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IRCTC की नई सर्विस: अब ट्रेन में सीट छोड़कर नहीं जाना होगा, मिलेगा खाना सीधी सीट पर

  नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने ‘ई-पैंट्री’ सर्विस शुरू की है. जिसके जरिए अब यात्री 25 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में ऑनलाइन खाना और पानी पहले से बुक कर सकते हैं. खाना सीधे उनकी सीट पर पहुंचा दिया जाएगा. यह सर्विस उन ट्रेनों के लिए है, जहां टिकट में खाना शामिल नहीं होता. बता दें कि IRCTC भारतीय रेलवे का हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म विभाग है, यह कैटरिंग, टूरिज्म और ऑनलाइन टिकट बुकिंग का काम देखता है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ई-पैंट्री सेवा यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और तकनीक से यात्रा को बेहतर बनाने का हिस्सा है. ई-पैंट्री सर्विस कैसे काम करती है? ई-पैंट्री सर्विस IRCTC की टिकट बुकिंग वेबसाइट और ऐप से जुड़ी हुई है. जिन यात्रियों का टिकट कन्फर्म, RAC या आंशिक कन्फर्म है, वे टिकट बुक करते समय या बाद में “बुक टिकट हिस्ट्री” सेक्शन में जाकर स्टैंडर्ड मील और रेल नीर (पैकेज्ड पानी) पहले से ऑर्डर कर सकते हैं. ऑर्डर करने के बाद यात्री को SMS या ईमेल से कन्फर्मेशन मैसेज और मील वेरिफिकेशन कोड (MVC) मिलता है. यात्रा के दिन ट्रेन में वेंडर को MVC दिखाना होता है, फिर खाना सीट पर डिलीवर कर दिया जाता है. इन ट्रेनों में शुरू ई-पैंट्री सर्विस ई-पैंट्री सर्विस विवेक एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22503/04) पर आजमाई गई थी, जो भारत की सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेनों में से एक है. अच्छे रिस्पॉन्स के बाद अब इसे 25 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में शुरू कर दिया गया है. आइए जानते हैं किन प्रमुख ट्रेनों में ई-पैंट्री सर्विस शुरू की गई है.       स्वतंत्र सेनानी एक्सप्रेस     स्वर्णजयंती एक्सप्रेस     कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस     मंगला द्वीप एक्सप्रेस     कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस     पुष्पक एक्सप्रेस     पश्चिम एक्सप्रेस     नेत्रावती एक्सप्रेस     ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस     पूर्वा एक्सप्रेस     लिच्छवी एक्सप्रेस     आजाद हिंद एक्सप्रेस     मालवा एक्सप्रेस     अहमदाबाद-बरौनी एक्सप्रेस     पुरुषोत्तम एक्सप्रेस और अन्य कई ट्रेनें.  

SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ममता बनर्जी को झटका, चीफ जस्टिस बोले—हर राज्य जिम्मेदारी निभाए

नई दिल्ली देश के कई राज्यों में चल रहे SIR के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी राज्यों को इस बात को समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो कुछ भी स्पष्टता चाहिए, वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाएगी।

शरद पवार अस्पताल में भर्ती, तबीयत में आई खराबी

 पुणे एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार की तबीयत सोमवार को अचानक बिगड़ गई है. शरद पवार को बारामती से पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक ले जाया जा रहा है. शरद पवार के कार्यालय ने जानकारी दी है कि उन्हें बुखार और खांसी की शिकायत है. सोमवार को बारामती तालुका के काठेवाड़ी में दिवंगत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की तेरहवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है. शरद पवार और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को इस समारोह में शामिल होना था, लेकिन शरद पवार की आज सुबह से ही तबीयत खराब हो गयी. इसकी वजह से वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए. प्राप्त जानकारी के अनुसार शरद पवार को सुबह से ही खांसी, बुखार और जुकाम था, इसलिए डॉक्टरों की एक टीम सुबह ही बारामती के गोविंदबाग स्थित उनके आवास पर पहुंच गई थी. डॉक्टरों ने शरद पवार की नियमित जांच की. इसके बाद, डॉक्टरों की एक टीम दोपहर में शरद पवार की दोबारा जांच करने गई. पुणे के रूबी अस्पताल में किया जाएगा भर्ती शरद पवार को पुणे के रूबी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया गया है. कुछ मिनट पहले शरद पवार पुणे के लिए रवाना हुए. उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले भी उनके साथ हैं. शरद पवार के काफिले में एक एम्बुलेंस भी है. शरद पवार जल्द ही पुणे पहुंचेंगे. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा. उनका आगे का इलाज पुणे के रूबी अस्पताल में होगा. परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि शरद पवार को लगातार खांसी और कफ की दिक्कत हो रही है, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. उन्होंने प्रोटेक्टिव मास्क पहना हुआ था और मेडिकल सपोर्ट स्टैंडबाय पर था. पिछले कुछ दिनों से पवार की तबीयत ठीक नहीं माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से शरद पवार की सेहत ठीक नहीं रही है. बीमारी की वजह से वह पिछले दो-तीन महीनों से ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहे थे, लेकिन अपने भतीजे और अजीत पवार की अचानक मौत के बाद उन्होंने पार्टी वर्कर्स और आम लोगों से मिलना फिर से शुरू कर दिया. पिछले हफ्ते, उन्होंने लगातार तीन दिन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में बिताए, जहां अजीत पवार रहते थे, जहां पार्टी लीडर्स और शुभचिंतक शोक जताने के लिए इकट्ठा हुए थे. माना जा रहा है कि पिछले आठ दिनों से बारामती में लगातार आने वालों की वजह से वह थक गए थे. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य भर में डिस्ट्रिक्ट काउंसिल और पंचायत चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ पॉलिटिकल एक्टिविटी बढ़ गई है.

RSS प्रमुख बनने के लिए हिंदू होना है अनिवार्य, मोहन भागवत ने साझा की चुनाव प्रक्रिया की जानकारी

मुंबई  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की। कैसे होता है चुनाव भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।’ RSS में कैसे होता है प्रमोशन भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों। SC-ST से होगा प्रमुख? भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है। मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं ‘सबसे योग्य उम्मीदवार’ के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।’ भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है’। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

कर्नाटक: बीदर और कोलार में सड़क हादसे, 6 की मौत, हादसे में गंभीर जख्मी कई लोग

 बीदर  कर्नाटक के बीदर और कोलार जिलों में दो अलग-अलग सड़क हादसों में छह लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, बीदर जिले के हमनाबाद तालुक में हल्लीखेड़ा के पास नागन्ना चौराहे के निकट रविवार को एक मोटरसाइकिल के पुल से टकरा जाने के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान राजेश्वर गांव के निवासी वेंकट करतमाल (40), उनकी पत्नी शिल्पा (35) और उनकी बेटी रक्षिता (12) के रूप में हुई है। उनके बेटे दिगंबर (15) को गंभीर चोटें आई हैं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने कहा, “हादसा उस समय हुआ जब ये चारों एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे और चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिससे मोटरसाइकिल पुल से टकरा गई।” एक अन्य हादसे में, कोलार जिले के श्रीनिवासपुर में रविवार को एक कार के पलट जाने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में से दो की पहचान आंध्र प्रदेश निवासी मुनियम्मा और वेंकटप्पा के रूप में हुई है। इस दुर्घटना में 10 से अधिक अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया, “यह हादसा उस समय हुआ जब श्रमिक काम खत्म करके लौट रहे थे। श्रीनिवासपुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।”

नरगिस मोहम्मदी पर ईरान का तगड़ा हमला: नोबेल विजेता को 7.5 साल की नई सजा, कुल जेल 44 साल

तेहरान  ईरान में महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. ईरानी कोर्ट ने उन्हें एक बार फिर दो अलग-अलग मामलों में कुल साढ़े सात साल की नई जेल की सजा सुनाई है. वकील ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी  नरगिस के वकील मुस्तफा नीली ने सोशल मीडिया पर बताया कि मशहद शहर की एक अदालत ने उन्हें दो बड़े आरोपों में सजा दी है. पहली सजा 6 साल की है, जो ‘गुटबाजी और साजिश’ के लिए दी गई है. दूसरी सजा डेढ़ साल की है, जो ‘सरकार के खिलाफ प्रचार’ करने के लिए मिली है. इसके अलावा, उन पर 2 साल का ट्रैवल बैन (विदेश जाने पर रोक) लगाया गया है और उन्हें देश के ही एक दूरदराज इलाके ‘खुस्फ’ में 2 साल के निर्वासन (Exile) की सजा भी दी गई है. क्यों हुई ताजा गिरफ्तारी? नरगिस (53 साल) को दिसंबर में तब गिरफ्तार किया गया था, जब वे वकील खुसरो अलीकोर्दी की शोक सभा में शामिल होने गई थीं. अलीकोर्दी अपने दफ्तर में मृत पाए गए थे. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, नरगिस ने वहां ‘भड़काऊ बातें’ की थीं. नरगिस के परिवार ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. कोर्ट को बताया ‘दिखावा’, शुरू की भूख हड़ताल नरगिस का समर्थन करने वाले ‘नरगिस फाउंडेशन’ ने शनिवार को हुई कोर्ट की इस सुनवाई को ‘दिखावा’ करार दिया है. फाउंडेशन के मुताबिक, अपनी अवैध गिरफ्तारी और जेल की खराब स्थिति के विरोध में नरगिस ने 2 फरवरी से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी. उनकी सेहत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें जेल से अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन फिर वापस जेल भेज दिया गया. परिवार का दर्द- यह फैसला क्रूर है नरगिस के पति तघी रहमानी ने बीबीसी को बताया कि यह सजा बेहद नाइंसाफी भरी और क्रूर है. उन्होंने कहा कि नरगिस ने कोर्ट में अपना बचाव करने से भी इनकार कर दिया क्योंकि वे इस न्याय व्यवस्था को सही नहीं मानतीं. उन्होंने न तो कोर्ट में एक शब्द बोला और न ही किसी कागज पर साइन किए. वहीं, पेरिस में रह रही उनकी बेटी कियाना भी अपनी मां की गिरती सेहत को लेकर काफी डरी हुई हैं. 10 साल से जेल में, बच्चों से भी नहीं मिल पाईं नरगिस मोहम्मदी पिछले एक दशक का ज्यादातर समय जेल की सलाखों के पीछे ही गुजार चुकी हैं. कुल सजा: फाउंडेशन के अनुसार, ताजा फैसले के बाद उनकी कुल सजा अब 44 साल की हो गई है. दूरी का गम: नरगिस साल 2015 से अपने जुड़वां बच्चों से नहीं मिल पाई हैं, जो पेरिस में रहते हैं. बीमारी में भी राहत नहीं: दिसंबर 2024 में उन्हें ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए 3 हफ्ते की पैरोल मिली थी, लेकिन ठीक होते ही उन्हें फिर जेल भेज दिया गया. कौन हैं नरगिस मोहम्मदी और क्यों मिला नोबेल? नरगिस को साल 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था. उन्हें यह सम्मान ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ लड़ने, मानवाधिकारों की रक्षा और फांसी की सजा (Capital Punishment) के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मिला था. जब उन्हें यह अवॉर्ड मिला, तब भी वे जेल में ही थीं और उनकी तरफ से उनके बच्चों ने यह पुरस्कार लिया था. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट  एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान दुनिया में चीन के बाद सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है. नरगिस इसी सिस्टम के खिलाफ लड़ रही हैं, जिसके कारण उन पर बार-बार ‘देश की सुरक्षा को खतरा’ पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, उनके वकील को अब भी उम्मीद है कि उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए जमानत मिल सकती है और इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी.

प्रधानमंत्री मोदी की परीक्षा पे चर्चा में प्रेरणा: छात्रों को सपनों को हकीकत में बदलने की क्षमता पर जोर

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज परीक्षा पे चर्चा 2026 के दूसरे एपिसोड में तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ के छात्रों से बात कर रहे हैं. इस दौरान पीएम मोदी छात्रों को स्टार्टअप से लेकर परीक्षा की तैयारी को लेकर संवाद कर रहे हैं. इस बार पीएम मोदी देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बच्चों से बात कर रहे हैं और उनके करियर से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे हैं.  परीक्षा पे चर्चा में ना सिर्फ पढ़ाई की तैयारी की बात हुई, बल्कि पीएम मोदी ने इस दौरान कल्चर, चाय आदि कई चीजों पर चर्चा की. इस दौरान हर चर्चा का उद्देश्य हर बच्चे को सुनना था. इस दौरान अंत में पीएम मोदी ने सभी बच्चों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के 9वें संस्करण का दूसरा एपिसोड सोमवार को जारी किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अद्भुत प्रतिभा के धनी हमारे विद्यार्थियों में अपने सपनों को सच करने की पूरी क्षमता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अद्भुत प्रतिभा के धनी हमारे विद्यार्थियों में अपने सपनों को सच करने की पूरी क्षमता है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य भी यही है कि कैसे वे अपनी प्रतिभा और कौशल का सार्थक इस्तेमाल कर सकते हैं।” इस अवसर पर पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित भी शेयर किया। उन्होंने प्राचीन संस्कृत श्लोक का हवाला देते हुए लिखा, “विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया। यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते॥” इसका अर्थ है, ‘विद्या, तर्कशक्ति, विज्ञान, स्मृति-शक्ति, तत्परता और कार्यशीलता, ये छह जिसके पास हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्य नहीं।’ हम क्या डाइट फॉलो करें? इस पर पीएम मोदी ने कहा कि मेरा कोई डाइट का सिस्टम नहीं है. हमेशा डाइट अपने मन का करना चाहिए और इसे दवाई की तरह नहीं खाना चाहिए. खाना हमेशा मन भर कर खाना चाहिए. अपने शरीर को सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए. आपकी लाइफ में टीचर का क्या रोल था? इस पर पीएम मोदी ने कहा कि हमारे टीचर का काफी रोल था और हमे लाइब्रेरी जाने के लिए कहते थे. इसके अलावा हमारे टीचर हमें फिजिकल फिटनेस के लिए आग्रह करते थे और योग के लिए कहते थे. हर एक टीचर का कुछ ना कुछ योगदान होता है.  पीएम मोदी ने गुजरात में पालतरिया समाज को लेकर किए गए काम का जिक्र भी परीक्षा पे चर्चा में किया है. इसके अलावा पीएम मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि बच्चों को तनाव से बचने के लिए अच्छी नींद लेना चाहिए.  साथ ही उन्होंने कहा कि सपना के अनूकुल मेहनत करनी चाहिए.  इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पहले लीडर बनिए. पहले ये तय कीजिए कि मुझे ये करना है और वो करना शुरू कर दीजिए. जैसे आप सड़क से कोई कचरा हटा देंगे तो लोग आपको फॉलो करेंगे. लीडर का मतलब ये नहीं है कि चुनाव लड़ना है. लीडर का मतलब है कि आप कुछ लोगों को अपनी बात समझा सकें. ऐसे में आपको पहले उसके बारे में समझना होगा. पढ़ाई और खेल का संतुलन कैसे रखें? इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा सबकुछ नहीं कर सकती है, लेकिन सिर्फ खेल से भी काम नहीं चलेगा. साथ ही उन्होंने कहा कि जिंदगी में खेल होने से बचना है तो खेलना चाहिए.  इस सेशन में तमिलनाडु के साथ पीएम मोदी ने रायपुर में छत्तीसगढ़ के बच्चों से भी बात की. इस दौरान पीएम मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि उन्हें अपने शहर की अलग अलग जगहों पर जाना चाहिए. इस बार पीएम मोदी देश ने अलग अलग शहरों में जाकर बच्चों से बात की है.  क्या एआई से डरना चाहिए? हर युग में टेक्नोलॉजी आती है तो ऐसी चर्चा होती है. हमें इससे डरना नहीं चाहिए. हमारी कोशिश रहनी चाहिए कि वो उसका गुलाम नहीं बनेंगे. उसे अपना मालिक नहीं बनने देंगे. मैं गुलाम नहीं बनूंगा, ये आपको पक्का करना होगा. साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि जॉब नेचर बदलता रहता है, ऐसे में टेक्नोलॉजी को समझना होगा. हमें डरने की जरुरत नहीं है.  इंस्पिरेशन और मोटिवेशन में क्या चुनें? इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि इंस्पिरेशन के साथ अनुशासन भी जरूरी है.  अगर अनुशासन है ही नहीं तो कितना ही इंस्पिरेशन होगा तो एक्सप्रेशन क्या काम करेगा. मान लीजिए एक किसान है उसकी प्रेरणा मिल रही है, बगल वाला किसान बहुत कमाई कर रहा है, ऐसे में इंस्पिरेशन तो मिलती है कि उतनी कमाई करनी चाहिए. लेकिन, डिसिप्लिन नहीं होगा तो इंस्पिरेशन काम नहीं करेगा. फिर वह बोझ बन जाता है निराशा पैदा करता है. स्टार्टअप शुरू करना है कैसे करुं? एक स्टूडेंट के इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि आप छोटे-छोटे स्टार्टअप से काम शुरू कर सकते हैं. साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि अगर आप पढ़ाई और पेशन दोनों को फॉलो करना चाहते हैं तो आप सप्ताह में दिन में कुछ वक्त पेशन के लिए निकालना शुरू कीजिए. इससे आप आसानी दोनों कामों को संतुलित तरीके से कर सकेंगे.    ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के दूसरे एपिसोड में देवमोगरा, कोयंबटूर, रायपुर, गुवाहाटी और दिल्ली में पीएम मोदी की छात्रों के साथ बातचीत को दिखाया जाएगा। इस एपिसोड में पीएम मोदी एग्जाम की तैयारी करते समय कॉन्फिडेंट रहने, रूटीन फॉलो करने और खुद पर भरोसा रखने के बारे में प्रैक्टिकल टिप्स शेयर करेंगे। ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ का पहला एपिसोड 6 फरवरी को जारी किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले एपिसोड में कहा कि बहुत सारे छात्रों ने यह सुझाव दिया था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए। इस स्पेशल एपिसोड में आप यही देखने जा रहे हैं। गौरतलब है कि साल 2018 के बाद प्रधानमंत्री मोदी हर साल बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों के साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) करते हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के बीच परीक्षा के तनाव को कम करना और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देना है। शिक्षा मंत्रालय इस कार्यक्रम को संचालित करता है। साल 2025 के कार्यक्रम में 5 करोड़ से अधिक छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी देखी गई। 2026 के संस्करण में 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए। अतिरिक्त 2.26 करोड़ प्रतिभागी … Read more

मोहन भागवत बोले: बीजेपी की सफलता में RSS की अहम भूमिका, राम मंदिर आंदोलन ने भी दिया लाभ

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा को लेकर बड़ी लकीर खींच दी है। 2024 के आम चुनाव के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हम आरएसएस के बिना भी चुनाव में जीत हासिल कर सकते हैं। इसे लेकर संघ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष देखा गया था। अब सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भाजपा के ये ‘अच्छे दिन’ आरएसएस के चलते ही आए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने प्रतिबद्धता दिखाई थी और जिसने इसका साथ दिया, उसे फायदा मिला। इस तरह उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि संघ के नेतृत्व में चले राम मंदिर आंदोलन का फायदा भाजपा को चुनावी राजनीति में भी मिला। इस तरह उन्होंने साफ कर दिया कि भाजपा के लिए आरएसएस का कितना महत्व है और वह भी उसका मातृ संगठन है। माना जा रहा है कि आरएसएस के कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखने के मकसद से उन्होंने ऐसी बात कही है। इसके अलावा भाजपा नेतृत्व के लिए भी यह एक संदेश है कि भले ही दल का विस्तार हो गया है, लेकिन उसका वैचारिक आधार अब भी आरएसएस ही है। बता दें कि आरएसएस और भाजपा के संबंधों को लेकर अकसर सवाल उठते रहे हैं। आरएसएस की ओर से भाजपा में किसी भी फैसले लेने के दावों को खारिज किया जाता रहा है। उसका कहना है कि हम संघ के कार्यकर्ता देते हैं, लेकिन उसके फैसलों में हमारा कोई दखल नहीं रहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अलग राजनीतिक पार्टी है भाजपा। उसमें बहुत से स्वयंसेवक हैं, लेकिन वह संघ की पार्टी नहीं है। उसमें स्वयंसेवक हैं और वे अपना काम करते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोगों के पास कोई और काम करने के लिए समय नहीं होता। उन्होंने कहा कि हमारे यहां माताओं-बहनों से आप बात करेंगे तो वे कहेंगे कि इन्हें घर पर भी ध्यान देने का समय नहीं है। आरएसएस का एक ही काम कि संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट किया जाए। इसके अतिरिक्त हमें कोई और काम नहीं करना है। हमारे विचार की बात करने से कुछ लोगों को मिलता है फायदा मोहन भागवत ने कहा कि फिर सवाल उठता है कि देश में और भी समस्याएं हैं। उनका क्या होगा। इस पर संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने कहा था कि संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी अहम कामों में संघ के कार्यकर्ता शामिल हैं, लेकिन वे स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि हमारा काम मनमर्जी से चलता है। इसमें नियंत्रण नहीं चलता है। स्वयंसेवकों के बीच एक सहयोग की भावना है। हमारे पास एक शक्ति है तो राष्ट्र के लिए भी एक विचार है और उसके अनुसार जो लोग बात करते हैं। उन्हें लाभ होता है। लेकिन हमारा काम किसी को लाभ पहुंचाना नहीं है।

बांग्लादेश चुनाव से पहले तनाव, BNP और जमात के बीच संघर्ष, 40 लोग घायल

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव से ठीक 72 घंटे पहले राजनीति एक बार फिर सड़क पर उतर आई. शनिवार देर रात बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में महिलाओं समेत 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह घटना ऐसे वक्त पर हुई है, जब 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले चुनाव प्रचार सोमवार सुबह 7:30 बजे खत्म होने वाला है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक देर रात के कार्यक्रम में जमात पर पैसे बांटने का आरोप लगाते हुए BNP कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने पहुंचे. इसके बाद दोनों पक्षों ने समर्थक जुटाए और बात हाथापाई से लेकर पत्थरबाजी तक पहुंच गई. रातभर चले टकराव को मौजूदा चुनाव अभियान की सबसे गंभीर हिंसा बताया जा रहा है. बांग्लादेश का चुनावी माहौल तनावपूर्ण पिछले छह हफ्तों में अलग-अलग इलाकों में चुनावी हिंसा में कई लोग घायल हो चुके हैं. अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है. शेख हसीना की पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है. इसी वजह से इसे 2009 के बाद का सबसे निर्णायक चुनाव माना जा रहा है. चुनाव में किसके-किसके बीच है टक्कर? 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में 12.7 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं. मुकाबला मुख्य रूप से BNP और जमात-नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच माना जा रहा है. BNP प्रमुख तारिक रहमान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़कर सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल करेगी. अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चुनाव को ‘न्यू बांग्लादेश का उत्सव’ बताते हुए इसे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने का वादा किया है. हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि लगातार हिंसा से प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है, खासतौर पर तब, जब सत्ता समीकरण उलट चुके हैं और सड़क पर दबदबा शेख हसीना के विपक्षी दलों का दिख रहा है. बवाल का अर्थव्यवस्था पर असर चुनाव का नतीजा देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है. हालिया अशांति से गारमेंट जैसे प्रमुख उद्योग प्रभावित हुए हैं और बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मदद की जरूरत पड़ी है. विदेश नीति के मोर्चे पर भी दिशा बदलने के संकेत हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, BNP को भारत के प्रति अपेक्षाकृत संतुलित माना जाता है, जबकि जमात की भूमिका पाकिस्तान की ओर झुकाव की अटकलें बढ़ाती है.

भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन शुरू करेगी पूर्वी भारत मंदिर दर्शन यात्रा, पैकेज डिटेल्स और रूट प्लान जारी

नई दिल्ली पूर्वी भारत के प्रमुख हिंदू मंदिरों के दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) की ओर से संचालित भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के माध्यम से यात्रियों को पूर्वी भारत के दिव्य मंदिरों की यात्रा कराई जाएगी। यह 10 दिन की यात्रा श्रद्धालुओं को वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम (ज्योतिर्लिंग) सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करवाएगी। इस यात्रा के दौरान यात्रियों को सुविधाजनक ट्रेन यात्रा के साथ पूजा स्थल भ्रमण और स्थानीय अनुभव का अवसर भी मिलेगा। IRCTC की साइट से टिकट बुकिंग कर पाएंगे यात्री दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन 9 मार्च को रवाना होगी। इस यात्रा में लगभग 150 यात्रियों के जाने की व्यवस्था है। इच्छुक यात्री IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट से टिकट बुक कर सकते हैं। इस बार के टूर के माध्यम से यात्रियों को पूर्वी भारत के प्रमुख दिव्य मंदिरों के दर्शन कराए जाएंगे, जिनमें वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम (ज्योतिर्लिंग) शामिल हैं। यात्रा के दौरान न केवल मंदिरों बल्कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर भी भ्रमण कराया जाएगा। IRCTC की यह पहल देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रियों को धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव एक साथ उपलब्ध कराने के लिए की जा रही है। 18 मार्च को सफदरजंग वापस लौटेगी गाड़ी इस 10 दिन की यात्रा में श्रद्धालुओं को वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन का अवसर मिलेगा और साथ ही गंगा आरती का भी अनुभव कराया जाएगा। इसके अलावा, कोलकाता में यात्रियों को विक्टोरिया मेमोरियल, काली घाट और दक्षिणेश्वर काली मंदिर का दर्शन कराया जाएगा। यात्रा का अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा पुरी के जगन्नाथ मंदिर और झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक यात्रा 9 मार्च को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होगी और 18 मार्च को वहीं वापस लौटेगी। इस दौरान यात्रियों को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भी भ्रमण कराए जाने की योजना है, जिससे यह यात्रा धार्मिक श्रद्धा और सांस्कृतिक अनुभव दोनों के लिए यादगार बनेगी। पैकेज में क्या-क्या शामिल भारत गौरव डीलक्स टूरिस्ट ट्रेन में एसी की तीनों श्रेणियों के कोच उपलब्ध होंगे। यात्रियों को इस पैकेज में शाकाहारी भोजन और सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त भी मिलेगा। किराया विवरण (प्रति यात्री) फर्स्ट एसी: ₹1,06,940, सेकंड एसी: ₹98,925, थर्ड एसी: ₹79,285 इस पैकेज में यात्रियों के होटल में ठहरने, खाने, एसी गाड़ी, यात्रा बीमा (इंश्योरेंस) का खर्च शामिल है, जिससे श्रद्धालु आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव कर सकें।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी: भारतीय रेलवे शुरू करेगा करीब 1500 ट्रेनें, जानें रूट डिटेल

नई दिल्ली होली का त्योहार नजदीक है और इस त्योहार पर घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ जाती है। इसे देखते हुए भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए मार्च महीने में 1,410 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है। ये संख्या मांग बढ़ने पर 1,500 तक बढ़ाई जा सकती है। आपको बता दें कि पिछले साल 2025 में 1,144 स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं। रेलवे का यह कदम सुनिश्चित करता है कि त्योहार के दौरान यात्रियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा मिल सके। स्पेशल ट्रेनों का संचालन न केवल भीड़ को नियंत्रित करेगा, बल्कि प्रमुख शहरों और ग्रामीण इलाकों के बीच कनेक्टिविटी भी मजबूत करेगा। इस बार के अभियान में हर जोन ने यात्रियों की बढ़ती मांग के अनुसार ट्रेन परिचालन में वृद्धि की है। आइए जानते हैं कि किस रूट पर कितनी ट्रेनें चलेंगी।   पूर्व मध्य रेलवे     पूर्व मध्य रेलवे इस होली पर सबसे ज्यादा 285 स्पेशल ट्रेनें चलाएगा।     यह जोन बिहार, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों को कवर करता है।      इन ट्रेनों का मुख्य उद्देश्य त्योहार के समय भारी भीड़ में यात्रियों को सुविधा प्रदान करना है। पश्चिम रेलवे     पश्चिम रेलवे ने 231 स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है।      मुंबई और गुजरात से जुड़े मार्गों पर यह ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।     इसकी वजह से यात्रियों को भीड़-भाड़ से बचते हुए यात्रा का बेहतर अनुभव मिल सकेगा।  मध्य रेलवे     मध्य रेलवे 209 स्पेशल ट्रेनें चलाएगा।     ये विशेष ट्रेनें मुख्य रूप से मध्य भारत के प्रमुख शहरों और छोटे कस्बों के बीच यात्रा को आसान बनाएंगी। दक्षिण मध्य रेलवे     दक्षिण मध्य रेलवे कुल 160 ट्रेनें चलाएगा।     ये जोन हैदराबाद, विजयवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों को कवर करता है और यात्रियों की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेन परिचालन करेगा। उत्तर रेलवे     उत्तर रेलवे 108 स्पेशल ट्रेनें संचालित करेगा।     दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मार्गों पर ये ट्रेनें होली के अवसर पर यात्रियों को सुविधा प्रदान करेंगी। उत्तर पश्चिम रेलवे उत्तर पश्चिम रेलवे 71 स्पेशल ट्रेनें चलाएगा।     राजस्थान और आसपास के राज्यों में इन ट्रेनों से यात्रा आसान और सुरक्षित होगी। उत्तर मध्य रेलवे     उत्तर मध्य रेलवे द्वारा 66 स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है।     यह जोन मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम करेगा।     दोनों जोन 62-62 स्पेशल ट्रेनें चलाएंगे।     ये ट्रेनें पूर्वोत्तर राज्यों और तटीय क्षेत्रों में त्योहार के समय यात्रियों को सुविधा देंगी।       दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR): 47 ट्रेनें     पश्चिम मध्य रेलवे (WCR): 43 ट्रेनें     दक्षिण रेलवे (SR): 39 ट्रेनें     दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR): 15 ट्रेनें      कोंकण रेलवे (KR): 9 ट्रेनें      पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (NFR): 2 ट्रेनें  

यातायात में क्रांति! ₹2200 करोड़ की लागत से बन रहा भारत का सबसे लंबा फ्लाईओवर, कौन कर रहा निर्माण?

नई दिल्ली भारत में यातायात और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए फ्लाईओवर निर्माण में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वर्तमान में देश का सबसे लंबा फ्लाईओवर (Longest Flyover in India) बनने का गौरव केरल के अरूर-थुरावूर एलिवेटेड हाईवे को मिलने वाला है। नेशनल हाईवे 66 (NH 66) पर बन रहा यह अनोखा रास्ता न केवल यात्रा का समय बचाएगा, बल्कि वास्तुकला का भी बेजोड़ नमूना होगा। प्रोजेक्ट की खासियत और लागत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा निर्मित यह एलिवेटेड हाईवे 12.75 किलोमीटर लंबा और छह लेन चौड़ा है। लगभग 2,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट देश का सबसे लंबा ‘सिंगल-पिलर’ वाला स्काईवे है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और मई 2026 तक इसके पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। यह फ्लाईओवर दक्षिण भारत के राज्यों के बीच व्यापार और परिवहन के नजरिए से गेम-चेंजर साबित होगा।     तेज सफर: यह तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।     कम होगा खर्च: बेहतर रास्ता मिलने से ट्रांसपोर्टेशन की लागत में भी कमी आएगी।     रिकॉर्ड निर्माण: प्रोजेक्ट के सभी 360 सपोर्टिंग पिलर और 3,000 गर्डर का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में गर्डर फिटिंग, एग्जिट रैंप और टोल प्लाजा पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। 2,500 मजदूरों का ‘डे-नाइट’ मिशन केरल के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होने वाला है। इसे समय पर पूरा करने के लिए लगभग 2,500 मजदूर और 350 अत्याधुनिक मशीनें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। पूरा होने के बाद यह फ्लाईओवर न केवल नेशनल रिकॉर्ड बनाएगा, बल्कि NH 66 पर यातायात की तस्वीर भी बदल देगा। सफर के लिए देना होगा टोल इस हाई-टेक फ्लाईओवर से गुजरने वाले यात्रियों का कीमती समय तो बचेगा, लेकिन इस सुविधा के लिए उन्हें अपनी जेब भी ढीली करनी होगी। छह-लेन वाले इस एलिवेटेड स्ट्रेच का उपयोग करने वाले मोटर चालकों को अलग से टोल टैक्स चुकाना होगा।  

ठंड का डबल अटैक: 9–11 फरवरी के बीच बारिश-बर्फबारी की चेतावनी, इन राज्यों में रेड/ऑरेंज अलर्ट

नई दिल्ली देश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। फरवरी का महीना होने के बावजूद ठंड का असर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 15 दिनों में लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे हैं, जिसके चलते उत्तर भारत के कई हिस्सों में ठंड, बारिश और बर्फबारी देखने को मिल रही है। कुछ इलाकों में शीत लहर और कोहरे ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले 9 से 11 दिनों में भी मौसम का रुख कुछ ऐसा ही बना रह सकता है। आज रात सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक 8 फरवरी की रात एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करना शुरू करेगा। इस दौरान उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में तेज पछुआ हवाएं चल रही हैं, जिनकी रफ्तार करीब 120 समुद्री मील तक पहुंच रही है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण 9 से 11 फरवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। इसका असर मैदानी इलाकों में भी दिखेगा, जहां ठंडी हवाओं से ठिठुरन बढ़ सकती है।   चार राज्यों में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। हालांकि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम सक्रिय रहेगा। 10 फरवरी को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। उत्तराखंड के कुछ इलाकों में घना कोहरा छाए रहने की भी संभावना जताई गई है।   दिल्ली में सुबह-शाम की ठंड, दिन में धूप से राहत दिल्ली में मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगा है। हवाओं के चलते सुबह और शाम ठंड महसूस की जा रही है, लेकिन दिन में धूप निकलने से हल्की गर्मी का अहसास हो रहा है। बीते दिन राजधानी में अधिकतम तापमान 25.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले सात दिनों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, हालांकि 9 फरवरी को तापमान में करीब दो डिग्री की गिरावट आ सकती है। 11 फरवरी के आसपास तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रह सकता है।   दिल्ली में हल्के बादलों की संभावना आने वाले एक हफ्ते में दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना रहने की संभावना है। हालांकि 10 और 11 फरवरी को यह सामान्य से कुछ डिग्री अधिक हो सकता है। अगले 24 घंटों के दौरान राजधानी में 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अगले सात दिनों तक आसमान अधिकतर साफ रहेगा, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 9 और 10 फरवरी को हल्के बादल छा सकते हैं। फिलहाल दिल्ली में बारिश की कोई संभावना नहीं जताई गई है।

धीमे ज़हर की तरह काम कर रहा है कैंसर, अगर नहीं छोड़ीं ये 4 आदतें तो…

नई दिल्ली चिकित्सा विज्ञान में हुई अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद ‘कैंसर’ आज भी दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है। जब शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर स्वस्थ ऊतकों (Tissues) को नष्ट करने लगती हैं, तो यह घातक बीमारी जन्म लेती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और भारत सरकार का आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) इस बात पर जोर देते हैं कि कैंसर कोई अपरिहार्य नियति नहीं है। सही जानकारी और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर इस जानलेवा बीमारी के जोखिम को 40% तक कम किया जा सकता है। आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देश: रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज आयुष मंत्रालय के अनुसार, कैंसर से बचाव के लिए महंगे इलाज से बेहतर ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ है। मंत्रालय ने कुछ बुनियादी आदतों को रेखांकित किया है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोक सकती हैं। कैंसर मुक्त जीवन के 5 मुख्य स्तंभ  1. तंबाकू का पूर्ण त्याग: कैंसर से बचाव का सबसे पहला और अनिवार्य कदम है नशा मुक्ति। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और खैनी जैसे उत्पाद न केवल मुंह और फेफड़ों, बल्कि पेट और किडनी के कैंसर का भी मुख्य कारक हैं। मंत्रालय के अनुसार, तंबाकू छोड़ना ही सुरक्षा की सबसे पहली ढाल है।   2. संतुलित वजन और मेटाबॉलिज्म: मोटापा केवल हृदय रोग ही नहीं, बल्कि स्तन, आंत और गर्भाशय के कैंसर का भी आमंत्रण है। शरीर में अत्यधिक वसा (Fat) हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जो ट्यूमर के विकास में सहायक हो सकता है। 3. सक्रिय जीवनशैली (Physical Activity): नियमित व्यायाम शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। रोजाना कम से कम 30-45 मिनट का योग, प्राणायाम या तेज पैदल चलना कैंसर के जोखिम को न्यूनतम स्तर पर ले आता है।   4. ‘रेनबो डाइट’ का महत्व: आयुष मंत्रालय पोषक तत्वों से भरपूर आहार की वकालत करता है। अपनी थाली में रंग-बिरंगे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और एंटीऑक्सीडेंट युक्त मसालों (जैसे हल्दी, अदरक) को शामिल करना चाहिए। प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक चीनी युक्त जंक फूड से दूरी बनाना अनिवार्य है।   5. समय पर स्क्रीनिंग और मेडिकल चेकअप: कैंसर की शुरुआती पहचान ही जीवन रक्षा की कुंजी है। मैमोग्राफी (स्तन कैंसर के लिए) और पैप स्मीयर (सर्वाइकल कैंसर के लिए) जैसे नियमित टेस्ट करवाने से बीमारी को प्रथम चरण में ही पकड़ा जा सकता है, जहाँ इलाज की सफलता दर 90% से अधिक होती है।  

रुके हुए पैसे वापस पाने का मौका! लाडली बहनों के खाते में आएंगे 1500 रुपये, ऐसे करें दावा

मुंबई महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने पात्र महिलाओं को बड़ी खुशखबरी देते हुए अपनी e-KYC में सुधार करने का फिर मौका दिया है। जिन महिलाओं ने अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया सही से पूरी नहीं की है या जिनके आवेदन में जानकारी भरते समय कोई चूक हो गई थी, उन्हें सरकार ने सुधार का एक अंतिम मौका दिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ के माध्यम से जानकारी दी है कि अब लाभार्थी महिलाएं 31 मार्च 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी ई-केवाईसी संबंधी गलतियों को सुधार सकती हैं। यह कदम उन लाडली बहनों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है जिनका लाभ तकनीकी त्रुटियों के कारण रुक गया था। गलत विकल्प से अटके 1500 रुपये मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीन योजना (Ladli Behen Scheme) के कार्यान्वयन के दौरान यह देखा गया कि 31 दिसंबर 2025 तक e-KYC करते समय कई महिलाओं ने अनजाने में गलत जानकारी दर्ज कर दी थी। विशेष रूप से e-KYC के दौरान परिवार के किसी सदस्य की सरकारी नौकरी या पेंशन से जुड़े विकल्प का गलत चयन करने के कारण कई पात्र महिलाओं के आवेदन अपात्र हो गए थे। और उनकी मासिक सहायता राशि रुक गई थी। ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आने के बाद अब सरकार ने सुधार का एक और मौका दिया है।   31 मार्च के बाद नहीं मिलेगा मौका प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि e-KYC और जानकारी में सुधार करने का यह अंतिम मौका है। 31 मार्च 2026 के बाद इस प्रक्रिया के लिए कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा। इसलिए जिन लाडली बहनों की e-KYC प्रक्रिया में किसी भी तरह की गलती रह गई है, वे तय समय सीमा के भीतर इसे जरूर ठीक करा लें।

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