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सुरक्षाबल के जवानों ने सर्चिंग के दौरान नक्सली प्रचार सामग्री व विस्फोटक के साथ 3 नक्सली किया गिरफ्तार

बीजापुर जिले में चलाये जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत थाना नैमेंड से सुरक्षाबलों के जवान नक्सल प्रभावित नैमेड इलाके में सर्चिंग के लिए निकले हुए थे इस दौरान नैमेड थाना क्षेत्र के राणापारा के जंगल से प्रतिबंधित नक्सली संगठन के प्रचार-प्रसार की सामग्री व विस्फोटक के साथ तीन नक्सली मिलिशिया सदस्य सोनू ओयाम पिता बुधरु उम्र 35 वर्ष निवासी ग्राम कैका, सन्नू लेकाम पिता पांडु उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम कैका एवं  मांडो उर्फ मांडू हपका पिता मासा उम्र 48 वर्ष निवासी ग्राम कांडका को गिरफ्तार किया है।  गिरफ्तार उक्त तीनों नक्सलियों के विरुद्ध नैमेड थाने में वैधानिक कार्रवाई के उपरांत आज बुधवार को रिमांड पर न्यायालय बीजापुर के समक्ष पेश किया गया ।

देश में लागू हुई ‘मासिक धर्म स्वच्छता नीति’, लड़कियों को पीरियड्स के दौरान मिलेगी राहत

नई दिल्ली केंद्र ने  सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुमोदित “स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति” अब लागू हो गई है। स्कूली लड़कियों की मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार पर केंद्रित नीति को 10 अप्रैल, 2023 के न्यायालय के आदेश के जवाब में 2 नवंबर, 2024 को मंजूरी दी गई थी। नीति का उद्देश्य और मुख्य बिंदु इस नीति का मुख्य उद्देश्य स्कूल जाने वाली लड़कियों में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। क्योंकि मासिक धर्म अक्सर उनकी गतिविधियों और शिक्षा में भागीदारी को प्रभावित करता है। इस योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म से संबंधित स्वच्छता सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। जिससे उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म साधनों तक पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही यह नीति मासिक धर्म अपशिष्ट के पर्यावरण-friendly तरीके से निपटान को भी बढ़ावा देगी। कांग्रेस नेता की मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की मांग यह नीति उस जनहित याचिका (PIL) के संदर्भ में है। जिसे कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल किया था। याचिका में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। केंद्र सरकार की जानकारी: शौचालय और स्वच्छता किट वितरण केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि देश के 97.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध हैं, और दिल्ली, गोवा, और पुडुचेरी जैसे राज्य 100% अनुपालन में हैं। इसके अलावा, सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर मासिक धर्म स्वच्छता किट का वितरण भी शुरू किया है, ताकि छात्राओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जा सके। मासिक धर्म स्वच्छता नीति से क्या होगा फायदा? कार्यक्रम का उद्देश्य मासिक धर्म के बारे में कम जागरूकता को दूर करना है, जो अक्सर स्कूली लड़कियों की गतिशीलता और दैनिक गतिविधियों में भागीदारी को बाधित करता है। यह सुनिश्चित करने के उपायों की रूपरेखा तैयार करता है कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच हो। केंद्र का उद्देश्य सुरक्षित मासिक धर्म प्रथाओं और मासिक धर्म अपशिष्ट के पर्यावरण के अनुकूल उपयोग को बढ़ावा देना है। कांग्रेस नेता ने उठाई थी मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करने की मांग सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और आवासीय स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ 12 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करेगी। इस नीति का उद्देश्य स्कूली छात्राओं के बीच ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए सरकार की स्कूली प्रणाली के भीतर मासिक धर्म स्वच्छता को मुख्यधारा में लाना है, ताकि कम जागरूकता की बाधाओं को दूर किया जा सके जो अक्सर उनकी स्वतंत्रता, गतिशीलता और दैनिक गतिविधियों में भागीदारी को प्रतिबंधित करती हैं,” लंबित मामले में दायर हलफनामे में कहा गया है। देश के 97.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय केंद्र ने पहले अदालत को बताया था कि भारत में 97.5% स्कूल छात्राओं के लिए अलग शौचालय प्रदान करते हैं, जिसमें दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे राज्य 100 प्रतिशत अनुपालन करते हैं। संस्थान ने घोषणा की कि छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता किट के वितरण पर एक राष्ट्रीय पहल चल रही है।

टैटू से हैरान कर देने वाला मामला गाजियाबाद से जहां 68 महिलाओं को एड्स जैसी गंभीर बीमारी HIV हो गई, मचा हड़कंप

नई दिल्ली आजकल टैटू बनवाना एक फैशन बन चुका है, लेकिन अगर यह फैशन आपकी सेहत के लिए खतरा बन जाए, तो क्या आप फिर भी इसे अपनाएंगे? कुछ ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला गाजियाबाद से सामने आया है, जहां 68 महिलाओं को एड्स जैसी गंभीर बीमारी HIV हो गई। इनमें से 20 महिलाओं ने अपने शरीर में HIV संक्रमण का कारण टैटू बनवाना बताया है। एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल महिलाओं का कहना है कि उन्हें शक है कि टैटू बनाने वाले आर्टिस्ट ने एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल किया, जो पहले से HIV संक्रमित हो सकती थी। इस वजह से इन महिलाओं के शरीर में HIV वायरस फैलने की आशंका जताई जा रही है। ये सभी महिलाएं सड़क किनारे टैटू बनाने वाले आर्टिस्ट से टैटू बनवाने गई थीं, जहां इनसे यह बीमारी फैलने का अनुमान है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच बताया जा रहा है कि टैटू आर्टिस्ट ने एक ही निडल (सुई) का बार-बार इस्तेमाल किया, जिससे यह वायरस महिलाओं तक पहुंचा। यह खबर इलाके में हड़कंप मचाने वाली है, और अब स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना यह बताती है कि टैटू बनवाने से पहले हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसका तरीका और सफाई सही हो, ताकि ऐसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।

चुलकाना धाम श्री श्याम जी के दर्शन कर लौट रही अध्यापिका की सड़क हादसे में मौत

पानीपत हरियाणा में आए दिन सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला पानीपत से सामने आया जहां चुलकाना धाम श्री श्याम जी के दर्शन कर लौट रही अध्यापिका रेखा की सड़क हादसे में मौत हो गई। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला की शव को कब्जे में लेकर पानीपत के सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया। महिला टीचर अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर दर्शन कर घर लौट रही थी। तभी महिला अध्यापिका को अज्ञात वाहन ने पीछे से टक्कर मार दी जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। सड़क हादसे में महिला का पति भी गंभीर रूप से घायल है। यह हादसा पानीपत पुलिस लाइन के पास हुआ। महिला टीचर पानीपत के कबाड़ी रोड की रहने वाली थी। महिला के बेटे का रो-रो कर बुरा हाल है। 

संतुलित औद्योगिक विकास पर केन्द्रित होगी नर्मदापुरम् में आरआईसी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के संतुलित विकास के लिये निरंतर सभी अंचलों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहे हैं। अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही है। नर्मदापुरम् क्षेत्र में मुख्य रूप से कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण इकाइयां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बहुतायत में हैं। नर्मदापुरम्, हरदा, और होशंगाबाद में पहले से स्थापित उद्योगों के साथ-साथ कृषि प्र-संस्करण, सोयाबीन तेल, मसाला उत्पादन और दुग्ध प्र-संस्करण जैसे उद्योग यहाँ की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र की खनिज संपदा का उपयोग कर निर्माण और अन्य उद्योगों से भी स्थानीय विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। छठवीं आरआईसी का आयोजन 7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम् के डिवीजनल आईटीआई में किया जाएगा। पिछली पांच रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के अनुभवों से प्रेरित होकर, इस कॉन्क्लेव का नर्मदापुरम् क्षेत्र में आयोजन उद्योगों की वृद्धि, निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। नर्मदापुरम आरआईसी में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, MSME और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में एक उद्योग-हितैषी वातावरण बना है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है। नर्मदापुरम् और इसके आसपास के क्षेत्र जैसे होशंगाबाद, हरदा में एमएसएमई, कृषि आधारित उद्योग, और पर्यटन के क्षेत्र में कई संभावनाएं हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का संतुलित और समन्वित आर्थिक विकास करना है। इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम् और इसके आस-पास के क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह आरआईसी नर्मदापुरम् और आसपास के क्षेत्रों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक धरोहर को उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा। पचमढ़ी, जो न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है बल्कि यहाँ की अनूठी जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन, अब निवेशकों के लिये नया आकर्षण बनेंगा। साथ ही नर्मदा नदी तट पर औद्योगिक और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इस कॉन्क्लेव में कृषि, MSME, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और खनिज जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। नर्मदापुरम् और पचमढ़ी, जो पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हैं, अब औद्योगिक दृष्टिकोण से भी नई ऊँचाइयों को छुएंगे। इस कॉन्क्लेव से औद्योगिक, पर्यटन और सामाजिक विकास के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित होगा।  

अवैध खनिज परिवहन पर नियंत्रण के लिये 41 ई-चेकगेट की होगी स्थापना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अवैध परिवहन रोकने के लिये एआई आधारित 41 ई-चेकगेट की स्थापना की जा रही है। इन ई-चेकगेटों पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी लीडर, ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की सहायता से खनिज परिवहन में संलग्न वाहनों की जाँच की जायेगी। परियोजना में पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में खनिज परिवहन के लिये महत्वपूर्ण मार्ग के 4 स्थानों पर ई-चेकगेट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अवैध परिवहन की निगरानी के लिये राज्य स्तर पर भोपाल में कमॉण्ड एवं कंट्रोल सेंटर और जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमॉण्ड सेंटर स्थापित किये गये हैं। माह दिसम्बर 2024 तक सभी 41 ई-चेकगेट की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में अवैध खनन की रोकथाम के लिये उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना भी प्रारंभ की गयी है। इसके द्वारा प्रदेश की सभी 7 हजार खदानों की जियो टैग कर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी रोकथाम की जा सकेगी। परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर थ्री-डी इमेजिंग एवं वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आंकलन किया जा सकेगा।  

दिल्ली-NCR में छाया घना कोहरा, जिससे दृश्यता बुरी तरह प्रभावित, लोगों को वायु गुणवत्ता से जूझना पड़ा

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में बुधवार की सुबह धुंध की मोटी चादर छाई रही, जिससे दृश्यता बुरी तरह प्रभावित हुई और लोगों को खतरनाक वायु गुणवत्ता से जूझना पड़ा। सड़कों पर निकलने वाले लोगों में से कई ने आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। राष्ट्रीय राजधानी के अलावा, उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद तथा हरियाणा के गुरुग्राम जैसे एनसीआर शहरों में हवा में जहरीली धुंध छाई रही, जिससे निवासियों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। जानलेवा स्तर पर पहुंचा प्रदूषण- दिल्लीवासी दिल्ली निवासी अभिमन्यु झा ने आईएएनएस से बात करते हुए कई लोगों की चिंताओं को व्यक्त किया और चेतावनी दी कि प्रदूषण जानलेवा स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “प्रदूषण अब जानलेवा हो गया है।” उन्होंने कहा कि इससे शहर के लोगों में गंभीर श्वसन संबंधी समस्याएं और यहां तक ​​कि कैंसर भी हो रहा है। झा ने इस बात पर जोर दिया कि इस पर्यावरणीय संकट का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास जहरीली हवा से बचने के लिए सीमित विकल्प हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “हम इसे बर्दाश्त करते हैं क्योंकि हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है।” बयानबाजी से हटकर ठोस कार्रवाई करे सरकार उन्होंने सुझाव दिया कि अमीर नागरिक स्वच्छ वाहन तकनीक अपनाकर प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं। झा ने समस्या से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों की आलोचना की, विशेष रूप से प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से किए गए छिड़काव उपायों की अप्रभावीता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “छिड़काव की पहल एक दिखावा लगती है। प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और राजमार्ग की स्थिति बिगड़ रही है।” उनकी टिप्पणियों को अन्य लोगों ने भी दोहराया और सरकार से बयानबाजी से हटकर ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया। आंखें जल रही हैं, सांस लेना मुश्किल हो रहा- बुद्ध सिंह काम के लिए सड़कों पर निकले बुद्ध सिंह ने बिगड़ती परिस्थितियों पर गौर किया। उन्होंने कहा, “यह कोहरे में चलने जैसा है। मेरी आंखें जल रही हैं और सांस लेना मुश्किल हो रहा है।” उन्होंने कहा, “हर साल स्थिति बदतर होती जा रही है, और फिर भी सरकार खोखले वादे करती रहती है। कुछ भी नहीं बदलता।” कोहरा में साइकिल चलाना भी खतरनाक हो गया है- प्रभुनाथ दुबे एक फैक्ट्री कर्मचारी प्रभुनाथ दुबे ने भी ऐसी ही चिंताएं साझा कीं। उन्होंने कहा, “आज कोहरा इतना घना है कि साइकिल चलाना भी खतरनाक हो गया है।” उन्होंने कहा, “प्रदूषण असहनीय है और यह सभी को प्रभावित कर रहा है। सरकार को सिर्फ़ बातें करने से ज़्यादा कुछ करने की ज़रूरत है।” भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि दिल्ली में बुधवार को मौसम का पहला घना कोहरा दर्ज किया गया और सुबह 8 बजे दृश्यता 0 मीटर तक गिर गई।

वर्ल्ड डायबिटिक डे: सावधान.. कही ये डायबिटीज आपकी आँखों की रोशनी ना छीन ले

बदलती दिनचर्या व जीवन शैली, बढ़ते तनाव, आनुवंशिक और खानपान में बदलाव आदि कारणों से विश्व में डायबिटीज के मरीजो की संख्या बढ़ती जा रही है। विभिन्न रिसर्च के अनुसार भारत वर्ष में डायबिटीज के मरीजो की संख्या लगभग 77 लाख अनुमानित है जो की 20 वर्षों में बढ़कर लगभग 1 करोड़ 35 लाख से अधिक होने की संभावना है। भारत को विश्व की डायबिटीज कैपिटल के रूप में जाना जाता है । डायबिटीज का दुष्प्रभाव शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ता है , आँखें भी इसका अपवाद नहीं है। आँखों के पर्दे या रेटिना पर इसके दुष्प्रभाव से रोशनी प्रभावित होने का ख़तरा होता है इस बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी का नाम दिया गया है । प्रारंभिक अवस्था में इसके कोई लक्षण नहीं होते और एडवांस स्टेज में ही मरीज़ को इसके बारे में पता चलता है । डायबिटीज से होने वाली ब्लाइंडनेस को कम करने हेतु 14 नवंबर वर्ल्ड डायबिटिक डे से मध्य प्रदेश स्टेट ऑफ़ल्थैमिक सोसाइटी द्वारा विशेष जन जागरूकता अभियान की शुरुआत की जा रही है ।संस्था के नव निर्वाचित अध्यक्ष एवम् रेटिना रोग विशेषज्ञ डा गजेंद्र चावला के अनुसार  15 दिवसीय इस आयोजन में प्रदेश भर में विभिन्न गतिविधिया का आयोजन किया जायेगा। डायबिटीज के मरीजो के रेटिना की जाँच, सेमिनार व कार्यशाला का आयोजन, पैम्पलेट्स का वितरण, सोशल मीडिया , प्रिंट मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग कर जन सामान्य तक डायबिटिक रेटिनोपैथी के बारे में जानकारी पहुँचाना आदि शामिल है । जिससे इस बीमारी को प्रारभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार के द्वारा डायबिटीज से होने वाली ब्लाइंडनेस को रोका जा सके । डा चावला से डायबिटीज के सभी मरीजो को सलाह दी है कि वे साल में कम से कम एक बार अपनी आँखों की जाँच , जिसमे रेटिना अथवा पर्दे की जाँच शामिल हो , अवश्य कराये चाहे उनको नज़र से संबंधित कोई लक्षण हो या ना हो और अपनी रोशनी को बचाये।

जनजातीय संस्कृति का गौरव गान ही सनातन संस्कृति का गौरव गान है : मुख्यमंत्री साय

रायपुर केन्द्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने माटी के वीर पदयात्रा का किया भव्य शुभारंभ केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर में जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में माटी के वीर पदयात्रा का भव्य आयोजन हुआ। पदयात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया ने देश की आजादी और कोरोना काल में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से हमें प्रेरणा लेना चाहिए, जिन्होंने 25 वर्ष की आयु में मातृ भूमि को आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ी और अपना बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में 6 लाख युवाओं ने अपना बलिदान दिया। उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के सपने को पूरा करने का संकल्प लेने तथा सामाजिक सरोकार को बढ़ावा देने के लिए आगे आने का आव्हान किया। डॉ. मंडाविया ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के आग्रह पर जशपुर नगर में सर्वसुविधायुक्त स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण कराए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माटी के वीर पदयात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ और जशपुर के लिए सौभाग्य की बात है कि भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। उन्होंने इस मौके पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवम्बर को देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जनजातियों को गौरव करने का एक और बड़ा अवसर प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जब-जब संस्कृति पर हमला हुआ है, जनजातीय समाज ने इसका तीव्र प्रतिकार किया है। जनजातीय संस्कृति प्रकृति से प्रेम करने की संस्कृति है। यह संस्कृति सौहार्द्र, शांति और सद्भाव की संस्कृति है। कलाओं से प्रेम करने वाली यह संस्कृति हमारी जनजातीय सनातन संस्कृति का उद्गम है। जनजातीय संस्कृति को बचाने की चिंता सनातन संस्कृति को बचाने की चिंता ही है। जनजातीय संस्कृति का गौरवगान सनातन संस्कृति का गौरवगान ही है। केन्द्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने माटी के वीर पदयात्रा का किया भव्य शुभारंभमुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम जनमन अभियान जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए संचालित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने जनजातीय समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए एकलव्य विद्यालयों तथा आय में बढ़ोतरी के लिए वन-धन योजना प्रारंभ किया। आयुष्मान भारत योजना में जनजातीय समुदायों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार है। हमने जनजातीय क्षेत्रों के विकास की रणनीति तय की है। हमारी सरकार जनजातीय समाज के प्राचीन गौरव और वैभव को वापस पाने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। लोकतंत्र की जड़ें दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। अंदरूनी गांवों में भी नियद नेल्ला नार योजना के तहत सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार जैसी मूलभूत अधोसंरचनाएं पहुंच रही हैं। हमने विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित छत्तीसगढ़़ निर्माण का संकल्प लिया है। सभी की सहभागिता से इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। जनजातीय समुदायों की अधिक से अधिक सहभागिता इस कार्य में सुनिश्चित की जाएगी। माटी के वीर पदयात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम में धरती के आबा भगवान बिरसा मुंडा के जीवन वृत्त पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में खेलकूद सहित अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले जनजातीय युवाओं तथा माई भारत से जुड़े वॉलेंटियर को सम्मानित किया गया। मुंडा समाज के अध्यक्ष श्री शंकर राम बारला ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। माटी के वीर पदयात्रा कार्यक्रम के शुभारंभ स्थल पुरना नगर मैदान में जनजातीय नायकों के जीवन गाथा, जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी लगाई गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद श्री राधेश्याम राठिया एवं श्री चिंतामणी महराज, विधायक श्रीमती गोमती साय, श्रीमती रायमुनि भगत, श्री राम कुमार टोप्पो, श्री सुशांत शुक्ला, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती  प्रियम्बदा सिंह जूदेव सहित श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, श्री रणविजय सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में युवा और नागरिकगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोटा में विद्यार्थियों के साथ साझा किए अपने अनुभव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थियों को अपना जुनून हमेशा कायम रखना चाहिए। इच्छाशक्ति जितनी दृढ़ होगी, लक्ष्य उतना ही आसान होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी पद पर पहुंचे, मित्रता का प्रेमभाव हमेशा बनाए रखना। इसका सबसे अच्छा उदाहरण श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती का है। उनकी दोस्ती 11 वर्ष की उम्र में हुई थी और जब वे द्वारका के राजा बने तब भी उनकी दोस्ती ने दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्थान के कोटा जिले में एलन शिक्षण संस्थान के समउन्नत भवन में विद्यार्थियों से चर्चा कर रहे थे। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विद्यार्थियों ने गजहार पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति का इससे अच्छा उदाहरण दूसरा नहीं हो सकता कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में पहली बार विधायक बनने के साथ ही मुख्यमंत्री बने और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री के बाद वे पहली बार सांसद बनें और पहली बार में ही देश के प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद लगातार सांसद बने और प्रधानमंत्री भी। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में हैट्रिक भी बनाई। आर्थिक दृष्टि से गुजरात देश के अन्य राज्यों की तुलना में अग्रणी है। समाज सेवा के लिए छोड़ी डॉक्टरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैंने अपने शैक्षणिक काल से ही अपना लक्ष्य समाज सेवा के रूप में निर्धारित किया था। वर्ष 1982 में मेरा चयन मेडिकल कॉलेज के लिए हो गया था, परंतु समाज सेवा के अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मैंने मेडिकल में प्रवेश न लेते हुए, बीएससी की उपाधि प्राप्त की। मैं यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट रहते हुए राजनीति में सक्रिय रह सका। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के तीन मूल मंत्र हैं, जिन्हें विद्यार्थियों को आत्मसात करना चाहिए। पर्याप्त नींद लें, नियमित रूप से व्यायाम करें और प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने बताया‍कि अपने लक्ष्य पर शुरू से ही ध्यान केन्द्रित रखना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 11 वर्ष की आयु में मथुरा से राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश के उज्जैन पधारे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी यात्रा के दौरान प्रदेश में जहां-जहां विश्राम किया या ठहरे उन स्थानों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक महत्व के तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिक्षा काल में जिन ग्रंथों का अध्ययन किया, उन ग्रंथों का सार गीता में समाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यार्थी निराशा को अपने आप पर हावी न होने दें। जब निराश हो जाए तो राजनेताओं की तरफ देखें, वे बार-बार चुनाव लड़ते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। कई बार विद्यार्थी लक्ष्य प्राप्ति की दौड़ में पीछे रह जाते हैं तो उन्हें निराश नहीं होना चाहिए, जबकि दोगनी ऊर्जा के साथ फिर प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलन शिक्षण संस्थान मध्यप्रदेश के उज्जैन में अपने संस्थान प्रारंभ करें, जिससे मध्यप्रदेश के छात्रों को भी स्थानीय स्तर पर लाभ प्राप्त हो सकेगा।  

जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की Z+ सिक्योरिटी सरकार को पत्र लिखकर वापस करने की अपील की

अमृतसर तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सिक्योरिटी को लेकर अहम खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने  Z+ सिक्योरिटी छोड़ दी है। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर Z+ सिक्योरिटी वापस करने की अपील कर रहे थे, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। पहले उनकी सिक्योरिटी के लिए अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया जाता था, लेकिन अब उनकी सिक्योरिटी सिर्फ पंजाब पुलिस के जवान ही करेंगे। बता दें कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह लंबे समय से केंद्र सरकार से यह मांग कर रहे हैं। कुछ दिन पहले विरसा सिंह वल्टोहा से विवाद के बाद उन्होंने जत्थेदार पद से भी इस्तीफा दे दिया था, हालांकि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के आदेश के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उनका इस्तीफा खारिज कर दिया था। उस वक्त भी ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने केंद्र सरकार से सुरक्षा वापस लेने की अपील की थी।

मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना: स्कूल भवनों की जांच में 78 स्कूल भवनों में निर्माण कार्यों में पाईं गंभीर खामियां, ठेकेदारों पर होगी कार्रवाई

बिलासपुर मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत शासकीय स्कूल भवनों का निर्माण, अतिरिक्त कक्ष निर्माण व रिपेयरिंग कार्य केवल कागजों में ही पूरा हुआ है। भौतिक सत्यापन के दौरान गठित टीम को 78 स्कूलों में कार्य अपूर्ण या गुणवत्ताहीन मिला, जबकि ठेकेदार ने अपनी पेश रिपोर्ट में कार्य को पूरा बताया था। कलेक्टर ने अनियमितता पाए जाने पर ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कागजों में कार्य पूर्ण बताकर राशि निकालने वाले ठेकेदारों से रकम वसूल की जाएगी और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत यह सुनिश्चित किया गया कि स्कूल भवनों का निर्माण, बच्चों के बैठने के लिए अतिरिक्त कक्षों का निर्माण और मरम्मत कार्य अच्छे से हों ताकि बच्चों को पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। कई स्कूलों भवनों का निर्माण हुआ तो कुछ के लिए अतिरिक्त कक्ष बनाए गए। वही छत का प्लास्टर गिरने और पानी रिसाव की शिकायतों के बाद रिपेयरिंग कराई गई थी। सत्यापन में पता चला कि ठेकेदारों ने केवल खानापूर्ति की है। अधिकारियों से मिलीभगत कर अपूर्ण कार्य को पूर्ण दिखाते हुए राशि का आहरण कर लिया गया। ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी का पता चलने के बाद कलेक्टर ने आयुक्त नगर निगम, आरईएस के कार्यपालन अभियंता और संबंधित सीएमओ को कार्रवाई का आदेश दिया है। दोषी निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने के साथ ही निर्माण कार्य के नाम पर निकाली गई राशि की वसूली भी की जाएगी। सबसे ज्यादा गड़बड़ी मस्तूरी ब्लाक में जांच टीम की अगुवाई में स्कूल भवनों की रिपेयरिंग जांच के दौरान पता चला कि मस्तूरी ब्लाक के 48 स्कूल ऐसे हैं जहां कार्य को पूर्ण बताकर भुगतान प्राप्त कर लिया गया। वहीं तखतपुर ब्लाक में 14 स्कूल, कोटा ब्लाक में 11 और बिल्हा ब्लाक में नौ स्कूल ऐसे मिले जहां समस्या जस की तस थी, लेकिन कागजों में कार्य को पूर्ण बता दिया गया था। इन स्कूलों में पाई गईं खामियां     केस 1- शासकीय जनपद प्राथमिक शाला बम्हनीखुर्द बिल्हा ब्लाक में स्कूल की छत व बरामदे में रिपेयरिंग और निर्माण कार्य तीन लाख 84 हजार रुपये में किया गया था। जांच टीम ने सत्यापन किया तो पता चला कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का अभाव है और बरामदे की छत का प्लास्टर गिरा हुआ था।     केस 2- तखतपुर के तुर्काडीह प्राथमिक शाला (ईडीयू) में 11 लाख 30 हजार की लागत से भवन का निर्माण हुआ था। मौके पर जांच करने पर टीम को छत में सीपेज की समस्या मिली।     केस 3- कोटा शासकीय माध्यमिक शाला भवन में परिवर्तन एवं परिवर्धन कार्य रानीबछाली में चार लाख 62 हजार की लागत से किया गया। जांच में गुणवत्ता का अभाव पाया गया।     केस 4- मस्तूरी ब्लाक के प्राथमिक शाला, सबरियाडेरा (सोन) में अतिरिक्त कक्ष निर्माण का ठेका 8आठ लाख 32 हजार में हुआ, परंतु फर्श का कार्य अधूरा था।  

ऐसे संतुलित माहौल में खेलना चाहते हैं, जहां उन्हें पूरी स्वतंत्रता के साथ खेलने का मौका मिले : राहुल

नई दिल्ली अनुभवी बल्लेबाज के एल राहुल ने कहा है कि वह एक ऐसे संतुलित माहौल में खेलना चाहते हैं, जहां उन्हें पूरी स्वतंत्रता के साथ खेलने का मौका मिले। साथ ही आरसीबी में शामिल होने को लेकर भी राहुल ने अपनी राय रखी है। लखनऊ सुपर जायंट्स ने राहुल को रिलीज़ कर दिया था और अब वह मेगा नीलामी का इंतज़ार कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही लखनऊ फ्रेंचाइज़ी के मालिक संजीव गोयनका ने उन खिलाड़ियों को टीम में रिटेन करने की इच्छा जताई थी जिनके पास “जीतने की मानसिकता” हो और जो “अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं और लक्ष्यों से पहले टीम को महत्व दें।” क्या इस बयान ने किसी तरह राहुल की नीलामी में जाने की इच्छा को प्रेरित किया? इस सवाल के जवाब में राहुल ने 12 नवंबर को स्टार स्पोर्ट्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “नहीं, मुझे लगता है निर्णय पहले ही लिया जा चुका था और मुझे नहीं पता कि उस बयान में क्या कहा गया था, लेकिन यह शायद रिटेंशन की घोषणा के बाद ही आया होगा। मुझे लगा कि मैं एक नई शुरुआत करना चाहता हूं, अपने विकल्पों को तलाशना चाहता हूं और वहां खेलना चाहता हूं, जहां मुझे थोड़ी स्वतंत्रता मिले और टीम का माहौल अधिक संतुलित हो।” “आईपीएल में पहले से ही बहुत दबाव होता है। आप गुजरात टाइटंस, चेन्नई सुपर किंग्स और अन्य टीमों को देखते हैं तो ऐसा साफ़ दिखता है कि जब वे जीतते या हारते हैं तो उनका संतुलन बना रहता है और ड्रेसिंग रूम का माहौल बहुत शांत होता है। एक खिलाड़ी के रूप में यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि अगर ऐसा माहौल हो, तो सभी खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का सबसे अच्छा मौक़ा मिलता है।” राहुल ने कहा,”न कप्तानी मेरे लिए उतना भी ज़रूरी नहीं है कि इसी से आगे की सारी चीज़ें तय हों। मैं बस एक ऐसी टीम का हिस्सा बनना चाहता हूं जिसमें अच्छा वातावरण हो। जहां आपको प्यार, देखभाल और सम्मान मिले और उस वातावरण में फ़्रेंचाइज़ी के हर व्यक्ति का एक ही लक्ष्य हो – जीतना। अगर ऐसा है तो वह मेरे लिए एक आदर्श स्थिति होगी।” उन्होंने कहा,”हमने एलएसजी में पहले एंडी फ्लावर (हेड कोच) और जीजी (गौतम गंभीर, मेंटॉर) के साथ और फिर पिछले साल नए हेड कोच जस्टिन लैंगर के साथ उस तरह के माहौल को बनाने की कोशिश की। मुझे लगता है कि ड्रेसिंग रूम का वातावरण शानदार था। लेकिन कभी-कभी आपको खु़द के लिए कुछ बेहतर तलाशने के लिए आगे बढ़ने की ज़रूरत होती है।” राहुल ने 2022 और 2023 में एलएसजी को प्लेऑफ़ तक पहुंचाया था। जब उनसे आईपीएल 2024 को लेकर सवाल किया गया, तो राहुल ने संकेत दिया कि बाहरी दबाव उनके प्रदर्शन में गिरावट का कारण हो सकता है। राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ हार के साथ शुरुआत करने के बाद, उन्होंने लगातार तीन मैच जीते, लेकिन फिर सीज़न के मध्य में उनकी टीम लड़खड़ा गई। इसके बाद उनका प्रदर्शन गिरता गया। हालांकि इस बीच राहुल 136.12 की स्ट्राइक रेट के साथ 520 रन बनाते हुए, अपने टीम के टॉप स्कोरर रहे। हालांकि इतने रन बनाने के बावजूद राहुल टीम के साथ बने रहेंगे या नहीं इस बात पर संशय था। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि लीग स्टेज में सनराइजर्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ खेले गए एक मैच के बाद राहुल और गोयनका के बीच गहमा-गहमी हुई थी, जो वीडियो में साफ़ दिख रहा था। उन्होंने कहा, “खेल में हमेशा उतार-चढ़ाव आते हैं। आपको अपने धैर्य को बनाए रखना होता है और लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना होता है। यात्रा, बाहरी घटनाएं, दबाव – ये सब हर साल होता है। लेकिन इस सीजन में ऐसा लगा कि यह सब कुछ ज़्यादा था और मुझे लगता है कि इसका असर टीम पर पड़ा, और हम तब प्रदर्शन नहीं कर पाए जब वास्तव में उसकी ज़रूरत थी।” राहुल ने कहा कि इस समय उनके लिए आईपीएल की कप्तानी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ नहीं है, बल्कि एक “अच्छे वातावरण” में खेलना ज़्यादा मायने रखता है। राहुल ने आईपीएल कप्तानी के बारे में पूछे जाने पर कहा, “मैं कभी भी जाकर किसी से कप्तानी के बारे में नहीं पूछूंगा। अगर आपको लगता है कि मेरी नेतृत्व क्षमताएं पर्याप्त हैं और आपको मेरी क्रिकेट खेलने की शैली और खु़द को संभालने के तरीक़े में कुछ अच्छा नज़र आता है, तो निश्चित तौर पर मैं कप्तानी करने के लिए खु़श हूं।” “लेकिन कप्तानी मेरे लिए उतना भी ज़रूरी नहीं है कि इसी से आगे की सारी चीज़ें तय हों। मैं बस एक ऐसी टीम का हिस्सा बनना चाहता हूं जिसमें अच्छा वातावरण हो। जहां आपको प्यार, देखभाल और सम्मान मिले और उस वातावरण में फ़्रेंचाइज़ी के हर व्यक्ति का एक ही लक्ष्य हो – जीतना। अगर ऐसा है तो वह मेरे लिए एक आदर्श स्थिति होगी।” सोशल मीडिया पर उनकी घरेलू टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु के साथ संभावित पुनर्मिलन की चर्चा तेज़ हो रही है। हालांकि राहुल किसी भी टीम में शामिल होने की संभावना को दरकिनार नहीं कर रहे हैं। लेकिन यह कोई रहस्य नहीं है कि उन्हें किस टीम से एक विशेष जुड़ाव है। उन्होंने कहा, “मैंने आरसीबी में खेलते हुए सबसे ज़्यादा आनंद लिया। वह टीम मेरे लिए घर जैसी है। आप घर पर बहुत समय बिता सकते हैं, और मुझे चिन्नास्वामी स्टेडियम के बारे में अच्छी तरह से पता है। मैं वहां खेलते हुए बड़ा हुआ हूं।” आरसीबी में वापस जाने के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा, “हां, बिल्कुल, जैसा कि मैंने कहा, यह मेरे लिए घर जैसा है और वहां के लोग मुझे एक स्थानीय कन्नड़ लड़के के रूप में जानते हैं, और वहां वापस जाना और फिर से एक अवसर पाना अच्छा होगा।

भगवान बिरसा मुंडा की 149वीं जयंती : एक ऐतिहासिक प्रेरणा: डॉ. कुंवर विजय शाह

भोपाल भारत के समृद्ध इतिहास में भगवान बिरसा मुंडा का नाम एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक के रूप में अंकित है, जिन्होंने अपने जीवन को जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। देश में हर साल 15 नवम्बर को उनकी जयंती पर भारत में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनकी शहादत और योगदान को याद करने का है, बल्कि यह जनजातीय समुदाय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, अनवरत संघर्ष और स्वाभिमान का उत्सव भी है। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और उनका संघर्ष बिरसा मुंडा जी का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्हें बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। सामाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतर्मन को विद्रोह की भावना से भर दिया। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारम्परिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया। उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व बिरसा मुंडा जी ने “उलगुलान” नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ था। “उलगुलान” का अर्थ है ‘महान विद्रोह’। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारम्परिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में जनक्रांति की लहर पैदा कर दी और उन्हें “धरती आबा” या “धरती पिता” या धरा पितृ के रूप में सम्मानित किया जाने लगा। भगवान बिरसा मुंडा का समाज सुधारक के रूप में योगदान भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने तत्कालीन जनजातीय समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे अंध-विश्वास, जाति-भेद, नशाखोरी, जातीय संघर्ष और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाई। उन्होंने अपने अनुयायियों को शिक्षा का महत्व समझाया और उन्हें एकता में रहने का संदेश दिया। बिरसा मुंडा ने “बिरसाइत” नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों को आचार-विचार की शुचिता, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस की स्थापना वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करना है। इस दिन देशभर में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर, उनकी परंपराओं और उनके गौरवशाली इतिहास को समझने और सम्मानित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिवस जनजातीय समाज के संघर्षों और उनके योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। बिरसा मुंडा का भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में योगदान भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में भगवान बिरसा मुंडा का योगदान अतुलनीय है। वे न केवल अपने क्षेत्र की जनजातियों के नेता थे, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को भी एक नई दिशा दी। उनके “उलगुलान” आंदोलन ने अन्य जनजातीय समुदायों को भी संगठित किया और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी करने की प्रेरणा दी। भगवान बिरसा मुंडा मात्र 24 साल 7 महीने की अल्पायु में 9 जून 1900 को वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी विरासत आज भी जनजातीय समाज के दिलों में जीवित है और उन्हें एक महान क्रांतिकारी जननायक के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस का महत्व राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस का महत्व केवल बिरसा मुंडा जी के योगदान को याद करने तक सीमित नहीं है। यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का जश्न मनाने का भी दिन है। जनजातीय समाज ने भारत के इतिहास में अहम भूमिका निभाई है। यह गौरव दिवस उनकी सांस्कृतिक धरोहर, संघर्षों और उपलब्धियों का सम्मान करता है। यह अवसर सभी भारतीयों को यह याद दिलाने का भी है कि जनजातीय समाज भारत की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण व अभिन्न हिस्सा है और उनके योगदान को हमें सदैव संजोकर रखना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें साहस, संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संदेश देता है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस हमें उनकी शिक्षाओं, राष्ट्रप्रेम और उनके संघर्ष को याद करने और जनजातीय समाज के अधिकारों और सम्मान के प्रति संवेदनशील बने रहने के लिए प्रेरित करता है। जनजातीय समाज के स्वाभिमान और उनके अधिकारों की रक्षा में भगवान बिरसा मुंडा का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस उनके प्रति हमारी कृतज्ञता, आदर और श्रृद्धांजलि का प्रतीक है।  

नई साल पर पंजाब के लोगो को मिलेगा बड़ा तोहफा, आदमपुर हवाई अड्डे से दिल्ली और मुंबई के लिए फ्लाइट होगी शुरू

पंजाब पंजाबियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जानकारी के अनुसार इंडिगो एयरलाइंस जनवरी 2025 से आदमपुर हवाई अड्डे से दिल्ली और मुंबई के लिए फ्लाइट शुरू कर सकती है।    आपको बता दें कि इंडिगो एयरलाइंस की एक टीम ने इंडियो के मुख्य अफसर सुरिंदर नरली के नेतृत्व में आदमपुर हवाई अड्डे का दौरा किया और फ्लाइट शुरू करने के लिए अड्डे का निरीक्षण किया। नरली ने कहा कि जनवरी 2025 से फ्लाइट को शुरू करने की योजना है। टीम ने एयरपोर्ट आथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों के साथ एप्रन क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचे का गहन निरीक्षण किया ताकि एयरलाइंस के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान आदमपुर एयरपोर्ट के डायरेक्टर पुष्पेंद्र कुमार निराला, अमित कुमार ए.जी.एम. सिविल, सूरज यादव मैनेजर इलेक्ट्रिकल, सूर्य प्रताप जूनियर इंजीनियर ऑपरेशन और मोहन पंवार सुपरिंटेंडेंट सी.एन.एस. मौजूद थे। इंडिगो की टीम ने आदमपुर एयरपोर्ट के डायरेक्टर पुष्पेंद्र कुमार निराला, अमित कुमार ए.जी.एम. सिविल के साथ आदमपुर से नियमित उड़ानें शुरू करने पर चर्चा की ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। आदमपुर हवाई अड्डे पर नई फ्लाइट के संचालन से दोआबा सहित क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। स्थानीय निवासियों और व्यापारिक समुदाय के लिए यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेगा।

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