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EPFO के करोडो सब्सक्राइबर्स नहीं उठा पाएंगे इस सुविधा फायदा

नई दिल्ली  प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कोविड-19 एडवांस फैसिलिटी को तत्काल प्रभाव से बंद करने की घोषणा की है। कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान ईपीएफ सदस्यों को नॉन-रिफंडेबल एडवां की सुविधा दी गई थी। इसके बाद महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर 31 मई, 2021 से एक और एडवांस की अनुमति भी दी गई थी। ईपीएफओ ने 12 जून, 2024 को जारी एक सर्कुलर में इस सुविधा को बंद करने की घोषणा की है। उसका कहना है कि अब कोविड-19 महामारी नहीं रह गई है, इसलिए तत्काल प्रभाव से एडवांस फैसिलिटी को बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला छूट प्राप्त ट्रस्टों पर भी लागू होगा। निजी क्षेत्र में काम करने वाले वर्कर्स की बेसिक सैलरी पर 12% की कटौती ईपीएफ अकाउंट के लिए की जाती है। साथ ही कंपनी भी इतना ही पैसा कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है। ईपीएफ खातों से पैसे निकालने का प्रावधान पहली बार मार्च 2020 में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के तहत घोषित किया गया था। जून 2021 में श्रम मंत्रालय ने घोषणा की कि ईपीएफ सदस्य अपने ईपीएफ अकाउंट्स से दूसरा नॉन-रिफंडेबल एडवांस प्राप्त कर सकते हैं। इससे पहले ईपीएफ सदस्यों के लिए केवल वन-टाइम एडवांस की सुविधा थी। ईपीएफओ अपने सदस्यों को तीन महीने के मूल वेतन और महंगाई भत्ते या ईपीएफ खाते में उपलब्ध राशि का 75%, जो भी कम हो, नॉन-रिफंडेबल विड्रॉल की अनुमति देता है। हालांकि, सदस्य कम राशि के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। मकान, विवाह और शिक्षा से संबंधित एडवांस क्लेम के लिए EPFO ने ऑटो-मोड सेटलमेंट लागू किया है। कोविड एडवांस फैसिलिटी कोविड एडवांस के रूप में ईपीएफ सब्सक्राइबर तीन महीने के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर या अकाउंट में शेष राशि का 75 प्रतिशत तक, जो भी कम हो, नॉन-रिफंडेबल विड्रॉल कर सकते थे। इसके लिए सदस्य या एम्प्लॉयर को कोई प्रमाण पत्र या दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं थी। यदि कोई कर्मचारी, उसके माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चे कोविड के कारण बीमार हो जाते तो सदस्य को पैसा निकालने की सुविधा थी। इस प्रकार की ईपीएफ निकासी में कोई लॉक-इन अवधि या न्यूनतम सेवा आवश्यकता नहीं थी। आंकड़ों के मुताबिक कुल 2.2 करोड़ सब्सक्राइबर्स ने कोरोना एडवांस सुविधा का लाभ उठाया जो ईपीएफओ के कुल सदस्यों की संख्या का एक तिहाई से ज्यादा है। यह सुविधा 2020-21 में शुरू हुई थी और तीन साल तक रही। इस दौरान पीएफ सब्सक्राइबर्स ने कोरोना एडवांस के रूप में 48,075.75 करोड़ रुपये निकाले। ईपीएफओ की ड्राफ्ट एन्युअल रिपोर्ट 2022-23 में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ईपीएफओ ने 2020-21 में 17,106.17 करोड़ रुपये वितरित किए जिससे 69.2 लाख सब्सक्राइबर्स को फायदा हुआ। साल 2021-22 में 91.6 लाख सब्सक्राइबर्स ने इस सुविधा का लाभ उठाया और 19,126.29 लाख करोड़ रुपये निकाले।

इंद्रेश कुमार ने सत्तारूढ़ बीजेपी को ‘अहंकारी’ और विपक्षी इंडिया ब्लॉक को ‘राम विरोधी’ करार दिया

Kansotiya removed from forest department due to PP mode, Varnwal got command for the second time

जयपुर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने लोकसभा चुनाव के नतीजे पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने सत्तारूढ़ बीजेपी को ‘अहंकारी’ और विपक्षी इंडिया ब्लॉक को ‘राम विरोधी’ करार दिया है. इंद्रेश कुमार ने कहा, राम सबके साथ न्याय करते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव को ही देख लीजिए. जिन्होंने राम की भक्ति की, लेकिन उनमें धीरे-धीरे अंहकार आ गया. उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बना दिया. लेकिन जो उसको पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए थी, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी. इंद्रेश कुमार ने आगे कहा, जिन्होंने राम का विरोध किया, उन्हें बिल्कुल भी शक्ति नहीं दी. उनमें से किसी को भी शक्ति नहीं दी. सब मिलकर भी नंबर-1 नहीं बने. नंबर-2 पर खड़े रह गए. इसलिए प्रभु का न्याय विचित्र नहीं है. सत्य है. बड़ा आनंददायक है. गुरुवार को इंद्रेश कुमार जयपुर के पास कानोता में ‘रामरथ अयोध्या यात्रा दर्शन पूजन समारोह’ को संबोधित कर रहे थे. इंद्रेश आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य भी हैं. हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी पार्टी का नाम नहीं लिया. लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर पक्ष-विपक्ष की तरफ संकेत दे रहा था. लोकतंत्र में राम राज्य का विधान देखिए… इंद्रेश ने बीजेपी के संदर्भ में कहा, जिस पार्टी ने (भगवान राम की) भक्ति की, लेकिन अहंकारी हो गई, उसे 241 पर रोक दिया गया, लेकिन उसे सबसे बड़ी पार्टी बना दिया गया. उन्होंने स्पष्ट रूप से इंडिया ब्लॉक का जिक्र करते हुए कहा, और जिनकी राम में कोई आस्था नहीं थी, उन्हें एक साथ 234 पर रोक दिया गया. उन्होंने आगे कहा, लोकतंत्र में रामराज्य का विधान देखिए, जिन्होंने राम की भक्ति की लेकिन धीरे-धीरे अहंकारी हो गए, वो पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन जो वोट और ताकत मिलनी चाहिए थी, वो भगवान ने उनके अहंकार के कारण रोक दी. जिन्होंने राम का विरोध किया, उनमें किसी को सत्ता नहीं दी उन्होंने कहा, जिन्होंने राम का विरोध किया, उनमें से किसी को भी सत्ता नहीं दी गई. यहां तक ​​कि उन सभी को एक साथ नंबर दो बना दिया गया. भगवान का न्याय सच्चा और आनंद दायक है. उन्होंने कहा, जो लोग राम की पूजा करते हैं उन्हें विनम्र होना चाहिए और जो राम का विरोध करते हैं, भगवान स्वयं उनसे निपटते हैं. भगवान राम भेदभाव नहीं करते हैं उन्होंने कहा कि भगवान राम भेदभाव नहीं करते और दंड नहीं देते. राम किसी को विलाप नहीं कराते. राम सबको न्याय देते हैं. वो देते हैं और देते रहेंगे. भगवान राम हमेशा न्यायप्रिय हैं और न्यायप्रिय रहेंगे. इंद्रेश ने यह भी कहा, भगवान राम ने लोगों की रक्षा की और रावण का भी भला किया. मोहन भागवत ने क्या कहा था? इंद्रेश कुमार की यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान के कुछ दिन बाद आई है. मोहन भागवत ने कहा था कि एक सच्चे ‘सेवक’ में अहंकार नहीं होता और वो ‘गरिमा’ बनाए रखते हुए लोगों की सेवा करता है. नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने आगे कहा था, जो सच्चे सेवक हैं, जिसे वास्तविक सेवक कहा जा सकता है, वो मर्यादा से चलता है. उस मर्यादा का पालन करके जो चलता है, वो कर्म करता है लेकिन कर्मों में लिपटा नहीं होता. उसमें अहंकार नहीं आता कि मैंने किया. वही सेवक कहने का अधिकारी रहता है. एक सच्चा ‘सेवक’ गरिमा बनाए रखता है. वो काम करते समय मर्यादा का पालन करता है. उसे यह कहने का अहंकार नहीं है कि ‘मैंने यह काम किया’. सिर्फ उस व्यक्ति को सच्चा ‘सेवक’ कहा जा सकता है.  

आतंकी हमलों पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, डल झील किनारे योग दिवस मनाएंगे PM मोदी

River blocked the way, Kudmur river in spate due to heavy rains

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में बीते करीब एक सप्ताह से आतंकवादी हमलों की संख्या बढ़ गई। वैष्णो देवी के पास तीर्थयात्रियों से भरी बस पर हमला हुआ तो उसके बाद तीन और अटैक हुए थे। इन आतंकी हमलों के बाद हालात की समीक्षा को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने हाईलेवल मीटिंग भी की थी। इस बीच खबर है कि 21 जून यानी योग दिवस के मौके पर वह श्रीनगर में डल झील के किनारे आयोजन में शामिल होंगे। पीएम के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद नरेंद्र मोदी का यह पहला कश्मीर दौरा होगा। अब तक पीएम मोदी की विजिट की आधिकारिक सूचना नहीं है। 20 जून को श्रीनगर पहुंचेंगे पीएम एक अधिकारी ने बताया, प्रधानमंत्री 20 जून को श्रीनगर आने वाले हैं ताकि 21 जून की सुबह योग दिवस कार्यक्रम में भाग ले सकें। इस कार्यक्रम में सैकड़ों प्रतिभागियों के रहने की उम्मीद है। योग दिवस की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कार्यक्रम स्थल को सैनिटाइज किया जाएगा और एसपीजी की एक टीम इस हफ्ते के आखिर में श्रीनगर पहुंचेगी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को निर्देश दिया है कि कार्यक्रम को सुरक्षित तरीके से आयोजित किया जाए। जम्मू-कश्मीर खेल परिषद को निर्देश दिया गया है कि वे कार्यक्रम के लिए एथलीटों और खिलाड़ियों को लाएं। सूत्रों का कहना है कि डल झील के किनारे आयोजन की तैयारियां होने लगी हैं। अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था से लेकर आयोजन के इंतजाम तक में जुटे हुए हैं। डल झील के पास ही बने इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में पीएम मोदी आयोजन के मुख्य अतिथि होंगे। एक अधिकारी ने बताया, ‘पीएम नरेंद्र मोदी 20 जून की शाम को ही श्रीनगर पहुंच जाएंगे। इसके बाद वह 21 तारीख को सुबह योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल होंगे। हमें उम्मीद है कि इसमें सैकड़ों लोग शामिल होंगे। पीएम मोदी की मौजूदगी के चलते यह हाईप्रोफाइल इवेंट है, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।’ इसी सप्ताह एसपीजी की टीम श्रीनगर पहुंचेगी और इलाके की सुरक्षा व्यवस्था चेक की जाएगी। एलजी मनोज सिन्हा ने प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था चौक-चौबंद रखने का आदेश दिया है। इस आयोजन में जम्मू-कश्मीर से जुड़े कुछ बड़े खिलाड़ी और एथलीट भी शामिल हो सकते हैं। इस आयोजन के लिहाज से भाजपा भी तैयारियों में जुटी है। भाजपा के एक नेता ने कहा कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि पीएम मोदी कश्मीर में योग दिवस में शामिल होंगे। बता दें कि इस साल मार्च में भी पीएम मोदी श्रीनगर गए थे, जब उन्होंने बख्शी स्टेडियम में एक रैली को संबोधित किया था। क्यों अहम है योग दिवस पर पीएम मोदी का कश्मीर जाना पीएम नरेंद्र मोदी के श्रीनगर में योग दिवस मनाने के प्लान को एक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। वह कश्मीर में आयोजन का हिस्सा बनकर यह संदेश देंगे कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और आतंकवादी हमलों का कोई खास असर नहीं है। दरअसल बीते कुछ दिनों में कश्मीर की बजाय जम्मू से लगते इलाकों को आतंकियों ने निशाना बनाया है। इस ट्रेंड पर संसदीय कार्य़ राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि यह आतंकवादियों की बौखलाहट है क्योंकि कश्मीर में वह कोई हरकत नहीं कर पा रहे हैं। क्यों अहम है PM मोदी का कश्मीर दौरा? 21 जून को योग दिवस पर प्रधानमंत्री का कश्मीर दौरा काफी अहम माना जा रहा है। इस दौरे के जरिए मोदी जम्मू-कश्मीर के लोगों को एक संदेश देना चाह रहे हैं कि घाटी मोदी राज में सुरक्षित है। पीएम कार्यक्रम में हिस्सा लेकर ये संदेश देंगे कि कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौंबद है। वहीं आतंकियों को भी कड़ा संदेश मिलेगा कि भारत आतंकी साजिशों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। मोदी का ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब पिछले कुछ दिनों में जम्मू के इलाकों में कई आतंकी हमले हुए। यहां गौर करने वाली बात ये है कि आतंकी अब जम्मू के इलाकों में एक्टिव दिख रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि आतंकियों की बौखलाहट है क्योंकि वे कश्मीर में कोई हरकत नहीं कर पा रहे हैं। कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य में कई पर्यटक स्थल हैं। लेकिन आतंकी गतिविधियों के चलते जम्मू-कश्मीर का पर्यटन प्रभावित होता रहा है। अब मोदी सरकार फिर से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने की रणनीति बना रही है। डल झील के पास बड़े स्तर पर योग दिवस का कार्यक्रम आयोजित करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। पिछले साल बॉटनिकल गार्डन में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था, जिसमें एलजी मनोज सिन्हा और जम्मू-कश्मीर के अन्य शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया था। इस बार खुद पीएम मोदी यहां पहुंचेंगे। जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने भी शुरू की तैयारियां कश्मीर में बीजेपी इकाई ने भी प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा के मुहम्मद आरिफ ने कहा, ‘यह हमारे लिए एक विशेष अवसर और सम्मान की बात है कि हम कश्मीर में पीएम मोदी की मेजबानी कर रहे हैं, जो तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं।’ मोदी की आखिरी यात्रा इस साल मार्च में श्रीनगर हुई थी, जब उन्होंने बख्शी स्टेडियम में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे, जिनमें सरकारी कर्मचारी भी थे।  

अगले 7 दिनों में असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, और सिक्किम में तेज हवाओं के साथ बारिश

नई दिल्ली मॉनसून की उत्तरी सीमा नवसारी, जलगांव, अमरावती, चंद्रपुर, बीजापुर, सुकमा, मलकानगिरी, विजयनगरम, और इस्लामपुर से होकर गुज़र रही है। इसके कारण अगले 3-4 दिनों के दौरान महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने 14 जून को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पूर्वोत्तर असम और उसके आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके उत्तर-पश्चिम बिहार से नागालैंड तक जाने की संभावना है। इसके कारण बंगाल की खाड़ी से पूर्वोत्तर राज्यों तक तेज़ हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 7 दिनों के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। आईएमडी ने बताया है कि 14 तारीख को पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं, 18 जून को अरुणाचल प्रदेश और 15-18 जून के दौरान मेघालय में भारी बारिश होगी। आईएमडी के पूर्वानुमान के मताबिक, अगले 5 दिनों के दौरान बिहार, झारखंड, ओडिशा में तेज़ हवाओं के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। वहीं, 14, 17 और 18 जून को ओडिशा में कुछ जगहों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। आईएमडी के मुताबिक, कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और उसके आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव में अगले 5 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर बारिश भी हो सकती है। आईएमडी ने कहा है कि मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा में गरज के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना है। लू का अलर्ट मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ लू को लेकर भी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14-18 तारीख के दौरान उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति की संभावना है। 14-15 जून के दौरान पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड में गंगा के मैदानी इलाकों में लू चलेगी। 16 जून को झारखंड में यह स्थिति बनी रहेगी। अगले 5 दिनों के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है। 16 और 17 जून को कुछ स्थानों पर भीषण लू चलने की संभावना है।  

लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर JDU-TDP की नजर, 26 जून को होगा स्पीकर का चुनाव

Mohan government's first budget on July 3, Finance Minister Jagdish Deora will present the budget

नई दिल्ली नई सरकार बनने के बाद अब देश की नजर लोकसभा स्पीकर के चुनाव पर हैं। 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होकर 3 जुलाई तक चलेगा। 27 जून को राज्यसभा का सत्र बुलाया जाएगा। इस बीच 24 जून को लोकसभा के सांसद शपथ लेंगे। इसके बाद लोकसभा स्पीकर का चुनाव होगा। 25 जून तक स्पीकर के नाम का प्रस्ताव किया जा सकेगा। 26 जून को स्पीकर का चुनाव होगा। इस रेस में सबसे डी पुंदेश्वरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। लेकिन नरेंद्र मोदी के वर्किंग स्टाइल को देखते हुए माना ये भी जा रहा है कि ओम बिरला को फिर से लोकसभा का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने 9 जून यानी रविवार को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ 71 मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें 30 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली है। उल्लेखनीय है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 293 सीटें मिली हैं। इन चुनावों में बीजेपी बहुमत के आंकड़े को नहीं छू पाई है। नरेंद्र मोदी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। उधर, इंडिया गठबंधन को 234 सीटें मिली हैं। फिर से ओम बिरला बन सकते हैं लोकसभा स्पीकर 17वीं लोकसभा में ओम बिरला लोकसभा के स्पीकर चुने गए थे। ओम बिरला राजस्थान की कोटा लोकसभा सीट से तीसरी बार चुनाव जीतकर पहुंचे हैं। माना ये भी जा रहा है कि ओम बिरला को दोबारा लोकसभा स्पीकर बनाया जा सकता है। ओम बिरला दलित चेहरा हैं और इस पर किसी भी पार्टी को आपत्ति नहीं होगी। पिछली लोकसभा में ओम बिरला निर्विरोध स्पीकर चुने गए थे। हालांकि, इस बार के समीकरण अलग हैं। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी स्पीकर पद अपने पास रखेगी और इस रेस में दूसरा नाम आंध्र प्रदेश बीजेपी की अध्यक्ष दुग्गुबति पुरंदेश्वरी का नाम है। पुरंदेश्वरी इस बार राजमुंदरी लोकसभा सीट से चुनाव जीती हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी को लगता है कि अगर पुरंदेश्वरी को स्पीकर बनाया जाता है तो टीडीपी और चंद्रबाबू नायडू इसे लेकर कोई आपत्ति नहीं जताएंगे। लोकसभा चुनाव में राज्य में टीडीपी और जनसेना के साथ बीजेपी के गठबंधन में दुग्गुबति पुरंदेश्वरी ने अहम भूमिका निभाई थी और जनता ने भी गठबंधन पर भरोसा जताया। कौन हैं दुग्गुबति पुरंदेश्वरी? दुग्गुबति पुरंदेश्वरी पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव की बेटी हैं और चंद्रबाबू नायडू की पत्नी नारा भुवनेश्वरी की बहन हैं। आंध्र प्रदेश बीजेपी चीफ के अलावा वह तीन बार की सांसद हैं। 2004 और 2009 में उन्होंने बापतला और विशाखापट्टनम से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस में आने से पहले वह और उनके पति दुग्गुबति वेंकटेश्वरा राव शुरुआत में चंद्रबाबू नायडू के साथ थे और उन्होंने मिलकर साल 1996 में टीडीपी में तख्तापलट के बाद एनटी रामाराव को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था। इस घटना के बाद चंद्रबाबू नायडू ने पूरी टीडीपी को अपने कंट्रोल में करके पुरंदेश्वरी और वेंकटेश्वरा को साइडलाइन कर दिया। इस घटना से नाराज पुरंदेश्वरी ने राजनीति में उतरने का फैसला कर लिया और कांग्रेस में शामिल हो गईं। कांग्रेस के टिकट पर दो बार सांसद बनीं और यूपीए की सरकार में मनमोहन सिंह की कैबिनेट में केंद्रीय राज्य मंत्री का भी पदभार संभाला। हालांकि, आंध्र प्रदेश के विभाजन के कांग्रेस सरकार के फैसले से नाराज होकर वह बीजेपी में शामिल हो गईं और उन्हें पार्टी राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया। बाद में वह पार्टी के महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाई गईं। दुग्गुबति पुरंदेश्वरी के स्पीकर बनने का विरोध कर सकते हैं चंद्रबाबू नायडू? दुग्गुबति पुरंदेश्वरी को अगर बीजेपी स्पीकर बनाती है तो इसकी संभावना कम है कि चंद्रबाबू नायडू उनका विरोध करें। एक तो वह उनकी रिश्तेदार है। हालांकि, वह कभी भी नायडू की समर्थक नहीं रही हैं, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी-टीडीपी गठबंधन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वहीं, एनटी रामाराव की सरकार के तख्तापलट के समय वह चंद्रबाबू नायडू का साथ दिया था।

परीक्षा केंद्रों पर लड़कियों को आवश्यक शौचालय ब्रेक लेने की अनुमति, मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध: शिक्षा मंत्रालय

नई दिल्ली मासिक धर्म स्वास्थ्य की दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए, शिक्षा मंत्रालय (MoE) ने सभी स्कूल परीक्षा केंद्रों को सभी छात्राओं के लिए निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन जैसे मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों से लैस करने की सलाह दी है. शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों को दूर करने और परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान आवश्यक शौचालय ब्रेक लेने की अनुमति दी जाएगी. मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन एक लड़की के समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसे उसके शैक्षणिक प्रदर्शन के आड़े नहीं आना चाहिए. शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्राओं की सहायता के लिए स्कूल में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन को प्राथमिकता देता है. मंत्रालय ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्राओं के स्वास्थ्य, सम्मान और शैक्षणिक सफलता को सुनिश्चित करने के लिए कई सक्रिय उपायों की घोषणा की है. मंत्रालय ने कहा कि DoSEL ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इस मामले में मुख्य पहल की गई है. सैनिटरी उत्पादों का प्रावधान- सभी 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर निःशुल्क सैनिटरी पैड आसानी से उपलब्ध होंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लड़कियों को परीक्षा के दौरान आवश्यक स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके. शौचालय में ब्रेक- छात्राओं को मासिक धर्म संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक शौचालय ब्रेक लेने की अनुमति दी जाएगी, ताकि असुविधा कम हो और परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित करने में मदद मिले. संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रम- छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्तशासी क्षेत्रों द्वारा शैक्षिक कार्यक्रम लागू किए जाएंगे. इस दृष्टिकोण का उद्देश्य कलंक को कम करना और स्कूल के माहौल को और अधिक समझदार बनाना है. परीक्षा के दौरान मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता संबंधी चिंताओं को संबोधित करके, DoSEL महिला छात्राओं के साथ उनकी मासिक धर्म संबंधी जरूरतों के संबंध में सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने के महत्व पर जोर देता है, साथ ही लड़कियों को आत्मविश्वास के साथ परीक्षाओं में भाग लेने और अपनी शैक्षणिक क्षमता हासिल करने के लिए सशक्त बनाता है.

आंध्र प्रदेश में ट्रक- वैन की टक्कर में छह लोगों की मौत

विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में शुक्रवार को एक कंटेनर ट्रक और डीसीएम वैन के बीच जोरदार टक्कर हो गई. हादसे में छह लोगों की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना क्रुथिवेन्नु मंडल के सीतानपल्ली के पास हुई. मृतकों में दोनों वाहनों के चालक शामिल हैं. कंटेनर ट्रक पुडुचेरी से भीमावरम जा रहा था. इस दौरान वह विपरीत दिशा से आ रही डीसीएम वैन से टकरा गया. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कंटेनर चालक ने लकड़ियां लदे एक ट्रैक्टर से बचने की कोशिश की और डीसीएम वैन से जा टकराया. घटना के शिकार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. मृतकों में से पांच कोनासीमा जिले के तल्लारेवू के रहने वाले थे. डीसीएम वैन में कम से कम 10 लोग सवार थे और वे मछली पकड़ने जा रहे थे. घायलों को मछलीपट्टनम के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. राज्य मंत्री कोल्लू रवींद्र ने दुर्घटना पर दुःख जताया और संबंधित अधिकारियों को घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

अदन की खाड़ी में Merchant ship पर हूतियों ने किया हमला, मर्चेंट नेवी का एक सदस्य गंभीर रूप से हुआ घायल

वाशिंगटन अदन की खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज पर मौजूद मर्चेंट नेवी का एक सदस्य यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया है और जहाज को भी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक बयान में यह जानकारी दी है। सेंटकॉम ने गुरुवार को एक्स पर बताया कि कर्मचारी को इलाज के लिए पास के जहाज में स्थानांतरित कर दिया गया है। अभी उसकी राष्ट्रीयता स्पष्ट नहीं है। सेंटकॉम ने लिखा, ‘ईरान समर्थति हूतियों द्वारा किया गया यह व्यवहार क्षेत्रीय स्थिरता को, और लाल सागर तथा अदन की खाड़ी में नाविकों के जीवन को खतरे में डालता है। उसने बताया कि ‘पलाऊ देश के ध्वज वाहक यूक्रेनी-स्वामित्व वाले और पोलैंड-संचालित बल्क कार्गो वाहक‘ पर दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया जिससे उसमें आग लग गई। चालक दल अभी भी आग बुझाने में लगा हुआ है। सेंटकॉम के अनुसार, एमवी वर्बेना नामक जहाज ‘लकड़ी की निर्माण सामग्रियां लेकर‘ मलेशिया से इटली जा रहा था। अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध की शुरुआत के बाद से हूती आतंकवादियों ने लाल सागर और आस-पास की अदन की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर बार-बार हमले किए हैं। अदन की खाड़ी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है जो स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर से जुड़ता है। आतंकवादियों ने कहा है कि इन हमलों का उद्देश्य फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास को समर्थन देना है, ताकि मालवाहक जहाजों के लिए इजरायल पहुंचना मुश्किल हो जाए। जवाबी कार्रवाई में, अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन में हूती ठिकानों पर कई सैन्य हमले किए हैं। यूरोपीय संघ ने भी लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक सैन्य अभियान शुरू किया है।  

हरियाणा में 4.5 लाख के मुकाबले 2.7 लाख नियमित कर्मचारी, रिक्त पदों को भरने के लिए अभियान चलाया जाएगा

Rs 40 lakh fraud in wheat purchase: FIR against seven people including warehouse owner

चंडीगढ़ हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों में इस समय एक लाख आठ हजार पद खाली हैं। प्रदेश में जिस रफ्तार से विभागीय कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उस हिसाब से कर्मचारियों की तैनाती नहीं हो रही है। हरियाणा के सरकारी विभागों में इस समय सवा लाख अनुबंधित कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों से ही विभागों का कामकाज चलाया जा रहा है। मुख्य सचिव के निर्देश पर सभी विभागों की ओर से रिक्त पदों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार की ओर से रिक्त पदों को भरने के लिए अभियान चलाया जाएगा।  प्रदेश में जल्द ही विभिन्न विभागों में ग्रुप सी और डी के 50 हजार पदों पर भर्तियां होंगी। सीएम ने कहा कि 2014 से लेकर आज तक हरियाणा सरकार ने करीब एक लाख भर्तियां की हैं। आने वाले तीन महीनों के भीतर 50 हजार भर्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। तमाम विभागों की ओर से मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, शहरी स्थानीय निकाय, सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजिनियरिंग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों को संभालने में अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका अहम है। आंकड़ों से पता चला कि लगभग 1.05 लाख कर्मचारी कांट्रैक्ट के आधार पर हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के साथ रजिस्टर्ड हैं। ठेके पर रखे जा रहे कर्मचारी! इनमें से लगभग 15,000 स्वास्थ्य विभाग में, 13,000 बिजली विभाग में, 8,000 यूएलबी विभाग में, 8,000 पीएचई विभाग में, 5,000 हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) में और 5,000 विश्वविद्यालयों में कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग के साथ काम करने वाले 5,000 संविदा कर्मचारी हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के तहत रजिस्टर्ड हैं। वहीं, अनुबंध के आधार पर काम करने वाले 14 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक भी शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं। 4.5 लाख के मुकाबले लगभग 2.7 लाख नियमित कर्मचारी इनके अलावा, विभिन्न विभागों में संविदा के आधार पर काम करने वाले कम से कम 2,000 कर्मचारी या तो HKRNL के तहत रजिस्टर्ड हैं या सीधे विभागों के तहत काम कर रहे हैं। हरियाणा में कुल स्वीकृत पदों में लगभग 4.5 लाख के मुकाबले लगभग 2.7 लाख नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। पिछले कुछ वर्षों में नियमित कर्मचारियों की संख्या में कमी आ रही है, जबकि जनसंख्या में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। चिंता करने की जरूरत नहीं: सीएम सैनी सीएम ने नौकरियों में सामाजिक-आर्थिक आधार पर मिलने वाले पांच अंक के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले पर कहा कि सरकार की लीगल टीम इसके हर पहलू के आधार पर अपनी तैयारी कर चुकी है। जल्द ही प्रदेश सरकार हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी, जिससे युवाओं को इंसाफ मिल सके। सीएम ने दावा किया कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद जिन युवाओं को नौकरी का खतरा पैदा हुआ है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार हर संभव प्रयास करके उनकी नौकरी को बचाएगी। हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में सरकारी भर्तियों में मिलने वाले सामाजिक आर्थिक मानदंड के 5 अंकों को संविधान के विरुद्ध करार दिया और सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया। इस फैसले से भर्तियां सिर्फ मेरिट के आधार पर हो सकेंगी।

जी-7 समिट से पहले इटली की संसद में मच गया बवाल! जमकर चले लात घुसे

रोम इटली में G7 शिखर सम्मेलन से पहले देश की संसद से एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है. इटली की संसद में सांसदों के बीच एक बिल को लेकर जमकर लात-घूसे चले. संसद के भीतर मारपीट का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इटली के कुछ क्षेत्रों को स्वायत्तता देने से जुड़े एक बिल को लेकर संसद के भीतर विवाद शुरू हुआ था. इस बिल का समर्थन करने वाले और विरोधी सांसदों के बीच शुरू हुआ विवाद बाद में मारपीट तक जा पहुंचा. वीडियो में देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के सांसद लियोनार्डो डोनो सरकार में मंत्री रॉबर्टो कैलडेरोली को इटली का झंडा देने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन डोनो ने झंडा लेने से इनकार कर दिया और पीछे हट गए. इस बीच अन्य सासंदों की भीड़ उमड़ पड़ी और देखते ही देखते दोनों पक्षों में लात और घूसे चलने लगे. इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद विदेश मंत्री एंटोनियो तेजानी ने खेद जताते हुए कहा कि उनके पास शब्द नहीं हैं. हमें एक और उदाहरण पेश करना है, ना कि राजनीतिक समस्याएं सुलझाने के लिए लात-घूसे चलाने हैं. बता दें कि इटली के अपुलिया में 50वें G7 शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख जुटे हैं. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से लेकर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक शामिल हैं.  

कुवैत से वतन लाए गए 45 भारतीयों के शव, कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी

कोच्चि  कुवैत अग्निकांड में मारे गए 45 भारतीयों के पार्थिव शरीर भारत लाए गए हैं। शवों को विशेष विमान से कोच्चि एयरपोर्ट लाया गया, जहां पहले से एंबुलेंस तैनात थी। पार्थिव शरीर कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचने पर एर्नाकुलम रेंज के डीआईजी पुट्टा विमलादित्य ने कहा कि हमने शवों को प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले ही कर ली थी। केरल और तमिलनाडु से हैं ज्यादातर मृतक डीआईजी ने कहा कि हमने पीड़ितों के परिवार के सदस्यों के साथ समन्वय किया है। शव प्राप्त होने के बाद उन्हें उचित तरीके से संबंधित स्थानों पर ले जाया जाएगा। बता दें कि 23 शव केरल के हैं, 7 तमिलनाडु के और 1 कर्नाटक का है। प्रत्येक शव के लिए एक समर्पित वाहन उपलब्ध कराया गया है। मृतकों में केरल के नागरिक सबसे ज्यादा कुवैत अग्निकांड में मारे गए लोगों में से सबसे ज्यादा लोग (23) केरल के नागरिक हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर तमिलनाडु (7) है. इसके अलावा 3-3 नागरिक उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के भी मारे गए हैं. ओडिशा के भी दो लोग इस अग्निकांड की वजह से मौत के मुंह में समा गए. इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, बंगाल, पंजाब और हरियाणा के भी एक-एक नागरिक की मौत हुई है. केरल के मंत्री भी एयरपोर्ट पहुंचे उधर, केरल के राजस्व मंत्री के. राजन कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां कुवैत में आग की घटना में 45 भारतीयों के पार्थिव शरीर को लेकर भारतीय वायुसेना का विशेष विमान पहुंचा। सुरेश गोपी बोले- भारत सरकार करेगी सर संभव मदद केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी कोच्चि एयरपोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी इतनी बड़ी है कि यह प्रवासी समुदाय पर आघात है। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों ने केरल की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद की। व्यक्तिगत क्षति हर घर की है जो इस त्रासदी से प्रभावित हुआ है। सुरेश गोपी ने कहा कि भारत सरकार उचित कार्रवाई और निर्णय लेगी और बहुत उचित राहत प्रदान करेगी। इमारत में आग लगने से गई 45 भारतीयों की जान बता दें कि कुवैत के अहमदी प्रांत के दक्षिणी मंगाफ की एक इमारत में लगी भीषण आग में 49 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें 45 भारतीयों की जान गई, जिनके शव अब भारत लाए गए।   किस राज्य के कितने लोग मारे गए क्रमांक राज्य संख्या 1. केरल   23 2. तमिलनाडु 7 3.  आंध्र प्रदेश 3 4.  उत्तर प्रदेश     3 5. ओडिशा     2 6. महाराष्ट्र     1 7. कर्नाटक     1 8. बिहार 1 9. झारखंड 1 10. बंगाल 1 11. पंजाब 1 12. हरियाणा 1 कब-कैसे हुआ था हादसा? कुवैत के मीडिया के मुताबिक आग रसोई में लगी थी, अधिकांश मौतें धुएं के कारण हुईं. 12 जून (बुधवार) की सुबह 4.30 बजे अल-अहमदी गवर्नरेट के अधिकारियों ने हादसे की सूचना दी थी. इसका मतलब आग अल सुबह लगी थी, जिस वक्त लोग नींद की आगोश में थे. कुवैती मीडिया के मुताबिक निर्माण कंपनी NBTC ग्रुप ने 195 से ज्यादा श्रमिकों के रहने के लिए बिल्डिंग किराए पर ली थी, जिनमें रहने वाले अधिकांश श्रमिक केरल, तमिलनाडु और उत्तरी राज्यों के थे.  

इटली में PM मोदी का पहुंचते ही जोरदार स्वागत, G-7 समिट में करेंगे शिरकत

रोम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपुलिया में आयोजित ग्रुप ऑफ सेवन (जी-7) शिखर सम्मेलन में भाग लेने इटली पहुंच गए हैं. अपुलिया के ब्रिंडिसि हवाई अड्डे पर इटली में भारत के राजदूत वाणी राव और अन्य अधिकारियों ने पीएम मोदी का स्वागत किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली पहुंचा. विश्व नेताओं के साथ सार्थक चर्चा में शामिल होने के लिए उत्सुक हूं. साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना और उज्जवल भविष्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है.” प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर आज जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लेंगे. इस दौरान पीएम कई विश्व नेताओं से मुलाकात भी करेंगे. माना जा रहा है कि इस दौरान अमेरिका खालिस्तानी  गुरपतवंत सिंह पन्नू  का मुद्दा उठा सकता है. जी7 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान शामिल हैं. इटली जी-7 (सात देशों के समूह) शिखर सम्मेलन की वर्तमान में अध्यक्षता और मेजबानी कर रहा है. भारत के अलावा इटली ने अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के 11 विकासशील देशों के नेताओं को शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. हालांकि, यूरोपीय संघ जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन यह वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेता है.  मोदी ने कहा कि मैं 2021 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी इटली यात्रा को गर्मजोशी से याद करता हूं. पिछले साल प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत की दो यात्राएं हमारे द्विपक्षीय एजेंडे में गति और गहराई लाने में सहायक रहीं. हम भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और हिन्द-प्रशांत एवं भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.” उन्होंने कहा, ”आउटरीच सत्र’ में चर्चा के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा, अफ्रीका एवं भूमध्यसागर पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा. यह भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन तथा आगामी जी7 शिखर सम्मेलन के परिणामों के बीच व्यापक तालमेल लाने और उन मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर होगा, जो ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए महत्वपूर्ण हैं. मैं इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं.”

अमेरिका के इस कदम से चीन का आगबबूला होना तय! पारित किया नया कानून

वॉशिंगटन अमेरिकी संसद ने तिब्बत पर चीन के नियंत्रण के बारे में बीजिंग के कथन का मुकाबला करने के लिए एक द्विदलीय विधेयक को राष्ट्रपति जो बाइडन की मंजूरी के लिए भेजा है। इस विधेयक के पारित हो जाने पर अमेरिका चीनी सरकार और दलाई लामा के बीच संवाद को आधिकारिक रूप से बढ़ावा भी देगा। प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को तिब्बत-चीन विवाद अधिनियम के समाधान को बढ़ावा देने के लिए 391-26 से मतदान किया, जिसे पिछले महीने सीनेट ने पारित किया था। इस विधेयक को ओरेगन के डेमोक्रेट सांसद जेफ मर्कले ने सीनेट में पेश किया था, जिसमें कहा गया था कि यह विधेयक तिब्बत के इतिहास, लोगों और संस्थानों के बारे में बीजिंग द्वारा फैलाई जा रही “गलत सूचना” का मुकाबला करने के लिए धन मुहैया कराएगा। माना जा रहा है कि इस कानून पर चीन सख्त प्रतिक्रिया देगा। चीन के दावे का खंडन करता है यह विधेयक यह विधेयक चीनी सरकार के इस दावे का खंडन करता है कि तिब्बत प्राचीन काल से चीन का हिस्सा रहा है, और यह अमेरिकी नीति बनाएगा कि तिब्बत की स्थिति पर विवाद अनसुलझा है। यह अमेरिकी नीति भी बनाएगा कि “तिब्बत” का तात्पर्य केवल चीनी सरकार द्वारा परिभाषित तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से ही नहीं है, बल्कि गांसु, किंघई, सिचुआन और युन्नान प्रांतों के तिब्बती क्षेत्रों से भी है। दलाई लामा और चीन के बीच बातचीत कराने पर जोर मंगलवार को सदन में टेक्सास के रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ने कहा, “इस विधेयक को पारित करना अमेरिका के इस संकल्प को दर्शाता है कि तिब्बत में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की यथास्थिति स्वीकार्य नहीं है और मैं दलाई लामा और तिब्बत के लोगों के लिए इससे बड़ा कोई संदेश या उपहार नहीं सोच सकता।” तिब्बत पर वाशिंगटन की स्थिति के बारे में भाषा को सख्त करते हुए, विधेयक के समर्थकों को उम्मीद है कि वे निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए बीजिंग पर दबाव डालेंगे। दोनों पक्षों ने 2010 से औपचारिक बातचीत नहीं की है। चीन का दावा- 700 साल से तिब्बत पर है अधिकार सदन ने फरवरी में सीनेट विधेयक का एक संस्करण पहले ही पारित कर दिया था। उस सदन विधेयक के प्रायोजक, मैसाचुसेट्स के डेमोक्रेट जिम मैकगवर्न ने कहा है कि बीजिंग और दलाई लामा के बीच “बिना किसी पूर्व शर्त” के वार्ता के लिए अमेरिका द्वारा की गई पिछली अपीलें विफल हो गई हैं। बीजिंग का तर्क है कि तिब्बत 700 से अधिक वर्षों से केंद्रीय चीनी शासन के अधीन रहा है, जबकि लंबे समय तक तिब्बती प्रचारकों का तर्क है कि यह क्षेत्र प्रभावी रूप से स्व-शासित था। दलाई लामा ने कहा है कि वह तिब्बत के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं चाहते हैं, लेकिन उन्होंने तिब्बत पर बीजिंग के ऐतिहासिक दावे को मान्यता नहीं दी है। तिब्बत को लेकर बदल रही अमेरिका की स्थिति अप्रैल में, चीन के विदेश मंत्रालय ने फिर से जोर दिया कि आध्यात्मिक नेता के साथ कोई भी संपर्क या बातचीत उनके “व्यक्तिगत भविष्य” या, अधिक से अधिक, उनके करीबी सहयोगियों के बारे में होगी, न कि तिब्बती स्वायत्तता के सवाल पर। अमेरिकी विदेश विभाग स्वायत्त क्षेत्र और अन्य तिब्बती क्षेत्रों को चीन का हिस्सा मानता है, लेकिन बिल के समर्थकों का कहना है कि अमेरिकी सरकार ने कभी यह स्थिति नहीं ली है कि 1950 के दशक में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा इस क्षेत्र पर कब्जा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करता है। चीन पर तिब्बत को तबाह करने का आरोप बिल के लेखकों का तर्क है कि चीनी सरकार तिब्बतियों की अपने धर्म, संस्कृति, भाषा, इतिहास, जीवन शैली और पर्यावरण को संरक्षित करने की क्षमता को “व्यवस्थित रूप से दबा रही है” और जोर देकर कहती है कि तिब्बती लोगों को “आत्मनिर्णय” का अधिकार है। 2021 में पदभार ग्रहण करने के बाद से, बाइडन ने अभी तक दलाई लामा से मुलाकात नहीं की है। 2020 में एक उम्मीदवार के रूप में, बाइडन ने डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना की कि वे तीन दशकों में एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने तिब्बती आध्यात्मिक नेता से न तो मुलाकात की और न ही उनसे बात की। तिब्बत पर बाइडन का क्या है रुख हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने तिब्बती मुद्दे के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है, तिब्बत में चीन की कार्रवाइयों के बारे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चिंता जताई है और तिब्बती मुद्दों के लिए विशेष समन्वयक के रूप में काम करने के लिए एक उच्च पदस्थ विदेश विभाग के अधिकारी को नियुक्त किया है। दलाई लामा ने घुटने के इलाज के लिए इस महीने अमेरिका जाने की योजना की घोषणा की है, लेकिन उनके और अमेरिकी अधिकारियों के बीच किसी भी बैठक के बारे में कोई विवरण नहीं है। बीजिंग किसी भी देश के अधिकारियों द्वारा दलाई लामा से संपर्क करने का विरोध करता है।  

PM Surya Bijli Scheme : 3 किलोवाट के सोलर पैनल से कुल सालाना बचत 30,240 रुपये

नईदिल्ली लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने पीएम सूर्य घर फ्री बिजली योजना (PM Surya Ghar Free Bijli Scheme) का ऐलान किया था, जिसके तहत 75000 करोड़ के निवेश के साथ 300 यूनिट तक फ्री बिजली देने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके तहत 1 करोड़ परिवारों को लाभ देने की योजना है. साथ ही बचे हुए बिजली को बेचकर लाभ भी उठा सकते हैं. इसके अलावा, केंद्र सरकार इस स्‍कीम के तहत सब्सिडी भी प्रोवाइड कराएगी. अगर आप भी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Free Bijli Scheme) के तहत लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको सोलर पैनल लगवाने होंगे. हालांकि सोलर पैनल लगवाने से पहले कुछ खास बातों के बारे में विस्‍तार से जान लेना चाहिए. ताकि आपको योजना का लाभ उठाने में किसी भी तरह की समस्‍या का सामना नहीं करना पड़े. आइए जानते हैं पूरी डिटेल… कितना आएगा खर्च? अगर आप सोलर पैनल लगवाने वाले हैं तो इसका खर्च अलग-अलग हो सकता है. 1 किलोवाट के लिए खर्च करीब 90 हजार रुपये, 2 किलोवाट के लिए करीब 1.5 लाख रुपये और 3 किलोवाट के लिए 2 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है.   किसे, कितनी मिलेगी सब्सिडी? अगर आप किसी आवासीय घर के लिए छत पर सौर पैनल लगाने की योजना बना रहे हैं, तो आप पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस योजना के तहत, 1 किलोवाट के लिए 18 हजार रुपये, 2 किलोवाट तक 30,000 रुपये और 3 किलोवाट के लिए कुल सब्सिडी 78,000 रुपये दी जाएगी. सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए 85% से अधिक का लोड नहीं होना चाहिए. 4 साल में इतना बचा लेंगे बिजली बिल छत पर सौर पैनल लगाना एक दीर्घकालिक निवेश है. 1 किलोवाट से 120 किलोवाट घंटे तक बिजली पैदा हो सकती है और 3 किलोवाट के सोलर पैनल से कुल सालाना बचत 7 रुपये प्रति यूनिट पर 30,240 रुपये किया जा सकता है. हालांकि 3 किलोवाट पर लागत 2 लाख रुपये होता है और सब्सिडी 78000 रुपये दिया जाता है तो ऐसे में 1.2 लाख रुपये का लागत पड़ता. यानी कि कुल 4 साल में 30 हजार रुपये की बिजली हर साल बचाते हुए पूरे लागत की भरपाई कर पाएंगे.  

बहुत बड़ी प्लानिंग का हिस्सा हैं जम्मू के सीरियल आतंकी हमला, आईएसआई ने ‘फाल्कन 50’ प्रॉजेक्ट लॉन्च किया

In the game of commission, DFO kept changing the date and conditions of tender without permission

नई दिल्ली  तैयारी लोकसभा चुनाव के दौरान आतंकी हमलों से दहलाने की थी, लेकिन तब सफलता नहीं मिली। अब जैसे-तैसे बॉर्डर पार कर रहे तो जम्मू में सीरियल अटैक का सिलसिला सा चल पड़ा। पहले रियासी में श्रद्धालुओं की बस पर अटैक, फिर कठुआ में गोलीबारी और फिर डोडा में सेना की चौकी पर अटैक, ये आतंकी वारदात कुछ इशारा कर रहे हैं। इन सभी हमलों के पीछे पाकिस्तान का सीधा-सीधा हाथ है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी रणनीति बदल ली है। नई रणनीति के तहत आईएसआई कश्मीर घाटी की जगह जम्मू के इलाके में आतंक फैलाने के प्लान पर आगे बढ़ रही है। आईएसआई का प्रॉजेक्ट फाल्कन 50 आईएसआई ने जम्मू को टारगेट करने के लिए ‘फाल्कन 50’ प्रॉजेक्ट लॉन्च किया है। इसके तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आंतकियों के जत्थे को ट्रेंड किया जा रहा है और मौका लगते ही खून-खराबे में माहिर हो चुके आतंकियों को सीमा पार करवा दिया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू के सांबा सेक्टर से लगी सीमा इन दिनों पाकिस्तानी आतंकियों का अड्डा बनी हुई है। वहां आतंकियों का समूह दिन-रात सीमा पार करने की फिराक में पल-पल का इतंजार करता रहता है। आईएसआई ने मूलतः लोकसभा चुनावों के दौरान आतंकी हमला करवाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की थी, लेकिन उसे तब आतंकियों को सीमा पार करवाने में सफलता नहीं मिल पाई। अब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी बॉर्डर क्रॉस करने में सफल हो गए तो लगातार तीन घटनाएं सामने आ गईं। जम्मू-कश्मीर के बदले मिजाज से घबराया पाकिस्तान दरअसल, लोकसभा चुनाव के बाद अब कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई इसे एक मौका समझ रही है। लोकसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर में वोटिंग का रिकॉर्ड टूटने से घबराया पाकिस्तान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जम्मू-कश्मीर की जनता में लोकतंत्र के प्रति आस्था गहराती न रहे। इस कारण से वह खून-खराबे की हैवानियत के जरिए लोगों में डर का माहौल बनाना चाहता है ताकि विधानसभा चुनावों में वोटर अपने घरों में ही दुबके रहें। यूं ही अंजाम तक पहुंचते रहेंगे आतंकी पाकिस्तान चाहता है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद भय के माहौल से निकलकर विकास के सपने देखने वाली आम आबादी के अरमान चकनाचूर हो जाएं। इसी मकसद से वो आतंकी हमलों के जरिए यह जताने की कोशिश में जुटा है कि दरअसल आर्टिकल 370 हटने से जम्मू-कश्मीर में शांति आने का दावा झूठा है। वो प्रदेश की जनता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भी भ्रमजाल में फांसने की फिराक में है। फाल्कन 50 प्रॉजेक्ट के जरिए अपना मकसद साधने में जुटी आईएसआई को लगातार मुंह की खानी पड़ रही है। भारतीय सेना ढूंढकर आतंकियों के सफाया कर रही है।

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