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जानें … दुनिया की सबसे तेज खुफिया एजेंसी मोसाद के सबसे चर्चित मिशन

नई दिल्ली। मोसाद को दुनिया की एक सबसे तेज खुफिया एजेंसी माना जाता है। ऐसी खुफिया एजेंसी जो अपना निशाना नहीं चूकती है। मोसाद ने कई ऐसे मिशन को अंजाम दिया है जिसको सोचकर इंसान सिहर जाए। मोसाद का सफलता का ट्रैक रेकॉर्ड काफी प्रेरक रहा है। यही कारण है कि अमेरिका और भारत समेत दुनिया की कई खुफिया एजेंसिया मोसाद के साथ मिलकर ट्रेनिंग और कई सीक्रेट मिशन्स को अंजाम देती हैं। भारत तो अपनी खुफिया एजेंसी में काम करने वाले अधिकारियों की ट्रेनिंग तक इजरायली खुफिया एजेंसी के साथ करवाता है। ऑपरेशन थंडरबोल्ट ने दुनिया में दिखाया मोसाद का दम 27 जून 1976 को जब इजरायली यात्रियों से भरी फ्रांस के एक यात्री विमान को अरब के आतंकियों ने अपहरण कर लिया। तब मोसाद ने अपनी ताकत और बुद्धिमानी के दम पर हजारों किलोमीटर दूर स्थित देश से अपने 94 नागरिकों को सुरक्षित वापस निकाल लिया। युगांडा के एंतेबे हवाई अड्डे पर मोसाद के ऑपरेशन को आज भी पूरी दुनिया में सबसे सफल हॉइजैकर्स मिशन माना जाता है। इस ऑपरेशन में वर्तमान में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई जोनाथन नेतन्याहू भी शामिल हुए थे। हालांकि, उनकी ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। जब मोसाद ने रूसी मिग-21 लड़ाकू विमान को चुराया 60 के दशक में अगर कोई लड़ाकू विमान सबसे अडवांस्ड और फास्ट था तो वह मिग-21 विमान था। अगर यह कहें कि अमेरिका भी इससे डरता था तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। इस विमान को पाने में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए फी असफल हो गई थी, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी मोसाद को दी गई। पहली कोशिश में पकड़े जाने के बाद दिसंबर 1962 में मोसाद के एक एजेंट को मिस्र में फांसी दे दी गई। मोसाद ने दूसरी कोशिश इराक में की, लेकिन यह प्रयास भी असफल रहा। 1964 में मोसाद की महिला एजेंट ने एक इराकी पायलट को इस विमान के साथ इजरायल लाने के लिए मना लिया था। म्यूनिख ओलिंपिक में इजरायली टीम के हत्यारों को ढूंढ-ढूंढकर मारा मोसाद ने 1972 में हुए म्यूनिख ओलिंपिक में इजरायली टीम के 11 खिलाड़ियों के हत्यारों को कई देशों में ढूंढ-ढूंढकर मौत के घाट उतार दिया। इजरायली खिलाड़ियों की हत्या का आरोप ब्लैक सेप्टेंबर और फिलीस्तीन लिबरेशन अर्गनाइजेशन पर लगा था। मोसाद की लिस्ट में 11 आतंकी थे, जो म्यूनिख में इजरायली खिलाड़ियों की हत्या के बाद अलग-अलग देशों में जाकर छिप गए थे। लेकिन, मोसाद ने 10 साल के ऑपरेशन में सभी आतंकियों को खोजकर मार दिया। कहा जाता है कि मोसाद ने सभी 11 आतंकियों को 11-11 गोलियां मारी थी। अर्जेंटीना में दिया सबसे घातक मिशन को अंजाम मोसाद ने अर्जेंटीना में 11 मई 1960 को एक ऐसे मिशन को अंजाम दिया जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। यह मिशन इतना सीक्रेट था कि अर्जेंटीना की सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगी। मोसाद नाजी युद्ध अपराधी एडोल्फ एकमैन का अपहरण कर इजरायल लेकर आई। जिसके बाद उसे यहूदियों के खिलाफ किए गए अत्याचारों के लिए मुकदमा चलाकर सजा दी गई। इस मिशन को इजरायल के पांच एजेंटों ने अंजाम दिया था जिसने नाम बदलकर अर्जेंटीना में छिपे एडोल्फ एकमैन को ढूंढ निकाला। एकमैन को पकड़ने के बाद एक सीक्रेट लोकेशन पर ले जाकर उसकी पहचान सुनिश्चित की गई। उसके बाद टीम उसे गुपचुप तरीके से इजरायल लेकर आ गई। यासिर अराफात के करीबी को परिवार के सामने मारी 70 गोलियां मोसाद ने फिलीस्तीन के प्रसिद्ध नेता रहे यासिर अराफात का दाहिना हाथ कहे जाने वाले खलील अल वजीर को ट्यूनिशिया में उसके परिवारवालों के सामने गोलियों से छलनी कर दिया। खलील को अबू जिहाद के नाम से भी जाना जाता था। यह फिलीस्तीन के आतंकी संगठनों का मुखिया माना जाता था जिसके इशारे पर इजरायल में कई हमले भी हुए थे। इस मिशन को मोसाद के 30 एजेंट्स ने अंजाम दिया। ये एजेंट एक-एक कर टूरिस्ट बनकर ट्यूनिशिया पहुंचे। जहां उन्होंने अबू जिहाद के घर का पता लगाकर उसके परिवार के सामने 70 गोलिया मारी। उस वक्त ट्यूनिशिया के आसमान में उड़ रहे इजरायली प्लेन ने सभी कम्यूनिकेशन सिस्टम्स को ब्लॉक कर दिया था।

MP : प्रोटेम स्पीकर ने कहा- ईदगाह हिल्स गुरुनानक के नाम पर होना चाहिए

भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा के भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम बदलने वाले बयान को कांग्रेस ने आड़े हाथ लिया है। शर्मा ने प्रकाश पर्व के दौरान कहा कि यह भोपाल का सौभाग्य है कि 500 साल पहले गुरुनानक भोपाल आए थे। वे भारत भ्रमण के दौरान राजधानी में रुके थे। यह राजा भोज की नगरी का सौभाग्य है। यहां उनके चरण पड़े। कोई बताए कि 500 साल पहले यहां किसका मकान था। पहले तो यह गुरुनानक टेकरी थी। वही नाम होना चाहिए। ईदगाह तो बाद में बनी। सत्य को स्वीकार करो। इसके बाद कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सामाजिक ताने-बाने को ध्वस्त करने की बात कही।

सिंधिया को करना पड़ा सीएम शिवराज का 40 मिनट इंतजार, सिर्फ 10 मिनट ही हुई मुलाक़ात

भोपाल. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद ज्याेतिरादित्य सिंधिया के बीच हुई मुलाकात महज 10 मिनट में खत्म हो गई। इससे पहले सिंधिया को सीएम हाउस में शिवराज का करीब 40 मिनट इंतजार करना पड़ा। दरअसल, शिवराज सुबह गोंदिया गए थे। वे तय कार्यक्रम से करीब आधा घंटा लेट दोपहर 2:30 बजे भोपाल पहुंचे। सिंधिया से मुलाकात के तत्काल बाद मुख्यमंत्री ने शहडोल में नवजातों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। इसके बाद शाम 4 बजे दोनों नेता ओरछा रवाना हो गए हैं। जहां वे केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की पुत्री के विवाह समारोह में शामिल होंगे। शिवराज और सिंधिया आज ही देर शाम दिल्ली रवाना हो जाएंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को सुबह 10:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच निगम-मंडलों में नियुक्ति को लेकर बातचीत हुई है। हालांकि जानकारों का कहना है कि अभी मंत्रिमंडल विस्तार में समय लग सकता है। लेकिन जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा सिंधिया खेमे के विधायक तुलसी सिलावट और गोविंदसिंह राजपूत को पहले मंत्री बनाया जाएगा। उपचुनाव के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार की कोई जल्दी नहीं है। इसके बाद सिंधिया ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर सहमति जताई थी। दरअसल, मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा होने की उम्मीद है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी टीम का चयन कर लिया है। इससे पहले शर्मा की दिल्ली में सिंधिया के साथ बैठक हो चुकी है। इससे पहले मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत के साथ उन्होंने कार्यसमिति को लेकर मंथन किया था। आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की जानकारी मोदी को देंगे सीएम मुख्यमंत्री मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश योजना के तैयार किए जा रहे रोडमैप की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के अलावा मप्र में कोरोना की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने के लिए तैयारियों से भी प्रधानमंत्री को अवगत कराएंगे। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री केंद्र से मिलने वाली लंबित राशि राज्य को देने का प्रधानमंत्री से अनुरोध कर सकते हैं।

उज्जैन में 41 लाख की जमीन 12 लाख में नीलाम करने वाली तहसीलदार दीपाली निलंबित

भोपाल। कलेक्टर गाइड लाइन को धता बताते हुए 41 लाख की जमीन को मात्र 12 लाख में अपने पति रंजीत कर्नाल के ड्राइवर प्रेमकुमार दांगी को नीलाम करना तत्कालीन उज्जैन नायब तहसीलदार दीपाली जाधव (वर्तमान में देवास में तहसीलदार) को महंगा पड़ गया। लोकायुक्त पुलिस की चार्जशीट के बाद शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रजिस्ट्रार ने जब आपत्ति जताई तो दीपाली ने अपने ओहदे का प्रभाव दिखाते हुए रजिस्ट्रार पर दबाव बनाकर रजिस्ट्री करा दी थी। यह है मामला दरअसल, उज्जैन तहसील के बमौरा निवासी नाथूलाल ने अपनी 3.21 हेक्टेयर जमीन को बंधक रखकर बैंक से पांच लाख का लोन लिया था। लोन नहीं चुका पाने पर वर्ष 2014 में नाथूलाल की जमीन नीलाम हो गई। तत्कालीन नायब तहसीलदार दीपाली जाधव ने उक्त भूमि को अपने पति रंजीत कर्नाल के ड्राइवर प्रेमकुमार दांगी के पक्ष में महज 12 लाख 11 हजार रुपए में नीलाम कर दी। जबकि उस समय कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार उस भूमि की कीमत 41 लाख 60 हजार रुपए थी। शिकायत होने पर लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने पूरे मामले की जांच की। नायब तहसीलदार के पति रंजीत कर्नाल लोकायुक्त पुलिस इंसपेक्टर बंसत श्रीवास्तव ने बताया कि नियमों को ताक पर रखकर नायब तहसीलदार दीपाली ने जमीन की नीलामी की थी। इसमें उसके पति रंजीत कर्नाल ने भी साथ दिया। जांच में पता चला कि नीलामी में प्रेमकुमार दांगी के साथ उज्जैन के अशोक नगर निवासी सहदेव और नीमनवासा के रहने वाले रमेश गुर्जर ने बोली लगाई थी। प्रेमकुमार की बोली 12.11 लाख पर छूटी। प्रेमकुमार ने नीलामी राशि को जमा करने के लिए चेक दिया था लेकिन उसने उसी समय आवेदन देकर चेक वापस ले लिया और उसी दिन तीन बजे तक सरकारी खाते में 12.11 लाख रुपए कैश जमा कर दिया। जांच में पता चला कि प्रेमकुमार के खाते में उस समय इतनी धनराशि नहीं थी तो वह इतना कैश कहां से लाया। लोकायुक्त पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि यह सब मैडम (दीपाली) और साहब (रंजीत) का करा-धरा है। साहब ने ही पैसों की इंतजाम किया था। इंसपेक्टर बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि रंजीत ने अपने इंदौर के पते पर प्रेमकुमार को किराएदार दिखाया था। उसी पते पर प्रेमकुमार का बैंक खाता भी खुलवाया था। प्रेमकुमार के पक्ष में नीलामी करवाने के बाद जमीन की रजिस्ट्री में रंजीत गवाह भी बना। जबकि यह नियमों के विरुद्ध था। नीलामी में पीठासीन अधिकारी का कोई सगा-संबंधी शामिल नहीं हो सकता है। रजिस्ट्रार ने की थी आपत्ति जांच अधिकारी बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि मात्र 12 लाख में नीलामी करने को लेकर तत्कालीन रजिस्ट्रार ने प्रेमकुमार के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री करने से मना कर दिया था। तब दीपाली जाधव ने रजिस्ट्रार काे पत्र लिखकर रजिस्ट्री करने का दबाव बनाया। नीलामी में शामिल होने से किया इंकार जांच अधिकारी ने बताया कि नीलामी में तीन लोग आए ही नहीं थे। प्रेमकुमार के साथ बोली लगाने वाले सहदेव और रमेश गुर्जर ने लोकायुक्त पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उन्हें न तो नीलामी के बारे में पता था और न ही वे बोली लगाने आए थे। पूरी नीलामी सिर्फ कागजों में की गई। नोटिस के बावजूद बयान देने नहीं आईं थीं दीपाली लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान बयान देने के लिए तत्कालीन नायब तहसीलदार दीपाली जाधव को नोटिस भेजा गया था, लेकिन वह नहीं आईं। उधर, प्रेमकुमार दांगी भी बयान देने के बाद से फरार है। उसकी फरारी में ही इसी साल 15 जनवरी को कोर्ट में चालान पेश किया गया।

MP: पत्नी से झगड़े के बाद टावर पर चढ़ गया पति, बोला- मायके गई तो कूद जाऊंगा

इंदौर। मध्य प्रदेश के बड़वानी में पत्नी से झगड़ा होने के बाद पति हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया. ग्रामीणों ने जब ये नजारा देखा तो हैरान रह गये. गनीमत ये रही कि उस समय हाईटेंशन में करंट नहीं दौड़ रहा था. टावर पर 80 फीट ऊपर चढ़ा पति बार-बार अपनी पत्नी से बोल रहा था कि तुम मायके गईं तो कूद जाऊंगा. ग्रामीणों की सूचना पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई. करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने पति को समझा-बुझाकर नीचे उतारा जा सका. बड़वानी के बालसमुद पुलिस चौकी क्षेत्र के ग्राम टमेला में एक घंटे तक चले ड्रामे से पुलिस और ग्रामीणों के पसीने छूट गये. गांव का ही रहने वाला मूलचंद पत्नी से झगड़े के बाद हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया. करीब 80 फीट ऊंचाई पर चढ़े हुए इस युवक को जब देखा, तो मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. युवक को बार-बार नीचे उतरने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन वो कह रहा था, कि पत्नी मायके गई, तो वो यहां से कूद जायेगा. वहीं पति की इस हरकत की जानकारी जब पत्नी को मिली तो वो भी मौके पर पहुंच गई. सूचना पर पुलिस भी ग्राम टमेला पहुंच गई. युवक को टावर से उतारने के लिए समझाने का क्रम शुरू हो गया. करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे समझा-बुझाकर टावर से नीचे उतारा जा सका. बताया गया है कि युवक का किसी बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया था. इस विवाद के दौरान पत्नी ने मायके जाने की धमकी दी. पत्नी के इस फैसले से नाराज युवक हाईटेंशन लाइन के टावर पर चढ़ गया. गनीमत ये रही, कि उस समय तारों में करंट नहीं दौड़ रहा था, नहीं तो गंभीर हादसा हो सकता था.

अवैध सम्बन्ध का नतीजा हत्या कर ईंट भट्टी में चुनवा दिया युवक का शव

जयपुर। राजस्थान के बारां में एक युवक की हत्या कर उसके शव को ईंट भट्टे की भट्टी में चुनवा दिया गया. मामले की जानकारी उस समय हुई, जब बदबू के चलते ईंट भट्टे के मजदूर काम नहीं कर पा रहे थे. लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. मौके का निरीक्षण किया गया, जहां कच्ची ईंटों के बीच से युवक का शव बरामद हुआ. लोगों ने मृतक की शिनाख्त सात दिन पूर्व गायब हुए एक भट्टा श्रमिक के रूप में की, जिसकी थाने पर गुमशुदगी दर्ज थी. सूचना पर मृतक का भाई भी मौके पर पहुंच गया. पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है. कोतवाली थाना क्षेत्र के समसपुर में स्थित ईंट भट्टे पर मजदूर काम कर रहे थे. भट्टी में से तेज बदबू आ रही थी. मजदूरों को शक हुआ, कि ये बदबू किसी इंसानी लाश की है. मजदूरों की​ शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया, इस दौरान कच्ची ईंटों के बीच से पुलिस ने एक युवक का शव बरामद किया. मृतक की पहचान खेड़ली भैंडोलिया निवासी महेंद्र मीणा के रूप में कर ली गई. सूचना मिलते ही मृतक का भाई भरत मीणा भी मौके पर पहुंच गया. भरत ने बताया कि 21 नवंबर को ठेकेदार राकेश मेघवाल उसके बड़े भाई महेंद्र और भाभी कांतिबाई को लेकर ईंट भट्टा पर आया था. 22 नवंबर को उसके पास भाभी कांतिबाई का फोन आया कि पति महेंद्र से झगड़ा हो गया है. झगड़े के बाद महेंद्र 500 रुपये लेकर कहीं चला गया है. भाई के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद छोटे भाई भरत ने उसकी तलाश शुरू कर दी. जब उसका कोई सुराग नहीं लगा, तो उसने 25 नवंबर को कोतवाली में पहुंचकर भाई के गुमशुदा होने की तहरीर दी थी. इसके बाद से पुलिस भी लगातार महेंद्र को खोजने का प्रयास कर रही थी. डीएसपी महावीर शर्मा ने बताया कि मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. मृतक के भाई का आरोप है कि उसकी भाभी कांतिबाई और ठेकेदार राकेश मेघवाल ने महेंद्र की हत्या की है. पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है. वहीं घटना के बाद से ठेकेदार और महेंद्र की पत्नी कांतिबाई भी गायब है. पुलिस उनकी तलाश भी कर रही है.

क्या मार ही डालोगे सरकार…. मध्य प्रदेश में पेट्रोल के दाम 90 रुपये प्रति लीटर के पार

भोपाल. मध्य प्रदेश (MP) में पेट्रोल और डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price hike) में आग लग गई है. राजधानी भोपाल सहित चारों प्रमुख महानगरों में पेट्रोल 90 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर गया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब पेट्रोल के दाम ₹90 प्रति लीटर से भी ज्यादा हुए हैं. वहीं डीजल जी ₹81 प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है. पेट्रोल और डीजल के दाम में हुई इस बढ़ोतरी से आम जनता काफी परेशान है. लोगों का कहना है कि सरकार को जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर रेट कम करना चाहिए. इस वक्त मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूला जा रहा है. यही वजह है कि इनके दाम भी आसमान छू रहे हैं. पेट्रोल और डीजल के दाम में हुई बढ़ोतरी के बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस की मांग है कि सरकार को आम लोगों को राहत देने के लिए टैक्स कम करना चाहिए. टैक्स की मार मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम सबसे ज्यादा होने के पीछे वजह सबसे ज्यादा टैक्स है. यहां पर प्रदेश सरकार वेट के जरिए पेट्रोल डीजल पर मुनाफा कमा रही है.पहले जहां पेट्रोल पर कुल टैक्स 30% था जो अब 39% हो गया है. वहीं डीजल पर टैक्स 20% था जो अब 27% हो गया है. ज्यादा टैक्स की वजह से सरकार को 341 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई का अनुमान लगाया जा रहा है. 4 महानगरों में रेट भोपाल पेट्रोल – 90.15 रुपये/लीटर डीजल – 80.23 रुपये/लीटर जबलपुर पेट्रोल – 90.15 रुपये/लीटर डीज़ल 80.23 रुपय/ लीटर इंदौर पेट्रोल 90.16 रुपए/ लीटर डीजल – 80.23 रुपए / लीटर ग्वालियर पेट्रोल 90.02 रुपए /लीटर डीजल 80.09 रुपए/ लीटर

दिल्ली के सभी बॉर्डर पर किसानों का डेरा, बोले – देश में सभी कानून कॉरपोरेट के लिए बन रहे हैं

नई दिल्ली। दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान जमे हुए हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली के बुराड़ी में मौजूद निरंकारी ग्राउंड में प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई है. लेकिन किसानों का एक गुट सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर ही डेरा डाले हुआ है और सरकार से बिना शर्त बातचीत की मांग कर रहा है.किसान नेता गुरनाम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस आंदोलन को कुचलने के लिए 30 से ज्यादा मुकदमा दर्ज हो चुके हैं. आज जगह जगह से और लोग आ रहे हैं. हरियाणा से किसान कुच कर रहा है. ये लड़ाई सिर्फ किसान की नहीं है, सबकी है. पैदावार करने वाले किसानों को कम भाव मिलेगा. ये सभी का आंदोलन है. उन्होंने कहा, “ब्राह्मण समाज ने हमें समर्थन दिया . हरियाणा में सब मंडियां बंद रहेंगी. जो भी देश में कानून बन रहे हैं, वो सिर्फ कॉरपोरेट के लिए बन रहे हैं. पूरी जनता का शोषण कारपोरेट कर रही है. पूरे देश के नागरिक इस लड़ाई में शामिल हों. अपील करता हूं. जब तक बाते नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा. कहीं इससे भी कड़ा कदम ना उठाना पड़े. उससे पहले बातचीत के लिए आ जाएं.” प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगेंद्र यादव ने कहा, ”देश और दुनिया मे आज सब तरफ उत्सव मनाया जा रहा है, उसकी बधाई. किसान आज देश में अपनी छाप छोड़ने के लिए खड़े हैं. इस आंदोलन ने 5 झूठ का पर्दाफाश किया . पहला- ये आंदोलन किसानों का नहीं है. आप खुद चेक करें. दूसरा- किसानों को बरगलाने का काम किया जा रहा है. किसानों को सब पता है . तीसरा- सिर्फ पंजाब का आंदोलन है. यहां सब बैठे हैं. देश के कोने कोने से. उत्तराखंड से आए हैं. पंजाब के किसानों ने शुरुआत सभी किसानों के लिए की है. चौथा- इसकी कोई लीडरशिप नहीं है. 30 संगठनों का समहू है. इतनी अच्छी लीडरशिप मैंने कभी नहीं देखी. 30 किसान संगठन हर रोज मिल रहे हैं. क्लियर लीडरशिप है. पांचवां- पॉलिटिकल पार्टी ने करवाया. हरियाणा का किसान हमारे साथ है. ये आंदोलन ऐतिहासिक आंदोलन है.” भारती किसान यूनियन (दकुंडा) के जनरल सेक्रेट्री जगमोहन सिंह ने सिंघु बॉर्डर पर हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी को गुरु पर्व की बधाई दी और कहा, ” हमारे 30 संगठन की मीटिंग हुई. मुंह में राम राम बगल में छुरी. अमित शाह फ़ोन पर बात कर रहे हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है. ये पंजाब का संघर्ष नहीं है. ये सभी का संघर्ष है . सभी की जो स्थिति है, हम जहां हैं वही रहंगे, और आगे कैसे बढ़ना है. आज देश के किसान अपने मन की बात सुनाने आए हैं.”

MP : 40 रु पेट्रोल के दाम पर सड़क पर उतरने वाले भाजपाई आज 90 रु होने पर चुप क्यों?

जबलपुर। कीमत बढ़ने से एक ओर जहां लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी नजर आई तो वहीं दूसरी ओर अब राजनीतिक नेता भी कीमत बढ़ने से सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने दाम बढ़ने पर बीजेपी नेताओं को घेरा है। विवेक तन्खा ने कहा कि यूपीए शासनकाल में पेट्रोल के दाम पर हायतौबा मचाने वाले आज कहां गए? तब 40 रु पेट्रोल के दाम पर सड़क पर उतरने वाले भाजपाई आज 90 रु दाम पर चुप क्यों? पेट्रोल-डीज़ल आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया। भाजपा अमेरिका की तरह भारत को फ्री इकोनॉमी की तरफ ले जाना चाहती है। 80 फीसदी गरीबों को देश में महंगाई के बोझ से नहीं लादा जा सकता। पीएम मोदी इसे लेकर सोचे। किसान आंदोलन को लेकर सांसद तन्खा ने कहा कि देश के मेहनती किसानों को खालिस्तानी बताया जा रहा है। क्या सिर्फ भाजपाई ही हिंदुस्तानी है। आगे कहा कि बीजेपी अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रही है। जब किसान खुश नहीं तो कैसे कृषि कानून किसान हितैषी हुआ। किसान हितैषी था कानून तो क्यों आनन-फानन में लागू किया गया। नया कानून सरकार की किसान विरोधी कवायद थी। देश की GDP संभाल रहे कृषि क्षेत्र को परेशान करना बुद्धिमानी नहीं। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इस विषय को गंभीरता से लें।

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