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चालू पावर ट्रांसफार्मर से कॉपर स्ट्रिप चोरी किये जाने के प्रयास को आउटसोर्स कर्मियों ने किया नाकाम

भोपाल एम.पी. ट्रांसको (मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) के विदिशा जिले में स्थित 132 के.व्ही. सबस्टेशन शमशाबाद के चालू पावर ट्रांसफामर्स से तांबे की अर्थिंग पट्टी (कॉपर स्ट्रिप) को निकालने के प्रयास को सबस्टेशन के आउटसोर्स ऑपरेटर धीरेन्द्र राठौर, निरंजन विश्वकर्मा एवं सुरक्षा सैनिक दीपक पॉल ने अपनी हिम्मत, सूझबूझ और कर्तव्य निष्ठा का अनूठा उदाहरण पेश करते हुये असफल कर दिया। जिससे रबी के इस सीजन में शमशाबाद, बैरसिया, सिरोंद क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति के लंबे समय तक प्रभावित होने की आंशका को टाला जा सका। यह भूमिका है कॉपर स्ट्रिप की लगभग 4-5 करोड़ रूपये कीमत के पावर ट्रांसफार्मर में तांबे के पट्टी (कॉपर स्ट्रिप) की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, यह सबस्टेशन में किसी फाल्ट के कारण उत्पन्न होने वाले हजारों एम्पीयर के करेंट को यह संवेदनशील कॉपर स्ट्रिप अपने में से प्रवाहित कर अर्थ कर देती है। इसके कारण उपकरण और सबस्टेशन में कार्यरत कर्मी सुरक्षित रहते है। यदि चालू ट्रांसफार्मर से कॉपर स्ट्रिप अलग करने का प्रयास किया जाता है तो वह न केवल निकालने वाले के लिये घातक रहती है बल्कि इससे ट्रांसफार्मर के क्षतिग्रस्त होने के पूरी आशंका पैदा हो जाती है। यदि चोर अपने मकसद में सफल हो जाते तो जहां मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को 4-5 करोड़ रूपये का आर्थिक क्षति पहुंचती। वहीं क्षेत्र में ऐन वक्त रबी के सीजन में किसानों और विद्युत उपभोक्ताओं को हफ्तों बिजली आपूर्ति प्रभावित हो जाती। कर्मियों को किया गया पुरस्कृत सबस्टेशन के इन आउटसोर्स कर्मियों द्वारा दिखाये गयी सूझबूझ और बहादुरी के लिये अधीक्षण अभियंता श्री एम.पी. पटेल ने इन्हें सम्मानित कर पुरूस्कृत किया।  

धर्मशाला के पास दिखने से फैली दहशत, राजस्थान-अलवर में पैंथर को वन विभाग ने किया ट्रैंकुलाइज

अलवर। अलवर शहर के बीचों-बीच स्थित सुगना बाई धर्मशाला के पास मंगलवार सुबह पैंथर दिखने से स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। जैसे ही पैंथर होने की जानकारी फैली, बस्ती के लोग डर के मारे इधर-उधर दौड़ने लगे। वहीं, केडलगंज बाजार के दुकानदार सतर्क हो गए। पैंथर की सूचना पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और उसे उसे ट्रैंकुलाइज करने की तैयारी शुरू की। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने की सलाह दी है। करीब तीन घंटे बाद वन विभाग की टीम ने पैंथर को ट्रैंकुलाइज किया। इधर, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पैंथर राजऋषि कॉलेज के परिसर में घूम रहे पैंथर हो सकता है। हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हो सकती है। सरिस्का के रेंजर शंकर सिंह ने बताया कि सुगना बाई धर्मशाला के पास पैंथर दिखना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पैंथर देखा गया था। कैमरा ट्रैप और तलाशी अभियान जारी वन विभाग की टीम ने बगीची के आसपास पैंथर की तलाश शुरू कर दी है और कैमरा ट्रैप लगाने की योजना बनाई है। अधिकारी बताते हैं कि सरिस्का के बफर जोन से पैंथर आबादी की ओर आ रहे हैं। बफर जोन में बाघों के बढ़ते दबदबे के कारण पैंथर शहर की ओर पलायन कर रहे हैं। राजऋषि कॉलेज में पैंथर अभी भी पकड़ से बाहर वन विभाग अभी तक राजऋषि कॉलेज परिसर में मौजूद पैंथर को पकड़ने में सफल नहीं हो पाया है। इसी बीच, सुगना बाई धर्मशाला के पास एक और पैंथर की मौजूदगी ने अधिकारियों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टीम पूरी कोशिश कर रही है कि पैंथर को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और उसे वापस जंगल में छोड़ा जाए। वहीं, स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

दिल्ली पुलिस को गुप्त सूचना मिली, अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर की कार्रवाई, पकड़े गए मां-बेटे

नई दिल्ली दक्षिण पश्चिम दिल्ली की पुलिस टीम ने अवैध रूप से रह रहे दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान नईम खान और उसकी मां नजमा खान के रूप में हुई है। नईम खान (22 वर्ष) बांग्लादेश के खुलना जिले के ग्राम सुंदर गुना का निवासी है। नईम ने 2020 में पश्चिम बंगाल की सीमा के माध्यम से भारत में प्रवेश किया था। मां-बेटा कटवारिया सराय में रहते हैं। पुलिस टीम को 29 दिसंबर 2024 को गुप्त सूचना मिली कि एक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक दिल्ली के पिप्पल चौक स्थित शास्त्री मार्केट में मौजूद है। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नईम खान को गिरफ्तार किया और वेरिफाई किया तो बांग्लादेशी होने का पता चला। नईम ने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जिसके कारण वह स्कूल नहीं जा सका और भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया। मां नजमा भी लगभग 20 साल पहले बेनापोल सीमा से भारत आई थी और कटवारिया सराय में घरेलू काम करती थीं। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर एफआरआरओ के माध्यम से बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया। पुलिस ने कहा कि वे अन्य अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए प्रयास तेज करेंगे। यह कार्रवाई दक्षिण पश्चिम जिला पुलिस द्वारा दिल्ली में अवैध प्रवासियों की पहचान और उनका निष्कासन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का हिस्सा है। इससे पहले दिल्ली में पकड़े गए 12 अवैध रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर साउथ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी रवि कुमार सिंह ने बताया कि सभी को डिटेंशन कैंप भेजा जाएगा। अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को लेकर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। डीसीपी रवि कुमार ने बताया था, “इस साल अभी तक 12 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया है। इस पर अलग-अलग थानों सरिता विहार और कालिंदी कुंज की टीम ने मिलकर काम किया है। भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस टीम इनको लगातार तलाश कर रही है।”  

कलेक्टर बोलीं- ट्रेस नहीं हो रहा बोरवेल, राजस्थान-जयपुर में गलत दिशा में खोद दी सुरंग

जयपुर। राजस्थान के कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में तीन साल की चेतना 9वें दिन भी फंसी हुई है। चेतना को रेस्क्यू करने के लिए खोदे गए 170 फीट गड्ढे में उतरकर एनडीआरएफ के जवान सुरंग खोद रहे थे। लेकिन, अब इसमें बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई। 10 फीट लंबी सुरंग की खोदाई पूरी हो चुकी है, लेकिन उसकी दिशा ही गलत निकली। सुरंग बोरवेल तक नहीं पहुंची है। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने कहा कि सुरंग के जरिए अब तक बोरवेल को ट्रेस नहीं किया जा सका है। हमारी कोशिश लगातार जारी है, रेस्क्यू अभियान में जुटी टीमों ने हिम्मत नहीं हारी है। बता दें कि आज मंगलवार को रेस्क्यू अभियान को 9वां दिन है, लेकिन चेतना को बाहर नहीं निकाला जा सका है। भूखी-प्यासी मासूम बच्ची की हालत कैसी है, इसका भी कुछ पता नहीं चल पा रहा है। कई दिन से वह मूवमेंट नहीं कर रही है। चेतना 120 फीट की गहराई पर एक हुक से लटकी हुई है। 30 दिसंबर को  प्रशासन और एनडीआरएफ ने दावा किया था कि बच्ची को सोमवार को बाहर निकाल लिया जाएगा। दावे के बाद से बच्ची की मां और परिजन उसके बाहर आने का बेसब्री से इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। वहीं, अब गलत दिशा में हुई सुरंग की खोदाई के कारण यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर चेतना को कब बाहर निकाला जा सकेगा। परिवार का आरोप, परिजनों से मिलीं कलेक्टर उधर, बच्ची को निकालने में हो रही देरी के कारण परिवार और ग्रामीण प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर, समय पर सही कदम उठाए गए होते तो चेतना को पहले ही बाहर निकाल लिया गया होता। हालांकि, प्रशासन किसी तरह की लापरवाही से इनकार कर रहा है। परिजनों की नाराजगी सामने आने के बाद सोमवार देर शाम कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने परिजनों से दोबारा मुलाकात की और उन्हें रेस्क्यू अभियान में आ रही परेशानियों के बारे में बताया। कलेक्टर का कहना है कि हम हर स्तर पर बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन यह रेस्क्यू अभियान काफी मुश्किल है। इसलिए इसे पूरा करने में समय लग रहा है। बता दें कि कलेक्टर कल्पना अग्रवाल इसे राजस्थान का सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन बता चुकी हैं।  अंदर सांस लेने में हो रही परेशानी मासूम चेतना तक पहुंचने के लिए एनडीआरएफ के 6 जवानों की तीन टीमें बनाई गई हैं। एक बार में दो जवान को 170 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर बोरवेल तक सीधी सुरंग खोद रहे हैं। दो जवानों की एक टीम करीब 20-25 मिनट अंदर रहकर खोदाई कर रही है, फिर उन्हें बाहर निकालकर दूसरी टीम को नीचे भेजा जा रहा है। इसी तरह सुरंग बनाने का सिलसिला जारी है। जवानों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है, लेकिन अधिक गहराई में होने के कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। नौ दिन से चेतना को निकालने के प्रयास जारी     तीन साल की चेतना 23 दिसंबर (सोमवार) की दोपहर दो बजे खेलते समय 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। चेतना करीब 150 फीट की गहराई में फंस गई थी, देसी जुगाड़ से उसे तीस फीट ऊपर खींच लिया गया। अब वह 120 फीट पर एक हुक से लटकी हुई है। 23 दिसंबर से चेतना को खाना पानी कुछ भी नहीं मिला है। 24 दिसंबर की शाम से वह कोई मूवमेंट भी नहीं कर रही है। उसकी हालत को लेकर अधिकारी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा- वर्ष 2024 किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने वाला रहा

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2024 विकसित भारत के विराट संकल्प की सिद्धि का आधार बना है। किसानों की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 विकसित भारत के विराट संकल्पों की सिद्धि का आधार बना है। इस दौरान कृषि क्षेत्र में भी हमने अभूतपूर्व उपलब्धियां अर्जित की हैं। प्रधानमंत्री द्वारा प्रत्येक कैबिनेट में कृषि और किसान से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सौगात दी गईं। इस दौरान किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए।” केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने आगे कहा किसान की सेवा मोदी सरकार के लिए भगवान की पूजा है। प्रधानमंत्री ने अपने तीसरे कार्यकाल का शुभारंभ ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ राशि जारी करने के साथ किया और 9.26 करोड़ किसानों को 20 हजार करोड़ सीधे भेजे। साथ ही फसलों की जलवायु अनुकूल 109 किस्में किसानों को समर्पित की और खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए 14 खरीफ फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ोतरी का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होने कहा, “किसान कल्याण के प्रति संवेदनशील मोदी सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क को शून्य प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया। बासमती चावल से न्यूनतम निर्यात शुल्क हटाने का निर्णय लिया और गैर बासमती चावल से निर्यात पर प्रतिबंध हटाया। साथ ही प्याज के निर्यात शुल्क को 40 प्रतिशत से 20 प्रतिशत किया। इस दौरान हमने 100 दिन सैचुरेशन अभियान चलाकर 25 लाख नए किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जोड़ा। साथ ही केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन, कृषोन्नति योजना, डिजिटल कृषि मिशन और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को मंजूरी दी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” चौहान ने आगे कहा, “किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमने 6 सूत्रीय रणनीति बनाई और निरंतर प्रयास किया कि किसान समृद्ध हों। केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों के परिणामस्वरूप इस वर्ष कृषि वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रही, जिसके अगले साल बढ़कर चार प्रतिशत होने का अनुमान है। विकसित भारत के लिए विकसित कृषि आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते एक वर्ष में इस हेतु हमने अनेक निर्णय किए हैं। आने वाले वर्ष में दोगुनी ऊर्जा और उत्साह के साथ किसानों के जीवन को खुशहाल बनाने में जुटेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 ग्रामीण भारत के विकास के उन संकल्पों का साक्षी बन रहा है, जो विकसित और आत्मनिर्भर भारत की नींव हैं। इस वर्ष दुनिया ने हमारी नमो ड्रोन दीदियों की उड़ान देखी तो साथ ही सशक्तिकरण का पर्याय बनीं लखपति दीदियों के सामर्थ्य से भी परिचित हुई। ग्रामीण इलाकों में बनाए जा रहे आवास को लेकर केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा, “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से 3 करोड़ नागरिकों का अपने पक्के घर का सपना सच हुआ तो वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांव का खुशियों से नाता जुड़ा। मनरेगा ने संबल दिया तो आजीविका मिशन से बहनों को समृद्धि मिली। बीते एक वर्ष में संपूर्ण देश ग्रामीण भारत के विकास की अभूतपूर्व यात्रा का साक्षी बना है। निश्चय ही आने वाला वर्ष भी नई उपलब्धियों से भरा होगा और हम दृढ़ संकल्प के साथ ग्रामीण विकास हेतु समर्पित रहेंगे।”  

छत्तीसगढ़ सरकार 2026 तक नक्सलियों के सफाये के लक्ष्य पर खरी उतरती नजर आ रही, अब तक 237 नक्सलियों को ढेर किया

जगदलपुर  छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में 2024 में अब तक 237 नक्सली ढेर किए जा चुके है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद जवानों का हौंसला बढ़ा हुआ है। बस्तर में नक्सलियों के लिए कोई रास्ता नहीं बच गया है। नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें क्योंकि आने वाले दिनों में अभियान और भी तेज किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बस्तर में अब तक 237 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है जिनमें से 217 के शव पुलिस को मिले हैं। अन्य 20 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि नक्सली स्वयं कर चुके हैं। इस अवधि में 925 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है तो 792 नक्सली अपने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौट आए हैं। इन मुठभेड़ में पुलिस को नक्सलियों के 284 हथियार पुलिस को मिले हैं जिसमें इंसास, एके-47 राइफल समेत कई बड़े हथियार हैं। इनमें से कई हथियार नक्सलियों ने पुलिस से लूटे थे। जानिए कितने नक्सली एक साल में ढेर इन मुठभेड़ में पुलिस को नक्सलियों के 284 हथियार पुलिस को मिले हैं, जिसमें इंसास, एके-47 राइफल समेत कई बड़े हथियार हैं। इनमें से कई हथियार नक्सलियों ने पुलिस से लूटे थे। इस वर्ष सुरक्षा बल ने सीधे नक्सलियों को निशाना बनाकर अभियान चलाया। बीते चार दशक में एक वर्ष के भीतर सर्वाधिक 124 बार पुलिस व नक्सलियों के बीच आमना-सामना हुआ। इन मुठभेड़ों में नौ करोड़ 24 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सलियों को ढेर किया गया है। इनमें 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली रणधीर, नीति, रुपेश उर्फ कोलू जोगन्ना शामिल थे। 28 नए कैंप सीधे नक्सलियों के गढ़ में प्रदेश में इस वर्ष 28 नवीन सुरक्षा कैंप सीधे नक्सलियों के गढ़ में खोले गए हैं। विगत माहभर में ही लगभग दस नए कैंप नक्सलियों के आधार क्षेत्र तेलंगाना राज्य सीमा से सटे दक्षिण व पश्चिम बस्तर क्षेत्र में खोले गए हैं। इसी तरह अबूझमाड़ में भी सुरक्षा कैंपों की दीवार खड़ी कर दी गई है। आईजीपी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस वर्ष मिली सफलता के बाद जवानों का हौसला बढ़ा हुआ है। बस्तर में नक्सलियों के लिए कोई रास्ता नहीं बच गया है। नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। अबूझमाड़ में 130 नक्सली हुए ढेर अबूझमाड़ में पिछले एक साल यानि 2024 में सुरक्षाबलों और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 130 नक्सलियों को मार गिराने में सफलता मिली है, वहीं पूवर्ती गांव जो नक्सली कमांडर हिडमा का गांव था वहां भी पुलिस ने कैंप खोला है, अबूझमाड़ इलाके में कुल सात नए पुलिस कैंप खोले गए हैं, जहां पहले पगडंडियों के सहारे जाना मुश्किल होता था वहां पर अब चार पहिया गाड़ियां दौड़ती नजर आ रही है, नियद नेल्लानार योजना के तहत गांवों में विकास के कार्य कर दशकों से मूलभूत सुविधाओं से नक्सली दहशत के चलते महरूम रहने वाले ग्रामीणों के लिए सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से होने लगा है. वहीं सरकार की सरेंडर नीति से प्रभावित होकर पिछले पांच साल में जितने नक्सलियों ने सरेंडर किया था, उतने नक्सली एक साल में सरेंडर कर समाज की मुख्यधारा में वापस लौट आए है. जो अबूझमाड़ में सफलता की कहानी कहता नजर आता है. अबूझमाड़ में बनी पक्की सड़कें 2024 की शुरुआत में अबूझमाड़ से नारायणपुर जिला मुख्यालय तक जाने के लिए सड़क मार्ग सोनपुर, कोहकामेटा और आंकाबेड़ा तक ही सीमित था, लेकिन 2024 में नक्सलियों के खिलाफ शुरु हुए अभियान के बाद यहां की स्थिति बदली है. नक्सलियों के खिलाफ प्रहार की रणनीति में बदलाव आने के साथ ही नक्सलियों के आधार इलाके में पुलिस बेस कैंप स्थापित करने के साथ ही सड़को का निर्माण कार्य भी तेजी से होने लगा. एक साल के अंदर अबूझमाड़ के घोर नक्सल प्रभावित घने जंगलों से घिरे कस्तूरमेटा, मोहंदी, इरकभट्टी, कच्चापाल, मसपूर, होरादी और गारपा तक पुलिस ने पहुंच कर पुलिस कैंप खोलने के साथ ही इन इलाकों तक सड़को का निर्माण कार्य नियद नेल्लानार योजना के तहत तेजी से कराया जहां चार दशकों से लोग नक्सलियों के दहशत के साए में जीवन जीने को मजबूर हुआ करते थे, वहां पुलिस ने उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की आजादी दिलाई है. 2025 में 6 नए थाने बनाने की योजना 2025 के साल में नारायणपुर पुलिस अबूझमाड़ में 6 नए थाने का विस्तार करने वाली हैं, जिसमे गारपा और कस्तूरमेटा में पुलिस ने अपने कैंप स्थापित कर दिए है, जिन्हें थाने का दर्जा मिलेगा वहीं फारसबेडा, तोके, कुतुल और गोमागल में थाना खोलना है जो बताता है कि अब नारायणपुर पुलिस नक्सलियों के कोर इलाके में घुसने की 2025 में योजना बना चुकी है. आने वाला साल अबूझमाड़ में एक नया इतिहास फिर लिखता नजर आएगा. क्योंकि 2024 में अबूझमाड़ में नक्सलियों के खिलाफ बड़े आपरेशन करने की रणनीति में बदलाव करते हुए नारायणपुर पुलिस ने अबूझमाड़ से लगे कोंडागांव, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिले की पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों के आधार इलाके में आपरेशन लांच किया है. पुलिस की रणनीति में आए बदलाव का एक बड़ा असर नक्सलियों के कोर इलाके अबूझमाड़ में देखने को मिला. 2024  में नारायणपुर पुलिस अन्य जिलों के साथ मिलकर 130 नक्सलियों को अबूझमाड़ में मार गिराने में सफलता हासिल किया. 130 नक्सलियों को उन इलाको में जाकर पुलिस के जवानों ने मारा जहां कभी फोर्स नहीं पहुंच पाई थी और उन इलाकों को नक्सलियों ने अपना ठिकाना बना दिया लिया था, लेकिन अब यहां से नक्सलियों ने अपना ठिकाना बदला है. नक्सलियों के गढ़ से नाम से जाने जाने वाले अबूझमाड़ और वहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए 2024 का साल बड़े बदलाव लेकर आया जहा लोगों को नक्सलियों के दहशत और भय के साए में जीवन जीने से आजादी मिली, वही इन इलाकों में नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास के रास्ते के निर्माण की नई बयार लिखी गई, अब इन रास्तों से विकास से महरूम रहने वाले ग्रामीणों को दशकों बाद 2025 के नए साल में विकास की किरण की सौगात मिलेगी. यह जानकारी नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की तरफ से मिली है.   

नए साल के मद्देनजर धार्मिक स्थानों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी, प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए

सीकर देश और दुनिया में नए साल का आगाज होने में अब कुछ घंटो का ही समय बचा है। लोग नए साल के स्वागत और जश्न की तैयारियों में जुटे हैं। नए साल के मद्देनजर धार्मिक स्थानों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। राजस्थान में सीकर जिले के खाटूश्यामजी कस्बे की प्रसिद्ध बाबा श्याम की धार्मिक नगरी में आज श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई है। वर्ष 2024 का अंतिम दिन होने के कारण यहां श्रद्धालुओं के आना सिलसिला लगातार जारी है। श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन कर साल 2024 को अलविदा कहते हुए नववर्ष 2025 की मंगल कामनाओं के लिए आशीर्वाद मांग रहे हैं। इस मौके पर पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था की है। इसके साथ ही सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था में भी प्रशासन की ओर से सहयोग किया जा रहा है। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने बाबा के निज मंदिर को भव्य और आकर्षक रूप से सजाया है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की झांकियों के साथ कई धार्मिक झांकियां भी सजाई गई हैं। वही, रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिर को जगमग किया गया है। बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार कोलकाता और दिल्ली से आए सतरंगी फूलों से किया गया है, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। इस बार वीआईपी दर्शन व्यवस्था को बंद कर दिया गया है, जिस वजह से श्रद्धालु कतार में लगकर ही बाबा श्याम के दर्शन कर रहे हैं। बाबा श्याम के दर्शन करने आए एक भक्त ने बताया कि ये कलयुग चल रहा है और ये कलयुग के देवता हैं। पूरे साल भर का हिसाब बाबा के चरणों में रखकर, उनसे नए साल के लिए आशीर्वाद मांगेंगे। बाबा से हम प्रार्थना करेंगे कि हमारा आने वाला नया साल बेहतर हो, इसी उद्देश्य के साथ हम यहां आए हैं। हम हमारा नया साल यहीं मनाएंगे।  

रायपुर में गाड़ी से उतरे यात्री सड़क किनारे बैठे थे तभी तेज रफ्तार ट्रक ने आकर उन्हें कुचल दिया, 2 बच्चों की मौत, 10 घायल

रायपुर सिलतरा इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब तूफान गाड़ी में तकनीकी खराबी के कारण ड्राइवर ने गाड़ी को सड़क किनारे पार्क कर दिया था। गाड़ी से उतरे यात्री सड़क किनारे बैठे थे, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने आकर उन्हें कुचल दिया। गाड़ी में 13 लोग सवार थे, 2 की मौत हादसे में 14 वर्षीय मोनिका और 12 वर्षीय आराध्या की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। गाड़ी में कुल 13 लोग सवार थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया और ट्रक ड्राइवर को हिरासत में लिया। हादसा धरसींवा थाना क्षेत्र में हुआ। धार्मिक यात्रा से लौट रहा था पीड़ित परिवार जानकारी के अनुसार पीड़ित परिवार शीतकालीन छुट्टी में जगन्नाथ पुरी और अमरकंटक की यात्रा से लौट रहा था। सिलतरा चौकी पुलिस मामले की जांच कर रही है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों को दी नव वर्ष की शुभकामना

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कामना की है कि नव वर्ष सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा है कि अच्छा स्वास्थ्य समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से हम ‘स्वस्थ प्रदेश, सशक्त प्रदेश’ के संकल्प को साकार कर सकते हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों के उज्ज्वल, स्वस्थ और सुखमय भविष्य की मंगलकामना की है।  

किसान आंदोलन के दौरान मुरादाबाद से गुजरने वाली 22 ट्रेनों का संचालन बाधित हुआ, 100 ट्रेन प्रभावित

मुरादाबाद पंजाब में जारी किसान आंदोलन का असर मुरादाबाद में भी देखने को मिल रहा है। आंदोलन के कारण यहां से गुजरने वाली 22 ट्रेनों का संचालन बाधित हुआ है। रेलवे के सीनियर डीसीएम मुरादाबाद मंडल के आदित्य गुप्ता ने बताया कि पंजाब में जो किसान आंदोलन हो रहा है, फिरोजपुर और अम्बाला मंडल में चलने वाली कई गाड़ियां में परिवर्तन किया गया है। वर्तमान में मुरादाबाद मंडल की 22 गाड़ियां है जो आंदोलन के चलते प्रभावित हुई हैं। वहीं पांच ऐसी गाड़ियां है जिनकी ट्रिप को रद्द किया गया है। तीन से चार गाड़ियां ऐसी हैं जिन्हें रोक-रोक कर चलाया जा रहा है। वहीं, अलग-अलग दस गाड़ियां हैं जिन्हें अमृतसर और लुधियाना में शॉर्ट टर्मिनेट किया जा रहा है। कुल 22 गाड़ियां है जो प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि किसान आंदोलन पर हर घंटे और हर समय मुख्यालय द्वारा निगरानी की जा रही है। कल की स्थिति का ध्यान रखते हुए यह डाइवर्जन आज के लिए हैं। लगातार जो निगरानी हो रही है उसके आधार पर तय किया जाएगा। इसके लिए राउंड द क्लॉक और जो कमर्शियल मुख्यालय हैं और पांचों मंडलों में अधिकारी की तैनाती की गई है। लगातार सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा रहा है। ताकि जो यात्री ट्रेन में सफर कर रहें हैं उनकी यात्रा को सुरक्षित रखा जा सके। उनको स्टेशनों में पर्याप्त सुविधा मुहैया करवाई जा सके। आदित्य ने बताया कि मुरादाबाद मंडल में 22 ट्रेन जबकि पूरे नॉर्दन रेलवे के हिसाब से 100 ट्रेन प्रभावित हो रही हैं। ज्ञात हो कि पंजाब में किसान आंदोलन का असर सोमवार को भी ट्रेन यातायात पर नजर आया। ट्रेन यातायात प्रभावित होने के चलते रेलवे स्टेशन के पूछताछ काउंटर पर यात्रियों की भीड़ लगी रही। यात्री अपने गंतव्य को जाने के लिए ट्रेनों का घंटों इंतजार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा परेशानी पंजाब की ओर जाने वाले यात्रियों को उठानी पड़ी।  

युद्ध के चलते इजराइल ने हजारों फिलिस्तीनी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया, 16000 भारतीय श्रमिकों का बढ़ेगा योगदान

इजराइल इजराइल और हमास के बीच जारी संघर्ष ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिनमें निर्माण उद्योग भी शामिल है। इस युद्ध के चलते इजराइल ने हजारों फिलिस्तीनी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में भारतीय निर्माण श्रमिकों ने तेजी से इस कमी को भरने में मदद की है। पिछले वर्ष में लगभग 16,000 भारतीय श्रमिकों ने इजराइल के निर्माण स्थलों पर अपनी जगह बनाई है। निर्माण स्थलों पर बदलाव मध्य इजराइल के बीर याकोव में निर्माण स्थलों पर अब हिंदी, हिब्रू और मंदारिन बोलने वाले श्रमिक दिखेंगे, जहां पहले अरबी भाषी फिलिस्तीनी कामगार काम करते थे। इजराइल में भारतीय श्रमिकों के लिए अधिक आय एक प्रमुख आकर्षण है। कई श्रमिक घर पर मिलने वाले वेतन से तीन गुना ज्यादा कमा रहे हैं। 35 वर्षीय राजू निषाद जैसे श्रमिक, जो उत्तर प्रदेश से आए हैं, इजराइल में अपने परिवार के भविष्य के लिए बचत और निवेश करने के इरादे से काम कर रहे हैं। भारत-इजराइल साझेदारी के बीच श्रम नया बाजार दिल्ली स्थित डायनेमिक स्टाफिंग सर्विसेज के अध्यक्ष समीर खोसला ने अक्टूबर 2023 के बाद से 3,500 से अधिक भारतीय श्रमिकों को इजराइल भेजा है। खोसला ने बताया कि इजराइल में कुशल श्रमिकों की भारी मांग है और भारत इसमें सहयोग करने के लिए स्वाभाविक रूप से तैयार है। उनके अनुसार, इजराइल के लिए भारत एक स्वाभाविक विकल्प है क्योंकि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध हैं। बता दें इजराइल सरकार की योजना है कि वह और अधिक भारतीय श्रमिकों को बुलाकर निर्माण उद्योग में स्थिरता लाए। फिलहाल, युद्ध से पहले के निर्माण स्तर तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। युद्ध से पहले लगभग 80,000 फिलिस्तीनी और 26,000 विदेशी निर्माण कार्यों में कार्यरत थे। आज यह संख्या घटकर लगभग 30,000 रह गई है। श्रम बाजार में चुनौतियां और संभावनाएं सेंट्रल बैंक ऑफ इजराइल के अनुसार, निर्माण गतिविधियां युद्ध-पूर्व स्तरों से लगभग 25 प्रतिशत कम हैं। इजराइल की आबादी हर साल दो प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और यह देरी भविष्य में आवास की कमी का कारण बन सकती है। इसलिए भारतीय श्रमिक इजराइल के निर्माण उद्योग में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। वे न केवल अपनी निर्माण विशेषज्ञता लेकर आए हैं, बल्कि अपने घर के स्वाद और संस्कृति को भी साझा कर रहे हैं। इजराइल के निर्माण उद्योग में भारतीय श्रमिकों का योगदान दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी को दर्शाता है। बढ़ती आबादी और युद्ध के प्रभावों के बावजूद इन श्रमिकों की उपस्थिति इजराइल के आर्थिक पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने प्रदेशवासियों को दी नव वर्ष की शुभकामना

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेशवासियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नया वर्ष प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और सफलता लेकर आए। वित्तीय दृष्टिकोण से हम देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि नए वर्ष में हम सभी मिलकर आर्थिक समृद्धि, रोजगार सृजन और समाज में समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर भारत को एक आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।  

जनवरी के मध्य में 100वें प्रक्षेपण मिशन के साथ प्रक्षेपणों की शताब्दी के लिए इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार: सोमनाथ

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग के हिस्से के रूप में पीएसएलवी-सी-60/स्पैडेक्स अंतरिक्षयानों के एक मील के पत्थर मिशन के साथ नए साल की शुरुआत करने के बाद जो भविष्य के अंतर-ग्रहीय मिशनों और पहले मानव अंतरिक्ष यान गगनयान के लिए महत्वपूर्ण था , जनवरी के मध्य में 100वें प्रक्षेपण मिशन के साथ प्रक्षेपणों की शताब्दी के लिए तैयार होकर एक और इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए सफल स्पैडेक्स मिशन और पीएसएलवी चौथे चरण के वाहन पीओईएम-4 के हिस्से के रूप में 24 वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए टीम इसरो को बधाई देते हुए कहा, ‘हमारा अगला मिशन जनवरी के मध्य में जीएसएलवी है जो नए साल 2025 का पहला प्रक्षेपण होगा। उन्होंने कहा कि 2025 में ‘हमारे पास कई मिशन होंगे और सबसे पहले हम जीएसएलवी द्वारा एनवीएस-02 (नाविक समूह का एक उपग्रह) का प्रक्षेपण करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘जब तक हम आपको जीएसएलवी मिशन के बारे में अपडेट नहीं देते, मैं आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं देता हूं।’ उन्होंने कहा कि कल रात का पीएसएलवी-सी60/स्पैडेक्स मिशन इसरो का 99वां मिशन था और जनवरी के मध्य में जीएसएलवी मिशन 100वां प्रक्षेपण होगा जो प्रक्षेपणों की एक शताब्दी को चिह्नित करेगा। श्री सोमनाथ ने स्पैडेक्स मिशन पर कहा कि अंतरिक्ष डॉकिंग अनुसंधान अंतरिक्ष में निर्माण, मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, उपग्रहों के रखरखाव और सेवा में मदद करेगा। उन्होंने कहा ‘यह मुख्य रूप से एक अनुसंधान और विकास डॉकिंग है। यह अंतरिक्ष स्टेशनों को विकसित करने में हमारी मदद करेगा।’ उन्होंने पीएसएलवी-सी60 मिशन के प्रक्षेपण में दो मिनट की देरी पर जो 2158 बजे निर्धारित प्रक्षेपण के बजाय 2200 बजे 15 सेकंड पर प्रथम प्रक्षेपण पैड से उड़ान भरी, कहा ‘यह सुनिश्चित करने के लिए था कि हमारे उपग्रह अन्य उपग्रहों (जो एक ही कक्षा में हैं) के बहुत करीब न आएं। यह कहते हुए कि डॉकिंग एक नियंत्रित तकनीक है श्री सोमनाथ ने कहा ‘हमें इस उपलब्धि पर गर्व है…एक बहुत ही महत्वपूर्ण अनुसंधान।’ उन्होंने कहा ‘यह पहला स्पैडेक्स मिशन है और निकट भविष्य में कई और होंगे।’ श्री सोमनाथ ने दो स्पैडेक्स उपग्रहों के बारे में जिन्हें 55 डिग्री के झुकाव के साथ 475 किमी की सही कक्षा में इंजेक्ट किया गया था और कक्षा को दो बार पीएस4-चरण को स्विच करके नीचे लाया जाएगा , कहा कि डॉकिंग सात जनवरी को पूर्वाह्न या आठ जनवरी को होने का अनुमान है। उन्होंने कहा, ‘नए साल में हमारे पास डॉकिंग के साथ-साथ पीएस4 ऑर्बिटल एक्सपेरीमेंट मॉड्यूल (पीओईएम) पर प्रयोग करने के लिए बहुत काम है।’ इसरो ने कहा कि अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग मिशन भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें चंद्रमा से नमूना वापस लाना, चंद्रमा पर एक भारतीय को उतारना और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) का निर्माण और संचालन शामिल है। इसरो ने कहा कि दो छोटे उपग्रह चेज़र और टारगेट जिनमें से प्रत्येक का वजन 200 किलोग्राम है, स्पैडेक्स के हिस्से के रूप में डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन करेंगे। पहले दो उपग्रहों एसडीएक्स 01 चेज़र और एसडीएक्स 02 टारगेट के बीच लगभग 20 किमी की दूरी बनाई जाएगी। एक दिन के भीतर आवश्यक दूरी प्राप्त होने के बाद सापेक्ष वेग का मुकाबला करने के लिए टारगेट पर प्रणोदन प्रणाली को फायर किया जाएगा – उपग्रह दूर जाना बंद कर देंगे और एक दूसरे से निरंतर दूरी पर रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘अंतिम डॉकिंग पैंतरेबाज़ी सात या आठ जनवरी के आसपास की जाएगी।’ डॉकिंग के लिए चेज़र उपग्रहों के बीच की दूरी को धीरे-धीरे कम करना शुरू कर देगा और अंततः टारगेट उपग्रह से जुड़ जाएगा। एक बार जुड़ जाने के बाद उपग्रह बाद में अलग होने से पहले विद्युत शक्ति भी स्थानांतरित करेंगे और अगले दो वर्षों तक अपने आप काम करना जारी रखेंगे।  

मुख्यमंत्री ने की विक्रमोत्सव-2025 और विक्रम व्यापार मेले के आयोजन की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को उज्जैन में स्मार्ट सिटी कार्यालय के सभा कक्ष में आगामी विक्रमोत्सव-2025 और विक्रम व्यापार मेले के आयोजन की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में विक्रम व्यापार मेले का आयोजन एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सम्राट विक्रमादित्य न्याय, दानशीलता, सुशासन, वीरता की अद्वितीय मिसाल है। वे एक महान शासक थे। उन्होंने न केवल विदेशी आक्रमणकारियों को पराजित कर देश से बाहर किया बल्कि सुशासन के सभी क्षेत्रों में उनका विशेष स्थान रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के साहस, पराक्रम और पुरूषार्थ, उनकी कथाएं, उनके द्वारा प्रारंभ किया गया विक्रम संवत्, उनके महान इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि उज्जैन को मूर्तिशील्प का केन्द्र बनाए जाने के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। मध्यप्रदेश सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के विभिन्न आयामों को देश और विदेश के सामने लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य प्रारंभ किया है। सम्राट विक्रमादित्य के विक्रम संवत् के प्रवर्तन के अवसर पर उज्जैन में आने वाले दिनों में भव्य आयोजन किया जाएगा। विक्रमादित्य की न्याय परंपरा पर विश्वविद्यालय में सेमीनार का आयोजन किया जाएगा। विक्रम व्यापार मेले में सरकार द्वारा निवेशकों को मंच प्रदान किए जाएंगे। प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं इन्हें और अधिक विकसित किया जाएगा। उज्जैन में धार्मिक पर्यटकों की संख्या में अत्यंत वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विक्रम व्यापार मेले के आयोजन और विक्रमोत्सव के आयोजन की समीक्षा की। कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन से गत वर्ष आयोजित विक्रम व्यापार मेले के बारे में मूलभूत जानकारी दी। बताया गया कि इस वर्ष विक्रम व्यापार मेले के आयोजन के लिए शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर का चयन किया जाना प्रस्तावित है। बैठक में विक्रम व्यापार मेले-2025 के लियिे स्थल के प्रस्तावित ले-आउट, प्रस्तावित दुकानों की जानकारी और आयोजन के संबंध में अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि इस बार के व्यापार मेले में ऑटो एक्स-पो और धार्मिक पर्यटन को भी विशेष बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले के आयेाजन का उद्देश्य यह है कि सब लोग आपस में मिलें, एक नए जीवन का संकल्प लें और सभी के जीवन में खुशियाँ आएं।  बैठक में सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, श्री सतीश मालवीय, श्री जितेन्द्र पण्ड्या, एडीजी श्री उमेश जोगा, संभागायुक्त श्री संजय गुप्ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती जयति सिंह, विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक डॉ.श्रीराम तिवारी, डॉ.भगवतीलाल राजपुरोहित, जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुँवर, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो.अर्पण भारद्वाज, नगर निगम आयुक्त श्री आशीष पाठक, श्री बहादुर सिंह बोरमुण्डला, एमपीआईडीसी के श्री राजेश राठौर, श्री विशाल राजोरिया एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।  

प्रदेश में गौ-संरक्षण और संवर्धन के नाम रहा वर्ष 2024, दुग्ध और दुग्ध उत्पादों से किसानों को मिल रहा है अच्छा मुनाफा

भोपाल वर्ष 2024 प्रदेश में गौ-संरक्षण और संवर्धन के नाम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में इस भारतीय वर्ष (चैत्र माह से फाल्गुन माह तक) को गौ-संरक्षण और संवर्धन वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने इस वर्ष पशुपालकों के लिए कई नई योजनाएं लाकर उन्हें आमदनी के नए अवसर भी प्रदान किए। पशुपालकों एवं गौ-संवर्धन के विकास व संरक्षण के लिए वर्ष 2024-25 के लिए 590 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। इस वर्ष मुख्यमंत्री सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के लिए बजट में 150 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। भोपाल के बरखेड़ी-डोब में 10 हजार गौ-वंश क्षमता वाली हाइटेक गौ-शाला बनाई जा रही है, जिसका मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा भूमि-पूजन किया गया। प्रदेश में बड़ी संख्या में गौ-शालाएं बनाई जा रही है और चरनोई की भूमि से अतिक्रमण हटाए जा रहे है। प्रदेश में संचालित 2500 गौ-शालाओं में 4 लाख से अधिक गौ-वंश का पालन किया जा रहा है। सरकार के निरंतर प्रयासों से प्रदेश में कृषि कार्य के साथ ही पशुपालन, किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से भी प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करारनामा हुआ है। किसानों और पशुपालकों को प्रोत्साहन के लिए दुग्ध उत्पादन पर बोनस दिया जायेगा। देशी गाय और अच्छी नस्ल के देशी नंदी के पालन के लिए मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास योजना में भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। किसानों को गौ-पालन और सौर संयंत्रों के प्रयोग पर सरकार प्रोत्साहन दे रही है। दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यहां दुग्ध उत्पादक किसान न केवल बड़ी मात्रा में दूध का उत्पादन कर रहे हैं, अपितु दुग्ध और दुग्ध उत्पादों के विक्रय से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। राष्ट्र का 9% दुग्ध उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 20% तक पहुंचाना। मध्यप्रदेश दुग्ध संघ का सांची ब्रांड वाजिब दामों में उच्च गुणवत्ता युक्त नए-नए दुग्ध एवं अन्य उत्पाद बाजार में ला रहा है, जिससे सदस्य किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है। प्रदेश में कृषि को लाभ का धंधा बनाने में दुग्ध उत्पादन का महत्वपूर्ण स्थान है। पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री लखन पटेल ने बताया कि भारत में दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। प्रदेश में 591 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 644 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 459 ग्राम प्रतिदिन का है। प्रदेश में 7.5% पशुधन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.05 का है। वर्ष-2019 की पशु संगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में गौ-वंश पशु संख्या देश में तीसरे स्थान पर 187.50 लाख है, वही भैंस वंश पशु संख्या चौथे स्थान पर 103.5 लाख है। प्रदेश में पशुओं के उपचार के लिए चलित पशु चिकित्सा वाहन (1962) संचालित है, जो कि स्थान पर जाकर पशुओं का इलाज करते हैं। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। प्रदेश ने 240.47 लाख गौ-वंशी एवं भैंसों के टीकाकरण में भी देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीकी से गायों के नस्ल सुधार कार्यक्रम में प्रदेश में अच्छा कार्य हो रहा है। पशुपालकों से मात्र 100 रुपए के शुल्क पर गायों का नस्ल सुधार किया जाता है। इससे पशुपालकों को अच्छी आय प्राप्त हो रही है। प्रदेश में गौ-वंश के बेहतर आहार के लिये प्रति गौ-वंश मिलने वाली 20 रुपये की राशि बढ़ाकर 40 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। मार्गों पर दुर्घटना में घायल गायों के लिये हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहन की व्यवस्था की गई है। ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना की गई है। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने प्रदेश के हर ब्लॉक में एक गाँव वृंदावन ग्राम बनाया जा रहा है। प्रदेश में मई 2023 से प्रारंभ 406 चलित पशु चिकित्सा इकाइयों द्वारा अब तक 5 लाख 46 हजार से अधिक पशुओं को घर पहुंच चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केन्द्र सरकार के निर्देशन में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा 21वीं पशु संगणना 2024 का कार्य सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में 25 अक्टूबर 2024 से प्रारंभ हो चुका है। राज्य मंत्री श्री पटेल ने बताया कि प्रदेश के 55 जिलों के कुल 55 हजार 902 ग्रामों व 7846 शहरी वार्डों में पशुओं की गणना की जाएगी। प्रदेश में अब तक कुल 7077 ग्राम/शहरी वार्डों में सर्वे कार्य प्रारंभ हो चुका है, शेष ग्रामों /शहरी वार्डों में सर्वे कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। प्रदेश में पशु संगणना में 5558 प्रगणक एवं 970 सुपरवाईजर कार्य कर रहे हैं। वर्ष-2019 की पशुगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशु थे। इसके अनुसार पशुओं की संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है।  

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