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जबलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर यात्री और पैसेंजर गाड़ियों की धमाचौकड़ी से बचने के लिए लागू होगा ड्रॉप एंड गो नियम

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर यात्री और पैसेंजर गाड़ियों की धमाचौकड़ी से बचने के लिए अब पश्चिम मध्य रेलवे ने एक नया प्लान लाया है। जी हां पश्चिम मध्य रेलवे ने गाड़ी के आकार रुकने और जाने के लिए ड्रॉप एंड गो का समय निर्धारित कर दिया है। जिसके तहत कार और अन्य गाड़ियों के लिए 6 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। तो वहीं ऑटो वालों के लिए 10 मिनट का ड्रॉप एंड को समय तय किया गया है।   आपको बता दे की कर समेत अन्य निजी वाहनों से आने वाले लोगों को 6 मिनट के अंदर रेलवे स्टेशन के बाहर छोड़कर वहां से जाना होगा। वहीं ऑटो चालकों के लिए भी सवारी को लाकर छोड़ने और दूसरी सवारी ले जाने के लिए भी 10 मिनट का वक्त होगा। आपको बता दे कि रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रैफिक व्यवस्था कंट्रोल करने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिनको जल्दी मंजूरी मिलने के बाद लागू कर दिया जाएगा।

कोरोना संक्रमण से पैरोल, प्रदेशभर की जेलों से लापता हैं 70 बंदी

रायपुर रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने सात बंदियों के पेरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। इसके अनुसार हत्या के केस में बंद शिवकुमार उर्फ मुन्ना पांच दिसंबर 2002, गणेश देवांगन 23 जुलाई 2008, संजीत उर्फ सुजीत आठ सितंबर 2010, कृष्ण कुमार 31 अगस्त 2013, राजीव कुमार दो अप्रैल 2020, रूपेंद्र साहू 21 नवंबर 2022 और नरेंद्र श्रीवास 18 जनवरी 2024 से पेरोल पर जेल से छोड़े गए थे। हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती जेल मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने हाई कोर्ट में पैरोल पर गए कैदियों की वापसी न होने के मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डबल बेंच ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई थी। मुख्य न्यायाधीश ने डीजीपी जेल से ताजा रिपोर्ट शपथ पत्र के जरिए पेश करने को कहा था। इसके बाद डीजी जेल की ओर से हाई कोर्ट को जानकारी दी गई कि प्रदेश के पांच सेंट्रल जेलों ने 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें 10 को गिरफ्तार कर लिया गया और तीन की मृत्यु हो गई थी। अभी भी प्रदेश भर के जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। बिलासपुर जेल में भी 22 बंदी नहीं लौटे केंद्रीय जेल बिलासपुर से पैरोल पर गए 22 बंदी लौटे ही नहीं। उनके स्वजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने संबंधित थानों को फरार बंदियों की जानकारी दी है। प्रबंधन की मानें, तो थानों में उनके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई गई है। सजायाफ्ता बंदियों के वापस जेल नहीं पहुंचने पर जेल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बिलासपुर के जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर बंदियों को एक निर्धारित अवधि के बाद पैरोल के बाद वापस जेल लौटना होता है। अधिकांश बंदी लौट भी आते हैं। मगर, 22 बंदी ऐसे हैं जो जेल से बाहर तो निकले, लेकिन वापस लौटकर नहीं आए। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे चाल-चलन वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उप जेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है।

खुशहाल एक साल इवेंट आज 17 दिसंबर को मरीन ड्राइव में शाम 6.30 बजे से

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर शासन की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति नागरिकों को जागरूक करने जनसंपर्क विभाग द्वारा  मरीन ड्राइव, तेलीबांधा, रायपुर में 17 दिसंबर को खुशहाल एक साल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है । यह कार्यक्रम शाम 6.30 बजे  से रात 9.30 बजे तक होगा जिसमें विभिन्न तरह की मनोरंजक गतिविधियों और गेम्स का आयोजन भी होगा। इसमें प्रत्येक आयु वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं । कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में पूछे गए रोचक प्रश्नों का सही उत्तर देने पर तत्काल गिफ्ट/गिफ्ट वाउचर मौक़े पर ही दिया जाएगा।

पूर्व सीएम भैरो सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे का जिक्र, जयपुर पहुंचे मोदी ने दिया राजस्थान के विकास और राजनीति का दिया संदेश

जयपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजस्थान के जयपुर में 46,300 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की, जो राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। लेकिन इस कार्यक्रम के पीछे केवल विकास का ही संदेश नहीं था, बल्कि मोदी ने अपनी सरकार के राजनीतिक एजेंडे को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। उनकी ये परियोजनाएं केवल राजस्थान के विकास के लिए नहीं, बल्कि आगामी चुनावी मुकाबले में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने के लिए भी रणनीतिक कदम प्रतीत होती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयपुर में अपनी स्पीच के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और जसवंत सिंह के किस्सों को याद किया, जो एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा सकता है। मोदी का यह बयान न केवल राजस्थान की राजनीतिक पृष्ठभूमि को उजागर करता है, बल्कि उनके द्वारा इन नेताओं को सम्मानित करने का उद्देश्य भाजपा के पुराने नेताओं और उनके योगदान को जनता के बीच फिर से प्रस्तुत करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस भावनात्मक अंदाज में भैरोंसिंह शेखावत और जसवंत सिंह के किस्से सुनाए, उसमें उनके नेतृत्व की क्षमता और राजस्थान के लिए उनके समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। मोदी ने इन नेताओं की नर्मदा जल को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया का उल्लेख किया, जिसमें शेखावत और सिंह ने गुजरात के नर्मदा पानी को राजस्थान को देने के मोदी के कदम को सराहा था। यह केवल विकास की बात नहीं थी, बल्कि यह कांग्रेस की विफलताओं और राजस्थान में जल संकट पर भाजपा के प्रयासों की ओर इशारा करता था। मोदी ने अपने भाषण में कहा, “उनकी आंखों में आंसू थे,” इस वाक्य के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि भाजपा और उनके नेतृत्व में दिल से काम करने का एक भावुक पहलू है, जो कांग्रेस की राजनीति से अलग है। वसुंधरा राजे का उल्लेख भाजपा के महिला नेतृत्व को मजबूती देने की दिशा में एक राजनीतिक संकेत हो सकता है। राजे की राजनीति राजस्थान में भाजपा की मजबूत चेहरा रही हैं और उनका नाम लेकर मोदी ने महिला सशक्तिकरण के पक्ष में अपनी पार्टी का रुख साफ किया। यह कदम महिला वोटरों को ध्यान में रखते हुए उनकी भूमिका को न केवल पहचान दिलाता है, बल्कि इसे भाजपा के विकासात्मक दृष्टिकोण के साथ जोड़ता है। मोदी का यह प्रयास महिलाओं के बीच भाजपा का समर्थन बढ़ाने के लिए एक सूक्ष्म रणनीति हो सकती है। 1. विकास के साथ राजनीतिक संदेश मोदी का जयपुर दौरा सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक सूक्ष्म राजनीतिक संदेश भी था। प्रधानमंत्री ने राजस्थान की भाजपा सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। उन्होंने भाजपा सरकार की पारदर्शिता और विकास कार्यों की दिशा को उजागर किया, जो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना में एक stark contrast के रूप में प्रस्तुत किया गया। मोदी ने कांग्रेस को निशाने पर रखते हुए कहा कि राजस्थान में पेपर लीक और भर्तियों के मामले कांग्रेस के शासनकाल की छवि बने थे, जबकि भाजपा सरकार ने बम्पर भर्तियां निकाली और पारदर्शी परीक्षाएं करवाई। यह बयान एक राजनीतिक इशारा था, जिसका उद्देश्य भाजपा की सत्ता में लौटने की संभावनाओं को मजबूत करना था। 2. महिलाओं को सशक्त बनाने की रणनीति प्रधानमंत्री ने अपनी योजनाओं में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्रमुखता दी, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश है। “नमो ड्रोन दीजिए योजना” और “बीमा सखी स्कीम” जैसी योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को नए कौशल से लैस करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस कदम के जरिए मोदी ने उन महिला वोटरों को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा से दूर रही हैं। यह योजनाएं न केवल महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि उन्हें वित्तीय निर्णयों में भी सक्षम बनाती हैं। 3. जल संकट पर जोर और राजनीतिक तंज जल संकट और नदियों को जोड़ने की योजना पर मोदी ने जो बयान दिए, वे स्पष्ट रूप से कांग्रेस सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए भाजपा के विकासात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करने का एक तरीका थे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई के नदियों को जोड़ने के विजन का हवाला देते हुए यह दर्शाया कि कैसे भाजपा सरकार जल संकट के समाधान की दिशा में काम कर रही है, जबकि कांग्रेस ने कभी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए। मोदी का यह बयान केवल कांग्रेस पर आरोप लगाने का तरीका नहीं था, बल्कि यह भाजपा की जल नीति को एक प्रभावी राजनीतिक तर्क के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास था, जिससे ग्रामीण और किसान समुदाय को भाजपा के पक्ष में खड़ा किया जा सके। 4. राजनीतिक एजेंडा और भाजपा की ‘विकासवादी’ छवि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भाजपा की विकासवादी छवि को और भी मजबूत किया, विशेष रूप से सौर ऊर्जा और बिजली क्षेत्र में किए गए समझौतों का जिक्र करते हुए। उन्होंने राजस्थान में किसानों को दिन में बिजली देने की योजना का उल्लेख किया, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से मोदी ने यह संदेश दिया कि भाजपा सरकार किसानों के लिए वास्तविक कदम उठा रही है, जबकि कांग्रेस ने केवल बयानबाजी की है। यह बयान भाजपा के ‘किसान समर्थक’ एजेंडे को प्रमोट करने का एक राजनीतिक प्रयास था, जो आगामी चुनावों में किसानों के वोट को अपनी तरफ खींचने के उद्देश्य से था। 5. भ्रष्टाचार और विवादों के खिलाफ भाजपा की ‘परदर्शिता’ मोदी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और नदियों के पानी के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा की सरकार को विकास और समाधान के पक्ष में बताया। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत तथा जसवंत सिंह की चर्चा कर एक भावनात्मक एंगल भी जोड़ा, जो उनके समर्थकों को आकर्षित करने का एक तरीका था। उनका यह कदम कांग्रेस के खिलाफ एक ठोस राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करने के साथ भाजपा के विकासात्मक और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की छवि को प्रस्तुत किया गया। 6. विकास और सहयोग की राजनीति मोदी ने राज्य और केंद्र … Read more

थाना कोतवाली अनूपपुर परिसर में प्रायवेट SIS कंपनी द्वारा सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण एवं भर्ती के लिए कैम्प का आयोजन

अनूपपुर, थाना कोतवाली अनूपपुर परिसर में मंगलवार सुबह पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान के निर्देशन में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड, परसवार अनूपपुर द्वारा युवाओं के लिए प्रायवेट सुरक्षा कर्मियों की भर्ती एवं प्रशिक्षण के लिए एक दिवसीय कैम्प का आयोजन किया गया। इस कैम्प में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड के कमांडेंट श्री प्रकाश कुमार साकेत एवं भर्ती अधिकारी श्री अभिषेक मिश्रा ने थाना कोतवाली अनूपपुर के टी.आई. श्री अरविंद जैन की उपस्थिति में करीब 50 नवयुवकों के साक्षात्कार एवं दस्तावेजों की जांच की। प्रक्रिया के उपरांत 14 युवाओं को प्रशिक्षण हेतु चयनित किया गया। चयनित युवाओं को SIS के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, परसवार में एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों और शाखाओं में प्रायवेट सुरक्षा कर्मी के पद पर नियुक्ति दी जाएगी। इन पदों पर वेतन 14,000 से 23,000 तक होगा।  कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाएं: कमांडेंट श्री प्रकाश कुमार साकेत ने बताया कि SIS संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण और रोजगार पाने वाले युवाओं को निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाती हैं:  स्थाई नौकरी: 65 वर्ष की आयु तक।  वेतन वृद्धि एवं पदोन्नति: वार्षिक आधार पर।  सुविधाएं: बोनस, पेंशन, ग्रेच्युटी, ईएसआईसी और दुर्घटना बीमा।  सुरक्षा बीमा: असमय मृत्यु होने पर परिवार को 2 लाख या अधिक राशि 72 घंटे के भीतर प्रदान की जाती है।  लोन और शैक्षणिक सहयोग: कर्मचारियों को लोन की सुविधा एवं बच्चों की पढ़ाई के लिए सहायता। यह आयोजन युवाओं को रोजगार के साथ-साथ सुरक्षा सेवा क्षेत्र में एक उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मोटरसाइकिल से डिप्टी कलेक्टर की कार की जोरदार भिड़ंत , बाइक सवार युवक की मौत

बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र के मर्चुरी के पास डिप्टी कलेक्टर की कार से टकराकर बाइक सवार युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय अलख राम के रूप में हुई, जो ग्राम बोगर, भानुप्रतापपुर का निवासी था। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, डौंडी विकासखंड के रहने वाले डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके फिलहाल बीजापुर में नियुक्त हैं। डिप्टी कलेक्टर का ड्राइवर आज उनके माता-पिता को इलाज के लिए अस्पताल ले गया था, जहां से वापस लौटते वक्त विपरीत दिशा से आ रही मोटरसाइकिल से उनकी कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। युवक की मौके पर हुई मौत इस हादसे की भयावहता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि टक्कर के बाद बाइक गाड़ी के सामने इंजिन के पास जाकर फंस गई थी, जिससे उसके परखच्चे उड़ गए। वहीं बाइक सवार युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दौरान मौके पर राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। घटना की सूचना मिलते ही डौंडी पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

वरिष्ठ नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने दागे सवाल, हरियाणा कांग्रेस में इस्तीफे की मांग से गरमाया माहौल

चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की है। चौधरी वीरेंद्र सिंह के बयान से हरियाणा में राजनितिक माहौल गरमा गया है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की हालिया हार पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि इस हार के पीछे कई कारण हैं। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “हरियाणा में कांग्रेस का संगठन मजबूत नहीं है और यही कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण बना।” उन्होंने कांग्रेस में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी को हरियाणा की जनता के और करीब लाने के लिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “हरियाणा में सब कुछ एक नेता के नाम पर केंद्रित था। यह गलत संदेश गया कि कांग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की सरकार बन रही है। हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने पद से इस्तीफा दे। राजनीति में ऐसा हमेशा होता रहा है, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि हरियाणा में अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ। भाजपा पर भी लगाए गंभीर आरोप वीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर भी हमला बोला और कहा कि पार्टी ने बागी कांग्रेस नेताओं पर खूब पैसा खर्च किया और चुनाव में सत्ता, मशीनरी और वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के अलावा हरियाणा में कई बाहरी ताकतों ने भी काम किया। जब धर्म कार्ड काम नहीं आया तो जातिगत ध्रुवीकरण का सहारा लिया गया।” “मेरा लक्ष्य हरियाणा को कांग्रेस की जनता की पार्टी बनाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मैं हरियाणा में बड़ा आंदोलन चलाऊंगा और कांग्रेस को फिर से हरियाणा की जनता की पार्टी बनाऊंगा। मेरा लक्ष्य है कि पार्टी हर वर्ग और हर समुदाय तक पहुंचे। चुनावी रणनीति पर सवाल वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में संगठन की कमी और नेतृत्व की गलतियां हार का मुख्य कारण बनीं। उन्होंने कहा कि यह समय आत्ममंथन का है और अगर पार्टी में बदलाव नहीं हुआ तो जनता से जुड़ने का सपना अधूरा रह जाएगा। चौधरी वीरेंद्र सिंह के इस बयान से हरियाणा कांग्रेस में हलचल मच गई है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्रदेश अध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा देंगे।

मध्य प्रदेश में शून्य से नीचे आया तापमान, अमरकंटक में मैदान में जमी बर्फ

अनूपपुर समुद्र तल से 1065 मीटर ऊंचाई पर विंध्य और सतपुड़ा मैकल पहाड़ी के केंद्र बिंदु पर स्थित नर्मदा उद्गम पवित्र नगरी अमरकंटक में वर्ष 2024 की सबसे अत्यधिक ठंड की सुबह 17 दिसंबर मंगलवार को दर्ज हुई। यहां तापमान 0 डिग्री से नीचे आ गया है। नर्मदा उद्गम स्थल से लेकर कपिलधारा तक पूरे अमरकंटक नगर में मंगलवार की सुबह जमाव भरी ठंड थी। रात में आई तापमान की गिरावट से घास पर ओस पूरी तरह से बर्फ का रूप ले ली थी। नर्मदा का जल भी पूरी तरह से ठहरा हुआ बर्फ के समान नजर आया। चारों तरफ हरी घास पूरी तरह से सफेद और कठोर हो चुकी थी। लोगों ने घास पर जमी बर्फ को उठाकर एहसास भी किया। स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने लिया आनंद     वाहनों में बर्फ पूरी तरह से जमा नजर आई। अमरकंटक आए पर्यटक श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने कड़कड़ाती ठंड के बावजूद बाहर निकाल कर इस नजारे को नजदीक से देखने का आनंद उठाया।     गलन भरी ठंड अमरकंटक सहित पुष्पराजगढ़ के ग्रामीण अंचल में भी मंगलवार की सुबह थी। अनूपपुर जिले में भी भारी ठंड का वातावरण बना हुआ है। 12 दिसंबर से उत्तर भारत से चलने वाली बर्फीली हवाओं की वजह से लगातार अमरकंटक सहित समूचे जिले के तापमान में लगातार गिरावट आ रही थी।     जमीन पर ओस जमा होने लगी थी। पाला पड़ने लगा था। पेड़ पौधे, पशुओं मवेशियों सहित इंसानों पर ठंड का कहर बना हुआ था। पिछले वर्ष अमरकंटक में तापमान निचले स्तर पर नहीं आ पाया था। तीन वर्ष बाद कड़ाके की ठंड लौटी पिछले तीन वर्ष बाद यहां कड़ाके की ठंड लौट कर आई है। अमरकंटक में मौजूद पर्यटक और श्रद्धालु यहां के ठंड भरे मौसम का भरपूर आनंद उठा रहे हैं और मौसम भी शिमला, पचमढ़ी की तरह बर्फ जमने जैसे तस्वीरों का दीदार लगातार कर रहा है जिससे लोग भी अमरकंटक के वातावरण की जानकारी मिलने पर रोज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं और सुबह जल्दी उठकर ठंड भरे नजारे का उठा रहे हैं। इस बीच, इंदौर से खबर है कि सोमवार को हवाओं का रुख उत्तर पूर्वी होने के कारण शहरवासियों को ठंड से राहत मिली और तापमान में इजाफा देखने को मिला। रविवार के मुकाबले सोमवार को दिन के तापमान में दो डिग्री का इजाफा देखने को मिला। मंगलवार को शहर में अधिकतम तापमान 28.6 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से दो डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री कम रहा। दिन में उत्तर व उत्तरी पूर्वी हवाएं 10 से 12 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चली। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानियों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बना है जो तमिलनाडु की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से अभी इंदौर में तापमान में इजाफा देखने को मिल रहा है। आगामी दिनों में हिमालय क्षेत्र में एक पश्चिम विक्षोभ भी सक्रिय होगा। इसकी वजह से इंदौर में 21 दिसंबर तक शहरवासियों को तेज ठंड से राहत मिलेगी और दिन व रात के तापमान में इजाफा भी देखने को मिलेगा। पश्चिम विक्षोभ के गुजरने के बाद ही शहर के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी।

बनेंगे 8 स्टेशन, इंदौर के लवकुश चौराहे से रवाना होकर उज्जैन के महाकाल लोक तक जाएगी मेट्रो

इंदौर। इंदौर से महाकाल मंदिर तक 47 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चलाने के लिए कवायद शुरू हो गई। इंदौर-उज्जैन के हाइब्रिड मोड पर मेट्रो का संचालन किया जाएगा। इस पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च का आकलन किया गया है। इसका लाभ इंदौर व उज्जैन वासियों को सिंहस्थ के बाद ही मिल पाएगा। लवकुश चौराहे से महाकाल मंदिर तक मौजूदा फोर लेन सड़क के डिवाइडर पर पिलर खड़े कर वायडक्ट के माध्यम से मेट्रो का मार्ग तैयार किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण कर रुट अलायमेंट तय कर लिया है। अब जल्द ही डीएमआरसी की टीम मप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन के अफसरों के सामने इसका प्रेजेंटेशन देगी। इसके बाद इंदौर-उज्जैन आरआरटीएस की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इंदौर शहर में निर्माणाधीन मेट्रो रूट पर मेट्रो मेट्रो 80 से 85 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। दो शहरों के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) में 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से मेट्रो चलती है। इंदौर व उज्जैन के बीच हाइब्रिड मोड में मेट्रो का संचालन किया जाएगा। यह 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। वर्तमान में दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में इस तरह हाइब्रिड मोड में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। पूर्व में सिंहस्थ के पहले इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने की योजना बनाई जा रही थी लेकिन 10 हजार करोड़ रुपये का बजट जुटाना राज्य शासन के लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट सिंहस्थ के पहले पूरा नहीं हो पाएगा। ऐसे में 2028 में उज्जैन में होने वाले महाकुंभ में इंदौर से जाने वालों को सिक्स लेन का सड़क मार्ग व रेलवे स्टेशन से अन्य ट्रेनों के अलावा वंदे मेट्रो ट्रेन का विकल्प रहेगा। रेल मंत्रालय द्वारा इंदौर से उज्जैन के बीच वंदे मेट्रो ट्रेन चलाने पर सहमति दी गई है। तालाब तक मेट्रो ले जाने की कोशिश जानकारों के मुताबिक पूर्व में उज्जैन की सघन बसाहट के कारण उज्जैन शहर के हिस्से में अंडरग्राउंड मेट्रो के विकल्प पर विचार किया जा रहा था। अब महाकाल महालोक के पास बने तालाब के पास पार्किंग वाले हिस्से तक ओवरहेड मेट्रो ले जाने की योजना है।

स्टीव स्मिथ ने केएल राहुल को आउट करने के लिए एक हैरतअंगेज कैच पकड़ा

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया की टीम को ब्रिसबेन टेस्ट मैच के चौथे दिन के खेल की पहली गेंद पर विकेट मिल सकता था, लेकिन उनके अनुभवी स्लिप फील्डर स्टीव स्मिथ ने कैच छोड़ दिया था। केएल राहुल का ये आसान कैच पता नहीं कैसे स्टीव स्मिथ से छूट गया। हालांकि, अच्छी बात ये रही कि उन्होंने ही केएल राहुल को आउट करने के लिए एक हैरतअंगेज कैच पकड़ा, लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि स्टीव स्मिथ का कैच छोड़ना ऑस्ट्रेलिया के लिए भारी पड़ सकता है। इसके पीछे कारण यह है कि जब केएल राहुल का कैच छूटा तो वे सिर्फ 33 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे और जब आउट हुए तो उनका स्कोर 84 रन था। अगर केएल राहुल दिन की पहली गेंद पर आउट हो जाते तो शायद मैच में ऑस्ट्रेलिया की पकड़ मजबूत हो जाती। केएल राहुल बाद में नाथन लियोन की गेंद को कट करने के चक्कर में स्लिप में आउट हुए। स्टीव स्मिथ ने अच्छी तरह से एंटिसिपेट करते हुए अपने दाहिने ओर जाकर एक हाथ से कैच पकड़ा। गेंद दाएं हाथ की हथेली पर लगी थी, लेकिन गेंद उनके हाथ से चिपक सी गई थी। ये देखकर उनको राहत जरूर मिली होगी, लेकिन कैच छोड़ने से कैच पकड़ने तक केएल राहुल ने 51 रन और बना लिए, जिससे भारत को फॉलोऑन टालने में थोड़ी सी मदद मिली। आप वीडियो देख सकते हैं।   स्टीव स्मिथ का कैच पकड़ने वाला वीडियो स्टीव स्मिथ की बात करें तो उनके लिए ये टेस्ट मैच बल्ले से बहुत अच्छा रहा है। वे लंबे समय के बाद शतक जड़ने में सफल हुए। वहीं, केएल राहुल की बात करें तो उन्होंने अपना दूसरा अर्धशतक इस दौरे पर जड़ा है। वे भारत के एकमात्र बल्लेबाज हैं, जो इस दौरे पर दो अर्धशतक लगाने में सफल हुए हैं। एक-एक शतक यशस्वी जायसवाल और विराट कोहली ने जड़ा है। रविंद्र जड़ा गाबा में अर्धशतक पूरा कर चुके हैं।

गाबा में जारी तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन भी बारिश की आंख मिचौली जारी रही, अब मैच का नतीजा होगा ड्रॉ!

नई दिल्ली ब्रिसबेन के गाबा में जारी बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन भी बारिश की आंख मिचौली जारी रही। बारिश और खराब रोशनी के कारण खेल को जल्दी रोकना पड़ा। इंडिया वर्सेस ऑस्ट्रेलिया गाबा टेस्ट मैच के पहले दिन कुछ ही ओवर हुए थे, लेकिन दूसरे दिन पूरा खेल हुआ। वहीं, तीसरे और चौथे दिन बारिश ने जमकर खेल खराब किया। ऐसे में अब इस टेस्ट मैच का नतीजा हार-जीत में निकले की संभावना ना के बराबर है, क्योंकि भारत ने फॉलोऑन टाल दिया है। भारत का आखिरी विकेट पहली पारी का बाकी है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को बल्लेबाजी करके टारगेट सेट करना होगा और उसे भारत को हासिल करना होगा या ऑस्ट्रेलिया को फिर से इंडिया को आउट करना होगा। ये एक लंबा प्रोसेस है, जिसके लिए वक्त बाकी नहीं है। पांचवें दिन का फोरकास्ट भी अच्छा नहीं है। ब्रिसबेन टेस्ट मैच के चौथे दिन बारिश ने जमकर खेल खराब किया। आखिर में रोशनी के कारण मैच जल्दी खत्म करना पड़ा। तीसरे दिन का खेल 20 मिनट के बाद शुरू हो गया। इस दौरान टी ब्रेक ले लिया गया। इंडिया वर्सेस ऑस्ट्रेलिया चौथे टेस्ट मैच के चौथे दिन चौथी बार बारिश ने खेल में खलल डाला। टी ब्रेक ले लिया गया है। जैसे ही बारिश बंद होगी, मैदान साफ होगा तो मैच शुरू हो जाएगा। गाबा टेस्ट फिर से शुरू हो गया है। दूसरे सेशन में एक घंटे का खेल होगा। ब्रिसबेन में बारिश बंद हो गई है। पिच और मैदान से कवर हटाए जा रहे हैं। मैच 11 बजे शुरू हो जाएगा। गाबा में दूसरे सेशन में भयंकर बारिश हो रही है। चौथे दिन भी बारिश की लुका-छिपी देखने को मिल रही है। तीन बार खेल को रोका जा चुका है। दूसरे सेशन में सिर्फ 17 गेंदों का खेल हुआ और फिर से बारिश ने मैच में खलल डाल दिया।

ब्रिसबेन के गाबा में भारतीय टीम के नजरिए से अच्छी बात ये रही कि रोहित एंड कंपनी ने फॉलोऑन का खतरा टाल दिया

नई दिल्ली ब्रिसबेन के गाबा में इंडिया वर्सेस ऑस्ट्रेलिया तीसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा है। इस मैच का आज यानी मंगलवार 17 दिसंबर को चौथा दिन था। बारिश और खराब रोशनी के कारण आज भी खेल में कई बार बाधा आई, लेकिन भारतीय टीम के नजरिए से अच्छी बात ये रही कि रोहित एंड कंपनी ने फॉलोऑन का खतरा टाल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में ट्रैविस हेड और स्टीव स्मिथ के शतकों की बदौलत 445 रन बनाए थे। इसके जवाब में भारत ने चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक 252 रन 9 विकेट खोकर बना लिए हैं। भारत अभी भी मैच में 193 रन पीछे है, लेकिन मैच को ड्रॉ कराने में अब आसानी होगी। जसप्रीत बुमराह और आकाश दीप ने आखिरी विकेट के लिए 33 रन जोड़े और फॉलोऑन का खतरा टाला। इसके बाद आकाश दीप ने दनदनाता छक्का भी पैट कमिंस को जड़ा। जसप्रीत बुमराह 10 और आकाश दीप 27 रन बनाकर नाबाद हैं। केएल राहुल और रविंद्र जडेजा ने दमदार अर्धशतकों के दम पर इस मैच में भारत फॉलोऑन बचाने में सफल रहा। चौथे दिन का खेल समाप्त इंडिया ने फॉलोऑन टाल दिया। हालांकि, इसके बाद काले बादल मैदान पर छा गए और ऐसे में खराब रोशनी के कारण मैच को रोकना पड़ा और चौथे दिन के खेल समाप्ति की घोषणा हो गई। भारत का स्कोर 252/9 है। रोमांचक दौर में मैच भारत को 5 रन अभी भी फॉलोऑन टालने के लिए चाहिए। आखिरी जोड़ी क्रीज पर है। क्या टल पाएगा फॉलोऑन? फॉलोऑन टालने के करीब भारत पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी 14 रन पीछे है। स्कोर भारत का 230 के पार पहुंच गया है। जडेजा भी हुए आउट रविंद्र जडेजा 77 रनों की पारी खेलकर आउट हो गए। अब भारत को फॉलोऑन लेना ही पड़ेगा। भारत की आखिरी जोड़ी मैदान पर है। सिराज बने स्टार्क का शिकार मोहम्मद सिराज को मिचेल स्टार्क ने आउट किया। वे एक रन बना सके। अभी भी भारत को 40 रनों से ज्यादा की दरकार फॉलोऑन के लिए है। तीसरे सेशन का खेल शुरू बारिश के बाद टी ब्रेक लिया गया और इस दौरान बारिश भी रुक गई। ऐसे में तीसरे सेशन का खेल शुरू हो गया है।

तीसरी लाइन के चलते बदलाव, बिलासपुर की जगह अब उसलापुर से छूटेंगी नर्मदा और रीवा व भोपाल एक्सप्रेस

बिलासपुर। बहुत जल्द यात्रियों को बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, बिलासपुर-भोपाल एक्सप्रेस समेत कटनी रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रा करने उसलापुर स्टेशन जाना पड़ेगा। रेल प्रशासन इसका प्रपोजल भी तैयार कर रहा है। हालांकि, रेलवे की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है। मगर, बिलासपुर रेल मंडल में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उसलापुर शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन को विकसित भी किया जा रहा है। आधे से ज्यादा कार्य हो चुके हैं। बचे कार्य जल्द पूरा हो जाएंगे। वहीं, बिलासपुर स्टेशन का भी कायाकल्प हो रहा है। 435 करोड़ खर्च कर रेलवे इस स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत जोनल स्टेशन का नया मॉडल भी बना लिया गया है। इस मॉडल पर गौर करें, तो पुरानी बिल्डिंग के सामने एक नई लाइन बिछाई जाएगी। यह पुरानी लाइन से जुड़ेगी। लाइन विस्तार के लिए ट्रेनों की आवाजाही रोकना जरूरी लाइन विस्तार तभी संभव है, जब पुरानी लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन बंद रहे। रेलवे इसकी तैयारी भी कर रही है। जोनल स्टेशन में तीन प्लेटफार्म छह, सात और आठ ऐसे हैं, जहां कटनी रेलखंड की ट्रेनें छूटती हैं। इन ट्रेनों में नर्मदा, रीवा, भोपाल एक्सप्रेस के अलावा बिलासपुर-शहडोल, बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों का परिचालन उसलापुर स्टेशन में शिफ्ट किए बिना लाइन विस्तार का कार्य संभव नहीं है। इसलिए रेलवे इस पर जोर दे रही है। बमुश्किल तीन से चार महीने में इस स्टेशन से इन ट्रेनों का परिचालन की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि जब तक अधिक से अधिक ट्रेनों का स्टापेज या परिचालन प्रारंभ नहीं होगा, उस स्टेशन का कद नहीं बढ़ेगा। इसी के तहत पिछले साल रायपुर से आने वाली ट्रेनों का स्टापेज उसलापुर किया गया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन सीधे दाधापारा से उसलापुर पहुंचती हैं। इससे इंजन बदलने का झंझट भी खत्म हुआ है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर दवाब होगा कम बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों की ठहराव की वजह से कहीं न कहीं जोनल स्टेशन में ट्रेनों का दबाव रहता है। इसी दबाव के चलते ट्रेनों को आउटर पर भी रोकना पड़ता है। कई बार मेल, आजाद हिंद एक्सप्रेस को दाधापारा रेलवे यार्ड में रोका गया है। हालांकि, यह स्थिति केवल जोनल स्टेशन में प्लेटफार्म पर जगह नहीं होने के कारण होती है। यदि कटनी रेलमार्ग की इन ट्रेनों को उसलापुर स्टेशन से रवाना किया जाता है और वापसी में इसी स्टेशन में परिचालन समाप्त किया जाता है, तो जोनल स्टेशन में काफी हद तक दबाव कम होगा। उसलापुर में अभी हो रहा है 17 ट्रेनों का ठहराव उसलापुर रेलवे स्टेशन में अभी 17 ट्रेनों का ठहराव है। इनमें आठ नियमित ट्रेनें हैं। अन्य ट्रेनें साप्ताहिक हैं। इन ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे यात्री भी बढ़ जाएंगे। इसे देखते हुए ही रेल प्रशासन सुविधाओं में विस्तार कर रहा है।

ब्रिसबेन टेस्ट: ऑस्ट्रेलिया को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा, जोश हेजलवुड हुए मैच के साथ-साथ सीरीज से बाहर

नई दिल्ली ब्रिसबेन के गाबा में इंडिया के खिलाफ जारी तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन के खेल से पहले ऑस्ट्रेलिया को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। उनकी टीम के प्रमुख गेंदबाज जोश हेजलवुड चोटिल हो गए। हालांकि, वे दिन के खेल के पहले घंटे में मैदान पर नजर आए और एक ओवर गेंदबाजी की, लेकिन फिर उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया और जोश हेजलवुड को स्कैन्स के लिए हॉस्पिटल भी ले जाना पड़ा। इसके बाद जो रिपोर्ट सामने आईं, उनसे साफ हो गया है कि जोश हेजलवुड को काफ स्ट्रेन है। वे इस मैच के साथ-साथ इस सीरीज से बाहर हो गए हैं। इस बात की जानकारी खुद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने दी है। अब जोश हेजलवुड ब्रिसबेन टेस्ट मैच में आगे गेंदबाजी नहीं कर पाएंगे और सीरीज के बाकी मैचों में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे। ऐसे में उनकी जगह इस सीरीज में स्कॉट बोलैंड खेलेंगे। उनको गंभीर चोट लगी है। इस चोट से उबरने के लिए उनको वक्त लगेगा। ऐसे में वे सीरीज के बाकी दो मैचों के लिए भी उपलब्ध नहीं होंगे। स्कैन्स के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने जोश हेजलवुड को लेकर जो अपडेट दिया है, उसमें बताया है, “जोश हेजलवुड की पिंडली (काफ) में खिंचाव आ गया है और वह टेस्ट सीरीज के शेष मैचों से बाहर हो सकते हैं।” जोश हेजलवुड इस मैच में 6 ओवर गेंदबाजी कर चुके हैं और एक विकेट अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने विराट कोहली को विकेट के पीछे एलेक्स कैरी के हाथों कैच आउट कराया था। हेजलवुड को चौथे दिन के खेल से पहले वॉर्मअप मैच के दौरान उनको चोट लगी थी। उन्होंने गेंदबाजी करने की कोशिश की, लेकिन एक ही ओवर फेंकने के बाद वे बाहर चले गए। बता दें कि चोट के कारण जोश हेजलवुड एडिलेड में खेले गए पिंक बॉल टेस्ट मैच का हिस्सा नहीं थे। उनकी जगह स्कॉट बोलैंड को मौका दिया गया था। उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की। बावजूद इसके जोश हेजलवुड ने वापसी की और अब वे चोटिल हो गए हैं। उन्होंने पर्थ टेस्ट मैच में ठीक ठाक गेंदबाजी की थी। जोश हेजलवुड अगर उपलब्ध नहीं होते हैं तो पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क पर ज्यादा गेंदबाजी करने का दबाव होगा और इसके अलावा नाथन लियोन और मिचेल मार्श को भी गेंदबाजी करनी होगी। मार्श ने एडिलेड और ब्रिसबेन में ज्यादा गेंदबाजी नहीं की है।

देश का सबसे स्वच्छ शहर नए साल में बनेगा भिक्षावृत्ति से मुक्त, इंदौर में भीख देने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

इंदौर। इंदौर को भिखारी मुक्त शहर बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फरवरी से शुरू हुए अभियान के पहले चरण में अगस्त तक भिक्षावृत्ति करने वालों और उनके परिजनों को भीख नहीं मांगने को लेकर समझाई दी गई। सितंबर से दिसंबर तक भिक्षुकों का रेस्क्यू किया जा रहा है। अब नए साल से इंदौर में भीख मांगने और भीख देने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। स्वच्छ शहर इंदौर को भिक्षुक मुक्त शहर बनाने के लिए जारी अभियान में एक जनवरी से तीसरा चरण शुरू किया जाएगा। इसमें भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहित कर भीख देने वालों पर कार्रवाई शुरू होगी। अब तक 300 से अधिक को उज्जैन सेवाधाम आश्रम भेजा कलेक्टर आशीष सिंह ने भिक्षा देने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के आदेश पूर्व में जारी किए जा चुके है। तीन चरणों में शुरू हुए अभियान का दूसरा चरण रेस्क्यू किया जा रहा है। इसमें अब तक तीन सौ से अधिक बुजुर्गों और व्यस्कों का रेस्क्यू कर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा जा चुका है। वहीं 34 बाल भिक्षुकों को रेस्क्यू भी किया गया है। कलेक्टर ने अब तीसरे चरण का अभियान शुरू करने के निर्देश दिए है।

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