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सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

रायपुर सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर  सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया।                मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।                 मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।                    नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।            मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।  “छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” –  अर्चना प्रधान सिक्किम की पत्रकार  अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है।  सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने  कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की। मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’ पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।          पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक श्री मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक श्री सुदीप्तो कर, श्री पुरुषोत्तम झा और श्री … Read more

केंद्रीय राज्यमंत्री कुरियन से राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने की भेंट

भोपाल/नई दिल्ली  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री  जॉर्ज कुरियन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने  कुरियन को प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के अंतर्गत भोपाल में “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सिम्युलेटरी स्पेस सेंटर” की स्थापना का प्रस्ताव भी सौंपा। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित पीएमजेवीके योजना अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास और आधारभूत संरचना को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं में विज्ञान, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से यह सेंटर स्थापित करने को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों एवं युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान, उपग्रह तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से परिचित कराया जाएगा। यह केंद्र युवाओं को भविष्य में अंतरिक्ष एवं तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा और विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देगा। राज्यमंत्री  गौर ने केंद्र सरकार से इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया, ताकि योजना का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में विज्ञान आधारित सशक्त युवा शक्ति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बड़े पैमाने पर अभियान, समितियों को प्रशिक्षण

वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का अभियान 26 हज़ार गाँवो में वन अधिकार समितियों का प्रशिक्षण भोपाल  वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण-सत्रों की शुरुआत की गई है। प्रथम चरण में 21 जिला मुख्यालयों पर उपखण्ड स्तरीय वन अधिकार समिति के शासकीय एवं अशासकीय सदस्यों सहित जिला स्तर पर नामांकित मास्टर ट्रेनर्स के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के लिए 26 हजार से अधिक ग्रामों को चिंहित किया गया है। इन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पिछले वर्ष से अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में इसका संचालन किया जा रहा है। उपखंड स्तरीय समितियों को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के साथ विशेष रूप से सामुदायिक वन संसाधन के अधिकारों के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग ने विशेष पहल करते हुए, टास्क फोर्स के विशेषज्ञों की मदद से राज्य स्तर पर 35 ‘’राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स’’ की टीम तैयार की है। यह टीम अनुसूचित क्षेत्र के 20 जिलों की उपखंड स्तरीय समितियों के 828 सदस्यों का प्रशिक्षण पूरा करेगी। साथ ही जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का भी प्रशिक्षण हो रहा है। ये मास्टर ट्रेनर ग्राम स्तर की वन अधिकार समितियों को प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्थान अभियान’ के अंतर्गत किए जा रहे हैं। जनजातीय कार्य विभाग की ओर से इन समितियों के शासकीय सदस्यों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अनुविभागीय अधिकारी (वन) और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं समिति में नामांकित जनपद पंचायत सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। इन समितियों को सामुदायिक वन संसाधन दावों के तैयार कराने, इनका निराकरण तथा मान्यता प्रदान कराये जाने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया। वन अधिकार अधिनियम 2006 में वन निवासियों के मान्य किए वन अधिकारों में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों का विशेष स्थान है। ये ग्राम सभाओं को अपने जंगलों के संरक्षण, प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है और अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन प्रबंधन में प्रमुख स्थान देता हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता

शोध ऐसा हो, जो बदल दें सबकी सोच: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारतीय संस्कृति में एकल शोध नहीं, समग्र कल्याण आधारित है शोध की परंपरा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के रिसर्च फेलोशिप के पोस्टर और वेबसाइट का हुआ विमोचन संस्थान द्वारा प्रकाशित 7 पुस्तकों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में  दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “Mahakal: The master of time” वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले “41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव” के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा। पूज्य आचार्य  मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है। वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक  सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है। भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए। उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे। स्वागत उद्बोधन राष्ट्रीय शोधार्थी समागम की संयोजिका डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने दिया। विषय प्रवर्तन डा. मुकेश कुमार मिश्रा ने दिया। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के अध्यक्ष  अशोक पाण्डेय ने समागम की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। शुभारंभ-सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान भवन परिसर में पौध-रोपण भी किया। उद्घाटन सत्र में मैपकास्ट के अध्यक्ष डॉ. अनिल कोठारी, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु  विजय मनोहर तिवारी सहित शिक्षक एवं शोधार्थी-विद्यार्थी उपस्थित थे।  

कानपुर हिट एंड रन: SOG ने डिकोड की पूरी साजिश, लैंबॉर्गिनी केस में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

 कानपुर     कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे मामले में पुलिस ने आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने कोर्ट को अवगत कराया कि 8 तारीख को घटना घटित होने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. इसके अगले दिन, 9 तारीख को एक डमी ड्राइवर को वाहन चालक बताकर फर्जी हलफनामा तैयार किया गया. जिसे बाद में कोर्ट में भी दाखिल कर दिया गया. पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि घटना के समय गाड़ी शिवम ही चला रहा था. इसके बाद पुलिस टीम नोटिस की तामील कराने उसके पास पहुंची और उसे जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए. लेकिन इसके बावजूद वह खुद को कानून से बचाने के लिए छिपता रहा और तरह-तरह के बहाने बनाता रहा. देर से गिरफ्तारी पर भी पुलिस का आया बयान उसकी गिरफ्तारी 35 बीएनएस का पालन न करने पर हुई है. वहीं आरोपी की देर से गिरफ्तारी को लेकर भी पुलिस का बयान आया है. पुलिस के मुताबिक मामले में लगी धाराएं 7 साल से कम सजा की होने के कारण अभियुक्त को तत्काल गिरफ्तार नहीं किया गया. बल्कि नोटिस तामील कराने के लिए पुलिस टीम उसके पास भेजी गई. हालांकि, अभियुक्त द्वारा 35-बीएस के नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते पुलिस के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह 7 साल से कम सजा वाली धाराओं में भी अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है. पुलिस ने कोर्ट से यह मांग की है कि आरोपी को 14 दिन की न्याय हिरासत में भेजा जाए.  मोहन को बनाया गया था डमी ड्राइवर कानपुर लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट मामले में शिवम मिश्रा की तरफ से समझौते के लिए शपथ पत्र दाखिल किया गया था. वादी के वकील ने कहा कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चला रहा था. जबकि पुलिस जांच में सामने आया कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चल रहा था. कोर्ट में मोहन लाल का शपथ पत्र भी दिया गया था. जिसमें घटना से जुड़े तथ्यों का जिक्र है. न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें और सबूतों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में अधिवक्ता धर्मेद्र कुमार धर्मू ने कहा एसीजेएम-7 की कोर्ट से कार चालक का आत्मसमर्पण खारिज होने के फैसले के खिलाफ वह जिला जज कोर्ट में रिवीजन दाखिल करेंगे। चालक खुद बता रहा है कि हादसे के समय वह कार चला रहा था।शिवम की कार रिलीज अर्जी पर भी कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने रिपोर्ट में कहा वाहन संख्या डीएल 11 सीफ 4018 लेम्बोर्गिनी कार से अपराध कारित किया है। चालक शिवम कुमार मिश्रा का नाम सामने आया है। आरोपी की ओर से कार से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। पुलिस की इस रिपोर्ट पर कोर्ट ने शिवम को आदेश दिया वह कार से संबंधित समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराए। थाना प्रभारी को आदेश दिया कार का परीक्षण कर 13 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट दें। पुलिस ने शिवम को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर तलब किया है। वहीं इस मामले में कोर्ट में समझौता पत्र दाखिल होने के बाद सामने आए वादी मो. तौफीक ने कहा हादसे में बाएं पैर में चोट आई थी। इलाज करा दिया, अब कोई शिकायत नहीं है। मो. तौफीक चमनगंज के घोसियाना में रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजर-बसर करता है। अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह धर्मू ने बताया कि चमनगंज घोसियाना निवासी मो. तौफीक ने मुकदमा दर्ज कराया था। उसने कोर्ट में एक समझौतानामा दाखिल किया है। उसने कहा कि हादसे में उसे चोट लगी थी। इसमें उसे इलाज का पैसा मिल गया है, जिससे वह संतुष्ट है। आपको बता दें कि कानपुर में लैंबॉर्गिनी कर दुर्घटना मामले में जितनी चर्चा दुर्घटना की है, उससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि गाड़ी कौन चला रहा है. क्योंकि वीडियो में शिवम मिश्रा कार से बाउंसर के साथ निकलते हुए देखा गया. साथ ही पुलिस भी कह रही है कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहा था. लेकिन कोर्ट में शिवम मिश्रा के एडवोकेट की तरफ से दावा किया गया था कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चल रहा था. यह दावा खुद शिवम मिश्रा के पिता केकेबमिश्रा ने भी किया था. मोहन को सोमवार को कोर्ट में सरेंडर करना था. आज तक से बातचीत करने के दौरान डमी ड्राइवर मोहन ने बताया कि गाड़ी मैं ही चल रहा था. गाड़ी ठीक करने के लिए मैं दिल्ली से आया था. गाड़ी टेस्ट कर रहा था. बगल की सीट में शिवम मिश्रा बैठे थे. तभी वह मेरे ऊपर गिर गए. मैं कुछ समझ नहीं पाया और गाड़ी का बैलेंस खो गया.

निक्की तंबोली के नाम से फ्रॉड का मामला, एक्ट्रेस ने पोस्ट के जरिए लोगों को किया आगाह

मुंबई बिग बॉस 14 फेम एक्ट्रेस निक्की तंबोली इन दिनों रियलिटी शो ‘द 50’  में नजर आ रही हैं. शो में उनके बॉयफ्रेंड अरबाज पटेल भी शामिल हुए हैं. पहली बार दोनों किसी शो में साथ नजर आ रहे हैं. इसी बीच एक्ट्रेस ने एक बड़ा खुलासा कर दिया है. बता दें कि निक्की तंबोली ने अपने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि उनके नंबर और तस्वीरों का यूज करके कोई लोगों को ठगने की कोशिश कर रहा है. कोई उनका नाम लेकर उनके करीबियों को कॉन्टैक्ट कर रहा है. ये निक्की नहीं है. निक्की ने कहा – ये इंसान मैं नहीं हूं. प्लीज आप लोग इस शख्स पर ध्यान न दें. इस शख्स को रिप्लाई न करें. ये एक स्कैम हो सकता है. इस नंबर से टैक्स आते ही इस नंबर को ब्लॉक कर दें. एक्ट्रेस ने ये बात अपने इंस्टाग्राम की स्टोरी पर लिखकर शयर किया है. इस ठगी की बात बताते हुए निक्की तंबोली ने उस फेक नंबर को भी स्क्रीनशॉट के जरिए सोशल मीडिया पर मेंशन किया है. स्क्रीनशॉट में ये आदमी दावा कर रहा है कि ये नंबर निक्की तंबोली का है. अब सोशल मीडिया पर निक्की तंबोली की ये पोस्ट धमाल मचा रही है.

वैष्णो देवी में नियमों का उल्लंघन? अंदर का वीडियो वायरल, शिखा के खिलाफ FIR

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में स्थित माता वैष्णो देवी का भवन देश के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है. लेकिन हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर ने इस अभेद्य किले जैसी सुरक्षा को चुनौती दे दी है. शिखा नाम की एक कंटेंट क्रिएटर ने माता वैष्णो देवी भवन के अंदर का वीडियो शूट किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह वीडियो किसी मोबाइल से नहीं, बल्कि एक आधुनिक कैमरा वाले चश्मे (Spy Camera Glasses) से बनाया गया है. इस घटना ने श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीवीआईपी (VVIP) को भी नहीं अंदर फोटो खींचने की इजाजत माता वैष्णो देवी की पवित्र तीनों पिंडियों के दर्शन के लिए प्रधानमंत्री से लेकर देश के बड़े से बड़े दिग्गज नेता और फिल्मी हस्तियां पहुंचती हैं. लेकिन सुरक्षा और मर्यादा के नियमों के कारण किसी को भी भवन के अंदर मोबाइल या कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं होती. श्राइन बोर्ड के सख्त निर्देशों के मुताबिक भवन परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बावजूद एक आम कंटेंट क्रिएटर का कैमरा लेकर वहां तक पहुंच जाना यह बताता है कि चेकिंग के दौरान कितनी बड़ी लापरवाही हुई है. कैमरा वाले चश्मे ने कैसे दी सुरक्षा घेरे को मात? वायरल वीडियो में भवन के अंदर के दृश्य साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं. कंटेंट क्रिएटर ने चालाकी दिखाते हुए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. उसने अपनी आंखों पर कैमरा वाला चश्मा पहन रखा था, जिसे सामान्य चश्मा समझकर सुरक्षाकर्मियों ने नजरअंदाज कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जब सोशल मीडिया पर बवाल मचा, तो शिखा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से उस वीडियो को डिलीट कर दिया. हालांकि तब तक यह वीडियो हजारों बार देखा जा चुका था और सुरक्षा में लगी सेंध उजागर हो चुकी थी. श्राइन बोर्ड का एक्शन और एफआईआर (FIR) की कार्रवाई इस गंभीर चूक पर प्रतिक्रिया देते हुए माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है. बोर्ड ने साफ कहा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच शुरू हो चुकी है. श्राइन बोर्ड इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस हरकत में बोर्ड के किसी कर्मचारी की मिलीभगत थी. बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी इसमें संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

माल्या के खिलाफ हाईकोर्ट का कड़ा संदेश: भगोड़ा टैग पर सुनवाई के लिए भारत लौटना अनिवार्य

मुंबई  बॉम्बे हाई कोर्ट ने कारोबारी विजय माल्या को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक माल्या भारत वापस नहीं लौटते, तब तक अदालत उनकी  याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी। इस याचिका में उन्होंने भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओ) के प्रावधानों को चुनौती दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति खुद को न्यायिक प्रक्रिया से दूर रखे हुए है, उसे अदालत से राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।  माल्या को पहले बतना होगा वह भारत लौटेंगे या नहीं मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा कि माल्या को पहले यह स्पष्ट करना होगा कि वह भारत लौटेंगे या नहीं। कोर्ट ने कहा कि आपको (माल्या) वापस आना होगा…अगर आप वापस नहीं आ सकते तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। माल्या की दो याचिकाएं  2016 से ब्रिटेन में रह रहे माल्या ने उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दायर की हैं, एक में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती दी गई है और दूसरी में 2018 के अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है।  18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई  पीठ ने याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख तय करते हुए कहा कि वह माल्या को यह स्पष्ट करने का एक और अवसर दे रही है कि क्या वह भारत लौटने के लिए तैयार है। माल्या अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं अदालत ने कहा कि हमें यह दर्ज करना पड़ सकता है कि आप अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं। आप कार्यवाही का लाभ नहीं उठा सकते। आपके साथ निष्पक्षता बरतते हुए, हम याचिका खारिज नहीं कर रहे हैं बल्कि आपको एक और अवसर दे रहे हैं। अदालत ने दिसंबर 2025 में पिछली सुनवाई में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था कि वह याचिका पर तभी सुनवाई करेगी जब माल्या भारत लौट आएंगे और उसने उनके वकील से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। आज बेंच ने कहा कि कारोबारी को एक हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वह भारत लौटेगा या नहीं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर ने कहा कि आप कब आएंगे? आप (माल्या) पहले ही यह तर्क दे चुके हैं कि आपको अदालत में शारीरिक उपस्थिति के बिना सुनवाई का अधिकार है। लेकिन पहले एक हलफनामा दाखिल करें जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा हो। शारीरिक उपस्थिति के बिना भी याचिकाओं पर हो सकती है सुनवाई  माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने कहा कि ऐसे फैसले मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि याचिकाकर्ता की शारीरिक उपस्थिति के बिना भी ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई और फैसला किया जा सकता है। एफईओ घोषित होने के बाद माल्या ने अधिनियम के प्रावधानों को दी चुनौती सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि माल्या ने एफईओ घोषित किए जाने के बाद एफईओ अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती दी है। मेहता ने दलील दी कि मल्ल्या को पहले भारत आना चाहिए, उसके बाद ही यह तय किया जा सकता है कि वे भुगतान के लिए जिम्मेदार हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि मल्ल्या पहले भारत आएं, फिर देखा जाएगा कि वे देनदार हैं या नहीं। वे देश के कानून पर अविश्वास नहीं जता सकते। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि लंदन में प्रत्यर्पण के खिलाफ मल्ल्या द्वारा शुरू की गई कार्यवाही अंतिम चरण में है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रत्यर्पण पास आता देख मल्ल्या ने भारत में अपने ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। मेहता ने यह भी दलील दी कि अपने हलफनामे में मल्ल्या ने कहा है कि बैंकों द्वारा उनसे धन की मांग करना गलत है। माल्या के ऊपर कौन-कौन से आरोप? वहीं, मल्ल्या की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि कारोबारी की भारत स्थित संपत्तियां पहले ही प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अटैच की जा चुकी हैं। गौरतलब है कि जनवरी 2019 में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने मल्ल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। उन पर कई बैंकों के ऋण चूक और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। मल्ल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर चले गए थे। 

आयशा शर्मा की बहुमुखी प्रतिभा, अब लेखिका भी बनीं अभिनेत्री

मुंबई  आयशा शर्मा अपनी रचनात्मक पहचान को एक नया आयाम दे रही हैं। अब वे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के साथ बतौर लेखिका डेब्यू कर रही हैं। सोशल मीडिया पर अपनी दमदार मौजूदगी और एक गहराई से जुड़ी कम्युनिटी के लिए जानी जाने वाली आयशा शर्मा ने धीरे-धीरे अपनी एक अलग आवाज़ बनाई है, जो सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं है।  इस किताब के जरिए वह अभिव्यक्ति का एक और रास्ता तलाश रही हैं—एक ऐसा रास्ता जो ठहराव, आत्मचिंतन और भावनात्मक ईमानदारी को जगह देता है। उनकी पहली किताब सौ छोटे-छोटे ध्यानपूर्ण विचारों का संग्रह है, जो ताकत, कोमलता और आत्म-प्रेम के इर्द-गिर्द बुना गया है। रोजमर्रा की भावनाओं से जुड़ी यह किताब खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो थकान, आत्म-संदेह और हर वक्त खुद को साबित करने के दबाव से जूझ रहे हैं। यह किताब हल देने का दावा नहीं करती, बल्कि एक ऐसा स्पेस बनाती है जहाँ पाठक खुद को पहचान सकें और एक सुकून भरी तसल्ली महसूस कर सकें।  किताब के पीछे की भावना साझा करते हुए आयशा शर्मा कहती हैं, मेरा मानना है कि सही किताब आपको सही समय पर मिलती है। उम्मीद है यह किताब आपको तब मिले जब आपको इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। और जब मिले, तो आपको ऐसा महसूस हो जैसे किसी ने चुपचाप आपको गले लगा लिया हो। मेरे पास सारे जवाब नहीं हैं, लेकिन अगर मेरी लिखी बातों में आपको लगे कि ‘ये तो वही एहसास है जिसे मैं हमेशा महसूस करती थी, पर शब्द नहीं दे पाती थी, तो मेरे लिए वही काफी है। आयशा शर्मा के लिए लेखन उनकी डिजिटल मौजूदगी का स्वाभाविक विस्तार है, जहाँ आत्म-विकास, भावनात्मक संतुलन और अंदरूनी सफर जैसे विषय पहले से ही उनके दर्शकों से गहराई से जुड़ते हैं। यह नया अध्याय उनकी उस कोशिश को दर्शाता है जिसमें वह अभिनय, डिजिटल कहानी कहने और अब लेखन—तीनों के बीच सहजता से सफर करती हुई एक मुकम्मल क्रिएटिव पहचान गढ़ रही हैं।

भारतीय लड़की की मौत पर अमेरिका ने दिया 2.6 अरब का मुआवजा, जाह्नवी कंदुला केस में फैसला

सिएटल  अमेरिका के सिएटल शहर ने 2023 में एक पुलिस अधिकारी की तेज रफ्तार गाड़ी की टक्कर से जान गंवाने वाली भारत की 23 साल की छात्रा जाह्नवी कंदुला के परिवार के साथ 2.9 करोड़ डॉलर (2.62 अरब रुपये) के समझौते पर सहमति दी है. कंदुला को अधिकारी केविन डेव की गाड़ी ने उस वक्त टक्कर मारी थी जब वह ड्रग्स से जुड़ी एक कॉल के बाद 40 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा वाले इलाके में 119 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जा रहे थे. उनकी गाड़ी की इमरजेंसी लाइट जल रही थी और चौराहों पर सायरन भी बज रहा था. सिटी अटॉर्नी एरिका इवांस ने बुधवार को बयान में कहा, ‘जाह्नवी कंदुला की मौत बहुत दुखद है और शहर को उम्मीद है कि यह समझौता कंदुला परिवार को कुछ हद तक संतोष देगा. जाह्नवी कंदुला का जीवन बहुत अहम था. यह उनके परिवार, दोस्तों और हमारे समुदाय के लिए मायने रखता था.’ जाह्नवी कंदुला कौन थीं? कंदुला सिएटल की नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में सूचना प्रणाली में मास्टर डिग्री कर रही थीं. कंदुला के परिवार के वकीलों ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. दोनों पक्षों ने पिछले शुक्रवार को किंग काउंटी सुपीरियर कोर्ट में समझौते की जानकारी दी. स्थानीय वेबसाइट ‘पब्लिकॉला’ ने सबसे पहले इस समझौते की खबर दी थी. कंदुला की मौत के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे. लोगों का गुस्सा तब और बढ़ गया जब एक अधिकारी के बॉडी कैमरा की रिकॉर्डिंग सामने आई जिसमें वह हंसते हुए कंदुला के जीवन को ‘मामूली’ बताते और कहते सुनाई दिए कि शहर को ‘बस एक चेक लिख देना चाहिए.’ अमेरिका में पुलिसवालों की हुई बर्खास्तगी भारत के राजनयिकों ने भी मामले की जांच की मांग की थी. शहर के नागरिक निगरानी प्राधिकरण ने पाया कि यूनियन नेता रहे अधिकारी डैनियल ऑडरर की टिप्पणियों से विभाग की साख को नुकसान पहुंचा और लोगों का भरोसा कमजोर हुआ. ऑडरर को बर्खास्त कर दिया गया और उन्होंने गलत तरीके से सेवा समाप्ति के खिलाफ शहर पर मुकदमा किया. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां इस बात की आलोचना करने के लिए थीं कि वकील इस मौत पर शायद कैसे प्रतिक्रिया देंगे. पुलिस विभाग ने वाहन चला रहे अधिकारी को भी बर्खास्त कर दिया. उन्हें लापरवाही से वाहन चलाने का दोषी पाया गया और 5,000 डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया. किंग काउंटी के अभियोजकों ने उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप लगाने से इनकार किया क्योंकि यह साबित नहीं हुआ कि उन्होंने जानबूझकर सुरक्षा की अनदेखी की. समझौते की करीब दो करोड़ डॉलर की राशि शहर की बीमा पॉलिसी के तहत कवर होने की संभावना है.

CJI ने जारी किया गंभीर संदेश: जयराम, साजिशों की खबर है, कीमत चुकानी पड़ेगी

नई दिल्ली  राज्यसभा सांसद जयराम रमेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें. हम इसके पीछे की साजिश जानते हैं. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की तल्खी देखते हुए कांग्रेस सांसद और पूर्व मंत्री जयराम रमेश की तरफ से याचिका वापस ले ली गई. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार 12 फरवरी को कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश की एक्स-पोस्ट फैक्टो एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस (EC) दिए जाने के खिलाफ दायर की गई रिट पिटीशन पर सुनवाई की. याचिका देखते ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने जयराम रमेश से टफ सवाल पूछे. यहां एक्स-पोस्ट फैक्टो एनवायरमेंट क्लीयरेंस (कार्योत्तर पर्यावरणीय मंजूरी) उन परियोजनाओं को दी जाने वाली मंजूरी है, जो बिना पहले से अनिवार्य पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) लिए शुरू हो चुकी हैं. सीजेआई ने पूछा तीखा सवाल सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत (CJI) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने वनशक्ति रिव्यू जजमेंट में एक्स-पोस्ट फैक्टो EC पर यूनियन के ऑफिस मेमोरेंडम को मंजूरी दी है तो रिट पिटीशन कैसे फाइल की जा सकती है? इस सवाल के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद और पूर्व मंत्री जयराम रमेश पर नाराजगी जताई. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाने की धमकी भी दी. SC की जयराम रमेश को फटकार जयराम रमेश से नाराजगी जताते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘आप एक जिम्मेदार नेता हैं. अगर यह गलत साबित हुआ तो इसकी भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें. हम इसके पीछे की साजिश जानते हैं.’ दरअसल, जयराम रमेश ने केंद्र द्वारा जारी उस कार्यालय ज्ञापन को चुनौती दी है. इसमें पर्यावरण संबंधी पूर्वव्यापी मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने का प्रावधान है. सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ, सीजेआई ने और क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यालय ज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए है, इसलिए चुनौती फैसले को दी गई है.     सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या कोई रिट याचिका के जरिए फैसले को चुनौती दे सकता है? यह तो सिर्फ मीडिया के लिए है.     जब सुप्रीम कोर्ट ने भारी जुर्माने की चेतावनी दी तो कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली.  

India vs Namibia: दूसरे मैच में दम दिखाने को तैयार टीम इंडिया, T20 वर्ल्ड कप में बड़ी टक्कर आज

नई दिल्ली नमस्कार, विश्व कप की लाइव कवरेज में आपका स्वागत है। आज आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के 18वें मुकाबले में भारत का सामना नामीबिया से होगा। यह मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से खेला जाएगा, साढ़े 6 बजे दोनों टीमों के कप्तान टॉस के लिए बीच मैदान पर होंगे। पिछले मैच में कठिन पिच पर संघर्ष करने के बाद, भारतीय बल्लेबाज दिल्ली के छोटे मैदान पर अपनी छक्के लगाने की लय वापस पाने के लिए बेताब होंगे। संजू सैमसन को आज ओपनिंग का मौका मिल सकता है क्योंकि अभिषेक शर्मा पेट की बीमारी के कारण शायद न खेलें। वहीं, दूसरी ओर नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने अपनी टीम को बिना किसी डर के नामीबियाई अंदाज में लड़ने का आह्वान किया है। दर्शकों को एक हाई-स्कोरिंग मुकाबले की उम्मीद है। भारत पिछला मैच अमेरिका से जीतकर आया है, लेकिन मुंबई की वानखेड़े स्टेडियम की पिच में भारतीय बल्लेबाज लड़खड़ाते हुए नजर आए थे। आज देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय धुरंधर क्या करते हैं और उन्हें नमीबियाई गेंदबाज कहां तक रोक पाते हैं। बने रहिए हमारे साथ लाइव अपडेट के लिए। दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग 11: • भारत: संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव, शिवम दुबे, हार्दिक पांड्या, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह। • नामीबिया: लौरें स्टीनकैंप, जान फ्रिलिंक, जान निकोल लॉफ्टी-ईटन, गेरहार्ड इरास्मस (कप्तान), जेजे स्मिट, जेन ग्रीन (विकेटकीपर), डायलन लीचर, रूबेन ट्रम्पेलमैन, विलेम मायबर्ग, बर्नार्ड शोल्ट्ज़, मैक्स हेंगो।  

पदकों की बरसात: अनीश को ब्रॉन्ज़, एड्रियन के नाम गोल्ड मेडल

नई दिल्ली ओलंपियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप सिल्वर मेडलिस्ट अनीश भनवाला ने पुरुषों की 25मी रैपिड-फायर पिस्टल (आरपीएफ) में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, यह उनकी तीसरी एशियन चैंपियनशिप थी। कजाकिस्तान ने एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप, नई दिल्ली 2026 के आठवें दिन बुधवार को डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में चार गोल्ड मेडल जीते। एड्रियन करमाकर ने 50मी राइफल प्रोन जूनियर मेन्स इवेंट में और जूनियर मेन्स 25 मी आरपीएफ टीम ने भी उस दिन गोल्ड मेडल जीता, जिससे भारत की मेडल टैली 41 गोल्ड, 19 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज़ मेडल तक पहुंच गई, जबकि कॉम्पिटिशन के दो दिन और बचे हैं। अनीश भनवाला और आदर्श सिंह ने क्रमशः 574 और 573 के स्कोर के साथ सातवां और आठवां क्वालिफाइंग स्थान हासिल किया, जिससे आरपीएफ फाइनल में दो भारतीय पक्के हो गए। पूर्व चैंपियन कजाकिस्तान के निकिता चिरुकिन ने 582 के स्कोर के साथ क्वालिफायर में टॉप किया और अपने तीन साथियों को डिसाइडर में पहुंचाया। जापान के दाई योशियोका, जो दो बार के ओलंपियन और वर्ल्ड कप गोल्ड मेडलिस्ट हैं, और हा मिन्ह थान, जो दो बार एशियन गेम्स में मेडल जीत चुके हैं, भी हा के टीममेट वु टिएन नाम के साथ आगे बढ़े। फाइनल में, जिसमें पांच रैपिड-फायर शॉट्स की आठ सीरीज थीं, योशियोका, अनीश और चिरयुकिन सबसे तेज थे, जबकि वु और कज़ाख आर्टेमी कबाकोव तीसरी सीरीज के बाद बाहर होने वाले पहले दो खिलाड़ी बने। जब उनके लंबे समय के टीममेट आदर्श चौथी सीरीज़ के बाद 11 हिट के साथ बाहर हो गए, तो अनीश छठी सीरीज के बाद 21 हिट के साथ योशियोका और निकिता के साथ जॉइंट लीड में थे। हालांकि, उन्हें सातवीं सीरीज में दो हिट मिले, जबकि जापानी खिलाड़ी ने पांच और चिरयुकिन ने चार हिट मारे, और उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल से संतोष करना पड़ा, यही नतीजा उन्हें तीन साल पहले चांगवोन एशियन चैंपियनशिप में मिला था। योशियोका ने एक और परफेक्ट फाइव के साथ चांगवोन में अपनी परफॉर्मेंस को एक और बेहतर किया, और 31 के वर्ल्ड और एशियन रिकॉर्ड स्कोर के साथ खत्म किया। चिरुकिन ने 28 हिट के साथ सिल्वर जीता, जबकि अनीश ने 23 हिट के साथ खत्म किया। दिन के पहले इवेंट में, इस्लाम सतपायेव, टैलेंटेड कज़ाख राइफल शूटर, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक्स में मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, ने नॉन-ओलंपिक लेकिन पॉपुलर 50मी राइफल प्रोन मेन्स कॉम्पिटिशन में कुछ गोल्ड जीतकर दिन में चमक बिखेरी। उन्होंने इंडिविजुअल इवेंट में 622.5 के स्कोर के साथ और टीम के साथी निकिता शाख्तोरिन (622.5, इंडिविजुअल सिल्वर) और कॉन्स्टेंटिन मालिनोव्स्की (615.0) के साथ टीम गोल्ड जीता। भारत ने पुरुषों के इंडिविजुअल इवेंट में बाबू सिंह पंवार (621.3) की मदद से ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता, जब बाबू ने समरवीर सिंह (618.2) और सरताज सिंह तिवाना (614.4) के साथ मिलकर मेडल जीता। जूनियर पुरुषों की राइफल प्रोन में, भारत के एड्रियन करमाकर ने 60 शॉट्स में 621.7 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता। कज़ाखस्तान ने ओलेग नोसकोव (620.6) और तामेरलान काबुलोव (617.3) की मदद से सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। कज़ाखस्तान ने इस इवेंट में 1848.7 के स्कोर के साथ टीम गोल्ड भी जीता, जो भारत के 1847.6 से बेहतर था। दिन के आखिरी इवेंट, जूनियर पुरुषों की 25मी आरएफपी में, इंडोनेशिया के मुहम्मद फवाज अदितिया फैरेल ने फाइनल में 29 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता, जो वर्ल्ड और एशियन जूनियर रिकॉर्ड भी था। भारत के सूरज शर्मा ने 23 के स्कोर के साथ सिल्वर और मुकेश नेलावल्ली ने 19 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। सूरज (582) और मुकेश (572) ने टीम कॉम्पिटिशन में गोल्ड जीता, क्वालिफिकेशन राउंड में साहिल चौधरी (575) के साथ मिलकर कुल 1729 का स्कोर बनाया। टीम कज़ाकिस्तान ने 1613 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल जीता।  

इतिहास रचने की दहलीज पर सूर्यकुमार यादव, नामीबिया मुकाबले में टूट सकता है कोहली का रिकॉर्ड

नामीबिया टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सूर्यकुमार यादव ने दमदार शुरुआत की है। नामीबिया के खिलाफ मैच में उनके पास एक खास रिकॉर्ड बनाने और विराट कोहली को पीछे छोड़ने का सुनहरा मौका होगा। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में डिफेंडिंग चैंपियन भारतीय टीम ने जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की। पहले मुकाबले में टीम इंडिया ने यूएसए को 29 रनों से हराया। इस मैच में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और 77 रन के स्कोर तक 6 विकेट गिर गए थे। मुश्किल समय में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। सूर्यकुमार यादव ने इस मुकाबले में 49 गेंदों पर 84 रनों की नाबाद पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत टीम इंडिया 20 ओवर में 161 रन तक पहुंच सकी। अब भारत को अपना अगला मुकाबला नामीबिया के खिलाफ खेलना है, जिसमें एक बार फिर सूर्या पर बड़ी जिम्मेदारी रहने वाली है। सूर्या के पास खास रिकॉर्ड बनाने का मौका सूर्यकुमार यादव टी20 क्रिकेट के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में गिने जाते हैं और अकेले दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। नामीबिया के खिलाफ मुकाबले में उनके पास एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका होगा। यदि सूर्या इस मैच में अर्धशतक लगाने में सफल रहते हैं तो वह घर पर टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा 50 प्लस पारियां खेलने के मामले में विराट कोहली को पीछे छोड़ सकते हैं। फिलहाल सूर्यकुमार यादव और विराट कोहली दोनों के नाम घर पर टी20 इंटरनेशनल में 14-14 फिफ्टी प्लस पारियां दर्ज हैं। इस सूची में केएल राहुल 12 पारियों के साथ तीसरे, रोहित शर्मा 10 पारियों के साथ चौथे और ईशान किशन 8 पारियों के साथ पांचवें स्थान पर हैं। भारत में सबसे ज्यादा 50+ पारी खेलने वाले टीम इंडिया के खिलाड़ी विराट कोहली – 14 पारियां सूर्यकुमार यादव – 14 पारियां केएल राहुल – 12 पारियां रोहित शर्मा – 10 पारियां ईशान किशन – 8 पारियां घर पर शानदार रहा है सूर्या का रिकॉर्ड भारतीय कप्तान का घर पर टी20 इंटरनेशनल में प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। सूर्यकुमार यादव ने अब तक 44 मैचों की 43 पारियों में 39 की औसत से 1404 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 13 अर्धशतक और एक शतक भी देखने को मिला है। स्ट्राइक रेट की बात करें तो घर पर उनका स्ट्राइक रेट 170.18 का रहा है, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी को दर्शाता है। सूर्या अब तक घरेलू मैदानों पर 86 छक्के और 126 चौके भी लगा चुके हैं। नामीबिया मैच में रहेंगी खास नजरें भारत और नामीबिया के बीच मुकाबला 12 फरवरी को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मैच में भारतीय टीम जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी, वहीं सभी की नजरें सूर्यकुमार यादव पर होंगी कि क्या वह एक और शानदार पारी खेलकर नया रिकॉर्ड अपने नाम कर पाते हैं।  

व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग के सबूत मान्य, हाईकोर्ट ने पत्नी की याचिका की खारिज

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने पति-पत्नी से संबंधित विवाद के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मंजूर करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने मामले में पत्नी की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि परिवार न्यायालय के पास यह विशेष शक्ति है कि मामले के प्रभावी निपटारे के लिए किसी भी दस्तावेज या जानकारी को बतौर सबूत स्वीकार कर सकते हैं। बता दें कि रायपुर निवासी ने पत्नी से तलाक की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता पति ने पत्नी की अन्य लोगों के साथ व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड में लेने के लिए आवेदन किया था। पत्नी ने इसका विरोध करते हुए इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया। हालांकि फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर कर ली, जिसके खिलाफ पत्नी हाईकोर्ट पहुंची। हाईकोर्ट ने भी परिवार न्यायालय के आदेश पर मुहर लगाते हुए पति को राहत दी है और प्राइवेसी से अहम फेयर ट्रायल को माना है।

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