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करवा चौथ पर भोपाल -इंदौर में कितने बजे निकलेगा चांद? जानें यूपी के हाल

भोपाल हिन्दू धर्म में करवा चौथ का व्रत सबसेअधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे जीवन में के लिए निर्जला उपवास रखती है. ये व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए पति की लंबी आयु के लिए उपवास करती है और रात को चांद देखने के बाद अपना व्रत तोड़ती करती हैं. करवा चौथ का पर्व पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश में भी इस पर्व की धूम देखने को मिलती है. देश में हर साल की तरह इस बार भी करवाचौथ का त्योहार आज धूमधाम से मनाया जा रहा है. आज के दिन महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. दिन भर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाएं रात को चांद दिखने पर चंद्रमा को अर्ध्य देकर उपवास तोड़ती हैं.  करवा चौथ व्रत की शुरुआत सुबह सरगी खाने के साथ होती है. सूर्योदय से शुरू हुआ यह व्रत रात में महिलाओं द्वारा चंद्रमा की पूजा और छलनी से चांद को देखने के बाद होती है. इस दौरान महिलाएं अपने पति की आरती भी उतारती हैं. पति अपने हाथों ने पत्नी को पानी पिलाते हैं.  करवा चौथ का व्रत गणपति जी और करवा माता को समर्पित है. यहां पर आपको ये भी बता दें कि यह व्रत चांद की पूजा के बिना अधूरा माना जाता है. करवा चौथ 2024 पूजा मुहूर्त  करवा चौथ पूजा समय- शाम 05.46 – रात 07.09 (अवधि 1 घंटा 16 मिनट) करवा चौथ व्रत समय – सुबह 06.25 – रात 07.54 (अवधि 13 घंटे 29 मिनट) हिन्दू धर्म में करवा चौथ को सुहागिन स्त्रियों को सबसे बड़ा माना जाता है. ये व्रत सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रोदय तक चलता हैं. महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती है और अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत करती है. महिलाएं पूरा दिन न तो अन्न ग्रहण करती और न ही जल. रात को जब चंद्रोदय होता है तब महिला चांद अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु की मंगल कामना करते हुए अपना उपवास पूरा करती है. करवा चौथ पर चतुर्थी तिथि 20 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होगी और 21 अक्टूबर को सुबह 04 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में शाम होने के बाद से ही महिलाओं को चांद के निकलने का इंतजार रहता है. लेकिन, इस बार चांद देखने के लिए महिलाओं को ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा. इस बार रविवार को चंद्रमा का उदय शाम 7 बजकर 40 मिनट पर हो जाएगा. राजधानी दिल्ली-नोएडा से लेकर प्रयागराज और अयोध्या तक तमाम बड़े शहरों में चांद इस समय दिखाई देगा. किस शहर में कब दिखेगा चांद शहर का नाम चांद निकलने का समय लखनऊ 07 बजकर 42 मिनट कानपुर 07 बजकर 47 मिनट नोएडा 07 बजकर 52 मिनट दिल्ली 9 बजकर 10 मिनट प्रयागराज 07 बजकर 42 मिनट अयोध्या 07 बजकर 38 मिनट वाराणसी 07 बजकर 32 मिनट बरेली 07 बजकर 46 मिनट गाजियाबाद 07 बजकर 52 मिनट आगरा 07 बजकर 55 मिनट कोलकाता 07 बजकर 46 मिनट देहरादून 07 बजकर 09 मिनट अमृतसर 07 बजकर 54 मिनट भोपाल 08 बजकर 29 मिनट अहमदाबाद 07 बजकर 38 मिनट चेन्नई 08 बजकर 43 मिनट मुंबई 08 बजकर 59 मिनट कुरुक्षेत्र 08 बजे शिमला 07 बजकर 47 मिनट जम्मू 07 बजकर 52 मिनट पंजाब 07 बजकर 48 मिनट बिहार 08 बजकर 29 मिनट झारखंड 08 बजकर 35 मिनट कुछ ऐसी है मान्यता ऐसा माना जाता है कि पूजा के दौरान करवा (मिट्टी का पात्र) का प्रयोग किया जाता है, जिसे पति की प्रतीकात्मक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है. महिलाएं करवा को भगवान गणेश और चंद्रमा के सामने रखकर पूजा करती हैं. फिर चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का समापन करती हैं. पति पत्नी को आवश्यक रूप से विशेष उपहार देते हैं, इसमें आभूषण, कपड़े और अन्य उपहार शामिल होते हैं. करवा चौथ 2024 मून टाइम  20 अक्टूबर 2024 को रात 7 बजकर 54 मिनट पर चांद निकलेगा. दिल्ली में चांद दिखने का सही समय सात बजकर 53 मिनट है. नोएडा में यह समय 7 बजकर 52 मिनट है. शहर के अनुसार चंद्रोदय समय कुछ मिनट के अंतर से अलग-अलग हो सकता है.  क्या है करवा चौथ की अहमियत? दिल्ली सहित पूरे देश में करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के अखंड प्रेम, सम्मान और त्याग की चेतना का प्रतीक है. ये व्रत दांपत्य जीवन में अपार खुशियां लेकर आता है. करवाचौथ की सबसे पहले शुरुआत सावित्री की पतिव्रता धर्म से हुई. महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं.  करवा चौथ के पीछे मान्यता यह है कि देवी पार्वती ने भी ये व्रत किया था. दूसरी मान्यता है कि करवा चौथ व्रत महाभारत काल में द्रोपदी ने भी किया था. जब पांडवों पर संकट के बादल मंडराए थे तो श्रीकृष्ण के कहे अनुसार द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत पूजन किया था, जिसके प्रभाव से पांडवों का संकट टल गया था.  इस त्योहार को लेकर एक मान्यता यह है जो सुहागिन स्त्री इस दिन अन्न-जल का त्याग कर व्रत रखती हैं, उसके सुहाग पर कभी कोई आंच नहीं आती.

ग्वालियर में 137 लोकेशन जहां पर गाइडलाइन से अत्यधिक मूल्य पर रजिस्ट्री हो रही

ग्वालियर  ग्वालियर जिले में जिन स्थानों पर अचल सम्पत्ति के बाजार मूल्य की वर्तमान गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर दस्तावेजों की रजिस्ट्री हो रही है। जिला मूल्यांकन समिति ने उन स्थानों के लिए मिड टर्म गाइडलाइन (2024-25) में मूल्य वृद्धि प्रस्तावित की है। कलेक्टर रुचिका चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में पंजीयन विभाग की गाइडलाइन में अचल सम्पत्तियों के पंजीकरण के लिये कुल 2321 लोकेशन (स्थान) निर्धारित हैं। गाइडलाइन से ज्यादा दाम पर रजिस्ट्री इनमें से 137 लोकेशन ऐसी हैं जहां पर गाइडलाइन से अत्यधिक मूल्य पर रजिस्ट्री हो रही हैं। इन लोकेशन पर गाइडलाइन में 5 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गई है। सरकार द्वारा हाल ही में पंजीयन के लिए लागू की गई संपदा 2.0 व्यवस्था के बारे में विस्तृत प्रजेंटेशन भी इस अवसर पर दिया गया। उप जिला मूल्यांकन समिति ग्वालियर, डबरा एवं भितरवार से प्राप्त प्रस्तावों पर जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान यह बात सामने आई कि जिले में कहीं-कहीं पर 400 प्रतिशत अधिक कीमत तक भी रजिस्ट्री हो रहीं हैं। जिला मूल्यांकन समिति ने इस स्थिति को ध्यान में रखकर और उप जिला मूल्यांकन समितियों के प्रस्तावों के आधार पर राजस्व में बढ़ोत्तरी व क्षेत्रीय निवासियों के हित में 137 लोकेशन के दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए अचल सम्पत्तियों की गाइडलाइन में बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गई है। 24 अक्टूबर तक आप दे सकते हैं सुझाव     बैठक में गाइडलाइन में प्रस्तावित आंशिक वृद्धि के संबंध में क्षेत्रवार स्थानीय निवासियों से दावे-आपत्तियां व सुझाव प्राप्त करने का निर्णय भी लिया गया। वरिष्ठ पंजीयक श्री दिनेश गौतम ने बताया कि दावे, आपत्तियाँ व सुझाव शुक्रवार 24 अक्टूबर को शाम 6 बजे तक कलेक्टर कार्यालय एवं जिला पंजीयक कार्यालय में दिए जा सकते हैं। मूल वृद्धि संबंधी प्रस्ताव जिला पंजीयक कार्यालय, उप पंजीयक कार्यालय ग्वालियर वृत-1 व वृत-2 एवं एनआईसी की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।     आम जन से प्राप्त दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद मूल्य वृद्धि संबंधी गाइडलाइन के प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति के अनुमोदन के लिये भेजे जायेंगे। बैठक में वरिष्ठ जिला पंजीयक दिनेश गौतम व जिला पंजीयक अशोक शर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं जिले के सभी उप पंजीयक मौजूद थे। कहां कितनी लोकेशनों पर बढ़ोत्तरी प्रस्तावित     उप जिला का नाम शहरी ग्रामीण कुल     ग्वालियर-1 40 9 49     ग्वालियर-2 62 14 76     डबरा 4 3 7     भितरवार 00 5 5 कहां कितनी कुल लोकेशन     ग्वालियर-1- 837     ग्वालियर-2-675     डबरा-476     भितरवार-333 48 लोकेशन ऐसी जहां 11 से 20 प्रतिशत होगी वृद्वि     1 से 10 प्रतिशत- 14 लोकेशन     11 से 20 प्रतिशत- 48 लोकेशन     21 से 30 प्रतिशत- 32 लोकेशन     41 से 50 प्रतिशत-16 लोकेशन     50 प्रतिशत से अधिक- 9 लोकेशन     कुल लोकेशन जिले में- 2321 यदि रजिस्ट्री करानी है तो अपना आधारकार्ड अवश्य अपडेट कराएं पंजीयन विभाग में लागू किए गए नए सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 में आधारकार्ड के माध्यम से अचल सम्पत्तियों के दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसलिए जिलेवासी अपने एवं अपने परिजनों के आधारकार्ड में फोटो व थंब इंप्रेशन इत्यादि सहित सभी प्रकार की जानकारी अपडेट करा लें, जिससे संपदा 2.0 से दस्तावेजों का पंजीकरण कराते समय कठिनाई न आए। कलेक्टर रुचिका चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में जिलेवासियों से यह अपील की गई है।

साल 2023 में सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत, हर तीन मिनट में एक जान गई

नई दिल्ली साल 2023 में सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यानी हर दिन औसतन 474 और हर तीन मिनट में एक जान गई। ये आंकड़े राज्यों ने केंद्र सरकार को दिए हैं। जब से केंद्र सरकार ने सड़क हादसों के कारणों और उनकी गंभीरता को समझने के लिए आंकड़े जमा करने शुरू किए हैं, तब से लेकर अब तक सबसे ज्यादा मौतें इसी साल हुई हैं। डरा रहे हैं ये आंकड़े पिछले साल सड़क हादसों में करीब 4.63 लाख लोग घायल हुए थे। यह 2022 के मुकाबले 4% ज्यादा है। इन आंकड़ों से साफ है कि सड़क हादसों में घायल होने वालों की संख्या बढ़ रही है। साल 2022 में सड़क हादसों में 1.68 लाख लोगों की मौत हुई थी। यह जानकारी सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट में दी गई थी। वहीं एनसीआरबी के मुताबिक 2022 में सड़क हादसों में 1.71 लाख लोगों की जान गई थी। इन दोनों ही एजेंसियों ने अभी 2023 के लिए अपने आंकड़े जारी नहीं किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम और तेलंगाना समेत कम से कम 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2022 के मुकाबले 2023 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। हालांकि आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, केरल और चंडीगढ़ जैसे राज्यों में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में मामूली गिरावट आई है। सड़क हादसों में सबसे ज्यादा यूपी में मौतें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। यहां पिछले साल सड़क हादसों में 23,652 लोगों की जान गई। इसके बाद तमिलनाडु में 18,347, महाराष्ट्र में 15,366, मध्य प्रदेश में 13,798 और कर्नाटक में 12,321 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। हालांकि सड़क हादसों में घायल होने वालों की लिस्ट में तमिलनाडु सबसे ऊपर है। यहां 72,292 लोग सड़क हादसों में घायल हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 55,769 और केरल में 54,320 लोग सड़क हादसों का शिकार हुए। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल मरने वाले करीब 44% लोग (करीब 76,000) दोपहिया वाहन सवार थे। यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल मरने वाले करीब 70 फीसदी दोपहिया सवारों ने हेलमेट नहीं पहना था। सड़क सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें दोपहिया सवारों की मौतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं। शहरों और गांवों में ज्यादातर लोग आने-जाने के लिए दोपहिया वाहनों का ही इस्तेमाल करते हैं।

बिश्नोई समाज में हिन्दूओं कि तरह अग्नि दाग नहीं होता, मृतक के शव को जमीन में कच्ची कब्र खोदकर मिट्टी डालकर दफनाया

जयपुर  काला हिरण , सलमान खान , बाबा सिद्दीकी,  लॉरेंस बिश्नोई और बिश्नोई समाज पिछले कुछ दिन से इन कुछ शब्दों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है ।‌बिश्नोई समाज से जुड़ा हुआ लॉरेंस बिश्नोई सलमान खान को मारने की धमकी दे चुका है और बाबा सिद्दीकी के मर्डर का जिम्मा ले चुका है । कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं , कई अभी भी फरार हैं।  दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में हड़कंप मचा हुआ है । राजस्थान से भी बिश्नोई समाज के बड़े नेता लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं । बिश्नोई समाज का ना शमशान घाट ना  कब्रिस्तान और ना ही मोक्ष धाम हम सभी जानते हैं बिश्नोई समाज पेड़ , पौधे और जीव जंतुओं के  संरक्षण के लिए हमेशा प्रयासरत रहा है, लेकिन समाज से जुड़े कुछ ऐसे नियम है जो बिल्कुल अलग और हैरान करने वाले हैं । उनमें सबसे ज्यादा अलग प्रथम अंतिम संस्कार की है।  बिश्नोई समाज के पास खुद के शमशान घाट,  कब्रिस्तान या मोक्ष धाम नहीं है , फिर वे लोग कैसे अंतिम संस्कार करते हैं । 29 नियमों का पालन करता है बिश्नोई समाज बिश्नोई समाज, जो प्राकृतिक संरक्षण और वन्य जीवों के प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाना जाता है, अपने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए भी विशिष्ट पहचान रखता है। इस समाज के लोग गुरु जम्भेश्वर के 29 नियमों का पालन करते हैं, जिनमें वन और जीव संरक्षण पर जोर दिया गया है। अंतिम संस्कार के लिए चिता नहीं बनाई जाती बिश्नोई समाज में अंतिम संस्कार के लिए चिता नहीं बनाई जाती। इसके बजाय, मृतक को दफनाने की परंपरा है, जिसे “मिट्टी लगाना” कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत, शव को पैतृक भूमि पर गड्ढा खोदकर दफनाया जाता है। समाज का मानना है कि शव को जलाने से लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है, जिससे हरे पेड़ों की कटाई होती है और पर्यावरण को हानि पहुंचती है। शव को गंगाजल मिलाकर नहलाया जाता जब किसी सदस्य का निधन होता है, तो शव को जमीन पर रखा जाता है और उसे छने पानी में गंगाजल मिलाकर नहलाया जाता है। फिर, शव को कफन पहनाया जाता है, जिसमें पुरुषों के लिए सफेद और महिलाओं के लिए लाल या काले कपड़े का उपयोग किया जाता है। शव को अर्थी पर नहीं ले जाया जाता; इसके बजाय, मृतक के बेटे या भाई शव को कांधे पर लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक जाते हैं। शव को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके दफनाया जाता गड्ढा खोदने की प्रक्रिया में, शव को घर में ही दफनाया जाता है। शव को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके दफनाया जाता है, और मृतक के बेटे द्वारा कहा जाता है, “यह आपका घर है।” इसके बाद, शव को मिट्टी से ढक दिया जाता है। अंतिम संस्कार के बाद, गड्ढे के ऊपर पानी डालकर बाजरी बरसाई जाती है। शव को कंधा देने वाले लोग उस स्थान पर स्नान करते हैं, जिससे शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी होती है। इस अनोखे अंतिम संस्कार के जरिए बिश्नोई समाज अपने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। पूरे देश में करीब 13 लाख से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोग बिश्नोई समाज की मौजूदगी की बात करें तो पूरे देश में करीब 13 लाख से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोग रह रहे हैं । इनमें सबसे ज्यादा 9 लाख राजस्थान में और करीब 2 लाख हरियाणा में रह रहे हैं । उसके बाद अन्य राज्यों का नंबर आता है।  

त्योहारी सीजन में फ्लाइट में बम की फर्जी धमकी के मामले बढ़े, आखिर क्यों बढ़ रहे ऐसे केस

नई दिल्ली बीते 14 अक्टूबर यानी सोमवार को मुंबई से न्यूयॉर्क स्थित JFK एयरपोर्ट के लिए एयर इंडिया की एक फ्लाइट ने उड़ान भरी। ये बोइंग 777 विमान लगभग 130 टन जेट फ्यूल के साथ 16 घंटे की नॉन-स्टॉप यात्रा के लिए न्यूयॉर्क रवाना हुआ। उड़ान भरने के तुरंत बाद, एयरलाइन को एक कॉल आई जिसमें कहा गया कि फ्लाइट में बम है। JFK एयरपोर्ट जा रहे AI 119 को तुरंत डायवर्ट किया गया। उड़ान भरने के दो घंटे में ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी कर रहा था। हालांकि, इसमें एक समस्या थी। फ्लाइट में बम की फर्जी धमकी के मामले बढ़े एक वरिष्ठ पायलट ने बताया कि B777 (बोइंग 777) का अधिकतम लैंडिंग वजन 250 टन है। इस तरह की पूरी उड़ान का वजन यात्रियों, सामान और कार्गो के साथ उड़ान भरने पर लगभग 340-350 टन होता है। दो घंटे के भीतर उतरने का मतलब है लगभग 100 टन ईंधन बर्बाद करना। लगभग एक लाख रुपये प्रति टन पर, अकेले ईंधन की बर्बादी की लागत 1 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें IGI एयरपोर्ट पर अप्रत्याशित लैंडिंग और पार्किंग शुल्क जैसे अन्य खर्च, दिल्ली के होटलों में 200 से अधिक यात्रियों और क्रू मेंबर्स को रखना, छूटे हुए कनेक्शन के लिए बाद में उन्हें मुआवजा देना जैसे खर्च शामिल हैं। झूठी अफवाह से 3 करोड़ का नुकसान झूठी अफवाह पर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग फिर पूरी तरह से जांच के बाद विमान को सेवा में वापस सेवा में लाने से पहले ऑपरेटिंग क्रू की नई जोड़ी की व्यवस्था करना शामिल होता है। अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेटिंग क्रू, फ्लाइट के JFK एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचने से यात्रियों को परेशानी होती है। इसके साथ इस एक फर्जी धमकी से एयरलाइन कंपनी को करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। पिछले रविवार से ऐसा लग रहा फर्जी धमकियों की बाढ़ आ गई है। गुरुवार देर रात तक करीब 40 धमकी भरी अफवाहों के चलते का एयरलाइंस पर भारी वित्तीय प्रभाव पड़ा है। एयरलाइन अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त खर्च लगभग 60-80 करोड़ रुपये है।   एअर इंडिया के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग एअर इंडिया B777 (VT-ALM) का मामला लें, जिसने इस मंगलवार (15 अक्टूबर) को दिल्ली से शिकागो के लिए उड़ान भरी थी। बारह घंटे बाद, 200 से अधिक यात्रियों के साथ फ्लाइट बम की धमकी के चलते कनाडा के दूर-दराज वाले शहर इकालुइट में उतर गया। विमान 15 अक्टूबर को सुबह 5.21 बजे वहां उतरा। इस विमान की अगली व्यावसायिक उड़ान साढ़े तीन दिन बाद हुई। पहले यह एक फेरी फ्लाइट के रूप में इकालुइट से शिकागो पहुंचा। उस समय इसमें कोई यात्री नहीं थे। ऐसा इसलिए क्योंकि फंसे हुए यात्रियों को पहले ही कनाडाई वायु सेना A330 से शिकागो ले जाया गया था। इसके लिए एअर इंडिया भुगतान करेगा। और फिर विमान ने 18 अक्टूबर को शाम 5.15 बजे दिल्ली के लिए एक व्यावसायिक उड़ान के रूप में उड़ान भरी।   बोइंग 777 का एक दिन का खर्च जानिए B777 का औसत मासिक किराया 400,000 डॉलर और 600,000 डॉलर के बीच है। यह लगभग 17,000 डॉलर के औसत डेली किराए पर काम करता है। उड़ान न भरने का मतलब है हर दिन 17,000 डॉलर का नुकसान। अब, अगर झठी धमकी नहीं दी गई होती, तो ये विमान शिकागो पहुंच जाता और फिर कुछ घंटों के बाद, एक नियमित उड़ान के रूप में दिल्ली के लिए रवाना हो जाता। लेकिन शिकागो नहीं पहुंचने का मतलब था कि इकालुइट में 200 से अधिक यात्री और क्रू मेंबर्स फंसे हुए थे। इनके लिए एक दूरदराज के शहर में रहना, खाना और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं की व्यवस्था करना पड़ा।   एयरलाइन के साथ यात्रियों को होती है परेशानी फिर इस फ्लाइट के यात्रियों को कनाडा वायुसेना के विमान से शिकागो ले जाना पड़ा। इस बीच, शिकागो के ओ’हारे हवाई अड्डे में दिल्ली जाने वाले यात्रियों को मुश्किलें हुईं। उनसे एयरपोर्ट कर्मियों को निपटना पड़ा, जिनका विमान इसलिए नजर नहीं आया क्योंकि वह इकालुइट में फंसा हुआ था। इस एक धमकी की कुल लागत 15-20 करोड़ रुपये से अधिक होगी, जिसमें इतने लंबे समय तक बोइंग 777 को रोकने की लागत भी शामिल है।   त्योहारी सीजन में बढ़े धमकी भरे कॉल के मामले पिछले कुछ दिनों में इन धमकियों का शिकार बनी किसी भी बड़ी एयरलाइन ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह त्योहारों की भीड़ का पीक सीजन है और हम यात्रियों के बीच डर पैदा नहीं करना चाहते हैं। इतना कहना पर्याप्त है कि यह एयरलाइंस के खिलाफ एक तरह का वित्तीय आतंकवाद है और इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।   लगातार आ रही ऐसी शिकायतें इंडिगो को भी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की कई उड़ानों के लिए धमकियां मिली हैं। बहुत बार जब किसी उड़ान को धमकी का संदेश मिलता है और उसे डायवर्ट नहीं किया जाता। डेस्टिनेशन एयरपोर्ट उसे होल्ड करने या मंडराने के लिए कहता है। लंदन में एअर इंडिया, सिंगापुर में AI एक्सप्रेस और शायद दूसरों के साथ भी ऐसा हुआ है। एक पायलट ने बताया कि बोइंग 777 हर घंटे 7-8 टन ईंधन जलाता है और एक A320 2.5 टन। 1 लाख रुपये प्रति टन और दो घंटे के होवरिंग पर, अकेले ईंधन जलने की लागत सभी प्रभावित एयरलाइंस के लिए कई करोड़ से अधिक है।   धमकियों को नजरअंदाज भी नहीं कर सकते एक बड़ी एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हवा में बिताए गए अतिरिक्त समय के कारण, बहुत बार वही क्रू मेंबर्स अगली उड़ान संचालित नहीं कर सकता है। वहीं ये फ्लाइट सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जांच के बाद क्लीयर होने पर ही उड़ान के लिए संचालित होगा। उन्हें आराम करने और उस शहर के होटल में रहने की सुविधा देने की आवश्यकता होगी। हालांकि यह हमारे नियंत्रण से परे एक अप्रत्याशित घटना है, लेकिन कई यात्री जो विमान में देरी होने पर अपने कनेक्शन मिस कर जाते हैं वे हमें अदालत में घसीटने की धमकी देते हैं। ऐसे में हमें अंततः हर्जाना देकर समझौता करना होता है।   कैसे लगे लगाम इस मामले को और भी बदतर बनाने वाली बात यह है … Read more

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