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जबलपुर में टी सीरीज के टैंकों के मेंटेनेंस और मारक क्षमता का टेस्ट किया जाएगा

जबलपुर  अभी तक जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में सेना के उपयोग में आने वाले वाहन बनाए जा रहे हैं, लेकिन अब यहां पहली बार विध्वंसक टैंकों का मेंटीनेंस भी शुरू हो रहा है. बता दें कि जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में फिलहाल सेना के उपयोग में आने वाले कुछ महत्वपूर्ण वाहनों का उत्पादन करता है. ये सामान्य ट्रक होते हैं, जिन्हें पहाड़ी मैदान या फिर दलदल जैसी परिस्थिति में दौड़ाया जा सकता है. साढ़े 4 किमी दूर मार करता है ये टैंक व्हीकल फैक्ट्री के मुख्य महाप्रबंधक संजीव कुमार भोला ने अपनी टीम के साथ एक नए प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया. इसके तहत व्हीकल फैक्ट्री को अब सामान्य वाहनों के साथ युद्ध टैंक के ओवर ऑयलिंग की भी जिम्मेदारी मिलने जा रही है. बता दें कि भारतीय सेना युद्ध के दौरान टैंक का इस्तेमाल करती है. इसमें T 90 और T 70 टैंक सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इनकी मारक क्षमता साढे़ 4 किलोमीटर है. टी सीरिज टैंकों को रूस से आयात किया फिलहाल भारत के पास जो टैंक हैं, वे रूस से खरीदे गए थे. इन युद्धक वाहनों को लगातार मेंटेनेंस की जरूरत होती है. मेंटेनेंस का काम अभी तक चेन्नई में होता था. बीते दिनों जबलपुर के कई जिम्मेदार अधिकारी मेंटेनेंस के इस काम को सीखने के लिए ट्रेनिंग पर चेन्नई गए थे. इस प्रोजेक्ट के आने के बाद जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री का काम बढ़ जाएगा. इसमें कई नए लोगों को भी काम मिलेगा और कर्मचारियों का तकनीकी कौशल भी. मेंटेनेंस के तहत मारक क्षमता का होगा टेस्ट टी सीरीज के टैंकों के मेंटेनेंस के तहत इनकी मारक क्षमता का टेस्ट किया जाएगा. इसके लिए टेस्टिंग रेंज विकसित करनी होगी. इन टैंक में लगने वाली चैन के मेंटेनेंस के लिए नई मिशनरी लगाई जाएगी. सीजीएम संजीव कुमार भोले की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में बताया है “यह जबलपुर के विकास के लिए एक नए युग की शुरुआत है.” व्हीकल फैक्ट्री में इन वाहनों का प्रॉडक्शन     माइन प्रोटेक्टेड वाहन     स्टैलियन     आरओएस_7899     टाटा-407 पर 5 बुलेट प्रूफिंग     5 टन-क्रॉस कंट्री (सीसी)/ 7.5 टन – सैंड कम हाईवे     वाटर ब्राउज़र

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का समय निकट, उद्योग की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने समन्वयकिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का समय निकट है। विभिन्न देशों के वाणिज्यिक दूतावासों के माध्यम से प्रदेश में व्यापार और उद्योग की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आवश्यक समन्वयकिया जा रहा है। इस क्रम में विश्व स्तरीय आयोजन की सफलता के लिए विभिन्न देशों के राजदूतों के साथ नई दिल्ली में विचार-विमर्श के लिए बैठक रखी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के युवा, महिला, किसान और गरीबों का जीवन बेहतर हो, इस उद्देश्य से कृषि के साथ उद्योगों को भी प्रदेश में आवश्यक अधोसंरचना और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस क्रम में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में विभिन्न नीतियों को अनुमोदन दिया गया है। उद्योग संबंधी इन नीतियों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे, नीतियों में राज्य के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार कमजोर से कमजोर व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  

भारत दुनिया में खाने के एडिबल ऑयल का सबसे बड़ा आयातक, आयात 14 साल के निचले स्तर पर

नई दिल्ली भारत में जनवरी में पाम तेल का आयात लगभग 14 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने बुधवार को बताया कि रिफाइनर सस्ते सोया तेल का रुख कर रहे हैं क्योंकि पाम तेल में रिफाइनिंग मार्जिन घाटे में है। रिफाइनिंग मार्जिन का मतलब है कि तेल को रिफाइन करने के बाद जो मुनाफ़ा मिलता है, वो कम हो गया है। भारत दुनिया में वेजिटेबल ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार है। भारत के आयात में कमी मलेशियाई पाम तेल की कीमतों पर दबाव डाल सकता है जबकि अमेरिकी सोया तेल की कीमतों को बढ़ा सकता है। SEA के मुताबिक जनवरी में पाम तेल का आयात दिसंबर की तुलना में 45% घटकर 275,241 मीट्रिक टन रह गया। यह मार्च 2011 के बाद का सबसे निचला स्तर है। लगभग डेढ़ दशक में इतना कम आयात नहीं हुआ था। अक्टूबर 2024 में समाप्त हुए मार्केटिंग ईयर में भारत ने हर महीने औसतन 750,000 टन से ज्यादा पाम तेल आयात किया। आमतौर पर पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल से सस्ता होता है। लेकिन कम स्टॉक होने के कारण इसकी कीमतों में उछाल आई है। इसकी तुलना में दूसरे तेलों की सप्लाई अच्छी है। कहां से तेल मंगाता है भारत जनवरी में सोया तेल का आयात 5.6% बढ़कर 444,026 टन हो गया, जो सात महीनों में सबसे ज्यादा है। वहीं, सूरजमुखी तेल का आयात 8.9% बढ़कर 288,284 टन हो गया। पाम तेल की कम शिपमेंट से जनवरी में भारत के कुल वेजिटेबल ऑयल इम्पोर्ट को 14.8% घटाकर 10 लाख टन कर दिया। यह 11 महीनों में सबसे कम है। SEA के अनुसार हाल के महीनों में खाद्य तेल के आयात में गिरावट के कारण फरवरी की शुरुआत में देश में वेजिटेबल ऑयल का स्टॉक घटकर 2.18 मिलियन टन रह गया, जो अप्रैल 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। एडिबल ऑयल ट्रेडर GGN रिसर्च के मैनेजिंग पार्टनर राजेश पटेल ने कहा कि पाम तेल का आयात फरवरी में कुछ बढ़ सकता है, लेकिन सामान्य से कम रहेगा। उन्होंने कहा कि फरवरी में सोया तेल का आयात गिर सकता है और सूरजमुखी तेल थोड़ा बढ़ सकता है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से पाम तेल खरीदता है जबकि अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से सोया तेल और सूरजमुखी तेल आयात करता है। देश में पाम ऑयल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कुछ साल पहले नेशनल पाम ऑयल मिशन को मंजूरी दी थी।  

इंदौरवासी सावधान! थूकते हुए पकड़े गए तो थूक साफ करना और जुर्माना भी भरने के लिए तैयार रहें, सात लाख रुपए वसूले

इंदौर शहर ने भले ही सात बार स्वच्छता में नंबर वन का खिताब हासिल किया हो, लेकिन अब भी कई नागरिक सड़क पर गंदगी फैलाने और गुटखा खाकर थूकने की आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। नगर निगम लगातार ऐसे लोगों पर नजर बनाए हुए है और स्पॉट फाइन के तहत जुर्माने की कार्रवाई कर रहा है। सिर्फ जनवरी महीने में ही निगम ने गुटखा थूकने वालों पर सख्त कार्रवाई की और साढ़े तीन हजार से ज्यादा लोगों से जुर्माना वसूलकर साढ़े छह लाख रुपये की वसूली की। 7.81 लाख रुपये का जुर्माना वसूला शहर में पान और गुटखा के सेवन का चलन कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है, जिसकी वजह से सड़क किनारे, डिवाइडरों और यहां तक कि आवासीय व व्यावसायिक इमारतों की दीवारें भी गुटखे की पीक से रंगी हुई नजर आती हैं। नगर निगम इस समय स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों में जुटा हुआ है, और इसी के चलते खुले में कचरा फेंकने, पॉलिथीन थैलियों के उपयोग और अन्य स्वच्छता नियमों के उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। बावजूद इसके गुटखा थूकने वालों की संख्या में कोई खास कमी देखने को नहीं मिल रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल निगम ने करीब 6,500 लोगों पर कार्रवाई करते हुए 7.81 लाख रुपये का जुर्माना वसूला था, जबकि इस साल सिर्फ जनवरी में ही 3,500 से अधिक लोगों से सख्त कार्रवाई करते हुए साढ़े छह लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूल किए गए हैं। फरवरी में भी यह सिलसिला लगातार जारी है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो साल पहले शहर में ‘नो थू-थू’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें लोगों को सड़कों और डिवाइडरों पर थूकने से रोकने के लिए प्रेरित किया गया था। इस अभियान के तहत न केवल लोगों को गुटखा थूकने से रोका गया बल्कि उनसे सफाई भी करवाई गई। बावजूद इसके लोग इस गंदी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं, और नगर निगम के सफाई मित्रों को बार-बार इन्हीं जगहों को धोकर साफ करना पड़ रहा है। इस समय भी लगातार शहर के डिवाइडरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई की जा रही है, मगर यह समस्या जस की तस बनी हुई है।  

इंदौरवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी इसी महीने मिल सकती है मेट्रो की सौगात

इंदौर  इंदौर वासियों का मेट्रो में सफर करने का सपना जल्द ही पूरा होने वाला है। कमर्शियल रन से पहले सेफ्टी ऑडिट करने कमिश्नर मेट्रो रेल सिक्योरिटी की टीम ने  सिविल कार्यों का फाइनल निरीक्षण किया। हर विभाग के स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी कार्यों की रिपोर्ट देखी। गांधीनगर डिपो से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक 5.8 किलोमीटर में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े हर छोटे-बड़े काम को बारीकी से जांच की गई। एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अधिकारी का कहना है कि कि सभी दस्तावेज सीएमआरएस टीम को पहले ही सौंप दिए गए हैं। निरीक्षण के बाद दिल्ली में दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। जांच के बाद ग्रीन सिग्नल मिलते ही मेट्रो का कमर्शियल रन इसी महीने से शुरू हो सकता है। निरीक्षण में सब कुछ सही मिलने पर ही सीएमआरएस की टीम ओके रिपोर्ट देगी। जिम्मेदारों के दावे के अनुसार मेट्रो का दिसंबर 2024 में कमर्शियल रन नहीं हो पाया था। अब MPMRCL के अधिकारियों ने कमर कस ली है। सीएमआरएस की टीम के निरीक्षण से पहले स्थानीय अधिकारियों ने भी पिछले दिनों पांच स्टेशन, जन सुविधा और ट्रैक सुरक्षा के पैरामीटर की जांच की थी।  एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) के अधिकारी ने बताया कि सभी दस्तावेज सीएमआरएस टीम को पहले ही सौंप दिए गए हैं।  निरीक्षण के बाद दिल्ली में दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। ग्रीन सिग्नल मिलते ही मेट्रो का कमर्शियल रन इसी महीने से शुरू हो सकता है। निरीक्षण में सबकुछ सही मिलने पर ही सीएमआरएस की टीम ओके रिपोर्ट देगी। जिम्मेदारों के दावे के अनुसार मेट्रो का दिसंबर 2024 में कमर्शियल रन नहीं हो पाया। अब एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों ने कमर कस ली है। सीएमआरएस की टीम के निरीक्षण से पहले स्थानीय अधिकारियों ने भी पिछले दिनों पांच स्टेशन, जन सुविधा और ट्रैक सुरक्षा के पैरामीटर्स की जांच की थी। जांच में इन पर फोकस – ट्रैक की सुरक्षा। – ट्रैक के नट-बोल्ट की जांच। – सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना। – स्टेशन निर्माण में उपयोगी उपकरणों को जांचना। – लोक सुविधा के लिए लगाए गए सिस्टम का ट्रायल करना। जांच में इन बिंदुओं पर फोकस… बता दें कि जांच में ट्रैक की सुरक्षा समेत ट्रैक के नट-बोल्ट की जांच, सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना, स्टेशन निर्माण में उपयोगी उपकरणों को जांचना और लोक सुविधा के लिए लगाए गए सिस्टम के ट्रायल करने जैसे पहलुओं पर फोकस किया जाएगा।

फरवरी में VIP मूवमेंट का बड़ा दौर, पीएम मोदी, अमित शाह और राष्ट्रपति मुर्मु पहुंचेंगे प्रदेश

छतरपुर भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट का उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे. इसके लिए पीएम 24 फरवरी को भोपाल आएंगे, लेकिन इससे पहले वह बागेश्वर धाम जाएंगे. जहां पीएम बागेश्वर धाम में बनने वाले कैंसर हॉस्पिटल का उद्घाटन करेंगे. वहीं राष्ट्रपति 26 फरवरी को बागेश्वर धाम में आयोजित  251 कन्याओं के विवाह के महामहोत्सव में आ सकती हैं. 26 को आएंगी राष्ट्रपति वहीं, महाशिवरात्रि पर्व पर बागेश्वर धाम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा आयोजित 251 कन्याओं के विवाह के महामहोत्सव में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आ सकती हैं. जिन कन्याओं का विवाह होना है, उनमें 108 कन्याएं आदिवासी वर्ग की हैं. इसलिए माना जा रहा है कि राष्ट्रपति नवविवाहित जोड़ों को सुखी दांपत्य जीवन के लिए आशीर्वाद देने के लिए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विशेष आग्रह पर आ रही हैं. कैंसर अस्पताल की पीएम रखेंगे आधारशिला 23 फरवरी को बागेश्वर धाम में कैंसर हॉस्पिटल का पीएम नरेंद्र मोदी भूमिपूजन करेंगे. बीते दिनों धीरेंद्र शास्त्री ने बताया था कि कार्यक्रम में कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी. उन्होंने बताया था कि पहले चरण में 3 साल में 100 बेड का सुविधायुक्त अस्पताल बनकर तैयार होगा. जानकारी के अनुसार, अस्पताल के उद्घाटन के लिए धीरेंद्र शास्त्री ने पीएम नरेंद्र मोदी को कैंसर हॉस्पिटल के भूम पूजन का निमंत्रण दिया था.   तैयारियां हुई तेज दो महीने के अंतराल में छतरपुर जिले में प्रधानमंत्री का यह दूसरा दौरा होगा. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए छतरपुर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. राष्ट्रपति के संभावित दौरे को देखते हुए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. इसको लेकर कलेक्टर ने एक आदेश भी जारी किया है.   PM मोदी का दौरा: 23 फरवरी को MP पहुंचेंगे, 24 को GIS का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 फरवरी को ही मध्यप्रदेश पहुंच जाएंगे और छतरपुर के बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखेंगे। इसके बाद 24 फरवरी को भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।  23 फरवरी: बागेश्वर धाम, छतरपुर – कैंसर अस्पताल की आधारशिला  24 फरवरी: भोपाल – ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS 2025) का उद्घाटन गृहमंत्री अमित शाह 25 फरवरी को पहुंचेंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 25 फरवरी को भोपाल में GIS 2025 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस मौके पर देश-विदेश के निवेशकों के साथ उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहेंगी।  25 फरवरी: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का समापन समारोह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संभावित दौरा – 26 फरवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 26 फरवरी को छतरपुर के बागेश्वर धाम में प्रवास प्रस्तावित है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।   26 फरवरी: बागेश्वर धाम, छतरपुर – राष्ट्रपति का दौरा संभावित छतरपुर कलेक्टर ने आदेश जारी किया है कि 11 से 26 फरवरी तक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अवकाश पर नहीं रहेगा। VIP दौरों को लेकर सुरक्षा और तैयारियों का जायजा इन हाई-प्रोफाइल दौरों को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार और जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। भोपाल और छतरपुर में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है और प्रशासनिक अधिकारियों को तैयारियों को लेकर निर्देश दिए गए हैं।

बागेश्वर धाम : कैंसर हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज के साथ ही मिलेगी सोलर पार्किंग-शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की सुविधा

छतरपुर छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में मल्टी स्पेशियलिटी कैंसर हॉस्पिटल का निर्माण किया जाएगा, जिसका भूमिपूजन 23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह 100 बिस्तर वाला आधुनिक अस्पताल होगा, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टर सेवाएं देंगे। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। अस्पताल के निर्माण का खर्च पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा संचालित कथा आयोजनों और दानदाताओं के सहयोग से जुटाया जाएगा। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अस्पताल के लिए 25 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। इसका नाम बालाजी सरकार कैंसर इंस्टीट्यूट रखा जाएगा। यहां जर्मनी और इंग्लैंड के डॉक्टर भी सेवाएं देंगे। गरीब मरीजों का इलाज निशुल्क किया जाएगा। फंड की व्यवस्था कथा से मिलने वाली राशि और दानदाताओं द्वारा की जाएगी। 100 बेड का होगा यह अस्पताल बागेश्वर धाम में बनने वाला यह कैंसर अस्पताल 100 बेड का होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देश की कई बड़ी हस्तियां भूमिपूजन में आएंगे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि यह अस्पताल तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा। अस्पताल की शुरुआत होने के बाद मेडिकल कॉलेज की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इस पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। गरीबों को फ्री में होगा इलाज वहीं, कैंसर अस्पताल का मकसद सेवा है। यहां गरीबों का फ्री में इलाज होगा। इसके लिए एक कमिटी होगी जो इनकी पात्रता की जांच करेगी। साथ ही वहां उनके रहने खाने की व्यवस्था भी होगी। इसके साथ ही अन्य मरीजों को भी बेहद कम खर्च में इलाज की सुविधा दी जाएगी। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार यहां इलाज करने विदेशों से भी डॉक्टर आएंगे। अस्पताल में रहेंगी ये सुविधाएं बालाजी सरकार कैंसर इंस्टीट्यूट में तमाम आधुनिक सुविधाएं होंगी। फूड कोर्ट, एग्जीबिशन कॉम्प्लेक्स, फॉर्मेसी एंड शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और सोलर पार्किंग होगी। इसके साथ पैथोलॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, रेडियोथैरेपी एंडी कीमोथैरेपी की सुविधा होगी। यही नहीं नर्सिंग के कामों के लिए बागेश्वर धाम के युवाओं को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में ट्रेनिंग दिलवाई जा रही है। जिला प्रशासन ने रद्द की छुट्टियां वहीं, बागेश्वर धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू भी आने वाली हैं। तीन साल में पहले चरण का निर्माण पूरा होगा अस्पताल का निर्माण चार चरणों में किया जाएगा, जिसका पहला चरण तीन वर्षों में पूरा होगा। 200 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनने वाले इस अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए रहने और भोजन की उत्तम व्यवस्था होगी। बागेश्वर धाम के बच्चों को पैरामेडिकल ट्रेनिंग धाम के बच्चों को पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए उन्हें रेडियोलॉजी, सर्जरी, कीमोथेरेपी जैसे चिकित्सा क्षेत्रों में विशेषज्ञता दिलाई जा रही है। इनकी शिक्षा और प्रशिक्षण का खर्च बागेश्वर धाम परिवार द्वारा उठाया जा रहा है। फंडिंग के लिए दान और दक्षिणा का योगदान अस्पताल के निर्माण के लिए देश-विदेश में बसे शिष्यों और श्रद्धालुओं से सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा, दानदाताओं से आर्थिक सहायता प्राप्त की जाएगी। बागेश्वर धाम ट्रस्ट समिति करेगी संचालन अस्पताल का संचालन बागेश्वर धाम ट्रस्ट समिति द्वारा किया जाएगा। इसके प्रबंधन के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन होगा, जो अस्पताल के कार्यों का संचालन करेंगी। डॉक्टरों की नियुक्ति तीन स्तरों पर होगी अनुभवी मेडिकल ग्रुप्स (जैसे मेदांता, शंकर हॉस्पिटल, बिरला ग्रुप) से विशेषज्ञ डॉक्टरों का अनुबंध किया जाएगा। विदेशों में बसे धाम से जुड़े डॉक्टरों को समय-समय पर सेवा देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। स्थायी आधार पर डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति होगी, जैसे अन्य प्राइवेट अस्पतालों में की जाती है। गरीब मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज अस्पताल में गरीब मरीजों को निशुल्क इलाज दिया जाएगा। इसके लिए विशेष कमेटी का गठन होगा, जो पात्र मरीजों की पहचान कर उनकी सहायता सुनिश्चित करेगी। विदेशी डॉक्टर भी देंगे सेवाएं जर्मनी के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एंजेल पहले ही बागेश्वर धाम में बस चुके हैं। उन्होंने अपनी जर्मनी की संपत्ति बेचकर यहां आशियाना बनाया है और अस्पताल में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। यह अस्पताल आने वाले समय में मेडिकल कॉलेज के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और गरीबों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

पत्नी की सहमति के बिना अननेचुरल सेक्स अपराध नहीं, जानें हाईकोर्ट ने किस केस में

रायपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी के साथ सेक्सुअल रिलेशन के एक मामले में अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि किसी बालिग पत्नी के साथ सहमति के साथ या फिर उसके बिना यौन संबंध बनाने के लिए पति पर रेप या अप्राकृतिक संबंध का आरोप नहीं लगाया जा सकता है. सेक्सुअल रिलेशन बनाना या अप्राकृतिक संबंध में पत्नी की सहमति जरूरी नहीं है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को सुनाए अपने फैसले में कोर्ट ने एक शख्स पर लगाए आरोपों को खारिज कर दिया. इसके साथ ही आरोपी को आईपीसी की धारा 376, 377 और 304 से बरी कर दिया और जेल से उसकी फौरन उसकी रिहाई का आदेश दिया. कोर्ट ने क्या कहा अदालत ने कहा कि अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम नहीं है, तो पति का अपनी पत्नी के साथ किए गए किसी भी सेक्सुअल एक्ट को ऐसी परिस्थितियों में रेप नहीं कहा जा सकता है. ऐसे में अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए पत्नी की सहमति होने की जरूरी नहीं है. इसलिए अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और 377 के तहत केस नहीं बनता है.  जानें कोर्ट का फैसला? कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अगर पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम नहीं है तो पति द्वारा किसी भी यौन कृत्य को किसी भी परिस्थिति में बलात्कार नहीं कहा जा सकता है। इस तरह से अप्राकृतिक कृत्य के लिए पत्नी की सहमति के अभाव का महत्व खत्म हो जाता है। इस कारण अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और 377 के तहत अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने कहा कि जहां तक अपीलकर्ता को धारा 304 के तहत दोषी ठहराया है, जो विकृति और पेटेंट अवैधता के अलावा और कुछ नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ये इस अदालत के हस्तक्षेप के योग्य है। इस कारण कोर्ट ने अपीलकर्ता पति को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने पति को तुरंत जेल हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है। जानें क्या है पूरा मामला? दरअसल कोर्ट में अपीलकर्ता मृतक-पीड़िता का पति है। Live Law के मुताबिक, अपीलकर्ता ने पीड़िता के साथ उसकी सहमति के विरुद्ध अप्राकृतिक यौन संबंध बनाया था। पीड़िता ने दर्द की शिकायत की थी और इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा मौत से पहले पीड़िता का बयान दर्ज किया गया था। पीड़िता ने बयान दिया था कि पति द्वारा जबरन यौन संबंध बनाने के कारण वह बीमार हो गई थी। इसके बाद उसी दिन पीड़िता की मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने माना था दोषी Bilaspur High court: ट्रायल कोर्ट ने पति को धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध), 376 (बलात्कार के लिए सजा) और 304 (गैर इरादतन हत्या के लिए सजा) के तहत अपराध करने के लिए दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ पति ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर की थी। दरअसल, मृतक पीड़िता का पति 11 दिसंबर 2017 की रात को कथित तौर पर अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए. इसके बाद तबियत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की गई और अपीलकर्ता के खिलाफ धारा 377 आईपीसी के तहत जुर्म दर्ज की गई. पीड़िता का मृत्यु पूर्व बयान एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया, जिसमें उसने कहा कि वह अपने पति द्वारा जबरदस्ती किए गए यौन संबंध के कारण बीमार पड़ गई. उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई. साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध), 376 (बलात्कार के लिए सजा) और 304 (हत्या के लिए दोषी न होने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए सजा) के तहत दोषी ठहराया. उन्हें डिफॉल्ट शर्तों के साथ 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई. इस फैसले के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष आपराधिक अपील दायर की. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि धारा 375, 376 और 377 आईपीसी के अवलोकन से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि धारा 375 आईपीसी की संशोधित परिभाषा के मद्देनजर पति और पत्नी के बीच धारा 377 आईपीसी के तहत अपराध का कोई स्थान नहीं है. इस तरह बलात्कार नहीं किया जा सकता है. धारा 375 आईपीसी के अपवाद 2 पर जोर देते हुए न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक पुरुष और उसकी पत्नी के बीच यौन संबंध या यौन क्रियाएं यदि पत्नी 15 वर्ष से अधिक उम्र की है तो बलात्कार नहीं माना जाता है. नतीजतन भले ही एक पति अपनी वयस्क पत्नी के साथ धारा 377 आईपीसी के तहत परिभाषित अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता है, यह अपराध नहीं माना जाता है. न्यायालय ने धारा 304 आईपीसी के तहत अपीलकर्ता की दोषसिद्धि के संबंध में इसे “विकृत” माना और टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा, आईपीसी की धारा 304 के तहत अपराध मामले के वर्तमान तथ्यों से कैसे जुड़ा है और अभियोजन पक्ष द्वारा कैसे साबित किया गया है, फिर भी इसने अपीलकर्ता को धारा 304 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया है, जो विकृति और स्पष्ट अवैधता के अलावा और कुछ नहीं है, जिस पर इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप किया जाना चाहिए.” कोर्ट ने अपीलकर्ता को सभी आरोपों से बरी करते हए उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया.

ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में निवेशकों को भारत की समृद्ध व्यंजन विविधता का प्रदर्शन किया जाएगा

 भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर समिट(जीआईएस) में निवेशकों को जापानी तपन्याकी, थाई करी बाउल और मालवा के दाल बाफले परोसे जाएंगे। इसके लिए जापान से प्रशिक्षित शेफ बुलाए जाएंगे। इसके अलावा निवेशकों को बिहार का लिट्टी चोखा, हरी मूंग मेथी पापड़ की भाजी और राजवाडी रिकमज की सब्जी भी खिलाई जाएगी। जीआईएस में मोटे अनाज से बने तीखे, नमकीन और मीठे व्यंजनों का भी स्वाद चखने को मिलेगा।निवेशकों को भारत का पारंपरिक अनुभव कराने के लिए कुछ विशेष व्यंजन मिट्टी के बर्तनों में भी परोसे जाएंगे। 100 से अधिक शेफ आएंगे जीआईएस में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। जीआईएस में भारत के विभिन्न राज्यों के व्यंजन भी विदेश मेहमानों को खिलाए जाएंगे। इसके लिए 100 से अधिक शेफ बाहर से बुलवाए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। फाइव स्टार होटलों के यह शेफ जीआईएस के चार दिन पहले बुला लिए जाएंगे। प्रधानमंत्री सहित विदेश की प्रमुख हस्तियों के लिए अलग से शेफ बुलाए जा रहे हैं। यह भी परोसा जाएगा     पनीर खट्टा प्याज़ मसाला     दाल भाजी घंटो     मेथी के दाने की सब्जी     दाल बाफला भटे का भरता के साथ     गुड़ और घी के साथ गेहूं का खिचड़ा     फाक्सटेल बाजरा क्रेप्स     ग्नोची और रिसोट्टो     बफौरी ‘इन्वेस्ट एमपी’ एप पर मिलेगी निवेश के अवसरों की रियल टाइम जानकारी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआइएस) का लोगो और वेबसाइट लांच करने के बाद अब राज्य सरकार ने इन्वेस्ट एमपी नाम से एक एप लांच किया है। इसमें जीआईएस से जुड़ी पल-पल की अपडेट जानकारी मिलेगी, वहीं मध्य प्रदेश में निवेश के अवसरों की रियल टाइम जानकारी भी एप पर उपलब्ध होगी। वैश्विक निवेशकों के लिए यह एप एंड्राइड और आईओएस दोनों प्लेटफार्म पर उपलब्ध है। यह नया एप निवेशकों को मध्य प्रदेश की निवेश संभावनाओं, नीतियों और प्रक्रियाओं की जानकारी तत्काल प्रदान करने में सक्षम है। एप में एक उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस है, जो निवेशकों को दुनिया के किसी भी कोने से विभिन्न क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और सरकारी पहल का पता लगाने की सुविधा प्रदान करेगा। एप पर राज्य की नीतियों और प्रोत्साहनों की विस्तृत जानकारी मिलेगी। इससे सरकारी अधिकारियों से सीधा संवाद किया जा सकेगा। एप को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि निवेशक एप पर मध्य प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को देख सकेगा। निवेश की संभावनाओं को समझकर एप पर ही निवेश के प्रस्ताव भी दे सकेगा। एप पर डिजिटल दस्तावेजीकरण और आवेदन जमा करने की सुविधा भी ही मिलेगी।

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