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मनीला एयरपोर्ट पर वीजा फीस मांगने पर महिला हुई न्यूड, बिना कपड़ों के चारों ओर घूमने लगी

मनीला  फिलीपींस में एक महिला यात्री को फ्लाइट लेने से रोके जाने पर न्यूड होकर एयरपोर्ट में प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। यह तब हुआ जब महिला से वीजा अवधि से ज्यादा रुकने पर फीस मांगी गई। इसके विरोध में महिला न्यूड अवस्था में हवाईअड्डे की सुरक्षा को पार करते हुए अंदर घुस गई। महिला यात्री की पहचान 34 साल की वियतनामी पर्यटक गुयेन थुइट्रांग के तौर पर हुई है। गुयेन फिलीपींस में छुट्टियां मनाने के लिए आई थी। पुलिस ने 8 जून को वीजा अवधि से अधिक समय तक रहने के लिए फीस की मांग की थी। इस पर महिला गुस्सा दिखाते हुए राजधानी मनीला में निनॉय एक्विनो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गई और जब निकली तो सबको चौंका दिया। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला जब टॉयलेट से निकली तो उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। उसने सिक्योरिटी और बॉडी स्कैनर को पार किया और एयरपोर्ट पर अंदर चली गई। एयरपोर्ट से सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दिखाया गया है कि महिला गुयेन इमिग्रेशन काउंटर की ओर जा रहा है। महिला को न्यूड देखर ग्राउंड स्टाफ उसके पीछे चल रहा है, उसे समझ में नहीं आ रहा है कि उसे कैसे रोका जाए। गार्ड ने महिला को रोककर दिए कपड़े एयरपोर्ट के पुलिस एपीओ1 माइकल रोनाल्ड डी गुजमैन ने बताया कि महिला एयरपोर्ट पर आई थी। उसे साइगॉन (हो ची मिन्ह सिटी) के लिए उड़ान भरनी थी लेकिन उसके वीजा में कुछ समस्याएं थीं। ऐसे में उसे फ्लाइट लेने की परमिशन नहीं दी गई। इस पर टॉयलेट में गई और बिना कपड़ों के वहां से निकल आई। ड्यटी पर तैनात गार्ड्स ने महिला को रोककर उसे बैठाया। उसे कपड़े और खाना दिया गया, जिससे वह शांत हो जाए। एयरपोर्ट के अधिकारियों ने बताया कि वह परेशान और चिड़चिड़ी लग रही थी। इसकी एक बड़ी वजह ये भी थी कि वह वहअच्छी तरह से अंग्रेजी नहीं बोलने की वजह से अपनी बात नहीं कह पा रही थी। वह केवल वियतनामी जानती थी, इसलिए हमने इंटनेट का सहारा लेकर उसकी बातों को समझने की कोशिश की। गुयेन ने बाद में वीजा से अधिक समय तक रुकने के लिए फीस चुका दी। इसके बाद उसे हनोई, वियतनाम जाने वाली फ्लाइट में चढ़ने की अनुमति दे दी गई।

समुद्रों में अब भी दो करोड़ टन सोना छिपा, मिल जाए तो हो जाए दुनिया का बेड़ापार

नई दिल्ली:  सोने की चमक ने हर युग में इंसान को अपनी ओर आकर्षित किया है। पुरातन काल से ही सोने का उपयोग गहनों और लेनदेन के साधन के रूप में किया जाता रहा है। मुसीबत के समय तो सोने की चमक और बढ़ जाती है। हाल में आम लोगों के साथ-साथ कई देशों के सेंट्रल बैंक्स ने जमकर सोने की खरीदारी की है। इससे सोने की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में अब तक केवल 208,874 टन सोने का ही खनन किया जा सका है। लेकिन समुद्रों में अब भी करीब दो करोड़ टन सोना छिपा है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसकी कीमत 771 ट्रिलियन टन हो सकती है। यह दुनिया की कुल जीडीपी से करीब सात गुना है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ल्ड इकॉनमी का साइज करीब 100 ट्रिलियन डॉलर की है। अमेरिका की नेशनल ओशन सर्विस (National Ocean Service) के मुताबिक उत्तरी प्रशांत और अटलांटिक महासागर में हर एक  100 मिलिटन मीट्रिक टन पानी में एक ग्राम सोना है। इस तरह समुद्र में करीब दो करोड़ टन सोना छिपा है। इसकी कीमत करीब 771 ट्रिलियन डॉलर है। दुनिया में अब तक केवल 208,874 टन सोने का ही खनन किया गया है। सवाल यह है कि जब समुद्र में इतना सोना छिपा है तो उसे निकाला क्यों नहीं जा रहा है? लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि समुद्र से सोना निकालना काफी महंगा पड़ता है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एक लीटर समुद्री पानी में एक ग्राम के 13 अरबवें हिस्से के बराबर सोना होता है। अभी कोई ऐसा सस्ता तरीका उपलब्ध नहीं है जिससे समुद्री पानी से सोना निकालकर प्रॉफिट कमाया जा सके। पानी से सोना हालांकि ऐसा नहीं है कि समुद्री पानी से सोना निकालने की कोशिश नहीं हुई है। कई इनवेंटर्स और इन्वेस्टर्स ने इसका प्रयास किया। 1890 के दशक में पेस्टर Ford Jernegan ने मरकरी और इलेक्ट्रिसिटी ट्रीटमेंट के जरिए Long Island Sound से सोना निकालने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने Electrolytic Marine Salts Company बनाई और 10 लाख डॉलर भी जुटा लिए थे। लेकिन जल्दी ही Jernegan सारा पैसा लेकर गायब हो गए। उसके बाद भी कई लोगों और संस्थाओं ने समुद्री जल से सोने को अलग करने का प्रयास किया। लेकिन उन्हें नाकामी ही हाथ लगी।

अग्निपथ स्कीम खत्म होगी या बदलेगी ? बन गई समिति, सिफारिश पर तुरंत फैसला लेगी मोदी सरकार

नई दिल्ली ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा देने वाली बीजेपी का गठबंधन 300 भी पार नहीं कर सका तो मतदाताओं की नाराजगी की वजहें ढूंढी जाने लगी हैं। भले ही कम सीटों के साथ, लेकिन एनडीए सरकार वापस आ गई है तो उसने अपनी नीतियों की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन इलाकों से बड़ी संख्या में युवा सेना में जाते हैं, वहां भी बीजेपी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ा है। इस कारण अग्निपथ स्कीम की पड़ताल भी शुरू हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 3.0 सरकार ने 10 प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों के एक समूह को अग्निपथ योजना की समीक्षा करने और सशस्त्र बलों की भर्ती योजना को अधिक आकर्षक बनाने के तरीके सुझाने का काम सौंपा है। केंद्र सरकार चाहती है कि जितनी जल्दी हो सके अग्निपथ स्कीम की हर कमी को दूर कर लिया जाए। पीएम के सामने प्रजेंटेशन देगा सेक्रेटरी समूह मामले से जुड़े अधिकारियों ने  बताया कि प्रधानमंत्री जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होकर इटली से लौट जाएंगे तब सचिवों का यह पैनल अंतिम प्रस्तुति देगा। जी-7 शिखर सम्मेलन 13 से 15 जून तक चलेगा। सूत्रों ने बताया कि सचिवों का यह समूह अग्निपथ योजना में बदलाव के तहत सैलरी बढ़ाने समेत अन्य लाभ देने का सुझाव दे सकता है। अग्निवीरों के भर्ती कार्यक्रम की समीक्षा नई सरकार के संशोधित 100 दिवसीय एजेंडे में भी शामिल है। अग्निपथ स्कीम की सेना भी कर रही है समीक्षा चर्चाओं से अवगत एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी को बताया, ‘सचिवों का समूह 16 जून से पहले विवरण तैयार करेगा और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में एक विस्तृत प्रजेंटेशन देगा।’ उन्होंने कहा कि प्रजेंटेशन 17 या 18 जून को होने की संभावना है। राज्यों सहित अन्य हितधारकों से सिफारिशों और फीडबैक की समीक्षा करने के बाद पीएमओ योजना में बदलावों पर अंतिम फैसला लेगा। उधर, सेना भी अपने स्तर से अग्निपथ योजना की समीक्षा कर रही है। अधिकारी ने कहा, ‘सेना भी अपना आंतरिक मूल्यांकन कर रही है।’ सरकार ने भारतीय सशस्त्र बलों में कर्मियों की अल्पकालिक भर्ती के लिए जून 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। योजना की आलोचना अग्निपथ को रक्षा पेंशन बिल के बढ़ते बोझ के बीच सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। चुनाव अभियान के दौरान विपक्ष ने इस योजना के खिलाफ माहौल बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष का यह एजेंडा चल निकला। मतदाता इस बात को लेकर नाराज हैं कि अग्निवीरों को नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई। इस पर महंगाई का मुद्दा विपक्ष के पक्ष में खूब काम आया। अग्निवीरों को क्या मिलता है, जानिए अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को चार साल के कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाता है। इस अवधि के दौरान, उन्हें 30 हजार रुपये से शुरू होने वाला नियमित मासिक वेतन मिलता है और चौथे वर्ष में 40 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त, चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर अग्निवीर को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज के रूप में लगभग 12 लाख रुपये मिलेंगे। सशस्त्र बल अपनी आवश्यकताओं के आधार पर अग्निवीरों को स्थायी सेवा भी दे सकते हैं। अग्निवीर योजना से सरकार को होती है बचत ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के एक अध्ययन के अनुसार, एक अग्निवीर की लागत सरकार को पूर्णकालिक भर्ती की तुलना में हर साल 1.75 लाख रुपये कम पड़ती है। 60 हजार अग्निवीरों के एक बैच के लिए वेतन पर कुल 1,054 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसने कहा कि मध्यम से लंबी अवधि में पेंशन बिल पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। पेंशन रक्षा बजट का लगभग 20-25% हिस्सा है। अंतरिम बजट में केंद्र ने रक्षा के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए। सत्तारूढ़ गठबंधन के एक प्रमुख सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी इस योजना की समीक्षा की मांग की है। पिछले हफ्ते जेडी(यू) के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था कि उनकी पार्टी चाहती है कि इस योजना की कमियों पर विस्तार से चर्चा की जाए।

चीन ने शौचालयों में लगा दिए हैं टाइमर, सरकार देख रही कितने समय रुके लोग

NDA and INDIA, Om Birla and K Suresh will compete for the post of Speaker.

बीजिंग चीन अपने नागरिकों पर निगरानी के नए तरीके अपनाने के लिए बदनाम रहा है। इस कड़ी में अब एक और नया कदम चीनी सरकार ने उठाया है, जिसकी जद में टूरिस्ट भी हैं। चीन ने शौचालयों में टाइमर लगा दिए हैं, जिससे ये पता चले कि लोग कितना समय अंदर गुजार रहे हैं। टॉयलेट्स के बाहर लगे टाइमर के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल युंगांग बौद्ध ग्रोटोज के शौचालयों से ये फोटो सामने आए हैं। चीन के युंगांग स्थित इस जगह पर 1,500 वर्ष पूर्व की 252 गुफाएं और 51,000 प्रतिमाएं मौजूद हैं। यहां साल 2023 में 30 लाख से ज्यादा टूरिस्ट आए थे। यहां जो शौचालय बने हैं, उनमें टाइमर लगे हैं। जो यह बताते हैं कि आप कितनी देर से शौचालय में हैं। हर एक टॉयलेट का अपना डिजिटल टाइमर है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोई टॉयलेट खाली होता है, तो पिक्सेल वाली एलईडी स्क्रीन पर हरे रंग में ‘खाली’ लिखा दिखता है। जब कोई टॉयलेट के अंदर जाता है तो दरवाजा बंद होते ही इस पर टाइम आना शुरू हो जाता है और ये मिनट और सेकंड को दिखाता है। दरवाजा खुलने पर ये देखा जा सकता है कि किसी ने कितनी देर तक टॉयलेट का यूज किया है। सोशल मीडिया पर चर्चा में चीन का कदम टॉयलेट्स में टाइमर का वीडियो चीनी सोशल मीडिया साइट वीबो पर काफी वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने इसकी आलोचना की है तो बहुत से लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि ये पर्यटकों को शौचालय में बैठकर अपने फोन स्क्रॉल करने से रोकेगा। एक यूजर ने लिखा कि पर्यटक स्थल कोई कार्यालय नहीं है कि शौचालयों की निगरानी की जाए। यह वास्तव में गैर जरूरी कदम है। टाइमर लगाने में आए खर्च को और ज्यादा शौचालय बनाने मेंखर्च करना ज्याद अच्छा होता। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि हम कोई समय सीमा निर्धारित नहीं कर रहे हैं कि कोई व्यक्ति शौचालय का उपयोग कितनी देर तक कर सकता है। ये टाइमर टूरिस्ट की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए लगाए गए थे। इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि टाइमर होने से आपको बाहर कतार में लगने या बाथरूम का दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं है। चीन के इस कदम को उसकी सामाजिक क्रेडिट प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। चीन ने 2020 में सोशल मीडिया की आदतों का विश्लेषण करके एक सामाजिक क्रेडिट की शुरुआत की। सामाजिक क्रेडिट प्रणाली को ‘अच्छे नागरिकों’ को पुरस्कृत करने और आलसी या “असभ्य” माने जाने वालों को दंडित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इसके तहत किसी व्यक्ति को प्रशासनिक मामलों, वाणिज्यिक गतिविधियों, न्यायिक प्रणाली और सामाजिक व्यवहार के आधार पर परखा जाता है।

अमेरिका के पश्चिमी तट वैंकूवर, सिएटल, वॉशिंगटन, ओरेगॉन और सैन फ्रांसिस्को पर 9 तीव्रता के भूकंप का खतरा: स्टडी

कैलिफोर्निया अमेरिका के पश्चिमी तट पर समंदर के अंदर एक फॉल्ट लाइन (Underwater Faultline) है. वैज्ञानिकों को आशंका है कि ये फॉल्ट लाइन किसी भी दिन भयानक भूकंप और सुनामी ला सकता है. यह फॉल्ट लाइन 600 मील यानी करीब 966 किलोमीटर लंबी है. दक्षिणी कनाडा से उत्तरी कैलिफोर्निया तक. वैज्ञानिकों ने हाल ही में इस समुद्री इलाके का नक्शा बनाया. अंडरवाटर मैपिंग की. इस इलाके को कैसकेडिया सबडक्शन जोन (Cascadia Subduction Zone) कहते हैं. आमतौर पर फॉल्ट लाइन दो हिस्सों में बंटी हुई होती है. लेकिन यह फॉल्ट लाइन चार टुकड़ों में बंट रही है. यह एक बड़े खतरे की निशानी है. अगर यहां पर टेक्टोनिक प्लेटों में जरा सी भी हलचल हुई, तो यह फॉल्ट लाइन बड़े पैमाने पर जमीन के ऊपरी सतह पर भारी तबाही मचाएगा. इससे एक भूकंप के बाद कई और तीव्र भूकंप आने की आशंका है. वैज्ञानिकों का मानना है कि कैसकेडिया सबडक्शन जोन में इतनी ताकत है कि ये 9 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप ला सकता है. क्या होगा अगर 9 या ज्यादा तीव्रता का भूकंप आया? कैलिफोर्निया के सैन एंड्रियास फॉल्ट लाइन के पास 8.3 तीव्रता का भूकंप लाने की ताकत है. अब सवाल ये उठता है कि अगर 9 तीव्रता का भूकंप अमेरिका के पश्चिमी तट पर आता है तो इसका असर कितना होगा? कितनी तबाही होगी? अमेरिका के पश्चिमी तट पर 100 फीट या उससे ज्यादा ऊंची सुनामी लहरें उठेंगी. इसकी वजह से 10 हजार लोगों के मारे जाने की आशंका है. इसके अलावा सिर्फ ओरेगॉन और वॉशिंगटन में 80 बिलियन डॉलर्स यानी 6.68 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होगा. सिर्फ इतना ही नहीं इसके बाद जमा पानी की वजह से फैलने वाली बीमारियों की वजह से कई मौते होंगी. यहां-वहां फैले शवों से बीमारियां पनपेंगी. जापान में 2011 में ऐसे ही फॉल्ट लाइन ने मचाई थी तबाही साल 2011 में जापान में भयानक भूकंप और सुनामी आई थी.  इसकी वजह कैसकेडिया सबडक्शन जोन जैसा ही फॉल्ट लाइन था. इसकी वजह से 9 तीव्रता का भूकंप आया. फिर आई भयानक सुनामी. जिसकी वजह से जापान में करीब 20 हजार लोग मारे गए थे. वैज्ञानिकों को चिंता है कि कैसकेडिया सबडक्शन जोन भी ऐसा ही कुछ करेगा. आमतौर पर इस जोन में हर 500 साल में इतना बड़ा भूकंप आता है. पिछला वाला सन 1700 में आया था. यह बता पाना मुश्किल है कि अगला भूकंप कब आएगा. लेकिन जब भी आएगा… भयानक तबाही मचाएगा. क्योंकि कैसकेडिया के चार टुकड़े उसे अन्य फॉल्ट लाइन से ज्यादा खतरनाक बनाते हैं. यहां और स्टडी की जरूरत है. एक टुकड़ा ज्यादा चिकना और फ्लैट… यानी खतरा ज्यादा वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के जियोफिजिसिस्ट हैरोल्ड टोबिन ने कहा कि हमें टाकोमा और सिएटल के पास इस फॉल्ट लाइन की और स्टडी करनी होगी. ताकि सही तबाही का अंदाजा लगाया जा सके. कैसकेडिया का यह टुकड़ा बाकी अन्य तीन टुकड़ों की तुलना में फ्लैट और चिकना है. इसकी वजह से ही भविष्य में भयानक भूकंप आ सकता है. टोबिन ने बताया कि कैसकेडिया सबडक्शन जोन की वजह से आने वाली सुनामी वॉशिंगटन के तटीय इलाके को पूरी तरह से खत्म कर देगा. असर अंदर के इलाकों तक देखने को मिलेगा. लैमोंट डोहर्टी अर्थ ऑब्जरवेटरी की मरीन जियोफिजिसिस्ट और इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता सुजैन कारबोट्ट ने बताया कि ये कैसकेडिया की नई स्टडी है. नए डेटा के साथ. हमने 1980 के दशक के डेटा का पुराना और घटिया डेटा इस्तेमाल नहीं किया है.  

भारत ने पापुआ न्यू गिनी को राहत सामग्री में 13 टन आपदा राहत सामग्री भेजी, की आर्थिक मदद

नई दिल्ली भारत ने पापुआ न्यू गिनी की मदद के लिए 19 टन राहत सामग्री भेजी है। पिछले महीने हुए भूस्खलन की वजह से एंगा प्रांत में भारी क्षति का सामना करना पड़ा था। इस दौरान 2000 लोगों की मौत हो गई थी। भारत ने 10 लाख डॉलर सहायता भेजी यह भारत की ओर से पापुआ न्यू गिनी के लिए घोषित 10 लाख डॉलर की सहायता के हिस्से के रूप में भेजी गई है। इसमें खाद्य पदार्थ, अस्थायी शरण स्थली और दवाएं शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक्स पोस्ट में कहा है कि इस संकट के समय भारत और पापुआ न्यू गिनी साथ खड़ा है। छह टन दवाएं भी भेजी गई भेजी गई राहत सामग्री में 13 टन आपदा राहत सामग्री शामिल है, जिसमें अस्थायी शरण स्थली, पानी के टैंक, स्वच्छता संबंधी किट और खाद्य सामग्री शामिल हैं। आपात स्थिति में उपयोग के लिए छह टन दवाएं भी भेजी गई हैं। इनमें डेंगू और मलेरिया का पता लगाने वाली इमरजेंसी किट भी शामिल हैं।

भीषण सड़क हादसा, ट्रक से टक्कर के बाद घंटों कार में फंसा रहा परिवार, तीन लोगों की मौत

जयपुर राजस्थान के जयपुर ग्रामीण के रायसर थाना क्षेत्र में एक कार और ट्रक की भिड़त में कार में सवार तीन साल की एक बच्ची सहित तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि कार में सवार सभी लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और सीकर जिले के खाटू श्याम जी मंदिर में दर्शन-पूजन कर लौट रहे थे। रायसर थानाधिकारी महेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि ट्रक से टक्कर के बाद कार सड़क के किनारे खाई में गिर गई और ट्रक भी कार पर जा गिरा। उन्होंने बताया कि कार में रवि (28), उसकी बहन रिंकी (24), उसका पति अंकित (30) और उनकी तीन साल की बेटी देवकी सवार थे। उन्होंने बताया कि हादसे में रवि, अंकित और देवकी की मौत हो गई, जबकि रिंकी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद ट्रक चालक फरार हो गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे। मामले की जांच की जा रही है।  

कुवैत में एक इमारत में लगी भीषण आग में मृतक भारतीयों के पार्थिव शरीर वापस लाने के प्रयास शुरू

BJP members elected the new state president of UP behind closed doors

दुबई कुवैत में एक इमारत में लगी भीषण आग में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए किये जा रहे कार्यों की निगरानी करने और इस घटना में मारे गए लगभग 40 भारतीयों के शवों को शीघ्र भारत भेजने के लिए विदेश राज्य मंत्री ( MoS ) कीर्तिवर्धन सिंह बृहस्पतिवार को कुवैत पहुंचे। दक्षिणी शहर मंगाफ में सात मंजिला एक इमारत में बुधवार को भीषण आग लग गई थी जिसमें 195 प्रवासी श्रमिक रहते थे। इस घटना में कम से कम 49 विदेशी कामगारों की मौत हो गई और 50 अन्य घायल हो गए। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह आग हादसे में घायल हुए लोगों की सहायता के प्रयासों और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मारे गए लोगों के पार्थिव शरीरों की शीघ्र वतन वापसी के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए कुवैत पहुंचे हैं।”   अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में कहा कि कुवैत के अधिकारी दक्षिणी कुवैत के मंगाफ क्षेत्र में आग लगने की विनाशकारी घटना में मारे गए लोगों के शवों का डीएनए परीक्षण करा रहे हैं। उनके अनुसार, घटना में मारे गए भारतीयों के पार्थिव शरीर वापस लाने के लिए भारतीय वायुसेना का एक विमान तैयार रखा गया है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात एक बयान में कहा, “कुवैत के मंगाफ क्षेत्र में श्रमिक आवास सुविधा में आज सुबह हुई दुर्भाग्यपूर्ण और आग लगने की दुखद घटना में लगभग 40 भारतीयों की मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हो गए।” प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना को “दुखद” बताया और विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, विदेश सचिव विनय क्वात्रा और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा सहित अन्य लोगों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।   बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ से मृतक भारतीय नागरिकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने कुवैती समकक्ष अब्दुल्ला अली अल-याह्या से फोन पर बात की और उनसे मृतकों के पार्थिव शरीरों को शीघ्र भारत भेजने का आग्रह किया। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “कुवैती विदेश मंत्री अब्दुल्ला अली अल-याह्या से कुवैत में आग की त्रासदी पर बात की। इस संबंध में कुवैती अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों से अवगत कराया गया। आश्वासन दिया गया कि घटना की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।” उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई है, उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने का आग्रह किया।   उन्होंने (कुवैत के विदेश मंत्री ने) कहा कि घायलों को अपेक्षित चिकित्सा सुविधा मिल रही है।” अधिकारियों ने कहा कि भारत के अधिकतर मृतक केरल के रहने वाले थे। कुवैत में भारत का मिशन संबंधित कुवैती अधिकारियों से घटना के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर रहा है। घायलों को वर्तमान में कुवैत के पांच सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनकी उचित चिकित्सा देखभाल की जा रही है और ध्यान दिया जा रहा है। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, भर्ती किए गए अधिकांश घायलों की हालत स्थिर है। घटना के बाद कुवैत में भारत के राजदूत आदर्श स्वैका तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने अस्पतालों में जाकर वहां भर्ती भारतीय नागरिकों का हालचाल भी जाना।    

मराठा आरक्षण: अनशन निलंबित, मांगों को स्वीकार करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को एक महीने का दिया समय: मनोज जरांगे

नई दिल्ली मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने छह दिन पहले आरक्षण के मुद्दे पर शुरू किया अपना अनिश्चितकालीन अनशन बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया और समुदाय की मांगों को स्वीकार करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को एक महीने का समय दिया। उन्होंने यह घोषणा उस समय की जब महाराष्ट्र के मंत्री और मराठा आरक्षण उप-समिति के सदस्य शंभूराज देसाई, शिवसेना सांसद सांदीपन भुमरे ने जालना जिले में उनके पैतृक गांव अंतरवाली सरती में उनसे मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। सरकार को एक महीने का समय दे रहे इससे पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने भी अंतरवाली सरती में जरांगे से मुलाकात की। धरना स्थल पर लोगों को संबोधित करते हुए जरांगे ने कहा, “हम मराठा समुदाय की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को एक महीने का समय दे रहे हैं। लेकिन हम आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी भी जारी रखेंगे। अगर सरकार हमें आरक्षण नहीं देती है तो हम इसमें (चुनाव में) जाएंगे और इसे (आरक्षण) हासिल करेंगे।” उन्होंने कहा, “अगर एक महीने में मांगें पूरी नहीं की गईं तो न तो विपक्ष के सदस्य और न ही सरकार में बैठे लोग हमारे पास आएं। हम (राज्य विधानसभा चुनावों में) उम्मीदवारों के नाम घोषित करके उन्हें हरा देंगे।” सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाएं जरांगे ने आठ जून से अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। वह मसौदा अधिसूचना के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं, जिसके तहत कुनबियों को मराठा समुदाय के सदस्यों के “सगे सोयरे” (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता दी गई है। साथ ही वह कुनबियों को मराठा के रूप में मान्यता देने के लिए एक कानून की भी मांग कर रहे हैं। कुनबी एक कृषि प्रधान समूह है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आता है। जरांगे मांग कर रहे हैं कि सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाएं, जिससे वे आरक्षण के लाभ के लिए पात्र बन सकें। मुद्दे पर कल एक बैठक बुलाई जाएगी जरांगे से मुलाकात के बाद मंत्री देसाई ने कहा, “इस मुद्दे पर कल एक बैठक बुलाई जाएगी। पिछले पांच महीनों में से दो महीने आदर्श आचार संहिता (लोकसभा चुनावों के लिए) लागू होने में बीत चुके हैं। हम एक महीने में मराठा समुदाय की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेंगे। अगर काम में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता होगी, तो हम मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अनुमति से ऐसा करेंगे।” सरकार ने मराठा समुदाय को मूर्ख बनाया जरांगे से मुलाकात के बाद दानवे ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि उन्होंने मराठा समुदाय की मांगें स्वीकार कर ली हैं, तो उन्हें पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “सरकार ने वाशी में (जारंगे की मांगों पर) मराठा समुदाय को मसौदा अधिसूचना सौंपकर मूर्ख बनाया है। अगर सरकार ने अधिसूचना जारी की है, तो इस पर निर्णय लिया जाना चाहिए।” मंत्री सावंत ने कहा, “आंदोलन जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए। सरकार को जल्दी से जल्दी फैसला लेना चाहिए और मराठा समुदाय को जश्न मनाने का मौका देना चाहिए।”  

एक बार फिर RSS की तरफ बढ़ रही शिवसेना, RSS की तारीफ

नई दिल्ली कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी इंडिया अलायंस और महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी के घटक दल शिवसेना ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके सरकार्यवाह मोहन भागवत की तारीफ की है और उनके बयानों के बहाने भाजपा पर तीखा तंज कसा है। अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि क्या मोहन भागवत के क्लास लगाने से भाजपा का मौजूदा चरित्र बदलने वाला है? पार्टी ने आगे लिखा है कि जब तक भाजपा के सूत्र मोदी-शाह के हाथ में हैं, तब तक संघ नेताओं की फटकार चिकने घड़े पर पानी डालने के सिवा कुछ नहीं कहा जा सकता है। मोहन भागवत के बयान का उल्लेख करते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने कहा है कि जनसेवक कौन है और जन सेवा के नाम पर अहंकार कौन पाल रहा है? आलेख में सेना ने लिखा है कि संघ भाजपा का मातृ संगठन है। भाजपा को वर्तमान स्थिति में लाने के लिए संघ के स्वयंसेवकों ने कड़ी मेहनत की। संघ वहां पहुंच गया है जहां भाजपा नहीं पहुंची। झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर-पूर्व के सुदूर राज्य, इन सुदूर इलाकों में संघ के स्वयंसेवकों के अपार प्रयासों के कारण ही भाजपा ने जड़ें जमाईं और सफलता पाई है। आलेख में आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा गया है कि संघ ने अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, असम जैसे राज्यों में भी काम किया। संघ झारखंड, छत्तीसगढ़ के जंगली इलाकों में है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भाजपा की शत-प्रतिशत सफलता संघ के निर्माण के कारण है, लेकिन पिछले दस वर्षों में मोदी-शाह ने संघ का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया। शिवसेना ने मोदी-शाह की जोड़ी पर हमला बोलते हुए लिखा है कि इस व्यापारिक जोड़ी ने दिखा दिया कि संघ का मतलब ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो’ है वरना भाजपा अध्यक्ष नड्डा में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह कह सकें कि हमें संघ की जरूरत नहीं है। शिवसेना ने लिखा है कि ये बयान देने की प्रेरणा उन्हें मोदी-शाह से मिली। भाजपा के मौजूदा नेतृत्व पर आक्रामक शिवसेना ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भाजपा ने अपने चरित्र को दागदार किया है। द्रौपदी का चीरहरण कौरवों ने किया था, लेकिन भाजपा का चीरहरण गुजरात के दुर्योधन ने किया, किसी वक्त गुजरात के दुर्योधन भी संघ के विनम्र स्वयंसेवक थे। मोदी-शाह शासनकाल में संघ का पतन हुआ है। शिवसेना ने लिखा है कि 2024 के चुनाव में भाजपा मोदी-शाह के अहंकार की वजह से हारी है। आलेख में शिवसेना और भाजपा के रिश्तों की भी बात कही गई है और कहा गया है कि  शिवसेना मूलत: हिंदुत्ववादी विचारों की पार्टी है और हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना एक साथ आए। संघ नेतृत्व की भूमिका थी कि यह गठबंधन न टूटे, लेकिन मोदी-शाह के अहंकार और व्यापारिक रवैए के कारण संघ की बात सुने बिना ही शिवसेना से गठबंधन तोड़ दिया गया। इसके साथ ही शिवसेना ने आरोप लगाया है कि संघ में भी मोदी-शाह ने चमचों की फौज तैयार कर दी थी, जिसकी वजह से इस मनमानी का किसी ने विरोध नहीं किया। आलेख में कहा गया है कि टीम मोदी ने यह धारणा बनाई कि मोदी जी ही हिंदुत्व के ब्रांड और शिल्पकार हैं, इस तरह का ढोल पीट कर उन्होंने संघ के हिंदुत्ववादी भूमिका को चुनौती दी है, जबकि मणिपुर हिंसा के मामले में मोदी-शाह का कायराना रवैया संघ पचा नहीं पा रहा है। शिवसेना ने लिखा है कि पहले संघ के कार्यकर्ता भाजपा की जीत के लिए कड़ी मेहनत करते थे। इस समय संघ कार्यकर्ता भाजपा के प्रचार से दूर रहे। यहां तक कि मोदी-की टीम की  गडकरी को भी कैबिनेट से हटाने की योजना थी, लेकिन चूंकि भाजपा 240 पर अटक गई थी, इसलिए उन्हें गडकरी को कैबिनेट में लेना पड़ा। शिवसेना ने लिखा कि पिछले दस सालों में मोदी-शाह ने संघ की सोच, संघ संरक्षकता, नैतिकता की खुराक को झिड़क दिया है। वे अभिमान और अहंकार से ग्रसित हो गए हैं।  

शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया परामर्श, बोर्ड परीक्षाओं के दौरान मुफ्त उपलब्ध होंगे सैनिटरी पैड्स, मिलेगी ब्रेक लेने की इजाजत

Farmers' loan waived off in Telangana, Rahul Gandhi said - he did what he said

नई दिल्ली केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को स्कूलों को जारी परामर्श में कहा कि मासिक धर्म से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए छात्राओं को 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान आवश्यक विराम लेने की अनुमति दी जानी चाहिए तथा सभी परीक्षा केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। मंत्रालय ने इस बात पर गौर किया कि लड़की के समग्र कल्याण के लिए मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन जरूरी है और यह उसके शैक्षणिक प्रदर्शन के रास्ते में नहीं आना चाहिए।  सभी केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध हो मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के लिए परामर्श जारी किया है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए सभी केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लड़कियों को परीक्षा के दौरान आवश्यक स्वच्छता उत्पाद उपलब्ध हो सकें।” छात्राओं को सशक्त बनाने पर भी जोर शिक्षक इसने कहा, ‘‘छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने, असुविधा को कम करने और परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित करने के लिए आवश्यक विराम लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।” मंत्रालय ने कहा, ‘‘छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।” मंत्रालय ने छात्राओं के साथ उनकी मासिक धर्म संबंधी जरूरतों के संबंध में सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने के महत्व पर जोर दिया है और साथ ही उन्हें परीक्षाओं में आत्मविश्वास के साथ भाग लेने और अपनी शैक्षणिक क्षमता हासिल करने के लिए सशक्त बनाने पर भी जोर दिया है। 

चीन और पाकिस्तान ने एक बार फिर से कश्मीर राग अलापा, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब, CPEC पर भी घेरा

नई दिल्ली चीन और पाकिस्तान ने एक बार फिर से भारत के जम्मू और कश्मीर को लेकर बयान जारी किया है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी भारत ने दोनों देशों को खूब खरी-खरी सुनाई। भारत ने चीन और पाकिस्तान के ताजा संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के ‘‘अनुचित’’ संदर्भों को बृहस्पतिवार को दृढ़ता से खारिज कर दिया। भारत ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख “भारत के अभिन्न अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे”। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के बीच वार्ता के बाद गत सात जून को बीजिंग में संयुक्त बयान जारी किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने सात जून को चीन और पाकिस्तान के बीच संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अनुचित संदर्भों को देखा है। हम ऐसे संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमारी स्थिति सुसंगत है और संबंधित पक्षों को अच्छी तरह से पता है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे।” जायसवाल संयुक्त बयान पर मीडिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। जायसवाल ने कहा, ‘‘किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त बयान में शामिल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘‘इसी संयुक्त बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत गतिविधियों और परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें से कुछ भारत के संप्रभु क्षेत्र में हैं, जो पाकिस्तान द्वारा जबरन और अवैध कब्जे में हैं।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आघात करने वाले इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को मजबूत करने या वैध बनाने के लिए अन्य देशों द्वारा किए गए किसी भी कदम का दृढ़ता से विरोध करते हैं और इसे अस्वीकार भी करते हैं।’’  

जम्मू-कस्मीर पुलिस ने मामले में 50 संदिग्धों को हिरासत में लिया, रियासी आतंकी हमला केस में पुलिस को बड़ी कामयाबी

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के रियासी में पिछले दिनों श्रद्धालुओं की बस पर हुए आतंकी हमले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जम्मू-कस्मीर पुलिस ने मामले में 50 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। रियासी की एसएसपी मोहिता शर्मा ने कहा, “जिला पुलिस रियासी ने पी/एस पौनी के कांडा इलाके में तीर्थयात्रियों की बस पर हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के सिलसिले में 50 व्यक्तियों को हिरासत में लिया है।” चार दिन पहले रविवार ( 09 जून) को हुई इस घटना में कई लोग हताहत हो गए थे । केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में हाल ही में हुए हमलों में शामिल आतंकवादियों का पता लगाने के लिए विभिन्न जिलों के वन क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान यह कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने बताया कि एक महिला ने दो व्यक्तियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर जम्मू के बाहरी इलाके नरवाल बाईपास क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। पिछले चार दिन में आतंकवादियों ने रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में चार जगहों पर हमले किए हैं, जिनमें नौ तीर्थयात्रियों और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान की मौत हो गई तथा सात सुरक्षाकर्मी समेत कई अन्य घायल हो गए। कठुआ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी भी मारे गए। उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुबह डोडा जिले में गंडोह के कोटा टॉप, चट्टागल्ला और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान फिर से शुरू किया, जहां मंगलवार और बुधवार को आतंकवादियों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मियों सहित सात सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने बुधवार को जिले में दो हमलों में शामिल चार आतंकवादियों के स्केच जारी किए थे और उनकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 20 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। इससे पहले पुलिस ने रविवार को रियासी जिले में तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हुए हमले में शामिल एक आतंकवादी पर 20 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया था और उसका स्केच भी जारी किया था। इस हमले में नौ लोग मारे गए थे और 41 घायल हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि रियासी और राजौरी जिले में तलाशी अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी के स्केच से मिलते-जुलते चेहरे वाले एक शख्स को दोपहर में रियासी में एक बस से हिरासत में लिया गया और उसे पूछताछ के लिए ले जाया गया। उन्होंने बताया कि राजौरी के नौशेरा और पास के पुंछ में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। आतंकी खतरे के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद कठुआ, सांबा और जम्मू जिलों में भी सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है। कठुआ में मंगलवार रात से शुरू हुई और 15 घंटे से अधिक समय तक चली भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था। इस अभियान में सीआरपीएफ के एक जवान की भी मौत हो गई थी, जबकि एक नागरिक घायल हो गया। पुलिस ने बुधवार को एक परामर्श जारी कर जम्मू क्षेत्र के निवासियों से संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की आवाजाही के बारे में सतर्क रहने का आग्रह किया था। राजौरी और जम्मू जिलों के कुछ हिस्सों में आतंकी खतरे की आशंका जताने वाली खुफिया सूचनाओं के बाद यह परामर्श जारी किया गया। 

भले ही कानून महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए बने हैं, लेकिन मर्द ही हमेशा गलत नहीं होता: इलाहाबाद हाई कोर्ट

नई दिल्ली   यौन उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही कानून महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए बने हैं, लेकिन मर्द ही हमेशा गलत नहीं होता। कोर्ट ने शादी के झूठा वादा करके यौन उत्पीड़न करने के आरोपों की सुनवाई करते हुए यह बात कही। सारे तथ्यों के सामने आने के बाद अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केस को साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों पर होती है। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून महिला केंद्रित हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना है। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि हमेशा मर्द ही गलत नहीं होते। अदालत ने आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अर्जी पर यह बात कही। आरोपी पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत भी केस दर्ज हुआ था। पीड़िता ने 2019 में केस दर्ज कराया था और कहा था कि आरोपी उसके साथ यौन संबंध बनाता रहा और वादा किया था कि शादी करेगा। लेकिन बाद में उसने शादी करने से इनकार कर दिया। यही नहीं महिला ने आरोप लगाया था कि उस शख्स ने जातिसूचक शब्द कहे थे। आरोपी शख्स के खिलाफ 2020 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने 2023 में आरोपी शख्स को रेप केस से बरी कर दिया था। अदालत में आरोपी का कहना था कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। उसने महिला से शादी करने से तब इनकार कर दिया था, जब उसे पता चला कि वह ‘यादव’ बिरादरी से नहीं है, जैसा कि उसने दावा किया था। यही नहीं पूरे मामले की पड़ताल के बाद अदालत ने पाया कि आरोप लगाने वाली महिला की पहले भी 2010 में किसी शख्स से शादी हुई थी, लेकिन दो साल बाद ही वह अलग रहने लगी थी। आरोप लगाने वाली महिला ने खुद छिपाई थी पहली शादी केस की जांच हुई तो पता चला कि आरोप लगाने वाली महिला ने अपनी पहली शादी की बात भी छिपाई थी। इसके अलावा जाति भी गलत बताई थी। इस पर अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला ठीक दिया था। हाई कोर्ट ने आरोपी पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज करने पर कहा कि समाज में किसी भी रिश्ते के शादी में तब्दील होने के लिए आज भी जाति मायने रखती है। बेंच ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में नाकाम रही कि आखिर उसने जाति को लेकर झूठ क्यों बोला और उसकी जरूरत क्या थी।  

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव एक महीने से ज्यादा चला, पाकिस्तानी सांसद ने सवाल किया कि आखिर हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते

इस्लामाबाद भारत में चुनावों के बाद नई सरकार का गठन हो गया है। नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में आए हैं। भारत में सात चरणों में चुनाव हुए और इसमें किसी भी तरह की धांधली का आरोप नहीं लगा है, जो पाकिस्तान के लिए हैरानी वाली बात है। पाकिस्तान की संसद में भी इससे जुड़ा मुद्दा उठाया गया है। पाकिस्तान के चुनावों में लगातार धांधली के आरोप लगे हैं, जिसे लेकर एक सांसद ने भारत के चुनावों की तारीफ की। उसने पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था को लताड़ लगाते हुए कहा कि भारत में एक महीने का इलेक्शन हो गया। लेकिन हम सिर्फ लड़ते रहते हैं। चुनावों के रिजल्ट नहीं मानते। पाकिस्तान में विपक्षी सांसद शिबली फराज ने भारतीय चुनावों की प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ईवीएम के जरिए एक साथ लंबे चुनाव आयोजित किए गए। उन्होंने इस बात की भी तारीफ की कि किसी भी धोखाधड़ी के आरोपों के बिना नई सरकार बनी। साथ ही सवाल किया कि आखिर पाकिस्तान ऐसा क्यों नहीं कर सकता? उन्होंने कहा कि सही से चुनाव न हो पाने के कारण हमारा पॉलिटिकल सिस्टम खोखला हो गया है। पाकिस्तान के चुनावों पर उठे सवाल पाकिस्तान में 8 फरवरी को चुनाव हुए थे। लेकिन इससे पहले ही यह साफ हो गया था कि सत्ता में किसकी सरकार आएगी। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की लहर पूरे पाकिस्तान में थी। लेकिन इमरान खान को सेना पसंद नहीं करती। सेना चाहती थी कि नवाज शरीफ फिर सत्ता में आएं। चुनावों में इमरान खान की पार्टी को प्रत्याशी उतारने से प्रतिबंधित कर दिया गया। वहीं जब रिजल्ट आए तो इसमें धांधली के आरोप लगे। आरोप लगे कि इमरान के समर्थक निर्दलीय उम्मीदवारों को जबरन हरा दिया गया। पाकिस्तान के चुनावों में धांधली के आरोप पाकिस्तान में हुए ‘कथित चुनाव’ ने पूरे देश की भद्द पिटाई थी। अमेरिकी कांग्रेस के 31 सांसदों ने राष्ट्रपति बाइडेन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों की जांच होने तक पाकिस्तान की नई सरकार को मान्यता न देने का आग्रह किया गया था। क्योंकि पाकिस्तान में चुनाव शांतिपूर्ण नहीं हुआ। 8 फरवरी के दिन मोबाइल सेवाओं को अवरुद्ध कर दिया गया था। कई इलाकों में हिंसा भी देखी गई थी। चुनावों के नतीजे जारी करने में भी देरी हुई, जिससे धांधली का शक बढ़ा है।

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