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MP : उपचुनाव हुए, अब मध्यप्रदेश में 7% महंगी हो सकती है बिजली

भोपाल. मप्र सरकार बदलने के बाद से अटका हुआ बिजली का नया टैरिफ लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। सात प्रतिशत तक दरें बढ़ाई जा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है उप चुनाव हो जाना। दरअसल, कोरोना काल के अलावा उपचुनाव होने के कारण सरकार भी नया टैरिफ लागू करने के पक्ष में नहीं बताई जा रही थी। सात महीने तक मामला टलता रहा, सुनवाई भी नहीं हुई। अब उपचुनाव में सकारात्मक माहौल देख इस पर जल्द फैसला हो सकता है जो बिजली उपभोक्ताओं के लिए भार बढ़ाने वाला होगा। वजह यह है कि सरकार आर्थिक संकट से गुजर रही है और इस साल आठ महीने में मप्र की तीनों बिजली कंपनियों को दो हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। पाॅवर मैनेजमेंट कम्पनी की ओर से तैयार कराई जा रही टैरिफ याचिका में इस बार औसतन सात प्रतिशत तक बिजली की दरें बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए प्रदेश की तीनों वितरण कम्पनियों से लेखा-जोखा मांगा गया है। उन्हें 30 नवम्बर तक विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर करना है। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 में बिजली कम्पनियों ने औसत 5.25 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस पर निर्णय नहीं हो पाया। लगभग तीन हजार करोड़ रुपए के घाटा की भरपाई के लिए इस बार बिजली बिलों के दामों में बढ़ोत्तरी होना तय माना जा रहा है। पाॅवर मैनेजमेंट कम्पनी की ओर से अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए टैरिफ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें बीते सालों में हुए नुकसान को जोड़कर बिजली की कीमत तय करने की तैयारी है। तीन हजार रुपए से अधिक घाटे की भरपाई के लिए अलग-अलग श्रेणी में चार से 12 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की तैयारी है। औसतन ये सात प्रतिशत के आसपास रहेगी। अभी ये हैं मौजूदा बिजली की दरें 0-50 यूनिट-3.85 रुपए प्रति यूनिट 51-150 यूनिट-4.95 रुपए प्रति यूनिट 151-300 यूनिट-6.30 रुपए प्रति यूनिट 300 यूनिट से ऊपर 6.50 रुपए प्रति यूनि मप्र विद्युत नियामक आयोग में 30 नवम्बर तक याचिका पेश करने के लिए मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों वितरण कंपनियों से आय-व्यय का लेखा-जोखा मांगा है। बिजली कंपनियों ने वर्ष 2019—20 में 5575 करोड़ यूनिट बिजली बेची थी। वहीं 2020—21 में 6 हजार करोड़ यूनिट बिजली बेचने का लक्ष्य रखा है। चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त तक कंपनी 2050 करोड़ यूनिट बिजली बेच पाई है। उसे उम्मीद है कि रबी सीजन में डिमांड बढ़ने पर छह हजार करोड़ यूनिट का लक्ष्य प्राप्त हो जाएगा। दो हजार करोड़ का है घाटा अगले वित्तीय वर्ष में 6500 करोड़ यूनिट के लगभग डिमांड बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में बिजली की उपलब्धता और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिजली के कीमतों में बढ़ोत्तरी करना होगा। चालू वित्तीय वर्ष में बिजली कम्पनियों ने 39332 करोड़ रुपए के आय और 41332 करोड़ रुपए व्यय का आंकलन किया था। इसी दो हजार करोड़ रुपए की भरपाई के लिए कीमतों में 5.25 प्रतिशत की वृद्धि की अनुमति मांगी थी, जो नहीं मिल पाया। आय-व्यय के आंकलन पर तय होगी दर मप्र पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी के राजस्व महाप्रबंधक फिरोज मेश्राम ने बताया कि बिजली की कीमत तय करने का निर्णय मप्र विद्युत नियामक आयोग करती है। कम्पनी अपनी वार्षिक जरूरत के अनुसार आय-व्यय का आंकलन कर दर बढ़ाने की अनुमति मांगती है। नया टैरिफ याचिका बनाने में पिछले साल के गैप को कम करने के लिए दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया जाएगा।

MP : 7 माह में 10500 कराेड़ का कर्ज लिया, प्रदेश के हर नागरिक पर 34 हजार का कर्ज

भोपाल। कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। शिवराज सरकार 30 दिन में चौथी बार बुधवार को बाजार से 1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। इससे पहले 7, 13 और 21 अक्टूबर को सरकार बाजार से 1-1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। शिवराज सरकार अपने 7 माह के कार्यकाल में 9वीं बार कर्ज ले रही है। वित्त विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 4 अक्टूबर को 20 साल के लिए एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने की प्रक्रिया पूरी की गई है। सरकार के इस फैसले पर पूर्व मंत्री जीतू पटवारी से सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि “इससे पता चल रहा है कि हमारा प्रदेश कहां जा रहा है। सरकार ने हर नागरिक पर 34 हजार रुपए का कर्ज लाद दिया है।” पटवारी ने कहा कि चुनाव के दाैरान दाेनाें पार्टियों ने अपनी-अपनी बातें रखीं। अब जनादेश पेटियों के भीतर है। जो निर्णय होगा, हमें मंजूर होगा। आशा है, लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ आपका मत रहा होगा। मप्र में आर्थिक स्थिति ऐसी है कि शिवराज सिंह चौहान ने एक हजार करोड़ रुपए का फिर से कर्ज लिया है। मैंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पिछले 7 महीने में 9 बार कर्ज लिया, अब तक 10500 कराेड़ रुपए का कर्ज लिया है। पिछले 15 साल के इनके कार्यकाल की बात करें, तो शिवराज सरकार ने 2 लाख 5 हजार 993 करोड़ रुपए कर्ज लिया है। ऐसे में प्रदेश के हर नागरिक पर सरकार ने 34 हजार रुपए का कर्ज लाद दिया है। बजट का 15 फीसदी पैसा ब्याज में जा रहा यदि ऐसे ही आर्थिक हालात बदतर होते रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का क्या होगा। आपको यह पता होना चाहिए कि हम इस कर्ज का करीब 16 हजार करोड़ प्रतिवर्ष ब्याज देते हैं। बजट का 15 फीसदी से ज्यादा हमारा ब्याज पर जाता है। मप्र में 40 साल के नीचे वाले युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। बच्चे को मुश्किलों से पढ़ाने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर माता-पिता की मानसिक हालत बदतर हो रही है। मप्र में बेरोजगारी और किसानों की समस्या को लेकर रोज आत्महत्याएं हो रही हैं। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख सरकारी नौकरियां खाली पड़ी हैं। छह महीने से स्कूल शिक्षा विभाग, नगरीय निकायों में वेतन नहीं बंटा है। ये लोग पेट्रोल डीजल में टैक्स बढ़ाकर इस भार को कम करने की कोशिश में हैं। विकास कार्यों के लिए कर्ज लिया गया मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि सरकार की माली हालत पहले से ही खराब थी। कोरोना के कारण सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है। जीएसटी में लगातार कमी के कारण सरकार की आर्थिक संकट की स्थिति में है। सरकार पर जनवरी से अब तक 22 हजार करोड़ का कर्ज बढ़ा है। केंद्र से 4440 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की पात्रता मिली है। नोटिफिकेशन के मुताबिक सरकार विकास कार्यों के लिए यह कर्ज लिया है। ब्याज पर 15 हजार करोड़ रुपए खर्च मध्य प्रदेश सरकार सिर्फ ब्याज पर ही करीब 15 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही हैl 2017 में यह ब्याज 12695 करोड़ों रुपए था, जो 2018 में 14432 करोड रुपए हो गयाl जबकि 2019 में 13751 करोड रुपए तथा 2020 में यह बढ़कर 16460 करोड़ रुपए होने की उम्मीद हैl

MP : भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के कॉलेज पर चला बुलडोजर

भोपाल। भोपाल के इकबाल मैदान में फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ भीड़ जुटाने वाले कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कसा है। एक दिन पहले पुलिस ने विधायक आरिफ मसूद समेत 7 के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। अगले ही दिन प्रशासन ने बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बनी बिल्डिंग के एक हिस्से पर बुलडोजर चला दिया गया। यहां विधायक आरिफ मसूद का कॉलेज भी बना हुआ है। तीन घंटे में दो बार यहां बुलडोजर चलाकर अलग-अलग जगह स्थित सीढ़ी, बाथरूम आदि तोड़े गए हैं। आरिफ मसूद बोले- किसी धर्म के बारे में बुरा नहीं बोला इस बीच कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि मेरा प्रोटेस्ट शांतिपूर्ण था। मैंने कभी किसी के धर्म के बारे में बुरा नहीं बोला। मेरे धर्म के बारे में जब बुरा बोला गया, उस पर रिएक्ट करने का मुझे संवैधानिक अधिकार है। सरकार मुझ पर दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि मेरे कॉलेज का भी कुछ हिस्सा तोड़ा गया है।

MP : उपचुनाव नतीजे के बाद शिवराज सरकार बचने के पूरे आसार, फिर बीजेपी खेमे में क्यों है धुकधुकी ?

भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर हुए उपचुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस जीत के दावे कर रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है है कि शिवराज सरकार को कोई खतरा नहीं नहीं है। इसके बाद भी बीजेपी खेमे में क्यों खलबली मची है ? बीजेपी नेता जीत के प्रति को आश्वस्त नहीं हैं ? भाजपा ने गुरुवार को लंच के बहाने 10 नवंबर को आने वाले उपचुनाव के परिणामों को लेकर होटल जहांनुमा रिट्रीट (लक्जरी रिजॉर्ट) में मंथन किया गया। होटल पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान जब लंच को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा- ‘ कार्यकर्ताओं के साथ फुरसत से बैठेंगे, खाना खाएंगे और गप्प भी करेंगे। इस लंच में भाजपा प्रबंध समिति ने चुनाव प्रभारियों से एक-एक सीट का फीडबैक लिया है। यहां पर हर सीट की जीत-हार की गणित बिठाई गई है। इसमें शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेता, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत समेत शिवराज सरकार के तमाम मंत्री और संगठन पदाधिकारी शामिल हुए। इससे पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान सुबह संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने शारदा विहार पहुंचे थे। सूत्र बताते हैं कि संघ प्रमुख से मुलाकात में उपचुनाव और उसके परिणामों पर चर्चा हुई है। होटल में हुई बैठक में मीडिया की एंट्री नहीं दी गई। न ही इस बैठक की तस्वीरें पार्टी की तरफ से जारी की गईं। इससे जाहिर होता है कि बैठक में लंच से परे चुनाव परिणामों पर गहन मंत्रणा हुई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि हम हमेशा सुकून में रहते हैं, परिणामों की कोई चिंता नहीं है। कार्यकर्ताओं के चेहरे बता रहे हैं कि 10 नवंबर को नतीजे क्या आने वाले हैं। भाजपा किसी तरह की टेंशन में नहीं है। हमारे कार्यकर्ताओं ने मेहनत की है, आज उन्हें संगठन की तरफ से लंच दिया गया है। भाजपा को सबसे बड़ी चिंता 9 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को सरकार बरकरार रखने के लिए 9 सीटों की ही जरूरत है। जिन 28 सीटों पर चुनाव हुए, उनमें से 9 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2018 के चुनाव में भाजपा को इन सीटों पर मुंह की खानी पड़ी थी और दलित वर्ग पर पकड़ भी कमजोर हो गई थी। वर्ष 2000 से 2015 तक संघ ने इस वर्ग के बीच में मेहनत की थी और कांग्रेस से दूर कर दलित वर्ग का पार्टी से जोड़ने का किया था। लेकिन शिवराज सरकार इसे संभाल नहीं सकी, यही वजह है कि यह वर्ग कांग्रेस की तरफ झुक गया था।

MP : ऑनलाइन क्लास के बाद के बाद 5वीं में पढ़ने वाले इंजीनियर के बेटे ने सुसाइड किया

भोपाल। ऑनलाइन क्लास अटेंड करने के बाद 11 साल के छात्र ने बाथरूम में जाकर टाई से फांसी लगा ली। घटना थाटीपुर थाना क्षेत्र की दर्पण कॉलोनी में बुधवार शाम की है। घटना का पता उस समय चला जब परिजन उसे तलाशते हुए बाथरूम में पहुंचे। मामले का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। निजी कंपनी में इंजीनियर अलकेश सक्सेना का 11 वर्षीय बेटा सार्थक बुधवार शाम को घर पर ही ऑनलाइन क्लास अटेंड कर रहा था। इसके बाद बाथरूम चला गया। जब काफी देर बाद भी वह बाहर नहीं आया तो परिजन उसे तलाशते हुए कमरे में पहुंचे, लेकिन कमरा खाली था। कमरा खाली देखकर परिजन उसे तलाशते हुए बाथरूम में पहुंचे तो वह स्कूल की टाई से फांसी लगा चुका था। तत्काल अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मामले का पता चलते ही परिजन ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि उसने खिड़की से टाई बांधी और उससे लटक गया। ऑनलाइन क्लासेस में भी कुछ गड़बड़ होने की बात सामने आ रही है। वह थाटीपुर चौराहे के एक निजी स्कूल में पढ़ता था। 6 दिन से टाई के साथ खेल रहा था बच्चा मृतक सार्थक के परिजन से पता लगा है कि जिस टाई से उसने फांसी लगाई है उसे पिछले 6 दिन से वह रोज बांधना सीख रहा था। अभी हाल ही उसे टाई लगाने का शौक चढ़ा था। परिजन समझ नहीं पाए कि टाई उसकी मौत का कारण बनेगी।

MP : हाईकोर्ट का आदेश : कोरोना जब तक रहेगा… ट्यूशन फीस ही लेंगे निजी स्कूल

भोपाल। मप्र हाईकोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए कोरोना खत्म होने तक निजी स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस ही लेने का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी मद में फीस नहीं वसूलेंगे। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्कूलों के शिक्षकों सहित अन्य स्टाफ को भी राहत दी है। बेंच ने कहा है कि शिक्षकों व स्टाफ का वेतन 20 फीसदी से ज्यादा नहीं काटा जा सकेगा। इसके अलावा महामारी समाप्त होने के बाद काटी की गई सैलरी भी शिक्षकों को देना होगी। कोर्ट ने 10 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने के बाद 6 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह है मामला कोरोना संक्रमण के बीच निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस ली जा रही थी। इसे लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपाण्डे, रजत भार्गव की ओर से जनहित याचिका दायर की गई। इसमें बताया गया कि हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ और और जबलपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फीस वसूली को लेकर दो अलग-अलग आदेश दिए हैं। इसके चलते विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई निजी अभी भी मनमानी फीस वसूल रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई पर तर्क याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिए कि प्रदेश भर में निजी स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं। बावजूद, भारी भरकम ट्यूशन फीस अभिभावकों से वसूल रहे हैं, जबकि ऑनलाइन क्लास से छात्र-छात्राओं की आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त जोर पड़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं, अन्य याचिका में भौतिक क्लास की अनुमति पर ऑनलाइन क्लास संचालन को गलत ठहराया गया था। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 6 अक्टूबर को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया। फैसले के पक्ष में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन एसोसिएशन ऑफ अन -एडेड प्राइवेट स्कूल्ज मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अनुपम चौकसे ने बताया ही हमारी एसोसिएशन के सभी सदस्य प्रारम्भ से ही केवल ट्यूशन फीस ही ले रहे हैं। सभी विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा की माननीय उच्च न्यायालय के अपने फैसले में सभी पक्षों का ख्याल रखा है, किन्तु बकाया फीस (जो लॉक डाउन की अवधी में नहीं ली जा रही है ) कब और कैसे ली जावेगी इस बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं दिए हैं। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विनी राज मोदी ने सभी पालकों से अपील करते हुए आशा व्यक्त की कि माननीय उच्च न्यायालय के इस बहुप्रतिक्षित निर्णय के बाद सभी पालक स्कूल फ़ीस जमा करने हेतु आगे आएंगे। स्कूल एवं पालकों के मध्य चल रहा गतिरोध अब समाप्त होंगे। साथ ही उनका कार्य सुचारु रूप से चल सकेगा ।

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