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सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली देश में विभिन्न धार्मिक स्थलों, खासकर मंदिरों और मस्जिदों को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद का सर्वेक्षण कोर्ट के आदेश पर हुआ था, जिसके बाद हिंसा की घटनाएं सामने आईं। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के पूजा स्थल कानून और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने का संकेत दिया है। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में और कब होगी इसपर सुनवाई। सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई? सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा और 1991 के पूजा स्थल कानून से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर 2024 को सुनवाई होगी। इस सुनवाई में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ शामिल होगी। सुनवाई करने वाले न्यायधीश इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी नरसिम्हा, और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच शामिल होगी। यह केस जमीअत उलमा-ए-हिंद और गुलजार अहमद नूर मोहम्मद आजमी की तरफ से दायर किया गया है, और इनके वकील एजाज मकबूल कोर्ट में उनका पक्ष रखेंगे। क्या है 1991 का पूजा स्थल कानून? 1991 का पूजा स्थल कानून भारत में धार्मिक स्थलों के स्वरूप को लेकर एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके तहत, यह प्रावधान किया गया कि 15 अगस्त 1947 को जिस रूप में धार्मिक स्थल था, उसे उसी रूप में बनाए रखा जाएगा। इसका मतलब है कि स्वतंत्रता संग्राम के समय के बाद से किसी भी धार्मिक स्थल का रूप बदलने पर रोक लगा दी गई है। इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और रूप में बदलाव से होने वाले विवादों को रोकना है। खासतौर पर इसने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर एक अपवाद रखा था, जिससे विवादित बाबरी मस्जिद को लेकर कोई बदलाव नहीं किया जा सका था। धारा 3 के तहत, यह कानून किसी व्यक्ति या समूह को किसी धार्मिक स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में बदलने से रोकता है। क्या बदलाव होगा इस कानून में? इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप को स्थिर रखना था ताकि किसी भी धार्मिक स्थल में बदलाव या तोड़फोड़ से विवादों की स्थिति पैदा न हो। लेकिन, कई बार इस कानून की व्याख्या को लेकर विवाद उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून पर सुनवाई होने से भविष्य में इस कानून के प्रभाव और इसकी व्याख्या पर कुछ नया रुख सामने आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अब जब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट पूजा स्थल कानून की परिभाषा और उसके दायरे को कैसे निर्धारित करता है। इसके अलावा, कोर्ट यह भी तय करेगा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। यह मामला धार्मिक स्थलों से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर है, और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि इस कानून में कोई बदलाव किया जाता है, तो वह देशभर में धार्मिक स्थलों के विवादों को प्रभावित कर सकता है। 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई देश भर के लोगों और धार्मिक संगठनों के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।

सिंहस्थ वर्ष 2028 के लिए संभाग स्तरीय समिति का गठन

भोपाल राज्य शासन ने सिंहस्थ वर्ष-2028 अंतर्गत आवश्यक अधोसंरचना की कार्ययोजना तैयार करने, इनके क्रियान्वयन की समीक्षा करने  एवं मंत्रि-परिषद समिति द्वारा लिये गये निर्णयों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ”संभाग स्तरीय समिति” का गठन संभागीय आयुक्त,उज्जैन संभाग की  अध्यक्षता में किया है । समिति में कलेक्टर, जिला उज्जैन सदस्य सचिव होंगे। मेला अधिकारी उज्जैन, इंदौर कलेक्टर, खण्डवा कलेक्टर, देवास कलेक्टर, संबंधित विभागों के संभागीय अधिकारीगण, आयुक्त नगर पालिका निगम उज्जैन, संयुक्त, संचालक, कोष एवं लेखा उज्जैन संभाग, मुख्य अभियंता लोक निर्माण, उज्जैन/इंदौर, मुख्य अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, इंदौर सदस्य होंगे। समिति द्वारा सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत आवश्यकता अनुसार नए कार्यों के प्रस्ताव नोडल विभाग को अनुशंसित करना, राज्य शासन द्वारा समिति को निर्माण एवं क्रय के कार्यों, सिंहस्थ मद के उत्तरदायित्व सौपे जाने पर उन कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति एवं क्रय प्रक्रिया पूर्ण करना, (सिंहस्थ मद अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की तकनीकी स्वीकृति संबंधित विभाग के सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदान की जायेगी।) सिंहस्थ-2028 अंतर्गत कराए जा रहे सभी विभागों के कार्यों की समीक्षा तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करना, राज्य शासन द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य उत्तरदायित्व निर्वहन समिति द्वारा किये जायेंगे।  

बाघ के रेस्क्यू में जुटी टाइगर रिजर्व की टीम, 4 हाथी दल और 3 परिक्षेत्र की टीम निगरानी में जुटी

भोपाल उमरिया जिले के बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ के गले में फंदे की जानकारी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व टीम रेस्क्यू में जुटी हुई है। सोमवार को पर्यटन के दौरान पर्यटकों को हितौली जोन के डमडमा नाले के पास बाघ दिखायी दिया था। पर्यटकों ने बाघ के फोटो और वीडियो भी बनाये। फोटो में बाघ के गले में तार जैसा दिखायी दिया। जानकारी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन बाघ के रेस्क्यू की तैयारी में जुट गया। सोमवार की शाम से ही रेस्क्यू टीम बाघ की तलाश कर रही है। मंगलवार को बाघ की तलाश में दो हाथियों और कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया गया, लेकिन बाघ लगातार अपनी मूवमेंट बदलता रहा और उसके घने जंगल में चले जाने से रेस्क्यू नहीं किया जा सका। अब बाघ की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार से शुरू किया जायेगा। रेस्क्यू टीम ने जंगल में सर्चिंग शुरू कर दी है। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक श्री पी.के. वर्मा ने बताया कि बाघ के रेस्क्यू के लिये खितौली जोन के कुछ एरिया में पर्यटन को बंद कर दिया गया है। गले में फंदा लगा बाघ स्वस्थ होने के कारण लगातार अपनी मूवमेंट बदल रहा है। उन्होंने बताया कि 4 हाथी दल और 3 परिक्षेत्र की टीम इसकी निगरानी में लगे हुए हैं। जल्द ही बाघ को रेस्क्यू कर लिया जायेगा।  

उद्योग, पर्यटन और हरित क्रांति से खत्म होगी बेरोजगारी: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि जहाँ उद्योग, पर्यटन और हरित क्रांति होती है, वहां बेरोजगारी का कोई स्थान नहीं रहता। इनसे विकास के नए द्वार खुलते हैं। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विस्तार के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने और पर्यटन क्रांति को साकार करने के लिए काम कर रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने देवास में उज्जैन रोड औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत 8 करोड़ 83 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। इन विकास कार्यों में सीसी रोड, आरसीसी ड्रेन, हयूम पाइप कल्वर्ट और रोड डामरीकरण शामिल हैं जिनसे औद्योगिक क्षेत्र की 156 इकाइयों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने नियो एक्सपर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का उद्घाटन किया। इस कंपनी में नवजात शिशुओं के लिए मेडिकल उपकरण बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह कंपनी प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी और नवाचार को प्रोत्साहित करेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा 7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है और अगले पांच वर्षों में इसे 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। हरित क्रांति से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के प्रयास हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि देवास औद्योगिक क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर की 1613 इकाइयां और वृहद स्तर की 28 इकाइयां कार्यरत हैं, ज़िनसे लगभग 50 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। यहाँ इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, फूड सेक्टर, मिल्क प्रोडक्ट्स और पंप-पार्ट्स से संबंधित इकाइयां क्रियाशील हैं। कार्यक्रम में देवास विधायक श्रीमती गायत्री राजे पवार, सतना महापौर श्री योगेश ताम्रकर, महापौर प्रतिनिधि श्री दुर्गेश अग्रवाल और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

सुभाष उत्कृष्ट स्कूल में हुई वेस्ट जोन इंटर स्कूल बैंड प्रतियोगिता, बालक वर्ग में राजस्थान और महाराष्ट्र बने विजेता

भोपाल भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट स्कूल में आज पश्चिम क्षेत्रीय (वेस्ट जोन) की इंटर स्कूल बैंड प्रतियोगिता का शुभारंभ आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने खुले आकाश में गुब्बारे छोड़कर किया। बालक वर्ग की प्रतियोगिता में वेस्ट जोन के 6 राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र गोवा एवं केन्द्र शासित प्रदेश दमन-दीव और दादर नगर हवेली के बालक वर्ग के विजेता प्रतिभागी शामिल हुए। प्रतियोगिता में 240 बालकों ने पाइप बैंड एवं ब्रास बैंड विधा में शानदार प्रस्तुतियां दी। आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि स्कूली बच्चों की बैंड की शानदार प्रस्तुतियों से मध्यप्रदेश के अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का समग्र विकास हो। इसके लिये जरूरी है कि बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों से भी जुडें। लोक शिक्षण आयुक्त ने अन्य राज्यों से आये प्रतिभागी विद्यार्थियों और अधिकारियों का राजधानी भोपाल में स्वागत किया। पुरस्कृत टीमें प्रतियोगिता में ब्रास बैंड विधा में प्रथम स्‍थान पर राजस्थान की टीम रही। वहीं द्वितीय स्‍थान महाराष्ट्र की टीम ने तथा तृतीय स्‍थान मध्यप्रदेश की टीम ने प्राप्‍त किया। पाइप बैंड विधा में महाराष्ट्र प्रथम, मध्यप्रदेश द्वितीय और गुजरात की टीम तृतीय स्थान पर रहीं। संचालक लोक शिक्षण श्री डी.एस. कुशवाह ने विजेता टीम को पुरस्कार प्रदान किये। उल्‍लेखनीय है कि पश्चिम क्षेत्रीय इस प्रतियोगिता में पाइप बैंड एवं ब्रास बैंड विधा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बालिका और बालक वर्ग की चारों टीमें गणतंत्र दिवस-2025 के उपलक्ष्य में राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में 24 एवं 25 जनवरी 2025 को नई दिल्ली में सहभागिता करेगी। बालिका वर्ग की प्रतियोगिता में 25 नवम्‍बर को ब्रास बैंड विधा में मध्‍यप्रदेश की और पाइप बैंड विधा में महाराष्‍ट्र राज्‍य की टीमें प्रथम स्‍थान पर रही थीं। इनका चयन राष्‍ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हो चुका हैं। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में पचमढ़ी स्थित सैन्‍य अकादमी बैंड विंग के श्री संदीप चौहान, श्री काजल मंडल, श्री रोजित कुमार एवं सशस्त्र सीमा बल चंदुखेड़ी के श्री रवि दास, श्री समाधान देओरे और शमूएल टर्रा ने विजेता टीमों का लयबद्धता, पोशाख, टीमवर्क और अनुशासन के आधार पर मूल्यांकन किया। समापन एवं पुरूस्कार वितरण कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालकद्वय श्री संजय कुमार, श्री राजीव तोमर, संयुक्त संचालक भोपाल संभाग श्री अरविंद चौरागढे, सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य श्री सुधाकर पराशर, प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी श्रीमती अर्चना अली एवं अन्य अधिकारी बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।  

राजस्थान में राजनीतिक हलचल बढ़ी, वन स्टेट-वन इलेक्शन की तर्ज पर होना संभव

जयपुर    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। राज्य की 40 प्रतिशत पंचायतों का कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है, और इसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या पंचायत चुनाव एक साथ होंगे, या फिर सरकार इन पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करेगी? क्योंकि चुनावों पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। जनवरी में 6759 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, जबकि बाकी पंचायतों का कार्यकाल 2025 तक रहेगा। इस बीच, सरकार ने राज्य में 49 निकायों में प्रशासक नियुक्त किया है, लेकिन पंचायतों में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय कैबिनेट की मीटिंग में लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान का मामला एमपी या झारखंड से अलग होगा और सरकार पंचायत चुनावों के लिए सही समय पर निर्णय लेगी। पंचायतीराज चुनावों के भविष्य को लेकर कयास राज्य के 40 प्रतिशत सरपंचों का कार्यकाल जनवरी में खत्म होने वाला है, और इस समय तक सरकार को निर्णय लेना होगा कि क्या पंचायतों में प्रशासनिक नियुक्तियां की जाएंगी, या फिर सरपंचों को ही चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पंचायतों के चुनावों को लेकर मंत्रिमंडल की मीटिंग में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, राज्य निर्वाचन विभाग ने इस विषय में अब तक कोई तैयारियां नहीं की हैं।  पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि चुनावों के बारे में सरकार जल्द ही फैसला लेगी और इस फैसले से किसी भी जनप्रतिनिधि को कंफ्यूजन में नहीं आना चाहिए। कार्यकाल समाप्त होने वाली पंचायतों की सूची: •        जनवरी 2025: 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त •        मार्च 2025: 704 पंचायतों का कार्यकाल खत्म •        सितंबर 2025: 3847 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा इसके बाद 2026 में भी कई पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा, जिसमें जिला परिषद और पंचायत समितियां शामिल हैं। पंचायतों में प्रशासक या सरपंच? राज्य सरकार ने हाल ही में 49 निकायों में प्रशासक नियुक्त किए हैं, और अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पंचायतों में भी इसी तरह प्रशासक लगाए जाएंगे, या फिर पंचायतों की जिम्मेदारी सरपंचों को सौंपी जाएगी। पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, और यह निर्भर करता है कि मंत्रिमंडल की मीटिंग में सरकार क्या फैसला करती है। सरपंचों ने की मुख्य सचिव से मुलाकात राज्य के सरपंचों ने भी इस मामले में अपनी राय दी है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश और झारखंड की तर्ज पर जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक कमेटी बनाई जाए और इसका चेयरमैन सरपंचों को बनाया जाए। इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव सुधांश पंत से भी मुलाकात की है और अपनी बात रखी है। सरकार जल्द लेगी पंचायत चुनाव पर फैसला? पंचायत चुनावों को लेकर सवालों की कोई कमी नहीं है, और यह राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि वह इन पंचायतों में क्या कदम उठाती है। क्या सरकार पंचायतों में प्रशासक लगाएगी, या पंचायत चुनावों की तैयारी करेगी? यह फैसला जल्द ही लिया जाएगा, जिससे राज्य की सियासत में और हलचल मच सकती है। जनवरी में पंचायतों के चुनाव होंगे या नहीं, यह सवाल फिलहाल बाकी है। वन नेशन-वन इलेक्शन का कॉन्सेप्ट: भारत में वन नेशन-वन इलेक्शन का मतलब है कि संसद के निचले सदन यानी लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराए जाएं। इसके साथ ही स्थानीय निकायों यानी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों के चुनाव भी हों। इसके पीछे विचार है कि ये चुनाव एक ही दिन या फिर एक निश्चित समय सीमा में कराए जा सकते हैं। कई सालों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव कराने पर जोर देते रहे हैं। वन नेशन-वन इलेक्शन के फायदे: एक देश एक चुनाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि चुनाव का खर्च घट जाएगा। अलग-अलग चुनाव कराने पर हर बार भारी-भरकम राशि खर्च होती है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासन और सुरक्षा बलों पर बोझ पड़ता है, क्योंकि उन्हें हर बार चुनाव ड्यूटी करनी पड़ती है। एक बार में चुनाव निपट जाने पर केंद्र और राज्य सरकारें कामकाज पर फोकस कर सकेंगी। बार-बार वह इलेक्शन मोड में नहीं जाएंगी और विकास के कामों पर ध्यान दे सकेंगी।  

नर्सरियों को सेल्फ सेन्सटेविल थीम पर विकसित किया जाये : उद्यानिकी मंत्री श्री कुशवाह

भोपाल प्रदेश में उद्यानिकी विभाग द्वारा विकसित की जा रही हाईटेक नर्सरियों को सेल्फ सेन्सटेविल मॉडल पर विकसित किया जाये। यह निर्देश उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में दिये। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की विपुल संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कृषकजन को उन्नत बीज के स्थान पर उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध कराये जाना चाहिये। नर्सरियों को आत्म-निर्भर बनाने के लिये आय के आधार पर प्रत्येक नर्सरी को एक रिवाल्विंग फण्ड दिया जाना चाहिये, जिससे वह अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर सके। बैठक में संचालक उद्यानिकी श्री बी.एस. सिंह, प्रबंध संचालक एम.पी. एग्रो श्री दिलीप कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। प्रदेश में शीघ्र राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जायेगी। इसमें उद्यानिकी के काम आने वाले सभी सेक्टर की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कृषक भाईयों को शासन की योजनाओं और ऋण प्रकरण के लिए बैंकर्स को भी आमंत्रित किया जाएगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि के सकल घरेलू उत्पाद में प्रदेश की उद्यानिकी फसलों की भागीदारी 11.37 प्रतिशत है। इसको बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। इसके लिए किसानों को उद्यानिकी फसलों के लिये प्रेरित किया जाये। उन्होंने निर्देश दिये कि विभाग की फ्लेगशिप स्कीम हाईटेक नर्सरी विकास की नियमित मॉनीटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाये। मंत्री श्री कुशवाह ने निर्देश दिये कि एम.पी. एग्रो से गेंदे के साथ-साथ अन्य पुष्प कच्ची गुलदावदी, गिलार्डिया, एस्टर की भी दरें निर्धारित की जायें। उन्होंने ग्वालियर जिले के खुरेरी ग्राम में विकसित की जा रही हाईटेक फ्लोरी कल्चर नर्सरी का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाये। उन्होंने ग्वालियर व्यापार मेले में खाद्य प्र-संस्करण पर आधारित प्रदर्शनी लगाने के निर्देश भी दिये हैं। मंत्री श्री कुशवाह ने उद्यानिकी फसल उत्पादन के अनुसार जिले में खाद्य प्र-संस्करण यूनिट स्थापना का मॉडल विकसित करने के निर्देश भी दिये।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भोपाल में आईटी हब और अंतर्राष्ट्रीय एयर कनेक्टिविटी को लेकर लंदन में हुई चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदेश प्रवास के दौरान लंदन में अपनी यात्रा के अंतिम दिन फ्रेन्ड्स ऑफ एम.पी चैप्टर के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया और समूह सदस्यों से भेंट कर उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष भोपाल में आईटी हब बनाने और अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मुलाकात में भोपाल के विकास और एयर कनेक्टिविटी को लेकर काम कर रही संस्था एयर कनेक्टिविटी फॉर भोपाल डेवलपमेंट (एएफबीडी) ग्रुप के फाउंडर आबिद फारूकी ने भोपाल में आईटी कंपनी स्टार्ट-अप को लेकर अपना प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि भोपाल में आई-टी सेक्टर में रोज़गार, स्किल एंड एडवांस डेवलपमेंट ट्रेनिंग के साथ फ्रेश इंजीनियर ग्रेजुएट्स को कैंपस प्लेसमेंट मुहैया कराएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आश्वस्त किया कि इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किया जाएगा। श्री आबिद फारूकी ने बताया कि लम्बे समय से भोपाल से अंतर्राष्ट्रीय उड़ान शुरू करने की मांग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के लिए सभी तैयारियां अंतिम चरण में है। भोपाल शहर को जल्दी ही अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की सौगात मिलेगी।

चीन में रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के खिलाफ करप्शन के आरोपों ने चीन की आर्मी को हिलाकर रख दिया, मुश्किलें बढ़ी

बीजिंग चीन में शी जिनपिंग सरकार के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। लगातार तीसरे रक्षा मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। सरकार ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के खिलाफ करप्शन के आरोपों ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को हिलाकर रख दिया है। फाइनेंशियल टाइम्स ने बुधवार को बताया कि डोंग जुन के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। एफटी ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि डोंग कथित तौर भ्रष्टाचार के लिए जांच का सामना करने वाले लगातार तीसरे चीनी रक्षा मंत्री हैं। हालांकि चीन के रक्षा मंत्रालय ने मामले में टिप्पणी नहीं दी है। चीन की सेना में पिछले साल से व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया है। अब तक कम से कम नौ पीएलए जनरलों और मुट्ठी भर रक्षा उद्योग के अधिकारियों को राष्ट्रीय विधायी निकाय से हटाया जा चुका है, अब एक बार फिर नए आरोपों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक साल पहले ही हुई नियुक्ति पीएलए के पूर्व नौसेना प्रमुख डोंग को दिसंबर 2023 में रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था। उनके पूर्ववर्ती ली शांगफू को सात महीने के कार्यकाल के बाद हटा दिया गया था। डोंग ने पिछले हफ्ते लाओस में रक्षा मंत्रियों की एक बैठक के दौरान अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन से मिलने से इनकार कर दिया था। तब पेंटागन प्रमुख ने बुधवार को कहा था कि यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके कार्यकाल के दौरान हाल ही में अमेरिका-चीन के सैन्य-से-सैन्य संबंधों में नरमी भी आई। दोनों देशों के बीच सितंबर में पहली बार सफल थिएटर-स्तरीय कमांडर वार्ता हुई। दो पूर्व रक्षा मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में हटाए गए डोंग से पहले दो पूर्व रक्षा मंत्री ली और वेई फ़ेंगहे को जून में “अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उस समय पार्टी के एक बयान में कहा गया था कि इन दोनों ने “पार्टी और केंद्रीय सैन्य आयोग के विश्वास को धोखा दिया है। बयान में कहा गया है कि इन्होंने रिश्वत के रूप में बड़ी रकम ली और पदोन्नति या सेना में उच्च रैंकिंग में नियुक्ति को लेकर घोटाला किया।

मुख्यमंत्री यादव ने प्रदेश में निवेश बढ़ाने उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूके यात्रा में मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए लंदन के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सेक्टर केंद्रित राउंड-टेबल मीटिंग कर निवेश संबंधी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने वन-ऑन-वन बैठकों में प्रत्येक निवेशक की परियोजना और आवश्यकताओं को ध्यानपूर्वक सुना और मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बेहतर अवसर और नीतिगत समर्थन का भरोसा दिलाया। राउंड-टेबल चर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन, नवकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडोरामा ग्रुप, एसआरएएम एंड एमआरएएम ग्रुप, सायनकॉननोड, हाइब्रिड एयर व्हीकल्स लिमिटेड, क्लिनीसप्लाईज, औरोरा एनर्जी रिसर्च, एल्सेवियर, वीडिलीवर, कैपरो, वेबसाइट, द मोंटकैल्म लग्ज़री होटल्स, फाइला अर्थ, एम्पर्जिया लिमिटेड, अयाना कंसल्टिंग, पैंजिया डेटा लिमिटेड, इनवर्जी, बीईएम ग्रुप लिमिटेड, डैक्स फर्स्ट, रैनसैट ग्रुप, कोगो इकोटेक सॉल्यूशंस, एम्पैटी.एआई, मनी फॉर बिजनेस लिमिटेड, डीएएम हेल्थकेयर लिमिटेड और हेलियन जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने और संभावित सहयोग के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में अनुकूल व्यावसायिक माहौल और निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंड-टेबल परिचर्चाओं में भाग लिया। इन परिचर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऑटोमोबाइल और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और फूड प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल राज्य को एक वैश्विक निवेश स्थल बनाने और उद्योगपतियों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करने में परिणामोन्मुखी साबित होगी। साथ ही ये बैठकें औद्योगिक विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ मध्यप्रदेश के विकास के लिए नई संभावनाओं को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।  

संगीत, नेतृत्व एवं रचनात्मकता का भव्य जश्न, लखनऊ ने अपने सालाना फेस्ट ओजस’24 की वापसी की घोषणा

लखनऊ देश के प्रमुख शिक्षा संस्थानों में से एक जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेन्ट, लखनऊ ने अपने सालाना फेस्ट ओजस’24 की वापसी की घोषणा की है।  ओजस’24 की थीम है ‘नाइन्टीज़ नॉस्टेल्जिया’ एक यात्रा जो 1990 के सुनहरे दौर में ले जाती है। यह थीम उस दशक की मशहूर फिल्मों, संगीत एवं कार्टून का जश्न मनाती है। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे से लेकर इंडीपॉप हिट्स और दर्शकों के पसंदीदा क्लासिक जैसे टॉम एण्ड जैरी तक, यह फेस्ट उपस्थितगणों को कैसेट टेप, वीसीआर और झनकार बीट्स की दुनिया में ले जाएगा तथा आज के दौर की वाइब्रेन्ट एनर्जी को नई परिभाषा देगा।   ओजस संस्थान का प्रमुख आयोजन है, जो संस्कृति, संगीत, नेतृत्व एवं रचनात्मकता का जश्न मनाता है। यह संस्कृति के आदान-प्रदान के लिए बेहतरीन मंच है जो छात्रों एवं उपस्थितगणों को यादगार अनुभव प्रदान करता है।‘जयपुरिया लखनऊ ओजस 2024 के साथ नब्बे के दशक के जादू को फिर से जगाने के लिए तैयार है। यह उभरती प्रतिभा को अपनी क्षमता एवं रचनात्मकता दर्शाने का मौका देगा तथा इनोवेशन एवं सौहार्द्र के साथ यादगार अनुभव प्रदान करेगा।’ डॉ कविता पाठक, डायरेक्टर, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेन्ट, लखनऊ ने कहा। ओजस का हर संस्करण पिछले साल की सफलता के साथ उत्कृष्टता की धरोहर को आगे बढ़ाता है। पिछले सालों के दौरान ओजस ने जाने-माने  कलाकारों, दिग्गजों एवं उत्साही दर्शकों को खूब लुभाया है। पिछले साल के संस्करण में अर्जुन कानूनगो ने अपने मनमोहक परफोर्मेन्स के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 2024 में भी ओजस ऐश किंग के स्टार परफोर्मेन्स तथा डीजे अवी की डीजे नाईट के साथ दर्शकों के लिए यादगार जश्न ला रहा है। ‘90 के दशक के मशहूर मुवी कैरेक्टर्स एवं कार्टून्स से प्रेरित इस साल का कार्यक्रम दर्शकों को इस जादू का अनुभव पाने के लिए आमंत्रित करता है। ओजस दर्शकों के साथ-साथ छात्रों को भी उनकी रचनात्मकता के प्रदर्शन का मौका देता है। छात्रों के उत्साह से स्पष्ट है कि ओजस 2024 एक शानदार और यादगार आयोजन बन जाएगा।’सीए डॉ रश्मि चौधरी, डीन ऑफ स्टूडेन्ट अफे़यर्स, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेन्ट, लखनऊ ने कहा। ओजस’24 में हिस्सा लेने वाले गणमान्य अतिथियों में शामिल हैं- श्री ब्रजेश पाठक, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री; डॉ कुमकुम धार, हैड ऑफ बिरजु महाराज कथक संस्थान, लखनऊ, जिन्हें भारतीय शास्त्री नृत्य को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में उत्कृष्ट कार्यों के लिए जाना जाता है। एक प्रख्यात कलाकार के रूप में वे इस मंच को सांस्कृतिक रूप देंगी और अपनी कला के साथ निश्चित रूप से दर्शकों को प्रेरित करेंगी। ‘ओजस सिर्फ एक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि उत्साह एवं प्रतिभा का जीवंत जश्न है, यह छात्रों को उनकी क्षमता के प्रदर्शन का अवसर देकर यादगार अनुभव प्रदान करता है। यह बेहतरीन परफोर्मेन्सेज़ के साथ दर्शकों के मनोरंजन का वादा करता है। इसके माध्यम से हम दर्शकों को ऐसी यादें प्रदान करना चाहते हैं जिन्हें वे जीवन भर संजो कर रखें।’ श्री सागर शुक्ला, वाईस प्रेज़ीडेन्ट, स्टुडेन्ट डेवलपमेन्ट काउन्सिल (बैच 2023-25) ने कहा। मैनेजमेन्ट के छात्रों के लिए ओजस सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि वास्तविक दुनिया में लर्निंग का अनूठा अनुभव भी है। जो उन्हें टीमवर्क एवं लीडरशिप, इवेंट मैनेजमेन्ट, आपसी सहयोग, रचनात्मकता एवं इनोवेशन, नेटवर्किंग एवं एक्सपोज़र तथा लेगेसी बिल्डिंग जैसी विशेषताओं के लिए प्रेरित करता है।

हमें अपने किशोरों को उनकी खुशी बनाए रखने के लिए उपकरण और तकनीकें देने की जरूरत है – गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

बेंगलुरु एक ऐतिहासिक पहल में वैश्विक आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग ने 70 स्कूलों और विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी की है और कई समझौता ज्ञापनों (एम.ओ.यू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कार्यक्रम में  माइलस्टोन एकेडमी भिलाई और अरपा रिवर वैली इंटरनेशनल स्कूल बिलासपुर भी शामिल हुए।  इस सहयोग का उद्देश्य 178,000 से अधिक छात्रों को सुदर्शन क्रिया और अन्य ध्यान तकनीकों के परिवर्तनकारी श्वास अभ्यास से परिचित कराकर सशक्त बनाना है जो मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक कल्याण और तनावमुक्त वातावरण को बढ़ावा देते हैं। गुरुदेव ने अपने संबोधन में कहा, “बच्चे जब पैदा होते हैं तब वे खुश रहते हैं लेकिन जब तक वे किशोरावस्था में पहुँचते हैं, तब वे खुश नहीं रह जाते। हमें उनकी खुशी को बनाए रखने के लिए उपकरण और तकनीक देना बहुत महत्त्वपूर्ण है।” गुरुदेव अपने संबोधन में बताते हैं, “मैं दुनिया भर में अक्सर देखता हूँ कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र जबरदस्त तनाव से गुजर रहे हैं। छात्र एक ओर अवसाद से ग्रस्त हो रहे हैं और दूसरी ओर आक्रामक हो रहे हैं।” विद्यालय परिसरों में आत्महत्या से मरने वाले छात्रों की संख्या आसमान छू रही है। बैंगलोर के आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में गुरुदेव की उपस्थिति में 70 भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल आर्ट ऑफ लिविंग की नशामुक्त खुशहाल परिसर बनाने और आने वाली पीढ़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम इस समय भारतीय युवाओं में अवसाद की दर 31% से 57% तक पहुँच चुकी है जो बहुत अधिक है । ऐसे में आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम बहुत जरूरी हैं। स्कूली बच्चों के लिए मेधा योग, उत्कर्ष योग और कॉलेज के छात्रों के लिए YES!+(यूथ एम्पोवेर्मेंट एंड स्किल्स) जैसे विशेष रूप से तैयार किए गए कार्यक्रमों को जबरदस्त सराहना मिली है। ये कार्यक्रम छात्रों को तनाव से निपटने, एकाग्रता में सुधार करने, रचनात्मकता बढ़ाने और नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करने में मदद करने के लिए श्वास तकनीक, ध्यान और जीवन के कौशल को एकीकृत करते हैं। कार्यक्रम बच्चों और किशोरों में डिजिटल एडिक्शन जैसी चुनौतियों से लड़ने में भी मदद कर रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग ने एम्स, आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, एनएलयू, आईआईआईटी जैसे दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों सहित कई अग्रणी विश्वविद्यालयों में  ऐसी ही पहल को सफलतापूर्वक लागू किया है। संस्था के कार्यक्रम अमेरिका के 135 से अधिक परिसरों में सक्रिय हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से, आर्ट ऑफ लिविंग युवा मन को आकार देने का कार्य कर रहा है और साथ ही शिक्षा प्रणालियों में बढ़ती चुनौतियों का समाधान कर रहा है। “हमारे सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए शुरू किया गया मेधा योग और उत्कर्ष योग कार्यक्रम से बेहतर बदलाव देखा जा रहा है । कई छात्रों ने स्वास्थ्य लाभ, बेहतर सम्बन्ध और मानसिक शांति का अनुभव किया है । यह पहल शैक्षिक संस्थानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है,” भारती विद्या भवन हायर सेकेंडरी स्कूल, एरोड  की अध्यक्ष अरुणा रामकृष्ण ने साझा किया। मेयो कॉलेज अजमेर के निदेशक एस.एच. कुलकर्णी ने इसका समर्थन करते हुए कहा, “आर्ट ऑफ लिविंग कार्यशालाओं में सिखाई गई सुदर्शन क्रिया ने छात्रों के जीवन में काफी परिवर्तन किया है । छात्रों ने बेहतर तनाव प्रबंधन, भावनात्मक स्थिरता और उच्च एकाग्रता स्तर की जानकारी दी है। यह शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए आशीर्वाद है।” शिक्षाविद युवा पीढ़ी के व्यक्तित्व को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे युवा दिमागों को प्रेरित करके उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगा सकते हैं, जो समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। ये कार्यक्रम विशेष रूप से छात्रों और शिक्षकों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किए गए हैं। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के विषय में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर एक मानवतावादी, आध्यात्मिक गुरु और  शांतिदूत हैं। अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से गुरुदेव ने दुनिया भर में लाखों लोगों को तनावमुक्त और हिंसामुक्त दुनिया के अपने दृष्टिकोण से प्रेरित किया है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रम डिज़ाइन किए हैं जो एक गहरी और खुशहाल जिंदगी जीने के लिए तकनीकें और उपकरण प्रदान करते हैं। उन्होंने आर्ट ऑफ़ लिविंग तथा इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज जैसी गैर-लाभकारी संगठनों की स्थापना की है जो लिंग, जाति, राष्ट्रीयता और धर्म की सीमाओं से परे मानवता का समर्थन करती  हैं। आर्ट ऑफ लिविंग  के बारे में 43 वर्षों में आर्ट ऑफ लिविंग ने 180 से अधिक देशों में लाखों लोगों को नवाचारी कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त किया है। इसके कार्यक्रम छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के लिए प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीकों के साथ मिलाकर ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं जो सीखने और विकास के लिए अनुकूल होते हैं।

रेलवे ने मुंबई उपनगरीय खंड पर 13 नई एसी लोकल ट्रेन सेवाओं की शुरुआत करने का निर्णय लिया

मुंबई मुंबई उपनगर क्षेत्र में सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पश्चिम रेलवे ने 27 नवंबर 2024 से मुंबई उपनगरीय खंड पर 13 नई एसी लोकल ट्रेन सेवाओं की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। इन नई सेवाओं के साथ ही एसी लोकल ट्रेनों की कुल संख्या 96 से बढ़कर 109 हो जाएगी। वहीं, शनिवार और रविवार को भी एसी लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़कर 52 से 65 हो जाएगी। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यात्रियों के बीच एसी लोकल ट्रेनों की बढ़ती लोकप्रियता और मांग को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और एसी सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, पश्चिम रेलवे ने 12 नॉन-एसी कार सेवाओं को बदलकर 13 नई एसी लोकल ट्रेन सेवाओं की शुरुआत की है। इन नई एसी लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वालों की सुविधा में इजाफा होगा और अधिक यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। पश्चिम रेलवे द्वारा शुरू की जा रही इन नई एसी लोकल ट्रेनों का नियमित परिचालन 27 नवंबर से शुरू होगा। पहली एसी लोकल ट्रेन चर्चगेट से सुबह 12:34 बजे रवाना होगी, और इसके बाद सभी नई एसी ट्रेनें समय सारणी के अनुसार चलेंगी। इन 13 नई एसी लोकल ट्रेनों में से 6 अप दिशा में और 7 डाउन दिशा में चलेंगी। अप दिशा में, विरार-चर्चगेट और भायंदर-चर्चगेट के बीच 2-2 सेवाएं, जबकि विरार-बांद्रा और भायंदर-अंधेरी के बीच एक-एक सेवा शुरू की जाएगी। डाउन दिशा में, चर्चगेट-विरार के बीच दो सेवाएं, चर्चगेट-भायंदर, अंधेरी-विरार, बांद्रा-भायंदर, महालक्ष्मी-बोरीवली और बोरीवली-भायंदर के बीच एक-एक सेवा शुरू की जाएगी। पश्चिम रेलवे पर एसी लोकल सेवाओं की कुल संख्या 109 हो जाएगी, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कुल लोकल सेवाओं की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा। पश्चिम रेलवे पर 109 एसी लोकल ट्रेन सेवाओं के साथ-साथ, अन्य लोकल ट्रेनों की कुल संख्या 1406 बनी रहेगी। पश्चिम रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इन नई एसी लोकल ट्रेनों से भारी भीड़ और यात्रियों की बढ़ती संख्या को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। खासकर गर्मी के दिनों में जब एयर कंडीशनिंग की सुविधा अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।  

दिल्ली में प्रदूषण स्तर फिर बढ़ा, एक्यूआई 400 के पार, ग्रैप-4 रहेगा जारी

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 396 है। वहीं, कुछ इलाकों में यह स्तर 400 के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, अलीपुर में एक्यूआई 416, आनंद विहार में 431, अशोक विहार में 420, और जहांगीरपुरी में 422 दर्ज किया गया है। इसके अलावा, मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में AQI 412, मंदिर मार्ग में 409, और मुंडका में 443 के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, नरेला में 415, नेहरू नगर में 420, पटपड़गंज में 409, और पंजाबी बाग में 413 के आंकड़े सामने आए हैं। रोहिणी में 432, शादीपुर में 423, सोनिया विहार में 425, विवेक विहार में 432 और वजीरपुर में 423 AQI रिकॉर्ड किया गया है। इन इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने से नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंचने के कारण यह प्रदूषण अब स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक बन गया है। बता दें कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के चौथे चरण (ग्रैप-4) को लागू कर दिया गया है। ग्रैप-4 लागू किए जाने के बाद वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। दिल्ली में कारखानों, निर्माण कार्यों, और यातायात पर कड़ी पाबंदियां लगाई गई है। आपको बताते चलें, प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और औसत एक्यूआई 450 को पार कर जाता है तो ग्रैप का चौथा चरण लागू किया जाता है। ग्रैप-4 लागू होने के बाद प्रतिबंध सबसे ज्यादा और सबसे कड़े होते हैं। राजधानी में ट्रक, लोडर समेत अन्य भारी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत नहीं है।  

नोएडा प्राधिकरण के स्वीकृत पदों से ही डीएनजीआईआर के गठित सेल में स्टाफ को पोस्ट किया जाएगा

नोएडा न्यू नोएडा मास्टर प्लान अप्रूव हो चुका है। जमीन अधिग्रहण के लिए 1000 करोड़ रुपए रिजर्व किए गए हैं। नोएडा प्राधिकरण के स्वीकृत पदों से ही डीएनजीआईआर के गठित सेल में स्टाफ को पोस्ट किया जाएगा। ताकि समय से न्यू नोएडा को बसाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके। नोएडा प्राधिकरण न्यू नोएडा (डीएनजीआईआर) का नोडल है। ऐसे में अधिग्रहण से लेकर नया शहर बसाने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। नोएडा और न्यू नोएडा यानी डीएनजीआईआर में प्लाट काटने , प्लान्ड सिटी बसाने के लिए यहां कुल 43 पद स्वीकृत हैं। इसमें से महज 5 पद पर ही अधिकारी नियुक्त हैं। 38 पद खाली हैं। ऐसे में डीएनजीआईआर का काम बाधित हो रहा है। बता दें प्लानिंग विभाग का काम अर्जित भूमि पर नक्शा बनाना, प्लाट काटना और योजनाओं को खसरे के अनुसार सुपर इंपोज करना है। न्यू नोएडा में सबसे पहले जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाएगी। यहां किसानों से आपसी सहमति से जमीन खरीदी जाएगी। इसके लिए प्राधिकरण के भू लेख के साथ सलाहकार कंपनी भी मदद करेगी। हालांकि स्टाफ की कमी के चलते ये काम धीमी गति से चल रहा है। वर्तमान में नोएडा प्राधिकरण में भू लेख विभाग में 24 पद स्वीकृत हैं। इन सभी पद को मिलाकर कुल 9 अधिकारी ही नियुक्त हैं। 17 अब भी खाली हैं। जबकि बिना इन अधिकारियों का जमीन अधिग्रहण करना मुश्किल है। न्यू नोएडा में जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। यहां आपसी सहमति के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए सैटेलाइट सर्वे किया जा रहा है। जिसमें सभी फेज की तस्वीरें ली जा रही हैं। इसी निर्माण के अनुसार ही आबादी की जमीन का निर्धारण किया जाएगा। क्योंकि प्राधिकरण ने अक्टूबर 2024 में न्यू नोएडा की अधिसूचित करीब 209 वर्ग किमी के एरिया में निर्माण पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण ने बताया कि न्यू नोएडा के पहले फेज में 3165 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जाएगी।  

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