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एक साल में AI ले लेगा 99% जॉब्स, ये नौकरियां बचेंगी: एक्सपर्ट की भविष्यवाणी

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों की जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। आज AI पॉवर्ड डिवाइसेज की मदद से लोग हर तरह का काम निकलवा रहे हैं। हालांकि वह दिन अब दूर नहीं है जब AI महज हेल्पर की तरह हमारी मदद करने की बजाय, हमें रिप्लेस ही कर दे। ऐसा कहना है कि जाने-माने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की का। डॉ. रोमन ने चेतावनी दी है कि महज एक साल में AI इंसानों की 99 फीसदी नौकरियां खा जाएगा। उन्होंने यह तक कह दिया है कि कोई भी ऐसा इंसानी काम नहीं दिख रहा, जिसे ऑटोमेट ना किया जा सकता हो। याम्पोल्स्की के मुताबिक 2045 तक समाज एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल पॉइंट पर पहुंच सकता है जहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हुए, डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले इंडस्ट्रियल बदलावों से बिल्कुल अलग होंगे। बता दें कि कम्प्यूटर साइंटिस्ट डॉ. याम्पोल्स्की लातविया से आते हैं और वे फिलहाल लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने AI सुरक्षा और जोखिम पर 100 से ज्यादा एकेडमिक पेपर पब्लिश किए हैं। उन्होंने हाल ही में स्टीवन बार्टलेट द्वारा होस्ट किए जाने वाले ‘द डायरी ऑफ ए CEO’ में यह बातें कही हैं। किसी भी फिजिकल लेबर को किया जा सकता है ऑटोमेट टाइम्स ऑफ इंडिया लाइक रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत के दौरान, डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा, “पांच सालों में किसी भी तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। तो हम एक ऐसी दुनिया देख रहे हैं जहां बेरोजगारी का स्तर ऐसा होगा जो हमने पहले कभी नहीं देखा। मैं 10 प्रतिशत बेरोज़गारी की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि 99 प्रतिशत की बात कर रहा हूं।” कौन सी नौकरियां बचने की संभावना? डॉ. याम्पोल्स्की ने बताया है कि कौन सी नौकरियां बचने की संभावना है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “आपके पास सिर्फ वही नौकरियां बचेंगी जहां किसी भी वजह से आप चाहेंगे कि कोई दूसरा इंसान आपके लिए वह काम करे। कुछ नौकरियां ऐसी होती हैं जहां इंसान की जरूरत होती है। हो सकता है आप अमीर हों और किसी भी वजह से आप एक इंसानी अकाउंटेंट चाहते हों।” उन्होंने कहा कि इंसानों द्वारा बनाए गए सामानों के लिए शौक की वजह से भी कुछ नौकरियां बीच सकती हैं। उन्होंने कहा, “आपको ऐसे लोगों के लिए एक छोटा सा मार्केट मिल सकता है जो अभी भी हाथ से बनी चीज़ों को पसंद करते हैं।” वहीं AI की निगरानी और रेगुलेशन का जॉब भी बचा हुआ रहेगा। हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा कि लंबे समय में AI को पूरी तरह से कंट्रोल करना शायद नामुमकिन हो, लेकिन उन्होंने कहा है कि इंसानी निगरानी बदलाव की गति को धीमा कर सकती है।

महाशक्तियों के बीच भारत से दोस्ती की होड़, चीन ने भी बढ़ाया दोस्ती का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में नया मोड़

महाशक्तियों में भारत से दोस्ती की होड़, अमेरिका के बाद अब चीन ने भी बढ़ाया हाथ भारत से दोस्ती का दौर तेज, अमेरिका के बाद चीन ने भी बढ़ाया मित्रता का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में U टर्न महाशक्तियों के बीच भारत से दोस्ती की होड़, चीन ने भी बढ़ाया दोस्ती का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में नया मोड़ नई दिल्ली  साल 2026 भारत की विदेश नीति के लिए एक नई सुबह लेकर आया है. जहां एक तरफ भारत को रोज धमक‍ियां देने वाले ट्रंप को भारत पर से टैर‍िफ हटाने के ल‍िए मजबूर होना पड़ा. वहीं, हिमालय के उस पार से भी शांति और मेल-मिलाप के संकेत मिल रहे हैं. भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग का रव‍िवार का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बीजिंग अब नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को शत्रुता के बजाय सहयोग के तराजू पर तौलने को मजबूर है. चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने एक्‍स पर ल‍िखा, चीन भारत के साथ मिलकर उस महत्वपूर्ण आम सहमति को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के लिए सहयोग के भागीदार और विकास के अवसर हैं. यह बयान पिछले कुछ वर्षों के कड़वे और तनावपूर्ण संबंधों के बाद एक बड़ी नरमी की ओर इशारा करता है. उन्होंने पारस्परिक लाभ के दायरे को और अधिक विस्तार देने की बात कही है. इसका सीधा अर्थ यह है कि दोनों देशों की आर्थिक रणनीतियों को एक दिशा में लाकर व्यापारिक और व्यावहारिक सहयोग को गहरा किया जाए. ब्रिक्स में भारत का साथ चीन ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत की भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है. बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार करना चीन की कूटनीतिक विवशता और रणनीति दोनों का हिस्सा है. राजदूत ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, ताकि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के करीब आ सकें. बीजिंग के इस हृदय परिवर्तन के पीछे की असली वजह आखिर चीन, जो कल तक सीमा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए था, आज दोस्ती की बात क्यों कर रहा है? इसके पीछे वजह है.     चीन की अपनी अर्थव्यवस्था इस समय मंदी और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है. भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार को लंबे समय तक छोड़ना चीन के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है. व्यापारिक घाटे और भारतीय कड़े रुख के कारण चीनी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है.     अमेरिका ने जिस तरह से भारत के साथ अपने रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया है, उसने चीन को बेचैन कर दिया है. हाल ही में भारत को शुल्कों में मिली छूट इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बन रहा है. चीन को डर है कि अगर वह अब भी अड़ा रहा, तो भारत पूरी तरह से पश्चिमी गुट के पाले में चला जाएगा.     रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से वैश्विक व्यवस्था बदली है, उसमें भारत एक ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनकर उभरा है. चीन जानता है कि एशिया की राजनीति में बिना भारत के सहयोग के वह अपनी धाक नहीं जमा सकता. भारत की गजब ड‍िप्‍लोमेसी चीन के इस शांति प्रस्ताव को भारत बड़े ही सतर्क नजरिए से देख रहा है. भारतीय विदेश नीति के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. इसल‍िए भारत बहुत सोच समझकर आगे बढ़ रहा है. 2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के बीच जो ‘विश्वास का संकट’ पैदा हुआ है, वह महज बयानों से दूर नहीं हो सकता. भारत का रुख साफ है क‍ि जब तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक व्यापार और संबंधों का सामान्य होना मुश्किल है. अमेरिका या चीन कौन बेहतर दोस्‍त भारत इस समय उस स्थिति में है जहां वह दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के साथ अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है. एक तरफ अमेरिका है जो भारत को रक्षा तकनीक दे रहा है, और दूसरी तरफ चीन है जो व्यापारिक लाभ का लालच दे रहा है. भारत की असली चुनौती इन दोनों के बीच अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बचाए रखने की है. राजदूत जू फेइहोंग का बयान निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन इसे जमीन पर उतरने में अभी समय लगेगा. 2026 की यह बदली हुई कूटनीति दिखाती है कि भारत अब किसी का ‘पिछलग्गू’ नहीं, बल्कि वह केंद्र है जिसके इर्द-गिर्द महाशक्तियों की नीतियां घूम रही हैं. वहीं भारत का लक्ष्य स्पष्ट है. साझेदारी में अवसर तो तलाशने हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की कीमत पर नहीं. चीन के साथ ‘सहयोग के दायरे’ को बढ़ाने से पहले पुरानी कड़वाहटों और सीमा विवादों का स्थायी समाधान जरूरी है.

सत्ता बनाम सुधारवादी: इस्तीफे की मांग पड़ी भारी, नोबेल विजेता नरगिस सहित कई हस्तियों की गिरफ्तारी

ईरान   ईरानी सुरक्षा बलों ने देश में जारी सुधारवादी आंदोलन से जुड़ी प्रमुख हस्तियों को हिरासत में लेने के लिए अभियान शुरू कर किया। सोमवार को प्रसारित खबरों में यह जानकारी सामने आई है। खबरों के मुताबिक, सुरक्षा बलों के इस कदम से दमनकारी कार्रवाई और भी तेज हो गई है। इससे पहले अधिकारियों ने हिंसा के जरिए देशव्यापी प्रदर्शनों को दबा दिया था। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए थे और हजारों अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया था। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को गिरफ्तार कर सात साल से अधिक जेल की एक अन्य सजा सुनाई गई है। यह कदम ईरान सरकार के अशांति के खिलाफ बगावत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को चुप कराने का प्रयास दिखाई देता है क्योंकि ईरान, अमेरिका के साथ नई परमाणु वार्ता का सामना कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो वह देश पर हमला कर सकते हैं। मीडिया में प्रसारित खबरों में ईरान की धर्मतांत्रिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे सुधारवादी आंदोलन के कार्यकर्ताओं के हवाले से बताया गया कि उनके कम से कम चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई सुधारवादी गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाले सुधारवादी मोर्चे के प्रमुख अजर मंसूरी और पूर्व राजनयिक मोहसेन अमीनजादेह शामिल हैं।  इब्राहिम असगरजादेह को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर धावा बोलने वाले विद्यार्थियों का नेतृत्व किया था। इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां संभवतः जनवरी में दिए गए एक सुधारवादी बयान से जुड़ी हैं, जिसमें ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से इस्तीफा देने और देश की देखरेख के लिए एक अंतरिम शासी परिषद नियुक्त करने का आह्वान किया गया था।  

ब्रिटेन को मिल सकती है पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री, शबाना महमूद का PoK से क्या है रिश्ता?

लंदन ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की सरकार गिर सकती है। इस बीच युनाइटेड किंगडम में चर्चाएं तेज हैं कि देश को पहली मुस्लिम महिला पीएम मिल सकती है। इसके लिए शबाना महमूद के नाम की चर्चा जोरों पर है। फिलहाल वह ब्रिटिश सरकार में होम मिनिस्टर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें लेबर पार्टी में सबसे बड़ी नेता के तौर पर देखा जा रहा है, जो पीएम के पद तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थितियां तब बन रही हैं, जब दुनिया भर की सरकारों को एपस्टीन फाइल्स वाले विवाद ने हिलाकर रख दिया है। शबाना महमूद को कीर स्टार्मर के करीबी लोगों में शुमार किया जाता है। 45 साल की शबाना पेशे से वकील हैं और एक युवा नेता हैं।   लेबर पार्टी में उनकी पहचान एक कुशल वक्ता के तौर पर रही है। उनके परिवार का ताल्लुक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर कस्बे से रहा है। उनका जन्म ब्रिटेन के ही बर्मिंगम में हुआ था। उनकी मां का नाम जुबैदा है और पिता का नाम महमूद अहमद है। 2025 में होम मिनिस्टर के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के बाद से उनके आगे सबसे बड़ा टास्क ब्रिटेन की सीमा सुरक्षा का रहा है। ऑक्सफोर्ड के लिंकन कॉलेज से लॉ की डिग्री हासिल करने वाली शबाना महमूद को 2010 में पहली बार सांसद बनने का मौका मिला था। वह उन चंद मुस्लिम महिलाओं में से हैं, जो ब्रिटेन में सांसद बनी हैं। इनमें रौशनआरा अली और यासमीन कुरैशी के नाम भी शामिल हैं। शबाना महमूद ने लेबर पार्टी से ऐसे लोगों को भी जोड़ा है, जो बीते कुछ सालों में उससे छिटक गए थे। इसकी वजह यह है कि लेबर पार्टी ने गाजा में इजरायली हमलों का पक्ष लिया था, जबकि शबाना महमूद खुलकर इजरायल का विरोध करती रही हैं। ऐसे में एक तबका है, जो शबाना महमूद को पसंद करता है और उनकी राय के चलते वापस लेबर पार्टी से जुड़ा है। दरअसल एपस्टीन फाइल्स वाले मामले में कीर स्टार्मर को लेकर भी कयास लग रहे हैं और कहा जा रहा है कि उनकी कुर्सी ही खतरे में है। ऐसी स्थिति में शबाना महमूद को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाने लगा है। फिलिस्तीन की समर्थक हैं शबाना महमूद, पर एक और बात दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ शबाना फिलिस्तीन की समर्थक हैं तो वहीं ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सख्त नियम बनाने की भी पैरोकार हैं। कीर स्टार्मर की सरकार ने बीते दिनों पीटर मैंडलसन को वॉशिंगटन में यूके के राजदूत के तौर पर नियुक्त किया था। इसे लेकर भी विवाद की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मेंडलसन का भी एपस्टीन से कनेक्शन जोड़ा जा रहा है। इसी के चलते विवाद गहरा गया है।

नफरत भरे बयान पर बवाल: ओवैसी ने बताया ‘नरसंहार की सोच’, शिकायत दर्ज—हिमंता सरमा ने क्या कहा?

हैदराबाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ एक कथित सोशल मीडिया वीडियो को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ओवैसी ने इस मामले में हैदराबाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। यह विवाद उस वीडियो को लेकर है, जिसे असम भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया था और बाद में हटा लिया। इस वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री सरमा को राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया है। वीडियो के दृश्य में दो लोग दिखाई देते हैं। उनमें से एक ने टोपी पहनी हुई थी और दूसरे ने दाढ़ी रखी थी। इसके कैप्शन में “प्वाइंट-ब्लैंक शॉट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। नफरत भरी भाषा अब सामान्य होती जा रही: ओवैसी ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दुर्भाग्य से, नरसंहार की मानसिकता वाली नफरत भरी भाषा अब सामान्य होती जा रही है।” ओवैसी ने अपनी शिकायत में सरमा पर ‘मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करने’, दोनों धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और ‘राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप लगाने’ की बात कही है। AIMIM प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, सार्वजनिक मंचों और भाषणों के जरिये मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान देते रहे हैं। ओवैसी की सख्त कार्रवाई की मांग ओवैसी के अनुसार, हाल के महीनों में यह बयानबाजी और भी उग्र हो गई है, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को गंभीर खतरा पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को पोस्ट किया गया यह वीडियो भले ही एक दिन बाद हटा लिया गया हो, लेकिन अब भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मुस्लिम समुदाय का स्पष्ट संकेत देने वाले किरदारों को निशाना बनाए जाने का चित्रण किया गया है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। ओवैसी ने मांग की कि इस मामले में कानून के तहत सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाने वाले ऐसे कृत्यों पर रोक लगाई जा सके। क्या बोले CM हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि अहर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है तो पुलिस गिरफ्तार करे। हालांकि, उन्होंने इस तरह के किसी वीडियो के बारे में जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बोलते रहेंगे।

पुतिन भी एपस्टीन फाइल्स में? 1005 बार नाम आने से बढ़ी हलचल, रिश्तों पर सवाल

वाशिंगटन अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी जेफ्री एपस्टीन की फाइलों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। इन लाखों पन्नों के दस्तावेजों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम कम से कम 1005 बार आया है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश उल्लेख न्यूज क्लिपिंग्स या रिपोर्ट्स से जुड़े हैं जो एपस्टीन को भेजी जाती थीं, लेकिन कुछ ईमेल्स में एपस्टीन की पुतिन से मुलाकात कराने की बार-बार कोशिशों का जिक्र है। हालांकि, इन फाइलों में कहीं भी यह साबित नहीं होता कि दोनों की कभी वास्तविक मुलाकात हुई। रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन ने रूसी अधिकारियों, पूर्व राजदूतों और यहां तक कि FSB से जुड़े लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश की थी। इस खुलासे के बाद हनीट्रैप और जासूसी की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इसे रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बड़ा घोटाला बताते हुए जांच शुरू करने की घोषणा की है, जबकि क्रेमलिन ने इन दावों को बकवास करार देते हुए खारिज कर दिया है। रूसी राजदूत से मिलता था एपस्टीन जारी दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन न्यूयॉर्क में रूस के पूर्व राजदूत विटाली चर्किन से नियमित रूप से मिलता रहता था। एपस्टीन ने चर्किन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक प्रमुख वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी दिलाने का ऑफर भी दिया था। वर्ष 2017 में चर्किन की अचानक मौत के बाद एपस्टीन ने रूस से संपर्क बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए। जून 2018 में एपस्टीन ने नॉर्वे के राजनेता थोरबजर्न जागलैंड (जो उस समय काउंसिल ऑफ यूरोप के सेक्रेटरी जनरल थे) को ईमेल किया। इस ईमेल में उसने लिखा कि जागलैंड को पुतिन से सुझाव देना चाहिए कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मुझसे बात करके जानकारी ले सकते हैं। एपस्टीन ने लिखा था कि चर्किन बहुत अच्छे थे, उन्होंने मेरी बातों के बाद ट्रंप को समझ लिया था। जागलैंड ने जवाब में कहा था कि वह लावरोव के असिस्टेंट से मिलकर यह बात पहुंचा देंगे। रूसी जासूसी और निवेश का कनेक्शन रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन के संबंध सर्गेई बेल्याकोव जैसे अधिकारियों से भी थे, जिनके लिंक रूस की खुफिया एजेंसी (FSB) से बताए जाते हैं। वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी शामिल हुआ था और रूसी अधिकारियों को पश्चिमी निवेश लाने की सलाह देता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन ने 2019 तक रूस के वीजा के लिए भी कोशिशें की थीं। हालांकि, इन दस्तावेजों में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि एपस्टीन की पुतिन से कभी मुलाकात हुई थी। पोलैंड के प्रधानमंत्री ने दिए जांच के आदेश इस खुलासे के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि उनका देश एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों से संभावित संबंधों की जांच शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रेस में मिल रहे बढ़ते सुराग, जानकारी और टिप्पणियां इस संदेह की ओर इशारा करती हैं कि बाल यौन शोषण का यह अभूतपूर्व घोटाला रूसी खुफिया सेवाओं द्वारा सह-आयोजित किया गया था। इस पर क्या बोला रूस? दूसरी ओर, रूस की सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि एपस्टीन और रूसी जासूसी के दावों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस सिद्धांत को किसी भी तरह से लिया जा सकता है, लेकिन गंभीरता से नहीं। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसे सिद्धांतों पर बहुत सारे चुटकुले बनाने का मन कर रहा है, लेकिन अपना समय बर्बाद न करें।  

अरब दुनिया का ड्रीम प्रोजेक्ट मुश्किल में! विजन 2030 क्यों फंस रहा, MBS के सामने क्या विकल्प बचे?

ब्लूमबर्ग, रियाद सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी आर्थिक योजना विजन 2030 रास्ते में ही हिचकोले मारने लगी है। ऐसे में विजन 2030 में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब अब इस विजन के लिए नई रणनीति पेश करेगा जिसके तहत खर्च और प्राथमिकताओं में फेरबदल किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में चल रही इस योजना पर नई और अपडेटेड रणनीति जल्द सामने आ सकती है, जिसमें बदलते आर्थिक हालात और बढ़ते वित्तीय बोझ को ध्यान में रखते हुए नीतियों और सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं में बदलाव किया जाएगा।   सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों की रणनीति को कैसे जनता और निवेशकों तक पहुंचाया जाए, इस पर चर्चा शुरू कर चुकी है। यह बातचीत सऊदी अरब में आयोजित अलऊला इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमीज़ कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई। उन्होंने संकेत दिया कि नई रणनीति में पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर खास जोर होगा, हालांकि इसके विस्तृत ब्योरे और लॉन्च की तारीख अभी तय नहीं की गई है। 2034 फीफा वर्ल्ड कप से जुड़े नए स्टेडियम पर ग्रहण इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) समेत कई वैश्विक संस्थाएं सऊदी सरकार से अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट संवाद की मांग कर रही हैं। माना जा रहा है कि सरकार 2034 फीफा वर्ल्ड कप से जुड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे नए स्टेडियम की योजनाओं की भी दोबारा समीक्षा कर रही है। तेल पर निर्भरता कम करने के मकसद से शुरू किए गए विजन 2030 के तहत अब खर्च की दक्षता पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर को कम किया जा सकेगा और बजट घाटे पर भी काबू पाया जा सकेगा। साथ ही, निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को आकर्षित करना अब इस योजना की बड़ी प्राथमिकता बन गया है। विजन 2030 पर कुल लागत करीब 2 ट्रिलियन डॉलर जा रही ब्लूमबर्ग के अनुमानों के मुताबिक, विजन 2030 पर कुल लागत करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इस बीच, वित्त मंत्री अल-जादान ने कहा, “हम लगातार अपनी नीतियों को दोबारा प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि निजी क्षेत्र अर्थव्यवस्था का नेतृत्व कर सके।” गौरतलब है कि सऊदी अरब 2022 से बजट घाटे में चल रहा है, क्योंकि आर्थिक विविधीकरण पर खर्च तेल से होने वाली आय से ज्यादा रहा है। सरकार का कहना है कि यह घाटा जानबूझकर स्वीकार किया गया है ताकि अर्थव्यवस्था में निवेश जारी रह सके। सरकारी अनुमान के मुताबिक, बजट घाटा 2025 में 5.3% से घटकर इस साल 3.3% रह सकता है। सऊदी अरब को करीब 58 अरब डॉलर फंडिंग की जरूरत हालांकि वॉल स्ट्रीट के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है। इस साल सऊदी अरब को करीब 58 अरब डॉलर की फंडिंग की जरूरत होगी और सरकार अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार से 17 अरब डॉलर तक जुटाने की योजना बना रही है। अल-जादान ने भरोसा जताते हुए कहा, “जरूरत पड़ी तो हमारे पास फंडिंग के कई रास्ते खुले हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में सऊदी जीडीपी तीन साल की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी, जिसमें नए ओपेक सप्लाई समझौते के तहत तेल क्षेत्र ने अहम भूमिका निभाई।

अप्रकाशित किताब लीक मामला: जनरल नरवणे से जुड़ी FIR, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

 दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार मंचों पर चल रही उन खबरों का संज्ञान लिया है, जिनमें यह दावा किया गया है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नाम की किताब की एक प्री-प्रिंट कॉपी सार्वजनिक रूप से प्रसारित की जा रही है। जांच में क्या पाया गया? इस किताब के प्रकाशन के लिए संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरी मिलना अभी बाकी है। जांच के दौरान यह पाया गया कि ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा तैयार की गई इसी शीर्षक वाली पुस्तक की एक पीडीएफ कॉपी कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध है। इसके अलावा, कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स ने पुस्तक के कवर को इस तरह प्रदर्शित किया है जैसे कि यह बिक्री के लिए उपलब्ध हो। इस मामले की जांच करने के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक मामला दर्ज किया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बिना आधिकारिक मंजूरी के यह किताब ऑनलाइन कैसे पहुंची और क्या यह किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। फिलहाल इस मामले में जांच जारी है ताकि इस ब्रीच के पीछे के कारणों और जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सके। बता दें, राहुल गांधी को पिछले हफ्ते संसद परिसर में कथित तौर पर इस किताब की एक कॉपी लहराते हुए देखा गया था। इस मामले ने काफी बवाल मचा दिया है, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही बाधित हुई और मौजूदा बजट सत्र के शेष समय के लिए आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया है।  

भरोसे की सीमा टूटी: बेटी ने मां के निजी पलों से किया खिलवाड़, सच जानकर सन्न रह गया परिवार

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने अपनी बेटी और उसके प्रेमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। महिला के आरोप हैं कि बेटी ने प्रेमी के कहने पर अपनी मां और मौसी की अश्लील तस्वीरें युवक को भेजी हैं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश की जा रही है।   जब फोन की जांच की तो चौंका परिवार रिपोर्ट के अनुसार, 49 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उन्हें बेटी के फोन में आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। परिवार ने जांचकर्ताओं को बताया है कि यह बात करीब एक महीने पहले की है, जब युवती की मां ने उसे एक युवक के साथ बात करते हुए पकड़ा था। पढ़ने के लिए मांगा फोन, खींची न्यूड फोटोज शिकायत की गई है कि बीबीए ग्रेजुएट युवती ने अपने पिता से पढ़ाई के लिए फोन की करीब एक साल पहले मांग की थी। परिवार ने मांग को पूरा कर दिया। बात तब बिगड़ी जब एक दिन घर में काम कर रही महिला अचानक बेटी के कमरे में गईं और उसे एक युवक से वीडियो कॉल करते देख लिया। मां को देखते ही युवती ने फोन काट दिया, जिससे उनका शक और गहरा गया था। गुमराह करने की कोशिश जब परिवार ने युवक को लेकर सवाल किया और पासवर्ड मांगा, तो युवती उन्हें सीधा जवाब देने से बचती रही। हालांकि, बाद में परिवार को फोन का पासवर्ड हासिल करने में सफलता मिली। रिपोर्ट के अनुसार, युवती की मां के आरोप हैं कि उन्हें फोन में उनके अश्लील फोटोज मिले हैं, जो सोने के दौरान खींचे गए थे। मौसी की अश्लील तस्वीरें भी शेयर कर दीं उन्होंने आरोप लगाए कि ये फोटोज वरुण नाम के युवक के साथ शेयर किए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया है कि बेटी ने अपनी मौसी की नहाते हुए तस्वीरें भी लेकर वरुण को शेयर की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज शिकायत में बताया गया है कि युवती के फोन से मिले संदेशों से पता चला है कि वरुण ने युवती से फोटो शेयर करने के लिए कहा था। घर से भागी युवती विवाद खड़ा होने के बावजूद युवती परिवार से लगातार बहस करती रही। खबर है कि करीब एक सप्ताह पहले वह कथित तौर पर घर छोड़कर चली गई और परिवार को बताया कि वह वरुण से शादी करना चाहती है। इसके बाद परिवार ने पुलिस का रुख किया। फिलहाल, वरुण की तलाश की जा रही है।

न्यायपालिका की मर्यादा तार-तार! जज के सामने हमला, CJI एक्शन मोड में

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के सामने वकील ने अपने साथ मारपीट का मुद्दा उठाया। वकील ने सीजेआई को बताया कि कोर्ट में दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और ये सब एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के सामने हुआ। इसपर सीजेआई ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही कहा कि अदालत में इस तरह का गुंडाराज नहीं चलेगा। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ‘मैं ADJ हरजीत सिंह पाल की अदालत तीस हजार कोर्ट में पेश हुआ था। मैं आरोपी की तरफ से कोर्ट में पेश हुआ था। शिकायतकर्ता और उसके कई गुंडों ने मुझपर हमला किया। पीटा भी। जज वहीं बैठे थे। कोर्ट के सभी सदस्य वहीं पर बैठे हुए थे।’ उन्होंने आरोप लगाए हैं कि कोर्ट रूम का दरवाज बंद करके आरोपी के साथ उनके साथ मारपीट की गई थी। CJI ने शिकायत दाखिल करने कहा सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने वकील से शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत दर्ज कराई जाए और इसमें उनका नाम भी शामिल किया जाए। CJI ने कहा, ‘ये सब 7 फरवरी को हुआ? क्या आपने इसकी जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी है? सीजे को लेटर लिखें और मुझे भी मार्क करें। इसपर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संज्ञान लेने दीजिए और कार्रवाई प्रशासनिक पक्ष की तरफ से की जाएगी। इस तरह का गुंडा राज हमें स्वीकार्य नहीं है। इसका मतलब कानून का व्यर्थ होना है। ऐसा करें और मुझे बताएं।’

‘इतिहास सब याद रखेगा’—SIR विवाद पर अभिषेक बनर्जी की कविता से गरमाई राजनीति

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर एक कविता लिखी, जिसमें उन्होंने लोगों पर इसके असर को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। राजनीतिक लामबंदी या दूसरे तरीकों से विरोध करने के बजाय, बनर्जी ने चुनाव आयोग के कदम के खिलाफ लोगों की तरफ से बोलने के लिए अपनी कलम की ताकत का इस्तेमाल किया। कविता की हर लाइन केंद्र सरकार द्वारा लोगों पर किए जा रहे अत्याचार को दिखाती है। कविता का नाम ‘आमी अस्वीकार कोरी’ (मैं मानने से इनकार करता हूं) है। सोशल मीडिया पोस्ट पर कविता शेयर करते हुए बनर्जी ने कहा, “एक खतरनाक प्रक्रिया को लेकर मेरे अंदर बहुत उथल-पुथल मची हुई है, जिसने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है, और हमारे लोगों के सामूहिक दुख, दर्द और गुस्से को आवाज देते हुए, मैंने इन भावनाओं को एक छोटी सी कविता में ढाला है।” कविता की शुरुआती लाइनें हैं—’मैं ‘मानने से इनकार करता हूं, यह लापरवाही, यह लिस्टों का राज, यह डर का राज। मैं मानने से इनकार करता हूं, राज्य के नाम पर खून का कर्ज। मैं मानने से इनकार करता हूं, खून पर स्याही का राज।’ कविता में, हर शब्द और वाक्यांश एसआईआर से पैदा हुई हाल की स्थिति के डर और दर्द को दिखाता है। यह कविता एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लोगों पर थोपे गए नियमों के खिलाफ विरोध की आवाज उठाती है। अब तक, राज्य में एसआईआर अभ्यास शुरू होने के बाद से लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है। उस संख्या का जिक्र करते हुए, बनर्जी ने दावा किया, “यह सिर्फ एक संख्या नहीं है; यह राज्य द्वारा लगाई गई आग में लोगों की चीख है।” उन्होंने एसआईआर तरीके की व्यर्थता को निशाना बनाते हुए लिखा, “राज्य के रिकॉर्ड में, आंकड़े जिंदगी की जगह ले लेते हैं। जमीर, सच्चाई और सम्मान शासक के जूतों के नीचे कुचल दिए जाते हैं।” बनर्जी ने अपनी कविता में इतिहास का भी जिक्र किया। उनकी पंक्तियां कहती हैं, “इतिहास- वह माफ नहीं करता, वह लिस्टें नहीं पढ़ता। इतिहास याद रखता है कि किसने विरोध किया, किसने लड़ाई लड़ी, कौन अपनी जगह पर डटा रहा, किसने आग लगाई। इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करता जो लोगों को छोटा समझते हैं।” इस कविता के जरिए, उन्होंने एक बार फिर एसआईआर अभ्यास के खिलाफ आवाज उठाई है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास के विरोध में 26 कविताएं लिखी थीं। अब, अभिषेक बनर्जी भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं।

बंगाल SIR विवाद में सुप्रीम कोर्ट की फटकार, समयसीमा बढ़ी; पुलिस प्रमुख से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) मामले पर सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर यह सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों की पड़ताल और फाइनल वोटर लिस्ट की समयसीमा को 1 हफ्ते बढ़ाया। पहले फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की डेडलाइन 14 फरवरी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार सुनिश्चित करें कि उसकी ओर से उपलब्ध कराए गए 8505 ग्रुप बी के अधिकारी कल शाम 5 बजे तक निर्वाचन अधिकारी (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) को रिपोर्ट करें। ईसीआई चाहे तो अपने अधिकारियों की जगह इन अधिकारियों की सेवा ले सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि माइक्रो ऑब्जर्वर या ग्रुप बी के अधिकारियों की भूमिका सिर्फ ईआरओ को सहयोग करने की रहेगी। वोटर लिस्ट पर अंतिम फैसला ईआरओ ही लेंगे। चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट को शिकायत की गई कि ऑब्जेक्शन फॉर्म जलाने वाले लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। कोर्ट ने इस पर राज्य के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि डीजीपी हलफनामा दाखिल करें। वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र उदय सिंह ने कहा कि नोटिस के जवाब पर चर्चा होनी चाहिए। शुरुआत में वकीलों की दलीलों में तालमेल न होने से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि सब एक साथ बोल रहे हैं और एक-दूसरे की बात काट रहे हैं, जिससे सुनवाई करना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने दलीलें शुरू कीं। सीजेआई ने पिछली सुनवाई का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या ड्राफ्ट में 70 लाख मतदाताओं के नामों में स्पेलिंग मिसमैच है। साथ ही मैनपावर की कमी के कारण चुनाव आयोग को माइक्रो-ऑब्जर्वर्स लगाने पड़े थे। श्याम दिवान ने बताया कि राज्य सरकार ने 8,500 अधिकारियों की व्यवस्था कर ली है। सीजेआई ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या आपको इन अधिकारियों की सूची मिल गई है। आयोग के वकील ने कहा कि अभी तक कोई नाम नहीं मिला है। सीजेआई ने टिप्पणी की कि 4 या 5 फरवरी को ही नाम भेजे जा सकते थे। दिवान ने कहा कि डेटा भेज दिया गया था और आयोग से पुष्टि मांगी गई थी, उसके बाद पूरा विवरण भेजा जाता। सीजेआई ने कहा कि राज्य सरकार को तुरंत सूची भेजनी चाहिए थी, कोर्ट के माध्यम से नहीं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कहा कि आयोग ने कभी ग्रुप-बी अधिकारियों की मांग नहीं की थी। यह सुझाव कोर्ट से आया था, इसलिए विवरण जुटाने में समय लगा। दिवान ने दोहराया कि सूची सौंप दी गई है, लेकिन आयोग ने इनकार किया। सीजेआई ने ईमेल चेक करने को कहा और पूछा कि क्या सूची में नाम, पदनाम, संपर्क और क्षेत्र दिए गए हैं। सिंघवी ने कहा कि ईमेल भेज दिया गया है और क्या इन अधिकारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रिपोर्ट करने के निर्देश दिए जाएं। दिवान ने कहा कि आयोग की मंजूरी के बाद नामों की सूची दी जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि छोटी-मोटी विसंगतियों के कारण बड़े पैमाने पर नाम नहीं हटाए जा सकते। सीजेआई ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल का कोई अधिकारी है, जिससे सवाल किए जा सकें। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान प्रधान सचिव मनोज पंत मौजूद हैं। पंत ने कहा कि 292 ईआरओ (ग्रुप-ए, एसडीएम रैंक) के नाम भेजे गए हैं। कुछ आईएएस भी हैं। कुल 8,525 सहायक ईआरओ हैं। सीजेआई ने हर विधानसभा क्षेत्र में एईआरओ की संख्या पूछी। पंत ने बताया कि सूची में 65 प्रतिशत ग्रुप-बी, 10-12 प्रतिशत ग्रुप-सी और बाकी ग्रुप-ए के अधिकारी हैं। इन्हें तैनात करने से पहले आयोग को सूचित किया गया था। सीजेआई ने पूछा कि क्या एईआरओ ईआरओ से वरिष्ठ होगा? राज्य ने कहा कि एईआरओ सहायता करता है। आयोग के वकील डीएस नायडू ने कहा कि ईआरओ अर्ध-न्यायिक अधिकारी होते हैं, इसलिए एसडीएम जैसे अनुभवी अधिकारियों की जरूरत थी। राज्य ने वेतन समानता पर आधारित सूची दी, लेकिन आयोग ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग अर्ध-न्यायिक कार्य नहीं कर पाएंगे। सीजेआई ने कहा कि अनुपयुक्त ईआरओ और एईआरओ को नए सक्षम अधिकारियों से बदला जा सकता है। दिवान ने कहा कि बदलाव में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटी विसंगतियों के लिए बड़े पैमाने पर नाम हटाने की अनुमति नहीं है। सीजेआई ने आयोग से कहा कि वे एईआरओ बदलने पर विचार करें। माइक्रो-ऑब्जर्वर्स मतदाताओं की आपत्तियों पर सलाह देते हैं, लेकिन निर्णय ईआरओ लेते हैं। आयोग ने कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया और दस्तावेज जांच पूरी हो गई है। सीजेआई ने सुझाव दिया कि अगर ये अधिकारी कल सुबह शामिल होते हैं, तो उन्हें फाइलें देखने दें, जिससे निर्णय की गुणवत्ता बढ़ेगी। सुनवाई जारी है और कोर्ट ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है ताकि वैध मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें। वहीं, सीजेआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को आसान बनाने और जताई गई चिंताओं का ध्यान रखने के लिए निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए जाते हैं। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि सभी 8,555 ग्रुप बी अधिकारी, जिनकी सूची आज सौंपी गई है, शाम 5 बजे तक जिला चुनाव अधिकारियों (डीआरओ) को रिपोर्ट करें। चुनाव आयोग (ईसीआई) के पास मौजूदा ईआरओ और एईआरओ को बदलने और योग्य पाए जाने पर अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने का अधिकार होगा।

अविश्वास प्रस्ताव की चेतावनी: विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली विपक्ष के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। उनका आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने जमकर प्रतिक्रिया दी है और इसे संसद की परंपरा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।” कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष एक संवैधानिक पद है, यह सत्ताधारी पार्टी का नहीं है। जिस तरह से विपक्ष के नेता की आवाज को भेदभाव के साथ दबाया जा रहा है, वह बहुत चिंताजनक है। यह संसद है, सेंसर बोर्ड नहीं।” उनका इशारा लोकसभा में विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने की ओर था, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा का नहीं, बल्कि सदन की परंपरा और उसकी गरिमा का है। उन्होंने यह सवाल उठाया, “क्या कभी आपने सुना है कि संसद में प्रधानमंत्री महिला सांसदों से डरते हैं? यह शर्मनाक नहीं है?” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए और इसी कारण विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने पर मजबूर है। कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा, “स्पीकर को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन ओम बिरला ने भाजपा की पार्टी लाइन अपनाई है, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।” उनका मानना है कि स्पीकर को सदन की परंपरा का पालन करना चाहिए। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जब आएगा तो हम आपको बताएंगे।” कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “हम बजट पर बोलने आए थे, लेकिन अब लग रहा है कि सरकार और स्पीकर संसद की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं रखते।” कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा, “संसद बहस और प्रक्रिया का पालन करने के लिए है। विपक्ष को देश से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जगह देनी चाहिए। यह अविश्वास प्रस्ताव उसी का हिस्सा है।”

Moodys ने भारत की ताकत को किया स्वीकार, कहा- ‘भारत बना रहेगा नंबर-1’

Moodys ने भारत की GDP पर कहा- ‘भारत रुकने वाला नहीं, बने रहेगा नंबर-1’ Moodys की रिपोर्ट: भारत की GDP में होगा लगातार उछाल, विदेशी एजेंसी ने माना लोहा Moodys ने भारत की ताकत को किया स्वीकार, कहा- ‘भारत बना रहेगा नंबर-1’     नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में दम है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में टॉप पर बना रहेगा. इंडियन इकोनॉमी को लेकर ये गुड न्यूज विदेशी रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s Ratings) ने दी है. एजेंसी ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ (India’s GDP Growth) जी-20 में शामिल सभी देशों में सबसे तेज रहेगी.  इस रफ्तार से भागेगी इंडियन इकोनॉमी भारतीय अर्थव्यवस्था के अगले वित्तीय वर्ष में मजबूत ग्रोथ के ट्रैक पर बने रहने की उम्मीद है. मूडीज ने अनुमान लगाते हुए कहा है कि FY27 देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.4% रहेगी और इकोनॉमी की इस रफ्तार के साथ भारत G-20 Nations में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन जाएगा. Moody’s ने इसके पीछे वजह बताते हुए कहा है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ को स्थिर घरेलू डिमांड, बेहतर इन्वेस्टमेंट एक्टिविटीज और स्थिर व्यापक आर्थिक परिस्थितियों से समर्थन मिलेगा, जो कि कारोबारी विश्वास बढ़ने और कंपनियों को कर्ज व निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है. GST Reform का जारी रहेगा असर  मूडीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ग्रोथ में संरचनात्मक सुधारों की अहम भूमिका रह सकती है. खासतौर पर जीएसटी रिफॉर्म और इनकम टैक्स में कटौती जैसे उपायों से घरेलू उपभोग को समर्थन मिलने की संभावना है. इसके साथ ही मॉनेटरी पॉलिसी से फाइनेंशियल हेल्थ भी दुरुस्त बनी रहेगी.  RBI ने भी बढ़ाया है ग्रोथ अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी हाल ही में भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव रुख अपनाया है. अपनी नई मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा रिपोर्ट में RBI ने FY2026-27 के लिए अपने प्रारंभिक ग्रोथ अनुमान को बढ़ा दिया है. केंद्रीय बैंक ने अब पहली तिमाही में रियल जीडीपी में 6.9% और Q2 में 7.0% की ग्रोथ का अनुमान जाहिर किया है. ये इससे पहले के क्रमश: 6.7% और 6.8% से ज्यादा है. रिजर्व बैंक ने भी इसके पीछे उपभोग और निवेश में निरंतर मजबूती को वजह बताया है. भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट फिट मूडीज के मुताबिक, मजबूत इकोनॉमी के चलते अगले 12 से 18 महीनों में वित्तीय स्थितियां स्थिर रहने की उम्मीद है. भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत मानी जा रही है और यह माहौल बैंकों को बढ़ती लोन डिमांड के बावजूद अपनी इनकम के माध्यम से पर्याप्त पूंजी भंडार बनाए रखने का मौका देता है. भारत-US ट्रेड डील के फायदे रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) के बाद निर्यात से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSMEs के लिए ऑपरेशनल स्थितियों में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है. इस समझौते से इस क्षेत्र में तनाव का जोखिम कम होने की उम्मीद है. हालांकि, जमा राशि के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कम लागत वाले लो-कॉस्ट फंडिंग सोर्सों का विस्तार करने की कोशिश में लगे बैंकों के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.  

भारत के अमेरिकी तेल आयात पर पीयूष गोयल का बयान:

 नई दिल्ली    भारत और अमेरिका में लंबे समय से अटकी ट्रेड डील (India-US Trade Deal) पर बात बन चुकी है और इसे लेकर फ्रेमवर्क भी जारी कर दिया गया है. इसके तहत भारत अमेरिका से तेल का आयात भी करेगा. इसके बाद ये सवाल उठने लगे थे कि क्या ट्रेड डील में ऐसी बाध्यता शामिल की गई है, जिसके चलते देश को US Crude Oil खरीदना होगा. इसे लेकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal On US Oil Import) ने बड़ा बयान दिया है और ऐसी किसी भी बात से साफ इनकार करते हुए अमेरिकी तेल की खरीदारी को पूरी तरह से रणनीतिक फैसला करार दिया है. US Oil खरीद पर पर बड़ा बयान भारत-US के बीच व्यापार समझौते को लेकर Piyush Goyal ने कहा कि अमेरिका से ऊर्जा खरीदने से भारत को तेल के सीमित सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही उन्होंने दोहराया कि इसकी वास्तविक खरीदारी बायर्स और सप्लायर्स कंपनियों द्वारा स्वतंत्र रूप से ही की जाती है. गोयल ने जोर देते हुए कहा कि ये निर्णय वाणिज्यिक विचारों से प्रेरित हैं और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) द्वारा निर्धारित नहीं हैं यानी इस समझौते में ऐसी कोई बाध्यता नहीं रखी गई है. गोयल बोले- ‘ये भारत के हित में…’ एएनआई को दिए एक इंटरव्यू के दौरान केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ढांचा यह अनिवार्य नहीं करता कि कौन क्या और कहां से खरीदेगा?, बल्कि यह सिर्फ व्यापार और अच्छी पहुंच के लिए एक आसान रास्ता मुहैया कराता है. Piyush Goyal  के मुताबिक, अमेरिका से कच्चा तेल (Crude Oil), एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) खरीदना भारत के अपने रणनीतिक हित में है, क्योंकि देश अपने ऊर्जा स्रोतों में लगातार विविधता ला रहा है.    US के साथ ट्रेड डील के ये फायदे इंटरव्यू के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि Trade Deal के तहक आज जब हमें हाई टैरिफ से काफी कम 18% Tariff मिला है, तो हमें अन्य विकासशील देशों पर वरीयता भी मिली है, जो आमतौर पर हमारे प्रतिस्पर्धी हैं. उन्होंने कहा कि ये डील तमाम सेक्टर्स को व्यापक मौके मुहैया कराएगा. इसके साथ ही हमारे युवाओं, बहनों, महिलाओं के लिए भी अपार अवसर मिलेंगे और साथ ही हमारे किसानों और मछुआरों के लिए भी ये अच्छा है.  वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हमारे MSMEs तेज रफ्तार से बढ़ेंगे और वे अमेरिका को आवश्यक कई सामग्रियों के आपूर्तिकर्ता बनेंगे. ये समझौता हमारे कपड़ा क्षेत्र, हमारा जूता और चमड़ा क्षेत्र, हमारा खिलौना क्षेत्र, हैंडक्राफ्ट सेक्टर, ऑटो कंपोनेंट्स, फर्नीचर समेत अन्य के लिए असीमित संभावनाओं से भरा हुआ है, जैसा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने भी कहा है.  दवाओं से डायमंड तक पर हटेगा टैरिफ! गौरतलब है कि अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में चुनिंदा भारतीय निर्यातों पर Reciprocal Tariff हटा देगा, जिसमें जेनेरिक दवाएं, जेम्स एंड ज्वेलरी, डायमंड और विमान के पुर्जे शामिल हैं. इसके साथ ही भारत से कुछ विमानों और विमान के पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शुल्क भी हटाए जाएंगे. इस डील के तहत भारत भी अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर वैल्यू के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, आईटी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदेगा. 

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