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Aadhaar Card Lost? घर बैठे 2 मिनट में मिलेगा नया आधार, जानिए सरकारी App का आसान तरीका

नई दिल्ली Aadhaar Card आज हर काम के लिए जरूरी हो गया है। ऐसे में अगर Aadhaar Card अचानक खो जाए या जरूरी समय पर हाथ में न हो, तो परेशानी होना तय है। कई लोग ऐसे हालात में फोटो कॉपी ढूंढने लगते हैं या दोबारा Aadhaar निकालने की सोचते हैं, जो समय लेने वाला काम हो सकता है। लेकिन अब घबराने की कोई जरूरत नहीं है। भारत सरकार की डिजिटल सेवा DigiLocker की मदद से आप सिर्फ 2 मिनट में अपना Aadhaar Card मोबाइल या लैपटॉप से डाउनलोड कर सकते हैं। न ही लंबी लाइन और न डॉक्यूमेंट इसके लिए न तो कहीं जाने की जरूरत है और न ही लंबी प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। बस आपका मोबाइल नंबर Aadhaar से जुड़ा होना चाहिए। DigiLocker भारत सरकार की एक डिजिटल सुविधा है, जिसमें आप अपने जरूरी दस्तावेज जैसे Aadhaar Card, Driving License, PAN Card आदि सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन रख सकते हैं। जानिए DigiLocker से Aadhaar Card डाउनलोड करने का पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस। इसे इस्तेमाल करना कितना सुरक्षित है, ताकि आपको किसी तरह की दिक्कत न हो। DigiLocker से Aadhaar Card डाउनलोड करने से पहले क्या चाहिए? Aadhaar डाउनलोड करने से पहले आपके पास ये चीजें होनी चाहिए: Aadhaar से लिंक मोबाइल नंबर, स्मार्टफोन या कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, DigiLocker ऐप या वेबसाइट। DigiLocker से Aadhaar Card कैसे डाउनलोड करें? Step 1: सबसे पहले अपने मोबाइल में DigiLocker ऐप खोलें। चाहें तो वेबसाइट digilocker.gov.in भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अब अपना वही मोबाइल नंबर डालें जो Aadhaar से जुड़ा हुआ है। OTP आएगा, उसे डालकर लॉगिन करें। Step 2: लॉगिन करने के बाद “Issued Documents” या “Get Documents” का ऑप्शन दिखेगा। यहां Aadhaar का विकल्प चुनें। अब अपना 12 अंकों का Aadhaar नंबर डालें और OTP से वेरिफिकेशन करें। Step 3: वेरिफिकेशन के बाद आपका Aadhaar Card DigiLocker में सेव हो जाएगा। यहां से आप इसे PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं। लैपटॉप या कंप्यूटर से Aadhaar कैसे डाउनलोड करें? अगर आप मोबाइल नहीं बल्कि लैपटॉप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भी प्रोसेस लगभग वही है। वेबसाइट खोलें, लॉगिन करें, Aadhaar लिंक करें और PDF डाउनलोड कर लें।

प्रियंका चतुर्वेदी की तीखी टिप्पणी: भारत-अमेरिका समझौता देशहित के खिलाफ?

नई दिल्ली शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने इस समझौते को ‘असमान और अन्यायपूर्ण’ बताते हुए कहा कि यह कोई बराबरी का करार नहीं, बल्कि अमेरिका की ओर से दिया गया एक आदेश है, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया है। प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कुछ दबावों में आकर और राष्ट्रीय हितों की कीमत पर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद यह बात कह चुके हैं कि भारत द्वारा रूस से तेल न खरीदने का आश्वासन दिए जाने के बाद ही 25 प्रतिशत डिजिटल टैरिफ वापस लिया गया। अगर भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीदने की कोशिश करता है, तो यह टैरिफ फिर से लागू किया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह समझौता भारत की स्वतंत्र विदेश और व्यापार नीति के अनुरूप है। प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि किसी भी देश की नीतियों पर भरोसा दशकों की विश्वसनीयता से बनता है। भारत की साख पिछले 70 वर्षों और उससे भी पहले से बनी है। भारत ने कभी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया, बल्कि जब भी आक्रामकता झेली, उसका उचित जवाब दिया। उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब भारत ने खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों को वैक्सीन भेजकर अपनी नीति की विश्वसनीयता दिखाई। संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की नीति हमेशा मुक्त, समान और भरोसेमंद व्यापार की रही है। इसके साथ ही प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली में गड्ढे में गिरकर एक बाइक सवार की मौत के मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जनता सरकार से बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद करती है, अच्छी और सुरक्षित सड़कें, साफ-सुथरा बुनियादी ढांचा। लेकिन सरकारें सड़क सुरक्षा के मूल नियमों का पालन नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में नोएडा में भी गड्ढे में गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी और अब दिल्ली में ऐसा ही दर्दनाक हादसा सामने आया है। दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब सरकारें जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी।

व्यापारिक रिश्तों में पारदर्शिता: चिराग पासवान ने भारत-अमेरिका समझौते के बिंदु जल्द स्पष्ट करने का वादा किया

पटना भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भरोसा जताया कि सरकार जल्द ही इस समझौते के सभी बिंदुओं को स्पष्ट कर देगी। वहीं जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कांग्रेस पर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। आईएएनएस से बातचीत में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कॉमर्स मिनिस्टर ने पहले ही बता दिया है कि जल्द ही सभी बिंदुओं को स्पष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब भी कोई समझौता होता है तो साझा बयान जारी किए जाते हैं। उन्हें लगता है कि जल्द ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी दे दी जाएगी। वहीं, जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी और न्यूक्लियर डील हुई थी, देश की संप्रभुता और जानकारी साझा करने को लेकर कांग्रेस सवालों के घेरे में आई थी, तब उन्हें अमेरिका के साथ हुई डील अच्छी लगी थी। आज की डील में उन्हें कमियां नजर आ रही हैं। संसद का सत्र चल रहा है, उन्हें अपनी बात रखनी चाहिए; सरकार जवाब देगी। पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर आ रहे नेताओं के बयानों पर उन्होंने कहा कि पप्पू यादव सांसद हैं और वे फरार थे। उनके खिलाफ कुर्की के आदेश जारी हुए हैं। यह न्यायपालिका की अवहेलना है। न्यायपालिका ने उन्हें फरार घोषित किया, उनके खिलाफ वारंट जारी किया और कुर्की का आदेश दिया; ऐसे में वे कैसे कह सकते हैं कि नीट की छात्रा के विवाद के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है। यह तो न्यायपालिका की प्रक्रिया का अपमान है। नीरज कुमार ने कहा कि न्यायपालिका में जमानत याचिका दाखिल करते समय यही लिखा जाना चाहिए कि नीट मामले के चलते ही गिरफ्तारी हुई है। प्रशांत किशोर को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का शटर अब गिर चुका है। अब कोई उन्हें राज्य में रणनीतिकार बनाने के लिए तैयार नहीं है। पीएम और सीएम बनाने की बातें करते थे, लेकिन एक एमएलए भी नहीं बनवा पाए। स्वाभाविक है कि वे दर-दर भटकेंगे, लेकिन जनता से समर्थन नहीं मिलेगा। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर अभी राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे।

बड़ा हादसा टला: खुले मैदान में गिरा ट्रेनिंग विमान, पहले ही कूद गए पायलट और यात्री

बंगलूरू कर्नाटक के विजयपुरा जिले के बालेश्वर तालुक के मंगलुरु गांव में रविवार दोपहर एक प्राइवेट मिनी विमान खुले मैदान में क्रैश हो गया। हादसे में पायलट समेत दोनों यात्री बाल-बाल बच गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रेड बर्ड कंपनी का यह दो-सीटर ट्रेनिंग विमान था। क्रैश से ठीक पहले दोनों यात्री विमान से बाहर निकलने में सफल रहे। टक्कर के बाद विमान तीन हिस्सों में टूट गया। हादसे में दोनों को चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

शांतिकुंज का कदम: हरिद्वार पंतद्वीप में जुटे साधक, बड़े पैमाने पर सफाई अभियान

हरिद्वार हरिद्वार के पंतद्वीप मैदान में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जहाँ अखिल विश्व गायत्री परिवार (शांतिकुंज) के हजारों साधकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिला शासन एवं नगर निगम ने स्वच्छता की अलख जगाई। शांतिकुंज की गरिमा और उसके अनुशासित कार्यबल का परिचय देते हुए हजारों की संख्या में आए शांतिकुंज के स्वयंसेवकों ने पंतद्वीप क्षेत्र में व्यापक सफाई अभियान चलाया। कई ट्राली अपशिष्टों, कचरों का निस्तारण किया गया। इस दौरान न केवल कूड़ा-करकट हटाया गया, बल्कि उपस्थित जनसमूह को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया गया। उत्तराखंड सरकार ने आवाहन किया है कि राज्य के प्रत्येक जिले में प्रत्येक व्यक्ति को सप्ताह में एक दिन सामूहिक रूप से स्वच्छता के लिए समय दान करना है। ताकि अभियान में जन जन की भागीदारी हो। इस अवसर पर शांतिकुंज के व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसएसपी डोबाल, महापौर किरण जैसल सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि ने कहा कि पूज्य पं श्रीराम शर्मा आचार्यश्री के स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन के सिद्धांत को अपनाकर ही हम देवभूमि उत्तराखंड को स्वच्छ राज्य के रूप में विकसित कर सकते हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने शांतिकुंज के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि जब आध्यात्मिक संस्थाएं प्रशासन के साथ जुड़‌ती हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रह जाता। उल्लेखनीय है कि इस विशेष पहल के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य स्वच्छ भारत अभियान के तहत उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान दिलाना है। यदि जन भागीदारी इसी प्रकार बनी रही, तो हरिद्वार सहित पूरा उत्तराखंड स्वच्छता का एक नया उदारहण के रूप में विकसित होगा।

भागवत की चेतावनी: अगर 1.25 करोड़ हिंदू खड़े हों, बांग्लादेश को भुगतना पड़ेगा

मुंबई बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर बांग्लादेश के सवा करोड़ हिंदू अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खुद खड़े होने का निर्णय लेते हैं, तो दुनिया भर के हिंदू उनके साथ मजबूती से खड़े होंगे। मुंबई में आयोजित संघ की दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला ‘नए क्षितिज’ के दूसरे दिन संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा, “बांग्लादेश में करीब सवा करोड़ हिंदू रहते हैं। अगर वे वहां रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का फैसला करते हैं, तो पूरी दुनिया के हिंदू उनकी मदद करेंगे।” ‘मैं आपको गारंटी देता हूं…’ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हुई घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा, “बांग्लादेश में जो घटनाएं हुई हैं… वहां आज भी करीब सवा करोड़ हिंदू रहते हैं। अगर वे एकजुट हो जाएं तो वहां की राजनीतिक व्यवस्था का इस्तेमाल अपने हित में, अपनी सुरक्षा के लिए कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उनका एकजुट होना बेहद जरूरी है। अच्छी बात यह है कि इस बार उन्होंने यह तय किया है कि वे भागेंगे नहीं, बल्कि वहीं रहकर संघर्ष करेंगे। अब अगर संघर्ष करना है, तो एकता सबसे जरूरी होगी। जितनी जल्दी वे एकजुट होंगे, उतना ही बेहतर होगा। बांग्लादेश में हिंदुओं की मौजूदा संख्या के साथ वे अपनी स्थिति में बड़ा सुधार ला सकते हैं। और इस दिशा में हम यहां अपनी सीमाओं के भीतर रहते हुए, और दुनिया भर में जहां-जहां हिंदू हैं, वहां से उनके लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसकी मैं आपको गारंटी देता हूं।”   इस कार्यक्रम का आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम में किया गया है। गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में तेजी देखी गई है। हालात उस समय और बिगड़ गए जब भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। इसके बाद अगस्त 2024 में हुए तथाकथित विद्रोह के तहत छात्र आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर देश से भागना पड़ा।   इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हिंसक भीड़ ने कई इलाकों में हिंदू नागरिकों को निशाना बनाया। इन हमलों में व्यापारी, मजदूर और छात्र समेत कई निर्दोष लोगों की मौत हो चुकी है। कई जगह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे संगठित हमलों में बदल गए, जिनका सीधा असर हिंदू समुदाय पर पड़ा। मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। उनके इस संदेश को संघ और अन्य हिंदू संगठनों के बांग्लादेशी हिंदुओं के समर्थन और एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सेशेल्स के राष्ट्रपति भारत पहुंचे, मुंबई और चेन्नई की यात्रा पूरी कर नई दिल्ली में राजकीय बैठकें

नई दिल्ली सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी रविवार को दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका स्वागत किया। हर्मिनी इससे पहले मुंबई और चेन्नई में आयोजित कुछ बिजनेस इवेंट्स में शामिल होने गए थे। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर तस्वीरों संग इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया: “सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी चेन्नई और मुंबई में अहम कार्यक्रमों को संपन्न कर यहां पहुंचे। वहां उन्होंने शासन, उद्योग, तटीय प्रबंधन और स्वास्थ्य क्षेत्र सहित अहम स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात की।” उन्होंने आगे कहा, “एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका गर्मजोशी से विधिवत स्वागत किया। सेशेल्स भारत का एक प्रमुख समुद्री पड़ोसी है और भारत के विजन महासागर और ग्लोबल साउथ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।” एमईए द्वारा जारी बयान के अनुसार, हर्मिनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर पांच दिवसीय (5-10 फरवरी) राजकीय यात्रा पर गुरुवार को भारत पहुंचे। दिल्ली यात्रा के दौरान, वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने और पीएम मोदी के साथ आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करने वाले हैं। मुंबई में उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की, और दोनों नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, खासकर पोर्ट-आधारित विकास, कोस्टल मैनेजमेंट, और महाराष्ट्र और सेशेल्स के बीच बेहतर सहयोग को लेकर वार्ता की गई। सीएम फडणवीस ने एक्स पोस्ट में अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, “महाराष्ट्र सेशेल्स का स्वागत करता है! मुंबई के ताज महल पैलेस में खूबसूरत देश सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी और मंत्रियों का स्वागत करते हुए बहुत खुशी हुई। मैंने उन्हें और सेशेल्स के लोगों को स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ और इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं!” उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई वार्ता को शानदार बताया। कहा, “विभिन्न विषयों पर शानदार बातचीत हुई, खासकर पोर्ट-आधारित विकास, तटीय प्रबंधन और महाराष्ट्र और सेशेल्स के बीच बेहतर सहयोग को लेकर। मैं माननीय मंत्रियों विदेश मंत्री बैरी फॉरे, वित्त मंत्री पियरे लापोर्टे, परिवहन मंत्री वेरोनिक लापोर्टे और पर्यटन और संस्कृति मंत्री अमांडा बर्नस्टीन का भी स्वागत करता हूं।” 6 फरवरी को, हर्मिनी ने चेन्नई में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा आयोजित भारत-सेशेल्स बिजनेस फोरम में भाग लिया। इसे लेकर फिक्की ने एक्स पर एक बयान जारी किया। फिक्की ने कहा, “फोरम के हिस्से के रूप में, एक खास सीईओ राउंडटेबल भी आयोजित की गई, जहां भारत के प्रमुख उद्योगपतियों ने माननीय राष्ट्रपति और सेशेल्स से आए मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधे बातचीत की।”

डॉ. चिन्मय पंड्या बोले: बाल्टिक देशों में भी सनातन संस्कृति का प्रभाव मजबूत

हरिद्वार अपने विदेश प्रवास के दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पंड्या लिथुआनिया की राजधानी विलनियस पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने राजधानी स्थित प्रसिद्ध बैलेंस सेंटर में वैदिक विधि-विधान के साथ गायत्री यज्ञ सम्पन्न कराया। यज्ञ में स्थानीय लिथुआनियाई नागरिकों, भारतीय समुदाय तथा गायत्री परिवार से जुड़े अनेक लोगों की भावपूर्ण सहभागिता रही, जिससे वातावरण शांति, सकारात्मक ऊर्जा और पवित्र चेतना से ओतप्रोत हो गया। गायत्री यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण एवं पवित्र अग्नि में आहुतियों के माध्यम से सर्वे भवन्तु सुखिन: तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य तथा मानवीय चेतना के उत्थान की कामना की गई। उपस्थित जनसमूह ने इस आध्यात्मिक अनुष्ठान को केवल एक धार्मिक कर्मकांड के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और सामूहिक चेतना को जाग्रत करने वाली प्रक्रिया के रूप में अनुभव किया। इस अवसर पर लिथुआनियाई नागरिकों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि प्राचीन भारतीय वैदिक साधनाएँ आज भी आधुनिक वैश्विक समाज में संतुलन, शांति, नैतिक मूल्यों और एकता की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन पूर्व और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेतु को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम सिद्ध हो रहे हैं। यह आयोजन बाल्टिक क्षेत्र में वैदिक परंपराओं के प्रति बढ़ती जागरूकता और रुचि का सजीव प्रमाण बना। विशेष रूप से लिथुआनियाई प्रतिभागियों ने यज्ञ के प्रतीकात्मक अर्थ, पंचतत्त्वों के साथ मानव के संबंध तथा प्रकृति-सम्मान की भारतीय दृष्टि के प्रति गहरी जिज्ञासा और सराहना व्यक्त की। यह कार्यक्रम अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के वैश्विक दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है, जिसके अंतर्गत एशिया का प्रथम एवं विश्व का सबसे बड़ा बाल्टिक सेंटर हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र भारत और बाल्टिक देशों के मध्य अकादमिक सहयोग, सांस्कृतिक संवाद और आध्यात्मिक आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच बनकर उभर रहा है। इस अवसर पर लिथुआनियाई नागरिकों ने सनातन संस्कृति के प्रति अपनी रुझान को व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता की अपेक्षा भी प्रकट की।

भारतीय नेतृत्व पर पीएम मोदी का भरोसा, मलेशिया में नेताओं से की महत्वपूर्ण चर्चा

कुआलालंपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मलेशिया में मंत्रियों और सीनेटरों समेत भारतीय मूल के नेताओं से मुलाकात की और सार्वजनिक जीवन में उनकी उपलब्धियों की सराहना की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जाने-माने मंत्रियों और सीनेटरों समेत पीआईओ नेताओं के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। भारत के साथ उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव साफ दिख रहा था। सार्वजनिक जीवन में उनकी उपलब्धियां सभी के लिए बहुत गर्व की बात हैं।” बता दें, इससे पहले पीएम मोदी ने कुआलालंपुर में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक जयराज राजा राव से भी मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने सैनिकों के ऐतिहासिक योगदान और साउथ-ईस्ट एशिया में रहने वाले भारतीयों के बीच इसकी विरासत को लेकर चर्चा की। आजाद हिंद फौज को इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के नाम से भी जाना जाता है। एक्स पर जयराज राजा राव के साथ एक तस्वीर शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आईएनए और इसके फाउंडर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “आईएनए के अनुभवी जयराज राजा राव से मिलना बहुत खास था। उनका जीवन बहुत हिम्मत और त्याग से भरा है। उनके अनुभव सुनना बहुत प्रेरणा देने वाला था। हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आईएनए की बहादुर महिलाओं और पुरुषों के हमेशा कर्जदार रहेंगे, जिनकी बहादुरी ने भारत की किस्मत बनाने में मदद की।” पीएम मोदी ने अपने मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम के साथ उनके आधिकारिक आवास सेरी परदाना में भी मीटिंग की। दोनों नेताओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अलग-अलग सेक्टर में विकास सहयोग की समीक्षा की और सुरक्षा, रक्षा, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए। पीएम इब्राहिम से मुलाकात को लेकर भारत के प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “आज सेरी परदाना में पीएम अनवर इब्राहिम के साथ बहुत अच्छी मीटिंग हुई। भारत और मलेशिया समुद्री पड़ोसी हैं, जिनके बीच हमेशा गहरी दोस्ती रही है। हमने व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी और दूसरे सेक्टर में विकास सहयोग की समीक्षा की। हम सुरक्षा, रक्षा, एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर के फील्ड में सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमत हुए।”

चीन का कड़ा रुख: ईसाई चर्च निशाने पर, पादरियों की धरपकड़ तेज

बीजिंग चीन में गैर-पंजीकृत ईसाई चर्चों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है। जनवरी 2026 की शुरुआत में झेजियांग प्रांत के वेनझोउ शहर स्थित यायांग चर्च को सैकड़ों सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने घेर लिया और चर्च के ऊपर लगे क्रॉस को हटा दिया गया। यह कार्रवाई केवल स्थानीय निर्माण नियमों का मामला नहीं, बल्कि स्वतंत्र ईसाई उपासना के खिलाफ चल रहे व्यापक राष्ट्रीय अभियान का संकेत मानी जा रही है। यायांग चर्च एक अपंजीकृत प्रोटेस्टेंट “हाउस चर्च” है, जो सरकारी नियंत्रण वाली धार्मिक व्यवस्था से बाहर काम करता है। रिपोर्टों के अनुसार, दिसंबर 2025 के मध्य से ही चर्च पर दबाव बढ़ाया जा रहा था और कई पादरियों व सदस्यों को हिरासत में लिया गया था। जनवरी आते-आते यह मामला पूर्ण पुलिस ऑपरेशन में बदल गया, जिससे साफ है कि प्रशासन अनौपचारिक चर्चों को पूरी तरह राज्य नियंत्रण में लाना चाहता है। चीन में ईसाई धर्म को आधिकारिक मान्यता तो है, लेकिन केवल राज्य-नियंत्रित संस्थाओं के माध्यम से। प्रोटेस्टेंट चर्चों को ‘थ्री-सेल्फ पैट्रियॉटिक मूवमेंट’ और कैथोलिक चर्चों को सरकारी कैथोलिक संघ से जुड़ना अनिवार्य है। जो चर्च पंजीकरण से इनकार करते हैं, उन्हें अवैध घोषित कर दिया जाता है। वेनझोउ को लंबे समय से स्वतंत्र ईसाई समुदाय का गढ़ माना जाता रहा है और इसे “चीन का यरुशलम” भी कहा जाता है। यहां पहले भी क्रॉस हटाने, चर्च सील करने और पादरियों की गिरफ्तारी जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हालिया कार्रवाई को अधिक संगठित और समन्वित अभियान के रूप में देखा जा रहा है। इसी अवधि में सिचुआन प्रांत के चेंगदू शहर में स्थित अर्ली रेन कवनेंट चर्च के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया गया। चर्च ने इसे सुनियोजित कार्रवाई बताया। वहीं, शांक्सी प्रांत के लिंफेन गोल्डन लैम्पस्टैंड चर्च से जुड़े लोगों को 2025 में कथित धोखाधड़ी के मामलों में सजा दी गई, जिसे मानवाधिकार समूह धार्मिक दमन का कानूनी जरिया बताते हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चीन में संशोधित धार्मिक कानून सरकार को निगरानी, दंड और नियंत्रण की व्यापक शक्तियां देते हैं। आलोचकों के अनुसार, आपराधिक कानूनों का उपयोग कर शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों को दबाया जा रहा है, जिससे स्वतंत्र आस्था के लिए जगह लगातार सिमटती जा रही है।

भारत-मलेशिया संबंधों को मिली नई दिशा: PM मोदी से वार्ता के बाद अनवर का बयान, 11 समझौते फाइनल

मलेशिया मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी बैठक को “बहुत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और निर्णायक” बताया और कहा कि यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। मोदी इस समय मलेशिया के दो-दिवसीय दौरे पर हैं, जिसमें वे कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। कुआलालंपुर में दोनों नेताओं ने प्रतिनिधि-स्तरीय वार्ता की और 11 दस्तावेजों सहित कई समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर का साक्षी बने। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनवर ने कहा कि भारत-मलेशिया के संबंध 1957 से चले आ रहे हैं और 2024 में इसे “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध, मजबूत जन-स्तरीय जुड़ाव और लगातार बढ़ती आर्थिक साझेदारी मौजूद है। अनवर ने आगे कहा कि भविष्य में दोनों देश व्यापार और निवेश, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, सुरक्षा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को और गहरा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन पहलों को तेजी से लागू करने के लिए दोनों सरकारों और विदेश मंत्रियों की प्रतिबद्धता है। वार्ता के परिणामों पर अनवर ने बताया कि 11 दस्तावेजों के हस्ताक्षर किए गए, जिनमें MoUs और पत्रों का आदान-प्रदान शामिल था। उन्होंने कहा कि ये समझौते पारंपरिक द्विपक्षीय समझौतों से आगे हैं और इनमें से कई क्षेत्र—जैसे सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और सुरक्षा सहयोग-शांतिरक्षा (peacekeeping) जैसी पहलें भी शामिल हैं।   इससे पहले, अनवर ने मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों देशों के मजबूत संबंधों और इस दौरे की व्यक्तिगत अहमियत पर जोर दिया। इस यात्रा की शुरुआत पर पुत्राजया में प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर और अन्य औपचारिक सम्मान दिए गए। मोदी ने स्वागत के लिए आभार जताते हुए कहा कि मलेशिया ने उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल का बहुत ही गरिमामय और खूबसूरत स्वागत किया। मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी इस स्वागत के कुछ पल साझा किए और कहा कि भारत और मलेशिया का साझेदारी विश्वास, मित्रता और साझा आकांक्षाओं पर आधारित है। यह मोदी का मलेशिया का तीसरा दौरा है और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया संबंधों के “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” में उन्नयन के बाद यह पहला दौरा है। इस दौरे के दौरान मोदी CEOs और व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात करेंगे और भारत-मलेशिया के व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने के लिए कदम उठाएंगे। दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का एक बड़ा कारण मलेशिया में भारतीय मूल की लगभग 2.9 मिलियन आबादी है, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी भारतीय समुदाय मानी जाती है।

हिमाचल बजट की तैयारी शुरू, CM सुक्खू ने विधायकों से विकास प्रस्तावों की लिस्ट तलब की

शिमला हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (CM Sukhu) ने शिमला और कांगड़ा जिलों के विधायकों के साथ बैठक की। यह बैठक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने के लिए बुलाई गई दो दिवसीय बैठक के अंतिम सत्र के दौरान हुई, जिसमें उन्होंने विधायकों से जल्द से जल्द अपनी विकास प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करने की अपील की। विधायकों से निर्धारित प्रारूप में अपनी विकास प्राथमिकताओं को योजना विभाग को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया ताकि इन्हें वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल किया जा सके। सुक्खू ने अधिकारियों को विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश भी दिया। बैठक के दौरान, रोहरू विधायक मोहन लाल ब्राक्ता ने सरकार से सीमा कॉलेज में बी.एड. कक्षाएं शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में निर्माणाधीन पेयजल योजनाओं को शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया। शिमला (शहरी) के विधायक हरीश जनार्थ ने शहर में संपर्क सड़कों के निर्माण और मरम्मत तथा पेयजल योजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के लिए अलग से बजट की मांग की। उन्होंने शिमला में भूमिगत पाइपलाइन बिछाने के कार्य में भी तेजी लाने की मांग की।    

काबुल दहला: रिहायशी मकान में विस्फोट, 8 लोगों की मौत से हड़कंप

काबुल अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक आवासीय घर के अंदर गैस सिलेंडर विस्फोट में कम से कम आठ लोग मारे गए। काबुल के गवर्नर कार्यालय ने शनिवार शाम जारी बयान में बताया कि घटना पुलिस डिस्ट्रिक्ट 21 में हुई, जहां एक परिवार अपने घर को ठंड से बचाने के लिए गैस हीटर का उपयोग कर रहा था। गैस रिसाव के कारण सिलेंडर फट गया और इससे घर में मौजूद लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। अफगानिस्तान में व्यापक आधुनिक हीटिंग प्रणाली न होने के कारण अधिकांश घर सर्दियों में अपने घर गर्म रखने के लिए गैस सिलेंडर या पारंपरिक चूल्हे पर निर्भर रहते हैं। ऐसे हादसे अक्सर गैस रिसाव और विस्फोट के कारण होते हैं और गरीब देश में यह एक आम खतरा बन गया है।इससे पहले 5 फरवरी को पूर्वी अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में एक घर के अंदर गैस सिलेंडर फटने से तीन महिलाएं मारी गई थीं और एक अन्य घायल हुई थी। उस घटना में भी परिवार गैस हीटर का उपयोग कर रहा था और गैस रिसाव के कारण विस्फोट हुआ था। घायल पुरुष सदस्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ सप्ताह पहले, पूर्वी नंगरहार प्रांत के स्पिन घर जिले में गैस सिलेंडर विस्फोट में दो महिलाएं मारी गईं और दो बच्चे घायल हुए थे।इसके अलावा 14 जनवरी को नंगरहार के बटिकोट जिले में एक होटल के अंदर गैस सिलेंडर फटने से 14 कर्मचारी घायल हो गए थे, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी। पुलिस ने घटना को होटल कर्मचारियों की लापरवाही का परिणाम बताया था और घायल लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया था।  

मुंबई मंच से मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश— आरएसएस प्रमुख जाति से ऊपर, केवल हिंदू

मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख कौन बन सकता है, इस बात को लेकर बड़ा बयान दिया। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है, केवल एक शर्त है, जो बने वह हिंदू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जाति के आधार पर पद का चयन नहीं किया जाता, केवल हिन्दू होने की शर्त जरूरी है। बता दें कि मोहन भागतव ने मुंबई में आयोजित आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही। इस मौके पर कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि जाति से नहीं बल्कि हिंदू होने से ही इस पद के लिए पात्रता तय होती है। अपने पद को लेकर भी बोले भागवत इस दौरान मोहन भागवत ने उनकी उम्र 75 साल हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद संघ ने उनसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने साफ किया कि संघ में पद छोड़ने का फैसला संगठन करता है, न कि कोई व्यक्ति खुद। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्र और प्रांत के प्रमुख मिलकर सरसंघचालक का चयन करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 साल के बाद बिना पद के काम करना चाहिए। मैंने अपनी उम्र के बारे में संघ को बताया, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी आरएसएस कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से रिटायर होना कभी नहीं होगा। ‘परिस्थितियों पर ज्यादा नहीं, समाधान पर ध्यान देने की जरूरत’ मोहन भागवत ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां अनुकूल भी हो सकती हैं और कठिन भी, लेकिन उन पर जरूरत से ज्यादा सोचने की बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है। इसके साथ ही हल्के-फुल्के अंदाज में भागवत ने कहा कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों से खून की आखिरी बूंद तक काम लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी को जबरन रिटायर किया गया हो। प्रचार नहीं, संस्कार देना संघ का काम आरएसएस प्रमुख ने साफ किया कि संघ का काम चुनावी प्रचार या आत्म-प्रचार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अपने काम का ज्यादा प्रचार नहीं करते। जरूरत से ज्यादा प्रचार से अहंकार आता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, समय पर और उतना ही जितना जरूरी हो। ‘आरएसएस में अंग्रेजी नहीं, लेकिन विरोध भी नहीं’ इसके साथ ही भागवत ने भाषा को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी माध्यम नहीं होगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहां जरूरत होगी, वहां अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाएगा। हमें इससे कोई परहेज नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को अंग्रेजी इस तरह बोलनी चाहिए कि अंग्रेजी बोलने वाले भी सुनना चाहें, लेकिन मातृभाषा को भूलना नहीं चाहिए। इस दौरान उन्होंने अपने दक्षिण भारत और विदेश का कुछ अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब वे बंगलूरू में एक कार्यक्रम के दौरान दक्षिण भारत के कई लोग हिंदी नहीं समझ पाए, तो उन्होंने अंग्रेजी में जवाब दिए। वहीं विदेशों में रहने वाले भारतीयों से बातचीत के दौरान वह हिंदी या उनकी मातृभाषा में संवाद करते हैं।

भारत–मलेशिया रिश्तों में नई गर्मजोशी: इब्राहिम ने PM मोदी को बताया सच्चा और भरोसेमंद दोस्त

मलेशिया मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की  तारीफों के पुल बांधते हुए उनको “सच्चा दोस्त” बताया और कहा कि उनके बीच भरोसेमंद और समझदारी भरा आदान-प्रदान हुआ।  इब्राहिम ने कहा- मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं  मोदी जी का बहुत अच्छा पर्सनल दोस्त हूं। और आप सही मायने में सच्चे, भरोसेमंद और समझदार दोस्त हैं।अनवर इब्राहिम ने कहा,  “मैं पर्सनली बहुत एक्साइटेड, बहुत शुक्रगुजार और बहुत खुश हूं कि भारत से मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त मलेशिया में हमारे साथ जुड़ रहा है।”  कुआलालंपुर में दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनवर ने इस बैठक को “बहुत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और निर्णायक” बताया और कहा कि यह भारत-मलेशिया संबंधों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। अनवर ने कहा कि भारत और मलेशिया के संबंध 1957 से हैं और 2024 में इसे “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” में अपग्रेड किया गया। उन्होंने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध, मजबूत जन-स्तरीय जुड़ाव और तेजी से बढ़ती आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने 11 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें MoUs और पत्रों का आदान-प्रदान शामिल है, और यह सामान्य द्विपक्षीय समझौतों से आगे है। इनमें से कुछ समझौतों में सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। अनवर ने कहा कि दोनों देश व्यापार और निवेश, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय मुद्रा (रुपया और रिंगगिट) में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को और गहरा करेंगे।   उन्होंने 2025 में 8.59 अरब डॉलर के व्यापार आंकड़े से आगे बढ़कर 18.59 अरब डॉलर के लक्ष्य से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई। अनवर ने शैक्षिक संबंधों को “केंद्रिय” बताया और कहा कि कई मलेशियाई छात्रों की शिक्षा भारत में हुई है, जबकि भारत से भी छात्र मलेशिया में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारतीय शिक्षा संस्थानों को वैश्विक मान्यता मिली है और भविष्य में छात्रों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा। उन्होंने पर्यटन और कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने भारत के शांति प्रयासों यूक्रेन-रूस और मध्य पूर्व (गाजा) के संदर्भ में को समर्थन देने के लिए मोदी की सराहना की।   अंत में, अनवर ने भारत की सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि कोटा किनाबालु (साबाह) में भारत का वाणिज्य दूतावास खोलने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। इससे पहले दोनों नेताओं ने प्रतिनिधि-स्तरीय वार्ता की, जिसमें रक्षा और सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी को पुत्राजया में औपचारिक स्वागत भी किया गया। यह दौरा भारत-मलेशिया के लंबे समय से चल रहे मित्रता संबंध को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।    

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