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Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज पर खीरे की क्यों करते हैं पूजा, जानें रहस्य

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं (Married Women) के लिए बहुत ही खास होता है. सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह पर्व रखती हैं. वैसे तो साल भर में तीन प्रकार की तीज होती हैं, जिसमें हरियाली तीज सबसे पहले पड़ता है. हरियाली तीज का पर्व सावन महीने (Sawan Month 2024) की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होती है, जोकि आज बुधवार 7 अगस्त 2024 को है. आज विवाहिताएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी और शिव-पार्वती (Shiv Parvati) की पूजा करेंगी. पूजा में कई तरह की सामग्रियों (Puja Samagri) की जरूरत पड़ती है, जिसमें खीरा (Kheera) भी शामिल है. हरियाली तीज की पूजा (Hariyali Teej ki Puja) में खीरा का होना बहुत जरूरी होता है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. आइये जानते हैं आखिर क्यों हरियाली तीज में होती है खीरा की जरूरत और क्या है तीज में खीरा पूजन का रहस्य. हरियाली तीज की पूजा में खीरा का महत्व (Cucumber Importance of Hariyali Teej Puja) ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) में खीरा का संबंध चंद्रमा (Chandrama) से बताया गया है. दरअसल जितने भी तरल पदार्थ होते हैं, उनका संबंध चंद्र ग्रह से होता है. हरियाली तीज में शिव शक्ति के साथ ही चंद्रमा पूजन का भी महत्व है. इसलिए पूजा के दौरान खीरा रखना अनिवार्य माना जाता है. एक अन्य कारण यह भी है कि, चंद्रमा शिव को अधिक प्रिय है. इसे शिवजी (Shiv ji) ने अपने माथे पर इसे सुशोभित किया है. चंद्रमा से खीरे का संबंध है और चंद्र का शिव से. इसलिए हरियाली तीज की पूजा में खीरा को चंद्रमा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है, जिससे कि चंद्रमा के शुभ फल से मन के विकार दूर हों, शुभता प्राप्त हो और व्रत में किसी तरह का दोष न रहे.

Tirupati Balaji : जाने का बना रहे हैं मन, तो जाने से पहले मंदिर के बारे में जान लें कुछ खास बातें

If you are planning to visit Tirupati Balaji then know some special things about the temple before

If you are planning to visit Tirupati Balaji then know some special things about the temple before going तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है, जहां हर दिन हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु आकर माथा टेकते हैं। यह भारत में सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह पवित्र मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के पहाड़ी शहर तिरुमाला में स्थित है, जो भगवान विष्णु के अवतार वेंकटेश्वर को समर्पित है। कहा जाता है कि हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर मानवता को ‘कलियुग’ की कठिनाइयों और क्लेशों से मुक्ति दिलाने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इस अवधारणा के अनुसार, इस क्षेत्र को कलियुग वैकुंठम के रूप में जाना जाता है, और भगवान को कलियुग प्रत्यक्ष दैवम के रूप में जाना जाता है। आइये जानते हैं तिरुपति मंदिर के बारे में कुछ रोचक तथ्य। तिरुपति मंदिर के कुछ रोचक तथ्य भगवान तिरुपति बालाजी की जो मूर्ति रखी गई है वह गर्भगृह के मध्य में खड़ी हुई प्रतीत हो सकती है, लेकिन यह मूर्ति वास्तव में गरबा गुड़ी के दाहिने कोने की ओर थोड़ी सी है। तिरुपति बालाजी मंदिर का नाम भारत के सबसे अमीर मंदिरों में आता है और यहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिससे इसने टूरिस्ट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। तिरुपति बालाजी मंदिर के गर्भगृह में देवता की मूर्ति के सामने रखे गए मिट्टी के दीपक भी बुझते नहीं हैं। ये दीपक कब जलाए गए और किसने जलाए, इसके बारे में कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड नहीं है। जब आप मुख्य मूर्ति की पीठ पर अपना कान लगाते हैं, तो आपको एक गरजते हुए समुद्र की आवाज सुनाई देती है। पहाड़ियों के बारे में एक तथ्य यह है कि,इनमें में से एक पर स्वामी का चेहरा है। देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह सो रहें हैं और आप वास्तव में उनका चेहरा देख सकते हैं। कहा जाता है कि यह मूर्ति इतनी मजबूत है कि कभी क्षतिग्रस्त नहीं हो सकती है। जब सिनामोमम कैम्फोरा पेड़ से प्राप्त कच्चा कपूर या हरा कपूर किसी पत्थर पर लगाया जाता है, तो इससे वस्तु पर दरारें पड़ जाती हैं। लेकिन, श्री तिरुपति बालाजी की मूर्ति पर कपूर की अस्थिर रासायनिक प्रतिक्रियाओं को कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। भगवान वेंकटेश्वर का अभिषेक करने के लिए उपयोग की जाने वाली वस्तुएं केवल जंगल से एकत्र की जाती हैं। हिंदू मंदिरों में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसों में करोड़ों की विदेशी मुद्रा होती है, RBI उस पैसे को बदलने में TTD बोर्ड की मदद करता है। तिरुपति बालाजी- दर्शन नियम तिरूपति बालाजी मंदिर के सामान्य तौर पर दर्शन सुबह 6.30 बजे से शुरु हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि जब आप तिरुपति दर्शन करने जाते हैं तो, यहां दर्शन करने के भी कुछ नियम भी हैं। नियम के अनुसार दर्शन करने से पहले आपको कपिल तीर्थ पर स्नान करके , कपिलेश्वर के दर्शन करने होते हैं। इसके बाद ही वेंकटाचल पर्वत पर जाकर बालाजी के दर्शन करने चाहिए। वहीं इसके पश्चात देवी पद्मावती के दर्शन करें। यहां ये भी जान लें कि पद्मावती देवी का मंदिर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पत्नी पद्मावती लक्ष्मी जी को समर्पित है। माना जाता है कि जब तक भक्त इस मंदिर के दर्शन नहीं करते, तब तक आपकी तिरुमला की यात्रा पूरी नहीं होती।

सावन का तीसरा सोमवार कब ? शिव जी पर चढ़ाएं ये खास चीज

When is the third Monday of Sawan? Offer this special thing to Lord Shiva

When is the third Monday of Sawan? Offer this special thing to Lord Shiva Sawan Somwar 2024: चातुर्मास में संसार का संचालन शिव जी करते हैं और सावन चातुर्मास (Chaturmas) का पहला महीना होता है. इसलिए श्रावण की विशेष मान्यता है. इस साल सावन में पांच सोमवार (Sawan somwar) का संयोग बन रहा है. सावन सोमवार के दिन शिव जी का रुद्राभिषेक (Rudrabhishek) और जलाभिषेक (Jalabhishek) करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है. सावन सोमवार के व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती है. जिन लोगों की शादी में अड़चने आ रही हैं वे सावन सोमवार के दिन कुछ खास उपाय जरुर करें. जानें 2024 में तीसरा सावन सोमवार कब है ? तीसरा सावन सोमवार 2024 (Sawan Third Somwar 2024) तीसरा सावन सोमवार 5 अगस्त 2024 को है. इस दिन सावन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 4 अगस्त 2024 को शाम 04.42 मिनट पर शुरू हो रही है, इसका समापन 5 अगस्त 2024 को शाम 06 बजकर 03 मिनट पर होगा. तीसरे सावन सोमवार पर करें ये उपाय (Sawan Somwar Upay) सफलता – बहुत मेहनत करने के बाद भी करियर में मन मुताबिक सफलता नहीं मिल रही है तो तीसरे सावन सोमवार के दिन गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें. इस उपाय को करने से मनोवांछित सफलता मिलती है. बाधाओं का नाश होता है.व्यापार में वृद्धि – व्यापार मंद पड़ा है तो, बिजनेस को बढ़ाने की योजनाएं लाभ नहीं दे पा रही है या फिर किसी ने काम बांध रखा है तो सावन के तीसरे सोमवार पर शिवजी को केसर अर्पित करें. मान्यता है इससे भाग्योदय होता है. व्यक्ति कारोबार में तरक्की पाता है.घर में सुख-शांति – जिन लोगों के घर में आए दिन किसी बात को लेकर विवाद होता है. उन्हें सावन के पूरे महीने खासकर सोमवार के दिन शिव पुराण का पाठ करना चाहिए. शिव पुराण सुन भी सकते हैं. इससे तनाव दूर होता है. घर में हो रहे क्लेश मिटते हैं.धन लाभ – सावन सोमवार की पूजा में शिवलिंग पर लौंग अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है. माना जाता है कि इससे धन से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती हैं.

गुरूपूजन कर पंच कुण्‍डीय गायत्री महायज्ञ में समर्पित की आहुतियां

After worshiping Guru, offerings were made in Panch Kundiya Gayatri Mahayagya.

After worshiping Guru, offerings were made in Panch Kundiya Gayatri Mahayagya. हरिप्रसाद गोहेआमला । अखिल विश्‍व गायत्री परिवार आमला द्वारा गायत्री प्रज्ञापीठ आमला में गुरूपुर्णिमा पर्व हर्षोल्‍लास के साथ मनाया गया । इस मौके पर सैकड़ों साधको ने अपने अनुष्‍ठान की पुर्णाहुती समर्पित कि व बृम्‍हास्‍त्र साधना के साथ 40 दिवसीय सवा लक्ष गायत्री पुरष्‍चरण हेतु संकल्‍प लिया वहीं साधको द्वारा गुरूदिक्षा लेकर साधना के मार्ग को अपनाया । इस अवसर पर प्रज्ञापीठ के मुख्‍य ढ्रस्‍टी बी पी धामोड़े,एस पी डढोरे ने गायत्री साधना हेतु मार्गदर्शन दिया ।पंच कुण्‍डीय गायत्री महायज्ञ और महाप्रसादी कार्यक्रम में साधको द्वारा बढ चढकर हिस्‍सा लिया वहीं भरत धोटें और नर्मदा सोलंकी द्वारा गुरूपुर्णिमा पर्व पर संगीत की प्रस्‍तुती दी गई । कार्यक्रम में भोजनालय में प्रसादी बनाने हेतु त्रषभ पंवार एवं महिला मंडल द्वारा प्रसादी निर्माण कर सभी परिजनो को वितरित किया । इस अवसर पर सभी ट्रस्टी एवं समन्‍वयक समिति के सदस्‍यों द्वारा आगामी 4 सितम्‍बर 2024 को हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर वृक्षगंगा अभियान के तहत करंजी के पौधों का रोपण कर अपने अभियान को गति देने हेतु योजना बनाकर परिजनो से पौधो को लगाने हेतु चर्चा कर कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आग्रह किया । गुरूपुर्णिमा पर्व पर गायत्री परिवार के के सूर्यवंशी, वंदना ढढोरे, विमला पंवार, माधुरी मालवीय ,श्रद्धा मालवीय ,पंचफूला देशमुख ,उमा देशमुख, गुलाबराव ओडुकले, देवकरण टिकारिया ,राजेश मालवी, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अनिल पाठक, राजेन्‍द्र उपाध्‍याय, नितिन देशमुख, अनिल सोनी आदि परिजन मौजूद रहे । ट्रस्‍टी ठाकुर दास पंवार ने बताया कि गायत्री परिवार बृम्‍हास्‍त्र साधना का क्रम चला रहा है जिसमे एक बैठक में 10 माला गायत्री महामंत्र के साथ एक माला महामृत्‍युंजय मंत्र का जप वंदनीय माता जी जन्‍म शाताब्‍दी तक परिजनो द्वारा चलाया जाना है । इस हेतु इच्‍छुक परिजन अपना पंजीयन करवा ले जिसकी जानकारी शांतिकुंज हरिद्वार दोष परिमार्जन हेतु भेजी जायेगी । गायत्री परिवार के निलेश मालवीय ने बताया की आगामी 04 अगस्‍त दिन रविवार को हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर करंजी के पौधे लगाकर वृक्षगंगा अभियान को गति देने ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में पंहुचकर श्रम दान करने जिससे इस प्रकृति का संरक्षण हो ।

पैराडाइज स्कूल में विद्या की देवी मां सरस्वती की स्थापना कर धूमधाम से मनाया गुरु पूर्णिमा का महापर्व 

The great festival of Guru Purnima was celebrated with great

The great festival of Guru Purnima was celebrated with great pomp by installing Goddess Saraswati, the goddess of knowledge, in Paradise School. हरिप्रसाद गोहे  आमला । गुरु,शिष्य, गुरुजी एवं विद्यार्थी के बीच अमिट कड़ी का महापर्व गुरु पूर्णिमा रविवार पैराडाइज हायर सेकेंडरी स्कूल बंधा रोड आमला में स्कूल शिक्षण समिति अध्यक्ष केपी सिक्केवाल शाला परिवार सदस्य एवं शाला में अध्ययनरत विद्यार्थियों की गरिमामय उपस्थिति में धूमधाम से मनाया गया । इस अवसर पर स्कूल में मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई बाद सुंदर कांड का आयोजन किया गया । शाला के प्राचार्य अनुराग मालवीय से प्राप्त जानकारी अनुसार  गुरू पूर्णिमा पर्व पर माता सरस्वती की स्थापना आमला स्थानीय पैराडाइज हायर सेकेंडरी स्कूल में विद्या की देवी माता सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई । इस अवसर पर विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री के पी सेक्केवाल द्वारा विधिवत पूजन कर विद्यालय परिसर में माता की प्रतिमा की स्थापना की गई । विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक शिक्षिका इस अवसर पर उपस्थित थे साथ ही विद्यालय की छात्राए नौ देवियों के रूप में कार्यकम में उपस्थित थी । मूर्ति स्थापना के बाद सुंदर काण्ड का की सुंदर प्रस्तुति निलेश खड़गड़े वा ग्रुप के द्वारा की गई ।  कार्यक्रम में विद्यालय के राजेश नागले, प्रवीण दिघडे, सुनील करारे, अभीकेश सातनकार, श्रीमती ममता पवार, श्रीमती आशा विश्वकर्मा, श्रीमती हीरा कापसे, श्रीमती दुर्गा देशमुख, श्रीमती पायल सातनकार, कुमारी प्रिय झारबड़े, कुमारी खुशबू साहू,  कुमारी तेजस्विनी मथनकर, कुमारी डॉली साहू, कुमारी पूजा हरोड़े, कुमारी करुणा चौकीकर, कुमारी कंचन चौकीकर, कुमारी प्रज्ञा मकोड़े, कुमारी शारदा झरबडे, श्रीमती अनिता डोंगरे, श्रीमती रश्मि देशमुख, श्रीमती प्रियंका ठाकुर, कुमारी सोनल सिंह, कुमारी शिखा यादव, श्रीमती बनायित, श्रीमती तयवाड़े,  श्रीमती सोनाली खातरकर, श्रीमती प्रियंका बेडरे आदि उपस्थित थे ।

भागवत कथा जीवन के उद्देश्य और दिशा को दर्शाती है:देवी सत्यार्चा जी

Bhagwat Katha shows the purpose and direction of life: Devi Satyarcha Ji हरिप्रसाद गोहे  आमला। हारोडे परिवार द्वारा सिटी मैरिज लान आमला में भागवत कथा का आयोजन 18 मई से 25 मई तक किया जा रहा है। आयोजन के मुख्य जजमान धर्मराज हारोडे तथा हारोडे परिवार के धनराज हारोड़े,धर्मराज हारोडे,युवराज हारोडे,बलराज हारोडे,प्रमोद हारोडे है।आयोजित भागवत कथा में राष्ट्रीय कथा वाचिका  देवी सत्यार्चा जी के मुखार बिंद से कथा की रसधार प्रवाह मान है। श्रीमद् भागवत कथा में राष्ट्रीय कथावाचिका देवी सत्यार्चा जी ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। देवी सत्यार्चा जी ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया आयोजन करता परिवार  जयेश, विनोद,हारोडे,स्वराज,कर्मराज , आदित्य, क्रिस,सक्षम,पिपराज सभी भक्तजनों कथा श्रवण करने आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत कर धन्य अनुभव कर रहे है।  

गंगोत्री में जाम में फंसे मप्र के तीन श्रद्धालुओं की मौत, सीएम ने जताया दुख, सहायता राशि का एलान

Death of three devotees of Madhya Pradesh stuck in traffic jam in Gangotri, CM expressed grief, announced assistance amount प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा में फंसे श्रद्धालुओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यात्रा में फंसे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए हेल्प लाइन नंबर 011-26772005, 0755-2708055 एवं 0755-2708059 पर संपर्क कर सकते हैं। मध्य प्रदेश से चारधाम यात्रा पर गए तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख सहायता राशि की घोषणा की है। वहीं, उत्तराखंड में फंसे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। उत्तराखंड में मृत तीनों श्रद्धालु अलग-अलग शहर इंदौर, सागर और नीमच के रहने वाले थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन श्रद्धालुओं की मौत पर दु:ख जताया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की है। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चार धाम यात्रा पर गए मध्य प्रदेश के तीन श्रद्धालुओं के जाम में फंसने से हुए असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं की शांति एवं परिजनों को यह गहन दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। इन यात्रियों की हुई मौतसागर के रहने वाले 71 वर्षीय राम गोपाल, नीमच की 62 वर्षीय संपत्ति बाई और इंदौर के 39 वर्षीय रामप्रसाद की मौत हुई है। राम गोपाल और संपत्ति बाई की मौत 10 मई और रामप्रसाद की मौत 14 मई को हुई। अधिकारियों ने अनुसार तीनों की मौत यमुनौत्री धाम की यात्रा के दौरान हुई है। मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। इन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्कप्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा में फंसे श्रद्धालुओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यात्रा में फंसे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए हेल्प लाइन नंबर 011-26772005, 0755-2708055 एवं 0755-2708059 जारी किया गया है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सहायता के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। भीड़ बढ़ने से सरकारी इंतजाम फेलउत्तराखंड में यमुनोत्री धाम की यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू हो गई है। यमुनोत्री धाम की कठिन पैदल यात्रा के दौरान कई बार ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण तीर्थ यात्रियों की तबीयत बिगड़ जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को पहाड़ी यात्रा को रुक रुक कर पूरा करने की सलाह दी जाती है। वहीं, इसके अलावा सैकड़ों यात्री गंगोत्री-यमुनोत्री धामों पर बिना रजिस्ट्रेशन के पहुंचने के कारण फंस गए हैं। इसके चलते सरकार की व्यवस्था चरमरा गई है। लोग जाम में फंसने के कारण भी परेशान हो रहे हैं।

जानिए बजरंगबली ने क्यों अपना हृदय चीरा और कैसे पड़ा हनुमान नाम ?

Know why Bajrangbali tore his heart and how he got the name Hanuman? देशभर में आज बड़े ही धूम-धाम के साथ भगवान हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भारी भीड़ है। उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के बाद महाकाल का हनुमान जी के स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भगवान शंकर से हनुमानजी को मिला वरदानहनुमान से शंकरजी के अवतार हैं और भोलेनाथ से हनुमान जी को वरदान मिला है कि हनुमान जी को किसी भी अस्त्र से नहीं मारा जा सकता। हनुमान जी क्यों रखते हैं अपने पास गदाहनुमान जी दुष्टों को संहार और भक्तों की समस्याओं का निदान गदा से करते हैं। हनुमान जी हाथ में हमेशा गदा होती है। क्या आपको ये मालूम है हनुमान जी को गदा कैसे प्राप्त हुई है। दरअसल बजरंगबली को गदा कुबेर देव मिली थी और साथ में ये भी आशीर्वाद दिया कि हनुमान को कभी भी किसी युद्ध में परास्त नहीं किया जा सकता है। भगवान हनुमान को यमराज से मिला वरदानभूत पिशाच निकट नहि आवै, महावीर जब नाम सुनावै…भगवान हनुमान का नाम लेते ही सभी तरह की नकारात्मक शक्तियां फौरन ही भाग जाती हैं। धर्मराज यमराज से भी हनुमान जी को वरदान मिला हुआ है, उन्हें कभी भी यमराज का शिकार नहीं होने का वरदान प्राप्त है। सूर्यदेव से मिला हनुमान जी को तेजधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान को अमरता का वरदान मिला है। हनुमानजी कलयुग में साक्षात और जाग्रत देवता हैं। यह भक्तों की पूजा से जल्दी प्रसन्न होकर हर तरह की मनोकामनाओं का पूरा करते हैं। हनुमान जी भगवान शिव के ग्याहरवें अवतार हैं और उन्हें कई तरह की शक्तियां मिली है। मान्यता है कि सूर्यदेव से हनुमान जी को तेज प्राप्त है। सूर्य देव ने उन्हें अपने तेज का सौवां अंश दिया है इसी कारण हनुमान जी के सामने कोई नहीं टिक पाता। जब हनुमानजी ने अपना सीना चीर दिया…हनुमानजी आज भी इस धरती पर विचरण करते हैं। हनुमान जी कलयुग के देवता हैं। कलयुग में हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होती है। नकारात्मक ऊर्जा एवं बुरी शक्तियां हनुमानजी की आराधना करने से भाग जाती हैं। हनुमानजी ने भगवान राम के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दुनिया उन्हें प्रभु राम का सबसे बड़ा भक्त मानती है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद दरबार में उपस्थित सभी लोगों को उपहार दिए जा रहे थे। इसी दौरान माता सीता ने रत्न जड़ित एक बेश कीमती माला अपने प्रिय हनुमान को दी। प्रसन्न चित्त से उस माला को लेकर हनुमान जी थोड़ी दूरी पर गए और उसे अपने दांतों से तोड़ते हुए बड़ी गौर से माला के मोती को देखने लगे। उसके बाद उदास होकर एक-एक कर उन्होंने सारे मोती तोड़-तोड़ कर फेंक दिए। यह सब दरबार में उपस्थित लोगों ने देखा तो सब के सब आश्चर्य में पड़ गए। जब हनुमान जी मोती तो तोड़ कर फेंक रहे थे तब लक्ष्मणजी को उनके इस कार्य पर बहुत क्रोध आया,इस बात को उन्होंने श्री राम का अपमान समझा। उन्होंने प्रभु राम से कहा कि ‘हे भगवन, हनुमान को माता सीता ने बेशकीमती रत्नों और मनकों की माला दी और इन्होंने उस माला को तोड़कर फेंक दिया। जिसके बाद भगवान राम बोले, ‘हे अनुज तुम मुझे मेरे जीवन से भी अधिक प्रिय हो, जिस कारण से हनुमान ने उन रत्नों को तोड़ा है यह उन्हें ही मालूम है। इसलिए इस जिज्ञासा का उत्तर हनुमान से ही मिलेगा। तब राम भक्त हनुमान ने कहा ‘मेरे लिए हर वो वस्तु व्यर्थ है जिसमें मेरे प्रभु राम का नाम ना हो। मैंने यह हार अमूल्य समझ कर लिया था, लेकिन जब मैंने इसे देखा तो पाया कि इसमें कहीं भी राम-नाम नहीं है। उन्होंने कहा मेरी समझ से कोई भी वस्तु श्री राम के नाम के बिना अमूल्य हो ही नहीं सकती। अतः मेरे हिसाब से उसे त्याग देना चाहिए। यह बात सुनकर भ्राता लक्ष्मण बोले कि आपके शरीर पर भी तो राम का नाम नहीं है तो इस शरीर को क्यों रखा है? हनुमान तुम इस शरीर को भी त्याग दो। लक्ष्मण की बात सुनकर हनुमान ने अपना वक्षस्थल नाखूनों से चीर दिया और उसे लक्ष्मणजी सहित सभी को दिखाया, जिसमें श्रीराम और माता सीता की सुंदर छवि दिखाई दे रही थी। यह घटना देख कर लक्ष्मण जी से आश्चर्यचकित रह गए,और अपनी गलती के लिए उन्होंने हनुमानजी से क्षमा मांगी । आज यानी 23 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन हनुमान जन्मोत्सव पर भगवान हनुमान की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है। ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी के बचपन का नाम मारुति था। उन्हें उनके पिता पवन देव और माता अंजनी के पुत्र के रूप में जाना जाता है। एक दिन पवन पुत्र अपनी निद्रा से जागे तो उन्हें तीव्र भूख लगी। उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा, जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े। दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे। उस दिन अमावस्या का दिन था और राहु सूर्य पर ग्रहण लगाने वाला था, लेकिन जब तक सूर्य को ग्रहण लग पाता, उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। सारे संसार में अन्धकार व्याप्त हो गया। मनुष्य से लेकर सभी देवता तक बड़े व्याकुल हो गए और हनुमानजी को मनाने के लिए आ गए लेकिन, मारुति हठ करके बैठ गए। सभी देवताओं ने देवराज इंद्र से सहायता मांगी। इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो, इंद्र ने विवश होकर अपने वज्र से मारुति के हनु यानी ठोड़ी पर प्रहार किया, जिससे सूर्यदेव मुक्त हुए। वहीं वज्र के प्रहार से पवन पुत्र मूर्छित होकर पृथ्वी पर आ गिरे और उनकी ठुड्डी टेढ़ी हो गई। जब पवन देवता को इस बात की जानकारी हुई तो वे बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने अपनी शक्ति से पूरे संसार में वायु के प्रवाह को रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवों में त्राहि-त्राहि मच उठी। इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करने पहुंचे कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें। सभी देवताओं … Read more

मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में रामनवमी पर हुआ सीताराम कीर्तन का समापन

Sitaram Kirtan concludes on Ramnavmi in Manokamna Nath Nageshwar Shiv Temple हरिप्रसाद गोहे आमला ! रामनवमी के पावन अवसर पर हवाई पट्टी स्थित मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में नौ दिवसीय सीताराम कीर्तन का समापन हुआ।श्री श्री 1008 महंत रघुवरदास जी महाराज चतुर्भुजी भगवान का मंदिर विद्याकुण्ड अयोध्या निवासी के मार्गदर्शन में आयोजित सीताराम कीर्तन को 40 वर्ष पूर्ण हुए । पूर्णाहुति महंत श्री विशंभरदास जी महाराज निवासी अयोध्या के मुखरबिंद से संपन्न हुई ।साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद गृहण किया। लक्ष्मण चौकीकर ने बताया कि 9.4.2024 से प्रारंभ होकर 17.4. 24 रामनवमी पर सीताराम कीर्तन संपन्न हुआ । प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र पर शिव मंदिर में नौ दिनों तक सीताराम कीर्तन का आयोजन होता है, उमराव चौकीकर भगत जी के रामायण मंडल द्वारा पिछले 40 वर्षो से रामनवमी के अवसर पर कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने अपनी धर्मपत्नी मंजू पंडाग्रे के साथ शिव मंदिर पहुंचकर प्रसाद गृहण किया और आशीर्वाद लिया । इस अवसर पर बोड़खी,आमला, सारणी, बैतूल, देवगांव, छावल, खापा, बोरी, रतेड़ा, जमदेही, नांदीखेड़ा, धौसरा, खिड़की,भारत भारती, जामठी, आवरियां, अंधारिया, अंबाडा, पंखा, बेलमंडई सहित विभिन्न ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भंडारे में प्रसाद गृहण किया ।

मां वैष्णवी धाम तिरनघाट में देवी भागवत महापुराण का हो रहा आयोजन 

Devi Bhagwat Mahapuran is being organized at Maa Vaishno Dham Kiran Ghat. हरिप्रसाद गोहे  आमला । चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर शहर सहित अंचल के विभिन्न देवीधामो में नवरात्रि की धूम है । अयोजन को लेकर सभी देवीधामों में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन आयोजित किए जा रहे है। इधर ब्लाक मुख्यालय से सटे ग्राम बरंगवाडी स्थित मां वैष्णवी देवीधाम तिरनघाट में दिनांक  09 अप्रैल 2024 से संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन बाबा बारंगदेव की तपोधरा में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित किया जा रहा हे । जहां देवी भागवत कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त जन पहुंच रहे हे। प्राप्त जानकारी अनुसार संगीतमय देवी भागवत महा पुराण का वाचन स्थानीय कथा वाचक व्यास महेश महाराज के मुखारबिंद से श्रवण कराया जा रहा हैं । क्था का आयोजन तिरंनघाट परिवार एवं समस्त क्षेत्रवासी के सौजन्य से किया जा रहा है। क्षेत्र के गणमान्य नागरिक महेश साहू, किशोरी राठौर, दादा शिवपाल सिंह ठाकुर, दिलीप सागरे, अभिमन्यु सोनपुरे ने क्षेत्र की धर्मप्रेमी जनता से बुधवार दिनांक 17/4/2024 को भागवत कथा समापन अवसर, पर आयोजित विशाल भंडारे एवं डंडार प्रतियोगिता में पहुंच कार्यक्रम को सफल बनाने अपील की है। मंगलवार कथा समाप्ति उपरांत आरती में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे थे ।

चैत्र नवरात्र के अवसर पर सीताराम कीर्तन का शुभारंभ हुआ ,कीर्तन का ये 40 वाँ वर्ष है

Sitaram Kirtan was started on the occasion of Chaitra Navratri This is the 40th year of Kirtan हरिप्रसाद गोहे आमला । चैत्र नवरात्र के अवसर पर हवाई पट्टी स्थित मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में आज सीताराम सीताराम कीर्तन का शुभारंभ हुआ । शिव मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र के अवसर पर नौ दिवसीय सीताराम कीर्तन आयोजित किया जाता है । कीर्तन 9 अप्रैल से आरंभ होकर 17 अप्रैल रामनवमी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा । सीताराम कीर्तन में आमला बोड़खी के रामायण मंडल एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भजन मंडल और महिला मंडल सम्मिलित होते है ।  मंदिर समिति के लक्ष्मण चौकीकर ने बताया कि कीर्तन का ये 40 वांँ वर्ष है । विगत 39 वर्षो से प्रतिवर्ष उमराव चौकीकर भगत जी के रामायण मंडल द्वारा चैत्र नवरात्र रामनवमी के अवसर पर अखंड सीताराम कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है । मंदिर समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओ से कीर्तन में सम्मिलित होने का आगृह किया  है।

गौ-शालाओं को मिलने वाली राशि में होगा इजाफा ,सीएम मोहन यादव

The amount received by cow shelters will increase, CM Mohan Yadav announces सीएम मोहन यादव ने कहा कि गायों के लिए गौ-शालाओं को प्रति गाय की राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रदान की जायेगी। इसके अलावा अधूरी गौ-शालाओं का निर्माण पूर्ण किया जायेगा। भारतीय नव वर्ष अर्थात इस चैत्र माह से अगले वर्ष तक वह गौ- वंश रक्षा वर्ष मनाया जाएगा। चरनोई की भूमि से अतिक्रमण हटाए जाएंगे। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में गौ-माता और गौ-वंश के संरक्षण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। गौ-शालाओं के बेहतर संचालन के लिए उन्हें दी जा रही राशि में वृद्धि की जाएगी। साथ ही प्रदेश में चरनोई की भूमि पर अतिक्रमण हटाने, प्रति 50 किलोमीटर पर सड़कों पर दुर्घटना का शिकार हुई गायों को इलाज के लिए भिजवाने और सड़कों पर बैठने वाले पशुधन को बैठने से रोकने या अन्य स्थानांतरित करने के लिये आधुनिक उपकरणों की सहायता ली जायेगी। उपकरणों पर मिलेगा अनुदानसीएम ने आगे कहा कि गायों के लिए चारा काटने के उपकरणों पर अनुदान की व्यवस्था की जायेगी। पंचायतों को आवश्यक सहयोग और प्रेरणा मिले, इसके लिए गौ-संवर्धन बोर्ड प्रयास करेगा। गायों के लिए गौ-शालाओं को प्रति गाय की राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रदान की जायेगी। अधूरी गौ-शालाओं का निर्माण पूर्ण किया जायेगा। नई गौ-शालाएं भी बनेंगी। बता दें कि मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में “गौ-रक्षा संवाद” के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। प्रमुख घोषणाएं मेरे परिवार में भी गाय पालने की परंपराउन्होंने ये भी कहा कि गौ-पालक ही गाय का महत्व समझता है। हमारे देश में गाय पालना, गौ-शाला चलाना पवित्र कार्य है। गौ-शाला संचालन से ज्यादा बेहतर काम यह है कि घर में ही गौ-पालन किया जाये। यदि पर्याप्त जगह है, तो गाय अवश्य पालें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके परिवार में भी गाय पालने की पुरानी परंपरा है। आज भी वयोवृद्ध पिता, बूढ़ी गायों की सेवा करते हैं। गाय को मां स्वरूप मानते हैं। गौ-पालक परिवार यदि गाय के दूध का उपयोग करता है, तो सेवा में भी पीछे नहीं रहना चाहिये। इस अवसर पर अखिलेश्वरानंद गिरि, गोपालानंद सरस्वती जी महाराज, पूर्व सांसद मेघराज जैन, प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, संचालक पशुपालन एवं प्रबंध संचालक म.प्र.गौ संवर्धन बोर्ड एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉको गुजरात से आए पूर्व सांसद एवं चेयरमैन राष्ट्रीय कामधेनु आयोग श्री वल्लभ भाई कठेरिया ने अपनी पुस्तक “कल्याण गौ-सेवा अंक” भेंट की। पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि वे स्वयं गौ-पालक हैं। इसलिये इस कार्यशाला से उनका विशेष जुड़ाव है। आज यहां इस क्षेत्र के अनेक जानकारों और विशेषज्ञों के विचार एवं सुझाव जानने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने गौ-पालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर कैबिनेट के संकल्प को पूरा किया है। कार्यशाला में प्राप्त अनुशंसाएं उपयोगी हैं। इनसे संबंधित आवश्यक निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिये हैं। निश्चित ही मध्यप्रदेश की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

समृद्धि के नये द्वार खोलेगा अष्ट महालक्ष्मी मंदिर

Ashta Mahalaxmi Temple will open new doors of prosperity  समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी सुख, संपत्ति और वैभव प्रदान करती हैं। माँ लक्ष्मी को धन, वैभव, संपत्ति, यश और कीर्ति की देवी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का वर्णन है, जिन्हें अष्ट महालक्ष्मी कहा जाता है। माँ के ये अष्ट स्वरूप अपने नाम और रूप के अनुसार समस्त दुःखों का नाश कर  सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। मान्यता है कि माँ लक्ष्मी की कृपा के बिना जीवन में समृद्धि और संपन्नता संभव नहीं है।  डॉ. केशव पाण्डेय सात मार्च गुरुवार का दिन आध्यात्मिक, धार्मिक एवं ग्रह-नक्षत्र की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होगा और भविष्य के लिए सुखद संकेत देने वाला रहेगा। कारण इस दिन प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद श्री अष्ट महालक्ष्मी मंदिर के पट आमजन के लिए खुल जाएंगे। आम हो या खास सभी वैभव की देवी महालक्ष्मी के द्वार धन और समृद्धि की मनौती मांग सकेंगे। ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के जौरासी में करीब 15 करोड़ की लागत से भव्य एवं विशाल श्री अष्ट महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण किया गया है। ट्रस्ट हनुमान मंदिर जौरासी द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसका उद्देश्य शनि और सूर्य की युति के चलते शहर में उत्पन्न हो रहे वास्तुदोष को दूर करना है।  श्री अष्ट महालक्ष्मी के अष्ट रूप यानी यह  आठ प्रकार के धन सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रत्येक व्यक्ति में यह आठ धन अधिक या कम मात्रा में होते हैं। हम उन्हें कितना सम्मान करते हैं, उनका कैसे उपयोग करते हैं, हमारे ऊपर निर्भर है। इन आठ लक्ष्मी की अनुपस्थिति को-अष्ट दरीद्रता कहा जाता है। चाहे लक्ष्मी है या नहीं, नारायण को अभी भी अनुकूलित किया जा सकता है। नारायण दोनों के हैं – लक्ष्मी नारायण और दरिद्र नारायण! दरिद्र नारायण परोसा जाता है और लक्ष्मी नारायण की पूजा की जाती है। पूरे जीवन का प्रवाह दरिद्र नारायण से लक्ष्मी नारायण तक, दुख से समृद्धि तक, जीवन में सूखेपन से दैवीय अमृत तक जा रहा है।  आदि, धन, धान्य, गज, संतान, वीर, जय और विद्या ये महालक्ष्मी के अष्ट रूप हैं। पहले इनके प्रत्येक रूप की महिमा को वर्णन करते हैं।    आदि लक्ष्मी = श्रीमद्भागवत पुराण में माँ लक्ष्मी का पहला स्वरूप कहा गया है। इन्हें मूल लक्ष्मी या महालक्ष्मी भी कहा गया है। मान्यता है कि आदि लक्ष्मी माँ ने ही सृष्टि की उत्पत्ति की है। भगवान विष्णु के साथ जगत का संचालन करती हैं। आदि लक्ष्मी की साधना से भक्त को जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति होती है।  धन लक्ष्मी = माँ लक्ष्मी का दूसरा स्वरूप है। इनके एक हाथ में धन से भरा कलश है तो दूसरे में कमल का फूल है। धन लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक संकट दूर होता है। कर्ज से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार माँ लक्ष्मी ने ये रूप भगवान विष्णु को कुबेर के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिया था।  धान्य लक्ष्मी = यह माँ का तीसरा रूप है। संसार में धान्य या अनाज के रूप में वास करती हैं। धान्य लक्ष्मी को माँ अन्नपूर्णा का ही एक रूप माना जाता है।   गज लक्ष्मी = चतुर्थ रूप में गज लक्ष्मी हाथी के ऊपर कमल के आसन पर विराजमान हैं। माँ गज लक्ष्मी को कृषि और उर्वरता की देवी के रूप में पूजा जाता है। इनकी आराधना से संतान की प्राप्ति होती है। राजा को समृद्धि प्रदान करने के कारण इन्हें “राज लक्ष्मी“ भी कहा जाता है।  संतान लक्ष्मी = माँ के पंचम रूप को स्कंदमाता के रूप में भी जाना जाता है। इनके चार हाथ हैं तथा अपनी गोद में कुमार स्कंद को बालक रूप में लेकर बैठी हुई हैं। माना जाता है कि संतान लक्ष्मी भक्तों की रक्षा अपनी संतान के रूप में करती हैं।  वीर लक्ष्मी = माँं लक्ष्मी का यह छठवां रूप भक्तों को वीरता, ओज और साहस प्रदान करता है। वीर लक्ष्मी माँ युद्ध में विजय दिलाती है। अपने हाथों में तलवार और ढाल जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।  जय लक्ष्मी =  माँ के इस रूप को विजय लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है। इनकी साधना से भक्तों के जीवन के हर क्षेत्र में जय-विजय की प्राप्ति होती है। जय लक्ष्मी माँ यश, कीर्ति तथा सम्मान प्रदान करती हैं।  विद्या लक्ष्मी माँ लक्ष्मी का यह आठवां रूप विद्या लक्ष्मी है। इनका रूप ब्रह्मचारिणी देवी के जैसा है। इनकी साधना से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। विश्व विख्यात श्री विद्या साधक एवं जन्म कुंडली विशेषज्ञ श्रीजी रमण योगी महाराज “साइंटिस्ट बाबा” के मुताबिक नारायण लक्ष्य है और लक्ष्मी जी उन तक पहुँचने का एक साधन। उन्होंने आठ प्रकार के धन या अष्ट लक्ष्मी के बारे में विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि माता महालक्ष्मी की नजर जिस तरफ पड़ेगी उस क्षेत्र का विकास होगा। महालक्ष्मी देवी का आभा मंडल आस-पास के इलाकों में अपना प्रभाव छोड़ेगा। अष्टभुजाओं का प्रकाश टेकनपुर और डबरा में तीव्र गति से विकास कराकर समृद्धि के द्वार खोलेगा। कारोबार के  साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। आय बढ़ने से जीवन स्तर में बदलाव आएगा और सुखद होगा।  पंडितों एवं त्योतिषाचार्यां की मानें तो ग्वालियर से 15 किलोमीटर दूर ऐंती पर्वत पर त्रेता युगीय शनि देव मंदिर है। कहा जाता है कि भगवान शनि देव उल्का पिंड के रूप में ऐंती पर्वत पर आए। जबकि गोला का मंदिर इलाके में सूर्य मंदिर स्थित है।  शनि-सूर्य की युति एक साथ होने से लोगों के जीवन पर खासा प्रभाव होता है। दोनों ही जीवन को पूर्णतः संघर्षमय बनाते हैं। जब यह युति लग्न, पंचम, नवम या दशम भाव की स्थिति में हो या फिर  दोनों में से कोई भी एक ग्रह इन भावों का कारक भी हो तो यह योग जीवन में विलंब लाता है। बेहद मेहनत के बाद समय बीत जाने पर सफलता मिलती है। क्योंकि सूर्य और शनि दोनों पिता-पुत्र होने पर भी परस्पर शत्रुता रखते हैं। वेसे भी प्रकृति की मान्यता है कि ज्ञान और अंधकार साथ मिलने पर शुभ प्रभाव अनुभूत नहीं होते हैं। ऐसे में ग्वालियर शहर में तो यह युति एक लंबे समय से बनती चली आ रही है। इस वजह से … Read more

महाशिवरात्रि के लिए फूलों से सजा महाकाल का दरबार, 750 कैमरों से रखेंगे हर आने जाने वाले पर नजर

Mahakal’s court decorated with flowers for Mahashivratri, will keep an eye on every visitor with 750 cameras महाशिवरात्रि महापर्व के पहले ही भगवान महाकाल के दरबार में फूलों से सजावट की गई है। मंदिर के मुख्य शिखर से लेकर गर्भगृह तक को फूलों से सजाया गया है। उज्जैन ! श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि पर्व पर एक भक्त ने मंदिर के नंदी हॉल, गर्भ गृह के साथ बाहर ओंकारेश्वर महादेव, नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर और शिखर पर भी आकर्षक फूलों से सजावट करवाई है। शिवरात्रि के पहले नौ दिवसीय पर्व के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में साज-सज्जा कराने वाले भक्त अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। रात से ही मंदिर में फूलों से सजावट का काम शुरू हो गया था। वहीं, मुख्य पर्व महाशिवरात्रि पर भी देशी-विदेशी फूलों के साथ विद्युत रोशनी कर सजावट करने का काम 7 मार्च से शुरू होगा। शिवरात्रि पर 15 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना श्री महाकालेवर मंदिर में इस बार महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के आगमन का रिकॉर्ड टूटेगा। संभावना है कि करीब 15 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मंदिर समिति और जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्रद्धालु कहां से आएंगे और कहां से जाएंगे, इसके लिए रूट प्लान जारी कर दिया गया है। कुछ दिनों पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्किंग स्थल से महाकाल मंदिर तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। बाबा के दर्शन के लिए जगह-जगह लगेगी मेगा स्क्रीन श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था के लिए लगाए गए बैरिकेड के साथ ही कुछ स्थानों पर मंच बनाए जाएंगे। यहां भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। सामान्य दर्शनार्थियों के प्रवेश द्वार पर मेगा स्क्रीन लगाई जाएगी, जिससे श्रद्धालु स्क्रीन पर भी बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। इस बार सामान्य दर्शनार्थियों को महाकाल महालोक के मानसरोवर भवन से फैसेलिटी सेंटर से कार्तिकेय मंडपम से दर्शन कराएंगे। कैमरों के साथ ड्रोन से भी रखी जाएगी नजर दर्शनार्थियों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से करीब 750 सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से नजर रखी जाएगी। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से लगने वाले करीब 750 सीसीटीवी कैमरों से पार्किंग स्थल से मंदिर तक नजर रखी जाएगी। भीड़ वाले क्षेत्र में ड्रोन कैमरे लगेंगे। सभी कैमरे मंदिर के श्री महाकाल लोक और फैसेलिटी सेंटर स्थित कंट्रोल रूम से अटैच रहेंगे। यहां पर मंदिर समिति व पुलिस और प्रशासन के अधिकारी नजर रख सकेंगे।

अमीरों के चक्कर में बेचारा गरीब पिसता ,हल्दी रस्म या फिजूल खर्ची

Haldi ritual or wasteful expenditure, the poor suffer for the sake of the rich. कमलेश अहिरवार ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां- बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं। हल्दी रस्म के दौरान हजारों रूपये खर्च कर के विशेष डेकोरेशन किया जाता है, उस दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीत (पीले) वस्त्र धारण करते हैं। साल 2020 से पूर्व इस हल्दी रस्म का प्रचलन ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता था, लेकिन पिछले साल दो-तीन साल से इसका प्रचलन बहुत तेजी से ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ा है। पहले हल्दी की रस्म के पीछे कोई दिखावा नहीं होता था, बल्कि तार्किकता होती थी। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आज की तरह साबुन व शैम्पू नहीं थे और ना ही ब्यूटी पार्लर था। इसलिए हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे-दुल्हन के चेहरे व शरीर से मृत चमड़ी और मेल को हटाने, चेहरे को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए हल्दी, चंदन, आटा, दूध से तैयार उबटन का प्रयोग करते थे। ताकि दूल्हा-दुल्हन सुंदर लगे। इस काम की जिम्मेदारी घर-परिवार की महिलाओं की थी। लेकिन आजकल की हल्दी रस्म मोडिफाइड, दिखावटी और मंहगी हो गई है। जिसमें हजारों रूपये खर्च कर डेकोरेशन किया जाता है। महंगे पीले वस्त्र पहने जाते है। दूल्हा दुल्हन के घर जाता है और पूरे वातावरण, कार्यक्रम को पीताम्बरी बनाने के भरसक प्रयास किये जाते हैं। यह पीला ड्रामा घर के मुखिया के माथे पर तनाव की लकीरें खींचता है जिससे चिंतामय पसीना टपकता है। पुराने समय में जहां कच्ची छतों के नीचे पक्के इरादों के साथ दूल्हा-दुल्हन बिना किसी दिखावे के फेरे लेकर अपना जीवन आनंद के साथ शुरू करते थे, लेकिन आज पक्के इरादे कम और दिखावा और बनावटीपन ज्यादा होने लगा है। आजकल देखने में आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के भी इस शहरी बनावटीपन में शामिल होकर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा रहे है। क्योंकि उन्हें अपने छुट भईए नेताओं, वन साइड हेयर कटिंग वाले या लम्बे बालों वाले सिगरेट का धुंआ उड़ाते दोस्तों को अपना ठरका दिखाना होता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि के लिए रील बनानी है। बेटे के रील बनाने के चक्कर में बाप की कर्ज़ उतरने में ही रेल बन जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां-बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो उन परिवारों के बच्चों को मां-बाप से जिद्द करके इस तरह की फिजूल खर्ची नहीं करवानी चाहिए। आजकल काफी जगह यह भी देखने को मिलता है कि बच्चे (जिनकी शादी है) मां-बाप से कहते है आप कुछ नहीं जानते, आपको समझ नहीं है, आपकी सोच वही पुरानी अनपढ़ों वाली रहेगी, यह कहते हुए अपने माता-पिता को गंवारू, पिछड़ा, थे तो बौझ्अ बरगा हो कहते हैं। मैं जब भी यह सुनता हूं सोचने को विवश हो जाता हूं, पांव अस्थिर हो जाते हैं। बड़ी चिंता होती हैं कि मेरा युवा व छोटा भाई-बहिन किस दिशा में जा रहे हैं। आज किसी को चींटी के पैरो के सूपरू की आवाज सुनने की फुर्सत नहीं है क्योंकि सब-के-सब फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर खुद को बढ़ा-चढ़कर कर परोसते हैं, दिखावटीपन को चासनी में आकंठ इसे हुए हैं। इसलिए व्यक्ति बाजारवाद की गिरफ्त में जल्दी आता जा रहा है और यह पूर्णतः बाजारवाद द्वारा आजाद की हुई नई-नवेली रस्म है. इसका गला यहीं पर घोट दो अन्यथा पीसना तय इस तरह की फिजूलखनों वाली रस्म को रोकने के समाचार पढ़ कर खुशी होती है लेकिन अपने घर, परिवार, समाज, गांव में ऐसे कार्यक्रम में शरीक होकर लुत्फ उम्र रहे हैं, फोटो खिचवाकर स्टेटस लगा रहे हैं। फिर तो वही बात हो गई कि तुझे रोकना तो चाहता हूं, मगर तू रूकना नहीं, मुझे तेरी महफिल में रोकना तो बाह रहे है मगर तू रुकना नहीं हमें महफिल में शरीक होना है, यानि कथनी और करनी में अंतर स्याह है।

ब्रह्माकुमारीज की द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा से शिवमय हुआ आमला

Amla became Shiva-like due to Brahma Kumaris’ Dwadash Jyotirlinga Yatra. हरिप्रसाद गोहे आमला । अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ब्रह्माकुमारीज के स्थानीय सेवा केंद्र द्वारा मंगलवार आमला नगर में विशाल एवं भव्य द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा का आयोजन किया गया । ब्रह्माकुमारीज के अनुयायियों द्वारा ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर शिव ध्वज फहराकर शिवरात्रि पर्व मनाया बाद यात्रा निकाली गई । इस यात्रा के द्वारा इस धरा पर परमात्मा शिव के अवतरण का दिव्य संदेश दिया गया । यात्रा के द्वारा बताया गया कि कलयुग रूपी घोर रात्रि के समय परमात्मा शिव का इस धरा पर अवतरण होता है और वह अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर हमारे जीवन में ज्ञान प्रकाश से दिव्य गुण लाते हैं और जब मनुष्य गुणवान बन जाता है तो नई सतयुगी सृष्टि , स्वर्ग की सृष्टि में जाने की वह पात्रता धारण कर लेता है अर्थात मानव ही देव मानव बन जाता है देवता बन जाता है तथा परमात्मा इस पुरानी कलयुग की दुनिया को परिवर्तन कर नई सतयुग की दुनिया लाते हैं। ब्रह्मा कुमारीज ने इस यात्रा के द्वारा सभी का आह्वान किया है की इस सृष्टि पर अवतरित हो चुके परमात्मा को पहचान कर वे भी अपने संस्कारों के परिवर्तन से संसार परिवर्तन के इस देवी कार्य में सहयोगी बने और अपने जीवन को सुखी और समृद्ध बनाएं । द्वादश ज्योतिर्लिंग का रथ बनाकर हुआ नगर भ्रमण ।यात्रा में परमात्मा शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग को रथ पर सजाकर सारे नगर का भ्रमण कराया गया। द्वादश ज्योतिर्लिंग में महाकालेश्वर, त्रयंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, विश्वनाथ, बैद्यनाथ, रामेश्वरम, सोमनाथ,मल्लिकार्जुन आदि 12 ज्योतिर्लिंग को सजाकर यात्रा निकाली गई। इस यात्रा से आमला निवासी सभी शिव भक्तों ने बाबा भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए। यात्रा का नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत भी हुआ। यात्रा ब्रह्माकुमारी की सेवा केंद्र से निकलकर शहर के मुख्य स्थान से होते हुए पुनः ब्रह्माकुमारी केंद्र पहुंची। यात्रा ने बोड़खी की और आमला के मुख्य मार्ग का भ्रमण किया तथा भक्तों को शिव बाबा के दर्शन कराए। मनाई 88वी त्रिमूर्ति शिव जयंतीसारनी से पधारी बी के सुनीता दीदी ने बताया कि परमात्मा शिव को इस धरा पर अवतरित हुए 88 वर्ष हो चुके है। वे साधारण मानव ब्रह्मा तन का आधार लेकर श्रृष्टि परिवर्तन का कार्य कर रहे है। निकट भविष्य में शीघ्र ही स्वर्गिक सृष्टि की स्थापना होने वाली है। इसके लिए परमात्मा हमे राजयोग सीखा रहे है। वही आमला सेवाकेंद्र संचालिका बी के हेमलता बहन ने बताया की ब्रह्माकुमारीज के सेवाकेंद्र पर निशुल्क राजयोग प्रशिक्षण दिया जाता हैं जिसे कोई भी व्यक्ति आके सिख सकता है ।

संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती विशेष प्रकाशन

Sant Shiromani Guru Ravidas Jayanti Special Publication Ravidas Jayanti 2024: गुरु रविदास जी का जन्म कब और कहां हुआ ? संत गुरु रविदास जी को प्रेम और करुणा की शिक्षाओं और समाज से जाति के भेदभाव को दूर करने के लिए जाना जाता है. हर साल माघ पूर्णिमा को रविदास जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है.भारत के प्रसिद्ध संत रविदास को रैदास के नाम से भी जाना जाता है. रविदास ऐसे संत और कवि थे, जिनका भक्ति आंदोलन में अहम योगदान रहा. समाज विभाजन को दूर करने पर इन्होंने जोर दिया और व्यक्तिगत आध्यात्मिक आंदोलन के लिए एकता को बढ़ावा दिया. रविदास जी के जन्मदिन को ही हर साल रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है, जोकि आज शनिवार, 24 फरवरी 2024 को है. संत रविदास ईश्वर को पाने का केवल एक रास्ता जानते थे और वो है ‘भक्ति’. इसलिए उनका एक मुहावरा ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ वर्तमान में काफी प्रसिद्ध है. संत रविदास जी ने अपना सारा जीवन समाज सुधार कार्य, समाज कल्याण और समाज से जाति भेदभाव को दूर करने के कार्यों में समर्पित कर दिया. आइये जानते हैं गुरु रविदास जी का जन्म कब और कहां हुआ था? कब और कहां हुआ संत रविदास का जन्म संत गुरु रविदास एक महान कवि, दार्शनिक और समाज सुधारक थे. संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र में माघ पूर्णिमा को 1377 में हुआ था. इसलिए हर साल माघ पूर्णिमा के दिन रविदास जयंती मनाई जाती है. लेकिन इनके जन्म को लेकर विद्वानों के बीच अलग-अलग मत हैं. इनकी माता का नाम कर्मा देवी और पिताजी का नाम संतोष दास था. संत रविदास का जन्म एक मोची परिवार में हुआ था और इनके पिता जूते बनाने का काम किया करते थे. रविदास जी बचपन से बहादुर और ईश्वर के भक्त थे. पंडित शारदानंद गुरु से इन्होंने शिक्षा प्राप्त की. जैसे-जैसे रविदास जी की उम्र बढ़ने लगी भक्ति के प्रति इनकी रुचि भी बढ़ गई. आजीविका के लिए रविदास जी ने पैतृक काम को करते हुए भगवान की भक्ति में भी लीन रहे. चर्मकार कुल के होने के कारण वे जूते बनाया करते थे और अपने पैतृक कार्य में उन्हें आनंद भी मिलता था. वे अपना काम ईमानदारी, परिश्रम और पूरे लगन से करते थे. साथ ही लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा भी दिया करते थे. संत शिरोमणि गुरु रविदास कौन थे, समाज के लिए क्या है इनका योगदान भारत में कई संतों ने लोगों को आपसी प्रेम, सौहार्द और गंगा जमुनी तहजीब सिखाई. इन्हीं में एक थे संत रविदास, जिनका भक्ति आंदोलन और समाज सुधार में विशेष योगदान रहा. संत गुरु रविदास भारत के महान संतों में से एक हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज सुधार कार्य के लिए समर्पित कर दिया. समाज से जाति विभेद को दूर करने में रविदास जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. वो ईश्वर को पाने का एक ही मार्ग जानते थे और वो है ‘भक्ति’, इसलिए तो उनका एक मुहावरा आज भी बहुत प्रसिद्ध है कि, ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’. रविदास जी का जन्म रविदास जी के जन्म को लेकर कई मत हैं. लेकिन रविदास जी के जन्म पर एक दोहा खूब प्रचलित है- चौदस सो तैंसीस कि माघ सुदी पन्दरास. दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरु रविदास. इस पंक्ति के अनुसार गुरु रविदास का जन्म माघ मास की पूर्णिमा को रविवार के दिन 1433 को हुआ था. इसलिए हर साल माघ मास की पूर्णिमा तिथि को रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है जोकि इस वर्ष 24 फरवरी 2024 को है. रविदास जी का जन्म 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक मोची परिवार में हुआ. उनके पिताजी जाति के अनुसार जूते बनाने का पारंपरिक पेशा करते थे, जोकि उस काल में निम्न जाति का माना जाता था. लेकिन अपनी सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद भी रविदास जी भक्ति आंदोलन, हिंदू धर्म में भक्ति और समतावादी आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उजागर हुए. 15 वीं शताब्दी में रविदास जी द्वारा चलाया गया भक्ति आंदोलन उस समय का एक बड़ा आध्यात्मिक आंदोलन था. समाज के लिए गुरु रविदास का योगदान संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी एक महान संत और समाज सुधारक थे. भक्ति, सामाजिक सुधार, मानवता के योगदान में उनका जीवन समर्पित रहा. आइये जानते हैं गुरु रविदास के महत्वपूर्ण योगदानों के बारे में- धार्मिक योगदान: भक्ति और ध्यान में गुरु रविदास का जीवन समर्पित रहा. उन्होंने भक्ति के भाव से कई गीत, दोहे और भजनों की रचना की, आत्मनिर्भरता, सहिष्णुता और एकता उनके मुख्य धार्मिक संदेश थे. हिंदू धर्म के साथ ही सिख धर्म के अनुयायी भी गुरु रविदास के प्रति श्रद्धा भाव रखते हैं. रविदास जी की 41 कविताओं को सिखों के पांचवे गुरु अर्जुन देव ने पवित्र ग्रंथ आदिग्रंथ या गुरुग्रंथ साहिब में शामिल कराया था.सामाजिक योगदान: समाज सुधार में भी गुरु रविदास जी का विशेष योगदान रहा. इन्होंने समाज से जातिवाद, भेदभाव और समाजिक असमानता के खिलाफ होकर समाज को समानता और न्याय के प्रति प्रेरित किया.शिक्षा और सेवा: गुरु रविदास जी ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और अपने शिष्यों को उच्चतम शिक्षा पाने के लिए प्रेरित किया. अपने शिष्यों को शिक्षत कर उन्होंने शिष्यों को समाज की सेवा में समर्थ बनाने के लिए प्रेरित किया. मध्यकाल की प्रसिद्ध संत मीराबाई भी रविदास जी को अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि SAHARA SAMACHaar.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

आमला में होगा द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा का भव्य आयोजन

A grand event of Dwadash Jyotirlinga Yatra will be held in Amla. हरिप्रसाद गोहे आमला । महा शिवरात्रि के पावन शुभ अवसर को उत्सव का रूप देने इस बार विश्व विख्यात नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्य शिक्षण संस्थान ब्रह्माकुमारीज के स्थानीय सेवा केंद्र बैतूल, सारणी, भौरा आदि स्थानों पर पूर्व में ब्रह्माकुमारीज के बैनर तले द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा निकाली जा चुकी है । जिसमें श्रद्धालु शिव भक्तों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और भगवान भोलेनाथ के ज्योर्तिलिंग स्वरूप का दर्शन लाभ प्राप्त किया । उक्त आयोजित दर्शन यात्रा अंतर्गत आगामी दिनांक 27/04/2024 दिन मंगलवार को आमला स्थित स्थानीय ब्रह्मकुमारीज आश्रम के बैनर तले द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा का आयोजन आयोजित किया जा रहा है । आमला ब्रह्मकुमारी सेवा आश्रम संचालिका बहन बीके हेमलता ने बताया अन्य सेवा केंद्रों की तरह आमला में भी दिनांक 27/02/2024 को द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा निकाली जाएगी । यात्रा में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग को सजाकर नगर भ्रमण कराया जाएंगा । भ्रमण के दौरान शिव भक्त भगवान भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंग स्वरूपों का दर्शन कर सकेंगे । दर्शन यात्रा बैतूल रामनगर ब्रह्मकुमारीज सेवाकेंद्र से निकलकर शहर के सभी मुख्य मार्गो से होकर वापस आमला पहुंच आमला में दर्शन यात्रा भ्रमण करेंगी l सभी भक्तों से निवेदन रहेगा की अपने-अपने स्थान पर यात्रा का स्वागत करें तथा शिव ज्योतिर्लिंगम की पूजा अर्चना करते हुए ज्योतिर्लिंग दर्शन का लाभ अवश्य उठाएं ।

जय श्रीराम घोष से गुंजा सीताराम, संकट मोचन हनुमान मंदिर,

Sitaram echoed with Jai Shri Ram Ghosh, Sankat Mochan Hanuman Temple. हरिप्रसाद गोहेआमला। मंगलवार अयोध्या मे भगवान श्रीराम जी के मंदिर में भगवान राम लला जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई । आज के इस दिन को राम दीपावली का नाम दिया गया श्रीराम भक्तों ने सोमवार आमला सहित अंचल के ग्रामों में भी श्री राम दीपावली जगह , जगह उत्सव की तरह मनाई । नगर के मुख्य चौराहा जनपद चौक को आकर्षक रूप दे सजाया गया था । इस मौके पर चौक को भगवा ध्वजों से पाट दिया गया था । स्वागत द्वार लगाए गए थे वही विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा जनपद चौक पर सुंदरकांड का आयोजन किया गया । साथ ही जनपद चौक पर स्थित प्रसिद्ध सीताराम संकट मोचन हनुमान मंदिर में भी अयोध्या में राम मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर को उत्सव का रूप देने दिन भर विविध धार्मिक आयोजन आयोजित कर मंदिर पहुंचे श्रद्धालु भक्तो को भंडारे की प्रसादी का वितरण किया गया । मंदिर समिति प्रमुख हनुमान भक्त श्याम सरमैया ने बताया इस मौके पर सीताराम संकट मोचन हनुमान मंदिर आमला एवं स्वर्ग आश्रम दुर्गा मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में उपस्थित श्रद्धालु भक्तजनों ने ग्यारह सौ द्वीप प्रज्वलित कर धूमधाम से राम दीपावली मनाई । प्रज्वलित द्वीप अयोध्या में राम आए हैं संदेश दे रहे थे । वहीं स्वर्ग आश्रम दुर्गा मंदिर में सुसज्जित गुंबज आकर्षण का केंद्र लग रहा था । उधर जनपद चौक पर विहिप ने महाआरती की गई जिसमें जनसैलाब उमड़ा था । महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया और देर शाम हजारो दीप जलाकर दीपावली मनाई गई ।

श्री राम चंद्र जी के स्वरूप में बाबा बटेश्वर 5100 दीपों से सजा शिवालय

Baba Bateshwar pagoda decorated with 5100 lamps in the form of Shri Ram Chandra Ji भोपाल । पुराने शहर के प्राचीन से श्री बड़वाले महादेव मंदिर में अयोध्या में प्रभु श्री राम लाल विराजमान होने के उपलक्ष्य में बाबा बटेश्वर को प्रभु श्री राम जी के स्वरुप में विराजमान किया गया, समिति के संयोजक संजय अग्रवाल ने बताया कि 5100 दीपों से पूरे मंदिर को सजाया गया। मंदिर गर्भ ग्रह में रंगोली और दीपमालाएं जलाई रात्रि 8 बजे श्रृंगार दर्शन कर महाआरती एवं प्रसाद वितरण हुआ। श्री बड़वाले महादेव मंदिर से ॐ नम: शिवाय मंडल के द्वारा निकली प्रभातफेरीॐ नम: शिवाय मंडल के द्वारा प्रात: 7:00 बजे प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें मंडल के सदस्यों द्वारा अखण्ड ॐ नम: शिवाय एवं राम घुन के भजन गाये फेरी श्री बड़वाले महादेव मंदिर से प्रारंभ होकर पुराने शहर के दयानंद चौक, लोहा बाजार, पीपल चौक, सराफा, लखेरापुरा से सोमवारा होते हुए शिवालय भवन में समापन हुआ। प्रभु राम मंदिर निर्माण का गवाह बन हरि हरात्मक शक्ति महायज्ञ मां दुर्गा धाम शक्तिपीठ मंदिर में सोमवार 10:00 बजे ढोल तसो बाजे झांकियां के साथ सैकड़ो भक्तगण नर नारियों राममय होकर श्री राम के जयकारे लगाते हुए। राम शोभा यात्रा में सम्मिलित होकर राम मंदिर निर्माण का उत्सव भव्यता और जोश के साथ मनाया जो अशोका गार्डन के मुख्य मुख्य मार्ग से होकर पुन: दुर्गा धाम मंदिर में संपन्न हुई । दोपहर 2:00 बजे से मुख्य यज्ञाचारी पंडित युगल किशोर शास्त्री ने सर्वप्रथम महायज्ञ के 9 हवन कुंडों में श्री राम प्रभु के 1001 आहुतियां डलवा कर महायज्ञ को 26 वा ऐतिहासिक पर्व मनाया।

साईं की 42 वर्षगाठ पर मंदिर में उमड़ा भक्तों का अपार जन सैलाब

A huge crowd of devotees gathered in the temple on the 42nd anniversary of Sai Baba आमला । नगर के रमली रोड रेल्वे बांध स्थित प्रसिद्ध साई मंदिर की 42 वी वर्षगाठ रविवार साई मंदिर समिति द्वारा धूमधाम एवं हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई । समिति के आमंत्रण पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु साई भक्त मंदिर परिसर में पहुंचे थे । कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ साई वस्त्र अभिषेक कर हवन एवं पूजा अर्चना कर किया गया। इस मौके पर साई मंदिर समिति द्वारा विशाल महा भंडारे एवं संगीतमय जागरण का आयोजन किया गया था । जहां उपस्थित भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया एवं जागरण की प्रस्तुति का आनंद उठाया । समिति के शैलेंद्र दुबे ने बताया साई बाबा की वर्षगांठ मानाने एक सप्ताह से आयोजन की तैयारी की जा रही थी । कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु भक्त साई बाबा की पूजा अर्चना अभिषेक करने यहा पहुंचे थे । दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में पहुचकर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया । इस वर्ष भी रमली रोड स्थित साईं बाबा की 42 वी वर्षगांठ मनाई गई सुबह 7:00 बजे हवन पूजन एवं बाबा का अभिषेक किया गया भंडारा प्रसादी वितरण और शिव भोले जागरण द्वारा भजन कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई ।

ग्वालियर में वाहनों पर श्री राम की झंडिया भी लगाई गई

Shri Ram flags were also installed on vehicles in Gwalior. ग्वालियर ! 22 जनवरी को अयोध्या में हो रहे राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है ! ऐसे में ग्वालियर में नमो नमो ग्रुप द्वारा शहर के बाजारों और चौराहों में अभियान चलाकर वाहन चालकों के वहां पर श्री राम नाम की झंडिया लगाई गई ! ग्वालियर फूलबाग पर पहुंचे नमो नमो ग्रुप के सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अभय चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे ! जहां वाहन चालकों को रोक कर 22 जनवरी को अयोध्या में हो रहे ! प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजन की जानकारी दी गई इसके साथ वाहनों पर श्री राम की झंडिया भी लगाई गई ! इस दौरान जय श्री राम के नारों से फूल बाग चौराहा गूंज उठा !

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पूर्व रोशनी से जगमगा उठी अयोध्या नगरी

Ayodhya city illuminated with lights before Ram Mandir consecration ceremony अयोध्या में दिवाली जैसा माहौल… प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले रोशनी से नहाए राज सदन, पुराने मंदिर अयोध्या ! अयोध्या के पूर्व राजा का भव्य आवास राज सदन, विभिन्न मंदिर और यहां अन्य इमारतें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर रोशनी से जगमगा उठी है, जिससे इस मंदिर नगरी में दिवाली उत्सव जैसा माहौल बन गया है। प्राचीन ‘अयोध्या नगरी’ को आकर्षक ढंग से सजाया गया है खासतौर से राम पथ और धर्म पथ की साज-सज्जा देखने लायक है। अयोध्या की गलियों में ‘राम आएंगे’ और ‘अवध में राम आए हैं” जैसी गीतों की गूंज सुनायी दे रही है और मंदिर शहर की इमारतें भगवा ध्वज से पटी पड़ी हैं।‘प्राण प्रतिष्ठा’ के दिन शहर में चकाचौंध रहने की उम्मीद है क्योंकि कई मकान, मंदिर और अन्य इमारतें रोशनी से नहायी हैं। अयोध्या के शाही परिवार का घर रहा राज सदन रोशनी से जगमग है। सैकड़ों लोग, स्थानीय निवासी और दर्शक शनिवार देर रात तक इसके सुशोभित द्वार ‘लक्ष्मीद्वार’ के सामने तस्वीरें या सेल्फी लेने के लिए उमड़ पड़े। प्रवेश द्वार के शीर्ष पर भगवान राम की धनुष और बाण लिए तस्वीर लगायी गयी है और ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज रहे। प्रवेश द्वार के मेहराब के नीचे एक झूमर लगाया गया है। यह साज-सज्जा नजदीकी राम पथ से गुजरने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। अयोध्या में 22 जनवरी को दिवाली उत्सव या संभवतः उससे बड़े पैमाने पर उत्सव मनाएँ जाने की उम्मीद है। बेगमपुरा इलाके में कई महीनों पहले खुला लॉज प्रभाराज पैलेस शुक्रवार रात को रोशनी से जगमग हो उठा। अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।

राममय हुआ संतनगर 11 हजार रामभक्तों के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया हनुमान चालीसा पाठ, राम धुन पर झूमे रामेश्वर शर्मा

Santnagar became Ram-filled; Chief Minister Mohan Yadav recited Hanuman Chalisa with 11 thousand Ram devotees. भोपाल। अयोध्यानाथ भगवान श्री राम जी के भव्य मंदिर में विराजमान होने के उपलक्ष्य में पूरा मध्यप्रदेश राममय हो रहा है। अपने नवाचारों और हिन्दुत्व वादी छवि के लिए लगातार चर्चित रहने वाले विधायक रामेश्वर शर्मा भी राजा राम के आगमन पर लगातार विभिन्न आयोजन करा रहे हैं। शनिवार को उन्होंने संत हिरदाराम नगर स्थित हेमू कालानी स्टेडियम में मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन कराया। इस आयोजन में 11 हजार रामभक्तों ने एक साथ उपस्थित होकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। विधायक रामेश्वर शर्मा के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी सम्मलित हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया व रामभक्तों के साथ भक्तिभाव के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। आयोजन से पूर्व मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री व विधायक शर्मा ने शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसके बाद कार्यक्रम विधिवत प्रारंभ हुआ। बच्चों के साथ राम धुन पर झूमे रामेश्वर शर्मा हेमू कालानी स्टेडियम में आयोजित सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में इतनी भीड़ जुटी कि पूरा स्टेडियम रामभक्तों से खचाखच भरा था। कार्यक्रम के दौरान नागरिकों के उत्साह में पूरा स्टेडियम झूम उठा। 11 हजार रामभक्तों का स्वर जब हनुमान चालीसा के रूप में गूँजा तो कण-कण राममय हो गया। विधायक रामेश्वर शर्मा भी राम भजनों पर बच्चों के साथ जमकर नाचते दिखे। विधायक शर्मा ने इस दौरान भजन भी गाए और राम-गाड़ी पर बैठकर आनंद लिया।  रामेश्वर शर्मा हिन्दुओं की प्रखर आवाज हैं – राजेन्द्र शुक्ल, उप-मुख्यमंत्री मप्र कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि – वर्षों के संघर्ष के बाद यह शुभ घड़ी आई है जब हम अपने रामलला को भव्य मंदिर में विराजमान होते देख रहे हैं। इस घड़ी में ऐसा भव्य आयोजन कराकर विधायक रामेश्वर शर्मा ने रामभक्तों की आस्था को और प्रबल किया है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में योगी जी और असम में हेमंत विस्वा सरमा हिन्दुओं की प्रखर आवाज हैं, उसी तरह मध्यप्रदेश में भाई रामेश्वर शर्मा हिन्दुओं की प्रखर आवाज है। उनका हर आयोजन भव्य और अनोखा होता है। इस सफल आयोजन के लिए उन्हें बधाई।  11 हजार रामभक्तों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ प्रशंसनीय – मुख्यमंत्री मोहन यादव। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए कई जन्मों के बाद प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। हम सभी सौभाग्यशाली हैं, ये शुभ घड़ी सामने आई है। इसके लिए गत पांच सौ वर्ष से कई पीढ़ियां खप गईं। आने वाली 22 जनवरी को सुशासन और रामराज का नया इतिहास बनेगा। नये दौर का नया भारत बनेगा। उन्होंने आगे कहा कि हनुमान चालीसा से भक्ति और शक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भगवान राम के अनन्य भक्त हनुमान जी को आधार बनाकर 11 हजार रामभक्तों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ प्रशंसनीय है। हम सभी के लिए भगवान श्रीराम आराध्य हैं। अयोध्या में मंदिर का बनना अखंड भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारतवासी आज समृद्धशाली अतीत को याद कर रहे हैं। सात जन्मों के पुण्योदय से राम काज कर पाए रहा हूँ। – रामेश्वर शर्मा कार्यक्रम में संबोधित करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि – धन्य हैं वो लोग जिन्होंने रामलला के लिए तन, मन, धन और प्राण समर्पित कर दिए। जिनके बलिदानों की कीमत पर आज हमने रामलला का भव्य मंदिर पाया है। मैं स्वयं कारसेवा के लिए गया। उस समय पर भी मेरा यही विचार था कि “यदि रामलला के काम न आए तो बेकार जिंदगानी है” मेरा आज भी यही विचार है। मैं तन-मन-प्राण लगाकर भी राम काज करने को आतुर रहता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि अब कुछ घंटों के अंतराल के बाद हमारी आस्था के केन्द्र मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपनी जन्मभूमि पर वापस लौट रहे हैं। उनके आगमन के हर्ष में पूरा देश सराबोर है। इसी हर्ष के वशीभूत होकर हमने 11 हजार रामभक्तों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया है।  कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि – जब 11 हजार रामभक्तों का स्वर श्री हनुमान चालीसा के रूप में गुंजायमान हुआ तो ऐसा लगा जैसे अयोध्यानाथ स्वयं प्रकट होकर पवनसुत स्तुतियों को आशीष प्रदान कर रहे हों। रामभक्ति में सब ऐसे रमे कि लग रहा था मानो स्टेडियम का कण-कण जीवंत होकर राम धुन गा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि राम जी के अभिनंदन में यह काज करके मेरा जीवन धन्य हो गया। मेरे सात जन्मों के पुण्यों के उदय से  राम जी, हनुमान जी की कृपा से और रामभक्तों की आस्था से यह आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। संत नगर वालों ने संपत्ति छोड़ दी लेकिन धर्म नहीं छोड़ा – रामेश्वर शर्मा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि संत नगर वो भूमि है जिसने धर्म के लिए सर्वस्व त्याग का पाठ सिखाया है। जब 1947 में देश विभाजन हुआ और सिंधी भाईयों से धर्मपरिवर्तन की शर्त रखी तो उन्होंने संपत्ति, घर, द्वार सब छोड़ दिया लेकिन अपना धर्म नहीं छोड़ा। उनकी धर्मनिष्ठा हम सबके लिए प्रेरणा है। इसलिए आज इस आयोजन के लिए संत हिरदाराम नगर की पुण्यभूमि को चुना। धर्मभूमि पर राम काज कर के स्वयं को धन्य पाता हूँ।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा का दिन दिवाली की तरह मनाएं , उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला

Celebrate the day of Ramlala Pran Pratistha like Diwali, Deputy Chief Minister Rajendra Shukla भोपाल ! आज हमारे देश के करोड़ों लोगों का मस्तक गर्व से ऊंचा करने वाला काम हो रहा है, 22 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा ! उप मुख्यमत्री राजेंद्र शुक्ला ने आह्वान किया है कि 22 जनवरी को हर व्यक्ति अपने घर 11 दीपक जलाए। उन्होंने कहा कि उस पावन दिन एक भी ऐसा घर न हो, जहां ग्यारह दीपक न जले। रामनवमी को जिस उत्साह से मनाया जाता है, उसी उत्साह से उन्होने राम मंदिर उद्घाटन के दिन भी उत्सव मनाने का आग्रह किया है। उप मुख्यमंत्री ने किया दीपक जलाने का आह्वानराजेंद्र शुक्ला ने कहा कि दो दिन बाद भव्य मंदिर का उद्घाटन हो रहा है और सारा देश मोदी जी की इस कुशलता का लोहा मान रहा है। उन्होने कहा कि ‘सारे देश में उमंग और उत्साह है। हर घर में भगवान राम की पूजा आराधना हो रही है। सुंंदरकांड के पाठ हो रहे हैं। हनुमान चालीसा के पाठ हो रहे हैं। हमारी सबसे बड़ी ताकत धर्म और अध्यात्म ही है। दुनिया में बहुत से देश हो सकता है हमसे आगे हों लेकिन धर्म और अध्यात्म के मामले में वो हमारे सामने बौने हैं अभी भी। हमारे सामने सारी दुनिया परंपरा और अध्यात्म की ताकत के आगे नतमस्तक होती है। इसीलिए इसका संरक्षण और संवर्धन भी जरुरी है और उस दिशा में रामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण बहुत बड़ा कदम है जो आज हमारे देश के करोड़ों लोगों का मस्तक गर्व से ऊंचा करने वाला काम हो रहा है। 22 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। इस क्षण को हम सबको आगे बढ़ कर उत्साह के साथ मनाने की जरूरत है। 22 जनवरी को कोई भी घर ऐसा न हो जहां पर हम 11 दीपक जलाकर उत्साह न मनाएं।”अयोध्या राम मंदिर उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में सिर्फ दो दिन बाकी है और इसे लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। इसे लेकर अयोध्या में तो तैयारियां जारी ही हैं लेकिन देश भर के अलग अलग स्थानों पर भी ज़ोर शोर से व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिरों में सफाई अभियान चल रहा है और कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। अब उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी आह्वान किया है कि इस दिन को दीपावली की तरह मनाएं और श्रीराम के नाम पर सभी लोग अपने घरों में ग्यारह दीपक जलाएं।

साहू समाज द्वारा हल्दी कुमकुम कार्यक्रम किया

Haldi Kumkum program organized by Sahu Samaj आमला।।साहू समाज की महिलाओं ने हल्दी कुमकुम का कार्यक्रम सम्पन्न किया।आमला नगर की सभी साहू समाज की महिलाएं इस कार्यक्रम में शामिल हुई।कार्यक्रम बोडखी बाजार में मनोहर साहू के भवन में हुआ।जिसमे दुर्गा अनिल साहू,आशा विजय साहू द्वारा सभी महिलाओं को शुभकामनाएं दी और सभी के जीवन में खुशहाली की प्रार्थना कर हल्दी कुमकुम भेट की गई।

हर्ष उल्लास से गौरव दिवस मनाया व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन 

Pride Day celebrated with joy and cultural program organized हरिप्रसाद गोहे आमला । विकास खंड आमला के ग्राम केदार खेड़ा में हर्ष उल्लास से गौरव दिवस मनाया गया । कार्यक्रम में ग्राम के बच्चे युवा साथी बुजुर्ग गण तथा माताओं बहनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया । कार्यक्रम प्रातः 8:00 बजे राम धुन व साथ डिंडी शोभा यात्रा के साथ शुरू हुआ । डिंडी श्री सदाराम हुडे के घर से प्रारंभ होकर ग्राम के हनुमान मंदिर, माता मैया होते हुए नांदया घाट स्थित शिवालय होकर हनुमान मंदिर पर महा आरती के साथ यात्रा संपन्न हुई । गांव में डिंडी का घरोघर पूजन किया गया जिससे पूरा गांव राममय हो गया । तत्पश्चात हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम बहुत ही आकर्षण का केंद्र रहे । बालमानुहार बच्चों ने गीत, नृत्य के जरिए अनेक शिक्षा प्रद एवं महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया । बाद भंडारे का प्रसाद वितरण किया गया । ग्राम के मुख्य अतिथि माननीय पटेल गुरुबक्स जी पुण्डे,श्री हरिश्चंद जी हुडे एवं भीमराज जी हुडे ने सभा को संबोधन कर इनाम वितरण किया । मुख्य अतिथि श्रीमती तारा हुडे तथा कौशल्या हुडे ने भी इनाम वितरण किया । कार्यक्रम का संचालन प्रवीण हुडे ने तथा आभार प्रदर्शन संजय कायस्थ ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में टिया, राधा लुभी चानू अर्पणा सुरुचि पूर्वी एकु तिक्छू ,लक्की ड्रा कांटेस्ट  खुशबू तथा दीक्षा ने संपन्न कराया । कार्यक्रम में शामिल श्री शिवपाल जी हुडे ,चिरोजी ,राजेश उत्तम कमलेश भूषण  लीलाधर ऊदल गौरीशंकर कायस्थ नीलू परसराम दिलीप , अरविंद मारोती सतपूते, राजू कायस्थ केदार कायस्थ रोजगार सहायक हेमंत हुडे ,सरपंच प्रमोद चौकीकर ख्यालीराम मोड़क हरिराम  सतपुते कमल पुंडे  टीकाराम  संतोष कवराई  राजेंद्र धनराज जग्गू बसंत चौकीकर तथा गांव की सभी मातृशक्ति तथा ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग किया ।

श्री राम जन्मोत्सव समिति का महा आयोजन महा प्रभात फेरी मे 40 गांव के प्रभात फेरी मंडल होंगे शामिल 

Prabhat Pheri Mandals of 40 villages will participate in the grand event of Shri Ram Janmotsav Samiti, Maha Prabhat Pheri. हरिप्रसाद गोहे आमला । श्री राम जन्मोत्सव समिति आमला के द्वारा 15 जनवरी सोमवार को महाप्रभात फेरी का आयोजन किया गया है जिसमें लगभग 40 ग्रामों की श्री राम प्रभात फेरी मंडल शामिल होंगे श्री राम जन्मोत्सव समिति की और से मिली जानकारी के अनुसार श्री राम जन्मोत्सव समिति के द्वारा 21 वर्ष में प्रवेश करने पर 21वां वार्षिक उत्सव मनाया जा रहा है जिसमें महाप्रभात फेरी का आयोजन किया गया है महाप्रसाद फेरी श्री कृष्ण मंदिर इतवारी चौक आमला से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न मार्गो से भ्रमण करती हुई भवानी लान खानापुर रोड पर समाप्त होगी समापन के पश्चात सभी प्रभात फेरियो के ध्वजवाहक को का सम्मान किया जाएगा 22 जनवरी सोमवार को अयोध्या में श्री राम प्रभु के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भी श्री राम जन्मोत्सव समिति आमला के द्वारा अमला नगर में जन जागरण अभियान चलाकर सभी को घरों के सामने रंगोली डालने व दीप जलाने हेतु प्रेरित किया जाएगा साथ ही 22 जनवरी को प्रभात फेरी का आयोजन भी श्री राम जन्मोत्सव समिति के द्वारा किया जाएगा

पूजित अक्षत के साथ सामूहिक संगठनों ने दिया राम प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण,

Along with revered Akshat, collective organizations invited Ram Pran Pratishtha, हरिप्रसाद गोहे आमला । 22 जनवरी को अयोध्या में होने जा रहे प्राण-प्रतिष्ठा एवं मंदिर उद्घाटन का निमंत्रण आज आमला नगर में सभी हिंदू संगठनों द्वारा, एयर फोर्स गेट से होते हुए, मेन रोड बोड़खी से आमला गंज के मुख्य मार्गो में प्रत्येक दुकनदारो, व्यापारियों एवं आम-जन को पूजित अक्षत के साथ निमंत्रण दिया गया। साथ ही सभी लोगो से आग्रह किया गया कि 22 जनवरी को सभी उत्सव की तरह मनाये। यह राम मंदिर हम सभी सनातनियो की आस्था एंव भावनाओ का प्रतीक है, हम वह गौरान्वित पीढ़ी है जिन्हे यह अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का समापन प्रभु श्री राम जी के जय घोष के साथ किया गया। जिसमे मुख्य रूप से विश्व हिंदू परिषद जिला अध्यक्ष रोमी बिलगाये,राजु हारोडे़, यमुना यादव,मोहित ठाकुर,बजरंग दल के अंकित वायकर, गोलू सोनी, कमलेश मथलाने, मन सातनकर, विजय यादव, अनुराग डाफने राजा बोड़के एवं मातृ शक्ति की सिंधु देशमुख, माधुरी, नंदनी, शोभा देशमुख, आरती पाटिल,लाजवन्ती नागले आदि माताएं और बहने उपसथित रही।

क्रिसमस डे, का धीरेंद्र कृष्‍ण शास्त्री ने किया विरोध

Dhirendra Krishna Shastri opposed Christmas Day सांता क्लाज बनाने की जगह बच्चों को राम मंदिर लेकर जाओ, धीरेंद्र कृष्‍ण शास्त्री ने कहा उन्होंने ईसाई पूजा पद्धति पर टिप्पणी करते कहा कि जब दो प्रतिशत लोग हमारी रामनवमी नहीं मनाते तो हम 98 प्रतिशत लोग उनका त्योहार क्यों मनाएं। कटनी ! बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोमवार को यहां पुरैनी में बागेश्वर धाम आश्रम का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में उन्होंने ईसाई पूजा पद्धति पर टिप्पणी करते कहा कि जब दो प्रतिशत लोग हमारी रामनवमी नहीं मनाते तो हम 98 प्रतिशत लोग उनका त्योहार क्यों मनाएं। सांता क्लाज को सांता क्रूज़ में भेज दिया जाए। क्रिसमस पर सांता क्लाज बनाने की जगह बच्चों को राम मंदिर लेकर जाओ, तिलक लगाओ, बच्चों को वहां गिफ्ट दो।इससे तुम्हारी पीढ़ी व पूर्वज प्रसन्न होंगे, बालक संस्कारी बनेगा। उन्होंने कहा कि हम किसी मजहब के विरोधी नहीं हैं। हकीकत है कि हम अपने धर्म के कट्टर हैं। 22 जनवरी को भगवान श्रीराम अयोध्या में विराजित हो रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है।

22 जनवरी को होगा राम मंदिर का उद्घाटन, इससे पहले गर्भ गृह की फोटो आई सामने.

The inauguration of the Ram Temple will take place on January 22, and before this, a photo of the sanctum sanctorum has been revealed. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर है। जिसका उद्घाटन आने वाले नए साल यानी साल 2024 में 22 जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। The construction work of the Ram Temple in Ayodhya is in full swing. Its inauguration is set to take place on January 22, 2024, by the Prime Minister of the country, Narendra Modi, in the upcoming new year.” इसके प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारी भी तेज हो चुकी है। मंदिर के लोकार्पण को लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर है। जगह-जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है। इसी बीच मंदिर के गर्भगृह की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई है। बता दें कि इन तस्वीरों को विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और महासचिव चंपत राय ने अपने ऑफिशियल पेज एक्स (ट्वीटर पहले) पर शेयर किया है। महासचिव ने लिखी ये बातेंदरअसल, राम मंदिर ट्रस्च के महासचिव चंपत राय ने फोटोज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “भगवान श्री रामलला का गर्भ गृह स्थान लगभग तैयार हो चुका है। हाल ही में लाइटिंग और फिटिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है। जिसकी कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं।” इस तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दीवार और गुंबद पर शानदार नकाशी की गई है जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। कितना प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा?मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि 95% कार्य पूरा कर लिया गया है और बाकी के कार्य 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि 22 जनवरी को मंदिर परिसर समेत पूरे शहर में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी। जिसका सीधा लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस दौरान भजन, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का भी प्रसारण होगा। इस भव्य समारोह के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाएगी ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े। वहीं, मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पुजारी को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। राम भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्वभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे।

साल 2024 में इन चमत्कारिक पेड़-पौधों को लाएं घर, आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

In the year 2024, bringing these miraculous plants to your home will strengthen your financial situation. वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में लगाई हर चीज में कुछ ना कुछ प्रभाव पड़ता है। यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही हो सकता है। अपने घर और दफ्तर में भूलकर भी कुछ ऐसा न लेकर आएं, जिससे नकारात्मक प्रभाव पड़े। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में लगाई हर चीज में कुछ ना कुछ प्रभाव पड़ता है। यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही हो सकता है। अपने घर और दफ्तर में भूलकर भी कुछ ऐसा न लेकर आएं, जिससे नकारात्मक प्रभाव पड़े। यह आपके आर्थिक, मानसिक और शारीरिक विकास के गलत हो सकता है। वास्तु शास्त्र में कुछ पेड़-पौधे ऐसे बताए गए हैं, जिनको लगाने से आर्थिक विकास में सहायता मिलती है। साल 2024 आने वाला है। आप नए साल के मौके पर इन पेड़-पौधों को अपने घर पर लगाने के लिए ला सकते हैं। रातरानी का पौधा,आप घर में पौधा लगाने के बारे में सोच रहे हैं तो रातरानी का पौधा अच्छा रहेगा। रातरानी के फूल खुशबू देते हैं, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है। यह आपको शांति देता है। ज्योतिष की माने तो परिवार में प्रेम को बढ़ावा मिलता है। चंपा का पौधा,चंपा के पौधे में हल्के-पीले रंग के फूल निकलते हैं। यह घर में बेहद अच्छे लगते हैं। इसके होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं होती है। घर के सदस्यों की सेहत पर सकारात्मक असर रहता है। चमेली का पौधा ,चमेली के पौधे में खूबसूरत फूल निकलते हैं, जिसमें अच्छी महक आती है। वास्तु शास्त्र की माने तो चमेली का पौधा घर में लगाना शुभ होता है। परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास पैदा होता है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

डॉ भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया

अजाक्स संघ के पदाधिकारी महापरिनिर्वाण मनाते हुए ग्यारसपुर में रविदास धाम पर डॉ भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पण किए और बाबा साहब के विचारों पर प्रकाश डाला एवम उनके विचारों पर चलने का निर्णय लिया जिसमें अजाक्स अधिकारी कर्मचारी संघ के तहसील अध्यक्ष देवी सिंह अहिरवार ज्ञान सिंह अहिरवार विक्रम सिंह चिड़ार मनोज कुमार चिडार नंदकिशोर रामकृष्ण सिसोदिया मनोज कुमार प्रदीप कुमार बाबूलाल अहिरवार एवं समाज के वरिष्ठ नागरिक बंधु उपस्थित रहे।

22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी.

इसको लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. वहीं बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी इसको लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है. प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोगों को निमंत्रण भेजा जा रहा है. वहीं खबर है कि कार्यक्रम में मंदिर बनाने वाले श्रमिकों को भी आमंत्रित किया जाएगा.

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