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बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर समिति जल्द ही घटनाओं की पूरी रिपोर्ट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेगी

कोलकाता लोकसभा चुनाव के बाद हो रही हिंसा का जायजा लेने के लिए भाजपा की केंद्रीय टीम बंगाल आ रही है। यह समिति जल्द ही बंगाल का दौरा कर हिंसा की घटनाओं की पूरी रिपोर्ट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेगी। सांसद व त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के नेतृत्व में शनिवार को पार्टी के चार सांसदों की समिति गठित की गई है। बिप्लब कुमार देब को समिति का संयोजक बनाया गया है। इस चार सदस्यीय समिति में सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, राज्यसभा सदस्य एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल और सांसद कविता पाटीदार को शामिल किया गया है। समिति के गठन के साथ ही भाजपा ने बंगाल में चुनाव बाद हो रही हिंसा के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। यहां सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हुआ- बीजेपी भाजपा ने कहा कि भारत के 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में हाल ही में लोकसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। लोकसभा के साथ-साथ तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए और सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हुआ, लेकिन बंगाल को छोड़कर कहीं भी राजनीतिक हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है। बंगाल ही एकमात्र ऐसा राज्य जहां चुनाव के बाद हुई हिंसा बंगाल ही एकमात्र ऐसा राज्य है जो चुनाव के बाद हिंसा की चपेट में है, जैसा कि वहां 2021 के विधानसभा चुनाव के भी बाद देखा था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती 21 जून तक बढ़ा दी है और मामले को आगे की समीक्षा के लिए 18 जून को सूचीबद्ध किया है।

नीट पेपर लीक मामले में बिहार, गुजरात और हरियाणा की घटनाएं विश्वसनीयता पर खड़े कर रही सवाल

नई दिल्ली NEET UG row 2024: पहली घटना- बिहार के पटना और नालंदा जिले में पांच मई को नीट पेपर लीक (NEET-UG Paper Leak) की घटना सामने आई। स्थानीय पुलिस ने इसमें कुछ लोगों को गिरफ्तारी की। साथ ही नीट पेपर के कुछ अधजला हिस्सा भी बरामद किए, जिसमें करीब 74 सवाल दिख रहे हैं। पुलिस ने एनटीए (NTA) से मूल प्रश्नपत्र मुहैया कराने को कहा, ताकि जांचा जा सके कि जो प्रश्न पत्र उन्हें मिला है वह सही या नहीं। अब तक एनटीए (NTA) ने उन्हें यह मुहैया नहीं कराया है। दूसरी घटना- गुजरात के गोधरा में एक केंद्र पर पैसा लेकर छात्रों को नीट परीक्षा (NEET-UG Exam 2024) में पास कराने की घटना सामने आई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन को परीक्षा से ठीक पहले ही इसकी जानकारी लग जाती है और छापेमारी कर वह इनमें शामिल कोचिंग संचालक, स्कूल के प्रिंसिपल आदि को लोगों को पकड़ता है। उनके पास से दो करोड़ से अधिक के चेक और सात लाख रुपए कैश पकड़ा जाता है। जांच में जो सामने आया है, कि स्थानीय कोचिंग संचालक ने प्रिंसिपल के साथ कुछ बच्चों को पास कराने का ठेका लिया था। एनटीए ने उस प्रिंसिपल को स्थानीय स्तर पर परीक्षा का कोआर्डीनेटर बनाया था। इनमें एनटीए का पर्यवेक्षक भी शामिल था। सवाल यह है कि गोधरा में तो स्थानीय प्रशासन ने पकड़ लिया। लेकिन क्या गारंटी है कि दूसरी जगहों पर ऐसा नहीं हुआ होगा। तीसरी घटना- हरियाणा में झज्जर के परीक्षा केंद्र में नीट परीक्षा के दौरान गलत पेपर खुलने और परीक्षा के दौरान छात्रों के समय के नुकसान की जानकारी एनटीए की ओर से दी जा रही है। इस दौरान छात्रों को इसकी भरपाई में ग्रेस मा‌र्क्स दिए जाते है। छात्रों के विरोध के बाद में उसे वापस भी ले लिया जाता है। वहीं, झज्जर के इस स्कूल की प्रिंसिपल अंशु यादव का कहना है कि उनके परीक्षा केंद्र पर किसी भी छात्र का एक मिनट का समय बर्बाद नहीं हुआ। ऐसे में इस केंद्र के छात्रों को फिर ग्रेस मा‌र्क्स देने का कहानी कैसे गढ़ी गई। खासबात यह है कि इसी केंद्र के छह छात्र ग्रेस मा‌र्क्स पाने के बाद टापर की सूची में आ गए थे। जिसके बाद विवाद और बढ़ा। मेडिकल में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट -यूजी (नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट-अंडर ग्रेजुएट) में गड़बड़ी का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने है। जो इसे आठ जुलाई को सुनेगा। लेकिन नीट परीक्षा से जुडी यह तीनों घटनाओं ने एनटीए पर सवाल खड़ा कर दिया है और एनटीए की चुप्पी से यह बढ़ता जा रहा है। वैसे भी अब तक बिहार के पटना व नालंदा, गुजरात के गोधरा और हरियाणा के झज्जर से जिन तरह की घटनाएं सामने आयी है, वह एनटीए पर आंख मूंद कर भरोसा करने वालों के लिए आंखे खोलने वाली है। खासकर गोधरा में जिस तरह से कोचिंग संचालक ने स्कूल प्रिंसिपल के साथ मिलकर छात्रों को पास कराने की योजना बनाई थी। उनसे पैसे लिए थे। जो बरामद भी हुए थे। यह वही स्कूल प्रिंसिपल था जिसे एनटीए ने अपना परीक्षा कोआर्डिनेटर बना रखा था। उसके पास ही परीक्षा को ठीक ढंग से संचालित करने की जिम्मेदारी थी। यही नहीं जांच में अब तक जो सामने आया है, उसके तहत इनमें एनटीए का पर्यवेक्षक भी शामिल है। शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे छात्रों और अभिभावकों ने उनसे सवाल किया कि जब गोधरा(गुजरात) में ऐसी घटना हो सकती है तो दूसरे शहरों में क्यों नहीं। एनटीए के पास कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। गोधरा में योजना के तहत पैसा लेकर छात्रों से कहा गया था उन्हें जो सही सवाल आए वह उसके जवाब ओएमआर सीट में अंकित कर दें, बाकी सवालों की जगह छोड़ दें। हम बाद में उसे भर देंगे। छात्रों ने केंद्रीय मंत्री के सामने इसी तरह से बिहार और हरियाणा का भी मुद्दा प्रमुखता से रखा। साथ ही इन सारी गडबड़ी की जानकारी भी दी। सूत्रों की मानें तो इन गड़बडि़यों से जुड़ी जानकारी समझने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री भी सख्त हुए हैं और एनटीए को जवाबदेह बनाने की बात कही है। सूत्रों का दावा तो यह भी है कि एनटीए को पांच जून को ही कई राज्यों से पेपर लीक होने की जानकारी अलग-अलग एजेंसियों के जरिए मिल गई थी, लेकिन वह सभी को खारिज करती रही। एनटीए फिलहाल जेईई, नीट, यूजीसी नेट, सीयूईटी, क्लैट जैसी दर्जनों परीक्षाएं कराता है और इसके जरिए लगभग दो करोड़ बच्चे परीक्षा देते हैं। ऐसी स्थिति में एनटीए को अपनी योग्यता के साथ साथ पारदर्शिता साबित करनी ही होगी।

आईटी के छात्रों ने बनाया आयुर्मिंत्रम एआई चैट बॉट, बताएगा एलर्जी एवं शरीर की प्रवृति

Why is there lack of employment in the country despite urbanization and economic development?

जयपुर  श्री गोविन्दराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी व विज्ञान संस्थान (एसजीएसआईटीएस) के विद्यार्थी एक एआई पर आधारित ऐसा ऐप डेवलप कर रहे हैं, जो मरीजों के लिए कारगर साबित होगा। डिपार्टमेंट ऑफ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रो. ललित पुरोहित ने बताया कि एसजीएसआईटीएस डायरेक्टर प्रो. राकेश के नेतृत्व में विभाग के स्टूडेंट्स ‘एआई चैट बॉट’ नाम का ऐप बना रहे हैं। यह ऐप डॉक्टर की तरह मरीजों से प्रश्न पूछेगा और बीमारी के अनुसार सलाह भी देगा कि प्रिकॉशन कब लेना है, डाइट प्लान क्या रहेगा। कौन सी बीमारी है, किस डॉक्टर को दिखाना है। क्षेत्र के मुताबिक मिलेगी डॉक्टर की जानकारी प्रो. पुरोहित के मुताबिक एआई चैट बॉट एरिया वाइज व बीमारी के हिसाब से डॉक्टर की जानकारी देगा। इस ऐप में सरकारी व निजी अस्पतालों को जोड़ा जाएगा। किस जगह कितने में फीस लगती है, अस्पताल कितनी दूरी में हैं, डॉक्टर से मिलने का समय, मरीज का एज ग्रुप, पुरानी बीमारी कौन-कौन सी रही, कौन सी बीमारी का इलाज चल रहा है। सारी जानकारी इस ऐप में मिलेगी। डिपार्टमेंट के 8 विद्यार्थी कर रहे काम प्रो. सुनीता वर्मा ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ़ इनफाॅर्मेशन टेक्नोलॉजी के 8 विद्यार्थी दिन में इस सॉफ्टवेयर को बनाने में काम कर रहे हैं। बाकी समय वह अपनी कक्षा में देते हैं। आने वाले 6 महीने में यह ऐप तैयार हो जाएगा। इसमें मरीज को सारी जानकारी चुटकियों में मिलेगी। एसजीएसआईटीएस संभवत: प्रदेश का पहला सरकारी कॉलेज है, जहां इस तरह का ऐप तैयार किया जा रहा है। ट्रिपलआईटी के छात्र हर्ष जैन, मोहित खैरनार, सत्यम सागर, अक्षिता अग्रवाल, ओजस कुशवाहा और रजत कुमावत ने इस चैटबॉट को तैयार किया है। छात्रों ने बताया कि जल्द ही इस स्टार्टअप के पंजीकरण की प्रकिया शुरू की जाएगी। पंजीयन में बाद लोग इस ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकेंगे। -एक करोड़ सालाना कमाई का अनुमान छात्रों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए सरकार से एक लाख की राशि प्राप्त हुई है। इस चैटबॉट से भविष्य में आयुर्वेद दवाओं की डिमांड बढ़ेगी। इससे सालाना एक करोड़ की कमाई का अनुमान लगाया जा रहा है। -मिलेगा श्रेष्ठ उपचार इस स्टार्टअप से देश के करोड़ों लोगों जो आयुर्वेद पर विश्वास करते हैं उन्हें एक श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति से उपचार मिलेगा और एक स्वदेशी उद्योग की स्थापना होगी जिससे हमारी इकोनॉमी भी सुदृढ़ होगी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी प्राप्त होगी। दो माह में मिले 28 आइडिया ई सेल के प्रभारी अजय श्रीवास्सव ने बताया कि छात्र-छात्राओं से स्टार्टअप के लिए आइडिया मांगे गए थे, दो माह लगभग 28 आइडिया छात्र-छात्राओं ने आइडिया सबमिट किए थे। इसमें से ऑल इंडिया लेवल पर 3 आइडिया का चयन हुआ है। तीनों स्टार्टअप को शुरू करने के लिए सरकार की अनुमति भी मिल गई है। इसमें आयुर्मिंत्रम एआई चैट बॉट भी शामिल है।

चीन यात्रा से पहले PM मोदी से मिलेंगी शेख हसीना, 21 और 22 जून को भारत की यात्रा पर नई दिल्ली आने की संभावना

Forest gives clean chit in case of IFS officers trapped in Rs 7 crore scam

नई दिल्ली बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के 21 और 22 जून, 2024 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली आने की संभावना है। यह इस महीने उनकी दूसरी भारत यात्रा है। 09 जून, 2024 को पीएम नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए वह भारत यात्रा पर आई थी और इस दौरान उनकी पीएम मोदी से संक्षिप्त बातचीत भी हुई थी। लेकिन अब अगले हफ्ते जब वह भारत में होंगी जो दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सारे आयामों पर विस्तार से बातचीत होगी। शेख हसीना की यात्रा क्यों महत्वपूर्ण? हसीना की इस यात्रा का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि वह अगले महीने (जुलाई) में बीजिंग की यात्रा पर जा रही हैं। चीन की तरफ से यह कहा गया है कि बांग्लादेश पीएम की आगामी यात्रा के दौरान बड़ी घोषणाएं की जाएंगी। ऐसे में जानकार मान रहे हैं कि पीएम हसीना भारत और चीन के रिश्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए नई दिल्ली आ रही हैं ताकि उनकी बीजिंग यात्रा को लेकर कोई गलतफहमी नहीं बने। पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में हुई थी शामिल जनवरी, 2024 आम चुनाव में विजयी होने के बाद पीएम हसीना ने अभी तक किसी देश की आधिकारिक यात्रा नहीं की है। चीन यात्रा को लेकर उनका फैसला पहले ही चुका था। सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश की तरफ से ही यह प्रस्ताव आया था की हसीना बीजिंग यात्रा से पहले नई दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करना चाहती हैं। यह भारत सरकार के साथ हसीना के बेहद घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए लिया गया फैसला है। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे? मोदी और हसीना के नेतृत्व में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले दस वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। बांग्लादेश आम चुनाव से पहले जब अमेरिका की तरफ से हसीना सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही थी तब भारत ने परोक्ष तौर पर उनकी मदद की। इस दौरान भारत की मदद से बांग्लादेश में कई कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को प्रगाढ़ बनाया गया है। पुूर्वोत्तर भारत के राज्यों को बांग्लादेश से जोड़ने की रणनीति लगातार काम कर रही है। भारत यात्रा की खास अहमियत हसीना सरकार ने ढांचागत परियोजनाओं में चीन की मदद जरूर ली है लेकिन चीन के प्रभाव को हावी नहीं होने दिया है। इन हालात में हसीना की भावी भारत यात्रा की खास अहमियत है। सूत्रों का कहना है कि चीन ने यह संकेत दिया है कि वह बांग्लादेश की तीस्ता नदी की सफाई के लिए भारी-भरकम राशि की मदद देने को तैयार है। यह मुद्दा भारत के लिए संवेदनशील है क्योंकि चीन की कंपनियों को ठेका मिलने का यह मतलब होगा कि उसे तीस्ता नदी से संबंधित सारा डाटा भी हासिल हो जाएगा। बांग्लादेश को भारत देगा ये प्रस्ताव माना जा रहा है कि भारत की तरफ से भी चीन जैसा ही प्रस्ताव बांग्लादेश को दिया जा सकता है। दूसरी तरफ, भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे को लेकर समझौता होने के बावजूद, इसे भारत सरकार की तरफ से अंतिम मंजूरी नहीं दी जा सकी है। पीएम मोदी और पीएम हसीना के बीच पिछले चार आधिकारिक वार्ताओं में इसका जिक्र किया गया है। बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्ति की वजह से भारत सरकार इस पर फैसला नहीं कर पा रही है। ऐसे में बांग्लादेश की पीएम एक बार फिर तीस्ता जल बंटवारे संधि को लागू करने का आग्रह पीएम मोदी से कर सकती हैं।

उच्चतम शिखर पर पहुंचा देश का विदेशी मुद्रा भंडार

नईदिल्ली देश का विदेशी मुद्रा भंडार सात जून को समाप्त सप्ताह में 4.307 अरब डॉलर बढ़कर 655.817 अरब डॉलर की नयी सर्वकालिक ऊंचाई को छू गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे पूर्व के सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 4.837 अरब डॉलर के उछाल के साथ 651.51 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। इससे पहले, विदेशी मुद्रा भंडार का उच्चतम स्तर 10 मई को 648.87 अरब डॉलर था। पिछले कुछ सप्ताहों में विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बढ़ गया स्वर्ण भंडार रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, सात जून को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां 3.773 अरब डॉलर बढ़कर 576.337 अरब डॉलर हो गयीं। डॉलर के संदर्भ में उल्लेखित विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 48.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 56.982 अरब डॉलर हो गया। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.161 अरब डॉलर हो गया। रिजर्व बैंक ने कहा कि आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित जमा भी एक करोड़ डॉलर बढ़कर 4.336 अरब डॉलर हो गई। पाकिस्तान के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार गिरावट के साथ 9 अरब डॉलर के करीब बना हुआ है। वहीं, पाकिस्तानी रुपया यूएस डॉलर के मुकाबले 278 पर है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की लेटेस्ट वीकली अपडेट के अनुसार, 7 जून 2024 को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6 मिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 9.10 अरब डॉलर रहा। यह मुद्रा भंडार 2 महीने से कम के आयात के जितना ही है। अगर पाकिस्तान ने कुछ मजबूत कदम नहीं उठाए, तो वह विदेशों से कुछ भी आयात नहीं कर पाएगा।

पीएम मोदी चेन्नई-नागरकोइल वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे, यात्रियों की बल्ले-बल्ले

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के दौरे पर होंगे। इस दौरान वह शहर में रेलवे परियोजनाओं और दूसरे कार्यक्रमों के उद्घाटन में भाग लेंगे। दक्षिण रेलवे से जुड़े सूत्रों ने पीएम के आगमन की खबर की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुरात्ची थलाइवर डॉ. एमजी रामचंद्रन चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सार्वजनिक समारोह आयोजित किया जाएगा। यहां पीएम मोदी चेन्नई-नागरकोइल वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। इतना ही नहीं, वह बेसिन ब्रिज रेलवे जंक्शन के पास ट्रेन सेट (वंदे भारत) रखरखाव डिपो की आधारशिला भी रखेंगे। नरेंद्र मोदी अरलवैनोझी-नागरकोइल और मेलप्पलायम-तिरुनेलवेली लाइन दोहरीकरण कार्य का उद्घाटन करेंगे। वह नागरकोइल टाउन-नागरकोइल जंक्शन-कन्याकुमारी लाइन दोहरीकरण कार्य का भी उद्घाटन करने वाले हैं। इस दौरान पीएम मोदी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए वह नई मदुरै से बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इस तरह दक्षिण भारत को नई वंदे भारत ट्रेनों की सौगात मिलने जा रही है। इससे यात्रियों को काफी सहूलियत मिलने वाली है। मालूम हो कि वंदे भारत ट्रेनें आम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुई हैं और देश भर में इनका जाल बिछाने का काम जारी है। ट्रेनों में स्लीपर और जनरल कोच बढ़ाएगी रेलवे दूसरी ओर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गर्मियों के सीजन में यात्रियों को होने वाली दिक्कतों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। रेलवे अधिकारियों को पांच मोर्चों पर युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। इनमें ट्रेनों में गैरवातानुकूलित स्लीपर व अनारक्षित श्रेणी के कोचों की संख्या बढ़ाना और वातानुकूलित कोचों में एयर कंडीशनिंग प्रणाली के खराब होने की शिकायतों को दूर करना शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने गर्मियों की भीड़ के दौरान ट्रेनों में भीड़भाड़ की समस्या का संज्ञान लिया। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से भीड़भाड़ की समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा करने वालों को निचली श्रेणी के टिकट लेकर उच्च श्रेणी के काेच में सवार होने वालों पर कार्रवाई का अभियान चलाया जाएगा।  

कोरोना वायरस और फ्लू पर कारगर All-in-One वैक्सीन बनाने में जुटे साइंटिस्ट, आया ये अपडेट

लंदन कोरोना महामारी को वैश्विक स्तर पर चार साल से अधिक का समय बीत गया है। संक्रमण से बचाव के उपाय और टीकाकरण ने रोग की गंभीरता तो कम की है, पर नए वैरिएंट्स के कारण होने वाली समस्याओं का जोखिम लगातार बना हुआ है। नए वैरिएंट्स की प्रकृति वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने वाली मानी जा रही है, ऐसे में कई बार टीकों को अपडेट भी किया जा चुका है। संक्रमण के जोखिमों को देखते हुए वैज्ञानिक हर साल फ्लू टीकों की ही तरह से लोगों को कोविड वैक्सीन भी लेने की सलाह दे रहे हैं। गौरतलब है कि कोविड टीकों की प्रभाविकता समय के साथ कम होती जाती है, जिससे नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण का खतरा हो सकता है। कोरोना की ही तरह से हर साल इंफ्लूएंजा वायरस से संक्रमण के कारण भी दुनियाभर में लाखों लोग बीमार होते हैं। इन संक्रामक रोगों से बचाव के लिए वैज्ञानिक अब एक तीर से दो निशाना लगाने की कोशिश में हैं। शोधकर्ताओं की एक टीम कोविड-19 और फ्लू के लिए ऐसे खास तरह के टीके का निर्माण कर रही है जिससे इन दोनों संक्रामक रोगों से बचाव किया जा सके। कोविड-19 और फ्लू के लिए एक ही टीका हम जितनी बार सोचते हैं कि कोविड-19 से हमारा पीछा छूट गया है, उतनी बार वायरस एक नए म्यूटेशन के साथ आ जाता है। स्वास्थ्य अधिकारी सलाह देते हैं कि सभी लोगों को निकट भविष्य में हर साल कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा दोनों के लिए टीकाकरण कराना चाहिए। इसी दिशा शोधकर्ताओं की एक टीम ‘टू इन वन’ वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस संबंध में 10 जून को वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने बताया कि वह इस तरह के एक टीके पर काम कर रही है। शुरुआती परिणामों में ये संयुक्त कोविड-19/इन्फ्लूएंजा टीका सार्स-सीओवी-2 और इन्फ्लूएंजा के खिलाफ मौजूदा अलग-अलग टीकों से बेहतर परिणाम देती हुई देखी गई है। इन्फ्लूएंजा के ज्यादातर स्ट्रेन पर ये प्रभावी अध्ययनकर्ताओं ने बताया इस संयुक्त टीके में कोविड-19 वाला हिस्सा मौजूदा वैक्सीन की तुलना में वायरस के स्पाइक प्रोटीन को अधिक प्रभावी तरीके से लक्षित करता हुआ देखा जा रहा है। इस वैक्सीन की शेल्फ लाइफ भी अधिक हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ वैक्सीन का इंफ्लूएंजा वाला घटक mRNA तकनीक का उपयोग करता है। ये पूरे सीजन फैलने वाले इन्फ्लूएंजा के लगभग सभी स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी तरीके से कारगर हो सकता है। इन्फ्लूएंजा ए समूह के इन्फ्लूएंजा और इन्फ्लूएंजा बी स्ट्रेन पर इस टीके को असरदार पाया गया है। अध्ययन में क्या पता चला? वैक्सीन के परीक्षण में 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के 8,000 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इसमें आधे लोगों को संयोजन टीका जबकि शेष लोगों को कोविड और फ्लू के अलग-अलग टीके दिए गए। अलग-अलग टीके लेने वाले समूह की तुलना में कॉम्बो वैक्सीन ने इन्फ्लूएंजा के स्ट्रेन को खिलाफ 20 से 40% अधिक और कोविड-19 वैरिएंट्स के खिलाफ 30% अधिक एंटीबॉडी उत्पन्न किए। वृद्ध लोगों में भी एंटीबॉडी का स्तर अच्छा देखा गया। क्या कहते हैं वैज्ञानिक? मॉडर्ना में संक्रामक रोग विभाग के वाइस प्रेसिडेंट और शोध के प्रमुख लेखकों में से एक डॉ. जैकलीन मिलर कहती हैं, इस टू इन वन वैक्सीन का असली फायदा यह है कि लोगों को केवल एक ही इंजेक्शन लगवाने की जरूरत होती है। इसका एक सार्वजनिक-स्वास्थ्य लाभ भी है, क्योंकि दोनों बीमारियों के लिए यू.एस. सहित दुनियाभर में टीकाकरण दर अपेक्षाकृत कम है। जब हम दोनों टीकों को एक साथ देने में सक्षम होते हैं, तो इससे टीकाकरण अनुपालन दर भी बढ़ेगी, खासकर उन लोगों के लिए जो सबसे अधिक जोखिम में हैं। इस टीके को अधिक प्रभावी तरीके से संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने वाला भी माना जा सकता है। 

हरियाणा में 50 लाख के नोटों से सजाया गया श्याम बाबा का दरबार, 20 दिन में तैयार हुईं मालाएं…

हिसार श्री श्याम मंदिर हांसी के 52 वे महोत्सव के दौरान आज शनिवार को श्याम बाबा का 50 लाख के नोटों से दरबार सजाया गया है। सजावट में 10 के नोट से लेकर 500 तक के नोटों का प्रयोग किया गया है। बाबा के दरबार में नोटों की गड्डियां भी रखी गई है। श्री श्याम मंदिर कमेटी का दावा है कि आज से पहले हरियाणा में श्याम बाबा का इतना भव्य लक्ष्मी सिंगार कहीं नहीं हुआ है। दिल्ली से आए कारीगरों द्वारा 20 दिन में नोटों की मालाओं को तैयार करवाया गया है। श्री श्याम मंदिर हांसी के 51 वे महोत्सव में 20 लाख रुपये का लक्ष्मी सिंगार हुआ था। विदेशों तक होती है चर्चा पिछले साल हुए लक्ष्मी सिंगार की पूरे देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चा हुई थी। आपको बता दें कि छोटी खाटू नगरी के नाम से प्रसिद्ध हांसी में श्याम बाबा का महोत्सव चल रहा है। हर साल होने वाला सालाना वार्षिक महोत्सव में पूरे देश में प्रसिद्ध है। श्याम बाबा के इस महोत्सव में पूरे भारत से अलग-अलग स्थानों से लोग यहां पहुंचते हैं और अपनी हाजरियां लगाते हैं। 50 लाख रुपए के नोटों का प्रयोग किया गया श्री श्याम मित्र मंडल एवं श्री श्याम भवन ट्रस्ट के प्रधान जगदीश राय मित्तल ने बताया कि अबकी बार श्याम बाबा का 52वां महोत्सव आठ दिवसीय मनाया जा रहा है। आज सातवें दिन श्याम बाबा का लक्ष्मी श्रृंगार किया गया है, जिसमें करीब 50 लाख रुपए के नोटों का प्रयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में आज से पहले बाबा का इतना भव्य लक्ष्मी श्रृंगार कहीं नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम को श्याम बाबा की पूरे शहर में भव्य यात्रा निकाली गई थी। शनिवार शाम को श्याम बाबा का भव्य विशाल जागरण होगा। विवार शाम को एक शाम सांवरे के नाम कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

भारत और चीन के बीच कुछ साल से तनाव, इस बीच एक लाख नौकरियां हो गई फुर्र

National Fish Farmers Day organized in VU - Fisheries Science College

नई दिल्ली  चीन के साथ जारी तनाव भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है। इस कारण पिछले चार साल में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को 15 अरब डॉलर का प्रॉडक्शन लॉस हुआ है। साथ ही इस दौरान करीब 100,000 नौकरियों का मौका भी हाथ से निकल गया। चीन के नागरिकों को वीजा जारी करने में देरी और भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों की जांच के बीच ऐसा हुआ है। विभिन्न मंत्रालयों को भेजे गए ज्ञापन में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री ने कहा कि भारत ने 2 अरब डॉलर के वैल्यू एडिशन नुकसान के अलावा 10 अरब डॉलर का निर्यात अवसर भी खो दिया है। इंडस्ट्री के लोगों के मुताबिक चीनी अधिकारियों के 4,000-5,000 वीजा आवेदन सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की विस्तार योजनाओं में बाधा आ रही है। यह स्थिति तब है जब सरकार ने 10 दिन के भीतर बिजनस वीजा आवेदनों को मंजूरी देने के लिए एक व्यवस्था बना रखी है। इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) और मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) लॉबी ग्रुप ने केंद्र सरकार से चीनी अधिकारियों के लिए वीजा मंजूरी में तेजी लाने का अनुरोध किया है। अभी इसमें एक महीने से अधिक समय लग रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि चीनी अधिकारियों की जरूरत टेक और स्किल ट्रांसफर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना और कमीशनिंग, एफिशियंसी प्रोसेसेज की स्थापना और मेंटनेंस के लिए है। साथ ही चीनी की उन कंपनियों के अधिकारियों के वीजा आवेदन भी लंबित हैं, जिन्हें स्थानीय कंपनियों के साथ पार्टनरशिप में यहां मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने के लिए बुलाया गया है। कैसे निकलेगा समाधान आईसीईए ने कहा कि हमारी घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) योजना पर गंभीर असर पड़ा है। जब मोबाइल के लिए पीएलआई योजना (2020-21 में) शुरू की गई थी, तो उम्मीद थी कि आपूर्ति श्रृंखला चीन से हट जाएगी। लेकिन इस गतिरोध और प्रेस नोट 3 (भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश की अधिक जांच अनिवार्य करना) के कारण सप्लाई चेन के ट्रांसफर में भारी गिरावट आई है। यह एसोसिएशन ऐपल, ओप्पो, वीवो, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और लावा जैसे टॉप मोबाइल ब्रांड्स और मैन्युफैक्चरर्स का प्रतिनिधित्व करता है। आईसीईए का अनुमान है कि अगर भारत और चीन के बीच बिजनस एक्टिवीज सामान्य होती तो भारतीय कंपनियों का वैल्यू एडिशन वर्तमान 18% से बढ़कर 22-23% होता। इससे घरेलू मोबाइल फोन ईकोसिस्टम में सालाना 15,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डीवीए कंट्रीब्यूशन होता। आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने ईटी से कहा, ‘हमें उम्मीद है कि एक संतुलित समाधान निकलेगा। इससे उद्योग की चिंताएं दूर होंगी और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा हितों में संतुलन बना रहेगा। इंडस्ट्री किसी भी देश के आगे झुकने को नहीं कह रहा है लेकिन हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि आत्मनिर्भरता का रास्ता चीन के दबदबे वाली वैल्यू चेन पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि भारत ने काफी हद तक अपने नुकसान की भरपाई कर ली है और वह अधिक प्रतिस्पर्धी बन गया है। फिर भी भारत को वियतनाम, मलेशिया और मैक्सिको जैसे देशों के मुकाबले नए प्रकार का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिनकी चीन से पूंजी, प्रौद्योगिकी और कौशल तक फ्री एक्सेस का फायदा मिल रहा है। भारत का नुकसान किसका फायदा उद्योग के लोगों का कहना है कि चीनी नागरिक भी गिरफ्तारी और पूछताछ के डर से भारत आने से डरते हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘अगर किसी फैक्ट्री को स्थापित करने में मदद के लिए 50 इंजीनियरों की जरूरत है, तो केवल 10 या उससे कम ही लोग आने को तैयार हैं।’ उन्होंने कहा कि 2020 से भारत-चीन रिश्तों में आई तल्खी के कारण चीनी कंपनियों की गहरी जांच हो रही है। इस कारण इन कंपनियों ने भारत में आगे निवेश करना बंद कर दिया है। इससे सप्लाई चेन के विकास में अड़चन आ रही है। अगर ये कंपनियां भारत छोड़ने का फैसला करती हैं, तो इससे प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज की उपलब्धता पर बड़ा असर पड़ेगा, रोजगार खत्म होगा और बड़ी संख्या में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बंद हो जाएंगी। उदाहरण के लिए एक बड़ी चीनी कंपनी ने ऐपल आईपैड बनाने के लिए भारत में एक प्लांट स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई थी। लेकिन वह वियतनाम चली गई और वहां सालाना 8-10 अरब डॉलर मूल्य के आईपैड का उत्पादन कर रही है। इसी तरह चीन के स्मार्टफोन ब्रांड्स भी भारत की प्रमुख मोबाइल पीएलआई योजना में भाग लेने से कतरा रहे हैं। एक सूत्र ने कहा कि यदि चीनी कंपनियों को मोबाइल पीएलआई में भाग लेने से नहीं रोका जाता, तो भारत 2020 से कम से कम 5-7 अरब डॉलर का अतिरिक्त एक्सपोर्ट रेवेन्यू कमा सकते थे। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम और इलेक्ट्रिकल उत्पादों का आयात बढ़कर 89.8 अरब डॉलर हो गया। इसमें 44% चीन से और 56% हांगकांग से आया।

भारत से अधिक अशांति अमेरिका में ,आइसलैंड में सबसे ज़्यदा शांति

लंदन पूरी दुनिया पर युद्ध का साया तेजी से गहरा रहा है। इसको फैलने से नहीं रोका गया तो यह कभी भी पूरी दुनिया को चपेट में ले सकता है। ग्लोबल पीस इंडेक्स की मंगलवार को जारी 18वीं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से पहली बार वैश्विक संघर्षों की संख्या सबसे अधिक 56 के स्तर पर पहुंच गई है। चिंताजनक यह है कि अब युद्ध भी अंतर्राष्ट्रीय होते जा रहे हैं। दुनिया भर में 92 देश अपनी सीमाओं पर संघर्ष के हालात से जूझ रहे हैं। वहीं, 2024 में 97 देशों में शांतिपूर्ण हालातों में गिरावट देखी गई है, जबकि भारत (India) समेत 65 देशों में स्थितियां बेहतर हुई हैं। रिपोर्ट जारी होने का सिलसिला शुरू होने के बाद से ये सबसे अधिक संख्या है। रूस-यूक्रेन, इजरायल हमास ज्यादा जिम्मेदार Global Peace Index रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में, 10 में से नौ वर्ष शांति में गिरावट के वर्ष रहे हैं। हम रिकॉर्ड संख्या में संघर्ष, सैन्यीकरण में वृद्धि और अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि देख रहे हैं। इतना ही नहीं, यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के चलते दुनिया के सबसे अधिक शांतिपूर्ण क्षेत्र यूरोप के तीन चौथाई देशों ने 2023 में अपने सैन्य खर्च में इजाफा किया है। हालांकि, यूरोप (Europe) में आज भी दुनिया के 10 सर्वाधिक शांतिपूर्ण देशों में से सात देश स्थित हैं, लेकिन इस क्षेत्र के 36 में से 23 देशों में शांतिपूर्ण हालात में गिरावट दर्ज की गई है। 2024 की पीस इंडेक्स के अनुसार, पूरी दुनिया में औसतन शांति में 0.56 फीसदी की गिरावट आई है। आइसलैंड, आयरलैंड और ऑस्ट्रिया को दुनिया के तीन सबसे शांतिपूर्ण देशों का स्थान दिया गया है। इसमें अमरीका को 132वीं रैंक देते हुए 116वें स्थान पर मौजूद भारत से ज्यादा अशांत माना गया है। दक्षिण एशिया में शांतिः भारत में सबसे अधिक सुधार (Global Peace Index) क्षेत्रीय रैंक देश पीस इंडेक्स रैंक रैंक में सुधार 1 भूटान 21 3 2 नेपाल 81 12 3 बांग्लादेश 93 8 4 श्रीलंका 100 1 5 भारत 116 5 6 पाकिस्तान 140 2 7 अफगानिस्तान 160 डाटा उपलब्ध नहीं एशिया में सिंगापुर सबसे शांत सिंगापुर को दुनिया का पांचवां और एशिया में सबसे अधिक शांतिपूर्ण देश माना गया है। इस सूची में मलेशिया को जापान से अधिक शांतिपूर्ण मानते हुए उसे 10वीं वैश्विक रैंक दी गई है, जबकि जापान को 17वीं। वहीं पीस इंडेक्स में चीन को 89वीं रैंक दी गई है। अंतरिक्ष में भी अशांति परंपरागत हथियारों (ऑर्टिलरी) की तुलना में अब वैश्विक ताकतें ड्रोन्स और डिफेंस सैटेलाइट पर ज्यादा खर्च कर रही हैं। सैन्य सैटेलाइट पर खर्च बढ़ने से अब टकराव का साया स्पेस तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं, ड्रोन की एंट्री से अब छोटे समूह भी आसानी से हमलावर क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं। प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपए की क्षति वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा के चलते 2023 में इसका के कारण आर्थिक नुकसान को 19.1 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है, जो कि दुनिया भर की जीडीपी का 13.5 फीसदी ठहरता है। प्रति व्यक्ति यह नुकसान 2380 डॉलर यानी करीब 198949 रुपए आंका गया है। दुनिया की सैन्य क्षमता 10 फीसदी बढ़ी, अमरीका की क्षमता चीन से तीन गुना ज्यादा वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्षों के चलते दुनिया भर के 108 देशों ने अपनी सैन्य क्षमताओं में इजाफा किया है। इससे पूरी दुनिया की सैन्य क्षमता 10 फीसदी बढ़ी है। अमरीका की घातक सैन्य क्षमता चीन की तुलना में तीन गुना अधिक है, हालांकि पिछले 10 सालों में सैन्य क्षमता में सबसे अधिक इजाफा चीन ने ही किया है। इसके बाद रूस और फ्रांस तथा यूके की सैन्य क्षमता सबसे अधिक है। तथ्य – इस समय दुनिया में करीब 11 करोड़ लोग हिंसा जनित शरणार्थी या विस्थापित का जीवन जी रहे हैं। – पिछले साल टकरावों के कारण 162000 मौतें हुईं, जो 30 सालों में सबसे अधिक हैं। इनमें भी तीन चौथाई, यूक्रेन और फिलिस्तीन संघर्ष में हुईं। 2009 और 2020 के बीच 126 देशों द्वारा शांति में सुधार के बावजूद, 2023 सूचकांक एक चिंताजनक प्रवृत्ति की रिपोर्ट करता है। लगातार नौवें वर्ष औसत वैश्विक शांति में गिरावट आई है, जिसमें 84 देशों में सुधार हुआ है और 79 देशों में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। कोविड महामारी के बाद की स्थिति को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में पहचाना जाता है, जिससे नागरिक अशांति और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। उल्लेखनीय रूप से, संयुक्त राज्य अमेरिका 131वें स्थान पर है, जो कि जेलों में बंद लोगों की उच्च दर, व्यापक हथियारों के निर्यात और सैन्यीकरण जैसे कारकों के कारण काफी कम है। सूची में भारत 126वें स्थान पर है। जीपीआई सामाजिक सुरक्षा, जारी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष और सैन्यीकरण सहित 23 संकेतकों पर विचार करता है । आइसलैंड के बाद डेनमार्क, आयरलैंड और न्यूजीलैंड का स्थान है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, दक्षिण सूडान, सीरिया, यमन और अफगानिस्तान, जहां अशांति के विभिन्न स्तर हैं, अंतिम पांच में हैं। क्षेत्रवार वैश्विक शांति कुल मिलाकर, IEP शोधकर्ताओं के अनुसार इस वर्ष वैश्विक शांति का स्तर 0.56% कम हुआ है। यह बहुत ज़्यादा नहीं लग सकता है, फिर भी यह ध्यान देने योग्य है कि यह बारहवीं बार है जब औसत में गिरावट आई है, सूचकांक शुरू होने के बाद से कुल मिलाकर 4.5% की कमी आई है। इस बीच, शरणार्थियों और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों की संख्या 95 मिलियन तक बढ़ गई है, जिसमें 16 देश ऐसे हैं जिनकी कम से कम 5% आबादी या तो शरणार्थी है या आंतरिक रूप से विस्थापित है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि राजनीतिक अस्थिरता और अनसुलझे आंतरिक संघर्ष वैश्विक शांति को कमजोर करने वाले प्रमुख कारक हैं। अफगानिस्तान लगातार छह वर्षों से दुनिया का सबसे कम शांतिपूर्ण देश रहा है, लेकिन इस साल शांति सूचकांक के संस्करण में दक्षिण सूडान, सूडान और यमन ने इसे पीछे छोड़ दिया है, जो अब यह अप्रिय स्थान रखते हैं। यूक्रेन- जिसने पिछले साल सूचकांक में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की थी, 14 स्थान गिरकर 157 वें स्थान पर आ गया था- 2 स्थान और गिरकर 159 पर आ गया। कहने की जरूरत नहीं है कि गाजा … Read more

भारत में पचास हजार महिलाओं ने उठाया तापमान बीमा का लाभ, मिले इतने रुपए, आखिर क्या है ये स्कीम?

नई दिल्ली  देश के कई इलाकों में इस बार रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के पार चला गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के कारण लाखों लोगों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनके पास अब दो ही विकल्प हैं। खतरनाक परिस्थितियों में काम करें या भूखे रहें। लेकिन ऐसी स्थिति में एक प्रोग्राम महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। इसने उन्हें एक तीसरा विकल्प दिया है। वे चिलचिलाती गर्मी में कम से कम कुछ घंटों के लिए काम करना बंद कर सकती हैं। उससे वह भीषण गर्मी से खुद को बचा लेंगी और उन्हें भूखों मरने की नौबत भी नहीं आएगी। अहमदाबाद शहर में 19 मई से 25 मई के बीच रोजाना तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को चलाने वाले कई मजदूरों के लिए काम करना मुश्किल हो गया। 40 वर्षीय लताबेन अरविंदभाई मकवाना के लिए अपने टिन की छत वाले मकान के अंदर सिलाई मशीन चलाना असहनीय था। इस मकान में बहुत कम वेंटिलेशन था और केवल एक छोटा सा छत वाला पंखा था। एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में उनके लिए जिंदगी मुश्किल थी। काम नहीं कर पाने का मतलब था कि वह अपने बच्चों का पेट भरने और अपने लिए ब्लड प्रेशर की दवा खरीदने के लिए जरूरी पैसे नहीं कमा पा रही थी। मकवाना ने कहा, ‘हर गर्मियों में स्थिति बदतर होती जा रही है।’ गर्मी खासकर उनके जैसे लोगों के लिए खतरनाक है जो हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। कैसे काम करती है यह स्कीम अहमदाबाद में जैसे ही तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस के पार हुआ, मकवाना और हजारों दूसरी महिलाओं को बताया गया कि इंश्योरेंस कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड उन्हें उनके दैनिक वेतन का एक हिस्सा देगी। यह प्रोग्राम पैरामीट्रिक इंश्योरेंस का उपयोग करता है जो किसी विशेष पैमाने के हिट होने पर भुगतान करता है। जैसे कि रोजाना तापमान का बढ़ना। पिछले महीने भीषण गर्मी के दौरान देश के 22 जिलों में 46,000 से ज्यादा महिलाओं को कुल 2,84,00,000 रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रोग्राम में करीब 50,000 महिलाएं एनरॉल हैं। मकवाना का इंश्योरेंस भुगतान 750 रुपये था, जो कुछ दिनों के लिए भोजन और दवाइयों के लिए पर्याप्त था। इसके अलावा उन्हें चैरिटी के रूप में अलग से 400 रुपये मिले थे। पहली बार तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर उन्हें यह राशि मिली थी। The Self-Employed Women’s Association का लेबर यूनियन इंश्योरेंस प्रोग्राम चलाता है। इसके प्रीमियम के एक हिस्से का भुगतान प्रोग्राम में एनरॉल महिलाएं करती हैं जबकि शेष हिस्सा चैरिटी द्वारा वहन किया जाता है। पायलट प्रोग्राम पिछले साल शुरू किया गया था और अप्रैल 2025 तक चलने वाला है। Climate Resilience for All एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है जो इस इंश्योरेंस प्रोग्राम को सपोर्ट कर रही है। इसकी सीईओ कैथी बॉगमैन मैकलियोड ने कहा कि यह प्रोग्राम सफल रहा है। चैरिटी की इस इंश्योरेंस प्रोग्राम को दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी अपनाने की योजना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय कार्यक्रम का सपोर्ट करने वाले फंडर्स अगले कुछ साल तक इसे मदद करते रहेंगे।  

विदेशियों का चारधाम यात्रा के प्रति उमड़ा प्यार, अब तक दर्शन के लिए 20 हजार रजिस्ट्रेशन कराये

नईदिल्ली चारधाम यात्रा के प्रति विदेशी नागरिकों की आस्था भी बढ़ रही है। इस बार केदारनाथ-गंगोत्री समेत चारों धामों में दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले विदेशी भक्तों की संख्या बढ़ गई है। इनके रजिस्ट्रेशन के विशेष प्रबंध किए गए हैं। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक वाई.के. गंगवार के मुताबिक चारधाम यात्रा के लिए अब तक 19,809 विदेशी नागरिक रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।  नेपाल के बाद सर्वाधिक अमरीकियों ने कराया पंजीकरण विदेशियों में नेपाल के बाद सर्वाधिक पंजीकरण अमरीकी नागरिकों ने कराए हैं। इस बार सउदी अरब और अफगानिस्तान से लेकर कतर तक के लोगों ने पंजीकरण कराया है। चारधाम यात्रा के प्रति आस्था उन्हें सात समुंदर पार से उत्तराखंड ला रही है। दस मई से चल रही चारधाम यात्रा में अब तक देश-विदेश के 41 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण कराया है। इसके अलावा 21 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। ये देश भी शामिल इस बार 109 देशों के नागरिकों ने चारधाम यात्रा के लिए विभिन्न माध्यमों से पंजीकरण कराया। इनमें सिंगापुर, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, ब्राजील, रूस, नीदरलैंड, भूटान, श्रीलंका, नॉर्वे, इंडोनेशिया, कुवैत, इटली, जर्मनी, थाईलैंड, हंगरी, स्वीडन, कतर, इराक, जापान, मैक्सिको, ओमान, बहरीन, ईरान, डेनमार्क, लेबनान और इजराइल शामिल हैं। अब तक पंजीकरण नेपाल 13,527 अमरीका 5,292 मलेशिया 4,358 बांग्लादेश 2,023 ब्रिटेन 1,906 आस्ट्रेलिया 927

हरियाणा के झज्जर में 2.3 की तीव्रता से आया भूकंप

BJP MLA's controversial statement: Rahul Gandhi should be locked in Parliament and beaten with slaps

झज्जर हरियाणा के झज्जर इलाके में शनिवार शाम करीब चार बजे भूकंप के झटके महसूस हुए। भूकंप आने से लोग घर से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने बताया कि शनिवार को हरियाणा के झज्जर में 2.3 तीव्रता का भूकंप आया। एनसीएस ने बताया कि भूकंप का केंद्र अक्षांश 28.70 उत्तर और देशांतर 76.66 पूर्व तथा 5 किलोमीटर की गहराई पर मौजूद था। हिमाचल में भी महसूस हुआ भूकंप फिलहाल भूकंप की वजह से किसी तरह के नुकसान का आकलन नहीं किया गया है। इससे पहले बीते शुक्रवार हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में भी भूकंप आया था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप दोपहर 3 बजकर 39 मिनट पर आया। वहीं, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.0 आंकी गई थी। भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान होने की सूचनी नहीं थी।

दर्दनाक हादसे में 10 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, पीएम मोदी ने जताया शोक

रुद्रप्रयाग उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग-बदरीनाथ हाईवे पर रौतेली के पास 23 यात्रियों से भरी एक टेम्पो ट्रैवलर अलकनंदा नदी में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में 10 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे में कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं मौके पर स्थानीय लोगों के साथ एसडीआरएफ, फायर विभाग, पुलिस प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, डीडीआरएफ समेत अन्य टीमें मौके पर रेस्क्यू कार्य कर रही हैं।  इस हादसे पर शोक जताते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में हुआ सड़क हादसा हृदयविदारक है। इसमें अपने प्रियजनों को खोने वाले शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इसके साथ ही मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। राज्य सरकार की देखरेख में स्थानीय प्रशासन पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटा है। वहीं पीएमओ से घोषणा की गई है कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को PMNRF से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। दरअसल, शनिवार को बद्रीनाथ हाइवे से 5 किलोमीटर दूर रौतेली के पास एक 23 यात्रियों से भरी टेम्पो ट्रैवलर बस अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी में जा गिरी, जिसमें सवार 23 यात्रियों में से 15 यात्रियों का रेस्क्यू कर लिया गया है। इनको तुरंत नजदीकी अस्पताल में रेफर किया गया है, जहां सभी की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं अभी और यात्रियों को रेस्क्यू किया जा रहा है। मौके पर रुद्रप्रयाग एसपी डॉ वैशाखा खुद मौजूद हैं। साथ ही मौके पर स्थानीय लोगों के साथ ही एसडीआरएफ, फायर, पुलिस प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, डीडीआरएफ समेत अन्य टीम मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही हैं। रुद्रप्रयाग एसपी डॉ वैशाखा ने बताया कि,हमको सूचना मिली कि 23 यात्रियों से भरी टेम्पो ट्रैवलर अचानक अनियंत्रित होकर रौतेली के पास अलकनंदा नदी में गिर गई है। तुरंत मौके पर पहुंच कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अभी तक 15 यात्रियों को हॉस्पिटल भेजा है, जिनकी हालत काफी सीरियस है। बाकियों को रेस्क्यू किया जा रहा है। वहीं अभी तक कितने यात्रियों की मौत हुई है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को शुरू हुए 1 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। और हर दिन यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। यात्रा के साथ ही अब हादसे भी लगातार बढ़ने शुरू हो गए हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जनता को मंहगाई का झटका दिया, महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, 3 रुपये प्रति लीटर बढ़े दाम

बेंगलुरु कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जनता को मंहगाई का झटका दिया है। राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी कर दी है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, कर्नाटक में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपये और 3.05 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। 15 जून से सेल्स टैक्स में बढ़ोतरी का ऐलान दरअसल, राज्य सरकार ने 15 जून को पेट्रोल और डीजल पर सेल्स टैक्स में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर ‘कर्नाटक बिक्री कर’ (KST) 25.92 प्रतिशत से बढ़ाकर 29.84 प्रतिशत और डीजल पर 14.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 18.4 प्रतिशत कर दिया गया है। वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह दरें तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इतना होगा इजाफा पेट्रोल की कीमत में 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे बेंगलुरु में प्रति लीटर कीमत 99.84 रुपये से बढ़कर 102.84 रुपये हो गई है। इसी तरह, डीजल की कीमत में 3.02 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे प्रति लीटर कीमत 85.93 रुपये से बढ़कर 88.95 रुपये हो गई है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, कीमत में वृद्धि इसलिए हुई है क्योंकि राज्य सरकार ने राज्य में बिक्री कर में संशोधन किया है, जो राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाया जाता है। अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल पर बिक्री कर 25.92 प्रतिशत से बढ़ाकर 29.84 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि डीजल पर कर 14.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 18.4 प्रतिशत कर दिया गया है। बिक्री कर में इस उल्लेखनीय वृद्धि का सीधा असर राज्य भर में पेट्रोल और डीजल दोनों की खुदरा कीमतों पर पड़ा है। इस कदम को उठाने का क्या उद्देश्य कर्नाटक के वित्त विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम का उद्देश्य राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है।हालांकि, इसका परिवहन और माल वितरण सहित विभिन्न क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए लागत में वृद्धि हो सकती है। इन नई कीमतों के तत्काल कार्यान्वयन ने कई निवासियों और व्यवसायों को आश्चर्यचकित कर दिया है, जिससे वित्तीय बोझ को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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