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वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में सतत एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और नवाचारों पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

 भोपाल वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में सतत एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और नवाचारों पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसएटीआई 2025) 7-8 फरवरी, 2025 वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग प्रोग्राम ने इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एयर ब्रीथिंग इंजन (आईएसएबीई) के सहयोग से 7-8 फरवरी, 2025 को सस्टेनेबल एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन (आईसीएसएटीआई 2025) पर अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया। सम्मेलन की शुरुआत से पहले, सभी प्रतिभागियों के लाभ के लिए गैस टर्बाइन प्रौद्योगिकी पर एक प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला भी आयोजित की गई।वीआईटी विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन, डॉ. जयरामन को सम्मानित करते हुए किशोर-अध्यक्ष यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल और पूर्व रोल्स रॉयस एशिया-पैसिफिक अध्यक्ष। सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. सुरेश संपत, क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी, यूके (सबसे दाएं) और मुख्य अतिथि पद्म श्री डॉ. अजय कुमार रे (सबसे बाएं) देख रहे हैं।उद्घाटन समारोह में वीआईटी विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन ने मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रोफेसर अजय कुमार रे (निदेशक, जेआईएस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज एंड रिसर्च; पूर्व निदेशक, आईआईईएसटी शिबपुर; पूर्व प्रोफेसर, आईआईटी खड़गपुर) को सम्मानित किया। आईआईटी दिल्ली सोनीपत परिसर के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सीईओ डॉ. आलोक पांडे ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। यह सस्टेनेबल एयरोस्पेस इंजीनियरिंग सम्मेलन भारत में एयरोस्पेस के क्षेत्र में ऐसे अग्रणी सम्मेलनों में से एक है।प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति जिन्होंने सम्मेलन में भाग लिया शामिल डॉ। सुरेश संपत-प्रोफेसर, क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी, यूके; डॉ. थियोक्लिस निकोलाइडिस – यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रास, ग्रीस; डॉ. किशोर जयरामन ओवे यूकेआईबीसी अध्यक्ष एवं रणनीतिक सलाहकार, पूर्व अध्यक्ष, रोल्स रॉयस भारत; डॉ. अशोक वी उत्कृष्ट वैज्ञानिक एवं वीएसएससी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. मुनियप्पन ए डिप्टी महाप्रबंधक, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड; प्रो. ए.एम. प्रदीप सिर, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, आईआईटी बम्बई; श्री Sundaramurthy मिशन निदेशक, टी.के. पूर्व इसरो (सेवानिवृत्त); श्री रवि कुमार वर्मा वैज्ञानिक/इंजीनियर-एसएफ, अंतरिक्ष एप्लीकेशन सेंटर (एसएसी), इसरो; और जोशी प्रो.सुधीर प्रमुख, एयरोस्पेसइंजीनियरिंग, ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी। इस सम्मेलन में डॉ. फ्रैंक हेसलबैक, अध्यक्ष, ISABE और वरिष्ठ उपाध्यक्ष, AIRBUS; डॉ. सामी गिरगिस एसोसिएट डायरेक्टर, प्रैट एंड व्हिटनी, कनाडा ने ऑनलाइन मुख्य भाषण के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ICSATI 2025 में 9 मुख्य सत्र, 7 तकनीकी सत्र, 2 पैनल चर्चाएँ, तकनीकी कार्यक्रम: स्पेस टैंक और एक शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। IIT, NITS, DRDO, VSSC और ISRO और अन्य विश्वविद्यालयों जैसे विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए। विजेताओं को डॉ. जी. विश्वनाथन सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।सबसे पहले, स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के डीन डॉ. एस. बालागुरु ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रो वाइस चांसलर डॉ. टी.बी. श्रीधरन ने एयरोस्पेस नवाचारों में स्थिरता के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने शीर्ष प्रबंधन चांसलर माननीय डॉ. जी. विश्वनाथन, उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन, सहायक उपाध्यक्ष सुश्री कधंबरी एस. विश्वनाथन और ट्रस्टी मैडम रमानी बालासुंदरम को उनके समर्थन और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत जी.के. ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

भोपाल मंडल में मॉक ड्रिल का सफल आयोजन, आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन

भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी के मार्गदर्शन में एवं वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी श्री विजय शंकर गौतम के नेतृत्व में आज दिनांक 11 फरवरी 2025 को भोपाल मंडल के बुदनी-नर्मदापुरम  रेलखंड पर मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे की तत्परता, समन्वय और बचाव कार्यों की प्रभावशीलता को परखना था। मॉक ड्रिल की परिकल्पना के अनुसार, सुबह 11:56 बजे नर्मदापुरम  स्टेशन मास्टर द्वारा भोपाल कंट्रोल रूम को सूचना दी गई कि बुदनी-नर्मदापुरम  खंड पर एक इंजीनियरिंग मशीन (रेल ग्रिलिंग मशीन – RGM) पटरी से उतर गई है, जिससे 10-12 रेलवे कर्मचारी घायल हो गए हैं। इस सूचना के आधार पर तत्काल प्रतिक्रिया शुरू की गई। भोपाल और इटारसी में हूटर बजाकर आपातकालीन स्थिति की तैयारी की गई। भोपाल और इटारसी से दुर्घटना राहत चिकित्सा वैन (ARMV) को समय पर तैयार कर रवाना किया गया। भोपाल से दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) को भी त्वरित रूप से तैयार किया गया। इस दौरान सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी (ADSO) श्री ममलेश यादव, इंजीनियरिंग, सिग्नल और ट्रैफिक विभाग के सेफ्टी काउंसलर, सहायक मंडल अभियंता (AEN) भोपाल, सभी विभागों के पर्यवेक्षक, जीआरपी, आरपीएफ तथा स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर समय पर पहुंच गए। इसी के साथ डीआरएम कार्यालय भोपाल में मंडल रेल प्रबंधक और अन्य शाखा अधिकारी स्थिति पर नजर रखने के लिए तुरंत कंट्रोल रूम में पहुंचे। इस मॉक ड्रिल को दोपहर 12:32 बजे सफलतापूर्वक पूरा घोषित किया गया। यह मॉक ड्रिल आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे कर्मचारियों की तत्परता, समयबद्धता और सतर्कता का परीक्षण करने के लिए आयोजित की गई थी। इस दौरान भोपाल मंडल की टीम ने त्वरित और संगठित कार्रवाई की, जिससे रेलवे की आपातकालीन सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता का प्रदर्शन हुआ। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में रेलवे कर्मचारियों को संगठित और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित करना है। इस प्रकार के अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां यह सुनिश्चित करती हैं कि रेलवे किसी भी आपातकालीन स्थिति में यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सतर्क और पूरी तरह तैयार है।

मंत्री टेटवाल ने बालक छात्रावास का उद्घाटन और निरीक्षण किया

भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि संत रविदास जी केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। राज्य मंत्री टेटवाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में संत रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि संत रविदास जी ने उस दौर में भी समाज को समानता और कर्म की प्रधानता का संदेश दिया, जब भेदभाव और छुआछूत चरम पर था। वे केवल शिक्षा के प्रचारक नहीं थे, बल्कि उन्होंने समाज को कौशल से संपन्न बनाकर रोजगार से जोड़ने का कार्य भी किया। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि उनके विचार इतने प्रभावशाली थे कि सिख धर्म के गुरु ग्रंथ साहिब में भी उन्हें स्थान मिला और आज भी गुरुद्वारों में उनके आदर्शों को गाया जाता है। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि संत रविदास जी के गुरु रामदास जी थे, और मीराबाई ने भी उन्हें ही अपना गुरु माना था। उनके विचारों ने समाज में एक नई चेतना जगाई, जो शिक्षा और हुनर दोनों को समान रूप से महत्व देती है। इसी भावना के अनुरूप आज ग्लोबल स्किल्स पार्क युवाओं को आधुनिक तकनीकी दक्षता से सशक्त कर रहा है। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि संत रविदास जी के विचारों के अनुरूप हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम ज्ञान और कौशल को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हों। यह डिजिटल युग अवसरों से भरा है, और युवाओं को इनका पूरा लाभ उठाकर अपने सपनों को साकार करना चाहिए। छात्रावास का उद्घाटन और निरीक्षण राज्य मंत्री टेटवाल ने सर्व-सुविधायुक्त बालकों के छात्रावास का उद्घाटन किया। छात्रावास में 600 छात्रों को लाभ मिलेगा। छात्रावास में 200 कमरे बनाए गए हैं, जिसमें तीन-तीन छात्रों के रहने की व्यवस्था की गई है। राज्य मंत्री टेटवाल ने छात्रावास का निरीक्षण किया और आवश्यक सुधारों के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसी को ध्यान में रखते हुए खिड़कियों में ग्रिल लगाने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक प्रस्तुतियां और उद्बोधन कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने संत रविदास जी के जीवन और आदर्शों पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिससे उनके विचारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। वहीं, ग्लोबल स्किल्स पार्क के विद्यार्थियों ने संस्था के उद्देश्य को रेखांकित करता विशेष गीत भी गाया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित जनों को प्रेरित किया, और राज्य मंत्री टेटवाल ने भी बच्चों के साथ इन प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया। इस अवसर पर राजगढ़ जिले की प्रसिद्ध एथलीट आशा मालवीय ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर, श्रम की पराकाष्ठा तक जाकर, लगन और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करने से सफलता निश्चित मिलती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।  

सुश्री भूरिया ने आंगनवाड़ी केन्द्र पर पहुँच कर मंगल दिवस आयोजन में सम्मिलित हुई

झाबुआ महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ जिले के कल्याणपुरा के तड़वी फलिया में स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र पर पहुँच कर मंगल दिवस आयोजन में सम्मिलित हुई। मंत्री सुश्री भूरिया ने कुपोषित बच्चे की माता और मोटी आई से संवाद किया और बच्चें की देखरेख कर पौष्टिक आहार, टीएचआर लड्डू एवं गुड़ चना खिलाये जाने और बच्चों की शिशु रोग विशेषज्ञ से स्वास्थ्य परीक्षण कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों को टीएचआर से बने लड्‌डु खिलाए एवं मोटी आई का पुष्पमाला पहना कर सम्मान किया। मंत्री सुश्री भूरिया ने समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मोटी आई पोस्टर लगाने की शुरुआत करते हुए केन्द्र पर मोटी आई पोस्टर लगायें जिसमे केन्द्र का नाम, मोटी आई का नाम प्रदर्शित रहेगा। उन्होंने आंगनवाड़ी को दी गयी मान्टेसरी किट के माध्यम से बच्चो के साथ विभिन्न ज्ञानवर्धक खेल, खेले एवं खेल के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया। मंत्री सुश्री भूरिया ने मंगल दिवस कार्यक्रम के उपलक्ष्य में आंगनवाड़ी केन्द्र पर गर्भवती महिला श्रीमती दीपिका दिनेश भूरा की गोद भराई कर उसे किट भेंट की।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहीमूलक योजनाओं की समीक्षा कर सुपात्रों को त्वरित लाभ पहुंचाने के दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनकल्याण ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है। योजनाओं के जरिए ही हम इस लक्ष्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए सुनिश्चित करें कि प्रदेश का कोई भी पात्र व्यक्ति सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। प्रदेश के विकास में हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी जरूरतमंद हितग्राहियों को पात्रतानुसार त्वरित लाभ दिया जाए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि इस वित्तीय वर्ष के तय लक्ष्यों की समय पर पूर्ति की जानी चाहिए। योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रतिदिन समीक्षा की जाए, ताकि कोई भी सुपात्र हितग्राही लाभ पाने से न छूटे। हर पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए सभी विभाग अपने स्तर पर सतत समीक्षा करें। सुनिश्चित करें कि योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा और विलम्ब के समय पर हितग्राहियों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी कहा कि हितग्राहीमूलक योजनाएं सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही जनता को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का फुल सैचुरेशन (पूर्ण संतृप्ति) किया जाना है, उसे शीघ्र पूरा किया जाए। साथ ही बैंकों द्वारा वित्तपोषित योजनाओं में हितग्राहीमूलक प्रकरणों को निर्धारित समय से पहले लक्ष्य से भी कहीं ज्यादा संख्या में प्रस्ताव भेजे जाएं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 में हितग्राहीमूलक योजनाओं के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 के बराबर या उससे अधिक वित्तीय प्रावधान किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी संचालन से ही हम विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे। सरकार की योजनाएं शासन और जनता के बीच परस्पर विश्वास की द्योतक होती हैं, इसीलिये योजनाओं का शत- प्रतिशत क्रियान्वयन कर सरकार पर जनविश्वास बढाने की दिशा में कार्य करें। यही सुशासन है, यही कल्याणकारी राज्य का मूल लक्ष्य है। बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी विभागीय हितग्राहीमूलक योजनाओं की अद्यतन जानकारी दी और इन योजनाओं के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में भी बताया।  

अन्नू कपूर ने संस्कृत श्लोक सुनाए और कला यात्रा की जानकारी दी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में अभिनेता अन्नू कपूर ने सौजन्य भेंट की। अन्नू कपूर ने कहा कि वे मध्यप्रदेश से हैं और यहां आकर उन्हें आनंद का अनुभव होता है। विशेष रूप से मालवा अंचल की संस्कृति से वे बहुत प्रभावित हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से उनका आत्मीय लगाव है।  कपूर ने कहा कि मध्य प्रदेश में विरासत से विकास के ध्येय के अनुसार महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मालवा, मध्यप्रदेश के साथ ही राष्ट्र के गौरव हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्नू कपूर द्वारा भारतीय सिने जगत और दूरदर्शन पर अंताक्षरी के माध्यम से राष्ट्र भाषा हिन्दी की सुदीर्घ सेवा के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्नू कपूर ने शिव तांडव स्रोत एवं अन्य संस्कृत भाषा की रचनाओं की सैकड़ों मंचों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी है। भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम देव भाषा कई भाषाओं की जननी है। इस नाते अन्नू कपूर का योगदान महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर अभिनेता कपूर ने संस्कृत के कुछ श्लोक भी सुनाए। इस अवसर पर अन्नू कपूर ने अपनी कला यात्रा और मध्यप्रदेश के नगरों -कस्बों से उनके संबंध के बारे में भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  अन्नू कपूर एवं उनके साथी देव कुमार का पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया।  

अगले पांच वर्षों में लगभग 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश को विकसित बनाने के लिए औद्योगिक संवर्धन नीति सहित अनेक नीतियां स्वीकृत युवाओं के लिये रोजगार क्रांति साबित होंगी नीतियां अगले पांच वर्षों में लगभग 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे निवेशकों की राह और आसान होगी निर्यात को और बढ़ावा देने के लिए “मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट प्रमोशन नीति-2025” की स्वीकृति मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक नीति 2025 की स्वीकृति प्रदेश को फिल्म पर्यटन अनुकूल राज्य बनाने के लिए फिल्म पर्यटन नीति 2025 की स्वीकृति प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गंतव्य के रूप मे स्थापित करने के लिए पर्यटन नीति 2025 की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल मंत्रि-परिषद के निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश को विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाने के लिए औद्योगिक संवर्धन नीति 2025 की स्वीकृति दी गयी है। इसके अंतर्गत 10 सेक्टर विशिष्ट नीतियों यथा कृषि, डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति, टेक्सटाइल नीति, परिधान, फुटवियर, खिलौने और सहायक उपकरण नीति, एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन प्रोत्साहन नीति, फार्मास्यूटिकल्स नीति, बायोटेक्नोलॉजी नीति, मेडिकल डिवाईसेस नीति, ईव्ही विनिर्माण नीति, नवकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण नीति और हाई वेल्यू-एड विनिर्माता नीति को स्वीकृति दी गयी है। औद्योगिक संवर्धन नीति 2025 का उदेश्य मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और राज्य की वर्तमान जीडीपी को 2.9 लाख करोड़ रूपये से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक लगभग 6 लाख करोड़ रूपये करने में उद्योगों का योगदान बढ़ाना है। निवेशकों को एक समग्र औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करने के लिए विश्व स्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना का विकास करना, एनवायरनमेंटली सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना, राज्य में रोजगार के अवसरों को बढ़ाना, विशेष रूप से रोजगार-गहन क्षेत्रों पर जोर देते हुए अगले पाँच वर्षों में लगभग 20 लाख नवीन रोजगार के अवसर सृजित करना,निवेशक सुविधा में सुधार करना और राज्य में व्यापार करने की प्रक्रिया को सरल बनाना और प्रदेश की योजनाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के साथ संरेखित कर भविष्य के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना है। इसके अंतर्गत वृहद और मेगा स्तर की औद्योगिक इकाई को निवेश प्रोत्साहन सहायता, सामान्य सहायता और अतिरिक्त सहायता के प्रावधान शामिल किये गये है। कृषि, डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति में विद्युत टैरिफ प्रतिपूर्ति 1 रूपये प्रति यूनिट 5 वर्षों के लिए प्रदाय की जायेगी। गुणवत्ता प्रमाणन के लिए प्रोत्साहन, 50% अथवा 5 लाख जो भी कम हो 5 वर्षों के लिए प्रदाय किया जायेगा। इसके साथ ही 75 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाले खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाईज्ड पैकेज के लिए पात्र होंगी। टैक्सटाइल नीति के अंतर्गत्‍संयंत्र और मशीनरी के लिए गए टर्मलोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान सुविधा 5 वर्षों के लिए अधिकतम, 50 करोड़ रूपये प्रदाय की जायेगी। अपेरल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना पर 25 प्रतिशत सहायता अधिकतम 50 लाख रूपये वित्तीय सहायता प्रदाय की जायेगी। साथ ही 500 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी की इकाईयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टमाईज्ड पैकेज के लिए पात्र होंगी। परिधान, फुटवियर, खिलौने और सहायक उपकरण नीति में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति कर्मचारी 5 हजार रूपये प्रति माह 5 वर्षों तक, कुल 10 वर्षों की अवधि में प्रदान किये जायेंगे। प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए 13 हजार रूपये प्रति नए कर्मचारी के लिए 5 वर्षों तक प्रदान किया जायेगा। टर्मलोन पर 5% ब्याज अनुदान, अधिकतम 50 करोड़ रूपये दिया जायेगा। विकास शुल्क में 25% की रियायत देने के साथ स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क सहायता में 100 प्रतिशत की छूट दी जायेगी। विद्युत टैरिफ रियायत के रूप में 1 रूपये प्रति यूनिट, अधिकतम 5 वर्षों के लिए प्रदान की जायेगी। अपेरल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना पर 25 प्रतिशत सहायता अधिकतम 50 लाख रूपये प्रदाय की वित्तीय सहायता प्रदाय की जायेगी। इसके साथ ही 75 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी इकाइयां कस्टामाईज्ड पैकज के लिए पात्र होंगी। एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन प्रोत्साहन नीति में विकास शुल्क में 25% की रियायत दी जायेगी। गुणवत्ता प्रमाणन के रूप मे 50% या 10 लाख रूपये की प्रतिपूर्ति, जो भी कम हो की जायेगी। साथ ही 500 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी इकाइयां कस्टामाईज्ड पैकज के‍लिए पात्र होंगी। नवकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण नीति में विकास शुल्क में 50% की रियायत दी जायेगी गुणवत्ता प्रमाणन लागत का 50% या 1 लाख रूपये जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जायेगी। 250 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी की इकाइयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाईज्ड पैकज के‍लिए पात्र होंगी। फार्मास्यूटिकल्स नीति के अंतर्गत्‍गुणवत्ता प्रमाणन लागत का 50% या 1 करोड़ रूपये 5 वर्षों के लिए प्रदान किया जायेगा। अतिरिक्त निवेश पर 2 वर्षों का स्लैक अवधि प्रोत्साहन के रूप में दिया जायेगा। परीक्षण सुविधा की स्थापना में हुए व्यय का 50% पूंजी अनुदान अधिकतम 1 करोड़ रूपये प्रदान किया जायेगा। साथ ही 250 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी की इकाइयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाईज्ड पैकज के लिए पात्र होंगी। बायोटेक्नोलॉजी नीति में इन-हाउस आर एंड डी के लिए यंत्र-संयंत्र एवं भवन का 50 प्रतिशत ईएफसीआई में सम्मिलित होगा। परीक्षण सुविधा की स्थापना में हुए व्यय का 50% पूंजी अनुदान अधिकतम 1 करोड़ रूपये प्रदान किया जायेगा। बायोटेक्नोलॉजी पार्क निजी औद्योगिक पार्क के समान सुविधा के लिए पात्र होंगे। 250 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी की इकाईयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाईज्ड पैकज के लिए पात्र होंगी। मेडिकल डिवाइसेस नीति में आर एंड डी सुविधाएं विकसित करने के लिए 50 प्रतिशत ईएफसीआई में सम्मिलित होगा। परीक्षण सुविधा की स्थापना पर 50% पूंजी अनुदान अधिकतम 1 करोड़ रूपये प्रदान किया जायेगा। 500 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी इकाईयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाईज्ड पैकज के लिए पात्र होंगी। ईव्ही विनिर्माण नीति के बैटरी परीक्षण सहित को ईएफसीआई अंतर्गत मान्य किया जायेगा। गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति या 1 लाख रूपये प्रति मॉडल जो भी कम हो, अधिकतम 10 लाख रूपये प्रदान किये जायेंगे। एमपीआईडीसी द्वारा लगाए गए विकास शुल्क में 25% की रियायत दी जायेगी। 500 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी इकाइयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाईज्ड पैकज के लिए पात्र होंगी। हाई वेल्यू-एड विनिर्माता नीति के … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से  शाम यहां उनके निवास कार्यालय में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सांकरा, पाटन दुर्ग के कुलपति प्रोफेसर रवि आर.सक्सेना ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कुलपति प्रोफेसर सक्सेना से चर्चा के दौरान प्रदेश में,  विकासखंडवार उपजाए जाने वाले विशिष्ट फलों और सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित करने, खेती की अत्याधुनिक तकनीकी और अनुसंधान कार्यों को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने तथा क्षमता विकास के लिए स्किल डेवलपमेंट के कोर्स प्रारंभ करने की पहल विश्वविद्यालय द्वारा की जानी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक संख्या में किसान और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।

विजय मनोहर तिवारी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरु नियुक्त

भोपाल माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल महापरिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा विजय मनोहर तिवारी को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल का कुलगुरु नियुक्त किया गया है। तिवारी का कार्यकाल 4 वर्ष की अवधि के लिये रहेगा।  

विधायक विक्रांत भूरिया बने ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस का चेयरमैन

झाबुआ मध्य प्रदेश के झाबुआ से कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया का कांग्रेस में कद बढ़ गया है. पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा है. विक्रांत भूरिया को पार्टी ने ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस का चेयरमैन बनाया है. कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी किए गए लेटर के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर विक्रांत भूरिया की तत्काल प्रभाव से नियुक्ति की है. उन्हें शिवाजी राव मोघे की जगय ये जिम्मेदारी सौंपी गई है.  दरअसल, विक्रांत भूरिया ने साल 2024 में अप्रैल में मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद कयास लगने शुरू हो गए थे कि उन्हें ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. हालांकि उनकी जगह जम्मू कश्मीर के उदय भानु चिब को ये जिम्मेदारी सौंप दी गई. वहीं अब विक्रांत भूरिया को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. बता दें कि विक्रांत भूरिया पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे हैं. भूरिया पेशे से डॉक्टर हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में वह झाबुआ से विधायक चुनकर आए थे.

पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल कल पंचायत विकेंद्रीकरण सूचकांक रिपोर्ट जारी करेंगे

नई दिल्ली भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने के महत्वपूर्ण कदम के तहत, पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल 13 फरवरी, 2025 को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली में व्यापक पंचायत विकेंद्रीकरण सूचकांक रिपोर्ट जारी करेंगे। राज्यों में पंचायतों के विकेंद्रीकरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य आधारित रैंकिंग 2024 शीर्षक संबंधी यह रिपोर्ट देश में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को सशक्त बनाने और 73वें संविधान संशोधन के स्थानीय स्वशासन के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति है। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय सचिव श्री विवेक भारद्वाज और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के संकाय सदस्य भाग लेंगे। पंचायत विकेंद्रीकरण सूचकांक, गहन शोध और विश्लेषण द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विकेंद्रीकरण तथा पंचायतों के विकास, प्रदर्शन और प्रगति का आकलन करता है। पारंपरिक मापदंडों से परे यह सूचकांक छह महत्वपूर्ण आयामों: ढांचा, कार्य, वित्त, कार्यकर्ता, क्षमता निर्माण और पंचायतों के उत्तरदायित्व का मूल्यांकन करता है। संविधान के अनुच्छेद 243जी की भावना के अनुरूप यह विशेष रूप से पड़ताल करता है कि पंचायतें निर्णय लेने और उन्हें लागू करने में कितनी स्वतंत्र हैं। यह अनुच्छेद राज्य विधानसभाओं को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में पंचायतों को शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है। विकेंद्रीकरण सूचकांक सहकारी संघवाद और स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने के उपकरण के रूप में कार्य करता है, जिससे राज्यों को सुधार वाले क्षेत्रों की पहचान करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को अपनाने में मदद मिलती है। इस सूचकांक की विभिन्न हितधारकों के लिए व्यावहारिक उपयोगिता है। यह लोगों को पंचायतों के कामकाज और संसाधन आवंटन पर नज़र रखने में पारदर्शिता प्रदान करता है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को यह पक्षसमर्थन और सुधार के लिए डेटा आधारित सूचना देता है। अधिकारियों के लिए, यह प्रभावी विकेंद्रीकरण नीतियां लागू करने में रोडमैप का कार्य करता है। नीति निर्माता स्थानीय शासन के समग्र विकास पहलुओं के आकलन और सुधारों के सबसे अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों के तौर पर चिन्हित करने में विकेंद्रीकरण सूचकांक का उपयोग कर सकते हैं। जमीनी स्तर पर समावेशी विकास और सतत विकास को बढ़ावा देने की यह पहल विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जहां विकसित और सशक्त पंचायतें ग्रामीण परिवर्तन की बुनियाद के तौर पर काम करती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया साइकिलिस्ट आशा मालवीय का सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया साइकिलिस्ट आशा मालवीय का सम्मान एक लाख रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को मंत्रालय में साहस और संकल्प की मिसाल पेश कर रही मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध सोलो साइकिलिस्ट सुआशा मालवीय ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा के साहसिक सफर की सराहना करते हुए उन्हें एक लाख रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की। इस मौके पर कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री गौतम टेटवाल भी उपस्थित रहे। 17,200 किलोमीटर की रोमांचक यात्रा साइकिलिस्ट कु. आशा मालवीय ने बताया कि वह अब तक लेह-लद्दाख सहित 17,200 किलोमीटर की यात्रा अपनी सामान्य साइकिल से पूरी कर चुकी हैं। उनके इस प्रयास ने न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आशा मालवीय के इस साहसिक अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा युवाओं और खासतौर पर महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने आशा को भविष्य में भी ऐसे ही कार्यों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आशा का यह सफर महिला सशक्तिकरण और दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर अन्य युवाओं को भी अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा मिलेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय खेल: 2025 में प्रदेश के खिलाड़ियों के पदक जीतने पर दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तराखंड में आयोजित 38 वें राष्ट्रीय खेल: 2025 में रेसलिंग (50 किग्रा वर्ग) में मध्यप्रदेश की खिलाड़ी शिवानी नंदनलाल पवार को स्वर्ण पदक, जूडो (90 किग्रा वर्ग) ब्रहृम वत्स को स्वर्ण पदक कयाकिंग और कैनोइंग खेल के सी वन 1000 मीटर इवेंट में अरविंद वर्मा को रजत पदक और जूडो-63 किग्रा वर्ग में हिमांशी टोकर को रजत पदक जीतने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मॉडर्न पेंटाथलॉन की बैथले प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर मध्यप्रदेश महिला टीम की खिलाड़ियों रमा सोनकर, कनकधारीवाल और मानवी श्रीवास्तव को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियों की इस अद्वितीय सफलता पर प्रदेशवासियों को गर्व है। बेटियों की यह उपलब्धि राज्य की भावी खेल प्रतिभाओं के लिए मिसाल बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट और अद्भुत खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए पदक अर्जित कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खिलाड़ियों की ऐतिहासिक उपलब्धि अभिनंदनीय है। उन्होंने सफलता के पथ पर खिलाड़ियों के निरंतर गतिमान रहने की कामना की है।  

10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिका मुख्य परीक्षक भी जाचेंगे, पांच मार्च से मूल्यांकन कार्य होगा शुरू

भोपाल माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा 25 फरवरी से आयोजित की जा रही है। पांच मार्च से मूल्यांकन कार्य शुरू कर दिया जाएगा । मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को मंडल ने अच्छे और बिल्कुल फिसड्डी विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। ऐसे विद्यार्थी जिन्हें एक नंबर भी न मिला हो या जिनके नंबर 90 प्रतिशत से अधिक हो, उनकी उत्तरपुस्तिका दोबारा जांच की जाएगी। साथ ही उनकी उत्तरपुस्तिकाओं को मुख्य परीक्षक भी जाचेंगे। इनके अलावा एक या दो अंक से किसी विषय में विशेष योग्यता या प्रथम श्रेणी की पात्रता से वंचित होने वाले परीक्षार्थियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें हर पेज पर मिले अंकों को जोड़ने में भी विशेष सावधानी रखी जाएगी। ऐसे सभी विद्यार्थियों की कापी दोबारा चेक कर अंकों को ध्यान से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा उत्तरपुस्तिका की जांच आदर्श उत्तर के अनुसार होगी। बता दें, कि इस बार बोर्ड परीक्षा में 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। विद्यार्थियों को हर स्टेप के नंबर मिलेंगे मप्र बोर्ड परीक्षा में अगर विद्यार्थी ने किसी भी सवाल को आधे से अधिक हल किया तो उसे आधा अंक मिल जाएगा। हर स्टेप पर अंक दिए जाएंगे। अगर विद्यार्थी ने प्रश्न से संबंधित जो लिखा है उसे उसके अंक भी दिए जाएंगे। मूल्यांकन केंद्र के अंदर एक बार प्रवेश करने के बाद शिक्षक को बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। इसके अलावा कापियों की चैकिंग आदर्श उत्तर के अनुसार होगी। 30 हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा में करीब 30 हजार शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य में लगेंगे। सबसे पहले 12वीं की कापी जांचने का काम प्राथमिकता से किया जाएगा। मूल्यांकन के दौरान केंद्रों पर धारा 144 लागू रहेगी। एक शिक्षक को प्रतिदिन न्यूनतम 30 व अधिकतम 45 उत्तरपुस्तिकाएं जांचने के लिए दी जाएगी। आठ घंटे की प्रतिदिन की ड्यूटी करनी होगी ।  

आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता के प्रेरणापुंज थे संत रविदास: गौतम टेटवाल

भोपाल विशेष लेख भारतीय संस्कृति में संतों का स्थान केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शकों के रूप में नहीं, बल्कि समाज सुधारकों के रूप में भी रहा है। उन्होंने समय-समय पर समाज को नई दिशा दी, उसके उत्थान के लिए कार्य किया और एक न्यायसंगत व्यवस्था का संदेश दिया। संत रविदास जी भी उन्हीं में से एक थे, जिन्होंने समानता, श्रम की प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता की शिक्षा दी। उनके विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही गहरी है जितनी उनके समय में थी। संत रविदास जी 15वीं-16वीं शताब्दी के एक महान संत, समाज सुधारक और कवि थे। उनका जन्म वाराणसी में हुआ था। उन्होंने समाज में जातिगत भेदभाव का विरोध किया और कर्म को व्यक्ति की पहचान का आधार माना। उनकी शिक्षाएँ भक्ति आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनीं और उन्होंने निर्गुण भक्ति को अपनाते हुए समानता और ईश्वर-भक्ति का संदेश दिया। उनके विचारों को गुरुग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया, जो यह दर्शाता है कि उनकी शिक्षाएँ किसी एक संप्रदाय तक सीमित न होकर समस्त मानवता के लिए थीं। उन्होंने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां न कोई गरीबी हो, न शोषण हो, और न ही किसी प्रकार का अन्याय। यह उनके सामाजिक सुधार के विचारों का दर्पण है, जो आज के आत्मनिर्भर भारत और विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प से मेल खाता है। उनके विचार केवल भक्ति तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने श्रम और कर्म की प्रतिष्ठा को समाज में स्थापित किया। उन्होंने कहा था कि “ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न” छोट-बड़ो सब सम बसै, रविदास रहै प्रसन्न। यह केवल एक आदर्श कल्पना नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज की परिकल्पना थी जहां समानता हो, कोई भेदभाव न हो और हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बने। संत रविदास के इन्हीं विचारों को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत प्रयास कर रही है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जहां युवाओं को वैश्विक स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे न केवल आत्मनिर्भर बनें, बल्कि अपनी प्रतिभा के बल पर प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दें। आज प्रदेश में 970 आईटीआई (290 सरकारी और 680 निजी) कार्यरत हैं, 83 हजार 109 युवाओं को प्रशिक्षित कर तकनीकी और व्यावसायिक विशेषज्ञता प्रदान कर रहे हैं। ग्लोबल स्किल पार्क जैसे संस्थान सालाना 10 हजार युवाओं को उन्नत नौकरी के लिए प्रशिक्षण देते हैं। आईटीआई का आधुनिकीकरण कर 10 संस्थानों को अपग्रेड किया गया है, जिससे हर साल 12 हजार युवा 32 उभरते ट्रेडों में एनसीवीटी-स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में 4.27 लाख से अधिक युवाओं ने आवेदन किया है, जिससे उन्हें छात्रवृत्ति और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार ने 1515 करोड़ रु. का बजट कौशल विकास पहल के लिए आवंटित किया है, जिससे युवाओं को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग दी जा सके। संत रविदास के विचारों को आत्मसात कर हम समाज में समानता, श्रम की प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने और उन्हें समाज में स्थापित करने का संकल्प है।  

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