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भारत ने उनके देश को एक संप्रभु राष्ट्र बनने में मदद की, भारत और ऑस्ट्रिया के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं: चांसलर कार्ल नेहमर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऐतिहासिक ऑस्ट्रिया दौरे पर हैं। उन्होंने बुधवार को ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर से मुलाकात की और द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा की। बैठक से पहले मोदी ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया दोस्ती मजबूत है और आने वाले समय में यह और मजबूत होगी। मोदी दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार शाम मास्को से यहां पहुंचे। यह 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रिया की पहली यात्रा है। वर्ष 1983 में इंदिरा गांधी ने ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। पीएम मोदी के साथ चर्चा के दौरान ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर ने एक बेहद पुरानी बात को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने उनके देश को एक संप्रभु राष्ट्र बनने में मदद की। उन्होंने कहा, “भारत और ऑस्ट्रिया के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। यह विश्वास का रिश्ता है जो 1950 के दशक में शुरू हुआ था। जब बात शांति समझौते की होती है, तो भारत और ऑस्ट्रिया बहुत महत्वपूर्ण और सपोर्टिव पार्टनर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “भारत ने ऑस्ट्रिया की मदद की और 1955 में ऑस्ट्रियाई राज्य संधि के साथ वार्ता सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंची। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच जो बात खास है वह यह कि हम भू-राजनीतिक स्थिति के घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं।” ऑस्ट्रिया की ‘आजादी’ में भारत का बड़ा हाथ, नेहरू ने ऐसे की थी मदद 1955 में भारत ने ऑस्ट्रिया की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह वह समय था जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया पर चार सहयोगी शक्तियों (अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस) का कब्जा था। भारत ने ऑस्ट्रिया की आजादी और तटस्थता की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ऑस्ट्रिया के समर्थन में जोर दिया। भारत ने यह प्रस्ताव रखा कि ऑस्ट्रिया को एक स्वतंत्र और तटस्थ देश के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वह दोनों विश्व युद्धों के दौरान हुए संघर्षों से बाहर रह सके। क्या निकला नतीजा? इसका नतीजा ये निकला कि 1955 में ऑस्ट्रियाई राज्य संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसने ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता और तटस्थता की स्थापना की। इस संधि ने ऑस्ट्रिया को चारों शक्तियों के नियंत्रण से मुक्त कर दिया और उसे एक संप्रभु राज्य बना दिया। भारत की इस पहल और समर्थन के कारण ऑस्ट्रिया ने स्वतंत्रता प्राप्त की और भारत की तरह ही शांति और तटस्थता की नीति अपनाई। क्या है ऑस्ट्रियन राज्य संधि? ऑस्ट्रियन राज्य संधि (Austrian State Treaty) एक महत्वपूर्ण संधि थी जिस पर 15 मई 1955 को वियना में हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि ने ऑस्ट्रिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चार सहयोगी शक्तियों (संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस) के नियंत्रण से मुक्त करा दिया और उसे एक स्वतंत्र, संप्रभु और तटस्थ राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। इससे ऑस्ट्रिया को पूर्ण स्वतंत्रता और संप्रभुता प्राप्त हुई, और सभी विदेशी सेनाओं को ऑस्ट्रियाई क्षेत्र से हटने का आदेश दिया गया। ऑस्ट्रिया ने अपनी स्थायी तटस्थता की घोषणा की, जिसका अर्थ है कि वह किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा और किसी भी सैन्य संघर्ष में भाग नहीं लेगा। ऑस्ट्रिया पर लगाए गए सभी प्रतिबंध और नियंत्रण हटा दिए गए, जिससे ऑस्ट्रियाई सरकार को अपने मामलों का स्वायत्त रूप से संचालन करने की अनुमति मिली। ऑस्ट्रिया ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए कुछ आर्थिक जिम्मेदारियों को स्वीकार किया और पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाए। यह संधि ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण थी और उसने देश को शांति और तटस्थता की नीति अपनाने में मदद की। ऑस्ट्रियन राज्य संधि के कारण, ऑस्ट्रिया एक तटस्थ राष्ट्र के रूप में विकसित हुआ और उसने अपने स्वतंत्रता और संप्रभुता को सुनिश्चित किया। अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस का ऑस्ट्रिया पर कब्जा क्यों था? संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया पर कब्जा किया था। इसका मुख्य कारण था कि ऑस्ट्रिया, नाजी जर्मनी का हिस्सा बन चुका था जब 1938 में एडोल्फ हिटलर ने ऑस्ट्रिया का एन्स्क्लुस (Anschluss) किया था। यहां एन्स्क्लुस का मतलब 1938 में ऑस्ट्रिया के विलय से है। यानी हिटलर ने ऑस्ट्रिया पर खुद का शासन स्थापित कर दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में, मित्र राष्ट्रों (Allied Powers) ने नाजी जर्मनी यानी हिटलर को हराया और यूरोप के पुनर्निर्माण की योजना बनाई। इस प्रक्रिया में, उन्होंने जर्मनी और उसके अधीनस्थ क्षेत्रों को विभाजित किया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की नाजी सत्ता का पुनरुत्थान न हो सके और स्थिरता बनी रहे। इस विभाजन के हिस्से के रूप में, ऑस्ट्रिया को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया और इन क्षेत्रों का नियंत्रण संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस को सौंपा गया। यह कब्जा अस्थायी था और इसका उद्देश्य ऑस्ट्रिया को नाजी शासन से मुक्त करना और देश में स्थायी शांति और लोकतंत्र की स्थापना करना था। इस प्रकार, इन चार सहयोगी शक्तियों ने मिलकर ऑस्ट्रिया के प्रशासन और पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी संभाली, ताकि देश को स्वतंत्र और तटस्थ राज्य के रूप में पुनः स्थापित किया जा सके।  

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित, भारत के लोगों को किया इसे समर्पित

मॉस्को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल द फर्स्ट-कॉल’ से सम्मानित किया गया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में आयोजित एक समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश का सर्वोच्च राजकीय सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री को रूस और भारत के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के साथ रूसी और भारतीय लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को विकसित करने में उत्कृष्ट कार्यों के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। समारोह की शुरुआत में पुतिन ने कहा, “प्रिय प्रधानमंत्री जी, प्रिय मित्र, आपको ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉल’ से सम्मानित करना हमारे देश और यहां के लोगों के बीच मित्रता और आपसी समझ को मजबूत करने में आपके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आपके प्रति रूस की कृतज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आपने हमेशा हमारे देश के साथ संपर्क बढ़ाने की वकालत की है, यहां तक ​​कि जब आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी आपने रूसी क्षेत्रों, इस मामले में आस्ट्राखान क्षेत्र के साथ सिस्टर-सिटी संबंध स्थापित करने की पहल की थी। रूसी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में उल्लेख किया कि 10 वर्षों तक भारत के प्रधानमंत्री होने के नाते, आपने वास्तव में यह कोशिश की कि रूस-भारत संबंधों विशेषकर रणनीतिक साझेदारी बेहतर हो और आपने इसे हासिल कर लिया है। आपके सहयोग से, व्यापार, आर्थिक और सैन्य-तकनीकी क्षेत्रों, परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा, उच्च प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष में सबसे बड़ी रूसी-भारतीय परियोजनाएं सफलतापूर्वक सुचारू रूप से चलाई जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में रूस-भारत सहयोग के लिए एक स्थिर आधार निर्माण करने में आपके योगदान को कम करके आंकना मुश्किल है। बता दें कि इस ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉल’ सम्मान के लिए जो चीजें दी जाती हैं, उसमें एक बैज, एक स्टार, एक ऑर्डर चेन और एक ऑर्डर रिबन होता है। वहीं, युद्ध क्षेत्र में पराक्रम दिखाने वाले को दिए जाने वाले ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉल’ सम्मान के तहत एक बैज और स्टार के साथ तलवारें दी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को ग्रहण करने के बाद कहा, “ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल प्राप्त करने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं इसे भारत के लोगों को समर्पित करता हूं।” इस सम्मान की स्थापना ज़ार पीटर-एक ने 1699 के आसपास की थी और यह रूस के सबसे पुराने पुरस्कारों में से एक है। इसे 1918 में समाप्त कर दिया गया था और 1998 में रूस के राष्ट्रपति के आदेश पर फिर से इसे बहाल किया गया था। ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉलेड’ को प्रमुख सरकारी और सार्वजनिक हस्तियों, सैन्य नेताओं, विज्ञान, संस्कृति, कला और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के उत्कृष्ट योगदान और उनकी असाधारण सेवाओं के लिए दिया जाता है। जो रूस की समृद्धि, महानता और गौरव में योगदान करते हैं। साथ ही जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को सुनिश्चित करते हैं। यह मॉस्को के साथ संबंधों को विकसित करने में दिए गए उत्कृष्ट योगदान के लिए विदेशी सरकारों के प्रमुखों और नेताओं को भी दिया जाता है।

22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 और 9 जुलाई को रूस जायेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक रूसी दौरे का ऐलान हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 और 9 जुलाई को रूस की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे, जहां वह 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जहां इन दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों की संपूर्ण समीक्षा की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि रूस की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद मोदी ऑस्ट्रिया जाएंगे, जो 41 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रिया की पहली यात्रा होगी। करीब पांच साल में मोदी की यह पहली रूस यात्रा होगी। रूस की उनकी पिछली यात्रा 2019 में हुई थी जब उन्होंने व्लादिवोस्तोक में एक आर्थिक सम्मेलन में शिरकत की थी। मोदी की पुतिन के साथ आगामी वार्ता में कोई भी विषय अछूता नहीं होगा: क्रेमलिन इससे पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच संबंधों की “अत्यंत भरोसेमंद प्रकृति” को देखते हुए, दोनों नेताओं के बीच यहां होने वाली मुलाकात में कोई भी विषय उनके लिए अछूता नहीं होगा। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टीएएसएस ने पेस्कोव के हवाले से बताया कि पुतिन और मोदी अपनी बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा, व्यापार तथा एजेंडे के अन्य सभी विषयों पर चर्चा करेंगे। पुतिन और मोदी के बीच वार्ता में किन विषयों पर चर्चा होगी, इस बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए क्रेमलिन अधिकारी ने कहा, “हम (रूस और भारत) संयुक्त रूप से समन्वय प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं, इसलिए क्षेत्रीय मामले, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा हमेशा एजेंडे में सबसे ऊपर रहता है। इसके अलावा, निश्चित रूप से, हमारा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संपर्क हमेशा एक केंद्र बिंदु होता है।” प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को “बहुत महत्वपूर्ण” बताते हुए अधिकारी ने कहा कि मॉस्को और नयी दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग विकसित करने की “पारस्परिक राजनीतिक इच्छाशक्ति” है। पेस्कोव ने कहा, “राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच संबंधों की बहुत भरोसेमंद प्रकृति को देखते हुए, हम उम्मीद कर सकते हैं कि एजेंडे में शामिल सभी मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान होगा और मुद्दे कई हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, ‘जब यह बालक बुद्धि पूरी तरह सवार हो जाती है तो सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर मंगलवार को इशारों-इशारों में जमकर तंज कसे। उन्होंने कहा कि बालक बुद्धि में न बोलने का ठिकाना होता है और न ही व्यवहार का कोई ठिकाना होता है। पीएम मोदी ने कहा, ‘जब यह बालक बुद्धि पूरी तरह सवार हो जाती है तो सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं। यह बालक बुद्धि अपनी सीमाएं खो देती है और सदन में बैठकर आंखें मारने लगते हैं।’ नेता विपक्ष को लेकर उन्होंने कहा कि इनकी सच्चाई अब पूरा देश समझ गया है। आज देश इनसे कह रहा है कि तुमसे ना हो पाएगा।   नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं की बयानबाजी ने शोले फिल्म को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, ‘शोले में एक मौसी जी थीं… तीसरी बार ही तो हारे हैं, पर मौसी मोरल विक्ट्री तो है ना। अरे मौसी 13 राज्यों में 0 सीटें आई हैं, पर हीरो तो है ना। अरे पार्टी की लुटिया तो डुबोई है, पार्टी अभी भी सांसें तो ले रही है।’ उन्होंने कहा कि 16 राज्यों में कांग्रेस जहां अकेले लड़ी, वहां उसका वोट शेयर गिर चुका है। गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश, तीन राज्यों में जहां कांग्रेस अपने दम पर लड़ी और वहां 64 में से सिर्फ 2 सीट जीत पाई है। इसका साफ मतलब है कि इस चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह परजीवी बन चुकी और अपने सहयोगी दलों के कंधे पर चढ़कर सीटों का आंकड़ा बढ़ाया है।     ‘कांग्रेस में छोटे बच्चे का मन बहलाने का चल रहा काम’ पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम दिन-रात हिंदुस्तान के नागरिकों के मन में ये प्रस्थापित करने की कोशिश कर रहा है कि उन्होंने हमें हरा दिया है। ऐसा लग रहा है कि आजकल कांग्रेस में छोटे बच्चे का मन बहलाने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे एक किस्सा याद आ रहा है… 99 मार्क्स लेकर एक बालक घमंड में घूम रहा था और सबको दिखाता था कि देखो कितने मार्क्स आए हैं। लोग भी 99 सुनकर उसे शाबाशी देते थे और हौंसला बढ़ाते थे। फिर उनके टीचर ने बताया कि ये 100 में से नहीं 543 में से 99 लाया है। अब उस बालक बुद्धि को कौन समझाए कि तुमने फेल होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है।’  

इटली में PM मोदी ने जापानी पीएम के साथ की बैठक, चर्चा के दौरान बुलेट ट्रेन परियोजना की रफ्तार बढ़ाने का लिया संकल्प

रोम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इटली की यात्रा पूरी कर भारत वापस आ चुके हैं। उनकी यह यात्रा कई मायने में खास रही है। इस दौरान उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। उन्होंने जापान को यह भरोसा दिलाया कि अपने तीसरे कार्यकाल में भी वह जापान के साथ संबंधों को प्राथमिकता देते रहेंगे। केंद्र सरकार ने एक बयान में कहा कि भारत और जापान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, जिसमें ऐतिहासिक मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना भी शामिल है। बुलेट ट्रेन परियोजना में पांच साल की देरी होने की खबर के बीच जापानी अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि सभी खंडों पर काम शुरू हो गया है और वे प्रगति से संतुष्ट हैं। जापान के अनुसार, परियोजना को लेकर सभी अनिश्चितताएं दूर हो गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी और किशिदा ने 2022-2027 के बीच में भारत में 5 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश के लक्ष्य को अंजाम तक पहुंचाने की दिशा में बात की। उन्होंने कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी अपने 10वें वर्ष में है और उन्होंवे संबंधों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। आपको बता दें कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शनिवार को दक्षिणी इटली के अपुलिया क्षेत्र में जी-7 शिखर सम्मेलन का आधिकारिक रूप से समापन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी वार्ता का जिक्र किया। दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। सात औद्योगिक देशों के समूह की अध्यक्षता करने वाले देश के रूप में इटली ने भागीदार देशों अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जापान, जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं की मेजबानी की।  

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों पर बोले मोदी, आतंकवाद-विरोधी क्षमताओं की पूरी तरह से तैनाती का आग्रह किया, न छोड़ें कोई कसर

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य अधिकारी भी शामिल रहे। जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में कई आतंकी हमले हुए हैं। आतंकवादियों ने पिछले चार दिनों में रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में चार स्थानों पर हमले किए हैं, जिसमें नौ तीर्थयात्रियों की मौत और एक सीआरपीएफ जवान शहीद हो गया। वहीं सात सुरक्षाकर्मी और कई अन्य घायल हो गए। गुरुवार की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा संबंधी स्थिति की पूरी जानकारी दी गई। उन्हें आतंकवाद विरोधी प्रयासों से भी अवगत कराया गया। आतंक के खिलाफ नहीं रहे कोई कसर: पीएम मोदी बैठक के दौरान, मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों से भारत की आतंकवाद-विरोधी क्षमताओं की पूरी तरह से तैनाती का आग्रह किया। उन्होंने सुरक्षा बलों की तैनाती और आतंकवाद विरोधी अभियानों के बारे में गृह मंत्री अमित शाह से भी बात की। उल्लेखनीय है कि कठुआ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी भी मारे गए और उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुबह डोडा जिले में गंडोह के कोटा टॉप, चट्टागल्ला और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान फिर से शुरू किया, जहां मंगलवार और बुधवार को आतंकवादियों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मियों सहित सात सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने जारी किया स्केच पुलिस ने बुधवार को दो हमलों में शामिल चार आतंकवादियों के स्केच जारी किए थे और उनकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 20 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। इससे पहले पुलिस ने रविवार को रियासी जिले में तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हुए हमले में शामिल एक आतंकवादी पर 20 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया था और उसका स्केच भी जारी किया था। इस हमले में नौ लोग मारे गए थे और 41 घायल हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि रियासी और राजौरी जिले में तलाशी अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी के स्केच से मिलते-जुलते चेहरे वाले एक शख्स को दोपहर में रियासी में एक बस से हिरासत में लिया गया और उसे पूछताछ के लिए ले जाया गया। उन्होंने बताया कि राजौरी के नौशेरा और पास के पुंछ में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। आतंकी खतरे के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद कठुआ, सांबा और जम्मू जिलों में भी सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है। कठुआ में मंगलवार रात से शुरू हुई और 15 घंटे से अधिक समय तक चली भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था। इस अभियान में सीआरपीएफ के एक जवान की भी मौत हो गई थी, जबकि एक नागरिक घायल हो गया। पुलिस ने बुधवार को एक परामर्श जारी कर जम्मू क्षेत्र के निवासियों से संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की आवाजाही के बारे में सतर्क रहने का आग्रह किया था। राजौरी और जम्मू जिलों के कुछ हिस्सों में आतंकी खतरे की आशंका जताने वाली खुफिया सूचनाओं के बाद यह परामर्श जारी किया गया।  

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