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Milkipur By-Election Result 2025 : मिल्कीपुर उपचुनाव में तीसरे राउंड की गिनती पूरी, बीजेपी के चंद्रभानु पासवान 10, 170 वोट से आगे

नई दिल्ली दिल्ली चुनाव में अब नतीजे का वक्त आ गया है. सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू हो गई है. 11 जिलों के 19 केंद्रों पर काउंटिंग चल रही है. शुरुआती रुझान में बीजेपी आगे चल रही है. AAP भी कड़ी टक्कर दे रही है. राजधानी में 5 फरवरी को वोट डाले गए. कुल 60.54 प्रतिशत वोट पड़े थे. दिल्ली में विधानसभा चुनाव के नतीजे की घड़ी आ गई है. वोटों की काउंटिंग चल रही है. शुरुआती रुझान में बीजेपी आगे चल रही है. AAP भी कड़ी टक्कर दे रही है. AAP के कई दिग्गज नेता पीछे चल रहे हैं. दिल्ली में कुल 70 सीटें हैं और बहुमत के लिए 36 सीटें होना जरूरी है. सुबह से हर किसी की निगाहें इस बात पर रहीं कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) लगातार तीसरी बार जीत हासिल करती है या बीजेपी राजधानी में 27 साल के सत्ता के सूखे को खत्म करेगी. वहीं, पिछले दो चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई कांग्रेस को भी इस चुनाव से काफी उम्मीदें हैं.  रुझानों में कांटे की टक्कर रुझानों में बीजेपी और AAP के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. अब तक BJP 39 सीटों पर आगे है. जबकि AAP भी 30 सीटों पर आगे है. एक सीट पर कांग्रेस आगे है. ओखला में बीजेपी आगे नजफगढ़ से बीजेपी 4383 वोटों से आगे है. मटियाला सीट से बीजेपी 2862 वोटों से आगे है. उत्तमनगर से बीजेपी 2223 वोटों से आगे है. द्वारका सीट से बीजेपी 1257 वोटों से आगे है. बिजवासन सीट और पालम सीट पर भी बीजेपी आगे है. पटेलनगर में बीजेपी के राजकुमार आनंद आगे हैं. ओखला सीट से लगातार बीजेपी आगे है. पहले राउंड की गिनती पूरी हो गई है.  ग्रेटर कैलाश में सौरभ भारद्वाज पीछे ग्रेटर कैलाश से AAP के सौरभ भारद्वाज पीछे चल रहे हैं. बीजेपी की शिखा राय आगे हैं. मटियाला सीट से बीजेपी के संदीप सहरावत आगे हैं. कोंडली सीट से बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका गौतम आगे हैं. मादीपुर सीट से बीजेपी के कैलाश गंगवाल आगे हैं. AAP की उम्मीदवार राखी बिरला पीछे हैं. रुझानों में बीजेपी की लहर देखी जा रही है. बीजेपी 45 और AAP 24 सीटों पर बढ़त बनाए है. एक सीट पर कांग्रेस आगे है.  जंगपुरा में सिसोदिया भी आगे जंगपुरा सीट पर भी उलटफेर हुआ है. AAP के मनीष सिसोदिया दो राउंड की गिनती के बाद 1800 वोटों से बढ़त बनाई है. हालांकि, आतिशी अभी भी पीछे चल रही हैं.  उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज शनिवार को जारी होंगे. मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है. सपा नेता अवधेश प्रसाद के फैजाबाद से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई इस सीट पर बुधवार को उपचुनाव हुआ. समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच यहां मुख्य मुकाबला है. ये उपचुनाव समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है. कारण, यह सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अयोध्या जिले का हिस्सा है. दरअसल, 2024 में फैजाबाद लोकसभा सीट जीतने के बाद सपा नेता अवधेश प्रसाद के मिल्कीपुर सीट खाली करने के बाद यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी है. अब, जबकि सपा इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, भाजपा इस चुनाव को फैजाबाद में अपनी हार का बदला लेने के अवसर के रूप में देख रही है. कारण, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर अयोध्या जिले की एकमात्र विधानसभा सीट थी, जिसे भाजपा हार गई थी. बुधवार को हुए उपचुनाव में पड़े 65 फीसदी वोट मिल्कीपुर सीट पर हुए बुधवार को हुए उपचुनाव में कुल 3.70 लाख मतदाताओं में से 65 प्रतिशत से अधिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो 2022 के विधानसभा चुनावों में दर्ज किए गए मतदान से अधिक है. चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान पूरा होने तक 65.35 फीसदी वोट पड़े. 2022 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर वोटिंग प्रतिशत 60.23 था. पांचवें राउंड के बाद- BJP- 27115 वोट सपा- 12850 वोट आजाद समाज पार्टी- 835 वोट अन्य- 1172 वोट कुल- 41972 अब बीजेपी 14220 वोटों से आगे मिल्कीपुर चुनाव में बीजेपी 14220 वोटों से आगे. बीजेपी के चंद्रभानु पासवान सपा के अजीत प्रसाद से पांचवें राउंड में भी आगे. आजाद समाज पार्टी को 549 वोट मिले  अभी तक की काउंटिंग में बीजेपी को 17123, सपा को 7000 जबकि, आजाद समाज पार्टी को 549 वोट मिले हैं. कुल 25407 वोटों की गिनती हुई है.      चौथे राउंड में भी बीजेपी आगे मिल्कीपुर चुनाव में बीजेपी 11635 वोटों से आगे. बीजेपी के चंद्रभानु पासवान सपा के अजीत प्रसाद से चौथे राउंड में भी आगे चल रहे हैं.  

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं-12वीं की परीक्षा 24 फरवरी से होगी शुरू, इन विद्यार्थियों को मिलेगा एक घंटा ज्यादा

भोपाल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से आयोजित की जा रही है। बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए कई सुविधाएं दी गई हैं। वे अपने साथ लेखक को ले जा सकेंगे। साथ ही कंप्यूटर या टाइप राइटर चयन की सुविधा भी दी गई है। इन सभी की जानकारी स्कूलों को 15 फरवरी तक माशिमं को उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा इन विद्यार्थियों को तीन घंटे की परीक्षा के दौरान एक घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके लिए माशिमं ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। 21 प्रकार की दिव्यांगता से पीड़‍ित विद्यार्थियों को विशेष सुविधा माशिमं ने 21 प्रकार की दिव्यांगता को विशेष सुविधाओं में शामिल किया है। इसमें दृष्टिबाधित, मानसिक कमजोर एवं हाथ की हड्डी टूट जाने या हाथ की खराबी के कारण लिखने में असमर्थ, थैलेसीमिया व सिकल सेल से पीड़ित सहित अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों को यह राहत मिलेगी। मंडल ने निर्देश दिए हैं कि सभी दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रायोगिक परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्नों के आधार पर मूल्यांकन करते हुए अंक प्रदान किए जाने की सुविधा रहेगी। ये बहुविकल्पीय प्रश्न बाह्य मूल्यांकनकर्ता द्वारा तैयार किए जाएंगे। मेरिट के विद्यार्थियों को जल्द मिलेगी लैपटाप की राशि मेरिट में शामिल स्कूलों के विद्यार्थियों को अब जल्द ही लैपटाप के लिए राशि भी दी जाएगी। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयारी प्रारंभ कर दी है। गुरुवार को ही प्रावीण्य सूची के विद्यार्थियों को स्कूटर का वितरण किया गया है। सभी जिलों को राशि भी उपलब्ध करा दी गई है, ताकि विद्यार्थी अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल या इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीद सकें। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि सरकार अपनी सभी योजनाओं का संचालन कर रही है। मेरिट में आए विद्यार्थियों को स्कूटर लेने के लिए राशि जिलों में पहुंचा दी गई है। आधुनिक समय में बच्चों के बौद्धिक विकास में लैपटाप सहायक है, जल्द ही कार्यक्रम आयोजित कर लैपटाप के लिए राशि दी जाएगी। विद्यार्थियों को जो अपनी प्रतिभा, मेहनत व लगन के बल पर उपलब्धि अर्जित कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना राज्य शासन का दायित्व है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भंडारी के निवास पहुंचकर उनकी माताजी के निधन पर शोक व्यक्त किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को अपने इंदौर भ्रमण के दौरान श्री अरविंदो मेडिकल कॉलेज के संस्थापक डॉ. विनोद भंडारी के परदेशीपुरा क्लर्क कॉलोनी स्थित निवास पहुंच कर डॉ. विनोद भंडारी की माताजी श्रीमती उषा भंडारी के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त भंडारी परिवार को यह दुख सहन करने की ईश्वर से प्रार्थना की। ज्ञात रहे है कि भंडारी परिवार ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्व. श्रीमती उषा भंडारी का देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिये किया। श्रीमती भंडारी आजीवन शिक्षक के रूप में अनगिनत विद्यार्थियों को ज्ञान से शिक्षित और संस्कारों से दीक्षित करती रहीं। सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा, विधायक श्री गोलु शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।  

महाकुंभ में एयरलाइंस कंपनियां वसूल रही मनमाना किराया, रायपुर से प्रयागराज 36 हजार रुपये

रायपुर महाकुंभ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से एयरलाइंस कंपनियां मनमाना किराया वसूल रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी रायपुर से प्रयागराज का किराया 38 हजार तक वसूला जा रहा है। 24 फरवरी तक 26 हजार लिया जाएगा। इसके बाद कुंभ के समापन पर प्रयागराज का किराया महज 5,400 रुपये हो जाएगा। बता दें कि रायपुर से दुबई का किराया 24 हजार रुपये, सिंगापुर का किराया 32 हजार रुपये, नेपाल के काठमांडू की हवाई टिकट तो एक तिहाई खर्च में ही मिल जाएगी। इतना ही नहीं श्रीलंका की राजधानी कोलंबो जाने के लिए भी करीब आधा ही किराया चुकाना होगा। चौंकाने वाली बात है इन देशों का किराया भी प्रयागराज से कम है। अहम बात यह है कि देश के अन्य हवाई अड्डों से प्रयागराज के लिए 50 हजार से 76 हजार रुपये तक टिकट का रेट कर दिया है। जानिए कहां का है कितना किराया     38,000 रुपये रायपुर से प्रयागराज का किराया।     24,043 रुपये रायपुर से दुबई का किराया।     32,651 रुपये रायपुर से सिंगापुर का किराया।     12,456 रुपये रायपुर से काठमांडू का किराया।     17 हजार रुपये रायपुर से कोलंबो का टिकट। श्रद्धालुओं को किया आश्वस्त, वापस दिलाएंगे पैसा छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी ने इसके लिए आवाज उठाई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नोटिस भेजते हुए 5,000 करोड़ का जुर्माना लगाने की मांग की है। डॉ. कुलदीप सोलंकी ने प्रयागराज गए फ्लाइट यात्रियों से आग्रह किया है कि अपनी पीड़ा तथा टिकट की कॉपी ईमेल पर साझा करें। उन्होंने इसके लिए ईमेल आईडी भी जारी की है। मंत्री से कीं ये चार मांगें डॉ. कुलदीप सोलंकी ने नागरिक उड्डयन मंत्री भारत सरकार को कारण बताओ नोटिस देते हुए चार मांगे की हैं।     सभी एयरलाइंस के टैरिफ तीन महीने पहले के एल्गोरिदम के हिसाब से किया जाएं।     फैज अहमद किदवई डायरेक्टर जनरल को तुरंत बर्खास्त किया जाए।     जिन यात्रियों से विगत एक माह में ओवरचार्ज किया है, उनको 7 दिनों में पैसे वापस करें।     महाकुंभ के दौरान दोषी एयरलाइंस पर 5,000 करोड़ का जुर्माना लगाया जाए और जुर्माने की राशि से नए एयरपोर्ट का निर्माण किया जाए।  

प्रदेश के सांसद-विधायक त्रिवेणी संगम में लगाएंगे डुबकी, विस अध्यक्ष रमन सिंह ने दिया आमंत्रण

रायपुर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के विधायकों और सांसदों को महाकुंभ में स्नान के लिए 13 फरवरी को प्रयागराज चलने का आमंत्रण दिया है. यात्रा के लिए सांसद संतोष पांडेय और विधायक सुशांत शुक्ला से संपर्क करने को कहा गया है. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के सांसदों और विधायकों के नाम लिखी चिट्ठी में बताया कि गंगा-यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम तट पर आयोजित महाकुंभ में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सभी को प्रयागराज आमंत्रित किया है. विधानसभा अध्यक्ष ने पत्र में बताया कि लाखों वर्षों से आयोजित हो रहे सनातन धर्म के इस महानतम अनुष्ठान को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार और अधिक भव्य रूप में आयोजित किया है. यही नहीं संगम तट पर छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए विष्णुदेव साय सरकार की ओर से आवास व भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की है, जिसकी पूरे देश में प्रशंसा हो रही है.

बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा

छतरपुर ‘बुंदेलखंड’ के नाम के साथ ही सूखा ग्रस्त इलाका, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याएं जुड़ी हुई हैं। पानी के संकट से जूझते इस पूरे इलाके को पानीदार बनाने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट की आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने किया। चंदेल कालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने में मप्र का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संरक्षण पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं (NGO), और पब्लिक की मदद से काम करेगी। जल संरक्षण पर काम कर रही गैर सरकारी संस्थाओं ने ओरछा में वर्कशॉप आयोजित की। इस कार्यशाला में जल पुरुष राजेंद्र सिंह, मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और जल संरक्षण पर काम करने वाले संजय सिंह तमाम एक्सपर्ट्स ने मंथन किया। चंदेल राजाओं ने बनवाए बांध, तालाब और बावड़ियां बुंदेलखंड मप्र और उप्र के 7-7 जिलों में बंटा हुआ है। इस इलाके में 9वीं से 16वीं शताब्दी तक चंदेलों का शासन रहा है। पानी की कमी से यह इलाका हमेशा जूझता रहा है। चंदेल राजाओं ने बरसाती पानी को सहेजने के लिए 2 पहाड़ों के बीच पत्थर और मिट्‌टी का प्रयोग करते हुए बांधों का निर्माण कराया। पहाड़ियों के तराई इलाके में बरसाती पानी इकट्‌ठा हो सके। इन तालाबों को बनाने में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया। जिसमें एक तालाब के भरने पर वेस्टवियर के जरिए उसके तराई इलाके का तालाब भर सके। इन तालाबों के साथ ही बावड़ियां भी बनवाई गई। ताकि तालाबों और बांधों के किनारे की बावड़ियां भर सकें। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं।। पानी पर काम करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- उन तालाबों में डीसिल्टिंग की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं हैं। क्योंकि वहां का जो डेटा हमारे पुरखों ने बनाया उसमें कोई नुकसानदेह चीजें नहीं हैं। पानी की आवक को निरंतर करना। अगर कोई अतिक्रमण है तो उनको दूर करना। पानी आने के रास्तों को खोलने के लिए प्रशासनिक जरूरत पड़ती है। ऐसी कोई जानकारियां जो वहां पर काम करने वाले लोग हैं या फिर जो जल के क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं उनके कोई सुझाव हैं। जो भी सुझाव विमर्श में सामने आएंगे उसके लिए सरकार कटिबद्ध है। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए पानी पर काम करना ही होगा। ये हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। पानी के रास्ते में बनी सड़कों पर विभाग बनवाएगा पुलिया मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- हमें एक बार चिह्नित करना पडे़गा कि हम शुरुआत कहां से करें। दमोह में मैने किया था बेलाताल में एसपी के सामने पुलिया थी, उसे हमने तोड़ दिया था। मुझे लगता है कि कैचमेंट खोलना हमारे नैतिक बल पर निर्भर करता है। प्रशासन की जरूरत तब पडे़गी तब वहां कोई अवरोध पैदा करे। दूसरी बात ये है कि अगर सीसी रोड बना दिया तो वहां पुलिया बनानी पडे़गी। ऐसे निर्माण की गारंटी हम जैसे मंत्रालय के लोग ही ले सकते हैं। आप बरसात के पहले पुलिया बना दो, अन्यथा वो फिर समस्या पैदा होगी। पानी आएगा तो रास्ता रुक जाएगा। हमारी मानवीय भूलों के कारण जो अवरोध पैदा हुए हैं। उसमें किसी बदलाव की जरूरत पड़ती है। तो फिर उसे हम अपने विभाग की प्राथमिकता में शामिल करेंगे। पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण पर काम करने वाली जल सहेलियों (महिलाओं के समूह) ने 2 फरवरी को ओरछा से यात्रा शुरू की है। जल सहेलियों की यह 18 दिवसीय यात्रा ओरछा के कंचना घाट से शुरू होकर छतरपुर के जटाशंकर धाम में पूरी होगी। इस यात्रा के दौरान जल सहेलियां गांव-गांव जाकर जल संरक्षण का संदेश देंगी और लोगों को जल प्रबंधन के महत्व को समझाएंगी।

आयुष्मान योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना: नड्डा

नईदिल्ली सरकार ने कहा है कि मेडिसिन प्लांट्स को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है और देश के साथ ही विदेशों में भी इसके संवर्धन पर ध्यान दिया जा रहा है। लोकसभा में आयुष मंत्री प्रताप राव गणपत राव ने एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद आयुष मंत्रालय का गठन हुआ और पांच देशों के साथ मेडिकल प्लांट्स के संवर्धन के लिए सरकार ने समझौता किया है। उन्होंने कहा कि देश में भी इन पौधों का बड़े स्तर पर संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है। सरकार का प्रयास विदेशों में भी समझौता के तहत इन पौधों के संवर्धन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि देश से लगभग 4000 मेडिसिन प्लांट का निर्यात किया जा रहा है। आयुष्मान योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना: नड्डा स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एक सवाल की जवाब में लोकसभा में कहा की आयुष्मान योजना दुनिया की स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी योजना है। जो लोग पहले पैसे के अभाव में अस्पताल में इलाज करवाने नहीं जा सकते थे उन्हें अब इस योजना के तहत अस्पतालों में इलाज मिल रहा है। आयुष्मान भारत के तहत देश की 40% आबादी को कवर किया गया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है और 2018 तक इसमें 35 लाख कार्यकर्ता जुड़े हुए थे। देश में कुल 61 करोड़ से ज्यादा लोगों को आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य कर सेवा दी गई है। अब तक अस्पताल 8.6 करोड़ लोगों को इस योजना के तहत लाभ दिया जा चुका है। देश में बड़े स्तर पर लोगों की जीवन को इस योजना के तहत बचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 30000 अस्पताल के माध्यम से बाईपास सर्जरी जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यदि कोई समस्या इस पर आती है तो राज्य सरकारों के साथ मिलकर इसकी समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत केंद्र सरकार सभी सुविधा दे रही है और समय पर पैसे का भुगतान भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो गरीब अस्पताल जाने से कतराते थे आयुष्मान भारत के तहत उन्हें सारी सुविधाएं अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही है।

नया किराएदारी एक्ट पूरे प्रदेश में ग्रामीण, शहरी, व्यावसायिक आदि सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा

भोपाल  मॉडल किराएदारी एक्ट का विधानसभा के बजट सत्र में भी पेश हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है। क्योंकि इसके ड्राफ्ट में फिर बदलाव किया जा रहा है। दरअसल, केन्द्र के निर्देश हैं कि सभी राज्यों का मॉडल किराएदारी एक्ट एक समान होना चाहिए। इसके लिए मंत्रालय से ड्राफ्ट फिर से नगरीय विकास संचालनालय को भेजा गया है। इसका पूरा रिव्यू होगा। इसके बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजा जाएगा। समिति में हर पहलू पर विचार होने के बाद जो सुझाव या आपत्तियां आएंगी। उनके अनुसार ड्राफ्ट में फिर संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद ड्राफ्ट कैबिनेट के समक्ष पेश होगा। विधानसभा में होगा पेश कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यह एक्ट विधानसभा में पेश किया जाएगा। वर्तमान में किराएदारी अधिनियम 2010 केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। नया एक्ट पूरे मध्य प्रदेश में ग्रामीण, शहरी, व्यावसायिक आदि सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा। केन्द्र ने मॉडल किराएदारी अधिनियम बनाया है। इसके आधार पर ही प्रदेश में मॉडल किराएदारी अधिनियम बनाया गया है। अलग से बनेगा पोर्टल इसमें नए सिरे से किराएदारी संबंधी विवाद सुलझाने की व्यवस्था की गई है। जिससे न्यायालय जाने की जरूरत नहीं होगी। जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर स्तर का अधिकारी होगा। किराया न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर कोर्ट होगा। इसके साथ अपील के लिए जिला जज की अध्यक्षता में एक रेंट ट्रिब्यूनल गठित होगा। किराएदारी की पूरी जानकारी रखने के लिए अलग से एक पोर्टल भी बनाया जाएगा। इसमें किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है।

इंदौर नगर निगम ने मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम शुरू करने की पूरी तैयारी, 2875 मकान तोड़े जाएंगे

इंदौर  इंदौर नगर निगम भले ही दावा करे कि उसने मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अब तक विस्थापन को लेकर कोई नीति तय ही नहीं हुई है। मास्टर प्लान की 23 सड़कों के निर्माण में 2875 मकान बाधक हैं। इनमें से करीब 650 ऐसे हैं, जो पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे यानी इन मकानों में रह रहे लोगों को वैकल्पिक स्थान देने के अलावा नगर निगम के पास कोई चारा नहीं है। चौड़ीकरण में जा रहा मकान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मास्टर प्लान की सड़कों को लेकर हुई विभागों की बैठक में कहा था कि जो लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं और जिनका पूरा मकान चौड़ीकरण में जा रहा है, उन्हें वन बीएचके नहीं, कम से कम टू या थ्री बीएचके फ्लैट दिए जाएं। फ्लैट नहीं हैं समस्या यह है कि नगर निगम के पास शहरी क्षेत्र में कहीं भी टू या थ्री बीएचके फ्लैट नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब निगम के पास टू और थ्री बीएचके फ्लैट उपलब्ध ही नहीं हैं तो विस्थापितों को देंगे कैसे। अब तक निगम ने यह भी तय नहीं किया है कि किस व्यक्ति को कहां विस्थापित किया जाएगा। किसे क्या मिलेगा, यह अब तक तय नहीं सड़क चौड़ीकरण में जिन लोगों के मकान शत प्रतिशत जाते हैं, उन्हें नीति के तहत नगर निगम प्रधानमंत्री आवास योजना में तैयार किए गए वन बीएचके फ्लैट देता रहा है। शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 12 हजार आवास तैयार किए गए थे, जिनमें से करीब चार हजार अब भी खाली हैं, लेकिन ये सभी शहर के बाहरी इलाकों में हैं। समस्या यह भी है कि नगर निगम ने अब तक ऐसी कोई सूची तैयार नहीं की है, जिससे यह पता चल सके कि किस व्यक्ति को कहां फ्लैट दिया जाएगा। अब तक चली आ रही नीति में एक समस्या यह भी है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए एक हजार वर्गफीट का मकान देने वाले और 200 वर्गफीट का मकान देने वालों को एक ही चश्मे से देखा जाता है। मध्यप्रदेश में शहरों को संवारने की कवायद चल रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर में मास्टर प्लान की 23 सड़कों का निर्माण किया जाना है। चार पैकेज में बांटे गए इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में हर पैकेज की दो-दो सड़कों को लिया गया है। सड़क निर्माण के लिए हजारों मकान दुकान तोड़े जाएंगे जिससे भवन मालिक बेचैन हो गए हैं। इधर, सड़कों का काम जल्द शुरू हो, बाधक हटाने में विवाद न हो और गुणवत्तापूर्ण निर्माण हो, इसके लिए विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक, सांसद और एमआइसी सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक की।  नई सड़कों के लिए छोटे-बड़े करीब 3 हजार बाधक मकान और धार्मिक स्थल चिन्हित किए गए हैं। जिनके पूरे मकान तोड़े जाने हैं, उन्हें जनप्रतिनिधियों ने प्लॉट देने की पैरवी की। अफसरों ने कहा कि यह प्रावधान नहीं है, हम सिर्फ फ़्लैट दे सकते हैं, वह भी वन बीएचके। इस पर मंत्री विजयवर्गीय ने कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि वह टू या थ्री बीएचके का फ़्लैट देने का प्रपोजल दें, मैं स्वीकृति दूंगा। बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कुछ हजार लोगों के लिए लाखों लोगों को सड़क का लाभ मिलने से वंचित नहीं किया जा सकता। शहर हित में कड़े निर्णय लेना जरूरी है। विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि भमोरी में कई लोगों की दुकानें जा रही हैं। ऐसे तो व्यापारी मर जाएंगे। विजयवर्गीय ने दो टूक कहा कि ऐसा ही रहा तो काम ही नहीं कर पाएंगे। मकान की व्यवस्था करेंगे, दुकान की नहीं। विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि सड़क को 80 फीट की कर दें। विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि शहर पहले ही छोटा पड़ रहा है। आप 1000 लोगों की चिंता मत करो, 40 लाख लोगों की करो। सड़क छोटी कर दोगे तो 10 साल बाद फिर कुछ करना पड़ेगा। बैठक में एक अहम मसला उठा। निगम ने गणेशगंज में कुछ लोगों को विंध्यांचल कॉलोनी में एक बिल्डर के यहां शिफ़्ट करवाया था। इसके बाद से अफसरों ने इस बिल्डिंग को खाली नहीं करवाया है। इसकी शिकायत मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंची तो समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि विस्थापितों को मकान देने के बाद भी निजी बिल्डिंग खाली नहीं करवाई है। काकाजी का राज चल रहा है क्या। किसी की भी बिल्डिंग ले लोगे। 15 दिन में बिल्डिंग खाली हो जानी चाहिए। विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि पाटनीपुरा में तीन मंजिला दुकान तोड़ी थी। उसके बदले मकान आज तक नहीं मिला। एक पार्षद ने कहा कि एरोड्रम से छोटा बांगड़दा क्षेत्र में निगम की दो प्रॉपर्टी में से एक पर धर्मशाला तो दूसरे पर स्कूल बन गया है। मंत्री ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक में विधानसभावार प्रेजेंटेशन देखा। बताया गया कि शहर के पुराने मकानों में पीढ़ियों से लोग रह रहे हैं। उनके लिए बीच का रास्ता निकालना चाहिए, सड़क की चौड़ाई कम करने पर भी विचार होना चाहिए। विजयवर्गीय ने अफसरों से कहा कि व्यक्तिगत जाकर सर्वे करो, अगर पूरे मकान जा रहे हैं तो कुछ करेंगे। मेरा मार्गदर्शन लेना, मैं तो निर्दयी हूं। किसी का भी वार्ड हो, मास्टर प्लान की सड़क को लेकर काम होना चाहिए। ऐसी कोई योजना भी बनाएं, जिसमें पीड़ितों को प्लॉट मिल सकें। जहां सड़क निर्माण होगा, वहां नगर निगम बोर्ड चस्पा करेगा। इसमें लागत, ठेकेदार, समय सीमा और सुपरविजन करने की जानकारी दी जाएगी। महापौर हर 15 दिन में इसकी समीक्षा कर रिपोर्ट मंत्री विजयवर्गीय को देंगे। मंत्री ने कहा कि यदि कहीं धार्मिक स्थल की बाधा है तो हम बात करेंगे।

पब्लिक सेक्टर बैंकों का जोरदार प्रदर्शन, 9 महीनों में 1.29 लाख करोड़ रुपए का कमाया लाभ

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर) में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की ओर से 1.29 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया गया, जो सालाना आधार पर 31.3% की बढ़ोतरी दर्शाता है। वित्‍त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पीएसबी ने अब तक का उच्चतम कुल शुद्ध लाभ, बेहतर एसेट क्वालिटी, व्यापार में मजबूत बढ़ोतरी और पर्याप्त पूंजी बफर हासिल किया है। वहीं, नीति और प्रक्रिया सुधारों की वजह से क्रेडिट अनुशासन, तनावग्रस्त एसेट की पहचान और समाधान, जिम्मेदार लेंडिंग, बेहतर प्रशासन, वित्तीय समावेशन पहल, प्रौद्योगिकी अपनाने आदि के लिए प्रणालियां और प्रक्रियाएं बेहतर हुई हैं। 242.27 लाख करोड़ रुपये रहा कुल कारोबार मंत्रालय ने कहा कि 0.59 प्रतिशत के काफी कम शुद्ध एनपीए रेश्यो से भी बेहतर एसेट क्वालिटी का पता चलता है। सरकारी बैंकों ने 9.8 प्रतिशत की बेहतर कुल जमा वृद्धि के साथ सालाना 11 फीसदी की कुल व्यावसायिक वृद्धि दर्ज की है। समीक्षाधीन अवधि में सरकारी बैंकों का कुल कारोबार 242.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इन बैंकों ने 12.4 प्रतिशत की मजबूत ऋण वृद्धि भी दर्ज की। इसमें खुदरा ऋण वृद्धि 16.6 प्रतिशत, कृषि ऋण वृद्धि 12.9 प्रतिशत और एमएसएमई ऋण वृद्धि 12.5 प्रतिशत रही। बेहतर स्थिति में हैं सरकारी बैंक बयान के अनुसार, 14.83 प्रतिशत के जोखिम भारित परिसंपत्तियों के अनुपात के साथ पर्याप्त पूंजी बफर का निर्माण 11.5 प्रतिशत की न्यूनतम आवश्यकता से काफी अधिक था। मंत्रालय ने कहा, ”सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पर्याप्त पूंजीकृत हैं और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों की ऋण मांगों को पूरा करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं, जिसमें कृषि, एमएसएमई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर विशेष जोर दिया गया है।” वित्त मंत्रालय ने कहा कि नीति और प्रक्रिया संबंधी सुधारों के चलते ऋण अनुशासन, संकटग्रस्त परिसंपत्तियों की पहचान और समाधान, बेहतर संचालन व्यवस्था, वित्तीय समावेश पहल और प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए बेहतर प्रणाली को बढ़ावा मिला है। आपको बता दें, मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन ने प्रमुख वित्तीय मापदंडों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है। 31दिसंबर 2024 तक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं –     वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में 31.3% (वर्ष-दर-वर्ष) की रिकॉर्ड शुद्ध लाभ वृद्धि, 1,29,426 करोड़ रुपये का उच्चतम कुल शुद्ध लाभ और 2,20,243 करोड़ रुपये का कुल परिचालन लाभ प्राप्त हुआ।     0.59% के बेहद कम नेट एनपीए अनुपात (कुल शुद्ध बकाया एनपीए 61,252 करोड़ रुपये) के साथ एसेट क्वालिटी बेहतर दिखाई दे रही है।     सकल व्यावसायिक वृद्धि 11.0% (वर्ष-दर-वर्ष) के साथ समग्र जमा वृद्धि 9.8% (वर्ष-दर-वर्ष) रही। पीएसबी का कुल कारोबार 242.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।     16.6% की रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, 12.9% की कृषि क्रेडिट ग्रोथ और 12.5% ​​की एमएसएमई क्रेडिट ग्रोथ के चलते 12.4% की मजबूत क्रेडिट ग्रोथ हुई ।     14.83% के रिस्क वेटेड एसेट अनुपात वाली कुल पूंजी के साथ पर्याप्त पूंजी बफर्स का निर्माण हुआ, जो 11.5% की न्यूनतम आवश्यकता से काफी ऊपर है। मंत्रालय ने बताया कि पीएसबी पर्याप्त रूप से पूंजीकृत हैं और कृषि, एमएसएमई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर विशेष जोर देने के साथ अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों की क्रेडिट की मांगों को पूरा करने के लिए तैयार हैं।  

मौसम विभाग ने जारी किया पूर्वानुमान, शीतलहर का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा, अगले 2 दिन बढ़ेगा पारा

राजस्थान राजस्थान के हाड़ौती अंचल में पिछले दो दिनों से जारी शीतलहर ने सर्दी का असर बढ़ा दिया है। रात के समय गलन बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे हैं। कोटा शहर में भी शीतलहर का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बुधवार रात को कोहरा छाया था, जिसके परिणामस्वरूप गुरुवार सुबह गलन में वृद्धि हुई। स्कूली बच्चे ठिठुरते हुए विद्यालय पहुंचे, लेकिन सुबह 8 बजे के बाद धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली और वे धूप सेंकते नजर आए। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तरी हवाओं के प्रभाव से सर्द मौसम बना रहेगा। 8 और 9 फरवरी को बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि, अगले सप्ताह से प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहने और दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी होने का पूर्वानुमान जताया गया है। इसका मतलब यह है कि जल्द ही सर्दी का असर कम होने लगेगा और तापमान में वृद्धि होगी। तापमान में गिरावट और राहत की उम्मीद बीती रात 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली उत्तरी हवाओं के कारण रात का तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। शेखावाटी अंचल के फतेहपुर कस्बे में न्यूनतम तापमान 2.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो मैदानी इलाकों में सबसे कम था। तापमान की जानकारी विभिन्न स्थानों का तापमान निम्नलिखित रहा- करौली: 3.8 डिग्री सेल्सियस लूणकरणसर: 4.6 डिग्री सेल्सियस माउंट आबू: 4.0 डिग्री सेल्सियस अंता बारां: 5.7 डिग्री सेल्सियस पिलानी: 6.4 डिग्री सेल्सियस चूरू: 5.6 डिग्री सेल्सियस दौसा: 5.6 डिग्री सेल्सियस संगरिया: 6.6 डिग्री सेल्सियस वनस्थली: 6.1 डिग्री सेल्सियस भीलवाड़ा: 6.2 डिग्री सेल्सियस चित्तौड़गढ़: 6.4 डिग्री सेल्सियस सीकर: 7.0 डिग्री सेल्सियस आने वाले दिनों में मौसम मौसम विभाग के अनुसार, 8 और 9 फरवरी को बादल छाने की संभावना है, लेकिन उसके बाद प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहेगा। तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे सर्दी का असर कम हो सकता है। सर्दी के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग ऊनी कपड़े पहनकर बाहर निकलने लगे हैं। अलाव जलाना और धूप सेंकना सर्दी से राहत पाने के प्रमुख उपाय बन गए हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग शीतलहर से बचने के लिए अलाव जलाकर सर्दी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। कोटा का अधिकतम तापमान 1 डिग्री गिरकर 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 5 डिग्री गिरकर 8.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दृश्यता भी 3,000 मीटर से घटकर 2,000 मीटर रह गई थी।

मोहन सरकार 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित पुत्री, विधवा, परित्याक्ता को परिवार पेंशन का लाभ देगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए नए नियम लागू करेगी। ये नियम पेंशन और छुट्टियों से जुड़े हैं। अविवाहित, विधवा और परित्यक्ता बेटियों को भी परिवार पेंशन मिलेगी। रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को अब सेवा पुस्तिका नहीं दी जाएगी। छुट्टियों के नियमों में भी बदलाव होंगे। वित्त विभाग ने इन बदलावों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इन नियमों के तहत 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को सेवा पुस्तिका नहीं दी जाएगी क्योंकि अब सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। छुट्टियों के नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। नए कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लंबे समय से हो रही थी बदलावों की मांग वित्त विभाग की एक समिति ने इन नए नियमों का प्रारूप तैयार किया है। पेंशनर्स एसोसिएशन लंबे समय से पेंशन नियमों में बदलाव की मांग कर रही थी। सरकार ने उनकी मांगों को सुनते हुए यह कदम उठाया है। इस समिति में वित्त विभाग के सदस्यों के अलावा, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, पेंशन संचालनालय के संचालक और रेरा के वित्तीय सलाहकार मिलिंद वाईकर भी शामिल थे। समिति की बैठक में पेंशन नियमों में कई अहम बदलावों पर सहमति बनी। पेंशनर्स की मांगों को सरकार ने मांगा पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा लंबे समय से पेंशन नियमों में सुधार करने और नए पेंशन नियम लागू करने की मांग की जा रही थी. इसके लिए राज्य सरकार ने वित्त विभाग की एक समिति गठित की थी. इस समिति में सदस्यों के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, पेंशन संचालनालय के संचालक, रेरा के वित्तीय सलाहकार मिलिंद वाईकर को रखा गया है. समिति की बैठक में नए पेंशन नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया गया. बैठक में तय किया गया है कि परिवार पेंशन में न्यूनतम आयु सीमा के नियमों को बदला जा सकता है. मोहन सरकार ला रही नए पेंशन नियम – राज्य सरकार कर्मचारियों के अवकाश नियमों में करीबन 50 साल बाद बदलाव करने जा रही है. इसके तहत भर्ती होने वाले नए कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा. नए अवकाश नियमों को लेकर अधिकारियों ने चर्चा की है. – इसमें प्रावधान किया जा रहा है कि 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित पुत्री, विधवा, परित्यक्ता को भी परिवार पेंशन का लाभ दिया जा सकता है. – वहीं अभी तक पेंशन प्रकरण के साथ सेवा पुस्तिका भी भेजी जाती थी, लेकिन अब इसे खत्म करने का निर्णय लिया गया है. क्योंकि अब ऑनलाइन व्यवस्था होने के चलते पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है, इसलिए इसे अलग से भेजने की जरूरत ही नहीं है. – यदि पेंशनर्स पर आश्रित की दिव्यांगता 25 वर्ष की आयु के पहले होती है तो ही उसे परिवार पेंशन की आजीवन पात्रता का लाभ मिलेगा. इस आयु सीमा के बाद दिव्यांग होने पर उसे परिवार पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा. – वसूली के मामलों में पेंशन से राशि उसी स्थिति में काटी जा सकेगी, जिसमें वसूली की सूचना रिटायरमेंट के पहले दी जा चुकी हो. इस तरह के मामलों में कोर्ट भी कई बार निर्णय दे चुकी है. सरकार कर्मचारियों के अवकाश नियमों में लगभग 50 साल बाद बदलाव करने जा रही है। नए नियमों के तहत नए कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों ने नए अवकाश नियमों पर विस्तार से चर्चा की है। अब सेवा पुस्तिका की ज़रूरत नहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को परिवार पेंशन देने का प्रावधान किया जा रहा है। अब तक पेंशन प्रकरण के साथ सेवा पुस्तिका भी भेजी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। चूंकि सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है, इसलिए सेवा पुस्तिका भेजने की ज़रूरत नहीं है। दिव्यांगता पेंशन पर बड़ा अपडेट अगर किसी पेंशनधारी के आश्रित की दिव्यांगता 25 साल की उम्र से पहले होती है, तो उसे ही आजीवन परिवार पेंशन मिलेगी। इस उम्र के बाद दिव्यांग होने पर परिवार पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। वसूली के मामलों में पेंशन से राशि तभी काटी जा सकेगी, जब वसूली की सूचना रिटायरमेंट से पहले दी गई हो। कोर्ट भी इस तरह के मामलों में कई बार फैसला दे चुकी है। जल्द लागू होंगे नए फैसले नए नियमों को जल्द ही लागू किया जाएगा। समिति द्वारा तैयार किए गए प्रारूप पर एक बार फिर उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा होगी। इसके बाद इसे मुख्य सचिव अनुराग जैन के सामने पेश किया जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद ही नए नियम लागू होंगे। केंद्र सरकार ने पेंशन और अवकाश नियमों को लेकर कई फैसले लिए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी तक इनके आधार पर संशोधन नहीं किए गए थे।

फ्रीलांसर, डिलीवरी ब्वॉय और कैब ड्राइवर्स जैसे गिग वर्कर्स को भी अब मिलेगी पेंशन! बजट में हुआ बड़ा ऐलान

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को पेश किए गए आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्रीलांसर, डिलीवरी ब्वॉय और कैब ड्राइवर्स जैसे गिग वर्कर्स के लिए एक बड़ा ऐलान किया। इसके तहत गिग वर्कर्स को हेल्थ बेनिफिट समेत कई बड़ी सुविधाएं दी जाएंगी। इसकी प्रक्रिया अब शुरू कर दी गई है। दरअसल, लेबर मिनिस्ट्री ने कहा है कि जल्द ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े एक करोड़ गिग श्रमिकों के लिए पेंशन योजना लाने को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मांगेगा। एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इसके तहत हर लेनदेन से हुई आय से सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान दिया जाएगा। क्या है प्लान  कहा कि श्रम मंत्रालय एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसके तहत जोमैटो, स्विगी के अलावा ओला, उबर जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इन श्रमिकों की आय पर हर लेनदेन पर प्रतिशत के रूप में सामाजिक सुरक्षा अंशदान काट लेंगे। सूत्र के मुताबिक इस योजना के तहत श्रमिकों को रिटायरमेंट के समय दो विकल्प दिए जा सकते हैं, जब उनकी पेंशन तय हो जाएगी। वे जमा पर ब्याज को पेंशन के रूप में निकाल सकते हैं या संचित धन को निर्धारित अवधि के लिए बराबर किस्तों में विभाजित कर सकते हैं। हालांकि, सूत्र ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजना के लिए योगदान की जाने वाली राशि अभी तय नहीं की गई है। गिग श्रमिक एक साथ दो या अधिक प्लेटफॉर्म के लिए काम कर सकते हैं। बजट में हुआ बड़ा ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार ई-श्रम प्लेटफॉर्म पर गिग कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था करेगी। साथ ही उन्हें पीएम जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी। बता दें कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए डिलिवरी सर्विसेज प्रोवाइड करने वाले कर्मचारी आदि ‘गिग’ कर्मियों की श्रेणी में आते हैं। व्यव सचिव ने कही थी ये बात बीते दिनों व्यय सचिव मनोज गोविल ने कहा कि श्रम मंत्रालय और संबंधित अन्य मंत्रालयों के साथ परामर्श कर योजना के मापदंडों तथा विवरणों पर काम किया जा रहा है। गोविल ने कहा कि ‘गिग’ श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना या तो 100 प्रतिशत केंद्रीय क्षेत्र की योजना हो सकती है या केंद्र प्रायोजित योजना हो सकती है, जहां लागत केंद्र व राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में साझा की जाएगी।

एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करेगी

भोपाल मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होना है. जिसके लिए प्रक्रिया तो जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल लगातार हो रही देरी से उठ रहा है. क्योंकि काफी मशक्कत के बाद बीजेपी ने जिला अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में देरी क्यों हो रही है. हालांकि, बीजेपी का कहना है कि फिलहाल पार्टी की प्राथमिकता दिल्ली विधानसभा चुनाव है, जिसके तुरंत बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. अब सवाल यह है कि पार्टी इस बार अध्यक्ष पद के लिए क्या फॉर्मूला तय करती है? बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करने वाली है. क्या है पुराना फॉर्मूला? आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में बीजेपी ने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में 10 सालों की कांग्रेस सरकार को हटाकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. तब जिस फॉर्मूले पर भारतीय जनता पार्टी ने काम किया, उसने बीजेपी को मध्यप्रदेश में बेहद मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया. यह फॉर्मूला था ओबीसी मुख्यमंत्री और सवर्ण प्रदेश अध्यक्ष का. 2003 में उमा भारती को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था जो ओबीसी वर्ग से आती हैं. उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव एमपी के मुख्यमंत्री बने और यह चारों ओबीसी वर्ग से आते हैं. वहीं, इन सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बीजेपी के संगठन की जिम्मेदारी यानी प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा कैलाश जोशी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, राकेश सिंह और वीडी शर्मा को मिला जो सभी सवर्ण वर्ग से आते हैं.  जातिगत फैक्टर हो सकता है टर्निंग पॉइंट  ओबीसी सीएम वाली सरकार और सामान्य वर्ग वाला प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 2003 से बीजेपी ने सत्ता और संगठन में जो संतुलन बनाया, उसने एमपी बीजेपी को देश का सबसे मजबूत संगठन बना दिया और माना जा रहा है कि बीजेपी इसी फॉर्मूले पर इस बार भी भरोसा करने जा रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जातिगत समीकरण किस वर्ग के लिए सटीक बैठने की संभावना है.  ब्राह्मण बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा जो ब्राह्मण वर्ग से आते हैं, उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है. सियासी गलियारों की मानें तो वीडी शर्मा को कोई नई जिम्मेदारी देकर एमपी में वीडी शर्मा की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. ऐसे में ब्राह्मण वर्ग से जो नाम रेस में हैं- उनमें पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और विधायक रामेश्वर शर्मा का नाम सामने आ रहा है. जातिगत समीकरणों की बात करें तो फिलहाल मोहन कैबिनेट में सबसे कम भागीदारी ब्राह्मण वर्ग की है, जिसमें सिर्फ दो मंत्री शामिल हैं. राजेंद्र शुक्ला और राकेश शुक्ला. विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे तो बीजेपी के 27 ब्राह्मण विधायक चुनाव जीते थे लेकिन सरकार में भागीदारी के मामले में यह वर्ग पीछे रह गया. अब जब 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं तो पड़ोसी राज्य में ब्राह्मण को एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी एमपी और यूपी के सवर्णों को खुश करने की कोशिश कर सकती है. दूसरी तरफ, सरकार में ब्राह्मणों की कम भागीदारी से सवर्णों की नाराजगी का जो डर बीजेपी की सता रहा है, उससे भी उसे छुटकारा मिल सकता है.  क्षत्रिय 2003 के बाद से लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी एमपी बीजेपी के क्षत्रिय वर्ग से आने वाले नेताओं को ही मिली है. नरेंद्र सिंह तोमर, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह. वर्तमान में मोहन कैबिनेट की बात करें तो इसमें 4 मंत्री क्षत्रिय वर्ग से आते हैं- जिनमें राकेश सिंह, उदय प्रताप सिंह, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर शामिल हैं. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर हैं जो क्षत्रिय वर्ग से आते हैं. पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने किरण देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एमपी में संदेश लगभग साफ कर दिया है कि यहां इस वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनेगा.  वैश्य बीते कुछ दिनों में जो नाम तेजी से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी के रूप में उभरा है- उनमें हेमंत खंडेलवाल का नाम है जो वैश्य समाज से आते हैं. मोहन कैबिनेट में फिलहाल 2 वैश्य वर्ग से आने वाले मंत्री हैं- कैलाश विजयवर्गीय और चेतन कश्यप. ऐसे में देखना यह है कि क्या सीएम की पसंद कहे जा रहे हेमंत खंडेलवाल को जिम्मेदारी मिलती है या नहीं? अनुसूचित जाति मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जाति के मंत्रियों की संख्या 4 है और एक डिप्टी सीएम हैं- जगदीश देवड़ा. जाहिर है सरकार में इस वर्ग की भागीदारी बेहतर है, इसलिए 2003 फॉर्मूले में यह वर्ग फिट नहीं बैठता. हालांकि, जिस तरह से अंबेडकर के नाम पर इन दिनों सियासी माहौल बना हुआ है, माना जा रहा है कि बीजेपी एससी वर्ग को अपने पाले में करने के लिए किसी एससी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो लाल सिंह आर्य का नाम सबसे ऊपर आ जाएगा जो बीजेपी एससी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.  ओबीसी मध्यप्रदेश में 2003 के बाद से ही बीजेपी ने ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाया है और वर्तमान में ओबीसी वर्ग से आने वाले मोहन यादव सीएम हैं. वहीं, दूसरी तरफ उनकी कैबिनेट में 8 से ज्यादा मंत्री ओबीसी वर्ग से आते हैं. दूसरी तरफ, 2003 के फॉर्मूले को देखें तो ओबीसी सीएम और सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाने का नियम रहा है, ऐसे में अगला प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से बनने के आसार न के बराबर हैं.  अनुसूचित जनजाति वर्तमान में मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से 5 मंत्री बने हुए हैं. एमपी में 47 एसटी सीटें हैं, जबकि दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर अनुसूचित जाति ही हार या जीत का फैसला करती है. जाहिर है यह एक बड़ा वोट बैंक है और इसे साधने के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए एसटी चेहरे पर भी दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो सुमेर सिंह सोलंकी, दुर्गादास उइके (मोदी कैबिनेट में मंत्री)और गजेंद्र पटेल का नाम ऊपर आ सकता है.  जातिगत समीकरण और अनुभव को दी जाएगी तवज्जो मध्यप्रदेश बीजेपी … Read more

उज्जैन सिंहस्थ के दौरान रेलवे के सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे, 75 प्रतिशत भीड़ दूसरे स्टेशनों से आ-जा सकेगी

 भोपाल  प्रयागराज की तरह उज्जैन सिंहस्थ के दौरान भी रेलवे के सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। तीन से चार स्टेशन बनाने की रूपरेखा बनी है। इससे मुख्य स्टेशन में आने वाली लगभग 75 प्रतिशत भीड़ दूसरे स्टेशनों से आ-जा सकेगी। इसका लाभ यह होगा कि स्टेशन और शहर में एक साथ भीड़ नहीं पहुंचेगी। प्रयागराज कुंभ में यह प्रयोग सफल रहा है। मप्र पुलिस के अधिकारियों की टीम ने कुंभ में जाकर सैटेलाइट स्टेशन सहित अन्य व्यवस्था देखी थी। अब उसी के अनुरूप उज्जैन सिंहस्थ के लिए तैयारी की जा रही है। सैटेलाइट रेलवे स्टेशन के लिए विस्तार से हुई चर्चा पिछले दिनों अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने भी उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर बैठक ली थी। इसमें सैटेलाइट रेलवे स्टेशन और बस स्टाप कहां-कहां बनाए जा सकते हैं, इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई थी। सिंहस्थ के दौरान लगभग तीन करोड़ लोगों के आने की संभावना है। उज्जैन के आसपास पांच से सात किमी के क्षेत्र में सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलाने की भी तैयारी है। सुरक्षा में लगेंगे 42 हजार पुलिसकर्मी सिंहस्थ में सुरक्षा के लिए दो पाली में लगभग 42 हजार पुलिसकर्मी लगाए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिला पुलिस बल के अतिरिक्त होम गार्ड्स के जवान भी लगाए जाएंगे। आवश्यकता होने पर केंद्र से अर्धसैनिक बल की सहायता ली जाएगी। सिंहस्थ के दौरान सुरक्षा के लिए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर सहित अन्य सामग्री की खरीदी के लिए पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव मांगा गया है। छह माह के भीतर खरीदी की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी।

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