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डाटाबेस प्रबंधन में अवसर

किसी भी कंपनी के लिए उनके डाटाज बेहद महत्वपूर्ण होते है। इन डाटा को सुरक्षित और अपडेट करने के डाटाबेस प्रबंधन की डिमांड तेजी से बढ़ती जा रही है। आखिर क्या है इनकी भूमिका? क्या आपकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से हुई है, जिनके पास कंपनी से संबंधित सारे डाटाज उपलब्ध हों। यदि हां, तो आपकी मुलाकात अब तक किसी ऐसे डाटाबेस प्रबंधक से हो गई होगी, जिनका प्रमुख काम होता है कंपनी की छोटी-छोटी गतिविधियों का ब्योरा रखना और उस ब्योरे से संबंधित डाटा को लगातार अपडेट करते रहना। दरअसल, डाटाबेस प्रबंधन द्वारा अपडेट किए जाने वाले डाटाज पर ही किसी भी संस्था के महत्वपूर्ण निर्णय निर्भर करते हैं। देखा जाए, तो इनका काम बेहद महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ चुनौतिपूर्ण भी होता है, क्योंकि उन्हें अपने डाटाज को लगातार अपडेट करना होता है। दरअसल, वे इस तरह का काम कंपनी की बेहतरी के लिए करते हैं और इसके लिए उन्हें बाजार की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर भी रखनी पड़ती है। गौरतलब यह है कि डाटाबेस कुल मिलाकर एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें जानकारियों को स्टोर किया जाता है। क्या आपको डाटाज मेंटेन करना अच्छा लगता है? अगर हां, तो आप इसे करियर के रूप में चुन सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपको कम्प्यूटर लैंग्वेज की जानकारी होनी चाहिए। जॉब पर रखें नजर:- वैसे, ऑरकल सर्टिफाइड असोसिएट (ओसीए) सर्टिफिकेशन के साथ इस क्षेत्र में फ्रेशर्स को भी आसानी से प्रवेश मिल जाता है। शुरुआती दौर में इन्हें लगभग 2-4 लाख रुपये सालाना मिल जाते हैं। दरअसल, 10 से 15 डेवलॅपर्स पर एक डेवलॅपमेंट डाटाबेस ऐडमिनिस्ट्रेटर की आवश्यकता होती है। आज जिस तरह से ज्योग्रफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी आदि जैसे क्षेत्रों का विकास हो रहा है, उससे इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं निरंतर बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही आपके पास कई और विकल्प भी हैं, जिन पर भी गौर किया जा सकता है। इसके अलावा, आप डाटाबेस एनालिस्ट के रूप में भी कार्य कर सकते है। ये योग्यताएं हैं जरूरी… ऑरकल पीएल की जानकारी आवश्यक है। पीएल-एसक्यूएल स्टोर्ड प्रोसिड्योर, ट्रीगर्स आदि को डेवलॅप करने की जानकारी। डाइनेमिक एसक्यूएल और जिन्हें असाधारण परिस्थितियों को संभालना अच्छी तरह आता हो। अच्छी कम्युनिकेशन और मैनेजमेंट स्किल। यदि आपके पास ये योग्यताएं हैं, तो डाटाबेस प्रबंधन के रूप में आपका भविष्य सुरक्षित और बेहतर हो सकता है।  

रिपोर्ट: वित्त वर्ष 2025 में भारत का सेवा निर्यात 9.8% बढ़कर 180 अरब डॉलर पर पहुंचा

नई दिल्ली भारत के सेवा क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन जारी रखा है, जिसमें सेवाओं के निर्यात में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 180 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। वहीं, सेवाओं के आयात में भी 9.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 62.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में दी गई है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप, सेवाओं का व्यापार संतुलन 82.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक है। हालांकि, सेवाओं के निर्यात और आयात में क्रमिक वृद्धि मामूली रही है। चालू खाता घाटा (CAD) वित्त वर्ष 2025 (FY25) के लिए चालू खाता घाटा 1 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। स्थिर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और मजबूत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) प्रवाह, जो कि अनुकूल ब्याज दरों और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए नीतियों द्वारा समर्थित हैं, बाहरी खाते का समर्थन करेंगे। निर्यात में संभावित बाधाएं मौद्रिक नीति में ढील के शुरू होने में देरी निर्यात सुधार को बाधित कर सकती है, लेकिन मौलिक अर्थशास्त्रीय कारक व्यापार में मध्यम अवधि में सुधार के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ दिखाते हैं। आने वाले महीनों में व्यापार घाटे पर ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि आयात की वृद्धि निर्यात में धीरे-धीरे सुधार से अधिक हो सकती है। व्यापार घाटे की स्थिति सितंबर में सुधार के बावजूद, वित्त वर्ष 2025 के पहले छह महीनों के लिए व्यापार घाटा अधिक है, जो संभावित चुनौतियों का संकेत देता है। वित्त वर्ष का दूसरा आधा भाग (H2FY25) आमतौर पर मौसमी कारकों के कारण निर्यात गतिविधियों में वृद्धि देखता है, लेकिन पूर्ण सुधार वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा, जो अभी भी अनिश्चित हैं। आयात में कमी इस सुधार का मुख्य कारण सोने के आयात में भारी गिरावट है, जो पिछले महीने 10.1 अरब डॉलर से घटकर 4.4 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में (H1FY25) व्यापार घाटा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 119.2 अरब डॉलर की तुलना में 137.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से तेजी से बढ़ते आयात के कारण हुई है, जो निर्यात में मामूली सुधार से अधिक है। निर्यात का आंकड़ा अप्रैल से सितंबर की अवधि में निर्यात में केवल 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 213.2 अरब डॉलर तक पहुंचा है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में 8.9 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले महत्वपूर्ण सुधार है। वृद्धि का नेतृत्व फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग वस्त्र, और रसायनों जैसे क्षेत्रों ने किया है। हालांकि, कृषि और संबंधित उत्पादों के निर्यात महंगाई के दबाव के कारण कमजोर बने रहे हैं। आयात का रुख महत्वपूर्ण गैर-तेल और गैर-सोने के आयात में, गैर-धातु धातुएं, पूंजी वस्तुएं, और इलेक्ट्रॉनिक्स में मजबूत वृद्धि बनी हुई है, जो पूंजी निवेश और उपभोक्ता खर्च की मांग को दर्शाती है। दलहन का आयात भी बढ़ा है, जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए है। भविष्य की चुनौतियाँ हालांकि, आयात का मार्ग upward रहने की उम्मीद है, जो औद्योगिक इनपुट और धातुओं की वैश्विक कीमतों में वृद्धि से प्रेरित है। वैश्विक मांग, विशेषकर यूरोजोन और चीन में, नरम बनी हुई है, जबकि तेल की कीमतों में अस्थिरता आयात बिल को और बढ़ा सकती है। महंगाई के दबाव, घरेलू मांग में वृद्धि, और त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में स्थिरता व्यापार संतुलन पर दबाव डाल सकती है। इसके अतिरिक्त, अगर भारतीय रुपया कमजोर रहता है, तो आयातित महंगाई के जोखिम बढ़ सकते हैं।  

योगी सरकार की नई योजना से होगी 8 लाख की कमाई, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूटूबर को फायदा

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने डिजिटल दुनिया में रोजगार के नए दरवाजे खोलते हुए एक नई सोशल मीडिया पॉलिसी की घोषणा की है। इसके तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स अब राज्य की कल्याणकारी योजनाओं और अन्य पहल का प्रचार करके हर महीने 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यह पॉलिसी राज्य के युवाओं और डिजिटल क्रिएटर्स के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। इसी के साथ-साथ सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में मदद करेगी। इस पॉलिसी में क्या है खास? दरअसल, यूपी सरकार ने एक नई सोशल मीडिया पॉलिसी की घोषणा की है। इस पॉलिसी का मकसद न केवल सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना है, बल्कि राज्य के युवाओं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को एक मौका देना है, जिसके तहत वे सरकारी योजनाओं और पहल को प्रमोट करके हर महीने लाखों रुपये कमा सकते हैं। यह पॉलिसी फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगी, जिससे डिजिटल दुनिया में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इंफ्लुएंसर्स के लिए सुनहरा मौका इस पॉलिसी के तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए पैसे मिलेंगे। खास बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इंफ्लुएंसर्स के फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिसके अनुसार उनकी अधिकतम कमाई तय की गई है। एक्स (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम – अधिकतम भुगतान: ₹5 लाख प्रति माह (X) – अधिकतम भुगतान: ₹4 लाख प्रति माह (फेसबुक) – अधिकतम भुगतान: ₹3 लाख प्रति माह (इंस्टाग्राम) – अधिकतम भुगतान: ₹2 लाख प्रति माह (कम फॉलोअर्स के लिए) यूट्यूब – अधिकतम भुगतान: ₹8 लाख प्रति माह (वीडियो, शॉर्ट्स, और पॉडकास्ट के लिए) – अन्य श्रेणियों में ₹7 लाख, ₹6 लाख और ₹4 लाख प्रति माह तक की कमाई हो सकती है। इंफ्लुएंसर्स को सरकारी योजनाओं के वीडियो, ट्वीट्स, पोस्ट्स और रील्स को सोशल मीडिया पर शेयर करना होगा, जिसे ‘V-Form’ नामक एक डिजिटल एजेंसी संभालेगी। यह एजेंसी इस पूरी प्रक्रिया को मैनेज करेगी, जिससे इंफ्लुएंसर्स को सीधे भुगतान मिलेगा। कैसे बन सकते हैं इसका हिस्सा? अगर आप एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं और इस पॉलिसी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा। सोशल मीडिया अकाउंट्स की श्रेणीः आपको पहले यह तय करना होगा कि आपके फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स की संख्या किस कैटेगरी में आती है। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के लिए अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं, जिसके आधार पर आपकी कमाई तय होगी। रजिस्ट्रेशन: इस स्कीम का हिस्सा बनने के लिए आपको सरकार द्वारा नामित एजेंसी ‘V-Form’ के माध्यम से रजिस्टर करना होगा। इसके लिए आपको अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी, फॉलोअर्स की संख्या और कंटेंट के नेचर को सबमिट करना होगा। कॉन्टेंट की अपलोडिंगः रजिस्ट्रेशन के बाद आपको सरकारी योजनाओं से जुड़े वीडियो, पोस्ट्स, रील्स या पॉडकास्ट को अपने प्लेटफार्म पर अपलोड करना होगा। इन पोस्ट्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनकी लाभकारी पहल को जनता के सामने लाना होगा। अधिकतम कमाई: जैसे-जैसे आपके फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स बढ़ेंगे, वैसे-वैसे आपकी कैटेगरी भी बढ़ेगी, जिससे आप हर महीने 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यूट्यूब पर कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है, जहां वीडियो, शॉर्ट्स और पॉडकास्ट के माध्यम से उन्हें सबसे अधिक कमाई का मौका मिलेगा। सिस्टम से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पॉलिसी केवल सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों को लाभान्वित करने वाली है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं को तेजी से और प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकेगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी कम पहुंच पाती है, इस पॉलिसी के जरिए उन्हें सरकारी लाभों के बारे में पता चलेगा। फर्जी खबरों पर भी लग सकेगी रोक! इस पॉलिसी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी और भ्रामक खबरों पर भी अंकुश लगाएगी। इसके तहत सरकार ने नियम बनाए हैं, जिसमें किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक, राष्ट्र-विरोधी या समाज-विरोधी कंटेंट पोस्ट करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फर्जी खबरों, नफरत फैलाने वाले संदेशों और समाज को भड़काने वाले कंटेंट पर सरकार की नजर रहेगी और उचित जरूरी उठाए जाएंगे।

अल्ट्राटेक सीमेंट को दूसरी तिमाही में 825 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

नई दिल्ली अग्रणी सीमेंट उत्पादक कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड का जुलाई-सितंबर तिमाही का एकीकृत शुद्ध लाभ घटकर 825.18 करोड़ रुपये रहा है। आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी ने शेयर बाजार को यह जानकारी दी। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी ने 1,280.38 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया था। कंपनी ने कहा कि व्हाइट सीमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स पीएससी (आरएकेडब्ल्यू) के लिए यूएई स्थित रास अल खालमा कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 54.79 प्रतिशत किए जाने से उसके तिमाही नतीजों की तुलना पिछले वर्ष की समान अवधि के साथ नहीं की जा सकती है। अल्ट्राटेक ने कहा, ‘‘अतिरिक्त हिस्सेदारी के अधिग्रहण से आरएकेडब्ल्यू 10 जुलाई, 2024 से अनुषंगी कंपनी बन गई है। इन परिणामों में आरएकेडब्ल्यू के 10 जुलाई से प्रभावी वित्तीय परिणाम शामिल हैं लिहाजा सितंबर तिमाही और पहली छमाही के आंकड़ों की तुलना पिछले साल की समान अवधि से नहीं की जा सकती है।’’ आलोच्य अवधि में अल्ट्राटेक का परिचालन राजस्व 15,634.73 करोड़ रुपये था जो एक साल पहले इसी अवधि में 16,012.13 करोड़ रुपये था। सितंबर तिमाही में कंपनी का कुल खर्च 14,837.44 करोड़ रुपये रहा। इस अवधि में कंपनी की कुल आय, जिसमें अन्य आय शामिल है, 15,855.46 करोड़ रुपये थी।  

भाई-बहन के प्यार के प्रतीक दूज का पर्व, जाने तिलक करने का सही नियम

रक्षाबंधन के अलावा भाई दूज के पर्व को भी भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार रक्षाबंधन के दिन बहनें अपनी भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। ठीक उसी तरह भाई दूज के दिन भी भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वजन उन्हें देते हैं। हालांकि इस दिन राखी नहीं बांधी जाती है, बल्कि बहनें अपने भाइयों का केवन तिलक करती हैं। प्यार के रूप में भाई अपनी बहनों को तोहफा देते हैं। इस बार भाई दूज की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। चलिए जानते हैं साल 2024 में 2 नवंबर या 3 नवंबर, किस दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ आपको तिलक करने के शुभ मुहूर्त और नियम के बारे में भी पता चलेगा। 2024 में भाई दूज कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का आरंभ 02 नवंबर को रात 08:21 मिनट से हो रहा है, जिसका समापन अगले दिन 03 नवंबर को देर रात 10 बजकर 05 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर भाई दूज का त्योहार 3 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा। 03 नवंबर 2024 को तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर बाद 01 बजकर 10 मिनट से लेकर 03 बजकर 22 मिनट तक है। इस अवधि के दौरान बहनें अपने भाई का तिलक कर सकती हैं। भाई दूज पर तिलक करने का तरीका     बहनें भाई दूज के दिन सुबह ही तिलक की थाली तैयार करें।     थाली में फल, फल, कुमकुम, मिठाई, चावल और चंदन जरूर रखें।     शुभ मुहूर्त में ही बहनें अपनी अनामिका यानी छोटी उंगली से भाई के माथे पर कुमकुम या चंदन से तिलक करें।     इसके बाद तिलक के ऊपर चावल लगाएं।     तिलक करने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं।     अंत में बहनें भाई की आरती उतारें।     इसके बाद भाई अपनी बहनों को गिफ्ट दें और उनका आशीर्वाद लें।  

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रायपुर- दुर्ग रेलवे स्टेशन का हो रहा कायाकल्प

रायपुर भारतीय रेल देश की लाइफ लाइन है। रेलवे लगातार यात्री सेवा को सुलभ करने के लिए नवीनतम तकनीक, सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। वर्तमान में रेल मंत्रालय के महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधा प्रदान करने हेतु “अमृत भारत स्टेशन” योजना के अंतर्गत स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल के 15 स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत कायाकल्प किया जा रहा है। (1) भाटापारा, (2) भिलाई पावर हाउस, (3) तिल्दा-नेवरा, (4) बिल्हा, (5) भिलाई, (6) बालोद, (7) दल्ली राजहरा, (8) भानुप्रतापपुर, (9) हथबंद, (10) सरोना, (11) मरोदा, (12) मंदिर हसौद, (13) उरकुरा, (14) निपनिया, (15) भिलाई नगर, रिडेवलपमेंट आॅफ मेजर स्टेशन में (1) रायपुर, (02) दुर्ग स्टेशनों का विकास किया जा रहा है। मेजर रिडेवलपमेंट किया जा रहा हैं।रायपुर स्टेशन का मेजर री डेवलपमेंट लगभग 482.48 करोड़ है। इन योजनाओ का मकसद आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता के साथ मौजूदा सुविधाओं के अपग्रेडेशन पर भी काम करना है। चरणबद्ध तरीके से इन कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। इसी कड़ी में रायपुर रेलवे स्टेशन जो छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण जिला एवं राजधानी होने के कारण महत्वपूर्ण स्टेशन है। व्यापारिक केंद्र एवं पर्यटन स्थल है जहाँ पर वर्ष भर पड़ोसी राज्य से यात्रियों का आना झ्रजाना लगा रहता है। इसी को ध्यान में रखकर रायपुर स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाएं और यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन के आसपास अच्छी व्यवस्थाएं होने से आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रायपुर स्टेशन को यात्रियों के अनुकूल सर्वसुविधायुक्त बनाने हेतु भव्य प्रवेश एवं विकास द्वार, यात्रियों के आवागमन एवं निकास के लिए सुगम पथ ,10 टिकट बुकिंग विंडो, बेहतरीन प्लेटफार्म सरफेस, 300 किलोवाट पावर सोलर सोलर पैनल युक्त ऊर्जा संरक्षण, प्रत्येक प्लेटफार्म पर 26 कोच इंडिकेशन बोर्ड, 74 टॉयलेट, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, 6 मीटर चौड़े तीन फुट ओवर ब्रिज 40 वाटर कूलर 42 लिफ्ट, 3512 स्क्वायर मीटर पार्सल एरिया, 12075 स्क्वायर मीटर प्लेटफार्म शेल्टर, 10 यात्री आरक्षण सुविधा काउंटर, 16 एस्केलेटर लगाए जाने हैं। रिजर्व लॉज, मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब, कोनकोर्स एरिया, बस्तर छत्तीसगढ़ी आर्ट से सुसज्जित होगा रायपुर स्टेशन विश्व स्तरीय यात्री सुविधाओं से उन्नत होगा रायपुर स्टेशन। वर्तमान समय में रायपुर स्टेशन पर लगभग 50 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। भविष्य में यात्रियों की संख्या और बढ़ाने को देखते हुए स्टेशन डेवलपमेंट में यात्री सुविधा उन्नत की जा रही है। ये सभी कार्य योजनाबद्ध तरीके से किए जाएंगे। रायपुर स्टेशन पर किए जा रहे पुनर्विकास कार्यों से यात्रियों के लिये आरामदायक व सुलभ यात्रा के साथ ही साथ उन्हें नया यात्रा अनुभव प्राप्त होगा तथा संस्कृति, पर्यटन और व्यापार में भी व्यापक विस्तार होगा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्री सुविधा एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में भी उन्नत और आधुनिक यात्री सुविधा के कार्य जारी रहेंगे।

पराली जलाने पर SC सख्त, पराली जलाने पर CQM से मांगा जवाब

लुधियाना बीते 24 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने के मुद्दे पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से जवाब तलब किया कि पराली जलाना फिर से क्यों शुरू हो गया? सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि ‘सीएक्यूएम एक्ट की धारा-14 के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाया गया है।’ अदालत ने पंजाब और हरियाणा की सरकारों को भी फटकार लगाते हुए कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की है। दरअसल, सीएक्यूएम की धारा के तहत पराली जलाने पर अधिकारियों, कर्मचारियों को सजा का भी प्रावधान है। सवाल है कि क्या अकारण सर्वोच्च न्यायालय को पराली जलाने पर एक जिम्मेदार संस्थान को फटकार लगानी पड़ी! पंजाब में पराली जलाने के मामले आठ से 93 तक पहुंच गए क्या सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद पराली प्रबंधन विफल हो चुका है? क्या कृषक जन-मन अब भी पूरी तरह से पराली प्रबंधन पर पुरानी परिपाटी से चल रहा है? जाहिर है, कुछ न कुछ कुप्रबंधित जरूर है। सितंबर माह के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पराली जलाने के कुल 75 मामले उजागर हो चुके हैं। हैरत की बात है कि 15-25 सितंबर के बीच पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं पांच से ग्यारह फीसद तक बढ़ी हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष इसी अवधि में जहां हरियाणा में पराली जलाने के तेरह मामले पाए गए थे, इस बार बढ़ कर 70 हो गए। इसी तरह पंजाब में पराली जलाने के मामले आठ से 93 तक पहुंच गए। हरियाणा में करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर सर्वाधिक प्रभावित जनपद हैं। वहां कुल 70 मामलों में 31 मामले पाए गए। इसी तरह पंजाब के कुल 93 मामलों में से 58 मामले तरनातरन, गुरुदासपुर और अमृतसर में पाए गए। अनवरत पराली दहन से बिगड़ती आबोहवा का खमियाजा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को भुगतना पड़ता है। सर्दियों के शुरुआती दौर में ही दम घुटने-सा लगता है। अभी बीते 24 सितंबर तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 203 तक दर्ज किया गया। ऐसे हालात में सुप्रीम की फटकार स्वाभाविक है। पराली जलाने पर निगरानी के लिए हर वर्ष निगाह रखी जाती है ऐसा नहीं कि सरकार ने विगत वर्षों में पराली दहन को लेकर कुछ नहीं किया। पर शासन, प्रशासन, सरकारी संस्थाओं और पराली जलाने वाले किसानों के बीच संबंध में जरूर कुछ कमी रह जाती है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के हवाले से केंद्र सरकार ने सूबे की सरकारों को पराली जलाने के दोषी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ न देने का सख्त निर्देश दिया है। पराली जलाने पर निगरानी के लिए हर वर्ष 15 सितंबर तक ‘कंसोर्टियम फार रिसर्च आन एग्रो इकोसिस्टम मानिटरिंग ऐंड माडलिंग फ्राम स्पेस’ (क्रीम्स) द्वारा सेटेलाइट से निगाह रखी जाती है। इससे ‘गूगल लोकेशन’ के साथ पराली जलाने का पता लग जाता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पराली जलाने पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए ढाई हजार रुपए, दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपए और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए पंद्रह हजार रुपए तक अर्थदंड का प्रावधान किया है। दुबारा पराली जलाने पर संबंधित किसान के खिलाफ कारावास और अर्थदंड का भी प्रावधान है। इसी तरह धान काटने के यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर में ‘स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम’ (एसएमएस) अनिवार्य कर दिया गया है। बिना एसएमएस वाले कंबाइन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। विगत वर्षों में विभिन्न सूबों में हजारों किसानों के विरुद्ध पराली जलाने पर एफआइआर भी दर्ज कराई गई है। पराली जलाने से मृदा में मौजूद अनेक लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक एक टन पराली जलने से मृदा में मौजूद 5.5 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलो ग्राम फास्फोरस, 25 किलो ग्राम पोटैशियम, 1.2 किलो ग्राम सल्फर समेत अन्य उपयोगी पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान की रपट के मुताबिक उत्तर भारत के राज्यों में पराली जलाने के कारण तकरीबन दो लाख करोड़ रुपए की आर्थिक हानि होती है। एक अन्य जानकारी के मुताबिक दिल्ली में पराली प्रदूषण की वजह से ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन’ (एआरआइ) ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा होता है। प्रदूषण का स्तर उच्च होने के कारण दिल्ली वासियों की जीवन प्रत्याशा में लगभग साढ़े छह साल की कमी आई है। पराली जलने से कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, मीथेन, पाली सायक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इन प्रदूषकों के प्रसार से ‘स्माग’ का एक मोटा आवरण निर्मित होता है, जिससे ब्रोंकाइटिस, तंत्रिका और हृदय संबंधी, यहां तक कि कैंसर जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या का समाधान केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को जागरूक बनाना होगा। किसान कम अवधि वाली धान की प्रजातियां लगाएं, जिससे पराली जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, और अगली फसल के लिए पराली विघटन को पर्याप्त समय मिल जाए। पिछले वर्ष हरियाणा सरकार ने धान की सीधी बिजाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया था, जिससे 30 सितंबर तक वहां की मंडियों में आठ लाख टन धान बिकने आया था। इससे इतर, धान की कम अवधि वाली प्रजातियों, जैसे पीआर-126, पीबी 1509 आदि बोने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। ‘हैप्पी सीडर’ का प्रयोग किया जाए, जिसमें पराली का बंडल बनकर ऊपर आ जाता है, गेहूं की बुवाई हो जाती है और पराली का बंडल पलवार के रूप में खेत पर बिछ जाता है। इसके अलावा ‘पैलेटाइजेशन’ को अपनाया जा सकता है। इसमें पुआल को सुखाकर गुटिका के रूप में बदल दिया जाता है, उसे कोयले के साथ मिलाकर थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों में ईंधन की तरह प्रयोग करते हैं। इससे एक ओर जहां कोयले की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन में कटौती होती है। ‘गौठान’ छत्तीसगढ़ का एक नवीन प्रयोग है। इसमें पांच एकड़ सरकारी भूमि में दान की गई पराली एकत्र कर गाय के गोबर और प्राकृतिक एंजाइम मिला कर जैविक खाद बनाई जाती है। पराली को ‘कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट’ (सीबीजीपी) में भेज दिया जाए तो ईंधन तैयार हो जाता है। दिल्ली के … Read more

भोपाल में बनेगा वंदे भारत के संचालन व मेंटेनेंस प्रशिक्षण का सेंटर, अभी प्रशिक्षण लेने भुसावल या उदयपुर जाना पड़ता है

भोपाल  भोपाल के निशातपुरा रेल कोच फैक्ट्री के पास पश्चिम मध्य रेलवे का पहला मल्टी डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि यहां वंदे भारत ट्रेनों के संचालन और मेंटेनेंस के प्रशिक्षण की आधुनिक लैब भी बनाई जा रही है। इसके बन जाने के बाद भोपाल वंदे भारत पर काम करने वाले देश भर के रेलवे कार्मिकों के प्रशिक्षण का बड़ा केंद्र बन जाएगा। बताया जा रहा है कि अभी पश्चिम मध्य रेलवे के लोको पायलट, गार्ड और स्टेशन मैनेजर आदि अधिकारी व कर्मचारियों का पेशेवर प्रशिक्षण भुसावल और उदयपुर में होता है। इसको अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए निशातपुरा में मल्टी डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर की परिकल्पना की गई थी। अब उसमें वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेन प्रणाली के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल भी जोड़ दिया गया है। तैयार होगी विशेष लैब यहां वंदे भारत लोको सिमुलेटर लैब को तैयार किया जा रहा है। इस लैब में वंदे भारत के लोको पायलट ट्रैक पर वास्तविक ट्रेन संचालन का अनुभव कर पाएंगे। इसमें उन्हें लोको पायलट केबिन से नियंत्रित होने वाली प्रणालियों के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें कब, कहां कितनी गति रखनी है, किन परिस्थितियों में ब्रेक लगाना है, सिग्नल की प्रक्रिया आदि का प्रशिक्षण भी सिमुलेटर पर ही दिया जाएगा। इनका मिलेगा प्रशिक्षण ट्रेनिंग सेंटर में तकनीकी, सिग्नल, दूरसंचार, इंजीनियरिंग, लेखा, कार्मिक, भंडार, रेलों की विविध प्रणाली, यातायात विभाग से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केंद्र में देशभर से रेलवे अधिकारी.कर्मचारी प्रशिक्षण लेने आएंगे। केंद्र में ऐसी सुविधा होगी इस प्रशिक्षण केंद्र में 80 बिस्तरों वाला होस्टल, कैंटीन, प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय, कंप्यूटर केंद्र, सभागार, चिकित्सा कक्ष जैसी सुविधाएं बनाई जा रही हैं। यह केंद्र अगले साल तक शुरू हो जाएगा। निशातपुरा के पास मल्टी डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है। जल्द ही यहां रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी को प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। – सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम, भोपाल रेल मंडल

कमला हैरिस ही बनेंगी अमेरिका की राष्ट्रपति? क्या सच साबित होगी एलन लिक्टमैन की भविष्यवाणी

वाशिंगटन अमेरिकी इतिहास में चुनावी परिणामों की सटीक भविष्यवाणी करने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार एलन लिक्टमैन ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जो चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है, सवाल यही है कि कया वह सच साबित होगी। दरअसल लिक्टमैन का कहना है कि इस बार राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस विजेता बनकर उभरेंगी। उनके अनुसार, भले ही डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता मजबूत हो, लेकिन कई प्रमुख कारक हैरिस के पक्ष में हैं। 1981 में लिक्टमैन और गणितज्ञ व्लादिमीर केलिस-बोरोक द्वारा विकसित द कीज टू द व्हाइट हाउस प्रणाली के आधार पर की गई यह भविष्यवाणी अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। लिक्टमैन की द कीज टू द व्हाइट हाउस प्रणाली में 13 प्रमुख बिंदुओं के आधार पर विश्लेषण किया जाता है जो यह निर्धारित करते हैं कि कौन सी पार्टी चुनाव जीतने की स्थिति में है। इनमें कांग्रेस में पार्टी की स्थिति, अर्थव्यवस्था, घोटाले, सामाजिक अस्थिरता, और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि जैसी बातें शामिल हैं। लिक्टमैन के अनुसार, इस बार के चुनाव में आठ प्रमुख कारक हैरिस के पक्ष में हैं। इस पद्धति ने 1984 से अब तक के दस में से नौ चुनाव परिणामों को सटीकता से भविष्यवाणी की है। हालांकि, इस बार राजनीतिक माहौल असामान्य रूप से चुनौतीपूर्ण है, खासकर जब देश में विभाजन और तनाव बढ़ा हुआ है। कमला हैरिस के पक्ष में अनुकूल कारक लिक्टमैन की भविष्यवाणी में आठ कारक ऐसे हैं, जो कमला हैरिस के पक्ष में माने जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं- अर्थव्यवस्था की स्थिति – लिक्टमैन के अनुसार, आर्थिक मोर्चे पर कुछ स्थिरता है, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी को बढ़त मिल सकती है। सत्ता दल की लोकप्रियता – मौजूदा सरकार को लेकर जनता में सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहा है। समर्थन में बढ़ोतरी – हैरिस के पक्ष में युवा और महिला मतदाताओं का समर्थन बढ़ रहा है, जिससे उनकी संभावनाएं मजबूत होती हैं। ट्रंप की प्रतिमा – डोनाल्ड ट्रंप की विवादित छवि और उनके कार्यकाल के कुछ फैसले भी हैरिस के पक्ष में जा सकते हैं। लिक्टमैन को आलोचना और धमकियों का करना पड़ रहा सामना भविष्यवाणी के बाद लिक्टमैन को अश्लील और धमकी भरे संदेश प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें पहले से कहीं अधिक शत्रुता और आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि 2024 का चुनाव असामान्य रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि समाज में ध्रुवीकरण और राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। विदेश नीति का चुनावी प्रभाव लिक्टमैन ने कहा कि गाजा संघर्ष जैसे मुद्दों पर बाइडेन प्रशासन की भूमिका इस चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन सकती है। यदि इस मामले पर अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव आता है, तो यह चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद, लिक्टमैन का मानना है कि यह बदलाव ट्रंप की सत्ता में वापसी के लिए पर्याप्त नहीं होगा। क्या कहती है राजनीतिक विशेषज्ञों की राय? लिक्टमैन की भविष्यवाणी पर राजनीतिक विश्लेषकों ने भी अपनी राय दी है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि कमला हैरिस का अमेरिकी राजनीति में प्रभाव बढ़ा है और उनके पक्ष में कई महत्वपूर्ण कारक हैं। लेकिन ट्रंप समर्थक विशेषज्ञ इस भविष्यवाणी से असहमत हैं और कहते हैं कि इस चुनाव में ट्रंप की वापसी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। क्या होगा 2024 का ऐतिहासिक चुनाव परिणाम? यदि लिक्टमैन की यह भविष्यवाणी सही साबित होती है, तो कमला हैरिस अमेरिका की पहली अश्वेत महिला राष्ट्रपति बनेंगी, जिससे अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव आएगा। एलन लिक्टमैन की द कीज टू द व्हाइट हाउस प्रणाली अब तक ज्यादातर सटीक रही है, जिससे उनकी भविष्यवाणी पर लोगों का ध्यान स्वाभाविक है। क्या 2024 का यह चुनाव इस भविष्यवाणी को साकार करेगा और कमला हैरिस को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में स्थापित करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या लिक्टमैन की भविष्यवाणी एक बार फिर सही साबित होती है और अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आता है।    

मोदी सरकार की ELI योजना: 500 कंपनियों में युवाओं के लिए मौके

नई दिल्ली मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2024 में एक नई योजना ‘रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना’ यानी ‘ELI’ लॉन्च की है। इस योजना का मकसद निर्माताओं और निर्यातकों को प्रोत्साहन देकर निर्यात को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उत्पादों की मार्केट में अच्छी पकड़ बनेगी, घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा में भी बढ़ोतरी होगी। इस योजना को और बेहतर ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने अलग-अलग मंत्रालयों को धन भी आवंटित किया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को 2,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि 500 कंपनियों में युवाओं के लिए इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाए जा सकें। इसी तरह, श्रम मंत्रालय को ELI से जुड़ी बाकी नीतियों को लागू करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये मिले हैं। तीन अलग-अलग योजनाओं का समूह है ELI ELI योजना दरअसल तीन अलग-अलग योजनाओं का एक समूह है। पहली योजना के तहत सरकार नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारियों को वेतन का एक हिस्सा देगी। दूसरी योजना का उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। तीसरी योजना के जरिए नियोक्ताओं को आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी। वेतन सब्सिडी पहली योजना, जिसे ‘वेतन सब्सिडी’ का नाम दिया गया है, के तहत लगभग 1 करोड़ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। यह योजना दो साल तक चलेगी। इसमें उन नए कर्मचारियों को तीन किस्तों में 15,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी जिनका मासिक वेतन 1 लाख रुपये तक है। दूसरी किस्त पाने के लिए उम्मीदवार को ऑनलाइन वित्तीय साक्षरता का एक कोर्स पूरा करना होगा। अगर नौकरी 12 महीने से पहले ही छूट जाती है तो कंपनी को सब्सिडी वापस करनी होगी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार दूसरी योजना ‘मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार’ का उद्देश्य इस सेक्टर में काम करने वाले नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करना है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए नियोक्ताओं का ईपीएफओ में कम से कम तीन साल का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके अलावा, उन्हें कम से कम 50 गैर-ईपीएफओ कर्मचारियों या पिछले साल के ईपीएफओ कर्मचारियों की संख्या के 25 फीसदी (जो भी कम हो) को नौकरी पर रखना होगा। इस योजना के तहत सब्सिडी का भुगतान चार साल तक किया जाएगा और इसे कर्मचारी और नियोक्ता के बीच बराबर बांटा जाएगा। सब्सिडी की गणना वेतन के आधार पर होगी। नियोक्ता को सपोर्ट तीसरी योजना ‘नियोक्ता को सपोर्ट’ खास तौर पर उन नियोक्ताओं के लिए है जो अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाते हैं। इसके तहत, नियोक्ताओं को ईपीएफओ नियोक्ता अंशदान पर हर महीने 3,000 रुपये तक का रिंबर्समेंट दो साल तक मिलेगा। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें हैं। जिन नियोक्ताओं के पास 50 से कम कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम दो नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखना होगा। जिनके पास 50 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम पांच नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखना होगा। अगर कोई कंपनी 1000 से ज्यादा नौकरियां पैदा करती है, तो रिबर्समेंट तिमाही आधार पर किया जाएगा। यह रिंबर्समेंट पिछली तिमाही के हिसाब से किया जाएगा। इसमें जो नियोक्ता ‘दूसरी योजना’ का लाभ ले रहे हैं, वे इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। हालांकि, जो पहली योजना, यानी ‘स्कीम ए’ का लाभ उठा रहे हैं, वे अतिरिक्त लाभ के रूप में इस योजना का फायदा उठा सकते हैं।

कृषि सहकारी समितियां अब प्रदेश के गांवों में जन औषधि केंद्र भी चलाएंगी

भोपाल मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कृषि साख सहकारी समितियां (बी-पैक्स) अब मेडिकल स्टोर यानी जन औषधि केंद्र भी चलाएंगी। यहां से ग्रामीणों को बाजार के मुकाबले सस्ती दरों पर कारगर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हो पाएंगी। इस प्रयोग से सहकारी समितियों को आय का नया स्रोत भी मिल जाएगा। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे जन औषधि केंद्रों के संचालन के लिए प्रदेश की 275 समितियों का चयन किया गया। इनमें से 270 ने अपना औपचारिक आवेदन विभाग को कर दिया। इनमें से 55 समितियों को केंद्र संचालन का लाइसेंस जारी किया गया है। 24 समितियों में जन औषधि केंद्र शुरू भी करवा दिए गए हैं। बढ़ रहा जेनेरिक दवाओं का कारोबार मध्य प्रदेश में ऐसा प्रयोग पहली बार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में कृषि साख सहकारी समितियां वर्ष 2023 में ही दवा कारोबार में उतर चुकी हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में जन औषधि केंद्रों में व्यवसाय अच्छा हो रहा है। पिछले पांच वर्ष में यहां 44 करोड़ रुपये की जेनेरिक दवाएं बिकी हैं। फार्मा कंपनी से होगा अनुबंध नियमों के मुताबिक किसी दवा दुकान के संचालन के लिए फार्मासिस्ट होना अनिवार्य है। जिला उपायुक्त, सहकारिता छविकांत बाघमारे ने बताया कि कृषि साख सहकारी समितियों के जन औषधि केंद्र का संचालन करवाने के लिए फार्मा कंपनी से अनुबंध किया जाएगा। केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव जाना है। वर्तमान में सीहोर, धार सहित कुछ जिलों में समितियों ने स्थानीय स्तर पर फार्मासिस्ट नियुक्त कर दुकानों का संचालन शुरू किया है। किसानों को होगा सीधा फायदा कृषि साख सहकारी समितियों पर जन औषधि केंद्र खुलने का सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा। वे अपने घर के नजदीक सस्ती दवाइयां प्राप्त कर सकेंगे। वहीं समितियों के स्वावलंबी होने से भी किसानों को कर्ज और दूसरी सुविधाएं मिलने में आसानी हो जाएगी। साख समितियों को बहुउद्देशीय बनाने की कवायद सरकार बेहतर कार्य करने वाली सहकारी साख समितियों को बहु उद्देश्यीय और विविध व्यवसाय करने वाली समिति बनाने की कोशिश कर रही है। सहकारिता विभाग ने 4500 समितियों में से 2000 समितियों को इसके लिए चुना है। समितियां कर रही ये कारोबार आर्गेनिक उत्पादों का व्यवसाय करने के 1,454 समितियों ने आवेदन किया है। इन समितियों के यहां आर्गेनिक बीज तैयार करने के लिए जगह भी उपलब्ध है। इस तरह की ज्यादातर समितियां आदिवासी क्षेत्रों में किसानों के साथ मिलकर काम करेंगी। समितियों को निर्यात कारोबार से जोड़ने का भी प्रस्ताव है। इन समितियों की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई गई है। नेशनल एक्सपोर्ट कोऑपरेटिव सोसायटी की सदस्यता के लिए 1,700 समितियों से आवेदन कराया गया है। प्रदेश की कई कृषि साख सहकारी समितियों को अलग-अलग काम करने के लिए कहा गया है। अभी इन समितियों को जन औषधि केंद्र संचालित करने के लिए लाइसेंस दिए जा रहे हैं। -मनोज कुमार सरियाम, पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्य प्रदेश

शेयर बाजार से चाहतें हैं पैसा कमाना तो इन ट्रेडिंग रणनीतियों है कबीले तारीफ

मुंबई ट्रेडिंग का मतलब सिक्टोरिटीज को खरीदना और बेचना होता है। ट्रेडिंग भी कई प्रकार की होती हैं। एक दिन से लेकर सालों के लंबे अंतराल के लिए भी ट्रेडिंग की जाती है। इसके साथ ही अलग-अलग बाजारों के माहौल और वहां मौजूद जोखिम से जुड़ी विभिन्न ट्रेडिंग रणनीतियां शेयरों में कारोबार करने के समय अपनाई जाती हैं। यहां पर हम कुछ ट्रेडिंग रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं जो बाकी रणनीतियों में से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ये रणनीतियां निवेशकों को तर्कसंगत निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) इंट्राडे ट्रेडिंग जिसे डे ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। ये ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें निवेशक एक ही दिन में शेयरों को खरीदते और बेचते हैं। वे शेयर बाजार के बंद होने के समय से पहले ट्रेडिंग बंद कर देते हैं। एक ही दिन में वे मुनाफा और घाटा बुक करते हैं। निवेशक इन शेयरों में एक दिन में कुछ सेकंड, घंटे के लिए या इसमें दिन भर में कई बार ट्रेड ले सकते हैं। इसलिए इंट्राडे एक अत्यधिक वोलाटाइल ट्रेडिंग रणनीति मानी जाती और इसके लिए तेजी से निर्णय लेना होता है। पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading) पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां शेयर्स को महीनों या सालों के लंबे समय तक रखा जाता है। ऐसे शेयरों में समय के साथ भाव में बड़ी बढ़त की अपेक्षा के साथ मुनाफा कमाने की उम्मीद की जाती है। निवेशक आमतौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ कंपनी का टेक्निकल ग्राउंड देखकर इस शैली को अपनाते हैं। इसलिए इस प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति में आमतौर पर बाजार के रुझान और उतार-चढ़ाव जैसी अल्पकालिक जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading) स्विंग ट्रेडिंग आमतौर पर एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक शेयरों के भाव में और तेजी की उम्मीद में एक दिन से अधिक समय तक शेयरों को अपने पास रखते हैं। स्विंग ट्रेडर्स आने वाले दिनों में बाजार की गतिविधियों और रुझानों की भविष्यवाणी करने के लिए जाने जाते हैं। इंट्राडे ट्रेडर्स और स्विंग ट्रेडर्स के बीच स्टॉक को अपने पास रखने की समय सीमा में महत्वपूर्ण अंतर होता है। इसलिए कहा जाता है कि ज्यादातर टेक्निकल ट्रेडर्स स्विंग ट्रेडिंग की कैटेगरी में आते हैं। टेक्निकल ट्रे़डिंग (Technical Trading) टेक्निकल ट्रेडिंग में ऐसे निवेशक शामिल हैं जो शेयर बाजार में प्राइस चेंज की भविष्यवाणी करने के लिए अपने तकनीकी विश्लेषण ज्ञान का उपयोग करते हैं। इस ट्रेडिंग शैली में कोई विशेष समय-सीमा नहीं होती है क्योंकि यह एक दिन से लेकर महीनों तक के लिए भी हो सकती है। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए अधिकांश ट्रेडर्स अपने टेक्निकल एनालिसिस स्किल्स का उपयोग करते हैं। हालांकि स्टॉक की कीमतों का निर्धारण करते समय सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल एनालिसिस बाजार की परिस्थिति होती है। फंडामेंटल ट्रेडिंग (Fundamental Trading) फंडामेंटल ट्रेडिंग का मतलब स्टॉक में निवेश करना होता है जहां ट्रेडर्स समय के साथ भाव में तेजी की उम्मीद के साथ कंपनी के स्टॉक को खरीदता है। इस तरह की ट्रेडिंग में ‘बाय एंड होल्ड’ रणनीति में विश्वास किया जाता है। इस प्रकार की ट्रेडिंग आमतौर पर कंपनी के फोकस्ड इंवेंट्स में किया जाता है। इसके लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, नतीजों, ग्रोध और मैनेजमेंट क्वालिटी का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाता है। मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रेडिंग रणनीतियाँ बहुत काम की होती हैं और निवेशक को उस ट्रेडिंग शैली पर निर्णय लेने में मदद करती हैं जिसे वे अपनाना चाहते हैं। प्रत्येक प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत की गहन समझ के साथ ट्रेडर्स चाहें तो रणनीतियों के संयोजन का उपयोग करके भी शेयरों में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।

ज्यादातर भारतीय खा रहे हैं तय मात्रा से दोगुना नमक, जानिए इसके नुकसान

हाई सोडियम (नमक) वाली चीजों को सेहत के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक माना जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि नमक वाली चीजों के अधिक सेवन के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है। पर इसके नुकसान सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, ये आदत आपमें किडनी की बीमारी, हड्डियों की कमजोरी को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। यानी शरीर को स्वस्थ और फिट रखना है तो आहार में नमक की मात्रा कम करना बहुत जरूरी है। ज्यादा नमक खाने के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और इससे बचाव के लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि हमें कितनी मात्रा में नमक खाना चाहिए? और कितना नमक नुकसानदायक हो सकता है। एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में ज्यादातर लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित मात्रा से दो-तीन गुना अधिक नमक खाते हैं। कहीं आप भी तो बहुत अधिक नमक का सेवन नहीं कर रहे हैं? कितना नमक खाना सेहत के लिए ठीक है? डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी सेहत के लिए वयस्कों को दिनभर में 4-5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। ये मात्रा एक चम्मच नमक के बराबर है।यहां समझना जरूरी है कि नमक के सेवन का मतलब सिर्फ भोजन में डालने वाले नमक से नहीं है। चिप्स, नमकीन, पैक्ड फूड्स, जंक फूड आदि में भी नमक की अधिक मात्रा होती है। इन सभी चीजों को मिलाकर एक दिन में एक टेबलस्पून से अधिक नमक नहीं खाना चाहिए। भारत में नमक की खपत अधिक इसी साल मई में प्रकाशित डब्ल्यूएचओ की  वैश्विक रिपोर्ट में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने कहा था कि भारतीय लोग तय मात्रा से बहुत अधिक नमक का सेवन करते हैं। रिपोर्ट में भारत को अत्यधिक नमक की खपत वाले शीर्ष 50 देशों में रखा गया है। स्वस्थ शरीर के लिए आदर्श मात्रा प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 5 ग्राम तक है, जबकि ज्यादातर लोग प्रतिदिन 11 ग्राम से अधिक नमक खाते हैं। बढ़ता जा रहा है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट कहती है, हर चार में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार हो सकता है। हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर को हृदय रोगों के लिए प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। डॉक्टर कहते हैं, आहार में नमक की मात्रा कम करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखा जा सकता है। इस एक आदत में सुधार करके आप हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचे रह सकते हैं। कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं खा रहे हैं ज्यादा नमक? स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बहुत ज्यादा नमक खाने के कारण आपको फौरी तौर पर कुछ लक्षणों का अनुभव हो सकता है, जिसपर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। ज्यादा नमक वाली चीजों के सेवन के कारण आपको पेट फूलने, ब्लड प्रेशर बढ़े रहने, पैरों में सूजन, बहुत अधिक प्यास लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अगर आपको भी इस तरह की दिक्कतों का अनुभव होता है तो नमक या वो चीजें खाना कम कर दें जिनमें नमक की अधिकता हो सकती है।

Govt Scheme: इधर एग्जाम पास, उधर खाते में आएंगे 100000 रुपए

नई दिल्ली यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को अक्सर आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तेलंगाना सरकार ने एक अहम योजना शुरू की है। दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा यानी प्रीलिम्स एग्जाम पास करने वालों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इस योजना का नाम ‘राजीव गांधी सिविल्स्स अभय हस्तम योजना’ रखा गया है। योजना के तहत यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले राज्य के उम्मीदवारों को मेंस की तैयारी के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। आइए इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं। क्या है राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना तेलंगाना सरकार की राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना का मकसद है कि आर्थिक दिक्कतों की वजह से यूपीएससी की तैयारी करने वाले किसी छात्र की तैयारी ना रुके। यह योजना यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को आगे की तैयारी के लिए आर्थिक तौर पर एक मजबूती प्रदान करती है। योजना के तहत, यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों को 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। इस राशि के जरिए उम्मीदवार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग, स्टडी मैटेरियल और दूसरे जरुरी संसाधनों से जुड़े खर्चों को कवर कर सकते हैं। योजना के तहत कहां से दिए जाएंगे रुपए? राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना के तहत यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के माध्यम से आर्थिक मदद दी जाएगी। यह मदद उन छात्रों को मिलेगी, जो सिविल्स सेवा परीक्षा के पहले चरण को पास कर लेंगे। छात्रों को दी जाने वाली ये मदद सिंगरेनी कोलियरीज के उस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत वह कई निर्माण कार्यक्रम चलाता है। गौरतलब है कि सिंगरेनी कोलियरीज भारत सरकार के अधीन एक कोयला खनन कंपनी है और तेलंगाना सरकार के ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आती है। कौन उठा सकता है योजना का लाभ? अगर आप यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके हैं और सामान्य (ईडब्ल्यूएस), पिछड़ा वर्ग, एससी, या एसटी वर्ग से हैं, तो आप राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना का फायदा उठा सकते हैं। इस योजना के तहत आपको आर्थिक मदद मिलेगी। लेकिन ध्यान रहे कि आप तेलंगाना के स्थायी निवासी होने चाहिए और आपके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। योजना का लाभ लेने के लिए, उम्मीदवारों को यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इसके बाद ही वे इस योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आर्थिक सहायता केवल एक बार ही दी जाएगी, भले ही उम्मीदवार सिविल्स सेवा परीक्षा कई बार दें। अप्लाई करने के लिए चाहिए ये डाक्यूमेंट्स यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण तेलंगाना में निवास का प्रमाण पत्र (आधार कार्ड, वोटिंग कार्ड, या अन्य वैध दस्तावेज) शैक्षणिक प्रमाण पत्र मोबाइल नंबर रकम ट्रांसफर करने के लिए बैंक खाते की डिटेल पासपोर्ट साइज की फोटो कैसे करें आवेदन? राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा बनाई गई आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं वेबसाइट पर ‘अप्लाई नाउ’ विकल्प पर क्लिक करें इसके बाद स्क्रीन पर एक एप्लिकेशन फॉर्म आएगा फॉर्म में अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी सहित जरूरी जानकारी भरें सारी जानकारी भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें

Maharashtra Elections: मैदान में 8,000 उम्मीदवार, किस पार्टी के हिस्से कितनी सीटें?

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में सीट बंटवारे की तस्वीर अब साफ हो गई है, क्योंकि मंगलवार को नामांकन समाप्त हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 148 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है – जो आधा दर्जन प्रमुख राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण चुनाव में 103 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। शिंदे की शिवसेना ने 80 उम्मीदवार उतारे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 80 कैंडिडेट उतारे हैं। दूसरे उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की NCP ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 53 सीटों पर अपने कैंडिडेटों को उतारा है। पांच सीटें अन्य महायुति सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि दो खंडों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। MVA में सीट बंटवारे की व्यवस्था विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में कांग्रेस ने 103 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 89 और NCP (SP) ने 87 उम्मीदवार नामित किए। 6 सीटें अन्य एमवीए सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि तीन विधानसभा क्षेत्रों पर कोई स्पष्टता नहीं थी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस 8,000 उम्मीदवार मैदान में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे के प्रमुख राजनीतिक दलों सहित लगभग 8,000 उम्मीदवारों ने 288 विधानसभा सीटों के लिए अपने नामांकन दाखिल किए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 7,995 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग (EC) के पास 10,905 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। कब होगी नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी की लास्ट डेट? उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 22 अक्टूबर को शुरू हुई और 29 अक्टूबर को समाप्त हो गई। नामांकन पत्रों का सत्यापन और जांच 30 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर (अपराह्न 3 बजे तक) है।

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