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बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी?: अखिलेश यादव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल की हिंसा के बाद सियासी बयानबाजी और पोस्टरवार भी शुरू है। एक तरफ प्रशासन ने घटना में शामिल उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की है। वहीं दूसरी तरफ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर पूछा है जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी? सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार को संभल हिंसा को लेकर एक तस्वीर जारी की है जिसमें सुप्रीमकोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन के साथ अन्य लोग भी दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा कि जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी? दरअसल हिंसा के तीन दिन बाद बुधवार को पुलिस की ओर से जारी किए गए पोस्टरों में अधिकतर उपद्रवी अधिकतर नौजवान दिख रहे हैं। सभी मुंह बांधे हुए हैं। उनके हाथ में ईंट पत्थर भी नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिसमें महिलाएं पत्थर चलाती नजर आ रही है। हालांकि उनके पोस्टर जारी नहीं हुए हैं। बवाल के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारी लगातार कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं। सांसद जियाउर्रहमान बर्क को भी 168 का नोटिस तामील कराया गया था। वीडियो, सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज से आरोपियों को चिह्नित किया गया। एसपी ने कहा कि किसी भी निर्दोष को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन जो लोग उपद्रव में शामिल रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। एसपी ने लोगों से उपद्रवियों की सूचना देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और उन्हें इनाम भी दिया जाएगा। ज्ञात हो कि बीते रविवार को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा मामले में चार लोगों की मौत हो गई और कई पुलिसवाले घायल हो गए। इसको लेकर पुलिस ने पत्थरबाजी करने वाले की पहचान की है और इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है।  

लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरणों में होंगे समझौते

भोपाल नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरणों को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय में संपर्क करें। विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी आवेदक को निर्धारित छूट के उपरांत शेष बिल आकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि एकमुश्त भुगतान करना होगा। उपभोक्ता/उपयोगकर्ता को विचाराधीन प्रकरण वाले परिसर एवं अन्य परिसरों पर उसके नाम पर किसी अन्य संयोजन/संयोजनों के विरूद्ध विद्युत देयकों की बकाया राशि का पूर्ण भुगतान भी करना होगा। आवेदक के नाम पर कोई वैध कनेक्शन न होने की स्थिति में छूट का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदक द्वारा वैध कनेक्शन प्राप्त करना एवं पूर्व में विच्छेदित कनेक्शनों के विरूद्ध बकाया राशि (यदि कोई हो) का पूर्ण भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा। नेशनल लोक अदालत में छूट आवेदक द्वारा विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग पहली बार किये जाने की स्थिति में ही दी जाएगी। विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग के प्रकरणों में पूर्व की लोक अदालत/अदालतों में छूट प्राप्त कर चुके उपभोक्ता/उपयोगकर्ता छूट के पात्र नहीं होंगे। सामान्य बिजली बिलों में जुड़ी बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। नेशनल लोक अदालत में उपरोक्‍तानुसार दी जा रही छूट आकलित सिविल दायित्‍व राशि 50 हजार तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘14 दिसंबर 2024 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।  

मध्यप्रदेश को प्राकृतिक खेती में अग्रणी बनाने उत्पादों की करें ब्रांडिंग

भोपाल मध्यप्रदेश को प्राकृतिक खेती में अग्रणी राज्य बनाने के लिए उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केट कनेक्टिविटी को बढ़ाया जाना चाहिए। महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर कम्युनिटी मॉडल अपनाए जाना चाहिए। प्राकृतिक खेती के लिए मानकों और प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। उक्त विचार विशेषज्ञों ने आज यहां मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग द्वारा “जलवायु सहनशीलता और सतत् कृषि के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: मार्ग, चुनौतियां और नीति समर्थन” विषय पर आयोजित संवाद में व्यक्त किए। संवाद में कृषि, बागवानी और सतत विकास के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, महिला किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। सीईओ, राज्य नीति आयोग श्री ऋषि गर्ग ने प्राकृतिक खेती के संवर्धन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने में किसानों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना आवश्यक है। आंध्रप्रदेश के उप निदेशक हॉर्टिकल्चर श्रीनिवासुलु ने सामुदायिक प्राकृतिक खेती के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कम लागत और स्थानीय संसाधनों का उपयोग प्राकृतिक खेती को किसानों के लिए आकर्षक बनाता है। अतिरिक्त सचिव बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्रीमती प्रीति मैथिल ने बताया कि प्राकृतिक खेती के उत्पाद उपभोक्ताओं में लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन इसे व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए बेहतर नीति समर्थन और बाजार संपर्क की आवश्यकता है। श्री जी. प्रकाश राव ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक आधार, जैव विविधता में सुधार और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर ने जैविक और प्राकृतिक खेती के बीच के अंतर को स्पष्ट किया और प्राकृतिक खेती को अपनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के सुझाव दिए। उन्होंने “शून्य लागत प्राकृतिक खेती” की तकनीकों पर जोर दिया। प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने विशेषज्ञों से संवाद किया।  

मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं, कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं: रिपोर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह जानकारी पुलिस की खुफिया रिपोर्ट में सामने आई है। ये सभी अलग-अलग समूह में पुरुषों के साथ काम कर रही हैं। यह भी पता चला है कि कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं। गांव के लोगों के साथ संवाद करने, उनकी समस्याएं जानने, पर्चा बांटने, लोगों को बरगलाने या किसी तरह की सहायता मांगने के लिए नक्सली महिलाओं को ही आगे करते हैं। महिलाएं गांव के लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाती हैं। इससे उन्हें गांव में प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी भी मिलती रहती है। पुरुषों की तरह महिलाएं भी छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र से ही हैं। अधिकतर महिलाओं की उम्र 25 से 40 वर्ष की है।   इस बार मुठभेड़ में नहीं फेंका पर्चा अभी तक ऐसा होता रहा कि नक्सली मुठभेड़ के दौरान अपने मांगों से जुड़ा पर्चा फेंक कर जाते थे। पिछले दिनों बालाघाट में हुई मुठभेड़ में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। यह जरूर पता चला है कि इसके पहले कुछ गांवों में उन्होंने तेंदूपत्ता की राशि बढ़ाने, बांस कटाई की दर बढ़ाने और मजदूरी बढ़ाने के लिए पर्चे फेंके थे। गांव के लोगों का समर्थन पाने के लिए वह ऐसी मांग रखते हैं। नक्सलियों की मांग के अनुसार नहीं करते काम पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि हम उनकी मांग के हिसाब से नहीं बल्कि अन्य विभाग और एजेंसियों से मिलकर विकास की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधाएं बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर का निर्माण, सड़क निर्माण, सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाने का काम करते हैं। निजी कंपनियों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) से भी काम कराए जा रहे हैं।

अब तक 5 लाख 10 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने कराई ई-केवायसी

भोपाल राज्य शासन की लाभकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए बिजली उपभोक्ताओं को ई-केवायसी कराना अनिवार्य है। उपभोक्ताओं से कहा गया है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के “उपाय” ऐप के जरिए भी ईकेवायसी करा सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध उपाय ऐप डाउनलोड कर बिजली उपभोक्ता समग्र केवायसी में अपना उपभोक्ता क्रमांक एवं समग्र क्रमांक दर्ज करके बाद लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को दर्ज कर केवायसी प्रक्रिया को पूर्ण कर सकते हैं। अब तक 05 लाख 10 हजार 360 उपभोक्ताओं ने सफलतापूर्वक केवायसी करा ली है। कंपनी ने बताया है कि नर्मदापुरम ग्रामीण में 65 हजार 335, बैतूल ग्रामीण में 75 हजार 961, राजगढ़ ग्रामीण में 31 हजार 099, शहर वृत्त भोपाल में 38 हजार 747, भोपाल ग्रामीण में 34 हजार 181, गुना ग्रामीण में 29 हजार 602, विदिशा ग्रामीण में 37 हजार 157, सीहोर ग्रामीण में 19 हजार 752, ग्वालियर ग्रामीण में 19 हजार 513, शहर वृत्त ग्वालियर में 25 हजार 835, अशोकनगर ग्रामीण में 13 हजार 591, दतिया ग्रामीण में 18 हजार 574, रायसेन ग्रामीण में 36 हजार 384, शिवपुरी ग्रामीण में 18 हजार 477, हरदा ग्रामीण में 15 हजार 257, श्योपुर ग्रामीण में 08 हजार 313, मुरैना ग्रामीण में 14 हजार 889 एवं भिण्ड ग्रामीण में 07 हजार 693 बिजली उपभोक्ताओं की केवायसी की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के जिलों के बिजली उपभोक्ताओं के बिजली संबंधी व्यक्तिगत विवरण को कंपनी के रिकार्ड में अपडेट करने के लिए नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी द्वारा नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया के तहत बिजली उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी जैसे समग्र आईडी, मोबाइल नंबर एवं बैंक खाता इत्यादि की जानकारी को अपडेट किया जा रहा है। नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया से बिजली उपभोक्ताओं को जहां राज्य शासन की योजनाओं का लाभ सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकेगा वहीं दूसरी ओर प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही केवायसी से वास्तविक उपभोक्ताओं के विद्युत संयोजन एवं उनके भार की स्थिति का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे कंपनी कार्यक्षेत्र में विद्युत संरचनाओं के भविष्य में विस्तार की योजना बनाने में आसानी होगी तथा कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं की सही पहचान और मोबाइल नंबर को सटीक रूप से टैग करने में मदद मिलेगी। इससे कंपनी की सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।  

20 हजार से अधिक गैस पीड़ितों के बनाये गये आयुष्मान कार्ड

भोपाल राज्य सरकार द्वारा भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को आयुष्मान ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसमें गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। 28 नवम्बर तक 20 हजार 27 गैस पीड़ितों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों को भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधीन संचालित 6 अस्पतालों एवं 9 औषधालयों में सभी प्रकार के उपचार एवं आवश्यकतानुसार सुविधाएँ निःशुल्क दी जा रही हैं। साथ ही आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी अनुबंधित अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को उपचार सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेष प्रकरणों में इस योजना में निर्धारित पैकेज के अतिरिक्त इलाज पर खर्च होने पर संबंधित अस्पताल को उसकी प्रतिपूर्ति गैस राहत विभाग द्वारा की जाती है। गैस पीड़ित मरीज एवं उनके बच्चों को किडनी, लीवर ट्रॉन्सप्लांट एवं अन्य प्रकार की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिये विशेष प्रकरण मानते हुए मरीजों को आवश्यकतानुसार इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। भोपाल गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों को कैंसर के उपचार के लिये गैस राहत विभाग द्वारा 3 निजी अस्पतालों एवं एम्स भोपाल के साथ अनुबंध भी किया गया है। यहां पीड़ितों को कैंसर के उपचार की नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है। गैस राहत विभाग के अधीन संचालित सभी अस्पतालों में गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के उपचार के लिये अत्याधुनिक इमरजेंसी यूनिट सातों दिन 24 घंटे संचालित की जा रही हैं। गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के किडनी रोग (सी.के.डी.- IV) व अतिगंभीर मरीजों के उपचार के लिये कमला नेहरू अस्पताल, भोपाल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना भी की गई है। इसमें 13 डायलिसिस मशीनें लगाकर मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा है। राज्य शासन की सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त गैस पीड़ित विधवाओं (कल्याणी) को पेंशन राशि के अलावा भोपाल गैस राहत विभाग द्वारा एक हजार रूपये प्रतिमाह अतिरिक्त पेंशन भी दी जा रही है। वर्तमान में करीब 4 हजार 406 गैस पीड़ित विधवाओं (कल्याणियों) को यह पेंशन दी जा रही है।  

ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 2031-32 तक 9.12 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बनाई

नई दिल्ली केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा देश में पावर ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए 2031-32 तक 9.12 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बनाई गई है। यह जानकारी केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने राज्यसभा में दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “राष्ट्रीय विद्युत योजना (ट्रांसमिशन) के अनुसार, 2022-23 से 2031-32 तक के 10 साल की अवधि में 1.91 लाख किलोमीटर (किमी) ट्रांसमिशन लाइनें और 1274 गीगा वोल्ट एम्पीयर (जीवीए) ट्रांसफॉरमेशन क्षमता (220 केवी और ऊपर के वोल्टेज स्तर पर) जोड़ी जाएगी। इसके अलावा 33.25 गीगावॉट हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) बाय-पोल लिंक की भी योजना बनाई गई है। इसके अलावा अंतर-क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता को वर्तमान स्तर 119 गीगावॉट से बढ़ाकर 2026-27 तक 143 गीगावॉट और 2031-32 तक 168 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना है। इस प्लान में ट्रांसमिशन के नए टेक्नोलॉजी विकल्पों, क्रॉस-बॉर्डर इंटरकनेक्शन और ट्रांसमिशन में निजी सेक्टर की भागीदारी पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय विद्युत योजना (ट्रांसमिशन) में नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ मौजूदा और योजनाबद्ध इंटरकनेक्शन को भी कवर किया गया है। एक अन्य लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश में कुल 13,997.5 मेगावाट की 28 जलविद्युत परियोजनाएं (एचईपी) और 6,050 मेगावाट की पांच पंप स्टोरेज परियोजनाएं (पीएसपी) निर्माणाधीन हैं। कुल 19,460 मेगावाट की 28 एचईपी और 4,100 मेगावाट की चार पीएसपी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा एप्रूव किया गया है। उन्होंने कहा कि कुल 8,036 मेगावाट की 11 एचईपी सर्वेक्षण और जांच (एस एंड आई) के अधीन हैं। इसके अलावा बताया कि मौजूदा समय में 29,200 मेगावाट कोयला आधारित क्षमता निर्माणाधीन है, 18,400 मेगावाट क्षमता आवंटित की जा चुकी है और 47,240 मेगावाट संभावित क्षमता विचाराधीन है। मंत्री ने आगे बताया कि 31 अक्टूबर तक कुल 1,27,050 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता कार्यान्वयन के अधीन है, जबकि 89,690 मेगावाट बोली प्रक्रिया के तहत है।  

प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय ने किया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्था का किया निरीक्षण

भोपाल प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने सीहोर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, संकल्प वृद्धाश्रम एवं नशा मुक्ति केन्द्र का निरीक्षण किया। प्रमुख सचिव ने पुनर्वास संस्थान द्वारा दिव्यांगजन को दी जा रही सुविधाओं के विषय में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने एपिड योजनान्तर्गत शिविर आयोजित करने तथा कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। श्रीमती वायंगणकर ने नशामुक्ति केन्द्र में भर्ती नशा मरीजों से भी चर्चा की। इस अवसर पर उप संचालक सामाजिक न्याय श्री महेश कुमार यादव सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

वक्फ विधेयक पर लोकसभा में सुनवाई के लिए और समय मांगा था, संयुक्त समिति को रिपोर्ट के लिये बजट सत्र तक मिला समय

नई दिल्ली लोकसभा में गुरुवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर बनी संयुक्त समिति को रिपोर्ट देने की समयावधि बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, इसके तहत समिति अब आगामी बजट सत्र तक रिपोर्ट दे सकेगी। समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयावधि बजट सत्र, 2025 के अंतिम दिन तक बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में रखा, जिसे सदस्यों ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस पर पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेन्नटी ने प्रस्ताव पारित होने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक पर चर्चा करने के लिये और समय देने की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर मांग की थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सदस्य जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता में समिति का गठन संसद के पिछले सत्र के दौरान किया गया था। इससे पहले सरकार ने वक्फ कानून में संशोधन के लिये विधेयक पेश किया था, जिस पर कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दलों ने गहरी आपत्ति जतायी थी। इसके बाद सदन ने समीक्षा के लिये विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव किया था।  

मंत्री नागर सिंह चौहान ने अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री ने विद्यालय का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से संवाद भी किया

भोपाल अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि ज्ञानोदय विद्यालयों से हमें गरीब बच्चों को शिक्षित करने का अवसर मिल रहा है, यह हमारा सौभाग्य है। सभी को शिक्षित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हम यह प्रयास करें कि विद्यार्थियों को पढ़ाई का माहौल मिले। पढ़ाई में कमजोर बच्चों की मार्किंग कर, उनकी कमियों का निराकरण करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के प्रवेश लेते ही बच्चों की नींव मजबूत करने का प्रयास करें, जिससे वे राष्ट्र के सशक्तिकरण के लिये तैयार हो सके। मंत्री श्री चौहान गुरुवार को ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय, कटारा हिल्स भोपाल में शासकीय ज्ञानोदय आवासीय विद्यालयों के संचालन की समीक्षा कर रहे थे। मंत्री श्री चौहान ने विद्यालय का निरीक्षण भी किया। मंत्री श्री चौहान ने निरीक्षण में छात्र-छात्राओं से शैक्षणिक, पाठ्येतर गतिविधियों, मिलने वाली सुविधाओं के बारे में चर्चा भी की। उन्होंने विद्यालय में स्थापित साइंस लैब, सोशल साइंस लैब, म्यूजिक रूम और क्लास रूम का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए उपकरणों और प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ दोपहर भोजन भी किया। मंत्री श्री चौहान ने ज्ञानोदय विद्यालयों के परीक्षा परिणाम की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में प्रदेश भर से मेरिट के आधार पर चयनित विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। सभी शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि बच्चों के शैक्षणिक स्तर में वृद्धि करें। सभी विद्यालयों में परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत होना चाहिए। बोर्ड परीक्षाओं में सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो। परीक्षा परिणाम में सुधार नहीं होने पर जिम्मेदार शिक्षकों एवं अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा शासन ने सर्व-सुविधायुक्त ज्ञानोदय आवासीय विद्यालयों की स्थापना की है, इन संस्थानों पर पालकों और विद्यार्थियों का भरोसा बना रहे, इसके लिये हमें टीम भावना से कार्य करना होगा। मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के सभी ज्ञानोदय आवासीय विद्यालयों में रिक्त पदों की शीघ्र पदपूर्ति कर लें। सभी विद्यालयों में खेलकूद परिसर बनाएं जाएं, जिन संभाग में परिसर बनाने का कार्य भूमि अनुपलब्धता के कारण अप्रारंभ हैं, उन जिलों के कलेक्टर को भूमि आवंटन करने के लिए पत्र लिखें। उन्होंने ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय, रीवा के लिए शीघ्र भूमि आवंटन कार्यवाही कराने के निर्देश दिए। उन्होंने इन विद्यालयों के छात्रावासों के संचालन, रख-रखाव एवं सामग्री प्रदाय, विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं तथा उपलब्ध बजट उपयोग की भी समीक्षा की। प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति कल्याण डॉ. ई. रमेश कुमार ने कहा कि परीक्षा परिणाम बेहतर करने के लिए सभी प्राचार्यों को विद्यार्थियों की ग्रेडिंग करें। ग्रेडिंग के बाद कमजोर बच्चों की हैंड होल्डिंग कर उनकी शिक्षा के स्तर को सुधारा जाए। उन्होंने प्राचार्य विद्यार्थियों की विषयवार मैपिंग करने और बोर्ड परीक्षाओं के लिए मॉडल प्रश्न उत्तर तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालय के छात्र-छात्राओं से भी चर्चा की। हाईस्कूल स्तर से विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में मार्गदर्शन देने और करियर काउंसलिंग करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर अपर आयुक्त श्री संजय वार्ष्णेय, प्राचार्य ज्ञानोदय विद्यालय भोपाल श्री नीरज अब्राहम भी उपस्थित रहे। अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियो के अध्ययन के लिए हर संभागीय मुख्यालय में ज्ञानोदय आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल उन्नयन, व्यक्तित्व/नेतृत्व विकास करना है। प्रदेश के सभी 10 संभागीय मुख्यालय में ज्ञानोदय विद्यालय संचालित हैं।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बढ़ा ठंड का प्रकोप, तापमान शून्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में गुरुवार को तापमान शून्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जबकि शोपियां और पहलगाम में तापमान क्रमशः शून्य से 5.5 डिग्री सेल्सियस नीचे और शून्य से 5.0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। ये सबसे ठंडे स्थान रहे। मौसम विज्ञान केंद्र (आईएमडी) के अनुसार श्रीनगर में मौसम की सबसे ठंडी रात रही क्योंकि देर रात तापमान शून्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया जबकि पिछली रात यह शून्य से 0.6 डिग्री सेल्सियस था, जो राजधानी के लिये औसत से 1.7 डिग्री सेल्सियस कम है। पहलगाम के पर्यटन स्थल में गुरुवार को तापमान शून्य से 5.0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि पिछली रात तापमान शून्य से 4.4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया,जो सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस कम रहा। दक्षिण कश्मीर स्थित शोपियां शून्य से 5.5 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा स्थान रहा। अनंतनाग में शून्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस, कोनीबल में शून्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस, पुलवामा में शून्य से 4.8 डिग्री सेल्सियस और कुलगाम में शून्य से 4.0 डिग्री सेल्सियस शामिल हैं। गंदेरबल जिले के सोनमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दक्षिण कश्मीर में कश्मीर के प्रवेशद्वार शहर काजीगुंड में शून्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले शून्य से 3.0 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस कम रहा। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में गुलमर्ग के स्की रिसॉर्ट में न्यूनतम तापमान में एक डिग्री का सुधार हुआ और यह पिछली रात के शून्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले आज शून्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.3 डिग्री सेल्सियस अधिक है। कोकरनाग में तापमान शून्य से कम दर्ज किया गया और पिछली रात 0.4 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले 0.2 डिग्री सेल्सियस कम तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। कुपवाड़ा में एक दिन पहले दर्ज किए गए शून्य से 1.9 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले शून्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस कम तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री सेल्सियस कम है। केन्द्र शासित प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान मौसम आमतौर पर शुष्क रहने और 29-30 नवंबर को कश्मीर घाटी के ऊंचे इलाकों हल्की बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का अनुमान है।  

प्रदेश का तीसरा पूर्णतः स्मार्ट मीटरीकृत शहर बना थांदला

भोपाल मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, स्मार्ट मीटरीकरण का कार्य प्राथमिकता के साथ कर रही है। पश्चिम क्षेत्र कंपनी का थांदला शहर प्रदेश का तीसरा शत प्रतिशत स्मार्ट मीटरीकरण वाला शहर बन गया है। इसके पहले महू और खरगोन शहर इस श्रेणी के हैं। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इंदौर व झाबुआ के विद्युत कार्मिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की प्रबंध निदेशक सुश्री रजनी सिंह ने बताया कि कंपनी स्तर पर स्मार्ट मीटरीकरण कार्य अत्यंत प्राथमिकता व गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है। प्रदेश के तीसरे पूर्ण स्मार्ट मीटरीकृत शहरों में झाबुआ जिले का थांदला शामिल हो गया है। थांदला नगरीय क्षेत्र में कुल 5631 अत्याधुनिक स्मार्ट मीटर लगाए हैं। इन स्मार्ट मीटरों में सिंगल फेज, थ्री फेज के अलावा ट्रांसफार्मर पर लगाए जाने वाले स्मार्ट मीटर भी शामिल हैं। प्रबंध निदेशक सुश्री रजनी सिंह ने बताया कि झाबुआ शहर आगामी एक सप्ताह में शत-प्रतिशत स्मार्ट मीटर वाला हो जाएगा। प्रबंध निदेशक ने बताया कि रतलाम समेत अन्य कई जिला मुख्यालयों पर 50 से 85 प्रतिशत स्मार्ट मीटरीकरण कार्य हो चुका है। सुश्री रजनी सिंह ने बताया कि कंपनी क्षेत्र में अब तक 8.50 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

कमला हैरिस का अपने समर्थकों के लिए पहला संदेश-आप किसी को भी अपनी ताकत को छीनने की इजाजत न दें

न्यूयॉर्क उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने अपने समर्थकों से कहा कि उन्हें अपनी ताकत की रक्षा करनी होगी। अपनी हार स्वीकारने वाली स्पीच के बाद यह उनका अपने समर्थकों के लिए पहला संदेश है। हैरिस ने एक वीडियो संदेश में कहा, “मैं आपको बस यह याद दिलाना चाहती हूं कि आप किसी को भी अपनी ताकत को छीनने की इजाजत न दें।” हैरिस ने कहा, “आपके पास वही शक्ति है जो 5 नवंबर से पहले थी, और आपके पास वही उद्देश्य है जो पहले था।।” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए कभी भी किसी व्यक्ति या हालात को इस ताकत को आपसे छीनने न दें।” चुनावी हार के बाद से हैरिस ने सार्वजनिक आयोजनों से दूर रही हैं। हार के बाद वह हवाई में छुट्टियां मनाने चली गईं और सोमवार को अपने गृह निवास सैन फ्रांसिस्को लौट आईं। डेमोक्रेटिक पार्टी, ने मंगलवार को एक्स और टिकटॉक पर 29 सेकंड का उनका वीडियो संदेश जारी किया। हालांकि यह नहीं बताया कि यह कब और कहां रिकॉर्ड किया गया। बीडियो में बोलते समय कमला हैरिस बेहद भावुक नजर आ रही थी। वह अपनी बात पर जोर देने के लिए हाथों से इशारे भी कर रही थीं। इससे पहले 6 नवंबर को अपने भाषण में, हार स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा, “मैं ऐसे भविष्य के लिए लड़ाई कभी नहीं छोड़ूंगी जहां अमेरिकी अपने सपनों, महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा कर सकें।” कमला हैरिस के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। एक संभावना यह जताई जा रही है कि वह 2026 में कैलिफोर्निया के गवर्नर पद का चुनाव लड़ सकती हैं और गैविन न्यूसम की जगह ले सकती हैं। न्यूसम का दूसरा कार्यकाल 2027 में समाप्त हो रहा है और वह राज्य के कानून के तहत तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। हालांकि वह इससे उच्च पद पर रह चुकी हैं, लेकिन सबसे अधिक आबादी वाले और सबसे अमीर राज्य के गवर्नर के पास उपराष्ट्रपति की तुलना में वास्तविक रूप से कहीं अधिक शक्तियां होती हैं। न्यूसम खुद 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। दूसरी संभावना यह है कि हैरिस राष्ट्रपति पद के लिए फिर से चुनाव लड़ें, हालांकि उनके खिलाफ दो बातें जाती हैं। 2020 में नामांकन के लिए पार्टी प्राइमरी से बाहर हो गई थीं और इस साल, उन्हें बिना किसी प्रतियोगिता के नामांकन मिला, लेकिन वह डोनाल्ड ट्रंप से हार गईं।

भारतीय टेक्नोलॉजी और जर्मन एक्सपर्ट्स के समन्वय से होगा औद्योगिक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को जर्मनी दौरे पर बवेरिया राज्य के चांसलरी प्रमुख और संघीय एवं यूरोपीय मामलों के साथ मीडिया विभाग के मंत्री डॉ. फ्लोरियन हैरमेन से मुलाकात की। इस मुलाकात में राज्य स्तर पर सहयोग के विभिन्न अवसरों पर चर्चा की गई। चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं डॉ. हैरमेन ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और जर्मनी के बीच मजबूत होते रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में राज्य स्तर पर भी साझेदारी बढ़ाने पर रजामंदी दिखाई। दोनों नेताओं ने तकनीकी नवाचार, सुपरकंप्यूटिंग, ऑटोमोटिव सेक्टर, एरोनॉटिक्स और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग के पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जर्मन प्रतिनिधिमंडल के टाइम मैनेजमेंट से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, “जो समय को जीतता है, वह दुनिया को जीत सकता है।” उन्होंने जर्मनी की आर्थिक सुदृढ़ता और परिवर्तन को प्रेरणादायक बताते हुए इसे राष्ट्रीय विकास और रणनीतिक प्रगति का एक आदर्श मॉडल निरूपित किया। दोनों पक्षों ने इस मुलाकात को मध्यप्रदेश और बवेरिया के बीच दीर्घकालिक और आपसी लाभकारी संबंधों का शुभारंभ बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और बवेरिया के बीच जलवायु नीति से जुड़े संकटों का समाधान, तकनीकी नवाचारों, उच्च शिक्षा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और मध्यप्रदेश के नागरिकों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करने की दिशा में मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के मंडीदीप और पीथमपुर में पहले से मौजूद जर्मन निवेशों के सुगम समन्वय के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में एक विशेष राज्य सरकारी संपर्क कार्यालय स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा की। उम्मीदों से बेहतर रही जर्मनी में हमारी औद्योगिक शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जर्मनी और मध्यप्रदेश का आपसी सहयोग औद्योगिक क्रांति के नए द्वार खोलने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जर्मनी की बवेरिया स्टेट के चांसलर डॉ. हैरमेन के साथ विस्तार से बात हुई है। मध्यप्रदेश में जर्मन एक्सपर्ट्स आयेंगे, साथ ही टेक्नोलॉजी भी उपलब्ध करवायेंगे। दोनों देश आपसी समन्वय से मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी का हमारे देश से पुराना संबंध रहा है। दुनिया में यह सभ्यता अलग ढंग से जानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं औद्योगिक प्रतिनिधि मंडल का जर्मनी के म्यूनिख पहुंचने पर भारत के कौंसलेट जनरल श्री शत्रुघ्न सिन्हा और भारतीय संघ के अध्यक्ष श्री राणा हरगोविंद सिंह एवं अन्य भारतवंशियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जर्मन भाषा के लिए खोलेंगे “लैंग्वेंज इंस्टीट्यूट” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने म्यूनिख स्थित बवेरिया स्टेट चांसलरी सरकार राजनैतिक नेतृत्व के साथ संवाद किया। जर्मनी और मध्यप्रदेश सरकार के समन्वय से रोजगार के नए आयाम स्थापित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 8.50 करोड़ की जनसंख्या वाला देश जर्मनी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तकनीकी दक्षता के साथ जिस रूप में दुनिया के सामने उभरा वह आदर्श है। उन्होंने कहा कि जर्मनी में काम के अनेक अवसर तो हैं, परंतु भाषाई चुनौती भी है। इसको दूर करने के लिए हम मध्यप्रदेश में “लैंग्वेंज इंस्टीट्यूट” खोलने की योजना बना रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसरों के लिए भाषा चुनौती नहीं बनें और मध्यप्रदेश तथा जर्मनी के अधिकारियों के मध्य समन्वय के साथ भाषाई सहजता से काम हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मनी पांचवीं वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में आज दुनिया के सामने है। यह अपने आप में प्रमाण है कि जर्मनी से सीखने के लिए बहुत कुछ है। हिन्दुस्तान के जर्मनी के साथ अतीत से मधुर संबंध है। मैक्समूलर ने हमारे वेदों का संस्कृत भाषा से अनुवाद करके जर्मनी के माध्यम से दुनिया के सामने हमारे प्राचीन ज्ञान को प्रकट किया था। अतीत के संबंध से इनकी अच्छाइयों और टेक्नोलॉजी को सीखते हुए मध्यप्रदेश और बवेरिया स्टेट समन्वयपूर्वक आगे बढ़ेंगे। औद्योगिक विकास के लिए जर्मन टेक्नोलॉजी का सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मनी के टेक्नीकल स्टाफ के माध्यम से इंजीनियरिंग, पॉलेटेक्निक, आईटीआई जैसे टेक्निकल क्षेत्र में हमारे उद्योगपति लाभ ले सकेंगे। खासकर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में जर्मन टेक्नोलॉजी उन्नत स्तर की है। हम जानते हैं इसमें कई चुनौतियां भी सामने आयेंगी, एक दूसरे के तकनीकी अनुभवों को साझा करते हुए हम आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस विदेशी दौरे के बाद भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा। इसमें हमने जर्मनी के प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों को भी आमंत्रित किया है। दोनों राज्यों में अधिकारियों को एक दूसरे राज्य में भेजने में प्रशासनिक लेवल पर जो कठिनाईयां आती हैं, उनको दूर किया जाएगा। इससे व्यापार और व्यवसाय की राह में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री यादव ने उम्मीद जताई कि इस वार्ता से सहयोगात्मक विकास, तकनीकी उन्नति और आर्थिक समृद्धि की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सहयोग का एक नया अध्याय प्रारंभ होगा।  

मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कोल आधारित विद्युत उत्पादन के लिए कोल आवंटन के लिए स्वीकृतिप्रदान की है। इससे 4100 मेगावॉट विद्युत उत्पादन के लिए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने सभी विभागों को प्रगति के अवसर दिये हैं। वे जानते हैं कि बिजली के बिनाविकास की कल्पना संभव नहीं है। यह एक बड़ा अवसर है, जिससे हम प्रदेश में ही स्वयं के पॉवर प्लांट लगा सकते हैं। कोल आवंटन करेगा संजीवनी का काम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में हम आज भी सरप्लस की स्थिति में हैं, परंतु औद्योगिक विकास के लिए नए उद्योगों की स्थापना के परिणामस्वरूप बिजली की खपत में भी निरंतर वृद्धि होती जा रही है। भविष्य की दृष्टि से भी हमें नए थर्मल पॉवर स्टेशन की आवश्यकता होगी। यह कोल आवंटन उसमें संजीवनी की तरह काम करेगा। हम थर्मल पॉवर के नए स्टेशन की स्थापना के लिए उद्यमियों को प्रेरित करेंगे। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि साथ ही राज्य नवकरणीय ऊर्जा की ओर भी समान रूप से आगे बढ़ रहा है। 25 हजार करोड़ रूपये का प्राप्त होगा निवेश उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की आगामी लंबी अवधि की विद्युत मांग के आंकलन के आधार पर 27 नवम्बर को भारत सरकार की उच्च स्तरीय अंतर्विभागीय समिति द्वारा प्रदेश के ऊर्जा विभाग के प्रस्तुतिकरण के आधार पर कुल 4100 मेगावॉट के नए थर्मल पॉवर प्लांट लगाने के लिये कोयला आवंटन स्वीकृत किया गया है। इस संबंध में संयंत्र लगाने के लिये प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा निविदा जारी की जायेगी। इससे लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त होगा। साथ ही हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रदेश उद्योग, घरेलू एवं कृषि सिंचाई के लिये सस्ती और गुणवत्तापूर्ण ऊर्जा प्रदाय करेगा और ऊर्जा उत्पादन में आत्म-निर्भर बना रहेगा।  

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