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5 साल बाद RBI से आई गुड न्यूज, रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती

नई दिल्ली  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज (7 फरवरी 2025) खत्म हो गई है और आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा आज सुबह 10 बजे कमेटी के फैसले का ऐलान कर दिया। तीन दिन तक चली इस मीटिंग में उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया गया। 2020 में COVID-19 के बाद आज आरबीआई रेपो रेट में 25bps की कटौती कर दी है। आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले मई, 2020 में कोविड-19 महामारी के समय रेपो दर को 0.40 प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत किया गया था। फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के जोखिमों से निपटने के लिए आरबीआई ने मई, 2022 में दरों में बढ़ोतरी करनी शुरू की थी और यह सिलसिला फरवरी, 2023 में जाकर रुका था। रेपो दर दो साल से 6.50 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। आरबीआई के गवर्नर ने संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की बैठक में लिए गये निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि छह सदस्यीय समिति ने आम सहमति से रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि बैठक में इकोनॉमी डेवलपमेंट को लेकर चर्चा की गई. गवर्नर ने आगे कहा कि हमने बैठक में फैसला किया है कि रेपो रेट को घटाया जा रहा है. अब रेपो रेट 6.50 से घटाकर 6.25 किया जा रहा है. रेपो रेट में कटौती के बाद अब आपके लोन की ईएमआई कम हो जाएगी. गवर्नर ने कहा कि ग्‍लोबल इकोनॉमी चुनौतियों से गुजर रही है. साथ ही वैश्विक स्‍तर पर महंगाई भी बढ़ रही है. वहीं फेडरल रिजर्व बैंक ने रेट में कई बार कटौती की है. साथ जियो पॉलिटिकल टेंशन भी बढ़ रहा है. जिस कारण दुनिया भर की इकोनॉमी पर असर पड़ रहा है. भारतीय रुपया अभी प्रेशर में है. रिजर्व बैंक के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है. वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल GDP ग्रोथ 6.75%, अप्रैल-जून 2025 तिमाही 6.7%, जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में 7% रहने का अनुमान है. वहीं अक्टूबर-दिसंबर 2025 और जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में इसके 6.5-6.5% रहने का अनुमान है. महंगाई को और कम करने का लक्ष्‍य गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि इस वित्त वर्ष 4.8 फीसदी महंगाई रहने का अनुमान है. वहीं आगे महंगाई दर और कम हो जाएगी. दिसंबर में रिटेल महंगाई दर और थोक महंगाई दर, दोनों में बदलाव हुआ. रिटेल महंगाई दर 4 महीने के निचले स्तर 5.22% पर है. वहीं थोक महंगाई दर बढ़कर 2.37% पर पहुंच गई है. नवंबर में यह 1.89% थी. गवर्नर ने कह कि रिजर्व बैंक ने कहा कि सेकेंड्री मार्केट में गवर्नमेंट सिक्‍योरिटीज में ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक सेबी द्वारा रजिस्‍टर्ड आरबीआई के प्‍लेटफॉर्म का उपयोग कर स‍कते हैं.

मध्यप्रदेश अन्तर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में बना थीम स्टेट

भोपाल मध्यप्रदेश, हरियाणा के पर्यटन विभाग द्वारा 7 फरवरी से 23 फरवरी, 2025 तक आयोजित किए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला में थीम राज्य है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के संयोजन से मेले में आने वाले देश-विदेश के सैलानियों को मध्यप्रदेश की संस्कृति, पर्यटन, कला, शिल्प देखने और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। अन्तर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में मध्यप्रदेश की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत लोक नृत्य-संगीत का प्रदर्शन होगा। इसमें भगोरिया, गणगौर, मटकी, गुदुमबाजा, काठी, करमा, भड़म, बरेदी, बधाई-नौरता, अहिराई इत्यादि लोक नृत्यों की प्रस्तुति होगी। मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति को मेले के सैलानी देख सकेंगे। मेले में 17 फरवरी को नाटक बैजू बावरा और नृत्य नाटिका वीरांगना रानी दुर्गावती की विशेष प्रस्तुतियां भी होंगी। सूरजकुंड शिल्प मेला में मध्यप्रदेश के 40 शिल्पकारों के पारंपरिक शिल्प प्रदर्शन सह विक्रय के लिए उपलब्ध होंगे। इन शिल्पों में चंदेरी, महेश्वरी साड़ी एवं बाग प्रिंट, दरी-चादर, अजरक प्रिंट, घास की पत्ती से बने शिल्प, गोंड पेंटिंग, ढोकरा शिल्प, जूट, मिट्टी शिल्प, कढ़ाई एवं छपाई, भीली गुड़िया, छापा कला, नाँदना प्रिंट, लौह शिल्प, गोबर शिल्प, कशीदाकारी, खरद शिल्प, खादी और कॉटन, ब्लॉक प्रिंट इत्यादि शामिल हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा मेला परिसर में विशेष मंडप भी बनाया गया है, जहां प्रदेश के पर्यटन के बारे में विस्तृत जानकारी पर्यटकों को दी जा सकेगी। पर्यटक जान सकेंगे कि वे कैसे मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर सकते हैं। साथ ही मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा क्या-क्या सुविधाएं पर्यटकों को दी जाती हैं। इस मंडप में पर्यटकों को मध्यप्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की जानकारी दी जायेगी। साथ ही बताया जायेगा कि वह किस तरह वे अपना टूर प्लान कर सकते हैं। सूरजकुंड शिल्प मेला के बारे में सूरजकुंड शिल्प मेला, भारत की एवं शिल्पियों की हस्तकला का 15 दिन चलने वाला मेला लोगों को ग्रामीण और लोक संस्कृति का परिचय देता है। यह मेला हरियाणा राज्य के फरीदाबाद शहर के दिल्ली के निकटवर्ती सीमा से लगे सूरजकुंड क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगता है। यह मेला लगभग तीन दशक से आयोजित होता आ रहा है। इस मेले में हस्तशिल्पी और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों की वस्त्र परंपरा, लोक कला, लोक व्यंजनों के अतिरिक्त लोक संगीत और लोक नृत्यों का भी संगम होता है।  

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर तथा गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर तथा गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निदान करने के लिए केन्द्रीयकृत कॉल सेंटर 1912 का लगातार उन्नयन करते हुए इनकमिंग चैनलों की संख्या को 550 से बढाकर 800 किया गया है। इससे उपभोक्ताओं के अधिकतम कॉल सुने जा सकेंगे। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने बताया कि कॉल-सेंटर का उन्नयन होने से वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कंपनी को कुल 89 लाख 96  हजार 106 कॉल प्राप्त हुईं, इनमें से 99.64 प्रतिशत कॉल को सफलतापूर्वक सुना गया है। इसी तरह शिकायत निराकृत करने में भी तेजी आई है। प्रबंध संचालक ने बताया कि कपंनी द्वारा आई.व्ही.आर. तकनीक, वाइस बोट, व्हाट्सएप-चेटबॉट, उपाय एप के माध्यम से 24X7 सतत् मॉनिटरिंग कर प्राप्त शिकायतों का निराकरण किया गया है। इन माध्यमों से वित्तीय वर्ष 2024-25  में प्राप्त 15 लाख 95 हजार 123 शिकायतों को दर्ज कर उनका समाधान सुनिश्चत किया गया। इसी अवधि में प्रतिदिन 500 उपभोक्ताओं का फीडबैक लेते हुए कुल 1 लाख 54 हजार से अधिक उपभोक्ताओं से बात की गई। ज्यादातर उपभोक्ताओें ने कंपनी की सेवाओं को बेहतर बताया तथा कुल 99.79 प्रतिशत उपभोक्ता अपनी शिकायतों के समाधान से पूरी तरह संतुष्ट हुए। प्रबंध संचालक ने कहा है कि विद्युत प्रणाली का उचित रखरखाव कर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं अनवरत विद्युत प्रदाय करने के लिए कंपनी कृत-संकल्पित है। उपभोक्ताओं की विद्युत संबंधी शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी क्षेत्रांतर्गत 12 निम्नदाब उपभोक्ताओं के लिए एवं 4 उच्चदाब उपभोक्ताओं के लिए एफओसी (शिकायत निवारण केन्द्र) का सृजन एवं नए लैडरयुक्त वाहनों की व्यवस्था की गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना जिले की सड़क दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना जिले की सड़क दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया परिजन को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 4-4 लाख की सहायता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुना में हुई सड़क दुर्घटना पर दु:ख व्यक्त किया है। गुना के थाना फतेहगढ़ के रामनगर में ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से 2 लोगों की आकस्मिक मृत्यु एवं 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों के परिजन को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त गुना जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद करने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक प्रयासों से औद्योगिक विकास के नए युग की ओर अग्रसर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक प्रयासों से औद्योगिक विकास के नए युग की ओर अग्रसर है। निवेशकों को अधिक प्रभावी अवसर देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य के प्रमुख 6 सेक्टर्स पर केंद्रित समिट के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। यह पहली बार होगा जब हर सेक्टर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और निवेशक एक मंच पर आकर विशेषज्ञ चर्चाओं, अवसरों और नीतिगत सुधारों पर संवाद करेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा। देश का आकर्षक डेस्टिनेशन बनता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विकसित बुनियादी ढांचा और उद्योग-अनुकूल नीतियां इसे निवेश के लिए देश का सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाती हैं। शहरी विकास, पर्यटन, माइनिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और एमएसएमई, ये सभी क्षेत्र अपनी असीमित संभावनाओं और अनुकूल वातावरण से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश न केवल देश का पहला डायमंड प्रोड्यूसिंग स्टेट है, बल्कि ग्रीन एनर्जी हब, विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र और उभरते हुए टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इन विभागीय समिट से सरकार निवेशकों को नीतिगत प्रोत्साहन, संसाधनों की उपलब्धता और औद्योगिक ईको सिस्टम की मजबूती से अवगत कराएगी। इससे जीआईएस में होने वाली चर्चाएं वास्तविक निवेश प्रस्तावों में तब्दील हो सकेंगी। शहरी विकास समिट मध्यप्रदेश का शहरी बुनियादी ढांचा तेजी से सुदृढ़ हो रहा है। राज्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स हब इसे एक आदर्श रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश डेस्टिनेशन बना रहे हैं। जीआईएस में शहरी विकास समिट के माध्यम से स्मार्ट और सतत् शहरों के निर्माण पर केंद्रित चर्चा होगी, जिससे नवाचार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन समिट मध्यप्रदेश को ‘भारत का दिल’ कहा जाता है और इसके धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौन्दर्य से पूर्ण पर्यटन क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। खजुराहो, उज्जैन, साँची, पचमढ़ी, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर उपलब्ध कराने के लिये तैयार हैं। पर्यटन समिट में हॉस्पिटैलिटी, थीम-बेस्ड डेस्टिनेशन और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश को बढ़ावा देने के लिए गहन चर्चा होगी।  माइनिंग समिट मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यह देश में डायमंड, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज और तांबे का प्रमुख उत्पादक है। पन्ना स्थित एशिया की एकमात्र डायमंड माइंस और विशाल कोयला भंडार राज्य को माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। जीआईएस में माइनिंग समिट से खनन आधारित उद्योगों, मूल्यवर्धित प्र-संस्करण और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा होगी। रिन्यूएबल एनर्जी समिट मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। रीवा सोलर प्लांट, ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और ग्रीन हाइड्रोजन में हो रहे विकास इसे नवकरणीय ऊर्जा निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जीआईएस में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट में सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए ठोस रणनीतियां प्रस्तुत की जाएंगी। आईटी एंड टेक्नोलॉजी समिट मध्यप्रदेश अब टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का केंद्र बन रहा है। इंदौर आईटी हब, डेटा सेंटर पॉलिसी, स्टार्ट-अप ईको सिस्टम और उभरते एआई और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्रों में तेजी से निवेश आ रहा है। जीआईएस में आईटी समिट के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आईटी पार्क और नई टेक्नोलॉजीज पर निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया जाएगा। एमएसएमई समिट मध्यप्रदेश का एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़ है, जहां लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना, नए क्लस्टर और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां इसे निवेश के लिए एक डेस्टिनेशन बना रही हैं। एमएसएमई समिट में उद्योगों को वित्तीय सहयोग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बाजारों तक पहुंच को लेकर चर्चा होगी। प्रवासी समिट मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीयों को प्रदेश के उद्योग, स्टार्ट-अप, पर्यटन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय समिट का उद्देश्य विश्वभर में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को एक मंच पर लाना और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ ही मध्यप्रदेश के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समिट मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी मिलेगा। इन विभागीय समिट से सरकार मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईएस के इस नए स्वरूप से न केवल उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। मध्यप्रदेश अब सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक भविष्य का निर्माण करने वाला प्रमुख राज्य बन रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश को जल्द ही एक नया टाइगर रिजर्व मिलने वाला है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को जल्द ही एक नया टाइगर रिजर्व मिलने वाला है। माधव टाइगर अभ्यारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिजर्व बनेगा। इससे चंबल अंचल में वन्य जीवों की संख्या बढ़ेगी। मध्यप्रदेश वन्य जीवन संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। बुधवार को कूनो क्षेत्र में 5 चीते छोड़े गए, इनमें से 3 का जन्म तो प्रदेश में ही हुआ है। इस प्रकार अब सात चीते स्वयं को मध्यप्रदेश की आबोहवा में ढाल रहे हैं। पहले छोड़े गए चीते न केवल शिकार कर रहे हैं, अपितु कुशलता से जंगल में विचरण कर रहे हैं। प्रकृति, जीव जगत और मानव जीवन के संतुलन की यह अनमोल झलक राज्य में दिखाई दे रही है। सभी लोग इस आनंद और रोमांच का अनुभव कर रहे हैं। यह वन्य जीवों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश में वन्यजीवों के लिए सबसे अनुकूल वातावरण है।  

मध्यप्रदेश को वर्ष 2011-12 से 2017-18 तक लगातार 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड से पुरस्कृत किया गया

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयास से कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। मध्यप्रदेश को वर्ष 2011-12 से 2017-18 तक लगातार 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड से पुरस्कृत किया गया है। मध्यप्रदेश वर्ष- 2011-12, 2012-13 एवं 2014-15 में कुल खाद्यान्न केटेगरी के लिए, वर्ष- 2013-14, 2015-16 एवं 2016-17 में गेहूं फसल के लिये और वर्ष 2017-18 में दलहन फसल के लिये कृषि कर्मण अवार्ड से पुरस्कृत किया गया है। वर्ष- 2022 में मध्यप्रदेश के भू-अभिलेखों के एकीकरण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा फसल बीमा योजनांतर्गत उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया गया है। प्रदेश में गेहूं, उड़द, मसूर, सोयाबीन, अलसी, फसलों का क्षेत्राच्छादन सबसे अधिक है। मक्का और तिल के उत्पादन में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है।  

भारत मंडपम में 10 फरवरी को होने वाली परीक्षा पर चर्चा के लिए छात्र भी बेहद उत्साहित, पीएम मोदी देंगे टिप्स

नई दिल्ली ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम नए कलेवर में छात्रों के सामने होगा। सवालों का जवाब सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही नहीं देंगे, बल्कि देश के कई दिग्गज भी देंगे। पहले पीएम मोदी छात्रों को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और तनावमुक्त रहने के टिप्स देते थे, लेकिन इस बार फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, अभिनेता विक्रांत मैसी, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर और खेल जगत के कई दिग्गज भी जरूरी टिप्स देते नजर आएंगे। दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में 10 फरवरी को होने वाली परीक्षा पर चर्चा के लिए छात्र भी बेहद उत्साहित हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), परीक्षा से जुड़े तनाव को सीखने के उत्सव में बदलने की पहल है। इसके 8वें संस्करण में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। वर्ष 2018 में परीक्षा पे चर्चा एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसने वर्ष 2025 में अपने 8वें संस्करण के लिए 3.56 करोड़ पंजीकरण प्राप्त किए हैं। ये 7वें संस्करण में 2.26 करोड़ पंजीकरण हुए थे, जो 1.3 करोड़ पंजीकरणों की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। परीक्षा पे चर्चा न केवल एक लोकप्रिय कार्यक्रम बन गया है, बल्कि यह एक “जन आंदोलन” में भी बदल गया है। यह पूरे देश में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ गहराई से जुड़ गया है। परीक्षा के तनाव को दूर करने और छात्रों को परीक्षाओं को एक त्योहार – “उत्सव” के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। परीक्षा पे चर्चा में अधिकतम भागीदारी मानसिक सेहत और समग्र शिक्षा के महत्व के बारे में बढ़ती जागरूकता और स्वीकृति को दर्शाती है। कार्यक्रम का इंटरैक्टिव प्रारूप, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और प्रधान मंत्री के बीच खुला संवाद शामिल है, ने इसकी सफलता में और योगदान दिया है। परीक्षा पे चर्चा को “जन आंदोलन” के रूप में और मजबूत करने के लिए 12 जनवरी 2025 (राष्ट्रीय युवा दिवस) से 23 जनवरी 2025 (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती) तक स्कूल स्तर पर कई आकर्षक गतिविधियां आयोजित की गईं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को परीक्षा पे चर्चा को एक उत्सव के रूप में मनाने में शामिल करना था। कुल 1.42 करोड़ छात्र, 12.81 लाख शिक्षक और 2.94 लाख स्कूलों ने भाग लिया। ये गतिविधियां तनाव को कम करने, ध्यान केंद्रित करने और परीक्षा के दौरान और उसके बाद प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई थीं। छात्रों को खो-खो और कबड्डी जैसे स्वदेशी खेलों, छोटी दूरी की मैराथन, रचनात्मक मीम प्रतियोगिता, आकर्षक नुक्कड़ नाटक प्रदर्शनों और आकर्षक पोस्टर बनाने सहित विविध प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें छात्र प्रशंसापत्रों के माध्यम से अपने अनुभव साझा करने, छात्र-नेतृत्व वाली चर्चाओं में भाग लेने और विश्राम और मन की शांति विकसित करने के लिए योग और ध्यान सत्रों में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए नाटकों का आयोजन किया, कार्यशालाएं आयोजित कीं तथा अपने विचार साझा करने के लिए विशेष अतिथियों को आमंत्रित भी किया।  

मध्यप्रदेश के बाग प्रिंट शिल्पियों ने पुणे में विरासत हाट मेले में की भागीदारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के शिल्पियों को प्रोत्साहित करने एवं बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग शिल्पियों एवं हाथकरघा बुनकरों को देश के विभिन्न मेलों और उत्सवों में भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इससे प्रदेश की कला की देश में सराहना हो रही है। प्रदेश के बाग प्रिंट शिल्पियों ने पुणे में आयोजित विरासत हाट मेले में सहभागिता की। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्प गुरू मोहम्मद युसुफ खत्री और अब्दुल करीम खत्री ने भी भागीदारी की। प्रमुख हस्तियों ने शिल्पियों का मनोबल बढ़ाकर सराहना की। शिल्पियों का प्रदेश की बाग प्रिंट की लोक प्रियता महाराष्ट्र में फैलाते में अहम योगदान रहा।  

चार सौ करोड़ रुपये से बदलेगी इंदौर को रेलव स्टेशन की सूरत, सिंहस्थ तक तैयार हो जाएगा

 इंदौर इंदौर में मुख्य रेलवे स्टेशन के री-डेवलपमेंट का काम जल्दी ही शुरू होने वाला हैै। सिंहस्थ तक नया स्टेशन शुरू होगा। निर्माण अवधि में मुख्य रेलवे स्टेशन से चलने वाली रेल गाडि़यां लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन से संचालित होगी। मार्च तक अहमदाबाद की कंपनी काम शुरू कर देगी। इस प्रोजेक्ट पर साढ़े चार सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे। हाल ही में जारी हुए रेल बजट में भी इसके लिए राशि आवंटित हुई हैै। यहां रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधा से लैस होगा और बिल्डिंग भी चार मंजिला होगी। यात्री सुविधा पर भी रेल विभाग का फोकस रहेगा। 50 साल की जरुरतों के हिसाब से बनेगा नया रेलवे स्टेशन सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि नया रेलवे स्टेशन पचास साल की जरुरतों को ध्यान मेें रखकर बनाया जाएगा। इसके लिए आसपास की जमीन भी ली जाएगी। निर्माण करने वाली को वर्क आर्डर जारी किया जा चुका हैै। निर्माण अवधि के दौरान प्लेटफार्म का उपयोग भी होता रहे, इसे लेकर वर्कप्लान निर्माण एजेंसी से मांगा गया है। लक्ष्मीबाई नगर रोड स्टेशन से भी कुछ ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। नए रेलवे स्टेशन का विस्तार पार्क रोड तक होगा। यह सुविधाएं मिलेगी नए रेलवे स्टेशन में नए स्टेशन की बिल्डिंग एयरपोर्ट की तर्ज पर बनेगी। भीतर शाॅप, फूडजोन रहेंगे। यात्रियों के लिए आरामदायक फुट अेावर ब्रिज, एस्केलेटर, टिकट काऊंटर, शेड बनेंगे। वेटिंग रुप पहले की तुलना में बड़े व आधुनिक होंगे। यात्रियों के रुकने के लिए रुम, रुफ प्लाजा, प्लेटफार्म कवर क्षेत्र बनेंगे। रीगल पर बनने वाले मेट्रो स्टेशन को भी रेलवे स्टेेशन से जोड़ने की प्लानिंग के लिए अफसरों को कहा गया हैै। इसके अलावा मल्टीलेवल पार्किंग भी रहेगी, ताकि ज्यादा समय तक पार्क रहने वाली गाडि़यां व्यवस्थित रखी जा सके। पार्क रोड को भी नए स्टेशन से जोड़ा जाएगा। इंदौर रेलवे स्टेेशन पर नए प्लेटाफार्म भी एक सीध में बनेंगे। अभी प्लेटफार्म पर गेेप रहने के कारण हादसे होने का अंदेशा बना रहता है। नए रेलवे स्टेशन के लिए पार्किंग व पार्सल विभाग का हिस्सा भी यात्री सुविधा के लिए लिया जा सकता है। पार्सल विभाग को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। नए स्टेशन के निर्माण का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल किया था।  

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए लाहौर का गद्दाफी स्टेडियम महज 117 दिन के रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ तैयार: पीसीबी

लाहौर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने घोषणा की कि लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में नवीनीकरण और आधुनिकीकरण का काम 117 दिन के रिकॉर्ड समय में पूरा हो गया है और अब यह आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी सहित अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी के लिए तैयार है। पीसीबी ने एक बयान में कहा कि स्टेडियम में अब बेहतर सुविधाएं, नई फ्लडलाइट्स, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स, अधिक दर्शकों के बैठने की क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड और शीर्ष स्तर के एलईडी टावर हैं। पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी ने कहा, ‘मैं उन सभी लोगों का आभारी हूं जिन्होंने आशंकाओं और आलोचनाओं के बावजूद स्टेडियम को समय पर तैयार करने के लिए दिन-रात काम किया।’ हाल ही में यह बताया गया था कि पीसीबी काम पूरा करने में कम से कम पांच सप्ताह पीछे चल रहा है। पीसीबी को 12 फरवरी तक स्टेडियम को आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) को सौंपना है क्योंकि टूर्नामेंट एक सप्ताह बाद शुरू होगा। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ शुक्रवार को एक समारोह के दौरान स्टेडियम का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे जहां अली जफर, आइमा बेग और आरिफ लोहार जैसे प्रसिद्ध कलाकार प्रस्तुति देंगे। नकवी ने कहा, ‘मैं उन लगभग 1000 श्रमिकों का विशेष रूप से आभारी हूं जिन्होंने इस सपने को संभव बनाया है।’ नए स्टेडियम का परीक्षण आठ फरवरी को होगा जब पाकिस्तान और न्यूजीलैंड त्रिकोणीय श्रृंखला का पहला मैच खेलेंगे जिसकी तीसरी टीम दक्षिण अफ्रीका है। पीसीबी 11 फरवरी को कराची में राष्ट्रीय स्टेडियम का उद्घाटन करेगा जिसमें राष्ट्रपति आसिफ जरदारी के शामिल होने की उम्मीद है। नकवी ने स्वीकार किया है कि लाहौर, कराची और रावलपिंडी में तीन स्टेडियमों के आधुनिकीकरण का खर्च शुरुआती आवंटित बजट से अधिक हो गया है लेकिन उन्होंने कहा कि नए अत्याधुनिक स्थल भविष्य में पाकिस्तान क्रिकेट को अच्छी सेवा प्रदान करेंगे। पीसीबी ने शुरू में नवीनीकरण कार्य के लिए 12 अरब 80 लाख रुपये आवंटित किए थे लेकिन बजट 18 अरब रुपये से अधिक बताया जा रहा है। पीसीबी ने कहा कि इस कार्य के लिए सरकार सहित किसी अन्य स्रोत से कोई वित्तीय सहायता नहीं ली गई।

वर्ष 2025-26 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये घोषित किया गया

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 62 हजार 77 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। उन्होंने बताया है कि वर्ष 2025-26 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये घोषित किया गया है। यह गत वर्ष से 150 रूपये अधिक है। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि गेहूँ की विक्री के लिए समय-सीमा में पंजीयन जरूर करायें। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की बिक्री के लिए जिला बुरहानपुर में 2, बड़वानी में 17, खरगोन में 189, खंडवा में 339, अलीराजपुर में 13, झाबुआ में 776, धार में 4202, इंदौर में 9381, नीमच 134, मंदसौर 362, आगर-मालवा में 823, शाजापुर में 3710, देवास में 4035, रतलाम में 2211, उज्जैन में 11344, ग्वालियर में 55, शिवपुरी में 23, गुना में 23, दतिया में 142, अशोकनगर में 6, भिंड में 4, मुरैना में 96, श्योपुर में 43, छिंदवाड़ा में 157, सिवनी में 61, डिंडौरी में 21, कटनी में 14, नरसिंहपुर में 215, मंडला में 353, हरदा में 173, बैतूल में 362, नर्मदापुरम में 1793, विदिशा में 1563, राजगढ़ में 1096, रायसेन में 1969, भोपाल में 1975, सीहोर में 12596, सतना में 48, सीधी में 75, रीवा में 44, सिंगरौली में 19, मैहर में 3, उमरिया में 64, अनूपपुर में 9, शहडोल में 239, पन्ना में 37, सागर में 419, दमोह में 124, छतरपुर में 289, निवाड़ी में 88 और टीकमगढ़ में 341 किसानों ने पंजीयन कराया है।  

विशेषज्ञ, नीति निर्माता और निवेशक होंगे एक मंच पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक प्रयासों से औद्योगिक विकास के नए युग की ओर अग्रसर है। निवेशकों को अधिक प्रभावी अवसर देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य के प्रमुख 6 सेक्टर्स पर केंद्रित समिट के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। यह पहली बार होगा जब हर सेक्टर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और निवेशक एक मंच पर आकर विशेषज्ञ चर्चाओं, अवसरों और नीतिगत सुधारों पर संवाद करेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा। देश का आकर्षक डेस्टिनेशन बनता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विकसित बुनियादी ढांचा और उद्योग-अनुकूल नीतियां इसे निवेश के लिए देश का सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाती हैं। शहरी विकास, पर्यटन, माइनिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और एमएसएमई, ये सभी क्षेत्र अपनी असीमित संभावनाओं और अनुकूल वातावरण से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश न केवल देश का पहला डायमंड प्रोड्यूसिंग स्टेट है, बल्कि ग्रीन एनर्जी हब, विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र और उभरते हुए टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इन विभागीय समिट से सरकार निवेशकों को नीतिगत प्रोत्साहन, संसाधनों की उपलब्धता और औद्योगिक ईको सिस्टम की मजबूती से अवगत कराएगी। इससे जीआईएस में होने वाली चर्चाएं वास्तविक निवेश प्रस्तावों में तब्दील हो सकेंगी। शहरी विकास समिट मध्यप्रदेश का शहरी बुनियादी ढांचा तेजी से सुदृढ़ हो रहा है। राज्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स हब इसे एक आदर्श रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश डेस्टिनेशन बना रहे हैं। जीआईएस में शहरी विकास समिट के माध्यम से स्मार्ट और सतत् शहरों के निर्माण पर केंद्रित चर्चा होगी, जिससे नवाचार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन समिट मध्यप्रदेश को ‘भारत का दिल’ कहा जाता है और इसके धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौन्दर्य से पूर्ण पर्यटन क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। खजुराहो, उज्जैन, साँची, पचमढ़ी, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर उपलब्ध कराने के लिये तैयार हैं। पर्यटन समिट में हॉस्पिटैलिटी, थीम-बेस्ड डेस्टिनेशन और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश को बढ़ावा देने के लिए गहन चर्चा होगी।  माइनिंग समिट मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यह देश में डायमंड, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज और तांबे का प्रमुख उत्पादक है। पन्ना स्थित एशिया की एकमात्र डायमंड माइंस और विशाल कोयला भंडार राज्य को माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। जीआईएस में माइनिंग समिट से खनन आधारित उद्योगों, मूल्यवर्धित प्र-संस्करण और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा होगी। रिन्यूएबल एनर्जी समिट मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। रीवा सोलर प्लांट, ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और ग्रीन हाइड्रोजन में हो रहे विकास इसे नवकरणीय ऊर्जा निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जीआईएस में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट में सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए ठोस रणनीतियां प्रस्तुत की जाएंगी। आईटी एंड टेक्नोलॉजी समिट मध्यप्रदेश अब टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का केंद्र बन रहा है। इंदौर आईटी हब, डेटा सेंटर पॉलिसी, स्टार्ट-अप ईको सिस्टम और उभरते एआई और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्रों में तेजी से निवेश आ रहा है। जीआईएस में आईटी समिट के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आईटी पार्क और नई टेक्नोलॉजीज पर निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया जाएगा। एमएसएमई समिट मध्यप्रदेश का एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़ है, जहां लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना, नए क्लस्टर और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां इसे निवेश के लिए एक डेस्टिनेशन बना रही हैं। एमएसएमई समिट में उद्योगों को वित्तीय सहयोग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बाजारों तक पहुंच को लेकर चर्चा होगी। प्रवासी समिट मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीयों को प्रदेश के उद्योग, स्टार्ट-अप, पर्यटन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय समिट का उद्देश्य विश्वभर में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को एक मंच पर लाना और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ ही मध्यप्रदेश के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समिट मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी मिलेगा। इन विभागीय समिट से सरकार मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईएस के इस नए स्वरूप से न केवल उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। मध्यप्रदेश अब सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक भविष्य का निर्माण करने वाला प्रमुख राज्य बन रहा है।  

सिंहस्थ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ और हरियाली से आच्छादित रहेंगे, नगर निगम ने ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर काम शुरू किया

 उज्जैन  तीन साल बाद उज्जैन में लगने जा रहे महाकुंभ सिंहस्थ में 22 हजार 200 टन कचरा निकलने का अनुमान नगर निगम ने लगाया है। अनुमान है कि प्रतिदिन औसत 740 टन कचरा (सालिड वेस्ट) निकलेगा। इतने कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सरकार से 15220 सफाई कर्मचारी, 379 वाहन, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट की अपेक्षा की गई है। पिछली बार महाकुंभ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे, इस बार 13 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। ढाई से तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या बता दें कि 92.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उज्जैन शहर की आबादी सात लाख के करीब है। यहां ‘महाकाल महालोक’ के रूप में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर का विस्तार होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या ढाई से तीन गुना बढ़ गई है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कहना है कि उज्जैन शहर में रोजाना चार लाख 81 हजार लोगों का आवागमन होता है। रेलवे का कहना है कि वर्तमान में उज्जैन रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 36946 व्यक्ति ट्रेन से उतरते-चढ़ते हैं। पिछले सिंहस्थ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे सिंहस्थ के दरमियान ये संख्या 66132 हो सकती है। नगर निगम का कहना है कि अभी प्रतिदिन शहर से रोजाना औसत 240 टन (महीने में 7200 टन) कचरा निकलता है। पिछले सिंहस्थ के दौरान महीनेभर में सात करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आए थे, तब महीनेभर में 18700 टन कचरा निकला था। इसकी कीमत 150 रुपये प्रति टन के हिसाब से 28 लाख पांच हजार रुपये थी। इन सब आंकड़ों का अध्ययन, विश्लेषण करने के बाद ही नगर निगम ने सिंहस्थ के दौरान 22200 टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान लगाया है। इतने कचरे के एकत्रीकरण, परिवहन एवं सड़क-नाली की सफाई के लिए वाहन एवं कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया है। प्रारंभिक योजना से अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजोरा को अवगत कराया जा चुका है। ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर होगा काम पिछली बार की तरह इस बार भी यहां ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ अवधारणा पर काम होगा। इसका मतलब है कि महाकुंभ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ तो होगा ही हरियाली से आच्छादित भी होगा। नगर निगम हर संभव प्रयास करेगा कि मेला प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरा मुक्त हो। योजना, जीरो वेस्ट सिंहस्थ इवेंट की बनाई जा रही है। इसमें सारे कचरे का बेहतर तरीके से संग्रहण कर वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। शहर से 12 किलोमीटर दूर गोंदिया ट्रेचिंग ग्राउंड में भारत सरकार की नवरत्न कंपनी गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किए जाने वाले कम्प्रेस्ड बायोमिथिनेशन प्लांट की इसमें अहम भूमिका होगी। मच्छर मारने तक के होंगे इंतजाम सिंहस्थ में कचरा संग्रहण, सफाई कार्य के साथ मच्छर मारने तक के इंतजाम होंगे। पिछली बार मच्छरों को पनपने से रोकने और मलेरिया की रोकथाम पर सवा करोड़ रुपये खर्च हुए थे। घाट क्षेत्र में शाही स्नान वाले दिन सुगंधित स्प्रे भी किया था। ऐसा इस बार भी किए जाने की योजना है। सिंहस्थ 2028 के लिए बनाया जा रहा प्लान     सिंहस्थ-2028 के लिए कचरा प्रबंधन का विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। अभी आकलन में यह बात सामने आई है कि सिंहस्थ के दरमियान महीनेभर में 22 हजार 200 टन कचरा निकलेगा। कचरा प्रबंधन के लिए 15220 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, 379 वाहनों की खरीदी, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट बनाने का प्रस्ताव शासन को दिया जा रहा है। – आशीष पाठक, आयुक्त, नगर निगम, उज्जैन  

60 साल बाद त्रिग्रही योग में मनेगी महाशिवरात्रि, दूल्हा बनेंगे भोलेनाथ, चार प्रहर की साधना देगी धन, यश, प्रतिष्ठा व समृद्धि

ज्योतिष शास्त्र व पंचांग की गणना के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का पर्वकाल त्रिग्रही युति योग में मनाया जाएगा। इस योग में की गई शिव साधना मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है। शिव साधना की दृष्टि से ऐसा शुभ संयोग वर्ष 2025 से पहले सन 1965 में बना था। मकर राशि में तीन ग्रहों की युति रहेगी     ज्योतिषाचार्य  ने बताया कि महाशिवरात्रि 26 फरवरी को बुधवार के दिन श्रवण उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, वणिज उपरांत शकुनीकरण तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है।     जब भी कोई महापर्व आता है, तो ग्रह योग, नक्षत्र व संयोग देखा जाता है, क्योंकि ग्रहों की साक्षी एवं परिभ्रमण का प्रभाव जीवन पर पड़ता है। ग्रहों के परिभ्रमण का लाभ लेते हुए साधना की दृष्टि से जीवन को कैसे सुखमय बनाया जाए ज्योतिष शास्त्र इसका मार्ग बताते हैं।     महाशिवरात्रि पर मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य, बुध व शनि की युति कुंभ राशि में रहेगी। सूर्य व शनि पिता पुत्र हैं और सूर्य शनि की कक्षा अर्थात शनि की राशि कुंभ में रहेंगे।     इस दृष्टि से यह विशिष्ट संयोग भी है, यह योग लगभग एक शताब्दी में एक बार बनता है। इस योग में की गई साधना परम पद व आध्यात्मिक धार्मिक उन्नति प्रदान करती है। इस दृष्टि से इन योग संयोग में विशिष्ट साधना अवश्य करनी चाहिए। -महाशिवरात्रि का पूजन रात्रि में करने का है विशेष प्रावधान  इस वर्ष आठ मार्च की महाशिवरात्रि बेहद खास है। ज्योतिषविदों के अनुसार 60 साल के बाद शिव योग एवं सवार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रहों की शुभ युति के त्रिग्रही योग में मनाई जाएगी। इसमें सिद्धि योग एवं श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बना है। कुंभ राशि में सूर्य, शनि व शुक्र साथ मिलकर त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। ग्रहों की युति के साथ ही शिवयोग, प्रदोष व्रत एवं सवार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ बना यह संयोग लगभग तीन सौ साल के बाद आया है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा योग बेहद दुर्लभ और अकल्पनीय सुखद संयोग लेकर आता है। इस दिन की भगवान शिव के व्रत एवं अर्चन की तुलना सामान्य दिनों में होने वाले पूजन कार्यों से नहीं की जा सकती है। मेष, वृषभ, तुला, मकर एवं कुंभ राशि के लिए बेहद खास रहेगा यह संयोग। शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान है। इसके साथ ही सूर्यदेव अपने पुत्र एवं आदर्श शत्रु शनि की राशि कुंभ में चन्द्रमा के साथ विराजित रहेंगे। ग्रहों की ये स्थिति त्रिग्रही योग का निर्माण कर रही है। जो कि फलदायी है। रात्रि में ही क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ज्योतिषी महेश गुरु के अनुसार ईषान संहिता में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि रात्रि के द्वितीय पहर में शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। शिव यानि की रात्रि के प्रतीक हैं, और यह भूतेश्वर या भूतनाथ कहे जाते हैं। भूत आदि रात्रि में ही सक्रिय होते हैं। इस दिन में रात्रि में ही इनका प्रादुर्भाव होने की वजह से ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि पर चार प्रहर में यानि की चार बार पूजन का विधान आता है। पहले प्रहर में दूध से शिव के ईशान स्वरूप का, दूसरे प्रहर में दही से अघोर स्वरूप का, तीसरे प्रहर में घी से वामदेव रूप का और चौथे प्रहर में शहद से सद्योजात स्वरूप का अभिषेक कर पूजन करना चाहिए। यदि कन्याएं चार बार पूजन न कर सकें, तो पहले प्रहर में एक बार तो पूजन अवश्य ही करें। महाशिवरात्रि की रात महासिद्धिदायिनी होती है। इस रात्रि को निशा रात्रि भी कहते हैं। यानि की चारों ओर घोर अंधकार की स्थिति में शिवलिंग का उद्भव अंधकार में प्रकाश का भी प्रतीक माना जाता है। पूजा पद्धति सात्विक व शाक्त अलग-अलग विधियों से संपन्न कराई जाती है। इसी दिन शिव एवं पार्वती का पाणीग्रहण भी हुआ था। इस वजह से भी पूरी रात्रि को उत्सव की तरह मनाया जाता है। रात्रि पूजन का है विशेष विधान महाशिवरात्रि पर ऐसे की जा सकती है पूजा पूरी तरह से शुद्ध होने के बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा की जा सकती र्है। पहले शिवलिंग में चंदन का लेप करने के साथ ही पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। इसमें गन्ने के रस, कच्चे दूध, या शुद्ध घी से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके पश्चात महादेव को बेलपत्र, धतूरा, जायफल, कमल गट्टे, फल, फूल, मिठाई, मीठा पान, इत्र आदि अर्पित करना चाहिए। अर्चन सदैव पूर्वाभिमुखी या फिर उत्तरामुखी करनी चाहिए। इसके पश्चात शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के साथ शिव ताण्डव स्तोत्र आदि का पाठ किया जा सकता है। व्रत रहने वाले को पूरा दिन निराहार रहना चाहिए। रोगी या अशक्त फलाहार कर सकते हैं। व्रत रखने वाले को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक भी किया जाता है। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करने का विधान है। इसमें पूजन तो चारों पहर में होता है, लेकिन मध्यरात्रि की पूजा को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।  

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