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पवार परिवार में शादी की शहनाई: शरद पवार की नातिन रेवती नागपुर की बहू बनेंगी

 नागपुर एनसीपी (शरद पवार) की नेता और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. रेवती की शादी नागपुर के प्रतिष्ठित बिजनेसमैन के बेटे सारंग लखानी से तय हुई है. इस खबर की पुष्टि परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए बधाई संदेशों से हुई है. लोकसभा सांसद के बेटे विजय सुले ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर बधाई मैसेज पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बहन रेवती और सारंग की एक फोटो शेयर की, जिसके साथ कैप्शन था, “बधाई हो बहन और जीजाजी,” साथ में दिल और अंगूठी वाले इमोजी भी थे. कांग्रेस लीडर सुशील कुमार शिंदे की बेटी स्मृति शिंदे ने भी सोशल मीडिया पर ऐसा ही मैसेज और फोटो शेयर किया. रेवती सुले ने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बैचलर किया और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की. वहीं, सारंग लखानी अभी विश्वराज ग्रुप में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, जो उनके पिता की फर्म है. सारंग ने यूनाइटेड स्टेट्स के कोलंबिया बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है. साथ ही सारंग लखानी एक कुशल बैडमिंटन खिलाड़ी भी रह चुके हैं.  खुशी की इस खबर के बीच परिवार के वरिष्ठ सदस्य और दिग्गज नेता शरद पवार के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है. उन्हें सीने में संक्रमण के चलते सोमवार को पुणे के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द स्वस्थ होकर पोती के विवाह समारोहों में शामिल होंगे.

कनाडा का टंबलर रिज बना खौफ का मंजर — स्कूल में गोलीबारी, शूटर सहित 9 मृत, 25 घायल

टंबलर रिज कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया (BC) प्रांत के टंबलर रिज शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. मंगलवार को एक माध्यमिक स्कूल और एक रिहायशी घर में गोलीबारी हुई, जिसमें हमलावर समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई. वहीं, इस फायरिंग में 25 लोग घायल भी हो गए.  रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के मुताबिक, दोपहर लगभग 1:20 बजे ‘टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल’ में एक सक्रिय शूटर के होने की रिपोर्ट मिली. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके में ‘पुलिस इनिशिएटेड पब्लिक अलर्ट’ (PIPA) जारी किया और स्कूल को चारों ओर से घेर लिया. स्कूल में दाखिल होने पर पुलिस अधिकारियों को 7 लोगों के शव मिले. पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक संदिग्ध के मारे जाने की आशंका है, लेकिन अभी इस बात की जांच की जा रही है कि क्या कोई दूसरा हमलावर भी इस घटना में शामिल है.  स्कूल और घर से 9 शव बरामद जांच में स्कूल से जुड़ी इस घटना के तार एक स्थानीय निवास से भी जुड़ा पाए गए. वहां तलाशी के दौरान पुलिस को दो और लोगों के शव बरामद हुए. स्थिति को काबू में देख पुलिस ने शाम 5:45 बजे पब्लिक अलर्ट वापस ले लिया था और अब आगे की जांच जारी है. पुलिस हमलावर के मकसद पता लगाने की कोशिश कर रही है. लोगों को घरों में रहने की सलाह इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘BC RCMP मेजर क्राइम’ विभाग ने जांच की कमान संभाल ली है. इलाके में इमरजेंसी रिस्पांस टीम और फ्रंटलाइन अधिकारियों के साथ-साथ विक्टिम सर्विसेज को भी तैनात किया गया है, ताकि प्रभावित परिवारों को मानसिक और सामाजिक सहायता प्रदान की जा सके. कस्बे की करीब 2400 की आबादी को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि पड़ोसी इलाकों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है. बंद किए गए सेकेंडरी और एलिमेंट्री स्कूल सुरक्षा के मद्देनजर टंबलर रिज के सेकेंडरी और एलिमेंट्री दोनों स्कूलों को फिलहाल बंद कर दिया गया है. स्थानीय विधायक लैरी न्यूफेल्ड ने जानकारी दी है कि समुदाय की मदद के लिए बड़ी संख्या में पुलिस (RCMP) और एम्बुलेंस की टीमें तैनात की गई हैं. उन्होंने सुरक्षा कारणों से फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा करने से मना किया है, ताकि चल रहे ऑपरेशन में कोई परेशानी न आए. 

शबाना महमूद की ब्रिटेन पीएम बनने की संभावना, कश्मीर पर पड़ सकता है प्रभाव?

लंदन   शबाना महमूद यह नाम विश्व की राजनीति पर हाल ही में चर्चा का केंद्र बन गया है, क्योंकि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं. शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक हैं और उन्होंने आर्टिकल 370 को हटाने जाने का विरोध किया था. उन्होंने कश्मीर को लेकर कई बार भारत विरोधी तेवर दिखाया है, ऐसे में उनके प्रधानमंत्री बनने से क्या भारत और यूके के संबंधों पर असर पड़ सकता है? कौन है शबाना महमूद? शबाना महमूद लेबर पार्टी की तेज तर्रार नेता हैं. वह महज 45 साल की हैं. उनका जन्म इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुआ है और वे एक पाकिस्तानी मूल के माता–पिता की संतान हैं. शबाना ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है और शुरुआत में पेशे से वकील रही हैं और बाद में उन्होंने राजनेता बनने की ओर कदम बढ़ा दिया. शबाना का परिवार पीओके के मीरपुर से वास्ता रखता है. उनके पिता सिविल इंजीनियर हैं. शबाना ने शादी नहीं की है और अपने 4 भाई-बहनों में वो सबसे बड़ी हैं. 2010 में वे पहली बार संसद सदस्य (MP) के रूप में चुनी गईं. शबाना महमूद लेबर पार्टी की सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुकी है. वर्तमान में वो होम सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत हैं. ब्रिटेन में होम सेक्रेटरी को भारत के गृहमंत्री के समकक्ष माना जा सकता है, लेकिन उसकी भूमिका विदेश नीतियों में भी अहम होती है. 2024 में शबाना ने न्याय मंत्री (Justice Secretary) और लॉर्ड चांसलर (Lord Chancellor) के रूप में भी सेवा दी. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की कुर्सी पर खतरा क्यों मंडराया? ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सुपरमेरी जीत(बड़ी जीत) के साथ 5 जुलाई 2024 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन एपस्टीन फाइल्स ने उनके लिए परेशानी खड़ी कर दी है. दरअसल कीर स्टारमर की परेशानी की वजह हैं पीटर मैंडेलसन. पीटर मैंडेलसन को कुछ समय पहले अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत नियुक्त किया गया था और मैंडेलसन के संबंध जेफ्री एपस्टीन से थे. एपस्टीन फाइल्स में यह बताया गया है कि कि मैंडेलसन ने कई संवेदनशील जानकारी एपस्टीन को मेल की थी. इस मुद्दे को लेकर ब्रिटेन में बड़ा बवाल मचा हुआ है और प्रधानमंत्री की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि आखिर उन्होंने ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति क्यों की. पीटर मैंडेलसन को पद से हटा दिया गया है, लेकिन ब्रिटेन में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग हो रही है. हालांकि कीर स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना किया है, लेकिन उनपर इस्तीफे का दबाव बहुत बढ़ गया है. शबाना महमूद अगर ब्रिटेन की पीएम बनी, तो भारत के साथ बिगड़ेंगे संबंध? शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की राजनेता हैं. इसी वजह से एक आम भारतीय के मन में यह सवाल है कि क्या शबाना महमूद के प्रधानमंत्री बनने से भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध बिगड़ सकते हैं? इस शंका के बीच हमें कुछ बातों को समझना होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी देश की राजनीति और वहां की नीतियां राष्ट्रीय हित के अनुसार तय होती हैं ना कि किसी व्यक्ति के धर्म और उसके सोच के आधार पर. इस स्थिति में अगर शबाना महमूद ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बन भी जाती हैं, तो उनकी व्यक्तिगत राय का असर भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर पर पड़ेगा इसकी संभावना शून्य है.

सोमनाथ में 1000 साल बाद महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन, 5 लाख श्रद्धालु होंगे शामिल

अहमदाबाद महाशिवरात्रि के अवसर पर इस वीकेंड पर गुजरात के विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कैलाश खेर समेत कई कलाकार देंगे प्रस्तुति 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के मद्देनजर सोमनाथ मंदिर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर एनवी उपाध्याय ने सोमवार को बताया कि भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बड़े पैमाने पर इंतजाम किए जा रहे हैं.गुजरात पर्यटन निगम की ओर से 14, 15 और 16 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर समेत देशभर के कलाकार प्रस्तुति देंगे. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बाद बढ़ी दर्शनार्थियों की संख्या उन्होंने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ 8 से 11 जनवरी के बीच आयोजित किया गया था, जो जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले ऐतिहासिक हमले के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय आयोजन था. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. उपाध्याय के अनुसार, पहले जहां रोजाना करीब 20 हजार श्रद्धालु मंदिर आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 75 हजार प्रतिदिन हो गई है. महाशिवरात्रि के मुख्य दिन करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए आने की उम्मीद है. 10 गेटों पर सुरक्षा जांच के प्रबंध भीड़ प्रबंधन के लिए सुरक्षा जांच गेट की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है. दर्शन को सुचारु बनाने के लिए वन-वे एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया जाएगा. आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी. इसके अलावा मंदिर परिसर के पार्किंग क्षेत्र में बड़े स्तर पर भंडारे और प्रसाद वितरण के लिए अतिरिक्त काउंटर लगाए जाएंगे. गुजरात पर्यटन निगम की ओर से 14, 15 और 16 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर समेत देशभर के कलाकार प्रस्तुति देंगे.

ISRO ने चंद्रयान-4 के लिए चांद के साउथ पोल में लैंडिंग साइट निर्धारित की, लैंड रोवर भेजेगा

बेंगलुरु  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) अपने अगले बड़े चंद्र मिशन की तैयारी में तेजी से जुट गया है. चंद्रयान-4 मिशन के लॉन्च होने में भले ही अभी करीब दो साल बाकी हैं, लेकिन इसकी सबसे अहम तैयारियों को पूरा कर लिया गया है. इसरो ने चंद्रमा के साउथ पोल में लैंडिंग के लिए एक सुरक्षित जगह भी चुन ली है. केंद्र सरकार पहले ही चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे चुकी है. यह मिशन भारत का पहला लूनर सैंपल रिटर्न मिशन होगा. इसका मतलब है कि इस बार चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के सैंपल को पृथ्वी पर लाया जाएगा. इस कारण से इस मिशन यानी चंद्रयान-4 को अभी तक का सबसे मुश्किल लूनर मिशन यानी चंद्र मिशन माना जा रहा है. इसरो प्रमुख वी नारायणन पहले ही साफ कर चुके हैं कि चंद्रयान-4 को साल 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है. इस मिशन के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के साउथ पोल वाले इलाके में स्थित मॉन्स मूटन क्षेत्र का गहराई से अध्ययन किया. इस क्षेत्र में चार संभावित लैंडिंग साइट्स की पहचान की गई है, जिनके नाम MM-1, MM-3, MM-4 और MM-5 रखे गए. MM-4 साइट सबसे सुरक्षित इन सभी जगहों का अध्ययन इसरो के हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्बिटर हाई रेजॉल्यूशन कैमरा की मदद से किया गया है. अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों और डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने जमीन की ढलान, ऊंचाई और खतरे की संभावना को परखा. इस जांच में MM-4 साइट सबसे सुरक्षित पाई गई. इसरो अधिकारियों के मुताबिक MM-4 के आसपास एक किलोमीटर के क्षेत्र में खतरे वाली जगहें सबसे कम हैं. यहां जमीन की औसत ढलान करीब 5 डिग्री है, जो लैंडिंग के लिए काफी सुरक्षित मानी जाती है. इस जगह की औसत ऊंचाई 5334 मीटर है और यहां 24 मीटर गुणा 24 मीटर के कई ऐसे ग्रिड मिले हैं, जहां बिना किसी रुकावट के लैंडर उतारा जा सकता है. चंद्रयान-4 मिशन में कुल पांच मॉड्यूल होंगे. इनमें प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर मॉड्यूल, असेंडर मॉड्यूल, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल हैं. डिसेंडर और असेंडर मॉड्यूल मिलकर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेंगे. इसके बाद सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे और उन्हें सुरक्षित तरीके से पृथ्वी तक वापस लाया जाएगा. इस मिशन की सफलता भारत को चंद्र अन्वेषण (Moon Exploration) के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी.

भारत का सशक्त कदम: सिंधु नदी पर बांधों का जाल और पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगर आपने सोचा होगा क‍ि भारत ने पाक‍िस्‍तान की ओर ध्‍यान देना बंद कर द‍िया है तो रुक‍िये… भारत ने जम्मू-कश्मीर की बर्फीली वादियों से बहने वाली चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर कुछ ऐसा क‍िया है क‍ि अगले कुछ महीनों बाद पाक‍िस्‍तान की सांसें अटक जाएंगी. सिंधु जल संध‍ि पर कंप्‍लीट ब्रेक के बाद मोदी सरकार ने इन नद‍ियों पर बांधों का जाल बिछाना शुरू कर द‍िया है. एक दो नहीं, बल्‍क‍ि कई बड़े बांध बनाए जा रहे हैं. सबको इमरजेंसी मोड में पूरा करने को कहा गया है. बजट पहले से अलॉट कर द‍िया गया है. टाइम फ‍िक्‍स है. साफ है क‍ि भारत अब अपनी नदियों के पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखेगा. पाक‍िस्‍तान के ल‍िए यह क‍िसी सर्जिकल स्‍ट्राइक से कम नहीं. वो प्रोजेक्‍ट जो पाक‍िस्‍तान का हलक सुखा देंगे च‍िनाब नदी सवलकोट हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट     सवलकोट प्रोजेक्‍ट को चिनाब नदी पर भारत का सबसे महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है. यह प्रोजेक्ट ऊधमपुर और रामबन जिलों में फैला हुआ है. यह चिनाब नदी पर पहले से मौजूद बागलीहार प्रोजेक्ट (अपस्ट्रीम) और सलाल प्रोजेक्ट (डाउनस्ट्रीम) के बीच में स्थित है. इसकी लोकेशन ऐसी है कि यह चिनाब के पानी के बहाव को नियंत्रित करने में भारत को अभूतपूर्व बढ़त देती है. पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.     इमरजेंसी मोड: NHPC ने फरवरी 2026 में इसके लिए टेंडर जारी किए हैं. दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार इसे जितनी जल्दी हो सके (As early as possible) कमीशन करना चाहती है. मानसून के दौरान भी इसका काम 50% गति से जारी रखने का निर्देश दिया गया है. पाकल दुल परियोजना     किश्तवाड़ जिले में बन रही यह परियोजना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न है. सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाली पश्चिमी नदियों पर भारत को ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति थी, लेकिन पाकल दुल भारत की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें पानी को स्टोर करने की क्षमता है.167 मीटर की ऊंचाई के साथ यह भारत का सबसे ऊंचा बांध होगा. इसकी मदद से भारत सर्दियों में जब पाकिस्तान को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब पानी के बहाव को रेगुलेट कर सकेगा. सरकार ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. कीरू प्रोजेक्‍ट     चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में ही एक और महत्वपूर्ण बांध ‘कीरू’ आकार ले रहा है. कीरू को पाकल दुल और अन्य परियोजनाओं के साथ एक ‘चेन’ के रूप में डिजाइन किया गया है. इसका मतलब है कि अगर भारत ऊपर के बांध से पानी रोकता है, तो नीचे के सभी बांधों का प्रबंधन एक साथ किया जा सकेगा. इसे भी दिसंबर 2026 तक पाकल दुल के साथ ही चालू करने का आदेश दिया गया है, ताकि चिनाब पर भारत की पकड़ एक साथ मजबूत हो. क्वार प्रोजेक्‍ट     क्वार परियोजना इंजीनियरिंग का एक नमूना है. जनवरी 2024 में चिनाब नदी का रुख मोड़कर इसके निर्माण के लिए रास्ता बनाया गया था, जिसे पाकिस्तान ने बहुत करीब से ट्रैक किया था. केंद्र ने इसके लिए मार्च 2028 की समयसीमा तय की है. नदी का मार्ग परिवर्तन इस बात का सबूत है कि भारत अब पाकिस्तान के कड़े विरोध की परवाह किए बिना निर्माण कार्य जारी रख रहा है. रतले प्रोजेक्‍ट     रतले प्रोजेक्ट पिछले एक दशक से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे विवादित मुद्दा रहा है. पाकिस्तान ने इसके डिजाइन, विशेष रूप से इसके स्पिलवे को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का दरवाजा खटखटाया है. भारत ने इन विरोधों को खारिज करते हुए 2024 में नदी का रुख मोड़ा और बांध के कंक्रीट कार्य की आधारशिला रखी. यह प्रोजेक्ट भी 2028 तक चालू होने की उम्मीद है. दुलहस्ती स्टेज-2     मौजूदा दुलहस्ती-1 के ठीक नीचे स्टेज-2 को भी पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान ने इस पर हाल ही में यह कहकर आपत्ति जताई कि उसे सूचित नहीं किया गया था, लेकिन भारत ने इसे संधि के दायरे में बताते हुए आपत्ति को दरकिनार कर दिया है. झेलम नदी     किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (330 MW): यह झेलम की सहायक नदी किशनगंगा (पाकिस्तान में नीलम) पर है. भारत ने इसे 2018 में चालू किया था. यह पानी को मोड़कर वुलर झील में डालती है, जिससे पाकिस्तान के नीलम-झेलम प्रोजेक्ट की बिजली क्षमता कम हो जाती है.     उरी स्टेज-II (240 MW): बारामूला जिले में स्थित इस प्रोजेक्ट को सरकार ने अब प्राथमिकता पर रखा है. संधि के स्थगन के बाद इसकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ी हैं ताकि झेलम के पानी का अधिकतम उपयोग भारत की सीमा के भीतर हो सके.     तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट: यह वुलर झील के मुहाने पर एक ‘बराज’ है. पाकिस्तान के विरोध के कारण यह सालों से लटका था, लेकिन अब भारत इसे नेविगेशन और पानी के स्‍टोरेज के लिए फिर से जीवित कर रहा है. सिंधु नदी     निमो-बाजगो (45 MW): लेह के पास अलची गांव में स्थित यह बांध सिंधु नदी पर बना है. यह लद्दाख की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सिंधु के मुख्य बहाव पर भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत करता है.     चुटक प्रोजेक्ट (44 MW): यह सिंधु की सहायक नदी ‘सुरु’ पर कारगिल जिले में स्थित है.     दुर्बुक-शायोक और निमू-चिलिंग प्रोजेक्ट: लद्दाख की इन परियोजनाओं पर भी पाकिस्तान ने हाल ही में आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत इन्हें अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए तेजी से आगे बढ़ा रहा है. रावी नदी     शाहपुर कंडी बांध: पंजाब के पठानकोट में रावी नदी पर स्थित इस बांध का मुख्य हिस्सा फरवरी 2024 में तैयार हो गया है. यह रणजीत सागर बांध से निकलने वाले पानी को रोकेगा, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी पूरी तरह बंद हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर व पंजाब के खेतों को सिंचाई मिलेगी.     उझ मल्‍टी परपज प्रोजेक्‍ट: रावी की सहायक नदी ‘उझ’ पर यह प्रोजेक्ट कठुआ में बन रहा है. केंद्र ने हाल ही में यहां नहर प्रणाली को मंजूरी दी है ताकि पाकिस्तान जाने वाले अनियंत्रित पानी को रोककर पंजाब और राजस्थान की … Read 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आगे की उड़ान: 6th जनरेशन के फाइटर प्लेन कैसे होंगे 5वीं पीढ़ी से ज्यादा शक्तिशाली?

नई दिल्ली दूसरे विश्व युद्ध के प्रोपेलर वाले एयरक्राफ्ट से लेकर आज के स्टील्थ फाइटर जेट तक पिछले 8 दशकों में हवाई युद्ध में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. फाइटर जेट्स की पांचवीं पीढ़ी जो रडार से बचने वाले, सेंसर से लैस एयरक्राफ्ट हैं, पहले ही उन सीमाओं को पार कर चुके हैं जिन्हें कभी मुमकिन माना जाता था. लेकिन अब दुनिया की बड़ी ताकतें छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर तेजी से कम कर रही हैं. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका के नए F-47 को दुनिया का सबसे विनाशकारी एयरक्राफ्ट बताया था. आपको बता दें कि यह एयरक्राफ्ट भी छठी पीढ़ी का ही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर कैसे होंगे छठी जनरेशन के फाइटर प्लेन. पांचवीं पीढ़ी से छलांग F-35 और F-22 जैसी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स ने स्टील्थ, सेंसर फ्यूजन और एडवांस्ड एविएशन को पेश किए हैं. अब नई पीढ़ी के एयरक्राफ्ट से इससे कहीं आगे जाने की उम्मीद की जा रही है. यह कोई सिंपल अपग्रेड नहीं होगा बल्कि एक क्वांटम छलांग होगी. बिना पायलट और ऑप्शनल पायलट वाला कॉम्बैट  छठी पीढ़ी के जेट्स की सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें ऑप्शनल मैनिंग होगी. इन एयरक्राफ्ट को पायलट उड़ा सकता है, रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है, या पूरी तरह से बिना पायलट के ऑपरेट किया जा सकता है. वे ऑटोनॉमस सपोर्ट ड्रोन के झुंड को भी कमांड करेंगे. इन्हें अक्सर लॉयल विंगमैन सिस्टम कहा जाता है. यह मुख्य फाइटर के साथ टोही, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या हमले के मिशन कर सकते हैं. कोर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम पायलटों की मदद करेंगे, युद्ध के मैदान के भारी मात्रा में डाटा का रियल टाइम में एनालिसिस करेंगे, रडार जैमिंग को मैनेज करेंगे, खतरों को भी प्रायोरिटी पर रखेंगे और यहां तक की तेज गति वाली लड़ाई के दौरान  टैक्टिकल फैसलों की भी सलाह देंगे.  नेक्स्ट लेवल स्टील्थ और रेडिकल डिजाइन स्टील्थ टेक्नोलॉजी में काफी सुधार किया जाएगा. छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट को रडार, इंफ्रारेड और इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम में पता लगाना और भी मुश्किल होने की उम्मीद है. कुछ डिजाइन पारंपरिक वर्टिकल स्टेबलाइजर को पूरी तरह से हटा सकते हैं. इससे ड्रैग और रडार रिफ्लेक्शन कम होगा और एफिशिएंसी और सर्वाइवल में काफी ज्यादा सुधार होगा.  लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी हथियार  पांचवीं पीढ़ी के जेट्स मुख्य रूप से मिसाइल पर निर्भर करते हैं. लेकिन छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स डायरेक्टेड एनर्जी हथियार ले जाएंगे. इसमें हाई एनर्जी लेजर और माइक्रोवेव सिस्टम शामिल हैं. यह हथियार लाइट की स्पीड से टारगेट को निशाना बना सकते हैं.  

43,000 करोड़ रुपये केंद्रीय योजनाओं में बचे अनspent, राज्यों की लापरवाही उजागर

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं पर खर्च की रफ्तार बेहद धीमी रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने अपनी 53 सबसे बड़ी योजनाओं के लिए आवंटित कुल बजट का मात्र 41.2 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक जारी किया है। विश्लेषण से पता चलता है कि 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाली इन योजनाओं में से अधिकतर के आवंटन में भारी कटौती की गई है। आशंका जताई जा रही है कि मार्च में वित्त वर्ष खत्म होने तक इन योजनाओं का कुल खर्च शुरुआती बजट के 75 प्रतिशत के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाएगा। प्रमुख योजनाओं के बजट में की जा रही भारी कटौती  रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण की गई 53 योजनाओं में से 47 के बजट को संशोधित कर कम कर दिया गया है। मूल बजट अनुमान जो 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, उसे घटाकर अब 3.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली कटौती प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) में देखी गई, जहां बजट 850 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। केवल मनरेगा (MGNREGS) और अनुसूचित जनजातियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप जैसी तीन योजनाओं में ही मूल बजट से अधिक खर्च दर्ज किया गया है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में बाकी 47 योजनाओं के लिए, RE अलग-अलग मात्रा में BE से कम है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में देखी गई, जहां 150 करोड़ रुपये की RE 850 करोड़ रुपये के BE का मुश्किल से छठा हिस्सा है। कुल मिलाकर, इन 53 योजनाओं के लिए BE 5 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज़्यादा था, जिसे संशोधित करके 3.8 लाख करोड़ रुपये से कम, या बजटीय आवंटन का 74.4 प्रतिशत कर दिया गया। 31 दिसंबर को खत्म होने वाले नौ महीनों में जारी किया गया फंड कुल 2 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था, जो बजट आवंटन का 41.2% और RE का 55.4% था। RE, BE के 40% से कम  पीएमकेएसवाई कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल संसाधन, पीएम ई-बस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन/राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश घटक-PMAY शहरी की अन्य मदों के लिए RE, BE के 40% से कम है। इनमें से छह योजनाओं में जारी की गई वास्तविक राशि BE के 10% से कम है। इन बड़ी योजनाओं (2,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा BE) में जल जीवन मिशन/नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन (BE 67,000 करोड़ रुपये, नौ महीनों में असल खर्च RE 31 करोड़ रुपये), PM स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (BE 7,500 करोड़ रुपये, असल खर्च 473 करोड़ रुपये), और प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (BE 2,140 करोड़ रुपये, असल खर्च 40 करोड़ रुपये) शामिल हैं। अगर कुल 53 योजनाओं पर कुल खर्च की बात करें तो यह 3.8 करोड़ रुपये है। इन योजनाओं पर 5 लाख करोड़ के बजट का ऐलान हुआ था। 31 दिसंबर तक दो लाख करोड़ का बजट रिलीज किया गया था। यह कुल बजट का 41.2 फीसदी था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, वॉटर मैनेजमेंट, पीएम ईबस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन, कंप्यूटराइजेशन ऑफ प्राइमरी ऐग्रीकस्च्र क्रेडिट सोसाइटी और अन्य कई योजाओं पर बजट का 40 फीसदी ही खर्च हुआ है। इनमें से 6 योजनाएं ऐसी भी हैं जिनके लिए केवल 10 फीसदी ही बजट रिलीज हुआ है। इस बजट सत्र के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटील ने शनिवार को यहां बताया कि देश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है।पाटिल ने यहां केन्द्रीय बजट को लेकर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमृत सरोवर योजना और जेजेएम ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं और अमृत सरोवर योजना के तहहत देशभर में 69 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण किया गया है, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जेजेएम के लिए 67 हजार 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है और चार-पांच करोड़ घरों को और पानी देना है तथा इस योजना को वर्ष 2028 तक विस्तारित किया गया है। इससे देश की लगभग नौ करोड़ माताओं-बहनों का करीब 4.5 करोड़ घंटे का समय बचा है। साथ ही जल गुणवत्ता जांच के लिए 24 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है और आठ लाख महिलाओं ने परीक्षण पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट को रखा है। जल जीवन मिशन और पीएम आवास योजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर असर

बिना शादी के बच्चों का बढ़ता आंकड़ा, ये देश सबसे आगे—भारत और एशिया में क्या हो रहा है?

नईदिल्ली  शादी, परिवार और संतान… जिन्हें कभी समाज की स्थायी नींव माना जाता था, लेकिन बदलते समय में दुनिया के कई हिस्सों में ये अवधारणाएं नए सिरे से परिभाषित हो रही हैं। बदलती जीवनशैली, कानूनी व्यवस्था और सामाजिक स्वीकृति के कारण विवाह के बाहर बच्चों का जन्म कुछ देशों में सामान्य हो चुका है, जबकि कहीं यह अभी भी सामाजिक कलंक बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों में विवाह के बाहर बच्चों का जन्म अब आम बात हो गई है। हालांकि एशिया और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति अभी भी बहुत कम है। ये बदलाव सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं, जहां विवाह हर जगह संतान प्राप्ति की शर्त नहीं रहा। यूं कहें तो बिना शादी के परिवार बसाना कई जगहों पर ‘न्यू नॉर्मल’ बन गया है। ओईसीडी (OECD) के नए आंकड़ों के अनुसार, विश्व के कई देशों में औसतन लगभग 43% बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यानी बिना शादी के महिलाएं मां बन रही हैं। आइए जानते हैं कि इस मामले में कौन-से देश सबसे आगे हैं… सबसे आगे लैटिन अमेरिका लैटिन अमेरिकी देश इस मामले में सबसे आगे हैं। कोलंबिया में 87% बच्चे विवाह के बाहर जन्म ले रहे हैं। इसके बाद चिली (78.1%), कोस्टा रिका (74%) और मैक्सिको (73.7%) का नंबर आता है। यहां लिव-इन रिलेशनशिप लंबे समय से सामाजिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य है, जिससे औपचारिक शादी की जरूरत कम हो गई है। ऐतिहासिक असमानता और कानूनी पहुंच की कमी ने भी इन बदलावों को बढ़ावा दिया है। नॉर्डिक देशों में कल्याण व्यवस्था के साथ हाई रेशियो नॉर्डिक देशों ने परिवार के मानदंडों को नए सिरे से परिभाषित किया है। आइसलैंड में 69.4%, नॉर्वे में 61.2%, स्वीडन में 58% (लगभग) और डेनमार्क में 55% के आसपास बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यहां मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों को माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अलग कानूनी संरक्षण मिलने से विवाह अब व्यक्तिगत चुनाव बन गया है। लिव इन में रहने वाले जोड़ों को विवाहित जोड़ों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं। एशिया और पूर्वी भूमध्यसागरीय में न्यूनतम दरें दूसरी ओर एशिया के कई देशों में स्थिति बिल्कुल उलट है। जापान में सिर्फ 2.4%, दक्षिण कोरिया में 4.7%, तुर्की में 3.1%, इजरायल में 8.6% और ग्रीस में 9.7% बच्चे विवाह के बाहर जन्म लेते हैं। यहां सांस्कृतिक मूल्य, धार्मिक परंपराएं और सख्त कानूनी ढांचा विवाह को संतान से जोड़े रखते हैं। एकल माता-पिता को सामाजिक कलंक और कम सहायता मिलने से यह प्रवृत्ति दबाव में रहती है। ओईसीडी भारत जैसे देशों में भी विवाह के बाहर जन्म की दर बहुत कम बनी हुई है। यही विवाद के बाहर बच्चों की जन्म दर एक फीसदी से भी कम है। भारत के पड़ोसी देशों और एशिया में भी यही स्थिति है, जहां सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंड विवाह को प्राथमिकता देते हैं। एंग्लो-अमेरिकी और पश्चिमी यूरोप संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और ज्यादातर पश्चिमी यूरोपीय देश बीचों बीच खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे विवाह के बाहर पैदा होते हैं, जो ऑस्ट्रिया और इटली के स्तर के करीब है। इन आंकड़ों से साफ है कि विवाह के बाहर बच्चों का जन्म सिर्फ सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि कानूनी संरचना, कल्याणकारी नीतियों और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संयुक्त परिणाम है। आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है, जिसका असर भारत समेत अन्य एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है।

मालेगांव की नई मेयर नसरीन शेख: बुर्के वाली मेयर, जानिए उनके अधिकार और जिम्मेदारियां

मालेगांव मालेगांव नगर निगम (MMC) के मेयर चुनाव में इस्लाम पार्टी की नसरीन शेख (Nasreen Sheikh) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. उन्‍हें लेकर सोशल मीडिया पर बुर्के वाली मेयर के रूप में चर्चाएं इन दिनों आम हैं. नसरीन शेख ने शिवसेना (शिंदे गुट) की उम्मीदवार लता घोडके को हराकर यह पद हासिल किया है. नसरीन बानो शेख मालेगांव की सक्रिय राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से जमीनी स्तर पर जुड़ी रही हैं. वह मूल रूप से एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं लेकिन उनका परिवार राजनीति में काफी प्रभावशाली रहा है. • पारिवारिक व्यवसाय और पृष्ठभूमि: नसरीन शेख का परिवार पारंपरिक रूप से पावरलूम (Powerloom) व्यवसाय से जुड़ा हुआ है. मालेगांव एक बुनकर बहुल शहर है जहां उनके परिवार का अच्छा-खासा व्यापारिक आधार है. • शिक्षा: नसरीन शेख की शुरुआती और उच्च शिक्षा मालेगांव में ही हुई है. स्थानीय स्तर पर उन्हें एक शिक्षित और जागरूक महिला के रूप में पहचाना जाता है. नसरीन शेख स्नातक (Graduate) हैं. उन्होंने अपनी शिक्षा मालेगांव के ही शिक्षण संस्थानों से पूरी की है. वह उर्दू और मराठी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं. • राजनीतिक करियर: नसरीन ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत नगरसेवक के रूप में की थी. वह ‘इस्लाम पार्टी’ के टिकट पर चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचीं. उनकी पार्टी ने इस बार मालेगांव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन (मालेगांव सेक्युलर फ्रंट) कर सत्ता हासिल की है. नसरीन शेख दिवंगत पूर्व विधायक रशीद शेख की बहू हैं. उनके पति शेख खालिद भी राजनीति में सक्रिय हैं. उनके परिवार के सदस्य आसिफ शेख (पूर्व विधायक) ने ही ‘इस्लाम पार्टी’ (ISLAM Party) की स्थापना की है. उनकी सास ताहिरा शेख भी 2012 और 2022 के बीच मालेगांव की मेयर रह चुकी हैं. यानी मेयर का पद उनके परिवार के लिए नया नहीं है. जीत का समीकरण: कैसे बनीं मेयर? मालेगांव नगर निगम में कुल 84 सीटें हैं, जहां बहुमत के लिए 43 पार्षदों के समर्थन की जरूरत थी. नसरीन शेख को अपनी पार्टी के 35 पार्षदों के अलावा सपा और कांग्रेस का साथ मिला. उम्मीदवार            पार्टी          मिले वोट नसरीन शेख    इस्लाम पार्टी       43 लता घोडके    शिवसेना (शिंदे)    18 सैलरी और नगर निगम का बजट मालेगांव नगर निगम का बजट शहर के बुनियादी ढांचे और बुनकर समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित रहता है. • मेयर की सैलरी: महाराष्ट्र के नगर निगम नियमों के अनुसार, मेयर को सीधा ‘वेतन’ नहीं बल्कि मानदेय (Honorarium) और भत्ते मिलते हैं. यह राशि लगभग 20,000 से 25,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है. इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास, गाड़ी और अन्य प्रोटोकॉल सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. • नगर निगम बजट: मालेगांव नगर निगम का वार्षिक बजट लगभग 700 से 900 करोड़ रुपये के बीच रहता है. यह बजट मुख्य रूप से जलापूर्ति, सड़क निर्माण और सफाई व्यवस्था के लिए आवंटित किया जाता है. नसरीन शेख के साथ नई टीम नसरीन शेख के साथ शान-ए-हिंद निहाल अहमद (समाजवादी पार्टी) को डिप्टी मेयर चुना गया है. यह मालेगांव के इतिहास में पहली बार है जब मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही महिलाएं हैं. नसरीन शेख ने अपनी प्राथमिकता में शहर की सफाई व्यवस्था और हॉस्पिटल्स की स्थिति को सुधारना बताया है.

13 देशों के 200 मेहमान, संस्कृत मंत्र और भारतीय रस्में: इटली के युवक ने मुंबई की बाला से की शादी

झुंझुनूं  जिले के मंडावा स्थित एक हेरिटेज होटल में 8 फरवरी को इटली के नागरिक माकार्े और मुंबई की जुई वैदिक रीति से विवाह बंधन मेंं बंध गए। शादी में नौ ब्राह्मणों ने संस्कृत मंत्रों के साथ फेरे कराए, जिनका अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया। इटली सहित 13 देशों से आए लगभग 200 मेहमान शादी समारोह के साक्षी बने। शादी दोपहर करीब 3 बजे तक अग्नि के सात फेरे पूरे होने के साथ सम्पन्न हुई। शादी के बाद  रिसेप्शन नहीं रखा गया। रात को ब्रज परंपरा अनुसार फू लों की होली का आयोजन किया गया, जिसमें गुलाल या रंगों के बजाय ताजे फू लों की पंखुड़ियों से होली खेली गई। इस अवसर पर राधा-कृष्ण के जीवन और ब्रज संस्कृति से जुड़े नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रेम और भक्ति का भाव दर्शाया गया। विदेशी मेहमानों को पहले इस परंपरा की जानकारी दी गई, जिससे  वे इसके सांस्कृतिक महत्व को समझ सकें। इसके बाद मेहमानों ने फ ूलों की होली में भाग लिया। समारोह में भारतीय और यूरोपीय संस्कृति का अद्भुत मिश्रण देखा गया। आयोजन को लेकर उपस्थित मेहमान और परिवारजन बेहद खुश और उत्साहित दिखाई दिए। इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ब्रज की परंपरा और प्रेमभाव को दर्शाया, जिससे विदेशी मेहमान भारतीय संस्कृति की झलक नजदीक से देख और समझ सके। 

रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: मैक्रों के भारत दौरे से पहले 114 राफेल खरीद प्रस्ताव मंजूर

नई दिल्ली  भारतीय रक्षा खरीद बोर्ड (Defence Procurement Board) ने भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने रखा जाएगा। अंतिम मुहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से लगने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया पर ज़ोर सूत्रों के मुताबिक, इस डील की सबसे अहम बात यह है कि राफेल विमानों का अधिकतर निर्माण भारत में किया जाएगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत करीब 30 फीसदी स्वदेशी कंटेंट शामिल होगा। शुरुआती चरण में 12 से 18 राफेल जेट सीधे फ्रांस से ‘फ्लाई-अवे कंडीशन’ में भारत लाए जाएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में निजी कंपनियों की साझेदारी से होगा। 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील भारत और फ्रांस के बीच इस राफेल सौदे की कुल लागत करीब ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है। डील पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी, जिससे वायुसेना की ताकत और रणनीतिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। हथियारों के इंटीग्रेशन की अनुमति हालांकि इस डील में राफेल का सोर्स कोड भारत को नहीं मिलेगा, लेकिन भारत को अपने स्वदेशी और अन्य हथियारों को राफेल में इंटीग्रेट करने की पूरी छूट होगी। इससे भारतीय वायुसेना अपनी जरूरत के हिसाब से विमानों को और ज्यादा सक्षम बना सकेगी। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की सफलता का प्रदर्शन भारतीय वायुसेना के मौजूदा 36 राफेल जेट पहले ही अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल विमानों ने SCALP मिसाइल, Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल और HAMMER बमों के साथ आतंकी ठिकानों और दुश्मन के सैन्य ठिकानों को सटीक निशाना बनाया था। मैक्रों की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले अहम कदम यह पूरा मामला ऐसे समय आगे बढ़ा है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 15 से 17 फरवरी 2026 के बीच भारत दौरे पर आने वाले हैं। इससे भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को और मजबूती मिलने के संकेत मिल रहे हैं।

उत्तराखंड में अधिकारियों के तबादले, नई जिम्मेदारियाँ तय

देहरादून उत्तराखंड के देहरादून में से अहम खबर सामने आ रही है। जहां पुलिस विभाग में फेरबदल किया गया है। राजधानी में छह पुलिस उपाधीक्षकों (सीओ/डीएसपी) का तबादला हुआ है। इन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया हैं। साथ ही उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। एसएसपी अजय सिंह की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों का हुआ तबादला पुलिस उपाधीक्षक विवेक सिंह कुटियाल को क्षेत्राधिकारी प्रेमनगर बनाया गया है। उनके अधीन थाना प्रेमनगर, थाना सेलाकुई, गोपनीय शाखा, एलआईयू व पीएसी रहेंगे। रीना राठौर को क्षेत्राधिकारी डोईवाला की जिम्मेदारी दी गई है। उनके अंतर्गत कोतवाली डोईवाला, थाना रायपुर, शिकायत जांच प्रकोष्ठ, विशेष जांच प्रकोष्ठ, सीसीएम हेल्पलाइन, होमिसाइड सेल, महिला हेल्पलाइन, महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1090 समेत अन्य शामिल किए गए हैं। स्वप्निल मुयाल को क्षेत्राधिकारी नगर नियुक्त किया गया है। उन पर कोतवाली नगर, थाना वसंत विहार, पुलिस लाइन के साथ कुछ अन्य जिम्मेदारियां भी रहेंगी। नीरज सेमवाल को क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश बनाया गया है। उन्हें कोतवाली ऋषिकेश, थाना रायवाला, थाना रानीपोखरी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जगदीश चंद्र पंत को क्षेत्राधिकारी यातायात की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके अधीन यातायात, प्रधान लिपिक, भवन, ऑडिट, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट, ऑपरेशन स्माइल, ट्रैक मिसिंग चाइल्ड, हाईकोर्ट/सम्मन सेल, लोक सूचना व सीसीओआर/डीसीआरओ रहेंगे।  

8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स को राहत? सरकार ने दूर किया संशय

नई दिल्ली अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं या रिटायर हो चुके हैं, तो आपकी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर संसद से एक बड़ी खबर आई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही तमाम अटकलों और पेंशन संशोधन के सवालों पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में स्थिति साफ कर दी है। इस जानकारी से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर होने वाले हैं या पेंशन में होने वाले बदलावों को लेकर चिंतित थे। वेतन आयोग की तैयारी: शुरू हुआ फीडबैक का दौर सरकार ने स्पष्ट किया है कि 8th Pay Commission अब कागजों से निकलकर एक्शन मोड में आ गया है। 3 नवंबर 2025 को इसके गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद अब आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च कर दी है। इतना ही नहीं, ‘MyGov’ पोर्टल के जरिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से उनकी राय और सुझाव मांगे जा रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके आधार पर वेतन, भत्ते और पेंशन की नई दरों का फैसला होगा। रिटायरमेंट की तारीख और पेंशन का गणित सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के दायरे में आएंगे? सरकार ने साफ किया है कि पेंशन में किसी भी तरह का बदलाव या बढ़ोतरी ‘पेंशन नियम 2021’ और आयोग की सिफारिशों के आधार पर जारी होने वाले सामान्य आदेशों से तय होती है। फाइनेंस बिल 2025 के जरिए किसी की पेंशन में अपने आप कोई बदलाव नहीं होता, बल्कि यह एक व्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया है। क्या फाइनेंस एक्ट से बदल जाएंगे नियम? सांसद आनंद भदौरिया के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि फाइनेंस एक्ट 2025 मौजूदा पेंशन नियमों को सिर्फ मजबूती देता है, वह वर्तमान में मिल रही सिविल या डिफेंस पेंशन के ढांचे में कोई सीधा बदलाव नहीं करता। पेंशन में संशोधन तभी लागू होता है जब सरकार वेतन आयोग जैसी विशेषज्ञ संस्था की सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है। यानी, जो भी बदलाव होंगे, वे तय नियमों के तहत सभी पात्र श्रेणियों पर लागू किए जाएंगे। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान आयोग के जरिए मिलने वाले फीडबैक और डेटा पर है, ताकि आने वाले समय में एक संतुलित और मजबूत वेतन ढांचा तैयार किया जा सके।

उखरूल, मणिपुर में हिंसा के बाद प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, इंटरनेट 5 दिन तक रहेगा बंद

 इंफाल मणिपुर के उखरूल में हिंसा भड़कने की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि कुछ सशस्त्र बदमाशों ने लिटन सारेइखोंग गांव में कई घरों को आग लगा दी. इस घटना के बाद स्थिति बिगड़ने की आशंका में प्रशासन ने पूरे जिले में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, ताकि आगे की हिंसा और अफवाहों को रोका जा सके. अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र समूहों ने पहाड़ी गांव के पास हवा में कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. कई ग्रामीण आवश्यक सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिले के सुरक्षित क्षेत्रों की ओर भाग गए, जबकि तांगखुल गांव के कई ग्रामीणों के भी इलाका छोड़ने की जानकारी मिली है. ‘5 दिन के लिए इंटरनेट सेव बंद’ बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मणिपुर सरकार के गृह आयुक्त ने सार्वजनिक सुरक्षा और शांति को खतरा होने के कारण उखरूल जिले में तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित करने का आदेश जारी किया है.  आदेश में कहा गया है कि हाल की घटनाओं से काफी अशांति फैली है और गलत सूचनाओं के प्रसार से तनाव बढ़ सकता है. इसलिए स्थिति को नियंत्रित करने और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं. वहीं, आगजनी की घटनाओं के बाद उखरुल जिले के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया और आगे की हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई. शनिवार को हुई हिंसा की शुरुआत प्रशासन का कहना है कि उखरूल में हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को हुई जब लीटन गांव में सात-आठ लोगों ने तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की. हालांकि, मामला सुलझने की उम्मीद थी, लेकिन रविवार की बैठक नहीं हो सकी. इसके बाद सोमवार आधी रात को कुछ हथियारधारी बदमाशों ने लीटन सारईखोंग में तांगखुल नागा समुदाय के घरों को आग लगा दी, जिसके बाद नाग समुदाय ने कुकी समुदाय के घरों को निशाना बनाया. पुलिस के अनुसार, के. लुंगविराम गांव में भी एक घर को आंशिक रूप से जलाया गया है. पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार को रात करीब 12:10 बजे के. लुंगविराम गांव में एक छोटी-सी आग लगने की घटना हुई, जिससे एक आवासीय घर को आंशिक नुकसान पहुंचा. सुरक्षाबलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया. पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारण की जांच की जा रही है और स्थिति सामान्य है.

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