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शाह ले रहे डोभाल-मनोज सिन्हा की मौजूदगी में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा स्थिति का जायजा

State gets new tiger reserve, approval to make Ratapani 8th Wildlife Century Tiger

दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा के लिए दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक स्थित गृह मंत्रालय में एक बैठक कर रहे हैं। बैठक में एनएसए अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, गृह सचिव, सेना प्रमुख मनोज पांडे और सेना प्रमुख के पद के लिए मनोनीत लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी, आईबी के निदेशक तपन डेका, सीआरपीएफ के महानिदेशक अनीश दयाल, बीएसएफ के महानिदेशक नितिन अग्रवाल तथा गृह मंत्रालय और केंद्र शासित प्रदेश के अन्य अधिकारी शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू कश्मीर को लेकर इसी तरह की बैठक आयोजित करने के तीन दिन बाद शाह ने भी उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हमले सहित कई आतंकवादी घटनाओं के बाद आतंकवाद विरोधी क्षमताओं का पूरा स्पेक्ट्रम तैनात करने के निर्देश दिए थे। सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर अधिकारी गृह मंत्री को जानकारी देंगे सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति, अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बलों की तैनाती, घुसपैठ के प्रयासों, चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों की स्थिति और केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय आतंकवादियों के बारे में अधिकारी जानकारी दी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अमित शाह प्रधानमंत्री के निर्देश के अनुरूप ही सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई के बारे में व्यापक दिशानिर्देश देंगे। जम्मू-कश्मीर में चार दिनों में चार आतंकी हमले आतंकवादियों ने चार दिनों में जम्मू-कश्मीर के रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में चार स्थानों पर हमले किए हैं। जिसमें नौ तीर्थ यात्रियों और एक सीआरपीएफ जवान की मौत हो गई और सात सुरक्षाकर्मी सहित कई अन्य लोग घायल हो गए।

नासा के चंद्र एक्स-रे ऑब्जरवेटरी ने ली तस्वीर, कैमरे में कैद हुआ पृथ्वी के सबसे नजदीकी ‘सुपर स्टार’

नई दिल्ली नासा के चंद्र एक्स-रे ऑब्जरवेटरी और नासा के दूसरे टेलीस्कोप से मिले नए डेटा के की मदद से पृथ्वी के सबसे बड़े और सबसे नजदीकी ‘सुपर’ स्टार समूह पर वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। इस ग्रुप को वेस्टरलंड 1 नाम दिया गया है। इन अध्ययनों की मदद से खगोलविदों को तारों के निर्माण की प्रकिया को समझने में मदद मिलेगी। यह एक्सटेंडेड वेस्टरलंड 1 और 2 ओपन क्लस्टर सर्वे (EWOCS) नाम की परियोजना से पहला सार्वजनिक रूप से जारी किया गया डाटा है। EWOCS का नेतृत्व में इटली के पलेर्मो में स्थित एक संस्थान कर रही है। चंद्र ऑब्जरवेटरी ने EWOCS के हिस्से के रूप में वेस्टरलंड 1 का लगभग 12 दिनों तक अध्ययन करने के बाद यह डाटा साझा किया है। नई तस्वीर में चंद्र का डाटा और नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप से पिछला डाटा शामिल है। चंद्र के एक्स-रे से क्लस्टर में नए तारे और गैसों का पता चलता है। युवा तारे ज़्यादातर सफ़ेद और गुलाबी रंग के दिखाई देते हैं, जबकि गर्म गैस गुलाबी, हरे और नीले रंग में दिखाई देती है। हबल के डेटा में कई तारे पीले और नीले रंग के डॉट्स के रूप में दिखाई देते हैं। एक दिलचस्प खोज यह है कि वेस्टरलंड 1 के केंद्र में चार प्रकाश वर्ष के दायरे में 1,075 तारे हैं। इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि चार प्रकाश वर्ष सूर्य और उसके निकटतम पड़ोसी तारे के बीच की दूरी है। EWOCS डेटा की मदद से वेस्टरलंड 1 के केंद्र के चारों ओर गर्म गैस के एक प्रभामंडल का पहली बार पता चला है। खगोलविदों का मानना ​​है कि यह क्लस्टर के गठन और विकास को समझने और इसके मास का बेहतर अनुमान लगाने के लिए जरूरी है। क्या होते हैं ‘सुपर स्टार क्लस्टर’? वर्तमान में, हमारी गैलेक्सी में हर साल केवल कुछ ही तारे बनते हैं। हालाँकि, अतीत की बात करे तो मिल्की-वे लगभग 10 बिलियन साल अपने चरम पर था जब यहां हर साल दर्जनों या सैकड़ों तारे बनते थे। इनमें से ज़्यादातर घटनाएं विशाल क्लस्टर्स में हुईं, जिन्हें ‘सुपर स्टार क्लस्टर’ के नाम से जाना जाता है। इन्हीं में से एक को वेस्टरलंड 1 नाम दिया गया है। ये क्लस्टर औरों की तुलना में नए हैं और इनका वजन सूरज के वजन से 10,000 गुना ज़्यादा है। वेस्टरलंड 1, 3 मिलियन से 5 मिलियन साल पुराना है। आज हमारी गैलेक्सी में कुछ ही सुपर स्टार क्लस्टर मौजूद हैं। यह हमें उस समय के बारे में अहम जानकारी देते हैं जब हमारी गैलेक्सी के ज़्यादातर सितारे बने थे। वेस्टरलंड 1 मिल्की वे में बचा हुआ सबसे बड़ा सुपर स्टार क्लस्टर है। यह पृथ्वी से सबसे करीबी, लगभग 13,000 प्रकाश वर्ष दूर है। इन विशेषताओं की वजह से वैज्ञानिक वेस्टरलंड 1 की मदद से सुपर स्टार क्लस्टर के वातावरण को और तारों के निर्माण की प्रकिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं।  

बहुप्रतिक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अगस्त में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री से बनकर बाहर आ जाएंगी

Good news for students dreaming of becoming doctors

नई दिल्ली मोदी सरकार 3.0 ने नए युग की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेनों के उत्पादन का अगले पांच साल का लक्ष्य तय कर दिया है। इसके तहत बहुप्रतिक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अगस्त में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) से बनकर बाहर आ जाएंगी। जबकि पांच से छह माह तक ट्रॉयल के बाद देशवासी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर का आनंद उठा सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक 300 से अधिक वंदे भारत स्लीपर व सीटिंग ट्रेनें देशभर में दौड़ने लगेंगी। वहीं, आम जनता के लिए चलने वाली 400 से अधिक अमृत भारत ट्रेनों का भी उत्पादन किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रथम चरण में 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। इसके पश्चात चरणबद्ध तरीके से सेमी हाई स्पीड 160-220 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाई जाएंगी। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दिसंबर या जनवरी में दिल्ली-कोलकाता अथवा दिल्ली-मुंबई में से किसी एक रेलमार्ग पर चलाने की संभावना है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में 16 कोच होंगे। इसमें 10 कोच एसी-3, चार कोच एसी-2 व एक कोच एसी-1 का होगा। जबकि दो कोच एसएलआर होंगे। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया अभी तय नहीं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया अभी तय नहीं किया गया है। हालांकि इसकी गति, सुविधाएं, सुरक्षा आदि को देखते हुए राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस से 10-15 फीसदी अधिक किराया होने की उम्मीद है। विदित हो, सरकार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को राजधानी ट्रेनों और वंदे भारत सीटिंग ट्रेनों को शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों के स्थान पर चलाने की योजना है। क्योंकि सेल्फ प्रोपेल्ड इंजन (एसपीई) तकनीक की मदद से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का एक्सेलरेशन-डीएक्सेलरेशन तेज होता है। जबकि राजधानी एक्सप्रेस में इंजन ट्रेन को खींचता और ब्रेक लगाता है। एसपीई तकनीक से लैस वंदे भारत ट्रेन की औसत रफ्तार बेहतर होने की उम्मीद है। इससे ट्रेन गंतव्य तक समय से तीन घंटे पहले पहुंचेगी। दो माह में शुरू होगा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रॉयल रेल मंत्री बनने के बाद पहली बार मीडिया से रूबरू हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आगामी दो माह में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पटरियों पर ट्रॉयल शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस साल के अंत तक पटरी पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। पहले दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू होंगी। अमृत भारत ट्रेनों का उत्पादन भी तेज गति से किया जा रहा है। वैष्णव ने बताया, टक्कररोधी तकनीक कवच 6000 किलोमीटर तक लगाया जा चुका है। इस माह के अंत तक 10,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर कवच लगाने का टेंडर जारी किया जाएगा। कवच को देशभर में लगाया जाएगा। इससे प्रथम चरण में देश के मेट्रो शहरों दिल्ली, कोलकाता, चैन्नई, मुंबई आदि शहरों के बीच वंदे भारत ट्रेनों को सेमी हाई स्पीड पर चलाया जा सकेगा। 10 साल में 35 हजार किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए रेल मंत्री ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में भीड़ को देखते हुए अप्रैल, मई व जून तक लगभग 20,000 स्पेशल ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। इस प्रकार चार करोड़ रेल यात्रियों ने सफर किया। वहीं, नियमित ट्रेनों में 20,000 अतिरिक्त कोच लगाकर चार लाख यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया गया। रेल मंत्री ने बताया कि पिछले 10 साल में 35 हजार किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। वर्तमान में 14.5 किलोमीटर प्रतिदिन ट्रैक बिछाए जा रहे हैं।  

International Yoga Day: ब्रिटेन और श्रीलंका में योग कार्यक्रम में लाखों लोग हुए शामिल

लंदन. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले दुनियाभर के देशों में योग कार्यक्रम हो रहे हैं। ब्रिटेन और श्रीलंका में योग को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग ने ट्राफलगर चौक पर तो  श्रीलंका के पूर्वी प्रांत के गवर्नर सेंथिल थोंडमन ने त्रिंकोमाली में एक योग कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। श्रीलंका के त्रिंकोमाली के गवर्नर सेंथिल थोंडमन ने 10वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह का आयोजन किया। इसमें पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। बता दें, 2014 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे अपनाने के बाद 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। 700 से अधिक लोगों ने भाग लिया भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने कहा, ‘लंदन के ट्राफलगर चौक पर 700 से अधिक लोगों का आना हमारे लिए बहुत खुशी की बात है। इसके चारों ओर प्रतिष्ठित प्रतिमाएं हैं। निश्चित रूप से, कई योग विद्यालय यहां आए और योग के अभ्यास में हमारा नेतृत्व किया।’ इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लंदन में हुए कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने का कहना है कि योग सभी को एकजुट करता है और योग सभी के लिए है। योग विद्यालय भी आए इस वर्ष क्या अलग है, इस बारे में पूछे गए सवाल के उत्तर में भारतीय राजदूत दोरईस्वामी ने बताया कि इस साल अधिक प्रतिभागी थे, अतिरिक्त योग विद्यालय शामिल हुए थे तथा समुदायों की विविधता भी अधिक थी। हालांकि, मुख्य ध्यान भागीदारी में अंतर के लक्ष्य के बजाय उपचार और व्यक्तिगत विकास में योग की भूमिका को जारी रखने पर रहता है। दोरईस्वामी ने शनिवार को कहा, ‘इस का कार्यक्रम इस मायने में अलग है कि हमारे यहां और भी अधिक लोग थे, हमारे साथ अधिक योग स्कूल जुड़े हैं और हमारे यहां समुदायों की एक बड़ी विविधता है।’ इस साल का विषय ‘महिला सशक्तिकरण’ इसके अलावा, ब्रिटेन की नागरिक इंद्रपाल ओहरी चंदेल ने भी बात की और बताया कि इस साल का विषय ‘महिला सशक्तिकरण’ है। उन्होंने भारतीयों और एशियाई लोगों के लिए योग के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि यह उनकी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सांस्कृतिक संबंध और महत्व को बढ़ावा देता है। बड़ी बात यह है कि आज भारतीय क्रिकेट की बधिर टीम के सदस्य भी यहां आए क्योंकि उनके मैच ग्रेट ब्रिटेन के साथ होंगे। कार्यक्रम के दौरान ब्रिटेन में भारतीय डायस्पोरा के सह-संस्थापक हितेश गुप्ता ने कहा, ‘आप देख सकते हैं कि हमारे समूह से बहुत सारे लोग यहां हैं। योग का जश्न मनाने के लिए आज लगभग 100 से अधिक लोग शामिल हुए हैं।’

नई शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू करने को सरकार तैयार, खत्म होगा इंतजार

Fifty thousand devotees visited Baba Omkareshwar

नई दिल्ली अरसे से लंबित शिक्षा सुधारों को गति देने की तैयारी हो रही है। इस कड़ी में भारतीय उच्च शिक्षा आयोग का प्रस्ताव अब जल्द संसद की दहलीज तक पहुंच सकता है। इस संबंध में विधेयक को कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजने की तैयारी शिक्षा मंत्रालय की ओर से पूरी कर ली गई है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दी है। हालांकि, कैबिनेट की मंजूरी और संसद में पेश करने के बाद भी सरकार इसे तुरंत पारित कराने की कोशिश नहीं करेगी, बल्कि सरकार का प्रयास होगा कि इसे संसदीय समिति के विचारार्थ भेजा जाए, जिससे इसकी सूक्ष्मता के साथ स्क्रूटनी हो जाए। सरकार आयोग के गठन से पहले व्यापक विचार विमर्श की प्रक्रिया पूरी कर लेना चाहती है। नई शिक्षा नीति के तहत बदलावों पर मंथन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर कई बदलाव किए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने सभी बदलावों को लेकर विभागीय स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। इसमें उच्च शिक्षा आयोग का गठन, उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने, डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने और विभिन्न बोर्डों के मानकों को समान बनाने के साथ परीक्षा और दाखिले से जुड़े सुधार शामिल हैं। आयोग से क्या होंगे बदलाव उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों में गैर-तकनीकी, तकनीकी और शैक्षिक संस्थानों को अलग-अलग नियामक चलाते हैं। उच्च शिक्षाा आयोग बनने से इस व्यवस्था को बदल दिया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के अलग-अलग विनियामकों की बजाय एक ही निमायक की स्थापना की तैयारियां की जा रही है। यह आयोग देश में सभी गैर-तकनीकी व तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ-साथ अध्यापक शिक्षा संस्थानों को विनियमित करेगा। इस कमीशन के अंदर मेडिकल और लॉ कॉलेज नहीं आएंगे। एचईसीआई की तीन प्रमुख भूमिकाएं होंगी। जिसमें एक्रेडिटेशन, प्रोफेशनल और शैक्षिक मानकों को बनाए रखना शामिल होगा। हालांकि फंडिंग एचईसीआई के अधीन नहीं होगी। अरसे से हो रहा इंतजार इस प्रस्ताव पर पिछले कई वर्षो से चर्चा चल रही है। लेकिन, यह मूर्त रूप नहीं ले पाया है। शिक्षा सुधारों के लिहाज से इसे काफी अहम माना जा रहा है, लेकिन इसके दूरगामी असर को देखते हुए सरकार इसकी हर स्तर पर व्यापक समीक्षा कर लेना चाहती है।  

इटली में PM मोदी ने जापानी पीएम के साथ की बैठक, चर्चा के दौरान बुलेट ट्रेन परियोजना की रफ्तार बढ़ाने का लिया संकल्प

रोम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इटली की यात्रा पूरी कर भारत वापस आ चुके हैं। उनकी यह यात्रा कई मायने में खास रही है। इस दौरान उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। उन्होंने जापान को यह भरोसा दिलाया कि अपने तीसरे कार्यकाल में भी वह जापान के साथ संबंधों को प्राथमिकता देते रहेंगे। केंद्र सरकार ने एक बयान में कहा कि भारत और जापान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, जिसमें ऐतिहासिक मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना भी शामिल है। बुलेट ट्रेन परियोजना में पांच साल की देरी होने की खबर के बीच जापानी अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि सभी खंडों पर काम शुरू हो गया है और वे प्रगति से संतुष्ट हैं। जापान के अनुसार, परियोजना को लेकर सभी अनिश्चितताएं दूर हो गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी और किशिदा ने 2022-2027 के बीच में भारत में 5 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश के लक्ष्य को अंजाम तक पहुंचाने की दिशा में बात की। उन्होंने कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी अपने 10वें वर्ष में है और उन्होंवे संबंधों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। आपको बता दें कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शनिवार को दक्षिणी इटली के अपुलिया क्षेत्र में जी-7 शिखर सम्मेलन का आधिकारिक रूप से समापन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी वार्ता का जिक्र किया। दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। सात औद्योगिक देशों के समूह की अध्यक्षता करने वाले देश के रूप में इटली ने भागीदार देशों अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जापान, जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं की मेजबानी की।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जून को वाराणसी में एक कार्यक्रम में किसानों को जारी करेंगे 20 हजार करोड़ रुपये

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जून को वाराणसी में एक कार्यक्रम में पीएम-किसान योजना की 17वीं किस्त के रूप में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करेंगे। इससे देश भर के 9.26 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा। यह जानकारी शनिवार को कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी। चौहान ने कहा,”भारत सरकार ने इस योजना के तहत अब तक पूरे देश में 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्रदान किया है।18 जून को जारी होने वाली राशि के साथ, योजना की शुरुआत से लाभार्थियों को प्रदान की गई कुल राशि 3.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।” चौहान ने कहा कि पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त जारी करने के बाद पीएम मोदी कृषि सखी के रूप में नामित 30 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों को प्रमाण पत्र भी प्रदान करेंगे। पीएम मोदी ने 10 जून को पीएम किसान निधि की 17वीं किस्त जारी करने की घोषणा के साथ अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत की। फरवरी 2019 में शुरू इस योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में साल भर मेें दो हजार रुपये की तीन किस्तों में छह हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाते हैं। मंत्री ने आगे कहा कि देश भर में लगभग 2.5 करोड़ किसान वीडियो के जरिए इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, 732 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), एक लाख से अधिक प्राथमिक कृषि सहकारी किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए देश भर से कृषि विज्ञान समितियों और 5 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) भी कार्यक्रम से जुड़ेंगे। कई केंद्रीय मंत्री किसानों से बातचीत करने और विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए 50 कृषि विज्ञान केंद्रों का दौरा करेंगे। किसान सम्मेलन के बाद, पीएम मोदी बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे और दशाश्वमेध घाट पर विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लेंगे।

मौसम विभाग का कहना है कि अनुकूल स्थितियां बनने लगी हैं और अगले 4-5 दिनों में मॉनसून गति पकड़ सकता है

नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। अगले चार से पांच दिन अधिकतम तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि अनुकूल स्थितियां बनने लगी हैं और अगले 4-5 दिनों में मॉनसून गति पकड़ सकता है। आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी हवाओं के कारण उत्तर भारत में तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत में अगले चार से पांच दिनों में बारिश का अनुमान है। पूर्वी मॉनसून भी गति पकड़ सकता है, जो बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ेगा। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में भी अभी चार-पांच दिनों तक गर्मी का सितम जारी रहेगा। इन राज्यों कुछ इलाकों में भीषण लू चलने की संभावना है। पहले बिहार फिर यूपी पहुंचेगा मॉनसून मौसम विभाग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि आगामी चार-पांच दिनों के दौरान महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों तथा गंगीय पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के शेष हिस्सों और बिहार के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। बिहार में आगे बढ़ने के बाद ही मॉनसून के उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ने के लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। आईएमडी ने बताया है कि 19 जून को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ आंधी चलने और बौछारें पड़ने के आसार हैं। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। 20 और 21 जून को पूरे प्रदेश में बारिश होने या गरज चमके साथ बौछारें पड़ने के आसार बन रहे हैं। चार दिन से गुजरात में आगे नहीं बढ़ा है मॉनसून आईएमडी के एक अधिकारी ने शनिवार को कहा कि गुजरात में मॉनसून प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण राज्य के अन्य हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाया है। आईएमडी के अहमदाबाद मौसम केंद्र के वैज्ञानिक रामाश्रय यादव ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 11 जून को दक्षिण गुजरात के नवसारी में दस्तक दी थी, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह चार दिन से आगे नहीं बढ़ पाया है। उन्होंने कहा, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आमतौर पर 15 जून को गुजरात में प्रवेश करता है और 20 जून तक अहमदाबाद और सौराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों सहित अन्य भागों में आगे बढ़ता है। 25 जून तक मॉनसून सौराष्ट्र के अधिकांश भागों में पहुंच जाता है और 30 जून तक यह पूरे गुजरात को कवर कर लेता है। इस बीच, आईएमडी ने अगले पांच दिनों में राज्य के कई जिलों में अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है।  

एनसीईआरटी की किताब में बाबरी मस्जिद का नाम भी हटा दिया गया, बदल दिया अयोध्या विवाद वाला चैप्टर

ASI presented 151 page report of survey conducted in Bhojshala in High Court

नई दिल्ली 12वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई एनसीईआरटी की किताब में बाबरी मस्जिद का नाम भी हटा दिया गया है। अब नई किताब में इसे ‘तीन गुंबद वाला ढांचा’ कहा गया है। वहीं अयोध्या वाले अध्याय को छोटा करके चार पेज से केवल दो में कर दिया गया है। इसमें बीजेपी की सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा, कार सेवकों की भूमिका, बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद हुई हिंसा, राष्ट्रपति शासन और अयोध्या में हुई हिंसा पर बीजेपी के खेद वाली बातों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरानी टेक्स्ट बुक में बताया गया था कि 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी। वहीं अब इस अध्याय में बताया गया है कि 1528 में श्रीराम के जन्मस्थान पर तीन गुंबद वाला ढांचा बना दिया गया है। हालांकि इस ढांचे में कई हिंदू चिह्न  बने हुए थे। इसतके अलावा आंतरिक और बाहरी दीवारों पर मूर्तियां बनी हुई थीं। पुरानी किताब में दो पेज में यही बताया गया था कि फैजाबाद जिला अदालत द्वारा 1986 में मस्जिद खोलने के फैसले के बाद किस तरह से मोबिलाइजेशन किया गया। 1992 में राम मंदिर बनाने के लिए रथ यात्रा और कारसेवा की वजह से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया। इसके बाद 1993 में सांप्रदायिक दंगे हुए। वहीं इस बार बताया गया है कि बीजेपी ने अयोध्या की घटनाओं को लेकर दुख व्यक्त किया। नई पुस्तक में क्या है नई किताब में बताया गया है कि 1986 में फैजाबाद जिला अदालत ने तीन गुंबद वाले ढांचे को खोलने का आदेश दे दिया और लोगों क पूजा करने की अनुमति मिल गई। माना जाता था कि इस तीन गुंबद वाले ढांचे को श्री राम के जन्मस्थान पर बनाया गया है। राम मंदिर का शिलान्यास कर दिया गया लेकिन आगे निर्माण पर रोक लगा दी गई। हिंदू समुदाय को लगा कि उसकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और मुस्लिम समुदाय को ढांचे पर अधिकार बनाए रखने का अधिकार मिल रहा है। वहीं 1992 में ढांचा गिरने के बाद बहुत सारे आलोचकों ने कहा कि यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। नई किताब में अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शामिल किया गया है। इसमें बताया गया कि 9 नवंब 2019 को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक  बेंच ने फैसला सुनाया कि यह भूमि मंदिर की है। पुरानी किताब में कुछ न्यूजपेपर कटिंग की तस्वीरें लगाई गई थीं जिनमें बाबारी ढहाने के बाद कल्याण सिंह सरकार को हटाने का आदेश शामिल था। इसे अब हटा दिया गया है। बता दें कि 2014 के बाद से चौथी बार एनसीईआरटी की किताब को अपडेट किया गया है। अप्रैल में एनसीईआरटी ने कहा था कि राजनीति में  हालिया  डिवेलपमेंट के आधार पर चैप्टर में परिवर्तन किया जाता है और नई चीजों को शामिल किया जाता है।  

फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री ने लिखी PM मोदी को चिट्ठी, गाजा में रुकवा दें युद्ध

नई दिल्ली गाजा में इजरायल के द्वारा किए जा रहे हमलों से फिलिस्तीन परेशान है। इस बीच फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है और तत्काल युद्ध विराम के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने युद्धग्रस्त गाजा को मिलने वाली सहायता बढ़ाने के लिए दुनिया के बाकी देशों पर दबाव बढ़ाने की अपील की है। फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद मुस्तफा ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी को ग्लोबल लीडर बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई देते हुए फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री ने कहा कि आप एक वैश्विक नेता हैं। मानवाधिकारों और शांति को महत्व देने वाले राष्ट्र के रूप में गाजा में नरसंहार को समाप्त करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुस्तफा ने कहा, “भारत को तत्काल युद्ध विराम के लिए सभी राजनयिक चैनलों का उपयोग करना चाहिए। हमारे दुख को कम करने में हमारी मदद करनी चाहिए। फिलिस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाना चाहिए और हमारे ऊपर किए जा अत्याचारों के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाना चाहिए।” आपको बता दें कि भारत ने पिछले साल तत्काल युद्ध विराम की मांग करने वाले UNGA प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि, भारत ने स्पष्ट रूप से इसके लिए आह्वान नहीं किया था। इजरायल को दिए गए संदेश में भारत सरकार ने लगातार इजरायल-हमास संघर्ष के कारण हो रही नागरिकों की मौत की कड़ी निंदा की है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने का आह्वान भी कर रही है। मुस्तफा ने पीएम मोदी को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने फिलिस्तीनी मुद्दे और फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए लगातार समर्थन दिया है। गाजा में घातक हमले में आठ इजराइली सैनिकों की मौत इस बीच इजराइली सेना ने शनिवार को कहा कि दक्षिणी गाजा में किये गए एक विस्फोट में उसके आठ सैनिकों की मौत हो गई। यह पिछले कई महीनों में किये गये अब तक का सबसे घातक हमला था। शनिवार का यह धमाका दक्षिण रफह शहर में हुआ। इजराइल रफह को हमास की मजबूत पकड़ वाला आखिरी बड़ा गढ़ मानता है। इस हमले से इजराइली प्रदर्शनकारियों द्वारा की जा रही संघर्ष विराम की मांग को संभवत: बढ़ावा मिलेगा । यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अति रूढ़िवादी युवाओं को सैन्य सेवा से छूट देने को लेकर सरकार को व्यापाक नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इजराइल और फलस्तीन में आठ महीने से अधिक समय से लड़ाई चल रही है। पिछले साल सात अक्टूबर को हमास और अन्य आतंकवादियों द्वारा किये गये हमले में 1200 लोगों की मौत हो गई थी तथा 250 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजराइल ने हमास के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया था। गाजा में जनवरी में फलस्तीनी आतंकवादियों के हमले में 21 इजराइली सैनिकों की मौत हो गयी थी।  

जापान में फैली ऐसी रहस्यमयी बीमारी, मरीज महज 48 घंटे के भीतर दम तोड़ देता है

29 Nagar Forests will be built in 17 districts of the state by spending Rs 29 crore

नई दिल्ली पूर्वी एशियाई देश जापान को इन दिनों ऐसी दुर्लभ बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है कि अगर यह किसी को यह बीमारी पकड़ गई तो मौत पक्की है। मरीज महज 48 घंटे के भीतर दम तोड़ देता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह रहस्यमयी बीमारी मांस खाने वाले बैक्टीरिया से फैल रही है। कोरोना प्रतिबंध हटने के बाद देश एक बार फिर नई बीमारी की चपेट में है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफेक्शियस डिजीज का कहना है कि वह इस रहस्यमयी बीमारी पर 1999 से नजर रख रहा है। इस साल 2 जून तक जापान में इस बीमारी के 977 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसका रिकॉर्ड 941 था। इस साल यह बीमारी ज्यादा कहर बरपा रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक, इसे स्ट्रेप्टोकोकल टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (एसटीएसएस) नाम दिया गया है। लक्षण और किस उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा इस बीमारी की शुरुआत आमतौर पर सूजन और गले में खराश से शुरू होती है। लेकिन कुछ प्रकार के बैक्टीरिया के कारण लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं। जिनमें शरीर के अंगों में दर्द और सूजन, बुखार, लो ब्लड प्रेशर शामिल है। सांस लेने में समस्या, अंगों काम करना बंद हो जाना और फिर मौत। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में फैलने का अधिक खतरा है। बीमारी पकड़ी तो मौत पक्की टोक्यो महिला चिकित्सा विश्वविद्यालय में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर केन किकुची का कहना है,”इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा यह है कि मौत 48 घंटे के भीतर हो सकती है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही किसी मरीज को सुबह में पैर में सूजन दिखाई देती है, दोपहर तक यह घुटने तक फैल सकती है और 48 घंटों के भीतर उसकी मृत्यु हो सकती है।” किकुची का कहना है कि संक्रमण की वर्तमान दर को देखें तो जापान में इस तरह के मामलों की संख्या इस साल 2,500 तक पहुंच सकती है। इसमें मृत्यु दर 30% हो सकती है, जो बेहद भयावह है। किकुची ने लोगों से हाथ की स्वच्छता बनाए रखने और खुले घाव के इलाज में कोताही न बरतने का आग्रह किया है। यह बैक्टीरिया गंदगी से हाथों और फिर शरीर के अंदर जा सकता है।  

सोलर पैनल का उपयोग करके आप अपने घर की बिजली की जरूरतें पूरी कर सकते हैं, 25 साल तक रहेंगे टेंशन फ्री, पंखे, AC सब जलाये

Despite five years of high school approval

नई दिल्ली गर्मी के कड़े तेवर और बिजली कटौती से बेहाल लोगों के लिए ग्रीन एनर्जी एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है। इस समाधान में सोलर पैनल का उपयोग करके आप अपने घर की बिजली की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जा रही है। ऐसे में आप ग्रीन एनर्ज  के सहारे बिजली की कौटती और महंगे बिजली बिल से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाना होगा। खास बात ये है कि इस काम के लिए सरकार की तरफ से मदद भी मिलेगी। फिर AC, पंखे चलाएं या फिर रोज घर में 10 बल्ब जलाएं, बिजली बिल का झंझट ही खत्म। आइए जानते हैं कैसे आप सोलर पैनल लगवाकर बिजली के महंगे बिलों और कटौती से निजात पा सकते हैं। सोलर पैनल लगाने का फायदा सोलर पैनल आपके घर की छत पर लगवाने से आप अपनी जरूरत भर की बिजली खुद उत्पन्न कर सकते हैं। इससे न केवल आपका बिजली बिल कम होगा, बल्कि बिजली कटौती का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। सरकार कर रही है मदद अगर आप अपने यहां सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं, तो सरकार इसमें आपकी मदद करेगी। सरकार की ओर से सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। एक बार पैसा खर्च कर आप लंबे समय से बिजली कटौती और महंगे बिल की परेशानी से निजात पा सकते हैं। अगर आप अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको ये अनुमान लगाना होगा कि आपकी रोजाना की खपत कितनी है यानी आपको हर दिन कितने यूनिट बिजली की जरूरत है। इसके लिए एक लिस्ट बनाएं कि आपके घर में कौन-कौन से ऐसे उपकरण हैं, जो बिजली से चलते हैं। अगर आपके घर में 2-3 पंखे, एक फ्रिज, 6-8 LED लाइटें, 1 पानी की मोटर और टीवी जैसे उपकरण बिजली से चलने वाले हैं, तो आपको प्रत्येक दिन 6 से 8 यूनिट बिजली की जरूरत पड़ेगी। फिर उसके अनुसार सोलर पैनल का सेट अपने यहां इंस्टॉल करवाएं। 6 से 8 यूनिट रोजाना बिजली पाने के लिए आप 2 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल अपने घर की छत पर लगवा सकते हैं। इसमें आपको चार सोलर पैनल मिलेंगे। इन्हें मिलाकर लगाना होगा। मोनोपर्क बाइफीशियल सोलर पैनल इस वक्त नए टेक्नोलॉजी के सोलर पैनल हैं। इसमें आगे और पीछे दोनों तरफ से पावर जेनरेट होता है। इस तरह आपको रोजना आपकी जरूरत भर बिजली मिल जाएगी। सोलर पैनल की लागत अथवा सब्सिडी की जानकारी आमतौर पर, 1 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाने के लिए करीब 90,000 रुपये, 2 किलोवाट के लिए 1.5 लाख रुपये, और 3 किलोवाट के लिए 2 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। सोलर पैनल की लाइफ 25 साल होती है, जिससे यह एक लंबे समय के लिए फायदे का सौदा साबित होता है। सरकार सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। उदाहरण के तौर पर, 1 किलोवाट के लिए आपको 18,000 रुपये, 2 किलोवाट के लिए 30,000 रुपये, और 3 किलोवाट के लिए 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। इतना ही नहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) इस योजना के तहत लोन भी प्रदान कर रहा है। 3 किलोवाट के लिए 2 लाख रुपये तक का लोन 7 फीसदी ब्याज पर मिल सकता है, जिससे आपकी शुरुआती लागत कम हो जाएगी। सोलर रूफटॉप लगवाने के लिए कैसे करें अप्लाई पहले ये काम https://solarrooftop.gov.in/ पर लॉगिन करके किया जाता था, लेकिन अब http://pmsuryaghar.gov.in के जरिए भी सोलरपैनल लगावाया जा सकता है। सब्सिडी की बात करें तो पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए वाले खर्च में इस योजना के तहत, 1 किलोवाट के लिए 18 हजार रुपये, 2 किलोवाट तक 30,000 रुपये और 3 किलोवाट के लिए कुल सब्सिडी 78,000 रुपये मिल जाती है। आवेदन की प्रक्रिया 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट [PM Surya Ghar](https://pmsuryaghar.gov.in) पर जाएं। 2. “Apply for Rooftop Solar” विकल्प चुनें। 3. अपने राज्य और बिजली वितरण कंपनी का नाम चुनें। 4. बिजली उपभोक्ता नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल दर्ज करें। 5. नए पेज पर लॉगिन करें और दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। 6. फीजिबिलिटी अप्रूवल मिलने के बाद आप अपने DISCOM के साथ रजिस्टर्ड किसी भी वेंडर से सोलर पैनल इंस्टॉल करवा सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर में सिंधु जल संधि के लिए भारत,पाक प्रतिनिधिमंडल के साथ 25 ‘संपर्क अधिकारियो’ की नियुक्ति

जम्मू सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के प्रावधानों से संबंधित 17 से 28 जून तक चलने वाली यात्रा के मद्देनजर भारत और पाकिस्तान के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ 25 संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति की। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों को प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान कर्तव्य और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी देने के लिए क्रमशः प्रबंध निदेशक, जम्मू-कश्मीर, बिजली विकास निगम, जम्मू तथा श्रीनगर के कार्यालयों को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। विशेष रूप से सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) भारत और पाकिस्तान के बीच एक जल-वितरण संधि है, जो सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों में उपलब्ध पानी का उपयोग करने के लिए विश्व बैंक द्वारा व्यवस्थित तथा बातचीत के आधार पर आधारित है।  

तीन नए कानूनों को लेकर जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से कानून मंत्रालय देश भर में सम्मेलन का आयोजित कर रहा

नई दिल्ली तीन नए कानूनों को लेकर जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से कानून मंत्रालय देश भर में सम्मेलन का आयोजित कर रहा है। ‘आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन में भारत के प्रगतिशील पथ’ की श्रृंखला में कानून एवं न्याय मंत्रालय का तीसरा सम्मेलन रविवार को कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। कानून एवं न्याय मंत्रालय के मुताबिक 25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति द्वारा भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय सुरक्षा अधिनियम, 2023 को मंजूरी दी गई थी। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है। ये नए आपराधिक कानून 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी होंगे। ऐसे में इन तीनों कानूनों के बारे में स्पष्टता और जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से नई दिल्ली और गुवाहाटी में दो प्रमुख सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में तीसरा सम्मेलन कोलकाता के आईटीसी रॉयल बंगाल, हाल्डेन एवेन्यू में आयोजित किया जा रहा है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. शिवगणनम उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। सम्मेलन को भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल भी संबोधित करेंगे। सम्मेलन में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार राज्यों के न्यायाधीशों और विभिन्न उच्च न्यायालयों, जिला और निचली अदालतों के पूर्व न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, पुलिस अधिकारियों जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन में लोक अभियोजक, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालयों और अन्य कानून कॉलेजों के कानून के छात्र भी भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य सार्थक बातचीत, विचार-विमर्श और प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से तीन नए आपराधिक कानूनों की मुख्य विशेषताओं को सामने लाना है। दो सत्रों में आयोजित इस सम्मेलन के पहले सत्र में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) के कार्यान्वयन का आंकलन करने के लिए तुलनात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर केंद्रित चर्चा होगी। दूसरे तकनीकी सत्र में भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) के मुख्य पहलुओं पर चर्चा की जाएगी यानी साक्ष्य, अपराध पर निर्णय लेने में आधारशिला। चर्चाएं दस्तावेज़ों और सबूत के विस्तृत दायरे पर केंद्रित होंगी, जो व्यापक परिभाषाओं की शुरूआत से सुगम होंगे।  

पुणे के बाद अब नागपुर में तेज गति से चला नाबालिग से पांच लोगों को कुचला

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नागपुर. महाराष्ट्र में ‘हिट एंड रन’ का सिलसिला जारी है। पुणे पोर्श कांड को लोग अभी भूल भी नहीं पाए कि एक और वैसा ही मामला सामने आ गया। अब नागपुर में हाई स्पीड कार की वजह से सड़क दुर्घटना का मामला आया है। नंदनवन पुलिस स्टेशन अंतर्गत वेंकटेशनगर चौक में केडीके कॉलेज के पास एक नाबालिग कार चला रहा था। अचानक काले रंग की स्कोडा नियंत्रण से बाहर हो गई। अनियंत्रित कार ने पहले सड़क किनारे खड़े कुछ दोपहिया वाहनों को टक्कर मारी और फिर फल-सब्जी विक्रेताओं और कुछ राहगीरों की भीड़ में घुस गई। बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई कार आखिरकार सड़क किनारे एक पेड़ से टकराने के बाद रुकी। सड़क पर कोहराम मचा इससे सड़क पर कोहराम मच गया। फल और सब्जी विक्रेताओं सहित पांच लोग जख्मी हो गए। दो की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं कई वाहन बर्बाद हो गए। गुस्साई भीड़ ने नाबालिक को कार से बाहर खींच कर सड़क पर गिरा लिया। बेकाबू भीड़ ने बुरी तरह से मारा, जिससे वह मरने तक की कगार पर पहुंच गया। किशोर ने अपनी मदद के लिए लोगों से गुहार लगाई। बाद में कुछ लोगों ने आरोपी नाबालिग को भीड़ से बचाया और फिर उसे पुलिस के हवाले कर दिया। यह दिल दहला देने वाली घटना शनिवार दोपहर करीब एक बजे की है। घायलों की पहचान महेंद्र अग्रवाल, वंदना अग्रवाल, सब्जी विक्रेता बसंती गोंड, गोलू साहू और कार्तिक के रूप में हुई है। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है।

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