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सांसद कुमारी सैलजा को पार्टी हाईकमान द्वारा एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की उम्मीद

चंडीगढ़ विधानसभा चुनाव के बाद से हरियाणा कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। विधायक दल के नेता के लिए लॉबिंग चल रही है तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी नई नियुक्ति की संभावना जोर पकड़ रही है। कांग्रेस महासचिव एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा को पार्टी हाईकमान द्वारा एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की उम्मीद है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर सैलजा की नियुक्ति को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। हरियाणा विधानसभा में इस बार कांग्रेस के 37 विधायक चुनकर आए हैं, जिनमें से 33 विधायक हुड्डा समर्थक हैं। चार विधायकों को कुमारी सैलजा समर्थक माना जाता है। इन चार विधायकों के बूते पर हालांकि सैलजा गुट को ना तो विधायक दल के नेता का पद मिल सकता है और ना ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर उनकी दावेदारी बनती है, लेकिन विधानसभा चुनाव में जिस तरह से सैलजा ने नाराज होकर बड़ा खेल किया, उससे कांग्रेस हाईकमान सकते में हैं। खींचतान से पार्टी के हाथ से छूट गई सत्ता विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के चाहे कितने भी कारण रहे हों, लेकिन हुड्डा व सैलजा की खींचतान की वजह से पार्टी के हाथ से सत्ता छूट गई है। रणनीतिकारों को पूरी उम्मीद थी कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी, लेकिन पार्टी के राज्य स्तरीय नेताओं की आपसी खींचतान ने कांग्रेस को पांच साल पीछे धकेल दिया है। थिंक टैंक का मानना है कि यदि हुड्डा और सैलजा मिलकर चुनाव लड़ते तो राज्य में कांग्रेस की सरकार बनना तय था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हुड्डा खेमा अपने स्वयं के बूते पर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी हुई मानकर चल रहा था, जबकि सैलजा गुट को अपनी नाराजगी के माध्यम से ताकत दिखाने का मौका मिल गया, जिसका पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। दोबारा जिम्मेदारी दे सकती है पार्टी कांग्रेस के इन नेताओं में अब भविष्य में तालमेल बना रहे और पार्टी में सिर्फ हुड्डा का एकाधिकार ना रहे, इसके लिए हुड्डा के स्थान पर किसी दूसरे को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाने की चर्चा चल रही है। दूसरा पहलू यह भी है कि हुड्डा के बिना कांग्रेस की राजनीतिक प्रगति संभव नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हाईकमान किसी दूसरे को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है। कुमारी सैलजा चूंकि पहले भी हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं तो ऐसे में उन्हें पार्टी दोबारा जिम्मेदारी दे सकती है, जिसका अंदर ही अंदर हुड्डा खेमा विरोध कर रहा है।

यूपी में 45 हजार से ज्यादा परिवारों को मिलेगा रोजगार, योगी सरकार ने उठाया यह बड़ा कदम- दी जा रही है ट्रेनिंग

प्रयागराज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में पारम्परिक भारतीय मूल्यों और ‘अतिथि देवो भव:’ की संकल्पना पर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और वातावरण प्रदान कर रही है। सरकार के इस भागीरथ प्रयत्न से प्रदेश में पर्यटन सेक्टर का कायाकल्प हो रहा है। प्रयागराज महाकुंभ जैसा विशाल जन समागम इसे बड़ा मंच प्रदान कर रहा है। पर्यटन को गति देने के लिए पूरे प्रयागराज में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे महाकुंभ के दौरान न सिर्फ वेंडर्स और सेवा प्रदाताओं की आय बढ़ेगी, बल्कि 45 हजार से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा। इसके साथ ही समस्त धार्मिक पर्यटन स्थलों के आसपास भी रोजगार के नए स्रोत विकसित होंगे। यूपी में बदल रही है पर्यटन की तस्वीर उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से उपेक्षित पड़े पर्यटन सेक्टर को प्रदेश की योगी सरकार ने नया आयाम दिया है। 16 नवंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश की नई पर्यटन नीति-2022 को मंज़ूरी मिलने के बाद पर्यटन क्षेत्र के विकास का नक्शा बदलना शुरू हुआ। नई पर्यटन नीति से प्रदेश में 20 हजार करोड़ के निवेश और 10 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें भी सबसे पहले पर्यटन सेक्टर से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर को कौशल विकास और प्रबंधन से जोड़ना महत्वपूर्ण है। प्रयागराज महाकुंभ इसके लिए बड़ा मंच साबित हो रहा है। प्रयागराज की क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह का कहना है कि प्रयागराज महाकुंभ में पर्यटकों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क में आने वाले सभी सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया गया है। नाविकों , टूर गाइड, स्ट्रीट वेंडर्स और स्ट्रीट वेंडर्स जैसे सेवा प्रदाताओं को कौशल विकास और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है। नाविकों को मिल रही नई भूमिका, रिवर गाइड होंगे नाविक उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों में नदियों में नौका संचालन से आजीविका चलाने वाले नाविकों की आय बढ़ाने और क्षमताओं का विकास कर योगी सरकार उन्हें नई भूमिका दे रही है। पर्यटन विभाग 2000 नाविकों को इसका प्रशिक्षण दे रहा है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह बताती हैं कि पर्यटन विभाग ने मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान और एक अन्य संस्था के साथ एक एमओयू साइन किया है जिसके अंतर्गत यह ट्रेनिंग चल रही हैं जिसमें अभी तक 300 नाविकों को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इस प्रशिक्षण से नाविक अब नौकायन से आगे बढ़कर रिवर गाइड की भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे। इससे नदियों में धार्मिक स्थलों के किनारे नाव चलाने वाले हजारों नाविकों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन स्थलों का वातावरण भी बेहतर होगा। टूर गाइड भी किए जा रहे हैं स्किल्ड पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के लिए इस स्थलों में बुनियादी संरचना के विकास के साथ यहां सेवा प्रदान करने सेवा प्रदाताओं को भी स्मार्ट बनाना होगा। पर्यटन विभाग ने इसी को देखते हुए प्रयागराज में 1000 टूर गाइड को स्किल डेवलेपमेंट और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग प्रदान कर रहा है। मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबन्ध संस्थान, लखनऊ के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रखर तिवारी की अगुवाई में यह ट्रेनिंग चल रही है। प्रखर तिवारी बताते हैं कि अब तक यहां टूर गाइड के 7 बैच की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है जिसमें 420 टूर गाइड प्रशिक्षित होकर सेवाएं देने को तैयार हैं। स्ट्रीट वेंडर्स और टैक्सी ड्राइवर्स को भी दी जा रही है ट्रेनिंग पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की डिलीवरी देने के लिए पर्यटन सेक्टर में प्रशिक्षित जनशक्ति पूल का निर्माण करना बड़ी आवश्यकता है। महाकुंभ में आने वाले पर्यटकों के आतिथ्य में यह जन शक्ति उपयोगी साबित हो सकती है। प्रयागराज की क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह का कहना है कि महाकुंभ के पूर्व पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं और जनशक्ति को कुशल बनाने के लिए टूर गाइड और नाविकों के साथ साथ अब शहर के स्ट्रीट वेंडर्स और टैक्सी ड्राइवर्स को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्ट्रीट वेंडर्स शहरी अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं जो एक तरफ जहां स्थानीय लोगों तक रोज़मर्रा की आवश्यक उपयोगी वस्तुओं को पहुंचाते हैं तो वहीं बाहर से आने वाले पर्यटकों के साथ भी उनका संपर्क होता है। पर्यटकों के साथ व्यवहार के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यटक स्थलों एवं मार्गों पर स्वच्छता की जानकारी देने के लिए इनका प्रशिक्षण भी आवश्यक है। पर्यटन विभाग की तरफ से इनका प्रशिक्षण शुरू किया गया है। प्रयागराज में 600 स्ट्रीट वेंडर्स और 600 टैक्सी ड्राइवर्स को इसका प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके अंतर्गत अभी तक 250 स्ट्रीट वेंडर्स और 120 टैक्सी ड्राइवर्स को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।  

किचन को रीडिजाइन कर देते हैं कैबिनेट्स

कौन-सी हाऊसवाइफ नही चाहेगी कि उसका किचन सबसे अच्छा दिखे। यदि आप अपनी किचन को अलग लुक देना चाहती हैं तो जरूरी है कि उस में लगाई जाने वाली सभी चीजों पर खास ध्यान दिया जाए। यदि बात किचन कैबिनेट्स की करी जाए तो वे न सिर्फ चीजों को स्टोर करने के लिए जगह देते हैं, बल्कि किचन को स्टाइलिश लुक भी देते हैं। आज मार्केट में किचन कैबिनेट्स की ढेरों वैराइटीज उपलब्ध हैं। फिर चाहे बात कलर्स की हो या साइज की, आप इन्हें अपनी किचन के अकौर्डिंग सैट करा सकती हैं।   स्टेनलैस स्टील कैबिनेट्स यदि आप लकड़ी के कैबिनेट्स नहीं लगाना चाहतीं, क्योंकि आप के घर में दीमक जल्दी लग जाती है, तो आप स्टेनलैस स्टील कैबिनेट्स लगवा सकती हैं। ये आजकल काफी ट्रैंड में हैं। इन में न तो दीमक लगने का डर रहता है और न ही ये जल्दी गलते हैं। साथ ही स्टाइलिश लुक भी देते हैं।   स्टोरेज कैबिनेट्स आप की किचन के साथ कोई स्टोर नहीं है और आप को किचन का सामान रखने में दिक्कत होती है, तो आप किचन के लिए स्टोरेज कैबिनेट्स खरीदें। इस में दराजें और अलमारियां काफी बनी होती हैं, जिन में आप आराम से सामान रख सकती हैं। आप महीने भर का सामान भी इन में स्टोर कर सकती हैं, बस इन्हें खरीदते समय यह देख लें कि ये आप की जरूरत के अकौर्डिंग हैं या नहीं। आप इन्हें अपनी जरूरत के अनुसार डिजाइन भी करवा सकती हैं।   ग्लास कैबिनेट्स यदि आप अपनी किचन को अलग लुक देना चाहती हैं तो ग्लास कैबिनेट्स अपनी किचन में शामिल करें। इन की खासीयत यह होती है कि इन में बनी अलमारियों के दरवाजे ग्लास के होते हैं, जिस से आप को उन में रखा सामान आसानी से नजर आ जाता है। साथ ही यदि आप की क्रौकरी काफी स्टाइलिश है तो आप अलमारी में उन्हें लगवा कर किचन को अट्रैक्टिव लुक दे सकती हैं। इन की आप को ढेरों वैराइटियां और डिजाइन मार्केट में मिल जाएंगे। ग्लासेज को स्टाइलिश लुक देने के लिए इन पर डिजाइनिंग भी की जाती है।   मौडर्न कैबिनेट्स आज जमाना मौडर्न किचन का है। किचन में लगी हर चीज मौडर्न लुक में मार्केट में मिल रही है। यदि आप चाहती हैं कि आप के लिविंग और बैडरूम की तरह किचन भी मौडर्न लुक दे तो इस के लिए मार्केट में कैबिनेट्स के ढेरों डिजाइन और कलर उपलब्ध हैं। कैबिनेट्स की डिजाइनिंग में अलमारियों की शेप्स व कलर्स का वर्क काफी मौडर्न तरीके से किया जाता है। कुछ शैल्फ सामने की तरफ बनाई जाती हैं, जिन में आप कुछ डैकोरेटिव आइटम्स भी सजा सकती हैं। साथ ही इन में दराजों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि आप कंफर्टेबल हो कर उन को यूज कर सकें। इन में लाइट भी कुछ अलग तरह की यूज की जाती है जिस से आप की किचन काफी अट्रैक्टिव नजर आती है। किचन के हर सामान के लिए प्रौपर अलमारियां और दराजें डिजाइन की जाती हैं।   सिंपल कैबिनेट्स आप को अपनी किचन सिंपल ऐंड सोबर पसंद है तो सिंपल ऐंड सोबर लुक देते कैबिनेट्स मार्केट में आराम से मिल जाएंगे। ये जगह भी कम घेरते हैं और साथ ही इन में दराजें और अलमारियां भी कम बनी होती हैं। इस से आप को सामान ढूंढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती है। इन में ज्यादातर 1-2 कलर यूज किए जाते हैं ताकि किचन सिंपल नजर आए। इन के हैंडल भी बिलकुल सिंपल लुक में होते हैं।   खरीदते समय रखें ध्यान…. टाइप ऐंड स्टाइलः मार्केट में आप को कैबिनेट्स की ढेरों किस्में और स्टाइल मिल जाएंगे। लेकिन जरूरी है कि आप अपनी किचन के अकौर्डिंग कैबिनेट्स खरीदें। आप को सामान को रखने के लिए कितनी स्पेस चाहिए इस को ध्यान में रखते हुए भी आप इन्हें डिजाइन करवा सकती हैं। कैबिनेट्स फ्रेम्ड या फ्रेमलैस दोनों तरह के मिलते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के कैबिनेट्स लगवाना पसंद करती हैं।   मैटीरियलः किचन कैबिनेट्स में आप को कई तरह का मैटीरियल मार्केट में मिलेगा। यह देखना जरूरी है कि आप को किस मैटीरियल से अपनी किचन को अलग लुक देना है।अपने कंफर्ट और रेंज को देखते हुए आप इन्हें खरीद सकती हैं।   कलर्सः घर का कोई भी कोना हो, उस में कलर बहुत माने रखते हैं। किचन कैबिनेट्स आप अपनी किचन के कलर के अकौर्डिंग ले सकती हैं। कैबिनेट्स में कुछ कलर्स कौमन हैं जैसे व्हाइट, सिलवर, ब्राउन, ब्लैक जिन्हें आप बिना मैचिंग के भी लगवा सकती हैं। वैसे आजकल कलर कौंबिनेशन का भी काफी ट्रैंड है. 2 या 3 कलर का प्रयोग कर के कैबिनेट्स को अट्रैक्टिव बनाया जाता है।   टिकाऊः कैबिनेट्स खरीदते समय ध्यान रखें कि उन का मैटीरियल टिकाऊ हो। यदि लकड़ी का कैबिनेट है तो उस की लकड़ी अच्छी क्वालिटी की हो। यदि कैबिनेट स्टेनलैस स्टील का है तो वह भी बढ़िया क्वालिटी में हो। मार्केट में लाइट से ले कर हैवी सभी तरह की क्वालिटी आप को मिल जाएगी।  

नए वाणिज्य दूतावास मुंबई और बेंगलुरु में खोले जाएंगे, ग्रीस के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को किए एक कॉल पर दी जानकारी

नई दिल्ली ग्रीस भारत में दो नए दूतावास खोलेगा। यह जानकारी ग्रीस के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को किए एक कॉल पर दी। नए वाणिज्य दूतावास मुंबई और बेंगलुरु में खोले जाएंगे। इसका उद्देश्य भारत के साथ राजनयिक उपस्थिति और जुड़ाव को बढ़ाना है। ग्रीक प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने टेलीफोन पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस निर्णय के बारे में बताया। वर्तमान में, ग्रीस के भारत में तीन राजनयिक कार्यालय हैं, जिनमें नई दिल्ली में दूतावास तथा चेन्नई और कोलकाता में वाणिज्य दूतावास शामिल हैं। ग्रीस सरकार का यह कदम भारत-ग्रीस संबंधों को बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की एथेंस की आधिकारिक यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी ढांचे को अपनाने को लेकर विशेष बातचीत की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए आपसी प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया है। उन्होंने हाल के उच्च स्तरीय आदान-प्रदान और द्विपक्षीय संबंधों में आई तेजी की समीक्षा की, तथा समुद्री संपर्क बढ़ाने के लिए निवेश के अवसरों और पहलों पर भी जोर दिया। ग्रीक प्रधानमंत्री मित्सोताकिस ने जून में प्रधानमंत्री मोदी के तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें बधाई दी तथा भारत-ग्रीस संबंधों के भविष्य के प्रति आशा व्यक्त की। इसके बाद पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर इस बातचीत के बारे में जानकारी देते हुए बताया, “कल पीएम किरियाकोस मित्सोताकिस के साथ एक उपयोगी बातचीत हुई, जिसमें भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता जताई गई। साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी में अपने सहयोग को गहरा करना है। ग्रीस यूरोपीय संघ के भीतर भी भारत के लिए एक मूल्यवान भागीदार है।” साथ ही पीएमओ के बयान में यह भी कहा गया कि दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की प्रगति की समीक्षा की, जिसका उद्देश्य रणनीतिक आर्थिक गलियारों के माध्यम से संपर्क बढ़ाना है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पश्चिम एशिया के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।  

तीन से सात नवंबर के बीच उत्तर भारत में तीन डिग्री तक पारा गिरने की संभावना, पड़ेगी ठण्ड: मौसम विभाग

नई दिल्ली नवंबर का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन अब भी दिन के समय धूप निकल रही है। अब मौसम विभाग ने बताया है कि तीन नवंबर से ठंड दस्तक देने वाली है, क्योंकि उत्तर और पूर्वी भारत में तीन डिग्री तक पारा गिरने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, तीन से सात नवंबर के बीच उत्तर पश्चिम और पूर्वी भारत में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा, देश के किसी और हिस्से में ज्यादा मौसम में बदलाव नहीं आने वाला है। पिछले 24 घंटे में तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में भारी बरसात भी रिकॉर्ड की गई है। अगले सात दिनों के मौसम के बारे में बात करें तो तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे में दो से चार नवंबर और साउथ इंटीरियर कर्नाटक और लक्षद्वीप में दो नवंबर को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, कुछ इलाकों में बिजली कड़क सकती है। वहीं, अंडमान और निकोबार में पांच नवंबर को तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान औसत से दो से चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक मिनिमम टेम्प्रेचर औसत से ज्यादा रहेगा। इसके अलावा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा में दो से छह डिग्री सेल्सियस तक तापमान औसत से ज्यादा रहने की संभावना है। तीन से सात नवंबर के बीच में उत्तर पश्चिम और पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। पिछले 24 घंटे में दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में थोड़ी से गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान 14-19 डिग्री सेल्सियस के बीच है। हालांकि, आने वाले दिन में आसमान पूरी तरह से क्लियर रहेगा और 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

भारत से पैसा निकालकर चीन गए विदेशी निवेशक, बाजारों में भी हाल में गिरावट आई से हुए कंगाल

नई दिल्ली  विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर महीने में भारतीय बाजार में भारी बिकवाली करते हुए 1,13,858 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह अब तक किसी एक महीने में की गई सबसे बड़ी बिकवाली है। हालांकि वे इस दौरान प्राइमरी मार्केट में सक्रिय खरीदार बने रहे। सेकंडरी मार्केट मे भारी बिकवाली के उलट उन्होंने प्राइमरी मार्केट में 19,842 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशक भारत में बेचो और चीन में खरीदो की नीति पर चल रहे थे। लेकिन चीन का बाजार एक बार फिर दबाव में लौटता दिख रहा है। चीनी शेयरों में तेजी कम हो रही है। हाल में शंघाई और हैंग सेंग सूचकांकों में गिरावट आई है। एफपीआई के व्यवहार में इस तरह के विरोधाभास के बारे में जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा कि प्राइमरी मार्केट के इश्यू ज्यादातर उचित मूल्यांकन पर हैं, जबकि बेंचमार्क सूचकांक ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। एफपीआई की लगातार बिकवाली से बेंचमार्क सूचकांकों में पीक से लगभग 8% की गिरावट आई है। एफपीआई आगे भी बिकवाली जारी रख सकते हैं जिससे बाजार में किसी भी संभावित तेजी पर रोक लग सकती है। चीन की निकली हवा लेकिन यह ट्रेंड देखने को मिला है वित्तीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर एफपीआई की बिकवाली के बावजूद यह सेक्टर लचीला बना हुआ है। इससे साफ है कि भारतीय शेयरों का उचित मूल्यांकन हैं क्योंकि बिक्री घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और व्यक्तिगत निवेशकों ने बिकवाली को एबजॉर्ब किया है। विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर चीन में लगा रहे थे। इसकी वजह यह थी कि चीन की सरकार ने भारी-भरकम पैकेज की घोषणा की थी। उसके बाद चीन के बाजारों में कुछ तेजी दिख रही थी। लेकिन अब एक बार फिर चीन के बाजार में दबाव हावी होने लगा है। हाल के दिनों में शंघाई और हैंग सेंग इंडेक्स में गिरावट आई है। वैश्विक मोर्चे पर बाजार आने वाले सप्ताह में कुछ दिनों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों पर प्रतिक्रिया देंगे। उसके बाद अमेरिकी में जीडीपी के आंकड़े, महंगाई और फेड के दर में कटौती जैसे बुनियादी कारक बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे।

नाइजीरिया में 29 प्रदर्शनकारियों पर 10 संगीन आरोप, मौत की सजा संभव

अबुजा  नाइजीरिया में बेतहाशा बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 29 नाबालिग किशोरों को  आरोपी बनाया गया और इस मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है। अदालत में अपनी दलील रखने से पहले उनमें से चार किशोर थकावट के कारण बेहोश होकर गिर गए थे। समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ द्वारा देखे गए आरोप पत्र के अनुसार, नाइजीरिया में बेतहाशा बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए कुल 76 प्रदर्शनकारियों पर 10 संगीन आरोप लगाए गए, जिनमें राजद्रोह, संपत्ति को नष्ट करना, उपद्रव मचाना और विद्रोह करना शामिल हैं। आरोप पत्र के अनुसार, नाबालिगों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है। नाइजीरिया में जीवन जीने की लागत बढ़ने के कारण हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। युवाओं के लिए बेहतर अवसरों और नौकरियों की मांग को लेकर अगस्त में हुए प्रदर्शन के दौरान कम से कम 20 लोगों को गोली मार दी गई थी जिससे उनकी मौत हो गई थी और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। नाइजीरिया में मृत्युदंड की सजा 1970 के दशक में शुरू की गई थी, लेकिन 2016 के बाद से देश में किसी को भी मौत की सजा नहीं दी गई। अबुजा के एक निजी वकील अकिंतयो बालोगन ने कहा कि बाल अधिकार अधिनियम के तहत किसी भी नाबालिग के खिलाफ अपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती और न ही उसे मौत की सजा दी जा सकती है। बालोगन ने कहा, ‘‘इसलिए नाबालिगों को संघीय उच्च न्यायालय के समक्ष पेश करना ही गलत है।’’ प्रदर्शन में शामिल कुछ किशोरों की पैरवी करने वाले वकील मार्शल अबूबकर ने बताया कि अदालत ने अंततः प्रत्येक प्रतिवादी को जमानत दे दी तथा उन पर कठोर शर्तें लगाई हैं। अबूबकर ने कहा, ‘‘एक ऐसा देश जिसका कर्तव्य अपने बच्चों को शिक्षित करना है, वह इन बच्चों को दंडित करने का फैसला करेगा। ये बच्चे 90 दिनों से बिना भोजन के हिरासत में हैं।’’  

ऑस्ट्रेलिया ए के कप्तान नाथन मैकस्वीनी का चयन करने की वकालत की पोंटिंग और हीली ने की

मेलबर्न,  ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर रिकी पोंटिंग और इयान हीली ने भारत के खिलाफ 22 नवंबर से पर्थ में शुरू होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए राष्ट्रीय टीम में सलामी बल्लेबाज के खाली पड़े एक स्थान के लिए ऑस्ट्रेलिया ए के कप्तान नाथन मैकस्वीनी का चयन करने की वकालत की है। डेविड वार्नर के इस साल की शुरुआत में संन्यास लेने और स्टीव स्मिथ के अपने पसंदीदा चौथे नंबर पर लौटने के बाद ऑस्ट्रेलिया को उस्मान ख्वाजा के साथ पारी की शुरुआत करने के लिए एक सलामी बल्लेबाज की तलाश है। मैकस्वीनी, सैम कोनस्टास, कैमरून बैनक्रॉफ्ट और मार्कस हैरिस जैसे खिलाड़ी इस रिक्त स्थान को भरने के दावेदारों में शामिल हैं। पोंटिंग ने ‘आईसीसी रिव्यू शो’ में कहा, ‘मेरे हिसाब से इस स्थान को भरने का एकमात्र दावेदार नाथन मैकस्वीनी है, जो क्वींसलैंड में जन्मे हैं और अब दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के लिए खेल रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया ए की तरफ से भी अच्छा प्रदर्शन किया है।’’ हीली ने एसईएन रेडियो से कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि लोगों ने देखा कि नाथन मैकस्वीनी किस तरह से अच्छी बल्लेबाजी कर सकते हैं। मैं उसे अच्छी तरह से जानता हूं क्योंकि वह मेरे क्लब से जुड़ा है। ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ता भी उसके बारे में जानते हैं क्योंकि उसने हाल ही में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। वह चारों दावेदारों में सबसे अधिक तैयार नजर आता है।’’  

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में बहुत कमी, हर हाल में आतंकवाद का खात्मा किया जाएगा : राजनाथ सिंह

कानपुर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और वहां तेजी से विकास हो रहा है। वहां के लोगों को भी विकास रास आ रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में बहुत कमी आई है और वहां से हर हाल में आतंकवाद का खात्मा किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने अपने गुरु हरिहर दास महाराज के आश्रम हरिहर धाम में मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि पूर्व की सरकारों की अपेक्षा अब जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई है। सुरक्षा बल पूरी तरह से सजग हैं और लोगों को अब सुरक्षा बल पर भरोसा हो रहा है। सुरक्षा बल के साथ लोगों का जिस तरह से भरोसा बढ़ा है उससे ऐसी स्थिति पैदा की जाएगी कि जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह से आतंकवाद का खात्मा जाे जाएगा। वहां की जनता विकास को प्रमुखता दे रही है और जम्मू-कश्मीर में तेजी से विकास हो रहा है। हाल ही में हुई आतंकवादी घटनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि यह जो दो-चार घटनाएं हुई हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण हैं। हमारे सुरक्षा बल के जवान इन घटनाओं का मुंहतोड़ जवाब भी दे रहे हैं। बहुत सारे आतंकवादी मारे भी गए हैं। इससे पहले रक्षा मंत्री सिंह कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट पहुंचे जहां पर भाजपा सांसद रमेश अवस्थी, विधायक सुरेन्द्र मैथानी, जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह समेत कई प्रमुख पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से रक्षा मंत्री सीधे श्याम नगर स्थित हरिहर धाम पहुंचे जहां पर अपने गुरु हरिहर दास महाराज का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे कानपुर आईआईटी के स्थापना दिवस समारोह के लिए रवाना हुए।  

मंत्री जयशंकर 3 से 8 नवंबर के बीच द्विपक्षीय वार्ता के लिए ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर का दौरा करेंगे

नई दिल्ली  विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर आज 3 से 8 नवंबर के बीच महत्वपूर्ण बैठकों और द्विपक्षीय वार्ता के लिए ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय ने  एक बयान जारी कर कहा कि इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर ब्रिसबेन की यात्रा करेंगे और ऑस्ट्रेलिया में भारत के चौथे वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन करेंगे। विदेश मंत्री कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ 15वें विदेश मंत्रियों की रूपरेखा वार्ता (एफएमएफडी) की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। वह ऑस्ट्रेलियाई संसद भवन में आयोजित होने वाले दूसरे रायसीना डाउन अंडर के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगे। विदेश मंत्री का ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व, सांसदों, भारतीय प्रवासियों, व्यापार समुदाय, मीडिया और थिंक टैंक के सदस्यों के साथ बातचीत करने का भी कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे चरण में विदेश मंत्री 8 नवंबर को आधिकारिक यात्रा के लिए सिंगापुर जाएंगे, जिसके दौरान वे आसियान-भारत थिंक टैंक नेटवर्क के 8वें गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करेंगे। वे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ साझेदारी की समीक्षा करने और द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने के लिए सिंगापुर के नेतृत्व से भी मिलेंगे।    

भारत ने प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया

नई दिल्ली  भारत ने आपदाओं से जोखिम को कम करने से संबंधित सेंडाई फ्रेमवर्क के प्रति वचनबद्धता दोहराते हुए वैश्विक स्तर पर आपदा से बचाव के लिए ज्ञान साझा करने, प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। गृह मंत्रालय ने यहां बताया कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 30 अक्टूबर से 01 नवंबर तक बेलेम, ब्राजील में आयोजित जी-20 की आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह (डीआरआरडब्ल्यूजी) की मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सक्रिय भागीदारी के कारण आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) पर पहली मंत्रिस्तरीय घोषणा को अंतिम रूप देने में सर्वसम्मति बनी। डॉ. मिश्रा ने विभिन्न मंत्रिस्तरीय सत्रों के दौरान चर्चा में भारत में आपदा जोखिमों को कम करने और आपदा वित्तपोषण को बढ़ाने में भारत सरकार द्वारा की गई प्रगति को साझा किया। उन्होंने जी 20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान उभरी डीआरआरडब्ल्यूजी की पांच प्राथमिकताओं अर्थात प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपदा रोधी बुनियादी ढांचा, डीआरआर वित्तपोषण, प्रतिरोधी क्षमतापूर्ण पुनर्वास और प्रकृति आधारित समाधान पर भारत के सक्रिय दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने आपदा रोधी बुनियादी ढांचे पर प्रधानमंत्री की आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (सीडीआरआई) की वैश्विक पहल को साझा किया। इस गठबंधन के अब 40 देश और सात अंतर्राष्ट्रीय संगठन सदस्य हैं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने सेंडाई फ्रेमवर्क के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और वैश्विक स्तर पर आपदा से बचाव बढ़ाने के लिए ज्ञान साझा करने, प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के मंत्रियों के साथ ट्रोइका बैठक में भी भाग लिया और मेजबान देश ब्राजील और अन्य देशों जापान, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, जर्मनी के मंत्रियों और आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। डाॅ. मिश्रा ने अत्यधिक गर्मी पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव (यूएनएसजी) एंटोनियो गुटेरेस के आह्वान पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पारंपरिक प्रथाओं को बढ़ावा देने पर ध्यान देने सहित उठाए जा रहे कदमों और अनुभव को साझा किया। वर्ष 2023 में जी 20 की अध्यक्षता के दौरान भारत की पहल पर पहले डीआरआरडब्लयूजी का गठन किया गया था। डॉ. मिश्रा ने डीआरआरडब्लयूजी को जारी रखने और इसे मंत्री स्तर तक बढ़ाने पर ब्राज़ील की अध्यक्षता पर बधाई दी और दक्षिण अफ्रीका को अगले वर्ष जी 20 की अध्यक्षता में डीआरआरडब्लयूजी पर भारत के समर्थन की पुष्टि की। भारत की भागीदारी वैश्विक डीआरआर प्रयासों में इसकी बढ़ती भूमिका और एक सुरक्षित और अधिक आपदा रोधी विश्व के निर्माण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।    

तेजस विमानों के इंजनों की सप्लाई हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सौपी जाएगी !

नई दिल्ली तेजस विमानों के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) से इंजनों की आपूर्ति नहीं होने को लेकर भारत सरकार बेहद चिंतित है। जीई की तरफ से अब अप्रैल, 2025 से इंजनों की आपूर्ति को सुचारू करने का भरोसा दिलाया गया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया कि अगर इस तारीख के बाद भी आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो फिर जीई से सीधे तकनीक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सौंपे जाने की मांग की जाएगी। इसके बाद एचएएल में ही फिर इंजनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार एचएएल और जीई के बीच 2021 में समझौता हुआ था, जिसके तहत तेजस विमानों के लिए 99 इंजनों की आपूर्ति जीई को करनी है। इसकी शुरुआत अप्रैल, 2023 से होनी थी और हर साल 16 इंजनों की आपूर्ति भारत को की जानी थी। लेकिन, पिछले डेढ़ साल में महज दो इंजन ही जीई ने दिए हैं, जबकि मार्च 2025 तक 32 इंजन की आपूर्ति करनी है। सिर्फ इंजन के कारण रुका है निर्माण वहीं रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस देरी के कारण एचएएल तेजस का निर्माण नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि दर्जनभर तेजस बनकर तैयार हैं, लेकिन उनमें इंजन फिट करने का काम ही बचा है। बता दें, रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच 2021 में वायुसेना के लिए 83 तेजस मार्क 1ए विमानों की खरीद को लेकर करार हुआ था। तीन साल बाद यानी मार्च, 2024 से एचएएल को उसे विमानों की आपूर्ति शुरू करनी थी। हर साल 24 विमान वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य था, लेकिन अभी तक एक भी विमान नहीं सौंपा जा सका है। वायुसेना इसे लेकर चिंतित है। जुर्माने से इनकार रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामले में जीई कंपनी पर जुर्माना लगाने का विकल्प सरकार के पास है, लेकिन फिलहाल यह कदम उठाने जाने से सरकार ने इनकार किया है। कंपनी के दिवालिया होने से हो रहा विलंब रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इस मामले में बार-बार जीई को कहा गया है और कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि अप्रैल, 2025 से इंजनों की आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। जीई ने कहा कि दक्षिण कोरिया की जो कंपनी उसे पुर्जों की आपूर्ति करती थी, वह दिवालिया हो गई है। इसके चलते विलंब हुआ है।

उज्जैन : स्टेशन से महाकाल मंदिर पल भर में पहुंचेंगे भक्त, साल 2026 तक पूरा होने की संभावना

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक आप रोप-वे से आ-जा सकेंगे। इसके लिए ओडिशा की एमएस इंफ्रा इंजीनियर कंस्ट्रक्शन कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने इनिशियल वर्क भी शुरू कर दिया है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से नूतन स्कूल-महाकाल मंदिर प्रशासक कार्यालय तक बनने वाला यह रोप-वे 1.76 किलोमीटर लंबा होगा। मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला (MDG) सिस्टम से ऑपरेट होने वाले रोपवे में रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक 3 स्टेशन बनाए जाएंगे। रोप-वे में 48 केबिन होंगे। हर 1 केबिन में एक समय में 10 लोग आ-जा सकेंगे। रोप-वे 16 घंटे चालू रहेगा। इस हिसाब से मोटे तौर पर माना जा रहा है कि 16 घंटे में 64 हजार श्रद्धालु इसमें आना-जाना कर सकेंगे। रेलवे स्टेशन से आखिरी स्टेशन तक पहुंचने में करीब 6 मिनट का समय लगेगा। रोपवे 2026 तक शुरू हो जाएगा। रोजाना दो से ढाई लाख भक्त आते हैं उज्जैन सिहस्थ 2028 काे देखते हुए रोपवे को बेहद अहम माना जा रहा है। श्री महाकाल लोक बनने के बाद से सामान्य दिनों में ही महाकाल के दर्शन करने के लिए रोजाना औसतन दो से ढाई लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।जबकि पर्व-त्योहार और विशेष अवसरों पर ये संख्या बढ़कर 5 लाख से 10.50 लाख तक पहुंच रही है। ऐसे में शहर में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोपवे की प्लानिंग की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने 189 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे रखी है। रोपवे का विकास, संचालन और रखरखाव नेशनल हाईवे-रोपवे प्रोजेक्ट करेगा। ऐसे होगा रोपवे का रूट रोपवे उज्जैन रेलवे स्टेशन से त्रिवेणी होते हुए गणेश कॉलोनी तक जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 1.76 किलोमीटर होगी। इसमें तीन स्टेशन 13 टावर और 48 केबिन होंगे। इनमें से प्रत्येक केबिन में लगभग 10 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। यात्रा का समय लगभग सात मिनट होगा। 2026 तक पूरा हो जाएगा काम उज्जैन में प्रशासनिक परिसर भवन में शुक्रवार को हुई बैठक में रोपवे परियोजना के विवरण पर चर्चा की गई है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि रोपवे परियोजना अक्टूबर 2024 में शुरू होगी और अक्टूबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। पर्यटन को मिलेगा फायदा पर्वतमाला योजना के अतंर्गत नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी और एमपी सड़क विकास निगम के बीच उज्जैन में रोपवे बनाने के लिए समझौता हुआ।इससे लोगों को आवाजाही में सुविधा होगी और पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान हो जाएगी। एनएचएलएमएल और एमपीआरडीसी मिलकर इस परियोजना को पूरा करेंगे। इस महत्वकांक्षी योजना से हर दिन हजारों लोग आसानी से सफर कर सकेंगे। इसके साथ ही पर्यटन को लाभ मिलेगा।

डीजल इंजन में 80 प्रतिशत डीजल के साथ 20 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जा सकता : शोध

 भोपाल  दुनियाभर के वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग हो रहे पेट्रोल और डीजल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में देख रहे हैं। हाइड्रोजन के उपयोग को लेकर विश्व के तमाम संस्थानों में शोधकार्य किया जा रहा है। भोपाल में स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में एनर्जी सेंटर के तीन प्रोफेसर और एक पीचएचडी छात्र ने भी ईंधन के रूप में हाइड्रोजन गैस के उपयोग को लेकर एक वर्ष तक शोध किया। इस अनुपात में सुरक्षित शोध में उन्होंने पाया कि डीजल इंजन में 80 प्रतिशत डीजल के साथ 20 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जा सकता है। उनके अनुसार अगले पांच वर्षों में वाहनों में हाइड्रोजन का उपयोग शुरू हो जाएगा, जो वाहन चालकों के लिए सुरक्षित रहेगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल होगा और इंजन को अधिक ऊर्जा भी प्रदान करेगा। इन्होंने किया शोध मैनिट में स्थापित एनर्जी सेंटर ने सितंबर 2023 में 25 लाख रुपये की लागत से हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग को लेकर प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें विभिन्न विभागों के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत बारेदार, डॉ. गौरव द्विवेदी, डॉ. टिकेंद्रनाथ वर्मा और पीएचडी छात्र कौस्तुभ ने ड्युअल फ्यूल इंजन में हाइड्रोजन गैस के ईंधन के रूप में उपयोग को लेकर शोध किया। धीरे-धीरे बढ़ाई मात्रा डॉ. गौरव द्विवेदी ने बताया कि शुरुआत के चार महीने हमने सिर्फ डीजल के साथ हाइड्रोजन गैस की अलग-अलग मात्रा को ईंधन के रूप में जांचा। शुरुआत पांच प्रतिशत से की, इसके बाद मात्रा बढ़ाते हुए 20 प्रतिशत तक लेकर गए। आगे जब ईंधन में हाइड्रोजन की मात्रा बढ़ी तो हीटिंग की समस्या होने की आशंका हुई, जिसके बाद इंजन में 20 प्रतिशत ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का आठ माह तक उपयोग किया। चूंकि हाइड्रोजन का एनर्जी कंटेंट पेट्रोकैमिकल्स से अधिक है, इसलिए इंजन को अतिरिक्त ऊर्जा मिली और संतुलित उपयोग से इंजन में गर्मी की समस्या भी नहीं हुई। इनका शोध एक रिसर्च जर्नल में भी प्रकाशन हो चुका है। इस तरह से इंजन में काम करता है हाइड्रोजन पीएचडी स्कॉलर कौस्तुभ ने बताया कि ड्युअल फ्यूल इंजन में डीजल टैंक के साथ हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाया जाता है। इंजन में दोनों की सप्लाई की जाती है। इंजन को डीजल सप्लाई से चालू किया जाता है और इंजन गर्म होने पर हाइड्रोजन की सप्लाई शुरू की जाती है। इसका कितनी मात्रा में उपयोग करना है, इसे सप्लाई को रोककर कंट्रोल किया जाता है। इंजन में जिस रास्ते से एयर प्रेशर किया जाता है, उसी जगह से हाइड्रोजन की सप्लाई की जाती है।

‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नकारात्मक नारा CM की निराशा और नाकामी का प्रतीक है- अखिलेश यादव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में चल रहे उपचुनाव के बीच नारों की सियासत काफी गरमाई है। मुख्यमंत्री योगी के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारा को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह नकारात्मक नारा उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। अखिलेश यादव ने  को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उनका ‘नकारात्मक-नारा’ उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। इस नारे ने साबित कर दिया है कि उनके जो गिनती के 10 फीसद मतदाता बचे हैं, अब वो भी खिसकने के कगार पर हैं, इसलिए ये उनको डराकर एक करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन ऐसा होने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि ‘नकारात्मक-नारे’ का असर भी होता है। दरअसल, इस ‘निराश-नारे’ के आने के बाद उनके बचे-खुचे समर्थक ये सोचकर और भी निराश हैं कि जिन्हें हम ताकतवर समझ रहे थे, वो तो सत्ता में रहकर भी कमजोरी की ही बातें कर रहे हैं। जिस ‘आदर्श राज्य’ की कल्पना हमारे देश में की जाती है, उसके आधार में ‘अभय’ होता है, ‘भय’ नहीं। ये सच है कि ‘भयभीत’ ही ‘भय’ बेचता है, क्योंकि जिसके पास जो होगा, वो वही तो बेचेगा। अखिलेश यादव ने भाजपा पर बोला हमला सपा मुखिया ने कहा कि देश के इतिहास में ये नारा ‘निकृष्टतम-नारे’ के रूप में दर्ज होगा और उनके राजनीतिक पतन के अंतिम अध्याय के रूप में आखिरी ‘शाब्दिक कील’ साबित होगा। उन्होंने कहा कि देश और समाज के हित में उन्हें अपनी नकारात्मक नजर और नजरिये के साथ अपने सलाहकार भी बदल लेने चाहिए, ये उनके लिए भी हितकर साबित होगा। एक अच्छी सलाह ये है कि ‘पालें तो अच्छे विचार पालें’ और आस्तीनों को खुला रखें, साथ ही बांहों को भी, इसी में उनकी भलाई है। सकारात्मक समाज कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा। पोस्टरवार शुरू हुआ मुख्यमंत्री योगी का नारा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ काफी चर्चित हो रहा है। इस कारण यूपी से महाराष्ट्र तक की सियासत गरमा गई है। बीते दिनों मुंबई के कई इलाकों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर और ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ संदेश वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टर में ‘बंटेंगे तो कटेंगे और एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’, सुरक्षित रहेंगे के संदेश लिखे हैं। योगी ने आगरा में दिया था नारा दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में एक कार्यक्रम में कहा था कि आप देख रहे हैं बांग्लादेश में क्या हो रहा है? वे गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए। ‘बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा पर पहुंचेंगे। इसके बाद यह नारा काफी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। सबसे पहले अखिलेश यादव के जन्मदिन से पोस्टर वार की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से भाजपा और सपा के बीच पोस्टर वार जारी है।

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