर्यकुमार यादव बड़ी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं, जबकि रिंकू सिंह फिनिशर की भूमिका निभाएंगे. तीन ऑलराउंडर्स के साथ उतर सकती है टीम भारतीय टीम संतुलन बनाए रखने के लिए तीन ऑलराउंडर्स के साथ उतर सकती है. हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे और अक्षर पटेल टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में गहराई देंगे. स्पिन विभाग की जिम्मेदारी वरुण चक्रवर्ती के कंधों पर रह सकती है, जिसमें उपकप्तान अक्षर पटेल उनका साथ देंगे. तेज गेंदबाजी आक्रमण में अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह की जोड़ी अहम भूमिका निभा सकती है. भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह. भारतीय टीम स्क्वॉड संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, अभिषेक शर्मा, कुलदीप यादव, वॉशिंगटन सुंदर.

गोल्ड-सिल्वर डाउन, शेयर बाजार भी कमजोर—सेंसेक्स 400 अंक टूटा

मुंबई     सोना-चांदी की कीमतों में फिर से गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) आई है. अपने हाई लेवल से दोनों कीमती धातुएं क्रैश नजर आ रही हैं. एक ओर जहां चांदी का भाव एमसीएक्स पर हाई से 1.59 लाख रुपये प्रति किलोग्राम कम है, तो वहीं सोना भी 35,000 रुपये से ज्यादा सस्ता मिल रहा है. कीमती धातुओं के भाव में नरमी के साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को खुलने के साथ ही धड़ाम नजर आया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स (BSE Sensex) ने तो ओपनिंग के साथ ही 400 अंकों से ज्यादा का गोता लगा दिया.  सेंसेक्स-निफ्टी की खराब शुरुआत  शेयर मार्केट में कारोबार ओपन होने पर BSE Sensex अपने पिछले बंद 84,233.64 की तुलना में फिसलकर 83,968.43 पर खुला और फिर तेजी से फिसलता ही चला गया. ये शुरुआती कारोबार में ही 438 अंक की गिरावट लेकर 83,795.65 के लेवल पर आ गया. सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty का भी हाल नजर आया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 25,953.85के मुकाबले गिरावट के साथ 25,906.70 के स्तर पर ओपन हुआ और फिर गिरकर 25,822.30 तक टूट गया. इसके शुरुआती कारोबार में ही 131 अंक की गिरावट आई.  IT Stocks भर-भराकर टूटे मार्केट में गिरावट के बीच सबसे ज्यादा आईटी शेयर फिसले. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (4.50%), Tech Mahindra Share (4.20%), TCS Share (3.80%). HCL Tech Share (3.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. आईटी शेयरों में बीते सप्ताह भी तेज गिरावट देखने को मिली थी, जब अमेरिका में Anthropic AI Tools की एंट्री से कोहराम मचा था और NASDAQ लगातार कई दिन डेढ़ फीसदी के ज्यादा फिसला था.  ये 10 शेयर सबसे बड़े लूजर  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के बीच सबसे बड़े लूजर शेयरों की लिस्ट देखें, तो आईटी शेयरों के अलावा लार्जकैप में Eternal Share (2%), M&M Share (1.10%) फिसला. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Coforge Share (5%), Mphasis Share (4.10%), Presistent Share (3.90%), Godrej Properties Share (2%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैप शेयरों में देखें, तो ARE&M Share (4.10%), CYIENT Share (3.50%), KFintech Share (3%) और FSL Share (2.80%) की गिरावट में ट्रेड कर रहा था.  Gold-Silver हाई से इतना सस्ता  एक ओर जहां शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी रेड जोन में कारोबार करते नजर आ रहे हैं, तो वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना-चांदी भी फिसल गए हैं. 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव बीते कारोबारी दिन के 2,63,018 रुपये प्रति किलोग्राम से टूटकर 2,60,453 रुपये पर आ गया और 1 Kg Silver Price 2,565 रुपये कम हो गया. वहीं हाई लेवल 4,20,048 रुपये प्रति किलो से ये 1,59,595 रुपये तक सस्ती (Silver Cheaper) हो चुकी है.  सोने का भाव भी फिसला है और 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate पिछले बंद 1,58,755 रुपये से गिरकर गुरुवार को खुलते ही 1,57,701 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया. यानी ये 1,054 रुपये सस्ता हुआ. वहीं हाई बीते 29 जनवरी के रिकॉर्ड हाई 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल से ये अभी 35,395 रुपये सस्ता मिल रहा है. 

इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ और चार्जिंग स्टेशन के लिए दिए गए 50 करोड़ रुपये

नव निर्माण के नौ वर्ष: बजट 2026-27  नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास को मिले नए पंख, बजट में 2,111 करोड़ रुपये की घोषणा जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिले 750 करोड़ रुपये, ऑपरेशन हब के रूप में होगा विकास इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ और चार्जिंग स्टेशन के लिए दिए गए 50 करोड़ रुपये लखनऊ प्रदेश में नागरिक उड्डयन और परिवहन अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। इस क्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण में नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास हेतु 2,111 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की। इसमें विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट में नए विकास कार्यों के साथ प्रदेश के अन्य एयरपोर्टों पर हवाई पट्टियों के निर्माण के लिए बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही सड़क परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 400 करोड़ रुपये ईवी बसों की खरीद के लिए स्वीकृत किए गए हैं। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण के दौरान प्रदेश के महत्वाकांक्षी जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट में नए निर्माण कार्यों के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि पीपीपी मोड पर बन रहे इस एयरपोर्ट के प्रथम चरण का विकास कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने यहां प्रस्तावित दो रनवे की संख्या बढ़ाकर पांच रनवे किए जाने का निर्णय लिया है। साथ ही जेवर एयरपोर्ट को एविएशन इनोवेशन एवं रिसर्च सेंटर के अलावा रखरखाव एवं ऑपरेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में हवाई पट्टियों के निर्माण, विस्तार, सुदृढ़ीकरण एवं भूमि अर्जन के लिए 1,100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) के माध्यम से हवाई सुविधाओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में सड़क परिवहन को सुदृढ़ बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने ईवी बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये और बस अड्डों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं परिवहन संरचना के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से बस अड्डों के निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं दुर्घटना के बाद त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री सड़क सेफ्टी विजन योजना के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योगी सरकार की इन पहलों से प्रदेश में हवाई और सड़क परिवहन ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे कनेक्टिविटी, निवेश और आर्थिक विकास को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा।

उज्जैन मेट्रो शहर के रूप में स्थापित हो रहा है, सभी कार्य हो उसी अनुरुप : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गुणवत्ताके साथ समय पर हो सिंहस्थ के सभी विकास कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ 2028 के लिए अनुभवी लोगों से चर्चा कर कार्ययोजना बनाने में लें मदद उज्जैन मेट्रो शहर के रूप में स्थापित हो रहा है, सभी कार्य हो उसी अनुरुप संवेदनशीलता के साथ जनता की कठिनाई को कम करने में बने सहभागी अधिकारी अपने कार्य संपूर्ण जिम्मेदारी के साथ युद्ध स्तर पर कराए पूर्ण अब मुख्यमंत्री निवास से भी होगी सिंहस्थ कार्यों की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में की सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा  उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन में सिंहस्थ 2028 अंतर्गत मंत्री मंडलीय समिति से अनुशंसित अधोसरंचना के प्रगतिरत विकास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व का आयोजन विश्व के लिए अद्वितीय है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस महापर्व के आयोजन पर विश्व की निगाह रहेगी। सिंहस्थ-2028 मध्यप्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पवित्र अनुष्ठानों में शामिल हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलग-अलग विभागों के माध्यम से सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेकर समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैनवासियों से सेवाभाव की तरह कार्य करने का आहवान किया है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री ने की किसानों की फसल की चिंता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 के प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा के दौरान गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिप्रा नदी पर घाट निर्माण के दौरान किसानों को पानी की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए नर्मदा जल की आपूर्ति की जाए। वतर्मान में गेहूं की फसल को सिंचाई के लिए एक पानी की और जरुरत होगी। इसके लिए शिप्रा नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित बनाए रखे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि सभी अधिकारी गंभीरता के साथ काम करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,  संजय दुबे को निर्देश दिए है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के काम में किसी भी तरह की रुकावट न आए। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास पर भी सिंहस्थ सेल गठित कर मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाये और जिन विभागों में अधिकारियों की कमी है, वहाँ पदस्थापना तत्काल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि अनुभवी अधिकारियों के लिए यदि सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारिेयों को रखना है तो उसके लिए भी नियमानुसार कार्यवाही कर तत्काल रुप से उन्हें रखा जाए। सिंहस्थ-2028 के लिए अब रिवर्स कैलेंडर बनाकर निर्माण कार्य तीव्र गति से पूर्ण करें। वर्तमान समय से लेकर सिंहस्थ-2028 तक दो वर्षाकाल का समय आने वाला है। इसलिए समय-सीमा में काम गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न निर्माण एजेसिंयों द्वारा किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की, साथ ही निर्देश दिए कि जो निर्माण एजेंसियां काम कर रही है उनके संसाधनों की भी लगातार मॉनीटरिंग हो। वर्तमान समय माइक्रों मैनेजमेंट से नैनो मैनेजमेंट की ओर जाने का है। युद्ध स्तर की तैयारियां शुरु करना है। सभी अधिकारी 24 घंटे-07 दिन सक्रिय रहें। सिंहस्थ 2028 को बेहतर प्रबंधन के साथ करने के लिए उज्जैन जिले के सभी नागरिकों को जिम्मेदारी के भाव के साथ काम करने के लिए प्रेरित करें, उनको यह लगना चाहिए कि यह हमारा व्यक्तिगत काम है। इसके लिए सभी नागरिकों में जिम्मेदारी के साथ समर्पण का भाव भी पैदा करने के लिए समन्वय बनाकर कार्य करें।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रचलित निर्माण कार्यों की समय-समय पर मॉनीटरिंग हो। उन्होंने सिंहस्थ के संदर्भ में विभागों को समन्वयपूर्वक कार्य करने और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अधिकारियों को निर्देश         1. सिंहस्थ-2028 के लिए होम स्टे, धर्मशाला, स्कूल, कॉलेज आदि में व्यवस्थाओं केलिए आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।         2. उज्जैन शहर से जोड़ने वाले आसपास के गांव में होम स्टे की व्यवस्था के लिए लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाए। सिंहस्थ-2028 मेला क्षेत्र में आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं की अलग-अलग रूपरेखा बनाएं। सिंहस्थ मेले की बाहर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि उसकी समस्त जगहों की  मैपिंग की जाए।         3. उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारी में बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन में  महाशिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी एवं अन्य त्योहारों पर व्यवस्थाओं को प्रायोगिक रूप से बनाए और उसके अनुभवों का लाभ लेते हुए सिंहस्थ के भीड प्रबंधन कार्य योजना बने।         4. उज्जैन शहर से जुड़ने वाले दूसरे जिलों के वैकल्पिक मार्गों का चयन कर लें और इन मार्गों को गुगल मैपिंग के साथ उन्नयन भी कराया जाए, जिससे भीड़ प्रबंधन में इन मार्गों का उपयोग हो सके। साथ ही उज्जैन शहर के महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का भी चयन करें, जिससे भीड़ प्रबंधन आसानी से हो सके।         5.  मंगलनाथ,  भूखीमाता रामघाट के आसपास घाटों को जोड़ने वाले मार्गों को चिन्हित कर उन्नयन करें। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के बाहर सामाजिक सामुदायिक भवन, स्कूल, कॉलेज धर्मशाला बनाने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करें।         6. सिंहस्थ 2028 के लिए काम कर रही निर्माण एजेंसी जो समय पर काम पूरा करें उनको प्रोत्साहन स्वरूप व्यवस्था भी बना कर दें। समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री उज्जैन  गौतम टेटवाल, महापौर  मुकेश टटवाल, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा,  सतीश मालवीय,  जितेन्द्र पंड्या, नगर निगम अध्यक्ष मती कलावती यादव, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त  आशीष सिंह, एडीजी  राकेश गुप्ता, कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह एवं अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।   

किसान संगठनों का राष्ट्रव्यापी बंद, ट्रेड यूनियनों ने भी किया समर्थन

नई दिल्ली  संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। आंदोलन को INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित कई राष्ट्रीय यूनियनों का समर्थन प्राप्त है। संगठनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ मजदूर हड़ताल में भाग ले सकते हैं. बंद के समर्थन में कई बैंक यूनियनों के शामिल होने से देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है. AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज धीमा रह सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? परिवहन सेवाएं कई राज्यों में प्रभावित हो सकती हैं. बस, ऑटो और ट्रक यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक और निजी परिवहन बाधित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है. बैंकिंग सेवाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं और चेक क्लीयरेंस में देरी संभव है. हालांकि, बैंक औपचारिक रूप से बंद नहीं रहेंगे. ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी.बाजार और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है. कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. सरकारी कार्यालयों में ट्रेड यूनियनों के प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रह सकती है, जिससे कामकाज धीमा हो सकता है. स्कूल और कॉलेजों के संबंध में स्थानीय प्रशासन स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है. परिवहन और सुरक्षा कारणों से कुछ जिलों में छुट्टी घोषित की जा सकती है. SKM की किसानों से अपील ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के लाखों मजदूर शामिल हो सकते हैं. एसकेएम ने किसानों से अपील की है कि वे भारी संख्या में प्रदर्शनों में शामिल हों और औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाएं. उनका कहना है कि सरकार की नीतियां केवल कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जिससे आम जनता की आजीविका पर सीधा हमला हो रहा है.  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने समर्थन किया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, ‘आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने सड़कों पर हैं. मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी. किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है.’ उन्होंने सरकार पर किसानों-मजदूरों की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए आगे लिखा, ‘जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नजरअंदाज किया गया. क्या मोदी जी अब सुनेंगे? या उन पर किसी ‘grip’ की पकड़ बहुत मजबूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं.’ कौन-सी सेवाएं रहेंगी सामान्य? अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी. दमकल विभाग, हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन पर असर नहीं पड़ेगा. डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं भी चालू रहेंगी. क्या 12 फरवरी को बैंक बंद रहेंगे? भारतीय रिजर्व बैंक या किसी बैंक की ओर से 12 फरवरी को आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया गया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन की भागीदारी के कारण सेवाओं में आंशिक बाधा आ सकती है. अगर आप 12 फरवरी को बाहर निकलने की प्लान बना रहे हैं तो अपने शहर की परिवहन व्यवस्था की स्थिति पहले से जांच लें. बैंकिंग कार्यों को संभव हो तो ऑनलाइन निपटाएं और बाजार या सरकारी कार्यालय जाने से पहले स्थानीय अपडेट अवश्य देखें. बंद की वजह: किन मुद्दों पर आंदोलन? कई किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:     भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध     चार नए लेबर कोड वापसी की मांग     सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध     पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली     न्यूनतम वेतन में वृद्धि     निर्माण और बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा     कृषि संबंधित कानूनों और नीतियों में बदलाव की मांग कई राज्यों में बस, ऑटो-रिक्शा और ट्रक यूनियनों के भी हड़ताल में शामिल होने की संभावना है, जिससे परिवहन सेवाओं पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? 1. परिवहन सेवाएं कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी ड्राइवर्स यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक व निजी परिवहन प्रभावित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बाधा आने की संभावना है.  2. बैंकिंग सेवाएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं. चेक क्लीयरेंस में देरी की आशंका बनी हुई है. हालांकि, बैंक बंद नहीं होंगे और ऑनलाइन लेन-देन व एटीएम सेवाएं सामान्य रहेंगी. 3. बाजार और व्यापार कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है, जिससे बड़े शहरों में थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. 4. सरकारी कार्यालय ट्रेड यूनियनों के अधिक प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना, जिससे सरकारी कामकाज धीमा हो सकता है. 5. स्कूल और कॉलेज सुरक्षा और परिवहन समस्याओं को देखते हुए, कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर सकता है. जो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी     एंबुलेंस, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं     दमकल विभाग     हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन     डिजिटल बैंकिंग और एटीएम क्या बैंक औपचारिक रूप से बंद रहेंगे? नहीं. भारतीय रिजर्व बैंक या किसी भी बैंक ने 12 फरवरी को अवकाश घोषित नहीं किया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन भागीदारी के कारण सेवा में रुकावट आ सकती है.

केन्या में जल संकट और सूखा, 20 लाख लोग भूख से जूझ रहे

नैरोबी केन्या के उत्तर पूर्वी इलाकों से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केन्या के कई हिस्सों में भीषण सूखे की वजह से 20 लाख से अधिक लोग भुखमरी की कागर पर खड़े हैं। सबसे बुरा असर पशुपालक समुदायों पर पड़ा है जिनका पूरा जीवन अपने पशुओं पर निर्भर रहता है। केन्या के राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया है कि देश के करीब 10 जिले इस वक्त पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। सोमालिया की सीमा से सटे मंडेरा जिले में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि इसे चेतावनी स्तर पर रखा गया है, जिसका मतलब है कि वहां अब हालात काबू के बाहर हो रहें हैं।  पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या इस समय पिछले कई दशकों के सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और विभिन्न राहत संगठनों द्वारा जारी ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश के उत्तर-पूर्वी इलाकों में सूखे की स्थिति भयावह हो गई है, जिससे 20 लाख से अधिक लोग गंभीर भुखमरी का शिकार हैं। केन्या के राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, देश के करीब 10 जिले इस समय सूखे से जूझ रहे हैं। सोमालिया से सटे केन्या के उत्तर-पूर्वी मंडेरा जिले में स्थिति “चेतावनी” स्तर पर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि पानी की गंभीर कमी के कारण पशुओं की मौत हो रही है और बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। जनवरी के अंत में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि यही परेशानी सोमालिया, तंजानिया और यहां तक कि युगांडा तक फैल रही है, जहां लोग इसी तरह के मौसम और पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। हाल के हफ्तों में सोमाली सीमा के पास सूखाग्रस्त इलाकों से झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें मवेशियों को बेहद कमजोर और कुपोषित हालत में देखा जा सकता है। इस संकट की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग और जसवायु परिवर्तन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती का तापमान का चक्र पूरी तरह से बिगड़ गया है। पहले केन्या और आसपास के इलाकों में बारिश का एक निश्चित समय होता था। अब वह समय लगातार छोटा होता जा रहा है। हाल ही में अक्टूबर से दिसंबर के बीच जो बारिश होनी चाहिए थी, वह पिछले कई दशकों के मुकाबले कम रही है। यह इलाका अब जलवायु परिवर्तन की मार झेलने वाला सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया है। बेजुबान जानवरों और मासूम बच्चों पर असर  इस सूखे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सोमालिया सीमा के पास का इलाका, जहां पशुओं को कभी इन परिवारों की संपत्ति और गौरव हुआ करते था। अब हड्डियों का ढांचा बनकर रह गए हैं। पानी और चारे की कमी के कारण हजारों पशु दम तोड़ चुके हैं। पशुओं की मौत का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों की खाने और कमाई पर पड़ा है। दूध और मांस की कमी की वजह से छोटे बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मदद नहीं पहुंची, तो यह स्थिति एक बड़े मानवीय संकट में बदल जाएगी क्योंकि बच्चों के शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म होती जा रही है। पूरे क्षेत्र में हाहाकार  यह परेशानी सिर्फ केन्या तक सीमित नहीं है। जनवरी के अंत में जारी विश्व स्वास्थय संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, यह संकट अब सोमालिया, तंजानिया और युगांडा जैसे पड़ोसी देश भी तेजी से फैल रहा है। पूरी दुनिया में हो रहे कार्बन उत्सर्जन और बढ़ते प्रदूषण का खामियाजा उन गरीब समुदायों को भुगतना पड़ रहा है।

किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी, कृषि में तकनीकी बदलाव की ओर कदम

भोपाल राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत प्रदेश में कृषि रथों का भ्रमण जारी है। इसी क्रम में नरसिंहपुर जिले के सभी 6 विकासखंडों में कृषि रथ चलाया जा रहा है। जिले के किसानों को ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन उर्वरक वितरण), आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत खेती आदि की जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग द्वारा कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, विभागीय कृषि योजनाओं का प्रचार-प्रसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था और पराली प्रबंधन की जानकारी दी गई। किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रॉ रीपर और रीपर कम बाइंडर की तकनीकी जानकारी दी गई। किसानों को जानकारी दी गई कि सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे यंत्र खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी जैसे तीन काम एक साथ करते हैं। इन यंत्रों के उपयोग से न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलती है। उन्होंने किसानों को समझाइश दी गई कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है और वायु प्रदूषण फैलता है। नरवाई न जलाकर उसे खाद के रूप में उपयोग करना ही श्रेष्ठ है। रतलाम जिले में कृषि रथ के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध विषयों जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, आत्मा, मत्स्य पालन आदि पर किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों के मध्य सीधा संपर्क कायम कर नवीन एवं वैज्ञानिकी तकनीकी सुधार की जानकारी कृषकों को दी जा रही है। कृषि रथ द्वारा किसानों को जिले के विभिन्न ग्रामों में जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, पराली न जलाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढावा देने, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था आदि के संबंध में जानकारी दी गई।  

कंधा टकराने पर बढ़ा विवाद, युवक की हत्या के चार आरोपी घंटों में गिरफ्तार

बीयर की बोतल से हमला कर युवक की हत्या   कंधा टकराने की बात को लेकर हुआ था विवाद   चंद्र घंटे के भीतर गिरफ्तार हुए चारों आरोपी  इंदौर जिले के विजयनगर थाना क्षेत्र में मामूली बात को लेकर चार लड़कों ने एक युवक की बीयर की बोतल मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।विजयनगर थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने बताया कि इलाके में रहने वाले गोलू चंद्रवंशी का कंधा टकराने की बात को लेकर एक युवक से विवाद हो गया था।इसके बाद उक्त युवक ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर बीयर की बोतल से गोलू चंद्रवंशी पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल गोलू को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां ईलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।पुलिस ने इस मामले में अखिलेश वासरे, अमोघ रैदास, आकाश कदम और वरुण श्रीनिवास को तत्काल घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस की टीम को देख यह चारों बदमाश नाले में कूद गए थे, जिसके कारण उन्हें गंभीर चोट आई है।आरोपियों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित….

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित…. बिलासपुर  भाजपा मंडल बिलासपुर  में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके तेलीय चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक, अर्थशास्त्री एवं भारतीय जनसंघ के शीर्ष नेताओं में से थे। वे अपने दार्शनिक सिद्धांत ‘एकात्म मानव दर्शन’ के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी की विचारधारा का मूल आधार यह था कि विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित न होकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य को उन्होंने विकास का केंद्र बिंदु माना। उनके अनुसार आर्थिक नीतियों का उद्देश्य केवल उत्पादन और उपभोग बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। वे 1968 में अपने असामयिक निधन तक भारतीय जनसंघ का नेतृत्व करते रहे। भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को अंत्योदय और एकात्म मानववाद का प्रणेता बताते हुए कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का वास्तविक मापदंड है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी के विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। भाजपा मंडल बिलासपुर के महामंत्री ने भी उन्हें निस्वार्थ कर्मयोगी और महान विचारक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया गया अंत्योदय का मंत्र आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण की मजबूत बुनियाद है। राष्ट्र सेवा और समर्पण के उनके आदर्श सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। कार्यक्रम में भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी भाजपा मंडल बिलासपुर के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी मंडल महामंत्री विनायक तिवारी उपाध्यक्ष रवि शंकर सोनी,विजय सोनी,गोविंद सोनी,बच्चू सोनी,किश्शू महार एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रॉपर्टी दामों में तेजी, मध्य प्रदेश में फाइनल हुई 74 हजार लोकेशन की नई गाइडलाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों के लिए जमीन और मकान खरीदना भी मंहगा होने जा रहा है. राजस्व और पंजीयन विभाग ने प्रदेश के करीब 74 हजार लोकेशन का विस्तृत सर्वे पूरा कर नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार कर लिया है. यह गाइडलाइन 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी. हालांकि अब इस प्रस्ताव को पहले उप जिला मूल्यांकन समिति, फिर जिला मूल्यांकन समिति में चर्चा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा. वहां से अंतिम स्वीकृति मिलते ही नई दरें प्रभावी हो जाएंगी. कलेक्टर गाइड लाइन में पहली बार एआई का प्रयोग इस बार कलेक्टर गाइडलाइन के तहत दर निर्धारण की प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से बिलकुल अलग और हाईटेक बनाई गई है. पंजीयन विभाग ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया है. एमपी इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सहयोग से जिलों की एक साल पुरानी और वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया. इससे यह स्पष्ट हुआ कि बीते एक वर्ष में किन क्षेत्रों में नया विकास हुआ है. सैटेलाइट इमेज के जरिए यह चिह्नित किया गया कि जहां पहले खाली जमीन थी, वहां अब प्लाटिंग, कॉलोनी, सड़क या व्यावसायिक निर्माण तो नहीं हो गया. जिन स्थानों पर तेजी से विकास हुआ है. डायवर्सन के डेटा का किया गया व्यापक विश्लेषण नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कृषि भूमि के आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में हुए डायवर्सन का डेटा लिया गया है. जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि का स्वरूप बदल चुका है और विकास कार्य शुरू हो गए हैं, वहां अब कृषि दरों के बजाय प्लाट के अनुरूप दरें तय की जाएंगी. कृषि विभाग से भी भूमि उपयोग से जुड़ी जानकारी लेकर क्रास वेरिफिकेशन किया गया है. इससे जमीन की दरें वास्तविक बाजार मूल्य के ज्यादा करीब तय करने का दावा किया जा रहा है. भोपाल सहित प्रदेशभर में प्राइम लोकेशन पर बढ़ोत्तरी अधिकारियों के अनुसार भोपाल की करीब 500 लोकेशन सहित प्रदेश के कई प्रमुख शहरों और ग्रामीण-शहरी सीमावर्ती इलाकों में दरों में बढ़ोतरी संभावित है. खासतौर पर उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जहां बाजार में प्रापर्टी का वास्तविक सौदा गाइडलाइन से अधिक कीमत पर हो रहा है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 55 जिलों के 60 हजार स्थानों पर औसतन 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी. तकनीकी सर्वे में यह सामने आया था कि कई क्षेत्रों में सुविधाओं और निर्माण गतिविधियों के कारण जमीन का बाजार भाव पहले से कहीं अधिक हो चुका है. कलेक्टर गाइड लाइन में एआई के प्रयोग से यह होगा लाभ राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एआई द्वारा किए गए सर्वे और सैटेलाइट इमेज के आधार पर कलेक्टर गाइडलाइन के निर्धारण से कई फायदे होंगे. इससे जहां अंडरवैल्यू रजिस्ट्रियों पर रोक लग सकेगी, वहीं नई गाइडलाइन लागू होने के बाद बाजार मूल्य के अनुरूप ही दरें तय होंगी. कृषि से आवासीय या व्यावसायिक बनी जमीन का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा. वहीं कम कीमत दिखाकर होने वाली रजिस्ट्रियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा. इससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी. साथ ही सभी जिलों में एक समान और वैज्ञानिक पद्धति से दर निर्धारण संभव होगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद होगी लागू मध्य प्रदेश पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक अमित तोमर ने बताया कि “नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार किया जा रहा है. जल्द ही संबंधित समितियों की बैठक बुलाकर प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में नई दरें लागू कर दी जाएगी. तोमर ने बताया कि नई व्यवस्था से जहां पारदर्शिता बढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं आम खरीदारों और निवेशकों के लिए प्रापर्टी सौदे पहले से महंगे हो सकते हैं.

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार  भोपाल  वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है जिसका एक ऐतिहासिक महत्व ही नहीं देशभक्त की भावना और मातृभूमि के प्रति सम्मान प्रकट के लिए है यह गीत वकील चंद चटर्जी द्वारा रचित किया गया था यह उसे अवसर का है जब देश गुलामी की जंजीरों में झगड़ा हुआ था तब स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना इसका गायन राष्ट्रीय गौरव एवं बलिदानों की याद और देश प्रेम के समर्पण के प्रतीक स्वरूप है भारत की संविधान सभा ने वर्ष 1950 भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। शुरू में वंदे मातरम की रचना स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास “आनंदमठ” (1882 में प्रकाशित) में शामिल किया गया था। इसे पहली बार 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में भी रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। ‘वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है। ‘सुजलाम सुफलाम’  जो भारत माता की सुंदरता (स्वच्छ जल, फलदार, शीतल हवा, फसलों से हरी-भरी) का वर्णन करता है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा का स्रोत रहा है। श्री बंकिम चंद्र चटर्जी ने यह गीत बंगाल के हुगली नदी के पास वर्ष 1876 में लिखा था, और इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी फिर यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास पुस्तक ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया, जो संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित था। बंगाल विभाजन के विरोध में यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य नारा बन गया था, जिससे देशभर में स्वदेशी आंदोलन को बल मिला। इसका प्रथम गायन वर्ष 1896 में रविंद्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार लय और संगीत के साथ गाया। एवं रायहाना तैयबजी कांग्रेस के एक अधिवेशन में वंदे मातरम गाने वाली पहली मुस्लिम महिला थीं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रमुख व्यक्ति थीं और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए जानी जाती थीं वंदे मातरम विवाद के विषय में इतिहास के अनुसार यह था कि मुख्य रूप से इसके कुछ अंश को लेकर उठा था जिस पर कुछ लोगों ने आपत्ति उठाई थी 1937 में कांग्रेस ने भी राष्ट्रगान बनाने हेतु निर्णय लिया था और यह विवाद देश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बना रहा यह विवाद केवल उसे मुद्दे पर आधारित रहा जो भारत माता को देवी के रूप में चित्रित करती है सभी धर्म विशेष कर इस्लाम को भी यह गीत स्वीकार था इसलिए 24 जनवरी 1950 में भारत सरकार ने  ‘जन गण मन’ के साथ ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। इसकी संरचना:  में छह छंद हैं, शुरु आती दो संस्कृत में और बाकी बांग्ला में हैं। इसका महत्व: यह है की यह गीत भारत के लोगों को एकता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति गहरी भक्ति सिखाता है, और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया।वंदे मातरम गीत यह शोधपत्र राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान हैदराबाद राज्य और विशेष रूप से हैदराबाद, कर्नाटक के वंदे मातरम आंदोलन पर केंद्रित है। वंदे मातरम आंदोलन हैदराबाद के निज़ाम राज्य के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रभावी और सबसे लोकप्रिय नारा था। वंदे मातरम, यह एक शब्द ऐसा है जो हमें इतिहास में ले जाता है। यह हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को, आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को यह नया साहस प्रदान करता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जिसे पूरा न किया जा सके । ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम भारतीय हासिल न कर सकें। वंदे मातरम का अर्थ है “मैं तुम्हें नमन करता हूँ, माँ” “मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, माँ,” जिसमें ‘माँ’ भारत माता को कहां गया है जो की हमारी मातृभूमि की प्रतीक है,  जो देश के प्रति गहरे प्रेम, सम्मान और भक्ति को व्यक्त करता है, विशेषकर वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम की भावना और भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका को याद करना है। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है; यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणादायक संकल्प था भारत सरकार ने जैसा की अपेक्षा थी ऐसे वंदे मातरम गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों का सम्मान किया है जिसके लिए हम कृतज्ञ हैं डॉ.राजेंद्र प्रसाद आचार्य  पूर्व सदस्य धर्मस्य विशेषज्ञ समिति मध्य प्रदेश शासन

मारुति का कमाल: सड़क और रेल दोनों पर दर्ज हुआ नया कीर्तिमान

 नई दिल्ली आपने सड़क पर दौड़ती मारु़ति की रफ्तार तो खूब देखी होगी. लेकिन अब रेल की पटरियों पर भी मारुति की स्पीड देख लीजिए. मारुति सुजुकी ने साल 2025 में गाड़ियों की ढुलाई के मामले में एक नया कीर्तिमान बना दिया है. कंपनी ने कैलेंडर ईयर 2025 में रेल के जरिए 5.85 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजी हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा रेल डिस्पैच आंकड़ा है. साल 2024 के मुकाबले इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि मारुति के लॉजिस्टिक्स सिस्टम में रेलवे की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. रेल से भेजी जा रही हर चौथी कार अब मारुति सुजुकी की कुल गाड़ियों में से करीब 26 फीसदी गाड़ियां रेल के जरिए डिस्पैच हो रही हैं. साल 2016 में यह हिस्सा सिर्फ 5.1 फीसदी था. आंकड़ों के हिसाब से देखें तो पिछले 10 साल में रेल से भेजी जाने वाली गाड़ियों की संख्या सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है. 2016 में जहां यह संख्या करीब 77 हजार यूनिट थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 5.85 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई. कंपनी के मुताबिक रेल ट्रांसपोर्ट के बढ़ते इस्तेमाल से साल 2025 में करीब 88 हजार मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव हुआ. इसके साथ ही 6.8 करोड़ लीटर से ज्यादा ईंधन की बचत भी हुई. माना जा रहा है कि इससे देश के कई बड़े वाहन कॉरिडोर पर सड़क ट्रैफिक का दबाव भी कम हुआ है. साल 2025 में मारुति सुजुकी के रेल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में दो अहम बदलाव देखने को मिले. कंपनी ने अपने मानेसर प्लांट में इन प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की, जिसे भारत में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सबसे बड़ी साइडिंग बताया जा रहा है. इसके अलावा मारुति ने पहली बार कश्मीर घाटी तक रेल के जरिए गाड़ियों की डिलीवरी की. यह खेप चिनाब रेल ब्रिज के रास्ते भेजी गई. फैक्ट्री से सीधे रेल कनेक्शन का असर गुजरात और मानेसर प्लांट में मौजूद इन प्लांट रेलवे साइडिंग से भेजी गई गाड़ियों का हिस्सा 2025 में मारुति के कुल रेल डिस्पैच का 53 फीसदी रहा. यह दिखाता है कि कंपनी अब सीधे फैक्ट्री से जुड़े रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा भरोसा कर रही है. मारुति सुजुकी साल 2013 से रेलवे के जरिए वाहन ढुलाई कर रही है. उस वक्त मारुति देश की पहली कार कंपनी बनी थी, जिसे ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर का लाइसेंस मिला.  फाइनेंशियल ईयर 2014-15 से अब तक कंपनी 22 डिस्पैच लोकेशन से 28 लाख से ज्यादा गाड़ियां रेल के जरिए भेज चुकी है. ये गाड़ियां देश के 600 से ज्यादा शहरों तक पहुंचाई गई हैं. फिलहाल कंपनी के पास 45 से ज्यादा फ्लेक्सी डेक रेक हैं, जिनमें हर एक रेक करीब 260 गाड़ियां एक बार में ले जाने की क्षमता रखता है. मारुति सुजुकी का कहना है कि आने वाले सालों में वह रेल के जरिए होने वाली गाड़ियों की ढुलाई को और बढ़ाएगी. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक अपने कुल आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स में रेल का हिस्सा करीब 35 फीसदी तक पहुंचाने का है.  जाहिर है कि, इतनी भारी मात्रा में यदि कारों को आम ट्रांसपोर्ट (ट्रकों) द्वारा एक जगह से दूसरी जगह तक भेजा जाता तो इससे लाखों लीटर डीजल की खपत होती. साथ ही भारी वाहनों की सड़क पर मौजूदगी से जो ट्रैफिक जाम जैसी समस्या होती वो अलग. इसके अलावा रोड ट्रांसपोर्ट के चलते वाहनों की डिलीवरी में भी देरी होती, जिसका सीधा असर कारों के वेटिंग पीरियड पर भी देखने को मिलता. 

Maha Shivratri 2026 Date & Muhurat: इस पावन महासंयोग में भोलेनाथ करेंगे हर कामना पूर्ण

हर साल महाशिवरात्रि का इंतजार शिवभक्तों को बेसब्री से होता है। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इसे हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस खास दिन पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव-शक्ति को पूजा जाए तो हर कामना पूरी होती है। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं। माना जाता है इस दिन की गई पूजा और इस दिन रखे गए व्रत से सुख-समृद्धि आती है और हर रूका हुआ काम पूरा हो जाता है। हर बार की तरह इस बार भी लोग महाशिवरात्रि की तारीख को लेकर कन्फ्यूज हैं।  महाशिवरात्रि की तारीख और मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल फाल्गुन महीने में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी से शुरु होगी। इसका समय शाम को 5:04 से शुरू होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 16 फरवरी की शाम साढ़े 5 बजे होगी। इस वजह के महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होगी। इसी दिन भगवान शिव की पूजा होगी और इसी दिन व्रत रखा जाएगा। बात करें पूजा के शुभ मुहूर्त की तो 15 फरवरी की शाम 5:54 बजे से लेकर रात 12:12 बजे के बीच कभी भी महाशिवरात्रि की पूजा की जा सकती है। अगले दिन दोपहर 3 बजे तक इस व्रत का पारण कभी भी किया जा सकता है। बन रहा है ये खास योग इस साल की महाशिवरात्रि कई वजह से खास होने वाली है। इस दिन कई योग एक साथ बन रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस महासंयोग से हर कामना पूरी हो सकती है। ऐसे में इस दिन व्रत रखना काफी फलदायी होगा। इस साल महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। वहीं अभिजीत मुहूर्त के साथ ही इस दिन भद्रावास योग का भी संयोग बनने वाला है। इस महासंयोग को काफी दुर्लभ माना जाता है।

बड़ी डील के बाद भारत को मिली अहम भूमिका: अमेरिकी कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की तैयारी

नई दिल्ली  भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. अब एक और अच्छी खबर आई है. भारत अब अमेरिकी कंपनियों का सहारा बनेगा. जी हां, खुद अमेरिका का कहना है कि भारत अब चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए नया ठिकाना होगा. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक नया अड्डा हो सकता है. कारण कि यहां लोग हैं और मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए इंपोर्ट के मामले में भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है. दरअसल, फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जैमिसन ग्रीर ने ये बातें कहीं. जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही जगह है, तो उन्होंने साफ कहा कि हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन अमेरिका में हों या जितना हो सके घर के पास हों. लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन से हटते हैं तो सप्लाई चेन को बदलना पड़ता है. भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है. वहां बहुत सारे लोग हैं, मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है.’ भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां हमें दूसरे देशों से आयात करना हो, वहां भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है,बशर्ते व्यापार संतुलित और निष्पक्ष हो.’ अमेरिका का यह बयान भारत के लिए बड़ा संदेश है. अमेरिका अब भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. भारत की युवा आबादी, बढ़ती फैक्ट्री क्षमता, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे आकर्षक बनाती हैं. कई अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में प्लांट लगा रही हैं. ऐपल, गूगल, अमेजन, टेस्ला जैसे नाम इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. इससे क्या फायदा होगा? इस डील के बाद दोनों देशों को फायदा होगा. भारत को अमेरिकी बाजार में ज्यादा निर्यात का मौका मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी आएगी. वहीं, अमेरिका को सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन मिलेगी, चीन पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. साउथ एशिया में भारत अब अमेरिका का विश्वसनीय साथी बन रहा है. न सिर्फ ऊर्जा में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भी. भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर या ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है. ‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ इंटरव्यू में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: ‘संक्षिप्त उत्तर हां है. उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है.’ सप्लाई चेन पर ग्रीर का पूरा बयान क्या है? फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहती हैं, तो क्या भारत सही जगह होगी, तो इस पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन यहां यूनाइटेड स्टेट्स में हों और जितना हो सके घर के पास हों. हम जानते हैं कि जब आप ग्लोबलाइज़ेशन से हटते हैं और जब आप एक ज़्यादा मज़बूत और सुरक्षित इकॉनमी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारे देश के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का एक प्रोसेस होता है. किसी न किसी पॉइंट पर आपको सप्लाई चेन को इधर-उधर करना ही होगा; भारत इसके लिए एक रास्ता हो सकता है. उनके पास वहां बहुत सारे लोग हैं, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है. बेशक, हम यह पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सबसे पहले और सबसे ज़रूरी हो और अमेरिकन वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां तक हम दूसरे देशों से इंपोर्ट करना चाहते हैं, भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है, जब तक यह बैलेंस्ड और फेयर हो.’ भारत पर अब कितना टैरिफ है? भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. ट्रेड डील के साथ ही अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. एडिशनल टैरिफ भी हटा दिया है.

देखें पालमपुर में खुला नया ट्यूलिप गार्डन, ख्वाब जैसा अनुभव

पालमपुर  हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में धौलाधार की वादियों में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन सैलानियों के लिए खोल दिया गया है. कश्मीर के बाद देश का दूसरा और प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ वर्ष पूर्व पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था. यहां पर ट्यूलिप्स की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है.  यह गार्डन हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा एवं पर्यटन को अग्रसर करने में मदद कर रहा है. गौर रहे कि कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन में चर्चित ‘देखा एक ख्वाब को सिलसिले हुए’ गाना शूट हुआ था और यह गाना ट्यूलिप से जोड़ा जाता है. जानकारी के अनुसार, पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान केंद्र सरकार और सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है. उन्होंने बताया कि 5 साल में 23 लाख ट्यूलिप तैयार करने का लक्ष्य रखा है. सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. सीएसआईआर के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने बताया कि जब से यह गार्डन खोला गया है कि तब से अब तक 4 लाख से ऊपर दर्शक यहां आ चुके हैं. इस बार भी दर्शकों  का आंकड़ा एक लाख से अधिक रहने की संभावना है. डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि  संस्थान कुछ कम्पनी के  के साथ मिलकर बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा हैं इसमें और ऑफ सीजन में ट्यूलिप लेने की कोशिश की जा रही है. इस वर्ष दिल्ली मुख्यालय में भी 1000 से ज्यादा ट्यूलिप लगाए गए है और उन्हें भी आम जनता के लिए खोला दिया गया है. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है.गौर रहे कि हालैंड में ट्यूलिप के फूलों की सबसे अधिक पैदावार होती है और वहीं से अन्य देश इन्हें आयात करते हैं. भारत में भी हालैंड से ही ट्यूलिप मंगवाए जाते रहे हैं. हालांकि, अब आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के प्रयासों से देश में फूलों की खेती में एक बड़े बदलाव हुआ है.

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