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सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मामले में अब तक छह लोगों को किया गिरफ्तार

हाथरस दो जुलाई को हाथरस में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ में 121 लोगों की हुई मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने सत्संग आयोजक समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि मुख्य आरोपी सेवादार पर एक लाख का इनाम घोषित किया गया है। गुरुवार को पुलिस ने प्रेस कान्फ्रेंस करके ये जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बाबा और बाकी लोगों की भी तलाश की जा रही है। अलीगढ़ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक शलभ माथुर ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पिछले मंगलवार को हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र स्थित फुलरई गांव में आयोजित हरिनारायण साकार विश्वहरि भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मामले में अब तक दो महिला सेवादारों समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले के प्रमुख आरोपी मुख्य सेवादार देव प्रकाश मधुकर पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उसके खिलाफ जल्द ही गैर जमानती वारंट भी जारी किया जाएगा। भोले बाबा से पूछताछ या उसकी गिरफ्तारी की सम्भावना के बारे में पूछने पर माथुर ने कहा, आगे किसी की गिरफ्तारी होगी या नहीं, यह विवेचना पर निर्भर करेगा। जांच में आगे किसी की भूमिका निकलकर आयेगी तो कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ेगी तो जरूर पूछताछ की जाएगी। हाथरस जिले के फुलरई गांव में भोले बाबा द्वारा आयोजित सत्संग में मंगलवार को मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी तथा 31 अन्य घायल हो गये थे। ये है पूरा मामला सत्संग खत्म होने के बाद बाबा की ‘चरण धूलि’ लेने के लिये बड़ी संख्या में लोगों के आगे बढ़ने के दौरान मची भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। घटना में 31 अन्य घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य सेवादार और उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और सभी की तलाश में दबिश शुरू कर दी। इस मामले में भोले बाबा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि भोले बाबा की लोकेशन की भी तलाश की जा रही है। घटना के बाद से भी भोले बाबा फरार चल रहा है। हाथरस पहुंचकर सीएम योगी ने घायलों का जाना था हाल हाथरस हादसे के अगले दिन सीएम योगी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और घटनास्थल का जायजा भी लिया। संवाददाताओं ने उनसे पूछा कि मुकदमे में भोले बाबा को अभियुक्त क्यों नहीं बनाया गया? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जिन लोगों ने कार्यक्रम के लिए अनुमति का आवेदन दिया था, प्रथम दृष्ट्या पहले मुकदमा उनके खिलाफ होता है। उसके बाद फिर उसका दायरा बढ़ता है जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार होंगे, वे इसके दायरे में आएंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस मामले की न्यायिक जांच के लिये बुधवार को तीन सदस्यीय आयोग गठित किया गया है जो दो महीने में जांच पूरी करके रिपोर्ट देगा। इस आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव करेंगे। आयोग के दो अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हेमंत राव और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी भावेश कुमार सिंह शामिल हैं।  

अब वकील एपी सिंह लड़ेंगे सूरजपाल जाटव उर्फ भोले बाबा का केस

हाथरस निर्भया केस में आरोपियों के वकील एपी सिंह अब सूरजपाल जाटव उर्फ भोले बाबा का केस लड़ेंगे। हाथरस में बाबा के सत्संग के दौरान मची भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई। इस पर भोले बाबा के वकील ने दावा किया कि भगदड़ मचने से पहले ही भोले बाबा कार्यक्रम स्थल से चले गए थे। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद हमारे स्वयंसेवक और अनुयायी यह समझाने में असफल रहे कि घटना का कारण क्या था। वकील एपी सिंह ने कहा, सत्संग में भगदड़ के पीछे असामाजिक तत्व थे। यह सब एक योजना के तहत किया गया है और इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, भोले बाबा मंगलवार की भगदड़ की जांच में प्रशासन और पुलिस को सहयोग करने के लिए भी तैयार हैं व उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। एफआईआर में किए गए दावों और प्रारंभिक रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर शीर्ष अदालत के वकील ने कहा, नारायण साकार हरि कभी भी अनुयायियों को अपने पैर नहीं छूने देते। ‘चरण रज का उल्लेख झूठ है। ऐसी हरकत का कोई वीडियो या तस्वीर नहीं है। एपी सिंह ने कहा कि वह बाबा भोले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और सिकंदर राऊ पुलिस थाना क्षेत्र के फुलराई गांव में आयोजित सत्संग के मुख्य आयोजक थे। भगदड़ के संबंध में दर्ज प्राथमिकी में नारायण साकार हरि का आरोपी के रूप में उल्लेख नहीं किया गया है।  

सर्वे और दिशा-निर्देश कमेटी बनाने की मांग, हाथरस सत्संग में भगदड़ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली/हाथरस। उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के बाद मची भगदड़ में कम से कम 121 लोगों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। देश की सबसे बड़ी अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में जांच शुरू करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सर्वे कराने और दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए समिति बनाने की मांग की गई है। उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में इस विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति की जाए। आपको बता दें कि हाथरस जिले के सिकंदराराऊ इलाके में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने ‘मुख्य सेवादार’ और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंगलवार को हुई भगदड़ की इस घटना में 121 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारी ने बताया कि पोरा पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक बृजेश पांडे की तहरीर पर मंगलवार देर रात सिकंदराराऊ थाने में मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर और अन्य सेवादारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास), 126 (2) (गलत तरीके से रोकना), 223 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा), 238 (साक्ष्यों को मिटाना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। तहरीर में कहा गया, ‘‘आयोजकों ने पिछले कार्यक्रमों में पहुंची लाखों लोगों की भीड़ की स्थिति को छिपाते हुए इस बार 80 हजार अनुयायियों के इकट्ठा होने की बात प्रशासन को बताई थी। इसके अनुसार ही सुरक्षा की व्यवस्था की थी लेकिन सत्संग में ढाई लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे जिससे अव्यवस्था पैदा हो गई।’’ आरोप लगाया गया, ‘‘सत्संग के मुख्य प्रवचनकर्ता सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ के प्रवचन के बाद वह अपनी गाड़ी में सवार होकर आयोजन स्थल से निकल रहे थे तभी अनुयायियों ने उनकी गाड़ी के मार्ग से धूल समेटना शुरू कर दिया। इस दौरान लाखों की भीड़ के दबाव के कारण कुछ लोग कुचल गए।’’ इसमें कहा गया, ‘‘भीड़ को आयोजन समिति और सेवादारों ने जबरन रोक दिया जिसकी वजह से भीड़ का दबाव बढ़ता गया और महिलाएं, बच्चे तथा पुरुष उसमें दबते-कुचलते चले गए। आयोजकों और सेवादारों के कारण बड़ी संख्या में निर्दोष लोग मारे गए और गंभीर रूप से घायल हुए।’’ शिकायत में आरोप लगाया गया, ‘‘मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने घायल तथा बेहोश लोगों को अस्पताल पहुंचाया लेकिन आयोजनकर्ताओं तथा सेवादारों ने कोई सहयोग नहीं किया। कार्यक्रम स्थल पर यातायात नियंत्रण संबंधी अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया। आयोजनकर्ताओं ने मौके पर छूटे लोगों के सामान, कपड़े और जूते-चप्पल को उठाकर पास के ही खेत में फेंक कर साक्ष्य मिटाये।’’ हाथरस जिले के फुलरई गांव में ‘भोले बाबा’ द्वारा आयोजित सत्संग में मंगलवार को भगदड़ मच गई थी जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई।

एलआईयू ने कहा- सत्संग में हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया, हालांकि इसके बारे में अफसरों को पहले ही चेताया गया था

Why did Jitu Patwari ask Congress leaders to register FIR in entire MP? Know the reason

हाथरस हाथरस में भोले बाबा के सत्संग में मंगलवार को हुए हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया है। हालांकि इसके बारे में अफसरों को पहले ही चेताया गया था। इसके बाद भी कोई एक्शन न लिया गया और इतना बड़ा हादसा हो गया। सत्संग में जरूरत से ज्यादा पहुंची भीड़ को देखकर एलआईयू ने अफसरों को सौंपी रिपोर्ट में किसी बड़ी घटना होने का अंदेशा जता दिया था, लेकिन इसके बाद भी अफसर मौन साधे बैठे रहे और श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई, जिसमें 107 श्रद्धालुओं की जान चली गई। हादसे के बाद अफसर चेते और मौके लिए रवाना हो गए। वहीं सीएम योगी ने भी घटना को संज्ञान में लेते हुए अफसरों से रिपोर्ट तलब कर ली है। मंगलवार को सिंकरामऊ कोतवाली क्षेत्र के फुलराई गांव में भोले बाबा साकार हरि के सत्संग का आयोजन किया गया था। हालांकि इस सत्संग के आयोजन की जानकारी प्रशासन को थी, लेकिन सत्संग में पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या कुछ और बताई गई थी। लेकिन सत्संग में जरूरत ज्यादा करीब सवा लाख श्रद्धालु पहुंच गए। सत्संग में पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या को देखकर एलआईयू ने किसी बड़ी घटना का अंदेशा जताया और इसकी रिपोर्ट बनाकर अफसरों को सौंप दी। इसके बाद भी अफसरों ने संज्ञान नहीं लिया। इस बीच भीषण गर्मी के चलते सत्संग में पहुंचे श्रद्धालुओं की धीरे-धीरे तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। तीन घंटे तक चले इस सत्संग में देखते ही देखते कई श्रद्धालु बेहोश होकर गिर गए। जैसे ही सत्संग खत्म हुआ तो श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। भगदड़़ में महिलाओं, बच्चों समेत कई लोग दब गए। श्रद्धालुओं के पैरों के नीचे दबकर 107 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। जैसे ही भगदड़ और श्रद्धालुओं की इतनी तादाद में मरने की खबर अफसरों को लगी तो फौरन मौके की तरफ दौड़ पड़े। सीएम योगी ने हाथरस हादसे को संज्ञान में लेते हुए तुरंत अफसरों को मौके पर पहुचंने के निर्देश दिए। साथ ही सीएम योगी ने एडीजी आगरा जोन और अलीगढ़ की कमिश्नर को हादसे की संयुक्त जांच की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। सीएम का आदेश पाते ही चीफ सेक्रेटरी से लेकर एडीजी, कमिश्नर मौके लिए रवाना हो गए।  

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