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नगरीय निकायों के उप निर्वाचन-2024 के परिणाम घोषित

नगरीय निकायों के उप निर्वाचन-2024 के परिणाम घोषित बीजेपी के 5, आईएनसी के 1 और एक निर्दलीय प्रत्याशी विजयी भोपाल : नगरीय निकायों के उप निर्वाचन 2024 (उत्तरार्द्ध) के निर्वाचन परिणाम घोषित कर दिये गये हैं। भारतीय जनता पार्टी के 5, इंडियन नेशनल कांग्रेस के 1 और एक निर्दलीय प्रत्याशी विजयी घोषित किये गये हैं। गौरतलब है कि नगरीय निकायों में 9 दिसम्बर को मतदान हुआ था। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग अभिषेक सिंह ने जानकारी दी है कि नगर पालिक निगम रीवा में वार्ड 10 में भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती अमिता सिंह, नगर पालिक निगम ग्वालियर में वार्ड 39 में भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती अंजलि पलैया, नगरपालिका परिषद गुना के वार्ड 10 में भारतीय जनता पार्टी के विनोद कल्याण सिंह लोधा, नगरपालिका परिषद सारणी में वार्ड 33 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की श्रीमती रेखा भलावी और नगर परिषद निवास जिला मण्डला के वार्ड 13 में भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती शांति बाई पार्षद पद के लिये निर्वाचित घोषित की गई हैं। इसी तरह नगर परिषद जैतहरी के वार्ड 6 में भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती हेमलता और नगर परिषद बरेली जिला रायसेन के वार्ड 9 में निर्दलीय प्रत्याशी पीयूष मालवीय निर्विरोध निर्वाचित हुये हैं।  

कलाओं की विविधता का उत्सव विरासत आज मध्यप्रदेश के वैभव को दिखाती नृत्यनाटिका, स्वस्ति मेहुल का गायन, रणदीप हुड्डा के अनुभव एवं प्रदर्शनियां होंगी आकर्षण

भोपाल मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा संयुक्त रूप से सांस्कृतिक संध्या का संयोजन किया जा रहा है। इसमें कलाओं की विविधता का उत्सव ”विरासत” का आयोजन 13 दिसम्बर, 2024 को रवीन्द्र भवन स्थित हसंध्वनि सभागार, भोपाल में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सायं 6:30 बजे से प्रारम्भ किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे। कार्यक्रम में मंत्रीगण सहित जनप्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। संचालक, संस्कृति एन.पी. नामदेव ने बताया कि इस प्रतिष्ठित आयोजन में सर्वप्रथम मध्यप्रदेश : स्वर की समता नृत्यनाटिका का मंचन किया जाएगा। इस नृत्यनाटिका का निर्देशन सुजयलक्ष्मी ईश्वर, दिल्ली द्वारा किया गया है। इस नृत्यनाटिका में मध्यप्रदेश का सौंदर्य, विरासत, ऐतिहासिक स्थल, पर्यटन स्थल एवं वैभव को नृत्य में पिरोकर प्रस्तुत किया जायेगा। कार्यक्रम में सुजयलक्ष्मी ईश्वर संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी हैं। इसके बाद सुप्रसिद्ध गायिका एवं मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे…राम आएंगे… भजन फेम सुस्वस्ति मेहुल एवं साथी, मुम्बई द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति देंगी। सुस्वस्ति मेहुल के गीत एवं भजन सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय हैं। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर वे अपने जीवन के अनुभव दर्शकों से साझा करेंगे। इस उत्सव में प्रदर्शनियां भी आयोजित की जा रही हैं। इसमें श्रीमद् भागवत पुराण चित्र प्रदर्शनी को प्रदर्शित किया जाएगा। ये चित्र गूलेर लघु चित्र शैली पर आधारित होंगे, जो हिमाचल प्रदेश की है। प्रदर्शनी में 271 चित्र शामिल हैं एवं इसके अलावा गौ एवं गोपाल चित्र प्रदर्शनी में 40 चित्र प्रदर्शित किये जाएंगे। प्रदर्शनी भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित होगी। इसके अलावा मध्यप्रदेश सरकार के एक वर्ष की यात्रा, कार्य, योजनाओं पर आधारित ”मध्यप्रदेश : विकास के एक वर्ष की उपलब्धियां पर ” प्रदर्शनी आयोजित की जायेगी। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क होगा।  

मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर महाविद्यालयीन गतिविधियों की समीक्षा की

पं. खुशीलाल आयुर्वेद संस्थान अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरक बने: आयुष मंत्री परमार पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान की साधारण सभा की बैठक हुई मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर महाविद्यालयीन गतिविधियों की समीक्षा की संस्थान परिसर में इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण की स्वीकृति भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में गुरुवार को भोपाल स्थित शासकीय पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान की साधारण सभा की बैठक संपन्न हुई। मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर महाविद्यालयीन गतिविधियों की समीक्षा की। साधारण सभा में महाविद्यालय के लिए इस वित्तीय वर्ष के बजट का अनुमोदन किया गया। महाविद्यालय परिसर में बालक छात्रावास निर्माण एवं इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण सहित विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। संस्थान परिसर में इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपए राशि की स्वीकृति दी गई। विधायक भगवान दास सबनानी ने एक करोड़ रुपए की सहयोग राशि देने की सहमति भी दी। आयुष मंत्री परमार ने महाविद्यालय में पदस्थ व्याख्याताओं एवं अधिकारियों के समयमान एवं वेतनमान संबंधी प्रक्रिया नियत समय पर पूर्ण करने संतोष व्यक्त किया । परमार ने कहा कि उच्च पद प्रभार प्रक्रिया का भी नियत समयावधि पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें ताकि महाविद्यालय में वास्तविक रिक्त पदों की स्थिति के अनुरूप पदों की पूर्ति की प्रक्रिया नियत समय पर पूर्ण हो सके। मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में महाविद्यालयीन छात्रों के लिए नवीन छात्रावास भवन निर्माण के लिए शासन के समक्ष प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक समस्त संसाधनों की उपलब्धता, नियत समय अवधि पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। परमार ने कहा कि संस्थान अपनी विशेषता पर उत्कृष्ट एवं व्यापक कार्य करे ताकि विशिष्ट संदर्भ में संस्थान का नाम आलोकित हो और संस्थान की प्रतिष्ठा एवं विश्वसनीयता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो।संस्थान, कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करे ताकि अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरक बनें। इस अवसर पर भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) विधानसभा क्षेत्र के विधायक भगवान दास सबनानी, प्रमुख सचिव आयुष डीपी आहूजा, आयुक्त आयुष सुनिधि निवेदिता, संभागीय आयुक्त अधिकारी डॉ एस पी वर्मा एवं संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ उमेश शुक्ला सहित साधारण सभा के अन्य सदस्यगण सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

मंत्री परमार की अध्यक्षता में शासकीय यूनानी चिकित्सा महाद्यिालय भोपाल की साधारण सभा सम्पन्न हुई

भोपाल आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में शासकीय यूनानी चिकित्सा महाद्यिालय भोपाल की साधारण सभा सम्पन्न हुई। बैठक में विधायक भगवान दास सबनानी आयुष विभाग के प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा, आयुक्त निधि निवेदिता सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मंत्री परमार ने महाविद्यालय के प्रस्तावित हम्माम, टीचिंग फार्मेसी, लैब एवं अग्निशमन (फायर सैफ्टी) संबंधी कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र प्रेषित किए जाने के निर्देश दिये। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मेहमूदा बेगम द्वारा बैठक में बजट संबंधी एजेन्डा प्रस्तुत किया गया। भवष्यि की योजनाओं पर चर्चा की गई एवं महाव़िालय की उन्नति के लिये अन्य बिन्दुओं पर चर्चा की गई। साथ ही मंत्री परमार द्वारा महाविद्यालय के कार्यों की समीक्षा करते हुए आमजन को उच्च स्तरीय नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान किए जाने के निर्देश भी दिये। महाद्यिालय के सभागार में म.प्र. लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित प्रशिक्षणरत चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री परमार द्वारा अधिकारियों को जन-सेवा की भावना से प्रदेश के दूर अंचलों में अपनी सेवाएं देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से भारत के पारम्परिक रूप के संवर्धन एवं परिणाम आधारित प्रयास किये जाने के निर्देश दिये, जिससे देश एवं प्रदेश का विकास हो सके।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबसे युवा वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने पर गुकेश को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगापुर में आयोजित वर्ल्ड चेस चैंपियन शिप-2024 के फाइनल मुकाबले में भारत के 18 वर्षीय डोम्माराजू गुकेश को चीन के डिंग लिरेन को हराकर भारत के दूसरे एवं विश्व के सबसे युवा वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डोम्माराजू गुकेश की यह ऐतिहासिक उपलब्धि असंख्य भारतीय खेल प्रतिभाओं को देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करती रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुकेश के स्वर्णिम एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उल्लेखनीय है कि चेन्नई निवासी डी. गुकेश ने 18 साल आठ महीने 14 दिन की उम्र में यह खिताब जीत कर इतिहास रचा है। उन्होंने गैरी कास्पारोव का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 22 वर्ष 6 माह 27 दिन की उम्र में खिताब जीता था। गुकेश से पहले भारत के विश्वनाथन आनंद (2000-2002 और 2007-2013) विश्व शतरंज चैंपियन रहे हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी बाबा रामदेव का माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामी बाबा रामदेव का उनके आत्मीय आशीर्वचन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी बाबा रामदेव का योग, आयुर्वेद एवं सनातन संस्कृति के प्रचार के माध्यम से जन-सेवा का प्रण हमें निरंतर प्रदेश में अपनी संस्कृति से जुड़कर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुर्वेद और योग के जन-जन की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने के भागीरथ प्रयास से विश्व को निरोगी बनाने के प्रयासों को अप्रतिम ऊर्जा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज उज्जैन में “जनकल्याण पर्व” के शुभारंभ अवसर पर अपार जन समूह के साथ योग में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार योग को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।  

मुख्यमंत्री यादव आज गोल जोड़, कोलार रोड भोपाल में प्रदेश के 8वें टाइगर रिजर्व रातापानी टाइगर रिजर्व का लोकार्पण करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में 13 दिसम्बर को गोल जोड़, कोलार रोड भोपाल में प्रदेश के 8वें टाइगर रिजर्व रातापानी टाइगर रिजर्व का लोकार्पण करेंगे। इसमें विशिष्ट अतिथि राज्य वन पर्यावरण मंत्री दिलीप अहिरवार होंगे। लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अभिनेता, लेखक, निदेशक रणदीप हूड्डा रातापानी टाइगर रिजर्व की जागरूकता के लिये “विरासत से विकास की अनूठी दौड़” बाईक रैली को हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। यह रैली गोल जोड़ चौराहे से एकांत पार्क तक निकाली जाएगी। रातापानी टाईगर रिजर्व का लोकार्पण 13 दिसम्बर 2024 को सुबह 10:30 बजे होगा। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और आमजन भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल और मार्गदर्शन पर 2 दिसम्बर, 2024 को रातापानी को प्रदेश का 8वाँ टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। राज्य शासन द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गयी है। रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया का रकबा 763.812 वर्ग किलोमीटर तथा बफर एरिया का रकबा 507.653 वर्ग किलोमीटर है। इस प्रकार टाइगर रिजर्व का कुल रकबा 1271.465 वर्ग किलोमीटर होगा। रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र की सीमा के अंदर स्थित राजस्व ग्राम झिरी बहेड़ा, जावरा मलखार, देलावाड़ी, सुरई ढाबा, पांझिर, कैरी चौका, दांतखो, साजौली एवं जैतपुर का रकबा 26.947 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि इन्क्लेव के रूप में बफर क्षेत्र में शामिल है। टाइगर रिजर्व में भौगोलिक रूप से स्थित, उक्त 9 ग्राम अभयारण्य की अधिसूचना में कोर क्षेत्र में शामिल नहीं हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व बनने से टाइगर रिजर्व का सम्पूर्ण कोर क्षेत्र रातापानी टाइगर अभयारण्य की सीमा के भीतर है। इससे ग्रामीणों के वर्तमान अधिकार में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इससे स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन से नये रोजगार सृजित होंगे, जिससे आर्थिक लाभ होगा। टाइगर रिजर्व गठित होने से भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से बजट प्राप्त होने से वन्य-प्राणियों का और बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन बढ़ने से लाभ प्राप्त होगा। टाइगर रिजर्व बनने से रातापानी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी तथा भोपाल की पहचान “टाइगर राजधानी’’ के रूप में होगी।  

15 वर्षों में प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि का अनुपात प्रॉफिट की तुलना में बहुत कम

नई दिल्ली हाल ही में यूएस बिलेनियर अंबिशन्स की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में अरबपतियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वहीं कैंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल क्लास देश का मध्यम वर्ग सिकुड़ता जा रहा है। उसकी चीजों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण मिडिल क्लास की सैलरी में वृद्धि दर धीमा होना है। अब ऐसा ही कुछ सरकार ने भी कह दिया है। सरकार ने कुछ ऐसे आंकड़े दिए हैं जो बताते हैं कि 15 वर्षों में चीजें कितनी बदल गई हैं। इन 15 वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा जहां अब तक के उच्चतम स्तर पर है तो वहीं कर्मचारियों की सैलरी उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। इस बारे में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन ने प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को चेतावनी भी दी है।   गिरती जीडीपी ने चिंता की पैदा प्राइवेट कंपनियों के बढ़ते प्रॉफिट और कर्मचारियों के सैलरी में धीमी वृद्धि को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई-सितंबर में जीडीपी में 5.4 फीसदी की तेज गिरावट ने नीति निर्माताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह तब है कि पिछले चार वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा चार गुना बढ़ गया है। वहीं सैलरी में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। इस सेक्टर में तैयार हुई रिपोर्ट उद्योग चैंबर फिक्की और क्वेस कॉर्प लिमिटेड ने सरकार के लिए रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में छह सेक्टर में कर्मचारियों की 4 साल की सैलरी के बारे में बताया गया है। ये 6 सेक्टर में SFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर), EMPI (इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेस और इंफ्रास्ट्रक्चर), FMCD/FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर ड्यूरेबल्स/फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स), IT (इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी), लॉजिस्टिक्स और रिटेल शामिल हैं। कितनी बढ़ी सैलरी? आंकड़ों के मुताबिक इन 6 सेक्टर में कर्मचारियों की 4 साल में सालाना औसतन सैलरी अधिकतम 5.4% बढ़ी है। इतनी बढ़ोतरी FMCD/FMCG सेक्टर में हुई है। जानें, कितनी बढ़ी 4 साल में औसत सैलरी: SFSI: साल 2019 में औसत सैलरी 15,184 रुपये थी। साल 2023 में यह 17,475 रुपये हो गई। इन 4 वर्षों में इसमें 2.8% की तेजी आई। EMPI: इस सेक्टर में साल 2019 में औसत सैलरी 19,659 रुपये थी। साल 2023 में यह 20,509 रुपये हो गई। इन 4 वर्षों में इसमें 0.8% की तेजी आई। FMCD/FMCG: साल 2019 में इस सेक्टर में औसत सैलरी 14,608 रुपये थी। साल 2023 में यह 5.8% बढ़कर 19,023 रुपये हो गई। IT: इस सेक्टर में 4 साल में सैलरी में 4 फीसदी की तेजी आई है। साल 2019 में इस सेक्टर में औसत सैलरी 40,333 रुपये थी। साल 2023 में यह 49,076 रुपये हो गई। Logistics: इस सेक्टर में भी 4 साल में सैलरी में बहुत ज्यादा तेजी नहीं आई है। साल 2019 में औसत सैलरी 15,844 रुपये थी। साल 2023 में यह 4.2% बढ़कर 19,534 रुपये हो गई। कितनी बढ़ी कंपनियों की कमाई? नागेश्वरन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में निजी कंपनियों की कमाई में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि मार्च 2024 में कॉर्पोरेट कंपनियों का प्रॉफिट पिछले 15 साल में अपने उच्चतम स्तर पर था। नागेश्वरन के मुताबिक पिछले 4 वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का प्रॉफिट चार गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता अनौपचारिक क्षेत्र में है जहां कर्मचारियों के सैलरी में मामूली वृद्धि हुई है।  

विरासत के साथ विकसित मध्यप्रदेश निर्माण के संकल्प का एक वर्ष

डॉ. मोहन यादव भोपाल देश का ह्दय प्रांत मध्यप्रदेश गौरवशाली इतिहास और विश्वविख्यात सांस्कृतिक परंपराओं के लिये प्रसिद्ध है। सृष्टि के आरंभ से लेकर अब तक मानव सभ्यता के कई चिन्ह मध्यप्रदेश की धरती पर हैं। यहां पर्याप्त भू-संपदा, वन-संपदा, जल-संपदा, और खनिज-संपदा है। हम विगत एक वर्ष में विकसित मध्यप्रदेश निर्माण के साथ प्रदेश की विरासत को सहेजने के संकल्प को लेकर आगे बढ़े हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि डबल इंजन की सरकार का लाभ मध्यप्रदेश और प्रदेशवासियों को मिल रहा है। इस विशेष संयोग में प्रदेश ने नवाचारों के साथ विकास के कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। इन दिनों प्रदेश में जनकल्याण पर्व मनाया जा रहा है। यह प्रदेश की समृद्धि का उत्सव है। इसमें भविष्य की कई संभावनाएं आकार लेंगी। शासन-प्रशासन और प्रदेशवासी सभी मिलकर विकास की गंगा बहाएंगे। आपकी सरकार, आपके द्वार होगी और जनता के हित जनता तक पहुंचेंगे। इसमें नई सौगातें भी शामिल होंगी। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो के स्वप्न को मध्यप्रदेश में धरातल पर उतारा जा रहा है। 17 दिसंबर को पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना तथा 25 दिसंबर को केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जायेगा। यह आनंद का विषय है कि मध्यप्रदेश देश में पहला ऐसा राज्य है जहां 2 नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इससे जलस्रोत परस्पर जुड़ेंगे तो धरती का जल स्तर सुधरेगा, हमारे गांव और क्षेत्रों को पानी सुलभ होगा तथा अन्नदाता को सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी मिलेगा। प्रदेश में जिस तरह कृषि, उद्योग, पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन के लिये संभावनाएं विकसित हो रही हैं। इसमें औद्योगिक क्रांति, हरित क्रांति और पर्यटन क्रांति की त्रिवेणी से गरीबी पूर्णतः समाप्त हो जायेगी। पिछले दिनों रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित करके मध्यप्रदेश के गांव-गांव को औद्योगीकरण और आधुनिक उत्पाद से जोड़ने का प्रयत्न किया गया है। भविष्य में जिला स्तर पर भी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित होंगी। हैदराबाद, कोयंबटूर तथा मुंबई में रोड-शो और यूके-जर्मनी के उद्योगपतियों को निवेश के लिये प्रदेश में आमंत्रित करना उद्योग विस्तार का उपक्रम है। क्षेत्रीयता से लेकर ग्लोबल स्तर तक उद्योग के लिये किया गया यह पहला नवाचार है। प्रधानमंत्री जी ने विकसित भारत निर्माण के लिये ज्ञान (GYAN) गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के सम्मान की बात कही है। हमने इन्हीं 4 आधार स्तंभों पर केंद्रित समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश सरकार गरीब कल्याण, युवा शक्ति, किसान-कल्याण और नारी शक्ति मिशन लागू करने जा रही है। हमारा लक्ष्य है अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का कल्याण हो, उन्हें बेहतर भविष्य निर्माण का अवसर मिले। प्रदेश में हर गरीब की पढ़ाई, लिखाई, दवाई, नौकरी और रहने-खाने से लेकर जीवन की हर जरूरत को सरकार पूरा कर रही है। अब गरीब-कल्याण मिशन में होने वाली गतिविधियों और कार्यों से हर गरीब के जीवन-स्तर में सुधार आयेगा, उनकी समृद्धि से प्रदेश के विकास को गति मिलेगी। यह गरीबों के प्रति हमारी संवेदनशीलता ही है कि हुकुमचंद मिल के 30 साल पुराने विवाद से लेकर श्रमिकों की मिल से जुड़ी हर समस्या का हल निकाला और उन्हें उनका अधिकार दिलाया है, वहीं गंभीर बीमारी के गरीब मरीजों के लिये एयर एंबुलेंस सेवा भी शुरू की है। राष्ट्र को समृद्ध बनाने की शक्ति युवाओं में है। आवश्यक है कि युवा कर्मशील हो, विचारशील हो और अपनी परंपराओं से जुड़ा हुआ हो। इसी अनुरूप युवाओं को शिक्षण और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में तैयार राष्ट्रीय शिक्षा नीति सबसे पहले मध्यप्रदेश में लागू हुई। यहां स्किल्ड युवा तैयार हो रहे हैं। प्रदेश के सभी जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस से उत्कृष्ट शिक्षा मिलेगी, भारतीय ज्ञान परंपरा और युगानुकूल शिक्षा के समावेश से युवाओं को अपनी समृद्ध विरासत का ज्ञान होगा और बेहतर भविष्य निर्माण के द्वार खुलेंगे। हर विकासखंड में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण से गांव-गांव से खेल प्रतिभाएं उभरकर आएंगी। युवा शक्ति मिशन में प्रदेश के युवाओं की शिक्षा, आधुनिक तकनीकी में योग्यता और कौशल निर्माण के साथ सर्वांगीण विकास की लक्ष्य प्राप्ति शामिल है। प्रदेश में स्किल्ड युवा अपना स्व-रोज़गार स्थापित कर रहे हैं। वहीं शासकीय सेवाओं में लगभग ढाई लाख युवाओं की भर्ती का अभियान भी शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रांत है। किसान कल्याण मिशन में कृषि की उपज बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास किये जायेंगे। अगले 5 वर्ष में सिंचाई का रकबा 50 लाख हेक्टेयर से 1 करोड़ हेक्टेयर किया जायेगा। अन्नदाता को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने के साथ खाद, बीज से लेकर उपज की बिक्री तक की व्यवस्था की गई है। किसानों के खेत में सोलर पंप लगाए जाएंगे, जिससे वे अपने उपयोग के लिये अपनी बिजली स्वयं बनायेंगे। हम प्रयासरत हैं कि जल की एक-एक बूंद का लाभ किसानों को मिले। हम चाहते हैं कि किसान चिंता मुक्त होकर खेती करें और खुशहाल जीवन जियें। हर किसान को गौ-पालक और हर घर को गौ-रक्षक बनाने का प्रयास है। मध्यप्रदेश न केवल कृषि उत्पादन में देश में शीर्ष पर हो, बल्कि दुग्ध उत्पादन और दुग्ध निर्यातक प्रदेश बने इसीलिये मध्यप्रदेश में गौ-वंश पालन के लिये अनुदान दिया जा रहा है। परिवार, समाज, राष्ट्र और सृष्टि निर्माण के केन्द्र में है नारी भारतीय दर्शन में नारी के महत्व का उल्लेख है। महिला कल्याण के लिये नारी शक्ति मिशन में महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक सशक्तिकरण किया जायेगा। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां शासकीय सेवाओं में महिलाओं का आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। बहनों के मान-सम्मान और स्वाभिमान के लिये लाड़ली बहना योजना से महिलाओं को और सेनिटेशन एवं हाइजीन योजना से प्रदेश की लाखों बालिकाओं को आर्थिक संबल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से सांस्कृतिक पुनरुत्थान का कार्य हो रहा है। प्रदेश में समृद्ध और गौरवशाली विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। श्रीराम वन गमन पथ, श्रीराम के कर्तव्य पालन और राष्ट्र निर्माण का समर्पण संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का आधार देगा। श्रीकृष्ण पाथेय में उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां श्रीकृष्ण के स्मृति चिन्ह हैं। उन … Read more

शहर की 531 कॉलोनियों के रहवासी नगर निगम रिकॉर्ड में बकायादा

इंदौर वर्ष 2024-25 का संपत्तिकर अग्रिम जमा करने के बावजूद शहर की 531 कॉलोनियों के रहवासी नगर निगम रिकॉर्ड में बकायादार हैं। इन कॉलोनियों के रहवासियों को मैसेज भेजे जा रहे हैं कि वे 14 दिसंबर 2024 को आयोजित वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत में आएं और बकाया करों का भुगतान करें। रहवासी समझ नहीं पा रहे कि जब उन्होंने कर का भुगतान अग्रिम में कर दिया है, तो फिर उन्हें बकायादार क्यों बताया जा रहा है। निगम की तरफ से बकाया भुगतान के लिए मैसेज क्यों भेजे जा रहे हैं। यह स्थिति पोर्टल को देरी से अपडेट करने की वजह से बनी है। मई के अंतिम सप्ताह में नगर निगम ने कॉलोनियों के रेट जोन में बदलाव किया था। शहर की 531 कॉलोनियां इससे प्रभावित हुई थीं। इस बदलाव के चलते इन कॉलोनियों में संपत्तिकर में 10 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन निगम ने इस बदलाव को पोर्टल में अपडेट ही नहीं किया। बिल के हिसाब से जमा कर दिया था असर यह हुआ कि जब लोग अग्रिम कर जमा करने निगम कार्यालय पहुंचे तो उन्हें पुरानी दर के हिसाब से संपत्ति और जलकर के बिल थमा दिए गए। चूंकि 30 जून तक अग्रिम कर जमा करने पर छूट थी, लोगों ने बिल के हिसाब से कर जमा कर दिया। अगले वर्ष पड़ेगा आर्थिक बोझ पोर्टल अपडेट करने में हुई देरी का असर अगले वर्ष एडवांस में करों का भुगतान करने वालों पर ज्यादा पड़ेगा। जिन लोगों ने वर्ष 2024-25 का कर अग्रिम में जमा कराया था उन्हें अगले वर्ष 2025-26 के बढ़े हुए कर के साथ-साथ वर्ष 2024-25 का बकाया कर भी जमा करना होगा।

पूजा स्थल अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस, नए निर्देश का क्या पड़ेगा असर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मस्जिदों के खिलाफ ताबड़तोड़ दर्ज हो रहे अदालती मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। इसके बाद संभल की जामा मस्जिद, जौनपुर की अटाला मस्जिद और बदायूं की शम्सी जामा मस्जिद केस पर बड़ा असर पड़ने वाला है। इन सभी मामलों में निचली अदालतें सर्वे के आदेश समेत कोई भी अंतरिम फैसला नहीं दे पाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही किसी अन्य मस्जिद या धर्मस्थल को लेकर सर्वोच्च अदालत के अगले आदेश तक कोई मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाएगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने देश की सुप्रीम अदालत साल 1991 के पूजा स्थल अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी। यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 से पूजा स्थलों के धार्मिक चरित्र के रूपांतरण को प्रतिबंधित करता है। यानी कि जो भी धार्मिक स्थल 15 अगस्त 1947 से पहले जिस हालत में थे, वह वैसे ही रहेंगे। इस याचिका पर सुनवाी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस कानून की संवैधानिक वैधता, इसकी रूपरेखा और दायरे का विश्लेषण कर रहे हैं, इसलिए उन्हें देशभर में लंबित मुकदमों की सुनवाई पर रोक लगानी होगी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की स्पेशल बेंच ने आदेश दिया कि पूजा स्थल अधिनियम से संबंधित केस कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में हम यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि न्यायालय के अगले आदेश तक पूजा स्थलों के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा और कार्यवाही नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हम यह भी निर्देश देते हैं कि लंबित मुकदमों में अदालतें सर्वेक्षण के आदेशों समेत कोई प्रभावी अंतरिम आदेश या अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगी। यूपी के मुकदमों पर क्या होगा असर हाल ही में संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान बवाल मच गया था। 19 नवंबर 2024 को स्थानीय अदालत के जज ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। इस मस्जिद का दो बार सर्वे किया जा चुका है लेकिन रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अदालत में रिपोर्ट पेश करने की राह में तो कोई अड़चन नहीं आएगी लेकिन जज साहब इस रिपोर्ट के आधार पर मस्जिद को लेकर कोई फैसला नहीं सुना सकेंगे। अटाला मस्जिद का सर्वे रुकेगा? जौनपुर की अटाला मस्जिद को लेकर भी विवाद पुराना है। दावा किया जा रहा है कि मस्जिद के स्थान पर अटाला देवी का मंदिर था। मामला अदालत में गया तो लोकल कोर्ट ने जुलाई 2024 में अमीन सर्वे का आदेश दिया था। हालांकि, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद सर्वे हो नहीं पाया। अब सर्वे का मामला हाई कोर्ट में है। वहीं, हिंदू पक्ष सर्वे को लेकर एक बार फिर स्थानीय अदालत में पहुंच गया है। हिंदू पक्ष ने अमीन को विवादित स्थल का निरीक्षण, उनकी रिपोर्ट और नक्शा तैयार करने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक को निर्देशित करने को लेकर कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि नियत की है। अब 16 दिसबंर को मामले को लेकर सुनवाई तो होगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अटाला मस्जिद का सर्वे नहीं किया जा सकेगा। बदायूं मस्जिद पर क्या होगा? बदायूं में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने साल 2022 में कोर्ट में वाद दायर कर दावा किया था कि नीलकंठ महादेव मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद बनाई गई है। इस केस में सरकारी अधिवक्ता की बहस पूरी हो चुकी है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी आ चुकी है। 30 नवंबर से इंतजामिया कमेटी की तरफ से बहस शुरू की गई थी। 3 दिसंबर को इस पर सुनवाई भी हुई थी।अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 10 दिसंबर की तारीख तय की थी और मंगलवार को मुस्लिम पक्ष को इस पर बहस करनी थी, लेकिन एक अधिवक्ता के निधन के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में सुनवाई 17 दिसंबर को होनी है। हालांकि, इस केस में मुकदमा सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने से पहले का है। ऐसे में, इस पर भी 17 दिसंबर को कोर्ट में सुनवाई तो हो सकेगी लेकिन अदालत कोई भी अंतरिम या अंतिम फैसला नहीं सुना सकेगी। कुल मिलाकर इन तीनों मस्जिदों को लेकर कोर्ट में चल रहा मामला पूरी तरह से पूजा स्थल अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे पर निर्भर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज इस अधिनियम का विश्लेषण कर जो फैसला सुनाएंगे, उसके आधार पर ही इन मामलों में स्थानीय अदालतें आगे की कार्रवाई कर पाएंगी। ऐसे में माना जा रहा है कि यूपी में कुछ दिनों तक मंदिर-मस्जिद को लेकर लगातार उठ रहे सनसनीखेज मामले थमेंगे। यूपी कॉलेज मजार विवाद वहीं, इस बीच वाराणसी में यूपी कॉलेज में मजार को लेकर विवाद भी गरमाया है। कॉलेज के छात्रनेताओं ने इसके खिलाफ न सिर्फ विरोध प्रदर्शन किया बल्कि कॉलेज में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। कई छात्र इस दौरान गिरफ्तार किए गए। कॉलेज में बाहरी लोगों के प्रवेश पर बैन लगा दिया गया। ताजा अपडेट के अनुसार मजार के गेट पर दो ताले जड़ दिए गए हैं। दूसरे ताले के बारे में पुलिस प्रशासन को भी जानकारी नहीं है। हालांकि, यह केस अभी कोर्ट में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इसमें भी केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा।

नेता प्रतिपक्ष महंत ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, 2028 तक 10 लाख करोड़ की GDP के लक्ष्य को बताया ‘सपना’

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने राज्य की बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार, अपराध और धान खरीदी में किसानों को हो रही परेशानियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही, उन्होंने यह दावा किया कि राज्य सरकार ने उनके द्वारा स्वीकृत सभी कार्यों को रद्द कर दिया है। इसके अलावा, उन्होंने साय सरकार के एक साल पूरा होने पर आयोजित जश्न और दुबई में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा में महादेव सट्टा एप के सरगना सौरभ चंद्राकर के देखें जाने को लेकर भी सवाल खड़े किये हैं। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रदेश की जीडीपी को 2028 तक 10 लाख करोड़ तक पहुंचाने के सरकार के लक्ष्य को “सपना” करार दिया और इसे वास्तविकता से परे बताया। उन्होंने कहा, “यह सपना कैसे देखा जा सकता है? इसे पूरा करने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। किसके निर्देश पर सरकार काम कर रही है, यह भी समझ से बाहर है।” उन्होंने कहा कि “सरकार ने मेरे द्वारा स्वीकृत नगर पालिका, सड़क, मंडी के कार्यों को वापस ले लिया। सरकार ने मेरा ध्यान नहीं रखा। प्रदेशभर में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। स्कूली छात्राओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं, और हर विभाग में गड़बड़ी व्याप्त है। ट्रांसफर ऑर्डर हाई कोर्ट से रद्द होने तक भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी है।” जशपुर जिले में बीते दिनों सामने आई एक नाबालिग लड़की के अपहरण और हत्या की वारदात पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “मुख्यमंत्री जी को यह बुरा लगेगा, लेकिन उनके ही जिले में एक लड़की को खेत में दबाकर उस पर धान बो दिया गया। रायगढ़ में अपराध की दर बढ़ी है, खासकर आदिवासियों और महिलाओं पर। सरकार इसे कैसे उपलब्धि मान सकती है?” राइस मिलर्स की हड़ताल और धान खरीदी के मुद्दे पर महंत ने कहा कि सरकार के साथ राइस मिलर्स का कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है। महंत ने आरोप लगाया कि धान का उठाव केवल कुछ जगहों पर हो रहा है, और किसान अभी भी टोकन पर आश्रित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमानक बोरे में धान भरने से किसानों को हर क्विंटल पर 23 रुपये का नुकसान हो रहा है। महंत ने राज्यपाल को पत्र लिखकर अमानक बोरे का मुद्दा उठाया और सरकार से ध्यान देने की अपील की। इसके अलावा, दुबई में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा में महादेव सट्टा एप के सरगना सौरभ चंद्राकर की तस्वीर पर नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा कि प्रदीप मिश्रा जी उन्हें माला पहना रहे थे, हमने देखा। वह हमारे यहां के बड़े कथाकार हैं, किनके भरोसे ये सब चल रहा है, यह इससे पता चल रहा है।

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय लोगों को आजीविका उपलब्ध कराने प्रशासन की पहल

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही छत्तीसगढ़ का गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (जिला) प्राकृतिक धरोहरों से भरा हुआ है. यहां साल के घने वन, प्राकृतिक झरने, 8 नदियों, पहाड़ों, और गुफाओं का अद्भुद सौंदर्य देखकर सभी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. दूर-दूर से पर्यटक यहां के खूबसूरत नजारे का लुत्फ उठाने आते हैं. 10 फरवरी 2020 में सत्ता के विकेन्द्रीकरण के तहत बिलासपुर से अलग इस जिले का गठन किया गया था. पृथक जिला बनने के बाद से जीपीएम जिले को पर्यटन जिला के नाम से एक नई पहचान दिलाने जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन स्थलों का विकास, पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय लोगों को आजीविका उपलब्ध कराने के लिए सार्थक पहल किया जा रहा है.  जीपीएम जिले में पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने गगनई नेचर कैंप के विस्तृत जलाशय में नौकायन शुरू करा दिया है. राजमेरगढ़, ठाड़पथरा, लक्ष्मणधारा, माई का मड़वा, झोझा जलप्रपात, जोगी गुफा आदि स्थानों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सौंदर्यीकरण के साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए कैंटीन एवं बैरियर का निर्माण किया गया है. इन स्थानों पर ट्रैकिंग, कैंपिंग व अन्य गतिविधियां कराई जा रही हैं. पर्यटन स्थलों की देखरेख एवं संधारण के लिए स्थानीय पर्यटन समितियों का गठन किया गया है. पर्यटन समितियों को रात्रि भ्रमण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. स्थानीय युवाओं को ट्रैकिंग, हॉस्पिटैलिटी आदि का प्रशिक्षण दिया गया है.  स्थानीय पर्यटन समितियों के माध्यम से बस्ती बगरा और सोन बचरवार में होम स्टे संचालित किया जा रहा है. झोझा जलप्रपात घूमने आने वाले पर्यटक प्रकृति की वादियों में बसे आदिवासी ग्राम बस्ती बगरा में संचालित होम स्टे का आनंद ले सकते हैं. कम्युनिटी विलेज स्टे भी लमना ग्राम पंचायत में स्थानीय पर्यटन समिती द्वारा संचालित कराया जा रहा है, जिसमें पर्यटकों को पारंपरिक संस्कृति से भी जोड़ा जाता है. सोन बचरवार जहां से सोन नदी का उद्गम स्थल माना जाता है, और पूरे विश्व में सिर्फ एक मात्र मंदिर जहां पर मां नर्मदा और शोणभद्र जी की एक साथ प्रतिमा देखने को मिलती है, यहां पर माघ पूर्णिमा में एक विशाल मेले का भी आयोजन कराया जाता है. यह गांव धार्मिक महत्वता के लिए भी प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है यहां पर भी सोन बचारवार होम स्टे है, जो कि पर्यटन समिति द्वारा संचालित कराए जा रहे हैं. पर्यटन स्थल ठाड़पथरा में मड हाउस बनाया जा रहा है, इसका भी संचालन स्थानीय पर्यटन समिति द्वारा किया जाएगा.  जिले में धनपुर एक पुरातत्विक् स्थल है, जहां पर पर्यटन समिति के द्वारा विशालकाय पत्थर पर उभरी हुई मूर्ति बेनीबाई को संरक्षित किया जा रहा है. यहां खुदाई से प्राप्त मूर्तियों एवं अवशेषों का संरक्षण भी किया जा रहा है. धनपुर में मूर्ति संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा है. पर्यटन विकास के तहत मलनिया डैम में खनिज न्यास मद से एक्वा टूरिज्म एवं वाटर स्पोर्ट्स की स्वीकृति दी गई है, जिसका संचालन मछुआ सहकारी समिति द्वारा किया जाना है. प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण जिले का पर्यटन स्थल स्थानीय पर्यअकों को ही नही बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी खूब भा रहा है. जिला प्रशासन जिले के सभी दुर्लभ एवं आकर्षक पर्यटन क्षेत्रों के विकास के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है. कबीर चबूतरा से लेकर समुदलई तक प्रत्येक पर्यटन स्थल की जीवंतता एवं सुरम्यता आने वाले दिनों में पूरे देश में जिले की ख्याति बढ़ाएगी. जिले के पर्यटन स्थलों के प्रचार प्रसार के लिए जिला प्रशासन द्वारा कॉफी टेबल बुक बनाई गई है तथा जिले की पर्यटन स्थलों को इंटरनेट के माध्यम से लोगो तक पहुंचाने के लिए www.gpmtourism.com वेबसाइट बनाई गई है. इस वेबसाइट के माध्यम से पर्यटन समितियों द्वारा संचालित कैम्पिंग, ट्रैकिंग, होमस्टे, कम्युनिटी विलेज स्टे एवं मडहाउस की बुकिंग भी की जाती है. जीपीएम कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने कहा कि गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले की प्राकृतिक सुन्दरता और पर्यटन की भरपूर संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा पर्यटन क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ स्थानीय जनजीवन के लिए भी कार्य किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ की हाउसिंग सोसाइटी सौर ऊर्जा से होंगी रोशन, क्रेडा ने शुरू किया सर्वे

रायपुर राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ऊर्जा अक्षय विकास अभिकरण (क्रेडा) ने हाउसिंग सोसाइटियों को सोलर ऊर्जा से रोशन करने की तैयारी की है। क्रेडा के अधिकारी आवासीय सोसाइटियों का सर्वे भी कर रहे हैं। बीते दिनों क्रेडा ने हाउसिंग सोसाइटियों की बैठक भी ली थी। अधिकारियों का कहना है कि आवासीय सोसाइटी में सोलर प्लांट लगाने से यहां के रहवासियों को लाभ होगा। इसका खर्च भी आवासीय सोसाइटी और रेस्को (रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी) मिलकर करेंगे। वहीं, केंद्र सरकार ने सोलर ऊर्जा के माध्यम से 2030 तक देश में 500 बिलियन वॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। दो योजनाएं होगी लांच सोसाइटियों में सौर संयंत्र लगाने के लिए रेस्को और कैपेक्स जैसी दो योजनाएं लांच की जा रही हैं। कैपेक्स मॉडल के अंतर्गत सोसाइटियों को इसका पूरा खर्च वहन करना होगा। वहीं, रेस्को के तहत वेंडर पूरा सिस्टम लगाएगा और कॉलोनी के लोग न्यूनतम दर पर बिजली खरीदेंगे। क्रेडा के सीईओ राजेश सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश की सभी छोटी बड़ी कॉलोनियों को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने के लिए इस दिशा में काम हो रहा है। सर्वे शुरू हो चुका है। इससे बिजली बिल भी कम आएगा। यह होता है रेस्को मॉडल रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी (रेस्को) मॉडल के तहत बिजली की मांग के अनुसार सोसाइटी में सोलर पावर प्लांट लगाया जाता है। इसमें शुरुआती खर्च रेस्को करता है। उत्पादित होने वाली बिजली को तय कीमत पर आवासीय सोसाइटी को बेचा जाता है। यह बिजली बिल की तुलना में एक तिहाई होता है। एक समय के बाद यह संयंत्र सोसाइटी के हवाले कर दिया जाता है। यह होता है कैपेक्स मॉडल कैपिटल एक्सपेंडिचर मॉडल (कैपेक्स) के तहत आवासीय सोसाइटी सोलर प्लांट लगाने का पूरा खर्च वहन करती है। इसमें सोसाइटी का ही मालिकाना हक होता है। प्लांट से उत्पादित बिजली का उपयोग यूटिलिटी बिजली भार में किया जाता है। इतने रुपये की होगी बचत रेस्को मॉडल के तहत 100 किलोवॉट का सौर संयंत्र लगाया जाता है, तो हर महीने 90 हजार की बचत होगी। वहीं कैपेक्स माडल से 1.13 लाख रुपये प्रति माह की बचत होती है। 100 किलोवॉट क्षमता का प्लांट लगाने के लिए 800 से 850 वर्ग मीटर जगह होनी जरूरी है।

देश भर में 404 शक्ति सदन काम कर रहे हैं, जहां 29,315 महिलाओं को पुनर्वास और सहायता मिली:मंत्री सावित्री ठाकुर

नईदिल्ली भारत में संचालित 802 वन स्टॉप सेंटर से 10 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। देश भर में 404 शक्ति सदन काम कर रहे हैं, जहां 29,315 महिलाओं को पुनर्वास और सहायता मिली है। राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। वन स्टॉप सेंटर क्या है ? वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाए जा रही संबल पहल का घटक है। यह घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है। यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और सलाह, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। देश भर में 802 ओएससी चालू हैं वर्तमान में स्वीकृत 878 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) में से, देश भर में 802 ओएससी चालू हैं और इनमें 31 अक्टूबर, 2024 तक 10.12 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, शक्ति सदन मिशन शक्ति के तहत सामर्थ्य पहल का एक घटक है। यह तस्करी करके लाई गई महिलाओं सहित संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एकीकृत राहत और पुनर्वास गृह है। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाना है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों से बाहर आ सकें। आज की तारीख में, देश भर में 404 शक्ति सदन काम कर रहे हैं और वर्तमान में 29,315 महिलाओं को सहायता दी गई और पुनर्वास दिया गया है। किन जगहों पर अतिरिक्त ओएससी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ? दरअसल ओएससी योजना आश्‍वयकता के आधार पर काम करती है इसलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रत्येक जिले में कम से कम एक ओएससी स्थापित करने और उन जिलों में अतिरिक्त ओएससी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिनमें महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर अधिक है या जिनका भौगोलिक क्षेत्र बड़ा है और जो आकांक्षी जिलों में गिने जाते हैं। सरकार ओएससी में नियुक्ति एवं भर्ती के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करती है गौरतलब हो, केंद्र सरकार राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को प्रति ओएससी 13 जनशक्ति संसाधनों की नियुक्ति एवं भर्ती के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करती है। ओएससी योजना का समग्र कार्यान्वयन राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के पास है।  

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