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चार की मौत और एक घायल, बिहार-बक्सर जिले में मिट्टी के ढेर में दबी बच्चियां

बक्सर। बिहार के बक्सर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रविवार को राजपुर थाना क्षेत्र स्थित सरेंजा राजकीय बुनियादी विद्यालय के पास मिट्टी के टीले में पांच बच्चियां मिट्टी खोद रही थीं। इसी दौरान टीला भरभरा कर गिर पड़ा और बच्चियां दब गईं। इस हादसे में चार बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल बच्ची का फिलहाल इलाज जारी है। सरेंजा बुनियादी विद्यालय के पास पुराने मिट्टी के टीले में मिट्टी खोदने के लिए पांच बच्चियां गई थीं। ये बच्चियां पीढ़ी पर्व की तैयारी के लिए घर में सफाई और लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लेने गई थीं। जब वे टीले के पास मिट्टी खोद रही थीं, तभी अचानक टीला भरभरा कर गिर पड़ा और सभी बच्चियां इसके नीचे दब गईं। मिट्टी के ढेर में दबने के बाद आसपास खेल रहे बच्चों ने शोर मचाया, इसके बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने की कोशिश की। ग्रामीणों की मदद से सभी बच्चियों को मलबे से निकाला गया और तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने चार बच्चियों की मौत की पुष्टि कर दी, जबकि एक बच्ची को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। मृतक बच्चियों में नयनतारा कुमारी (11 वर्ष), शालिनी कुमारी (8 वर्ष), शिवानी कुमारी (6 वर्ष), और संजू कुमारी (11 वर्ष) शामिल हैं। जबकि घायल बच्ची की पहचान करिश्मा कुमारी (10 वर्ष) के रूप में हुई है। इस घटना के बाद मृतक बच्चियों के परिवारों में मातम का माहौल है, उनका रो-रो कर बुरा हाल है। घटना से आसपास के पूरे इलाके में गम का माहौल है। घटना की सूचना मिलते ही राजपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने भी घटना की जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मिट्टी का टीला बहुत पुराना था और उसमें गहरी खुदाई से वह खतरनाक हो गया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

केजरीवाल-सिसोदिया ने दिलाई सदस्यता, UPSC टीचर अवध ओझा आम आदमी पार्टी में शामिल

नई दिल्ली। प्रसिद्ध UPSC कोच और मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा ने राजनीति में कदम रखते हुए सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन थाम लिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में अवध ओझा ने सदस्यता ग्रहण की। अवध ओझा इतिहास के बड़े जानकार हैं और उसी की तैयारी भी कराते हैं. अवध ओझा का जन्म 3 जुलाई 1984 को यूपी के गोंडा में हुआ था. उनके पिता माता प्रसाद ओझा पोस्टमास्टर थे और उनकी मां वकील थीं. ओझा की शुरुआती पढ़ाई लिखाई गोंडा से ही हुई. ओझा को बचपन से आईएएस बनने का ख्वाब था. ग्रेजुएशन के बाद ओझा यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए. उन्होंने खूब तैयारी की लेकिन वो यूपीएससी क्रैक नहीं कर पाए. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद में दोस्त की कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया. धीरे-धीरे वो लोकप्रिय होते गए. शुरुआत में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन बाद उन्होंने पढ़ाने के तरीके को बदला और यही तरीका छात्रों को भा गया. अपने पढ़ाई के तरीकों की वजह से अवध ओझा सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहते हैं. वो एक दम आम भाषा में छात्रों को पढ़ाते हैं. ओझा कई बड़े आईएएस संस्थानों में पढ़ा चुके हैं. ओझा अपना यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं. अवध ओझा क्लासेस नाम से वो कोचिंग भी चलाते हैं. इलके अलावा वो IQRA IAS के फाउंडर भी हैं.

लगा लंबा जाम, जगह-जगह RAF तैनात कर की बैरिकेडिंग, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर छावनी में तब्दील

नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली कूच का एलान कर दिया है। आज सोमवार को नोएडा की ओर से किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। जिसके चलते नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर दी है तो वहीं दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर सख्ती बढ़ा दी है। महामाया फ्लाईओवर के पास दोपहर 12 बजे से जुटेंगे। ये हैं दिल्ली आने वाले किसानों की सरकार से मांग 10 फीसदी विकसित भूखंड, सभी किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा, नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी लाभ, हाई पावर कमेटी द्वारा किसानों के हक में भेजी गई सिफारिशें लागू किए जाने आदि मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर मोर्चा से जुड़े 10 किसान संगठनों 25 नवंबर को प्रदर्शन कर महापड़ाव शुरू किया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बाद किसान यमुना प्राधिकरण दफ्तर के सामने 28 नवंबर से बैठे हैं। 10 फीसदी विकसित भूखंड और 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा प्रमुख मुद्दा है। दिल्ली कूच के आह्वान पर बढ़ी चौकसी, कई मार्गों पर यातायात प्रभावित किसानों के दिल्ली कूच आह्नान के कारण पुलिस की ओर से जीरो प्वाइंट पर बैरिकेड लगाकर चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा कासना, दादरी अन्य रूट से दिल्ली जाने वाले मार्ग पर बैरिकेड लगाकर चेकिंग की जा रही है। चेकिंग के कारण कई चौराहों पर यातायात का दबाव है।  कई किसान नेताओं को उनके घर में नजरबंद किया गया है। किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए चार हजार से ज्यादा पुलिस बल सड़कों पर है। दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर फोर्स तैनात किसानों के दिल्ली कूच से पहले ही दिल्ली-यूपी के चिल्ला बॉर्डर पर पुलिस, आरएएफ के जवान और दंगा नियंत्रण वाहन तैनात किए गए हैं। डीएनडी बॉर्डर पर लगा जाम दिल्ली नोएडा को जोड़ने वाले डीएनडी बॉर्डर पर सुबह लंबा जाम लग गया। किसानों ने दिल्ली कूच का एलान किया है। जिसके बाद बॉर्डरों पर जगह-जगह सख्ती बढ़ा दी है और साथ ही बैरिकेडिंग भी की है। चिल्ला बॉर्डर पर पुलिस और आरएएफ तैनात किसानों की दिल्ली कूच एलान के बाद यूपी के चिल्ला बॉर्डर पर पुलिस और आरएएफ की तैनाती पर डीसीपी पूर्वी दिल्ली अपूर्व गुप्ता ने कहा कि हमें कुछ किसान संगठनों के बारे में पहले से सूचना मिली थी। जिन्होंने दिल्ली कूच करने की घोषणा की है। संसद सत्र चलने के कारण उन्हें इस विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है। आगे कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो और कोई यातायात बाधित न हो। हम नोएडा पुलिस के साथ समन्वय कर रहे हैं। दिल्ली-यूपी की सभी बड़ी और छोटी सीमाओं पर पुलिस बल तैनात है। किसान आंदोलन के चलते ग्रेनो में ऑनलाइन क्लास किसानों के दिल्ली कूच करने के दौरान सड़कों पर लगने वाले जाम से छात्रों को परेशानी न हो। इसके लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कई स्कूलों ने सोमवार को ऑनलाइन क्लास संचालित करने का निर्णय लिया है। नोएडा के एमिटी,डीपीएस 30, डीपीएस 122, ग्रेटर नोएडा वेस्ट का डीपीएस,स्पर्श ग्लोबल स्कूल सहित कई स्कूल आज ऑनलाइन संचालित हो रहे हैं। छात्रों को जाम में फंसने के दौरान कोई परेशानी न हो इसको देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने स्वत ऑनलाइन क्लास चलाने का निर्णय लिया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉक्टर धर्मवीर सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से ऑनलाइन क्लास चलाने का निर्देश नहीं दिया गया है। स्कूलों की ओर से स्वयं ऑनलाइन क्लास चलाने का निर्णय लिया गया है। प्रदूषण को देखते हुए पहले ही हाइब्रिड मोड में क्लास चलाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। चिल्ला बॉर्डर पर लगी गाड़ियों की लंबी कतार किसानों के आज से दिल्ली की ओर मार्च शुरू होने की वजह से दिल्ली नोएडा के बीच चिल्ला बॉर्डर पर यातायात जाम देखा गया। सुबह लोग घरों से ऑफिस के लिए निकले हैं। जिसके बाद सख्त पहरे के बीच ट्रैफिक की रफ्तार धीमी है। दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर पुलिस की तैयारी उत्तर प्रदेश के किसानों के दिल्ली कूच के एलान के बाद आज से नोएडा में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नोएडा ट्रैफिक पुलिस डायवर्जन को लेकर तैयारी — -नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर महामाया फ्लाईओवर या उससे पहले जाम लगने पर वाहन सेक्टर-128 कट से सर्विस रोड से मुड़कर सेक्टर-94 चरखा गोलचक्कर के पास पहुंचेंगे। यहां से डीएनडी व चिल्ला बॉर्डर की तरफ जाने वाले वाहनों को भी कालिंदी कुंज से दिल्ली को भेजा जाएगा। -कालिंदी कुंज की तरफ से आने वाले वाहन जो दलित प्रेरणा स्थल के सामने से होते हुए नोएडा को आते हैं इनको सेक्टर-37, 18 होकर आगे निकाला जाएगा। -किसानों के नोएडा की तरफ दलित प्रेरणा स्थल के सामने पहुंचने पर ग्रेनो की तरफ से आने वाले ट्रैफिक को कालिंदी कुंज के साथ-साथ लूप से महामाया फ्लाईओवर पर चढ़ाकर सेक्टर-37 की तरफ निकाला जाएगा। सेक्टर-37 से होकर सीधे सेक्टर-18 बाजार के मुख्य रास्ते से अट्टा पीर होते हुए डीएनडी व चिल्ला बॉर्डर की तरफ वाहनों को भेजा जाएगा। -दलित प्रेरणा के सामने किसानों के दिल्ली से आने वाले रास्ते भी जाम करने की स्थिति में चिल्ला बॉर्डर व डीएनडी से आने वाले वाहनों को सेक्टर-27 अट्टा पीर, अट्टा बाजार के सामने से होते हुए सेक्टर-37 लाया जाएगा। यहां से नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे की तरफ भेजा जाएगा। महामाया फ्लाईओवर से दिल्ली कूच की तैयारी महामाया फ्लाईओवर जहां से किसानों ने आगे दिल्ली कूच का एलान किया है वहां से कालिंदीकुंज से होकर नोएडा सेक्टर-18 की तरफ आने, डीएनडी, चिल्ला बॉर्डर से दिल्ली जाने और नोएडा आने के रास्ते जुड़े हुए हैं। इस वजह से ट्रैफिक पूरी तरह से यहां भीड़ जुटने पर प्रभावित हो जाता है। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि तैयारी कर ली गई है। जरूरत के हिसाब से डायवर्जन प्लान प्रभावी किया जाएगा। पुलिस ने भी सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर तैयारी की हुई है। कई थानों की पुलिस और पीएसी को लगाया जाएगा। चिल्ला, डीएनडी बॉर्डर व महामाया फ्लाईओवर के पास भी भारी संख्या में पुलिसबल लगाया जाएगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर भी कई चेक प्वाइंट बनाए जाने हैं।  

काली कमाई के साम्राज्य का पर्दाफाश, उदयपुर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी के घर इनकम टैक्स का छापा

उदयपुर। शहर की शांति को 28 नवंबर की सुबह अचानक भंग कर दिया गया, जब इनकम टैक्स विभाग ने उदयपुर के प्रतिष्ठित ट्रांसपोर्ट कारोबारी टीकम सिंह राव के घर और कार्यालय समेत 23 ठिकानों पर छापा मारा। यह रेड चार दिनों तक चली, और इसके अंत में सामने आया एक ऐसा काला सच जिसने पूरे राजस्थान को हिला दिया। रेड के दौरान 137 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला। इसमें से 95 करोड़ रुपये के लेन-देन का कोई हिसाब-किताब नहीं था। कार्रवाई में 4 करोड़ रुपये नकद और 50 किलो सोना बरामद किया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें से 45 किलो सोना अघोषित निकला, जिसकी बाज़ार कीमत लगभग 38 करोड़ रुपये आंकी गई। टीकम सिंह राव, जो “उदयपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड” के मालिक हैं, पर अवैध ट्रांसपोर्टेशन से काली कमाई करने के आरोप लगे हैं। इस पैसे का बड़ा हिस्सा लग्जरी कारों, होटलों और महंगी प्रॉपर्टी में निवेश किया गया। दस्तावेजों की जांच जारी है, और अधिकारियों को उम्मीद है कि काले धन की वास्तविक राशि इससे भी अधिक हो सकती है। टीकम सिंह के छोटे भाई, गोविंद सिंह राव, बांसवाड़ा में भाजपा जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। गोविंद सिंह कंपनी के कामकाज को संभालते थे। इनकम टैक्स विभाग ने उनके ठिकानों पर भी कार्रवाई की, जिससे परिवार के राजनीतिक और व्यावसायिक संबंधों की परतें खुल रही हैं। टीकम सिंह के 7 बैंक लॉकर खोले गए, जिनसे 25 किलो सोना और 2 करोड़ नकद मिले। अब तक कुल 50 किलो सोना और 5 करोड़ नकद जब्त किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह राजस्थान में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है। टीकम सिंह खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते थे। उनकी तस्वीरें योग गुरु बाबा रामदेव के साथ भी देखी गई हैं। लेकिन इस रेड ने उनकी सामाजिक छवि के पीछे छिपे काले सच को उजागर कर दिया है। इनकम टैक्स विभाग ने जब्त दस्तावेजों की गहराई से जांच शुरू कर दी है। संभावना है कि इस कार्रवाई के बाद और भी बड़े खुलासे होंगे। टीकम सिंह का यह काला साम्राज्य कैसे बना और इसका जाल कितनी दूर तक फैला है, यह कहानी का अगला अध्याय होगा। उदयपुर की यह घटना एक सबक है कि भले ही काला धन और ताकत के दम पर छवि को चमकाया जा सकता है, लेकिन सच्चाई आखिरकार सामने आ ही जाती है।

बड़ी संख्या में मौजूद रहेगा पुलिस बल, आज दिल्ली कूच करेंगे किसान

नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान आज दिल्ली कूच करेंगे। दिन में 12 बजे के आसपास अलग-अलग संगठनों के किसान महामाया फ्लाईओवर के पास जमा होंगे। वहीं कुछ और किसान संगठन ग्रेटर नोएडा के परी चौक से ट्रैक्टर ट्राली के साथ कूच करेंगे। किसानों के इस आंदोलन को देखते हुए महामाया फ्लाईओवर के आसपास ट्रैफिक डायवर्जन कर दिया गया है। वहीं कई स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है और कई स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं चला रहे हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी को तैनात किया गया है। दरअसल रविवार को तीनों प्राधिकरण, जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नर के साथ किसानों की तकरीबन 2 घंटे तक बैठक चली जो बेनतीजा निकली। अधिकारियों ने किसानों से अपील की थी कि वह दिल्ली कूच के कार्यक्रम को स्थगित कर दें, लेकिन किसान संगठनों ने उसे दरकिनार कर दिया। पूरे जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है। उसके बावजूद भी किसान बड़ी संख्या में महामाया फ्लाईओवर के पास जुटेंगे और यहां से दिल्ली कूच करेंगे। किसानों के इस आंदोलन को देखते हुए कई स्कूलों ने सोमवार को अपने स्कूलों में छुट्टी कर दी है और कई जगह पर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। आंदोलन की वजह से जगह-जगह जाम लगने की आशंका को देखते हुए स्कूलों ने कदम उठाया है। वहीं दूसरी तरफ आम जनता को जाम की समस्या से बचने के लिए नोएडा पुलिस के ट्रैफिक विभाग ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। उन्होंने बताया है कि जरूरत के हिसाब से डायवर्जन प्रभावित किया जाएगा। चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी, महामाया फ्लाईओवर के पास भी बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी को तैनात किया जाएगा। गौरतलब है कि 25 नवंबर से शुरू हुआ किसान आंदोलन अब अपने चरम पर पहुंच गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले के अनुसार आंदोलन के तीसरे और अंतिम चरण में आज संसद सत्र के दौरान किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। सानों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्राधिकरण के सामने महापंचायत की थी। जिसमें उनकी मुख्य मांगे हैं कि पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रभावित किसानों को 10 प्रतिशत प्लॉट और 64.7 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा मिले। 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित भूमि पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा और 20 प्रतिशत प्लॉट दिया जाए। इसके साथ ही सभी भूमिधर और भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोजगार और पुनर्वास लाभ भी मिले। हाई पावर कमेटी द्वारा पास किए गए मुद्दों पर सरकारी आदेश जारी किया जाए। इसके अलावा आबादी क्षेत्र का उचित निस्तारण किया जाना चाहिए।

मध्यप्रदेश: 1800 करोड़ से बनेंगे एक्सप्रेस हाइवे, 25 मिनट दूर होगा एयरपोर्ट

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के भविष्य का रास्ता अयोध्या बाईपास के आसपास से निकलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आमजन से लेकर कारोबारी तक को केवल 25 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचने के लिए यहां काम तेजी से किया जा रहा है। इतना ही नहीं भोपाल को लॉजिस्टिक हब बनाने, नया व्यवसायिक क्षेत्र- इंडस्ट्रीयल कॉरीडोर विकसित करने समेत भोपाल में प्रवेश के एतिहासिक गेट को बनाने का प्रस्ताव भी यहीं पर है। प्रभात चौराहा, रायसेन रोड से लेकर जेके रोड तिराहा, रत्नागिरी से बायपास और फिर एयरपोर्ट तक शहर के विकास की कहानी इस समय इसके ही इर्द-गिर्द है। यहीं से लोगों को मिसरोद, 11 मिल, मंडीदीप के लिए निकाला जाएगा। 1800 करोड़ रुपए में आठ लेन होगा बायपास रत्नागिरी से आसाराम तिराहा तक 20 किमी लंबे चार लेन अयोध्या बायपास को आठ लेन किया जा रहा है। 6 लेग मुख्य मार्ग होगा, जबकि दो लेन सर्विस रोड रहेगी। इसके तहत स्त्नागिरी पर टी जंक्शन होगा। ये आनंद नगर, पिपलानी, प्रभात चौराहा से जुड़ेगा। इससे रयरपोर्ट का रास्ता महज 25 मिनट का रह जाएगा। एनएचएआई ने इसके लिए काम शुरू किया है। 1800 करोड़ रुपए का बजट लगेगा। अयोध्या बायपास में पांच फ्लाइओवर बनेंगे। भोपाल की ये सबसे लंबी कमर्शियल रोड होगी। यूपी-एमपी के उद्योग सप्लाई में राहत मिलेगी। शहर के 5 लाख लोगों को व्यापार में राहत होगी। ये भी जानिए लॉजिस्टिक हब और औद्योगिक कॉरिडोर 2200 करोड़ के लॉजिस्टिक हब की योजना। भोपाल मास्टर प्लान में औद्योगिक नी विकास का प्रावधान। आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स 1100 करोड़ के हाउसिंग प्रोजेक्ट । बनेगा ट्रांसपोर्ट और टैक्स केंद्र कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और आरटीओ यहीं या स्थित। यूपी-एमपी व्यापार को मिलेगी राहत। भोपाल की सबसे लंबी कमर्शियल रोड। 5 लाख लोगों को मिलेगा सीधा लाभ । को व्यापार और उद्योगों के लिए आदर्श क्षेत्र ।

विपक्ष का बदस्तूर जारी है हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित

नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र का आज छठा दिन है। आज विदेश मंत्री एस जयशंकर लोकसभा को भारत-चीन संबंधों के प्रमुख घटनाक्रमों के बारे में जानकारी देंगे। लोकसभा में कोस्टल शिपिंग, बैंकिंग कानूनों और रेलवे अधिनियम, 1989 में संशोधन से संबंधित विधेयक भी पेश किए जाएंगे। वहीं, दूसरी ओर राज्यसभा में, तेल क्षेत्रों के रेगुलेशन और विकास और विमानों के डिजाइन, निर्माण, उपयोग और बिक्री से संबंधित विधेयक पेश किए जाएंगे। 25 नवंबर को शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से, मणिपुर अशांति और संभल हिंसा सहित कई मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही ज़्यादातर रद्द ही रही है। 25 नवंबर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को समाप्त होगा। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के लिए प्रस्ताव बांग्लादेश के हालात पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, मैंने अभी बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ ध्यान आकर्षित करने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया है और मुझे उम्मीद है कि सरकार इसे सुनेगी क्योंकि इस्कॉन मंदिर के प्रमुख बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया है, इसके अलावा भी कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे अभी पता चला है कि कानूनी वीजा होने के बावजूद भी इस्कॉन के पुजारियों को भारत में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, मुझे लगता है कि वहां नहीं दिया जा सकता है इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ भी हो, हमें इसके बारे में बात करनी चाहिए।” इंडिया गठबंधन की मीटिंग दोनों सदनों की शुरुआत से पहले इंडिया गठबंधन के फ्लोर नेताओं की कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन कार्यालय में आज बैठक होगी। सांसद राघव चड्ढा ने दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस AAP सांसद राघव चड्ढा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और चिन्मय कृष्ण दास सहित 3 इस्कॉन पुजारियों की गिरफ्तारी पर चर्चा के लिए राज्यसभा में सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दायर किया। कांग्रेस सांसदों का स्थगन प्रस्ताव नोटिस कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने संभल हिंसा और अजमेर शरीफ दरगाह याचिका के मुद्दे पर राज्यसभा में सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया। कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने अडानी मुद्दे पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। डीएमके सांसद ने दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस डीएमके सांसद टीआर बालू ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के विल्लुपुरम, कुडालोर, चेंगलपट्टू जिलों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण खड़ी फसलों और संपत्तियों को हुए नुकसान पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया। पक्ष द्वारा अडानी मुद्दे, संभल हिंसा और मणिपुर सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा करने की मांग करने और मोदी सरकार द्वारा ऐसा करने से इनकार करने के कारण, दोनों सदनों को पिछले चार सत्रों के लिए समय से पहले स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, 29 नवंबर को कुछ छोटे-मोटे कामकाज हुए, जिसमें विभिन्न बोर्डों और संस्थानों के लिए सदस्यों को चुनने के प्रस्ताव पारित किए गए।

प्रदेश सरकार 500 गांव को विस्थापित कर बनाएंगी वन्यप्राणी कारिडोर

भोपाल. मध्य प्रदेश के जंगलों में वन्यजीवों के बीच मानव दखल न हो, इसके लिए राज्य सरकार पांच सौ गांवों को वन्यप्राणी बहुल वनक्षेत्र से बाहर करेगी। इसके लिए वन विभाग ने विकसित भारत 2047 विजन डाक्यूमेंट में अपना एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत वन विभाग राज्य के समस्त संरक्षित वन क्षेत्रों एवं वन्यप्राणी बहुल क्षेत्रों में बसे 500 गांवों को उनकी सहमति से विस्थापित करेगा। इसके अलावा, संरक्षित वन क्षेत्रों को आपस में जोड़कर वन्यप्राणी कारिडोर बनाया जाएगा। आधुनिक उपकरणों एवं तकनीक के उपयोग विकसित भारत के विजन डाक्यूमेंट के अनुसार आधुनिक उपकरणों एवं तकनीक के उपयोग से वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। इसके तहत रेंज अधिकारी आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होंगे। रेंज अधिकारियों को ड्रोन तथा आधुनिक शस्त्रों, वाहनों से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे अवैध कटाई एवं चराई, अतिक्रमण, अवैध खनन एवं वन अग्नि पर पूर्ण नियंत्रण हो सकेगा। प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभयारण्यों में सक्रिय प्रबंधन के माध्यम से वन्यजीवों का पुनर्स्थापन एवं प्रबंधन किया जाएगा। महत्वपूर्ण बिंदु 500 गांवों का विस्थापन, वन्यप्राणी सुरक्षा वन्यप्राणी कारिडोर निर्माण, संरक्षित क्षेत्र जोड़ना आधुनिक तकनीक, ड्रोन, शस्त्रों से सुरक्षा 500 ईको टूरिज्म स्थल, स्थानीय रोजगार सृजन विदेशी पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार ईको टूरिज्म के चिन्हित स्थलों को किया जाएगा विकसित वर्ष 2047 तक ईको टूरिज्म के कम से कम 500 गंतव्य स्थलों को चिन्हित कर उन्हें विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के आसपास के गंतव्य स्थलों में कम से कम 500 होम स्टे की व्यवस्था की जाएगी जिससे स्थानीय वन वासियों का रोजगार सृजन हो सके। इसे ग्लोबल स्तर पर प्रचारित किया जाएगा, जिससे मप्र में विदेशी पर्यटन बढ़े।

उत्तरप्रदेश के मंत्री कपिल देव अग्रवाल आज भोपाल में कौशल विकास और रोजगार मंत्री टेटवाल करेंगे स्वागत

भोपाल मध्यप्रदेश में चल रही कौशल विकास की गतिविधियों का अध्ययन के लिए उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री कपिल देव अग्रवाल आज मध्यप्रदेश के प्रवास पर रहेंगे। मंत्री श्री अग्रवाल अपनी टीम के साथ भोपाल में एडीबी परियोजना से तैयार विश्वस्तरीय ग्लोबल स्किल पार्क का भ्रमण करेंगे। मध्यप्रदेश में कौशल विकास के क्षेत्र में चल रही योजनाओं एवं नवाचारों के बारे में जानकारी लेंगे। कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री गौतम टेटवाल सुबह 9 बजे संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में मंत्री श्री अग्रवाल का स्वागत करेंगे। मंत्री श्री अग्रवाल प्रशिक्षण केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। परियोजना और संस्था के अधिकारियों द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में चल रहे विभिन्न योजनाओं और नवाचारों पर प्रस्तुति दी जाएगी। दोपहर 12:30 बजे मंत्री श्री अग्रवाल कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन केंद्र (KBTICC) के लिए प्रस्थान करेंगे। मंत्री श्री अग्रवाल का यह दौरा मध्यप्रदेश के कौशल विकास प्रयासों को जानने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे दोनों राज्य में कौशल और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके।  

सरकारी नौकरी पाने का एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में अप्रेंटिस पदों पर मौका, जल्द करें अप्लाई

नई दिल्ली. आईटीआई, डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त कर चुके ऐसे अभ्यर्थी जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं उनके लिए बड़ी खबर है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की ओर से आईटीआई अप्रेंटिस, ग्रेजुएट अप्रेंटिस एवं डिप्लोमा अप्रेंटिस के 197 रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती निकाली गई है। इस भर्ती में शामिल होने के लिए आवेदन की लास्ट डेट 25 दिसंबर 2024 निर्धारित है। ऐसे में ग्रेजुएट/ डिप्लोमा अप्रेंटिस पदों पर अभ्यर्थी NATS पोर्टल nats.education.gov.in पर जाकर एवं ITI अप्रेंटिस पदों पर apprenticeshipindia.org पर जाकर एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं। पात्रता एवं मापदंड AAI अप्रेंटिसशिप भर्ती में ग्रेजुएट एवं डिप्लोमा पदों पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी संबंधित क्षेत्र में 4 वर्षीय फुल टाइम डिग्री या तीन वर्षीय इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया हो। आईटीआई अप्रेंटिस पदों पर आवेदन के लिए संबंधित ट्रेड में आईटीआई/ NCVT सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो। आयु सीमा इस भर्ती में भाग लेने के लिए अभ्यर्थी की अधिकतम आयु 26 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। एससी, एसटी, ओबीसी एवं पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के अभ्यर्थियों को ऊपरी आयु में नियमानुसार छूट दी जाएगी। उम्र की गणना 31 जुलाई 2024 को ध्यान में रखकर की जाएगी। इस भर्ती में ग्रेजुएट अप्रेंटिस पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 15 हजार रुपये प्रति माह एवं डिप्लोमा अप्रेंटिस पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 12 हजार रुपये प्रति माह स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आईटीआई अप्रेंटिस पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 9000 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा। भर्ती विवरण एवं चयन प्रक्रिया इस भर्ती के माध्यम से माध्यम से कुल 197 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। भर्ती में चयन योग्यता के अनुसार शॉर्टलिस्ट करके इंटरव्यू/ डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया के लिए आमंत्रित किया जायेगा। इसके बाद प्राप्त वेटेज के आधार पर अभ्यर्थियों की फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार होगी। इंटरव्यू/ दस्तावेज सत्यापन के लिए उम्मीदवारों को रजिस्टर्ड ई-मेल के माध्यम से सूचित किया जाएगा। जिन भी उम्मीदवारों का नाम फाइनल मेरिट लिस्ट में दर्ज होगा उनको रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी। भर्ती से जुड़ी विस्तृत डिटेल के लिए अभ्यर्थी एक बार ऑफिशियल नोटिफिकेशन का अवलोकन अवश्य कर लें।

प्रदेश में 4 दिसम्बर को कक्षा-3, 6 और 9 में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया जायेगा

भोपाल प्रदेश में 4 दिसम्बर को चयनित सेम्पल शालाओं में कक्षा-3, 6 और 9 में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया जायेगा। सर्वेक्षण की रिपोर्ट का केन्द्र सरकार द्वारा नीति निर्धारण में उपयोग किया जायेगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य शिक्षा केन्द्र ने सर्वेक्षण कार्य में पारदर्शिता रखे जाने के निर्देश मैदानी अमले को दिये हैं। राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024 के संचालन की जिम्मेदारी एनसीईआरटी के पास है, जबकि सीबीएसई को सर्वेक्षण के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गयी है। प्रदेश में सर्वेक्षण के सुचारु और निष्पक्ष संचालन के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पेशल ऑब्जर्वर नियुक्त किये हैं। यह ऑब्जर्वर जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक से तालमेल रखकर सर्वेक्षण की व्यवस्था को सुनिश्चित करेंगे। स्पेशल ऑब्जर्वर की जिलेवार नियुक्ति की गयी है। इसके साथ ही जिले में डिस्ट्रिक्ट लेवल को-ऑर्डिनेटर भी बनाये गये हैं। मैदानी अमले को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं कि जिन सेम्पल शालाओं में सर्वेक्षण का कार्य किया जायेगा, उन शालाओं में दर्ज विद्यार्थियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत हो। मॉडल डाइट के रूप में चयन केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश में संचालित डाइट्स का सर्वे किया गया है। सर्वे के बाद इन डाइट्स की अधोसंरचना एवं व्यावसायिक विकास के लिये विस्तृत योजना तैयार की गयी है। इस कार्य-योजना के आधार पर वर्तमान में प्रदेश के संचालित सभी डाइट्स को मॉडल डाइट के रूप में विकसित करने के लिये चयनित किया गया है। वर्ष 2023-24 में भोपाल, सीहोर, मंदसौर, सागर, ग्वालियर, खण्डवा, रीवा और जबलपुर डाइट को मॉडल डाइट के रूप में विकसित करने के लिये विकास योजना तैयार कर ली गयी है। प्रदेश में वर्तमान में संचालित 50 डाइट्स के माध्यम से शासकीय शालाओं में कार्यरत शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है।  

अब किराएदार रखेगा दूसरा पार्टनर तो चुकाना पड़ेगा चार गुना रेंट

भोपाल. नगरीय क्षेत्र में आवास किराये पर लेकर उसमें कारोबार संचालित करना आम बात है लेकिन अब बिना मकान मालिक की अनुमति ऐसा नहीं किया जा सकेगा। यदि कारोबारी गतिविधि संचालित करनी है तो छह माह का किराया अग्रिम देना होगा। किरायेदार परिसर किसी और को किराये में भी नहीं दे सकेगा। ऐसा पाया जाता है तो इसे अनुबंध का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। इसका प्रविधान भारत सरकार के दिशा निर्देश पर तैयार किए गए किरायेदारी अधिनियम के प्रारूप में किया जा रहा है। मुख्य सचिव अनुराग जैन की सहमति मिलने के बाद प्रविधानों को अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। उधर, फायर एक्ट भी शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित अधिकतर नगरीय निकायों में बड़ी संख्या में आवास किराये पर दिए जाते हैं। कई बार मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराये, मकान के संधारण और खाली कराने को लेकर विवाद होता है। मामले कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। किरायेदारी अधिनियम का प्रारूप इसे देखते हुए मकान मालिक और किरायेदार के हितों को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार ने मॉडल किरायेदारी अधिनियम का प्रारूप बनाकर सभी राज्यों को अपने-अपने अधिनियम में संशोधन करने के लिए भेजा था। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसके आधार पर प्रारूप तैयार किया है, जिसे 16 दिसंबर से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत करने की तैयारी है। मालिक की सहमति जरूरी इसमें प्रविधान किया है कि किरायेदार बिना मकान मालिक की सहमति के किसी और को उप किरायेदार नहीं रख सकेगा। यदि दोनों के बीच सहमति बनती है तो उप किरायेदार रखा जा सकता है और इसकी सूचना किराया प्राधिकारी को देनी होगी। अनुबंध समाप्त होने के बाद चार गुना देना होगा किराया किरायेदार अनुबंध समाप्त होने के बाद भी मकान खाली नहीं करता है तो प्रथम दो माह तक दोगुना और इसके बाद चार गुना मासिक किराया देना होगा। आवासीय प्रयाेजन के लिए किराये पर मकान लेने के बाद वहां कारोबार करने की अनुमति नहीं रहेगी। यदि ऐसा किया जाता है तो छह माह का किराए अग्रिम देना होगा। यह भी रहेंगे प्रविधान बिना अनुबंध के मकान मालिक किरायेदार नहीं रख पाएंगे। निर्धारित अवधि के बाद मकान खाली करना होगा। यदि मकान खाली नहीं किया जाता है तो शिकायत पर सुनवाई करके बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। मकान मालिक भी किरायेदार को अनावश्यक रूप से तंग नहीं कर सकेगा। आवश्यक सेवाओं को बाधित करने पर मालिक के विरुद्ध कार्रवाई होगी। किरायेदार अनुबंध के अनुसार बढ़ा हुआ किराया देने से इन्कार करता है तो इसकी शिकायत किराया अधिकरण में की जा सकेगी। युद्ध, बाढ़, सूखा, तूफान, भूकंप या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति है तो अवधि समाप्त होने पर भी किरायेदार से मकान खाली नहीं कराया जाएगा पर उसे अनुबंध के अनुसार किराया देना होगा। किरायेदार की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को रहने का अधिकार होगा पर उसे भी अनुबंध का पालन करना होगा। मकान किराये पर देने के बाद मकान मालिक को यह अधिकार नहीं रहेगा कि वह कभी भी परिसर में प्रवेश करे। मकान में मरम्मत या अन्य कार्य करवाने, निरीक्षण या अन्य किसी कारण से प्रवेश करना है तो कम से कम चौबीस घंटे पहले सूचना देनी होगी। किराया प्राधिकारी नियुक्त होगा, जो डिप्टी कलेक्टर से कम स्तर का नहीं होगा। प्रत्येक जिले में जिला अथवा अपर जिला न्यायाधीश को किराया अधिकरण नियुक्त किया जाएगा। इन्हें साठ दिन के भीतर आवेदन का निराकरण करना होगा। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, किसरी सरकार उपक्रम, उद्यम या किसी कानूनी निकाय के स्वामित्व वाले परिसर पर प्रविधान लागू नहीं होंगे।

मतदान केंद्रों पर वोटर्स की संख्या बढ़ाने वाले मामले में EC के फैसले को SC में चुनौती, आज होगी सुनवाई

नई दिल्ली. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट उस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा जारी दो आदेशों को चुनौती दी गई है। इस याचिका में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भारत में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में हर मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या बढ़ाई गई है। ये जनहित याचिका इंदु प्रकाश सिंह ने शीर्ष न्यायालय में दायर की है। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा अगस्त 2024 में दो नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इस आदेश के अनुसार देश के प्रत्येक मतदान केंद्र पर वोटरों की संख्या 1200 से बढ़ाकर 1500 करने का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए शीर्ष न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कही गई ये बात इंदु प्रकाश सिंह के वकील अभिषेक सिंघवी ने इस जनहित याचिका को लेकर कहा कि प्रत्येक मतदान केंद्रों पर 1200 से 1500 मतदाताओं की संख्या बढ़ाने से वंचित समुदाय की मतदान में भागीदारी कर होने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब किसी भी बूथ पर मतदाताओं की संख्या ज्यादा होगी तो मतदान में ज्यादा वक्त लगेगा। वहीं, सिंघवी ने आगे कहा कि मतदान केंद्र पर लंबी कतारें और इंतजार वोटर्स के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। पीठ ने कही ये बात याचिकाकर्ता के तर्क पर पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान करें और ईवीएम के इस्तेमाल से समय की बचत होती है। आयोग मतदान के समय को कम करने के लिए ज्यादा ईवीएम का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। आगामी चुनावों पर पड़ेगा असर इस याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग के फैसले से बिहार और दिल्ली में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं पर असर पड़ेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी का कहना है कि एक वोट डालने में 1 सेकंड का समय लगता है और इसलिए एक ईवीएम के साथ एक मतदान केंद्र पर एक दिन में 660 से 490 लोग अपना वोट डाल सकते हैं। औसत मतदान प्रतिशत 65.70 प्रतिशत होने पर विचार करते हुए, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 1,000 मतदाताओं को स्वीकार करने के लिए तैयार एक मतदान केंद्र पर लगभग 650 मतदाता आते हैं। जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि देश में ऐसे बूथ भी हैं जहां मतदाताओं का मतदान 85-90 प्रतिशत के बीच है। ऐसी स्थिति में, लगभग 20 प्रतिशत मतदाता या तो मतदान के घंटों के बाद कतार में खड़े रहेंगे या लंबे इंतजार के कारण अपने मताधिकार का प्रयोग करना छोड़ देंगे। प्रगतिशील गणराज्य या लोकतंत्र में दोनों में से कोई भी स्वीकार्य नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – नागरिकों को मिलेगी इको-फ्रेंडली, किफायती, भरोसेमंद और सुगम परिवहन की सुविधा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के चार शहरों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में नागरिकों को जल्द ही इको-फ्रेंडली, किफायती, भरोसेमंद और सुगम परिवहन की सुविधा मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत इन चारों शहरों में कुल 240 ई-बसें संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत रायपुर के लिए 100, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई के लिए 50-50 तथा कोरबा के लिए 40 ई-बसों की स्वीकृति प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर इसके लिए सुडा को नोडल एजेंसी तथा संबंधित जिलों में गठित अरबन पब्लिक सर्विस सोसाइटी को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ई-बस सेवा प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ के शहरों में कम कार्बन उत्सर्जन से वायु गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरण का संरक्षण होगा। कम ऊर्जा खपत और बेहतर ईंधन दक्षता के साथ ही नागरिकों को आरामदायक आवागमन की सुविधा सुलभ होगी। इसे शहरों में मेट्रो के विकल्प या उसके सहयोगी साधन के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को किफायती, भरोसेमंद और सुगम परिवहन की सुविधा मिले। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के ढांचे को दुरुस्त करने केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना प्रारंभ की गई है। सार्वजनिक परिवहन की इस अभिनव योजना में केंद्र सरकार द्वारा शहरों को बसों की खरीद तथा उनके संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसका एक बड़ा हिस्सा शहरों में बस डिपो एवं बीटीएम पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी अधोसंरचना विकास के लिए भी खर्च किया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत तीन तरह की बसें स्टैंडर्ड, मीडियम और मिनी चलाई जाएंगी। शहरों की जनसंख्या के आधार पर बसों की संख्या निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने सड़कों पर इन ई-बसों को उतारने की तैयारियां तेज करते हुए चारों शहरों में बस डिपो और बीटीएम पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कुल 67 करोड़ 40 लाख रुपए मंजूर करते हुए निविदा आमंत्रण की भी अनुमति दे दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण ने चारों शहरों में ई-बस सेवा के संचालन के लिए अलग-अलग गठित अरबन पब्लिक सर्विस सोसाइटी को इन दोनों कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करते हुए निविदा आमंत्रित करने कहा है। सुडा द्वारा रायपुर में बस सेवा प्रारंभ करने के लिए बस डिपो के सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर हेतु रायपुर अरबन पब्लिक सर्विस सोसाइटी को 14 करोड़ 33 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की है। इसमें आठ करोड़ 60 लाख रुपए का केन्द्रांश और पांच करोड़ 73 लाख रुपए का राज्यांश शामिल है। सुडा ने बीटीएम पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी 12 करोड़ 90 लाख रुपए मंजूर किए हैं। दुर्ग-भिलाई में ई-बसों हेतु बस डिपो के सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए दुर्ग-भिलाई अरबन पब्लिक सर्विस सोसाइटी को छह करोड़ 73 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति सुडा द्वारा जारी की गई है। इसमें चार करोड़ चार लाख रुपए का केन्द्रांश और दो करोड़ 69 लाख रुपए का राज्यांश शामिल है। वहां बीटीएम पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 11 करोड़ दो लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। बिलासपुर में बस डिपो के सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बिलासपुर अरबन पब्लिक सर्विस सोसाइटी को आठ करोड़ 37 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें पांच करोड़ दो लाख रुपए का केन्द्रांश और तीन करोड़ 35 लाख रुपए का राज्यांश शामिल है। बीटीएम पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए तीन करोड़ आठ लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इसी तरह कोरबा में बस डिपो के सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कोरबा अरबन पब्लिक सर्विस सोसाइटी को सात करोड़ 19 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। इसमें चार करोड़ 31 लाख रुपए का केन्द्रांश और दो करोड़ 88 लाख रुपए का राज्यांश शामिल है। बीटीएम पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए वहां तीन करोड़ 78 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। चार श्रेणियों में बांटा गया है शहरों को, जनसंख्या के आधार पर स्वीकृत की गई हैं बसें प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत शहरों को जनसंख्या के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। 20 लाख से 40 लाख तक की आबादी वाले शहरों को 150, दस से बीस लाख और पांच से दस लाख तक की आबादी वाले शहरों को 100-100 तथा पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों को 50 ई-बसों की पात्रता है। इसके आधार पर रायपुर को 100 मीडियम ई-बसों, दुर्ग-भिलाई को 50 मीडियम ई-बसों, बिलासपुर को 35 मीडियम और 15 मिनी ई-बसों तथा कोरबा को 20 मीडियम एवं 20 मिनी ई-बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। योजना के दिशा-निदेर्शों के अनुसार बसों का क्रय तथा संचालन एजेंसी का चयन भारत सरकार द्वारा किया जाएगा।

बिजली बिल में मिलेगी प्रदेशवासियों को मिलेगी बड़ी राहत, 300 प्लस यूनिट के स्लैब को खत्म करने की तैयारी

भोपाल. मध्यप्रदेश में बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने वाली है। 300 से ज्यादा यूनिट के स्लैब को खत्म कर 151 यूनिट के स्लैब में जोड़ने की तैयारी है। ऐसा होने से प्रति यूनिट बिजली बिल 19 पैसे तक कम हो जाएगा जिससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा। हालांकि 19 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी का फायदा सिर्फ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा जिनके घर की बिजली की खपत हर महीने 300 यूनिट से ज्यादा हो रही है या फिर होती है। 300 प्लस यूनिट के स्लैब को खत्म करने की तैयारी मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 300 प्लस के स्लैब को खत्म करने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग को प्रस्ताव दिया है। अब 300 प्लस के स्लैब को 151 से 300 यूनिट के स्लैब में ही जोड़ा जाएगा। इस स्लैब को खत्म करने से बिजली बिल में करीब 70 रुपए तक की कमी आएगी। बता दें कि अभी प्रदेश में 0 से 15 यूनिट पर 4.27 रुपए यूनिट से बिजली बिल आता है। इसके अलावा 51 से 150 यूनिट पर 5.32 रुपए, 151 से 300 यूनिट पर 6.61 यूनिट और 300 से ज्यादा यूनिट पर 6.80 रुपए यूनिट के हिसाब से उपभोक्ताओं से बिल आता है। 19 पैसे प्रति यूनिट की आएगी कमी 300 प्लस यूनिट स्लैब खत्म होने से उपभोक्ताओं को 19 पैसे प्रति यूनिट कम बिल की राशि देनी होगी। पावर मैनेजमेंट कंपनी के चीफ जनलर मैनेजर शैलेंन्द्र सक्सेना के मुताबिक इससे उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा और बिजली बिल में 70 रूपए तक की कमी आएगी। इसके पहले भी बिजली कंपनी 500 यूनिट से ज्यादा खपत वाले स्लैब को खत्म कर चुकी है।

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