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जम्मू-कश्मीर में सीमा पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे 7 पाकिस्तानियों को किया ढेर, कुख्यात BAT के आतंकी भी थे शामिल

नई दिल्ली इंडियन आर्मी ने जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे 7 पाकिस्तानियों को ढेर कर दिया है. इन घुसपैठियों में पाकिस्तान के कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम के आतंकी भी शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने 4-5 फरवरी की रात को नियंत्रण रेखा पर अपनी चौकी पर पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले को नाकाम कर दिया. इस दौरान 7 पाकिस्तानी घुसपैठिए मारे गए. इन घुसपैठियों में 2 से 3 पाकिस्तानी आर्मी के जवान भी शामिल थे. यह घटना जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में हुई. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी घुसपैठिए कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम की मदद से भारत के जवानों पर घात लगाकर हमला करना चाहते थे. बॉर्डर एक्शन टीम LoC पर छिपकर हमला करने के लिए ट्रेंड है. पाकिस्तान की ये एजेंसी पहले भी बॉर्डर पर इंडियन जवानों पर हमला कर चुकी है. इसी अनुभव का फायदा लगाकर ये टीम एक बार फिर से भारत के जवानों को टारगेट करना चाहती थी.  सूत्रों ने बताया कि LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखते ही भारतीय जवानों ने ढेर कर दिया. मारे गए आतंकियों में दहशत संगठन अल-बदर के आतंकी भी शामिल हैं. ये घटना उस रोज हुई जब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने प्रोपगेंडा को हवा देता है और 5 फरवरी को कथित रूप से कश्मीर सॉलिडरिटी डे बनाने का ढोंग करता है. बता दें कि पाकिस्तान के कथित कश्मीर सॉलिडरिटी डे के मौके पर ही 5 फरवरी को लाहौर में आयोजित एक रैली में आतंकी हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद ने भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया. रैली को संबोधित करते हुए तल्हा सईद मिमियाता दिखा. उसने कहा कि वो कश्मीर को आजाद कराएगा. उसने मंच पर खूब नौटंकी की और कश्मीर को लेकर कसमें खाई. तल्हा सईद ने यह भी मांग की कि पाकिस्तानी सरकार अपनी नीति की समीक्षा करे और उसके बाप हाफिज सईद को जेल से रिहा करे.

कुछ लोग शिकायत करते हैं कि मेरा पुलिस से ज्यादा प्रेम है, लेकिन ये सच है कि पुलिस 24 घंटे काम करती है: CM यादव

 भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में IPS मीट का शुभारंभ किया. इस अवसर पर सीएम ने प्रदेश के आला IPS अधिकारियों को संबोधन में कहा कि कुछ लोग शिकायत करते हैं कि मेरा पुलिस से ज्यादा प्रेम है. लेकिन ये सच है कि पुलिस 24 घंटे काम करती है. किसी भी घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया पुलिस को ही देना पड़ती है. परेशानी में पुलिस ही भगवान नजर आती है. पुलिस सबकी आशा का केंद्र बनती जा रही है. जो काम पुलिस के नहीं हैं, उनमें भी पुलिस से मदद की उम्मीद की जाती है. जाति से किसी को अपराधी न समझें CM यादव ने कहा कि कई जातियों को हमने आपराधिक घोषित कर दिया है. लेकिन हमारी ये मानसिकता अंग्रेजों के वजह से हो गई. जबकि ऐसे लोगों का उपयोग सही तरीके से किया जाए तो ये बहुत काम के हो सकते हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि नट जाति के लोगों से पहले गुप्तचर का काम लिया जाता था, अपनी कला-कौशल के बल पर वे बहुत काम आते थे. इसीलिए पुलिस को अपनी मानसिकता में भी परिवर्तन लाना होगा. सबके अधिकारों की रक्षा ही सच्ची पुलिसिंग मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पुलिसिंग की भावना का सही अर्थ समझाने के लिए उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसान अपनी फसल में से कई वर्गों को उपज का हिस्सा देता है, उसी प्रकार पुलिस की भी ये भावना होनी चाहिए. जो हमें मिला, केवल वो हमारा नहीं है. पुलिस को मिला पॉवर सबका पॉवर है. सबके अधिकारों के लिए अपने पॉवर का इस्तेमाल करना ही सच्ची पुलिसिंग है. सीएम यादव ने कहा कि पुलिस के सामने चुनौती होती है कि कानून का पालन कराना है, दक्षता दिखानी है लेकिन ये वसंवेदनशीलता के साथ होना चाहिए. मुझे मध्यप्रदेश पुलिस पर गर्व है जिसने कई मामलों में अपनी अच्छी पोजीशन से बनाई है बम्होरीकला थाना प्रभारी का सम्मान टीकमगढ़ के बम्होरीकला थाने को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ थानों की सूची में सम्मिलित किया और एक्सीलेंस अवॉर्ड से पुरस्कृत किया गया था. इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने टीकमगढ़ एसपी मनोहर सिंह मंडलोई और बम्होरीकला थाना प्रभारी रश्मि जैन को सम्मानित किया. CM ने दिए थानों को पुरस्कृत करने के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अंत में डीजीपी कैलाश मकवाना से कहा कि प्रदेश में भी पुलिस थानों को पुरस्कृत करने की परंपरा शुरू हो. उन्होने कहा कि जिस प्रकार केन्द्रीय गृह मंत्रालय थानों को पुरस्कृत करता है, इसी प्रकार के पैरामीटर पर मध्यप्रदेश में पुलिस थानों को प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पुरस्कृत करने की परंपरा शुरू करें. प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पर थानों को पुरस्कृत किया जाए.  

विराट कोहली के आने के बाद किसका प्लेइंग XI से पत्ता कटेगा, श्रेयस अय्यर या यशस्वी जायसवाल कोन होगा बाहर

नई दिल्ली इंडिया वर्सेस इंग्लैंड 3 मैच की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला रविवार, 9 फरवरी को कटक में खेला जाना है। इस मैच के दौरान भारतीय प्लेइंग XI पर हर किसी की निगाहें रहेगी। दरअसल, विराट कोहली चोट के चलते सीरीज का पहला मुकाबला नहीं खेल पाए थे। मैच से एक दिन पहले उनके घुटने में कुछ दिक्कत हुई जिस वजह से कप्तान रोहित शर्मा को एंड मूमेंट पर प्लेइंग XI में बदलाव करना पड़ा। हालांकि मैच के बाद उप-कप्तान शुभमन गिल ने अच्छी खबर यह दी कि विराट कोहली की चोट को चिंता की कोई बात नहीं है और वह दूसरे वनडे के लिए उपलब्ध रहेंगे। ऐसे में सवाल यह है कि विराट कोहली के आने के बाद किसका प्लेइंग XI से पत्ता कटेगा। नागपुर ODI के दौरान जब पता लगा था कि विराट कोहली नहीं खेल रहे हैं तो हर किसी को लगा था कि यशस्वी जायसवाल को उनकी जगह मौका दिया गया है। मगर श्रेयस अय्यर ने मैच के बाद खुलासा किया कि जायसवाल नहीं वह विराट कोहली के चोटिल होने के बाद प्लेइंग XI में आए हैं।इसका मतलब है कि यशस्वी जायसवाल का पहला वनडे में डेब्यू तय था। मगर श्रेयस अय्यर ने इस मौके को दोनों हाथों से लपका और नंबर-4 पर आकर मैच जिताऊ पारी खेली। अय्यर की बैटिंग उस समय आई जब भारत 19 के स्कोर पर भारत 2 विकेट गंवा चुका था। तब उन्होंने 36 गेंदों पर 9 चौकों और 2 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 59 रनों की तूफानी पारी खेली। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 163.89 का रहा। वहीं दूसरी ओर यशस्वी जायसवाल अपने डेब्यू में ज्यादा इंप्रेस नहीं कर पाए, उन्होंने 22 गेंदों पर मात्र 15 रन बनाए। ऐसे में अब सवाल यह है कि जब विराट कोहली आएंगे तो इन दोनों में से किसका पत्ता कट सकता है। अगर आगामी चैंपियंस ट्रॉफी को ध्यान में रखा जाए तो भारतीय टीम की तैयारियों को देखकर यह समझा जाता है कि वह यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग XI में फिट करना चाहते हैं। ऐसे में शुभमन गिल नंबर-3 या फिर विराट कोहली के आने पर नंबर-4 पर खेल सकते हैं। भारतीय टीम की सोच इस समय बैटिंग ऑर्डर में लेफ्ट एंड राइड कॉम्बिनेशन आजमाने की लग रही है। यही वजह है कि पहले वनडे में नंबर-5 पर केएल राहुल और हार्दिक पांड्या के ऊपर अक्षर पटेल आए थे। ऐसे में नागपुर ODI में परफॉर्म करने के बावजूद दूसरे वनडे में श्रेयस अय्यर का पत्ता कट सकता है। ऐसा नहीं है कि श्रेयस अय्यर ने कुछ गलत किया है, बस टीम कॉम्बिनेशन के हिसाब से वह प्लेइंग XI में फिट नहीं बैठ रहे हैं।

महाकाल मंदिर प्रशासन ने जीरो टालरेंस पॉलिसी की लागू, अवैध वसूली के खिलाफ भक्तों से ले रहा फीडबैक

उज्जैन  जय श्री महाकाल… आपसे भस्म आरती दर्शन के लिए मंदिर में किसी भी व्यक्ति ने निर्धारित शुल्क (200 रुपये) से अधिक रुपये तो नहीं लिए हैं? इस प्रश्न के साथ अब अगर ऐसा कोई फोन कॉल आपके पास आए तो चौंकिएगा नहीं, क्योंकि ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर कार्यालय से भस्म आरती दर्शन करने वाले दर्शनार्थियों से यह फीडबैक लिया जा रहा। दरअसल, मंदिर में दर्शन के नाम पर अवैध वसूली की रोकथाम के लिए यह कदम उठाया गया है। वजह यह है कि ऐसे बहुत सारे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें ज्योतिर्लिंग में दर्शन और भस्म आरती के नाम पर भक्तों से अवैध वसूली की गई। आपको भी आ सकता है फोन अगर आप भी बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए हैं या होने वाले हैं तो आपको भी फोन आ सकता है. महाकाल मंदिर की तरफ से आए फोन को रिसीव करते ही उधर से बोला जा रहा है, जय श्री महाकाल… आपसे भस्म आरती दर्शन के लिए मंदिर में किसी भी व्यक्ति ने निर्धारित शुल्क (200 रुपये) से अधिक रुपये तो नहीं लिए हैं? यदि आपको भी ऐसे काल आते हैं तो आप चौंकियेगा मत, क्योंकि यह फोन कॉल मंदिर प्रशासन की तरफ से ही किया जा रहा है. अवैध वसूली पर रोक के लिए बनाई गई व्यवस्था गौरतलब है कि आम भक्तों के लिए महाकाल मंदिर में अवैध वसूली को रोकने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है. इसी के तहत भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों को फोन कॉल कर फीडबैक लिया जा रहा है. क्योंकि ऐसे बहुत से मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती के नाम पर अवैध वसूली की गई. इसमें मंदिर कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई. उन पर कार्रवाईया होती रहीं. लेकिन अवैध वसूली पर लगाम नहीं लग सका. कर्मचारी और दलाल दर्शन के नाम पर भक्तों से खूब अवैध धन राशि वसूलते थे. जानिए कितने रुपये लिया जाता है शुल्क जानकारी के मुताबिक, मंदिर प्रशासन की तरफ से प्रोटोकाल और ऑनलाइन अनुमति प्राप्त करने के लिए 200 रुपये शुल्क लिया जाता है. वहीं, पूरे दिन प्रोटोकाल दर्शन के लिए 250 रुपये शुल्क लगता है. वहीं. भस्म आरती दर्शन के लिए 2,00 रुपये निर्धारित है. इसके अलावा  महाकाल मंदिर समिति द्वारा प्रतिदिन 300 सामान्य दर्शनार्थियों को निश्शुल्क भस्म आरती अनुमति प्रदान की जाती है.     

15 साल बाद भारतीय मिडिल ऑर्डर में गिल-अय्यर और अक्षर की बदौलत दिखा दम, मिली कामयाबी

नई दिल्ली इंग्लैंड के खिलाफ नागपुर ODI में भारतीय बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया 4 विकेट से मुकाबला अपने नाम करने में कामयाब रही। 249 रनों के टारगेट का पीछा करते हुए शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर और अक्षर पटेल ने शानदार अर्धशतक जड़े। इन तीनों की धमाकेदार पारियों के चलते भारतीय मिडिल ऑर्डर में पुराने जैसा दम दिखा। शुभमन गिल को 87 रनों की पारी के चलते प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया। वहीं श्रेयस अय्यर ने 36 गेंदों पर 9 चौकों और 2 गगनचुंबी छ्क्कों की मदद से 59 तो अक्षर पटेल ने 47 गेंदों पर 52 रनों की पारी खेली। गिल-अय्यर और अक्षर ने अपनी इस पारियों के दम पर 15 सालों से सूखी पड़ी रिकॉर्ड लिस्ट में अपनी जगह बनाई। यह लिस्ट है रनचेज के दौरान भारत के नंबर-3,4 और 5 के बल्लेबाजों द्वारा 50 से अधिक स्कोर करने की। आखिरी बार इस लिस्ट में विराट कोहली, युवराज सिंह और सुरेश रैना ने 2010 में अपना नाम दर्ज कराया था। भारतीय वनडे क्रिकेट के इतिहास में यह मात्र चौथी घटना है जब रनचेज के दौरान भारत के नंबर-3,4 और 5 के बल्लेबाजों ने 50 से अधिक रन की पारी खेली हो। सबसे पहले यह कारनामा संजय मांजरेकर, डी वेंगसरकर और अजहरुद्दीन की तिकड़ी ने इंग्लैंड के खिलाफ 1990 में किया था, वहीं इसी के एक साल बाद 1991 में श्रीलंका के खिलाफ संजय मांजरेकर, सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद अजहरुद्दीन ऐसा करने में कामयाब रहे थे।

नीमच में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, एक महिला सरपंच ने अपनी सरपंची गिरवी रखी

नीमच नीमच में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला सरपंच ने अपनी सरपंची गिरवी रख दी है। महिला सरपंच ने स्टांप पेपर पर साइन कर ठेकेदार को सरपंच पद दे दिया है। वो भी महज 500 रुपए के लिए है। दरअसल, ग्राम पंचायत दाता की सरपंच कैलाशीबाई कछावा ने 500 रुपए के स्टांप पर गांव के ही सुरेश गरासिया को सरपंची सौंप दी। इस तरह का अनुबंध करने का यह देश का पहला मामला माना जा रहा है। इधर जनपद पंचायत के अधिकारियों ने बोला कि सरपंच को नोटिस जारी करेंगे। 24 जनवरी को दिया गया है अनुबंध यह अनुबंध 24 जनवरी को किया गया। इसमें गवाह के रूप में गांव के सदाराम, मनालाल और सुरेश के हस्ताक्षर हैं। साथ ही, सरपंच की सील और हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। अनुबंध में लिखा गया कि मनरेगा, पीएम आवास, वाटरशेड सहित शासन के सभी कार्य सुरेश गरासिया देखेंगे। शर्तों का उल्लंघन होने पर चार गुना हर्जाना भरने की बात भी लिखी गई है। निर्माण कार्यों के लिए किया गया कॉन्ट्रैक्ट सरपंच के पति जगदीश कछावा ने कहा कि यह अनुबंध केवल निर्माण कार्यों को लेकर किया गया था। सरपंची के अधिकारों से जुड़ा कोई अनुबंध नहीं हुआ। वहीं, सुरेश गरासिया ने कहा कि उन्होंने कोई अनुबंध नहीं किया। वह ठेकेदार हैं और सात पंचायतों में ठेकेदारी करते हैं। सरपंच को पद से हटाया जाएगा जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो सरपंच को पद से हटाया जाएगा। मामला संज्ञान में आ चुका है। मैं कार्य करने में हूं असमर्थ सरपंच कैलाशीबाई ने अनुबंध में लिखा कि वह अपने कार्य करने में असमर्थ हैं। इसलिए अपने सारे दायित्व और कर्तव्य सुरेश गरासिया को सौंप रही हैं। अब पंचायत के सभी काम वही देखेंगे। उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। जहां सुरेश कहेंगे, वहां वह अपने हस्ताक्षर करेंगी।

पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा में 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षा होगी निरस्त

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पांचवीं-आठवीं की बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से आयोजित हो रही है। इस बार हर जनशिक्षा केंद्र के तहत पांच केंद्र बनाए जाएंगे। परीक्षा केंद्र स्कूल से तीन किमी के अंदर ही होंगे और एक केंद्र पर 250 से अधिक विद्यार्थी शामिल नहीं होंगे। विशेष परिस्थितियों में राज्य शिक्षा केंद्र को सूचित करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अनुमति से परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। इस बार परीक्षा के लिए राज्य व जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष भी बनाया जाएगा। परीक्षा से संबंधित कोई भी शिकायत यहां दर्ज कराई जा सकती है। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें निर्देशित किया गया है कि इस बार डिटेंशन पॉलिसी भी लागू होगी। बता दें कि इस बार परीक्षा में सरकारी व निजी स्कूलों के करीब 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। डिटेंशन पॉलिसी लागू होगी कक्षा 5वीं व 8वीं की परीक्षा में निर्धारित अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने वाले विद्यार्थियों को पुन: परीक्षा का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए दो माह बाद पुन: परीक्षा आयोजित होगी। पुन: परीक्षा में भी अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को उसी कक्षा में रोके जाने (डिटेंशन पालिसी) का प्रविधान होगा। प्रत्येक विषय में लिखित परीक्षा 60 अंक का होगा, जिसमें 33 प्रतिशत यानी 20 अंक लाने होंगे। उससे कम अंक लाने वाले बच्चों को पुन: परीक्षा देनी होगी। इसके बाद भी कोई फेल हो जाता है तो उसे उसी कक्षा में रोक लिया जाएगा। नियमितता व कर्तव्यनिष्ठा पर भी मिलेगी ग्रेड स्कूलों में आयोजित गतिविधियों में विद्यार्थी की उपलब्धि पर स्कूल से ग्रेड दी जाएगी। यह कक्षा शिक्षक देंगे। इसमें नियमितता, समयबद्धता, सहयोग की भावना, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी का आकलन भी होगा। इसके अलावा साहित्यिक, सांस्कृतिक, विज्ञान, सृजनात्मक, खेलकूद पर भी ग्रेडिंग की जाएगी। स्कूलों को ग्रेड व अंक 15 फरवरी तक आनलाइन भरकर राज्य शिक्षा केंद्र को भेजने होंगे। वहीं पांचवीं के परीक्षार्थियों के लिए अतिरिक्त भाषा वैकल्पिक है। इस कारण अतिरिक्त भाषा के प्राप्तांकों को वार्षिक परिणाम में नहीं जोड़ा जाएगा। नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षा होगी निरस्त अगर कोई विद्यार्थी नकल करते या अनुचित साधनों का प्रयोग करते पकड़ा जाएगा तो उसकी परीक्षा निरस्त कर दी जाएगी। उसकी उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। एक घंटे के अंदर उत्तरपुस्तिकाओं को जमा करना होगा यह भी निर्देशित किया गया है कि परीक्षा के दिन जनशिक्षा केंद्र से 45 मिनट पहले केंद्रों पर केंद्राध्यक्ष की उपस्थिति में प्रश्नपत्रों का बंडल वितरित किया जाएगा। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी केंद्रों से एक घंटे के अंदर उत्तरपुस्तिकाओं को जनशिक्षा केंद्र पर जमा कराना होगा।

ग्वालियर में 60 करोड़ की जमीन के लिए परिवार में खूनी संघर्ष, पंचायत में गोलीबारी, 1 की मौत, 3 घायल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में परिवार के सदस्यों के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला। सदस्यों के बीच हुए भीषण खून-खराबे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि अन्य तीन लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि लड़ाई की वजह 60 करोड़ रुपए की कीमत (Price of Rs 60 crores) वाली बेशकीमती जमीन (Precious land) है, जिसके बारे में पंचायत चलते समय विवाद बढ़ा और फिर खूनी रूख अख्तियार कर लिया। दरअसल ग्वालियर के एक यादव परिवार और उनके नजदीकी रिश्तेदारों की मौजूदगी में पंचायत की बैठक हो रही थी। तभी दो भाइयों हुकुम सिंह और रामू यादव के बीच में विवाद बढ़ गया। इस बीच हुकुम सिंह ने परिवार की कुछ महिलाओं सहित रामू और दिनेश पर षडयंत्र करके हमला करने का आरोप लगाया। और फिर विवाद बढ़ता ही चला गया और गोलियां चलने तक की नौबत आ गई। जब हम मृतक पुरुषोत्तम यादव के घर पहुंचे, तो वहां काफी संख्या में लोग जमा थे, क्योंकि कुछ ही देर में गोली लगने से मरने वाले युवक की बॉडी आने वाली थी। जिसके रिश्तेदार और गांव वाले अंतिम संस्कार की तैयारी में लगे थे। पूरे घर में गमगीन माहौल था। यहां महिलाएं रो-बिलख रही थीं। पुरुषोत्तम यादव के घर के पास दो घर छोड़कर आरोपियों का घर है, जहां सन्नाटा पसरा हुआ था और घर के बाहर ताला लगा था। वहां के पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी घर छोड़कर भाग चुके हैं। वहीं, आरोपियों के घर के बाहर और पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। 60 करोड़ की जमीन बनी खूनी संघर्ष की वजह करीब साढ़े 17 बीघा जमीन, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 60 करोड़ रुपए आंकी जा रही है, इसी के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ। पंचायत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। ऐसे समझिए पूरा मामला ग्वालियर के गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित गोकुलपुरा में हुकुम सिंह यादव और उनके भाई पंचम सिंह यादव के बीच पुश्तैनी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। यह जमीन 1989 में हुकुम सिंह के पिता मजबूत सिंह ने खरीदी थी। चूंकि हुकुम सिंह के छोटे भाई बालमुकुंद और बड़े भाई शिवचरण उस समय नाबालिग थे, इसलिए जमीन बड़े भाई पंचम सिंह यादव के नाम कर दी गई थी। बाद में, हुकुम सिंह, बालमुकुंद और शिवचरण ने 2000 में कानूनी कार्रवाई कर जमीन अपने नाम करा ली। हालांकि, 2018 में पंचायत बैठी, जिसमें जमीन का एक हिस्सा पंचम सिंह, शिवचरण और बालमुकुंद को दिया गया, जबकि दूसरा हिस्सा पंचम सिंह की पत्नी कमला यादव और उनके बेटे रामू व रामबरन यादव के नाम हुआ। लेकिन 2021 में कमला और उनके बेटों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरी जमीन अपने नाम करा ली। इसके बाद विवाद कोर्ट तक पहुंच गया, जहां 2021 में कोर्ट ने हुकुम सिंह के पक्ष में फैसला सुना दिया। बावजूद इसके, दूसरा पक्ष मानने को तैयार नहीं था। प्रशासनिक अधिकारी कई बार सुलह का प्रयास कर चुके थे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल पाया। पंचायत में हथियारों के साथ पहुंचने पर दूसरे पक्ष ने की फायरिंग बुधवार को कुछ रिश्तेदारों ने दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए पंचायत बुलाकर बातचीत कराने की पहल की थी। इस दौरान मजबूत सिंह के बड़े बेटे, पंचम सिंह की पत्नी कमला और उसका बेटा रामू यादव हथियारों के साथ वहां पहुंच गए। इसके बाद कमला के बेटे रामबरन, रामू, रणवीर और दिनेश ने पिस्टल, माउजर और बंदूक से अपने चाचा हुकुम सिंह, शिवचरण, बालमुकुंद और चचेरे भाई पुरुषोत्तम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। बचाव में हुकुम सिंह, शिवचरण, बालमुकुंद और पुरुषोत्तम ने भी जवाबी फायरिंग की। इस गोलीबारी में हुकुम सिंह के पक्ष से उनके भाई बालमुकुंद सिंह यादव, पूर्व सरपंच शिवचरण सिंह यादव, भतीजा पुरुषोत्तम सिंह यादव और धीरज यादव गोली लगने से घायल हो गए। वहीं, कमला का बेटा रामबरन सिंह उर्फ रामू और दिनेश यादव भी घायल हुए। चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची थी घटना की सूचना मिलते ही चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। सभी घायलों को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने गोली लगने से घायल 25 वर्षीय पुरुषोत्तम सिंह यादव को मृत घोषित कर दिया। पुरुषोत्तम पूर्व सरपंच शिवचरण सिंह यादव का बेटा था। पंचायत के जरिए मामले को सुलझाने का वादा किया था दिसंबर में पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए बाउंड ओवर की कार्रवाई की थी। इसमें दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत और पंचायत के जरिए मामले को सुलझाने का वादा किया था। इसके बावजूद, पुलिस और प्रशासन ने एक बार फिर पंचायत कराने की कोशिश की। पुलिस और रिश्तेदारों ने 2 और 3 जनवरी को पंचायत आयोजित की थी, लेकिन उस समय दोनों परिवारों के बीच सहमति नहीं बन पाई। खून के छींटे अब भी जमीन पर मौजूद जब भास्कर की टीम घटनास्थल की पड़ताल करने पहुंची, तो गिरवाई थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके की जांच कर रहे थे। घटना के बाद मृतक के खून के छींटे अब भी जमीन पर मौजूद थे, जिन्हें पुलिसकर्मी सबूत के तौर पर इकट्ठा कर रहे थे। जिस स्थान पर यह खूनी संघर्ष हुआ, वह जमीन पूर्व सरपंच शिवचरण यादव की बताई जा रही है। शिवचरण ने इस जमीन को क्रेशर संचालक को किराये पर दिया हुआ है। सुरक्षा के लिए गांव में 30 पुलिसकर्मी तैनात गिरवाई थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि घटना ठीक उसी स्थान पर हुई है, जहां दोनों पक्ष बातचीत कर रहे थे। पुलिस टीम घटनास्थल की दोबारा जांच करने पहुंची है। उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ में पता चला कि तीन से चार राउंड फायर किए गए थे। पुलिस को घटनास्थल से खाली कारतूस भी मिले हैं। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 25 से 30 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।  

महू में भीषण सड़क हादसे में 6 की मौत व 10 घायल, ट्रैवलर में सवार थे कर्नाटक के यात्री

महू  मानपुर थाना क्षेत्र में देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में 6  लोगों की मौत हो गई है, वहीं 10 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. घटना की सूचना लगते ही मानपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है. पुलिस के मुताबिक घटना गुरुवार-शुक्रवार मध्यरात्रि 2:30 बजे की है. दुर्घटनाग्रस्त हुई टेंपो ट्रैवलर में सवार यात्री कर्नाटक के रहने वाले हैं, जो उज्जैन से महाकाल के दर्शन कर महाराष्ट्र की ओर जा रहे थे. मानपुर भैरव घाट के पास की घटना मानपुर पुलिस के अनुसार मानपुर भैरव घाट में करीब ढाई बजे टेंपो ट्रैवलर आगे चल रहे टैंकर में जा घुसी. इस घटना में ट्रैवलर में सवार दो यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं टक्कर से पहले ट्रैवलर वाहन ने पास से गुजर रहे दो बाइक सवारों को भी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी भी मौत हो गई. इसके अलावा ट्रैवलर में बैठे 10 लोग जिनमें महिला पुरुष और बच्चे शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हो गए. 6  में से 2 मृतकों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है. ट्रैवलर के उड़े परखच्चे, मृतकों में दो एमपी से मानपुर थाने के एएसआई रवि ने बताया, ” ट्रैवलर और ट्रक के टक्कर से पहले ट्रैवलर ने बाइक को टक्कर मारी थी. इसमें मध्यप्रदेश के सेंधवा निवासी शुभम और धरमपुरी निवासी हिमांशु की मौत हो गई है. वहीं ट्रैवलर में सवार दो महिलाओं की मौत हुई है. उनकी भी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है.” पुलिस के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि ट्रैवलर वाहन के परखच्चे उड़ गए. इसमें सवार सभी यात्री कर्नाटक के रहने वाले हैं. घायलों का उपचार इंदौर के एम वाय अस्पताल में किया जा रहा है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. हादसे में ये 15 घायल     सविता पत्नी तुकाराम, 40 साल     सुभाष रेन, 35 साल     शीतल रामचंद्र, 27 साल     तीरथ पिता रामचंद्र, 48 साल     श्रुति पति अमर, 32 साल     भाव सिंह, 36 साल     शिव सिंह पिता श्रीकांत, 31 साल     बबीता पति फकीरा, 56 साल     राजू, 63 साल     मालवा पति कृष्णा, 60 साल     सुनीता पति श्रीकांत, 50 साल     प्रशांत, 52 साल     शंकर, 60 साल     लता, 62 साल     बांगल वडियप्पा, 55 साल

इंग्लैंड में अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबला बॉयकॉट करने की मांग उठी, 19 फरवरी से चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज

नई दिल्ली चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज 19 फरवरी से होने जा रहा है, मगर इससे पहले इंग्लैंड में अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबला बॉयकॉट करने की मांग उठ रही थी। वहां कई राजनेताओं ने अफगानिस्तान के खिलाफ मैच का विरोध किया था। दरअसल, 2021 में जब तालिबान ने दोबारा अफगानिस्तान में अपना राज शुरू किया था तभी से वहां पर महिलाओं की क्रिकेट पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। ICC के नियमों के मुताबिक जो भी देश पुरुष क्रिकेट खेल रहे हैं उन्हें महिला क्रिकेट को भी बढ़ावा देना है और कम से कम अपनी एक टीम तो जरूर रखनी है। हालांकि, तीन साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अफगानिस्तान की महिला टीम मैदान पर नहीं उतर सकी है। इसको लेकर ही लगातार अफगानिस्तान की टीम को विरोध भी झेलना पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया ने कई मौकों पर अफगानिस्तान के खिलाफ मैच खेलने से मना किया है। पिछले महीने, ब्रिटिश सांसदों के एक ग्रुप ने इंग्लैंड से अफगानिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज के मैच का बॉयकॉट करने का आग्रह किया था, जो 26 फरवरी को लाहौर में आयोजित किया जाएगा। साउथ अफ्रीका के खेल मंत्री गेटन मैकेंजी ने भी इसका समर्थन किया था। हालांकि, ईसीबी के अध्यक्ष रिचर्ड थॉम्पसन ने कहा कि वे सरकार, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और खिलाड़ियों के साथ विचार-विमर्श के बाद मैच खेलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले क्रिकेट समुदाय अफगानिस्तान की समस्याओं से नहीं निपट सकता। थॉम्पसन ने एक बयान में कहा, “हमने सुना है कि कई आम अफगानी नागरिकों के लिए उनकी क्रिकेट टीम को खेलते देखना ही मनोरंजन के कुछ बेहद कम बचे साधनों में से एक बचा है। हम यह कंफर्म कर सकते हैं कि हम ये मुकाबला खेलेंगे।” तालिबान का कहना है कि वे इस्लामी कानून और स्थानीय रीति-रिवाजों की अपनी व्याख्या के अनुसार महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करते हैं और ये आंतरिक मामले हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए।

ट्रंप के ऑर्डर से फिर मची खलबली, अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर लगाया बैन; क्या नेतन्याहू है वजह?

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराध न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ICC की ओर से गाजा में इजरायल के युद्ध अपराध की जांच के चलते अमेरिका ने ये कार्रवाई की है। अमेरिका के प्रमुख सहयोगी इजरायल पर गाजा में नरसंहार के गंभीर आरोप लगे हैं। ICC ने बीते साल इजरायली नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। ट्रंप ने ICC की कार्रवाई को खतरनाक मिसाल बताते हुए बैन का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों में ICC अधिकारियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमलों के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ ICC के गिरफ्तारी वारंट जारी करने के चलते यह कदम उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका और सहयोगी देशों की ICC जांच का विरोध कर रहा है। उन्होंने इन जांचों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल ICC के सदस्य नहीं हैं और दोनों ही देश इसके ऑर्डर नहीं मानते। ट्रंप पर हमलावर रहे हैं ट्रंप ICC को दूसरी बार अमेरिकी प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है। साल 2020 में ट्रंप प्रशासन ने तत्कालीन अभियोजक फातौ बेन्सौडा और एक शीर्ष सहयोगी पर प्रतिबंध लगाए थे। ये प्रतिबंध अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्ध अपराधों की ICC की जांच की प्रतिक्रिया में लगाए गए थे। ICC को अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इससे अदालत के कामकाज पर असर पड़ा है। ICC अध्यक्ष ने कुछ समय पहले चिंता जताई थी कि अमेरिकी प्रतिबंध न्यायालय के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्यायालय की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया है। ICC 125 सदस्य देशों वाला ICC एक स्थायी न्यायालय है। यह युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों, नरसंहार और सदस्य देशों या उनके नागरिकों के खिलाफ आक्रामकता के लिए मुकदमा चलाता है। हालांकि कई बड़े देश इसके सदस्य नहीं है। इंटरनेशनल कोर्ट ने पिछले नवंबर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट और हमास नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अदालत ने माना था कि नेतन्याहू और गैलेंट ने मानवीय सहायता रोककर गाजा में नागरिकों की भुखमरी को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया। हालांकि इजरायल ने आरोपों को झूठा बताकर खारिज कर दिया था।

हार्दिक पटेल को सुप्रीम राहत, पटेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज किए गए राजद्रोह का केस वापस

अहमदाबाद गुजरात बीजेपी के विधायक हार्दिक पटेल (31) काे बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने हार्दिक पटेल और अन्य के खिलाफ दर्ज राजद्रोह में मामले को वापस ले लिया है। पाटीदार अनामत आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल और उनके साथियों के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था। आंदोलन के बाद हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2022 गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले हार्दिक पटेल बीजेपी में शामिल हो गए थे। हार्दिक पटेल वर्तमान में अहमदाबाद जिले की वीरमगाम से विधायक हैं। गुजरात में पाटीदार अनामत आंदोलन साल 2015 में हुआ था। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। 2017 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी इसी आंदोलन की वजह से सिर्फ 99 सीटें जीत पाई थी। फैसले पर बोले हार्दिक पटेल राज्य सरकार के फैसले पर हार्दिक पटेल ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि गुजरात में हुए पाटीदार आंदोलन के दौरान मेरे समेत समाज के अनेक युवाओं पर लगे गंभीर राजद्रोह समेत के मुकदमें आज भूपेंद्र भाई पटेल की सरकार ने वापिस लिए है। मैं समाज की ओर से गुजरात की भाजपा सरकार का विशेष आभार व्यक्त करता हूं। पाटीदार आंदोलन से गुजरात में बिन आरक्षित वर्गों के लिए आयोग-निगम बना, 1000 करोड़ की युवा स्वावलंबन योजना लागू हुई और देश में आर्थिक आधार पर स्वर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिला हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित भाई शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल पुनः दिल की गहराई से आभार व्यक्त करता हूं। जीएमडीसी मैदान में की थी सभा 20 जुलाई 1993 को जन्में हार्दिक पटेल बी कॉम की डिग्री ली है। वह अक्टूबर 2012 में सरदार पटेल ग्रुप से जुड़ गए थे। इसके बा वह एसपीजी की वीरमगाम यूनिट के अध्यक्ष बन गए थे। 2015 में हार्दिक पटेल को मतभेदों के बाद एसपीजी प्रमुख ने निकाल दिया था। हार्दिक पटेल ने गुजरात पाटीदार अनामत आंदोलन को लीड किया था। इसके बाद वह पूरे देश में बड़ा चेहरा बन गए थे। उन्होंने जीएमडीसी मैदान में बड़ी सभा करके उस वक्त की सरकार को हिला दिया था। उनके आंदोलन को पास (PAAS) यानी पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने संचालित किया था। गुजराती में अनामत का मतलब आरक्षण से है।

सुभाष नायर के खिलाफ यह केस नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने पर हुआ, अब हुई जेल

सिंगापुर सिंगापुर में भारतीय मूल के रैपर सुभाष नायर को जेल हो गई है। सुभाष नायर के खिलाफ यह केस नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने पर हुआ है। पांच फरवरी को उन्हें छह हफ्तों के लिए जेल में डाल दिया गया। 32 साल के सुभाष ने सिंगापुर में चीन को मिलने वाली छूट और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार को लेकर लगातार आवाज उठाई है। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट्स और कार्यक्रमों के दौरान नस्लवाद पर बोलने के कई केस हैं। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वह सिंगापुर में भेदभाव के खिलाफ मुंह खोलने की सजा पा रहे हैं। उनके मुताबिक सिंगापुर के अधिकारी उनकी सामाजिक लड़ाई को रोकने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। क्या हैं मामले सुभाष नायर की मुश्किलें 2020 में शुरू हुईं जब उन्हें अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर चेतावनी मिली। यह पोस्ट उन्होंने 2019 के ऑर्चर्ड टॉवर्स मर्डर को लेकर की थी। इस घटना में 31 साल के भारतीय मूल के सिंगापुरियन सतीश नोएल गोबीदास की कुछ लोगों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। मामले में चैन जिया जिंग के ऊपर पहले तो हत्या का मामला दर्ज किया गया। लेकिन बाद में कुछ शर्तों पर उसके केस को कमजोर करते हुए चेतावनी दे दी गई। इसके मामले में नस्लीय पूर्वाग्रह के आरोप लगे थे। इंस्टाग्राम पर पोस्ट सुभाष ने इस मामले को लेकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने लिखा कि ‘नस्लवाद और चीनी विशेषाधिकार की आलोचना करना=दो साल की सशर्त चेतावनी और मीडिया में बदनामी का अभियान। एक भारतीय आदमी की हत्या की साजिश करना=हल्की सजा और मीडिया की सहानुभूति। इसको लेकर भी सुभाष को चेतावनी मिली थी। लेकिन उन्होंने अपने म्यूजिक शोज और कार्यक्रमों के दौरान नस्लवाद के मामलों को उठाना जारी रखा। साल 2021 में एक कार्यक्रम के दौरान ऑर्चर्ड टॉवर केस में अपनी पोस्ट को लेकर संकेत किया था। बाद में इस केस में उनके खिलाफ केस हुआ था। इसी तरह साल 2019 में अभिनेता डेनिस चियू को एक सरकारी विज्ञापन में दिखाने की सुभाष ने आलोचना की थी। इस मामले में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इस वीडियो में चाइनीज सिंगापुरियंस के लिए आक्रामक भाषा इस्तेमाल की गई थी। इसी तरह 2021 में एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उनके खिलाफ आरोप लगा था। इसमें उन्होंने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर जोआना थेंग और सिटी रिवाइवल चर्च के संस्थापक जेमी वोंग के खिलाफ ढंग से कार्रवाई न होने पर आलोचना की थी। इन दोनों ने एलजीबीटीक्यू आंदोलन को शैतान से जोड़ा था। नायर ने तर्क दिया कि अगर दो मलय मुसलमानों ने ऐसा किया होता तो जांच तेजी से होती।

ईरान में महिला ने नग्न होकर पुलिस के सामने हंगामा किया, हिजाब बैन के विरोध में

तेहरान इस्लामिक देश ईरान ने वैसे तो पिछले साल दिसंबर में ही सख्त हिजाब कानून को लागू करने पर रोक लगी दी है लेकिन अभी भी वहां हिजाब बैन के खिलाफ महिलाएं हल्ला बोल रही हैं। इसी तरह के एक वाकए में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए पहले अपने सभी कपड़े उतार दिए फिर नग्न होकर पुलिस वाहन के बोनट पर खड़ी होकर हंगामा करने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में महिला सशस्त्र बलों के अधिकारियों पर चिल्लाती हुई दिखाई दे रही है। ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने महिला की इस करतूत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि हंगामा करने वाली महिला पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर विंडशील्ड की ओर बढ़ते हुए और अपने दोनों पैरों को फैलाकर बैठ रही है। महिला की हालत देखकर वहां मौजूद एक सशस्त्र पुरुष अधिकारी मामले में दखल देने में हिचकिचाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो के अंत में महिला ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए और विरोध में चिल्लाने लगीं। महिला इस्लामी गणराज्य में महिलाओं के लिए सख्त प्रावधानों का विरोध कर रही थी। वह शरीर को पूरी तरह से ढकने से इनकार भी करती दिखी। हालांकि, हंगामा बढ़ने पर उस महिला के पति ने कहा कि फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत ठीक नहीं है। बता दें कि दिसंबर में, ईरानी सांसद ने विवादास्पद ‘पवित्रता और हिजाब’ कानून पारित किया था, जिसमें उन महिलाओं और लड़कियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया था जो अपने बाल, हाथ या पैर का प्रदर्शन करती हैं। हालांकि, महिलाओं के व्यापक विरोध के बाद ईरानी सरकार झुक गई थी और इस कानून को लागू करने पर रोक लगा दी थी। तब ईरानी सरकार ने कहा था कि इसमें सुधार की जरूरत है। एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई वैश्विक संगठनों ने ईरान के इस कानून की निंदा की थी और इसे दमनकारी और दमघोंटू व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कहा था। प्रस्तावित कानून में भारी जुर्माना और बार-बार अपराध करने वालों के लिए 15 साल तक की कैद का भी प्रावधान किया गया था।

दलित दूल्हे की घुड़चढी को रस्म पूरा करने एसपी ने पुलिसकर्मियों की फौज उतारी

अहमदाबाद  गुजरात के बनासकांठा जिले में दलित वकील मुकेश परेचा ने घोड़ी पर बैठकर अपनी शादी की बारात निकाली। इलाके में किसी दलित परिवार में घुड़चढ़ी का यह पहला मौका था। इस बारात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। बाद में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी के साथ पुलिस अफसरों ने दूल्हे की गाड़ी ड्राइव की। हालांकि घोड़ी के उतरकर कार पर चढ़ने के दौरान किसी ने उनकी कार पर पत्थर फेंका। दूल्हे परेचा ने कहा कि वह एक-दो दिन में इसकी शिकायत देंगे। शादी में घुड़चढ़ी के लिए मांगी थी सुरक्षा बनासकांठा ज़िले के पालनपुर तहसील के गडलवाड़ा गांव में गुरुवार को एक अनोखी शादी देखने को मिली। यह शादी आम शादियों से बिल्कुल अलग थी। दूल्हे मुकेश परेचा अपनी शादी में घुड़चढ़ी की रस्म करना चाहते थे। इलाके के दबंगों ने दलितों की घुड़चढ़ी पर रोक लगा रखी थी। परेचा ने इस रस्म के लिए स्थानीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से सुरक्षा मांगी। उन्होंने 22 जनवरी को बनासकांठा ज़िले के पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन दिया। आवेदन में परेचा ने बताया कि उनके गांव में दलित कभी घुड़चढ़ी या वरघोड़ा नहीं निकालते हैं। मैं पहला व्यक्ति हूं जो वरघोड़ा निकालूंगा, जिसमें किसी अनहोनी की पूरी संभावना है। आपसे निवेदन है कि हमें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। इंस्पेक्टर ने खुद चलाई दूल्हे की कार पुलिस ने उनकी बरात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई। खुद जिग्नेश मेवाणी भी पुलिस अफसरों के साथ बारात में शामिल हुए। बनासकांठा ज़िला अदालत में वकालत करने वाले परेचा ने कहा कि पुलिस सुरक्षा के बीच उनकी बारात निकली। जब वह घोड़े पर सवार थे, तब कुछ नहीं हुआ। लेकिन जब वह घोड़े से उतरे और अपनी कार में बैठे तो किसी ने उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंक दिया। फिर पुलिस इंस्पेक्टर के. एम. वसावा ने खुद स्टेयरिंग थाम लिया। उनके साथ कार में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी भी मौजूद थे।

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