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शिवराज ने अपने आने वाले 100 दिन के काम को लेकर अधिकारियों को खास दिशा निर्देश दिए

Congress showed strength on Amarwada seat, Nakul Nath reached the fields during campaigning.

 नईदिल्ली शिवराज सिंह चौहान कृषि मंत्रालय का प्रभार संभालते ही एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. शिवराज ने अपने आने वाले 100 दिन के काम को लेकर अधिकारियों को खास दिशा निर्देश दिए हैं. शिवराज ने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें 100 दिनों की कृषि कार्य योजना के संबंध में प्लान तैयार कर लिया गया.     इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि वे अपना पूरा फोकस किसानों की उन्नति के लिए करें, ताकि देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के निरंतर विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी की संकल्पना के मुताबिक तेजी से काम किया जा सके. साथ ही कृषि क्षेत्र की मजबूती को लेकर शिवराज ने निर्देश दिए. शिवराज ने अफसरों को दिए दिशा-निर्देश! केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के दुख दर्द को कम करने के लिए सशक्त कदम उठाने के भी निशा निर्देश दिए हैं. कृषि मंत्री शिवराज ने बैठक में कहा कि किसान भाइयों-बहनों को गुणवत्तापूर्ण खाद बीज की उपलब्धता प्राथमिकता से सुनिश्चित की जानी चाहिए. इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि इस संबंध में उन्हें कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए. चौहान ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ना चाहिए, साथ ही हम अपनी घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के अलावा दुनिया के अन्य देशों की भी जरूरत अनुसार गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद निर्यात कर सके ऐसी ठोस कार्ययोजना पर अमल करना चाहिए. शिवराज ने अधिकारियों को साफ कहा कि अपना पूरा फोकस किसान कल्याण पर करें. गौरतलब है कि 18 साल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को अब केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिल चुकी है. कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते ही सियासी पंडित उम्मीद लगा रहे हैं कि शिवराज कृषि क्षेत्र के उद्धार के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. साथ ही किसानों की समस्याओं को भी सुलझाएंगे. फिलहाल तो शिवराज फुल फॉर्म में नजर आ रहे हैं.

बड़ा हादसा… 23 यात्रियों को लेकर जा रहा वाहन अलकनंदा नदी में गिरा, कई मौतों की आशंका

रूद्रप्रयाग उत्तराखंड में रूद्रप्रयाग (Rudraprayag) के पास रैंतोली में बद्रीनाथ हाइवे पर यात्रियों को लेकर जा रहा टेंपो ट्रैवलर वाहन अलकनंदा नदी (Alaknanda river) में गिर गया. इस घटना में 12 यात्रियों के मौके पर ही मारे जाने की आशंका है. वहीं 7 यात्री घायल बताए जा रहे हैं. हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी है. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं. रुद्रप्रयाग से कुछ पहले ये हादसा (accident) हुआ है. यहां वाहन सीधे गहरी खाई में गिरते हुए अलकनंदा नदी में जाकर समा गया. वाहन जैसे ही नीचे गिरा तो यात्रियों में चीख-पुकार मच गई. आसपास के लोगों की नजर पड़ी तो तुरंत मौके पर पहुंचे और सूचना पुलिस को दी. घटना के बारे में जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और लोगों की मदद से रेस्क्यू शुरू कराया. हादसे का शिकार हुआ वाहन दिल्ली के यात्रियों को लेकर जा रहा था. ये लोग दिल्ली से चोपता तुंगनाथ जा रहे थे. इस वाहन में ड्राइवर सहित 23 लोग सवार थे. आशंका जताई जा रही है कि घटना में कई मौतें भी हो सकती हैं, लेकिन अभी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है. घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक ने क्या बताया? घटना के संबंध में रुद्रप्रयाग की एसपी डॉ. विशाखा अशोक भदाणे ने कहा कि रुद्रप्रयाग में रैंतोली के पास एक टेम्पो ट्रैवलर के हाइवे से खाई में गिरने की सूचना प्राप्त हुई है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घटना का जायजा लिया. फिलहाल स्थानीय लोगों, जिला पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, जिला आपदा प्रबंधन व जल पुलिस के द्वारा संयुक्त रूप से रेस्क्यू किया जा रहा है. घटना को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने जताया दुख घटना को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दुख व्यक्त किया है. उन्होंने लिखा- जनपद रुद्रप्रयाग में टेम्पो ट्रैवलर के दुर्घटनाग्रस्त होने की दुखद खबर मिली है. स्थानीय प्रशासन व SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं. सीएम धामी ने आगे लिखा- घायलों को नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर उपचार के लिए भेज दिया गया है. जिलाधिकारी को घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगतों की आत्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें. बाबा केदार से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं.  

लाचुंग में बारिश का कहर, तीन दिन में नौ लोगों की मौत; लाचुंग में 1200 से अधिक पर्यटक फंसे

 गंगटोक  सिक्किम के मंगन जिले के लाचुंग में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण सड़क अवरुद्ध होने से 1,200 से अधिक घरेलू और 15 विदेशी पर्यटक फंसे हुए हैं। विदेशी पर्यटकों में थाईलैंड के 2, नेपाल के 3 और बांग्लादेश के 10 पर्यटक शामिल हैं। सभी पर्यटक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें अपने जगह बने रहने और कोई जोखिम लेने से बचने की सलाह दी है। भोजन की कमी का तत्काल कोई खतरा नहीं है, क्योंकि सभी फंसे हुए व्यक्तियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त आपूर्ति और राशन उपलब्ध है। सिक्किम के मुख्य सचिव के कार्यालय ने मौसम अनुकूल होने पर पर्यटकों की संभावित एयरलिफ्टिंग के लिए भारत सरकार के साथ चर्चा शुरू कर दी है। वैकल्पिक रूप से, यदि आवश्यक हो तो सड़क मार्ग से निकासी की व्यवस्था की जाएगी। सिक्किम का पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग पर्यटकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए मंगन जिले में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और स्थानीय पर्यटन हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। अधिकारियों की ओर से संकट की घड़ी में सभी फंसे हुए पर्यटकों को सहायता का आश्वासन दिया जा रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण केवल लाचुंग का इलाका प्रभावित है, जबकि यात्रा के लिए सिक्किम राज्य खुला और सुरक्षित है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पूर्वी सिक्किम के लोअर टिंटेक वार्ड में भूस्खलन से कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मार्चक में सिंगताम-डिक्चू सड़क की हालत भी चिंताजनक है।

PM मोदी ने जी7 सम्मेलन में राष्ट्रपति बाइडेन और प्रधानमंत्री ट्रूडो से अलग-अलग बातचीत की

Press Conference: BJP is anti-village and anti-farmer, took loan and indulged in corruption: Jeetu Patwari

अपुलिया जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली दौरे से भारत के लिए रवाना हो गए हैं. जी7 शिखर सम्मेलन के इतर इटली में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और कनाडा के समकक्ष जस्टिन ट्रूडो से हुई उनकी मुलाकात काफी चर्चा में रही. बाइडेन के साथ मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बाइडेन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है. भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे. मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “जी7 शिखर सम्मेलन में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात की.” मुलाकात के दौरान मोदी और ट्रूडो दोनों एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन करते देखे गए. हालांकि तुरंत यह पता नहीं चल पाया है कि मोदी और ट्रूडो के बीच क्या बातचीत हुई. विदेश सचिव का बयान विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बुधवार को कहा था कि कनाडा के साथ भारत का मुख्य मुद्दा कनाडा द्वारा चरमपंथ और हिंसा की वकालत करने वाले भारत विरोधी तत्वों को राजनीतिक पनाह प्रदान करना रहा है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार कनाडा को अपनी “गहरी चिंताओं” से अवगत कराते रहा है. और नई दिल्ली को उम्मीद है कि ट्रूडो सरकार उन तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी. दोनों देशों के रिश्तों में इस वजह से आई खटास पिछले साल सितंबर में ट्रूडो द्वारा ब्रिटिश कोलंबिया में निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की “संभावित” संलिप्तता के आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. नई दिल्ली ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका” और “प्रेरित” बताकर खारिज कर दिया था. भारत कहता रहा है कि दोनों देशों के बीच मुख्य मुद्दा यह है कि कनाडा कनाडा की धरती से संचालित खालिस्तान समर्थक तत्वों को बेखौफ जगह दे रहा है.  भारत द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए निज्जर की पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या की जांच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) द्वारा की जा रही है. ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए आरोपों के कुछ दिनों बाद, भारत ने कनाडा से देश में अपनी राजनयिक उपस्थिति को कम करने के लिए कहा ताकि समानता सुनिश्चित की जा सके. इसके बाद कनाडा ने भारत से 41 राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को वापस बुला लिया था. जेलेंस्की से भी मिले पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से भी मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव प्रयास करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि शांति का रास्ता “बातचीत और कूटनीति” से होकर जाता है. ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने और पीएम मोदी ने शांति शिखर सम्मेलन और इसके एजेंडे के मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने इसमें उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया. जापान और फ्रांसीसी पीएम से भी मिले मोदी पीएम मोदी ने भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ भी चर्चा की. इसके अलावा पीएम मोदी ने इटली के अपुलिया में जी -7 शिखर सम्मेलन के मौके पर जापानी पीएम फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक की और भारत में लक्षित पांच ट्रिलियन येन के निवेश के साथ मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर चर्चा की. पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, ‘अपुलिया में जी7 शिखर सम्मेलन में बहुत ही उपयोगी दिन रहा. वैश्विक नेताओं से बातचीत की और विभिन्न विषयों पर चर्चा की. साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य ऐसे प्रभावशाली समाधान तैयार करना है जिससे वैश्विक समुदाय को लाभ हो और भावी पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण हो. मैं इटली के लोगों और सरकार को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं.’

पत्रकार रजत शर्मा ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ HC में दायर किया मानहानि का मुकदमा

नई दिल्ली पत्रकार रजत शर्मा ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पार्टी के दो प्रवक्ता रागिनी नायक और पवन खेड़ा पर मानहानि का केस किया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में यह केस दायर किया है, जिसने अंतरिम राहत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रजत शर्मा पर कांग्रेस की प्रवक्ता रागिनी नायक ने आरोप लगाया था कि उन्होंने उनको इंडिया टीवी के स्टूडियो में गाली थी। इस पर जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने रागिनी नायक के आरोपों का समर्थन किया था। इसी मामले को लेकर रजत शर्मा ने मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को अपनी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। दरअसल कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने मंगलवार को ही दिल्ली के तुगलक लेन पुलिस थाने में इंडिया टीवी के एडिटर-इन-चीफ पर केस फाइल कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि लाइव टेलिकास्ट के दौरान रजत शर्मा ने उन्हें गालियां दी थीं। रागिनी नायक ने मांग की थी कि रजत शर्मा को इस मामले में बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। हालांकि रागिनी नायक के आरोपों को इंडिया टीवी ग्रुप ने खारिज किया था। यही नहीं चैनल की ओर से नायक और कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और जयराम रमेश को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने आरोप वापस ले लें। कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप वापस न लिए जाने के बाद अब मानहानि का केस किया गया है। रागिनी नायक का कहना था कि 4 जून को चुनाव नतीजों वाले दिन लाइव डिबेट के दौरान जयराम रमेश ने बदसलूकी की थी, जब काउंटिंग के अनुसार एनडीए को 286 सीटों पर बढ़त थी और INDIA अलायंस 243 सीटों पर आगे था। रागिनी नायक ने पुलिस में रजत शर्मा के खिलाफ सेक्शन 294 और 509 के तहत केस दर्ज कराया था। रजत शर्मा पर आरोप लगाते हुए रागिनी नायक भावुक भी हो गई थीं।  

एक बार सिरिल रामफोसा फिर बने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति, जूलियस मालेमा को मिले सिर्फ 44 वोट

 केपटाउन  दक्षिण अफ्रीका की सत्तारूढ़ अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) के नेता सिरिल रामफोसा को संसद ने अगले पांच साल के लिए दोबारा राष्ट्रपति चुना है। गुरुवार को नेशनल असेंबली की पहली बैठक की अध्यक्षता करने वाले मुख्य न्यायाधीश रेमंड ज़ोंडो ने घोषणा की कि राष्ट्रपति चुनाव में रामफोसा को 283 वोट मिले, जबकि इकोनॉमिक फ्रीडम फाइटर्स के उम्मीदवार जूलियस मालेमा को 44 वोट मिले। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अपने पहले संबोधन में रामफोसा ने कहा कि उन्होंने अपने दोबारा निर्वाचन को “एक बड़ी जिम्मेदारी” के रूप में स्वीकार किया है। वह उन लोगों के साथ भी काम करेंगे जिन्होंने उनका समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि मई के अंत में हुए आम चुनावों के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के लोग अपने नेताओं से मिलकर काम करने की उम्मीद करते हैं। रामफोसा ने कहा, “अपने वोटों के माध्यम से हमारे लोग उम्मीद करते हैं कि गैर-नस्लवाद तथा गैर-लिंगवाद पर आधारित, शांति तथा न्याय पर आधारित लोकतांत्रिक समाज के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए; स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए और गरीबी, बेरोजगारी तथा असमानता की तिहरी चुनौतियों से निपटने के लिए; तथा सब के लिए समृद्धि हासिल करने के लिए सभी दल संविधान के ढांचे के भीतर एक साथ काम करेंगे।” रामफोसा (71) ने जोर देकर कहा कि कई दलों की सहमति से बनी राष्ट्रीय एकता की सरकार “दो या तीन दलों का एक बड़ा गठबंधन नहीं है”। उन्होंने कहा, “हम अब अपने लोगों द्वारा दिए गए जनादेश से यहां हैं, ताकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर सकें कि हम उन चुनौतियों का समाधान करें जिनका वे सामना कर रहे हैं। …और मैं दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के रूप में इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। “यह हमारे देश के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिसके लिए हमें अपने संवैधानिक लोकतंत्र तथा कानून के राज को मजबूत करने और अपने सभी लोगों के लिए एक दक्षिण अफ्रीका बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।” दक्षिण अफ्रीकी संविधान के तहत, नेशनल असेंबली द्वारा राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के बाद, निर्वाचित राष्ट्रपति को पांच दिन के भीतर पदभार ग्रहण करना होता है। गुरुवार को नेशनल असेंबली द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, रामफोसा 19 जून को देश की प्रशासनिक राजधानी प्रिटोरिया में शपथ लेंगे। सांसदों ने शुक्रवार को एएनसी के थोको डिडिजा को नेशनल असेंबली का स्पीकर चुना, जो पहले कृषि मंत्री रह चुके हैं। डेमोक्रेटिक अलायंस (डीए) की एनेली लोट्रिएट डिप्टी स्पीकर चुनी गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एएनसी और मुख्य विपक्षी दल डीए ने शुक्रवार को राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने के लिए एक समझौता किया, जिसमें पैट्रिऑटिक अलायंस और इंकाथा फ्रीडम पार्टी भी शामिल होगी। समझौते के तहत रामफोसा को डीए के समर्थन से फिर से राष्ट्रपति चुने जाने की पहले से उम्मीद थी। गत 29 मई को हुए आम चुनावों में एएनसी ने नेशनल असेंबली की 400 सीटों में से 159 सीटें हासिल कीं। पिछले 30 साल में पहली बार संसद के निचले सदन में उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला है।

पूरा उत्तर भारत लू की चपेट में, सौर रेडीएशनल हीट की वजह से कुछ इलाक़ों में तापमान बहुत ज़्यादा बढ़ा हुआ है

नई दिल्ली उत्तर भारत के मैदानी इलाक़ों में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है. सुबह का समय बीतते ही प्रचंड लू तापमान को बढ़ा देती है. लोगों को घर से निकलने के दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र ने कहा कि उत्तर भारत के मैदानी इलाक़ों में फिलहाल लू और गर्मी से राहत नहीं मिलेगी. दरअसल इस समय सूर्य की सीधी किरणें मैदानी इलाक़ों में धरती पर पड़ रही हैं, जिसकी वजह से तापमान में वृद्धि हो रही है. वहीं शुष्क और गर्म पछुआ हवाओं के चलने और आसमान साफ होने के कारण हो रहे सौर रेडीएशनल हीट की वजह से कुछ इलाक़ों में तापमान बहुत ज़्यादा बढ़ा हुआ है. बीकानेर-छपरा से भी ज्यादा गर्म हुआ हिमाचल का ऊना उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लू के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में कहीं-कहीं प्रचंड लू की स्थिति बनी हुई है. 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रयागराज प्रदेश में सबसे गर्म रहा. हालात ये हैं कि पहाड़ी राज्य भी लू की चपेट में हैं. हिमाचल के कई शहरों का पारा इतना बढ़ गया कि हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है. बेतहाशा गर्मी से बावजूद शिमला में अब भी सैलानी पहुंच रहे हैं. कल (14 जून) हिमाचल प्रदेश के ऊना में 43.6 डिग्री तापमान मापा गया, जो राजस्थान के बीकानेर और बिहार के छपरा और पटना से भी ज्यादा रहा. 18 जून तक राहत नहीं मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली और गंगा के तटवर्ती पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड सहित कई उत्तरी और मध्य भारतीय राज्यों में 18 जून तक लू की स्थिति रहेगी. इन क्षेत्रों के निवासियों को गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. वहीं, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भी आगे बढ़ रहा है. अनुकूल परिस्थितियों से पता चलता है कि यह अगले 4-5 दिनों के अंदर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी, गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ क्षेत्रों की तरफ मॉनसून आगे बढ़ेगा. इस प्रगति से गर्मी से बहुत राहत मिलेगी और मॉनसूनी बारिश पर निर्भर कृषि गतिविधियों को भी राहत मिलेगी. आज इन राज्यों में लू का अलर्ट मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एजेंसी, स्काईमेट के मुताबिक, आज, 15 जून को पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति संभव है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में लू चलने की संभावना है. इन इलाकों में बरसेंगे बादल वहीं, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तेलंगाना, दक्षिण छत्तीसगढ़, दक्षिण ओडिशा, सिक्किम और असम में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश संभव है. लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश, दक्षिण गुजरात और जम्मू कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश संभव है. दक्षिण मध्य प्रदेश, ओडिशा, दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों, दक्षिण-पूर्व राजस्थान, उत्तर छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और रायलसीमा में हल्की बारिश हो सकती है.

योग गुरु रामदेव ने कहा-पीएम मोदी का नेतृत्व, नीतियां, चरित्र और व्यक्तित्व इतना बड़ा है और यह वर्षों की तपस्या के कारण है

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव नतीजों पर आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के बयान पर योग गुरु रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शुक्रवार को हरिद्वार के हरी सेवा आश्रम में चल रहे संत सम्मेलन में मीडिया से बातचीत में कहा कि पीएम मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ के अपने आदर्श वाक्य के साथ देश को आगे बढ़ाया है. रामदेव ने कहा, ‘राजनीतिक टिप्पणियां अक्सर होती रहती हैं. भगवान राम सभी के हैं; यह राष्ट्र सभी का है और हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. जाति, संप्रदाय और विचारधाराओं के आधार पर विभाजन पैदा करना राष्ट्रीय एकता के लिए ठीक नहीं है.’ रामदेव ने आगे कहा, ‘पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से आगे बढ़ाया है. चुनौतियों के बावजूद, मेरा दृढ़ विश्वास है वह देश को आगे ले जाना जारी रखेंगे.’ लोकसभा चुनाव के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने एक बयान में कहा था, ‘2024 में राम राज्य का विधान देखिए, जिनमें राम की भक्ति थी और धीरे-धीरे अहंकार आ गया, उन्हें 240 सीटों पर रोक दिया. जिनकी राम के प्रति आस्था नहीं थी, उन सबको 234 पर रोक दिया. यही प्रभु का न्याय है.’ पीएम मोदी का व्यक्तित्व हिमालय जैसा: रामदेव इंद्रेश कुमार की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर रामदेव ने ने कहा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी का नेतृत्व, नीतियां, चरित्र और व्यक्तित्व इतना बड़ा है और यह वर्षों की तपस्या के कारण है. पीएम मोदी के सामने कोई नहीं टिक सकता; उनका व्यक्तित्व हिमालय जैसा है.’ हालांकि, एक दिन बाद ही इंद्रेश कुमार ने बाद में अपने बयान पर यू-टर्न ले लिया. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘देश का वातावरण इस समय में बहुत स्पष्ट है- जिन्होंने राम का विरोध किया वो सब सत्ता से बाहर हैं, जिन्होंने राम की भक्ति का संकल्प लिया आज वो सत्ता में हैं और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बन गई है. उनके नेतृत्व में देश प्रगति करेगा- यह विश्वास लोगों में है. हमें उम्मीद है कि यह भरोसा कायम रहेगा.’ नरेंद्र मोदी ने 9 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी. उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत के पड़ोसी और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं ने भाग लिया. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 293 सीटें जीतकर तीसरी बार बहुमत हासिल किया. वहीं भाजपा ने 543 सदस्यीय निचले सदन में अपने दम पर 240 सीटें जीतीं, जहां बहुमत का आंकड़ा 272 है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए पीएम पद की शपथ लेने वाले दूसरे नेता हैं.    

16 जून को बुलाई हाई लेवल मीटिंग, जम्मू-कश्मीर में लगातार आतंकी हमलों के बाद एक्शन में अमित शाह

जम्‍मू केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों की सुरक्षा स्थित की समीक्षा की। रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हमले सहित कई आतंकी हमलों के बारे में चर्चा की। शाह ने 16 जून को बुलाई बैठक शाह ने 16 जून को एक हाई-लेवल की बैठक भी बुलाई। इस मीटिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना और सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारी और अन्य शामिल होंगे। चार स्‍थानों पर हुआ आतंकी हमला जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री को जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति और आतंकी घटनाओं के बाद उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी गई। पिछले चार दिनों में जम्मू-कश्मीर के रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में चार स्थानों पर आतंकवादियों ने हमला किया। इन हमलों में नौ तीर्थयात्रियों और एक सीआरपीएफ जवान की मौत हो गई और सात सुरक्षाकर्मी और कई अन्य घायल हो गए। कठुआ जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी भी मारे गए। साथ ही उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया।

आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत 480 लोइटर म्यूनिशन के दिए गए हैं ऑर्डर

नई दिल्ली  भारतीय सेना को नागपुर की कंपनी ने 120 स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन ‘नागस्त्र’ का पहला बैच सौंप दिया है। भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत 480 लोइटर म्यूनिशन की आपूर्ति के लिए सोलर इंडस्ट्रीज के इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (ईईएल) को ऑर्डर दिया है। प्री-डिलीवरी निरीक्षणों के सफल समापन के बाद ईईएल ने सेना के गोला-बारूद डिपो को 120 लोइटर म्यूनिशन वितरित किए हैं। भारतीय सेना को घरेलू स्तर पर निर्मित आत्मघाती ड्रोन का पहला बैच प्राप्त हुआ है, जिसे नागस्त्र-1 के नाम से जाना जाता है। स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन को आत्मघाती ड्रोन नागस्त्र-1 के रूप में भी जाना जाता है। इसे नागपुर की कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है। भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत 480 लोइटर म्यूनिशन की आपूर्ति के लिए सोलर इंडस्ट्रीज की इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (ईईएल) को ऑर्डर दिया है। इसमें पहले बैच के रूप में 120 लोइटर म्यूनिशन सेना के गोला-बारूद डिपो को सौंप दिए हैं। यह एक ही आत्मघाती ड्रोन दुश्मन के इलाके में घुसकर तबाही मचा सकता है। जीपीएस से लैस यह ड्रोन दो मीटर की दूरी पर सटीकता के साथ हमला कर सकता है। नौ किलोग्राम वजन वाले मैन-पोर्टेबल फिक्स्ड-विंग इलेक्ट्रिक यूएवी की क्षमता 30 मिनट की है। मैन-इन-लूप रेंज 15 किलोमीटर और ऑटोनॉमस मोड रेंज 30 किलोमीटर है। इसका इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम कम ध्वनिक संकेत प्रदान करता है। इससे 200 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर दुश्मन इसे पहचान नहीं पाता। इसे आसानी के साथ जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। यह 1.5 किलोग्राम विस्फोटक वारहेड ले जाने में सक्षम है और 15 किमी. तक निगरानी करके आसानी से लक्ष्य भेद सकता है। इससे आतंकी लॉन्च पैड, घुसपैठियों और दुश्मनों के ट्रेनिंग कैंप पर सटीक हमले किये जा सकेंगे।    

पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित करेगी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित कर सकती है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोलकाता के पास न्यू टाउन क्षेत्र स्थित ‘विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर’ में ‘शोकेस बंगाल’ नाम से 20 सितंबर से छह अक्टूबर तक प्रदर्शनी आयोजित किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में निर्णय लिया गया। अधिकारी ने बताया, ‘‘राज्य के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि इसी प्रदर्शनी में ‘बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट’ (बीजीबीएस) के अगले सत्र की तिथि भी घोषित की जा सकती है। राज्य ने पिछले वर्ष नवबंर में ‘बीजीबीएस- 2023’ के सातवें संस्करण का आयोजन किया था, जिसमें कई देशों के नेताओं,प्रमुख हस्तियों तथा गणमान्य लोगों ने भाग लिया था। बीजीबीएस हर दो साल में आयोजित की जाती है। बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट अगले साल  राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बंगाल सरकार की ओर से हर वर्ष बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (बीजीबीएस) का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस साल बीजीबीएस का आयोजन नहीं किया जायेगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने  राज्य सचिवालय के पास बने नबान्न सभाघर में उद्योगपतियों व औद्योगिक चेंबर के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में यह जानकारी दी. राज्य सचिवालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान कहा गया है कि करीब तीन महीने तक चले लोकसभा चुनाव का असर बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट की तैयारियाें पर भी पड़ा है. चुनाव की वजह से वाणिज्यिक सम्मेलन की तैयारी बाधित हुई है, इसलिए राज्य सरकार की ओर से इस वर्ष बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट का आयोजन नहीं किया जायेगा. वर्ष 2025 की शुरुआत में बीजीबीएस का आयोजन होगा. जानकारी के अनुसार,बैठक में राज्य के विभिन्न औद्योगिक विकास निगम के अधिकारी, उद्योगपति और औद्योगिक चेंबर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बैठक में उद्योगपतियों में हर्ष नेवटिया, संजय बुधिया, सत्यम रॉय चौधरी, सीके धानुका सहित अन्य उपस्थित रहे. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पिछले साल नवंबर में वाणिज्यिक सम्मेलन का आयोजन किया था. राज्य सरकार ने प्राथमिक रूप से यह निर्णय लिया था कि इस साल नवंबर में बीजीबीएस का आयोजन किया जायेगा. लेकिन अन्य सरकारी परियोजनाओं की तरह वाणिज्यिक सम्मेलन की तैयारियों पर चुनाव का असर पड़ा है. इसी वजह से इस साल की बजाय अगले वर्ष की शुरूआत में बीजीबीएस आयोजित करने की योजना बनायी गयी है. तय किया गया है कि बीजीबीएस में अतिथियों को आमंत्रित करने के लिए सितंबर से देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी राज्य की निवेश संभावनाओं को उजागर करते हुए एक अभियान चलाया जायेगा और उद्योग के लिए डेस्टिनेशन बंगाल को बढ़ावा देने पर अधिक जोर दिया जायेगा. उद्योगों के लिए प्रोत्साहन योजना को फिर से शुरू करने का निर्देश: जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के कारण उद्योगों के लिए राज्य सरकार की निलंबित विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है. मालूम हो कि चुनावी आचार संहिता के कारण नये उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गयी कई प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ का वितरण बंद हो गया था, जिसे मुख्यमंत्री ने तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया. साथ ही उद्योगपति राज्य में जो निवेश ला रहे हैं, उसका भी अधिक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है. उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले घोषणा की थी कि विश्व बंगाल व्यापार सम्मेलन के बाद से राज्य में कितना निवेश हुआ है, इस पर राज्य सरकार द्वारा श्वेत पत्र प्रकाशित किया जायेगा. बैठक के दौरान इस पर चर्चा की गयी और मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को अपना डेटा तैयार करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री ने अमित मित्रा को इस मामले पर रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया.  

ब्रिटेन में हिंदुओं ने भावी ब्रिटिश सरकार से सीधी डिमांड, हिंदू फॉर डेमोक्रेसी ने बनाया

70 patients sick so far, serious victims sent to district hospital

लंदन फिलहाल चुनावी मौसम चल रहा है. भारत के लोकसभा चुनाव 2024 के बाद यूरोपियन पार्लियामेंट का भी चुनाव हुआ. अब ब्रिटेन की पारी है. जुलाई में होने वाले आम चुनावों से पहले वहां हिंदू मेनिफेस्टो जारी हो चुका. 32-पेज का ये दस्तावेज यूके में बसे हिंदुओं की जरूरतों पर बात करता है, इसलिए इसे हिंदू मेनिफेस्टो भी कहा जा रहा है. क्या है हिंदू फॉर डेमोक्रेसी संगठन ये एक नहीं, बल्कि 15 गुटों का समूह है, जिनमें हिंदू काउंसिल यूके, हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन, हिंदू मंदिर नेटवर्क यूके, बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था, चिन्मय मिशन, इस्कॉन यूके और नेशनल काउंसिल ऑफ हिंदू टेम्पल्स आते हैं. इसकी वेबसाइट पर हिंदू मेनिफेस्टो का भी जिक्र है. घोषणापत्र में सात मांगें हैं. इनमें ब्रिटेन में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा और गैर-बराबरी को रोकने के साथ-साथ यूके में मंदिरों की सुरक्षा की भी डिमांड की गई. क्यों करनी पड़ी ये मांगें बीते कुछ समय में हिंदुओं के साथ कथित तौर पर हेट क्राइम की घटनाएं बढ़ीं. कई रिपोर्ट्स भी इसपर ठप्पा लगाती हैं. खुद लीडिंग ब्रिटिश थिंक टैंक हेनरी जैक्सन सोसायटी ने पिछले साल दावा किया था कि ब्रिटेन में बसे मुस्लिम स्टूडेंट्स हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करते और उन्हें कंन्वर्ट होने को कहते हैं. किनपर हुआ सर्वे इसके लिए देश के हजार से ज्यादा स्कूलों का सर्वेक्षण और लगभग इतने ही पेरेंट्स से बात की गई. वहां रहने वाले करीब 50% अभिभावकों ने माना कि मजहब के चलते उनके बच्चों को स्कूल में नफरत झेलनी पड़ी. यहां तक कि कई स्कूलों ने भी अपनी अंदरुनी रिपोर्ट में माना कि उनके कैंपस में बीते 5 सालों में हिंदू-विरोधी सोच बढ़ी है. साल 2023 में ही अमेरिकी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क कांटेजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) ने दावा किया कि बीते समय में तेजी से एंटी-हिंदू नैरेटिव तैयार हुआ और हिंदुओं पर हमले में थोड़ी-बहुत नहीं, लगभग हजार गुना तेजी आई. खासकर ब्रिटेन और अमेरिका में. कितने हिंदू हैं ब्रिटेन में साल 2021 के सेंसस के अनुसार. यहां 10 लाख से ज्यादा हिंदू आबादी है. साल 2011 में ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का डेढ़ फीसदी हिंदुओं का था. अगले 10 सालों में ये बढ़कर 1.7 फीसदी हो गया. वहां ईसाई और मुस्लिम के बाद हिंदू तीसरा सबसे बड़ा धर्म है. क्या है मेनिफेस्टो में – इसमें आने वाली सरकार से 7 मांगें की गई हैं. – हिंदू हेट-क्राइम की घटनाओं को धार्मिक नफरत की तरह पहचानना और ऐसे लोगों को सजा देना. – पूजा स्थलों को सुरक्षा देना और मंदिरों के लिए सरकारी फंडिंग. – हिंदुओं की मान्यताओं-आस्थाओं को आने वाली पीढ़ी तक ले जाने के लिए फेथ स्कूल्स तैयार करवाना. – सरकार और सार्वजनिक स्थलों पर हिंदुओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना. – पुजारियों से जुड़े वीजा के मामलों को सुलझाना. – सामाजिक सेवाओं में हिंदुओं को शामिल करना. – धार्मिक मान्यताओं को पहचानना और उन्हें प्रोटेक्ट करना. इसमें कई और मांगें भी हैं. जैसे नए सांसद ब्रिटिश हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर कानून लाने से पहले हिंदू संगठनों से बातचीत करें. हिंदू दाह संस्कार की प्रोसेस में प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की मांग है ताकि मौत के तीन दिन के भीतर दाह संस्कार का काम हो सके. होने लगा मेनिफेस्टो का विरोध बढ़ते हेट-क्राइम की घटनाओं के बीच ब्रिटेन में रहते हिंदू इसलिए भी नाराज हैं क्योंकि सरकार में उनके मुद्दों का रिप्रेजेंटेशन उतनी अच्छी तरह से नहीं हो रहा. यही वजह है कि पहली बार कोई हिंदू मेनिफेस्टो लाया गया. हालांकि आते ही इसपर विवाद भी शुरू हो गया. घोषणापत्र रिलीज होने के साथ ही वहां के कैंपेनिंग संस्थान नेशनल सेकुलर सोसायटी ने दस्तावेजों की आलोचना करते हुए कहा कि आने वाली सरकार को इन्हें सिरे से रिजेक्ट कर देना चाहिए. सोसायटी ने यहां तक कह दिया कि अगर मेनिफेस्टो अमल में आ जाए तो फ्री स्पीच को नुकसान होगा क्योंकि हिंदुओं के खिलाफ कुछ कहा नहीं जा सकेगा.  

पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी के साथ बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की

पाकिस्तान: पीटीआई के वार्ताकार अचकजई ने नवाज और जरदारी से वार्ता की इच्छा जताई पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी के साथ बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की पाकिस्तान : शहबाज शरीफ ने मौलाना फजलुर रहमान को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया इस्लामाबाद पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ वार्ता का नेतृत्व करने के लिए इमरान खान की पार्टी द्वारा चुने गए पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेएमएपी) के अध्यक्ष महमूद खान अचकजई ने  पीएमएल-एन के अध्यक्ष नवाज शरीफ और पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी के साथ बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की।  मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई है। ‘जियो न्यूज’ की खबर के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने विपक्षी गठबंधन के मंच तहरीक-ए-तहफ्फुज आईन (टीटीएपी) के माध्यम से वार्ता का नेतृत्व करने के लिए अचकजई को चुना था। अचकजई ने एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को एक ‘मजबूत सेना’ की जरूरत है और स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन सेना के खिलाफ नहीं है। मार्च में सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के उम्मीदवार के रूप में आसिफ अली जरदारी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले अचकजई ने चेतावनी दी कि यदि ‘जरदारी और नवाज शरीफ ने हमसे वार्ता नहीं की, तो एक समय ऐसा आएगा जब वे अपने घरों से बाहर कदम नहीं रख पाएंगे।” पीकेएमएपी प्रमुख ने महंगाई को लेकर जनता के बीच बढ़ती हताशा के बारे में बात की और कहा, ‘लोग गुस्से में हैं। उन्हें दो वक्त की रोटी जुटाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।’   पाकिस्तान : शहबाज शरीफ ने मौलाना फजलुर रहमान को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने पूर्व सहयोगी जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बनने और देश में राजनीतिक गतिरोध को दूर करने में भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया है। समाचार पत्र ‘डॉन’ की खबर के अनुसार, बिलावल भुट्टो-जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और अन्य छोटे दलों के समर्थन से गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे शरीफ ने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) प्रमुख के आवास पर जाकर उनका हालचाल जाना। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (72) ने मौजूदा राजनीतिक मुद्दों के समाधान के लिए एक समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा और मौलाना रहमान से सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने को कहा। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक सूत्र के हवाले से खबर में कहा गया है कि जेयूआई-एफ नेता को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने और देश में व्याप्त राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए प्रस्तावित समिति में भूमिका निभाने को कहा गया है। जेयूआई-एफ के प्रवक्ता ने बताया कि मौलाना रहमान ने हालांकि सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया है। प्रवक्ता ने दावा किया, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह सच है (कि जेयूआई-एफ सरकार में शामिल होगी)। सत्ता की चाहत हमारी राजनीति का हिस्सा नहीं है। वर्तमान सरकार के गठन से पहले ही हमारे पास बेहतर प्रस्ताव था।’’ मौलाना रहमान ने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के दौरान पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) नामक विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व किया था।    

संघ ने लोकसभा चुनाव में कोई हस्तक्षेप नहीं किया, जो दिख रहा है बात उससे कहीं कुछ ज्यादा है?

Proceedings against 11 forest officers including Devanshu in scam worth Rs 7.5 crores aborted

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहिए दशकों से एक लय में एक गति से चल रहे हैं. जब नए इलाकों में पैर जमाने की बात आई तो संघ हमेशा आगे रहा. यहां RSS ने पहले जमीन तैयार की, फिर बीजेपी वहां पहुंची और राजनीतिक रूप से स्वयं को समृद्ध किया. अगर दोनों संगठनों के बीच ऐसा सहज समन्वय और सामंजस्य है तो संघ परिवार की ओर से फिर असहमति के स्वर क्यों? ये असंतोष के बुदबुदाहट क्यों? और बुदबुदाहट ही क्यों इंद्रेश कुमार ने तो अब खुली घोषणा कर दी है- अहंकारियों को प्रभु राम ने रोक दिया है.   दरअसल नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के खिलाफ जब टिप्पणी की तो इस फुसफुसाहट के स्वर तेज हो गए और ये राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई. टिप्पणियों का ये सिलसिला यहीं नहीं रुका. मोहन भागवत के बाद संघ के मुखपत्र पांचजन्य में लोकसभा चुनाव में बीजेपी के परफॉर्मेंस पर एक आलोचनात्मक लेख छपी शीर्षक था- लोकसभा चुनाव-2024/NDA: सबक हैं और सफलताएं भी. ‘आर्गनाइजर’ में भी टिप्पणी की गई. इन लेखों पर चर्चा हो ही रही थी कि संघ नेता इंद्रेश कुमार ने सार्वजनिक मंच से कहा कि ‘राम सबके साथ न्याय करते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव को ही देख लीजिए. जिन्होंने राम की भक्ति की, लेकिन उनमें धीरे-धीरे अंहकार आ गया. उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बना दिया. लेकिन जो उसको पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए थी, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी.’ भागवत, इंद्रेश कुमार की टिप्पणियां ऐसे समय में आई है जब इस बात पर गहन चर्चा चल रही है कि क्या आरएसएस ने वास्तव में बीजेपी से दूरी बना ली है और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूरे दिल से उसका समर्थन नहीं किया है. मोहन भागवत ने आम चुनाव के बाद, जहां बीजेपी बहुमत से 30 सीटें पीछे रह गई थी, अपनी पहली टिप्पणी में प्राथमिकता के आधार पर मणिपुर के संघर्ष को समाप्त करने तथा सरकार और विपक्ष के बीच आम सहमति की आवश्यकता की बात कही थी. मोहन भागवत ने कहा था, “एक सच्चा सेवक मर्यादा बनाए रखता है, वह काम करते समय मर्यादा का पालन करता है. उसमें यह अहंकार नहीं होता कि वह कहे कि ‘मैंने यह काम किया’. केवल वही व्यक्ति सच्चा सेवक कहलाता है.” कुछ लोगों ने उनकी टिप्पणी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना के रूप में देखा, क्योंकि प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर स्वयं को जनता का “प्रधान सेवक” बताया था. मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियां, पहले की कई बार की तरह ही अस्पष्ट हैं. भागवत के बाद बोले इंद्रेश कुमार भागवत के बयान का लक्ष्य कौन है? इसका संदेश क्या है इस पर एक्सपर्ट कमेंट आ ही रहे थे कि संघ के बड़े फंक्शनरी इंद्रेश कुमार ने अपने बयान सारा धुंध साफ कर दिया. उन्होंने राजस्थान में एक बयान में स्पष्ट कहा कि अहंकारियों को प्रभु राम ने 241 पर रोक दिया है. अब ये स्पष्ट है कि संघ पब्लिक प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट मैसेज देना चाहता है. इंद्रेश ने बिना लाग-लपेट के कहा, “जिस पार्टी ने (भगवान राम की) भक्ति की, लेकिन अहंकारी हो गई, उसे 241 पर रोक दिया गया, लेकिन उसे सबसे बड़ी पार्टी बना दिया गया…” उन्होंने आगे कहा, “लोकतंत्र में रामराज्य का विधान देखिए, जिन्होंने राम की भक्ति की लेकिन धीरे-धीरे अहंकारी हो गए, वो पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन जो वोट और ताकत मिलनी चाहिए थी, वो भगवान ने उनके अहंकार के कारण रोक दी.” इंद्रेश कुमार के इस बयान का वजन इतना है कि बीजेपी की ओर से कोई भी बड़े नेता ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. कांग्रेस, शिवसेना जैसे विपक्षी दल और बीजेपी की सहयोगी जेडीयू ने इस पर जरूर अपनी प्रतिक्रिया दी है. लेकिन संघ द्वारा अहंकारी बतलाये जाने के बाद बीजेपी ने अपनी रक्षा में कुछ खास तर्क नहीं दिए हैं. कैसे रहे हैं संघ और बीजेपी के रिश्ते? आरएसएस और बीजेपी के बीच संबंध और संघ किस हद तक इस राजनीतिक पार्टी पर प्रभाव डालता है, यह हमेशा से चर्चा का विषय रहा है. इतना ही नहीं, आरएसएस पर शोधकर लिखी गई किताब के लेखक ने इस मुद्दे को “पुरानी बात” कहकर खारिज कर दिया. लेकिन संघ-बीजेपी के इकोसिस्टम पर नजर रखने वाले लोग कहते हैं कि इस बार बात कुछ अलग है. वे भागवत की टिप्पणियों के समय की ओर इशारा करते हैं, जो एक ऐसे चुनाव के बाद आई है जिसमें भाजपा बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई और प्रधानमंत्री मोदी की बड़े और साहसिक निर्णय लेने की क्षमता को झटका लगा. उनका कहना है कि हाल के वर्षों में नागपुर और अहमदाबाद के बीच पर्सनैलिटी की खींचतान चल रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती लोकप्रियता और उनके चुनावी वादों को पूरा करने के कारण सत्ता का केंद्र अहमदाबाद की ओर खिसक गया है. लेखक और वरिष्ठ पत्रकार दीप हलदर ने इंडियाटुडे.इन से बातचीत में कहते हैं, “आरएसएस यह बात खुलकर नहीं कहने जा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में भाजपा की प्रभावशाली भूमिका को लेकर संघ परिवार सहज नहीं है.” हालदार कहते हैं, “यह सिर्फ़ बीजेपी की सीटों की संख्या का मामला नहीं था, बल्कि राम मंदिर और अनुच्छेद 370 जैसे वादे भी थे, जिन्हें पीएम मोदी के कार्यकाल में पूरा किया गया था. खासकर 2019 में कार्यकाल की शुरुआत से ही बीजेपी नेतृत्व संघ से सलाह नहीं ले रहा था.” गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी आरएसएस प्रचारक रहे हैं और संघ की नजरों में वे आदर्श प्रधानमंत्री माने जाते हैं. सच्चाई तो ये है कि आरएसएस ने 2014 के आम चुनाव में उनके लिए अपने सभी सहयोगी संगठनों की ताकत लगा दी थी. हालांकि, आरएसएस-भाजपा तंत्र के करीबी एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न बताने की शर्त पर इंडियाटुडे.इन को बताया कि उनका व्यापक आभामंडल और उनका सत्ता का केंद्र बन जाना नागपुर में संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को पसंद नहीं आया. बता दें कि आरएसएस राजनीति में सक्रिय भूमिका अदा नहीं करता है. इसका रोल राह दिखाने का है. अपने व्यापक नेटवर्क के जरिए यह भाजपा … Read more

वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम रिपोर्ट: भारत में एक ही काम के लिए पुरुषों को 100 तो महिलाओं को 40 रुपये मिलता

नई दिल्ली भारत समेत भारतीय उपमहाद्वीप के कई देशों में बार-बार महिलाओं को समान अधिकार और समान वेतन की बात होती है। लेकिन अभी तक यह सपना ही है। अभी देखिए ना, वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम (World Economic Forum) ने बीते दिनों ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स (Global Gender Gap Index) के आंकड़े जारी किए। इस रिपोर्ट ने भारत के लिए एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर किया है। इस इंडेक्स में भारत दो पायदान फिसल गया है। इंडेक्स के 146 देशों की सूची में भारत को 129वां स्थान मिला है। पिछले साल भारत इस सूची में 127वें स्थान पर था। इस साल भी आइसलैंड को सूची में पहला स्थान मिला है। वह दशकों से इस स्थान पर काबिज है। बंगलादेश, नेपाल और श्रीलंका भी हमसे आगे महिलाओं को वेतन देने में भारत तो बांग्लादेश (99), नेपाल (111), श्रीलंका (125) और भूटान (124) से भी पीछे छूट गया है। हां, पाकिस्तान जरूर हमसे पीछे है। पाकस्तान का इस सूची में 145वां स्थान है जो कि सूची के सबसे अंतिम पायदान पर स्थान पाए सूडान से सिर्फ एक पायदान ऊपर है। इससे एक स्पष्ट आंकड़ा सामने आया है जो दर्शाता है कि भारतीय महिलाएं पुरुषों द्वारा अर्जित प्रत्येक 100 रुपये पर केवल 40 रुपये कमाती हैं। निम्नतम स्तर वाली अर्थव्यवस्था रिपोर्ट के अनुसार, भारत आर्थिक समानता के निम्नतम स्तर वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसमें अनुमानित अर्जित आय में 30% से कम लैंगिक समानता दर्ज की गई है। इन देशों की सूची में बांग्लादेश, सूडान, ईरान, पाकिस्तान और मोरक्को भी शामिल हैं। इन देशों में श्रम बल भागीदारी दर में लैंगिक समानता का स्तर 50% से भी कम है। इस मामले में हुआ है सुधार WEF की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने साल 2024 में अपने लिंग अंतर gender gap को 64.1% तक कम कर लिया है। लेकिन, पिछले वर्ष के 127वें स्थान से गिरावट का कारण ‘शैक्षिक प्राप्ति’ और ‘राजनीतिक सशक्तीकरण’ मापदंडों में मामूली कमी आई है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि भारत का आर्थिक समता स्कोर पिछले चार वर्षों से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। भारत माध्यमिक शिक्षा नामांकन के मामले में भी तरक्की हुई है। तभी तो यह लैंगिक समानता में पहले स्थान पर काबिज है। यह तृतीयक नामांकन (Tertiary enrolment) में 105वें, साक्षरता दर में 124वें और प्राथमिक शिक्षा नामांकन में 89वें स्थान पर है। तभी तो इससे शैक्षिक उपलब्धि उपसूचकांक (Educational attainment subindex) में 26वें से 112वें स्थान पर भारी गिरावट आई है। राजनीति में बढ़ी हैं महिला शक्ति भारत में इस समय हेड ऑफ दि स्टेट यानी राष्ट्रपति के पद पर एक महिला हैं। इसलिए, राजनीतिक सशक्तिकरण उपसूचकांक (Political empowerment subindex) में, भारत ने राज्य प्रमुख संकेतक (Head-of-state indicator) पर अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, संघीय स्तर पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व में भारत अपेक्षाकृत कम स्कोर किया है। भारत को मंत्री पदों पर केवल 6.9% और सांसद में 17.2% का स्कोर मिला है। यह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के मामले में 65वें स्थान पर है और पिछले 50 वर्षों में महिला/पुरुष राष्ट्राध्यक्षों की संख्या के मामले में यह 10वें स्थान पर है। आर्थिक समता में कोई बदलाव नहीं आर्थिक समता और अवसर उपसूचकांक (Economic parity and opportunity subindex) में यहां कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत साल 2023 के दौरान इस उपसूचकांक में 142 वें स्थान पर था। इस साला भी भारत का स्थान यही है। यह वैश्विक स्तर पर सबसे निचले में से एक है, जो कि शर्मनाम स्थिति को दिखाती है। भारत श्रम-बल भागीदारी दर पर 134वें और समान काम के लिए वेतन समानता पर 120वें स्थान पर है, जो पुरुषों और महिलाओं के बीच कमाई में पर्याप्त असमानताओं को दर्शाता है।

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