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सीटीईटी एडमिट कार्ड जल्द ही जारी होने की संभावना, उम्मीदवार नोट कर लें डेट

नई दिल्ली सीटीईटी परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए अहम सूचना है। परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जल्द ही जारी होने की संभावना है। फिलहाल, सीबीएसई बोर्ड ने इस बारे में कोई सूचना तो नहीं दी है लेकिन आमतौर पर परीक्षा से चार या पांच दिन पहले प्रवेश पत्र आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए जाते हैं तो इसी आधार पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि हॉल टिकट 10 या 11 दिसंबर तक जारी हो सकते हैं, क्योंकि सीटीईटी परीक्षा 14 दिसंबर, 2024 के लिए निर्धारित है। परीक्षार्थी को प्रवेश पत्र जारी होने की सटीक डेट मालूम करने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करना चाहिए। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर 14 दिसंबर, 2024 को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) का आयोजन किया जाएगा। यह परीक्षा दो पालियों में कंडक्ट कराई जाएगी। इसके अनुसार, पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक संचालित की जाएगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक होगी। बता दें कि पेपर II सुबह की पाली में और पेपर I शाम की पाली में आयोजित किया जाएगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए नीचे आसान स्टेप्स दिए जा रहे हैं, जिनको फॉलो करके अभ्यर्थी आसानी से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। सबसे पहले कैंडिडेट्स को आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाना होगा। अब, होम पेज पर “केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) हॉल टिकट लिंक” पर क्लिक करें। होम पेज पर लिंक पर अपना लॉगिन क्रेडेंशियल प्रदान करें। उम्मीदवारों को एक नई विंडो में प्रवेश पत्र खुलकर आ जाएगा। अब भविष्य के संदर्भ के लिए इसे डाउनलोड करें और सहेजें। इस तारीख से शुरू हुई सीटीईटी परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया केंद्रीय शिक्षक पात्रत परीक्षा (CTET Exam 2024) परीक्षा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू हुई थी। कैंडिडेट्स को 16 अक्टूबर तक आवेदन करने का मौका दिया गया था। आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों को आवेदन फॉर्म में करेक्शन का मौका दिया गया था। वहीं, अब उम्मीदवारों को एग्जाम सिटी स्लिप और प्रवेश पत्र का इंतजार है, जिसके जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। बता दें कि परीक्षा को कई बार रीशेड्यूल किया गया है।

पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की पदयात्रा श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह, विदेशों से‌ भी आ रहे भक्त

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों ‘हिंदू जोड़ो पदयात्रा’ काफी सुर्खियों में है. इस दौरान बागेश्वर धाम आश्रम का दावा है कि यात्रा में शामिल होने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुयायी आ रहे हैं. खास तौर पर विदेश में भी हिंदू धर्म के प्रति जो आस्था बढ़ी है, वह यात्रा में शामिल होने वाले लोगों में साफ देखी जा सकती है. जाहिर है कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों को जोड़ने के लिए यात्रा निकाल रहे हैं. इस यात्रा में बड़ी संख्या में नेता से लेकर अभिनेता शामिल हो रहे हैं. दूसरी तरफ बागेश्वर धाम आश्रम ने एक दावा किया है कि हिंदू जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए विदेश से भी लोग आ रहे हैं. बागेश्वर धाम आश्रम में ऑस्ट्रेलिया से आधा दर्जन से ज्यादा लोगों पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू सनातन यात्रा में शामिल होने के लिए आ रहे हैं. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में विदेशी अनुयायी है. ऐसे में हिंदू जोड़ो यात्रा का प्रचार विदेश तक भी पहुंच गया है. पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दिया नया नारा पर्चियों के माध्यम से लोगों की समस्या का हल करने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री यात्रा के दौरान रोज नया नारा दे रहे हैं. उन्होंने यात्रा के दौरान नारा देते हुए कहा कि, “मैं हिंदू हूं, मैं हिंदू हूं और मैं हिंदुस्तान हूं.” धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हिंदुओं को एक करने के लिए लंबे समय से भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग कर रहे हैं. यात्रा में राजनेता भी शामिल पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के द्वारा छतरपुर से ओरछा तक निकाली जा रही यात्रा में बड़ी संख्या में राजनेता शामिल हो रहे हैं. इस यात्रा में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता भी लगातार यात्रा में शामिल हो रहे हैं. इस वजह से भी ये यात्रा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

कैरियर बदलने से पहले सोचें कई बार

किसी भी कैरियर में बहुत आगे बढ़ने के बाद कई युवा साथी कैरियर शिफ्ट करने की इच्छा रखते हैं। वे एक तरह की जिंदगी से कुछ अलग करना चाहते हैं जो उनके दिल को पसंद हो। इस प्रकार के कैरियर शिफ्ट में न केवल जोखिम रहता है बल्कि यह कैरियर का एक ऐसा मोड़ रहता है जहां से आप पर आर्थिक रूप से बहुत बोझ भी रहता है।    ऐसे में अगर आप बदलाव कर रहे हैं तब इन बातों का जरूर ख्याल रखें। ऐसा न हो कि महज बदलाव के लिए आपने कैरियर शिफ्ट कर लिया पर बाद में लगा कि अपने हाथों से पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। पैसा सब कुछ नहीं कैरियर में बदलाव करते समय अगर आप यह सोचते हैं कि जो वर्तमान में कार्य कर रहे हैं उसमें पैसा कम है और कैरियर शिफ्ट के बाद ज्यादा पैसा मिल जाएगा तब आप गलत दिशा में सोच रहे हैं। प्रत्येक कैरियर में अलग-अलग तरह की प्रक्रियाएं रहती हैं आगे बढ़ने के लिए। इस कारण पैसे को ही देखकर करियर शिफ्ट न करें। किसी और ने किया इसलिए आप भी करें यह अकसर देखा गया है कि कोई व्यक्ति लगातार पांच-आठ वर्षों तक एक ही कंपनी में कार्य कर रहा है और कंपनी में काम करने वाले उसके एक साथी ने कैरियर शिफ्ट किया क्योंकि उसे मीडिया में काम करने की इच्छा थी। साथी ने कैरियर शिफ्ट किया है इसलिए आप भी करें यह जरूरी नहीं। आप अपनी सहूलियत देखें। अपनी क्षमता को पहचानें कई बार युवा साथी जोश में आकर कैरियर शिफ्ट करने के बारे में विचार करते हैं और उस पर अमल भी कर देते हैं। जब वे दूसरे कैरियर के लिए काम करने जाते हैं तब असहज महसूस करते हैं। यह इस कारण भी होता है क्योंकि आप अपनी क्षमता से परिचित नहीं हैं। कैरियर शिफ्ट करने के पहले इस ओर जरूर ध्यान दें कि क्या वाकई आपमें उतनी क्षमता है। किसी विकल्प का चयन मात्र इसलिए न करें क्योंकि वह आपके लिए अंतिम विकल्प है। यदि आप इस संबंध में किसी उलझन में हैं तो खुद का आंकलन पहले करें। नई डिग्री लें या नहीं युवा साथी पांच वर्ष के कैरियर के बाद अपने पसंद के कैरियर को अपनाने के लिए नई डिग्री लेने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। पर इस बात का ध्यान दें कि आप पांच वर्षों बाद पुनः पढ़ाई करने जा रहे हैं। डिग्री आपको फायदेमंद भी साबित हो सकती है और नुकसान भी हो सकता है क्योंकि आप डिग्री प्राप्त करने के लिए अलग ध्यान लगा रहे हैं और वर्तमान में जो काम कर रहे हैं उस पर आपका ध्यान नहीं होता। ऐसे में आप न इधर के रहते हैं न उधर के। कैरियर में बदलाव संबंधी बड़े फैसले अपने आप न करें। इस संबंध में अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात करें। हो सकता है आपकी इस समस्या में वे आपको बेहतर विकल्प दें।  

चार आवेदकों को पटवारी के पद पर मिली अनुकम्पा नियुक्तिके भीतर

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशा अनुरूप अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों को समय-सीमा के भीतर निराकरण किया जा रहा है। महासमुंद जिले के भू-अभिलेख शाखा अनुकम्पा नियुक्ति के चारों प्रकरणों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए एक माह के भीतर ही अनुकम्पा नियुक्ति के आदेश जारी किये गये है। इन आवेदकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संवेदनशील सरकार की सुशासन का ही परिणाम है कि उनके आवेदन पर त्वरित कार्यवाही करते हुए उन्हें अनुकम्पा नियुक्ति मिली है।  लोकसभा सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, और स्थानीय विधायक महासमुंद श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने पटवारी के पद पर श्री कौशल कुमार बुड़ेक, श्री राजनारायण झारेय, श्रीमती पूनम नंद, और श्री भूपेन्द्र कुमार सेन को पटवारी पद के लिए नियुक्ति आदेश प्रदान किया। इन आवेदकों को पटवारी प्रशिक्षण शाला जिला रायपुर में आगामी प्रशिक्षण सत्र में पटवारी प्रशिक्षण दिया जायेगा। एक वर्ष का निर्धारित पटवारी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद  आवेदकों द्वारा पटवारी परीक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर पटवारी पद पर नियुक्ति का आदेश पृथक से जारी किया जाएगा। अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने वाले आवेदक श्री भूपेन्द्र कुमार सेन ने बताया कि उनके पिता स्व. श्री कृष्ण कुमार सेन जनपद पंचायत महासमुंद में विकास विस्तार अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। वर्ष 2022 में उनके अचानक मृत्यु हो जाने के कारण बहन और माता की जिम्मेदारी भी उनके उपर आ गई थी। घर की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी थी। उन्होंने बताया की नए सरकार के गठन के पश्चात प्रक्रिया में तेजी आई और जैसे ही आवेदन भू-अभिलेख शाखा में पहुंचा वैसे ही समय में आवेदन का निराकरण हुआ और हमें पटवारी के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति मिली है।

शहर में इस साल कड़ाके की ठंड में अलाव नहीं जलाए जाएंगे, आबोहवा रहे स्वच्छ लिया निगम ने फैसला

 भोपाल  शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इस बार शहर में अलाव नहीं जलाए जाएंगे । नगर निगम प्रशासन ने यह निर्णय पहली बार लिया है ताकि वायु प्रदूषण का स्तर कम किया जाए सके। लिहाजा शहर के वह 500 स्थान जहां पर हर साल कड़ाके की ठंड पड़ते ही अलाव जलाए जाते थे, वहां इस बार अलाव नहीं जलाए जाएंगे। नगर निगम की इस पहल से यकीनन वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी, लेकिन अहम बात यह है कि जो लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते थे। वह किस तरह इस कड़ाके की ठंड से अपना अब बचाव करेंगे। लोगों से अपील इसको लेकर भी निगम ने नागरिकों से अपील की है कि बेवजह ठंडे में बाहर नहीं रहें। रैन बसेरों में पर्याप्त कमरे और गर्म रजाई-गद्दे हैं। वह आराम से वहां सोए। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के संग सिर्फ एक अटेंडर परिसर में रुके। बाकी के लोग अपने घरों में रहें। प्राइवेट कॉलोनियों में जो लोग अलाव जलाते रहे हैं, वे हीटर का उपयोग करें। ताकि लोग ठंडे से भी बचे रहें और शहर की हवा भी स्वच्छ हो सके। अलाव के लिए नहीं किए आदेश जारी शहर में अलाव जलाने के लिए नगर निगम द्वारा कड़ाके की ठंड पड़ते ही अलाव के लिए लकड़ियां मुहैया करवाने के आदेश जारी किए जाते थे, लेकिन इस बार निगमायुक्त ने ऐसा कोई आदेश नहीं जारी किया। अलाव जलाने के लिए निगम के स्टोर से लकड़ियां मुहैया करवाई जाती थीं। इन लकड़ियों को निगम के वाहनों से सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचाया जाता था। जिसमें डीजल खर्च के अलावा निगम को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता था, लेकिन इस बार अलाव नहीं जलाए जाएंगे। लिहाजा लाखों रुपये के डीजल खर्च की बचत भी होगी। इसलिए लिया निर्णय शहर की हवा की सेहत को सुधारने के लिए निगम प्रशासन ने यह निर्णय लिया है, क्योंकि तमाम प्रयास के बाद भी शहर में बढ़ता वायु प्रदूषण कम नहीं हो रहा। शुक्रवार को भी शहर का एक्यूआई 300 पार हो गया था। शाम सात बजे पर्यावरण परिसर क्षेत्र में एक्यूआई 305, टीटी नगर में 285 और कलेक्ट्रेट में 236 दर्ज किया गया थे। शहर की हवा में अभी भी पीएम 2.5 धूल कण अधिक मात्रा में है, जो कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को बीमार करने के लिए काफी है। इस हवा में सांस लेना बीमारियों को न्योता देने के बराबर है। सर्दी ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड हालांकि राजधानी में कड़ाके की ठंड पड़ना शुरू हो चुकी है। भोपाल में सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। नवंबर में सबसे ठंडी शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात रही, जब पारा लुढ़ककर 8.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भोपाल में न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया था। इससे पता चलता है कि सर्दी लगातार जोर पकड़ रही है।

कप्तान एलिसा हीली की गैर मौजूदगी में आस्ट्रेलिया की 13 सदस्यीय महिला टीम की कप्तान बनेगी ताहलिया

सिडनी अनुभवी हरफनमौला ताहलिया मैकग्रा को भारत के खिलाफ अगले महीने होने वाली तीन मैचों की वनडे श्रृंखला के लिये नियमित कप्तान एलिसा हीली की गैर मौजूदगी में आस्ट्रेलिया की 13 सदस्यीय महिला टीम का कप्तान बनाया गया। चौतीस वर्ष की एलिसा घुटने की चोट के कारण भारत के खिलाफ पांच दिसंबर से ब्रिसबेन में शुरू हो रही श्रृंखला नहीं खेल सकेंगी। वह महिला बिग बैश लीग के आखिरी चरण में भी नहीं खेल पाई थी। दूसरा वनडे आठ दिसंबर को ब्रिसबेन में और तीसरा 11 दिसंबर को पर्थ में खेला जायेगा। महिला बिग बैश लीग में सिडनी थंडर के लिये खेलने वाली जॉर्जिया वोल को टीम में शामिल किया गया है। आस्ट्रेलियाई टीम में अनुभवी बेथ मूनी, एलिसे पेरी, मेगान शट और अनाबेल सदरलैंड भी है। आस्ट्रेलियाई टीम 19 से 23 दिसंबर तक वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी तीन वनडे खेलेगी। राष्ट्रीय चयनकर्ता शॉन फ्लेगलेर ने कहा, ‘‘एशेज को ध्यान में रखते हुए एलिसा हीली को आराम देने का फैसला किया गया है।ताहिलया मैकग्रा ने विश्व कप के दौरान कठिन हालात में कप्तान के तौर पर प्रभावित किया है। हमने एशेज श्रृंखला और आईसीसी महिला विश्व कप को ध्यान में रखकर अनुभवी टीम चुनी है।’’ टीम : डार्सी ब्राउन, एशले गार्डनर, किम गार्थ, अलाना किंग, फोबे लिचफील्ड, ताहलिया मैकग्रा, सोफी मोलिनू, बेथ मूनी, एलिसे पेरी, मेगान शट, अनाबेल सदरलैंड, जॉर्जिया वोल, जॉर्जिया वेयरहेम (भारत श्रृंखला), एलिसा हीली (न्यूजीलैंड श्रृंखला)।  

चैंपियंस ट्रॉफ़ी पर चर्चा के लिए आईसीसी ने 26 नवम्बर को अपनी बोर्ड की आपात बैठक बुलाई

दुबई आईसीसी ने 26 नवम्बर को अपनी बोर्ड की आपात बैठक बुलाई है, जिसमें 2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी पर चर्चा की जाएगी। ईएसपीएन क्रिकइंफो को यह जानकारी मिली है कि बैठक का एकमात्र एजेंडा यह है कि क्या टूर्नामेंट के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाए, जिसमें पाकिस्तान और किसी अन्य देश में इसे आयोजित किया जाए। टूर्नामेंट की संभावित शुरुआत से 100 दिन से भी कम समय बचा है। मेज़बान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने इसे 19 फ़रवरी से 9 मार्च तक आयोजित करने के लिए निर्धारित किया है। हालांकि आईसीसी ने अभी तक शेड्यूल जारी नहीं किया है। लेकिन इस पर अभी इससे भी ज़्यादा बड़ा रोड़ा अटका हुआ है। बीसीसीआई ने आईसीसी को सूचित किया है कि भारतीय सरकार ने रोहित शर्मा की टीम को पाकिस्तान यात्रा करने की अनुमति नहीं दी है। पाकिस्तान को नवंबर 2021 में इस आठ-टीम के वनडे टूर्नामेंट की मेज़बानी के अधिकार दिए गए थे और वह तीन वेन्यूज़ – लाहौर, कराची और रावलपिंडी में पूरे टूर्नामेंट का आयोजन करने के लिए अडिग है। पाकिस्तान में इस सप्ताह मीडिया से बात करते हुए पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नक़वी ने कहा था कि उन्हें चैंपियंस ट्रॉफ़ी पाकिस्तान में आयोजित होने के बारे में “सकारात्मक अपेक्षाएं” हैं। नक़वी पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्रालय के प्रमुख भी हैं, उन्होंने कहा कि वह बीसीसीआई से इस गतिरोध को तोड़ने के लिए संवाद करने के लिए तैयार हैं। पीसीबी आईसीसी से इस बात का जवाब पाने का इंतज़ार कर रहा है कि भारत को पाकिस्तान यात्रा करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती।” यह लगातार दूसरा वर्ष है जब पाकिस्तान को भारत की वजह से टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर आयोजित करने के प्रश्न से जूझना पड़ा है। पिछले वर्ष एशिया कप के लिए भी भारत ने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था, जिसके चलते टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर पाकिस्तान और श्रीलंका में आयोजित करना पड़ा था। इसके ठीक बाद पाकिस्तान को वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारत की यात्रा करनी पड़ी थी, पीसीबी ने हाल ही में कहा था कि उसने यह फ़ैसला इसलिए किया था ताकि इसके चलते उसे चैंपियंस ट्रॉफ़ी केवल पाकिस्तान में ही आयोजित किए जाने का ठोस आधार मिलेगा। इसी सप्ताह की शुरुआत में भारत को टी20 ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप से अपना नाम वापस लेना पड़ा था क्योंकि भारतीय टीम को सरकार से पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं मिल पाई थी।  

‘गाजा में मौतों का आंकड़ा 44 हजार के पार’, इस्राइल-हमास जंग पर फलस्तीनी अधिकारी का दावा

 गाजा  गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में गाजा पट्टी में मरने वालों की संख्या 44,000 से अधिक हो गई है। बता दें कि 13 महीने से ज्यादा वक्त से जारी युद्ध के दौरान मारे गए लोगों में गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय लड़ाकों और नागरिकों के बीच अंतर नहीं करता है, उसक कहना है कि हताहतों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। एक लाख से ज्यादा लोग घायल- गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय इधर इस्राइली सेना का कहना है कि उसने बिना सबूत दिए 17,000 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से 44,056 लोग मारे गए हैं और 104,268 घायल हुए हैं। हालांकि मंत्रालय का ये भी दावा है कि वास्तविक संख्या अधिक है क्योंकि हजारों शव मलबे के नीचे या ऐसे क्षेत्रों में दबे हुए हैं जहां चिकित्सक और चिकित्सीय सुविधाएं नहीं पहुंच सकती हैं। नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने गुरुवार को इस युद्ध के लिए इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलंट और हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद डेफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. ICC ने इन्हें युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना है. कोर्ट ने नेतन्याहू के खिलाफ आरोपों की जांच का भी आदेश दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ICC ने कहा कि नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री ने जानबूझकर फिलिस्तीनी नागरिकों को मारने के आदेश दिए. साथ ही, गाजा में अंतरराष्ट्रीय मानवीय मदद पहुंचने से रोकने के लिए कदम उठाए, जिससे वहां भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हुई. हमास के हमले से शुरू हुआ युद्ध यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ, जब हमास के आतंकवादियों ने दक्षिणी इजराइल पर हमला किया. इस हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए और 250 लोगों का अपहरण कर लिया गया. इनमें से करीब 100 लोग अब भी गाजा में बंधक हैं. रिपोर्ट के अनुसार इनमें से एक-तिहाई की मौत हो चुकी है. 7 अक्तूबर 2023 को शुरू हुआ था युद्ध इस्राइल और हमास में युद्ध तब शुरू हुआ जब 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के लड़ाकों ने दक्षिणी इस्राइल में धावा बोल दिया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे, और 250 अन्य का अपहरण कर लिया गया। एक जानकारी के अनुसार, लगभग 100 बंधक अभी भी गाजा के अंदर हैं, जिनमें से कम से कम एक तिहाई के मारे जाने का अनुमान है। बाकी में से ज्यादातर को पिछले साल संघर्ष विराम के दौरान रिहा कर दिया गया था। अचानक गाजा के दौरे पर पहुंचे थे पीएम बेंजामिन नेतन्याहू वहीं इससे दो दिन पहले 19 नवंबर को इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अचानक गाजा के दौरे पर पहुंचे थे। गाजा से एक वीडियो संदेश जारी करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि हमास अब कभी भी गाजा पर फिर से शासन नहीं कर सकेगा। नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली सशस्त्र बलों ने हमास को पूरी तरह से तबाह कर दिया है, इस दौरान उन्होंने बंधकों को छुड़ाने की बात भी कही। इस वीडियो में नेतन्याहू बैलिस्टिक हेलमेट और युद्ध की वर्दी पहने दिखाई दिए थे।  

स्टार की करारी हार, 56 लाख फॉलोवर्स वाले Ajaz Khan को मिले महज 153 वोट

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजे सामने आ रहे हैं। महायुति एक बार फिर से सत्ता में वापसी कर रही है। इस बीच महाराष्ट्र की ‘वर्सोवा’ सीट भी बेहद चर्चा में है। इस सीट से बिग बॉस के एक्स कंटेस्टेंट और अभिनेता एजाज खान भी चुनावी मैदान में थे। हालांकि, चुनावी नतीजे देखकर लग रहा है कि एजाज का ये फैसला गलत निकला है क्योंकि अगर वोटिंग रिजल्ट देखा जाए, तो एक्टर का करारी हार का सामना करना पड़ा है। ‘वर्सोवा’ सीट पर मतगणना जारी महाराष्ट्र की ‘वर्सोवा’ सीट सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि इस सीट से एजाज खान चुनावी रणभूमि में थे। एजाज ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के टिकट पर नामांकन किया था। अभी भी ‘वर्सोवा’ सीट मतगणना जारी है और एजाज को अब तक महज 153 वोट मिले हैं। बता दें कि 10वें राउंड तक एजाज खान को सिर्फ 79 वोट मिले थे। हालांकि, दसवें राउंड के बाद हारूण 32,499 वोट 6,856 मतों से आगे चल रहे थे। वहीं, अगर बीजेपी की भारती की बात करें तो उन्हें 25,643 वोट मिले थे। इंस्टाग्राम पर एजाज की तगड़ी फैन फॉलोइंग गौरतलब है कि एजाज खान को सोशल मीडिया पर लोग खूब पसंद करते हैं। एजाज की इंस्टाग्राम पर तगड़ी फैन फॉलोइंग है। अगर एजाज के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की बात करें तो उन्हें करीब 5.6 मिलियन लोग इंस्टा पर फॉलो करते हैं, इसके बाद भी उन्हें इतने कम वोट मिलना अपने आपमें ही हैरानी की बात है। ‘वर्सोवा’ सीट से एजाज की हार की वजह से अब चारों ओर उनकी बातें हो रही हैं और लोग इस पर तरह-तरह का रिएक्शन दे रहे हैं। एजाज को नहीं मिले वोट जैसे ही महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आने लगे तो सोशल मीडिया पर चुनावी नतीजों की चर्चा होने लगी और इसी के साथ एजाज को ट्रोल किया जाने लगा। लोगों ने कहा कि जिस शख्स को इंस्टाग्राम पर 5 मिलियन से भी ज्यादा लोग फॉलो करते हैं उसे 150 वोटों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है, तो बेहद बड़ी बात है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानभा में कुल 288 सीटें हैं और महायुति गठबंधन को 220 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, लेकिन इस हार की वजह से एजाज को खूब ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर हो रहे ट्रोल हालांकि ये पहली बार नहीं है जब एजाज चुनाव हार गए हों। हर मामले में अपना रिएक्शन देने वाले एजाज का अभी तक रिएक्शन सामने नहीं आया है। मतगणना को देखते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जाने लगा है। लोग उन्हें बोल रहे हैं कि ये आदमी सोशल मीडिया में खूब हीरो बनता है, लेकिन असल में सच्चाई दिख गई। वहीं, कुछ लोग उन्हें छपरी भी बता रहे हैं। एजाज के 56 लाख फॉलोअर्स हैं सोशल मीडिया पेज खुरपेंच ने अपनी पोस्ट में लिखा, संसद और विधायिका में लगभग हर वर्ग से लोग चुनकर जाते हैं , लेकिन आज तक छपरी समाज से वहां तक कोई नहीं पहुंच पाया , एजाज खान जी ने कोशिश की लेकिन उनको सिर्फ 103 वोट ही प्राप्त हुए हैं। ये सिर्फ छपरी समाज की हार नहीं है बल्कि समाज के तौर पर हमारी और लोकतंत्र की हार है। बता दें, सोशल मीडिया पर एजाज को 5.6 मिलियन लोग फॉलो करते हैं।

ये लड़की 158 लड़कों के साथ संबंध बना चुकी है मात्र 14 दिनों में, माँ लेकर देती है कंडोम, करती थी सफाई

नॉटिंघम पोर्न इंडस्ट्री आजकल युवाओं को काफ़ी आकर्षित कर रही है. इसकी वजह है इसमें मिलने वाला पैसा. युवाओं का मानना है कि जल्दी पैसा कमाने के तरीकों में से ये एक है. कुछ माता-पिता अपने बच्चों के पोर्न इंडस्ट्री में काम करने को न सिर्फ़ स्वीकार करते हैं, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं. कुछ दिन पहले इससे जुड़ा एक रील वायरल हुआ था. एक व्यक्ति ने बताया था कि जब उसने अपने माँ को पोर्न फिल्म में काम मिलने की बात बताई तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी. अब एक पॉर्न स्टार ने एक हैरान करने वाली बात बताई है.   पॉर्न स्टार का नाम बोनी ब्लू (Bonnie Blue) है. हाल ही में एक इंटरव्यू में बोनी ब्लू ने अपनी कमाई और काम के बारे में एक चौंकाने वाली बात बताई. वो एक एडल्ट साइट पर युवाओं का कंटेंट पोस्ट करती है. उसने बताया कि दो हफ़्तों में उसने 158 पुरुषों के साथ संबंध बनाए. कॉलेज के लड़के आगे आए! : बोनी ब्लू ने वीडियो कंटेंट के लिए कॉलेज के लड़कों के सामने अपना प्रस्ताव रखा. उसने 18-19 साल के लड़कों से बात की. सिर्फ़ 14 दिनों में 158 युवक इसके लिए तैयार हो गए. पहले बोनी ब्लू ने उनसे सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए. फिर उनके साथ संबंध बनाए. उसके इस काम में उसके माता-पिता ने पूरा साथ दिया. उन्होंने बोनी की मदद की और उसे इस काम के लिए प्रोत्साहित किया. अब वही वीडियो बोनी ब्लू के लिए कमाई का ज़रिया बन गए हैं. बोनी ब्लू ने बताया कि वो वीडियो से काफ़ी पैसा कमा रही है. फ्रेशर्स के साथ किया सेक्स लोकप्रिय सोशल मीडिया स्टार ने हाल ही में दावा किया कि उसने अपने ऑनलाइन कंटेंट के लिए यूनिवर्सिटी फ्रेशर्स के साथ सेक्स किया है। बोनी ने कहा कि उसने अपने OnlyFans पेज के लिए कंटेंट बनाने के लिए 18 और 19 साल के लड़कों को अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उसने दावा किया कि लड़के सहमति फॉर्म पर साइन करने से पहले घंटों तक अपार्टमेंट के अंदर कतार में खड़े रहते थे। शिकारी महिला से बच के रहना नॉटिंघम में जन्मी इस एडल्ट फिल्म स्टार ने अब खुलासा किया है कि उसके माता-पिता ने उसके इस आंकड़े को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। उसने दावा किया है कि वह अपने वीडियो से हर महीने £750,000 कमाने वाली है। इस महीने की शुरुआत में, बोनी ब्लू ने जल्दी पैसे कमाने के लिए सेक्स की योजना बनाई। सोशल मीडिया पर लोग अब इस महिला को “शिकारी” कह रहे हैं। मां ने किया सपोर्ट स्टार ने कहा- “मेरी मां नए छात्रों के बीच जाकर उन्हें पर्चे और कंडोम बांटती थीं और कहती थीं, ‘जाओ और मेरी बेटी के साथ सेक्स करो’. मूल रूप से डर्बीशायर की रहने वाली बोनी वास्तव में ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं. हालांकि, इस साल की शुरुआत में, उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि वह ऑस्ट्रेलियाई गर्मियों को छोड़कर ब्रिटेन के ठंडे तापमान की ओर वापस जा रही हैं ताकि कुछ मसालेदार कंटेंट बना सकें जिससे उन्हें पैसे की बरसात हो रही है. माँ लाती थी कंडोम : आज की दुनिया और लोगों की सोच बिल्कुल अलग है. बेटी के पोर्न वीडियो के लिए माँ का पूरा सहयोग है. बोनी ब्लू की माँ ने उसके लिए लोगो तैयार किया और घर आने वाले पुरुषों को कंडोम देती है. उनके जाने के बाद घर की सफ़ाई का ज़िम्मा भी माँ का ही है. पिता सभी को बिज़नेस कार्ड देते हैं. बोनी ब्लू ब्रिटेन के डर्बीशायर की रहने वाली है. अब वो ऑस्ट्रेलिया में रहती है. बोनी को किसी कंपनी में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. इसलिए उसने ये पेशा चुना. बोनी ब्लू ने शुरुआत में अपने माता-पिता की मर्ज़ी के बिना ये काम शुरू किया था. लेकिन पहला वीडियो लीक होने के बाद सब बदल गया. बोनी ब्लू बताती है कि उसके माता-पिता बेटी का वीडियो देखकर हैरान नहीं हुए, बल्कि उसका साथ दिया. उन्होंने कहा कि तुम्हारी ख़ुशी में ही हमारी ख़ुशी है और बेटी के काम में मदद करने लगे.

महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत में कांग्रेस को गुजरात वाली चोट मिली, कांग्रेस नहीं बचा पाई नेता विपक्ष की कुर्सी

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति की प्रचंड जीत में कांग्रेस को गुजरात वाली चोट मिली है। 2022 के गुजरात विधानसभा चुनावों कांग्रेस सिर्फ 17 सीटें जीत पाई थी। इसके बाद राज्य की सत्ता में 25 साल से बाहर कांग्रेस के हाथों से नेता विपक्ष का पद भी चला गया था। महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों में भी कुछ ऐसी स्थिति उभरी है। विपक्ष गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को कोई भी घटक जरूरी 29 सीटों के आसपास पहुंचता नहीं दिख रहा है। नियमानुसार संसद और विधानसभा में नेता विपक्ष के लिए 10 फीसदी सीटों का होना आवश्यक है। महाराष्ट्र में कम से 29 सीटों होनी चाहिए। कांग्रेस को 25 सीटों के अंदर सिमटती गई है। ऐसे में सवाल खड़ हो गया है कि जिस महाविकास आघाड़ी में सीएम बनने के लिए लड़ाई थी। उसके घटक दल नेता विपक्ष की हैसियत भी नहीं रख पाए। गुजरात को बनाया था मुद्दा महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र से गुजरात की तरफ निवेश, कारखाने और नौकरियां जानें को चुनावी मुद्दा बनाया था, लेकिन एमवीए का यह दांव उल्टा पड़ा। महायुति को 220 से अधिक सीटें मिलती दिख रही है तो वहीं एमवीए 50 के आसपास सिमट गया है। राहुल गांधी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के 99 सीटें हासिल करने के बाद नेता विपक्ष बन पाए थे। लोकसभा में 13 सीटें जीतने वाली कांग्रेस की यह दुर्गति होगी यह शायद किसी ने नहीं सोचा था। गुजरात के बाद कांग्रेस महाराष्ट्र में भी कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। महाराष्ट्र में कांग्रेस ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था। आखिर में कांग्रेस को मिला था पद 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी बनी थी। से 105 सीटों पर जीत मिली थी। दूसरे नंबर पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और फिर तीसरी नंबर पर एनसीपी रही थी। शिवसेना और एनसीपी के टूटने के बाद कांग्रेस को राज्य में नेता विपक्ष का पता मिला था। जब राज्य में शिंदे सीएम बने थे तो पहले संख्याबल के हिसाब से एनसीपी को यह पद मिला था और अजित पवार नेता विपक्ष बने थे। एनसीपी के टूटने के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी हो गई थी। तब विजय वडेट्टीवार नेता विपक्ष बने थे। वह 1 साल 112 दिनों तक नेता विपक्ष रहे। 2024 के चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि वह नेता विपक्ष की कुर्सी भी नहीं बचा पाई।

डेढ़ लाख बालिकाओं को दिलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण

स्कूल में पढ़ने वाली बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के लिये दिया जा रहा है प्रशिक्षण  प्रदेश में एक लाख 50 हजार बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के लिये जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया डेढ़ लाख बालिकाओं को दिलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण भोपाल प्रदेश में शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं में आत्म-विश्वास और सुरक्षा की भावना सशक्त करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रानी लक्ष्मीबाई आत्म सुरक्षा प्रशिक्षण योजना चलाई जा रही है। योजना से प्रदेश में करीब एक लाख 50 हजार बालिकाओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया है। योजना में 15 हजार 245 शासकीय विद्यालयों की 80 हजार 466 बालिकाओं को प्रशिक्षण दिलाया गया। इसी के साथ प्रदेश में संचालित 207 कस्तूरबा गांधी विद्यालय और 324 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस बालिका छात्रावास में अध्ययनरत 70 हजार 450 बालिकाओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया। स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से 8 की बालिकाओं के विद्यालयों के लिये प्रशिक्षण राशि भी जारी की है। दृष्टि बाधित बच्चों को पुस्तकों का वितरण स्कूल शिक्षा विभाग ने दृष्टि बाधित बच्चों की सुविधा को देखते हुए उनके पाठ्यक्रम की समस्त पुस्तकें ब्रेल लिपि में उपलब्ध करवाई हैं। ब्रेल लिपि पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण शासकीय ब्रेल प्रेस भोपाल से कराया गया है। दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन प्रदेश के शासकीय स्कूलों में पढने वाले दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन शिविरों के माध्यम से कराया गया। पिछले वर्ष 30 जिलों के विकासखंडों पर आयोजित शिविर में 6 हजार 560 दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी आवश्यकता के उपकरण वितरित किये गये। इसी के साथ दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को भी गृह आधारित शिक्षा एवं बच्चों की दैनिक गतिविधियों पर फेस-टू-फेस प्रशिक्षण जिला स्तर पर प्रदान किया गया है।  

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में मिलिंग नीति की खाद्य मंत्री ने की समीक्षा

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के मिलिंग नीति की समीक्षा की। उन्होंने अफसरों को कड़े निर्देश दिये  कि उपार्जन के दौरान या उसके बाद होने वाली गड़बडि़यों को रोकने के लिए विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त उपार्जन केन्द्रों का औचक निरीक्षण करें। मंत्रालय में प्रस्तावित मिलिंग नीति की समीक्षा करते हुए खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अफसर कड़े निर्णय लेने से गुरेज न करें। व्यवस्था में सुधार लाने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनिमितता पाये जाने पर जिम्मेदारों के  खिलाफ कठोर कार्यवाही करें। उपार्जन में गड़बड़ी रोकने के लिए उड़न दस्ता गठित करें। उड़नदस्ता औचक रूप से उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे।     मंत्री राजपूत ने कहा कि मैदानी स्तर पर   जिला प्रबंधक नियमानुसार कार्य करने में कोई कोताही न बरतें।  अफसरों को निर्देश दिये गये कि उपार्जन कार्य में संलग्न सर्वेयरों पर सतत् निगरानी रखें, जिससे वे उपार्जन के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही न करें। उन्होंने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कुछ नई कार्य-योजना बनाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये। बैठक में प्रमुख सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य सिबि चक्रवर्ती, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम पी.एन. यादव सहितसंबंधित अधिकारी उपस्थित थे।   मशीनों से होगी अनाज की सफाई, मंडला में पायलेट प्रोजेक्ट खाद्य मंत्री राजपूत ने निर्देश दिये कि भारतीय खाद्य निगम को उच्च गुणवत्ता का चावल प्रदान करने के लिए अनाज की सफाई मशीनों से कराई जाये। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस कार्य को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में मंडला से शुरूआत की जायेगी। इसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा, जिससे भारतीय खाद्य निगम को गुणवत्ता युक्त चावल दिया जा सके। 20 दिन में मानक स्तर का चावल जमा कराना अनिवार्य प्रस्तावित नई मिलर्स नीति 2024-25 में पहली बार दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें  चावल की सूचना मिलर्स को प्राप्त होने के दिनांक से 20 दिवस में मानक स्तर का चावल जमा कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने की स्थिति में मिलर्स पर 2 रूपये प्रति दिन प्रति क्विंटल का जुर्माना लगाया जाऐगा और एक माह में मानक स्तर का चावल जमा न कराये जाने पर मिलर्स द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि राजसात कर ली जाऐगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम को प्रदान किये जाने वाले चावल की मात्रा 60 प्रतिशत से कम प्रदान करने पर मिलर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाऐगी।  

हर हाथ में इंटरनेट के साथ बढ़ा है ठगी का नया मायाजाल, 5,463 केस केवल साइबर सेल में दर्ज हुए बीते 10 महीनों में

 भोपाल डिजिटल दुनिया के विस्तार ने अपराधियों के हाथ में ठगी का नया मायाजाल दे दिया है। अब ठग वेश बदलकर आपसे मिलने का जोखिम नहीं लेते। वे इंटरनेट मीडिया, ई-मेल और स्मार्टफोन के एप के जरिए चारा डालते हैं और एक क्लिक कर आपका खाता खाली कर देते हैं। हालात कितने भयावह हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अकेले भोपाल के थानों में इस साल जितनी एफआईआर हुई हैं, उनमें 27% केवल साइबर ठगी की शिकायतों पर हुई हैं। राजधानी के 34 पुलिस थानों में इस वर्ष 15 नवंबर तक जहां अपराध के 14 हजार 454 आपराधिक मामले दर्ज हुई हैं। कुल अपराधों का 27% ऑनलाइन फ्रॉड वहीं, अकेले साइबर क्राइम सेल में इसी दौरान पांच हजार 463 केस दर्ज हो चुकी हैं। यह कुल अपराधों का 27% है। यह स्थिति तब है, जब हर साइबर अपराध थाने तक नहीं पहुंच पाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस साल दर्ज 14 हजार से अधिक मामलों में चोरी, ठगी, छिनैती, जेबकतरी जैसे वित्तीय अपराधों के मामले केवल एक हजार के करीब हैं। मगर, साइबर क्राइम सेल में जो पांच हजार से अधिक केस आए हैं, उनमें चार हजार मामलों में तो पीड़ित के खातों से रकम उड़ा ली गई है। चोरी, ठगी और छिनैती जैसे वित्तीय अपराधों की तुलना में साइबर ठगों ने सैकड़ों गुना अधिक रकम चुराई है। यह ठगी कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अंदाजा आप ऐसे लगाइए कि 2019 में भोपाल में दो हजार 792 एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसमें एक करोड़ 48 लाख रुपये की ठगी का ब्यौरा था। इस साल के 10 महीनों में ही पांच हजार 491 केस दर्ज हो चुके, जिसमें 55 करोड़ 88 लाख रुपयों की ठगी हुई है। इस साल ठगी जा चुकी रकम 2019 की तुलना में 3800% ज्यादा है। ठगों ने इन तरीकों से दिया झांसा     ओएलएक्स पर बाइक बेचने का एड डाला था। एक व्यक्ति ने मैसेज कर बाइक खरीदने की इच्छा जाहिर की। अगले दिन बाइक लेने के लिए आने से पहले उसने फोन पर भुगतान करने को कहा। उसने पेटीएम के माध्यम से दो रुपये मेरे खाते में भेजे। इसके बाद 50 हजार रुपये की राशि भेजी। साथ ही मुझे पेमेंट स्वीकार करने के लिए पिन डालने का बोला। मैंने पिन डाला तो खाते से रुपये गायब हो गए। पता चला कि उसने मुझे रुपये नहीं भेजे, बल्कि पेमेंट की रिक्वेस्ट भेजी थी। -रवि दुबे, रेलवे कर्मचारी     फेसबुक लिंक के माध्यम से ट्रेडिंग एप डाउनलोड किया था। ऐसा दावा था कि वे हर कंपनी के आइपीओ दिलवाते हैं। एप पर नए आइपीओ की जानकारी ठीक उसी तरह दिखती थी, जैसे किसी अन्य एप या वेबसाइट पर नजर आती है। मैंने एक आइपीओ के लिए आठ लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन तय समय पर आइपीओ नहीं मिला, जिसके बाद ठगी का एहसास हुआ। – अरुण पारिख, डॉक्टर, एम्स     आईसीआईसीआइ बैंक के प्रतिनिधि का फोन आया। उसने बताया कि क्रेडिट कार्ड के 600 रिवार्ड प्वाइंट्स हैं, उसे रिडीम कर लीजिए। उसने रिडीम करने का तरीका भी बताया। रिडीम की प्रकिया के दौरान उसने ओटीपी भेजा। मेरे नंबर पर ओटीपी बैंक के नाम से आया था, विश्वास कर मैंने उसे बता दिया। फोन कटने के कुछ देर बाद क्रेडिट कार्ड से तीन लाख रुपये कटने का मैसेज आया। – सोनम जैन, व्यापारी     किसी व्यक्ति ने मेरे बैंक खाते में 1800 रुपये भेजे थे। अगले दिन फोन कर उसने कहा कि आपने 1800 रुपये का लोन लिया था, उसे 3200 रुपये भरकर चुकाएं। इन्कार किया तो छेड़छाड़ कर मेरे अश्लील फोटो बहुप्रसारित करने की धमकी दी। डरकर मैंने उन्हें रुपये भेज दिए। इसके बाद खाते में पांच हजार रुपये भेजे गए और दस हजार की मांग की। इसके बाद मांग लगातार बढ़ती गई। बाद में दोस्तों और परिवार को बात बताई तथा साइबर पुलिस से शिकायत की। -विजेंद्र यादव, व्यापारी वर्ष     शिकायतें               ठगी राशि 2019     2792          1 करोड़ 48 लाख (लगभग) 2020    3643           3 करोड़ 20 लाख (लगभग) 2021   3915           4 करोड़ 18 लाख 2022   5491       17 करोड़ 15 लाख 2023 6087 24 करोड़ 35 लाख 2024 5463 55 करोड़ 88 लाख 2019 से 2024 तक ठगी की राशि में वृद्धि (प्रतिशत में) 2019 से 20     212 2020 से 21     130 2021 से 22     410 2022 से 23     142 2023 से 24     229 इस साल के साइबर अपराध पर भी नजर डालिए     भोपाल साइबर क्राइम सेल में दर्ज कुल शिकायतें (15 नवंबर 2024 तक)- 5463।     पारंपरिक अपराध की तुलना में 38 प्रतिशत अपराध सिर्फ साइबर क्राइम के हुए।     1073 मामले साइबर बुलिंग और इंटरनेट मीडिया पर उत्पीड़न के सामने आए हैं।     ऑनलाइन फ्रॉड के 4370 मामलों में हुई है 55 करोड़ 88 लाख रुपये की ठगी।     विभिन्न थानों में पारंपरिक अपराध के लिए एक हजार दर्ज की गई एफआईआर। प्रदेश से इस साल 290 करोड़ चुरा लिए वर्ष     राशि रुपये में 2021     11 करोड़ 2022     45 करोड़ 2023     200 करोड़ 2024     290 करोड़ कैसे बढ़ा डिजिटल दुनिया में अपराध का ग्राफ स्मार्ट फोन का बढ़ता उपयोग– पांच वर्षों में मोबाइल धारकों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ गई है। वे इंटरनेट पर विभिन्न एप का उपयोग करते हैं, जहां उपभोक्ता का डाटा मौजूद होता है। सस्ता और हाइ स्पीड इंटरनेट- भारत में इंटरनेट काफी किफायती दरों पर उपलब्ध है। साथ ही उसकी स्पीड भी बीते वर्षों में काफी तेज हुई है। इसने इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ाई है। डिजिटल ट्रांसफार्मेशन- डिजिटल परिवर्तन के अंतर्गत सरकारी सेवाओं से लेकर निजी व्यवसाय सब कुछ आनलाइन हो गया है। डिजिटल पेमेंट व्यवस्था ने इसे नया रूप दिया है। जागरूकता का अभाव- 90 प्रतिशत से अधिक मोबाइल व इंटरनेट उपभोक्ता अब भी साइबर सुरक्षा के बुनियादी ज्ञान से वंचित हैं। वे साइबर ठगों का सबसे आसान शिकार होते हैं। साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे में कमी- साइबर सुरक्षा के लिए देश में मजबूत ढांचा तैयार नहीं किया जा सका है। जो नियम-कानून बने हैं, वे भी कमजोर हैं। पुलिस के पास भी साइबर अपराधियों को पकड़ने का तंत्र कमजोर है।

बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा, वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है: CAQM

नई दिल्ली दिल्ली एक बार फिर गंभीर प्रदूषण स्तर से जूझ रही है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को प्रदूषण की निगरानी करने और विभिन्न राज्यों को उचित उपाय करने के लिए मार्गदर्शन देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली को माना जाता है, लेकिन इस साल पराली जलाने पर रोक लगाने के बावजूद भी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है. प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि के लिए CAQM द्वारा पहचाने गए प्रमुख कारकों में से एक नवंबर में देखा गया असामान्य मौसम पैटर्न है. इंडिया टुडे से खास बातचीत में, आयोग के एक तकनीकी सदस्य एसडी अत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में घने कोहरे ने मौसमी गतिविधियों को काफी हद तक बदल दिया है. घना कोहरा, जो पहले इस अवधि में असामान्य था ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण का संकट बढ़ गया है. दिल्ली में क्यों घुट रहा है लोगों का दम? पिछले दो हफ़्तों में बढ़े प्रदूषण स्तर ने आयोग के लिए काफी चिंता पैदा कर दी है. जिससे मौसम की स्थिति पर फिर से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है क्योंकि यह एक प्रमुख कारक है. एसडी अत्री ने बताया कि पिछले 20 साल में औसतन नवंबर में आधे दिन तक घना कोहरा दर्ज किया जाता था. हालांकि, इस साल लगातार और तीव्र धुंध ने स्थिति को जटिल बना दिया है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या है. हाल के वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां दुनिया भर के शहरी वातावरण में तेजी से देखने को मिल रही हैं. कई दशकों से भारतीय मौसम विभाग से जुड़े एक अनुभवी विशेषज्ञ अत्रेय ने बताया कि कैसे ये वैश्विक घटनाएं दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. बारिश की कमी के कारण भी बढ़ा प्रदूषण आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण भारत के मैदानी इलाकों में बारिश होती है. हालांकि, इस साल बारिश नहीं हुई है. बारिश ना होने से एक प्राकृतिक तंत्र को नष्ट हो गया है, जो आमतौर पर प्रदूषकों को फैलाने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है. बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा दिया है, जहां वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है. इंडिया टुडे से बातचीत में अत्री ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सामने प्रदूषण के स्तर की निगरानी और नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों पर जोर दिया. हालांकि, आयोग स्थिति पर कड़ी नज़र रखता है, लेकिन मौसम और वायुमंडलीय कारकों को नियंत्रित करना लगभग असंभव है. ये कारक प्रदूषकों के फैलाव और सांद्रता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हवा की गति से लेकर हवा की दिशा तक हर तत्व इस बात को प्रभावित करता है कि प्रदूषक दिल्ली में कैसे पहुंचते हैं और कैसे बसते हैं. दुर्भाग्य से पिछले दो हफ़्तों में ये कारक अनुकूल नहीं रहे हैं, जिससे हवा में स्थिरता बनी हुई है और प्रदूषण में वृद्धि हुई है. सीएक्यूएम द्वारा दी गई जानकारी दिल्ली और इसी तरह के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को संबोधित करने की जटिलता को रेखांकित करती है. चूंकि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन मौसम के पैटर्न को बदलना जारी रखते हैं इसलिए नीति निर्माताओं के लिए वायु गुणवत्ता को प्रबंधित करने के लिए समाधान तैयार करते समय इन कारकों पर विचार करना अनिवार्य है. इन वैश्विक मुद्दों से उत्पन्न प्रदूषण चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों में जलवायु लचीलापन शामिल होना चाहिए.  

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