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भारत बंद की तैयारियां तेज:संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया राज्यवार बैठकों का कार्यक्रम

गाजियाबाद. कृषि कानूनों के खिलाफ 27 सितंबर को प्रस्तावित भारत बंद के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्यवार बैठकों का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य एवं भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता युद्धवीर सिंह के अनुसार, किसान संगठन 11 सितंबर को पटना में एक सम्मेलन करेंगे। मध्यप्रदेश के सभी जिलों में तैयारी बैठकें 10 सितंबर तक पूरी कर ली जाएंगी। उत्तर प्रदेश में एसकेएम के “मिशन यूपी’ की अहम बैठक 9 सितंबर को लखनऊ में होगी। 15 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में किसान संसद होगी। युद्धवीर सिंह ने कहा कि ये सभी बैठकें कहीं न कहीं 27 सितंबर के प्रस्तावित भारत बंद की तैयारियों से जुड़ी हैं। अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार बैठकें-पंचायत करके सभी किसान-मजदूर संगठनों का समर्थन लिया जा रहा है। इन बैठकों के बाद ये संगठन अपने-अपने राज्य में बंदी के लिए जनसंपर्क करके जनसमर्थन हासिल करेंगे। महापंचायत पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार पांच सितंबर को यूपी के मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत पर किसान संगठनों ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनवाई है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ट्वीट करके बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म 17 सितंबर को भारतीय किसान यूनियन के सभी अधिकारिक प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीम की जाएगी। चुनाव नजदीक देख किसान आंदोलन ने पकड़ा जोर जैसे-जैसे यूपी-उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह किसान आंदोलन फिर से जोर पकड़ रहा है। पांच सितंबर की मुजफ्फरनगर महापचंायत और सात सितंबर की करनाल महापंचायत इसी का नतीजा है। करनाल में खुद राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी अपनी टीम को लेकर डटे हुए हैं। इधर, संयुक्त किसान मोर्चा ने कह दिया है कि सभी राज्यों में एसकेएम की समितियां बनाई जाएं। साफ है कि किसान संगठन अब इस आंदोलन को दिल्ली बॉर्डर के साथ-साथ गांव-गांव, जिले-जिले तक ले जाना चाहते हैं।

MP: सगाई के बाद युवती ने मंगेतर से बनाए शारीरिक संबंध, ज्यादा ब्लीडिंग होने से मौत

भोपाल. सगाई के बाद अपने मंगेतर के साथ शारीरिक संबंध बनाना एक युवती के लिए मौत का कारण बन गया. अधिक ब्लीडिंग होने से युवती की जान चली गई. मरने से पहले युवती ने अपने मंगेतर के खिलाफ बयान नहीं दिए, लेकिन मामला युवती की मौत (Death) का है. इसलिए पुलिस (Police) ने मंगेतर को अपनी कस्टडी में रखा है और कानूनी सलाह के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. यह घटना भोपाल (Bhopal) के कोलार इलाके की है. यहां रहने वाला एक युवक होटल में काम करता है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक युवक की सगाई मंडीदीप में रहने वाली एक 28 साल की युवती से हुई थी. कुछ महीनों बाद उनकी शादी भी होने वाली थी. बीते 5 सितंबर को युवती अपने मंगेतर से मिलने के लिए भोपाल पहुंची. शाम पांच बजे दोनों ने फिजिकल रिलेशन बनाए. इस दौरान ब्लीडिंग शुरू हो गई. मंगेतर पहले उसे पास के एक अस्पताल ले गया था. फिर वहां से दूसरे हॉस्पिटल में भर्ती कराया. डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि काफी कोशिशों के बाद भी ब्लीडिंग बंद नहीं हो सकी. इस कारण उसकी मौत हो गई. डॉक्टरी और कानूनी सलाह के बाद कार्रवाई भोपाल के एएसपी अंकित जयसवाल ने बताया कि इस मामले में कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल युवती ने मरने से पहले युवक के खिलाफ किसी तरीके के बयान नहीं दिए. दोनों बालिग हैं. फिर भी पुलिस तमाम मामले से जुड़े बिंदुओं पर जांच कर रही है. कोई भी बिंदु इस जांच में नहीं छोड़ा जाएगा. मामला गंभीर है. इसलिए पुलिस की एक टीम सभी पहलुओं पर लगातार जांच कर रही है. इस जांच में डॉक्टरों और लीगल एडवाइस भी लिया जा रहा है. मरने से पहले युवती ने दिए थे बयान युवती ने मरने से पहले बयान दिए थे. उसने बताया था कि वह मंडीदीप की रहने वाली थी. उसकी सगाई हो चुकी है. वह अपने मंगेतार के पास भोपाल मिलने आई थी, लेकिन युवती ने मंगेतर के खिलाफ कोई बयान नहीं दिए हैं. इस मामले में अभी कोई सबूत युवक के खिलाफ नहीं मिले हैं. पुलिस ने डॉक्टर की सूचना पर मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है. वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार भी किया जा रहा है. अभी मौत के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है.

37 करोड़ रुपए का इनामी अफगानिस्तान का गृहमंत्री; 13 साल पहले भारत को जख्म दिया था

काबुल. 20 साल बाद अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा। 20 साल बाद ही एक बार फिर तालिबान ने हुकूमत का औपचारिक ऐलान कर दिया। तालिबान घोषित आतंकी संगठन है और जाहिर सी बात है कि उसकी सरकार में दहशतर्दों को ही जगह मिलनी थी, और मिली भी। एक नाम और उसका ओहदा या कहें पोर्टफोलियो, अमेरिका और दुनिया को चौंका रहा है। ये नाम है सिराजुद्दीन हक्कानी। वो कितना खूंखार आतंकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने उस पर 50 लाख डॉलर (इंडियन करेंसी के मुताबिक करीब 37 करोड़ रुपए) का इनाम घोषित कर रखा है। सिराजुद्दीन और उसके पिता ने 2008 में काबुल के भारतीय दूतावास पर भी हमला कराया था। इसमें 58 लोग मारे गए थे। 2011 में अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ रहे जनरल माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का दायां हाथ और एजेंट बताया था। फिदायीन हमले इसके दिमाग की उपज फिदायीन हमलों का इतिहास कई दशक पुराना है। माना जाता है कि श्रीलंका में सिविल वॉर के वक्त इनकी शुरुआत हुई थी, लेकिन अफगानिस्तान में फिदायीन या आत्मघाती हमले शुरू करने वाला हक्कानी नेटवर्क और खास तौर पर यही सिराजुद्दीन हक्कानी माना जाता है। अफगानिस्तान में इन हमलों में अब तक हजारों बेकसूर मारे जा चुके हैं। सिराजुद्दीन ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की साजिश भी इन्हीं हमलों के तहत रची थी। ये नाकाम रही। कहा जाता है कि सिराजुद्दीन का बाप और हक्कानी नेटवर्क की स्थापना करने वाला जलालुद्दीन हक्कानी 2013 या 2015 के बीच मारा गया, लेकिन सिराजुद्दीन 2001 के बाद से ही हक्कानी नेटवर्क का सरगना बना हुआ है। सिराजुद्दीन पाकिस्तान के वजीरिस्तान में ही रहता है। हक्कानी नेटवर्क को जानना जरूरी इसको संक्षिप्त में समझ लेते हैं। 1980 के आसपास सोवियत सेना ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। अमेरिका ने इसे अपनी तौहीन समझा। पाकिस्तान के साथ मिलकर स्थानीय कबीलों को हथियार और पैसा दिया। इनमें हक्कानी नेटवर्क भी शामिल था। इसके बाद तालिबान बना और अमेरिका ने इन गुटों से दूरी बनानी शुरू कर दी, लेकिन पाकिस्तान इन्हें पालता-पोसता रहा। ISI ने हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल अफगानिस्तान और अमेरिका दोनों के खिलाफ किया। ये एजेंसी पैसे भी लेती और हमले भी कराती। अमेरिका की ये नाकामी ही कही जाएगी कि वो पाकिस्तान पर दबाव डालकर हक्कानी नेटवर्क को खत्म नहीं करा सका। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क: कितने पास, कितने दूर शायद कम लोगों को पता होगा कि तालिबान किसी एक संगठन का नाम नहीं है। इसमें कई गुट, कई कबीले और कई धड़े हैं। हक्कानी नेटवर्क को आप इनमें से एक मान सकते हैं। अफगान तालिबान अलग है और पाकिस्तान तालिबान अलग। बस एक चीज कॉमन है। ये सभी कट्टरपंथी और आतंकी संगठन हैं जो शरीयत के हिसाब से हुकूमत चलाना चाहते हैं। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क अपनी सुविधा के हिसाब से एक-दूसरे का इस्तेमाल करते हैं। अफगान तालिबान को सत्ता में आने के लिए हक्कानी नेटवर्क ने दिल-ओ-जान से मदद की। नतीजा सामने है। उसका सरगना अब अफगानिस्तान का होम मिनिस्टर होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो तालिबान और हक्कानी नेटवर्क एक होकर भी अलग हैं, और अलग होकर भी एक हैं। हक्कानी नेटवर्क का खूनी खेल 2001: सिराजुद्दीन हक्कानी नेटवर्क का चीफ बना 2008 : में भारतीय दूतावास पर हमला, 58 की मौत 2012 : में अमेरिका ने हक्कानी नेटवर्क को बैन किया 2014 : में पेशावर स्कूल पर हमला, 200 बच्चे मारे गए 2017 : काबुल में हमला, 150 से ज्यादा लोगों की मौत

खरगोन में आदिवासी युवक की मौत पर सियासत तेज

कमलनाथ ने बीजेपी सरकार पर आदिवासियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया  भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच में आदिवासी युवक को गाड़ी से बांधकर खींचने पर हुई मौत का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था. इसी बीच खरगोन (Khargone) में एक आदिवासी (Tribal) की मौत के मामले को लेकर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है. आदिवासी की मौत पर कांग्रेस राज्य की बीजेपी सरकार पर हमलावर हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आदिवासी उत्पीड़न का आरोप लगाया है. कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि नेमावर नीमच के बाद अब खरगोन के विस्तार थाने में एक आदिवासी की मौत का मामला सामने आया है. बालाघाट में स्कूल जाते समय का आदिवासी छात्रा की हत्या की खबर है. कमलनाथ ने सरकार से दोनों घटनाओं पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. कमलनाथ ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और न्याय दिलाने को कहा है. वहीं कांग्रेस नेता अरुण यादव ने भी बयान जारी कर कहा है कि खरगोन के विस्तार थाने में तालिबानी रिमांड में एक आदिवासी की मौत हो गई है. यह घटना दु:खद और निंदनीय है. गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश खरगोन की घटना पर एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच के आदेश दिए हैं. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने घटना को निंदनीय बताया है. गृह मंत्री ने कहा कि इस तरीके के मामलों पर सियासत नहीं होनी चाहिए. पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच में जहां लापरवाही मिलेगी वहां कार्रवाई होगी. अस्पताल थाने में कहां पर लापरवाही हुई है, इस बात की जांच होगी. प्रदेश में एक के बाद एक पूरी घटनाओं पर भी गृह मंत्री ने चिंता जताई है. कांग्रेस के खरगोन मामले पर जांच दल बनाने पर गृहमंत्री ने कहा है कि कांग्रेस हर मामले पर सियासत करती है. कांग्रेस पर साधा निशाना नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दतिया वाले मामले में अल्पसंख्यक की हुई पिटाई पर कांग्रेस ने जांच दल क्यों नहीं बनाया. इसका जवाब देना चाहिए. बहरहाल प्रदेश प्रदेश में आदिवासियों के साथ घट रही घटनाओं को लेकर सियासत घर में पहले नीमच उसके बाद अब खरगोन का मामला सामने आने पर अब सियासत जोर पकड़ती हुई नजर आ रही है. बता दें कि खरगोन की घटना की जांच के लिए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने पूर्व मंत्री विजयलक्ष्मी साधो की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई है. इस कमेटी में ग्यारसी लाल रावत, मुकेश पटेल, प्राची लाल मेड़ा, लाल सिंह मेड़ा को शामिल किया गया है.

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