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आईपीएल 2025 मेगा नीलामी में शामिल होने वाले 574 खिलाड़ियों की सूची की घोषणा की: बीसीसीआई

नई दिल्ली बीसीसीआई ने सऊदी अरब के जेद्दा में 24 और 25 नवंबर को होने वाली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2025 मेगा नीलामी में शामिल होने वाले 574 खिलाड़ियों की सूची की घोषणा की। शॉर्ट-लिस्ट किए गए खिलाड़ियों में से 366 भारतीय और 208 विदेशी खिलाड़ी हैं, जिनमें एसोसिएट देशों के 3 खिलाड़ी शामिल हैं। नीलामी में 318 भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ी और 12 अनकैप्ड विदेशी खिलाड़ी शामिल होंगे। 10 फ्रैंचाइजी के रोस्टर में अधिकतम 204 स्लॉट भरे जाने बाकी हैं। विदेशी खिलाड़ियों के लिए 70 स्लॉट उपलब्ध हैं, जबकि 2 करोड़ रुपए उच्चतम आरक्षित मूल्य है, जिसमें 81 खिलाड़ी उच्चतम ब्रैकेट में रहना पसंद करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि टीमों के चयन के लिए सूची में अनुभवी सितारों के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों का भी नाम शामिल किया गया है। आईपीएल 2025 नीलामी में सबसे उम्रदराज खिलाड़ी इस साल की शुरुआत में अपना आखिरी टी20 मैच खेलने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के 10 साल बाद पहली बार आईपीएल नीलामी में शामिल होने वाले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन आईपीएल 2025 नीलामी में शामिल होने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। इनका बेस प्राइज 1.25 करोड़ है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसिस, इंग्लैंड के जेमी ओवरटन और अफगानिस्तान के ऑलराउंडर मोहम्मद नबी के साथ 40 साल से अधिक उम्र के केवल तीन अन्य क्रिकेटरों ने इस सूची में जगह बनाई है। आईपीएल के अनुभवी सितारे डेविड वार्नर और रविचंद्रन अश्विन इस सूची में अगले स्थान पर हैं, जो 38 साल की उम्र में इस मेगा नीलामी में शामिल हुए हैं। इनमें ओवरटन और नबी का बेस प्राइज 1.5 करोड़ जबकि, डु प्लेसिस, वार्नर और अश्विन का बेस प्राइज  2 करोड़ है। आईपीएल 2025 नीलामी में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी दूसरी ओर बिहार के 13 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी 16 वर्षों में आईपीएल नीलामी सूची में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। हाल ही में इस युवा खिलाड़ी ने तब सुर्खियां बटोरीं जब वह अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए, उन्होंने चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ भारत अंडर-19 के लिए एक युवा टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल की। हाल ही में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने और 2 शतक लगाने वाले ​​मुंबई के सनसनीखेज खिलाड़ी आयुष म्हात्रे 17 साल की उम्र में आईपीएल 2025 की नीलामी में दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। तमिलनाडु के आंद्रे सिद्धार्थ और दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज क्वेना मफाका शीर्ष 4 में हैं, दोनों की उम्र 18 साल है। इन सबका बेस प्राइज 30 लाख है।

दिल्ली LG ने पुलिस को दिए अवैध प्रवासियों की पहचान के आदेश, एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने के निर्देश

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर अब जल्द ही कोई बड़ा ऐक्शन हो सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना ने दिल्ली पुलिस को राजधानी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने को कहा है। एलजी ने इसके लिए पुलिस को एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने का भी निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली में अवैध अप्रवासियों की संख्या में इजाफा होने की खबरों का संज्ञान लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और उनकी पहचान के लिए एक महीने तक अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। एलजी ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए कि वे राजधानी में अवैध प्रवासियों की पहचान कर केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर उन पर कार्रवाई करें। एलजी ऑफिस द्वारा दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, एमसीडी कमिश्नर और एनडीएमसी अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी खबरें हैं कि अवैध अप्रवासियों के पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार करने और हेरफेर करने की प्रक्रिया अपनाने के प्रयास चल रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दिल्ली में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर राजधानी में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर बोला हमला अवैध प्रवासियों पर उपराज्यपाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली की ‘आप’ सरकार ने कहा, “भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए अवैध प्रवासियों के मुद्दे का इस्तेमाल करती है। इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि अवैध प्रवासी हमारे देश में कैसे प्रवेश कर रहे हैं। इसके लिए सीधे तौर पर अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्रालय जिम्मेदार हैं।” ‘आप’ ने एक बयान में कहा, “यदि अवैध अप्रवासी हैं, तो कितने हैं? यह एक बड़ी विफलता है तथा ऐसे लोगों पर कार्रवाई ना करना, इसे और अधिक स्पष्ट रूप से उजागर करता है।” ‘आप’ ने कहा, “एक तरफ भाजपा अवैध प्रवासियों को नागरिकता दे रही है और दूसरी तरफ जांच का दिखावा कर रही है। भाजपा को यह पाखंड बंद करना चाहिए और अपनी गंदी राजनीति खत्म करनी चाहिए।” एलजी के पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली में अवैध प्रवासियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। पत्र में कहा गया है, “ऐसे लोगों द्वारा सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और पार्कों पर अतिक्रमण भी बढ़ा है। ऐसी खबरें हैं कि उनके पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, चुनाव पहचान पत्र आदि बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और धोखाधड़ी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।” सक्सेना ने कहा, “यदि अवैध प्रवासियों को चुनाव पहचान पत्र जारी किया जाता है तो इससे उन्हें लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली अधिकार अर्थात हमारे देश में वोट देने का अधिकार प्राप्त होगा। अवैध प्रवासियों को ऐसे अधिकार देना किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस तरह के कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं।” सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतें उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव संभागीय आयुक्तों के माध्यम से जिलाधिकारियों को पहचान दस्तावेजों के लिए आवेदन करने वाले लोगों के सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी करें। पत्र में कहा गया है कि पुलिस कमिश्नर क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को विशेष रूप से सड़क किनारे तथा खाली सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बसे लोगों का निरीक्षण करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दें। सक्सेना ने कहा कि दिल्ली पुलिस अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एक महीने तक स्पेशल अभियान चलाएगी और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राजधानी में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर अनाधिकृत कब्जा न हो।

भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें : मोहन भागवत

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)प्रमुख मोहन भागवत  गुरुग्राम पहुंचे थे। यहां वह ‘विविभा-2024:विकसित भारत के लिए विजन’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। भागवत ने कहा कि विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य लेकिन वह भारत-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें। भारत-केंद्रित हो- मोहन भागवत संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है,लेकिन यह शिक्षा भारत-केंद्रित होनी चाहिए। हमें दुनिया भर से अच्छे विचार लेने चाहिए, लेकिन कभी भी अंधाधुंध अनुयायी नहीं बनना चाहिए। भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित शोध के लिए शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। “भारतीय शिक्षण मंडल- युवा आयाम” की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जैसे विशिष्ट वक्ताओं ने देश भर के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ विकसित भारत को प्राप्त करने के बारे में अपने विचार साझा किए। एस सोमनाथ ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में अगले 25 वर्षों के महत्व पर प्रकाश डाला। ’16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था’ मोहन भागवत ने कहा कि पहली शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था। हमने बहुत पहले ही बहुत कुछ खोज लिया था। हम बस रुक गए और इसी कारण हमारा पतन शुरू हुआ। उन्होंने खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में पिछले 10,000 सालों से खेती हो रही है, लेकिन जमीन,पानी,हवा के प्रदूषित होने की समस्या कभी नहीं थी। लेकिन जब बाहर से खेती आई, तो 500-600 सालों में ही ये चीजें होने लगीं। भागवत ने कहा, ‘कहीं न कहीं भारत की दृष्टि में कमी थी, जिसके कारण विकास भी एकतरफा हुआ। भारत में विकास समग्र रूप से होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि आजकल बहस इस बात पर होती है कि विकास किया जाए या पर्यावरण की रक्षा,जैसे हमें एक को चुनना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में,यह एक या दूसरे को चुनने के बारे में नहीं है,बल्कि दोनों को एक साथ लेकर चलने के बारे में है। भागवत ने आगे कहा कि सिर्फ चार प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहते हैं। इस तरह का विकास लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करके धकेला गया है। भागवत ने कहा कि जो लोग तकनीकी विकास को आगे बढ़ाते हैं,तो आप देख सकते हैं कि वे आबादी का सिर्फ 4 प्रतिशत हैं,लेकिन उन्हें 80 प्रतिशत संसाधनों की जरूरत है और उन संसाधनों को प्राप्त करने के लिए वे कई लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास के लिए लोगों को वास्तव में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और जुनून के साथ काम करना पड़ता है,लेकिन उन प्रयासों का फल बहुतों को नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि जुनून को फिर से जगाने के लिए लाठी का इस्तेमाल उनके ही लोगों पर करना चाहिए,ऐसी स्थितियां हर जगह देखने को मिलती हैं।

कोई SC, ST, OBC नहीं सब हिंदू एक है, सब भारतीय एक है : रामभद्राचार्य

 जयपुर जयपुर में कथा कहने आए जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकारों को जाति के आधार पर आरक्षण ख़त्म कर आर्थिक आधार पर देना चाहिए और ये जल्दी होनेवाला है. उन्होंने कहा कि हमने सवर्ण समाज में जन्म लेकर पाप नहीं किया है. रामभद्राचार्य यहीं नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा, ‘शत प्रतिशत नंबर लाकर सवर्ण का बच्चा जूता सीए और चार प्रतिशत लाकर एससी का बच्चा नौकरी पाए. इसको समाप्त करना हीं होगा और ये होगा. कोई SC, ST, OBC नहीं सब हिंदू एक है, सब भारतीय एक है. आर्थिक आधार पर आरक्षण कर दो. तब यह जाति वाला गृह युद्ध अपने आप समाप्त हो जाएगा.’ राजस्थान के सीएम को लेकर किया चौंकाने वाला दावा उन्होंने आगे कहा, ‘ब्राह्मण मुख से निकला है, क्षत्रिय भुजा से वैश्य जंघा से और शूद्र चरण से. चरण पर सिर झुकता है तो वो अपवित्र कैसे हो गया. हिंदुओं में कोई छूआछूत नहीं है. 80 परसेंट देश में हिंदू करना होगा फिर सारी समस्या ख़त्म हो जाएगी.’ रामभद्राचार्य ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने कहा, ‘जानते हैं जब मुख्यमंत्री की चर्चा चल रही थी कि राजस्थान का सीएम कौन बनेगा तो मैंने उपर बात की और कहा कि राजस्थान का मुख्यमंत्री ब्राह्मण को बनाओ. सभी ने कहा कि कैसे होगा? वसुंधरा जी कैसा मानेंगी? तब हमने कहा कि उन्हीं के मुंह से कहलवाओ और इस तरह से मेरे समझ से राजस्थान को पहला ब्राह्मण मुख्यमंत्री मिला.’ इस मौक़े पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ मज़बूत करने की भी अपील की.

ग्वालियर नगर निगम अपने इस कदम से होगा 01 करोड़ 33 लाख रुपए का फायदा, जाने क्या है मामला

ग्वालियर मध्यप्रदेश में डीजल और पेट्रोल (Petrol-Diesel) पर भारी टैक्स लगता है, इससे ईंधन के दाम पड़ोसी राज्य की तुलना में बढ़े हुए हैं. महंगे पेट्रोल-डीजल की खरीदी की मार राज्य के नागरिक पहले ही परेशान थे लेकिन अब राज्य सरकार और उससे जुड़े संस्थान भी इससे चिंतित हो रहे हैं. अब वे भी पड़ेसी राज्य यूपी (UP) से सस्ता डीजल व पेट्रोल खरीदने की तैयारी में हैं. सरकार से अनुदान लेने वाली ग्वालियर नगर निगम (Nagar Nigam Gwalior) ने अब यूपी से डीजल-पेट्रोल खरीदने का फैसला लिया है. साल भर में होगी इतने की बचत MP में पेट्रोल-डीजल पर अधिक वैट (VAT) और अन्य टैक्स के चलते निगम ने UP के झांसी शहर से डीजल खरीदने का निर्णय लिया है, जिससे निगम को सालाना  लगभग 01 करोड़ 33 लाख रुपए का फायदा होगा, इस के लिए बाकायदा परिषद से प्रस्ताव पास भी हो चुका है. ऐसे में पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने एक बार फिर से प्रदेश सरकार से MP में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने की मांग की है. क्या कहते हैं आंकड़े?     MP के ग्वालियर में डीजल 91.80 रु./लीटर है. इस पर VAT 19%, अतिरिक्त VAT 1.50 रु/ली. और सेस 11% लगता है.     UP के झांसी में डीजल 87.49 रु./लीटर है. वहां पर वैट 17.08% लगता है. इसके अलावा अन्य कोई टैक्स नहीं लिया जाता है.     UP से डीजल खरीदने के लिए निगम परिषद में आए प्रस्ताव को सभापति मनोज तोमर ने मंजूरी दे दी है.     ग्वालियर नगर निगम में अधिकारियों के वाहन सहित छोटे-बड़े लगभग 770 वाहन हैं. जबकि एक सैकड़ा वाहन और आने वाले हैं.  डीजल खपत (3 लाख लीटर) होती है. एक टैंकर में 12 हजार लीटर डीजल होता है.     UP-झांसी से डीजल खरीदने पर नगर निगम को 1 लीटर डीजल पर 3 रुपये 70 पैसे की बचत होगी, यानी एक महीने में 11लाख 10 हज़ार और एक साल में 1करोड़ 33 लाख रुपए का फायदा होगा. एमपी में बॉर्डर पर मौजूद पंप संचालक भी हैं परेशान मध्यप्रदेश में डीजल-पेट्रोल पर ज्यादा वैट होने और अन्य टैक्स लगने से यहां  इसकी कीमतें बहुत ज्यादा हैं. यूपी के सीमावर्ती जिले भिंड, मुरैना, दतिया, रीवा, सतना, सीधी और ग्वालियर के पेट्रोल पम्प मालिक यह आरोप लगाते रहे हैं कि इस दाम के चलते सीमावर्ती इलाकों के पम्प बदहाली में हैं. लोग इटावा, आगरा और झांसी से माल खरीद लाते हैं क्योंकि दोनों प्रदेशों की दरों में भारी अंतर है. ग्वालियर नगर निगम के UP से डीजल खरीदने के निर्णय के बाद अब ग्वालियर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि MP के बॉर्डर पर संचालित पेट्रोल पंपों की स्थिति खराब है, अधिकतर बंद होने के कगार पर हैं ऐसे में MP में पेट्रोल डीजल पर वैट कम किया जाए. नगर निगम अधिकारी का क्या कहना है? नगर  निगम कमिश्नर अमन वैष्णव ने खुद एमआईसी के माध्यम से इसका प्रस्ताव परिषद में ये प्रस्ताव लेकर आए थे. प्रस्ताव में UP के झांसी से डीजल खरीदने की बात कही गई है, जिसे सभापति मनोज तोमर ने सर्वसम्मति से पास कर दिया.  

मंत्री केदार कश्यप ने नारायणपुर के वासियों को दी करोड़ों की सौगते

नारायणपुर, राज्य सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास, सहकारिता और संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने नारायणपुर के एक दिवसीय भ्रमण के दौरान 2 करोड़ 12 लाख रूपये का लोकार्पण एवं 65 करोड़ 5 लाख रूपये का भूमिपूजन कर जिले वासियों को सौगत दिया। उन्होंने राहत शिविर भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 50 लाख रूपये, शबरी एम्पोरियम का नवनीकरण कार्य हेतु 24 लाख 52 हजार रूपये, कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय 100 सीटर हेतु 37 लाख 70 हजार रूपये से निर्मित भवनों का लोकापर्ण किया। उन्होंने कस्तुरमेटा से इकपाड़ सड़क निर्माण हेतु 2 करोड़ 19 लाख 94 हजार रूपये, कस्तुरमेटा कुतुल रोड से तोके सड़क निर्माण हेतु 10 करोड़ 32 लाख 38 हजार रूपये, सोनपुर मसपुर रोड से तुमेरादि सड़क निर्माण हेतु 14 करोड़ 58 लाख 98 हजार रूपये, सोनपुर से ऐहनार सड़क निर्माण हेतु 4 करोड़ 32 लाख 60 हजार रूपये, कड़ेमेटा से कोडोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 78 लाख 64 हजार रूपये और कस्तुरमेटा से मकसोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 67 लाख 41 हजार रूपये से निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक रूपसाय सलाम, जिला पंचायत सदस्य प्रताप मण्डावी, पार्षद जैकी कश्यप, सरपंच कानागांव मगंड़ूराम नुरेटी, बृजमोहन देवांगन, नरेंद्र मेश्राम, प्रीतेश जैन, नारायण मरकाम, रीता मण्डल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत वासु जैन, अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, एसडीएम अभयजीत मण्डावी, सहायक आयुक्त राजेंद्र सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

बाबा महाकाल को अनोखे भक्त ने चढ़ाई अमेकिरी डॉलर के नोटों की माला

उज्जैन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में देश भर आने वाले भक्त सोना चांदी नगदी दान करते हैं. लेकिन पहली बार किसी भक्त ने बाबा महाकाल को भस्म आरती में अमेरिकन डॉलर से बनाई माला भेंट की. जिसे देख मंदिर प्रशासन भी सकते में रह गया. हालांकि यह पता नहीं चला कि माला में कितने डॉलर लगे हैं. 12 ज्योतिर्लिंग में एक महाकालेश्वर मंदिर की भस्मआरती दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है. यही वजह है कि इनके दर्शन के लिए देशभर से आम लोगों के साथ ही पॉलीटिशियन, क्रिकेट खिलाड़ी, बॉलीवुड स्टार और उद्योगपति आते रहते हैं. इन भक्तों में कोई सोने चांदी के गहने बाबा महाकाल को अर्पित करता करता है तो कोई बड़ी राशि दान करता है. लेकिन शनिवार तड़के भस्म आरती में किसी भक्त ने अमेरिकन डॉलर से बनी तीन फीट की माला भगवान महाकाल को भेंट कर दी. माला में 200 से अधिक अमेरिकन डॉलर लगे हुए हैं. जिसके बीच जय श्री महाकाल लिखा हुआ है. दान पेटी में डाली डॉलर की माला महाकाल मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ के अनुसार भगवान महाकाल के दरबार में बड़ी संख्या में आने वाले भक्त भगवान को भेंट स्वरूप कुछ ना कुछ दान करके जाते हैं. आज सुबह  हुई भस्म आरती में एक भक्त ने माला अर्पित करने के लिए दी थी. भक्त ने गुप्त दान किया इसलिए उनका नाम पता चल पाया. माला में कितने डॉलर लगे हैं इसकी भी जानकारी नहीं है. माला दान पेटी में डाल दी. अब पेटी खुलने पर पता चलेगा कि माला में कितने डॉलर लगे हैं.  

चीनी मिसाइलों से भारतीय पिनाका का मुकाबला, रेंज 120 किमी. करने का प्लान

नई दिल्ली  भारतीय सेना को जल्द ही नई लंबी दूरी की गाइडेड मिसाइलें मिलने वाली हैं। ये मिसाइलें चीन की मिसाइलों का मुकाबला करने में सक्षम होंगी। चार साल तक चले परीक्षण के बाद अब इन मिसाइलों को मंजूरी दी गई है। गाइडेड पिनाका रॉकेट 75 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकते हैं। इनमें एक गाइडेंस किट भी लगी है जो उड़ान के दौरान इसे सही दिशा में ले जाती है। 10 नवंबर को अंतिम परीक्षण सफल रहने के बाद अब सेना की सभी तकनीकी जरूरतें पूरी हो गई हैं। और बढ़ेगी पिनाका रॉकेट की मारक क्षमता सूत्रों का कहना है कि अगले फेज में इनकी मारक क्षमता को पहले 120 किलोमीटर और फिर 200 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। इस पर काम शुरू हो चुका है। DRDO ने चार कंपनियों के साथ मिलकर यह सिस्टम बनाया है। इनमें तीन निजी क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। उत्पादन के लिए फैक्ट्रियां भी बन चुकी हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों की सफलता को देखते हुए, दुनिया भर में इनकी मांग बढ़ रही है। लेकिन इनकी आपूर्ति सीमित है। भारत में हर साल सैकड़ों रॉकेट बनाने की क्षमता है। जरूरत पड़ने पर इसे हजारों तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे बढ़ेगी रॉकेट का रफ्तार सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि 37 किलोमीटर की रेंज वाले पुराने पिनाका रॉकेट का उत्पादन पहले से ही हो रहा है। इन्हीं जगहों पर लंबी दूरी वाले रॉकेट भी बनाए जा सकते हैं। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो लॉन्चर बनाते हैं। इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड और म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड गोला-बारूद बनाते हैं। पिनाका को निर्यात की मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है, इसलिए उम्मीद है कि सेना जल्द ही ऑर्डर देगी। गाइडेड पिनाका को निर्यात के लिए भी मंजूरी दे दी गई है और आर्मेनिया ने ऑर्डर दिया है। अन्य मित्र देशों को भी यह सिस्टम बेचने के लिए बातचीत चल रही है। भारतीय रॉकेट को मौजूदा पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर से चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इससे सेना को तैनाती में काफी सुविधा होगी। पाकिस्तान ने हाल ही में अपने फतह- II सिस्टम का परीक्षण किया है। दावा किया जा रहा है कि यह 400 किलोमीटर तक मार कर सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

रतलाम का वन विभाग सैलाना वन क्षेत्र में प्रदेश का पहला कैक्टस गार्डन तैयार करने जा रहा

रतलाम मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में वन विभाग एक नया आयाम स्थापित कर रहा है। सैलाना वन क्षेत्र में प्रदेश का पहला और एकमात्र कैक्टस गार्डन तैयार किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा बल्कि शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी एक ज्ञानवर्धक केंद्र साबित होगा। एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन भी रतलाम जिले के सैलाना में बना हुआ है। लेकिन मध्य प्रदेश में वन विभाग का यह पहला कैक्टस गार्डन बन रहा है जिसमें 100 से ज्यादा प्रजातियां के कैक्टस पौधे लगाए जाएंगे इसके साथ ही यहां पर गार्डन और अन्य सुविधाएं भी मिलेगी। 100 से अधिक प्रजातियों के कैक्टस पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग की योजना के तहत इस गार्डन में 100 से ज्यादा प्रजातियों के कैक्टस का रोपण किया जाएगा। कैक्टस के पौधे मध्य प्रदेश सहित गुजरात से भी लाए जाएंगे। डीएफओ एन. के. दोहरे ने बताया कि यह परियोजना कैक्टस जैसे विशेष पौधों के संरक्षण के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी। आखिर कैसे हुआ चयन रतलाम जिले में सैलाना वन परिक्षेत्र 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। वन विभाग द्वारा कैक्टस गार्डन का तीन माह पूर्व प्रपोजल तैयार किया। शासन स्तर पर पहले प्रपोजल भोपाल भेजा। वहां से केंद्र सरकार के पास पहुंचा। पीएम नरेंद्र मोदी की ‘सेंट्रल ग्रीन इंडिया मिशन योजना’ में इस प्रपोजल को शामिल किया। केंद्र से पूरे देश में 10 से 15 नगर वाटिका (गार्डन), नगर वन व स्माल नगर वाटिका को स्वीकृत किया। स्माल नगर वाटिका में प्रदेश में मात्र रतलाम के सैलाना वन परिक्षेत्र का चयन किया। इसके बाद से वन परिक्षेत्र में कैक्टस गार्डन के लिए कार्य शुरू हो चुका है। वन परिक्षेत्र की सफाई की जा रही है। जिस जगह गार्डन बनेगा उस जगह को समतल कर गड्‌डे खोदने का काम किया जा रहा है। कैक्टस ही नहीं बहुत कुछ देखने को मिलेगा अगर आप सोच रहे है कि सैलाना के वन परिक्षेत्र में केवल कैक्टस गार्डन ही देखने को मिलेगा। तो ऐसा नहीं है, कैक्टस गार्डन के साथ ही वन परिक्षेत्र में ऑक्सीजन पार्क, बटरफ्लाए पार्क, फ्लावर पार्क, किड्स पार्क झूलों के साथ यहां भ्रमण के लिए एक स्थान में सब कुछ आपको मिलेगा। इसके साथ ही नाम राशि अनुसार राशि वन व नौ ग्रह के नाम से नक्षत्र वन भी तैयार किया जाएगा। जिसमें नाम व नक्षत्र के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे। स्टेच्यू पर दिखेगा मेडिसनल गार्डन पीएम नरेंद्र मोदी के सेंट्रल ग्रीन इंडिया मिशन योजना के तहत मेडिसनल गार्डन (औषध मानव) का ह्यूमन स्ट्रेक्चर खड़ा किया जाएगा। इस स्ट्रेक्टर पर मेडिसीन लगाई जाएगी। शरीर से जुड़ी बीमारी के लिए कौन सी दवा जरुरी है वह इस मेडिसीन ह्यूमन स्ट्रेक्चर के माध्यम से पता चलेगा। यह भी होगा     आयुर्वेदिक त्रिफला वन के साथ टीग सागवान (सागौन) वन भी बनेगा। इसमें सेल्फी पाइंट बनाया जाएगा। 40 लाख का प्रोजेक्ट, एक साल में होगा तैयार डीएफओ नरेश कुमार दोहरे ने बताया कैक्टस गार्डन समेत अन्य सुविधाओं को विकसीत करने के लिए केंद्र सरकार से राशि दी जाएगी। पूरा प्रोजेक्ट 40 लाख रुपए का है। पहले फेस में वन विभाग को 27.50 लाख राशि मिल चुकी है। हमने काम भी शुरू कर दिया है। इन जगहों से लाएंगे पौधे कैक्टस गार्डन के लिए गुजरात, भोपाल व इंदौर से कैक्टस के पौधे लाए जाएंगे। जिस जगह गार्डन बनेगा उस वन परिक्षेत्र में सैलाना के कैक्टस गार्डन से पौधे लाकर लगा रखे है। बस इस वन परिक्षेत्र को संवारने की जरूरत है। पौधों पर लगेंगे क्यूआर कोड कैक्टस गार्डन में लगाए जाने वालो पौधों की जानकारी के लिए तकनीकी का भी सहारा लिया जाएगा। प्रत्येक पौधों के आगे उनके नाम व प्रजाति के बारे में लिखा जाएगा। इसके साथ पौधों के आगे क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे। जिससे गार्डन में आने वालों को उस पौधों की जानकारी सरलता से मिल जाए। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पौधों की सारी जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी। डीएफओ नरेश कुमार दोहरे के अनुसार गार्डन के विकसित होने के बाद सैलाना और रतलाम क्षेत्र में पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह गार्डन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। साथ ही वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यधिक उपयोगी साबित होगा। सैलाना में पहले से है एक गार्डन सैलाना में एशिया का पहला कैक्टस गार्डन है। इस गार्डन को सैलाना के महाराजा ने अपनी निजी जगह पर सालों पहले लगाया था। छोटे से लेकर बड़े कैक्टस के पौधों कई प्रजातियों के यहां पर लगे हुए है। जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में रतलाम जिले के अलावा अन्य राज्यों से भी पर्यटक पहुंचते है। पर्यटन के रूप में जाना जाता है सैलाना रतलाम से सैलाना करीब 18 किमी दूर रतलाम-बांसवाड़ा मार्ग पर स्थित है। सैलाना पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहां पर पहाड़ियों के बीच शिवगढ़ मार्ग पर कल्याण केदारेश्वर तो बांसवाड़ा रोड पर भी पहाड़ों के अंदर भगवान भोलेनाथ विराजित है। बारिश व सावन माह में हजारों की संख्या में लोग इन दोनों स्थानों पर पहुंचते है। बारिश में बहते हुए झरने व चारों तरफ हरियाली आकर्षण का केंद्र रहती है। सैलाना का वन परिक्षेत्र भी रतलाम से जाते समय सैलाना में इंटर करते ही मुख्य रोड पर है। सैलाना की और पहचान बढ़ेगी सैलाना के पार्षद ईश्वर डिंडोर का कहना है कि कैक्टस का नया गार्डन बनने से सैलाना की और पहचान बढ़ेगी। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आएंगे। कमलेश राठौर ने बताया सैलाना में कैक्टस गार्डन बनने के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इससे यहां के लोगों के व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। 10 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉटनिकल गार्डन का विस्तार कैक्टस गार्डन सैलाना वन क्षेत्र के 10 हेक्टेयर एरिया में विकसित किया जा रहा है। इस बॉटनिकल गार्डन में 150 प्रकार के वृक्ष लगाए जाएंगे, जिनमें से कुछ दुर्लभ और विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियां भी शामिल होंगी। तकनीकी नवाचार के माध्यम से गार्डन में लगाए गए वृक्षों के बारे में जानकारी प्राप्त करना भी सरल बनाया गया है। हर वृक्ष पर एक क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करने पर उस वृक्ष की विस्तृत जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। कैक्टस गार्डन के विकास पर लगभग 50 … Read more

इंटेलिजेंस रिपोर्ट :बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में दाखिल होते हुए नक्सलियों ने माड़ा के जंगल को सेफ जोन बनाया

बालाघाट छत्तीसगढ़ से नक्सलियों को जड़ से उखाड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान की वजह से माओवादियों की कमर टूटती नजर आ रही है। नक्सलियों पर हमले की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कार्रवाई की वजह से नक्सली अब मध्य प्रदेश को अपना ठिकाना बना रहे हैं, जिसका खुलासा इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में हुआ है। अब इसे ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। इन तीन जिलों में नक्सली     इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी में नक्सलियों का नया कैडर तैयार हो रहा है। नक्सली दलम-2 के नाम से इसका विस्तार कर रहे हैं। इसे देखते हुए सीएम मोहन यादव ने केंद्र से सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व बल) की 2 बटालियन की मांग की है। बटालियनों को बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाएगा।     जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ बटालियन के साथ ही इन तीनों जिलों में 220 नई सड़कें बनाने की भी मांग की गई है। तीनों जिलों के नक्सल मूवमेंट वाले इलाकों में आरसीपी (रिगिड कंक्रीट पेवमेंट) से 220 नई सड़कें बनाई जाएंगी। गौरतलब है कि इससे पहले नक्सली कान्हा के रास्ते बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में प्रवेश करते रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि नक्सलियों ने माड़ा के जंगल को सेफ जोन क्यों बनाया है, इससे निपटने के लिए सुरक्षा बल क्या रणनीति बना रहे हैं? आइए आपको बताते हैं। बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश दरअसल, 4 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में 31 नक्सली मारे गए थे। इसके चलते छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। आपको बता दें कि जब भी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होती है तो वे अपने सुरक्षित ठिकाने की तलाश करते हैं ताकि वे सरकार की कार्रवाई से बच सकें। डिंडोरी जिले को क्यों चुनते हैं नक्सली? नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक एमपी के बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिले को नक्सली अपने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस संबंध में बालाघाट जोन के आईजी संजय कुमार का कहना है कि नक्सलियों ने साल 2015-16 में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) एरिया इसलिए बनाया था क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा से लेकर मनेंद्रगढ़ और कोरिया जिले तक फैला हुआ है। संजय कुमार की मानें तो महाराष्ट्र का गोंदिया, छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव और एमपी का बालाघाट (जीआरबी) नक्सलियों के एमसीसी एरिया का हिस्सा है, जिसके चलते नक्सली इसे चुनते हैं। केंद्र से मांग इसके अलावा नक्सलियों ने मंडला के कान्हा टाइगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ के भोरमदेव अभ्यारण्य को विकसित कर लिया है, जिसे केबी कहते हैं। गौरतलब है कि यह इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी की रिपोर्ट का हिस्सा है, जो पिछले दिनों केंद्र सरकार को दी गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर एमपी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हाल ही में हुई बैठक में सीआरपीएफ की दो बटालियन की मांग की है।

मध्‍य प्रदेश में अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी होगी तैयार, सस्ती दर पर मिलेगी जमीन, एक प्रतिशत से भी कम स्टांप शुल्क

भोपाल  शहरों को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 लागू की है। अन्य योजनाओं को मिलाकर इसमें काम होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी तैयार कर लागू करेगी। इस नीति के तहत मकान बनाने के लिए सस्ती दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। योजना में पंजीकृत आवासों के लिए एक प्रतिशत से कम स्टांप शुल्क लिया जाएगा। ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए निर्मित क्षेत्र में परियोजना के समग्र फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में शामिल नहीं किया जाएगा। 31 दिसंबर तक का है समय नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना को लागू करने के लिए 31 दिसंबर, 2024 से पहले प्रदेश को केंद्र सरकार को सहमति प्रेषित करनी होगी। साथ ही अन्य सुधार 30 जून, 2025 तक पूर्ण कर लागू करने होंगे। 12 नवंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बताया गया कि प्रदेश सरकार योजना पर सहमति भेज रही है। लक्ष्य यह रखा गया है कि पांच वर्ष में इस योजना के माध्यम से प्रदेश में दस लाख आवास निर्मित किए जाएं। जारी रहेगी ढाई लाख की सब्सिडी     स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा।     प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश वर्ष 2015 से वर्ष 2023 तक पहले या दूसरे स्थान पर रहता आया है। अभी तक इसमें साढ़े नौ लाख हितग्राहियों को लाभ मिल चुका है।     अब शहरों को झुग्गी मुक्त करने और आवास की आवश्यकता की पूर्ति के लिए तीन स्तर पर एक साथ काम होगा।     इसमें प्रधानमंत्री आवास शहरी के तहत पंजीकृत आवासों (60 वर्गमीटर तक) के लिए एक प्रतिशत या उससे भी कम स्टांप या पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा।     आवास निर्माण के लिए ऐसे हितग्राही जिनके पास भूमि नहीं है, उन्हें सस्ती दर पर पट्टे दिए जाएंगे। इन्हें मिलेगी योजना में प्राथमिकता     प्रधानमंत्री आवास योजना में उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास कहीं भी पक्का आवास नहीं है।     नौ लाख रुपये तक की वार्षिक आय और राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी आवास योजना में लाभ ले चुके व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होंगे।     कल्याणी (विधवा), दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग, सफाई कर्मी, पथ विक्रेता, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, निर्माण श्रमिक, मलिन बस्तियों में रहने वाले परिवारों को प्राथमिकता मिलेगी।     ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक हो और उनके पास स्वयं का भूखंड हो उन्हें मकान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से ढाई लाख रुपये की मदद की जाएगी।     यह राशि तीन किस्तों में देय होगी। इसी तरह सरकारी या निजी एजेंसी की परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 30 से 45 वर्ग मीटर का फ्लैट दिलाया जाएगा।     इसके लिए भी ढाई लाख रुपये तक की सहायता केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देगी।  

चीनियों ने जिनपिंग से कहा उन्‍हें सुरक्षा के लिए अब पाकिस्‍तानी सैनिकों पर भरोसा नहीं

इस्‍लामाबाद पाकिस्‍तान और चीन के बीच बलूचों के हमलों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। बलूच व‍िद्रोही चाइना पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) को बनाने में लगे चीनी इंजीनियरों पर लगातार खूनी हमले कर रहे हैं। यही नहीं चीनी बिजनसमैन को भी पाकिस्‍तान के पंजाब प्रांत के अंदर न‍िशाना बनाया जा रहा है। इससे उनके अंदर दहशत का माहौल है। चीनियों ने साफ तौर पर शी जिनपिंग की सरकार को बोल दिया है कि उन्‍हें सुरक्षा के लिए अब पाकिस्‍तानी सैनिकों पर भरोसा नहीं है। हम चीनी सैनिकों को प्राथमिकता देंगे। इन हमलों की वजह से कई चीनी बिजनसमैन पाकिस्‍तान छोड़ना चाहते हैं और उन्‍हें पाकिस्‍तान के अंदर अपना कोई भविष्‍य नहीं दिख रहा है। इससे राष्‍ट्रपति जिनपिंग अब चीनी सेना को तैनात करने को लेकर भारी दबाव में हैं। चीन अगर पाकिस्‍तान में सेना को तैनात करता है तो इसका पाकिस्‍तान और भारत पर क्‍या असर होगा? आइए समझते हैं चीन सरकार पर यह दबाव तब बढ़ गया है जब पिछले महीने दोनों चीनी इंजीनियरों की बलूचों के हमले में मौत हो गई। चीन ने सीपीईसी परियोजना पर अब तक 62 अरब डॉलर का निवेश किया है। सीपीईसी चीन के बीआरआई के सबसे बड़े प्राजेक्‍ट में से एक है। बीआरआई चीनी राष्‍ट्रपति का ड्रीम प्राजेक्‍ट है और सीपीईसी को इसका मुखौटा करार दिया जाता है। चीन के इस प्राजेक्‍ट का बलूच‍िस्‍तान में कड़ा विरोध हो रहा है और बलूचिस्‍तान लिबरेशन आर्मी ने चीनी लोगों को वापस जाने के लिए अल्‍टीमेटम दे रखा है। चीनियों की सुरक्षा में तैनात हैं 15 हजार पाक‍िस्‍तानी सैनिक चीनी निवेशकों को अब तक पाकिस्‍तानी सेना और चीन की निजी सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा मिली हुई है। हालांकि बाद में पाकिस्‍तान ने विदेशी सुरक्षा एजेंसियों पर प्रतिबंध लगा दिया। बीआरआई मामलों के विशेषज्ञ अलेसांद्रो अरदुइनो ने फाइनेंशियल टाइम्‍स से कहा कि मैं समझता हूं कि यह मुद्दा अब अहम मोड़ पर पहुंच चुका है और सुरक्षा मुहैया कराने के मुद्दे पर चीन पाकिस्‍तान से और ज्‍यादा डिमांड कर रहा है। पाकिस्‍तान में चीनी सुरक्षा एजेंसियां करेंगी, वह पूरी दुनिया के लिए एक लिटमस टेस्‍ट होगा। इससे पता चलेगा कि चीन अपने नागरिकों की पूरी दुनिया में कैसे सुरक्षा करेगा। पाकिस्‍तानी सेना ने चीनियों की सुरक्षा के लिए करीब 15 हजार जवानों को तैनात किया है, इसके अलावा एक नौसैनिक यूनिट को ग्‍वादर में रखा है जहां चीन नौसैनिक अड्डा बना रहा है। इन सैनिकों की तैनाती का पूरा खर्च चीन के रक्षा मंत्रालय को वहन करना पड़ रहा है। बलूच विद्रोहियों ने ग्‍वादर पोर्ट को भी निशाना बनाने का प्रयास किया था जहां बड़ी संख्‍या में चीनी नागरिक काम करते हैं। बलूच 26 मार्च को पाकिस्‍तानी वायुसेना के पीएनएस सिद्दीक एयरबेस को भी निशाना बना चुके हैं। इन हमलों को रोकने में पाकिस्‍तानी सेना को काफी नुकसान पहुंचा है। पाकिस्‍तानी सेना की दुनिया में उड़ेगी खिल्‍ली चीनियों में खौफ की वजह एक यह है कि हाल ही में पाकिस्‍तानी सुरक्षा गार्ड ने दो चीनी वर्कर्स को गोली मार दी थी जिसमें वे बुरी तरह से घायल हो गए थे। इन सब वजहों से चीन पाकिस्‍तान में अपने सुरक्षाकर्मी तैनात करना चाहता है। चीन के सैनिक तैनात होना पाकिस्‍तान की संप्रभुता का खुला उल्‍लंघन होगा और दुनियाभर में पाकिस्‍तानी सेना की जो खिल्‍ली उड़ेगी, वह अलग से होगी। इसी वजह से पाकिस्‍तानी सेना चाह रही है कि चीन जासूसी और निगरानी करने में मदद करे। वहीं चीन के आर्थिक गुलाम बन चुके पाकिस्‍तान में अगर चीनी सेना आती है तो इसका भारत पर भी असर होगा। चीन की सेना पाकिस्‍तान पहुंची तो भारत को खतरा! यह वजह है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है। चीन अगर पाकिस्‍तान में अपनी सेना को तैनात करता है तो वे पीओके में भी आएंगे। पीओके से ही होकर सीपीईसी परियोजना जाती है। भारत इसका कड़ा विरोध करता रहा है। भारत ने साफ कहा है कि पीओके उसका हिस्‍सा है और मानता है कि अगर कोई भी विदेशी मौजूदगी नई दिल्‍ली की संप्रभुता का उल्‍लंघन है। भारत ने बार-बार पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल और बांग्‍लादेश को चेतावनी दी है कि वे बीआरआई से पैदा होने वाले खतरे से सजग रहें। बीआरआई आज दुनिया में कर्ज के जाल के रूप में देखा जा रहा है। वहीं अगर चीनी सेना पीओके में मौजूदगी बनाने में कामयाब हो जाती है तो इससे भारत के उत्‍तरी सीमा पर उसका प्रभाव काफी बढ़ जाएगा। इससे दोनों देशों से एक साथ निपटने की भारत की रणनीति और जटिल हो जाएगी।

सरकार ने इंदौर में नए ESIC मेडिकल कॉलेज बनने की दी मंजूरी, साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत आएगी

इंदौर इंदौर में एक और नया मेडिकल काॅलेज खुलने जा रहा है। इसका निर्माण कर्मचारी राज्य बीमा निगम करेगा। इसके सहमति सरकार से मिल चुकी है। नंदानगर स्थित ईएसआईसी परिसर में काॅलेज बिल्डिंग का निर्माण अगले साल शुरू होगा। यह बिल्डिंग 40 साल पहले अस्पताल के लिए बनाई बिल्डिंग को तोड़कर बनाया जाएगा। बीमा निगम के अफसरों के अनुसार यह मेडिकल काॅलेज जबलपुर मेडिकल विश्व विद्यालय से संबद्ध रहेगा। भविष्य में परिसर में नर्सिंग काॅलेज भी खुल सकता है। इंदौर में नया मेडिकल काॅलेज खोलने की योजना दस साल पहले बनी थी, लेकिन तब मेडिकल काॅलेज के लिए 50 एकड़ से ज्यादा की जमीन का नियम था और काॅलेज के छात्रों को प्रैक्टिस के लिए बड़े और आधुनिक अस्पताल की जरुरत भी होती है। इस कारण मामला ठंडे बस्ते में रहा। अब ईएसआईसी ने 500 बेड का अस्पताल बना लिया है। इसका निर्माण 350 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। हाल ही में इसका लोकार्पण वर्चुअली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस अस्पताल में तीन आपरेशन थिएटर, एक्सरे रुम, एमआरआई रुम, सोनाग्राफी, पैथलाॅजी सहित अन्य सुविधाएं भी है। इंदौर संभाग से यहां बीमा निगम से जुड़े कर्मचारी इलाज के लिए अाते है। इस कारण मेडिकल छात्रों को प्रैक्टिस में भी आसानी होगी। अगले माह से टूटने लगेगी अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग बीमा अस्पताल के नाम से पहचानी जाने वाली 40 साल पुरानी बिल्डिंग को तोड़ने का काम अगले माह से शुरू होगा। इस बिल्डिंग का मुआयना केंद्र से आए अफसर कर चुके है। बिल्डिंग के कई हिस्से खतरनाक भी हो चुके है। तोड़ने में चार से छह माह का समय लगेगा। इसके बाद मेडिकल काॅलेज की नई बिल्डिंग का काम शुरू होगा। इस काॅलेज में विभाग यह भी कोशिश कर रहा है कि बीमित कर्मचारियों के बच्चों के लिए भी चयन का कुछ कोटा रहे। इंदौर में अभी एक सरकारी और दो निजी मेडिकल काॅलेज है। अब चौथा मेडिकल काॅलेज खुलेगा। 350 करोड़ रुपये की लागत पुराना बीमा अस्पताल 40 साल पहले बना था और अब उसकी स्थिति खतरनाक हो गई है। केंद्र से आए अधिकारियों ने इसका मुआयना किया और इसे तोड़ने का फैसला लिया। इसे तोड़ने में चार से छह महीने का समय लगेगा, जिसके बाद नई मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग का निर्माण शुरू होगा। यह मेडिकल कॉलेज जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय से संबद्ध रहेगा। इसके साथ ही भविष्य में परिसर में नर्सिंग कॉलेज खोलने की भी योजना है। वर्तमान में ईएसआईसी ने 500 बेड का आधुनिक अस्पताल बनवाया है, जिसकी लागत 350 करोड़ रुपये आई है। इस अस्पताल का लोकार्पण हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली किया था। अस्पताल में तीन ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, एमआरआई, सोनोग्राफी और पैथोलॉजी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मेडिकल कॉलेज में छात्रों को प्रैक्टिस के लिए इस अस्पताल का लाभ मिलेगा। साथ ही बीमा निगम यह प्रयास कर रहा है कि बीमित कर्मचारियों के बच्चों के लिए चयन में कुछ कोटा तय किया जाए। खुलेगा चौथा मेडिकल कॉलेज इंदौर में पहले से एक सरकारी और दो निजी मेडिकल कॉलेज हैं। यह चौथा मेडिकल कॉलेज होगा, जो शहर की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। ईएसआईसी देशभर में दस नए मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें इंदौर के अलावा बिहार, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले साल इन कॉलेजों की घोषणा की थी। देशभर में खुलेंगे दस नए मेडिकल काॅलेज देश में दस नए ईएआईसी अस्पताल कर्मचारी राज्य बीमा निगम खोलेगा। इनमें इंदौर शहर भी शामिल है। श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले साल दस काॅलेजों के निर्माण की घोषणा की थी। बीमा निगम के काॅलेज बिहार, दिल्ली, हरियाणा,कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और बंगाल में है।

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