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चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा में घमासान।

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में बहुत जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनैतिक दलों की तैयारीयां जोरों पर हैं लेकिन भाजपा चुनाव तैयारियों के मामले में सबसे आगे नजर आ रही है। जिसके चलते प्रतिदिन उद्धघाटन, लोकार्पण और जनसभाओं का दौर जारी है। इन्ही जनसभाओं में दिग्गज नेताओं द्वारा दिये जा रहे बयानों से राजनैतिक गलियारों के साथ ही डबल इंजन सरकार वाली भारतीय जनता पार्टी में भी माहौल गर्मा गया है। विधानसभा चुनाव में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव मैदान में उतरी भाजपा के बड़े नेताओं ने पार्टी हाईकमान की इस रणनीति का खुलकर विरोध तो नहीं किया लेकिन दिग्गज नेताओं ने बातों बातों में खुद को मुख्यमंत्री चेहरा साबित करना शुरू कर दिया है। जबकि अभी यह कहना भी मुश्किल है कि प्रदेश में सरकार भाजपा की बनेगी या फिर कांग्रेस की लेकिन इन दिग्गजों के दावों और बयानों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल जरूर मचा दी है। आइये आपको बताते हैं भाजपा के दिग्गज नेताओं ने क्या ऐसा क्या कहा, जिससे अपने आप को भावी मुख्यमंत्री सिद्ध करना माना जा रहा है। मामा को मुख्यमंत्री बनना चाहिए कि नहीं:- शिवराज सिंह। सीएम शिवराज सिंह अपनी सभाओं में कुछ ऐसे बयान भी दे रहे हैं। जिनकी सियासी गलियारों में खासी चर्चा है। लोग अलग-अलग कयास लगा रहे हैं। सीएम शिवराज सिंह ने एक सभा में कहा था कि ‘ऐसा भैया नहीं मिलेगा, जब चला ऊंगा तो बहुत याद आऊंगा’। इसके बाद एक सभा में उन्होंने जनता से पूछा ‘चुनाव लडूं या नहीं’ । वहीं, शुक्रवार को डिंडौरी की सभा में तो उन्होंने जनता से ये पूछ ‘लिया कि ‘मामा को मुख्यमंत्री बनना चाहिए कि नहीं’। उन्होंने जनता से दोनों हाथ उठवाकर मामा का साथ देने और भाजपा की सरकार का साथ देने का संकल्प भी दिलवाया। उन्होंने ये भी पूछा कि मुझे दिल से ईमानदारी से बताना। मैं कैसी सरकार चला रहा हूं? अच्छी सरकार चला रहा हूं कि बुरी सरकार चला रहा हूं? तो ये सरकार आगे चलनी चाहिए कि नहीं? मामा को मुख्यमंत्री बनना चाहिए कि नहीं ? मोदी जी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए कि नहीं ? मुख्यमंत्री साबित कर रहे हैं की जनता के बीच लोकप्रिय चेहरा में हूँ कोई और नहीं, उनके सख्त तेवर बता रहे हैं कि वह किसी के दवाव में काम कएने बाले नहीं है। मैं सिर्फ विधायक बनने नहीं आया:- कैलाश विजयवर्गीय। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर से प्रत्याशी कैलाश विजयवर्गीय लगभग रोजाना नई बात कह जाते हैं और बात भी ऐसी होती है कि दूर तलक जाती हैं। दरअसल कैलाश विजयवर्गीय ने एक सभा में ये कह हलचल मचा दी, कि वे सिर्फ विधायक बनने नहीं आए है, पार्टी की ओर से उन्हें बड़ी जवाबदारी मिलने वाली है। उन्होंने कहा ‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, भारतीय जनता पार्टी की सरकार फिर से बनने वाली है। मैं खाली विधायक बनने नहीं आया हूं। मुझे और भी कुछ बड़ी जवाबदारी मिलेगी पार्टी की ओर से। और जब बड़ी जवाबदारी मिलेगी तो बड़ा काम भी करूंगा। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हमने विकास किया है और हम विकास करेंगे।’ अभी इस बात के सियासी मायने निकाले ही जा रहे थे की कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को एक बैठक के दौरान यह कहकर फिर सबको चौंका दिया कि “मैं भोपाल में बैठे-बैठे इशारे करुंगा तो इंदौर में काम हो जाएगा.” इस बयान के मायने भी मुख्यमंत्री पद से जुड़े हुए हैं, क्योंकि सीएम भोपाल में रहकर ही सरकार चलाते हैं। हो सकता है ईश्वर की इच्छा हो में कुछ बनु:- गोपाल भार्गव। सागर के रहली में प्रसिद्ध देवी सिद्ध पीठ टिकीटोरिया धाम में गुरुवार को रोप वे के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने आए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा प्रत्याशी गोपाल भार्गव तो कैलाश विजयवर्गीय से भी दो कदम आगे निकल गए। भूमिपूजन कार्यक्रम में उन्होंने कहा – ‘मैं परेशान होता रहा, तो गुरु जी ने कहा जब इतने परेशान हुए हो तो, एक बार आप फिर चुनाव लड़ जाओ। ये अंतिम चुनाव होगा। ये जो भी गुरु का आदेश है, तो निश्चित रूप से मुझे भी लगा कि इस बार जो चुनाव हो रहे हैं। किसी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं किया जा रहा है। यह नहीं बताया जा रहा कि किसे हम मुख्यमंत्री बनाएंगे। जब गुरु का आदेश आया है तो हो सकता है। और मुझे भी लगा कि गुरु की कुछ इच्छा हो । ईश्वर की तरफ से बात आई हो। गोपाल भार्गव ने कहा- ‘ऐसा भी नहीं है कि मुझे कोई चाहत है। क्योंकि लोग सरपंच बनने के लिए परेशान रहते हैं, पार्षद बनने के लिए परेशान रहते हैं। भगवान ने तो मुझे सब कुछ बनाया है। नगर पालिका अध्यक्ष बनाया। इतने साल विधायक बनाया। इतने साल मंत्री बनाया और तो और सबसे बड़ा पद जो मुख्यमंत्री के बराबर होता है, मुझे नेता प्रतिपक्ष बनाया। बाद में सरकार बदली उस समय में मैं सोचता था कि मुझे नेता प्रतिपक्ष बनाया है। मैं 108 विधायकों का नेता था। कमलनाथ जी 113 विधायकों के नेता थे। लेकिन वह संभव नहीं हो पाया। हर चीज का मुहूर्त होता है। हो सकता है कि मेरी हस्तरेखा में, भाग्य रेखा में ना हो। लेकिन समय पता नहीं कब कैसा आ जाए। तो हो सकता है कि जगदंबा जी की इस परिषद से आपकी आवाज सत्य हो जाए। मैया से यही प्रार्थना करता हूं कि जो कुछ भी बनूं सब आपके लिए बनूं।’ अब क्या बनना वांकी है यह कहने की जरूरत नहीं पड़ती दिख रही है। इस चुनाव में बीजेपी ने कई बड़े चेहरे उतारे। भारतीय जनता पार्टी ने किसी भी नेता को सीएम फेस प्रोजेक्ट नहीं किया है। भाजपा आलाकमान की बात करें तो वह कई बार साफ कर चुका है कि पार्टी प्रदेश में बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ेगी। यानी इस विधानसभा चुनाव को पार्टी किसी को भी सीएम घोषित नहीं करेगी। अब तक इसी रणनीति के साथ पार्टी प्रचार-प्रसार कर रही है। वहीं पार्टी ने इस चुनाव में 3 केंद्रीय मंत्री समेत 7 सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा अब तक तीन लिस्ट जारी कर 79 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। खास बात यह है कि … Read more

ना सड़क बनी ना नाली की व्यवस्था सड़कों में बह रहा गंदा पानी स्वच्छता अभियान की उड़ाई जा रही धज्जियां ग्रामीणों में आक्रोश

कटनी ।उमरियापान । सरकार के द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत लाखों करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहता है कोई देखने सुनने वाला नहीं है ग्रामीणों ने बताया कि घुघरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव टोपी में ग्रामीणों को परेशानी से जूझना पड़ता है।गांव की अलग अलग सड़कें जर्जर हो चुकी है। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस रोड पर लोग कई बार हादसे का शिकार हो चुके हैं। गांव के अरविंद पटेल,अभिषेक पटेल,सुरेन्द्र यादव, सुमित पटेल,नीलेश पटेल,रामकुमार पटेल, सुमित दाहिया सहित अन्य लोगों बताया कि ग्राम पंचायत के द्वारा बनाई गई सड़कें बदहाल हो चुकी है। मार्ग पर जगह-जगह गढ्ढे खुले हुए हैं।गिट्टियां भी निकल आई हैं। इससे कई बार हादसे हो चुके हैं। लोगों ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।ग्रामीणों ने बताया कि गांव सड़क तो बनी लेकिन नाली का निर्माण कार्य नहीं हुआ। सड़क खराब हो चुकी है। अब घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बहता है। जिससे कि गंदगी सड़कों पर बहती है। लोग इसी गंदे पानी से होकर निकलते हैं। जिससे कि इस सड़क से निकलने वाले लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव गांव में साफ सफाई नहीं कराते हैं। जिससे की गांव में जगह जगह गंदगी फैली हुई है।उन्होंने बताया कि कुछ दिनों बाद नवरात्रि का पर्व शुरू होने वाला है। गांव में मातारानी की प्रतिमा स्थापित होने ही। सड़कों पर गढ्ढे और गंदगी होने से ग्रामीणों को परेशानी होती है।ग्राम पंचायत के द्वारा साफ सफाई नहीं कराई गई तो मातारानी के पंडाल में पहुचने वाले भक्तों को ज्यादा दिक्कत होगी।ग्रामीणों ने बताया कि टोपी गांव से नदी की तरफ जाने वाली सड़क भी पूरी तरह से खराब हो चुकी है। इसे अधूरी छोड़कर कागजों पर सड़क को पूरा बताकर राशि आहरित की जा चुकी है। सड़क आज भी अधूरा पड़ा है। इस सड़क पर भी गढ्ढे होने और गंदा पानी बहने से ग्रामीणों को दिक्कतें आती है।अधूरी सड़क होने से लोग नदी तक नही पहुँच पाते हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर अवि प्रसाद से समस्याओं का निराकरण कराये जाने की मांग किया है। इनका कहना है।टोपी गांव में सड़क और नाली निर्माण कार्य कराए जाने को लेकर प्रयास किये जा रहे हैं। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य कराया जाएगा।नवरात्रि पर्व के पहले गांव में साफ सफाई कराई जाएगी। कमलेश हल्दकार, सचिव ग्राम पंचायत घुघरा अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की समस्या का समाधान कब होता है

फरार कैदी को पुलिस ने किया गिरफ्तार, दीवार कूद कर भागा था लापरवाही बरतने वाला जेल कर्मचारी निलंबित

कटनी। पिछले 1 साल से हत्या के मामले में बंद विचाराधीन कैदी गत 6 अक्टूबर की दोपहर लगभग 2:30 बजे फरार होने में कामयाब हो गया था जबकि दूसरे बंदी को फरार होने से पहले ही जेल कर्मियों ने दबोच लिया था। जेल की दीवार फांदकर भागी हुई हत्या के आरोपी को 6, 7 अक्टूबर की दरमियानी रात लगभग 2:00 बजे जेल के सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया। जेल सूत्रों के मुताबिक भागने के प्रयास में हत्या का आरोपी जेल की दीवाल से कूदा था जिसके कारण उसका एक पैर टूट गया था, और वह जेल के ड्रेनेज सिस्टम के लिए बनाई गई नाली में छिप कर बैठ गया था। देर रात जब वह वहां से निकल कर भागने का प्रयास करने लगा तो उसे पकड़ लिया गया। यह था पूरा मामला कैमोर के लालनगर निवासी बंदी लल्लन कोल बड़ारी गांव में रेलवे साइडिंग में एक महिला की हत्या के मामले में एक साल से जिला जेल में बंद था। और कैदी बसंत एनडीपीएस के मामले में बंद था। 6 अक्टूबर शुक्रवार को जेल में मरम्मत का कार्य चल रहा था। दोपहर लगभग दो बजे छत की मरम्मत के लिए लगाई गई सीढ़ी में चढ़कर दोनों कैदी जेल से फरार होने की कोशिश करने लगे। इस कोशिश में लल्लन तो दीवार फांदने में कामयाब हो गया जबकि बसंत को दीवार फांदने के पूर्व ही पकड़ लिया गया। नाली में छिपा था आरोपी जेल अधीक्षक प्रभात चतुर्वेदी ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि जेल की दीवार फांदकर भागने में सफल हुआ लल्लन दीवार से कूदने के बाद जेल के ड्रेनेज सिस्टम के लिए बनाई गई नाली में घुसकर छिप गया था। उसने खुद को नाली में मौजूद कचरे से ढक लिया था। फरार हुए आरोपी को पकड़ने के लिए की में गठित कर तलाशी के लिए लगाई गई थी। इसी बीच रात लगभग दो बजे जब वह नाली से निकलकर भागने की कोशिश करने लगा तो जेल के सिपाही योगेंद्र पटेल ने उसकी आहट सुन ली और उसे दबोच लिया गया। अस्पताल में चल रहा इलाज जेल की दीवार कूदने के कारण आरोपी लल्लन का एक पैर टूट गया है जिसके कारण उसे इलाज के लिए शासकीय जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेल अधीक्षक ने बताया कि कैदी के फरार होने में जेल के सिपाही रामकरण श्रीवास की लापरवाही उजागर हुई है उसे तत्काल निलंबित कर दिया गया है। निलंबित किए गए जेल कर्मी रामकरण को मरम्मत कार्य के दौरान सीढ़ी की निगरानी के लिए लगाया गया था। उसी की सुरक्षा में चूक के कारण आरोपियों को भगाने का मौका मिल गया था।

“ठोस सबूत लाओ वरना 2 मिनट भी नहीं टिकेगा केस” सुप्रीम कोर्ट

हम आपको बता दे की मनीष सिसोदिया दिल्ली की आम आदमी की सरकर में मंत्री होकर मुख्य मंत्री अरविन्द केजरिवाल के सबसे करीबी नेता माने जाते है जिन पर आबकारी विभाग में शराब घोटाले को लेकर बड़े आरोप लगे है. इन आरोपों के चलते ED और सीबीआई ने लम्बी जाँच के बाद इन्हे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था तबसे मनीष सिसोदिया जमानत पर बाहर आने के लिए लगातार प्रयास कर रहे है. इसी मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चलने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ED और सीबीआई के अधिकारीयों से पूछे सवाल एवं कहा की “ठोस सबूत लाओ वरना 2 मिनट भी नहीं टिकेगा केस”

मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद के निर्विरोध अध्यक्ष बने अशोक कुमार सिंह सेंगर।

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद कार्य समिति एवं महा समिति की भोपाल में हुई बैठक में पंचायत परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न हुआ। इस चुनाव में पंचायत परिषद के संयोजक अशोक कुमार सिंह सेंगर को अग्रिम पाँच वर्षों 5-10-2028 तक के लिए निर्विरोध, मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद का अध्यक्ष चुना गया। श्री सेंगर ने सदस्यों द्वारा उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने पर सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद कार्य समिति एवं महा समिति सदस्यों की बैठक शनिवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक गांधी भवन श्यामला हिल्स भोपाल में संयोजक मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद अशोक कुमार सिंह सेंगर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिसमें उपस्थित सदस्यों ने सर्व प्रथम चुनाव सम्पन्न कराने की माँग की। सदस्यों की माँग के अनुक्रम में शीतला शंकर विजय मिश्र , मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं मुख्य महामंत्री ने सभा को सम्बोधित करते हुए 1961 से वर्तमान तक की मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद के पूर्व अध्यक्षों रविशंकर शुक्ल , भागवत साहू संसद सदस्य, कैलाश नाथ काटजू, श्यामाचरण शुक्ल, राजा नरेश चंद्र सिंह, गोविंद नारायण सिंह, विरेंद्र कुमार सकलेचा, अर्जुन सिंह, पी सी सेठी, सुंदर लाल पटवा, लोकेंद्र सिंह सांसद एवं श्री मती कलावती भूरिया एमएलए के द्वारा त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए गये क्रिया कलापों एवं पंचायती राज आंदोलन का परिचय कराते हुए सभागार में उपस्थित सदस्यों से उपरोक्त वर्णित अध्यक्ष / संयोजक गण के उत्तराधिकारी का नाम प्रस्तावित करने का आग्रह किया। महेंद्र सिंह बुंदेला जी , सरपंच , ग्राम पंचायत – जसवंत नगर , टिकम गढ़ ने अशोक कुमार सिंह सेंगर का नाम अग्रिम पाँच वर्षों के लिए मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद के अध्यक्ष पद हेतु प्रस्तावित किया जिसका समर्थन सुधाकर पंडागरे, रामानुज त्रिपाठी, भीम सिंह सरपंच सिहोर, राम बाबू पाटीदर सरपंच, कौशल प्रसाद पाठक , सरपंच एवं भूत पूर्व सरपंच एवं भूत पूर्व अध्यक्ष ज़िला परिषद भोपाल पति हिम्मत सिंह गोयल सहित उपस्थित समस्त सदस्यों के जन समूह ने प्रस्ताव का एक स्वर से समर्थन किया। इस प्रकार सर्व सम्मति से अशोक कुमार सिंह सेंगर को अग्रिम पाँच वर्षों 5-10-2028 तक के लिए निर्विरोध, मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद का अध्यक्ष चुना गया। श्री सेंगर को अधिकृत किया गया कि वे अपनी वर्तमान कार्यकारिणी की समीक्षा करके प्रदेश राज्य पंचायत परिषद के पदाधिकारियों एवं कार्य समिति सदस्यों का मनोनयन / नियुक्ति करके 15 दिवस के अंतर्गत सूची ऑल इंडिया पंचायत परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराएँ। निर्वाचन प्रक्रिया समाप्त होने के पश्चात उपस्थित त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित पदाधिकारियों, प्रति निधियों को अशोक सिंह जादौन अंतरिम अध्यक्ष अखिल भारतीय पंचायत परिषद, बहादुर सिंह प्रधानसचिव परिषद, राहुल वानखेड़े आदि एवं अन्य पदाधिकारियों ने सम्बोधित किया।

अवैध उत्खनन रोकने गए वन विभाग के अधिकारी पर ही भूमाफ़िया ने अधिकारी की गाड़ी पर ही जेसीबी चढ़ाई

उमरिया, अधिकारीयों को जानकारी मिली कि चंडिया रेंज के अंदर कुछ व्यक्तियों द्वारा अवैध खदानी गतिविधियां हो रही हैं एवं जेसीबी मशीन का अवैध मिट्टी उत्खनन के लिए उपयोग किया जा रहा है । इस अवैध उत्खनन की जानकारी प्राप्त होते ही, चंडिया रेंजर एक डिप्टी रेंजर और दो वन गार्ड के साथ अपने वाहन में अवैध उत्खनन को रोकने के गए. अवैध उत्खनन रोकने गए वन विभाग के अधिकारी पर ही भूमाफ़िया ने हमला कर दिया, लगातार जेसीबी का पीछा कर रहे अधिकारी की गाड़ी पर ही जेसीबी चढ़ा दी गई जैसे- तैसे अपनी गाड़ी से कूदकर अधिकारी और उनके साथियों ने अपनी जान बचाई वन विभाग के रेंजर रवि पांडे ख़ुद इस पूरी घटना को मीडिया को बताया तथा उनका एक विडिओ भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. प्रदेश में ऐसे ही कुछ घटनाये सामने आ रही हैं

” विधायक विपिन वानखेड़े और विवेक त्रिपाठी को एमपी एमएलए कोर्ट ने 1 साल की सजा सुनाई “

जबलपुर/भोपाल -: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट ने आगर-मालवा से विधायक विपिन वानखेड़े और युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी और अन्य 4 लोगों को 12 साल पुराने धरना प्रदर्शन के मामले में एक साल की सजा सुनाई है। वानखेड़े के अलावा इस मामले में कोर्ट ने युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी समेत कुल 6 लोगों को दोषी करार दिया है और 1 साल की सजा सुनाई और 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया । यह पूरा मामला साल 2011 का बताया जा रहा है। तब विधायक विधायक वानखेड़े और विवेक त्रिपाठी एनएसयूआई कार्यकर्ता थे। उन्होंने मध्य प्रदेश में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। भोपाल के जहांगीराबाद इलाके से होते हुए विपिन वानखेड़े और विवेक त्रिपाठी सैंकड़ों छात्रों को लेकर जब विधानसभा कूच कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दी। युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने कहा कि हम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं हम उच्च न्यायालय में अपील करेंगे हमें पूर्ण विश्वास है कि उच्च न्यायालय से हमें इंसाफ मिलेगा | उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह से परत दर परत शिवराज सिंह सरकार की लगातार पोल खुल रही है उससे सरकार डरी हुई है, सरकार की बौखलाहट स्पस्ट दिख रही है | भाजपा सरकार के दबाव में पुलिस ने झूठा प्रकरण दर्ज किया था ।

खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दाल और आटा पर 5 प्रतिशत जीएसटी (GST) दर लगाई जाएगी

दिल्ली, फाइनेंस मंत्रालय द्वारा 25 किलोग्राम तक के पैक किए और लेबल किए गए खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दाल और आटा पर 5 प्रतिशत जीएसटी (वस्त्र और सेवाकर) दर लगाई जाएगी। अब अनब्रांडेड खाद्य पदार्थ जैसे अनाज, दाल, दही, लस्सी और मुरमुरा भी कर के तहत कर लगाया जाएगा। इससे पहले, केवल ब्रांडेड आइटम पर ही कर लगता था।0

आईएएस की नौकरी से त्यागपत्र देने वाले राजीव शर्मा का भिंड पहुँचने पर जोरदाए स्वागत।

ग्वालियर/भिंड। शहडोल कमीश्नर के पद पर रहते हुए शासकीय सेवा से त्यागपत्र देने वाले आईएएस राजीव शर्मा पहली बार भिंड आए। भिंड के खंडा रोड पर अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के कई राजनेता समेत गणमान्य जन शामिल हुए है। कयास लगाया जा रहा है कि आईएएस शर्मा किसी राजनीति पार्टी से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरेंगे लेकिन उन्होंने अपने वक्तव्य में राजनीति न करने और भिंड के विकास का संकल्प लेने की बात कही है। भिंड जिले के मेहगांव कस्बे के ग्राम गढ़ी के रहने वाले राजीव शर्मा आईएएस की नौकरी से वीआरएस ले ली है। वे समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़कर भिंड की पहचान बदलने की बात कह रहे है। राजीव शर्मा का अभिनंदन कार्यक्रम राजनीति की तर्ज पर भिंड के खंडा रोड किया गया। वे 35 साल से शासकीय सेवा में डिप्टी कलेक्टर से लेकर कमिश्नर पद पर रहे। वे शहडोल कमिश्नर भी रह चुके है। शहडोल कमिश्नर के पद पर रहत हुए ही राजीव शर्मा ने शासकीय सेवा से त्यागपत्र द्व दिया लेकिन जब तक सरकार ने त्यागपत्र मंजूर किया तब तक उनकी पोस्टिंग वल्लभ भवन भोपाल में हो गई। वल्लभ भवन भोपाल में तैनाती के दौरान यहीं से वीआरएस लेकर भिंड पहुंचे हैं। आईएएस राजीव शर्मा शुक्रवार की शाम को गाड़ियों और समर्थको के काफिले के साथ खंडा रोड पर आयोजित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से मुलाकात की । वे गोल मार्केट से खंडा रोड पर शहरवासियों से राजनेता की तर्ज पर मुलाकात करते हुए कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा आइएएस शर्मा का फूलमाला से स्वागत किया। मंच को संबोधित करते शर्मा ने कहा कि भिंड हमारी मां है। जन्मभूमि है। इस माटी से मेरा ममत्व जुड़ा है। आजादी के इतने साल बाद भी हमारा भिंड पिछड़ा है। बस मेरे जीवन का यह उद्देश्य है कि भिंड से पिछड़ापन दूर करके विकसित शहर बना सकें। इसी विचार के साथ सरकारी सेवा से दूर होकर भिंड की सेवा करने का सकंल्प लिया है। उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में सर्व सुविधाएं है। मेरे एक बटन दवाने पर सर्वसुविधाएं मिलती है परंतु जब मैं भिंड की ओर देखता हूं। यहां के लोगों के जीवन की ओर देखता हूं तो मन व्याकुल हो उठता है। मन में पीड़ा होती है। बस यह कारण है कि मैं फिर से अपनी माटी की ओर लौटा हूं। जीवन का लक्ष्य राजनीति नहीं, भिंड का विकास है। आईएएस शर्मा ने कहा कि मेरे नौकरी छोड़ने की चर्चा होने पर कई राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव लड़ने के लिए प्रस्ताव आए। मेरे जीवन का लक्ष्य राजनीति करना नहीं है। मेरा उद्देश्य भिंड को विकसित बनाना है। इसी उद्देश्य से आया हूं। उन्होंने कहा कि मैं कई जिलों में रहा हूं। मालवा का किसान एक लाख से लेकर एक करोड़ तक की फसल बेचता है। क्या कभी भिंड के किसान ने एक करोड़ की एक साल में फसल बेची है। भिंड में संसाधनो की कमी बहुत कमी है। उचित संसाधनों और उन्नत तकनीक से खेती करने से किसान समृध्द होंगे। उन्होंने बताया कि अपने गौरी किनारा,वनखंडेश्वर मार्ग स्थित पैतृक निवास को छात्रों के हित में निशुल्क वातानुकूलित लाइब्रेरी में परिवर्तित किया इस दौरान 7 दिन भिंड में रहा और भिंड के वर्तमान हालात देखकर यह चिंतन किया कि भिण्ड विकास में पीछे क्यों? इस पीड़ा से द्रवित होकर अब कमिश्नर पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपनी जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाने का निर्णय किया है, जिससे भिण्ड जिले को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके। राजीव शर्मा की पारिवारिक प्रष्ठभूमि और संक्षिप्त जीवन परिचय। आईएएस राजीव शर्मा के बाबा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे तथा आजादी के उपरांत कमुनिस्ट आंदोलन से जुड़ गए, कामरेड बाबा जनकराम अपने निजी प्रयासों से एक संपादक के रूप में अखबार भी निकालते थे। राजीव शर्मा के पिता रामनारायण शर्मा ने भी शासकीय सेवा छोड़कर 1967 में सार्वजनिक विद्यालय की स्थापना की थी। निर्धन और कमजोर वर्ग के सहायता हेतु संचालित मांटेसरी पद्धति का यह विद्यालय अपने आप में बहुत अनूठा था। गुन्दे मास्टर की कोठी में इसी सार्वजनिक मांटेसरी विद्यालय में राजीव की प्रारंभिक शिक्षा शिक्षा दीक्षा हुई थी। गौरी किनारे किरण निवास में जन्मे राजीव बचपन से ही योगाश्रम से जुड़ गए थे जहाँ उन्होंने योग, प्राणायाम, ध्यान सीखा और गौरी सरोवर में तैराकी भी सीखी। 1975 में बाबा और 1977 में पिता की असमय मृत्यु ने परिवार को दुख के भंवर में फँसा दिया। तब चाचा शिवचरण उपाध्याय ने विद्यालय और परिवार की जिम्मेदारी संभाली। काटनजीन स्कूल से कक्षा 8 पास कर राजीव शासकीय बहु.उ.मा. विद्यालय क्रमांक 1 में गए, तथा स्काउट और NCC के अलावा साहित्यक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाषण, वाद विवाद, अभिनय तथा काव्य पाठ में विजेता बने।तत्पश्चात MIS कॉलेज से इतिहास में MA किया, छात्र संघ का चुनाव जीता। दैनिक उदगार, साप्ताहिक वनखडेश्वर, गौरी सरोवर आदि में पत्रकारिता की। 1978 में तरुण कला संगम की स्थापना की। एनएसएस में भिण्ड और मप्र का राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिनिधित्व किया। 21 वर्ष की आयु में प्रथम प्रयास में ही मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा टॉप कर प्रशासनिक सेवा में चले गए। शहडोल संभाग में आदिवासियों के बीच फुटबॉल को घर घर तक पहुंचाया जिसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात में कर चुके हैं। डिप्टी कलेक्टर से कमिश्नर पद तक की यात्रा में श्री राजीव शर्मा ने अपनी प्रशासनिक दक्षता के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। मंडला जिले में हर टोला मजरे को मुख्य सड़क से जोड़ने की बात हो या नरसिंहपुर में जलाभिषेक योजना की बात हो, शहडोल में कुओं को रिचार्ज कर भूजल स्तर को ऊपर उठने की बात हो या शाजापुर में संतरा क्रांति करके किसानों को समृद्ध बनाने की बात हो, राजीव शर्मा ने जहां-जहां भी वह पदस्थ रहे हैं वहां उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता से आम जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाया है। आईएएस अधिकारी रहते मिली कई उपलब्धियां। भारतीय प्रशासनिक सेवा में 35 वर्ष तक सेवाएं देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपनी जन्मभूमि भिंड को विकासपथ पर आगे बढ़ाने का संकल्प लेने वाले राजीव शर्मा ने अपने सेवाकाल में किये गए बेहतरीन कार्यों के लिए कई उपलब्धियां … Read more

फूड पॉयजनिंग का शिकार lNIPE छात्रों से मिले केंद्रीय मंत्री सिंधिया।

ग्वालियर। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे, यहां उन्होंने मंगलवार को फूड पॉयजनिंग का शिकार होने के बाद अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के 100 से ज्यादा छात्रों अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना है। यहां 15 छात्र भर्ती मिले हैं जिनमें एक वेंटीलेटर पर था, जबकि अधिकांश छात्रों को उपचार के बाद आराम मिलने पर अस्पताल से डिसचार्ज किया जा चुका है।छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर अस्पताल के डॉक्टरों से जानकारी ली और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिये केन्द्रीय मंत्री सिंधिया सभी छात्रों के परिजनों से मुलाकात की है। यहां छात्रों ने बताया कि उन्होंने पनीर खाया तभी उनकी हालत बिगड़ने लगी थी। अस्पताल से बाहर निकलने के बाद केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान में इतनी संख्या में वहां पढ़ने वाले छात्रों का फूड पॉइजनिंग का शिकार हो जाना, यह कोई साधारण बात नहीं है। मामले की पूरी जांच की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी कोई भी हो बच नहीं सकेगा। सिंधिया ने कहा कि मैंने छात्रों और उनके परिजन से बातचीत कर उनका हाल चाल जाना है। वेंटीलेटर पर जो छात्र है उसकी भी हालत में सुधार है। ऐसे समझिए पूरा मामला शहर के रेसकोर्स रोड स्थित महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान में तीन दिन पहले मंगलवार को उस समय हड़कंप मंच गया था, जब एक सैकड़ा से अधिक छात्र-छात्राएं फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए थे। पूछताछ में छात्रों ने बताया था कि सोमवार रात को उन्होंने डिनर में सादा चपाती के साथ उनको खाने में पनीर दिया गया था। पनीर ग्रेवी वाला था। पनीर खाने के बाद छात्र अपने अपने कमरे में सो गए थे, लेकिन सोमवार-दरमियानी रात से ही छात्रों को पेट में दर्द और दस्त की शिकायत होने लगी थी। इनमें कुछ छात्रों को उल्टियां होने लगीं थी। उस समय तो यह बात सामान्य लग रही थी, लेकिन मंगलवार सुबह होते-होते हालत बद से बदतर होने लगे थे। और करीब 100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं बुरी तरह से उल्टी दस्त से ग्रसित होने लगे थे। इसके बाद छात्र-छात्राओं को बीमार होता देख महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के अधिकारी और कर्मचारियों ने तत्काल सभी को कैंपस में बने अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन अस्पताल में बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ और उनकी हालत हर मिनट बिगड़ती जा रही थी, इसके बाद इन सभी छात्रों को गंभीर हालत में जयारोग्य के हजार बिस्तर के अस्पताल में मंगलवार रात को भर्ती कराया गया था। खाद्य विभाग चुका है सैंपल महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के 119 छात्रों के फूड पॉयजनिंग का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती होने खबर मिलने के बाद कॉलेज पहुंचे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कार्यवाही करते हुए महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान की किचन से पनीर, दूध, दही घी, तेल, आटा, चावल, सलाद, मसाले सहित एक दर्जन खाद्य सामग्री के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए थे। सैंपल की जांच आने पर यह स्पष्ट हो पाएगा कि किचन में बने खाद्य पदार्थ खाने से फूड पॉइजनिंग के शिकार होकर तबीयत बिगड़ी थी या नहीं । पुलिस कर रही है जांच बड़ी संख्या में छात्रों के फूड पॉयजनिंग का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती होने की सूचना अस्पताल के डॉक्टरों और कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अस्पताल और कॉलेज पर पहुंच कर आवश्यक कार्यवाही करने के साथ ही मैस के प्रभारी अधिकारियों से मामले में जानकारी ली इसके बाद से मैस की किचिन स्टाफ, सुपरवाइजर व अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक ने की आत्महत्या।

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक के आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक ने सल्फास खाने के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद आत्महत्या के मामले में मर्ग कायम कर लिया है। आत्महत्या के मामले में पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है लेकिन ग्रह क्लेश के चलते डिप्रेशन में रहने की बात जरूर सामने आई है। पुलिस गंभीरता से मामले की जांच कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक सिल्वा मुरुगन ने आत्महत्या के लिए पहले कोल्ड ड्रिंक में चूहे मारने वाला सल्फास मिलाकर पी लिया, इसके बाद नींद की कई गोलियां भी खाईं थी। जब देर रात उनकी हालत बिगड़ने लगी तब घरवालों को पता चला जिसके बाद परिजनों ने तत्काल उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया, जहां हालत नाजुक होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अस्पताल के आईसीयू में तीन दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल से उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद पहुंची मुरार थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में पता लगा है कि अधीक्षक सेल्वा मुरुगन ने पत्नी से विवाद के चलते 4 माह पहले भी आत्महत्या की कोशिश की थी। पुलिस के अनुसार मृतक मुरुगन का अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। आत्महत्या की वजह का खुलासा फिलहाल नहीं हो सका है। पुलिस ने बताया कि अभी तक परिजनों द्वारा कोई भी बयान दर्ज नहीं कराया गया है। अंत्येष्ठि होने के बाद उनसे पूछताछ की जाएगी। चार माह पहले भी की थी आत्महत्या की कोशिश। जांच में पता लगा कि अधीक्षक सेल्वा मुरुगन ने 4 माह पहले भी अपनी जान देने की कोशिश की थी। पत्नी से विवाद होने के बाद डिप्रेशन में आये सेल्वा मुरुगन 31 मई को खुदकुशी करने की मंशा से ऑटो से ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे, लेकिन इसकी भनक पाकर पीछे से उनकी पत्नी भी वहां पहुंच गईं थी। जिसके बाद उनकी पत्नी ने स्टेशन डायरेक्टर और आरपीएफ की मदद से खोजबीन कर उन्हें आत्महत्या करने से रोक लिया था। बताया जा रहा है कि इसके बाद वहां पर अधिकारियों ने पति-पत्नी के बीच विवाद को खत्म कराने के लिए उनकी काउंसलिंग भी की थी।

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