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प्रदेश में जैविक खेती के लिए तीन हजार से अधिक क्लस्टर बने, एक लाख से अधिक किसानों द्वारा organic farming की जा रही

भोपाल  देश में कुल जैविक उत्पाद का 40 प्रतिशत हिस्सा देने वाला मध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में नए कीर्तिमान की ओर है। इसका रकबा 17 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 20 लाख हेक्टेयर करने की तैयारी चल रही है। जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने प्रति हेक्टेयर पांच-पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इसमें भारत सरकार से भी मदद मिलेगी। साथ ही जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए बाजारों में स्टाल लगाने के साथ खुदरा व्यापारियों से जोड़ने की पहल भी की जाएगी। बता दें, देश में कुल 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है। मध्य प्रदेश के मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, सिंगरौली सहित अन्य कई जिलों में परंपरागत रूप से जैविक खेती होती है। खेतों में डाले जा रहे रासायनिक उवर्रक और कीटनाशकों के कारण खाद्यान्न और भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है। किसानों के लिए फायदेमंद जैविक खेती किसानों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक भी है, इसलिए इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2011 में जैविक खेती नीति बनाई गई। जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण के साथ अन्य व्यवस्थाएं बनाई गईं। अब इसे प्राकृतिक खेती से जोड़कर और आगे बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में जैविक खेती के लिए तीन हजार से अधिक क्लस्टर बने हैं। अब इसे और विस्तार दिया जाएगा। जैविक उत्पादों का कराया जाएगा प्रमाणीकरण जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने प्रति हेक्टेयर पांच-पांच हजार रुपये तीन वर्ष तक दिए जाएंगे। उन्हें कहीं से भी सामग्री लेने की छूट रहेगी। तीन वर्ष तक किसान द्वारा की जाने वाली खेती का पूरा रिकार्ड रखा जाएगा। जैविक उत्पाद का प्रमाणीकरण भी करवाया जाएगा, ताकि उपज का अच्छा मूल्य मिले। साथ ही उपज विक्रय के लिए अन्य राज्यों के बाजारों में स्टाल लगाने के साथ खुदरा व्यापारियों से किसानों को जोड़ने की पहल की जाएगी। जैविक खाद की आवश्यकता की पूर्ति के लिए सहकारी स्तर पर समिति बनाना भी प्रस्तावित है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें गोपालन से जोड़ने की भी तैयारी है। प्राकृतिक खेती करने पर देसी गाय पालन के लिए 900 रुपये प्रतिमाह देने की योजना बनाई गई है। ये फसलें उगाई जा रहीं प्रदेश में अभी एक लाख से अधिक किसानों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। प्रमुख उपज में सोयाबीन, गेहूं, धान, चना, मसूर, अरहद, उड़द, बाजरा, रामतिल, मूंग, कपास, कोदो-कुटकी आदि शामिल हैं। इन जिलों में अधिक जैविक खेती मंडला, डिंडौरी, शहडोल, सिंगरौली, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, कटनी, उमरिया, अनूपपुर, उमरिया, दमोह, सागर, आलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, सीहोर, श्योपुर और भोपाल

वन सुरक्षा श्रमिकों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी टिकरिया को ब्याज की राशि एवं नियमित कार्य पर रखने हेतु दिये लिखित आवेदन

मंडला मंडला के जिले अंतर्गत वन परिक्षेत्र टिकरिया फड़की बीट सिवनी माल के वन सुरक्षा श्रमिकों ने वन विभाग को ब्याज की राशि एवं नियमित कार्य पर रखने हेतु 22/10/2024 को पोस्ट आफिस निवास द्वारा रजिस्ट्री के माध्यम से लिखित आवेदन दिए हैं।  लिखित आवेदन के माध्यम से उन्होंने साफ-साफ कहा हम आवेदकगणों की विनम्र पूर्वक निवेदन है कि हमारे द्वारा किए गए वन सुरक्षा श्रमिक  के कार्य पर वर्ष 2007 में नियोजित किए गए थे,और हमने अक्टूबर 2011 तक निरंतर कार्य किया है। जिसमें फरवरी 2009 से अक्टूबर 2011 तक की अवधि में लंबित समय से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, जिससे कई बार विभाग के जिम्मेदारों को आवेदन निवेदन किया गया। परंतु भुगतान न किए जाने पर व्यथित होकर माननीय श्रम न्यायालय जबलपुर के समक्ष याचिका क्रमांक 40/पी. डब्ल्यू एक्ट/2014 प्रस्तुत की गई। जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 28/10/ 2015 को राशि 2.69.280 रू. का भुगतान हेतु आदेशित किया गया था।        जिसके बाद भी उक्त आदेश का पालन न किए जाने पर माननीय उच्च न्यायालय मुख्य खंडपीठ जबलपुर में याचिका MP/3561/2023 प्रस्तुत किए जाने पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 18/07/2023 को आदेशित किया गया। उक्त भुगतान हेतु जिस पर अक्टूबर 2024 में सिर्फ राशि 2.69.280/- रू. का भुगतान किया गया है। जबकि उच्च न्यायालय जबलपुर जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2011 से अक्टूबर 2024 तक की ब्याज 12% प्रतिवर्ष के हिसाब से राशि 4 लाख 52,390/-रू. का भुगतान होना था जिसे नहीं किया गया है। अतः माननीय महोदय जी से विनम्र निवेदन है कि ब्याज की राशि 4 लाख  52,390/-रू. का भुगतान अति शीघ्र हम वन सुरक्षा श्रमिकों को किया जाए तथा साथ ही पुनः कार्य में रखते हुए वर्ष 2007 से निरंतर कार्य सेवा मानी जाए, अन्यथा हमें विवश होकर माननीय न्यायालय के शरण में न्याय हेतु जाना पड़ेगा। आवेदकगण……. 1. संजय चौधरी/पिता उत्तम लाल चौधरी 2. सुवेंद्र कुमार/ पिता बजरू तेकाम 3. सगनी बाई बेवा/पति जगत सिंह मरावी 4. सिंधी सिंह/पिता बुद्धू सिंह कुशराम

बीयू के ज्ञान-विज्ञान भवन की बाहरी लोगों को विवाह समारोह की पार्टी हो रही बुकिंग के चलते परिसर में आए दिन गंदगी का अंबार लगा

भोपाल राजधानी में स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय(बीयू) में ज्ञान-विज्ञान भवन का निर्माण किया गया था। इसके पीछे उद्देश्य यही था कि विवि के होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठी,कार्यशाला और दीक्षा समारोह का आयोजन ज्ञान-विज्ञान भवन में किया जा सके। साथ ही विवि में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के यहां होने वाले समारोह के लिए जगह उपलब्ध हो सके, लेकिन विवि प्रबंधन इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है। आलम यह है कि विवि के दीक्षा समारोह से लेकर अन्य कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर या अन्य किसी सभागृह में किए जाते हैं। इसकी वजह से ऐसे कार्यक्रमों में लाखों रुपये खर्च होते हैं। वहीं, बीयू के ज्ञान-विज्ञान भवन की बाहरी लोगों को विवाह समारोह और जन्मदिन की पार्टी के लिए बुकिंग की जाती है। इस कारण विवि परिसर में आए दिन गंदगी का अंबार लग जाता है। बता दें, कि दो दिन पहले ज्ञान-विज्ञान भवन के खुले जगह पर जन्मदिन की पार्टी हुई थी। मगर, अब तक वहां कचरा फैला हुआ है। इसके लिए नगर निगम विवि प्रबंधन को नोटिस भी जारी किया है। वहीं, विवि के अधिकारियों का कहना है कि ज्ञान-विज्ञान भवन में निर्माण कार्य जारी है। इस कारण वहां विवि का कोई भी समारोह आयोजित नहीं किया जाता है। ज्ञान-विज्ञान भवन में निर्माण कार्य जारी है। इस कारण वहां विवि का कोई भी समारोह या कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है। – आईके मंसूरी, कुलसचिव, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल सुरक्षा निधि जमा होती है विवि प्रबंधन का कहना है कि ज्ञान-विज्ञान भवन के रख-रखाव के लिए किराये पर दिया जाता है। इसके लिए आयोजक से सुरक्षा निधि 15 हजार रुपये ली जाती है और साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी उनकी ही होती है। विवि के कर्मचारियों को रियायती दरों पर देते हैं ज्ञान-विज्ञान के अंदर के हॉल को एकेडमिक कार्य के लिए दिया जाता है। इसके लिए करीब 90 हजार रुपये शुल्क लिया जाता है और सुरक्षा निधि के तौर पर 15 हजार रुपये जमा कराए जाते हैं। साथ ही ज्ञान-विज्ञान भवन के खुले मैदान को कर्मचारियों को 29 हजार रुपये में और बाहरी लोगों को 70 हजार रुपये में विवाह समारोह के लिए दिया जाता है।

आयुष मंत्री परमार की अध्यक्षता में हुई “पुरस्कार चयन समिति” की बैठक

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में आयुष विभाग अंतर्गत “पुरस्कार चयन समिति” की बैठक हुई। बैठक में पंडित उद्धवदास मेहता वैद्यशास्त्री आयुर्वेद सेवा सम्मान पुरस्कार वर्ष-2022 के लिए “पुरस्कार चयन समिति” ने व्यापक विचार मंथन किया। बैठक में सर्वसम्मति से वर्ष-2022 के पुरस्कार के लिए नाम का चयन किया गया। आयुष मंत्री परमार ने पंडित उद्धवदास मेहता वैद्यशास्त्री आयुर्वेद सेवा सम्मान पुरस्कार वर्ष-2023 के लिए अनुशंसा समिति की बैठक शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ज्ञातव्य है कि उक्त पुरस्कार वर्ष-2023 के लिए भी विज्ञापन जारी किया जा चुका है। बैठक में प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा एवं आयुक्त आयुष श्रीमति आर. उमा माहेश्वरी सहित समिति के सदस्य डॉ. एस.एन. पांडे (उज्जैन) एवं वैद्य प्रभाकर चतुर्वेदी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

फिल्म “द साबरमती रिपोर्ट” टैक्स फ्री : आदेश जारी

भोपालT राज्य शासन ने धीरज सरना द्वारा निर्देशित हिन्दी फीचर फिल्म “द साबरमती रिपोर्ट” को मध्यप्रदेश में ट्रैक्स फ्री कर दिया है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिये गये हैं। मध्यप्रदेश में फिल्म को प्रदर्शन की अवधि 21 नवम्बर से 20 दिसम्बर 2024 तक के लिये राज्य माल और सेवा कर (एसजीसएसटी) के समतुल्य राशि की प्रतिपूर्ति करते हुए दर्शकों को इस राशि की छूट प्रदान की है। फिल्म के प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों/मल्टीफ्लेक्स में फिल्म के लिए राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) की धन राशि को घटाकर दर्शकों को टिकट विक्रय किया जाएगा। फिल्म प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों / मल्टीफ्लेक्स के प्रचलित सामान्य प्रवेश शुल्क में वृद्धि नहीं की जा सकेगी। सेवा प्रदाय पर देय एवं भुगतान किए गए राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) के अंश के बराबर की राशि की राज्य शासन द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी।  

अब प्रसिद्ध सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले रोट (प्रसाद) की गुणवत्ता पर उठे सवाल

हमीरपुर तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में मिलावट को लेकर विवाद के बाद अब कई मंदिरों के प्रसाद पर भक्तों की नजर टिकी हुई है। देश के प्रसिद्ध मंदिरों की संस्थाएं और ट्रस्ट इस मामले में अब सावधानी बरत रही हैं। इस सबके बीच हिमाचल के हमीरपुर के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठ रहा है। दरअसल हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले रोट (प्रसाद) की गुणवत्ता पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कंडाघाट लैब ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है। लैब द्वारा जांचे गए रोट(प्रसाद) के सैंपल के चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में रोट की गुणवत्ता स्वास्थ्य मानकों पर खरी नहीं उतरी है और इसे खाने के लिए सुरक्षित नहीं माना गया है। इससे पहले, सितंबर में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद (लड्डू) में हुई गड़बड़ी को लेकर उठे विवादों के बाद, लोगों ने अन्य मंदिरों में दिए जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए थे। इसके मद्देनजर, अक्टूबर में फूड एंड सेफ्टी विभाग की टीम ने मंदिर की कैंटीन और अन्य दुकानों में निरीक्षण कर रोट के सैंपल इकट्ठे किए थे। जांच रिपोर्ट में रोट के सैंपल फेल पाए गए हैं, जिससे मंदिर प्रशासन के लिए चुनौती पैदा हो गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त अनिल शर्मा ने कहा कि पिछले दिनों तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद (लड्डू) में मिलावट का मामला सामने आया था। उसी की तर्ज पर हमने कुछ मंदिरों से जांच के लिए सैंपल इकट्ठे कराए थे। दियोटसिद्ध में स्थित मंदिर से हमने रोट (प्रसाद) की गुणवत्ता के लिए सैंपल भरवाए थे। रोट (प्रसाद) की रिपोर्ट चौंकाने वाली आई है और यह स्वास्थ्य मानकों पर फेल हुई है। उसमें बासीपन रेंसिडिटी का मामला सामने आया है। इसमें आगे की कार्रवाई करेंगे। मंदिर में अन्य लोग जो रोट बनाते हैं, हम उनसे गुजारिश करेंगे वो इस पर ध्यान दें। विभाग इस पर कार्रवाई करेगा। बता दें कि सितंबर में आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में जो प्रसाद भक्तों को लड्डू के रूप में दिया जाता है, उसमें जानवरों की चर्बी और मछली तेल से बनाई जाने वाली घी का उपयोग करने की बात सामने आई थी। मिलावटी घी से बने प्रसाद के खुलासे ने पूरे देश के करोड़ों भक्तों की आस्था पर गहरी चोट पहुंचाई थी। इस बात के सामने आने के बाद से देशभर के साधु-संतों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मांग शुरू की थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले “द साबरमती रिपोर्ट” फिल्म के कलाकार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज मुख्यमंत्री निवास में “द साबरमती रिपोर्ट” फिल्म के कलाकार विक्रांत मैसी, सुराशि खन्ना एवं फिल्म निर्माण से जुड़े अन्य सदस्यों ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म के कलाकारों को एक उत्कृष्ट फिल्म में अभिनय के लिए बधाई दी। इस अवसर पर फिल्म कलाकारों के दल द्वारा गत वर्ष प्रारंभ हुए फिल्मांकन के बाद से अब तक के अनुभव और संस्करण भी साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों का अंगवस्त्रम् भेंट करने के साथ मिठाई खिलाकर स्वागत किया। फिल्म के कलाकारों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनके द्वारा “जाणता राजा” और अन्य नाटकों में किए गए अभिनय का उल्लेख करते हुए कला जगत से जुड़े रहने के लिए बधाई दी।  

नक्सली मुठभेड़ में घायल जवान को पीएमयोजना में किया एयर लिफ्ट

नक्सली मुठभेड़ में घायल जवान को पीएमयोजना में किया एयर लिफ्ट सीएम डॉ. यादव के निर्देशानुसार दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में होगा उपचार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार रविवार को बालाघाट जिले के रूपझर क्षेत्र में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में हॉक फोर्स के घायल जवान शिवकुमार शर्मा का अब दिल्ली में होगा उपचार। बुधवार दोपहर में जवान शर्मा को पीएमउपचार योजना के तहत गोंदिया से एयर लिफ्ट किया गया। सीएमएचओ डॉ. मनोज पाण्डे ने बताया कि आरक्षक शर्मा का उपचार दिल्ली में कराया जायेगा जिससे वे यथाशीघ्र स्वस्थ हो सके।  

ग्रेजुएशन में अब नहीं लगेंगे 3 साल, यूजीसी अध्यक्ष ने दी जानकारी

नई दिल्ली ग्रेजुएशन पूरा करने के लिए छात्र-छात्राओं को अब पूरे तीन साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टूडेंट्स चाहें तो इसे ढाई साल में भी पूरा कर सकते हैं।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष जगदेश कुमार ने चेन्नई के एक कॉलेज में इस संबंध में हाल ही में आयोजित हुए एक दिवसीय सम्मलेन में यह जानकारी दी है। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि, शिक्षा निकाय स्टूडेंट्स के लिए तेजी से डिग्री को पूरा करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसी क्रम में स्टूडेंट्स को तीन साल का पाठ्यक्रम ढाई में और चार साल का पाठ्यक्रम तीन में पूरा करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘आने वाले वर्षों में, जो छात्र सक्षम हैं, वे कम अवधि में डिग्री कार्यक्रम पूरा कर सकते हैं। हमारा अनुमान है कि ऐसे स्टूडेंट्स को छह महीने से एक साल तक का फायदा हो सकता है। हालांकि, यूजीसी अध्यक्ष ने यह भी बताया कि, जो छात्र- छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी करने में अधिक समय लेना चाहते हैं तो उन्हें वह भी दिया जाएगा। साथ ही उन्हें अपने पाठ्यक्रमों के दौरान ब्रेक लेने की अनुमति दी जाएगी। आईआईटी मद्रास के निदेशक ने दिया है यह सुझाव यह योजना आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामाकोटी द्वारा की गई सिफारिश पर आधारित है। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में जल्द डिटेल में दिशानिर्देश जल्द ही जारी किये जाएंगे। बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने के लिए आईआईटी मद्रास में एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में यूजीसी अध्यक्ष समेत कई संस्थानों के शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के बारे में बात करते हुए यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार ने कहा कि, इससे शिक्षा प्रणाली में बदलाव आएगा जिससे छात्रों को लाभ होगा। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा को अर्फोडेबल बनाने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) पर है। इससे इतर बात करें तो यूजीसी नेट दिसंबर परीक्षा के लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी कुछ दिनों के भीतर ही एग्जाम की अधिसूचना जारी करके आवेदन प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि, सटीक अपडेट तो अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर सूचना जारी होने के बाद ही मालूम कर पाएंगे।

7वें पेफी राष्ट्रीय पुरस्कार 24 नवंबर को शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रहे शिक्षकों को दिया जाएगा

नई दिल्ली शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले राष्ट्रीय पेफी अवार्ड की घोषणा की गयी है, इस बार यह राष्ट्रीय पुरस्कार 24 नवंबर को एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रहे 29 शिक्षकों को दिया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुनाल जी, अर्जुन अवार्डी एवं हॉकी के पूर्व खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद, खेलो इंडिया के हाई परफॉरमेंस मैनेजर और अर्जुन अवार्डी यशपाल सोलंकी, द्रोणाचार्य अवार्डी डॉ. ए. के. बंसल एवं विभिन्न खेल पुरस्कारों से पुरस्कृत वर्तमान एवं पूर्व खिलाड़ी उपस्थित रहेंगे। अवार्ड समिति के सचिव डॉ चेतन कुमार ने बताया कि पेफी के राष्ट्रीय पुरस्कार का यह सातवां संस्करण है। किसी भी देश के खेल भविष्य के लिए शारीरिक शिक्षकों का उत्कृष्ट स्तर प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है। बिना शारीरिक शिक्षकों के बेहतर खेल माहौल की कल्पना नहीं की जा सकती है। शारीरिक शिक्षकों को पेफी के माध्यम से बेहतर प्लेटफार्म प्रदान किया जा रहा है। अवार्ड कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार उप्पल ने बताया कि इस बार इमर्जिंग स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ द ईयर का अवार्ड चिराग चिकारा को दिया जा रहा है जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप कुश्ती में गोल्ड मेडल प्राप्त कर देश का नाम रोशन किया है। वहीं डॉ. जी. पी. गौतम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिल्ली इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन के पूर्व प्रोफ़ेसर डॉ. धनंजय शॉ और सर्वश्रेष्ठ शारीरिक शिक्षा शिक्षक पुरस्कार मध्य भारत से आशुतोष शर्मा, लेफ्टिनेंट डॉ. बृज किशोर प्रसाद (मध्य प्रदेश), उत्तर भारत से आशा दलाल, सुनीता रानी, रोहित कुमार प्रवीण कुमार (दिल्ली), दक्षिण भारत से लेफ्टिनेंट अनु डी. अलप्पट (केरल) एवं डॉ. श्रीनिवासा जी. एम. (कर्नाटक), पश्चिम भारत से डॉ. राजेंद्र कुमार सुखदेव देवकाते (महाराष्ट्र), पूर्व भारत से साहिनूर खान (पश्चिम बंगाल), अमलेंदु बाग (पश्चिम बंगाल) को दिया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ योग शिक्षक पुरस्कार, अल्का रहोरा (मध्य प्रदेश), डॉ. शुभांगी भीवाजी डामले (महाराष्ट्र), ग्रामीण क्षेत्रों में शारीरिक शिक्षा, फिटनेस और खेल के प्रचार हेतु डॉ. जयश्री आचार्य पुरस्कार डॉ. केशब चंद्र गोपे (पश्चिम बंगाल), डॉ. एम. रॉबसन युवा शोधकर्ता पुरस्कार पोली बोरा (असम), दिलप्रीत कौर (महाराष्ट्र), संजय कुमार एस. (तमिलनाडु), डॉ. अजमेर सिंह सर्वश्रेष्ठ कोच पुरस्कार (केवल ओलंपिक खेलों के लिए) डॉ. नीतू दत्ता (पश्चिम बंगाल), अशोक कुमार (उत्तर प्रदेश) ईश्वर भाटी (दिल्ली) और कुलदीप सिंह (हरियाणा), सर्वश्रेष्ठ अधिकारी/जज/रेफरी/अंपायर पुरस्कार (केवल ओलंपिक खेलों के लिए) रोहित कुमार (दिल्ली) इंद्रनील घोष (उत्तर प्रदेश) को दिया जाएगा. शारीरिक शिक्षा और खेलों में नेतृत्व व उत्कृष्टता के लिए कोमल और वी. के. पाहुजा पुरस्कार डॉ. अनिदेव सिंह (दिल्ली) और थॉमस एम. ए. (तेलंगाना), विशेष छात्रों को कोचिंग के लिए डॉ. राकेश गुप्ता सर्वश्रेष्ठ कोच पुरस्कार पराग अग्रवाल (उत्तर प्रदेश) डॉ. पी. एम. जोसेफ पुरस्कार: शारीरिक शिक्षा और खेल को बढ़ावा देने वाले सर्वश्रेष्ठ संस्थान धर्म समाज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (उत्तर प्रदेश) और अजम्प्शन कॉलेज ऑटोनोमस (केरल) को दिया जाएगा। इस अवसर पर एक दिवसीय स्पोर्ट्स इंजरी कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर सफदरजंग हॉस्पिटल, एमवे इंडिया और आई फाई पार्टनर के रूप में रहेंगे। इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव में स्पोर्ट्स इंजरी के विशेषज्ञ खेलों में लगने वाली चोटों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

छत्तीसगढ़ में सर्द हवाओं का आगमन तेजी, सरगुजा में ठंड का रिकॉर्ड टूटा

रायपुर छत्तीसगढ़ में सर्द हवाओं का आगमन तेजी से हो रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर सरगुजा सम्भाग में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, भरतपुर और सूरजपुर में अगले 24 घंटे में शीत लहर चलने की चेतावनी जारी की है। ठिठुराने वाली हवाओं के चलने से सरगुजा संभाग में पारा तेजी से नीचे गिर गया है। यहां नवंबर के तीसरे हफ्ते में ही पारा 8.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग की मानें तो साल 2014 के बाद पहली बार नवंबर के तीसरे हफ्ते में सरगुजा का पारा इतना नीचे पहुंचा है। यानी सर्दी ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग ने अचानक से तापमान गिरने के पीछे का कारण चक्रवातीय परिवर्तन को बताया है। सरगुजा सम्भाग में सर्दी बढ़ने से ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों को अभी से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग बीमार पड़ने लगे हैं। दिन में भी गर्म कपड़े पहनकर निकल रहे हैं। हवा से नमी गायब मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी शांत बनी हुई है। इस दिशा से नमी का आगमन नहीं हो रहा है। लगातार पश्चिम और उत्तर से सर्द हवा आ रही है। बीते दिनों उत्तर भारत में कई जगहों पर बर्फबारी हुई। इसके चलते उस दिशा से सर्द हवा आ रही है। आसमान पूरी तरह से साफ है। प्रदेश समेत उत्तर छत्तीसगढ़ का तापमान सर्द हवाओं की वजह से गिरा है। अभी पहाड़ी इलाकों में पारा और नीचे जाएगा। ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, आगामी पांच दिनों में तापमान में क्रमिक गिरावट होने की संभावना है। प्रदेश में मौसम शुष्क रहा। छत्तीसगढ़ में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। रायपुर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री के आस-पास रहने की संभावना है।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने छात्र संघ डूसू चुनाव के परिणाम अब 25 नवंबर को, एक बार फिर टली मतगड़ना

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय ने छात्र संघ (डूसू) चुनाव के परिणाम फिर से टाल दिये और अब मतगणना 25 नवंबर को होगी, जो उच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित समय सीमा से ठीक एक दिन पहले है। अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में चुनाव प्रचार के कारण विरुपित हुई संपत्ति को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, डूसू की केंद्रीय पैनल के लिए मतगणना अब 25 नवंबर को नॉर्थ कैंपस के वनस्पति विज्ञान विभाग के पास कॉन्फ्रेंस सेंटर में होगी जबकि कॉलेज स्तर की मतगणना एक दिन पहले 24 नवंबर को होगी। सुबह के कॉलेजों को मतगणना सुबह आठ बजे शुरू करने जबकि शाम के कॉलेजों को अपराह्न दो बजे शुरू करने का निर्देश दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया, ‘‘हमारी कई टीम अभी भी साफ-सफाई के प्रयासों पर काम कर रही हैं। परिसरों को बड़े पैमाने पर साफ कर दिया गया है जबकि अन्य हिस्सों में अब भी गंदगी है। हम इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।” डूसू चुनाव के नतीजे मूल रूप से 28 सितंबर को घोषित किए जाने थे, लेकिन लगभग तीन महीने की देरी हो गई है। इससे पहले, डीयू ने 21 नवंबर को केंद्रीय पैनल और कॉलेज स्तर के चुनावों के लिए मतगणना कराने की योजना बनाई थी।

दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण, वायु प्रदूषण तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक होता

नई दिल्ली क्या आपको पता है कि दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण होता है? एक तरह से वायु प्रदूषण तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक होता है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में दुनियाभर में तंबाकू की वजह से अनुमानित 75 से 76 लाख मौतें हुई होंगीं. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 81 लाख मौतें. यानी, दुनिया में 12% मौतों का कारण जहरीली हवा है. वहीं, दुनियाभर में हर साल एक करोड़ से ज्यादा मौतें हाई ब्लडप्रेशर के कारण होती हैं. ये बातें इसलिए चिंता बढ़ाती हैं, क्योंकि राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 500 के करीब पहुंच गया है. यानी अब यहां AQI ‘गंभीर’ की श्रेणी में आ गया है. जब ये ‘गंभीर’ की श्रेणी में आ जाता है तो अच्छे-खासे तंदरुस्त लोग भी बीमार पड़ सकते हैं. ये रिपोर्ट बताती है कि सबसे बड़ा रिस्क PM2.5 है. PM2.5 का मतलब है 2.5 माइक्रोन का कण. ये बहुत ही महीन कण होता है. इसे ऐसे समझिए कि ये इंसान के बाल से भी 100 गुना ज्यादा पतला होता है. ये इतना छोटा है कि नाक और मुंह के जरिए हमारे शरीर में घुस जाता है. जैसे ही ये हमारे शरीर में आता है तो दिल और फेफड़ों को प्रभावित करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में PM2.5 के कारण 78 लाख मौतें हुई थीं. यानी, वायु प्रदूषण के कारण जितनी मौतें हुई थीं, उनमें से 96 फीसदी से ज्यादा की वजह यही कण था. इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण के कारण होने वाली 90 फीसदी से ज्यादा बीमारियों का कारण भी यही छोटा सा कण होता है. सबसे खतरनाक PM2.5 2024 की स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण जहरीली हवा ही थी. सबसे ज्यादा खतरा साउथ एशियाई और अफ्रीकी देशों पर है. रिपोर्ट से पता चलता है कि 81 लाख मौतों में से 58 फीसदी की वजह वातावरण में मौजूद प्रदूषण रहा. जबकि, 38 फीसदी मौतें घरों के अंदर मौजूद प्रदूषण की वजह से हुई थीं. चिंता बढ़ाने वाली बात ये है कि पांच साल से छोटे बच्चों की मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी वायु प्रदूषण ही है. इतने छोटे बच्चों की मौतों की सबसे बड़ी वजह है. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 2021 में पांच साल से छोटे 7 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी. इतना ही नहीं, साउथ एशिया और अफ्रीकी देशों में जन्म के बाद पहले महीने में होने वाली 30 फीसदी से ज्यादा मौतों का कारण भी जहरीली हवा ही है. भारत के लिए कितना बड़ा खतरा? एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हर साल तंबाकू की वजह से 10 लाख के आसपास लोग मारे जाते हैं. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 21 लाख लोग मारे गए थे. यानी, लगभग दोगुना. इस हिसाब से देखा जाए तो भारत में हर महीने औसतन 1.75 लाख और हर दिन 5,753 लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो जाती है. अकेले भारत में ही पांच साल से कम उम्र के 1.69 लाख बच्चों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो गई थी. ये आंकड़ा दुनिया में सबसे ज्यादा था. दूसरे नंबर पर नाइजीरिया था, जहां 1.14 लाख बच्चों की मौत हुई थी. पाकिस्तान में 68 हजार से ज्यादा बच्चे मारे गए थे. रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाले अस्थमा 5 से 14 साल की उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. 15 फरवरी 2013 को लंदन की रहने वालीं 9 साल की एला किस्सी-डेब्रा की मौत अस्थमा अटैक से हो गई थी. वो दुनिया की पहली शख्स हैं, जिनके डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह ‘वायु प्रदूषण’ दर्ज है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे जहरीली हवा साउथ एशियाई देशों में है. वायु प्रदूषण के कारण दुनिया में जितनी मौतें हुई थीं, उनमें आधी से ज्यादा सिर्फ भारत और चीन में हुई थी. चीन में 23 लाख तो भारत में 21 लाख लोगों की मौत का कारण वायु प्रदूषण था. हवा में मौजूद PM2.5 सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि इससे बेमौत ही लोग मारे जा रहे हैं और हार्ट डिसीज, लंग कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं. भारत में हर एक लाख आबादी में से 148 की मौत का कारण वायु प्रदूषण है. ये वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है. PM2.5 में नाइट्रेट और सल्फेट एसिड, केमिकल, मेटल और धूल-मिट्टी के कण होते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में काफी अंदर तक घुस सकते हैं और गंभीर रूप से बीमार कर सकते हैं. इस कारण दिल और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों की मौत भी हो सकती है. जबकि, स्वस्थ लोगों को इससे हार्ट अटैक, अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी हो सकती है. इसी साल जनवरी में एक स्टडी आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि दुनियाभर में PM2.5 की सबसे ज्यादा मात्रा भारत में है. वहीं, दिल्ली में इसकी मात्रा सबसे ज्यादा है. इस स्टडी में दावा किया गया था कि सर्दी के मौसम में भारत में घर के अंदर की हवा बाहर की हवा से 41% ज्यादा प्रदूषित होती है. हाल ही में साइंस जर्नल लैंसेट में एक स्टडी छपी थी. स्टडी में बताया गया था कि शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के खतरे को बढ़ा रहा है.

अमेरिका के टैरिफ शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद चीन ने भारत से नदीकियां बढ़ानी फिर की शुरू

नई दिल्ली जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीता है, तब से चीन का डर बढ़ता जा रहा है। चीन को सबसे ज्यादा डर कारोबार को लेकर है। माना जा रहा है कि जनवरी में राष्ट्रपति की कुर्सी संभालने के बाद ट्रंप चीन पर लगने वाला टैरिफ शुल्क बढ़ा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो पहले से ही धीमी आर्थिक गति की मार झेल रहे चीन के लिए यह बड़ा धक्का होगा। ट्रंप के इस कदम से बचने के लिए चीन ने हाल ही में एक और आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। इसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को गति देना था। लेकिन लगता है कि चीन के ये सारे आर्थिक पैकेज किसी काम के नहीं हैं। ट्रंप का दबाव कम करने के लिए चीन भारत की शरण में आ रहा है। इसके लिए वह भारत के साथ संबंध सुधारने पर लगा है। ढीले पड़ने लगे चीन के तेवर अमेरिका में आगामी ट्रंप प्रशासन का दबाव कम करने के लिए चीन अब भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। यह बात अमेरिका-भारत सामरिक एवं साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कही। ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान चीन से माल पर 60 फीसदी टैरिफ शुल्क और हर दूसरे अमेरिकी आयात पर 20 फीसदी तक के टैरिफ शुल्क का प्रस्ताव रखा था। मुकेश अघी ने कहा, ‘इसलिए हम ट्रंप प्रशासन के आने का प्रारंभिक प्रभाव देख रहे हैं, जिसने चीन पर भारत के साथ व्यवहार को आसान बनाने का दबाव बनाया है। इसलिए सीमा पर गश्त पर सहमति बनी है। सीधी उड़ानों पर सहमति बनी है।’ और नरम होगा ड्रैगन चीन के तेवर आने वाले समय में और ढीले पड़ते नजर आएंगे। अघी ने कहा कि ट्रंप की जीत का भारत-चीन संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आने वाले समय में चीन की ओर से कुछ और नरमी देखी जा सकती है। वहीं भारत की ओर से भी चीन के लोगों के लिए अधिक वीजा जारी होंगे। अमेरिका में चीन का कड़ा विरोध अघी ने कहा कि उन्होंने कहा कि अमेरिका में नया प्रशासन मैन्युफैक्चरिंग को चीन से दूर ले जाने और अमेरिका में ही रोजगार सृजन की योजना बना रहा है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में कांग्रेस की एक समिति ने सिफारिश की है कि चीन के साथ अपने व्यापार संबंधों को अमेरिका कड़ा करे। साथ ही करीब 25 साल पुराने उस फैसले को वापस लेने पर जोर दे जिसने चीन की तीव्र आर्थिक वृद्धि में मदद की थी और जिसे अब अमेरिका में कई लोग अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाला मानते हैं। इसलिए भारत के करीब आया चीन अमेरिका-चीन आर्थिक तथा सुरक्षा समीक्षा आयोग ने मंगलवार को कांग्रेस को भेजी अपनी नौ पन्नों की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार चीन के साथ स्थायी सामान्य व्यापार संबंधों को समाप्त करने का आह्वान किया। ट्रंप प्रशासन के तहत चीन के साथ व्यापार युद्ध के तेज होने के आसार हैं। वहीं चीन यह पहले ही भांप गया था कि अमेरिका में ट्रंप की सरकार बनने जा रही है। ऐसे में उसे लगने लगा था कि ट्रंप व्यापार में चीन का तवज्जो नहीं देंगे। ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद चीन ने भारत के साथ संबंध बेहतर करने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधरने के बाद चीन अपने व्यापार का बड़ा हिस्सा फिर से भारत के साथ बड़े स्तर पर शुरू कर सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार में आई कमी भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा रहा है। लेकिन जून 2020 को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद हालात बिगड़ गए थे। इसका व्यापारिक स्तर पर बड़ा प्रभाव पड़ा। दोनों देशों के बीच काफी दूरियां आ गई थीं। बढ़ गया भारत का व्यापार घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में चीन के साथ भारत का माल व्यापार घाटा 13 फीसदी बढ़ गया है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के संभावित बढ़ने से यह समस्या और बढ़ सकती है। चूंकि अमेरिका चीनी वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लगाता है, इसलिए चीन अपने अतिरिक्त उत्पादन को बेचने के लिए भारत सहित वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर सकता है। इससे भारतीय बाजार में चीनी वस्तुओं की बाढ़ आ सकती है, जिससे व्यापार घाटा और बढ़ सकता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट की तैयारियां शुरू, आमजन से सुझाव आमंत्रित : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप प्रदेश के चहुँमुखी विकास और जन-कल्याण को दृष्टिगत रखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी गई है। बजट को अधिक लोक कल्याणकारी बनाने के लिये आमजन के सुझाव आमंत्रित किये जा रहे हैं। प्रदेश का आम नागरिक राज्य के बजट को प्रभावी बनाने अपने सुझाव साझा कर सकेंगे। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में मध्यप्रदेश भी अपना योगदान देने के लिये अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विकसित मध्यप्रदेश @2047 का विजन तैयार किया जा रहा है। निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 का लोक कल्याणकारी बजट तैयार किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि राज्य का बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास व आम नागरिकों के खुशहाल जीवन को साकार करने, सतत् विकास की गति बनाये रखने, आधारभूत सुविधाओं का विकास व सभी वर्गों के कल्याण में महत्वपूर्ण साधन रहा है। समाज के सभी वर्गों से प्राप्त सुझावों, मार्गदर्शन, प्राथमिकताओं आदि से प्रदेश का बजट, सर्वांगीण विकास की दिशा में बढ़ाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। प्रदेश की राजस्व आय में वृध्दि के सुझाव भी बजट को और अधिक लोक कल्याणकारी स्वरूप देने में सहयोगी होगे। MPMYGov पर सुझाव एवं मार्गदर्शन आमंत्रित किये गये हैं। सुझाव 15 जनवरी, 2025 तक लिये जायेंगे। सुझावों के साथ आम नागरिक अपना नाम, शहर, जिला, पिनकोड एवं मोबाइल नम्बर भी अंकित करे। “आमजन निम्न मुख्य क्षेत्रों पर दे सकेंगे सुझाव”     हरित ऊर्जा जैसे बायो गैस, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने हेतु संभावित स्थलों के संबंध में।     विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार जैसे-स्मार्ट मीटर, एव्हरेज बिल की जगह एक्च्युअल बिल, विद्युत के पुराने तारों के स्थान पर केबल तार स्थापित करने, सडकों के मध्य आने वाले पोल को प्रतिस्थापित करने, अस्थाई विद्युत कनेक्शनों को स्थाई विद्युत कनेक्शनों में परिवर्तित करने हेतु तथ्यात्मक सुझाव।     परिवहन के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार हेतु सडकों (जिला मार्ग, राज्य मार्ग एवं अन्तर्राज्यीय मार्ग) के विकास हेतु तथ्यात्मक सुझाव एवं ई-परिवहन को बढावा देने हेतु सुझाव/विचार/प्रस्ताव।     ग्रामीण विकास हेतु परंपरागत व्यवसायों के पुनर्रुध्दार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, पेयजल एवं अधोसंरचनात्मक विकास हेतु तथ्यात्मक सुझाव।     गौ-वंश के संवर्धन, सरंक्षण एवं गौचारण भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने हेतु सुझाव।     मत्स्य विकास, मुर्गीपालन, दुग्ध उत्पादन, कृषि विकास, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण को बढावा देने हेतु उत्पादन एवं निर्यात के संबंध में सुझाव।     प्रदेश में प्रवाहित समस्त नदियों एवं जल स्त्रोतों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्रुध्दार हेतु सुझाव।     प्रदेश के वनों, वन्य जीवों तथा जैव-विविधता के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्रुध्दार तथा वन ग्रामों में निवासरत जन जीवन की मूलभूत सुविधाओं के विकास हेतु सुझाव।     स्थानीय पर्यटन को बढावा दिये जाने हेतु मध्यप्रदेश में स्थित धार्मिक, नैसर्गिक (प्राकृतिक), ऐतिहासिक धरोहरों/स्थलों के विकास हेतु तथ्यात्मक सुझाव।     शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अधोसंरचनात्मक विकास हेतु सरकार के अतिरिक्त आमजनों के द्वारा आर्थिक सहयोग प्राप्त किये जाने हेतु सुझाव।     रोजगार एवं उद्योग के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार हेतु क्षेत्र विशेष जैसे- जिला, ब्लॉक, नगर, ग्राम आदि में स्थापित किये जा सकने वाले उद्योग (निर्माण उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण, कृषि उद्योग एवं फर्नीचर उद्योग, कुटीर एवं हथकरघा, टेक्सटाईल, खिलौना, स्टेशनरी, गृह निर्माण सामग्री, वनोपज प्र-संस्करण, औषधि निर्माण आदि)।     वोकल फॉर लोकल के अंतर्गत “एक जिला-एक उत्पाद” के लिए स्थानीय उत्पादों के उत्पादन एवं निर्यात हेतु सुझाव।     प्रदेश के पुराने शहरों में सड़को/गलियारों के चौड़ीकरण, ऐतिहासिक व पुरानें बाजारों के पुनर्विकास एवं अतिक्रमण/झुग्गी मुक्त शहरों की परिकल्पना हेतु सुझाव।     सड़क, पुल, पार्कों एवं अन्य अधोसंरचनात्मक विकास हेतु सुझाव।     जन स्वास्थ्य से संबंधित क्षेत्रों पर सुझाव।     महिला एवं बाल विकास से संबंधित क्षेत्रों पर सुझाव।     सामाजिक सुधार जैसे- दिव्यांगजन/भिखारियों/आवासहीन/बेसहारा जनों आदि के कल्याण हेतु सुझाव।     राजस्व संग्रहण को बढावा देने हेतु सुझाव।     प्रशासनिक सुधार से संबंधित सुझाव।     अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित सुझाव। यहां दिए जा सकेंगे सुझाव     MPMyGov Portal     Toll free no.: 0755-2700800     Email id: budget.mp@mp.gov.in     डाक से पत्राचार: संचालक (बजट) वित्तीय प्रबंध सूचना प्रणाली 218-एच, द्वितीय तल, वित्त विभाग, मंत्रालय, भोपाल, मध्यप्रदेश 462004  

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