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बीटीआर में टिकट की कालाबाजारी से अधिकारियों की दिवाली

The corruption in the purchase of tickets in the BTR is a celebration for the officials more than Diwali. उदित नारायण बांधवगढ़:- टाइगर रिजर्व में स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाले पड़े हैं, और यहां अधिकारियों की जमकर कमाई का आरोप लगा है। स्थानीय जनों में पर्यटकों के टिकट के कालाबाजारी का चर्चा जोरों पर है। विभाग के कर्मचारियों के ऊपर चहेतों और पूंजीपतियों के दबाव में टिकट का बड़ा खेल किया जा रहा है, लेकिन कार्यवाही के नाम पर मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चुप्पी साध रखी है। लिहाजा स्थानीय जनों की माने तो उनके अनुसार टिकट के कालाबाजारी के इस खेल में नीचे से ऊपर तक कि कड़ी के संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जिसका खामियाजा दूर से आने वाले सैलानियों को उठाना पड़ता है और बांधवगढ़ की सफारी का सपना बुनकर आने वाले पर्यटक बगैर सैर के ही वापस लौट जाते हैं। वीआईपी टिकट के नाम पर किये जाने वाले इस कारनामे ने बीटीआर की समूची व्यवस्था ही चौपट कर दी है। कारनामे का कौन है जिम्मेदार – बांधवगढ़ में कई पूंजीपतियों के रिसोर्ट हैं, साथ ही कई बड़े  पहुंच का दम भरने वाले वे लोग भी जो टिकट बुकिंग का काम करते हैं। दिवाली की इस भीड़ में जहां लोगों को सफारी के लिए मसक्कत करनी पड़ रही थी, तो वहीं उक्त लोग टिकट का जुगाड़ बीटीआर के कर्मचारियों के सह पर बना रहे थे। बांधवगढ़ में इससे पूर्व भी टिकट के कालाबाजारी के कारनामे से पर्दा उठ चुका है, लेकिन टिकट का खेल ज्यों का त्यों अभी भी जारी है। सूत्रों के मुताबिक़ वीआईपी के नाम पर टिकट की बुकिंग कर गाढ़ी कमाई की जा रही है, इसमें बीटीआर के कई अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। यही नहीं हर विभाग के जिम्मेदार मिलकर राजस्व को चुना लगाने में जुटे हैं, वहीं सैलानियों को भी सफारी के लिए कई कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है। अफसर ही लूट के कटघरे में – पूंजीपति रिसोर्ट सञ्चालक अपने रसूख के बल पर टिकट तो बुक कर लेते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर सक्रीय कुछ दलाल बड़े अधिकारी और वीआईपी के नाम पर टिकट लेकर महंगे दामों में पर्यटकों को सफारी करा रहे हैं। यही नहीं कई वर्षों से एक ही स्थान पर जमें स्थानीय शासकीय विभागों के कर्मीयों पर भी टिकट कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं, इन कर्मियों द्वारा शासकीय प्रोटोकॉल वाहनों को भी पर्यटक सफरी के लिए उपयोग कर कमाई का जरिया बना लिया गया है। जिस तरह से व्यापक पैमाने पर अधिकारियों और अन्य वीआईपी के कोटे की टिकटों के नाम पर खेला किया जा रहा है उससे समूची व्यवस्था चौपट हो रही है साथ ही पर्यटन से मिलने वाले राजस्व की हानि भी हो रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि वीआईपी के नाम पर जितनी भी टिकट बुकिंग हुई है उनकी जांच कर दी जाए तो मामले में शामिल अधिकारियों और व्यक्तियों के नामों का खुलासा हो जाएगा।

कलेक्टर ने किया नेहरू नगर, रंगमहल, बागसेवनिया, दानिश एवं बिट्टन मार्केट चौराहों का निरीक्षण.

Collector inspected Nehru Nagar, Rangmahal, Bagsevaniya, Danish, and Bittan markets yesterday. ट्रैफिक जाम एवं अव्यवस्था से निजात पाने इन चौराहों का होगा चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण, चौराहों के अवैध अतिक्रमण हटाये जायेंगे। फ्री लेफ्ट टर्न का चलाया जायेगा अभियान, नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी को प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के दिये निर्देश. साकिब कबीरभोपाल: कलेक्टर आशीष सिंह ने मंगलवार की सुबह नेहरू नगर चौराहा, रंगमहल चौराहा, बागसेवनिया चौराहा, दानिश चौराहा एवं बिट्टन मार्केट चौराहा का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर निगम आयुक्त फ़्रेंक नोबल ए, एडीएम श्री हरेन्द्र नारायण सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री सिंह ने निरीक्षण के बाद कहा कि इन चौराहों पर आये दिन ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है जिससे उत्पन्न अव्यवस्था के चलते कई बार हादसे भी देखे गये है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिये चौराहों का चौड़ीकरण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने एवं जाम की समस्या से निजात पाने के लिये यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन चौराहों का सौंदर्यीकरण भी होगा। उन्होंने चौराहों के चौड़ीकरण में डिवाइडर एवं फ्री लेफ्ट टर्न को सुव्यवस्थित बनाने के निर्देश दिये जिससे ट्रैफिक का मूवमेंट व्यवस्थित रहे और जाम जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। इसके साथ ही चौराहों पर स्थित अवैध अतिक्रमण को भी हटाया जायेगा। कलेक्टर श्री सिंह ने संबंधित विभागों नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी को चौराहों के चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिये की जाने वाली प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिये

सिर्फ वेबसाइट तक ही सिमटा कामकाज, शिवराज सरकार का आनंद विभाग.

Work of the Anand Department of the Shivraj government is confined only to the website. Manish Trivedi भोपाल: वर्ष 2016 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आनंद विभाग (Ministry of Happiness) के गठन को मंजूरी दी थी. मोटे तौर पर इसका मूल मकसद राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर मापकर उनका जीवन खुशहाल बनाने का प्रयास करना था. इसकी प्रेरणा मुख्यमंत्री चौहान को भूटान के राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक से मिली थी. इसलिए मध्य प्रदेश का एक ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ जारी करने की भी बात कही गई थी, जो राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर बताता. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उनके इस विभाग के कामकाज की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि संस्थान के कार्यों के निष्पादन हेतु 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 रिक्त हैं. वहीं, वेबसाइट पर जिन 17 पदाधिकारियों का उल्लेख है, उनमें सामान्य सभा के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री, कार्यपालन समिति के अध्यक्ष के तौर पर राज्य के प्रमुख सचिव और सीईओ के अलावा बाकी 14 पदों में से 7 रिक्त हैं. द वायर में आनंद विभाग के ऊपर एक रिपोर्ट के अनुसार आनंद विभाग पर एक रिपोर्ट के अनुसार  संस्थान की ओर से आनंद के विषय पर शोध/अनुसंधान के लिए ‘आनंद रिसर्च फेलोशिप’ भी जारी की जाती है, लेकिन आज तक कोई शोध प्रकाशित नहीं हुआ है. लोगों के जीवन में आनंद घोलने का बजट 10 पैसा प्रति व्यक्ति है आनंद विभाग का गठन एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुआ था. वर्ष 2018 में सरकार बदलने पर इसका विलय अध्यात्म विभाग में कर दिया गया. वापस भाजपा की सरकार आने पर इसे फिर से स्वतंत्र कर दिया गया. वर्ष 2022-23 में इसको 5 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें 2 करोड़ वेतन भुगतान, कार्यालय किराया, बिजली-पानी व्यय, प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार के लिए थे. 3 करोड़ का पोषण अनुदान था, जिससे विभाग को आनंद के प्रसार के कार्यक्रमों का संचालन करना था. विभाग केवल 4.22 करोड़ की राशि खर्च कर सका. वित्तीय वर्ष 2021-22 के उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी विभाग द्वारा आनंद के प्रसार के लिए चलाए जाने वाले सभी कार्यक्रमों पर केवल 79 लाख रुपये खर्च किए गए, जो राज्य की लगभग 8 करोड़ आबादी के लिहाज से लगभग 0.10 पैसा प्रति व्यक्ति होता है. हालांकि, इस बजट को पर्याप्त मानते हैं. उनका कहना है, ‘हम वालंटियर (स्वयंसेवी) के जरिये काम करते हैं. यह एक नई अवधारणा लाने की शुरुआत है, समय तो निश्चित तौर पर लगेगा. बजट हमारे लिए पर्याप्त है, कोई समस्या नहीं है.’ ‘आनंद विभाग’ या ‘सरकारी अधिकारी/कर्मचारी आनंद विभाग?’ स्वयंसेवी आनंदकों (84 हजार से अधिक) में बड़ी संख्या में शासकीय सेवक शामिल हैं (दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक), उनमें भी शिक्षा विभाग के कर्मियों की संख्या इनमें अधिक है. अशासकीय व्यक्तियों में समाजसेवी, पत्रकार जैसे ज़मीनी सक्रियता वाले पेशों के लोग शामिल हैं. वहीं, वेबसाइट पर उपलब्ध 268 आनंदम सहयोगियों की सूची में 60 फीसदी से अधिक शासकीय कर्मचारी हैं. भले ही पूरी योजना को वॉलंटियर रूप से सफल बनाने का ख्वाब देखते हों लेकिन द वायर से बातचीत में ‘अशासकीय आनंदम सहयोगी’ कहते हैं कि हम काम-धाम छोड़कर अपने मन की संतुष्टि के लिए लोगों में खुशियों बांटने के प्रयास करते हैं, तो कम से कम विभाग को हमारे पानी-पेट्रोल का खर्च तो देना ही चाहिए. विभाग के गठन के समय राज्य का हैप्पीनेस इंडेक्स जारी करने को इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य बताया गया था. आईआईटी खड़गपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने सरकारी खर्च पर भूटान के दौरे भी किए थे. लेकिन, तब से अब तक नतीजा सिफर ही रहा है. कभी कोरोना, तो कभी किसी अन्य कारण से बार-बार राज्य आनंद संस्थान की ओर से इंडेक्स जल्द ही जारी करने का आश्वासन दिया जाता है. वेबसाइट पर उपलब्ध विभागीय कामकाज की उपरोक्त जानकारी किसी को भी बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और है. ‘द वायर’ ने इस दौरान कई ‘आनंदम सहयोगी’ से बात की. इनमें एक डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा भी थे. उनका नाम वेबसाइट पर ग्वालियर के ‘आनंदम सहयोगी’ के रूप में दर्ज है. द वायर से बातचीत में उन्होंने बताया, ‘जो भी दिख रहा है वो केवल कागजों में है, धरातल पर शून्य है. आपको केवल संस्थान के ईमेल मिलेंगे, वेबसाइट पर सब कुछ मिलेगा, ज़मीन पर कुछ भी नहीं है. विभाग की सक्रियता केवल फोटो खिंचवाकर अपलोड करने तक है. थोड़ी-बहुत गतिविधियां कर देते हैं, जिससे फोटो बन जाते हैं और वेबसाइट पर अपलोड हो जाते हैं. कुल मिलाकर यह केवल एक वेबसाइट के अलावा और कुछ नहीं है. डॉ. शर्मा के दावों की ज़मीनी पड़ताल की और राज्य के विभिन्न तबकों से जुड़े लोगों से बात करके जाना कि वह ‘आनंद विभाग ’ या ‘राज्य आनंद संस्थान’ के कामकाज को किस तरह देखते हैं या उसके कामकाज के बारे में कितना जानते हैं. शिवपुरी और श्योपुर ज़िलों में आदिवासी समुदाय के बीच पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि समस्यों पर सक्रियता से काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अजय यादव को तो पता ही नहीं है कि ऐसा कोई विभाग भी है जो लोगों का जीवन खुशहाल बनाने के लिए कार्य करता है. ‘मैं करीब दशकभर से वंचित तबकों के बीच काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने आज तक आनंद विभाग या राज्य आनंद संस्थान का नाम ही नहीं सुना और न ही कभी इसके द्वारा किया गया कोई आयोजन देखा.’ सिवनी ज़िले के केवलारी खेड़ा गांव के किसान सतीश राय, जो किसान संबंधी समस्याओं पर भी मुखर रहते हैं, को भी नहीं पता कि लोगों के जीवन में आनंद का प्रसार करने के लिए भी कोई विभाग काम कर रहा है. वे आगे कहते हैं, मेरे जैसे सक्रिय किसान को भी ऐसे किसी विभाग या उसके कार्यक्रमों और आयोजनों की जानकारी नहीं है. कोई भी ग्रामीण इस विभाग की गतिविधियों के बारे में नहीं बता पाएगा कि इसके कार्यक्रम कब और कहां होते हैं.’ पूरे राज्य में पोषण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल अधिकार और नागरिक अधिकारों पर काम करने वाली भोपाल की एनजीओ विकास संवाद के राकेश मालवीय को विभाग के गठन … Read more

सड़क में घूमते मवेशियों से बड़ा दुर्घटना का खतरा जिम्मेदारों ने शादी चुप्पी.

The authorities remained silent on the imminent danger of accidents posed by roaming livestock on the roads Manish Trivedi – Sahara Samachaar कटनी। जिस देश में गव वंश को गौ माता का दर्जा दिया गया है आज स्थिति ऐसी है कि कोई अपने स्वयं के पालतू मवेशी बाधने को तैयार नहीं है लाभ तो सभी लेते हैं लेकिन सड़क में आवारा छोड़ देते हैं जिससे गोवंश को भी नुकसान होता है और इंसानों को भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंशों के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है गौशालाएं तो बनी हुई हैं लेकिन गोवंश के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है फसलों को भी नुकसान हो रहा है किसानो से बात करने पर पता चला कि पहले काजी हाउस की व्यवस्था थी तो लोगों को डर था लेकिन अब वह भी नहीं है लोग मवेशी बाधने को तैयार नहीं है सहारा समाचार से बात करते हुए राहगीर ने बताया कि गोवंशों के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए जिससे फसलों को भी नुकसान ना हो दुर्घटनाएं भी ना हो इस विषय पर कड़ाई से पालन होना चाहिए.

धर्म संसद में गाय को गौमाता का राष्ट्रीय दर्जा देने संतों ने उठाई आवाज.

Saints raised their voices in the Parliament of Religion to confer the national status of ‘Gau Mata’ (Mother Cow) on the cow. सरकार से जल्द गौमाता का राष्ट्रीय पशु का दर्जा हटाने की मांग, दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के संतों ने किया आंदोलन, हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने में यह एक अच्छा कदम साबित होगा Udit Narayan दिल्ली। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गौमाता की रक्षा धर्म रक्षा है और गोमाता की हत्या धर्म हत्या है। अगर धर्म का रक्षण और पोषण करना है तो गाय का रक्षण और पोषण करना शुरू कर दें, धर्म का रक्षण और पोषण अपने आप हो जाएगा। जगतगुरु शंकराचार्य सोमवार को रामलीला मैदान में आयोजित गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा आंदोलन के विशाल महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। शंकराचार्य ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि गोमाता के प्रति हमारी भावना को सत्ता में बैठे लोग नहीं समझ रहे है। एक तरफ देश में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सबको अमृत देने वाली गौमाता की दुर्दशा हो रही है। महासम्मेलन में अलग-अलग राज्यों से गौमाता के लिए समर्पित साधु-संत, गौभक्त, गौशाला संचालक, सामाजिक, धार्मिक और सनातन संस्कृति से संबंधित संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तीन पीठों के शंकराचार्य ने आंदोलन को दिया अपना समर्थन भारतीय गौ क्रांति मंच के संस्थापक और महासम्मेलन के आयोजक गोपालमणि महाराज ने बताया कि अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य ने वीडियो संदेश भेजकर इस आंदोलन को अपना समर्थन और आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि गौमाता का खोया गौरव लौटाने का एकमात्र रास्ता है कि केंद्र सरकार गाय को पशु के दर्जे से हटाए और राष्ट्रमाता का दर्जा दे। गोपालमणि महाराज ने कहा कि गाय हमारे धर्म का हिस्सा है। जबसे हम लोगों ने गाय को धर्म से अलग किया, तभी से गौमाता की दुर्दशा शुरू हो गई है। जो इंसान गौमाता को धर्म की दृष्टि से देखेगा, वही उसकी रक्षा कर सकता है, इसलिए गाय को धर्म की तरह अपनाना होगा। गौमाता में 33 करोड़ देवी-देवता का वास: देवकीनंदन ठाकुर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि गौमाता में 33 करोड़ देवी-देवता बसते है। अगर गाय की हत्या होती है तो वह सनातन धर्म की हत्या है। आरएसएस की ममता दास ने कहा कि गौमाता के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकना जरूरी है। इसके लिए हम सबको मिलकर संकल्प लेना होगा। राजस्थान के स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि हमारे जितने भी वैदिक कर्म है, वे सभी गौमाता के बिना संपन्न नहीं होते। हमारी सनानत संस्कृति के अनुसार गाय को माता माना गया है, लेकिन हम गाय का दूध पीने के बाद उसे बाहर निकाल देते हैं, जबकि भगवान ने भी कहा है कि मैं गौ के भीतर रहता हूं। हमारी पूरी संस्कृति और सामाजिक ताना-बाना गौमाता के इर्द गिर्द घूमती है। इसलिए सभी देशवासी गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करवाने के लिए आंदोलन करने के साथ-साथ स्वयं भी गौमाता का सम्मान करें। भाजपा सरकार गौमाता को राष्ट्रीय दर्जा देने में देरी नहीं करेअब देखना यह है कि केंद्र सरकार संतों की मांग गाय को राष्ट्रीय गौमाता का दर्जा देती है या विचार में किसान आंदोलन जैसा स्वरूप लेने के लिए संत महात्माओं को विवश होना पडेगा। कुछ धार्मिक गुरूओं से चर्चा करने के बाद यह कहा जा सकता है कि जैसा कि भाजपा अपने आपको सनातन के प्रति वचनवद्ध है, तो फिर भाजपा सरकार गौमाता को राष्ट्रीय दर्जा देने में देरी नहीं करनी चाहिए। पूर्व में भी भाजपा सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सनातन की रक्षा के लिए अनुकरणीय कदम उठा चुकी है। भाजपा सरकार के लिए यह अच्छा मौका है कि वह गौमाता को राष्ट्रीय दर्जा देती है। जिससे हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने में एक अच्छा कदम साबित होगा।

मप्र के हारे थके भाजपा नेत और मंत्री चले तेलंगाना, करेंगे प्रचार.

Tired after the elections in Madhya Pradesh, BJP leaders and ministers have gone to Telangana to campaign. मप्र को निपटाकर अब तेलंगाना को निपटाएंगे नेता, मंत्री, तेलंगाना के चुनाव में शिवराज कैबिनेट के आधा दर्जन मंत्रियों की लगी ड्यूटी, चुनाव प्रचार में होंगे शामिल, राजस्थान में सीएम की होंगी सभाएं. अपने आपको मप्र और देश का बड़ा नेता कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय से पार्टी ने किया किनारा. मप्र विधानसभा चुनाव के बाद कैलाश विजयवर्गीय का पार्टी ने घटाया कद घटा, बने छोटे नेता. Udit Narayanभोपाल। मध्यप्रदेश में चुनाव के बाद अब बीजेपी हाईकमान ने तेलंगाना में हो रहे चुनाव के लिए कमर कस ली है। मध्यप्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता भी अब तेलंगाना चुनाव में मोर्चा संभालेंगे। इसके लिए एमपी भाजपा से एक दर्जन से अधिक नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि अपने आपको मप्र और देश का बड़ा नेता कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय से फिलहाल उनसे किनारा कर लिया। पार्टी ने जिन 22 नेता और मंत्रियों की सूची बनाई, उसमें उनका नाम नहीं है। पार्टी ने उन्हें प्रचार प्रसार करने लायक नेता नहीं समझा है। एक तरह से उनके कद का छोटा आंक लिया है। अब वे छोटे कद के नेता बन गए हैं। वहीं शिवराज कैबिनेट के आधा दर्जन मंत्रियों की चुनावी प्रचार में ड्यूटी लगा दी गई है। सभी इसी वीक से तेलंगाना की अलग-अलग विधानसभाओ में डेरा डालेंगे। इनमें कई मंत्री और संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजस्थान में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्हें स्टार प्रचारक बनाया गया है। बता दें, राजस्थान में 25 और तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होगा। फिलहाल, यहां भाजपा का प्रचार जारी है। 22 नेता जाएंगे तेलंगाना

कांग्रेस को जीत का यकीन, बन रही है पक्षपात करने वाले अधिकारियों की लिस्ट.

Congress is confident of victory, and a list of officials prone to bias is being prepared. 230 प्रत्याशियों को पत्र लिख 30 नवंबर तक मंगाए भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले अधकारियों के नाम, मध्य प्रदेश में कांग्रेस बनाने लगी अभी से सबक सिखाने वाले अफसरों की लिस्ट Udit Narayanमध्य प्रदेश में मतदान के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी 230 उम्मीदवारों को एक लेटर लिखकर उन अधिकारियों का नाम बताने को कहा है जिन्होंने कथित तौर पर नियमों के खिलाफ भाजपा के पक्ष में काम किया। भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदान के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी 230 उम्मीदवारों को एक लेटर लिखकर उन अधिकारियों का नाम बताने को कहा है कि जिन्होंने कथित तौर पर नियमों के खिलाफ काम करते हुए भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाया। मध्य प्रदेश में जीत का दावा कर रही कांग्रेस पार्टी को यदि सत्ता मिलती है तो ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, भाजपा ने कहा है कि इस कदम के सहारे कांग्रेस पार्टी अपनी हार के लिए बहाना तलाश रही है। भाजपा को फायदा पहुंचाने नियमों की अनदेखी कीअपने सभी उम्मीदवारों को भेजे खत में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी (एमपीसीसी) ने दावा किया कि 17 नवंबर को मतदान के दिन बनाए गए कंट्रोल रूम में ऐसे अफसरों और कर्मचारियों की शिकायतें मिली, जिन्होंने नियम के खिलाफ काम करते हुए भाजपा को फायदा पहुंचाया। एमपीसीसी उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने लेटर में उम्मीदवारों से कहा है कि ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों का नाम बताए। साथ में उनका पद और तैनाती को लेकर भी जानकारी देने को कहा है। सभी प्रत्याशियों से ऐसे अफसरों की सूची 30 नवंबर तक भेजने को कहा गया है। कमलनाथ कई बार दोहरा चुके हैं बयानगौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख कमलनाथ ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर कई बार आरोप लगाया कि वे बीजेपी के समर्थन में काम कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की सरकार बनने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। नाथ ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा पुलिस, पैसा और प्रशासन का इस्तेमाल अपने पक्ष में कर रही है। वे यह भी कई सभाओं में कहते हुए सुने गए हैं कि अधिकारी याद रखें कि कल के बाद परसों भी आएगा। उनके बयान से साफ है कि उनके तेवर सख्त हैं और और अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो ऐसे अधिकारियों की मुश्िकलें अवश्य बढ़ेंगी, जो भाजपा के पक्ष में काम करते हैं। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी हार के लिए बहाना तलाश रही है। कोठारी ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी लोकतंत्र के शक्तिशाली अभिभावक है और कांग्रेस ने पहले ही उन पर सवाल उठाकर अपना भरोसा खो दिया है। जिनके पास पोलिंग बूथ पर बैठने के लिए कार्यकर्ता तक नहीं हैं, वे ऐसे झूठे आरोप लगा रहे हैं। मध्य प्रदेश में सबी 230 सीटों पर 17 नवंबर को वोट डाले गए और 3 दिसंबर को नतीजे घोषित होंगे।

काउंटिंग से पहले कांग्रेस के सभी पोलिंग एजेंट और 230 प्रत्याशियों की होगी ट्रेनिंग.

Before the counting, all polling agents of the Congress and 230 candidates will undergo training 26 नवंबर को सभी उम्मीदवारों को बुलाया, ईवीएम की मानीटिरिंग और गणना का होगा प्रशिक्षण Udit Narayanभोपाल। प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला एश्ट में कैद है। आगामी 3 दिसंबर को मतों की गणना की जाएगी। वहीं मतगणना की तैयारी में सभी राजनीतिक पार्टियां जुट गई है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने विधानसभा प्रत्याशी को राजधानी भोपाल बुलाया है। जानकारी के अनुसार, एमपी कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के सभी 230 विधायक प्रत्याशियों को ट्रेनिंग के लिए राजधानी भोपाल बुलाया गया है। विधायक प्रत्याशी और मतगणना एजेंट को ट्रेनिंग दी जाएगी। आपको बता दें कि, 26 नवंबर को एमपी कांग्रेस द्वारा ट्रेनिंग कैंप लगाया जा रहा है। ट्रेनिंग में प्रत्याशियों को मतगणना से संबंधित जानकारी दी जाएगी। प्रत्याशियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद के साथ पोलिंग एजेंट को भी साथ में लेकर आएंगे। बता दें कि, ट्रेनिंग में मतगणना के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है। इस बात की विशेष जानकारी (टिप्स) दी जाएगी। ट्रेनिंग में ईवीएम और वीवीपैट की भी जानकारी दी जाएगी। बता दें कि, साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस ने मतगणना के पहले प्रत्याशियों को इसी तरह ट्रेनिंग के लिए बुलाई थी। उसी कड़ी में इसबार भी ऐसा किया जा रहा है। इसके साथ कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि स्ट्रांग रूम में रखी मशीनों की लाइव जानकारी हर एक प्रत्याशी को मिले। स्ट्रांग रूम में लगे कैमरे का लिंक प्रत्याशी को दिया जाए, ताकि वह अपनी सुविधा के मुताबिक स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम मशीनों की गणना तक उन पर नजर रख सके।

नातीराजा के खिलाफ हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज, 12 अन्य कांग्रेस समर्थक भी बनाए गए आरोपी

Case has been registered against an attempted murder of Nati Raja, with 12 other Congress supporters also accused. Udit Narayanभोपाल। छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नातीराजा के ड्राइवर सलमान की मौत के मामले ने सियासी रंग ले लिया है। इस मामले में पुलिस ने पहले ही भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया सहित 21 लोगों के खिलाफ हत्या एवं हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया था। अब भाजपा के दबाव में नातीराजा सिह एक दर्जँन लोगों के खिलाफ भी धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज हो गया।घटना मतदान के पूर्व की रात की थी। जैसे ही मतदान निबटा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राजनगर पहुंच गए और भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दे दिया। पुलिस अधीक्षक छतरपुर के आश्वासन के बाद दिग्विजय ने रात पर चला अपना धरना तो समाप्त कर दिया लेकिन यह दांव नातीराजा के लिए उलटा पड़ गया। अगले ही दिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित पूरी भाजपा सक्रिय हो गई। पुलिस महानिदेशक और निर्वाचन आयोग को शिकायत कर अरविंद पटैरिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया गया। भाजपा ने कहा कि सलमान की मौत के लिए नातीराजा ही जवाबदार हैं। नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने नातीराजा सहित कांग्रेस के अन्य 12 समर्थकों के खिलाफ भी पुलिस ने हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया। वीडी शर्मा ने आज छतरपुर में भाजपा के तमाम नेताओं के साथ पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा और दाेषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

निर्वाचन आयोग के शांतिपूर्ण चुनाव कराने के दावों की खुली पोल.

Open scrutiny of the claims to conduct peaceful elections by the Election Commission. आचार संहिता पर उठे सवाल, चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था हुई तार-तार, मप्र में लगभग दो दर्जन से अधिक स्थानों पर भड़की हिंसा. प्रदेश के मालवा-निमाड़ में मारपीट के साथ चली तलवारें, ग्वालियर-चंबल में जमकर फायरिंग-मारपीट, पत्थरबाजी, बुंदेलखंड में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थक को भाजपा समर्थकों ने उतारा मौत के घाट Udit Narayanभोपाल। मप्र विधानसभा चुनाव 2023 का चुनाव िहंसा, मारपीट, फायरिंग के नाम से जाना जाएगा। यह हिंसक घटनाएं अब चुनावी इितहास बन गई हैं। 25 दिनों तक चले चुनावी कार्यक्रम को लेकर निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए सुरक्षा व्यवस्था के दावों का गुब्बारा 17 नवंबर को उस समय फूट गया, जब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए तेजी से वायरल दर्जनों हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थी। बारी-बारी से आई इन घटनाओं ने दिनभर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। चुनाव आयोग ने खूब दावे किए कि प्रदेश की 230 विधानसभाओं में शांतिपूर्ण चुनाव कराएंगे, लेकिन 17 तारीख को मतदान के दिन इन दावों की पोल खुल गई। जबकि, मध्य प्रदेश में निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए ढाई लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में लगभग दो दर्जन से अधिक स्थानों पर हिंसा भड़की, लात-घूसों और डंडों से मारपीट के साथ ही म्यान में बंद खून की प्यासी तलवारें भी निकलीं। जिसने कई लोगों की जान का आफत में डाल दिया। वहीं इससे भी बड़ी घटना बुंदेलखंड के छतरपुर जिले की विधानसभा राजनगर में हुई। जहां कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के समर्थक को भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों ने मौत के घाट उतार दिया। हालांकि किसी की जान जाने के बाद पुलिस ने डेढ़ दर्जन लोगों पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया। इस चुनाव मतदान का 17 नवंबर 2023 वाला ‘शुक्रवार’ सैकड़ों लोगों को पांच साल नहीं, बल्िक जिंदगी भर रूलाएगा।बता दें चुनाव आयोग ने 230 विधानसभा सीटों के लिए करीब 65 हजार मतदान केंद्र बनाए। सुरक्षा के साये में शांतिपूर्ण चुनाव कराने करीब 4 लाख कर्मियों की ड‍यूटी लगाई गई थी। इनमें ढाई लाख सुरक्षाकर्मी शामिल थे, बावजूद प्रदेशभर में िहंसा ने भयानक रूप धारण कर लिया। इससे सवाल उठता है कि यह चुनाव आयोग की लापरवाही का नतीजा नहीं तो और क्या है? दरअसल, मप्र के चुनाव आयोग ने तय चुनावी रस्म अदायगी वाली तैयारियों के साथ चुनाव के कार्यक्रमों का ऐलान कर दिया। 17 नवंबर को मतदान होने के बाद 3 दिसंबर को आने वाले परिणामों की ओर लोगों की नजरें टिकी हैं । चुनाव आयोग ने 230 विधानसभा सीटों के लिए करीब 65 हजार मतदान केंद्र बनाए गए थे। इनमें 25 फीसदी संवेदनशील केंद्र चिन्िहत किए गए थे। ऐसे संवेदनशील केंद्रों पर सेंट्रल फोर्स के साथ ही प्रदेश की पुलिस लगाई गई थी। मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, माइक्रो ऑब्जर्वर और पेट्रोलिंग कराई गई। प्रदेश के सबसे ज्यादा हथियार चलाने वाले भिंड, मुरैना जिले में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया था। यहां पुलिस को सुरक्षा के सख्त निर्देश थे। प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त अनुपम राजन ने बताया कि प्रदेश में भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव 2 लाख लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। 2 लाख 85 हजार लाइसेंसी हथियारों को थानों पर जब्त किया गया था। छतरपुर में कांग्रेस समर्थक की हत्या :छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में एक कांग्रेस समर्थक को भाजपा के समर्थकों ने मौत मौत के घाट उतार दिया था। भिंड के मेहगांव क्षेत्र के मनहद गांव में मतदान केंद्र के बाहर पथराव होने से भाजपा प्रत्याशी राकेश शुक्ला घायल हो गए हैं। राकेश को मामूली चोटें आई हैं। मेहगांव विधानसभा क्षेत्र में अज्ञात लोगों की गोलीबारी में भाजपा उम्मीदवार और आप समर्थक घायल हो गए हैं। इंदौर में दो गुटों में झड़प हुई। महू में मतदान के दौरान तलवारें चली, जिसमें दो लोग घायल हो गए। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी िहंसक घटनाएं घटित हुईं। यह सब घटनाएं पुलिस की नाकामी की ओर इशारा करती है। यह घटनाएं निर्वाचन आयोग की लापरवाही की पोल खोलने के लिए काफी है। चुनावी मैदान में उतरे थे 2533 उम्मीदवार :इस बार एमपी के चुनाव में 2,533 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इसमें 2,280 पुरुष और 252 महिलाएं हैं। एक प्रत्याशी थर्ड जेंडर का है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि, बसपा ने 181, सपा ने 71 और आम आदमी पार्टी ने 66 उम्मीदवार उतारे हैं।

मप्र में सबसे ज्यादा वोटिंग सिवनी व सबसे कम जोबट में वोटिंग.

In Madhya Pradesh, the highest voting turnout is in Sivani, and the lowest voting turnout is in Jobat. मप्र में सबसे ज्यादा वोटिंग सिवनी व सबसे कम वोटिंग जोबट में हुई, मतगणना के बाद फैसला होगा कि जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेंगा। सबसे कम वोटिंग में मालवा निमाड़ अंचल का जोबट जुड़ गया है। भोपाल। मप्र के विधानसभा चुनाव में इस बार मालवा निमाड़ के साथ ही महाकौशल अंचल में सबसे अधिक वोटिंग हुई। इसमें भी सबसे अधिक वोट सिवनी में पड़ा। यहां कुल वोट में से 85.68 फीसदी वोट पड़ा है। सिवनी में भाजपा से दिनेश राय मुनमुन मैदान में थे। जबकि कांग्रेस से आनंद पंजवानी चुनाव लड़ रहे थे। यहां मुनमुन की स्थिति अच्छी मानी जाती है, यहां से वे एक बार तो निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए। दूसरे नंबर पर बालाघाट में 85.23 फीसदी वोट पड़े। जबकि सबसे कम वोट अलीराजपुर जिले के जोबट में महज 54.04 फीसदी रहा। बालाघाट में इस बार भाजपा के पुराने नेता गौरीशंकर बिसेन ने अपनी बेटी मौसम बिसेन काे टिकट दिलवाया था। कांग्रेस ने अनुभा मुंजारे मैदान में उतारा था। दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी। प्रदेश में सभी 230 विधानसभा सीटों में से दूसरे नंबर पर सबसे अधिक वोट पड़े हैं। किंतु किसके पक्ष में ज्यादा वोट पड़े या फिर जीत का सेहरा किसके माथे पर बंधेगा, यह मतगणना 3 दिसंबर के बाद ही पता चलेगा। उधर, सबसे कम वोटिंग में मालवा निमाड़ अंचल का जोबट जुड़ गया है। यहां एक रिकार्ड बन गया है। इतनी कम वोटिंग इस विधानसभा क्षेत्र में पहले कभी नहीं हुई थी। जोबट से भाजपा के विशाल रावत व कांग्रेस प्रत्याशी सेना पटेल के बीच शुरू से ही कांटे का मुकाबला माना जा रहा था, हालांकि काफी कम वोट मिलने से असमंजस की स्थिति है कि आखिर में जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा।  सबसे अधिक वोट प्रतिशत वाले 10 विधानसभा क्षेत्र-सिवनी व बालाघाट के बाद तीसरे नंबर पर वोटिंग आगर मालवा में 85.03 फीसदी हुई है। इसके चौथे नंबर पर शाजापुर रहा। यहां 84.99 फीसदी वोट पड़े। पांचवें नंबर पर राजगढ़ रहा। यहां कुल 84.29 फीसदी वोट पड़े हैं। यह क्षेत्र हालांकि मध्य क्षेत्र में आता है। मध्य भारत में यह एक मात्र सीट है, जहां से बंपर वोटिंग हुई है। राजगढ़ से भाजपा ने अमर सिंह यादव को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने बाबू सिंह तंवर को टिकट दिया है। राजगढ़ में इतनी जबरदस्त वोटिंग होने को लेकर खुद यहां के लोग हैरान हैं। इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। छठवें नंबर पर रतलाम 83.40 फीसदी व सांतवें पर नीमच है। यहां 83.30 फीसदी वोट पड़े। भाजपा ने दिलीप सिंह परिहार व कांग्रेस ने उमराव सिंह गुर्जर को मैदान में उतारा है। आठवें सबसे अधिक वोटिंग में मंदसौर है। यहां 83.28 फीसदी वोट पड़े हैं। भाजपा के कद्दावर नेता यशपाल सिंह सिसोदिया व कांग्रेस से विपिन जैन मैदान में हैं। नौवें पर छिंदवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मैदान मेंप्रदेश में 10 सबसे अधिक वोटिंग वाले विधानसभा क्षेत्र में नौवें नंबर पर छिंदवाड़ा का भी नाम है। यहां से कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने विवेक बंटी साहू काे टिकट दिया है। नाथ की वजह से इस सीट पर प्रदेश भर की नजरें थी। अब बंपर मतदान करके मतदाताआंे ने अपने प्रत्याशी के प्रति विश्वास जता दिया है। 10 वें नंबर पर नरसिंहपुर है। यहां से केंद्रीय मंत्री व भाजपा प्रत्याशी प्रह्लाद पटेल चुनाव मैदान में हैं। जबकि कांग्रेस ने लाखन सिंह पटेल का टिकट दिया है। इस सीट पर भी प्रदेश भर की नजरें तो थी ही साथ में देश के कई राज्यों के नेताओं की नजर थी। भाजपा के लिए यह सीट थोड़ी कठिन बन गई थी, इसलिए केंद्रीय मंत्री पटेल को चुनाव मैदान में उतारा। भोपाल के दक्षिण पश्चिम सबसे कम में तीसरे नंबर पर-सबसे कम वोटिंग वाले विधानसभा क्षेत्रों में से सबसे पहले अलीराजपुर जिले का जोबट क्षेत्र हैं। दूसरा सबसे कम ग्वालियर जिले का ग्वालियर पूर्व क्षेत्र है। यहां 57.33 फीसदी वोट पड़े। तीसरे सबसे कम का रिकार्ड इस बार भोपाल दक्षिण पश्चिम का रहा। यहां से महज 58.2 फीसदी वोटिंग हुई। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की है। लेकिन सरकारी कर्मचारी वोट देने ही नहीं निकले। इसे क्षेत्र में कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा व व भाजपा के भगवान दास सबनानी मैदान में हैं। चौथे सबसे कम में भिंड क्षेत्र रहा। यहां महज 58.57 फीसदी वोट पड़े। पांचवें सबसे कम में भी भोपाल मध्य का नाम दर्ज हो गया है। यहां से 60.1 फीसदी वोट पड़े। मध्य से भाजपा ने धु्व नारायण सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने आरिफ मसूद को टिकट दिया था। छठवें सबसे कम में मुरैना का अंबाह व सांतवे पर भिंड का गोहद क्षेत्र है। आंठवे पर भिंड का गोहद व नौवें पर रीवा का मेहगांव क्षेत्र रहा। 10 वें सबसे कम वोटिंग में भोपाल का गोविंदपुरा क्षेत्र है।

अमृत काल में 80 करोड़ लोग अनाज क्यों नहीं खरीद पा रहे हैं.

In the Amrit Kaal, why are 80 crore people unable to purchase grains? Manish Trivedi यह रिपोर्ट द वायर हिंदी की एक रिपोर्ट के आधार पर है.  दिल्ली, छत्तीसगढ़ में एक चुनावी भाषण में मोदी ने भव्य घोषणा की कि 80 करोड़ गरीब भारतीयों को मुफ्त अनाज बांटने की योजना, को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया जाएगा. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि यह ‘भारत के लोगों को मोदी की गारंटी’ है. सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, जो 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, उसे 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज क्यों बांटना चाहिए? दूसरी तरफ देखें, अगर भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है तो वैश्विक भूख सूचकांक में यह और नीचे क्यों गिर रहा है? 2023 ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत चार पायदान फिसलकर 125 देशों में से 111वें स्थान पर पहुंच गया. सरकार हंगर इंडेक्स रिपोर्ट की आलोचना करती है, लेकिन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत मुफ्त खाद्यान्न योजना को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाकर इसका समर्थन कर रही है. जमीनी स्तर पर कुछ वास्तविक नतीजे दिखाने के लिहाज़ से दस साल का समय बहुत लंबा है, चाहे वह विकास हो, रोजगार हो, बचत दर, निजी निवेश, बढ़ा हुआ विदेशी निवेश या निर्यात आदि हो. इन सभी मामलों पर उपलब्ध डेटा खराब प्रदर्शन ही दर्शाता है. मनरेगा यानी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जिसे सरकार ने वास्तविक आर्थिक विकास, रोजगार और आय पैदा करने में कांग्रेस की विफलता का स्मारक बताया. आज की तारीख में मोदी और उनकी सरकार की एक बड़ी विडंबना यह है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी बजट का 93% हिस्सा वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में ही खर्च हो गया है. पिछले महीने सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी जुलाई 2022 से जुलाई 2023 के लिए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे) में सामने आया. सर्वे से पता चलता है कि स्व-रोजगार के आंकड़ों में भारी वृद्धि हुई है, जो 2022-23 में कुल काम में लगे लोग का 58% है. अर्थव्यवस्था में कुल एम्प्लॉयड लोगों का आंकड़ा लगभग 500 मिलियन से अधिक है. 2017-18 में स्व-रोज़गार श्रेणी, मुख्यतः ग्रामीण भारत में छोटे विक्रेता और व्यक्तिगत सर्विस प्रोवाइडर कुल एम्लॉयड का 52% थे. स्व-रोज़गार में बड़ी वृद्धि गैर-मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में निम्न गुणवत्ता वाले रोज़गार में बढ़ोतरी का संकेत देती है. यह स्पष्ट है क्योंकि स्व-रोज़गार में से एक तिहाई अवैतनिक श्रमिक हैं जो बिना किसी वेतन के छोटे परिवार द्वारा चलाई जाने वाली इकाइयों में शामिल होते हैं. इसलिए स्व-रोज़गार का अनुपात और उसमें बिना वेतन के काम करने वालों का अनुपात पिछले 5 वर्षों में नाटकीय रूप से बढ़ गया है, खासकर नोटबंदी और महामारी के बाद. अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा के अनुसार, स्व-रोज़गार श्रेणी में अवैतनिक श्रमिकों की संख्या अवैतनिक श्रमिकों की संख्या 2017-18 में 4 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 9.5 करोड़ हो गई है. संभवतः अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी संरचनात्मक कमजोरी है क्योंकि श्रम बल सर्वे से यह भी पता चलता है कि 2017-18 और 2022-23 के बीच वास्तविक रूप से औसत नियमित मासिक वेतन में 20% से अधिक की गिरावट आई है. स्व-रोज़गार और कैज़ुअल (अस्थायी) श्रेणियों के लिए भी असल वेतन में गिरावट दिखती है. दरअसल में बीते पांच सालों में औसत वेतन में कोई वृद्धि न होना स्पष्ट रूप से रोज़गार की बिगड़ती गुणवत्ता को दर्शाता है. इस बात का पता खुद भी लगाया जा सकता है, बस जाकर किसी स्व-रोजगार करने वाले जैसे निर्माण या परिवहन में लगे लोग (उबर या ओला ड्राइवर) से पूछिए, वो बताएंगे कि उनका वेतन वास्तविक रूप से स्थिर है, भले ही रोजमर्र के जीवनयापन की लागत बढ़ गई हो. वेतन का स्थिर होना, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति की कमी को भी दिखता है, जो हाल के वर्षों में हिंदुस्तान लीवर, बजाज ऑटो इत्यादि जैसी कंपनियों के लिए ग्रामीण मांग में वृद्धि की कमी में दिखी है. बजाज ऑटो जैसे दोपहिया वाहन निर्माता पांच या छह साल पहले की तुलना में आज 30 से 40% कम इकाइयां बेच रहे हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ था. लक्जरी सेगमेंट- एसयूवी, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल, हवाई यात्रा आदि मजबूत खपत बढ़ी है और जो कंपनियां इन जरूरतों को पूरा करती हैं, वे अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. निम्न मध्यम वर्ग की खपत अब तक के सबसे निचले स्तर पर नज़र आ रही है. श्रम बल सर्वे में दिखने वाला वेतन का स्थिर हो जाना मोटे तौर पर निचली 60 से 70% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि पीएम मोदी भारत के अमृत काल में प्रवेश की अपनी भव्य कहानी को लेकर लोगों को कैसे आश्वस्त करते हैं. कोई भी मोदी से एक सरल, सामान्य सवाल पूछ सकता है- अमृत काल में 80 करोड़ लोग अनाज कैसे नहीं खरीद पा रहे हैं?

भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक ने इतिहासिक इमारतों का किया अवलोकन.

The inspector of the Election Commission of India conducted an inspection of historical buildings. निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक माला देवी का अवलोकन करते हुए Sitaram Kushwaha. विदिशा, ग्यारसपुर में भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक के द्वारा ग्यारसपुर की ऐतिहासिक इमारतों का अवलोकन किया गया आपको बता दें की मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव संपन्न हो गए हैं चुनाव संपन्न होने के पश्चात भोपाल लौटते समय ग्यारसपुर की नवी और दसवीं सदी मैं निर्मित ऐतिहासिक इमारतें माला देवी मंदिर, हिंडोला तोरण ,आठ खम्मा, बाजारा मठ का भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक के द्वारा अवलोकन किया गया उन्होंने बताया है कि ग्यारसपुर एक ऐतिहासिक और विरासत नगरी है जहां पर आज भी 9वी और 10वीं की इमारते खड़ी हुई हैं, पुरातत्व सर्वेक्षण इंडिया को इन इमारत के संरक्षण करने की आवश्यकता है माला देवी मंदिर के पत्थर जगह-जगह से गिर रहे हैं, माला देवी की रखवाली कर रहे गार्ड से उन्होंने माला देवी के विषय में जानकारी ली वहीं उन्होंने बताया है कि 8 साल से माला देवी का मुख्य द्वार बंद है सुरक्षा कारणों के चलते पर्यटकों को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता । माला देवी के अंदर भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है वहीं गलियारे में 12 फीट की भगवान महावीर की खड़ी हुई प्रतिमा स्थापित है मुख्य द्वार के ऊपर माला देवी की प्रतिमा है द्वार के दोनों तरफ गंगा और जमुना की प्रतिमा अंकित है ।

मजदूरों को सुरंग में फंसे हुए 160 घंटे से ज्यादा का समय, सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी की चूक का मामला.

Uttrakhand; Tunnel; Sahara Samachaar; Sahara India;

More than 160 hours of trapped laborers in a tunnel, due to the negligence of the company constructing the tunnel. उत्तराखंड में 41 मजदूरों को एक सुरंग में फंसे हुए 160 घंटे से ज्यादा का समय तो चुका है. सुरंग का यह नक्शा तब सामने आया जब केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने गुरुवार को सुरंग ढहने वाले स्थान का दौरा किया. इस बीच एक नक्शा सामने आया है जो सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी की चूक की ओर इशारा कर रहा है. मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, तीन किलोमीटर से अधिक लंबी सभी सुरंगों में आपदा के हालात में लोगों को बचने के लिए भागने का रास्ता होना चाहिए. नक्शा से ज्ञात हुआ है कि 4.5 किलोमीटर लंबी सिल्कयारा सुरंग के प्लान में भी बचकर निकलने के लिए एक मार्ग बनाया जाना था, लेकिन यह रास्ता बनाया नहीं गया. बचाव टीमें अब सुरंग के अंदर फंसे हुए मज़दूरों को बचाने के लिए योजनाएं भी लेकर आ रही हैं. सुरंग में फंसे 41 निर्माण मजदूरों के परिवारों के सदस्य, जिनमें से अधिकांश प्रवासी हैं, को अब चिंता होने लगी है मजदूरों के परिवारों के कुछ सदस्यों और निर्माण में शामिल अन्य श्रमिकों ने कहा कि अगर भागने का रास्ता बनाया गया होता तो अब तक मजदूरों को बचाया जा सकता था.

मध्य प्रदेश में 150 सीटों से अधिक आए इस लक्ष्य को लेकर हम सबने काम किया:- नरेंद्र सिंह तोमर।

We all worked towards the goal of getting more than 150 seats in Madhya Pradesh: Narendra Singh Tomar. प्रचंड बहुमत के साथ बन रही है भारतीय जनता पार्टी कि सरकार। मतदान करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया बड़ा दावा। सुभाष पांडेय ग्वालियर। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज ग्वालियर में मुरार स्थित मतदान केंद्र पर वोट डाला, इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में माहौल है और मैं ये दावे से कह सकता हूँ कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने कांग्रेस का दावे पर कहा कि कांग्रेस क्या कह रही है हमें नहीं पता लेकिन हम ये दावा कर रहे हैं कि मप्र में भाजपा की सर्कार बन रही है।  मतदान करने के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि मध्य प्रदेश की जनता मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है, जो रुझान मुझे दिखाई दे रहा है उस पर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन देखने को मिल रहा है। हमें विश्वास है जो प्रदेश भर में वातावरण है उसके आधार पर प्रचंड बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही है। मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर चंबल से मुख्यमंत्री होने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है भारतीय जनता पार्टी में पद की स्पर्धा नहीं है बल्कि जीतने की स्पर्धा है। मध्य प्रदेश में 150 सीटों से अधिक आए इस लक्ष्य को लेकर हम सब काम कर रहे हैं। दिमनी सहित चम्बल अंचल में हुए पथराव और फायरिंग के सवाल पर तोमर ने कहा है कि चुनाव में हिंसा का कोई स्थान नहीं है कांग्रेस के लोग भयभीत और घबराए हुए है हार की वजह से इस तरह का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कहीं कांग्रेस के लोग झगडे कर रहे हैं कहीं बीएसपी के लोग लेकिन जनता सब जान रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान होगा और भारतीय जनता पार्टी की विजय होगी।  राहुल गांधी के 150 सीटें जीतने के दावे पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि कांग्रेस क्या कहती है? कौन क्या दावे कर रहा है हमें नहीं मालूम, लेकिन हम ये दावा कर रहे हैं की मप्र में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत की सरकार बना रही है।

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