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पूर्व राष्ट्रपति प्रणव द की मोदी को नसीहत, जो असहमत हैं उन्हें भी सुनें

नई दिल्ली . पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की किताब ‘द प्रेसिडेंशियल इयर्स’ मंगलवार काे बाजार में आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देते हुए उन्होंने लिखा कि उन्हें असहमति के स्वर भी सुनना चाहिए। विपक्ष काे राजी करने और देश के सामने अपनी बात रखने के लिए संसद में और ज्यादा बाेलना चाहिए। मोदी की केवल माैजूदगी ही संसद के काम में बहुत बदलाव ला सकती है। प्रणब ने लिखा, ‘पूर्व प्रधानमंत्रियाें- जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी या मनमाेहन सिंह, इन सभी ने संसद में उपस्थिति महसूस कराई है। प्रधानमंत्री माेदी काे अपने दूसरे कार्यकाल में इनसे प्रेरणा लेकर संसद में माैजूदगी बढ़ानी चाहिए।’ किताब के मुताबिक, ‘मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में संसद को सुचारू रूप से नहीं चला सकी। इसकी वजह उसका अहंकार और अकुशलता है।’ ‘नोटबंदी के बारे में नहीं बताया’ इसी क्रम में आगे लिखा है, ‘मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की, लेकिन इससे पहले मुझसे (तब प्रणब राष्ट्रपति थे) ही इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की। हालांकि, इससे मुझे कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि ऐसी घोषणा के लिए आकस्मिकता जरूरी है।’ पूर्व राष्ट्रपति ने इस बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा है, ‘मैं UPA सरकार के समय विपक्ष के साथ लगातार संपर्क में रहता था। संसद चलाने का प्रयास करता था। सदनों में पूरे वक्त माैजूद रहता था।’ ‘नेपाल की भारत में शामिल होने की ख्वाहिश थी’ प्रणब ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। इसके मुताबिक, ‘नेपाल भारत का राज्य बनना चाहता था, लेकिन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इस पर नेहरू की प्रतिक्रिया थी कि नेपाल एक स्वतंत्र राष्ट्र है। उसे हमेशा ऐसे ही रहना चाहिए।’ प्रणब आगे लिखते हैं, ‘अगर पंडित नेहरू की जगह इंदिरा गांधी होतीं, तो शायद वे अवसर का फायदा उठातीं, जैसा उन्होंने सिक्किम के साथ किया।’ उनकी इस किताब में देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली के बारे में भी तमाम बातें हैं। ‘कांग्रेस जान नहीं पाई कि करिश्माई नेतृत्व खत्म हो चुका’ प्रणब के मुताबिक, ‘मुझे लगता है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस ने पॉलिटिकल फोकस खो दिया। पार्टी ये पहचान नहीं पाई कि उसका करिश्माई नेतृत्व खत्म हो चुका है। यही 2014 के लोकसभा में उसकी हार के कारणों में से एक रहा होगा। उन नतीजों से मुझे यह राहत मिली कि निर्णायक जनादेश आया। लेकिन मेरी पार्टी रही कांग्रेस के प्रदर्शन से निराशा हुई।’

MP: हेड कॉन्स्टेबल ने खुद के सीने पर मारी गोली, इलाज के दौरान मौत

धार  . मध्य प्रदेश के धार जिले के कुक्षी थाना क्षेत्र के तहत निसरपुर पुलिस चौकी में तैनात प्रधान आरक्षक ने बुधवार सुबह चौकी के माल खाने में कथित तौर पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली. घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. थाना प्रभारी कमल सिंह गहलोत ने बताया कि 55 साल के प्रधान आरक्षक राजकुमार रघुवंशी ने माल खाने में रखी राइफल से छाती के नीचे गोली मार ली. आवाज सुनकर वहां पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने उसे निसरपुर के सामुदायिक अस्पताल पहुंचाया. लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल बड़वानी के जिला अस्पताल रेफर कर दिया. जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि पारिवारिक तनाव के चलते उन्होंने इस तरह का कदम उठाया होगा. जांच के बाद ही घटना का सही कारण का पता चल पाएगा. पुलिस इस मामले क जांच कर रही है. शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. निसरपुर चौकी में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राजकुमार रघुवंशी विगत दो साल से यहां पदस्थ थे. इसके पूर्व भी वे दो साल निसरपुर रह चुके थे. मूल रूप से वह भिड़ जिले के अशोकनगर के ग्रामीण इलाके के रहने वाले थे. उनकी उम्र लगभाग 55 साल थी. वर्तमान में वे निसरपुर चौकी में बने हुए सरकारी निवास में रहते थे. उनके साथ उनकी पत्नी बेटा बहू व दो पोते व पोती भी हैं. घटना के बाद से ही परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है. परिवार के लोग भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर इस तरह की स्थिति क्यों आई. इधर पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह भी मौके के लिए रवाना हो गए हैं. प्रधान आरक्षक की मौत का कारण फिलहाल मालूम नहीं हो पा रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों के पहुंचने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी. फिलहाल रघुवंशी का शव बड़वानी में है. वहां से शव पोस्टमार्टम के बाद निसरपुर लाया जाएगा.

इंदौर : बाबा ने महिला को कोल्ड्रिंक्स में नशीला पदार्थ पिलाकर किया दुष्कर्म

इंदौर. एक ढोंगी बाबा ने पति के लकवे की बीमारी का उपचार कराने आई महिला को कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर दे दिया। फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाबा ने हवन के बहाने महिला को अकेले में बुलाया था। बलात्कारी बाबा ने महिला को धमकाया और उसका शारीरिक शोषण करता रहा। महिला से कहा- शिकायत की तो तेरे पति के इलाज का उपाय नहीं करूंगा और बच्चों की बलि चढ़ा दूंगा। आखिरकार परेशान होकर पीड़िता पुलिस के पास पहुंची और उसने मामला दर्ज कराया। मामला द्वारकापुरी थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार प्रजापत नगर में रहने वाली 32 वर्षीय पीडि़ता की शिकायत पर बाबा कपाली उर्फ निर्मल निवासी पालदा के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके पति को लकवा था, और बाबा द्वारा इलाज करने की जानकारी मिलने पर वह बाबा कपाली के पास गई, तो आरोपी ने उसके पति का इलाज किया, जिससे कुछ फायदा हुआ। तो महिला बाबा पर विश्वास करने लगी। इस पर आरोपी ने अकेले कमरे मे ले गया और कोल्डड्रिंक मे कुछ नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया व उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ उसे धमकाया कि यदि यह बात किसी को बताई तो वह उसके पति को और ज्यादा बीमार कर देगा और उसके बच्चों की बलि चढ़ा देगा। बाबा की धमकियों से पीड़िता ने यह बात किसी को नहीं बताई। इसका फायदा उठाकर बाबा आए दिन उसके घर जाकर शारीरिक शोषण करने लगा। बार-बार की उसकी धमकियों और शारीरिक शोषण से तंग आकर पीड़िता ने यह बात अपने परिजनों को बताई और बुधवार देर रात थाने पहुंचकर प्रकरण दर्ज कराया। मामले में पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है। जल्दी ही उसे गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सहारा ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई … रियल एस्टेट ऑफिस सील

लखनऊ .  जिला प्रशासन ने सहारा ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. प्रशासन ने लखनऊ में सहारा इंडिया के रियल स्टेट के ऑफिस को सील कर दिया है. जिला प्रशासन और रेरा की टीम अलीगंज के कपूरथला स्थित सहारा इंडिया के रियल स्टेट के ऑफिस को सील करने पहुंची. सहारा के कई हाउसिंग प्रोजेक्टस पर पैसा जमा करने पर मकान ना देने और पैसा ना वापस देने का आरोप है. बता दें कि सहारा ग्रुप की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. इससे पहले भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय और उनकी दो कंपनियों से 62,600 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था. सेबी ने कहा कि ​यदि कंपनी निवेशकों का पैसा सेबी के पास जमा नहीं करती है तो दोषी लोगों को हिरासत में लिया जाए. सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सहारा समूह 2012 और 2015 के कोर्ट के आदेशों का पालन करने में विफल रहा है, जिसमें कहा गया था कि वह निवेशकों से जमा रकम को 15 फीसदी ब्याज सहित वापस करे. गौरतलब है कि कभी एक बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय की निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये की वापसी को लेकर सेबी से पिछले कई साल से टकराहट चल रही है. निवेशकों ने समूह की बॉन्ड योजनाओं में ये पैसा जमा किया है, जिसे सेबी अवैध बता चुका है. सहारा और सेबी की टकराहट तो पहले से चल रही है और इस बीच अब लखनऊ जिला प्रशासन ने भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर दी है.

बदायूं में महिला के साथ गैंगरेप, मुख्य आरोपी महंत पर 50 हजार का इनाम घोषित

बदायूं . उत्तर प्रदेश के बदायूं में महिला के साथ गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने STF को आदेशित किया है. जिला पुलिस के साथ एसटीएफ भी मामले की जांच करेगी. साथ ही आरोपियों पर NSA के तहत कार्रवाई का आदेश दिया गया है. सीएम योगी ने कहा कि बदायूं की घटना अत्यंत निंदनीय है. अभियुक्तों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस घटना के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. इस मामले के मुख्य आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. मुख्य आरोपी महंत सत्यनारायण फरार है. बुधवार को बदायूं जिले से हैवानियत की हदें पार करने वाली खबर सामने आई. दरअसल, उघैती इलाके में रविवार रात 50 वर्षीय महिला अपने गांव के मंदिर में पूजा करने के लिए गई थी. जिसके बाद महिला का शव संदिग्ध हालात में मिला था. पुलिस ने जब इस मामले की जांच की और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई तो गैंगरेप की पुष्टि हुई. पोस्टमार्ट्म रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के गुप्तांग पर चोटें आई हैं और महिला का पैर भी फैक्चर पाया गया है. पुलिस ने इस मामले में गैंगरेप, हत्या का मामला दर्ज किया है और तीन लोगों को नामजद किया है. पुलिस की ओर से इस मामले में एक्शन के लिए चार टीमें बनाई गई हैं. इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में उघैती के थाना प्रभारी राघवेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया है. अब तक कुल दो आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. पुलिस को मुख्य आरोपी महंत सत्यनारायण की तलाश है. वहीं, डीएम ने कहा है कि मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा. परिवार ने पुलिस पर उठाए सवाल महिला रविवार को शाम 6 बजे पूजा के लिए गई थी. जब 2-3 घंटे बाद वापस नहीं लौटी तो परिवार वाले थाने गए. लेकिन उन्हें पुलिस ने रात 11 बजे तक अटेंड नहीं किया. परिवार का कहना है कि आरोपियों ने दरवाजे की कुंडी खटखटा के डेडेबॉडी फेंकी और भाग गए. परिवार का ये भी आरोप है कि पुलिस ने सुबह मामले को देखने की बात कही थी. इस वारदात के बाद से विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है.

भोपाल में सीरियल किलर गिरफ्तार, रोंगटे खड़े कर देगी मर्डर के तरीके

भोपाल . करीब दो महीने पहले युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या करने वाला सीरियल किलर निकला। उसने जमीन में गड़े खजाने का लालच देकर नवंबर 2020 में एक युवक की हत्या की थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी पर 20 हजार रुपए का इनाम रखा था। अब तक वह 6 लोगों की इसी तरह जंगल में ले जाकर हत्या कर चुका है। पुलिस 74 लोगों से पूछताछ के बाद ही 58 साल के इस आरोपी तक पहुंच सकी। एएसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार गत 8 नवंबर 2020 को थाना सूखीसेवनिया अंतर्गत ग्राम अब्दुल्ला बरखेड़ी के जंगल में पत्थर से सिर कुचली आदिल वहाव की लाश मिली थी। जांच में सामने आया कि अशोका गार्डन में रहने वाले आदिल ने खजाना (जमीन में गड़ा सोना) के लालच में किसी मनीराम सेन को 17 हजार रुपए दिए थे। आदिल उससे रुपए वापस मांग रहा था, लेकिन मनीराम सेन नहीं लौटा रहा था। हत्या के बाद से ही उसके फरार होने के कारण सबसे पहले उस पर ही संदेह गया। पुलिस ने उस पर 20 हजार रुपए नकद इनाम रखा था। मुखबिर की सूचना पर मनीराम सेन को राहतगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह मंगलवार यानी आज ही इलाहाबाद से लौटकर सागर जिले के राहतगढ़ पहुंचा था। उसने बताया कि आदिल उस पर जल्द से जल्द रुपए वापस करने का दबाव बना रहा था। इसलिए वह 7 नवंबर को आदिल को स्कूटी से सूखीसेवनिया के जंगल में ले गया। यहां उसे तंत्र विद्या करने का झांसा देकर आंखें बंद करने को कहा। जब उसे लगा कि आदिल अब आंखें नहीं खोलेगा तो उसने उसके सिर पर पत्थर मारा। इसके बाद उसकी पहचान छिपाने के लिए चेहरा कुचल दिया था। पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए 74 लोगों से पूछताछ की थी। 2000 में एक साथ 5 लोगों को मारा था एएसपी भदौरिया ने बताया कि आरोपी मनीराम सेन ने वर्ष 2000 में थाना ग्यारसपुर जिला विदिशा में खजाना दिलाने के नाम 5 लोगों की हत्या की थी। उसने जमीन में गड़ा खजाना दिलाने के नाम पर सबसे 5-5 हजार रुपए लिए। इसके बाद वह सभी को जंगल में ले गया। वहां उन्हें एक-दूसरे से एक-एक किमी की दूरी पर पेड़ के नीचे बैठा दिया था। तंत्र विद्या के नाम पर सभी के हाथ में धागा बांधा और बोरा रखकर आंखें बंद कर मंत्र जाप करने को कहा। इसके बाद उसने एक-एक कर सभी की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी थी। वह करीब डेढ़ साल तक फरार रहा था। उसके बाद 2002 में पकड़ा गया था। उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वर्ष 2006 में पैरोल पर छूटने के बाद वह फरार हो गया था। करीब 4 महीने बाद गुजरात से गिरफ्तार हुआ था। आजीवन कारावास की सजा वर्ष 2017 में पूरी हो गया। उसके बाद वह अशोका गार्डन की नवाब कालोनी में रहने लगा था।

एमपी अजब है एमपी गजब है ….. स्वास्थ्य मंत्री ने 1000 डॉक्टर को दरकिनार कर अपनी पत्नी का किया प्रमोशन

भोपाल . स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति में परिवारवाद का मामला सामने आया है। मंगलवार को स्वास्थ्य संचालनालय से एक आदेश जारी हुआ। इसमें बताया गया कि भोपाल की जिला स्वास्थ्य अधिकारी नीरा चौधरी को क्षेत्रीय कार्यालय में संयुक्त संचालक बनाया गया है। बता दें कि नीरा चौधरी प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की पत्नी हैं और उन्हें पदोन्नत कर जो पद दिया गया है, वरिष्ठता सूची के आधार पर उस पद के लिए नीरा से पहले 1000 अन्य डॉक्टर दावेदार थे। स्वास्थ्य विभाग ने 2017 में प्रथम श्रेणी डॉक्टराें की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की थी। इसमें 1042 डॉक्टरों के नाम थे, लेकिन नीरा का नाम नहीं था। नीरा की नई नियुक्ति से डॉक्टरों में भी नाराजगी है। इस मामले में जब स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। 34 जिलों में सीनियर को दरकिनार कर जूनियर को बनाया सीएमएचओ प्रदेश के 52 जिलों में से 34 ऐसे जिलें है, जहां पिछले एक साल में सीनियर डाॅक्टरों के बजाय जूनियर को सीएमएचओ बनाया गया है। इनमें शाजापुर में डाॅ. राजू निदारिया को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां उनसे सीनियर तीन अन्य डाॅक्टर एसडी जायसवाल, सुनील सोनी और आलोक सक्सेना पदस्थ हैं। खरगोन में रजनी डाबर को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां एसएस चौहान, विजय फूलोरिया, राजेंद्र जोशी, डाॅ. कानूनगो, वंदना कानूनगो, इंदिरा गुप्ता और संजय भट्‌ट सीनियर हैं। बड़वानी में डॉ. अनिता सिंगारे को सीएमएचओ बनाया है, जबकि वहां तीन डाॅक्टर उनसे सीनियर हैं। इसी तरह रतलाम में डाॅ प्रभाकर नानावरे से 6 डाॅक्टर सीनियर हैं। धार, छतरपुर, दमोह, कटनी, रीवा, शहडोल समेत अन्य जिलों में पदस्थ सीएमएचओ से वरिष्ठ चिकित्सक पदस्थ हैं। इसी तरह अन्य जिलों में भी यही स्थिति हैं। वरिष्ठता क्रम में दो पद पीछे थीं नीरा नियमानुसार संयुक्त संचालक पद पर सिर्फ प्रथम श्रेणी अधिकारी को ही पदस्थ किया जा सकता है। इनमें वरिष्ठता क्रम में उप संचालक और उससे नीचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) आते हैं। नीरा जिला स्वास्थ्य अधिकारी थीं और अकेले भोपाल में ही 70 से ज्यादा प्रथम श्रेणी डॉक्टर हैं। ये सभी डिप्टी डायरेक्टर पद पर हैं। इनमें अर्चना मिश्रा, प्रज्ञा तिवारी, दुर्गेश गौर, दिलीप हेड़ाऊ, हिमांशु जायसवाल, मनीष सिंह, राजीव श्रीवास्तव, अलका परगनिया, पद्माकर त्रिपाठी, इंद्रजीत सिकरवार और वीरेंद्र गौर समेत अन्य चिकित्सकों के नाम हैं। ये सभी पिछले 15 साल से संचालनालय में प्रशासनिक पदों पर हैं और ट्रांसफर की वजह से पदोन्नति नहीं चाहते हैं।

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