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2027 वर्ल्ड कप मिशन पर हिटमैन फोकस्ड: भारत के लिए ट्रॉफी जीतना ही सपना

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को टी20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब दिलाया, लेकिन उनके दिल में विश्व कप 2023 का खिताब न जीत पाने का गम अभी भी जिंदा है। रोहित उस कसक को मिटाने के लिए अगला वनडे विश्व कप खेलने और जीतने के प्रति दृढ़संकल्पित हैं। रोहित शर्मा ने बुधवार को एक आईसीसी इवेंट में कहा, “वह सिर्फ वनडे विश्व कप 2027 खेलना नहीं चाहते हैं, बल्कि 2023 में अहमदाबाद में फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हारने वाली ट्रॉफी उठाने के लिए बेताब हैं। पूर्व कप्तान ने कहा, “मैं 50-ओवर का विश्व कप देखते हुए बड़ा हुआ हूं। उस समय कोई टी20 विश्व कप नहीं था, कोई आईपीएल नहीं था। वह क्रिकेट का सबसे ऊंचा स्तर था, जो हर चार साल में होता था। इसलिए, बेताबी थी। उस एक ट्रॉफी का इतना ज्यादा बोझ था। मैं सच में वह ट्रॉफी चाहता हूं, इसलिए मैं कड़ी मेहनत करने और उसे पाने के लिए अपनी पूरी ताकत और काबिलियत से सब कुछ करने की कोशिश करूंगा। मैं वहां जाकर अपने देश के लिए विश्व कप जीतना चाहता हूं।” टी20 और टेस्ट फॉर्मेट से संन्यास ले चुके रोहित शर्मा की उम्र और फिटनेस की वजह से 2027 विश्व कप में खेलने को लेकर सवाल था। पिछले 6 महीने में रोहित ने अपनी फिटनेस पर काम किया और अपना वजन कम किया है। साथ ही उनकी बल्लेबाजी में भी जोरदार बदलाव दिखा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में उनका बल्ला बेशक नहीं चला था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रोहित ने अपनी बल्लेबाजी से रोमांचित किया था। फिटनेस और फॉर्म के प्रति रोहित की सजगता देखते हुए विश्व कप 2027 को लेकर उनके समर्पण का अंदाजा लगाया जा सकता है। मौजूदा समय में वनडे फॉर्मेट के बेहतरीन सलामी बल्लेबाजों में से रोहित शर्मा ने 282 वनडे की 274 पारियों में 33 शतक और 61 अर्धशतक की मदद से 11,577 रन बनाए हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव दमोह जिले के नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव में होंगे शामिल

भोपाल. नोहटा स्थित ऐतिहासिक नोहलेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित दस दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव में शामिल होंगे। यह आयोजन संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेन्द्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन में चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को ही छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम में महाशिव रात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित गरीब परिवारों की कन्याओं के सामुहिक विवाह समारोह में भी शामिल होंगे। नोहलेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व नोहटा में स्थित नोहलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। यह मंदिर कलचुरी कालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण 10वीं–11वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। मंदिर की शिल्पकला, अलंकृत स्तंभ, विशाल गर्भगृह एवं कलात्मक नक्काशी आज भी दर्शकों को उस युग की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती है। पुरातत्वविदों के अनुसार नोहलेश्वर मंदिर मध्य भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, जहां प्राचीन काल से ही श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते आ रहे हैं। यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। महोत्सव की विशेषताएं महोत्सव के दौरान देशभर के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समा बॉध रहे है। साथ ही, धार्मिक, सांस्कृतिक संध्याएं, कार्यशालाएं, महिला सम्मेलन, किसान गोष्ठी और पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है।  

शतरंज बदला, रणनीति बदली; गहरी समझ ही बनाती है चैंपियन: विश्वनाथन आनंद

मदुरै (तमिलनाडु) पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने गुरुवार को यहां कहा कि ऐसे युग में जहां खिलाड़ी कंप्यूटर से मिलने वाली सहायता से अभिभूत हैं तब खेल की गहरी समझ आधुनिक शतरंज में एकमात्र असली निर्णायक कारक बन गई है। आनंद ने तीन दिवसीय शतरंज कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में कहा, ‘‘दिलचस्प बात यह है कि आपको जितना अधिक ज्ञान उपलब्ध कराया जाता है, उतना ही कम आप जान पाते हैं। यदि हर दिन आपको 20-30 नए निष्कर्ष मिलते हैं तो आप उन्हें कैसे समझ पाएंगे। मेरा मानना है कि आज के शतरंज खिलाड़ियों को अलग करने वाली एकमात्र चीज गहरी समझ है।’’ कई साल पहले जब आनंद ने कंप्यूटर का उपयोग करना सीखा था, तब का उदाहरण देते हुए इस ग्रैंडमास्टर ने कहा कि नए विचारों के प्रति खुला रहना मददगार होता है, लेकिन बारीकियों को समझना एक खिलाड़ी को नए स्तर पर ले जाता है। आनंद ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि शतरंज में महारत हासिल करना रटने के बजाय पैटर्न को पहचानने पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा दिमाग हमारी क्षमता से कहीं अधिक पैटर्न बनाता है। किसी का खेल देखने के हफ्तों बाद अक्सर खिलाड़ियों के दिमाग में नए विचार आ जाते हैं। उन्हें इसका अहसास नहीं होता है कि वे कहीं और से कुछ नकल कर रहे हैं।’’  

दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के रिसर्च फेलोशिप के पोस्टर और वेबसाइट का हुआ विमोचन

संस्थान द्वारा प्रकाशित 7 पुस्तकों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “Mahakal: The master of time” वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले “41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव” के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा। पूज्य आचार्य श्री मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है। वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक श्री सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है। भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए। उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे।  

टीम इंडिया का तूफानी प्रदर्शन, दूसरे मैच में नामीबिया के सामने 210 रनों की चुनौती

नई दिल्ली दिल्ली के अरुण जेलटी स्टेडियम में भारत और नामीबिया के बीच खेले जा रहे विश्व कप के मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 209 रन बनाए हैं। नामीबिया को अब निर्धारित 20 ओवरों में 210 रनों का विशाल स्कोर बनाना है। नामीबिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया लेकिन उसका यह फैसला सही साबित नहीं हुआ। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने शानदार शुरुआत की। संजू सैमसन ने आते ही 3 गगनचुंबी छक्के लगाए। वे 8 गेंदों में 22 रन बनाकर आउट हुए। उसके बाद ईशान किशन ने मोर्चा संभाला जिन्होंने 20 गेंदों में ताबड़तोड़ अर्धशतक जड़ा। वे 61 रन बनाकर आउट हुए। भारत की ओर से हार्दिक पांड्या ने 28 गेंदों में 52 रनों की पारी खेली। तिलक वर्मा ने 25 रन बनाए वहीं, सूर्यकुमार यादव 12 रन बनाकर आउट हुए। भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 209 रन बनाए हैं। नामीबिया ने आखिरी दो ओवरों में शानदार गेंदबाजी की और भारत के एक के बाद एक विकेट लिए जिससे भारतीय टीम 209 रनों पर ही रुक गई। अब क्या 210 रनों के स्कोर का नामीबिया पीछा कर पाएगी जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ।   पिछले मैच में कठिन पिच पर संघर्ष करने के बाद, भारतीय बल्लेबाज दिल्ली के छोटे मैदान पर अपनी छक्के लगाने की लय वापस पाने के लिए बेताब होंगे। संजू सैमसन को आज ओपनिंग का मौका मिल सकता है क्योंकि अभिषेक शर्मा पेट की बीमारी के कारण शायद न खेलें। वहीं, दूसरी ओर नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने अपनी टीम को बिना किसी डर के नामीबियाई अंदाज में लड़ने का आह्वान किया है। दर्शकों को एक हाई-स्कोरिंग मुकाबले की उम्मीद है।

रूस का कड़ा फैसला, WhatsApp, Facebook और YouTube पर प्रतिबंध

रूस टेलीग्राम पर रोक लगाने के बाद रूस की पुत‍िन सरकार ने अमेर‍िकी सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म्‍स पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मीड‍िया र‍िपोर्टों के अनुसार, रूस में वॉट्सऐप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय अमेर‍िकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई है। कहा जा रहा है क‍ि वहां लोग इन पॉपुलर ऐप्‍स को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। बुधवार को रूस ने पॉपुलर मैसेजिंग ऐप Telegram पर रोक लगा दी थी। सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, ताकि लोग सरकारी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने लगें। रूस की नियामक संस्था ‘रोसकोमनाडजोर’ ने सुरक्षा का हवाला देते हुए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। अब अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी रोक लग गई है। इन वेबसाइट्स के डोमेन नाम को रूस के राष्ट्रीय डोमेन नेम सिस्टम (DNS) से हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुतिन सरकार ने सिर्फ अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी रोक लगाई है। इससे प्रभावित हुई वेबसाइट्स में बीबीसी, डॉउचा वेले, रेडियो फ्री यूरोप रेडियो लिबर्टी शामिल हैं। इसके अलावा, टॉर ब्राउजर (Tor Browser) को भी ब्लॉक कर दिया गया है, जिसका इस्तेमाल गुमनाम ब्राउजिंग के लिए किया जाता था। राष्ट्रीय DNS सिस्टम इस्तेमाल करना हुआ अनिवार्य बता दें कि रूस में इंटरनेट सेवा देने वालों के लिए देश के राष्ट्रीय DNS सिस्टम का इस्तेमाल करना अनिवार्य हो गया है। यह सिस्टम Roskomnadzor नाम की सरकारी एजेंसी की निगरानी में काम करता है। सिस्टम का काम “सॉवरेन इंटरनेट” कानून के तहत इंटरनेट कंट्रोल को लागू करना है। क्यों उठाया रूस ने ये कदम? कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रूस ने यह कदम देश में विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया वेबसाइट्स के इस्तेमाल को लगभग खत्म कर देने के लिए उठाया है। हालांकि, इससे रूस में रहने वाले लोग कई ग्लोबल सर्विस और खबरों के सोर्स से दूर हो गए हैं। वॉट्सऐप कॉल‍िंंग फीचर पर पहले से बैन बता दें कि रूस में पहले से ही वॉट्सऐप की कई सर्विस पर बैन लगा हुआ है। पिछले साल WhatsApp और Telegram की कॉलिंग फीचर पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा, रूस ने दिसंबर में ऐपल के फेसटाइम और स्नैपचैट को भी देश में बैन कर दिया था।

पुलिस अधिकारियों की विधिक दक्षता बढ़ाने के लिये मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल में 2 दिवसीय सेमिनार संपन्न

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में विगत दिनों अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा सूचना का अधिकार अधिनियम विषयों पर आयोजित 2 दिवसीय सेमिनार का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस सेमिनार का मुख्‍य उद्देश्य अधिकारियों की विधिक समझ को सुदृढ़ करना, संवेदनशील प्रकरणों में विधि अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करना तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी पालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। सेमिनार में मध्यप्रदेश पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए अधिकारियों को अधिनियमों के नवीनतम संशोधनों और माननीय न्यायालयों द्वारा दी गई कानूनी व्याख्याओं से अवगत कराया गया।साथ ही केस स्टडीज के माध्यम से जटिल प्रकरणों के प्रभावी क्रियान्वयन और विधिक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पक्षों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के उप निदेशक डॉ.  संजय कुमार अग्रवाल ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंटरनेशनल पैरा स्विमर श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दी बधाई

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दुनिया के सबसे मुश्किल समुद्री चैनलों में से एक, न्यूज़ीलैंड के कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्मश्री और तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड जीतने वाले श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया ने इतिहास रच दिया है। इस शानदार कामयाबी के साथ, वे कुक स्ट्रेट को जीतने वाले एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं। उनकी यह असाधारण कामयाबी देश और मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया के ज़बरदस्त जज़्बा और पक्का इरादा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहेगा।  

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थ के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध निर्माण, तस्करी एवं खेती के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार सख्त कार्यवाही की जा रही है। इसी कार्यवाही के परिणामस्वरूप राजगढ़ एवं नीमच जिले में की गई दो अलग-अलग बड़ी कार्रवाइयों में पुलिस ने 21 करोड़ 97 लाख रूपए से अधिक के मादक पदार्थ (एमडी ड्रग्‍स एवं अफीम के पौधे) जब्‍त किए है। नीमच- 9.76 क्विंटल अवैध अफीम के हरे पौधे जब्‍त — कीमत लगभग 97 लाख 60 हजार रूपए जिले की पुलिस चौकी जाट को 11 फरवरी को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्रामलुहारिया जाटमें कपास की फसल की आड़ में अवैध अफीम की खेती की जा रही है। सूचना पर पुलिस द्वारा तकनीकी साधनों एवं ड्रोन सर्चिंग के माध्यम से पुष्टि कर कार्रवाई की गई।पुलिस टीम द्वारा मौके से 11,600 नग हरे पौधे (कुल वजन 09 क्विंटल 76 किलोग्राम) अफीम के पौधे जब्‍त किए गए। कुल बरामद किए गए है। जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 97 लाख 60 हजार रुपयेहै। आरोपी के विरूद्ध एनडीपीएस एक्‍ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। 

एआई पर वैश्विक मंथन में लूला की एंट्री, भारत दौरे से बढ़ेगी रणनीतिक साझेदारी

नई दिल्ली विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इंसियो लूला दा सिल्वा भारत के दौरे पर पहुंचेंगे। इस दौरान वे एआई-इम्पेक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति लूला यहां पहुंचने वाले हैं। 19-20 फरवरी को एआई इम्पेक्ट समिट का आयोजन होगा, जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय वार्ता 21 फरवरी को होगी। ब्राजील के राष्ट्रपति 21 फरवरी को भारत की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, भारत के उपराष्ट्रपति समेत अन्य अधिकारियों से भी उनकी मुलाकात होगी। राष्ट्रपति लूला अपने बिजनेस डेलिगेशन समेत अन्य अधिकारियों के साथ भारत पहुंचेंगे। इससे पहले एमईए ने जानकारी दी थी कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी भारत पहुंचने वाले हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय दौरे पर भारत आएंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत में रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरे के दौरान पीएम मोदी और मैक्रों हॉरिजोन 2047 रोडमैप में बताए गए कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, नेता आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में भी सहयोग शामिल है। दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करने के लिए मुंबई में उपस्थित होंगे। इस इवेंट को दोनों देशों में पूरे साल 2026 तक मनाया जाएगा। राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पेक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। एमईए प्रवक्ता ने बताया कि अभी और भी कई अन्य नेता इस समिट में शामिल होने वाले हैं, जिनके बारे में बाद में जानकारी साझा की जाएगी। इसमें दुनिया भर के नेता, नीति बनाने वाले, इंडस्ट्री और एक्सपर्ट शामिल होंगे, ताकि गवर्नेस, नवाचार और स्थिर विकास के लिए एआई की क्षमता को दिखाया जा सके और उस पर चर्चा की जा सके।

आचार्य संतोषदास जी (सतुआ बाबा) का उप मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय स्वागत व अभिनंदन

भोपाल. महामंडलेश्वर काशी पीठ आचार्य  संतोषदास जी (सतुआ बाबा) का उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने अपने अमहिया (रीवा) निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य जी का सानिध्य एवं आशीर्वाद सदैव समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उप मुख्यमंत्री ने  सतुआ बाबा के साथ ईको पार्क स्थित कुंडलेश्वर मंदिर में भगवान आशुतोष का दर्शन पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने आचार्य जी को ईको पार्क की प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन कराया जिसकी संत  ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।  

घर में हिंदू संस्कारों की झलक: बेटी की परवरिश और संस्कृति पर निक जोनस–प्रियंका चोपड़ा की सोच

लॉस एंजिल्स प्रियंका चोपड़ा भले सात समंदर पार भारत से बहुत दूर रह रही हों लेकिन उन्होंने अपने देसी अंदाज और भारतीय संस्कृति को कभी नहीं छोड़ा। अपने विदेशी पति निक जोनस भी अब भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व को अच्छी तरह महसूस करने लगे हैं। निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस का पालन-पोषण हिंदू मूल्यों के साथ कर रहे हैं। निक जोनस ने हाल ही में अपनी बातचीत में इस बारे में काफी सारी बातें कही हैं। निक इन दिनों अपने एल्बम ‘संडे बेस्ट’ के प्रमोशन में जुटे हैं और अपने हालिया इंटरव्यू में उन्होंने अपने परिवार के बारे में बातें कीं। उन्होंने अपनी हालिया बातचीत में बेटी के पालन-पोषण पर निक ने बातें कीं। Zach Sang Show में नजर आए निक जोनस ने अपने प्रोजेक्ट के अलावा अपनी फैमिली पर बातें करते हुए कहा कि जब एक एक नन्हा सा बच्चा पहली बार किसी चीज का अनुभव करता है तो ये अद्भुत होता है। एक पिता और एक आर्टिस्ट के रूप में अपनी जिम्मेदारी को लेकर बातें करते हुए निक जोनस ने कहा, ‘किसी चिड़चिड़े बच्चे से सहानुभूति और प्यार से पेश आना, माता-पिता होने का सबसे दिलचस्प पहलू रहा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं अब उन चीजों के बारे में लिख रहा हूं जो मैं उसे समझाना चाहता हूं। वो सुनेगी और मैं इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता। उसे हमारा गाना (लव मी टू हेवन) बहुत पसंद है और हम इसे हमेशा सेट की शुरुआत में बजाते हैं। प्रियंका के साथ स्टेज के किनारे उसकी ड्रेस पकड़े हुए उसके कई शानदार वीडियो हैं, क्योंकि वह बस दौड़कर हमारे साथ शामिल होना चाहती है।’ इसी पॉडकास्ट पर निक से भारतीय संस्कृति के बारे में पूछा गया। उन्होंने इसका जवाब देते हुए कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर भारतीय फैन्स जमकर तारीफ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह हमेशा से एक बड़ा परिवार चाहते थे और उन्हें खुशी है कि प्रियंका भी यही सोचती हैं। भारत में अपनी पहली यात्रा को याद करते हुए निक ने इस बातचीत में कहा, ‘जब मैं पहली बार भारत गया तो वो अनुभव एकदम जादू वाला था। मुझे प्रियंका के दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने और भारतीय संस्कृति को और भी गहराई से समझने का मौका मिला। कुछ भारतीय परंपराएं और त्योहार अब मेरी फेवरेट परंपराएं और त्योहार बन गए हैं।’ निक ने ये भी कहा- मेरे जीवन की कुछ सबसे प्यारी यादें या तो भारत से जुड़ी हैं या भारत के आसपास के इलाकों से। निक भी अब भारतीय संस्कृति में रच-बस गए हैं। उन्होंने इसकी जमकर तारीफ की और कहा कि बेटी मालती का पालन-पोषण हिंदू मूल्यों के साथ ही हो रहा है, क्योंकि इस धर्म ने उनकी भी स्प्रिचुअलिटी को भी बदल दिया है। उन्होंने कहा, ‘यह वाकई अविश्वसनीय रहा है। मैंने हिंदू धर्म के बारे में बहुत कुछ सीखा है, जो अद्भुत है। यह गहरा और सुंदर है, और कर्म का अभ्यास और दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना जैसा आप अपने साथ करवाना चाहते हैं… और आपके पास अच्छे फल का आना बहुत सुंदर है।’

पद्मश्री सत्येंद्र सिंह लोहिया ने रचा इतिहास

भोपाल . मध्यप्रदेश के गौरव, पद्म सम्मानित अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया ने विश्व की सबसे कठिन समुद्री तैराकियों में से एक न्यूज़ीलैंड के कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर इतिहास रच दिया। वे इस चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग तैराक बन गए हैं। तैराक  लोहिया 18 जनवरी 2026 से न्यूज़ीलैंड में इस अभियान की तैयारी कर रहे थे और लगातार ठंडे पानी में कठिन अभ्यास व अक्लिमेटाइजेशन कर रहे थे। 28 जनवरी को उनका पहला प्रयास खराब मौसम के कारण रोकना पड़ा था। उन्होंने हार नहीं मानी और पुनः तैयारी कर निर्धारित दिनांक 12 फरवरी को अदम्य साहस और आत्मविश्वास के साथ चुनौती स्वीकार की। तैराकी के दौरान उन्हें अत्यंत ठंडे पानी, तेज़ समुद्री धाराओं और प्रतिकूल मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने दृढ़ संकल्प के बल पर लक्ष्य हासिल किया। 70 प्रतिशत दिव्यांग और व्हीलचेयर बाउंड होने के बावजूद उनकी यह उपलब्धि अदम्य इच्छाशक्ति और संघर्ष की मिसाल बन गई है। तैराक  लोहिया ने अपनी सफलता का श्रेय न्यूज़ीलैंड के अपने तैराक साथियों, पायलट फिलिप्स तथा सहयोगी मुजीब खान को दिया, जिन्होंने पूरे प्रशिक्षण और प्रयास के दौरान उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और पूरे भारत की विजय है। यह विजय संदेश देती है कि संकल्प, साहस और निरंतर प्रयास से कोई भी असंभव लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।  

भारत के खिलाफ नई रणनीति? बांग्लादेश और अमेरिका की नजदीकी से सियासी भूचाल

नई दिल्ली कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस रीढ़ को सहारा देते हैं भारत समेत सेंट्रल एशिया के कुछ देश. बांग्लादेश कपड़े बनाता है लेकिन इसके लिए कपास (Cotton) भारत सप्लाई करता है, लेकिन अब बांग्लादेश ने इसमें बड़े बदलाव की घोषणा कर दी है. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 9 फरवरी को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता किया था. आज यानी गुरुवार को बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं और इस चुनाव से ठीक तीन दिन पहले यूनुस सरकार ने अमेरिका से व्यापार समझौता कर लिया. समझौते की वैधता पर कई सवाल खड़े हुए क्योंकि यूनुस सरकार ने समझौते को काफी सीक्रेट रखा और इसका ड्राफ्ट किसी के साथ शेयर नहीं किया गया. अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत बांग्लादेश भारत से कपास की खरीद को धीरे-धीरे कम करने जा रहा है. बांग्लादेश ने घोषणा की है कि भारत की जगह अब अमेरिका से कपास खरीदी जाएगी.   ‘बांग्लादेश के लिए गेमचेंजर साबित होगा अमेरिका से कपास की खरीद’ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के सूचना सलाहकार शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को ‘गेम चेंजर’ बताया. उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके लिए बेहद अहम है. अमेरिका ने बांग्लादेश से व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती कर उसे 19% कर दिया है. कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देश वस्त्र उद्योग में बांग्लादेश के प्रतिस्पर्धी हैं और इन देशों पर भी अमेरिका ने 19% का ही टैरिफ लगाया है. साथ ही, अमेरिका ने कहा है कि अगर बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाता है तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा यानी बांग्लादेश बिना किसी फीस के उसे अमेरिका में बेच सकेगा. भारत से बड़ी मात्रा में कपास खरीदता है बांग्लादेश बांग्लादेश का वस्त्र उद्योग काफी बड़ा है लेकिन वो कपड़ों के लिए पर्याप्त कपास या जरूरी धागे का उत्पादन नहीं कर पाता. इसके लिए वो भारत और सेंट्रल एशिया के देशों पर निर्भर है. लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद अब उसके सप्लायर्स में अमेरिका शीर्ष के देशों में शामिल हो जाएगा. 2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा और लगभग 8.5 करोड़ डॉलर का मानव निर्मित फाइबर धागा बेचा था. इनका बड़ा हिस्सा जमीनी बंदरगाहों के रास्ते भेजा गया. लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया. भारत ने शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी जिसके बाद से रिश्ते और खराब हुए. इसे देखते हुए 13 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी. इसके जवाब में भारत ने 16 मई 2025 से बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स समेत कई उत्पादों के जमीनी रास्ते से देश में एंट्री पर रोक लगा दी. बांग्लादेश भारत को सबसे अधिक रेडीमेड गारमेंट्स बेचता है. तनावपूर्ण रिश्तों के बीच बांग्लादेश ने भारत के बजाए अब अमेरिका से कपास खरीदने की योजना बनाई है. अमेरिका बांग्लादेशी कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार भी है. ऐसे में बांग्लादेश मान रहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में कपास खरीद को शामिल करना टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छा फैसला साबित होगा. ब्रैक यूनिवर्सिटी के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि इस समझौते से अमेरिका के कपास उत्पादकों के लिए बांग्लादेश अब आकर्षक जगह बन गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका का कपास भारत और मिस्र के कपास जैसी क्वालिटी वाला होगा या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है. उन्होंने कहा, ‘टेक्सटाइल सेक्टर में कपास की क्वालिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है. अगर अमेरिकी कपास स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतरी, तो अमेरिकी खरीदार भी हमारे कपड़े पसंद नहीं करेंगे.’ प्रोफेसर जहान ने यह भी कहा कि अमेरिका बांग्लादेश से काफी दूर है और वहां से कपास के आने की वजह से उसका शिपिंग चार्ज काफी बढ़ सकता है जिससे टैरिफ में मिली छूट का फायदा कम हो जाएगा.

टी20 वर्ल्ड कप में सर्वाधिक विकेट लेने वाले नंबर-2 गेंदबाज बने एडम जांपा

कोलंबो एडम जांपा टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में संयुक्त रूप से दूसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। इस लेग स्पिनर ने अब तक टी20 वर्ल्ड कप में 40 विकेट हासिल किए हैं, जिसके साथ उन्होंने वानिंदु हसरंगा और राशिद खान की बराबरी कर ली है। इन तीनों ही गेंदबाजों ने टी20 वर्ल्ड कप में 40-40 विकेट हासिल किए हैं, जबकि शाहिद अफरीदी 39 विकेट के साथ इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं। शीर्ष पर बांग्लादेश के शाकिब अल हसन हैं, जिन्होंने 50 विकेट अपने नाम किए। आयरलैंड के खिलाफ इस मुकाबले में एडम जांपा ने 4 ओवर गेंदबाजी करते हुए 23 रन देकर 4 विकेट निकाले। यह जांपा का टी20 वर्ल्ड कप में दूसरा ‘फोर-विकेट हॉल’ है। उन्होंने टूर्नामेंट में एक बार मैच में 5 विकेट भी निकाले हैं। कुल मिलाकर, जांपा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 112 मुकाबलों में 20.56 की औसत से 143 विकेट लिए हैं। इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट खोकर 182 रन बनाए। इस टीम के लिए मार्कस स्टोइनिस ने सर्वाधिक 45 रन बनाए, जबकि मैट रेनेशॉ और जोश इंगलिस ने 37-37 रन का योगदान टीम के खाते में दिया। विपक्षी खेमे से मार्क अडायर ने सर्वाधिक 2 विकेट हासिल किए, जबकि मैथ्यू हम्फ्रीज, जॉर्ज डॉकरेल और हैरी टेक्टर ने 1-1 विकेट निकाला। इसके जवाब में आयरलैंड की टीम 16.5 ओवरों में 115 रन पर सिमट गई। इस टीम के लिए जॉर्ज डॉकरेल ने सर्वाधिक 41 रन बनाए, जबकि लॉरेन टकर ने 24 रन का योगदान टीम के खाते में दिया। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नाथन एलिस और एडम जांपा ने 4-4 विकेट निकाले। एक विकेट मैथ्यू कुहनेमन के हाथ लगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम 13 फरवरी को अपने अगले मुकाबले में इसी वेन्यू पर जिम्बाब्वे से भिड़ेगी, जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 के उनके ग्रुप स्टेज का दूसरा मैच होगा। इस मुकाबले में जांपा के पास राशिद और हसरंगा से आगे निकलने का मौका होगा।  

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