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सिर्फ बालकनी से नहीं,दिल्ली का प्रदूषण अंतरिक्ष से भी दिखाई दे रहा है, चौंका देंगी तस्वीरें

नई दिल्ली उत्तर भारत में इन दिनों प्रदूषण का कहर जारी है। खराब आबोहवा के बीच लोगों का सांस लेना भी दूभर हो रहा है। दिल्ली के कई इलाकों में विजिबिलिटी बेहद खराब रही जहां कोहरे और धुंध की वजह से स्थिति असामान्य बनी हुई है। दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद जैसे प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के बताए गए सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा है। इस बीच अब सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि दिल्ली का प्रदूषण अंतरिक्ष से भी दिखाई दे रहा है। रेडिट पर शेयर किए गए एक तस्वीर में भारत के नक्शा दिखाई दे रहा है। इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा है, “उत्तर भारत में प्रदूषण अंतरिक्ष से साफ दिखाई दे रहा है। सिर्फ एक महीने पहले ऐसा नहीं था।” नक्शे में देखा जा सकता है कि एक महीने पहले जहां स्थिति सामान्य थी, वहां अब सफेद चादर की परत दिखाई दे रही है। इस पोस्ट पर लोग तरह तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह सच में पागलपन है।” वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, “यह इतना भयानक है कि मेरा एयर प्यूरीफायर बिना रुके चल रहा है लेकिन यह अभी भी लाल बत्ती दिखाता है। मैंने दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दी हैं लेकिन यह ठीक नहीं हो रहा।” कुछ लोग इस पर मजेदार कमेंट भी करते दिखे। एक यूजर ने कहा, “अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमें भारत में ज्यादा जनसंख्या के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। मुझे लगता है कि औसत जीवन आयु दर 1900 की स्थिति में पहुंच जाएगी।” गौरतलब है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार दिल्ली के कई इलाकों में AQI 500 के आंकड़े को भी पार कर चुका है। इस स्केल पर 0 से 50 के बीच AQI को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’, 401 से 450 को ‘गंभीर’ और 450 से ऊपर को ‘गंभीर से अधिक’ माना जाता है।

ऑल्ट एनवायर्नमेंटल फिल्म फेस्टिवल के ब्रांड एंबेसडर बनें जैकी श्रॉफ

मुंबई, बॉलीवुड के माचो हीरो जैकी श्रॉफ को ऑल लिविंग थिंग्स एनवायर्नमेंटल फिल्म फेस्टिवल (एएलटी ईएफएफ) का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है। जैकी श्रॉफ हमेशा से ही पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए लोगों को जागरूक करते आये है और अब उन्हें 22 नवंबर से 08 दिसंबर, 2024 तक आयोजित होने वाले ऑल लिविंग थिंग्स एनवायर्नमेंटल फिल्म फेस्टिवल (एएलटी ईएफएफ) का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है।ऑल्ट इएफएफ का लक्ष्य सिनेमा की इमोटीव पावर के माध्यम से उन्हें क्लाइमेटअवेयरनेस बढ़ावा देना है, और बेहतर कल प्राप्त करने की दिशा में जैकी श्रॉफ का योगदान फिल्म महोत्सव के मुख्य उद्देश्य के साथ सही बैठता है, जो उन्हें ब्रांड एंबेसडर के लिए एकदम उपयुक्त बनाता है। जैकी श्रॉफ ने कहा,मुझे बेहद ख़ुशी है कि एएलटीईएफएफ के ब्रांड एंबेसडर के रूप में मुझे चुना गया है, खासकर ट्रांस्फॉर्मटिवे क्लाइमेट एक्शन पर काम करने के लिए बेहद उत्साहित हूँ। मेरा मानना है कि फिल्में लोगों को एक साथ लाने वाले दमदार तरीकों में से एक है , और अगली पीढ़ी के बेहतर कल के लिए प्रेरित करने के लिए हमारी अपनी फिल्मों से बेहतर क्या हो सकता है, एएलटी ईएफएफ एक फिल्म महोत्सव से कहीं अधिक है, यह हम सभी का एक बड़ा सहयोग है जिसके लिए हम काम कर रहे हैं एक हरा-भरा कल, और मैं उत्साह और एकता देखने के लिए बहुत उत्सुक हूँ! जैकी श्रॉफ को फिल्म ‘सिंघम अगेन’ में अपने नेगेटिव किरदार उमर हफ़ीज़ को जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इस बीच, वह अपनी आगामी रिलीज ‘बेबी जॉन’ के लिए तैयारी कर रहे हैं, जिसमें वह बब्बर शेर की भूमिका निभाते नजर आएंगे। इस फिल्म में जैकी, वरुण धवन, कीर्ति सुरेश और वामिका गब्बी सहित अन्य लोगों के साथ स्क्रीन स्पेस साझा करते हुए दिखाई देंगे। ‘बेबी जॉन’ 25 दिसंबर 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

एक व्यक्ति की मौत और चार घायल, राजस्थान-सिरोही दो ऑटो की आमने-सामने से भिड़ंत

सिरोही. आबूरोड शहर के मानपुर मार्ग पर पांच बंगला के समीप बीती रात दो ऑटो की आमने सामने की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि इसमें चार अन्य लोग घायल हो गए। सूचना मिलने पर आबूरोड शहर पुलिस थानाधिकारी बंशीलाल एवं यातायात पुलिस के हेड कांस्टेबल किशोरीलाल अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे तथा क्षतिग्रस्त ऑटो को एक साइड में खड़े करवाकर घायलों को 108 एंबुलेंस से आकराभट्टा सरकारी अस्पताल पहुंचाया। यहां आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को मोर्चरी में रखवाकर घायलों का इलाज किया गया। मंगलवार को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। आबूरोड शहर के मानपुर मार्ग पर हुआ यह सड़क हादसा इतना भीषण था कि इसमें दोनों वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। ऑटो में सवार लोगों की चिल्लाने और ऑटो के भिड़ने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे। लोगों ने ऑटो में फंसे लोगों को बाहर निकालकर शहर पुलिस एवं 108 एंबुलेस को दुर्घटना की जानकारी दी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां ट्रॉमा सेंटर के पीछे, तलेटी, पीएस आबूरोड सदर निवासी मुकेश कुमार पुत्र देवीलाल वाल्मीकि को मृत घोषित कर दिया गया। मंगलवार को पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अधिकांश ऑटो चालक खुलेआम उड़ा रहे हैं यातायात नियमों की धज्जियां शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेजगति एवं लापरवाही पूर्वक ऑटो चलाने वाले चालकों की संख्या दिनोदिन बढ़ रही है। ये लोग न केवल घनी आबादी क्षेत्रों में तेजगति से ऑटो चलाते हैं, सवारियां लेने एवं उतारने के लिए बिना सुरक्षा का ध्यान रखे जहां मर्जी आए ऑटो को रोक देते हैं। ऐसा नहीं है यातायात पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन वे भी इन सबको नजरअंदाज कर रहे हैं। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।

जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर सिलवानी थाना क्षेत्र में ट्रैक्टर पलटने से दो लोगों की मौत

रायसेन (मध्यप्रदेश) मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में ट्रैक्टर पलटने से एक नाबालिग लड़के और एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर सिलवानी थाना क्षेत्र के पडरिया गांव में सोमवार रात को हुई। पुलिस उपमंडल अधिकारी अनिल मौर्य ने बताया कि वाहन में ईंधन खत्म हो जाने के बाद चालक ने ट्रैक्टर को खेत में खड़ा कर दिया। बाद में, 19 वर्षीय एक मजदूर ट्रैक्टर मालिक के घर से डीजल लेकर आया और वाहन चलाने लगा, लेकिन वाहन नियंत्रण से बाहर हो गया। उन्होंने बताया कि थोड़ी दूर जाने के बाद ट्रैक्टर खेत के पास एक नाले में पलट गया, जिससे दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान नितेश (19) और अंतराम (15) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।  

भोपाल में प्रदेश का पहला पुलिस अस्पताल बनकर तैयार, जानिए क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रदेश का पहला राज्य स्तरीय पुलिस अस्पताल बनकर तैयार हो गया है। इससे एमपी पुलिस और उनके परिजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। 50 बेड का ये अस्पताल(Police Hospital) लगभग 12 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ है। जल्द ही सीएम मोहन इसका उद्घाटन कर सकते है। भोपाल के भदभदा चौराहे पर बने पुलिस अस्पताल(Police Hospital) में पीडियाट्रिक, गायनिक, डेंटल, आई जैसे कई विभाग होंगे। फिलहाल ओपीडी के साथ इस हॉस्पिटल की शुरुआत की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, अस्पताल बनने से पहले तक यहां पर पुलिस बटालियन में पुलिस डिस्पेंसरी हुआ करती थी। ऐसी सुविधाएं मिलेंगी बता दें कि, फर्स्ट फ्लोर पर 50 बेड के इस अस्पताल में दो मेल और एक फीमेल वार्ड बनाया गया है। इसके साथ ही बच्चों के इलाज के लिए भी एक वार्ड बनाया गया है, जिसमे 5 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके आलावा महिला वार्ड, ओटी, हाई डिपेंडेंसी यूनिट और रिकवरी रूम की भी व्यवस्था की गयी है। इस अस्पताल का हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, जो 8068700128 है। मरीजों के लिए 2 मेल और एक फीमेल वार्ड 50 बेड के इस अस्पताल में 2 मेल (5-5 बेड) व 1 फीमेल वॉर्ड (5 बेड) का बनाया है। इसके अलावा बच्चा वार्ड में भी पांच बेड रखे गए हैं। वहीं, अन्य बेड महिला वार्ड, ओटी, हाई डिपेंडेंसी यूनिट और रिकवरी रूम में लगाए गए हैं। अस्पताल अधिकारियों की माने तो पुलिस और उनके परिवार के अलावा आम लोग यहां इलाज करवा सकेंगे या नहीं, यह जल्द ही फाइनल होगा। अस्पताल का संचालन 25वीं बटालियन करेगी। 2022 से पहले यहां एसटीएफ का कार्यालय हुआ करता था, जिसके बाद इसे अस्पताल बताया गया। इसका निर्माण पुलिस हाउसिंग द्वारा किया गया है। कई चरणों में होगी शुरुआत जानकारी के अनुसार, पुलिस अस्पताल(Police Hospital) में पहले चरण में ओपीडी, फार्मा, पैथालॉजी और एक्स-रे जैसी सुविधाएं मुहैया कराइ जाएगी। वहीँ दूसरे चरण में सोनोग्राफी और लेवर क्लिनिक जैसी कई अन्य सुविधाओं की शुरुआत होगी। बता दें कि, स्वास्थ्य विभाग की मदद से डॉक्टर और स्टाफ को लाया गया है। डॉ. रूही चंद्रा को अस्पताल का अधीक्षक नियुक्त किया गया है। पहले चरण की शुरुआत ओपीडी के साथ स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर यहां पर डॉक्टर्स एवं अन्य स्टाफ को लाया गया है। पहले चरण की बात की जाए तो ओपीडी, फार्मा, पैथालॉजी और एक्स-रे जैसी सुविधाएं दी जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में सोनोग्राफी ओर लेबर क्लिनिक के अलावा अन्य सुविधाएं शुरू की जाएगी। अस्पताल के लिए कुल 12 पद सेंशन हुए हैं, जिसमें से दो डॉक्टर मेडिकल ऑफिसर एसके गुप्ता और डेंटल सर्जन डॉक्टर सुरैश माहौर शामिल हैं। अस्पताल की अधीक्षक डॉ. रूही चंद्रा रहेंगी। 12.51 करोड़ की लागत से तैयार हुआ अस्पताल यह अस्पताल कुल 12.51 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। इसमें भवन निर्माण और फर्नीचर की लागत 10.41 करोड़ रही, वहीं मेडिकल उपकरण 2.1 करोड़ के खरीदे गए हैं। इस तरह से अस्पताल की कुल लागत 12.51 करोड़ है। यह भी देखें     अस्पताल में भर्ती के लिए दो मेल वॉर्ड में कुल 10 बेड लगाए गए हैं।     महिला और बच्चा वार्ड में कुल 10 बेड हैं।     हाई डिपेंडेंसी यूनिट और रिकवरी रूम में 5-5 बेड लगाए गए हैं।     ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी और ओटी और लेबर वार्ड बनाया गया है।     फर्स्ट फ्लोर पर मेल फीमेल और बच्चा वार्ड बनाया गया है।     अस्पताल का हेल्पलाइन नंबर 8068700128 है।

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री पर भी निशाना साधा और कहा कि वे उनके खिलाफ बेवजह की बयानबाजी ना करें: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

देहरादून स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर दिए बयान के बाद स्वामी रामदेव ने कहा था कि वे शंकराचार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वामी रामदेव को नोटिस भेजेंगे। क्योंकि उन्होंने आरोप तो लगा दिए, लेकिन सिद्ध नहीं कर पा रहे। उन्होंने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री पर भी निशाना साधा और कहा कि वे उनके खिलाफ बेवजह की बयानबाजी ना करें। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड में चारधाम के कपाट भले ही सर्दियों में बंद हो जाते हैं, लेकिन दूसरे स्थानों पर शीतकालीन पूजा जारी रहती है। ऐसे में श्रद्धालु शीतकाल में भी भगवान के दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए सरकार को शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम पिछले साल से यात्रा अपने स्तर पर शुरू कर चुके हैं। इस बार भी 16 दिसंबर से शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू होगी। देहरादून के वसंत विहार में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जल्द ही प्रदेश में धार्मिक आस्था के 108 स्थान चिह्नित कर उनकी यात्रा भी शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग चारधाम यात्रा में सीमित लोगों को आने देने की बात कहते हैं, वे गलत हैं। जितने ज्यादा से ज्यादा लोग यात्रा पर आएंगे, उतना सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार होगा। राज्य के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। केदारनाथ में उपचुनाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि केदारनाथ मन की शांति के लिए है, न कि चुनावी हार-जीत के लिए। ऐसे में चुनाव से इसे ना जोड़ा जाए। जो गाय को माता का दर्जा दिलाएगा उसे वोट करेंइससे पहले अपने प्रवचन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो गाय को माता का दर्जा दिलाएगा, उसे ही वोट करें। उन्होंने लोगों से चुनाव में जरूर मतदान की भी अपील की। पत्रकारों ने सवाल किया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री लव जेहाद और लैंड जेहाद से देवभूमि की छवि खराब होने की बात कह रहे हैं। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि कानून व्यवस्था और पुलिस मुख्यमंत्री के हाथ में है। वे ये ना कहें कि लव जेहाद और लैंड जेहाद हो रहा है, अगर हो रहा है तो उसे रोकें। वीआईपी कल्चर को बताया गलत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस देश में हर जगह वीआईपी कल्चर है। कम से कम भगवान के दर पर तो सभी सनातनी एक बराबर हों। चारधाम में वीआईपी दर्शन की परीपाटी खत्म होनी चाहिए। ये पूरी तरह से गलत है। भगवान के दर्शन सभी का समान अधिकार है।

एक नाबालिग लड़की का अपहरण और उससे बलात्कार करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दी: इलाहाबाद हाई कोर्ट

प्रयागराज (उप्र) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण और उससे बलात्कार करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी है। व्यक्ति दूसरे समुदाय से है और उसके खिलाफ हिंदुवादी संगठन ‘बजरंग दल’ के एक सदस्य ने नाबालिग का अपहरण कर उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपी जावेद आलम को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति समीर जैन ने कहा कि लड़की के बयान के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज कराने के समय उसकी उम्र 17 वर्ष से अधिक थी और वह खुद आरोपी के साथ गई थी तथा और उसने अपनी इच्छा से आरोपी के साथ शादी की। सुनवाई के दौरान, लड़की की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है तो लड़की को कोई आपत्ति नहीं है। पूछताछ के दौरान लड़की ने कहा कि आरोपी याचिकाकर्ता उसका पति है और उसने अपनी इच्छा से उससे शादी की है। ट्रेन में यात्रा के दौरान लड़की का आलम से विवाद हो गया जिसके बाद बजरंग दल के एक सदस्य ने आलम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसने 10वीं कक्षा की छात्रा का अपहरण कर लिया है। शिकायत के अनुसार आलम ने लड़की का धर्म परिवर्तन कराया। मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करने के वास्ते अपहरण), 506 (आपराधिक धमकी), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।  

नकारात्मक लोगों से घिरे होने के बावजूद अपनी सोच और जिंदगी को रखें सकारात्मक

शनल साइंस फाउंडेशन के मुताबिक दिन भर में हमारे मन में जितने विचार आते हैं, उसमें से 80 प्रतिशत नकारात्मक होते हैं। इतनी नकारात्मकताओं के बीच भी हम अपनी सकरात्मक सोच के बल पर जिंदगी के अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर ही लेते हैं। वैसे भी कहते हैं कि अच्छी सोच जीवन में सकारात्मकता को बढ़ाती है, इसलिए हमेशा बेहतर संभावनाओं के बारे में ही सोचना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि हमारी सोच पर हमारी संगत का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में हमेशा अच्छे और सकारात्मक विचारों वाले लोगों के साथ ही रहना चाहिए। असल में हमारे आस-पास हर विचारधारा के लोग होते हैं। कुछ लोग जीवन के प्रति इतना नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं कि उन्हें दुनिया में सिवाय बुराई और कमियों के कुछ नजर ही नहीं आता है। ऐसे लोग हमेशा नाराज और शिकायत करते रहते हैं। इनके साथ समय बिताने का अर्थ अपनी ऊर्जा व्यर्थ करना होता है। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग भी होते हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी कुछ अच्छा तलाश लेते हैं। ऐसे लोग हमेशा आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। हालांकि आपको हमेशा सिर्फ अच्छा सोचने वाले लोग ही मिलें, यह तो संभव नहीं है। पर, दूसरों की नकारात्मकता से आप खुद को जरूर बचा सकती हैं: सीमाएं तय करना है जरूरी अकसर महिलाओं के ऊपर परिवार और समाज की अपेक्षाओं का इतना भारी दबाव होता है कि वह चाह कर भी खुद को व्यक्त नहीं कर पाती हैं। कभी परिवार की खुशी तो कभी समाज में मर्यादा बनाए रखने का दबाव उन्हें वह सब बर्दाश्त करने को भी मजबूर कर देता है, जो वह नहीं करना चाहती हैं। इससे ना केवल उनकी मानसिक शांति भंग होती है बल्कि जीवन के प्रति उत्साह भी खत्म होने लगता है। इसलिए अपनी सीमाएं निर्धारित करना बहुत जरूरी है। यदि कोई दोस्त या रिश्तेदार हमेशा उलाहना देने वाली या दुख भरी बातें ही करता है, तो उनसे मिलना-जुलना सीमित ही रखें। याद रखिए, हम किसी से बेहतर और ऊर्जावान महसूस करने के लिए मिलते हैं। लेकिन सामने वाला व्यक्ति यदि हर समय ही नकारात्मक बातें करे, तो उससे किनारा कर लेने में ही भलाई है। बनें संवेदनशील अपनी मानसिक शांति बनाए रखने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप दूसरों की समस्याओं को लेकर असंवेदनशील बन जाएं। कभी-कभी सामने वाला वास्तव में बहुत कठिन हालातों से गुजर रहा होता है और किसी सहारे की तलाश में होता है। इसलिए संवेदनशील बनिए, ताकि संकट में पड़े किसी व्यक्ति से असभ्य व्यवहार करने के बजाय आप उसकी परेशानी को समझ सकें। आपका सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार आपकी मानसिक शांति बरकरार रखते हुए सामने वाले के लिए भी सहारे का काम करेगा। संजोएं अपनी ऊर्जा मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिए समाज से अलग-थलग होकर रहना मुमकिन नहीं है। परिवार से लेकर जानकारों तक में कोई ना कोई ऐसा जरूर होता है, जिससे आपके विचार नहीं मिलते हैं। यदि आपका भी कोई ऐसा जानकार है जो हमेशा नकारात्मक बातें करता है, लेकिन आप उससे संबंध खत्म नहीं कर सकतीं, तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों से पूरी तरह नाता तोड़ने की बजाय मिलना कम कर दें। नकारात्मक लोग आपकी ऊर्जा को अपने विचारों से हानि पहुंचा सकते हैं। ऐसे लोगों से मिलने के बाद बेहद थका हुआ और निस्तेज महसूस होता है। इससे बचने के लिए जहां तक संभव हो सिर्फ किसी पारिवारिक या सामाजिक समारोह में ही ऐसे लोगों से मिलें। सुनने की आदत डालें एक अच्छा श्रोता संवेदनशील होते हुए भी अपनी मानसिक शांति बनाए रख सकता है। जब भी किसी से बात करें तो बिना बीच में बोले पूरी तसल्ली से सामने वाले की बात सुनें। लेकिन ऐसा करते समय स्वयं भी सचेत रहें क्योंकि आपको सामने वाले व्यक्ति की बात तो सुननी है, लेकिन उसके प्रभाव में नहीं आना है। बातचीत के दौरान अचानक अपनी प्रतिक्रिया देना सामने वाले को और ज्यादा परेशान कर सकता है। जबकि सिर हिलाना, आंखों में देखकर बात करना और सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल सामने वाले व्यक्ति को विश्वास दिलाता है कि आप उसकी परेशानी समझ रही हैं। याद रखिए, आपके व्यवहार में ठहराव ही आपकी मानसिक शांति को बनाए रखने की चाबी है। तनाव से दूर रहने और मानसिक सुकून के लिए कुछ ऐसा करें, जिससे आपको खुशी मिले। बागवानी करना, सैर पर जाना, अपनी पसंद का संगीत सुनना, डांस करना डायरी लिखना या कोई किताब पढ़ने जैसा आप कुछ भी ऐसा कर सकती हैं, जिससे आपको खुशी का अनुभव हो। अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्राणायाम करना एक ऐसा प्रभावशाली तरीका है जो विपरीत परिस्थितियों में भी आपके मन को शांत रखेगा।

दिग्गज अभिनेता सिद्दीकी को पासपोर्ट जमा कराना होगा और जांच अधिकारी के साथ सहयोग करना होगा: उच्चतम न्यायालय

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी एवं मलयालम अभिनेता सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को मंजूर कर ली। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि दिग्गज अभिनेता को अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा और जांच अधिकारी के साथ सहयोग करना होगा। शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि 2016 में हुई कथित घटना के आठ साल बाद अगस्त में इस मामले में शिकायत दर्ज की गई। न्यायालय ने सिद्दीकी को 30 सितंबर को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था। केरल पुलिस ने जांच में सिद्दीकी द्वारा सहयोग नहीं किए जाने का आरोप लगाया है। केरल पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि अभिनेता जांच में बाधा डाल रहे हैं और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अकाउंट डिलीट करने के अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी नष्ट कर दिया है। केरल उच्च न्यायालय ने 24 सितंबर को सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि सिद्दीकी पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अपराध की उचित जांच के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ अपरिहार्य है।  

पीएचडी के बाद आपके पास क्या है करियर ऑप्शन्स

आमतौर पर यह एक गलत धारणा है कि यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी एक ट्रेनिंग आधारित स्टडी मोड्यूल है. हां! यह कुछ हद तक सही विचार है लेकिन, पीएचडी का क्षेत्र एकेडमिक क्षेत्र से कहीं आगे तक व्याप्त है. जो लोग पीएचडी की डिग्री प्राप्त करते हैं, उनकी तुलना में कम लोग एकेडमिक क्षेत्र ज्वाइन करते हैं. भारत सहित अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों में रोज़गार का परिदृश्य बड़ी तेज़ी से बदल रहा है. इस वजह से पीएचडी स्टूडेंट्स भी एकेडमिक क्षेत्र ज्वाइन करने के अपने उद्देश्य के बारे में अच्छी तरह सोचने पर मजबूर हो गये हैं. आजकल, पीएचडी ग्रेजुएट्स राइटिंग, रिसर्च, इंवेस्टमेंट बैंकिंग, लॉ और अन्य कई संबद्ध क्षेत्रों में विभिन्न विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. अपनी डिग्री पर केवल “डॉक्टर” की रबड़ लगी होने पर गर्व महसूस करने से आपको कोई बढ़िया जॉब नहीं मिलेगी. यह बहुत अच्छी बात है कि आप एक पीएचडी ग्रेजुएट हैं. हालांकि, पीएचडी सिर्फ डिग्री की तुलना में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ट्रेनिंग और नॉलेज पर आधारित रिसर्च एक्टिविटीज को ज्यादा महत्व दिया जाता है. पीएचडी में रिसर्च इश्यूज की बेहतरीन समझ के साथ ही गहन रिसर्च कार्य और अति विशेष एनालिटिकल और ऑब्जरवेशनल स्किल्स के साथ महत्वपूर्ण समस्याओं को सॉल्व करने की काबिलियत शामिल है. किसी पीएचडी ग्रेजुएट को कई घंटे लगातार काम करना, जटिल समस्याओं को एनालाइज और सॉल्व करना और शांति से हरेक परिस्थिति को हैंडल करना जरुर सीखना चाहिए. ये गुण न केवल किसी एकेडेमिक एक्सपर्ट के लिए बहुत जरुरी हैं बल्कि, रिसर्च, फाइनेंस और पब्लिक सर्विस जैसे अन्य कार्यक्षेत्रों के लिए भी अनिवार्य हैं. आमतौर पर, पीएचडी करने के बाद सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जॉब्स हैं-यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, इंडस्ट्रियल आर एंड डी लैब प्रोफेशनल्स और स्टार्ट-अप्स मेंटर्स. इंडस्ट्रियल रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन्स में समर्पित पीएचडी ग्रुप्स होते हैं जो रिसर्च एक्टिविटीज और नये प्रोडक्ट्स की डिजाइनिंग का कार्य करने के साथ ही महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों में शामिल होते हैं. डेवलपमेंट सेंटर्स की तुलना में, इंडस्ट्रियल आर एंड डी लेब्स की एवरेज सैलरीज काफी अच्छी होती हैं. इससे साफ पता चलता है कि 5 वर्ष के अनुभव सहित एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को इंडस्ट्रियल आर एंड डी लेब्स में अभी जॉब ज्वाइन करने वाले किसी फ्रेश पीएचडी ग्रेजुएट की तुलना में कम सैलरी मिलती है. कुछ मामलों में, डेवलपमेंट सेंटर्स विभिन्न कार्यों के लिए पीएचडी ग्रेजुएट्स को हायर करते हैं लेकिन, उनकी सैलरी विशेष आर एंड डी की तुलना में समान या कुछ अधिक होती है. किसी रिसर्च लैब या डेवलपमेंट सेंटर ज्वाइन करने वाले पीएचडी ग्रेजुएट का सैलरी स्ट्रक्चर और डेजिग्नेशन हमेशा किसी अन्य ग्रेजुएट से ज्यादा हाई होते हैं फिर भले ही अन्य ग्रेजुएट्स के पास काफी अच्छा कार्य अनुभव हो. स्टार्ट-अप्स की शुरुआत ने पूरे पीएचडी परिवेश को बदल दिया है. कुछ समय पहले तक, पीएचडी का कार्यक्षेत्र सिर्फ एकेडमिक क्षेत्र तक ही सीमित था. यद्यपि आजकल, एकेडमिक क्षेत्र और स्टार्ट-अप्स के मिश्रण से पीएचडी ग्रेजुएट्स को कई नये ऑप्शन्स मिल गये हैं. अब, क्योंकि स्टार्ट-अप्स इनोवेशन और इम्प्रोवाइजेशन का स्टोरहाउस बन चुके हैं तो पीएचडी ग्रेजुएट्स किसी नये और उभरते हुए संगठन में काम करना चाहते हैं ताकि अपनी एक्सेप्शनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट क्षमताओं के माध्यम से नये प्रोडक्ट्स को डिज़ाइन करने के लिए वे अपने नॉलेज बेस्ड स्किल्स का उपयोग कर सकें. आजकल, पीएचडी ग्रेजुएट्स स्टार-अप परिवेश में काम तलाश रहे हैं ताकि उन्हें अच्छा कार्य-अनुभव प्राप्त हो जाए और फिर, वे एकेडमिक क्षेत्र ज्वाइन कर लें, जहां पर वे अपने स्किल्स और विशेषज्ञता का प्रोडक्टिव तरीके से उपयोग कर सकें. एकेडमिक क्षेत्र पीएचडी ग्रेजुएट्स की पहली पसंद बन चूका हैं क्योंकि यहां उन्हें काम करने की पूरी आजादी के साथ बहुत बढ़िया सैलरी पैकेज मिलते हैं. अधिकांश मामलों में, एकेडमिक क्षेत्र की जॉब्स के तहत कई अन्य लाभ जैसे फ्री एकोमोडेशन भी शामिल होते हैं. पीएचडी ग्रेजुएट्स के लिए इस बात का भी चांस होता है कि वे किसी अन्य देश में काम करें. कुल मिलाकर, पीएचडी कैंडिडेट्स को हायर करते समय अधिकांश संगठन अक्सर अपने भावी कैंडिडेट्स के सुपीरियर एनालिटिकल स्किल्स और जटिल समस्याओं को तुरंत सॉल्व करने की काबिलियत देखते हैं.  

‘अत्यधिक सावधानी’ के चलते अतिरिक्त सुरक्षा जांच के अस्थाई उपाय किए गए, सिर्फ भारत आने वालों की हो रही एक्स्ट्रा जांच

कनाडा कनाडा से भारत आ रहे यात्रियों को पहले से ज्यादा जांच का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में कनाडा सरकार ने इस संबंध में बयान जारी किया था। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि सुरक्षा उपायों को बढ़ाए जाने की वजह क्या है। इससे पहले ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने भी कनाडा सरका से एयर इंडिया की उड़ानों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कहा है। खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उड़ानों को लेकर धमकी दी थी। कनाडा की ट्रांसपोर्ट मंत्री अनिता आनंद की तरफ से इस संबंध में बयान जारी किया गया है। उन्होंने जानकारी दी है कि ‘अत्यधिक सावधानी’ के चलते अतिरिक्त सुरक्षा जांच के अस्थाई उपाय किए गए हैं। एयर कनाडा की तरफ से भी भारत जा रहे यात्रियों को नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है, ‘ट्रांसपोर्ट कनाडा की तरफ भारत जा रहे सभी यात्रियों के लिए बढ़ाए गए सुरक्षा उपायों के चलते सिक्युरिटी वेट टाइम ज्यादा हो सकता है।’ आगे कहा गया, ‘आपकी यात्रा में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए हम आपको फ्लाइट के उड़ान भरने से 4 घंटे पहले आने की सलाह देते हैं…।’ एयर कनाडा के प्रवक्ता ने भी सोमवार को इस फैसले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया, ‘ट्रांसपोर्ट कनाडा ने भारत आने वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त जरूरतों की बात कही है और अन्य कैरियर्स की तरह एयर कनाडा इनका पालन कर रहा है।’ हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में कुछ यात्रियों ने बताया है कि अतिरिक्त जांच के आदेश लागू कर दिए गए हैं, जिसमें भारत आने वालों की दूसरी बार स्क्रीनिंग शामिल है। अलगाववादी समूह SFJ यानी सिख फॉर जस्टिस ने अक्टूबर में धमकी दी थी, जिसमें 1 नवंबर से 19 नवंबर के बीच एयर इंडिया की फ्लाइट्स को निशाना बनाने की बात कही गई थी। इससे पहले 2023 में भी पन्नू ने सिखों को 19 नवंबर के बाद एयर इंडिया के विमान में यात्रा नहीं करने की हिदायत दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने बाद में साफ किया था कि वह धमकी नहीं थी, बल्कि बहिष्कार की बात कर रहा था।

चोरों के हौसले इतने बुलंद की माता के जेवरात और मुकुट सहित दान पेटी चोरी

कोरबा जिले की पुलिस को इन दिनों चोर चुनौती देते नजर आ रहे है। जिले और शहर में लगातार रोजाना चोरी की वारदाते हो रही है, जिससे पुलिस की रात्रि गस्त पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चोरों के हौसले इतने बुलंद है कि वह अब भगवान के घर को भी नहीं बक्श रहे है। ताजा मामला नगर पंचायत पाली से सामने आया है, जहां वार्ड क्रमांक एक मादन मुख्य मार्ग स्थित राज कालिका मंदिर पर चोरों ने धावा बोला और मंदिर में विराजमान मूर्तियों से मुकुट और जेवरात लेकर फरार हो गए, इस दौरान चोर अपने साथ दान पेटी भी साथ ले गए थे। बता दें कि राज कालिका मंदिर में पंडित प्रमोद तिवारी रोज की तरह सोमवार की रात 9 बजे मंदिर के कपाट बंद कर घर चले गए थे, इसके बाद आज सुबह जब वह मंदिर पहुंचे तो मंदिर का ताला टूटा हुआ था और दरवाजा खुला हुआ था। जब उन्होंने अंदर जाकर देखा तो मंदिर के गर्भगृह का ताला भी टूटा हुआ था और गेट के पास में एक त्रिशूल पड़ा हुआ मिला। मंदिर के अंदर प्रवेश करने पर माता काली की प्रतिमा पर मुकुट नथनी सहित अन्य देवी देवताओं के मुकुट आदि गहने गायब मिले, इसके अलावा मंदिर की दान पेटी भी उसके स्थान पर नहीं मिली। मंदिर में चोरी का पता लगने के बाद मंदिर के पुजारी ने तत्काल पाली पुलिस को घटना की जानकारी दी, इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस चोर को पकड़ने के लिए स्निफर डॉग को बुलाया। इस दौरान मंदिर के आसपास सर्चिंग की गई, तब मंदिर के पीछे कुछ दूरी पर खाली दान पेटी मिली। मंदिर से चोरी हुए मुकुट और जेवरात की कीमत करीब 2 लाख रूपये बताई जा रही है। बीते 3 महीने में बढ़ी चोरी की वारदातें गौरतलब है कि पाली क्षेत्र में बीते 3 महीने में छोटी-बड़ी चोरी की घटनाएं हो रही है, पहले तो चोर घरों और दफ्तरों को निशाना बनाते थे। अब चोरों ने मंदिर में भी हाथ साफ करना शुरू कर दिया है। लगातार चोरियों ने आमजन की नींद हराम कर दी है। वहीं पुलिस के हाथ अब तक खाली है, जिससे चोरों के हौसले बुलंद है।

निर्विरोध जीत गए 3000 लोग, न्यायालय ने असंतुष्ट उम्मीदवारों को चुनाव याचिका दायर करने की अनुमति दी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य को ‘बहुत विचित्र’ बताया कि पंजाब में हाल में हुए चुनावों में 13,000 पंचायत पदाधिकारियों में से 3,000 निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। न्यायालय ने असंतुष्ट उम्मीदवारों को चुनाव याचिका दायर करने की अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कई उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को खारिज करने और अन्य चुनावी अनियमितता का आरोप लगाने संबंधी याचिका पर पहले नोटिस जारी किए थे। पीठ ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति निर्वाचन आयोग के समक्ष चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं और आयोग को छह महीने में उन पर फैसला करना होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए या फाड़ दिए गए, वे भी अपनी शिकायतें लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि उनकी याचिकाओं को सीमा अवधि के उल्लंघन के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाओं को गुण-दोष के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया है, ‘हम याचिकाकर्ता को चुनाव याचिका दायर करने की अनुमति देते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग छह महीने में याचिकाओं पर फैसला करेगा, देरी होने पर याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय जा सकते हैं।’ आदेश में कहा गया है, ‘जिन लोगों के नामांकन खारिज कर दिए गए या कागजात फाड़ दिए गए, वे कानून के अनुसार उच्च न्यायालय के समक्ष समीक्षा याचिका दायर कर सकते हैं… यदि उच्च न्यायालय में उनकी याचिका खारिज कर दी जाती है तो याचिकाकर्ताओं को इस अदालत में आने का अधिकार है।’ संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, जब न्यायालय को बताया गया कि पंचायत के 13,000 से अधिक पदों में से 3,000 पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, तो प्रधान न्यायाधीश ने आश्चर्य व्यक्त किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘यह बहुत अजीब है! मैंने ऐसे आंकड़े कभी नहीं देखे… यह बहुत बड़ी संख्या है।’ एक वकील ने दावा किया कि चुनाव के दौरान एक उम्मीदवार का चुनाव चिह्न हटा दिया गया था। शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि उच्च न्यायालय ने सैकड़ों याचिकाओं को प्रभावित पक्षों का पक्ष उचित तरीके से सुने बिना खारिज कर दिया। पीठ ने 18 अक्टूबर को सुनीता रानी और अन्य द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें 15 अक्टूबर को हुए पंचायत चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को कुर्क करने के आदेश दिए, सुक्खू सरकार को लगा झटका

शिमला हिमाचल की सुक्खू सरकार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को कुर्क करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश सेली हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर की गई अनुपालना याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किए गए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कंपनी को अपनी बकाया राशि वसूलने के लिए हिमाचल भवन को नीलाम करने की अनुमति दी जाए। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अजय मोहन गोयल ने यह आदेश 64 करोड़ रुपये के बकाये को लेकर दिया। दरअसल यह राशि कंपनी को ब्याज सहित राज्य के ऊर्जा विभाग से मिलनी थी, जो अब तक नहीं दी गई है। हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव को आदेश दिया है कि वे यह तथ्यात्मक जांच करें कि किस अधिकारी या अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह राशि अभी तक जमा नहीं की गई। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि दोषी अधिकारियों से इस ब्याज की राशि व्यक्तिगत रूप से वसूलने का आदेश दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए 15 दिनों की समयसीमा निर्धारित की है और अगली सुनवाई के लिए 6 दिसंबर 2024 तारीख तय की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस बात की भी स्पष्ट जानकारी देने के लिए कहा है कि किस वजह से बकाया राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है, जबकि इसे कई साल पहले वसूल किया जाना चाहिए था। यह मामला वर्ष 2009 से जुड़ा हुआ है, जब राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने सेली हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड को लाहौल स्पीति में 320 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट का आवंटन किया था। इसके तहत कंपनी को बीआरओ द्वारा सड़क निर्माण कार्य उपलब्ध कराया गया था। सरकार ने समझौते के तहत कंपनी को जरूरी मूलभूत सुविधाएं देने का वादा किया था, ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके। हालांकि, बाद में कई विवादों के चलते कंपनी ने 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, जिसके बाद यह मामला कानूनी दांव-पेचों में उलझ गया था। कंपनी का आरोप है कि सरकार इस परियोजना के लिए मूलभूत सुविधाएं देने में नाकाम रही। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि अभी उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं पढ़ी है। उन्होंने कहा कि अपफ्रंट प्रीमियम 2006 की ऊर्जा नीति के तहत तय किया जाता है। आर्बिट्रेशन का फैसला चिंताजनक है और सरकार फैसले का अध्ययन करेगी। भाजपा ने सरकार पर साधा निशाना इस बीच, हिमाचल भवन की नीलामी के फरमान ने राज्य की सत्तारूढ़ सुक्खू सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। फिलहाल यह मुद्दा विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनता दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश भाजपा ने हाईकोर्ट से फैसला आने के बाद कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा है। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल भवन जो राज्य का गौरव है, वह आज कुर्क किए जाने के कगार पर है। यह प्रदेश के लिए अत्यंत शर्मनाक घटना है। मुख्यमंत्री और उनकी सरकार ने राज्य की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई है तथा हिमाचल अब नीलामी के दौर में है। वहीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भी प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। सरकार अपना पक्ष कोर्ट में नहीं रख पा रही है, इसलिए हिमाचल भवन को अटैच करने के आदेश दिए गए हैं। यह सरकार की विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

ये योगासन बनाते हैं टांगों की मसल्सा को मजबूत

उत्कटासन कोर की मांसपेशियों (जांघों और नितंबों) को मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप जिम में घंटों पसीना बहाएं। अगर आप अपनी टांगों की मांसपेशियों को मजबूत बनाना चाहते हैं। तो यहां हम आपको 3 ऐसे योगासनों के बारे में बता रहे हैं जो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ये योगासन टांगों की मसल्सो को मजबूत बनाने के साथ, हिप, टखनों, पेट की मसल्सह आदि शरीर के कई हिस्सोंक के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। उत्कटासन : उत्कटासन कोर की मांसपेशियों (जांघों और नितंबों) को मजबूत बनाने और टोन में मदद करता है। सीधे हाथ जोड़कर (नमस्ते में मुद्रा) खड़े हो जाओ। पैरों के पंजे भूमि पर टिके हुए हों तथा एड़ियों के ऊपर नितम्ब टिकाकर बैठ जाइए। दोनों हाथ घुटनों के ऊपर तथा घुटनों को फैलाकर एड़ियों के समानान्तर स्थिर करें। अपने सिर को हल्का आगे मोड़ें। इस मुद्रा में तब तक रहें जब तक आप सहज हो। आसन से बाहर आने के लिए आराम से सीधा खड़ा हो जाएं। वृक्षासन : वृक्षासन आपके पेट से वसा को दूर करने के लिए सबसे आसान और आदर्श आसनों में से एक है। साथ ही इस आसन से टांगों की वसा कम होती हैं और शरीर का संतुलन बेहतर है। इसे करने के लिए योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और अपने पैर जोड़ लें। अब अपना दायां पैर, अपनी बाईं जांघ पर रखें। आपके दाएं पैर का अंगूठा नीचे जमीन की तरफ हो और बाएं पैर की उंगलियां सामने की तरफ। ध्या न रखें कि आपकी पीछे से गर्दन, रीढ़ की हड्डी की रेखा में सीधी होनी चाहिए। अर्ध चंद्रासन : अर्ध चंद्रासन भी जांघों और नितंबों की चर्बी को कम करने के लिए बहुत अच्छा है। इसके अलावा अतिरिक्त स्ट्रेच से पेट की चर्बी भी कम होकर आपका शरीर मजबूत बनता है। इसे करने के लिए, शुरू करने के साथ ही अपने पैरों को एक साथ करके  खड़े हो जाये। फिर दाएं हाथ को उपर सीधा कान और सिर से सटा हुआ रखते हुए ही कमर से बाईं ओर झुकते जाएं। जहां तक हो सके बाईं ओर झुके फिर इस अर्ध चंद्र की स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें। वापस आने के लिए धीरे-धीरे पुन: सीधे खड़े हो जाएं। इस आसन को 4 से 5 बार करने से लाभ होगा।  

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