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4% ब्याज वाले लोन पर असर? RBI की नई गाइडलाइन से बदलेंगे क्रेडिट कार्ड नियम

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के दिशा-निर्देशों में बदलाव के लिए ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मकसद कवरेज का विस्तार, परिचालन प्रक्रियाओं का सरलीकरण और कृषि क्षेत्र की उभरती जरूरतों का ध्यान रखना है। इस ड्राफ्ट पर आम लोग और अन्य हितधारक छह मार्च 2026 तक टिप्पणियां और सुझाव दे सकते हैं। होने वाले हैं ये बदलाव आरबीआई ने केसीसी लोन की मंजूरी और री-पेमेंट प्रोग्राम में एकरूपता लाने के लिए फसल सत्रों की अवधि को मानकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को 12 माह के चक्र और लंबी अवधि वाली फसलों को 18 माह के चक्र के रूप में परिभाषित किया गया है। लंबी अवधि की फसलों के चक्र के अनुरूप लोन अवधि तय करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की कुल अवधि छह वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है। ड्राफ्ट में केसीसी के तहत निकासी सीमा को प्रत्येक फसल सत्र के लिए फसल की अनुमानित लागत के साथ समायोजित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि किसानों को वास्तविक खेती लागत के अनुरूप पर्याप्त लोन मिल सके। इसके अलावा, मिट्टी की जांच, वास्तविक समय में मौसम पूर्वानुमान, जैविक एवं उत्तम कृषि पद्धतियों के सर्टिफिकेशन जैसे तकनीकी खर्चों को भी पात्र मद में शामिल किया गया है। ये खर्च कृषि परिसंपत्तियों के मेंटेनेंस के लिए वर्तमान में स्वीकृत 20 प्रतिशत अतिरिक्त के भीतर रखे जाएंगे। किसान क्रेडिट कार्ड के बारे में बता दें कि किसान क्रेडिट कार्ड सिर्फ सरकारी बैंक ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय ग्रामीण और कुछ निजी बैंकों से भी मिलता है। इस कार्ड के लिए जमीन का मालिक होना जरूरी नहीं, किरायेदार और शेयरफार्मर भी पात्र हैं। इसके लिए जरूरी दस्तावेज में दो पासपोर्ट साइज के फोटो, राजस्व अधिकारियों द्वारा विधिवत प्रमाणित भूमि जोत का प्रमाण, रकबे के साथ फसल पैटर्न (उगाई जाने वाली फसलें) आदि शामिल हैं। शॉर्ट टर्म के लिए कितना लोन किसान क्रेडिट कार्ड योजना, किसानों को उनकी विविध वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त और समय पर लोन प्रोवाइड करने के लिए बनाई गई है। यह किसानों को संस्थागत लोन तक आसान पहुंच प्राप्त करने मदद करती है। इसके जरिए कृषि और फसल के बाद के खर्चों के लिए पैसे की उपलब्धता सुनिश्चित किया जा सकता है। संशोधित ब्याज अनुदान योजना (एमआईएसएस) के तहत किसानों को फसल और संबद्ध गतिविधियों के लिए रियायती शॉर्ट टर्म एग्री लोन प्रोवाइड किया जाता है। योजना में 3 लाख रुपये तक के लोन पर 7 प्रतिशत ब्याज दर है। वहीं, समय पर री-पेमेंट के लिए अतिरिक्त 3 प्रतिशत अनुदान के साथ प्रभावी दर को घटकर 4 प्रतिशत हो जाता है। एमआईएसएस में किसान क्रेडिट कार्ड वाले छोटे किसानों के लिए नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीदों यानी एनडब्ल्यूआर पर फसल के बाद के लोन भी शामिल हैं।  

एआई पर वैश्विक मंथन में लूला की एंट्री, भारत दौरे से बढ़ेगी रणनीतिक साझेदारी

नई दिल्ली विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इंसियो लूला दा सिल्वा भारत के दौरे पर पहुंचेंगे। इस दौरान वे एआई-इम्पेक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति लूला यहां पहुंचने वाले हैं। 19-20 फरवरी को एआई इम्पेक्ट समिट का आयोजन होगा, जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय वार्ता 21 फरवरी को होगी। ब्राजील के राष्ट्रपति 21 फरवरी को भारत की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, भारत के उपराष्ट्रपति समेत अन्य अधिकारियों से भी उनकी मुलाकात होगी। राष्ट्रपति लूला अपने बिजनेस डेलिगेशन समेत अन्य अधिकारियों के साथ भारत पहुंचेंगे। इससे पहले एमईए ने जानकारी दी थी कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी भारत पहुंचने वाले हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय दौरे पर भारत आएंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत में रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरे के दौरान पीएम मोदी और मैक्रों हॉरिजोन 2047 रोडमैप में बताए गए कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, नेता आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में भी सहयोग शामिल है। दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करने के लिए मुंबई में उपस्थित होंगे। इस इवेंट को दोनों देशों में पूरे साल 2026 तक मनाया जाएगा। राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पेक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। एमईए प्रवक्ता ने बताया कि अभी और भी कई अन्य नेता इस समिट में शामिल होने वाले हैं, जिनके बारे में बाद में जानकारी साझा की जाएगी। इसमें दुनिया भर के नेता, नीति बनाने वाले, इंडस्ट्री और एक्सपर्ट शामिल होंगे, ताकि गवर्नेस, नवाचार और स्थिर विकास के लिए एआई की क्षमता को दिखाया जा सके और उस पर चर्चा की जा सके।

भारत के खिलाफ नई रणनीति? बांग्लादेश और अमेरिका की नजदीकी से सियासी भूचाल

नई दिल्ली कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस रीढ़ को सहारा देते हैं भारत समेत सेंट्रल एशिया के कुछ देश. बांग्लादेश कपड़े बनाता है लेकिन इसके लिए कपास (Cotton) भारत सप्लाई करता है, लेकिन अब बांग्लादेश ने इसमें बड़े बदलाव की घोषणा कर दी है. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 9 फरवरी को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता किया था. आज यानी गुरुवार को बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं और इस चुनाव से ठीक तीन दिन पहले यूनुस सरकार ने अमेरिका से व्यापार समझौता कर लिया. समझौते की वैधता पर कई सवाल खड़े हुए क्योंकि यूनुस सरकार ने समझौते को काफी सीक्रेट रखा और इसका ड्राफ्ट किसी के साथ शेयर नहीं किया गया. अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत बांग्लादेश भारत से कपास की खरीद को धीरे-धीरे कम करने जा रहा है. बांग्लादेश ने घोषणा की है कि भारत की जगह अब अमेरिका से कपास खरीदी जाएगी.   ‘बांग्लादेश के लिए गेमचेंजर साबित होगा अमेरिका से कपास की खरीद’ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के सूचना सलाहकार शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को ‘गेम चेंजर’ बताया. उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके लिए बेहद अहम है. अमेरिका ने बांग्लादेश से व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती कर उसे 19% कर दिया है. कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देश वस्त्र उद्योग में बांग्लादेश के प्रतिस्पर्धी हैं और इन देशों पर भी अमेरिका ने 19% का ही टैरिफ लगाया है. साथ ही, अमेरिका ने कहा है कि अगर बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाता है तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा यानी बांग्लादेश बिना किसी फीस के उसे अमेरिका में बेच सकेगा. भारत से बड़ी मात्रा में कपास खरीदता है बांग्लादेश बांग्लादेश का वस्त्र उद्योग काफी बड़ा है लेकिन वो कपड़ों के लिए पर्याप्त कपास या जरूरी धागे का उत्पादन नहीं कर पाता. इसके लिए वो भारत और सेंट्रल एशिया के देशों पर निर्भर है. लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद अब उसके सप्लायर्स में अमेरिका शीर्ष के देशों में शामिल हो जाएगा. 2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा और लगभग 8.5 करोड़ डॉलर का मानव निर्मित फाइबर धागा बेचा था. इनका बड़ा हिस्सा जमीनी बंदरगाहों के रास्ते भेजा गया. लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया. भारत ने शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी जिसके बाद से रिश्ते और खराब हुए. इसे देखते हुए 13 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी. इसके जवाब में भारत ने 16 मई 2025 से बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स समेत कई उत्पादों के जमीनी रास्ते से देश में एंट्री पर रोक लगा दी. बांग्लादेश भारत को सबसे अधिक रेडीमेड गारमेंट्स बेचता है. तनावपूर्ण रिश्तों के बीच बांग्लादेश ने भारत के बजाए अब अमेरिका से कपास खरीदने की योजना बनाई है. अमेरिका बांग्लादेशी कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार भी है. ऐसे में बांग्लादेश मान रहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में कपास खरीद को शामिल करना टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छा फैसला साबित होगा. ब्रैक यूनिवर्सिटी के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि इस समझौते से अमेरिका के कपास उत्पादकों के लिए बांग्लादेश अब आकर्षक जगह बन गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका का कपास भारत और मिस्र के कपास जैसी क्वालिटी वाला होगा या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है. उन्होंने कहा, ‘टेक्सटाइल सेक्टर में कपास की क्वालिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है. अगर अमेरिकी कपास स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतरी, तो अमेरिकी खरीदार भी हमारे कपड़े पसंद नहीं करेंगे.’ प्रोफेसर जहान ने यह भी कहा कि अमेरिका बांग्लादेश से काफी दूर है और वहां से कपास के आने की वजह से उसका शिपिंग चार्ज काफी बढ़ सकता है जिससे टैरिफ में मिली छूट का फायदा कम हो जाएगा.

महाशिवरात्रि विवाद सुप्रीम कोर्ट में: दरगाह प्रबंधन की गुहार पर SC की अहम टिप्पणी

कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 फरवरी) को कर्नाटक स्थित अलंद लाडले मशाइक दरगाह प्रबंधन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें जिसमें दरगाह परिसर में हिंदू महाशिवरात्रि पूजा और दूसरे हिंदू रीति-रिवाजों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। दरगाह मैनेजमेंट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अर्जी दी थी, जो उन पार्टियों को राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाज़त देता है जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। दरगाह प्रबंधन याचिका में दावा किया था कि दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए हर साल रणनीतिक तरीके से पूजा की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर दरगाह के मूल धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की भी मांग की थी। हालांकि, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की थी कि हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट लाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट प्रभावी नहीं हैं। जब कल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने यह मामला आया, तो इस बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले हाई कोर्ट जाने के बजाय आर्टिकल 32 की पिटीशन क्यों फाइल की गई। यह विवाद उस दरगाह से जुड़ा है जो 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित मानी जाती है। दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम से पहचानी जाने वाली एक संरचना भी मौजूद बताई जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा-अर्चना करते रहे हैं, हालांकि 2022 में यहां पूजा अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2025 में 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी, जो भारी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुई थी। इससे पहले भी कोर्ट के आदेश पर सीमित संख्या में पूजा कराई गई थी। दरगाह प्रबंधन का कहना था कि बार-बार अंतरिम आदेश लेकर धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के खिलाफ हो सकता है। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना जरूरी माना गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक अधिकार, ऐतिहासिक दावों और कानून के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ईरान बनाम इजरायल: हाइपरसोनिक मिसाइलों के खिलाफ डेविड्स स्लिंग की रणनीति क्या है?

इजरायल  इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली डेविड्स स्लिंग ने एक बार फिर अपनी शक्ति साबित की है। भविष्य में बढ़ते मिसाइल खतरों, खासकर ईरान जैसे दुश्मनों को ध्यान में रखते हुए, इजरायल ने इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इजरायल ने तैयार कर लिया ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का तोड़, डेविड्स स्लिंग के साथ क्या प्लान? इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली डेविड्स स्लिंग ने एक बार फिर अपनी शक्ति साबित की है। भविष्य में बढ़ते मिसाइल खतरों, खासकर ईरान जैसे दुश्मनों को ध्यान में रखते हुए, इजरायल ने इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। ये परीक्षण जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध से सीखे गए महत्वपूर्ण सबकों पर आधारित हैं, जहां डेविड्स स्लिंग ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक रोक लिया था। यह प्रणाली इजरायल की बहु-स्तरीय रक्षा ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें आयरन डोम (छोटी दूरी), डेविड्स स्लिंग (मध्यम दूरी) और एरो (लंबी दूरी) शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि भविष्य के खतरों के लिए तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली के साथ कई उन्नत परीक्षण किए गए। राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित डेविड्स स्लिंग को 40 से 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, विमान तथा मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी/ड्रोन) को मार गिराने के लिए तैयार किया गया है। इन परीक्षणों के नए चरण की घोषणा ऐसे समय में हुई जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता कर रहे थे। यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सामने आया है, जहां तेहरान की ओर से संभावित हमले की आशंका जताई जा रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये अभ्यास जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध से प्राप्त ‘परिचालन अनुभवों’ पर आधारित थे। इसमें मौजूदा और उभरते खतरों के अनुरूप कई चुनौतीपूर्ण परिदृश्य शामिल किए गए। मंत्रालय ने कहा कि परीक्षणों की सफलता प्रणाली के तकनीकी और परिचालन उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। युद्ध के दौरान इस प्रणाली ने उच्च प्रदर्शन दिखाया और सफल अवरोधनों से कई जानें बचाईं तथा बड़े नुकसान को टाला। बता दें कि डेविड्स स्लिंग वर्ष 2017 से इजरायल में सक्रिय है और देश की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का मध्य स्तर बनाती है। इस ढांचे में कम दूरी के लिए आयरन डोम और आयरन बीम शामिल हैं, जबकि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए शीर्ष स्तर पर एरो-3 प्रणाली तैनात है। डेविड्स स्लिंग के उन्नयन से एरो-3 पर दबाव कम होता है। एरो-3 को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया है। जहां डेविड्स स्लिंग की एक मिसाइल दागने की लागत लगभग 10 लाख डॉलर है, वहीं एरो-3 के इस्तेमाल पर 25 लाख डॉलर से अधिक खर्च आ सकता है। हालांकि डेविड्स स्लिंग को मूल रूप से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था, लेकिन रक्षा सूत्रों के अनुसार जून 2025 में ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इसे तैनात किया गया और इसने लगभग 1500 किलोमीटर दूर से दागी गई कई मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया। इससे पहले इसका उपयोग मुख्य रूप से गाजा पट्टी और लेबनान से हमास तथा हिज़बुल्लाह द्वारा दागे गए मध्यम दूरी के रॉकेटों के खिलाफ किया जाता था। सेना के अनुसार, जून के संघर्ष के दौरान तेहरान की ओर से दागी गई लगभग 550 बैलिस्टिक मिसाइलों और 1000 से अधिक ड्रोनों में से करीब 85 प्रतिशत को सफलतापूर्वक मार गिराया गया।

13 वर्षीय ईसाई लड़की संग कथित जबरन इस्लाम कबूलनामा और निकाह, पाकिस्तान में मानवाधिकारों पर सवाल

इस्लामाबाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां अल्पसंख्यक समुदाय की मासूम बच्चियों का अपहरण कर उनके धर्म को जबरन बदल दिया जाता है और छोटी उम्र में ही जबरदस्ती शादी कर दी जाती है। एक बार फिर ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) ने पाकिस्तान के साहिवाल जिले की तहसील चिचावतनी में 13 वर्षीय ईसाई लड़की सतीश मरियम के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी पर गहरी चिंता जताई है। 11 जनवरी को दर्ज हुआ था मामला रिपोर्ट के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365-बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि सतीश मरियम का अपहरण 10 और 11 जनवरी की रात के बीच हुआ। उसके पिता दिहाड़ी मजदूर बशारत मसीह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने अली हैदर गुलजार को कुछ अज्ञात साथियों के साथ नाबालिग लड़की को जबरन गाड़ी में ले जाते देखा था। बशारत मसीह ने एचआरएफपी टीम को बताया कि पुलिस ने शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है। बताया गया कि यह घटना तब हुई जब सतीश की मां शाहनाज बीबी एड़ी में फ्रैक्चर के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। परिवार के अनुसार, सतीश घर के काम के लिए बाहर गई थी, तभी उसे जबरन उठा लिया गया। कानून प्रवर्तन अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने और कराची में लड़की के होने के दावों के बावजूद, परिवार का आरोप है कि उसे ढूंढने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। 22 जनवरी 2026 को अपहरण के मामले को आगे बढ़ाने के लिए परिवार के घर में कई व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर घुसपैठ की गई, धमकियां दी गईं और उन्हें डराया-धमकाया गया, जिसके बाद दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 452, 506, 148 और 149 के तहत घर में जबरन घुसने, आपराधिक धमकी और गैरकानूनी जमावड़े से जुड़े आरोप लगाए गए। लड़की ने कबूल कर लिया है इस्लाम रिपोर्ट के अनुसार, मामला तब और गंभीर हो गया जब कथित अपहरणकर्ता ने दावा किया कि नाबालिग लड़की ने इस्लाम कबूल कर लिया है और शादी भी कर ली है। पीड़िता के परिवार का कहना है कि सतीश के बयान दर्ज किए गए थे और 28 जनवरी को चिचावतनी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नूर मोहम्मद दोथर के समक्ष हुई अदालती सुनवाई में अपहरणकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया गया। इसमें माता-पिता को बेटी से मिलने की इजाजत नहीं दी गई और कानूनी जानकारी के बिना कार्यवाही की गई। 3 फरवरी 2026 को एचआरएफपी कार्यालय में बोलते हुए सतीश के माता-पिता ने न्याय की अपनी मांग दोहराई। सतीश की मां शाहनाज बीबी ने कहा कि वह घर पर अकेली है, स्वास्थ्य खराब होने के कारण बेटी की रक्षा नहीं कर पा रही है और लगातार मिल रही धमकियों से परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। माता-पिता का कहना है कि सतीश नाबालिग है, इसलिए कानूनी रूप से न तो विवाह की सहमति दे सकती है और न ही धर्म परिवर्तन कर सकती है। सुरक्षा की मांग ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने अल्पसंख्यक नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह से सुरक्षा, पीड़ित परिवारों द्वारा झेली जा रही धमकियों व उत्पीड़न, बिना पूर्ण पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व के कानूनी कार्यवाही तथा नाबालिग की सुरक्षा व कल्याण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, एचआरएफपी अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सतीश मरियम के माता-पिता को उनके दौरे के दौरान आश्वासन दिया कि हम सतीश मरियम और उनके परिवार के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं। हम संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, नाबालिग के अधिकारों की रक्षा करने और परिवार को उत्पीड़न व धमकियों से सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हैं।  

बांग्लादेश चुनाव में तनाव का माहौल, कई बूथों पर हिंसक घटनाएं; महिला एजेंट्स ने लगाए उत्पीड़न के आरोप

ढाका  बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग संपन्न हो गई है। कड़ी सुरक्षा और लोगों में भारी उत्साह के बीच 299 सीटों पर वोट डाले गए। हालांकि, वोटिंग के दौरान भारी हिंसा और पोलिंग बूथों पर महिला एजेंट्स के साथ बदतमीजी का भी मामला सामने आया है। देश भर के 42,659 पोलिंग बूथों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक वोटिंग हुई। बांग्लादेशी मीडिया की ओर से जारी साझा जानकारी के अनुसार, शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के बाद चुनाव टाल दिया गया है। 299 सीटों पर कुल 127,298,522 वोटर वोट डालने के लिए उपयुक्त थे। इनमें से 64,620,077 पुरुष वोटर, 62,677,232 महिला वोटर और 1,213 थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं। अगर कुल 300 सीटों की बात करें तो वोटरों की कुल संख्या 127,711,899 है। चुनाव आयोग की ओर से बांग्लादेशी मीडिया को बताया गया कि दोपहर दो बजे तक 48 फीसदी वोटिंग हुई। निर्दलीय उम्मीदवार तस्नीम जारा ने आरोप लगाया कि ढाका-9 चुनाव क्षेत्र में कई जगहों पर महिला पोलिंग एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है और पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। जारा ने खिलगांव मॉडल कॉलेज पोलिंग सेंटर का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पोलिंग एजेंट्स, खासकर महिलाओं को, कई सेंटरों में घुसने की कोशिश करते समय रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पोलिंग एजेंट्स को अलग-अलग बहानों से पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है, और महिला एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है।” जारा ने आरोप लगाया कि पोलिंग बूथों के अधिकारी मनमाने नियम बनाकर रुकावटें पैदा कर रहे हैं। महिला एजेंट्स को अंदर जाने से रोका गया, सेंटर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, या उन्हें अलग-अलग निर्देश दिए गए। बता दें कि इससे पहले भी बांग्लादेश की निर्दलीय महिला उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें परेशानी हो रही है। महिलाओं को चरित्र हनन या धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दो पोलिंग बूथ, गोपालगंज और मुंशीगंज में धमाके की जानकारी भी सामने आई।

नरवणे की किताब विवाद में नया मोड़, लीक के पीछे साजिश की आशंका; प्रकाशक से 15 सवालों की सूची

नई दिल्ली पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब लीक मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छानबीन तेज कर दी है। इस सिलसिले में प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस 15 सवालों के जवाब जानना चाहती है। स्पेशल सेल तकनीकी सबूतों के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि यह पूरी घटना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। कोई आपराधिक साजिश तो नहीं? पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पेशल सेल की छानबीन अब इस बात पर फोकस है कि क्या पांडुलिपि के कथित लीक के पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं थी। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नरवणे की किताब के कथित लीक की जांच में आपराधिक साजिश के आरोप भी जोड़ दिए हैं। 15 सवालों के जवाब चाह रही स्पेशल सेल पुलिस सूत्रों ने बताया कि स्पेशल सेल ने पेंगुइन इंडिया को नोटिस जारी कर 15 अहम सवालों के जवाब मांगे थे। जांच एजेंसी ने कंपनी से पांडुलिपि की हैंडलिंग, डिजिटल और फिजिकल एक्सेस, एडिटिंग प्रक्रिया, प्रिंटिंग से पहले की सुरक्षा व्यवस्था और ड्राफ्ट कॉपी तक किन-किन लोगों की पहुंच थी, जैसे बिंदुओं पर जानकारी तलब की थी। पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ वहीं जांच टीम ने पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से विस्तृत पूछताछ की है। कंपनी के प्रतिनिधि पूछताछ के लिए पेश हुए। उन्होंने कुछ सवालों के जवाब जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं। कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है। स्पेशल सेल अब पेंगुइन इंडिया द्वारा दिए गए जवाबों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। डिजिटल ट्रेल की भी जांच जांच में इस सवाल का भी जवाब तलाशा जा रहा है कि क्या यह घटना किसी आंतरिक लापरवाही का नतीजा है। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। नहीं प्रकाशित की पुस्तक- पेंगुइन इंडिया गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकसभा में इसके कुछ अंश का जिक्र करते हुए सरकार की घेरेबंदी की थी। इसके बाद पुस्तक को लेकर विवाद बढ़ गया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कहा कि हम स्पष्ट कर रहे हैं कि पुस्तक का प्रकाशन नहीं हुआ है। पुस्तक की कोई भी प्रति प्रिंट या डिजिटल रूप में जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। फिर कैसे लीक हो गए बुक के अंश? ऐसे में सवाल उठता है कि जब किताब प्रकाशित नहीं हुई तो इसके अंश आम कैसे हो गए? पुलिस सूत्रों ने बताया कि अप्रकाशित पांडुलिपि कथित तौर पर कैसे प्रसारित हुई? इसके जवाब तलाशे जा रहे हैं।

निपाह अलर्ट के बीच पहली मौत, टेस्ट निगेटिव लेकिन हार्ट अटैक से नर्स का निधन

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में निपाह वायरस इंफेक्शन से जूझ रही 25 साल की एक नर्स की गुरुवार को मौत हो गई। हाल के इतिहास में पश्चिम बंगाल में इस वायरस से यह पहली मौत है। निपाह वायरस से देश में पहली मौत, टेस्ट निगेटिव के बावजूद नर्स की हार्ट अटैक से चली गई जान निपाह वायरस से देश में पहली मौत का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के एक प्राइवेट अस्पताल में निपाह वायरस इंफेक्शन से जूझ रही 25 साल की एक नर्स की गुरुवार (12 फरवरी) को मौत हो गई। हाल के इतिहास में पश्चिम बंगाल में इस वायरस से यह पहली मौत है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि नर्स, उन दो लोगों में एक थीं, जो निपाह वायरस से संक्रमित हुए थे और कई हफ़्तों से इलाज करा रही थी। हालांकि, हाल ही में उसका वायरस टेस्ट नेगेटिव आया था, बावजूद इसके उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी और गुरुवार को हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नर्स को जनवरी के अंत में जीवन-रक्षक प्रणाली से हटाया गया था। उन्होंने कहा, ”आज दोपहर हृदयगति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि वह निपाह संक्रमण से उबर चुकी थीं, लेकिन वह कई जटिलताओं से ग्रस्त थीं।” अधिकारी ने बताया कि नर्स लंबे समय तक कोमा में थीं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई और बाद में उन्हें फेफड़ों का संक्रमण हो गया था। उन्होंने बताया कि वह उन दो लोगों में से एक थीं जिनके पिछले महीने निपाह से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। दूसरा संक्रमित व्यक्ति पुरुष नर्स है और ठीक हो चुका है।

‘संविधान नहीं देता मजबूरी की इजाजत’ — वंदे मातरम् फैसले पर मदनी ने उठाए सवाल

नई दिल्ली वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में बजाने को अनिवार्य घोषित किए जाने के फैसले को जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने धर्म की स्वतंत्रता पर खुला हमला बताया है। केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में इसके सभी अंशों की धुन बजाने को अनिवार्य कर दिया है। मदनी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अत्यंत दुखद तथा नागरिकों पर जबरन थोपा गया बताया है। धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास मदनी ने कहा कि यह न केवल एक पक्षपातपूर्ण फैसला है बल्कि नागरिकों की उस धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास है जो देश के संविधान ने उन्हें प्रदान की है। उन्होंने कहा कि अब यह दुखद सच्चाई पूरी तरह सामने आ गई है कि इन लोगों को देश की प्रगति और जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है, वे हर समय चुनावी मोड में रहते हैं। उनका हर काम और हर फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि उससे चुनाव में कितना लाभ मिल सकता है। हम केवल एक अल्लाह की इबादत करते हैं मौलाना मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् का विवाद बहुत पुराना है। इससे पहले दिसंबर 2025 में जब इसे लेकर संसद में चर्चा हुई थी तब भी हमने अपने एक बयान के माध्यम से अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। हमें किसी के वंदे मातरम् गाने या किसी समारोह में इसकी धुन बजाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हम मुसलमान इस गीत को इसलिए नहीं गा सकते क्योंकि हम केवल एक अल्लाह की इबादत करते हैं और अपनी इस इबादत में किसी और को शामिल नहीं कर सकते। हर धर्म के अपने आदेश और नियम होते हैं उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् की विषयवस्तु शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है और इसके एक अंतरे में देश को दुर्गा माता से उपमा देकर उसकी उपासना के लिए शब्दों का प्रयोग किया गया है। हर धर्म के अपने आदेश और नियम होते हैं जिन पर अमल करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता और इसी कारण हमारे संविधान में भी अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। ऐसे में किसी विशेष नागरिक या नागरिकों पर किसी विशेष विचारधारा को अपनाने, उसका उच्चारण करने या उसे मानने के लिए मजबूर करना संविधान के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का भी यह निर्णय है कि किसी भी नागरिक को राष्ट्रगान या किसी ऐसे गीत को गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके धार्मिक विश्वास के विरुद्ध हो। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम एक अलग बात है और उसकी पूजा दूसरी बात। मुसलमानों को इस देश से कितनी मोहब्बत है, इसके लिए उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। देशभक्ति का संबंध दिल की निष्ठा और कर्म से मदनी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद के बुजुर्गों की बेमिसाल कुर्बानियां और विशेष रूप से देश के विभाजन के विरोध में जमीयत की कोशिशें दिन के उजाले की तरह स्पष्ट हैं। आजादी के बाद भी देश की एकता और अखंडता के लिए उनकी जद्दोजहद को भुलाया नहीं जा सकता। हमने हमेशा कहा है कि देशभक्ति का संबंध दिल की निष्ठा और कर्म से है, न कि नारों से। टैगोर ने नेहरू को सलाह दी थी आजादी से पहले का ऐतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद है कि 26 अक्टूबर 1937 को रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र में सलाह दी थी कि वंदे मातरम् के प्रारंभिक दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए क्योंकि शेष पंक्तियां एकेश्वरवादी धर्मों की मान्यताओं से टकराती हैं। फलस्वरूप 19 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस की वर्किंग कमेटी ने निर्णय लिया कि इसके केवल दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए। पूरे गीत को थोपने की कोशिश संसद में हुई पूरे दिन की चर्चा में भी कांग्रेस सहित अन्य दलों के सदस्यों ने इसी बात पर जोर दिया था, लेकिन अब एक आदेश के माध्यम से पूरे गीत को नागरिकों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे देशभक्ति की भावना नहीं बल्कि राजनीति काम कर रही है। वर्तमान सरकार जब भी किसी मुद्दे पर घिरती है तो जानबूझकर कोई न कोई विवाद खड़ा करने की कोशिश करती है ताकि जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाया जा सके, वंदे मातरम् संबंधी अधिसूचना इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने अंत में कहा कि यह देश को बांटने वाली राजनीति है। हर हाल में सत्ता बनाए रखने का यह जुनून देश की शांति और एकता को नष्ट करने वाला ही नहीं है बल्कि उस संविधान को भी पैरों तले रौंदता है जिस पर हमारे देश के महान लोकतंत्र की नींव टिकी हुई है।  

तानाशाह का नया दांव या उत्तराधिकारी तय? किम की बेटी की बढ़ती मौजूदगी से उठे बड़े सवाल

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया के तानाशह किम जोंग उन अपनी बेटी किम जू ऐ को उत्तराधिकारी के रूप में नामित करने की प्रक्रिया में बहुत आगे बढ़ चुका है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (एनआईएस) ने गुरुवार को संसद की एक बंद कमरे की ब्रीफिंग में इस बात की जानकारी दी है। एनआईएस ने बताया कि किम जू ऐ अब ‘उत्तराधिकारी के रूप में नामित होने के चरण’ में पहुंच चुकी हैं। एजेंसी के अनुसार, पहले उन्हें ‘उत्तराधिकारी प्रशिक्षण में’ बताया जाता था, लेकिन अब भाषा में बदलाव आया है, जो प्रक्रिया के अधिक ठोस और सुनियोजित होने का संकेत देता है। सांसद ली सियोंग-क्वेउन ने ब्रीफिंग के बाद पत्रकारों से कहा कि एनआईएस ने कहा कि किम जू ऐ विभिन्न प्रमुख सैन्य और प्रतीकात्मक कार्यक्रमों में अपने पिता के साथ दिखाई दी हैं, जैसे कोरियन पीपुल्स आर्मी की स्थापना वर्षगांठ, कुमसुसान पैलेस ऑफ द सन का दौरा और वायु सेना दिवस समारोह। साथ ही, निरीक्षण के दौरान नीतिगत मुद्दों पर उनके विचार व्यक्त करने के संकेत मिले हैं। एजेंसी ने किम की बेटी की सार्वजनिक उपस्थिति, पिता के ठीक बगल में प्रमुख स्थिति, सरकारी मीडिया कॉवरेज और व्यवहार को उत्तराधिकार की तैयारी का प्रमाण बताया है। दरअसल, पिछले दो वर्षों में सरकारी मीडिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च, सैन्य परेड और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों की बैठकों में बार-बार दिखाया है। एनआईएस का मानना है कि किम जू ऐ अब डी फैक्टो दूसरे सबसे उच्च पद पर हैं और नीतिगत मामलों पर इनपुट दे रही हैं। एजेंसी इस महीने के अंत में होने वाली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस पर नजर रखेगी, जहां उनकी भागीदारी, प्रोटोकॉल स्तर, कोई आधिकारिक उपाधि या पार्टी नियमों में संशोधन उत्तराधिकार की पुष्टि कर सकता है। बता दें कि किम जू ऐ की पहली अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पिछले साल चीन की यात्रा में देखी गई थी, जहां वह अपने पिता के साथ बुलेटप्रूफ ट्रेन से बीजिंग पहुंचीं और एक सैन्य परेड में शामिल हुई थी। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया में 1940 के दशक से किम परिवार का वंशानुगत शासन है। किम जोंग उन को 2011 में उनके पिता किम जोंग इल की मृत्यु से पहले उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। किम जू ऐ को माना जाता है कि वह किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल जू की संतान हैं, जिनमें दो या तीन बच्चे हो सकते हैं, लेकिन प्योंगयांग ने अन्य बच्चों की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।  

पीयूष गोयल ने दी बड़ी खबर, US टेक्सटाइल पर लगा सकता है 0% टैरिफ

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन की ओर से भारत को एक के बाद एक राहत मिल रही है. पहले भारत-अमेरिका डील की फैक्टशीट में बड़े बदलाव करते हुए कुछ शर्तों में छूट दी गई, तो अब एक दिन बाद ही और रियायतें मिलने की संभावना नजर आ रही हैं. इस संबंध में खुलासा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने किया है. गुरुवार को उन्होंने कहा कि भारत के कपड़ा सेक्टर को और भी लाभ मिलेंगे, जो अमेरिका द्वारा बांग्लादेश को दिए गए हैं.  भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने संकेत दिया कि बांग्लादेश की तरह, भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को भी अंतिम समझौते पर साइन होने के बाद शून्य टैरिफ (Zero US Tariff) की सुविधा मिलने की उम्मीद है. उनके इस बयान से भारत के कपड़ा निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते ने इस बिजनेस के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.  कांग्रेस पर ऐसे साधा निशाना पीयूष गोयल का इस संबंध में बयान ऐसे समय में दिया है, जबकि India-US Trade Deal को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी वार-पलटवार का सिलसिला जारी है. बता दें कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह समझौता डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण है. अब Piyush Goyal ने उनके बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने संसद में एक और झूठ फैलाया कि व्यापार समझौते से भारत की तुलना में बांग्लादेश को अधिक लाभ मिला है. बांग्लादेश की तरह भारत को भी लाभ वाणिज्य मंत्री ने कांग्रेस कहा कि जिस प्रकार बांग्लादेश को यह सुविधा मिली है कि अगर अमेरिका से कच्चा माल खरीदा जाता है और उसे संसाधित करके कपड़ा तैयार करके फिर इसका निर्यात किया जाता है, तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगता है. उन्होंने कहा कि भारत को भी यही सुविधा मिलेगी. ‘अंतिम समझौते में ये शामिल होगा’ इस संबंध में विस्तार से बताते हुए पीयूष गोयल ने साफ किया कि यह पार्ट पिछले सप्ताह दोनों देशों द्वारा जारी किए गए अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क में शामिल नहीं हो सकता है, लेकिन यह अंतिम समझौते में शामिल होगा. उन्होंने कहा कि अभी हमारा व्यापार समझौता तैयार हो रहा है और जब ये अंतरिम समझौता अंतिम रूप ले लेगा, तब आपको इसकी हर बारीकी समझ में आने लगेगी. भारत के लिए कैसे बंपर फायदा?  भारत के लिए पीयूष गोयल द्वारा दिया गया ये बयान इसलिए भी बेहद खास हो जाता है, क्योंकि अंतिम समझौते में इसे शामिल करने से टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी. बता दें कि अमेरिका भारत के कपड़ा निर्यात के लिए सबसे बड़ा बड़ा बाजार है और देश से होने वाले सभी वस्त्र और परिधान शिपमेंट का 30% हिस्सा अमेरिका पहुंचता है. पिछले सप्ताह, भारत और अमेरिका के बीच डील के बाद कपड़ा निर्यातकों में खुशी की लहर दौड़ गई, क्योंकि ट्रंप ने टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था. हालांकि, इस बीच अमेरिकी कपास से बने बांग्लादेशी वस्त्रों के निर्यात पर शून्य शुल्क की खबर आ गई थी. इससे चिंता बढ़ गई थी कि इस वजह से अगर बांग्लादेशी कपड़ों पर शुल्क नहीं लगेगा, तो भारतीय कपड़ों पर 18% शुल्क लगने के बाद भी उसे प्रतिस्पर्धात्मक लाभ नहीं हासिल होगा.

बांग्लादेश में बढ़ा तनाव: चुनावी माहौल के बीच हिंदू युवक की नृशंस हत्या से सनसनी

ढाका    बांग्लादेश में आम चुनाव के दिन वोटिंग जारी है, लेकिन उससे ठीक पहले हिंदू अल्पसंख्यक पर हुई एक और हत्या ने देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है। मौलवीबाजार जिले में बुधवार को 28 वर्षीय हिंदू युवक रतन साहूकार का शव संदिग्ध हालात में बरामद किया गया। मृतक के हाथ-पैर बंधे हुए थे और शरीर पर गहरे जख्मों के निशान मिले हैं। मौलवी बाजार से मिली लाश रतन साहूकार चंपा इलाके के चाय बागानों में काम करता था। बुधवार सुबह करीब 10 बजे उसका शव मिलने से इलाके में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शव पर चोटों से खून बह रहा था, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई। रतन के सहकर्मियों ने पुलिस को बताया कि जिस तरह से उसके हाथ-पैर बांधे गए और शरीर पर चोटें हैं, उससे यह सुनियोजित हत्या प्रतीत होती है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हत्या चुनाव से जुड़ी हिंसा है या किसी अन्य कारण से हुई।   पहले भी हो चुकी  ऐसी वारदातें यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले मैमनसिंह जिले में 62 वर्षीय हिंदू व्यापारी सुशेन चंद्र सरकार की भी धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उनकी दुकान में ही हत्या कर शटर बंद कर दिया और नकदी लूटकर फरार हो गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। शेख हसीना के भारत आने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार पर कट्टरपंथी तत्वों को खुली छूट देने के आरोप लगते रहे हैं।  चुनावी माहौल और सरकार की अपील आज बांग्लादेश में सुबह 7:30 बजे से वोटिंग जारी है, जो शाम 4:30 बजे तक चलेगी। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से संयम बरतने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील की है। लेकिन चुनाव से पहले हुई यह हत्या उनकी अपीलों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

वैष्णो देवी में नियमों का उल्लंघन? अंदर का वीडियो वायरल, शिखा के खिलाफ FIR

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में स्थित माता वैष्णो देवी का भवन देश के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है. लेकिन हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर ने इस अभेद्य किले जैसी सुरक्षा को चुनौती दे दी है. शिखा नाम की एक कंटेंट क्रिएटर ने माता वैष्णो देवी भवन के अंदर का वीडियो शूट किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह वीडियो किसी मोबाइल से नहीं, बल्कि एक आधुनिक कैमरा वाले चश्मे (Spy Camera Glasses) से बनाया गया है. इस घटना ने श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीवीआईपी (VVIP) को भी नहीं अंदर फोटो खींचने की इजाजत माता वैष्णो देवी की पवित्र तीनों पिंडियों के दर्शन के लिए प्रधानमंत्री से लेकर देश के बड़े से बड़े दिग्गज नेता और फिल्मी हस्तियां पहुंचती हैं. लेकिन सुरक्षा और मर्यादा के नियमों के कारण किसी को भी भवन के अंदर मोबाइल या कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं होती. श्राइन बोर्ड के सख्त निर्देशों के मुताबिक भवन परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बावजूद एक आम कंटेंट क्रिएटर का कैमरा लेकर वहां तक पहुंच जाना यह बताता है कि चेकिंग के दौरान कितनी बड़ी लापरवाही हुई है. कैमरा वाले चश्मे ने कैसे दी सुरक्षा घेरे को मात? वायरल वीडियो में भवन के अंदर के दृश्य साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं. कंटेंट क्रिएटर ने चालाकी दिखाते हुए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. उसने अपनी आंखों पर कैमरा वाला चश्मा पहन रखा था, जिसे सामान्य चश्मा समझकर सुरक्षाकर्मियों ने नजरअंदाज कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जब सोशल मीडिया पर बवाल मचा, तो शिखा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से उस वीडियो को डिलीट कर दिया. हालांकि तब तक यह वीडियो हजारों बार देखा जा चुका था और सुरक्षा में लगी सेंध उजागर हो चुकी थी. श्राइन बोर्ड का एक्शन और एफआईआर (FIR) की कार्रवाई इस गंभीर चूक पर प्रतिक्रिया देते हुए माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है. बोर्ड ने साफ कहा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच शुरू हो चुकी है. श्राइन बोर्ड इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस हरकत में बोर्ड के किसी कर्मचारी की मिलीभगत थी. बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी इसमें संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

माल्या के खिलाफ हाईकोर्ट का कड़ा संदेश: भगोड़ा टैग पर सुनवाई के लिए भारत लौटना अनिवार्य

मुंबई  बॉम्बे हाई कोर्ट ने कारोबारी विजय माल्या को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक माल्या भारत वापस नहीं लौटते, तब तक अदालत उनकी  याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी। इस याचिका में उन्होंने भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओ) के प्रावधानों को चुनौती दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति खुद को न्यायिक प्रक्रिया से दूर रखे हुए है, उसे अदालत से राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।  माल्या को पहले बतना होगा वह भारत लौटेंगे या नहीं मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा कि माल्या को पहले यह स्पष्ट करना होगा कि वह भारत लौटेंगे या नहीं। कोर्ट ने कहा कि आपको (माल्या) वापस आना होगा…अगर आप वापस नहीं आ सकते तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। माल्या की दो याचिकाएं  2016 से ब्रिटेन में रह रहे माल्या ने उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दायर की हैं, एक में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती दी गई है और दूसरी में 2018 के अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है।  18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई  पीठ ने याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख तय करते हुए कहा कि वह माल्या को यह स्पष्ट करने का एक और अवसर दे रही है कि क्या वह भारत लौटने के लिए तैयार है। माल्या अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं अदालत ने कहा कि हमें यह दर्ज करना पड़ सकता है कि आप अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं। आप कार्यवाही का लाभ नहीं उठा सकते। आपके साथ निष्पक्षता बरतते हुए, हम याचिका खारिज नहीं कर रहे हैं बल्कि आपको एक और अवसर दे रहे हैं। अदालत ने दिसंबर 2025 में पिछली सुनवाई में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था कि वह याचिका पर तभी सुनवाई करेगी जब माल्या भारत लौट आएंगे और उसने उनके वकील से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। आज बेंच ने कहा कि कारोबारी को एक हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वह भारत लौटेगा या नहीं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर ने कहा कि आप कब आएंगे? आप (माल्या) पहले ही यह तर्क दे चुके हैं कि आपको अदालत में शारीरिक उपस्थिति के बिना सुनवाई का अधिकार है। लेकिन पहले एक हलफनामा दाखिल करें जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा हो। शारीरिक उपस्थिति के बिना भी याचिकाओं पर हो सकती है सुनवाई  माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने कहा कि ऐसे फैसले मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि याचिकाकर्ता की शारीरिक उपस्थिति के बिना भी ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई और फैसला किया जा सकता है। एफईओ घोषित होने के बाद माल्या ने अधिनियम के प्रावधानों को दी चुनौती सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि माल्या ने एफईओ घोषित किए जाने के बाद एफईओ अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती दी है। मेहता ने दलील दी कि मल्ल्या को पहले भारत आना चाहिए, उसके बाद ही यह तय किया जा सकता है कि वे भुगतान के लिए जिम्मेदार हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि मल्ल्या पहले भारत आएं, फिर देखा जाएगा कि वे देनदार हैं या नहीं। वे देश के कानून पर अविश्वास नहीं जता सकते। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि लंदन में प्रत्यर्पण के खिलाफ मल्ल्या द्वारा शुरू की गई कार्यवाही अंतिम चरण में है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रत्यर्पण पास आता देख मल्ल्या ने भारत में अपने ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। मेहता ने यह भी दलील दी कि अपने हलफनामे में मल्ल्या ने कहा है कि बैंकों द्वारा उनसे धन की मांग करना गलत है। माल्या के ऊपर कौन-कौन से आरोप? वहीं, मल्ल्या की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि कारोबारी की भारत स्थित संपत्तियां पहले ही प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अटैच की जा चुकी हैं। गौरतलब है कि जनवरी 2019 में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने मल्ल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। उन पर कई बैंकों के ऋण चूक और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। मल्ल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर चले गए थे। 

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